Tag: Commonwealth Games 2026

  • गरीबी नहीं रोक सकी हौसला, झंडू कुमार ने संघर्ष को ताकत बनाकर भारत को दिलाया कॉमनवेल्थ पदक

    गरीबी नहीं रोक सकी हौसला, झंडू कुमार ने संघर्ष को ताकत बनाकर भारत को दिलाया कॉमनवेल्थ पदक


    नई दिल्ली। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने केवल ब्रॉन्ज मेडल ही नहीं जीता, बल्कि अपने संघर्ष और जज्बे से करोड़ों लोगों का दिल भी जीत लिया। आर्थिक तंगी, कठिन परिस्थितियों और रोजमर्रा की चुनौतियों से लड़ते हुए उन्होंने वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना कभी उनके गांव के लोगों ने भी नहीं की थी। ई-रिक्शा चलाने और सब्जियां बेचकर जीवनयापन करने वाले झंडू आज देश के लिए अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने वाले खिलाड़ी बन चुके हैं।

    पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए झंडू कुमार ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। मुकाबले के बाद भावुक झंडू ने अपनी सफलता का श्रेय वर्षों की मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास को दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किलें आईं, लेकिन उन्होंने कभी अपने सपनों को मरने नहीं दिया। उनका मानना था कि लगातार मेहनत करने वालों को एक दिन सफलता जरूर मिलती है और यही विश्वास उन्हें आगे बढ़ाता रहा।

    झंडू ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। घर चलाने के लिए कभी ई-रिक्शा चलाना पड़ा तो कभी सब्जियां बेचनी पड़ीं। इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने खेल को नहीं छोड़ा। दिनभर मेहनत करने के बाद भी अभ्यास जारी रखा और हर चुनौती को अपनी ताकत बनाया। उनका कहना है कि कठिनाइयों ने उन्हें कमजोर नहीं बल्कि और मजबूत बनाया।

    प्रतियोगिता में झंडू ने ग्रुप बी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 130.9 अंक हासिल किए और अपने ग्रुप में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। उन्होंने युगांडा और ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए पदक की मजबूत दावेदारी पेश की। संयुक्त स्टैंडिंग में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने स्वर्ण पदक और इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने रजत पदक जीता, जबकि झंडू केवल 0.1 अंक के बेहद मामूली अंतर से रजत पदक से चूक गए। इसके बावजूद उनका ब्रॉन्ज मेडल भारत के लिए बेहद अहम साबित हुआ क्योंकि इसी के साथ देश का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदकों का खाता खुला।

    झंडू की सफलता केवल एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने कहा कि यह पदक सिर्फ उनका नहीं बल्कि उन सभी लोगों का है जिन्होंने मुश्किल समय में उनका साथ दिया, उनका हौसला बढ़ाया और उन पर विश्वास बनाए रखा।

    उन्होंने यह भी कहा कि यह उपलब्धि उनके सफर का अंत नहीं बल्कि नई शुरुआत है। अब उनका लक्ष्य देश के लिए और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में पदक जीतना है। झंडू का मानना है कि अगर मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी बाधा इंसान को उसकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।

    झंडू कुमार की यह कहानी साबित करती है कि सफलता केवल सुविधाओं से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों, निरंतर मेहनत और अपने सपनों पर अटूट विश्वास से हासिल होती है। उनका संघर्ष आज देशभर के खिलाड़ियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गया है।

  • ग्लासगो में खेलों का महासंग्राम शुरू, मीराबाई-लवलीना बनीं भारत की शान, कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार शुभारंभ

    ग्लासगो में खेलों का महासंग्राम शुरू, मीराबाई-लवलीना बनीं भारत की शान, कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार शुभारंभ


    नई दिल्ली । स्कॉटलैंड के ऐतिहासिक शहर ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का शानदार आगाज हो गया। रंगों रोशनी संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी भव्य उद्घाटन समारोह ने दुनिया भर से पहुंचे खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया। ओवीओ हाइड्रो एरिना में आयोजित इस समारोह में स्कॉटलैंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक खेल भावना का अद्भुत संगम देखने को मिला। इसी के साथ अगले 11 दिनों तक चलने वाले खेलों के इस महाकुंभ का औपचारिक शुभारंभ हुआ जहां दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पदकों के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगे।

    कॉमनवेल्थ की परंपरा के अनुरूप ब्रिटेन के सम्राट किंग चार्ल्स तृतीय ने आधिकारिक रूप से खेलों का उद्घाटन किया। वर्ष 2014 के बाद एक बार फिर ग्लासगो को इन प्रतिष्ठित खेलों की मेजबानी का अवसर मिला है। उद्घाटन समारोह में स्कॉटलैंड की संस्कृति लोक परंपराओं और आधुनिक कला का अनूठा प्रदर्शन हुआ। प्रसिद्ध कलाकारों केटी टुनस्टॉल नाथन इवांस और सेंट फीनिक्स की शानदार प्रस्तुतियों ने समारोह को और भी यादगार बना दिया। संगीत नृत्य और रोशनी के शानदार संयोजन ने पूरे माहौल को उत्साह से भर दिया।

    भारत के लिए उद्घाटन समारोह बेहद गर्व का क्षण साबित हुआ जब ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन ने भारतीय दल का नेतृत्व करते हुए परेड ऑफ नेशंस में तिरंगा थामा। जैसे ही भारतीय दल एरिना में पहुंचा पूरा स्टेडियम तालियों और उत्साह से गूंज उठा। टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू ने राष्ट्रीय ध्वज को गर्व के साथ थामा जबकि टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ बैटन के साथ भारत की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व किया। दोनों खिलाड़ियों की मौजूदगी ने भारतीय दल का उत्साह कई गुना बढ़ा दिया।

    इस बार भारत ने 125 सदस्यीय मजबूत दल ग्लासगो भेजा है जो पैरा खेलों सहित 13 विभिन्न खेलों में अपनी चुनौती पेश करेगा। हालांकि इस संस्करण में प्रतियोगिताओं की संख्या पिछले संस्करणों की तुलना में कम रखी गई है लेकिन भारतीय दल में कई ओलंपिक और विश्व स्तरीय पदक विजेता खिलाड़ियों की मौजूदगी देश की पदक उम्मीदों को मजबूत बनाती है। भारत का लक्ष्य एक बार फिर कॉमनवेल्थ खेलों में अपनी खेल शक्ति का दम दिखाना और पदक तालिका में मजबूत स्थान हासिल करना है।

    दिलचस्प बात यह रही कि उद्घाटन समारोह से पहले ही भारत का अभियान शुरू हो चुका था। भारतीय लॉन बॉल्स टीम सबसे पहले मैदान पर उतरी और उससे बर्मिंघम 2022 जैसे ऐतिहासिक प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद की जा रही है। पिछली बार लॉन बॉल्स में भारत ने ऐतिहासिक सफलता हासिल कर पूरे देश को गौरवान्वित किया था और इस बार भी खिलाड़ियों से वैसी ही उम्मीदें हैं।

    कॉमनवेल्थ गेम्स के 23वें संस्करण में 74 देशों और क्षेत्रों के हजारों खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिताएं 10 खेलों में आयोजित की जाएंगी जिनके मुकाबले स्कॉटिश इवेंट कैंपस स्कॉटस्टाउन स्टेडियम टोलक्रॉस इंटरनेशनल स्विमिंग सेंटर और ग्लासगो एरिना जैसे विश्वस्तरीय मैदानों पर खेले जाएंगे। आयोजन का दायरा भले ही पहले की तुलना में थोड़ा छोटा हो लेकिन प्रतियोगिता का स्तर पहले की तरह बेहद रोमांचक और चुनौतीपूर्ण रहने की उम्मीद है।

    भारत की नजरें इस बार कई बड़े सितारों पर टिकी होंगी। ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा एथलेटिक्स में देश की सबसे बड़ी उम्मीद होंगे जबकि मीराबाई चानू वेटलिफ्टिंग में और लवलीना बोरगोहेन बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक की मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। इसके अलावा भारतीय मुक्केबाजी दल भी शानदार प्रदर्शन करने की क्षमता रखता है। उद्घाटन समारोह के साथ अब नजरें मैदान पर होने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा पर टिक गई हैं जहां पदकों रिकॉर्ड और नए इतिहास का इंतजार पूरी दुनिया को रहेगा।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: ग्लासगो में गूंजा 'चीयर 4 भारत', खेल मंत्री मांडविया ने भारतीय खिलाड़ियों का बढ़ाया हौसला

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: ग्लासगो में गूंजा 'चीयर 4 भारत', खेल मंत्री मांडविया ने भारतीय खिलाड़ियों का बढ़ाया हौसला


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के आगाज से पहले स्कॉटलैंड के ग्लासगो में भारतीय खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए ‘चीयर 4 भारत’ अभियान की शानदार शुरुआत हुई। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने वहां मौजूद भारतीय समुदाय के साथ साइकिलिंग कार्यक्रम में हिस्सा लेकर खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया और दुनिया को फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण तथा स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया।

    इस अवसर पर डॉ. मांडविया ने कहा कि फिटनेस केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति का आधार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ आज वैश्विक स्तर पर लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। उन्होंने भारतीय समुदाय का आभार जताते हुए कहा कि ‘चीयर 4 भारत’ अभियान के माध्यम से प्रवासी भारतीय एकजुट होकर भारतीय खिलाड़ियों का हौसला बढ़ा रहे हैं।

    खेल मंत्री ने साइकिलिंग को पर्यावरण संरक्षण और ट्रैफिक जाम की समस्या का प्रभावी समाधान बताते हुए कहा कि यह फिट रहने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम भी है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्वस्थ समाज और विकसित भारत के निर्माण के लिए नियमित व्यायाम और फिटनेस को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

    कार्यक्रम में यूनाइटेड किंगडम में भारत के उच्चायुक्त पेरियासामी कुमारन भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में खेल संस्कृति तेजी से विकसित हुई है। फिट इंडिया मूवमेंट ने लोगों में स्वास्थ्य के प्रति नई जागरूकता पैदा की है और आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक खेल महाशक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय खिलाड़ी इस बार भी कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करेंगे और पदकों की संख्या में बढ़ोतरी करेंगे। साथ ही उन्होंने 2030 में अहमदाबाद में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स को लेकर भी उत्साह व्यक्त करते हुए कहा कि भारत उस आयोजन की सफल मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत 124 सदस्यीय दल के साथ हिस्सा ले रहा है। भारतीय खिलाड़ी आठ खेलों और पांच पैरा स्पोर्ट्स स्पर्धाओं में पदक के लिए चुनौती पेश करेंगे। भारत अपने अभियान की शुरुआत पुरुष और महिला लॉन बाउल प्रतियोगिताओं से करेगा। खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन की उम्मीद के बीच ‘चीयर 4 भारत’ अभियान ने भारतीय दल को वैश्विक मंच पर मजबूत समर्थन और नया उत्साह देने का काम किया है।

  • प्रणति नायक की एशियाई और राष्ट्रमंडल खेल 2026 की तैयारी को मिला मजबूत सरकारी समर्थन

    प्रणति नायक की एशियाई और राष्ट्रमंडल खेल 2026 की तैयारी को मिला मजबूत सरकारी समर्थन


    नई दिल्ली । Pranati Nayak की आगामी राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेल 2026 की तैयारियों को केंद्र सरकार और खेल संस्थानों से लगातार मजबूत समर्थन मिल रहा है। युवा मामले एवं खेल मंत्रालय, Sports Authority of India (SAI) और Target Olympic Podium Scheme (TOPS) मिलकर उनके प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी पर फोक
    टोक्यो 2020 ओलंपियन प्रणति नायक इस समय भुवनेश्वर स्थित हाई परफॉर्मेंस सेंटर में चल रहे सीनियर और जूनियर महिला आर्टिस्टिक जिमनास्टिक्स राष्ट्रीय कोचिंग शिविर का हिस्सा हैं। यह शिविर 22 मई से 20 जून 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य चीन में होने वाली 13वीं सीनियर एशियाई चैंपियनशिप के लिए टीम को तैयार करना है। इस कैंप में कुल 21 सदस्य शामिल हैं, जिनमें खिलाड़ी, कोच और सपोर्ट स्टाफ हैं। सरकार ने इस प्रशिक्षण शिविर के लिए करीब 23.52 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की है।

    चीन में होने वाली चैंपियनशिप के लिए आर्थिक सहायता
    आगामी 25 से 28 जून 2026 तक चीन के जुनी में आयोजित होने वाली एशियाई चैंपियनशिप में भारतीय जिमनास्टिक्स टीम की भागीदारी के लिए भी सरकार ने 36.59 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की है। इस दल में सीनियर और जूनियर महिला जिमनास्ट शामिल होंगे, जिनमें प्रणति नायक भी प्रमुख खिलाड़ी के रूप में मौजूद हैं।

    TOPS के तहत व्यक्तिगत सहयोग
    Target Olympic Podium Scheme (TOPS) के तहत प्रणति नायक को व्यक्तिगत स्तर पर भी महत्वपूर्ण सहायता दी गई है। 19 से 25 मई 2026 तक उज्बेकिस्तान के ताशकंद में आयोजित एफआईजी आर्टिस्टिक जिमनास्टिक्स वर्ल्ड चैलेंज कप में भाग लेने के लिए उन्हें, उनके कोच और फिजियोथेरेपिस्ट के साथ 5.89 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई थी। इसी प्रतियोगिता में प्रणति ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक भी जीता।

    विदेशी प्रशिक्षण और भविष्य की योजना
    भारत के जिमनास्टिक्स कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने के लिए TOPS ने यूके में प्रस्तावित एक उच्च स्तरीय प्रशिक्षण शिविर के लिए भी 75.65 लाख रुपये की मंजूरी दी है। यह शिविर नवंबर से दिसंबर 2025 के बीच आयोजित किया जाएगा।

    इसके अलावा 2026 की शुरुआत में होने वाली दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भी खिलाड़ियों को सहायता दी जाएगी। हालांकि, चोट के कारण प्रणति कुछ पिछली प्रतियोगिताओं में भाग नहीं ले सकीं, लेकिन वे अब पूरी तरह से वापसी की तैयारी में जुटी हैं।

    सरकारी योजनाओं और संस्थागत सहयोग के चलते प्रणति नायक की तैयारी को मजबूत आधार मिल रहा है। आने वाले राष्ट्रमंडल खेल और एशियाई खेल 2026 में उनसे भारत को जिमनास्टिक्स में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।