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  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेमौसम बारिश से फसलें बर्बाद होने पर उठे सवाल पर सरकार को किया ज़िम्मेदार सर्वे और मुआवजे का आश्वासन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेमौसम बारिश से फसलें बर्बाद होने पर उठे सवाल पर सरकार को किया ज़िम्मेदार सर्वे और मुआवजे का आश्वासन


    भोपाल। मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से अचानक बदला मौसम किसानों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गया है। तेज बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के चलते राज्य के कई जिलों में गेहूं चना लहसुन समेत कई रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ है जिससे अन्नदाताओं में भारी मायूसी और परेशानी का माहौल है। समस्या इतनी गंभीर हो गई कि इसे मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में भी उठाया गया।

    उज्जैन जिले में लगातार दूसरे दिन बारिश ने तबाही मचाई। नागदा खाचरोद उन्हेल और महिदपुर तहसीलों में तेज बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान हुआ है। पारा गिरने और मौसम में बदलाव के कारण किसानों के चेहरे पर निराशा साफ़ देखी जा रही है।

    रतलाम धार और शुजालपुर सहित अन्य जिलों में भी फसलें बर्बाद हुई हैं। रतलाम में कृषि क्षेत्र में लगभग 50% के आसपास नुकसान का अनुमान है जिसमें गेहूं चना और लहसुन शामिल हैं। नगरा और कांडरवासा जैसे इलाकों में किसान खासा प्रभावित हुए हैं। धार और शुजालपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अति बारिश के कारण गेहूं और अन्य रबी फसलें बुरी तरह खराब हो गई हैं।

    इस गंभीर विषय को विधानसभा में भी उठाया गया। बजट सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि पिछले दो दिनों में प्रदेशभर में हुई बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है और तुरंत सर्वे कर मुआवजा दिया जाना चाहिए। इस पर सरकार ने जवाब दिया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले ही सभी कलेक्टर्स को प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे करने के निर्देश दे दिए हैं।

    सरकार ने कहा कि तहसीलदार और पटवारियों को खेतों में जाकर नुकसान का आकलन करने का आदेश दिया गया है। प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए सर्वे के आधार पर मुआवजा राशि दी जाएगी जिसमें अगर नुकसान 50% से अधिक पाया जाता है तो 32 000 रुपये और 50% से कम होने पर 16 000 रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा। इससे पहले भी सरकार ने सोयाबीन नुकसान पर 2 000 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की थी।

    मौसम विभाग ने भी चेतावनी दी है कि 23–24 फरवरी को फिर बारिश हो सकती है जिससे पहले से ही क्षतिग्रस्त फसलों के लिए और जोखिम बढ़ सकता है। तेज हवाओं ओलावृष्टि और बरसात से खेतों में खड़ी फसलें दब गई हैं और कृषि उत्पादन पर इसका नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।

    किसानों ने प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि सर्वे में निष्पक्षता बरती जाए और उन्हें समय पर मुआवजा दिया जाए ताकि बेमौसम बारिश से हुई क्षति का आर्थिक बोझ कम हो सके। कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर नुकसान का आकलन कर रही हैं और जल्द रिपोर्ट तैयार करने का आश्वासन दिया गया है।

    यह स्थिति यह भी दर्शाती है कि बदलते मौसम के पैटर्न से किसानों की खेती अहम है खासकर जब किसान पहले से ही मौसम-संवेदनशील खेती के दबाव में हैं।पर कितना सीधा प्रभाव पड़ता है और समय रहते राहत उपाय तथा सरकारी सहायता की आवश्यकता कितनी

  • ट्रेन लेट होने पर टिकट कैंसिल करने से न करें गलती, मुआवजे का दावा हो सकता है खारिज

    ट्रेन लेट होने पर टिकट कैंसिल करने से न करें गलती, मुआवजे का दावा हो सकता है खारिज


    भोपाल । भोपाल ट्रेन देरी से चलने पर यात्री जल्दबाजी में टिकट कैंसिल करने की गलती न करें क्योंकि ऐसा करने से उन्हें न तो पूरा रिफंड मिलेगा और न ही मानसिक क्षतिपूर्ति का दावा स्वीकार होगा। भोपाल के एक मामले में उपभोक्ता आयोग ने यह स्पष्ट किया कि यदि यात्री ट्रेन के लेट होने के कारण बिना रेलवे की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए टिकट कैंसिल कर देते हैं तो वे मुआवजे से हाथ धो सकते हैं। यह फैसला उन लाखों यात्रियों के लिए एक अहम संदेश है जो ट्रेन के समय से लेट होने पर बिना सही प्रक्रिया का पालन किए जल्दबाजी में टिकट कैंसिल कर देते हैं।

    क्या है पूरा मामला

    भोपाल के एक निवासी ने सितंबर 2023 में भोपाल से नई दिल्ली जाने के लिए आंध्रप्रदेश एक्सप्रेस में AC-2 श्रेणी का टिकट बुक किया था। ट्रेन निर्धारित समय से करीब तीन घंटे की देरी से नई दिल्ली पहुंची। इस देरी के कारण यात्री की आगे की यात्रा भी प्रभावित हुई, क्योंकि उसे नई दिल्ली से चंडीगढ़ जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस का कनेक्शन छूट गया। इस स्थिति में यात्री ने दोनों यात्रा टिकट कैंसिल करवा दिए। लेकिन, जब उसे पूरा रिफंड नहीं मिला तो उसने रेलवे पर सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट किया कि सिर्फ ट्रेन की देरी के आधार पर टिकट कैंसिल करना और रिफंड की मांग करना सही नहीं है। यदि यात्री ने रेलवे द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है, तो उसे पूरा रिफंड और मानसिक क्षतिपूर्ति का दावा नहीं मिल सकता।

    उपभोक्ता आयोग का फैसला

    उपभोक्ता आयोग ने यह कहा कि जब भी ट्रेन की देरी हो, तो यात्री को पहले रेलवे द्वारा दी जाने वाली अन्य सुविधाओं और विकल्पों का लाभ उठाना चाहिए, जैसे कि मुआवजे के लिए आवेदन करना या ट्रेनों का अन्य विकल्प तलाशना। सिर्फ टिकट कैंसिल करके और बिना प्रक्रिया का पालन किए मुआवजे का दावा करना गलत है और यह न केवल यात्रियों के लिए बल्कि रेलवे के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है। यह फैसला यात्रियों को यह सिखाता है कि ट्रेन लेट होने पर घबराहट में कोई जल्दबाजी का कदम न उठाएं और सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का नुकसान न हो।

  • इंदौर दूषित पानी से 18 मौतें. 3 मरीज वेंटिलेटर पर. प्रशासन ने की कार्रवाई

    इंदौर दूषित पानी से 18 मौतें. 3 मरीज वेंटिलेटर पर. प्रशासन ने की कार्रवाई


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण पिछले कुछ दिनों में 18 मौतें हो चुकी हैं. और अब तक 429 लोग अस्पतालों में भर्ती हो चुके हैं। बुधवार तक 330 मरीजों को छुट्टी मिल चुकी है. लेकिन 99 मरीज अभी भी इलाजरत हैं। अस्पतालों में ICU में मरीजों की संख्या बढ़ी है. जिनमें से 3 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। इस गंभीर स्थिति ने इलाके के लोगों को खौफ में डाल दिया है. और अब वे टैंकर और आरओ के पानी पर निर्भर हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने बुधवार को क्षेत्र का निरीक्षण किया. और सीवरेज तथा नर्मदा पाइपलाइन के लीकेज को ठीक करने के निर्देश दिए। इलाके में पानी की सप्लाई टेस्टिंग की जा रही है. और लोगों को पानी उबालकर और छानकर पीने की सलाह दी जा रही है।
    स्वास्थ्य विभाग ने 61 टीमों का गठन किया था. जिनमें से 5013 घरों का सर्वे किया गया। इस सर्वे के माध्यम से 24786 लोगों को उचित सलाह दी गई और घर-घर दवाइयां भी वितरित की गईं। इसके साथ ही. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ICMR के सर्वे में पाया गया कि इलाके की 17 गलियां संक्रमित पाई गई हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ी टिप्पणी की. और कहा कि इंदौर की छवि को इस घटना ने गंभीर नुकसान पहुंचाया है। कोर्ट ने कहा कि स्वच्छ पानी हर नागरिक कामौलिक अधिकार है और यदि भविष्य में जरूरत पड़ी तो दोषीअधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही. मुआवजे की राशि पर भी उचित निर्देश दिए जा सकते हैं।
    वहीं. कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन की योजना बनाई है। पार्टी की अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया ने पूरे प्रदेश में कैंडल मार्च आयोजित करने कीघोषणा की है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी मंगलवार को प्रभावित इलाकों का दौरा करने पहुंचे और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की। इंदौर में दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों के सिलसिले ने पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है. और प्रशासन की ओर से इस समस्या के समाधान के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

  • पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना: सीहोर के हर किसान के खेत तक पहुंचेगा पार्वती नदी का पानी20 गांव होंगे प्रभावित

    पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना: सीहोर के हर किसान के खेत तक पहुंचेगा पार्वती नदी का पानी20 गांव होंगे प्रभावित


    सीहोर । मध्य प्रदेश सीहोर जिले में पार्वती कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना के तहत दो महत्वपूर्ण सिंचाई योजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना से श्यामपुर और सीहोर तहसील के 111 गांवों में किसानों को सिंचाई का सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावालगभग 20 गांव इस परियोजना क्षेत्र में प्रभावित होंगेजिनके लिए नियमानुसार पुनर्वास और मुआवजे की व्यवस्था की जाएगी।

    दिल्ली से आई टीम ने किया मृदा परीक्षण

    निर्माण कार्य की शुरुआत के लिए दिल्ली से एक विशेषज्ञ टीम सीहोर आई थीजिन्होंने मृदा के सेंपल लेकर परीक्षण किए हैं। इस परियोजना के पूर्ण होने से सीहोर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक किसान के खेत तक पार्वती नदी का पानी पहुंचेगा। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगीकिसानों की आय में सुधार होगा और क्षेत्र का समग्र आर्थिक विकास संभव होगा।

    दो बड़े बैराज का निर्माण
    इस परियोजना के तहत पार्वती नदी पर दो प्रमुख बैराज श्यामपुर बैराज और कराडिया बैराज का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्तग्राम जेटला में एक बड़े बांध का निर्माण प्रस्तावित हैजो पार्वती नदी से पानी उठाकर भरेगा। इन संरचनाओं से लगभग 1 लाख 18 हजार 750 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। यह सीहोर विधानसभा क्षेत्र की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना मानी जा रही है।

    जेठला वृहद माइक्रो सिंचाई परियोजना

    इस योजना के तहत श्यामपुर तहसील के 71 गांवों की लगभग 72,500 एकड़ भूमि को स्प्रिंकलर प्रणाली के माध्यम से सिंचित किया जाएगा। इस परियोजना की कुल लागत 1349.51 करोड़ रुपये हैऔर इसके तहत प्रत्येक हेक्टेयर भूमि के लिए अलग जल कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे। इससे किसानों को अपनी आवश्यकता अनुसार पानी की आपूर्ति हो सकेगीजिससे जल की बचत होगी और फसलों का उत्पादन बढ़ेगा।

    पार्वती उद्वहन सिंचाई कॉम्प्लेक्स

    पार्वती उद्वहन सिंचाई कॉम्प्लेक्स” योजना के तहत ग्राम करिया और श्यामपुर में दो वृहद बैराजों का निर्माण किया जाएगा। इन बैराजों से 40 गांवों की 46,250 एकड़ भूमि को स्प्रिंकलर प्रणाली से सिंचित किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 1165.04 करोड़ रुपये है।

    किसे मिलेगा सिंचाई का पानी

    जेठला परियोजना के तहत 71 गांवों को सिंचाई का पानी मिलेगा, जिनमें दुर्गा, महुआखेडा, मगरदीखुर्द, चांदबड जांगीर, मानपुरा, बिसनखेडा, रावतखेडा, छतरपुरा, जेटला, पाटेर, अछारोही, सोकला, सीलखेडा, मुंगावली, जुगराजपुरा, बाजारगांव, बरखेडा हसन, पडालिया और कई अन्य गांव शामिल हैं। पार्वती उद्वहन परियोजना से 40 गांवों को सिंचाई का पानी मिलेगा, जिनमें पाटन, बरखेडा खरेट, चौकी, शाहजहापुर, भौज, बरखेडी, कतपोन, सोनकच्छ, सतपोन, जमुनियाखुर्द, बराडीकलां, सतोरनिया, तोरनिया, छापरी दोराहा, झागरिया, निवारिया, मिटटूखेडी, गुलखेडी, कादमपुर, मुख्तार नगर और अन्य गांव शामिल हैं।

    आर्थिक लाभ और जल प्रबंधन

    यह परियोजना किसानों के लिए एक बड़ी राहत होगीक्योंकि इससे जल संकट की समस्या को हल करने में मदद मिलेगी। इसके अलावाइससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होने के साथ-साथ जल की बचत भी संभव होगीजो क्षेत्रीय जल प्रबंधन में सुधार करेगा। पार्वती कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम हैजो मध्य प्रदेश के सीहोर और श्यामपुर क्षेत्र के किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी। इस परियोजना के तहत किसानों को सिंचाई के बेहतर साधन मिलेंगेजिससे उनकी कृषि आय में वृद्धि होगी और पूरे क्षेत्र का समग्र विकास होगा।

  • रामगढ़ में हाथियों का आतंक जारी 56 घंटे में 6 लोगों की मौत 2 और मरे

    रामगढ़ में हाथियों का आतंक जारी 56 घंटे में 6 लोगों की मौत 2 और मरे


    रामगढ़ । झारखंड के रामगढ़ जिले में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को दो और लोगों की जान चली गई जिससे पिछले 56 घंटों में यहां हाथियों के हमले में मरने वालों की संख्या 6 हो गई है। शुक्रवार की घटनाओं में एक व्यक्ति का नाम लोकनाथ मुंडा था जो कुजू ओपी क्षेत्र के सुगिया गांव का निवासी था। वह अपनी पत्नी के साथ जलावन के लिए कोयला चुनने सीसीएल के करमा परियोजना की ओर जा रहे थे तभी उनका सामना हाथियों के झुंड से हो गया। हाथियों ने उन्हें पटककर मार डाला जबकि उनकी पत्नी किसी तरह भागकर अपनी जान बचाने में सफल रही।

    दूसरी घटना रामगढ़ प्रखंड के कुंदरूकलां पंचायत में हुई जहां काजल देवी नाम की महिला ईंट भट्ठे में काम करने आई थी। जब वह रात में शौच के लिए बाहर गई तो हाथियों ने उसे घेर लिया और उसे पटक-पटककर मार डाला। इस दौरान वहां मौजूद आधे दर्जन से अधिक लोग बाल-बाल बच गए। इसके अलावा हाथियों ने पास में मौजूद फसलों को भी नुकसान पहुंचाया। वन विभाग अब इस नुकसान का मूल्यांकन करने में जुटा है।

    इन घटनाओं से पहले मंगलवार को भी रामगढ़ जिले के घाटो थाना क्षेत्र के आरा सारूबेड़ा में हाथियों के हमले में चार लोग मारे गए थे जिनमें एक सीसीएल का सुरक्षाकर्मी और तीन अन्य स्थानीय लोग शामिल थे।स्थानीय लोगों और वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि हाथियों के आक्रामक होने का मुख्य कारण उनके पारंपरिक रास्तों में बढ़ती मानवीय गतिविधि और जंगलों का सिमटना है। इसके कारण हाथी भोजन और पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों में घुसने पर मजबूर हो रहे हैं।

    वर्तमान में वन विभाग ने क्षेत्र में हाथियों से बचाव के लिए निगरानी बढ़ा दी है और उनके मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। साथ ही ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान और मुआवजे के साथ-साथ हाथियों के सुरक्षित मार्ग को बहाल करने की अपील की है। तोपा माइनस कॉलोनी उखरबेड़वा और हरवे क्षेत्र में हाथियों का झुंड खुलेआम विचरण कर रहा है जिससे ग्रामीणों में चिंता का माहौल है।प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को तत्काल 25 हजार रुपये की सहायता राशि दी है और मुआवजे के रूप में 3 लाख 75 हजार रुपये 10 दिनों के अंदर भुगतान करने का आश्वासन दिया है।

  • महाकाल मंदिर विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला तकिया मस्जिद की याचिका खारिज

    उज्जैन । सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर के विस्तार महाकाल लोक फेज-2के लिए तकिया मस्जिद की भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता मोहम्मद तैय्यब भूमि का मालिक नहीं है बल्कि केवल उपासक भक्तहै इसलिए उसे भूमि अधिग्रहण पर सवाल उठाने का कानूनी अधिकार नहीं है। यह फैसला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनाया।

    याचिका में यह दावा किया गया था कि 1985 से यह भूमि मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की संपत्ति है और अधिग्रहण के समय उचित मुआवजा पुनर्वास और सामाजिक प्रभाव आकलन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने कहा कि महाकाल मंदिर के विस्तार के लिए भूमि का अधिग्रहण सार्वजनिक उद्देश्य के अंतर्गत नहीं आता और इससे संविधान के अनुच्छेद 14 25 26 और 300-A का उल्लंघन होता है।

    हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में पहले से वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध थे और याचिकाकर्ता केवल मुआवजे की आपत्ति ही उठा सकता था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह भूमि अधिग्रहण की वैधता पर विचार नहीं करेगा क्योंकि याचिकाकर्ता भूमि का मालिक नहीं है।

    इससे पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी महाकाल लोक फेज-2 परियोजना से जुड़ी मुआवजे को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हाई कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता न तो भू-स्वामी हैं और न ही टाइटल होल्डर इसलिए वे केवल मुआवजे के संदर्भ में सवाल उठा सकते हैं। इस फैसले से महाकाल लोक फेज-2 परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को कानूनी मंजूरी मिल गई है। यह परियोजना महाकाल मंदिर परिसर के विस्तार और सार्वजनिक स्थलों के पुनर्विकास का हिस्सा है जिसे बड़ी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्वता प्राप्त है।

  • हादसे में एयरबैग न खुलने पर टोयोटा पर 61 लाख का जुर्माना CG राज्य उपभोक्ता आयोग का फैसला

    हादसे में एयरबैग न खुलने पर टोयोटा पर 61 लाख का जुर्माना CG राज्य उपभोक्ता आयोग का फैसला


    रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने टोयोटा किर्लोस्कर मोटर कंपनी पर 61 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है और कंपनी को मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह आदेश उस समय आया जब एक गंभीर सड़क दुर्घटना में कंपनी की इनोवा कार के एयरबैग न खुलने की वजह से चालक को गंभीर चोटें आईं। आयोग ने इस मामले को विनिर्माण दोष और सेवा में कमी की श्रेणी में माना है क्योंकि एयरबैग की कार्यशीलता एक सुरक्षा मानक है जो कार दुर्घटनाओं में जीवन को बचाने में अहम भूमिका निभाता है।

    यह मामला 23 अप्रैल 2023 का है। कोरबा निवासी व्यापारी अमित अग्रवाल और उनके भाई सुमित अग्रवाल रायपुर से कोरबा लौट रहे थे जब तरदा गांव के पास सामने से आ रहे वाहन से बचने के प्रयास में उनकी इनोवा कार अनियंत्रित हो गई और पेड़ से टकरा गई। हादसा बेहद गंभीर था और इस दौरान कार का कोई भी एयरबैग नहीं खुला जिससे चालक अमित अग्रवाल को गंभीर चोटें आईं।

    अमित अग्रवाल ने इलाज के दौरान कुल 36.83 लाख रुपये खर्च किए क्योंकि उन्हें रायपुर और हैदराबाद में इलाज कराना पड़ा। इसके बाद सुमित अग्रवाल ने टोयोटा किर्लोस्कर मोटर कंपनी के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग कोरबा में शिकायत दायर की। शिकायत में यह आरोप लगाया गया कि कार में एयरबैग की तकनीकी खराबी के कारण गंभीर दुर्घटना के दौरान चालक को बचाया नहीं जा सका।

    जब कंपनी की ओर से कोई प्रतिनिधि सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ तो जिला उपभोक्ता आयोग ने एकपक्षीय निर्णय लेते हुए टोयोटा को नया वाहन या उसके बराबर राशि देने का आदेश दिया। इसके अलावा उन्होंने चिकित्सा खर्च की भरपाई भी करने के निर्देश दिए।

    टोयोटा ने इस फैसले के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की जिसमें उन्होंने बीमा भुगतान और विशेषज्ञ रिपोर्ट के अभाव जैसे तर्क प्रस्तुत किए। हालांकि राज्य उपभोक्ता आयोग ने कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए जिला आयोग के फैसले को सही ठहराया। आयोग ने कहा कि वाहन के एयरबैग का न खुलना एक गंभीर लापरवाही और खराब निर्माण का उदाहरण है जो उपभोक्ता के जीवन को खतरे में डालता है।

    यह मामला उपभोक्ता सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि कार निर्माता कंपनियों को अपनी सुरक्षा प्रणालियों की गुणवत्ता और कार्यक्षमता को सुनिश्चित करना चाहिए। अगर कोई उपभोक्ता सुरक्षा मानक में कमी की वजह से नुकसान उठाता है तो कंपनी को जिम्मेदारी लेनी चाहिए और उपभोक्ता को उचित मुआवजा देना चाहिए। यह फैसला उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करता है और यह संदेश देता है कि कंपनियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर ध्यान देना चाहिए।

  • कुमार सानू ने एक्स वाइफ रीता के खिलाफ दर्ज किया मानहानि का केस 30 लाख रुपये मुआवजे की मांग

    कुमार सानू ने एक्स वाइफ रीता के खिलाफ दर्ज किया मानहानि का केस 30 लाख रुपये मुआवजे की मांग


    नई दिल्ली । कुमार सानू ने अपनी एक्स वाइफ रीता के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज किया है और मुआवजे के रूप में 30 लाख रुपये की मांग की है। यह मामला तब सामने आया जब रीता ने कई मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुमार सानू पर गंभीर आरोप लगाए।

    क्या है मामला

    रीता ने अपने बयानों में दावा किया था कि कुमार सानू ने उनकी प्रेग्नेंसी के दौरान उनका बहुत बुरा व्यवहार किया था। उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि कुमार सानू ने उन्हें भूखा रखा किचन में बंद कर दिया और प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें दूध और मेडिकल केयर तक नहीं दिया। रीता का यह भी कहना था कि कुमार सानू ने इस दौरान कोर्ट के मामलों को भी जारी रखा था।

    इन आरोपों को लेकर कुमार सानू ने मानहानि की याचिका दायर की है जिसमें कहा गया है कि इन झूठे आरोपों के कारण उनकी इमेज को काफी नुकसान पहुंचा है और उन्होंने मानसिक तनाव का सामना भी किया है। कुमार सानू का कहना है कि इन आरोपों के कारण उनकी पब्लिक इमेज खराब हुई है और इसका असर उनके प्रोफेशनल करियर पर भी पड़ा है।

    याचिका में क्या कहा गया

    याचिका में कहा गया है कि इन बयानों ने सिंगर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है और उन्हें सोशल मीडिया पर भी निगेटिव प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा है। इस मानहानि के मामले में रीता और संबंधित मीडिया पोर्टल्स को लीगल नोटिस भेजा गया है। कुमार सानू ने यह भी कहा कि इन आरोपों से उन्हें आर्थिक और प्रतिष्ठा संबंधी भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा रीता ने यह भी आरोप लगाया था कि शादी के दौरान कुमार सानू के कई अफेयर थे जो मामला और पेचीदा बना रहा है।

    सना रईस खान ने लिया कुमार सानू का पक्ष

    कुमार सानू की ओर से इस मानहानि केस की याचिका वकील सना रईस खान द्वारा दायर की गई है। सना रईस खान बिग बॉस 17 की कंटेस्टेंट भी रह चुकी हैं और उन्होंने ही कुमार सानू का कानूनी प्रतिनिधित्व किया है।

    कुमार सानू और रीता का तलाक

    कुमार सानू और रीता का तलाक 2001 में हुआ था। दोनों का एक बेटा है जान कुमार सानू जो बिग बॉस 14 में बतौर कंटेस्टेंट नजर आ चुके थे। जान कुमार सानू का नाम भी इस विवाद से जुड़ा है लेकिन अभी तक उन्होंने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यह विवाद सिंगर कुमार सानू और उनकी एक्स वाइफ रीता के बीच बढ़ता जा रहा है। यदि कोर्ट इस मामले में फैसला देता है तो यह देखना दिलचस्प होगा कि मानहानि के इस केस में क्या परिणति होती है और क्या कुमार सानू को मुआवजा मिलता है।