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  • रिकल्टन के शतक और मुल्डर की पारी ने पलटा मैच, आखिरी दिन सीरीज जीतने के लिए दोनों टीमें आमने-सामने

    रिकल्टन के शतक और मुल्डर की पारी ने पलटा मैच, आखिरी दिन सीरीज जीतने के लिए दोनों टीमें आमने-सामने


    नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच केपटाउन में खेला जा रहा तीसरा टेस्ट रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार को मुकाबले का आखिरी दिन है और दोनों टीमों के सामने सीरीज जीतने की चुनौती होगी। दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज रयान रिकल्टन को उम्मीद है कि मैच का नतीजा जरूर निकलेगा। उनका मानना है कि मुकाबला जीत या हार के साथ समाप्त होगा और ड्रॉ की संभावना बेहद कम है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि पिच की धीमी रफ्तार और गेंद की स्थिति को देखते हुए आखिरी दिन तीनों तरह के नतीजे संभव हैं।

    चौथे दिन का खेल समाप्त होने के बाद रिकल्टन ने कहा कि पिच बल्लेबाजी के लिए बहुत खराब नहीं हुई है लेकिन इसकी धीमी गति के कारण रन बनाना आसान नहीं है। गेंद भी नरम हो चुकी है जिससे बल्लेबाजों के लिए फील्डरों को चकमा देकर रन निकालना मुश्किल हो रहा है। उनके मुताबिक नई गेंद से बल्लेबाजों को रन बनाने के मौके मिल सकते हैं और गेंदबाजों को विकेट हासिल करने में भी मदद मिल सकती है। ऑस्ट्रेलिया के सामने लक्ष्य हासिल करने की चुनौती होगी क्योंकि उसे पूरे दिन एक ऐसे विकेट पर बल्लेबाजी करनी पड़ सकती है जो लगातार धीमा होता जा रहा है।

    रिकल्टन ने दक्षिण अफ्रीका के मुख्य कोच शुकरी कॉनराड और कप्तान टेम्बा बावुमा की सोच की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि कोच हमेशा सकारात्मक रुख अपनाते हैं और टीम को भरोसा दिलाते हैं कि उसके पास उपलब्ध संसाधन मुकाबला जीतने के लिए पर्याप्त हैं। कप्तान बावुमा भी खिलाड़ियों को हर दिन कुछ खास करने का अवसर मिलने की बात कहते हैं। रिकल्टन के अनुसार आखिरी दिन किसी खिलाड़ी के पास टीम के लिए यादगार प्रदर्शन करने का मौका होगा।

    मैच की स्थिति पर नजर डालें तो दक्षिण अफ्रीका ने पहली पारी में 329 रन बनाए थे। इसके जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 429 रन बनाए और पहली पारी के आधार पर 100 रन की बढ़त हासिल कर ली। दूसरी पारी में दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने 181 रन पर 5 विकेट गंवा दिए थे। ऐसे मुश्किल समय में रयान रिकल्टन और वियान मुल्डर ने मोर्चा संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 154 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की और टीम को 335 रन तक पहुंचाया।

    इस साझेदारी के दौरान रिकल्टन ने शानदार शतक लगाया। वह 101 रन बनाकर दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट हो गए। उनके आउट होने के बाद मुल्डर ने अकेले संघर्ष जारी रखा और आखिरी विकेट के रूप में आउट होने से पहले 115 रन की शतकीय पारी खेली। दक्षिण अफ्रीका की दूसरी पारी 387 रन पर समाप्त हुई। टीम अगर रिकल्टन के रन आउट होने के बाद भी कुछ देर टिक पाती और निचले क्रम से सहयोग मिलता तो स्कोर और बड़ा हो सकता था।

    पहली पारी में मिली 100 रन की बढ़त के बाद दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया के सामने जीत के लिए 288 रन का लक्ष्य रखा है। आखिरी दिन दक्षिण अफ्रीका की कोशिश ऑस्ट्रेलिया के सभी 10 विकेट हासिल करने की होगी जबकि कंगारू टीम लक्ष्य तक पहुंचने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। तीन टेस्ट मैचों की सीरीज फिलहाल 1-1 से बराबर है। ऐसे में केपटाउन टेस्ट जीतने वाली टीम सीरीज अपने नाम कर लेगी। यही वजह है कि मुकाबले का आखिरी दिन दोनों टीमों के लिए बेहद अहम और रोमांचक रहने वाला है।

  • हांगकांग सिक्सेस में भारत की लगातार दूसरी हार, UAE ने 4.2 ओवर में ही 95 रन का लक्ष्य किया हासिल

    हांगकांग सिक्सेस में भारत की लगातार दूसरी हार, UAE ने 4.2 ओवर में ही 95 रन का लक्ष्य किया हासिल


    नई दिल्ली। हांगकांग सिक्सेस टूर्नामेंट में भारतीय क्रिकेट टीम का निराशाजनक प्रदर्शन जारी है। टूर्नामेंट में भारत को लगातार दूसरी हार का सामना करना पड़ा है। शनिवार को खेले गए मुकाबले में संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने भारतीय टीम को 6 विकेट से शिकस्त दी। इससे पहले भारत को अपने शुरुआती मुकाबले में पाकिस्तान के खिलाफ 4 विकेट से हार मिली थी। लगातार दो हार के बाद भारतीय टीम के प्रदर्शन पर सवाल उठने लगे हैं।

    कॉव्लून के टिन क्वॉंग रोड रिक्रिएशन ग्राउंड में खेले गए मुकाबले में UAE ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। शीर्ष क्रम के बल्लेबाज बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। हालांकि आखिरी क्रम में बल्लेबाजी करने आए टी. नटराजन ने शानदार आक्रामक अंदाज दिखाते हुए टीम का स्कोर 94 रन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

    नटराजन ने महज 14 गेंदों पर नाबाद अंदाज में 38 रन की तेजतर्रार पारी खेली। उनकी इस पारी में 4 छक्के और 3 चौके शामिल रहे। राहुल त्रिपाठी ने भी शुरुआत से ही बड़े शॉट खेलने की कोशिश की। उन्होंने केवल 7 गेंदों पर 3 छक्कों और एक चौके की मदद से 24 रन बनाए। कप्तान क्रुणाल पंड्या ने 8 गेंदों पर 15 रन का योगदान दिया। इसके अलावा नितीश राणा 6 रन और राहुल तेवतिया तथा शशांक सिंह एक-एक रन बनाकर आउट हुए। भारतीय टीम ने 6 ओवर में अपने सभी 6 विकेट गंवाकर 94 रन बनाए।

    95 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी UAE की टीम ने भारतीय गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया। टीम ने बेहद आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए महज 4.2 ओवर में बिना कोई विकेट गंवाए 97 रन बना लिए और मुकाबला अपने नाम कर लिया। UAE के कप्तान और विकेटकीपर खालिद शाह ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर खबर ली। उन्होंने सिर्फ 14 गेंदों पर 6 छक्कों और 3 चौकों की मदद से नाबाद 52 रन बनाए। उनके साथ अंश टंडन ने भी विस्फोटक बल्लेबाजी की। अंश ने 12 गेंदों पर 5 छक्के और 2 चौके लगाते हुए नाबाद 39 रन बनाए।

    भारतीय गेंदबाज इस मुकाबले में पूरी तरह बेअसर नजर आए। बल्लेबाजी में 38 रन बनाने वाले टी. नटराजन गेंदबाजी के दौरान काफी महंगे साबित हुए। उन्होंने अपने 2 ओवर में 43 रन खर्च कर दिए। शशांक सिंह ने एक ओवर में 17 रन दिए जबकि नितीश राणा ने एक ओवर में 24 रन लुटाए। कप्तान क्रुणाल पंड्या ने भी केवल 2 गेंदों में 12 रन दे दिए। UAE के जाहिद अली को शानदार गेंदबाजी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने 2 ओवर में 32 रन देकर 2 विकेट हासिल किए।

    भारतीय टीम के लिए यह हार इसलिए भी चिंता बढ़ाने वाली है क्योंकि उसे लगातार दूसरे मुकाबले में शिकस्त मिली है। पहले पाकिस्तान और फिर UAE के खिलाफ मिली हार ने टूर्नामेंट में भारत की स्थिति मुश्किल कर दी है। अब भारतीय टीम को आगे के मुकाबलों में बेहतर बल्लेबाजी और अनुशासित गेंदबाजी के साथ उतरना होगा।

  • चार साल बाद टीम इंडिया में लौटे भुवनेश्वर कुमार का फीका प्रदर्शन, तीन मैचों में 139 रन लुटाए और मिला सिर्फ एक विकेट

    चार साल बाद टीम इंडिया में लौटे भुवनेश्वर कुमार का फीका प्रदर्शन, तीन मैचों में 139 रन लुटाए और मिला सिर्फ एक विकेट


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में चार साल बाद वापसी अब तक उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही है। न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली जा रही पांच मैचों की टी20 सीरीज में मेरठ के 36 वर्षीय गेंदबाज को शुरुआती तीन मुकाबलों में अपनी पुरानी लय हासिल करने के लिए संघर्ष करना पड़ा है। अपनी स्विंग गेंदबाजी के दम पर दुनिया के बड़े बल्लेबाजों को परेशान करने वाले भुवनेश्वर इस बार रन रोकने और विकेट निकालने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सके। तीन मैचों में उन्होंने कुल 12 ओवर गेंदबाजी करते हुए 139 रन खर्च किए और उनके खाते में केवल एक विकेट आया। ऐसे प्रदर्शन के बाद अब अगले मुकाबलों में उनकी गेंदबाजी पर सभी की निगाहें रहेंगी।

    न्यूजीलैंड के खिलाफ मौजूदा सीरीज में भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा है। बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाकर विरोधी टीम पर दबाव बनाया है और गेंदबाजों ने भी कई मौकों पर अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि भुवनेश्वर कुमार के लिए शुरुआती मुकाबले चुनौतीपूर्ण साबित हुए। पहले मैच में उन्होंने चार ओवर में 49 रन दिए जबकि दूसरे मुकाबले में उनके खाते से 50 रन खर्च हुए। तीसरे टी20 में भी उन्होंने चार ओवर में 40 रन दिए। हालांकि पिछले दो मैचों की तुलना में उनके प्रदर्शन में कुछ सुधार दिखाई दिया लेकिन उन्हें कोई विकेट नहीं मिल सका। तीन मैचों में उनकी इकोनॉमी 11.58 रन प्रति ओवर रही है जो टी20 क्रिकेट के लिहाज से काफी महंगी मानी जाती है।

    भुवनेश्वर कुमार को भारतीय क्रिकेट में उनकी शानदार स्विंग गेंदबाजी और शुरुआती ओवरों में विकेट निकालने की क्षमता के लिए जाना जाता है। नई गेंद से दोनों तरफ स्विंग कराने की उनकी कला ने उन्हें लंबे समय तक टीम इंडिया का अहम गेंदबाज बनाए रखा। लेकिन लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। मैच की परिस्थितियों के अनुसार गेंदबाजी करना और दबाव के बीच सही लाइन और लेंथ बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में भुवनेश्वर को भी अपनी पुरानी लय पाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है।

    टीम प्रबंधन को अनुभव पर भरोसा

    शुरुआती तीन मुकाबलों में महंगे साबित होने के बावजूद टीम प्रबंधन और मुख्य कोच ने भुवनेश्वर कुमार के अनुभव पर भरोसा जताया है। टीम का मानना है कि लंबे समय बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के कारण खिलाड़ी को लय में लौटने में समय लग सकता है। मेरठ के गांधी बाग में क्रिकेट कोच तनकीब अहमद ने भी माना कि लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलने पर खिलाड़ी के ऊपर दबाव रहता है। हर खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करना चाहता है और भुवनेश्वर भी आने वाले मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। कोच अतरह अली के मुताबिक भी वापसी के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव रहता है और खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करता है।

    अगले मुकाबलों में लय हासिल करने की चुनौती

    अब सीरीज के अगले मैच भुवनेश्वर कुमार के लिए काफी अहम होंगे। उन्हें अपनी गेंदबाजी में सटीकता लाने के साथ विकेट निकालने की क्षमता भी दिखानी होगी। शुरुआती ओवरों में रन रोकना और बल्लेबाजों को गलतियां करने के लिए मजबूर करना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। यदि वह अपनी स्विंग और अनुभव का सही इस्तेमाल कर पाए तो टीम इंडिया के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। फिलहाल उनके प्रदर्शन पर सवाल जरूर उठ रहे हैं लेकिन सीरीज के बाकी मुकाबलों में वापसी करने का अवसर उनके पास है। अब देखना होगा कि अनुभवी भुवी अपने प्रदर्शन में कितना सुधार कर पाते हैं और टीम प्रबंधन के भरोसे पर किस तरह खरे उतरते हैं।

  • अभिषेक शर्मा के बल्ले से निकला रनों का तूफान, न्यूजीलैंड को रौंदने के बाद युवराज सिंह को लेकर कही दिलचस्प बात

    अभिषेक शर्मा के बल्ले से निकला रनों का तूफान, न्यूजीलैंड को रौंदने के बाद युवराज सिंह को लेकर कही दिलचस्प बात


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में ऐसी विस्फोटक पारी खेली कि विरोधी टीम के गेंदबाजों के पास कोई जवाब नहीं बचा। अभिषेक ने महज 35 गेंदों में शतक पूरा किया और 38 गेंदों पर 113 रन बनाकर भारतीय टीम को शानदार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। भारत ने इस मुकाबले में न्यूजीलैंड को छह विकेट से हराकर पांच मैचों की टी20 सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। हालांकि इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद अभिषेक की चर्चा उनकी बल्लेबाजी के साथ साथ अपने मेंटर युवराज सिंह को दिए गए मजेदार जवाब को लेकर भी हो रही है।

    मैच के बाद बातचीत के दौरान अभिषेक से युवराज सिंह की उस टिप्पणी के बारे में पूछा गया जिसमें उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि अभिषेक अभी तक 12 गेंदों में अर्धशतक बनाने का कमाल नहीं कर पाए हैं। इस पर अभिषेक ने हंसते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि उस समय युवराज कौन सा क्रिकेट खेल रहे थे लेकिन 12 गेंदों में 50 रन बनाना बिल्कुल आसान काम नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई बल्लेबाज केवल मैदान पर उतरकर इतनी कम गेंदों में अर्धशतक नहीं बना सकता। इसके लिए परिस्थितियों का साथ और असाधारण प्रदर्शन दोनों जरूरी होते हैं। अभिषेक का यह जवाब सुनकर क्रिकेट प्रशंसकों को उनके और युवराज के बीच गुरु शिष्य के रिश्ते की मजेदार झलक देखने को मिली।

    अभिषेक ने अपनी शानदार पारी के दौरान 11 छक्के और नौ चौके लगाए। उन्होंने केवल 15 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया था और इसके बाद भी उनकी आक्रामक बल्लेबाजी जारी रही। दूसरी ओर युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने भी न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर जमकर हमला बोला। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए महज 7.1 ओवर में 133 रन जोड़ दिए। वैभव ने 19 गेंदों पर 45 रन बनाए और उनकी तेज शुरुआत ने भारतीय टीम के लिए लक्ष्य का पीछा बेहद आसान कर दिया।

    अभिषेक ने बताया कि इस मुकाबले से पहले उन्होंने पिच और मैदान की परिस्थितियों को समझने पर खास ध्यान दिया था। फील्डिंग के दौरान उन्होंने पिच पर अतिरिक्त उछाल को महसूस किया और इसके बाद वैभव के साथ मिलकर पावरप्ले में आक्रामक बल्लेबाजी करने की रणनीति बनाई। उन्होंने कहा कि दोनों का उद्देश्य व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाना नहीं बल्कि टीम को जीत दिलाने के लिए तेजी से रन बनाना था। अभिषेक ने अपनी सफलता का श्रेय कोचिंग स्टाफ और अभ्यास सत्रों को भी दिया। उनके मुताबिक मैच से पहले साइडआर्म गेंदों पर अभ्यास करने से उन्हें तेज गेंदों के खिलाफ बेहतर तैयारी करने में मदद मिली।

    मुकाबले में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए डेरिल मिचेल की नाबाद 89 रन की पारी की बदौलत 20 ओवर में तीन विकेट पर 198 रन बनाए थे। फिन एलन ने 40 रन और बेवन जैकब्स ने नाबाद 39 रन का योगदान दिया। भारतीय टीम ने जवाब में आक्रामक शुरुआत की और शुरुआती ओवरों में ही मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। भारत ने 13.2 ओवर में चार विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया और 40 गेंद शेष रहते मुकाबला अपने नाम कर लिया।

    इस जीत के साथ भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड में लगातार तीसरी टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज जीतने का सिलसिला भी बरकरार रखा। अभिषेक का तूफानी शतक और वैभव के साथ उनकी साझेदारी इस मुकाबले की सबसे बड़ी खासियत रही। वहीं युवराज सिंह की टिप्पणी पर उनका मजेदार जवाब भी चर्चा का विषय बन गया। मैदान पर बल्ले से धमाल मचाने वाले अभिषेक ने यह साफ कर दिया कि उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं बल्कि टीम इंडिया की जीत है।

  • देवदत्त पडिक्कल की मैराथन पारी से न्यूजीलैंड ए के गेंदबाज पस्त, 24 चौके और 3 छक्के जड़कर 199 रन पर हुए आउट

    देवदत्त पडिक्कल की मैराथन पारी से न्यूजीलैंड ए के गेंदबाज पस्त, 24 चौके और 3 छक्के जड़कर 199 रन पर हुए आउट


    नई दिल्ली । भारत ए और न्यूजीलैंड ए के बीच लिंकन के बर्ट सटक्लिफ ओवल मैदान पर खेले जा रहे पहले अनौपचारिक टेस्ट में देवदत्त पडिक्कल ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। दूसरी पारी में उन्होंने 199 रन की बेहतरीन पारी खेली लेकिन दोहरे शतक से महज एक रन दूर रह गए। पडिक्कल ने अपनी पारी के दौरान धैर्य और आक्रामकता का शानदार संतुलन दिखाया। हालांकि वह जिस तरह आउट हुए उससे भारतीय बल्लेबाज के चेहरे पर निराशा साफ नजर आई। उनकी इस पारी ने मुश्किल में फंसी भारत ए की टीम को मुकाबले में मजबूत वापसी का मौका दिया है।

    पडिक्कल ने 248 गेंदों का सामना करते हुए 199 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 24 चौके और तीन छक्के लगाए। वह दोहरा शतक पूरा करने के बेहद करीब थे लेकिन न्यूजीलैंड ए के तेज गेंदबाज जैक गिब्सन की गेंद उनके पैड पर लगी। गेंदबाज और विपक्षी खिलाड़ियों ने जोरदार अपील की जिसके बाद अंपायर ने उन्हें आउट करार दे दिया। भारतीय बल्लेबाज इस फैसले से संतुष्ट नहीं दिखे और दोहरे शतक से चूकने की निराशा उनके चेहरे पर नजर आई। हालांकि उनकी पारी ने भारत ए के लिए दूसरी पारी में मजबूत आधार तैयार कर दिया।

    दूसरी पारी में भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल केवल पांच रन बनाकर आउट हो गए जबकि केएल राहुल भी चार रन ही बना सके। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने से टीम पर दबाव बढ़ गया था। ऐसे समय में पडिक्कल ने साई सुदर्शन के साथ मिलकर पारी को संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ए के गेंदबाजों का सामना किया और तीसरे विकेट के लिए 340 गेंदों पर 215 रन की शानदार साझेदारी निभाई।

    साई सुदर्शन ने भी बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए 184 गेंदों में 91 रन बनाए। उनकी पारी में 12 चौके शामिल रहे। पडिक्कल और सुदर्शन की साझेदारी ने भारत ए को शुरुआती झटकों से उबरने में मदद की। सुदर्शन के आउट होने के बाद कप्तान ध्रुव जुरेल भी ज्यादा देर क्रीज पर नहीं टिक सके और केवल दो रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बावजूद पडिक्कल ने एक छोर संभाले रखा और रन बनाने का सिलसिला जारी रखा।

    इसके बाद पडिक्कल को यश राठौड़ का साथ मिला। दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर उपयोगी साझेदारी की और स्कोर को आगे बढ़ाया। यश राठौड़ ने भी जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतक पूरा किया। टी ब्रेक तक भारत ए ने दूसरी पारी में पांच विकेट के नुकसान पर 377 रन बना लिए थे। यश राठौड़ 66 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे जबकि वॉशिंगटन सुंदर दो रन बनाकर उनका साथ दे रहे थे। इस समय भारत ए की कुल बढ़त 173 रन तक पहुंच चुकी थी और उसके पांच विकेट शेष थे।

    मैच की पहली पारी में भारत ए की बल्लेबाजी पूरी तरह लड़खड़ा गई थी और पूरी टीम केवल 113 रन बना सकी थी। इसके जवाब में न्यूजीलैंड ए ने 317 रन बनाकर 204 रन की अहम बढ़त हासिल कर ली थी। ऐसे में दूसरी पारी में पडिक्कल की शानदार बल्लेबाजी भारत ए के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई। उनकी पारी ने न केवल टीम को संकट से बाहर निकालने में मदद की बल्कि मुकाबले में वापसी की उम्मीद भी जगा दी।

    हालांकि पडिक्कल अपने दोहरे शतक से चूक गए लेकिन 199 रन की उनकी पारी इस मुकाबले की सबसे अहम पारियों में शामिल हो गई। अब भारत ए की कोशिश अपनी बढ़त को और मजबूत करने की होगी ताकि न्यूजीलैंड ए के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा जा सके।

  • इंग्लैंड की रिकॉर्ड हार पर कप्तान हैरी ब्रूक का बड़ा बयान, बोले- हम अपनी गलती जानते हैं, 429 रन बनाकर भी नहीं बचा पाए मैच

    इंग्लैंड की रिकॉर्ड हार पर कप्तान हैरी ब्रूक का बड़ा बयान, बोले- हम अपनी गलती जानते हैं, 429 रन बनाकर भी नहीं बचा पाए मैच


    नई दिल्ली। पाकिस्तान में खेली जा रही वनडे त्रिकोणीय सीरीज में इंग्लैंड को श्रीलंका के खिलाफ ऐसी हार का सामना करना पड़ा जिसने क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया। इंग्लैंड ने कप्तान हैरी ब्रूक के ऐतिहासिक दोहरे शतक की बदौलत 429 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया लेकिन श्रीलंका ने 49.5 ओवर में आठ विकेट खोकर 430 रन बना लिए और मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस रिकॉर्डतोड़ हार के बाद इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने स्वीकार किया कि उनकी टीम गेंदबाजी में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी और उसे अपनी गलतियों को सुधारने की जरूरत है।

    मैच के बाद ब्रूक ने कहा कि यह शानदार मुकाबला था और दोनों टीमों ने बेहतरीन क्रिकेट खेला लेकिन दुर्भाग्य से श्रीलंका ने बाजी मार ली। उन्होंने माना कि इंग्लैंड के गेंदबाज विपक्षी टीम की ताकत के हिसाब से गेंदबाजी करते रहे और बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में नाकाम रहे। ब्रूक के मुताबिक टीम को पता है कि उससे कहां गलती हुई है। अब खिलाड़ियों को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करना होगा और आने वाले मैचों में बेहतर प्रदर्शन के लिए सरल योजनाओं के साथ मैदान पर उतरना होगा।

    इस मुकाबले में इंग्लैंड की बल्लेबाजी शानदार रही। टॉस जीतकर श्रीलंका ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था। बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने निर्धारित 50 ओवर में चार विकेट पर 429 रन बनाए। कप्तान हैरी ब्रूक ने 116 गेंदों पर 202 रन की विस्फोटक पारी खेली। उनकी पारी में 21 चौके और 10 छक्के शामिल रहे। इस प्रदर्शन के साथ ब्रूक ने वनडे क्रिकेट में सबसे तेज दोहरा शतक लगाने का रिकॉर्ड भी बनाया। उनके अलावा जो रूट ने 66 गेंदों पर 69 रन बनाए जबकि विल जैक्स ने केवल 30 गेंदों पर नाबाद 66 रन ठोककर टीम को विशाल स्कोर तक पहुंचाया।

    इंग्लैंड को उम्मीद रही होगी कि 430 रन का लक्ष्य श्रीलंका के लिए बेहद मुश्किल साबित होगा लेकिन श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही मुकाबले में अपनी पकड़ बनाए रखी। सलामी बल्लेबाज अविष्का फर्नांडो ने 83 गेंदों पर 97 रन बनाकर मजबूत नींव रखी। इसके बाद पवन रथनायके ने चौथे नंबर पर उतरकर 106 गेंदों पर 130 रन की शानदार पारी खेली। उनकी बल्लेबाजी ने श्रीलंका को लक्ष्य के करीब पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। रथनायके को उनके प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

    मुकाबले के अंतिम चरण में दासुन शनाका और जेनिथ लियांगे ने इंग्लैंड की उम्मीदों को झटका दिया। शनाका ने 50 गेंदों पर 97 रन बनाए जबकि लियांगे ने 27 गेंदों पर नाबाद 61 रन की तेजतर्रार पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने जरूरी रन गति बनाए रखी और श्रीलंका को आखिरी ओवर की पांचवीं गेंद पर ऐतिहासिक जीत दिला दी। श्रीलंका का यह वनडे क्रिकेट में सबसे बड़ा सफल रन चेज बताया गया जबकि विश्व क्रिकेट में यह दूसरा सबसे बड़ा सफल लक्ष्य हासिल करने का कारनामा रहा।

    इस हार ने इंग्लैंड की गेंदबाजी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 429 रन बनाने के बावजूद टीम जीत हासिल नहीं कर सकी जो उसके लिए बड़ी चिंता का विषय है। ब्रूक ने कहा कि टीम के पास फाइनल में जगह बनाने का मौका अभी मौजूद है और खिलाड़ियों को खुद पर भरोसा बनाए रखना होगा। अब इंग्लैंड की कोशिश अपनी गेंदबाजी की कमियों को दूर कर अगले मुकाबलों में वापसी करने की होगी जबकि श्रीलंका की टीम इस ऐतिहासिक जीत से मिले आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेगी।

  • ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका का जोरदार पलटवार, बावुमा की कप्तानी पारी से मिली बड़ी जीत, बोले- हर प्रदर्शन पर रहती है दुनिया की नजर

    ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका का जोरदार पलटवार, बावुमा की कप्तानी पारी से मिली बड़ी जीत, बोले- हर प्रदर्शन पर रहती है दुनिया की नजर


    नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे टेस्ट में शानदार प्रदर्शन करते हुए पारी और 31 रन से बड़ी जीत दर्ज की और तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-1 से बराबरी हासिल कर ली। इस मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के कप्तान टेंबा बावुमा ने 179 रन की यादगार पारी खेली जिसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। वहीं तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा ने वापसी करते हुए गेंद से अहम योगदान दिया। जीत के बाद बावुमा ने कहा कि मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन के तौर पर सभी चाहते हैं कि दक्षिण अफ्रीका मैदान पर उसी स्तर का प्रदर्शन करे और टीम के हर कदम पर लोगों की नजर रहती है।

    मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बावुमा ने कहा कि टीम से विश्व चैंपियन की तरह खेलने की अपेक्षा की जाती है। उनके मुताबिक टीम को अपने प्रदर्शन के साथ इन उम्मीदों पर भी खरा उतरना होता है। उन्होंने माना कि मजबूत विपक्षी टीम के खिलाफ खेलने से खिलाड़ियों को अपनी क्षमता और चुनौतियों का बेहतर अंदाजा मिलता है। बावुमा के इस बयान से साफ है कि दक्षिण अफ्रीका अपनी प्रतिष्ठा के साथ मैदान पर बेहतर प्रदर्शन करने के दबाव को समझती है और हर मुकाबले में मजबूत खेल दिखाने पर ध्यान दे रही है।

    दूसरे टेस्ट में तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा की वापसी भी दक्षिण अफ्रीका के लिए निर्णायक साबित हुई। चोट के कारण वह पहले टेस्ट में नहीं खेल पाए थे और उनकी गैरमौजूदगी में टीम को हार का सामना करना पड़ा था। दूसरे मैच में फिट होकर लौटे रबाडा ने छह विकेट लेकर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी क्रम को झकझोर दिया। बावुमा ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि रबाडा गेंदबाजी आक्रमण की अगुवाई करने की जिम्मेदारी लेते हैं। इससे बाकी खिलाड़ियों को अपनी भूमिका बेहतर तरीके से निभाने का मौका मिलता है। उन्होंने रबाडा को दूसरे खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा देने वाला खिलाड़ी भी बताया।

    मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत आसान नहीं रही। टीम ने पहली पारी में महज 110 रन पर छह विकेट गंवा दिए थे और एक समय बड़ा स्कोर बनाना मुश्किल दिखाई दे रहा था। लेकिन कप्तान बावुमा ने मोर्चा संभाला और 179 रन की शानदार पारी खेलकर टीम को संकट से बाहर निकाला। मार्को जानसेन ने 85 रन बनाए जबकि सिमोन हार्मर ने 82 रन का योगदान दिया। इन पारियों की मदद से दक्षिण अफ्रीका ने नौ विकेट पर 425 रन बनाकर पारी घोषित कर दी। शुरुआती झटकों के बाद टीम की इस वापसी ने मैच का रुख बदल दिया।

    लक्ष्य के जवाब में ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी केवल 99 रन पर सिमट गई। दक्षिण अफ्रीका की ओर से मार्को जानसेन ने पांच विकेट लेकर विपक्षी टीम पर दबाव बनाया। बड़ी बढ़त मिलने के कारण ऑस्ट्रेलिया को फॉलोऑन खेलना पड़ा। दूसरी पारी में ट्रेविस हेड ने 121 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेली और टीम को संभालने की कोशिश की लेकिन बाकी बल्लेबाज बड़ी साझेदारियां नहीं कर सके। पूरी टीम 295 रन पर आउट हो गई और दक्षिण अफ्रीका ने पारी तथा 31 रन से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

    इस जीत के साथ दक्षिण अफ्रीका ने सीरीज में वापसी करते हुए मुकाबले को बराबरी पर ला दिया है। बावुमा की कप्तानी पारी और रबाडा की प्रभावी गेंदबाजी टीम की जीत के प्रमुख कारण रहे। अब तीन टेस्ट मैचों की सीरीज का निर्णायक मुकाबला दोनों टीमों के लिए महत्वपूर्ण होगा। दक्षिण अफ्रीका की कोशिश इस लय को बरकरार रखने की होगी जबकि ऑस्ट्रेलिया सीरीज जीतने के लिए अपनी कमजोरियों को दूर करने उतरेगा।

  • पहले बल्ले से बरसे अराफात मिन्हास, फिर गेंद से उड़ाई इंग्लैंड की धज्जियां, पाकिस्तान ने दर्ज की धमाकेदार जीत

    पहले बल्ले से बरसे अराफात मिन्हास, फिर गेंद से उड़ाई इंग्लैंड की धज्जियां, पाकिस्तान ने दर्ज की धमाकेदार जीत


    नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट टीम को युवा ऑलराउंडर अराफात मिन्हास के रूप में एक ऐसा खिलाड़ी मिला है जिसने अपने दमदार प्रदर्शन से इंग्लैंड की मजबूत टीम को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। रावलपिंडी में खेले गए वनडे ट्राई सीरीज के मुकाबले में 21 वर्षीय मिन्हास ने पहले बल्ले से 59 रन की अहम पारी खेली और फिर गेंदबाजी में छह विकेट चटकाकर इंग्लैंड की बल्लेबाजी को तहस नहस कर दिया। उनके शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन की बदौलत पाकिस्तान ने इंग्लैंड को 87 रन से हरा दिया। इस जीत के साथ पाकिस्तान ने टूर्नामेंट में अपनी दूसरी जीत दर्ज की और मिन्हास ने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    20 अक्टूबर को रावलपिंडी क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। पाकिस्तान की शुरुआत बेहद खराब रही और पारी की पहली ही गेंद पर गस एटकिंसन ने फखर जमां को आउट कर दिया। सैम अयूब भी केवल आठ रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद बाबर आजम ने 52 गेंदों पर 34 रन बनाए लेकिन वह बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। सलमान अली आगा भी 16 रन बनाकर आउट हो गए। पाकिस्तान ने महज 59 रन के स्कोर पर चार विकेट गंवा दिए थे और टीम मुश्किल में नजर आ रही थी।

    ऐसे समय में हसन नवाज और साद बेग ने पारी को संभालने की जिम्मेदारी उठाई। दोनों बल्लेबाजों ने उपयोगी साझेदारी कर टीम को संकट से बाहर निकालने का प्रयास किया। साद बेग ने 35 रन बनाए जबकि हसन नवाज ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 74 गेंदों पर 79 रन ठोक दिए। उनकी पारी में पांच चौके और चार छक्के शामिल रहे। हसन नवाज के आउट होने के बाद अराफात मिन्हास ने मोर्चा संभाला और 58 गेंदों पर 59 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में नौ चौके लगाए और फहीम अशरफ के साथ सातवें विकेट के लिए 72 रन की अहम साझेदारी की। फहीम ने 25 गेंदों पर 39 रन बनाकर पाकिस्तान की रन गति तेज की। कप्तान शाहीन आफरीदी के उपयोगी योगदान से पाकिस्तान ने 50 ओवर में नौ विकेट पर 302 रन बनाए।

    303 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने तेज शुरुआत की। टॉम बैंटन और बेन डकेट ने पहले विकेट के लिए 91 रन जोड़कर पाकिस्तान के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। डकेट ने 45 रन बनाए जबकि बैंटन ने 53 गेंदों पर 57 रन की पारी खेली। हारिस रऊफ ने डकेट को आउट कर इस साझेदारी को तोड़ा और इसके बाद अराफात मिन्हास ने बैंटन को पवेलियन भेज दिया। मिन्हास ने इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक को भी केवल पांच रन पर आउट कर दिया। इसके बाद इंग्लैंड की पारी लड़खड़ाने लगी। जो रूट ने 33 रन बनाए लेकिन नसीम शाह ने उन्हें बोल्ड कर दिया। हारिस रऊफ ने सैम करन को 27 रन पर आउट करके इंग्लैंड की मुश्किलें और बढ़ा दीं।

    इसके बाद अराफात मिन्हास पूरी तरह इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर हावी हो गए। उन्होंने जॉर्डन कॉक्स और जेमी ओवर्टन को आउट करने के बाद विल जैक्स और आदिल राशिद के विकेट भी झटक लिए। इस तरह उन्होंने छह विकेट लेकर इंग्लैंड की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। मिन्हास ने 8.4 ओवर में केवल 40 रन देकर छह विकेट हासिल किए। हारिस रऊफ को दो और नसीम शाह को एक विकेट मिला। इंग्लैंड की पूरी टीम 38.4 ओवर में 215 रन पर सिमट गई और पाकिस्तान ने मुकाबला 87 रन से जीत लिया। बल्ले और गेंद दोनों से शानदार प्रदर्शन करने वाले अराफात मिन्हास ने साबित कर दिया कि वह पाकिस्तान क्रिकेट के लिए भविष्य में एक अहम ऑलराउंडर बन सकते हैं।

  • भारत-वेस्टइंडीज टी20 सीरीज ड्रॉ, शाई होप बने सबसे बड़े हीरो, श्रेयस अय्यर ने मानी टीम इंडिया की रणनीति में कमी

    भारत-वेस्टइंडीज टी20 सीरीज ड्रॉ, शाई होप बने सबसे बड़े हीरो, श्रेयस अय्यर ने मानी टीम इंडिया की रणनीति में कमी


    नई दिल्ली। भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली गई पांच मैचों की टी20 सीरीज 2-2 की बराबरी पर समाप्त हो गई। शनिवार को बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में होने वाला पांचवां और निर्णायक मुकाबला बारिश के कारण नहीं खेला जा सका। लगातार बारिश और मैदान की परिस्थितियों को देखते हुए अंपायरों ने मैच रद्द करने का फैसला किया। इसके साथ ही सीरीज का परिणाम बराबरी पर रहा। मुकाबला रद्द होने के बाद भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप के प्रदर्शन की तारीफ की और माना कि उनकी बल्लेबाजी ने भारतीय टीम के सामने बड़ी चुनौती खड़ी की।
    श्रेयस अय्यर ने मैच के बाद कहा कि भारतीय टीम दूसरे और चौथे टी20 मुकाबले में बेहतर गेंदबाजी कर सकती थी। अगर इन मैचों में गेंदबाज अपनी योजनाओं को सही तरीके से लागू कर पाते तो परिणाम अलग हो सकता था। उन्होंने वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी को शानदार बताते हुए कहा कि विरोधी टीम को उसके प्रदर्शन का पूरा श्रेय दिया जाना चाहिए। अय्यर के मुताबिक शाई होप ने बेहतरीन बल्लेबाजी की और उनकी पारियों ने भारतीय टीम के लिए मुश्किलें बढ़ा दीं। उन्होंने होप को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई भी दी।
    इस सीरीज में शाई होप वेस्टइंडीज की सफलता के सबसे प्रमुख खिलाड़ियों में रहे। उन्होंने चार पारियों में दो शतकों की मदद से कुल 261 रन बनाए। इनमें से 204 रन उन्होंने केवल 95 गेंदों पर बनाए। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाया और वेस्टइंडीज को सीरीज में वापसी करने का मौका दिया। होप को उनके लगातार शानदार प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया।
    सीरीज के दूसरे और चौथे टी20 मुकाबले में वेस्टइंडीज ने भारत को हराया था। इन दोनों मैचों में शाई होप ने शतक लगाकर अपनी टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। उनके प्रदर्शन की बदौलत वेस्टइंडीज ने सीरीज में 2-2 की बराबरी हासिल कर ली। भारतीय टीम के लिए इन मुकाबलों में विपक्षी बल्लेबाजों को रोकना चुनौतीपूर्ण रहा। कप्तान अय्यर की टिप्पणी से भी साफ हुआ कि टीम को अपनी गेंदबाजी योजनाओं के क्रियान्वयन पर ध्यान देने की जरूरत है।
    वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी में शरफेन रदरफोर्ड का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा। बाएं हाथ के इस आक्रामक बल्लेबाज ने दूसरे टी20 में 37 गेंदों पर 84 रन की शानदार पारी खेली थी। इसके बाद चौथे मुकाबले में उन्होंने 26 गेंदों पर नाबाद 49 रन बनाकर टीम को मजबूती दी। होप और रदरफोर्ड की पारियों ने वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी को धार दी और भारतीय टीम के सामने चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा की।
    सीरीज बराबरी पर समाप्त होने के बाद शाई होप ने भी अपनी टीम के प्रदर्शन पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि टीम जीत के काफी करीब पहुंची और इतने वर्षों में इस तरह की प्रतिस्पर्धा दिखाना खिलाड़ियों के सामूहिक प्रयास को दर्शाता है। होप के अनुसार सीरीज में टीम ने खुद को अच्छा मौका दिया और यह संकेत है कि वेस्टइंडीज एक इकाई के रूप में आगे बढ़ रही है।
    पांचवें मुकाबले के बारिश में धुलने से दोनों टीमों को निर्णायक मैच खेलने का मौका नहीं मिला। भारतीय टीम जहां अपनी गेंदबाजी की कमियों से सबक लेकर आगे बढ़ना चाहेगी वहीं वेस्टइंडीज के लिए शाई होप और शरफेन रदरफोर्ड का प्रदर्शन सकारात्मक पहलू रहा। बराबरी पर खत्म हुई सीरीज ने दोनों टीमों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा को दिखाया।

  • कुलदीप यादव के पास बड़ा रिकॉर्ड बनाने का मौका, T20 में 100 विकेट से बस 3 शिकार दूर, अर्शदीप-बुमराह जैसे दिग्गजों की सूची में मिलेगी जगह

    कुलदीप यादव के पास बड़ा रिकॉर्ड बनाने का मौका, T20 में 100 विकेट से बस 3 शिकार दूर, अर्शदीप-बुमराह जैसे दिग्गजों की सूची में मिलेगी जगह


    नई दिल्ली। भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का दूसरा मुकाबला शुक्रवार को रांची के जेएससीए अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम परिसर में खेला जाना है। इस मुकाबले में भारतीय स्पिनर कुलदीप यादव के पास अपने अंतरराष्ट्रीय T20 करियर में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने का मौका है। कुलदीप अब तक 97 विकेट ले चुके हैं और विकेटों का शतक पूरा करने के लिए उन्हें सिर्फ तीन विकेट की जरूरत है। अगर वह दूसरे T20 में यह उपलब्धि हासिल कर लेते हैं तो अंतरराष्ट्रीय T20 क्रिकेट में 100 विकेट पूरे करने वाले भारत के पांचवें गेंदबाज बन जाएंगे। ऐसे में रांची मुकाबले के दौरान उनकी गेंदबाजी पर खास नजर रहने वाली है।

    कुलदीप यादव ने लखनऊ में खेले गए पहले T20 मुकाबले में भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया था। उन्होंने चार ओवर में 33 रन देकर दो विकेट हासिल किए थे। इस प्रदर्शन के साथ उनके अंतरराष्ट्रीय T20 विकेटों की संख्या 97 पहुंच गई। आंकड़ों के मुताबिक कुलदीप ने 55 मैचों की 53 पारियों में ये विकेट लिए हैं। वह अब तक दो बार एक पारी में पांच विकेट लेने का कारनामा भी कर चुके हैं। अपनी विविधतापूर्ण स्पिन गेंदबाजी और बल्लेबाजों को चकमा देने की क्षमता के कारण कुलदीप भारतीय टीम के अहम गेंदबाजों में गिने जाते हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे मुकाबले में तीन विकेट लेकर वह अपने करियर में नया मील का पत्थर हासिल कर सकते हैं।

    अंतरराष्ट्रीय T20 क्रिकेट में भारत की ओर से 100 या उससे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में अर्शदीप सिंह जसप्रीत बुमराह हार्दिक पांड्या और अक्षर पटेल शामिल हैं। इस सूची में अर्शदीप सिंह सबसे आगे हैं। उन्होंने 95 मैचों की 92 पारियों में 141 विकेट हासिल किए हैं। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्शदीप ने अपनी स्विंग और डेथ ओवरों में सटीक गेंदबाजी से टीम इंडिया के लिए लगातार अहम भूमिका निभाई है।

    इस सूची में दूसरे स्थान पर जसप्रीत बुमराह हैं जिन्होंने 100 मैचों में 126 विकेट लिए हैं। बुमराह की यॉर्कर और अलग-अलग गति से गेंदबाजी करने की क्षमता उन्हें खास बनाती है। तीसरे स्थान पर हार्दिक पांड्या हैं। उन्होंने 138 मैचों में 114 विकेट हासिल किए हैं। हार्दिक अपनी तेज गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी योगदान देते हैं और टीम के लिए उपयोगी ऑलराउंडर हैं। चौथे स्थान पर अक्षर पटेल हैं जिन्होंने 108 मैचों में 111 विकेट लिए हैं। अक्षर की किफायती गेंदबाजी और दबाव में विकेट निकालने की क्षमता भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण रही है।

    कुलदीप यादव इस सूची में फिलहाल पांचवें स्थान पर बताए गए हैं। उनके बाद युजवेंद्र चहल का नाम आता है जिन्होंने 80 मैचों में 96 विकेट लिए हैं। वहीं भुवनेश्वर कुमार 87 मैचों में 90 विकेट लेकर भारत के सफल T20 गेंदबाजों में शामिल हैं। भुवनेश्वर की चार साल बाद न्यूजीलैंड सीरीज के लिए भारतीय टीम में वापसी भी चर्चा का विषय रही है। उनके पास भी भविष्य में विकेटों का शतक पूरा करने का अवसर हो सकता है।

    रांची में होने वाला दूसरा T20 कुलदीप यादव के लिए व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल करने के साथ भारतीय टीम की सीरीज में स्थिति मजबूत करने का भी मौका है। हालांकि रिकॉर्ड तक पहुंचने के लिए उन्हें मैदान पर तीन विकेट लेने होंगे। अब देखना होगा कि वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों के खिलाफ कुलदीप अपनी स्पिन का कितना असर दिखा पाते हैं और क्या वह इस मुकाबले में विकेटों का शतक पूरा कर इतिहास रचते हैं।