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  • संन्यास के बाद फ्रेंचाइजी क्रिकेट में धमाकेदार वापसी बेन स्टोक्स बने BBL के सबसे महंगे खिलाड़ी

    संन्यास के बाद फ्रेंचाइजी क्रिकेट में धमाकेदार वापसी बेन स्टोक्स बने BBL के सबसे महंगे खिलाड़ी


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और स्टार ऑलराउंडर बेन स्टोक्स ने फ्रेंचाइजी क्रिकेट में वापसी करते हुए बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। स्टोक्स आगामी बिग बैश लीग यानी BBL के 2026-27 सीजन में एडिलेड स्ट्राइकर्स की ओर से खेलते नजर आएंगे। खास बात यह है कि उन्हें साइन करने के साथ ही स्टोक्स BBL इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी बन गए हैं। उनकी डील ने विदेशी खिलाड़ियों की कीमत को लेकर लीग में नया बेंचमार्क तैयार कर दिया है। स्टोक्स पूरे सीजन के लिए टीम के साथ उपलब्ध रहेंगे और स्ट्राइकर्स को उनसे बल्ले और गेंद दोनों से मैच जिताने वाले प्रदर्शन की उम्मीद होगी।

    स्टोक्स का BBL से रिश्ता नया नहीं है। वह इससे पहले 2014-15 सीजन में मेलबर्न रेनेगेड्स के लिए खेल चुके हैं। उस दौरान उन्होंने चार मुकाबलों में हिस्सा लिया था। इसके बाद लंबे समय तक वह इस लीग से दूर रहे। अब करीब 12 साल बाद उनकी BBL में वापसी होने जा रही है। कई फ्रेंचाइजियां उन्हें अपनी टीम में शामिल करना चाहती थीं लेकिन अंत में एडिलेड स्ट्राइकर्स ने बाजी मार ली। टीम ने उनके साथ एक साल का करार किया है।

    BBL में हाल ही में कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बदलाव किया गया है। लीग ने डायरेक्ट साइनिंग मॉडल को फिर से लागू किया है जिसके तहत फ्रेंचाइजियों को खिलाड़ियों को सीधे साइन करने और उनके लिए अधिक राशि खर्च करने की स्वतंत्रता मिलती है। इस नए सिस्टम के तहत स्टोक्स पूरे सीजन के लिए साइन किए जाने वाले पहले विदेशी खिलाड़ी बने हैं। रिपोर्ट के अनुसार उनकी डील करीब 3.5 करोड़ रुपये यानी लगभग 3 लाख 60 हजार अमेरिकी डॉलर की है। यह रकम पिछले प्लैटिनम स्तर के करीब 2.84 करोड़ रुपये के शीर्ष बैंड से भी अधिक है।

    एडिलेड स्ट्राइकर्स के कोच और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान टिम पेन ने स्टोक्स को क्रिकेट इतिहास के महान ऑलराउंडरों में शामिल बताया है। उनका मानना है कि स्टोक्स बड़े मुकाबलों में दबाव झेलने और मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। स्टोक्स ने भी ऑस्ट्रेलिया में खेलने को लेकर उत्साह जताया है और कहा है कि वह एडिलेड स्ट्राइकर्स के साथ जुड़ने के मौके को गंवाना नहीं चाहते थे। उनका पहला मुकाबला 16 दिसंबर को सिडनी थंडर के खिलाफ कैनबरा में होगा जबकि 23 दिसंबर को वह एडिलेड ओवल में अपनी नई टीम के घरेलू मैदान पर पहली बार उतरेंगे।

    स्टोक्स के लिए यह वापसी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने जून 2026 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। इसके बाद अब उनका फोकस फ्रेंचाइजी क्रिकेट पर बढ़ता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से उन्होंने नियमित T20 क्रिकेट भी नहीं खेला है। आखिरी बार वह 2024 में द हंड्रेड में T20 क्रिकेट खेलते नजर आए थे जहां उन्हें हैमस्ट्रिंग चोट का सामना करना पड़ा था।

    IPL में भी स्टोक्स की मांग काफी ज्यादा रही है। वह तीन अलग-अलग टीमों का हिस्सा रह चुके हैं। 2017 में राइजिंग पुणे सुपरजायंट ने उन्हें 14.5 करोड़ रुपये में खरीदा था और वह उस समय IPL इतिहास के सबसे महंगे विदेशी खिलाड़ी बने थे। इसके बाद 2023 में चेन्नई सुपर किंग्स ने उन्हें 16.25 करोड़ रुपये में अपने साथ जोड़ा। हालांकि चोट के कारण वह उस सीजन केवल दो मैच खेल सके। स्टोक्स के दोनों T20 शतक भी IPL में ही आए हैं।

    ऑस्ट्रेलिया में स्टोक्स की सबसे यादगार T20 पारियों में से एक 2022 T20 वर्ल्ड कप फाइनल की रही जब उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 52 रन बनाकर इंग्लैंड को चैंपियन बनाया था। अब BBL में उनकी वापसी पर सभी की नजरें होंगी। एडिलेड स्ट्राइकर्स को उम्मीद होगी कि स्टोक्स की पूरे सीजन उपलब्धता टीम को खिताब की मजबूत दावेदार बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • शतक से चूके लेकिन गेंदबाजों को खूब धोया: वैभव सूर्यवंशी ने 81 गेंदों में जड़ा 92 रन का तूफान, ईस्ट जोन को मिली शानदार शुरुआत

    शतक से चूके लेकिन गेंदबाजों को खूब धोया: वैभव सूर्यवंशी ने 81 गेंदों में जड़ा 92 रन का तूफान, ईस्ट जोन को मिली शानदार शुरुआत


    नई दिल्ली। दलीप ट्रॉफी के पहले सेमीफाइनल मुकाबले में ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के बीच खेले जा रहे मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर अपने बल्ले की चमक दिखाई। सेंट्रल जोन की टीम को पहली पारी में 266 रनों पर समेटने के बाद बल्लेबाजी करने उतरी ईस्ट जोन को वैभव ने अभिमन्यु ईश्वरन के साथ मिलकर शानदार शुरुआत दिलाई। वैभव ने महज 81 गेंदों में 92 रनों की तूफानी पारी खेलकर सेंट्रल जोन के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। हालांकि वह शतक पूरा करने से सिर्फ 8 रन दूर रह गए लेकिन उनकी पारी ने मुकाबले में ईस्ट जोन की स्थिति मजबूत कर दी।

    मुकाबले के दूसरे दिन ईस्ट जोन की पारी की शुरुआत वैभव सूर्यवंशी और अभिमन्यु ईश्वरन ने की। दोनों बल्लेबाजों ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए पहले विकेट के लिए 153 गेंदों में 162 रनों की शानदार साझेदारी की। वैभव शुरुआत से ही बेहद आक्रामक नजर आए और उन्होंने मैदान के चारों तरफ शॉट लगाए। 81 गेंदों की अपनी पारी में उन्होंने 7 चौके और 7 छक्के जमाए। उनकी बल्लेबाजी में तेजी के साथ आत्मविश्वास भी साफ नजर आया और उन्होंने सेंट्रल जोन के गेंदबाजों को लगातार बैकफुट पर रखा।

    वैभव सूर्यवंशी की पारी का अंत हर्ष दुबे ने किया। बाउंड्री लगाने की कोशिश में वैभव अरशद खान के हाथों कैच आउट हो गए। शतक से चूकने के बावजूद उनकी 92 रनों की पारी ईस्ट जोन के लिए बेहद अहम साबित हुई। वैभव के आउट होने के बाद ईस्ट जोन को एक और झटका लगा जब कुमार कुशाग्र पहली ही गेंद पर पवेलियन लौट गए। इसके बावजूद अभिमन्यु ईश्वरन ने मोर्चा संभाले रखा और अपना अर्धशतक पूरा कर क्रीज पर डटे रहे। उनके साथ सुदीय कुमार पारी को आगे बढ़ाने में जुटे रहे।

    लंच ब्रेक तक ईस्ट जोन ने पहली पारी में 2 विकेट गंवाकर 183 रन बना लिए थे। इस तरह टीम ने सेंट्रल जोन के पहली पारी के स्कोर की ओर मजबूती से कदम बढ़ा दिए। ईस्ट जोन की शुरुआत में वैभव की विस्फोटक पारी की बड़ी भूमिका रही जिसने टीम को तेज रन गति के साथ मजबूत आधार दिया।

    इससे पहले ईस्ट जोन के गेंदबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन किया था। उनकी घातक गेंदबाजी के सामने सेंट्रल जोन की पूरी टीम पहली पारी में 266 रन पर सिमट गई। सेंट्रल जोन की ओर से रिंकू सिंह ने संघर्ष करते हुए 88 गेंदों पर 60 रन बनाए और अर्धशतक पूरा किया। उनके अलावा आर्यन जुयाल ने 46 रनों का योगदान दिया। हालांकि रिंकू को दूसरे छोर से लगातार मजबूत साझेदारी नहीं मिल सकी और टीम बड़ा स्कोर खड़ा करने में सफल नहीं हो पाई।

    ईस्ट जोन की गेंदबाजी में मुकेश कुमार और अभिजीत सरकार सबसे प्रभावी रहे। दोनों गेंदबाजों ने 3-3 विकेट अपने नाम किए। वहीं मोहम्मद शमी और मोहम्मद कौनेन कुरैशी ने 2-2 विकेट लेकर सेंट्रल जोन की पारी को समेटने में अहम भूमिका निभाई। अब मुकाबले में ईस्ट जोन की नजर बड़ी बढ़त हासिल करने पर है और वैभव सूर्यवंशी की 92 रनों की आतिशी पारी ने सेमीफाइनल मुकाबले में रोमांच बढ़ा दिया है।

  • जब सूर्या का क्रिकेट से उठ गया था भरोसा! पत्नी ने याद दिलाई 5 साल की मेहनत, ऐसे लौटा मैदान में जोश

    जब सूर्या का क्रिकेट से उठ गया था भरोसा! पत्नी ने याद दिलाई 5 साल की मेहनत, ऐसे लौटा मैदान में जोश


    नई दिल्ली। सूर्यकुमार यादव की क्रिकेट कहानी में उतार चढ़ाव हमेशा देखने को मिले हैं लेकिन हाल ही में सामने आया उनका एक खुलासा फैन्स को हैरान करने वाला है। भारत को 2026 का टी20 वर्ल्ड कप जिताने वाले सूर्यकुमार यादव एक समय क्रिकेट से संन्यास लेने के बारे में सोचने लगे थे। टीम से बाहर होने और कप्तानी गंवाने के बाद वह इस कदर निराश हो गए थे कि उन्हें अपने क्रिकेट करियर का आगे का रास्ता भी साफ नजर नहीं आ रहा था। हालांकि इस मुश्किल दौर में उनकी पत्नी देविशा शेट्टी ने उनका साथ दिया और उन्हें उनके पुराने जुनून की याद दिलाकर दोबारा मैदान पर लौटने के लिए प्रेरित किया।

    आकाश चोपड़ा को दिए इंटरव्यू में सूर्यकुमार यादव ने बताया कि टीम से बाहर होने के बाद करीब 40 से 50 दिनों तक वह घर पर बिल्कुल खाली बैठे रहे। इस दौरान उनके मन में लगातार यह सवाल चल रहा था कि अब आगे क्या करना है और क्या उन्हें क्रिकेट खेलना भी जारी रखना चाहिए। उनके मुताबिक भविष्य को लेकर तस्वीर पूरी तरह धुंधली हो गई थी। एक ऐसे खिलाड़ी के लिए यह दौर बेहद मुश्किल था जिसने पिछले कुछ वर्षों में भारतीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई थी।

    सूर्यकुमार के लिए स्थिति उस समय और कठिन हो गई जब उन्हें कप्तानी से हटाकर टी20 टीम से भी बाहर कर दिया गया। चयनकर्ताओं ने उनकी जगह श्रेयस अय्यर को टी20 टीम की कप्तानी सौंपी। लगातार बड़े मुकाम हासिल करने के बाद अचानक टीम से बाहर होना सूर्या के लिए बड़ा झटका था। इसी दौरान उनके मन में संन्यास लेने का विचार आया।

    लेकिन इस कठिन समय में पत्नी देविशा उनकी सबसे बड़ी ताकत बनीं। देविशा ने उन्हें पीछे मुड़कर अपने उस दौर को याद करने के लिए कहा जब वह 13 से 15 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर रहे थे। उन्होंने सूर्या से सवाल किया कि आखिर उन्होंने तब बल्ला क्यों उठाया था। देविशा ने उन्हें उनके अंदर मौजूद क्रिकेट के जुनून और खेल के प्रति पागलपन की याद दिलाई।

    उन्होंने सूर्यकुमार को पिछले पांच साल की उनकी उपलब्धियां भी याद दिलाईं। पांच वर्ल्ड कप खेलना, दो बार आईसीसी टी20 प्लेयर ऑफ द ईयर का पुरस्कार जीतना, दुनिया की नंबर एक टी20 रैंकिंग हासिल करना, 2024 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में शानदार कैच लेना और 2026 में कप्तान के तौर पर वर्ल्ड कप ट्रॉफी उठाना उनकी बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। देविशा ने उन्हें समझाया कि जिस मुकाम तक पहुंचने में कई खिलाड़ियों को 20 से 25 साल लग जाते हैं उसे सूर्या ने महज पांच साल में हासिल किया है।

    पत्नी की बातों का सूर्यकुमार पर गहरा असर हुआ और उन्होंने धीरे धीरे क्रिकेट में वापसी की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने दोबारा जिम जाना शुरू किया दोस्तों के साथ समय बिताया और टेनिस तथा रबर बॉल क्रिकेट खेलकर अपने पुराने जुनून को फिर से महसूस किया। सूर्या के मुताबिक पिछले दो तीन हफ्तों में उनके अंदर वह पुराना जोश दोबारा लौट आया है।

    अब सूर्यकुमार के लिए क्रिकेट सिर्फ उनका करियर नहीं बल्कि उनकी बेटी के लिए भी एक प्रेरणा बन गया है। उनका कहना है कि जब वह अपनी बेटी को देखते हैं तो उन्हें महसूस होता है कि अब उन्हें उसके लिए खेलना है। 35 साल के सूर्यकुमार का मानना है कि उनके अंदर क्रिकेट के लिए प्यार फोकस और अनुशासन वापस आ चुका है। वह अपने बचे हुए तीन से चार साल यानी करीब 38 से 39 साल की उम्र तक उसी जुनून और पागलपन के साथ क्रिकेट खेलना चाहते हैं।

  • भारत के सामने श्रीलंका की हालत पस्त! फॉलोऑन खेलते ही ढहा टॉप ऑर्डर, 6 विकेट लेकर जीत की ओर टीम इंडिया

    भारत के सामने श्रीलंका की हालत पस्त! फॉलोऑन खेलते ही ढहा टॉप ऑर्डर, 6 विकेट लेकर जीत की ओर टीम इंडिया


    नई दिल्ली। कोलंबो टेस्ट में भारतीय टीम ने मुकाबले पर अपनी पकड़ बेहद मजबूत कर ली है और अब श्रीलंका की हार लगभग सामने खड़ी नजर आ रही है। सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के चौथे दिन बारिश ने खेल जरूर रोक दिया लेकिन उससे पहले भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंकाई बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। फॉलोऑन खेलने उतरी मेजबान टीम ने दिन का खेल खत्म होने तक दूसरी पारी में 6 विकेट गंवाकर 229 रन बना लिए हैं। श्रीलंका के पास अब भारत के खिलाफ सिर्फ 16 रन की बढ़त है और उसके चार विकेट बाकी हैं। ऐसे में पांचवें दिन भारतीय टीम की कोशिश श्रीलंका की पारी को जल्द से जल्द समेटकर जीत पर मुहर लगाने की होगी।

    इससे पहले भारत ने अपनी पहली पारी 503 रन पर 9 विकेट के नुकसान पर घोषित की थी। टीम इंडिया की शुरुआत बहुत अच्छी नहीं रही थी और 66 रन के भीतर केएल राहुल और यशस्वी जायसवाल के विकेट गिर गए थे। इसके बाद देवदत्त पड्डिकल और कप्तान शुभमन गिल ने पारी को संभाला और तीसरे विकेट के लिए 120 रन की शानदार साझेदारी की। गिल ने 50 रन बनाए जबकि पड्डिकल ने शानदार शतक लगाते हुए 117 रन की पारी खेली। उनकी पारी में 12 चौके शामिल रहे।

    पड्डिकल के बाद रवींद्र जडेजा के साथ उनकी 74 रन की साझेदारी ने भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। इसके बाद ऋषभ पंत ने चोट से उबरकर मैदान पर वापसी की और ध्रुव जुरेल के साथ मिलकर 112 रन जोड़े। पंत ने 63 रन बनाए जबकि जुरेल ने नाबाद 115 रन की शानदार पारी खेलकर भारत को 500 के पार पहुंचाया। जुरेल की पारी में 9 चौके और 2 छक्के शामिल रहे।

    भारत के विशाल स्कोर के जवाब में श्रीलंका की पहली पारी 290 रन पर सिमट गई। पसिंदु सूरियाबंदारा ने 80 रन और सोनल दिनुषा ने 103 रन बनाकर टीम को संभालने की कोशिश की लेकिन श्रीलंका फॉलोऑन बचाने के लिए जरूरी स्कोर से 14 रन दूर रह गया। भारत की ओर से प्रसिद्ध कृष्णा और मानव सुथार ने तीन तीन विकेट चटकाए जबकि सारांश जैन ने दो विकेट हासिल किए। भारत को पहली पारी में 213 रन की बड़ी बढ़त मिली जिसके बाद श्रीलंका को फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    दूसरी पारी में श्रीलंका ने शुरुआत में ही एक विकेट गंवा दिया लेकिन इसके बाद पसिंदु सूरियाबंदारा ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने कामिल मिशारा और कामिंदु मेंडिस के साथ महत्वपूर्ण साझेदारियां कीं। कामिंदु ने 55 रन बनाए जबकि पसिंदु 92 रन बनाकर आउट हुए। कप्तान धनंजय डी सिल्वा ने 23 रन जोड़े। हालांकि भारतीय गेंदबाज लगातार दबाव बनाए रहे और दूसरी पारी में भी श्रीलंका के छह विकेट गिर चुके हैं।

    अब मुकाबले का आखिरी दिन बेहद रोमांचक होने वाला है। श्रीलंका के पास केवल 16 रन की बढ़त है और चार विकेट शेष हैं। अगर भारतीय गेंदबाज शुरुआती सत्र में इन विकेटों को हासिल कर लेते हैं तो टीम इंडिया के सामने जीत के लिए बेहद छोटा लक्ष्य होगा। बारिश के कारण चौथे दिन खेल समय से पहले खत्म होने के बाद अब सभी की निगाहें पांचवें दिन पर टिकी हैं। भारत के पास जीत का सुनहरा मौका है और श्रीलंका के लिए अब मैच बचाना सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।

  • ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर डेविड वॉर्नर को सजा, कोर्ट ने लगाया जुर्माना; कार में इंटरलॉक डिवाइस लगाना होगा

    ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर डेविड वॉर्नर को सजा, कोर्ट ने लगाया जुर्माना; कार में इंटरलॉक डिवाइस लगाना होगा


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज डेविड वॉर्नर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामले में सिडनी की अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया है। अदालत ने वॉर्नर पर 1500 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही अब उन्हें दोबारा वाहन चलाने के लिए इंटरलॉक डिवाइस से जुड़ी शर्तों का पालन करना होगा। इस मामले में अदालत ने यह भी माना कि घटना के समय वाहन में बच्चे मौजूद थे इसलिए मामला और गंभीर हो गया था।

    यह पूरा मामला 5 अप्रैल 2026 का है। ईस्टर संडे के दिन डेविड वॉर्नर एक वाहन चला रहे थे और सिडनी में रैंडम ब्रेथ-टेस्टिंग साइट के पास पहुंचने से पहले उन्होंने गाड़ी रोक दी थी। इसी दौरान पुलिस की नजर उन पर गई। जांच में उनके शरीर में अल्कोहल की मात्रा कानूनी सीमा से दोगुने से भी ज्यादा पाई गई। इसके बाद उन पर मिड-रेंज ड्रिंक-ड्राइविंग का आरोप लगाया गया।

    मामले की सुनवाई के दौरान वॉर्नर ने पिछले महीने अदालत में ड्रिंक-ड्राइविंग के आरोप को स्वीकार कर लिया था। इसके बाद अदालत ने अंतिम सजा के लिए 18 अगस्त की तारीख तय की थी। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने घटना से जुड़े कई पहलू रखे गए और अंत में जज क्लेयर फॉर्नन ने वॉर्नर को दोषी मानते हुए जुर्माने की सजा सुनाई।

    इस मामले में एक अहम बात यह भी सामने आई कि रैंडम ब्रेथ टेस्टिंग साइट के पास पहुंचने से पहले वॉर्नर ने कथित तौर पर वाहन में मौजूद एक यात्री के साथ सीट बदलने की कोशिश की थी। पुलिस जांच के बाद उन पर शराब पीकर गाड़ी चलाने का मामला दर्ज किया गया। अदालत ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और खास तौर पर इस बात को ध्यान में रखा कि घटना के समय कार में बच्चे भी मौजूद थे।

    वॉर्नर के वकील अवैस अहमद ने अदालत में उनका पक्ष रखते हुए कहा कि इस मामले की मीडिया कवरेज के कारण वॉर्नर को पहले ही काफी सार्वजनिक दबाव और नुकसान का सामना करना पड़ा है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि इस घटना का असर उनके पेशेवर जीवन और भविष्य के व्यावसायिक अवसरों पर पड़ सकता है। वॉर्नर अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं लेकिन दुनिया भर की टी20 फ्रेंचाइजी लीग में खेलने के अवसर उनके करियर का हिस्सा रहे हैं।

    हालांकि अदालत ने मीडिया कवरेज और सोशल मीडिया टिप्पणियों को ध्यान में रखा लेकिन जज ने साफ किया कि सजा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य लोगों को शराब पीकर गाड़ी चलाने से रोकना है। अदालत के मुताबिक यह केवल किसी एक व्यक्ति की गलती का मामला नहीं है बल्कि सड़क सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। कार में बच्चों की मौजूदगी ने इस मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया।

    अब वॉर्नर को वाहन चलाने के लिए इंटरलॉक लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए उनकी कार में एक इंटरलॉक डिवाइस लगाया जाएगा। यह डिवाइस वाहन को तब तक स्टार्ट होने से रोक सकता है जब तक चालक की सांस की जांच में अल्कोहल की मौजूदगी निर्धारित सीमा के भीतर न हो। अदालत की शर्तों के अनुसार वॉर्नर को इस व्यवस्था का पालन करने के बाद ही वाहन चलाने की अनुमति होगी।

    डेविड वॉर्नर ऑस्ट्रेलिया के सबसे चर्चित क्रिकेटरों में शामिल रहे हैं। टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक टीम के प्रमुख सलामी बल्लेबाज रहे वॉर्नर ने अपने आक्रामक अंदाज से दुनियाभर में पहचान बनाई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद भी वह टी20 क्रिकेट और फ्रेंचाइजी लीग से जुड़े रहे हैं। ऐसे में अदालत का यह फैसला उनके व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ भविष्य के पेशेवर अवसरों पर भी असर डाल सकता है।

    इस मामले ने एक बार फिर शराब पीकर वाहन चलाने के खतरों को लेकर बहस छेड़ दी है। अदालत ने अपने फैसले के जरिए यह संदेश भी दिया कि सड़क सुरक्षा के नियम किसी भी व्यक्ति की लोकप्रियता या सार्वजनिक पहचान से अलग हैं। वॉर्नर के लिए अब आगे की राह अदालत द्वारा तय शर्तों का पालन करने और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने की होगी।

  • एक कैच छूटा और बदल गया पूरा मैच! डिकवेला-दिनुषा ने श्रीलंका को संकट से निकाला, भारत के सामने नई चुनौती

    एक कैच छूटा और बदल गया पूरा मैच! डिकवेला-दिनुषा ने श्रीलंका को संकट से निकाला, भारत के सामने नई चुनौती


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच गॉल में खेले जा रहे टेस्ट मुकाबले में तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक टीम इंडिया मजबूत स्थिति में जरूर नजर आई लेकिन मैदान पर हुई एक छोटी सी गलती ने मैच का समीकरण काफी हद तक बदल दिया। भारतीय टीम के पास श्रीलंका को 200 रन के भीतर समेटकर फॉलोऑन देने का शानदार मौका था। श्रीलंका ने एक समय केवल 90 रन पर अपने पांच विकेट गंवा दिए थे और ऐसा लग रहा था कि भारतीय गेंदबाज जल्द ही पूरी पारी समेट देंगे। लेकिन इसके बाद एक कैच छूटना मेजबान टीम के लिए बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।

    श्रीलंका की पारी के 36वें ओवर में मानव सुथार ने निरोशन डिकवेला को अपनी गेंद से परेशान किया। फ्लाइटेड गेंद पर डिकवेला के बल्ले का बाहरी किनारा लगा और गेंद स्लिप में खड़े केएल राहुल की तरफ तेजी से गई। राहुल ने दाईं ओर डाइव लगाकर कैच पकड़ने की कोशिश की लेकिन गेंद उनके हाथों से निकल गई। उस समय डिकवेला केवल 20 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे। भारतीय टीम के लिए यह मौका बेहद अहम था क्योंकि श्रीलंका पहले ही दबाव में थी और एक और विकेट गिरने से उसकी पारी जल्दी खत्म हो सकती थी।

    लेकिन कैच छूटने के बाद डिकवेला ने भारतीय गेंदबाजों को जमकर परेशान किया। उन्होंने सोनल दिनुषा के साथ मिलकर श्रीलंका की पारी को संभाल लिया। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 146 रनों की बड़ी साझेदारी की। डिकवेला ने मिले जीवनदान का पूरा फायदा उठाया और 115 गेंदों पर 80 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। वहीं सोनल दिनुषा ने करीब साढ़े चार घंटे तक क्रीज पर टिककर शानदार शतक जमाया और भारतीय गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट के लिए तरसाया।

    इस साझेदारी ने मैच का पूरा माहौल बदल दिया। जिस श्रीलंकाई टीम के पांच विकेट सिर्फ 90 रन पर गिर चुके थे वह देखते ही देखते 284 रन तक पहुंच गई। भारत को फॉलोऑन देने के लिए श्रीलंका को 263 रन के आंकड़े तक पहुंचने से रोकना जरूरी था लेकिन डिकवेला और दिनुषा की साझेदारी ने भारतीय टीम की यह उम्मीद खत्म कर दी। श्रीलंका ने 284 रन बनाकर खुद को फॉलोऑन की स्थिति से बाहर निकाल लिया।

    भारतीय गेंदबाजों की बात करें तो मानव सुथार ने शानदार गेंदबाजी करते हुए चार विकेट हासिल किए। रवींद्र जडेजा ने तीन बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा जबकि प्रसिद्ध कृष्णा मोहम्मद सिराज और कुलदीप यादव को एक एक सफलता मिली। भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका के शीर्ष क्रम को लगातार दबाव में रखा लेकिन निचले क्रम में डिकवेला और दिनुषा की साझेदारी ने टीम इंडिया की मेहनत पर पानी फेर दिया।

    श्रीलंका की पहली पारी समाप्त होने के बाद बारिश ने भी खेल में खलल डाला। बारिश शुरू होने के कारण अंपायरों ने समय से पहले तीसरे दिन के खेल को समाप्त करने का फैसला किया। हालांकि भारत के पास अब भी 178 रनों की बढ़त मौजूद है और चौथे दिन टीम इंडिया अपनी दूसरी पारी में इसी बढ़त के साथ आगे बढ़ेगी। भारत के पास मैच पर पकड़ मजबूत करने का मौका अभी भी है लेकिन श्रीलंका को फॉलोऑन से बचने का मौका देने के बाद मुकाबला पहले की तुलना में थोड़ा अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।

    इस मुकाबले में केएल राहुल के कैच को लेकर भी चर्चा तेज है। अगर डिकवेला का वह कैच पकड़ लिया जाता तो श्रीलंका का स्कोर और पारी का नतीजा पूरी तरह अलग हो सकता था। हालांकि क्रिकेट में एक कैच से मैच खत्म नहीं होता और भारत के पास अभी बढ़त मौजूद है लेकिन टेस्ट क्रिकेट में ऐसे छोटे मौके अक्सर बड़े अंतर में बदल जाते हैं। अब टीम इंडिया की नजर चौथे दिन बल्लेबाजी पर होगी जहां वह बड़ी बढ़त हासिल कर श्रीलंका के सामने मजबूत लक्ष्य रखने की कोशिश करेगी।

    भारतीय टीम के नए फील्डिंग कोच सुभदीप घोष के लिए भी यह दौरा चुनौतीपूर्ण है। टीम इंडिया को आगे ऐसे मौकों को भुनाने पर ध्यान देना होगा क्योंकि लंबे टेस्ट मैचों में एक कैच या एक साझेदारी कई बार पूरे मुकाबले की दिशा बदल देती है। गॉल टेस्ट में अब भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि तीसरे दिन की चूक से सबक लेते हुए चौथे दिन मैच पर अपनी पकड़ और मजबूत की जाए।

  • देर रात ऋषभ पंत ने CM पुष्कर धामी को किया मैसेज, बोले- ‘भटक रहा हूं…’ रखी बड़ी डिमांड

    देर रात ऋषभ पंत ने CM पुष्कर धामी को किया मैसेज, बोले- ‘भटक रहा हूं…’ रखी बड़ी डिमांड


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत इन दिनों श्रीलंका दौरे पर हैं लेकिन इसी बीच उनका एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बन गया है। पंत ने देर रात उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग करते हुए अपने लिए जमीन खरीदने में मदद की अपील की। क्रिकेटर ने बताया कि वह लंबे समय से उत्तराखंड में अपना घर बनाने और दिल्ली से अपना बेस अपने गृह राज्य में शिफ्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि जमीन की तलाश में उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पंत के मुताबिक वह करीब तीन साल से जमीन का इंतजार कर रहे हैं और अब उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में मदद करने का अनुरोध किया है।

    ऋषभ पंत ने शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात करीब 12 बजकर 46 मिनट पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग करते हुए पोस्ट किया। उन्होंने अपने संदेश में उत्तराखंड के प्रति अपने लगाव का जिक्र किया और कहा कि वह अपने राज्य में वापस लौटना चाहते हैं। पंत ने बताया कि वह उत्तराखंड में ऐसी जगह तलाश रहे हैं जहां सुविधाओं के साथ अपना घर बनाया जा सके और अपना बेस दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट किया जा सके। लेकिन जमीन खरीदने की प्रक्रिया उनके लिए आसान नहीं रही है।

    पंत ने मुख्यमंत्री से जमीन खरीदने की प्रक्रिया को स्पष्ट कराने और इसमें मदद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह उत्तराखंड से जुड़े हुए हैं और अपने पहाड़ी लोगों के बीच वापस लौटना चाहते हैं। क्रिकेटर ने यह भी इच्छा जताई कि वह अपने राज्य के विकास और निर्माण में योगदान देना चाहते हैं। इसी वजह से वह उत्तराखंड में स्थायी रूप से अपना घर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।

    ऋषभ पंत ने अपनी अपील में जमीन को लेकर एक विकल्प भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उन्हें जमीन उपलब्ध कराने की अनुमति देती है तो वह उसे निर्धारित सरकारी दर पर खरीदने के लिए तैयार हैं। पंत के लिए यह केवल जमीन खरीदने का मामला नहीं है बल्कि उत्तराखंड में अपना पहला घर बनाने से जुड़ा सपना है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले पर गंभीरता से ध्यान देने और उन्हें सही प्रक्रिया बताने की अपील की।

    पंत का उत्तराखंड से पुराना और गहरा जुड़ाव रहा है। उनका परिवार राज्य से जुड़ा हुआ है और वह कई मौकों पर उत्तराखंड के प्रति अपना लगाव जाहिर कर चुके हैं। अब उन्होंने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री से मदद मांगकर यह साफ कर दिया है कि वह अपने गृह राज्य में वापस लौटकर यहां अपना स्थायी ठिकाना बनाना चाहते हैं।

    पंत की अपील पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने क्रिकेटर को उत्तराखंड का गौरव बताते हुए कहा कि पंत ने अपने शानदार खेल और उपलब्धियों से देश और दुनिया में देवभूमि का नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री ने उनकी मातृभूमि के प्रति प्रेम और उत्तराखंड लौटकर योगदान देने की भावना की सराहना की और जरूरी सहयोग का भरोसा दिया।

    ऋषभ पंत इस समय भारतीय टेस्ट टीम के साथ श्रीलंका दौरे पर हैं और टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया के अहम खिलाड़ियों में शामिल हैं। अब उनकी जमीन से जुड़ी अपील के बाद निगाहें उत्तराखंड सरकार की अगली कार्रवाई पर हैं। अगर सरकारी स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो पंत का अपने पहाड़ में पहला घर बनाने का सपना जल्द पूरा हो सकता है।

  • WTC फाइनल की रेस में भारत की अग्निपरीक्षा, अब हर मैच जीतना जरूरी; एक गलती बिगाड़ देगी पूरा गणित

    WTC फाइनल की रेस में भारत की अग्निपरीक्षा, अब हर मैच जीतना जरूरी; एक गलती बिगाड़ देगी पूरा गणित


    नई दिल्ली। वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2025-27 में भारतीय क्रिकेट टीम की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। शुरुआती मुकाबलों के बाद टीम इंडिया अंक प्रतिशत के मामले में पांचवें स्थान पर पहुंच गई है और अब उसके सामने फाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए बेहद कठिन चुनौती है। भारत ने अब तक 9 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें उसे 4 मुकाबलों में जीत मिली है और उसका पॉइंट्स परसेंटेज यानी पीसीटी 48.15 है। मौजूदा स्थिति में भारत बांग्लादेश से भी पीछे है। ऐसे में अब टीम इंडिया के लिए WTC का हर मुकाबला लगभग करो या मरो जैसा हो गया है।

    भारतीय टीम के पास इस चक्र में अभी 9 टेस्ट मैच बाकी हैं। अगर टीम अपने सभी बचे हुए मुकाबले जीतने में सफल रहती है तो उसका पीसीटी करीब 74.07 तक पहुंच सकता है। यह आंकड़ा उसे फाइनल की दौड़ में बेहद मजबूत स्थिति में पहुंचा सकता है। लेकिन समस्या यह है कि आने वाले सभी मुकाबले आसान नहीं होने वाले हैं। भारत को पहले श्रीलंका का दौरा करना है जहां दो टेस्ट मैच खेले जाएंगे। श्रीलंका की परिस्थितियों में स्पिन गेंदबाजी हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है और गॉल की पिच पर भारतीय बल्लेबाजों की परीक्षा होना तय माना जा रहा है।

    श्रीलंका के बाद भारतीय टीम न्यूजीलैंड का दौरा करेगी। वहां उसे दो टेस्ट मैच खेलने हैं। न्यूजीलैंड की परिस्थितियां भी भारतीय टीम के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। तेज गेंदबाजी के अनुकूल परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाजों को नई गेंद का सामना करना होगा। इसके बाद भारत में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जाएगी। ऑस्ट्रेलिया मौजूदा WTC चक्र में मजबूत टीमों में शामिल है और उसके खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज भारत के लिए सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है।

    भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा यह है कि अब एक भी हार उसके अंक प्रतिशत को काफी नीचे ला सकती है। अगर टीम अपने बचे हुए नौ मैचों में से एक मुकाबला हार जाती है तो उसका पीसीटी करीब 68.5 तक गिर सकता है। दो हार होने पर यह आंकड़ा करीब 62.9 और तीन हार की स्थिति में लगभग 57.41 तक पहुंच सकता है। ऐसे में सिर्फ एक मुकाबले का नतीजा भी फाइनल की रेस में भारत की स्थिति को काफी प्रभावित कर सकता है।

    मौजूदा अंक तालिका पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलिया 87.50 पीसीटी के साथ शीर्ष पर है। दक्षिण अफ्रीका 75 पीसीटी के साथ दूसरे जबकि न्यूजीलैंड 72.22 के साथ तीसरे स्थान पर है। बांग्लादेश 58.33 पीसीटी के साथ भारत से आगे है। इसका मतलब साफ है कि भारत को अपने बचे हुए मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करने के साथ साथ दूसरी टीमों के नतीजों पर भी नजर रखनी होगी। अगर शीर्ष टीमों में से कोई लगातार अंक गंवाती है तो भारत को उसका फायदा मिल सकता है।

    WTC में जीत के लिए 12 अंक मिलते हैं जबकि ड्रॉ होने पर दोनों टीमों को 4-4 अंक दिए जाते हैं और हारने वाली टीम को कोई अंक नहीं मिलता। अंक प्रतिशत की यही व्यवस्था टीमों की अंतिम स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए भारत के लिए अब ड्रॉ भी उतना फायदेमंद नहीं होगा जितनी लगातार जीत होगी।

    शुभमन गिल की अगुआई वाली भारतीय टीम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती जीत की लय कायम रखने की है। श्रीलंका में दो टेस्ट से लेकर न्यूजीलैंड और फिर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मुकाबलों तक टीम को लगातार दबाव में खेलना होगा। भारतीय बल्लेबाजों को स्पिन और तेज गेंदबाजी दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार रहना होगा जबकि गेंदबाजों को भी हर मैच में निर्णायक प्रदर्शन करना होगा।

    कुल मिलाकर WTC 2025-27 में भारत के लिए तस्वीर बिल्कुल साफ है। फाइनल में पहुंचने का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है लेकिन गलती की गुंजाइश बेहद कम बची है। भारत अगर अपने बचे हुए नौ टेस्ट में लगातार जीत दर्ज करता है तो फाइनल की उम्मीद मजबूत रहेगी लेकिन हार की संख्या बढ़ते ही समीकरण मुश्किल होता जाएगा। अब टीम इंडिया के सामने हर टेस्ट सिर्फ एक मुकाबला नहीं बल्कि WTC फाइनल की ओर बढ़ने का एक बड़ा कदम होगा।

  • स्पिन की तैयारी करने पहुंची टीम इंडिया के सामने बिछी घास वाली पिच, श्रीलंका में अभ्यास मैच से पहले खड़ा हुआ विवाद

    स्पिन की तैयारी करने पहुंची टीम इंडिया के सामने बिछी घास वाली पिच, श्रीलंका में अभ्यास मैच से पहले खड़ा हुआ विवाद


    नई दिल्ली। श्रीलंका दौरे पर पहुंची भारतीय क्रिकेट टीम के लिए दो मैचों की टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले ही एक नया विवाद सामने आ गया है। भारत को 7 अगस्त से कोलंबो के नॉनडिस्क्रिप्ट क्रिकेट क्लब यानी एनसीसी मैदान पर तीन दिवसीय अभ्यास मैच खेलना है लेकिन मुकाबले से पहले तैयार की गई पिच को देखकर भारतीय टीम मैनेजमेंट पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया। टीम इंडिया को उम्मीद थी कि अभ्यास मैच के लिए ऐसी विकेट तैयार की जाएगी जो श्रीलंका की पारंपरिक स्पिन परिस्थितियों जैसी हो ताकि बल्लेबाजों और स्पिन गेंदबाजों को टेस्ट सीरीज से पहले बेहतर तैयारी का मौका मिल सके लेकिन मैदान पर घास वाली विकेट देखकर टीम की चिंता बढ़ गई। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक भारतीय टीम ने पिच पर मौजूद घास को लेकर सवाल उठाए हैं। एनसीसी से जुड़े अधिकारी ने भी बताया कि पिच पर घास रखने का फैसला श्रीलंका क्रिकेट के निर्देश के बाद किया गया है।

    दरअसल भारत और श्रीलंका के बीच पहला टेस्ट मुकाबला 15 अगस्त से गॉल में खेला जाना है। गॉल की परिस्थितियां आमतौर पर स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती हैं। ऐसे में भारतीय टीम चाहती थी कि अभ्यास मैच में भी उसे ऐसी ही परिस्थितियों का अनुभव मिले ताकि बल्लेबाज श्रीलंकाई स्पिनरों का सामना करने से पहले अपनी कमियों को सुधार सकें। खासतौर पर भारतीय बल्लेबाजों के स्पिन के खिलाफ प्रदर्शन को देखते हुए यह अभ्यास मैच टीम के लिए काफी अहम माना जा रहा है। लेकिन एनसीसी की पिच पर छोड़ी गई घास ने टीम इंडिया की योजना को कुछ हद तक बदल दिया है।

    घास वाली पिच का फायदा शुरुआती दौर में तेज गेंदबाजों को मिल सकता है। गेंद नई होने पर सतह से अतिरिक्त सीम और मूवमेंट मिलने की संभावना रहती है जिससे बल्लेबाजों के लिए शुरुआती समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। दूसरी तरफ स्पिन गेंदबाजों को इस विकेट से तुरंत वैसी मदद मिलने की उम्मीद कम है जैसी भारतीय टीम चाहती थी। हालांकि एनसीसी प्रबंधन का कहना है कि मुकाबले के आगे बढ़ने के साथ पिच का मिजाज बदल सकता है और तीसरे दिन स्पिनरों को कुछ सहायता मिलने की संभावना है। क्लब का यह भी मानना है कि पिच पर बल्लेबाजों को रन बनाने का अच्छा मौका मिल सकता है।

    एनसीसी मैदान श्रीलंका के पुराने क्रिकेट क्लबों में शामिल है और भारतीय टीम यहां टेस्ट सीरीज से पहले अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने की कोशिश करेगी। पहले यह अभ्यास मुकाबला चार दिन का प्रस्तावित था लेकिन बाद में इसे घटाकर तीन दिन कर दिया गया। ऐसे में भारतीय टीम के पास परिस्थितियों को समझने और खिलाड़ियों को पर्याप्त मैच अभ्यास देने के लिए सीमित समय है। यही वजह है कि अभ्यास मैच की पिच को लेकर उठे सवालों ने टीम मैनेजमेंट की चिंता बढ़ा दी है।

    भारत के लिए यह टेस्ट सीरीज कई मायनों में महत्वपूर्ण है। टीम को श्रीलंका की परिस्थितियों में खुद को ढालने के साथ साथ स्पिन और तेज गेंदबाजी दोनों के खिलाफ अपनी रणनीति को मजबूत करना होगा। वहीं श्रीलंका भी घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर भारतीय टीम को कड़ी चुनौती देने की कोशिश करेगा। अभ्यास मैच में कैसी पिच मिलती है और भारतीय खिलाड़ी उस पर किस तरह प्रदर्शन करते हैं इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

    हालांकि पिच को लेकर उठे विवाद के बावजूद टीम इंडिया के पास परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने का मौका है। घास वाली विकेट भारतीय बल्लेबाजों और गेंदबाजों के लिए एक अलग तरह की परीक्षा साबित हो सकती है। अगर भारतीय खिलाड़ी इस चुनौती का फायदा उठाते हैं तो गॉल टेस्ट से पहले उन्हें जरूरी आत्मविश्वास मिल सकता है। अब देखना यही होगा कि अभ्यास मैच में घास वाली पिच टीम इंडिया के लिए परेशानी बनती है या टेस्ट सीरीज की तैयारी का एक उपयोगी हिस्सा साबित होती है।

  • टी20 क्रिकेट में बटलर का नया कीर्तिमान, वैभव सूर्यवंशी की जमकर तारीफ; बोले- कई रिकॉर्ड तोड़ेगा

    टी20 क्रिकेट में बटलर का नया कीर्तिमान, वैभव सूर्यवंशी की जमकर तारीफ; बोले- कई रिकॉर्ड तोड़ेगा


    नई दिल्ली। टी20 क्रिकेट में नया इतिहास रचने वाले इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज जोस बटलर ने भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी को लेकर ऐसी भविष्यवाणी की है जिसने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बनने के बाद बटलर ने कहा कि भविष्य में यदि कोई खिलाड़ी उनका रिकॉर्ड तोड़ सकता है तो वह 15 वर्षीय भारतीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी हैं। बटलर का यह बयान युवा भारतीय खिलाड़ी की प्रतिभा और उसके उज्ज्वल भविष्य पर बड़ी मुहर माना जा रहा है।

    द हंड्रेड टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए जोस बटलर ने टी20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। उन्होंने इस उपलब्धि के साथ कीरोन पोलार्ड को पीछे छोड़ दिया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद स्टार स्पोर्ट्स से बातचीत में बटलर ने कहा कि सबसे ज्यादा टी20 रन बनाने वाला खिलाड़ी कहलाना उनके लिए बेहद खास एहसास है लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि एक दिन यह रिकॉर्ड कोई और खिलाड़ी तोड़ेगा और संभवतः वह खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी होंगे।

    बटलर ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह सोचना बेहद रोमांचक है कि उन्होंने टी20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाए हैं लेकिन रिकॉर्ड हमेशा टूटने के लिए ही बनते हैं। उनके अनुसार वैभव सूर्यवंशी में इतनी क्षमता है कि वह भविष्य में इस उपलब्धि को अपने नाम कर सकते हैं। दुनिया के दिग्गज बल्लेबाज से मिली यह तारीफ युवा भारतीय बल्लेबाज के लिए किसी बड़े सम्मान से कम नहीं मानी जा रही।

    वैभव सूर्यवंशी ने पिछले एक वर्ष में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों को लगातार प्रभावित किया है। कम उम्र में ही उन्होंने अपनी विस्फोटक शैली से अलग पहचान बनाई है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में पदार्पण करने वाले खिलाड़ियों में शामिल वैभव ने अपने शुरुआती मुकाबलों में ही शानदार प्रदर्शन कर यह साबित कर दिया कि उनमें बड़े मंच पर खेलने का आत्मविश्वास और क्षमता दोनों मौजूद हैं।

    हाल के मुकाबलों में वैभव ने तेज गति से रन बनाकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 श्रृंखला में बेहद कम गेंदों में अर्धशतक जड़कर सबका ध्यान खींचा था। इसके अलावा एक अन्य मुकाबले में उन्होंने दमदार पारी खेलते हुए शानदार स्कोर बनाया और टीम की जीत में अहम योगदान दिया। उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता और आत्मविश्वास दोनों साफ दिखाई देते हैं।

    घरेलू टी20 लीग में भी वैभव का प्रदर्शन लगातार चर्चा का विषय बना रहा। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए सबसे ज्यादा रन बनाए और कई यादगार पारियां खेलीं। उनकी तेज रन बनाने की क्षमता और लंबे शॉट लगाने की कला ने उन्हें भारतीय क्रिकेट का नया सितारा बना दिया है।

    दूसरी ओर जोस बटलर भी इस समय शानदार फॉर्म में हैं। रिकॉर्ड बनाने वाले मुकाबले में उन्होंने केवल 20 गेंदों में 51 रन की तूफानी पारी खेली जिसमें दो चौके और छह शानदार छक्के शामिल रहे। इस पारी के साथ उन्होंने टी20 क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज का स्थान हासिल किया। बटलर के नाम अब 14833 टी20 रन दर्ज हैं जबकि कीरोन पोलार्ड 14803 रन के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इस सूची में वेस्टइंडीज के दिग्गज क्रिस गेल तीसरे स्थान पर मौजूद हैं।

    बटलर की यह भविष्यवाणी भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए उत्साह बढ़ाने वाली है। यदि वैभव सूर्यवंशी अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखते हैं तो आने वाले वर्षों में वह न केवल भारतीय क्रिकेट बल्कि विश्व क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में अपनी जगह बना सकते हैं।