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  • WTC अंकतालिका में न्यूजीलैंड का दबदबा, ऑस्ट्रेलिया टॉप-2 से बाहर, भारत के सामने फाइनल में पहुंचने की बड़ी चुनौती..

    WTC अंकतालिका में न्यूजीलैंड का दबदबा, ऑस्ट्रेलिया टॉप-2 से बाहर, भारत के सामने फाइनल में पहुंचने की बड़ी चुनौती..


    नई दिल्ली ।
    वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) 2025-27 की अंकतालिका में साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज के नतीजे के बाद बड़ा बदलाव देखने को मिला है। साउथ अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया को घरेलू टेस्ट सीरीज में 2-1 से हराकर अंकतालिका का समीकरण बदल दिया है। इस परिणाम का सीधा फायदा न्यूजीलैंड को मिला है, जिसने ऑस्ट्रेलिया को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया है। वहीं, साउथ अफ्रीका दूसरे और ऑस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। भारतीय टीम भी चौथे स्थान पर बनी हुई है।

    ताजा स्थिति के अनुसार, न्यूजीलैंड का अंक प्रतिशत 72.22 है, जबकि साउथ अफ्रीका 71.43 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया का अंक प्रतिशत 69.23 है। भारत 51.52 प्रतिशत के साथ चौथे नंबर पर है। बांग्लादेश 47.62 प्रतिशत के साथ पांचवें स्थान पर मौजूद है। इसके बाद इंग्लैंड 38.54 प्रतिशत, श्रीलंका 33.33 प्रतिशत और वेस्टइंडीज 26.92 प्रतिशत के साथ क्रमशः छठे, सातवें और आठवें स्थान पर हैं। पाकिस्तान 4.63 प्रतिशत के साथ नौवें नंबर पर है।

    मौजूदा चक्र में अभी 10 टेस्ट सीरीज खेली जानी बाकी हैं। किसी भी टीम ने फाइनल में अपनी जगह पक्की नहीं की है। अंकतालिका में टीमों की स्थिति का फैसला उनके अंक प्रतिशत के आधार पर होता है। टेस्ट मैच जीतने पर टीम को 12 अंक मिलते हैं, जबकि मुकाबला ड्रॉ होने पर चार अंक दिए जाते हैं। वहीं, टाई होने की स्थिति में दोनों टीमों को छह-छह अंक मिलते हैं। इसी व्यवस्था के आधार पर फाइनल में पहुंचने वाली शीर्ष दो टीमों का चयन किया जाएगा।

    न्यूजीलैंड के पास अपनी स्थिति मजबूत करने का अच्छा अवसर है। उसे भारत और श्रीलंका के खिलाफ घरेलू मैदान पर दो-दो टेस्ट खेलने हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर चार और पाकिस्तान के खिलाफ दो टेस्ट मुकाबले खेलने हैं। इस तरह कीवी टीम के सामने अभी आठ टेस्ट मैच बाकी हैं। मौजूदा समीकरण के अनुसार, इन मुकाबलों में सात जीत दर्ज करना उसे शीर्ष दो में जगह बनाने की दौड़ में मजबूत स्थिति में पहुंचा सकता है।

    दूसरी ओर, साउथ अफ्रीका के सात टेस्ट मुकाबले बाकी हैं। इनमें पांच मैच घरेलू मैदान पर खेले जाएंगे। टीम को बांग्लादेश के खिलाफ दो और इंग्लैंड के खिलाफ तीन टेस्ट खेलने हैं, जबकि श्रीलंका के दौरे पर भी दो मुकाबले खेलने हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली सीरीज जीत से टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब बाकी मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन उसे फाइनल की दौड़ में बनाए रख सकता है।

    ऑस्ट्रेलिया के लिए भी आगे की राह महत्वपूर्ण होगी। साउथ अफ्रीका दौरे से पहले अंकतालिका में शीर्ष पर रही कंगारू टीम अब तीसरे स्थान पर है। उसके नौ टेस्ट मुकाबले बाकी हैं। इनमें न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू मैदान पर चार और भारत के खिलाफ भारतीय जमीन पर पांच टेस्ट शामिल हैं। इन मुकाबलों के परिणाम से उसकी फाइनल की संभावनाएं तय होंगी।

    भारतीय टीम के सामने भी फाइनल तक पहुंचने के लिए कड़ी चुनौती है। उसे न्यूजीलैंड में दो टेस्ट खेलने हैं, जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने घरेलू मैदान पर पांच मुकाबलों की सीरीज खेलनी है। भारत यदि अपने बाकी सभी सात टेस्ट जीत लेता है तो उसका अंक प्रतिशत 70.37 तक पहुंच सकता है। छह जीत की स्थिति में यह 65 प्रतिशत रहेगा। वहीं, पांच जीत और एक ड्रॉ मिलने पर टीम को अन्य मुकाबलों के परिणामों पर भी निर्भर रहना पड़ सकता है। यदि भारत न्यूजीलैंड में 0-2 से सीरीज हार जाता है और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांचों टेस्ट जीत भी लेता है, तब उसका अंक प्रतिशत 59.26 ही रहेगा।

    बांग्लादेश के पांच और श्रीलंका के छह टेस्ट मुकाबले बाकी हैं। बांग्लादेश की एक और हार उसकी फाइनल की संभावनाओं को कमजोर कर सकती है। वहीं, श्रीलंका यदि अपने सभी छह मुकाबले जीतता है तो उसका अंक प्रतिशत 66.67 तक पहुंच सकता है। ऐसे में WTC फाइनल की दौड़ अभी खुली हुई है और आने वाली टेस्ट सीरीज अंकतालिका की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती हैं।

  • न्यूजीलैंड ने चौथे टी20 में भारत को 87 रन से हराया, फिलिप्स का शतक और डफी की घातक गेंदबाजी

    न्यूजीलैंड ने चौथे टी20 में भारत को 87 रन से हराया, फिलिप्स का शतक और डफी की घातक गेंदबाजी

    नई दिल्ली ।न्यूजीलैंड ने चौथे टी20 मुकाबले में भारतीय टीम को 87 रन से हराकर सीरीज में पहली जीत दर्ज की। ऑकलैंड के ईडन पार्क स्टेडियम में खेले गए मैच में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 259 रन बनाए। इसके जवाब में भारतीय टीम निर्धारित 20 ओवर में 9 विकेट गंवाकर 172 रन ही बना सकी। इस जीत के साथ न्यूजीलैंड ने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में भारत के खिलाफ अपनी सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड भी बना दिया।

    इससे पहले न्यूजीलैंड ने 2019 में वेलिंग्टन में खेले गए टी20 मुकाबले में भारत को 80 रन से हराया था। चौथे मैच में 87 रन की जीत ने उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। हालांकि, इस मुकाबले के नतीजे से सीरीज में भारतीय टीम की स्थिति पर असर नहीं पड़ा, क्योंकि इससे पहले खेले गए तीनों मैचों में भारत ने जीत हासिल की थी और सीरीज अपने नाम कर ली थी।

    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम ने आक्रामक अंदाज में रन बनाए। टीम ने टी20 इंटरनेशनल में अपना अब तक का सबसे बड़ा स्कोर खड़ा किया। ग्लेन फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 49 गेंदों पर 107 रन बनाए। उनकी पारी ने न्यूजीलैंड को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। फिलिप्स ने भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा और तेजी से रन जुटाए।

    माइकल ब्रेसवेल ने भी विस्फोटक बल्लेबाजी की। उन्होंने केवल 25 गेंदों पर 65 रन बनाकर न्यूजीलैंड की पारी को मजबूती दी। दोनों बल्लेबाजों की पारियों की बदौलत न्यूजीलैंड ने 259 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। भारत की ओर से मयंक यादव सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने तीन विकेट हासिल किए। अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव, नीतीश कुमार रेड्डी और अक्षर पटेल को एक-एक विकेट मिला।

    260 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने महज चार रन के स्कोर पर अपने दोनों शुरुआती विकेट गंवा दिए। संजू सैमसन चार रन बनाकर आउट हुए, जबकि ईशान किशन खाता भी नहीं खोल सके। शुरुआती झटकों के कारण भारतीय टीम दबाव में आ गई।

    इसके बाद अभिषेक शर्मा और श्रेयस अय्यर ने पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन दोनों बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं कर सके। दोनों के आउट होने से भारत की मुश्किलें बढ़ गईं। टीम ने अपने शुरुआती चार विकेट केवल 56 रन पर गंवा दिए। बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाजी पूरी तरह दबाव में नजर आई और कोई भी बल्लेबाज अर्धशतक तक नहीं पहुंच सका।

    भारत की ओर से तिलक वर्मा ने सबसे अधिक 35 रन बनाए। उन्होंने 35 गेंदों का सामना किया। नमन धीर ने 28 रन और अभिषेक शर्मा ने 27 रन का योगदान दिया। अन्य बल्लेबाज बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। परिणामस्वरूप भारतीय टीम 20 ओवर में 172 रन तक ही पहुंच सकी।

    न्यूजीलैंड की गेंदबाजी में जैकब डफी सबसे प्रभावशाली रहे। उन्होंने चार विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। मैथ्यू फिशर और मिचेल सैंटनर ने दो-दो विकेट हासिल किए, जबकि एडम मिल्ने को एक सफलता मिली। फिलिप्स की शतकीय पारी और डफी की शानदार गेंदबाजी न्यूजीलैंड की जीत के प्रमुख कारण रहे।

  • नंबर-3 से नंबर-5 पर आते ही बदला तिलक वर्मा का अंदाज, अब पहली गेंद से बाउंड्री लगाने की रहती है कोशिश

    नंबर-3 से नंबर-5 पर आते ही बदला तिलक वर्मा का अंदाज, अब पहली गेंद से बाउंड्री लगाने की रहती है कोशिश

    नई दिल्ली । भारतीय टी20 टीम के उपकप्तान तिलक वर्मा ने बल्लेबाजी क्रम में बदलाव के साथ अपनी रणनीति में भी बदलाव किया है। पहले तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले तिलक अब पांचवें या छठे नंबर पर उतर रहे हैं। इस नई भूमिका में उनका लक्ष्य शुरुआत से ही तेजी से रन बनाना है। हालांकि, वह परिस्थितियों को समझकर ही आक्रामक शॉट खेलने का फैसला करते हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे टी20 मुकाबले से पहले उन्होंने अपने बदले हुए बल्लेबाजी अंदाज और रन चेज के दौरान अपनाई जाने वाली रणनीति के बारे में बताया।

    तिलक के मुताबिक, उनके पास पहले से ही बड़े शॉट खेलने की क्षमता थी और उन्होंने तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए भी खूब रन बनाए हैं। लेकिन अब पांचवें या छठे नंबर पर आने के बाद उनकी सोच में थोड़ा बदलाव आया है। इस क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए वह पहली ही गेंद से बाउंड्री लगाने का मौका तलाशते हैं। हालांकि, इसके लिए गेंद का उनके अनुकूल होना जरूरी है। यदि पहली गेंद पर बड़ा शॉट खेलने का सही अवसर नहीं मिलता, तो वह जल्दबाजी करने के बजाय पारी को आगे बढ़ाने पर ध्यान देते हैं।

    तिलक ने बताया कि ऐसी स्थिति में वह शुरुआत में सिंगल और डबल लेकर स्कोर आगे बढ़ाते हैं। साथ ही मैदान में खाली जगह तलाशकर चौके लगाने की कोशिश करते हैं। उनका मानना है कि मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते समय केवल आक्रामक होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मैच की परिस्थिति के अनुसार जोखिम लेना भी जरूरी है। जरूरत पड़ने पर वह क्रीज पर समय बिताते हैं और मुकाबले को अंतिम ओवरों तक ले जाने की कोशिश करते हैं।
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    तिलक की यह रणनीति न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में देखने को मिली थी। क्राइस्टचर्च में खेले गए इस मैच में भारतीय टीम 181 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए मुश्किल स्थिति में पहुंच गई थी। ऐसे समय में तिलक ने नीतीश रेड्डी के साथ मिलकर पारी को संभाला। उन्होंने 26 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाए और टीम को चार विकेट से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। दोनों बल्लेबाजों के बीच सातवें विकेट के लिए 69 रन की नाबाद साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को उस मुकाबले में जीत तक पहुंचाया।

    तिलक ने बताया कि उस समय उन्होंने नीतीश रेड्डी से कहा था कि अगर दोनों बल्लेबाज मिलकर यहां से मैच जिता देते हैं तो यह बेहद खास होगा। उन्होंने साथी खिलाड़ी को क्रीज पर टिके रहने, मुकाबले को आगे तक ले जाने और फिर परिस्थितियों के अनुसार खेलने की सलाह दी थी। तिलक के अनुसार, रन चेज में धैर्य बनाए रखना और सही समय पर तेजी से रन बनाना काफी महत्वपूर्ण होता है।

    आखिरी ओवरों में गेंदबाजों पर दबाव बनाने को लेकर भी तिलक की सोच स्पष्ट है। उनका मानना है कि डेथ ओवर्स में बल्लेबाज के मुकाबले गेंदबाज अधिक दबाव में होता है। वह इसी सकारात्मक सोच के साथ बल्लेबाजी करते हैं कि गेंदबाज पर दबाव होने के कारण उससे रन देने की गलती हो सकती है। इस मानसिकता से उन्हें मुश्किल लक्ष्य का पीछा करते समय आत्मविश्वास बनाए रखने में मदद मिलती है।

    न्यूजीलैंड दौरे पर पहुंचने से पहले भारतीय टीम ने घरेलू मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज खेली थी। लगातार व्यस्त कार्यक्रम के कारण नए माहौल और समय क्षेत्र के अनुसार खुद को ढालना आसान नहीं था। तिलक ने माना कि परिस्थितियों से तालमेल बैठाना चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाली टीम इस वजह से बहाने नहीं बना सकती। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन से युवा क्रिकेटरों के लिए उदाहरण पेश करना चाहिए। मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी टीम बैठकों में स्पष्ट किया है कि टी20 टीम का प्रदर्शन पूरे दौरे के लिए अच्छा माहौल तैयार कर सकता है।

    भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में शुरुआती तीनों मुकाबले जीतकर 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है। अब टीम की नजर बाकी दोनों मैच जीतकर सीरीज में 5-0 से क्लीन स्वीप करने पर है। तिलक ने इसे भारतीय टीम और दर्शकों के लिए अच्छा अवसर बताया। चौथा टी20 मुकाबला 30 अक्टूबर को ऑकलैंड में खेला जाना है।

  • शादाब खान और हारिस रऊफ ने आखिरी विकेट पर रचा इतिहास, इंग्लैंड को हराकर पाकिस्तान ने ट्राई सीरीज के फाइनल में बनाई जगह

    शादाब खान और हारिस रऊफ ने आखिरी विकेट पर रचा इतिहास, इंग्लैंड को हराकर पाकिस्तान ने ट्राई सीरीज के फाइनल में बनाई जगह

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच 25 अक्टूबर को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए वनडे ट्राई सीरीज के मुकाबले में रोमांचक नतीजा देखने को मिला। एक समय पाकिस्तान की टीम हार के बेहद करीब पहुंच गई थी, लेकिन शादाब खान और हारिस रऊफ ने आखिरी विकेट के लिए शानदार साझेदारी कर मैच का रुख बदल दिया। पाकिस्तान ने नौ विकेट गंवाने के बाद भी लक्ष्य हासिल करते हुए इंग्लैंड को एक विकेट से हरा दिया। इस जीत के साथ पाकिस्तानी टीम ने ट्राई सीरीज के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली।

    लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान की पारी लड़खड़ा गई थी। टीम ने 154 रन तक अपने नौ विकेट गंवा दिए थे और जीत के लिए अभी 88 रन बनाने बाकी थे। इंग्लैंड को मुकाबला जीतने के लिए केवल एक विकेट की जरूरत थी। ऐसे मुश्किल समय में शादाब खान ने जिम्मेदारी संभाली और दूसरे छोर पर मौजूद हारिस रऊफ के साथ मिलकर इंग्लैंड की जीत की उम्मीदों को झटका दिया।

    शादाब खान ने 96 गेंदों पर नाबाद 113 रन की पारी खेली। उनकी इस पारी में 13 चौके और पांच छक्के शामिल रहे। यह शादाब का पहला वनडे शतक था। उन्होंने दबाव के बीच आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान को लक्ष्य के करीब पहुंचाया। दूसरी ओर, 11वें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे हारिस रऊफ ने सात रन बनाकर उनका साथ दिया। रऊफ ने विकेट बचाए रखा, जिससे शादाब को अपना स्वाभाविक खेल जारी रखने का मौका मिला।

    दोनों बल्लेबाजों ने दसवें विकेट के लिए नाबाद 89 रन जोड़े। उनकी साझेदारी ने पाकिस्तान को 17 गेंद शेष रहते जीत दिला दी। आखिरी समय तक इंग्लैंड की टीम विकेट हासिल करने की कोशिश करती रही, लेकिन पाकिस्तानी बल्लेबाजों ने संयम बनाए रखा। अंत में हारिस रऊफ ने चौका लगाकर टीम को यादगार जीत दिलाई।

    दसवें विकेट की साझेदारी में बनाया रिकॉर्ड

    शादाब खान और हारिस रऊफ की नाबाद 89 रन की साझेदारी सफल वनडे रनचेज में दसवें विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी बन गई। इससे पहले यह रिकॉर्ड डेरिक मरे और एंडी रॉबर्ट्स के नाम था। दोनों ने 1975 के विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 64 रन जोड़े थे। शादाब और रऊफ ने इस उपलब्धि को पीछे छोड़ते हुए वनडे क्रिकेट में नया रिकॉर्ड कायम किया।

    शाहीन आफरीदी की गेंदबाजी ने भी निभाई अहम भूमिका

    इससे पहले पाकिस्तान के कप्तान शाहीन शाह आफरीदी ने गेंदबाजी में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उन्होंने 46 रन देकर चार विकेट हासिल किए और इंग्लैंड की पारी को 241 रन पर समेटने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वनडे क्रिकेट में पदार्पण करने वाले रजाउल्लाह ने भी दो विकेट लिए।

    इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने केवल 19 रन के स्कोर तक तीन विकेट गंवा दिए। इसके बाद बेन डकेट ने 111 गेंदों पर 105 रन बनाकर पारी को संभाला। सैम करन ने 42 रन बनाए। दोनों के बीच पांचवें विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई, जिसने इंग्लैंड को शुरुआती झटकों से उबरने में मदद की। अंत में गस एटकिंसन ने नाबाद 36 रन बनाकर टीम का स्कोर 241 रन तक पहुंचाया।

    हालांकि, इंग्लैंड का यह स्कोर जीत के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ। पाकिस्तान ने शुरुआती विकेट गंवाने के बावजूद आखिरी जोड़ी के दम पर मुकाबला अपने नाम कर लिया। शादाब खान के शतक और हारिस रऊफ के सहयोग ने न केवल पाकिस्तान को जीत दिलाई, बल्कि टीम को ट्राई सीरीज के फाइनल में पहुंचाने में भी निर्णायक भूमिका निभाई।

  • अमित मिश्रा का दावा, विराट कोहली ने वापसी का भरोसा देने के बाद फोन उठाना किया बंद, आईपीएल मुलाकात में भी नहीं मिला जवाब

    अमित मिश्रा का दावा, विराट कोहली ने वापसी का भरोसा देने के बाद फोन उठाना किया बंद, आईपीएल मुलाकात में भी नहीं मिला जवाब

    नई दिल्ली ।भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व लेग स्पिनर अमित मिश्रा ने विराट कोहली के साथ अपने संवाद और टीम में वापसी की उम्मीदों को लेकर कुछ अहम बातें साझा की हैं। मिश्रा के मुताबिक, गंभीर चोट से उबरने के बाद उन्हें भारतीय टीम में दोबारा जगह मिलने की उम्मीद थी। उस दौरान विराट कोहली ने उन्हें फिटनेस हासिल करने के बाद वापसी का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में उनसे संपर्क करना मुश्किल हो गया। मिश्रा ने बताया कि उनके फोन कॉल और संदेशों का जवाब नहीं मिलने से वह निराश हुए और आखिरकार उन्हें क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला करना पड़ा।

    मिश्रा ने यह अनुभव आकाश चोपड़ा के पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान साझा किया। उन्होंने बताया कि साल 2017 में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के दौरान उनके पैर में गंभीर चोट लगी थी। इस चोट के कारण उन्हें लंबे समय तक मैदान से दूर रहना पड़ा। चोट से उबरने और दोबारा प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में लौटने के दौरान उनके सामने फिटनेस हासिल करने के साथ भारतीय टीम में जगह बनाने की चुनौती भी थी।

    मिश्रा के अनुसार, उस समय भारतीय टीम के कोच अनिल कुंबले थे। उन्होंने चोट से जूझ रहे स्पिनर का हौसला बढ़ाया था और कहा था कि पूरी तरह फिट होने के बाद उनकी वापसी हो सकती है। इस आश्वासन से मिश्रा को फिर से भारतीय टीम का हिस्सा बनने की उम्मीद मिली। बाद में विराट कोहली के कप्तान बनने पर उन्होंने उनसे भी अपनी वापसी को लेकर संपर्क किया।

    मिश्रा का कहना है कि कोहली ने उन्हें आश्वस्त किया था कि फिट होने के बाद टीम में उनकी जगह को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। इस बातचीत के बाद उन्हें उम्मीद थी कि मेहनत और प्रदर्शन के आधार पर वह दोबारा राष्ट्रीय टीम में जगह बना सकेंगे। अपनी फिटनेस और खेल को साबित करने के लिए उन्होंने घरेलू क्रिकेट के साथ-साथ इंडियन प्रीमियर लीग में भी प्रदर्शन जारी रखा।

    हालांकि, मिश्रा के मुताबिक, वापसी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही थी। इसी सिलसिले में उन्होंने आईपीएल के दौरान विराट कोहली से आमने-सामने बातचीत करने की कोशिश की। यह मुलाकात दिल्ली कैपिटल्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच मुकाबले के दौरान हुई थी। मिश्रा ने कोहली से अपने क्रिकेट भविष्य और भारतीय टीम में दोबारा मौका मिलने की संभावना पर स्पष्ट जवाब मांगा।

    मिश्रा के अनुसार, इस मुलाकात के दौरान कोहली ने उन्हें एक सप्ताह से दस दिन के भीतर स्थिति स्पष्ट करने की बात कही थी। उन्हें उम्मीद थी कि तय समय में इस विषय पर बातचीत आगे बढ़ेगी और उन्हें अपने भविष्य को लेकर स्पष्टता मिलेगी। लेकिन मिश्रा का दावा है कि इसके बाद उन्हें कोहली की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा कि कोहली ने उनके फोन कॉल उठाने बंद कर दिए थे।

    मिश्रा के लिए यह स्थिति इसलिए भी मुश्किल थी, क्योंकि वह चोट से उबरने के बाद लगातार क्रिकेट खेलकर अपनी फिटनेस और क्षमता साबित करने की कोशिश कर रहे थे। उनके मुताबिक, वापसी की उम्मीद मिलने के बावजूद संवाद नहीं होने से उन्हें निराशा हुई। इसी अनुभव को उन्होंने अपने क्रिकेट करियर के कठिन दौर से जोड़कर बताया।

    अमित मिश्रा के इस बयान ने विराट कोहली के साथ उनके संबंधों और भारतीय टीम में वापसी की कोशिशों को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि, सामने आई जानकारी में यह पक्ष अमित मिश्रा के बयान पर आधारित है। कोहली की ओर से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया दिए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

  • तिलक वर्मा और नीतीश रेड्डी ने पलटा हारा हुआ मैच, पाकिस्तानी दिग्गज बासित अली ने भारतीय टीम की जमकर तारीफ की

    तिलक वर्मा और नीतीश रेड्डी ने पलटा हारा हुआ मैच, पाकिस्तानी दिग्गज बासित अली ने भारतीय टीम की जमकर तारीफ की

    नई दिल्ली ।भारत और न्यूजीलैंड के बीच क्राइस्टचर्च में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में भारतीय टीम ने मुश्किल परिस्थितियों से उबरते हुए जीत हासिल की। भारतीय बल्लेबाज तिलक वर्मा और नीतीश कुमार रेड्डी ने अहम योगदान देकर मुकाबले का रुख बदल दिया। इस प्रदर्शन के बाद पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर बासित अली ने भारतीय खिलाड़ियों की तारीफ की। उन्होंने तिलक वर्मा को जीत का असली हीरो बताते हुए कहा कि उनकी सूझबूझ भरी बल्लेबाजी ने भारत को मुश्किल स्थिति से बाहर निकाला।

    मैच के दौरान भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। एक समय 70 रन के स्कोर पर पांच विकेट गिर चुके थे और टीम मुश्किल में दिखाई दे रही थी। ऐसे हालात में तिलक वर्मा ने जिम्मेदारी संभाली और पारी को आगे बढ़ाया। उनके साथ नीतीश कुमार रेड्डी ने भी अहम भूमिका निभाई। दोनों बल्लेबाजों ने दबाव के बीच रन जुटाकर भारतीय टीम की जीत की उम्मीदों को बनाए रखा और अंततः मुकाबले का पासा पलट दिया।

    बासित अली ने मैच के विश्लेषण के दौरान तिलक की बल्लेबाजी की रणनीति की विशेष रूप से सराहना की। उनके मुताबिक, तिलक ने परिस्थितियों को समझते हुए गैरजरूरी जोखिम लेने से परहेज किया। उन्होंने बड़ी बाउंड्री की दिशा में हवा में शॉट खेलने के बजाय सिंगल और डबल लेकर स्कोर आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया। साथ ही, उन्होंने छोटी बाउंड्री का भी समझदारी से इस्तेमाल किया। बासित के अनुसार, तिलक की इसी रणनीति ने भारतीय पारी को संभालने और टीम को जीत तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    उन्होंने भारतीय टीम के युवा खिलाड़ियों की भूमिका को भी सराहा। नमन धीर और नीतीश कुमार रेड्डी ने निचले क्रम में आकर उपयोगी और तेज रन बनाए। इन खिलाड़ियों के योगदान से भारतीय टीम उस मुकाबले में वापसी करने में सफल रही, जहां शुरुआती विकेट गिरने के बाद स्थिति उसके पक्ष में नहीं दिख रही थी। बासित अली ने कहा कि भारतीय टीम के युवा खिलाड़ियों ने अपनी क्षमता साबित की है। उनके प्रदर्शन से टीम की बेंच स्ट्रेंथ का भी पता चलता है।

    भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर के वैभव सूर्यवंशी को तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजने के फैसले की भी बासित अली ने सराहना की। हालांकि, उन्होंने यह संभावना भी जताई कि ईशान किशन के फिट होकर उपलब्ध होने पर टीम के प्लेइंग इलेवन का समीकरण बदल सकता है। इससे आने वाले मुकाबलों में खिलाड़ियों के चयन को लेकर नए विकल्प सामने आ सकते हैं।

    दूसरी ओर, न्यूजीलैंड के कप्तान मिचेल सेंटनर की रणनीति पर भी बासित अली ने सवाल उठाए। सेंटनर ने गेंदबाजी करते हुए चार विकेट हासिल किए, लेकिन बासित के मुताबिक, कप्तानी के स्तर पर कुछ फैसले न्यूजीलैंड के पक्ष में परिणाम सुनिश्चित नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड के पास मुकाबले में जीत हासिल करने का मौका था, लेकिन रणनीतिक चूक के कारण टीम इसे भुना नहीं पाई।

    बासित अली ने सीमित ओवरों के क्रिकेट की अनिश्चितता का जिक्र करते हुए कहा कि आखिरी गेंद फेंके जाने तक मुकाबले का परिणाम तय नहीं माना जा सकता। भारतीय टीम के युवा बल्लेबाजों ने दबाव में प्रदर्शन करके इस बात को फिर साबित किया। तिलक वर्मा की संयमित बल्लेबाजी और नीतीश कुमार रेड्डी समेत अन्य खिलाड़ियों के योगदान ने भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई।

  • पाकिस्तान ने भारत में होने वाले मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप से बनाई दूरी, हॉकी टीम को भेजने की अनुमति भी नहीं

    पाकिस्तान ने भारत में होने वाले मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप से बनाई दूरी, हॉकी टीम को भेजने की अनुमति भी नहीं

    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों का असर एक बार फिर खेल आयोजनों पर दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और वहां के गृह मंत्रालय ने जनवरी 2027 में भारत में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप में अपनी 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की टीम को भेजने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के कारण पाकिस्तान की वेटरंस क्रिकेट टीम टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकेगी। इससे पहले पाकिस्तान की पुरुष राष्ट्रीय हॉकी टीम को भी भारत में आयोजित होने वाले टूर्नामेंट में भेजने से इनकार किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

    इंटरनेशनल मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप में भाग लेने के लिए पाकिस्तान वेटरंस क्रिकेट संघ ने अपनी टीम भेजने की तैयारी की थी। संघ के प्रमुख फवाद एजाज के अनुसार, आयोजकों को टीम का नाम वापस लेने की आधिकारिक जानकारी दे दी गई है, ताकि वे टूर्नामेंट के लिए किसी दूसरी टीम की व्यवस्था कर सकें। पाकिस्तान की टीम को अनुमति नहीं मिलने से आयोजकों को अब भाग लेने वाली टीमों की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।

    फवाद एजाज ने बताया कि भारतीय आयोजकों और मेजबान देश की ओर से पाकिस्तानी खिलाड़ियों को वीजा तथा उच्चस्तरीय सुरक्षा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद पाकिस्तान वेटरंस क्रिकेट संघ ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी मांगा था। हालांकि, अनुमति नहीं मिलने के कारण टीम भारत आने की तैयारी आगे नहीं बढ़ा सकी।

    बताई गई जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के गृह मंत्री और क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख मोहसिन नकवी ने दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों का हवाला देते हुए टीम को भारत जाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया। इसके चलते पाकिस्तान की टीम अगले साल होने वाले इस टूर्नामेंट में अपने खिताब का बचाव नहीं कर सकेगी। पाकिस्तान ने पिछला वेटरंस विश्व कप श्रीलंका में जीता था। ऐसे में आगामी प्रतियोगिता से उसका बाहर रहना टीम के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है।

    क्रिकेट के अलावा हॉकी में भी इसी तरह की स्थिति सामने आई है। पाकिस्तान हॉकी महासंघ ने हाल ही में संवेदनशील द्विपक्षीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपनी पुरुष राष्ट्रीय टीम को भारत भेजने से इनकार कर दिया था। इसके बाद एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी के लिए बांग्लादेश को शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई। इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि भारत-पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव का प्रभाव केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी पर भी पड़ रहा है।

    पाकिस्तान पहले भी भारत में आयोजित कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से हट चुका है। सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए उसने तमिलनाडु में आयोजित जूनियर विश्व कप और जूनियर एशिया कप से भी अपना नाम वापस लिया था। हालांकि, अलग-अलग प्रतियोगिताओं में फैसलों के पीछे परिस्थितियां और आधिकारिक कारण अलग हो सकते हैं।

    भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय खेल संबंध लंबे समय से प्रभावित हैं। वर्ष 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंधों में बड़ा बदलाव आया। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने जुलाई 2008 में एशिया कप के लिए पाकिस्तान का दौरा किया था। वहीं, द्विपक्षीय श्रृंखला खेलने के लिए भारतीय टीम वर्ष 2005-06 में पाकिस्तान गई थी।

    वर्तमान परिस्थितियों में दोनों देशों की क्रिकेट टीमें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद और एशियाई क्रिकेट परिषद के बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में आमने-सामने आती हैं। ऐसे मुकाबले भी अक्सर संयुक्त अरब अमीरात या श्रीलंका जैसे तटस्थ स्थानों पर आयोजित किए जाते हैं। द्विपक्षीय तनाव के कारण नियमित घरेलू दौरे और श्रृंखलाएं बहाल नहीं हो पाई हैं।

    जनवरी 2027 के मास्टर्स क्रिकेट विश्व कप में पाकिस्तान की अनुपस्थिति और हॉकी टीम को भारत नहीं भेजने के फैसले से दोनों देशों के खेल संबंधों में जारी चुनौतियां फिर सामने आई हैं। अब आयोजकों को क्रिकेट प्रतियोगिता के लिए वैकल्पिक टीम की व्यवस्था करनी होगी, जबकि दोनों देशों के बीच भविष्य में खेल आयोजनों में भागीदारी की स्थिति राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों पर निर्भर करेगी।

  • संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी में किसे मिलेगी ओपनिंग की जिम्मेदारी? चेतेश्वर पुजारा ने बताई प्लेइंग-11 की चुनौती

    संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी में किसे मिलेगी ओपनिंग की जिम्मेदारी? चेतेश्वर पुजारा ने बताई प्लेइंग-11 की चुनौती

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग-11 में मौका मिलने का इंतजार करना पड़ सकता है। न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज से पहले टीम के संयोजन को लेकर चर्चा तेज है। पूर्व भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा का मानना है कि न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में वैभव के लिए अंतिम ग्यारह में जगह बनाना आसान नहीं होगा। उन्होंने इसकी वजह टीम का संतुलन, ऑलराउंडर्स की जरूरत और शीर्ष क्रम में पहले से मौजूद बल्लेबाजों को बताया है।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी20 सीरीज का आगाज 22 अक्टूबर से क्राइस्टचर्च में होना है। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि टीम प्रबंधन वैभव सूर्यवंशी को शुरुआती मुकाबलों में मौका देता है या उन्हें बेंच पर इंतजार करना पड़ता है। युवा बल्लेबाज को लेकर चर्चा इसलिए भी अहम है, क्योंकि टीम में पहले से ऐसे खिलाड़ी मौजूद हैं, जो ओपनिंग की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।

    न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में टीम संतुलन अहम

    चेतेश्वर पुजारा के अनुसार, न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में टीम का संतुलन काफी मायने रखेगा। ऐसी परिस्थितियों में टीम को अधिक ऑलराउंडर्स की जरूरत पड़ सकती है, जिससे प्लेइंग-11 में बल्लेबाजों के लिए उपलब्ध जगह सीमित हो जाती है। इसी कारण शीर्ष क्रम में कई बल्लेबाजों को एक साथ शामिल करना टीम प्रबंधन के लिए चुनौती बन सकता है।

    पुजारा ने संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी के विकल्प पर बात करते हुए कहा कि दोनों में से किसी एक को ओपनिंग की जिम्मेदारी दी जा सकती है। उनके मुताबिक, न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में दोनों खिलाड़ियों को एक साथ प्लेइंग-11 में शामिल करना मुश्किल नजर आता है। ऐसे में वैभव को अवसर के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि युवा बल्लेबाज को आगे मौके जरूर मिलेंगे।

    अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन पर भरोसा

    टीम में ओपनिंग के विकल्पों को देखते हुए अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। कप्तान श्रेयस अय्यर पहले ही इन दोनों बल्लेबाजों की अहमियत का जिक्र कर चुके हैं। दोनों खिलाड़ियों ने टीम के लिए उपयोगी प्रदर्शन किया है और उनकी मौजूदगी शीर्ष क्रम में प्रतिस्पर्धा बढ़ाती है।

    लगातार रन बनाने वाले बल्लेबाजों को टीम से बाहर करना आसान फैसला नहीं होता। यही वजह है कि वैभव सूर्यवंशी को मौका देने के लिए टीम प्रबंधन को बल्लेबाजी क्रम और अन्य खिलाड़ियों की भूमिकाओं के बीच संतुलन बनाना होगा। हालांकि, खिलाड़ियों की फिटनेस या टीम की जरूरतों के अनुसार परिस्थितियां बदलने पर वैभव के लिए प्लेइंग-11 में जगह बन सकती है।

    संजू सैमसन की फॉर्म पर पुजारा ने क्या कहा?
    चेतेश्वर पुजारा ने संजू सैमसन के हालिया प्रदर्शन में आए उतार-चढ़ाव पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने संजू का बचाव करते हुए कहा कि टी20 क्रिकेट में शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों से निरंतरता की उम्मीद को लेकर लोगों की धारणा हमेशा सही नहीं होती। इस प्रारूप में प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव आना सामान्य बात है।

    पुजारा के मुताबिक, संजू सैमसन को पूरी तरह आउट ऑफ फॉर्म मानना उचित नहीं है। टी20 क्रिकेट में कई बार बल्लेबाज को अपनी लय हासिल करने के लिए एक अच्छी पारी की जरूरत होती है। उनका मानना है कि संजू एक अच्छी पारी खेलकर दोबारा फॉर्म में लौट सकते हैं।

    इस तरह न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी टी20 सीरीज में भारतीय टीम का संयोजन चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। एक ओर संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा जैसे स्थापित विकल्प हैं, तो दूसरी ओर वैभव सूर्यवंशी को अवसर मिलने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि टीम प्रबंधन परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किस संयोजन के साथ मैदान पर उतरता है।

  • भारत-वेस्टइंडीज पांचवें टी20 में ईशान किशन का तूफान, छक्का मारकर स्टेडियम के बाहर पहुंचाई गेंद, अंपायरों को मंगानी पड़ी नई बॉल

    भारत-वेस्टइंडीज पांचवें टी20 में ईशान किशन का तूफान, छक्का मारकर स्टेडियम के बाहर पहुंचाई गेंद, अंपायरों को मंगानी पड़ी नई बॉल


    नई दिल्ली ।
    भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांचवें टी20 मुकाबले में ईशान किशन ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से दर्शकों का ध्यान खींचा। बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले जा रहे इस मुकाबले में बारिश के कारण खेल प्रभावित हुआ और मैच को घटाकर नौ-नौ ओवर का कर दिया गया। टॉस जीतने के बाद वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी करने उतरी, लेकिन शुरुआती ओवर में ही उसे पहला झटका लग गया।

    वेस्टइंडीज के गेंदबाज कीमो पॉल ने अभिषेक शर्मा को छह रन के निजी स्कोर पर आउट कर भारत को शुरुआती नुकसान पहुंचाया। इसके बाद बल्लेबाजी करने आए ईशान किशन ने तेजी से रन बनाकर भारतीय पारी को गति दी। उन्होंने क्रीज पर आते ही कैरेबियाई गेंदबाजों पर आक्रमण शुरू कर दिया। उनकी बल्लेबाजी में बड़े शॉट खेलने का अंदाज साफ दिखाई दिया और कुछ ही गेंदों में उन्होंने मुकाबले का माहौल बदल दिया।

    ईशान की पारी का सबसे खास क्षण रोमारियो शेफर्ड के ओवर में देखने को मिला। उन्होंने लेग साइड की ओर हटकर घुटने के बल बैठते हुए फाइन लेग के ऊपर से स्कूप शॉट खेला। गेंद इतनी दूर गई कि स्टेडियम की सीमा पार कर बाहर जा गिरी। इस जोरदार छक्के के बाद मैच में नई गेंद की जरूरत पड़ी और अंपायरों को गेंद बदलनी पड़ी। उनके इस शॉट ने मैदान पर मौजूद दर्शकों के बीच उत्साह बढ़ा दिया।

    ईशान किशन ने अपनी पारी में केवल 10 गेंदों का सामना किया और 30 रन बनाकर आउट हो गए। शमर जोसेफ की गेंद पर रोवमैन पॉवेल ने उनका कैच पकड़ा। हालांकि, उनकी पारी ज्यादा लंबी नहीं चली, लेकिन कम गेंदों में बनाए गए रनों ने भारतीय बल्लेबाजी को तेज शुरुआत देने में मदद की। इस दौरान उन्होंने बड़े शॉट लगाने की अपनी क्षमता दिखाई। मुकाबले में लगाया गया छक्का सीरीज के छक्कों का शतक पूरा होने से भी जुड़ा रहा।

    बारिश के कारण मैच की परिस्थितियों में बदलाव करना पड़ा। मुकाबले को नौ-नौ ओवर का किए जाने के बाद गेंदबाजों के लिए भी विशेष नियम लागू किए गए। नए खेल नियमों के अनुसार, प्रत्येक टीम का कोई भी गेंदबाज अधिकतम दो ओवर डाल सकता है, जबकि एक गेंदबाज को केवल एक ओवर करने की अनुमति होगी। छोटे प्रारूप में बल्लेबाजों को कम समय में तेजी से रन बनाने का मौका मिलता है, वहीं गेंदबाजों के सामने भी सीमित ओवरों में विकेट निकालने की चुनौती रहती है।

    ह मुकाबला सीरीज के लिहाज से बेहद अहम था, क्योंकि पांचवें टी20 से पहले भारत और वेस्टइंडीज के बीच श्रृंखला 2-2 से बराबर थी। ऐसे में दोनों टीमों के लिए यह मैच निर्णायक महत्व रखता था। बारिश से प्रभावित खेल में बल्लेबाजी और गेंदबाजी के दौरान गलतियों की गुंजाइश कम हो गई थी। भारत की ओर से ईशान की तेज पारी ने शुरुआती चरण में टीम को आक्रामक रुख अपनाने का अवसर दिया।

    इस मुकाबले के लिए भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने प्लेइंग इलेवन में दो बदलाव किए। चार साल बाद भारतीय टीम में वापसी करने वाले भुवनेश्वर कुमार को मयंक यादव की जगह शामिल किया गया। भारत की प्लेइंग इलेवन में अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, नमन धीर, अक्षर पटेल, भुवनेश्वर कुमार, प्रिंस यादव और अर्शदीप सिंह शामिल रहे।

    वेस्टइंडीज की टीम में शाई होप कप्तान और विकेटकीपर की भूमिका में उतरे। उनके साथ ज्वेल एंड्रयू, शिमरोन हेटमायर, रोवमैन पॉवेल, शेरफेन रदरफोर्ड, रोमारियो शेफर्ड, रोस्टन चेज, कीमो पॉल, शमर स्प्रिंगर, गुडाकेश मोटी और शमर जोसेफ को प्लेइंग इलेवन में जगह मिली। सीरीज बराबर होने के कारण दोनों टीमें निर्णायक मुकाबले में जीत हासिल कर ट्रॉफी अपने नाम करने के इरादे से उतरीं।

  • ऑस्ट्रेलिया की जीत से WTC फाइनल की रेस हुई रोमांचक, भारत के पास बचे सात टेस्ट, जानिए कैसे मिलेगी फाइनल में जगह

    ऑस्ट्रेलिया की जीत से WTC फाइनल की रेस हुई रोमांचक, भारत के पास बचे सात टेस्ट, जानिए कैसे मिलेगी फाइनल में जगह

    नई दिल्ली । वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) 2025-27 के फाइनल में पहुंचने की दौड़ ऑस्ट्रेलिया की दक्षिण अफ्रीका पर जीत के बाद और दिलचस्प हो गई है। डरबन में खेले गए टेस्ट मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने मेजबान दक्षिण अफ्रीका को 214 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। इस जीत से ऑस्ट्रेलिया ने अंक तालिका में अपनी शीर्ष स्थिति मजबूत कर ली, जबकि मौजूदा चैंपियन दक्षिण अफ्रीका तीसरे स्थान पर खिसक गया। न्यूजीलैंड दूसरे और भारतीय टीम पांचवें स्थान पर बनी हुई है।

    ऑस्ट्रेलिया ने मौजूदा WTC चक्र में 11 मैचों में नौ जीत दर्ज की हैं। उसके खाते में 108 अंक हैं और अंक प्रतिशत यानी पीसीटी 81.82 हो गया है। न्यूजीलैंड छह मैचों में चार जीत, एक हार और एक ड्रॉ के साथ 72.22 प्रतिशत अंक लेकर दूसरे स्थान पर है। दक्षिण अफ्रीका ने पांच मैचों में तीन जीत और दो हार के बाद 36 अंक जुटाए हैं। उसका पीसीटी 60 है। बांग्लादेश 55.56 प्रतिशत अंकों के साथ चौथे स्थान पर है।

    भारतीय टीम ने अब तक 11 टेस्ट खेले हैं, जिनमें पांच जीत, चार हार और दो ड्रॉ शामिल हैं। भारत के खाते में 68 अंक हैं और उसका पीसीटी 51.52 है। टीम ने हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज 1-0 से जीती थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की ताजा जीत के बाद भारतीय टीम की रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ। बांग्लादेश फिलहाल भारत से आगे है, इसलिए टीम इंडिया को अपनी स्थिति बेहतर बनाने के लिए आगामी मुकाबलों में लगातार जीत दर्ज करनी होगी।

    अंक तालिका में इंग्लैंड 38.54 प्रतिशत अंकों के साथ छठे स्थान पर है। उसने 16 मैचों में सात जीत, आठ हार और एक ड्रॉ दर्ज किया है। धीमी ओवर गति के कारण उसके 14 अंक काटे गए हैं। श्रीलंका 33.33 प्रतिशत अंकों के साथ सातवें, वेस्टइंडीज 20.83 प्रतिशत के साथ आठवें और पाकिस्तान 4.63 प्रतिशत अंकों के साथ नौवें स्थान पर है। वेस्टइंडीज के दो और पाकिस्तान के नौ अंक पेनल्टी के कारण काटे गए हैं।

    भारत के सामने अब सात टेस्ट मैच बाकी हैं। इनमें न्यूजीलैंड के खिलाफ उसके घर में दो मुकाबले और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू मैदान पर पांच टेस्ट शामिल हैं। फाइनल में पहुंचने के लिए भारत को इन मैचों में अधिकतम जीत हासिल करने के साथ अन्य टीमों के नतीजों पर भी नजर रखनी होगी। WTC में टीमों की रैंकिंग कुल अंकों के बजाय अंक प्रतिशत के आधार पर तय होती है। जीत पर 12, ड्रॉ पर चार और टाई होने पर छह अंक मिलते हैं। चक्र के अंत में अंक तालिका की शीर्ष दो टीमें फाइनल खेलती हैं।

    अगर भारत अपने बाकी सभी सात टेस्ट जीत लेता है, तो उसके कुल अंक 152 हो जाएंगे। इस चक्र में भारत के कुल 18 मैच होने हैं और अधिकतम उपलब्ध अंक 216 हैं। इस हिसाब से उसका पीसीटी 70.37 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह स्कोर भारत को फाइनल की दौड़ में मजबूत स्थिति में ला सकता है। हालांकि, क्वालिफिकेशन दूसरी टीमों के प्रदर्शन और उनके अंतिम अंक प्रतिशत पर भी निर्भर करेगा। केवल छह मैच जीतना अपने आप में फाइनल में जगह की गारंटी नहीं देता।

    ऑस्ट्रेलिया की मौजूदा स्थिति भारत के लिए बड़ी चुनौती है। अगर ऑस्ट्रेलिया लगातार जीत दर्ज करता है, तो उसका अंक प्रतिशत भारत के संभावित स्कोर से ऊपर रह सकता है। दूसरी ओर, दक्षिण अफ्रीका का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बाकी मुकाबलों में जीतना भारतीय टीम के लिए मददगार हो सकता है, क्योंकि इससे ऑस्ट्रेलिया के अंक प्रतिशत पर असर पड़ेगा। भारत को अपने पांचों घरेलू टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को हराने की भी जरूरत पड़ सकती है।

    न्यूजीलैंड भी भारत की राह में चुनौती बना हुआ है। उसके पास अभी दस टेस्ट बाकी हैं और मौजूदा अंक प्रतिशत 72.22 है। भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने दोनों मुकाबले जीतने होंगे, लेकिन इसके बावजूद कीवी टीम अन्य मैचों में अच्छा प्रदर्शन करके अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है।

    पिछली WTC साइकिलों के नतीजे बताते हैं कि फाइनल में पहुंचने के लिए कोई एक स्थायी अंक प्रतिशत तय नहीं है। 2021-23 चक्र में भारत 58.80 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरे और ऑस्ट्रेलिया 66.67 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर रहा था। 2023-25 चक्र में दक्षिण अफ्रीका ने 69.44 और ऑस्ट्रेलिया ने 67.54 प्रतिशत अंकों के साथ फाइनल के लिए क्वालिफाई किया था। ऐसे में भारत की उम्मीदें अभी कायम हैं, लेकिन सातों टेस्ट में बेहतर प्रदर्शन और प्रतिद्वंद्वी टीमों के नतीजे निर्णायक होंगे।