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  • इंग्लैंड दौरे के बाद आध्यात्मिक यात्रा पर विराट, अनुष्का संग प्रेमानंद महाराज के दर्शन

    इंग्लैंड दौरे के बाद आध्यात्मिक यात्रा पर विराट, अनुष्का संग प्रेमानंद महाराज के दर्शन


    उत्तर प्रदेश । भारतीय क्रिकेट स्टार Virat Kohli और अभिनेत्री Anushka Sharma बुधवार तड़के वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने Premanand Maharaj के नए आश्रम यमुना विहार कुंज में दर्शन कर आशीर्वाद लिया। दोनों सुबह करीब चार बजे आश्रम पहुंचे और सादगी के साथ नंगे पैर भीतर गए। लगातार बारिश के कारण रास्ते में कीचड़ था, ऐसे में विराट पूरे रास्ते अनुष्का का हाथ थामे चलते दिखाई दिए।

    आश्रम पहुंचने पर प्रेमानंद महाराज के शिष्यों ने दोनों का स्वागत किया। विराट और अनुष्का करीब एक घंटे तक आश्रम में रहे। बाहर निकलते समय विराट के माथे पर चंदन का तिलक था और उनके हाथ में प्रसाद भी दिखाई दिया। इसके बाद दोनों कार से लगभग 15 किलोमीटर दूर महाराज के गुरु हित गोविंद शरण महाराज के आश्रम पहुंचे और वहां भी दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    आश्रम के बाहर दोनों को देखने के लिए श्रद्धालुओं और प्रशंसकों की भीड़ उमड़ पड़ी। विराट और अनुष्का ने चेहरे पर मास्क पहन रखा था तथा हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया। सुरक्षा व्यवस्था के चलते किसी को उनके पास जाने की अनुमति नहीं दी गई।

    यह पहली बार नहीं है जब यह दंपती वृंदावन पहुंचा हो। दोनों अब तक आठ बार प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर चुके हैं। इस वर्ष यह उनकी चौथी यात्रा है। इससे पहले आईपीएल जीतने के बाद 2 जून को भी दोनों आश्रम पहुंचे थे, जहां उन्होंने करीब दो घंटे तक समय बिताया था।

    विराट कोहली हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज खेलने के बाद भारत लौटे हैं। तीन मैचों की सीरीज में उन्होंने 144 रन बनाए, जिसमें निर्णायक मुकाबले में 74 रन की महत्वपूर्ण पारी भी शामिल रही। क्रिकेट व्यस्तताओं के बीच उनकी यह आध्यात्मिक यात्रा चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • टी20 में 'पंजा' खोलने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने चहल, संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी

    टी20 में 'पंजा' खोलने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने चहल, संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के सबसे चतुर लेग स्पिनरों में शामिल युजवेंद्र चहल का सफर संघर्ष, जुनून और मेहनत की मिसाल है। आज बल्लेबाजों को अपनी फिरकी में फंसाने वाले चहल कभी शतरंज की बिसात पर देश का नाम रोशन करने का सपना देखते थे। आर्थिक परिस्थितियों ने उन्हें खेल बदलने पर मजबूर किया, लेकिन क्रिकेट में उन्होंने ऐसी पहचान बनाई कि उनका नाम भारतीय टीम के सफल स्पिनरों में शामिल हो गया।

    23 जुलाई 1990 को हरियाणा के जींद जिले में जन्मे युजवेंद्र चहल बचपन से ही शतरंज के प्रतिभाशाली खिलाड़ी थे। उन्होंने अंडर-12 राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप अपने नाम की और जूनियर स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

    हालांकि शतरंज में आगे बढ़ने के लिए लगातार आर्थिक सहयोग की जरूरत थी। संसाधनों की कमी के कारण उन्हें इस खेल को छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने क्रिकेट को अपना करियर बनाने का फैसला किया। शुरुआती दिनों में चहल खेतों में अभ्यास करते थे। उनकी इच्छा तेज गेंदबाज बनने की थी, लेकिन पिता की सलाह पर उन्होंने लेग स्पिन गेंदबाजी अपनाई और यही फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

    घरेलू क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग में लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर चहल को वर्ष 2016 में भारतीय टीम में जगह मिली। उन्होंने 11 जून 2016 को जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे और इसके बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया।

    चहल ने 1 फरवरी 2017 को इंग्लैंड के खिलाफ बेंगलुरु में खेले गए टी20 मुकाबले में इतिहास रच दिया। उन्होंने चार ओवर में केवल 25 रन देकर छह विकेट झटके और टी20 इंटरनेशनल में भारत की ओर से एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज बने। उनका यह प्रदर्शन आज भी भारतीय टी20 क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शनों में गिना जाता है।

    अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में चहल ने भारत के लिए 72 वनडे मैचों में 121 विकेट और 80 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 96 विकेट हासिल किए हैं। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी सटीक लाइन-लेंथ, विविधता और दबाव में विकेट निकालने की क्षमता उन्हें भारत के सबसे भरोसेमंद स्पिनरों में शामिल करती है।

    शतरंज की बिसात से क्रिकेट के मैदान तक का युजवेंद्र चहल का सफर यह साबित करता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है।

  • 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' बने जयडेन लेनोक्स, दिग्गज स्पिनरों को पछाड़कर हासिल की बड़ी उपलब्धि

    'प्लेयर ऑफ द सीरीज' बने जयडेन लेनोक्स, दिग्गज स्पिनरों को पछाड़कर हासिल की बड़ी उपलब्धि


    नई दिल्ली । वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की वनडे सीरीज में न्यूजीलैंड के युवा स्पिनर जयडेन लेनोक्स ने अपनी शानदार गेंदबाजी से सभी का ध्यान खींच लिया। हालांकि सीरीज का अंतिम मुकाबला न्यूजीलैंड हार गया, लेकिन टीम ने 3-2 से सीरीज अपने नाम की। इस सफलता में लेनोक्स की अहम भूमिका रही, जिन्होंने पूरी सीरीज में 14 विकेट लेकर ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ का पुरस्कार अपने नाम किया।

    लेनोक्स की फिरकी के सामने वेस्टइंडीज के बल्लेबाज पूरी श्रृंखला में संघर्ष करते नजर आए। पांच मुकाबलों में 14 विकेट लेने के साथ उन्होंने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली। वह अब एक द्विपक्षीय वनडे सीरीज में सर्वाधिक विकेट लेने वाले स्पिनरों की सूची में पूर्व दिग्गज गेंदबाज अनिल कुंबले, शेन वॉर्न और शाहिद अफरीदी से आगे निकल गए हैं। इन तीनों महान स्पिनरों ने अपने-अपने करियर में किसी एक द्विपक्षीय वनडे सीरीज में 13-13 विकेट लिए थे, जबकि लेनोक्स ने 14 विकेट लेकर यह आंकड़ा पार कर दिया।

    इस प्रदर्शन के साथ लेनोक्स ने श्रीलंका के स्पिनर अकिला धनंजय की भी बराबरी कर ली है। धनंजय ने वर्ष 2018 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में 14 विकेट हासिल किए थे। अब दोनों संयुक्त रूप से इस सूची में बराबरी पर हैं।

    एक द्विपक्षीय वनडे सीरीज में सर्वाधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड भारत के पूर्व लेग स्पिनर अमित मिश्रा के नाम दर्ज है, जिन्होंने एक श्रृंखला में 18 विकेट झटके थे। इस सूची में दूसरे स्थान पर भारतीय स्पिनर कुलदीप यादव हैं, जिन्होंने एक वनडे सीरीज में 17 विकेट लेने का कारनामा किया था।

    सीरीज के पांचवें और अंतिम मुकाबले में भी लेनोक्स ने शानदार गेंदबाजी की। उन्होंने 9 ओवर में केवल 35 रन देकर 3 महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए और न्यूजीलैंड को मुकाबले में बनाए रखा। हालांकि वेस्टइंडीज ने शिमरॉन हेटमायर की नाबाद 69 रन और शेरफेन रदरफोर्ड की 61 रन की बेहतरीन पारियों की बदौलत 269 रन का लक्ष्य 47.3 ओवर में हासिल कर लिया।

    लेनोक्स के लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन ने यह संकेत दिया है कि न्यूजीलैंड को सीमित ओवरों के क्रिकेट में एक भरोसेमंद स्पिनर मिल गया है। उनकी नियंत्रण भरी गेंदबाजी और विकेट निकालने की क्षमता भविष्य में टीम के लिए बड़ी ताकत साबित हो सकती है।

  • क्रिकेट जगत ने महान ऑलराउंडर सर गैरी सोबर्स को किया नमन, लॉर्ड्स वनडे से पहले रखा गया मौन

    क्रिकेट जगत ने महान ऑलराउंडर सर गैरी सोबर्स को किया नमन, लॉर्ड्स वनडे से पहले रखा गया मौन


    नई दिल्ली । क्रिकेट इतिहास के महानतम ऑलराउंडरों में शुमार सर गारफील्ड गैरी सोबर्स को रविवार को लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान में भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे तीसरे और निर्णायक वनडे मुकाबले से पहले दोनों टीमों के खिलाड़ियों, मैच अधिकारियों और मैदान पर मौजूद हजारों दर्शकों ने एक मिनट का मौन रखकर महान क्रिकेटर को अंतिम सम्मान दिया। पूरे मुकाबले के दौरान दोनों टीमों के खिलाड़ी काली पट्टी बांधकर मैदान पर उतरे।

    89 वर्ष की आयु में शुक्रवार को सर गैरी सोबर्स के निधन से पूरे क्रिकेट जगत में शोक की लहर है। वेस्टइंडीज क्रिकेट के स्वर्णिम दौर के सबसे बड़े सितारों में शामिल सोबर्स ने अपने खेल से जिस तरह दुनिया को प्रभावित किया, उसकी छाप आज भी क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में कायम है। लॉर्ड्स में दी गई यह श्रद्धांजलि उनके इसी असाधारण योगदान का सम्मान थी।

    इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर ने सोबर्स को याद करते हुए कहा कि वे वेस्टइंडीज क्रिकेट समुदाय के लिए एक महान प्रेरणा थे और अब तक के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडरों में गिने जाते हैं। आर्चर ने बताया कि कुछ महीने पहले बारबाडोस में उनकी सोबर्स से मुलाकात हुई थी और उस दौरान भी वे बेहद उत्साही और सकारात्मक नजर आए थे। उनके निधन की खबर ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से गहरा दुख पहुंचाया।

    इंग्लैंड के युवा बल्लेबाज जैकब बेथेल ने भी सर गैरी सोबर्स को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें एक असाधारण व्यक्तित्व बताया। उन्होंने कहा कि सोबर्स केवल महान क्रिकेटर ही नहीं बल्कि बेहद विनम्र इंसान भी थे। उनके साथ बिताया गया हर पल सीख और प्रेरणा से भरा रहता था। बेथेल ने कहा कि जहां भी सोबर्स मौजूद रहते थे वहां का माहौल अपने आप जीवंत हो जाता था।

    28 जुलाई 1936 को बारबाडोस के ब्रिजटाउन में जन्मे सर गैरी सोबर्स ने 1954 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। बाएं हाथ के बल्लेबाज और बहुमुखी गेंदबाज के रूप में उन्होंने दो दशकों तक वेस्टइंडीज क्रिकेट का नेतृत्व किया। 93 टेस्ट मैचों में उन्होंने 8032 रन बनाए, जिसमें 26 शतक और 30 अर्धशतक शामिल रहे। उनका सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर नाबाद 365 रन रहा, जो लंबे समय तक विश्व रिकॉर्ड भी रहा। गेंदबाजी में उन्होंने 235 टेस्ट विकेट भी अपने नाम किए और अपने हरफनमौला प्रदर्शन से क्रिकेट इतिहास में अमिट पहचान बनाई।

    सर गैरी सोबर्स प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक ओवर में लगातार छह छक्के लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज भी थे। उन्होंने यह ऐतिहासिक उपलब्धि 1968 में हासिल की थी। टेस्ट क्रिकेट में 8000 से अधिक रन और 200 से ज्यादा विकेट लेने वाले चुनिंदा महान ऑलराउंडरों में उनका नाम आज भी सम्मान के साथ लिया जाता है।

    लॉर्ड्स में भारत और इंग्लैंड के खिलाड़ियों द्वारा दी गई श्रद्धांजलि ने यह साबित कर दिया कि सर गैरी सोबर्स केवल वेस्टइंडीज ही नहीं बल्कि पूरी क्रिकेट दुनिया की अमूल्य धरोहर थे। उनका योगदान और विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

  • आईपीएल में खत्म हुआ एक स्वर्णिम अध्याय 18 साल बाद चेन्नई सुपर किंग्स से अलग हुए स्टीफन फ्लेमिंग

    आईपीएल में खत्म हुआ एक स्वर्णिम अध्याय 18 साल बाद चेन्नई सुपर किंग्स से अलग हुए स्टीफन फ्लेमिंग


    नई दिल्ली । इंडियन प्रीमियर लीग के इतिहास का एक बेहद सफल और यादगार अध्याय अब समाप्त हो गया है। पांच बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स और उसके लंबे समय तक हेड कोच रहे स्टीफन फ्लेमिंग ने 18 वर्षों की ऐतिहासिक साझेदारी को आपसी सहमति से समाप्त करने का फैसला लिया है। इस घोषणा के साथ ही आईपीएल के सबसे लंबे और सबसे सफल कोचिंग कार्यकालों में से एक का अंत हो गया। फ्रेंचाइजी ने आधिकारिक रूप से इसकी जानकारी देते हुए फ्लेमिंग के योगदान को हमेशा याद रखने की बात कही।

    स्टीफन फ्लेमिंग का चेन्नई सुपर किंग्स से रिश्ता आईपीएल के पहले सीजन वर्ष 2008 में शुरू हुआ था। उस समय वह खिलाड़ी के रूप में टीम से जुड़े थे। अगले ही वर्ष उन्होंने हेड कोच की जिम्मेदारी संभाली और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। लगभग दो दशक तक उन्होंने टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और चेन्नई सुपर किंग्स को आईपीएल की सबसे सफल और सबसे सम्मानित फ्रेंचाइजियों में शामिल कर दिया।

    फ्लेमिंग के नेतृत्व में चेन्नई सुपर किंग्स ने पांच बार आईपीएल ट्रॉफी अपने नाम की। इसके अलावा टीम ने दो बार चैंपियंस लीग टी20 का खिताब भी जीता। उनकी कोचिंग में सीएसके ने रिकॉर्ड 12 बार प्लेऑफ में जगह बनाई और 10 बार फाइनल तक का सफर तय किया। यह निरंतर सफलता उनकी रणनीति मजबूत नेतृत्व और खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराने की क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण मानी जाती है।

    चेन्नई सुपर किंग्स की मालकिन रूपा गुरुनाथ ने फ्लेमिंग की विदाई पर कहा कि उन्होंने केवल टीम को जीत दिलाने का काम नहीं किया बल्कि फ्रेंचाइजी की पहचान और संस्कृति को भी मजबूत बनाया। उन्होंने कहा कि फ्लेमिंग ने लगभग दो दशकों तक समर्पण जुनून और नेतृत्व के साथ टीम को नई दिशा दी। मैदान पर उनका सफर भले ही समाप्त हो रहा हो लेकिन वह हमेशा सुपर किंग्स परिवार और उसकी विरासत का अभिन्न हिस्सा बने रहेंगे।

    फ्रेंचाइजी के मैनेजिंग डायरेक्टर काशी विश्वनाथन ने भी फ्लेमिंग के योगदान को ऐतिहासिक बताया। उनके अनुसार फ्लेमिंग ने केवल टीम की रणनीति नहीं बनाई बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जिसमें अनुशासन निरंतरता विनम्रता और टीम भावना सबसे बड़ी पहचान बन गई। खिलाड़ियों को समझने और हर खिलाड़ी की क्षमता को निखारने की उनकी कला ने चेन्नई सुपर किंग्स को लगातार सफल बनाया। उनका प्रभाव केवल मैदान तक सीमित नहीं रहा बल्कि टीम की कार्यसंस्कृति का स्थायी हिस्सा बन गया।

    विदाई के अवसर पर स्टीफन फ्लेमिंग भी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि खेल की दुनिया में 18 वर्ष बहुत लंबा समय होता है और वह केवल आभार की भावना के साथ इस जिम्मेदारी से विदा ले रहे हैं। उनके अनुसार चेन्नई सुपर किंग्स के साथ बिताया गया समय उनके पूरे कोचिंग करियर का सबसे यादगार अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि इस दौरान टीम ने शानदार जीत हासिल की कठिन दौर का सामना किया और ऐसी अनगिनत यादें बनाई जो जीवनभर उनके साथ रहेंगी।

    फ्लेमिंग ने यह भी कहा कि चेन्नई सुपर किंग्स हमेशा उनके दिल के बेहद करीब रहेगी और भले ही अब वह टीम के हेड कोच नहीं होंगे लेकिन भविष्य में भी टीम की सफलता के लिए हमेशा शुभकामनाएं देते रहेंगे। उन्होंने फ्रेंचाइजी प्रबंधन खिलाड़ियों सहयोगी स्टाफ और करोड़ों प्रशंसकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस सफर ने उन्हें एक बेहतर कोच और बेहतर इंसान बनाया।

    स्टीफन फ्लेमिंग और चेन्नई सुपर किंग्स की यह साझेदारी आईपीएल इतिहास में हमेशा एक आदर्श उदाहरण के रूप में याद की जाएगी। लगातार सफलता स्थिर नेतृत्व और मजबूत टीम संस्कृति की जो मिसाल इस जोड़ी ने पेश की है वह आने वाले वर्षों तक फ्रेंचाइजी क्रिकेट के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि चेन्नई सुपर किंग्स फ्लेमिंग के बाद टीम की कमान किसे सौंपती है और नया दौर किस दिशा में आगे बढ़ता है।

  • महिला क्रिकेट के एक स्वर्णिम युग का अंत: इंग्लैंड की विश्व विजेता कप्तान हीदर नाइट ने किया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान

    महिला क्रिकेट के एक स्वर्णिम युग का अंत: इंग्लैंड की विश्व विजेता कप्तान हीदर नाइट ने किया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान

    नई दिल्ली । महिला क्रिकेट जगत से एक बेहद भावुक और बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ इंग्लैंड की महान और दिग्गज क्रिकेटर हीदर नाइट ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। भारत के खिलाफ ऐतिहासिक लॉर्ड्स के मैदान पर खेला जा रहा महिला टेस्ट मैच उनके 16 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मुकाबला साबित होने जा रहा है। उनके साथ ही इंग्लैंड की एक और अनुभवी खिलाड़ी टैमी ब्यूमोंट भी इस ऐतिहासिक टेस्ट मैच की समाप्ति के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को हमेशा के लिए अलविदा कह देंगी। इस तरह इंग्लैंड महिला क्रिकेट के एक बेहद सफल और स्वर्णिम युग का समापन हो रहा है।

    हीदर नाइट ने साल 2010 में इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम के लिए पदार्पण किया था और तब से लेकर अब तक वे टीम के मध्यक्रम की सबसे मजबूत रीढ़ बनी रहीं। उन्होंने अपने करियर में तीनों प्रारूपों को मिलाकर कुल 320 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले, जिसमें उन्होंने 7,994 रन बनाए। उनके नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 6 शानदार शतक और 42 अर्धशतक दर्ज हैं, जबकि अपनी उपयोगी गेंदबाजी के दम पर उन्होंने 84 विकेट भी चटकाए हैं। वह इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली महिला क्रिकेटर हैं। साल 2020 में उन्होंने टी20 विश्व कप में शतक जड़कर क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में शतक लगाने वाली इंग्लैंड की पहली महिला खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया था।

    नाइट के पूरे क्रिकेटिंग सफर का सबसे ऐतिहासिक और यादगार पल साल 2017 में आया था। उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए महिला वनडे विश्व कप के बेहद रोमांचक फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम का सपना तोड़ते हुए विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। उन्होंने साल 2016 में दिग्गज खिलाड़ी चार्लोट एडवर्ड्स के बाद टीम की कमान संभाली थी और साल 2025 तक कुल 199 मैचों में इंग्लैंड का नेतृत्व किया, जिसमें से टीम ने 134 मुकाबलों में जीत दर्ज की। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली एशेज सीरीज में पराजय के बाद उन्होंने कप्तानी छोड़ दी थी।

    अपने संन्यास की घोषणा करते हुए हीदर नाइट बेहद भावुक नजर आईं और उन्होंने कहा कि पिछले 16 वर्षों की यह यात्रा उनके लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं रही है। उन्होंने इस सफर में मिले अनुभवों, यादों और ड्रेसिंग रूम के साथियों का आभार व्यक्त किया। पिछले कुछ वर्षों में नाइट को गंभीर चोटों का भी सामना करना पड़ा, जिसमें साल 2024 के टी20 विश्व कप के दौरान पिंडली की चोट और साल 2025 में हैमस्ट्रिंग टेंडन की गंभीर चोट शामिल थी। इन बाधाओं के बावजूद उन्होंने शानदार वापसी की और हालिया टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 58 रनों की जुझारू पारी खेलकर अपनी टीम को संकट से निकाला था।

    इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्लेयर कॉनर और चेयरमैन रिचर्ड थॉम्पसन ने हीदर नाइट के योगदान को असाधारण बताते हुए उनकी प्रतिबद्धता और नेतृत्व क्षमता की जमकर सराहना की है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद हीदर नाइट अब खेल प्रशासनिक भूमिका में कदम रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्हें द हंड्रेड टूर्नामेंट की प्रसिद्ध टीम ‘लंदन स्पिरिट’ का नया जनरल मैनेजर नियुक्त किया गया है, जिसकी जिम्मेदारी वे जुलाई के अंत में शुरू होने वाले नए सीजन से संभालेंगी।

  • हेली मैथ्यूज का तूफानी शतक, आयरलैंड को 9 विकेट से रौंदकर वेस्टइंडीज ने सीरीज में बनाई बढ़त

    हेली मैथ्यूज का तूफानी शतक, आयरलैंड को 9 विकेट से रौंदकर वेस्टइंडीज ने सीरीज में बनाई बढ़त


    नई दिल्ली। ब्रेडी क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए पहले महिला वनडे मुकाबले में वेस्टइंडीज ने कप्तान हेली मैथ्यूज के शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन की बदौलत आयरलैंड को 9 विकेट से हराकर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। मैथ्यूज ने पहले गेंद से तीन महत्वपूर्ण विकेट झटके और फिर बल्ले से नाबाद 159 रन की विस्फोटक पारी खेलकर मैच को पूरी तरह एकतरफा बना दिया। उनके इस प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

    टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम ने आयरलैंड को 49 ओवर में 269 रन पर समेट दिया। आयरलैंड की ओर से विकेटकीपर बल्लेबाज एमी हंटर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 90 गेंदों में 96 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में छह चौके लगाए और शतक से केवल चार रन दूर रह गईं। कप्तान गेबी लेविस ने 39 रन, ओर्ला प्रेंडरगैस्ट ने 30 और लुइस लिटिल ने 27 रन का योगदान दिया, लेकिन कोई भी बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं बना सका।

    वेस्टइंडीज की गेंदबाजी में एफी फ्लेचर सबसे सफल रहीं। उन्होंने 10 ओवर में 49 रन देकर चार विकेट हासिल किए। कप्तान हेली मैथ्यूज ने भी शानदार गेंदबाजी करते हुए 10 ओवर में 52 रन देकर तीन विकेट लिए। जैनिलेया ग्लासगो और करिश्मा रामहरक ने एक-एक विकेट लेकर आयरलैंड की पारी को समेटने में अहम भूमिका निभाई।

    270 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज ने शुरुआत से ही मुकाबले पर पकड़ बना ली। कप्तान हेली मैथ्यूज और रीलियाना ग्रिमंड ने पहले विकेट के लिए 258 रन की रिकॉर्ड साझेदारी कर आयरलैंड की उम्मीदों को पूरी तरह खत्म कर दिया। यह महिला वनडे क्रिकेट में वेस्टइंडीज की ओर से पहले विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी बन गई।

    मैथ्यूज ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 123 गेंदों में 24 चौकों और दो छक्कों की मदद से नाबाद 159 रन बनाए। यह उनके वनडे करियर का 11वां शतक होने के साथ-साथ इस प्रारूप में उनकी अब तक की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी भी रही। दूसरी ओर रीलियाना ग्रिमंड शतक से चूक गईं और 107 गेंदों में 91 रन बनाकर आउट हुईं। उन्होंने अपनी पारी में 11 चौके लगाए। इसके बाद स्टेफनी टेलर दो रन बनाकर नाबाद लौटीं और वेस्टइंडीज ने केवल एक विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया।

    इस शानदार जीत के साथ वेस्टइंडीज ने तीन मैचों की वनडे सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। कप्तान हेली मैथ्यूज का ऑलराउंड प्रदर्शन टीम के लिए बड़ा आत्मविश्वास लेकर आया है। अब दूसरे वनडे में आयरलैंड वापसी की कोशिश करेगा, जबकि वेस्टइंडीज की नजर सीरीज अपने नाम करने पर होगी।

  • एमसीजी से पीएम मोदी का बड़ा संदेश: भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स रोडमैप लॉन्च, खेल साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार

    एमसीजी से पीएम मोदी का बड़ा संदेश: भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स रोडमैप लॉन्च, खेल साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के अंतिम दिन मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में भारत और ऑस्ट्रेलिया के खेल संबंधों को नई दिशा देने वाला भारत-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट्स कोलेबरेशन रोडमैप लॉन्च किया। इस अवसर पर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने खेलों को दोनों देशों की दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी का मजबूत आधार बताते हुए भविष्य में सहयोग को और विस्तार देने का संकल्प जताया।

    एमसीजी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के युवा खिलाड़ियों से मुलाकात की। क्रिकेट, कबड्डी और ऑस्ट्रेलियन रूल्स फुटबॉल से जुड़े खिलाड़ियों ने उनसे बातचीत की, ऑटोग्राफ लिए और सामूहिक तस्वीरें खिंचवाईं। कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेट कप्तान स्टीव वॉ और पूर्व महिला कप्तान लीसा स्टालेकर भी मौजूद रहीं।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड हर भारतीय के लिए विशेष महत्व रखता है। यहां आते ही भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट मुकाबलों की यादें ताजा हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच क्रिकेट केवल एक खेल नहीं, बल्कि साझा जुनून और मजबूत सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है।

    प्रधानमंत्री ने युवा खिलाड़ियों की ऊर्जा और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें देखकर भविष्य के चैंपियनों की झलक दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि खेल देशों को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं और भारत-ऑस्ट्रेलिया के संबंधों में खेलों की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।

    स्पोर्ट्स कोलेबरेशन रोडमैप के तहत दोनों देश क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों में भी सहयोग बढ़ाएंगे। इसमें स्पोर्ट्स ट्रेनिंग, खेल विज्ञान, तकनीक, खेल अवसंरचना, निवेश और प्रतिभा विकास जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में खेलों को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे खेलो इंडिया कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने भारत की 2036 ओलंपिक मेजबानी की महत्वाकांक्षा का भी जिक्र किया, जबकि 2032 ओलंपिक खेलों की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में होगी।

    उन्होंने यह भी घोषणा की कि बिग बैश लीग 2026-27 का उद्घाटन मुकाबला भारत के चेन्नई में आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में किसी भी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने का बड़ा अवसर है और इससे दोनों देशों के खेल संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।

    कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास जताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी खेलों के साथ-साथ शिक्षा, नवाचार और युवा विकास जैसे क्षेत्रों में भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देश खेल भावना के साथ आगे बढ़ेंगे और “हम साथ खेलेंगे, हम साथ जीतेंगे” की भावना को और मजबूत करेंगे।

  • एमसीजी से पीएम मोदी का बड़ा स्पोर्ट्स विजन: चेन्नई में होगा बीबीएल मुकाबला, भारत-ऑस्ट्रेलिया ने लॉन्च किया नया रोडमैप

    एमसीजी से पीएम मोदी का बड़ा स्पोर्ट्स विजन: चेन्नई में होगा बीबीएल मुकाबला, भारत-ऑस्ट्रेलिया ने लॉन्च किया नया रोडमैप


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के अंतिम दिन मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में आयोजित विशेष कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ भारत और ऑस्ट्रेलिया के खेल संबंधों को नई मजबूती देने वाली कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इस दौरान दोनों देशों ने क्रिकेट से लेकर खेल विज्ञान, युवा विकास और खेल उद्योग तक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

    सबसे बड़ी घोषणा बिग बैश लीग (बीबीएल) को लेकर हुई। दोनों प्रधानमंत्रियों ने बताया कि 12 दिसंबर को बीबीएल के 16वें सीजन का उद्घाटन मुकाबला चेन्नई के एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाएगा। यह मुकाबला मेलबर्न रेनेगेड्स और पर्थ स्कॉर्चर्स के बीच होगा। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास में पहली बार बिग बैश लीग का कोई मैच विदेशी धरती पर आयोजित किया जाएगा, जिसे दोनों देशों के खेल संबंधों के लिए ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

    एमसीजी में प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न खेलों में भाग लेने वाले युवा खिलाड़ियों से भी मुलाकात की। उन्होंने क्रिकेट, कबड्डी और ऑस्ट्रेलियन रूल्स फुटबॉल खेल रहे बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि खेल लोगों और देशों को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में दोनों देश युवा प्रतिभाओं के विकास, खेल प्रशिक्षण, इंफ्रास्ट्रक्चर और खेल विज्ञान के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे।

    कार्यक्रम के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त रूप से स्पोर्ट्स कोलैबोरेशन रोडमैप भी लॉन्च किया। इस पहल के तहत खेल प्रशिक्षण, स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी, खेल विज्ञान, निवेश और खेल उद्योग में सहयोग को नई दिशा दी जाएगी। साथ ही दोनों देशों के युवा खिलाड़ियों के लिए यूथ स्पोर्ट्स फेस्टिवल आयोजित करने की भी घोषणा की गई, जिससे खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव और सीखने का बेहतर अवसर मिलेगा।

    एमसीजी कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ और पूर्व महिला कप्तान लीसा स्थालेकर भी मौजूद रहीं। प्रधानमंत्री मोदी ने स्टीव वॉ के साथ मुलाकात कर तस्वीर खिंचवाई, जबकि लीसा स्थालेकर ने प्रधानमंत्री का ऑटोग्राफ लिया। प्रधानमंत्री ने शेन वॉर्न स्टैंड का भी दौरा किया और हाल ही में महिला टी20 विश्व कप जीतने पर ऑस्ट्रेलियाई टीम को बधाई दी।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक की मेजबानी का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया 2032 ब्रिस्बेन ओलंपिक की मेजबानी करेगा। ऐसे में दोनों देशों के पास खेल, खेल उद्योग और युवा विकास के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग के व्यापक अवसर मौजूद हैं। यह पहल भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी को खेल कूटनीति के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • विराट संग क्रिकेट खेलना चाहते हैं नोवाक जोकोविच: बोले- भारत आकर कोहली से सीखूंगा बैटिंग तकनीक

    विराट संग क्रिकेट खेलना चाहते हैं नोवाक जोकोविच: बोले- भारत आकर कोहली से सीखूंगा बैटिंग तकनीक


    नई दिल्ली । दुनिया के महान टेनिस खिलाड़ियों में शामिल नोवाक जोकोविच ने भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली की जमकर तारीफ करते हुए कहा है कि वह जल्द भारत आने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने अपनी इच्छा जाहिर की कि भारत दौरे के दौरान वह विराट कोहली के साथ क्रिकेट और टेनिस दोनों खेलना चाहेंगे। जोकोविच ने कहा कि उनके मन में विराट और भारतीय क्रिकेट के प्रति बेहद सम्मान है और वह भारत आकर इस दोस्ती को और मजबूत बनाना चाहते हैं।

    एक बातचीत के दौरान जोकोविच ने कहा कि वह लंबे समय से भारत आने की योजना बना रहे हैं और इस संबंध में विराट कोहली से भी चर्चा हो चुकी है। उन्होंने कहा कि विराट केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के सबसे बड़े खेल सितारों में शामिल हैं। यदि उन्हें भारत आने का अवसर मिला तो वह चाहेंगे कि विराट उनके मेजबान बनें और उन्हें देश की संस्कृति तथा प्रमुख स्थानों से परिचित कराएं।

    सर्बिया के रहने वाले जोकोविच ने बताया कि उनके देश में क्रिकेट लोकप्रिय खेल नहीं है, लेकिन उनकी टीम के कुछ सदस्य ब्रिटेन से हैं और उन्हें क्रिकेट का काफी शौक है। इसी वजह से पिछले कई वर्षों में उन्होंने क्रिकेट को समझने और उसके नियम सीखने की कोशिश की है। हालांकि उन्होंने मुस्कुराते हुए स्वीकार किया कि उनकी क्रिकेट तकनीक अभी भी बहुत बेहतर नहीं है और उन्हें उम्मीद है कि विराट कोहली उनकी बैटिंग तकनीक और बैट स्विंग सुधारने में मदद करेंगे।

    जोकोविच ने कहा कि विराट कोहली की खेल भावना, अनुशासन और मैदान पर समर्पण उन्हें हमेशा प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट ने विश्व खेल जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है और उसके लिए उनके मन में विशेष सम्मान है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत आकर विराट के साथ समय बिताना उनके लिए यादगार अनुभव होगा।

    इस बीच जोकोविच ने विंबलडन में भी शानदार प्रदर्शन जारी रखा है। उन्होंने चौथे दौर के मुकाबले में रोमन सफीउलिन को हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। इस जीत के साथ उन्होंने विंबलडन पुरुष एकल में सबसे अधिक जीत दर्ज करने का नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। लगातार नौवीं बार विंबलडन के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाले जोकोविच ने अपनी इस उपलब्धि को बेहद खास बताया।

    उन्होंने कहा कि विंबलडन उनके लिए केवल एक टूर्नामेंट नहीं बल्कि बचपन का सपना है। बचपन से ही वह यहां चैंपियन बनने और दुनिया का नंबर एक खिलाड़ी बनने का सपना देखते थे। सात बार विंबलडन का खिताब जीतना और इतने वर्षों तक लगातार शीर्ष स्तर पर खेलना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि सेंटर कोर्ट पर खेलने का अनुभव हमेशा उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा और आत्मविश्वास देता है तथा वह इस वर्ष भी खिताब जीतने की पूरी कोशिश करेंगे।

    अब क्वार्टर फाइनल में जोकोविच का मुकाबला फेलिक्स ऑगर अलियासिमे और एलेजांद्रो डेविडोविच फोकिना के बीच होने वाले विजेता से होगा। टेनिस प्रेमियों की नजर एक बार फिर इस दिग्गज खिलाड़ी के अगले मुकाबले पर टिकी हुई है।