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  • कच्चे तेल के उछाल और महंगाई की चिंता से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 78,154 पर बंद; निफ्टी भी फिसला

    कच्चे तेल के उछाल और महंगाई की चिंता से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 78,154 पर बंद; निफ्टी भी फिसला


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल और बढ़ती महंगाई की चिंता के बीच दबाव में नजर आया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 388.19 अंक यानी 0.49 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,154.25 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 112.10 अंक यानी 0.46 प्रतिशत फिसलकर 24,471.70 के स्तर पर पहुंच गया। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा लेकिन कारोबारी सत्र के आखिरी हिस्से में बिकवाली का दबाव बढ़ गया। निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों के साथ ही वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर रही। कच्चे तेल में तेजी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। तेल महंगा होने पर कंपनियों की लागत बढ़ने के साथ महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है और यही चिंता बाजार के सेंटीमेंट पर हावी रही।

    सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो एफएमसीजी और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 1.17 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 0.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ दिन के प्रमुख कमजोर सेक्टर रहे। इसके अलावा निफ्टी मेटल में 0.95 प्रतिशत निफ्टी इन्फ्रा में 0.86 प्रतिशत निफ्टी कमोडिटीज में 0.84 प्रतिशत निफ्टी कंजप्शन में 0.63 प्रतिशत निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.56 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.55 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स भी 0.44 प्रतिशत कमजोर रहा। इन सेक्टरों में बिकवाली ने बाजार की कुल कमजोरी को और बढ़ाया।

    हालांकि बाजार में कुछ ऐसे सेक्टर भी रहे जिन्होंने गिरावट को सीमित करने का काम किया। निफ्टी फार्मा 1.02 प्रतिशत की मजबूती के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख इंडेक्स में रहा। निफ्टी आईटी में 0.61 प्रतिशत निफ्टी हेल्थकेयर में 0.32 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.08 प्रतिशत की बढ़त रही। इससे संकेत मिला कि निवेशकों ने बाजार में जोखिम बढ़ने के बावजूद चुनिंदा रक्षात्मक और मजबूत कंपनियों में खरीदारी बनाए रखी।

    लार्जकैप शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप में भी कारोबार मिला-जुला रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 11.85 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 63,843.85 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 43.20 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,857.15 पर पहुंच गया। सेंसेक्स में इटरनल इन्फोसिस टाइटन एचसीएल टेक और टीसीएस बढ़त के साथ बंद होने वाले प्रमुख शेयरों में रहे। इसके विपरीत अल्ट्राटेक सीमेंट एक्सिस बैंक इंडिगो भारती एयरटेल बजाज फाइनेंस पावर ग्रिड आईटीसी एमएंडएम टाटा स्टील एचयूएल एशियन पेंट्स बजाज फिनसर्व एलएंडटी सन फार्मा मारुति सुजुकी एसबीआई ट्रेंट एचडीएफसी बैंक टेक महिंद्रा एनटीपीसी आईसीआईसीआई बैंक कोटक महिंद्रा बैंक और बीईएल समेत कई दिग्गज शेयरों में गिरावट रही।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों को एक बार फिर महंगाई और ब्याज दरों के संभावित जोखिमों को लेकर सतर्क कर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट में संभावित व्यवधान और अमेरिका ईरान बातचीत को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। निवेशकों की नजर अब भारत और अमेरिका में आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर है क्योंकि इनके आधार पर आगे की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार नई दिशा तय कर सकता है। हालांकि विदेशी निवेश की मजबूत आवक और कंपनियों की बेहतर कमाई बाजार के लिए राहत देने वाले संकेत बने हुए हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में वैश्विक घटनाक्रम कच्चे तेल की कीमतें और महंगाई के आंकड़े भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

  • कच्चे तेल की खोज….. समुद्र मंथन योजना पर 84084 करोड़ खर्च करेगा भारत

    कच्चे तेल की खोज….. समुद्र मंथन योजना पर 84084 करोड़ खर्च करेगा भारत


    नई दिल्‍ली।
    भारत (India) एनर्जी निर्भरता (Energy Dependence) को कम करने के लिए कई बड़े कदम उठा रहा है. अब भारत ने समुद्र से कच्‍चे तेल (Crude Oil) को निकालने के लिए एक योजना शुरू किया है. इस योजना के तहत समुद्र के नीचे अधिक तेल और प्राकृतिक गैस की खोज की जाएगी. यह एक लॉन्‍गटर्म स्‍कीम है. इस प्रोग्राम का नाम ‘समुद्र मंथन’ रखा गया है.

    नेशनल आफसोर एक्‍सप्‍लोरेशन योजना (समुद्र मंथन) के तहत 84,084 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी गई है. यह खर्च वित्त वर्ष 2030-31 तक चलेगा, जिसका लक्ष्य गहरे जल क्षेत्रों में घरेलू तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है. समुद्र में उन जगहों पर तेल और गैस की खोज की जाएगी, जहां पर विशाल संसाधन मौजूद हैं और अभी तक किसी ने खोज नहीं की है।

    सरकार के अनुसार, यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस नजरिए को दर्शाती है, जिसे उन्होंने पहली बार 2025 के स्वतंत्रता दिवस भाषण में चर्चा की थी, जिसमें भारत की ऊर्जा क्षमता को उजागर करने के लिए आधुनिक युग के समुद्र मंथन का संचालन करने की बात कही गई थी।

    यह कार्यक्रम ऐसे समय में शुरू किया गया है जब भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88-89% और प्राकृतिक गैस का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है. यानी देश की ऊर्जा की बढ़ती मांग विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर है और जियो-पॉलिटिक तनाव के कारण भारत के लिए एनर्जी सप्‍लाई प्रभावित हुई है।


    इस योजना के तहत क्‍या होगा?

    भारत में कई आफशोर सेमीडेंट्र्री बेसिन हैं, जिनमें तेल और प्राकृतिक गैस मौजूद हो सकती है, लेकिन इनमें से कई अभी भी बड़े पैमाने पर अनछुए हैं क्योंकि वहां से तेल निकालना कठिन और महंगा है. इस योजना के तहत, सरकार बड़े पैमाने पर सर्वे, भूवैज्ञानिक अध्ययन, ड्रिलिंग और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे प्रमुख प्रारंभिक चरण के कार्यों के लिए धन उपलब्ध कराएगी।

    इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले भूवैज्ञानिक डेटा का उत्पादन करना है जो आशाजनक हाइड्रोकार्बन संसाधनों की पहचान कर सके और तेल-गैस निकालने में मदद कर सके. भारत के इस कदम से घरेलू स्‍तर पर तेल और गैस में बड़ा निवेश आ सकता है. साथ ही भारत का एनर्जी क्षमता मजबूत हो सकती है।


    समुद्र मंथन आखिर करेगा क्या?

    इस योजना के तहत आधुनिक टेक्‍नोलॉजी का उपयोग करते हुए उन जगहों की पहचानल की जाएगी, जहां पर तेल और गैस के होने की संभावना है. इसके बाद आशाजनक गहरे पानी और अति-गहरे पानी के क्षेत्रों में ड्रिलिंग की जाएगी. इस योजना के तहत सीमावर्ती जगहों में वैज्ञानिक ड्रिलिंग, सामान्य उत्पादन और निकासी, तेल और गैस विनिर्माण और सेवा क्षेत्र, आधुनिक टेक, डिजिटल प्रोगाम मैनेजमेंट और क्षमता निर्माण भी शामिल हैं।

    इससे क्‍या लाभ हो सकता है?
    सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से समय के साथ तेल और गैस भंडार में 600 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक तेल के बराबर मात्रा जुड़ जाएगी. हालांकि व्यावसायिक उत्पादन में अभी कई साल लगेंगे, लेकिन सफल खोजों से भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम हो सकती है, लॉन्‍गटर्म ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है, निवेश आकर्षित हो सकता है, रोजगार पैदा हो सकते हैं और देश की ऊर्जा क्षमताओं को बढ़ावा मिल सकता है।

  • अब समुद्र से निकलेगी ऊर्जा की नई ताकत, 'समुद्र मंथन' योजना से आयात बिल घटाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की तैया

    अब समुद्र से निकलेगी ऊर्जा की नई ताकत, 'समुद्र मंथन' योजना से आयात बिल घटाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की तैया


    नई दिल्ली। भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा और दूरगामी कदम उठाया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की नई समुद्र मंथन योजना का उद्देश्य देश में गहरे समुद्री क्षेत्रों में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को नई रफ्तार देना है। सरकार का मानना है कि इस महत्वाकांक्षी योजना से आने वाले वर्षों में भारत की विदेशी तेल और गैस पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत बनेगी।

    भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। हर साल देश को कच्चे तेल के आयात पर करीब 144 अरब डॉलर यानी लगभग 13 लाख करोड़ रुपए खर्च करने पड़ते हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार चढ़ाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल आयात आधारित व्यवस्था पर लंबे समय तक निर्भर रहना देश के लिए सुरक्षित विकल्प नहीं हो सकता। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए सरकार ने घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने पर फोकस किया है।

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में 84084 करोड़ रुपए की लागत वाली राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना समुद्र मंथन को मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी और इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा ऑफशोर तेल एवं गैस अन्वेषण अभियान माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य केवल नए भंडार तलाशना नहीं बल्कि ऐसा मजबूत तंत्र तैयार करना है जो भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की नींव रख सके।

    योजना के तहत बेहतर भू वैज्ञानिक आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा ताकि संभावित तेल और गैस क्षेत्रों की सटीक पहचान हो सके। साथ ही जोखिम साझा करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी जिससे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां अधिक निवेश के लिए आगे आएं। साझा बुनियादी ढांचे और घरेलू विनिर्माण क्षमता को भी बढ़ावा दिया जाएगा ताकि अन्वेषण और उत्पादन की लागत कम हो तथा परियोजनाओं का क्रियान्वयन तेज हो सके।

    सरकार का कहना है कि वर्ष 2014 के बाद से हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में कई बड़े सुधार किए गए हैं। पहले जिन क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज की अनुमति नहीं थी उनमें से 99 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रों को खोल दिया गया है। इससे भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र के 10 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक हिस्से में पहली बार अन्वेषण का रास्ता साफ हुआ है। इसके अलावा प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट की जगह रेवेन्यू शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट लागू कर प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और सरल बनाया गया है।

    सरकार ने ऑयलफील्ड्स रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट संशोधन अधिनियम 2025 और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियम 2025 जैसे सुधारों के जरिए कानूनी और नियामकीय ढांचे को भी आधुनिक बनाया है। कारोबार करने में आसानी बढ़ाने विवाद समाधान को मजबूत करने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए कई नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। वहीं ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के प्रदर्शन मूल्यांकन में भी अब तेल और गैस खोज गतिविधियों को अधिक महत्व दिया जाएगा।

    सरकार का विश्वास है कि समुद्र मंथन योजना केवल घरेलू उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी विदेशी मुद्रा की बचत होगी आयात बिल में कमी आएगी और देश आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर अधिक तेजी से आगे बढ़ सकेगा। वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में यह योजना भारत के ऊर्जा भविष्य को मजबूत बनाने वाली एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल साबित हो सकती है।

  • हूती नाकेबंदी के बीच भारत के लिए राहत, सऊदी तेल लेकर लाल सागर से सुरक्षित निकले दो टैंकर

    हूती नाकेबंदी के बीच भारत के लिए राहत, सऊदी तेल लेकर लाल सागर से सुरक्षित निकले दो टैंकर


    नई दिल्ली । यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब की तेल आपूर्ति पर नाकेबंदी की घोषणा के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर भारत आ रहे दो बड़े तेल टैंकर लाल सागर के संवेदनशील क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकल गए हैं। इससे फिलहाल भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर तत्काल किसी बड़े असर की आशंका कम हो गई है, हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है।

    सूत्रों के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) द्वारा किराए पर लिया गया सुएजमैक्स श्रेणी का टैंकर अमेजन सऊदी अरब के यनबू बंदरगाह से करीब 10 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर रवाना हुआ था। वहीं मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) के लिए अफ्रामैक्स श्रेणी का टैंकर रोडोस लगभग 7 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है। दोनों जहाज 20 जुलाई के आसपास यनबू बंदरगाह से निकले थे और शुरुआत में स्वेज नहर की दिशा में आगे बढ़े।

    हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी तेल आपूर्ति को निशाना बनाने की चेतावनी के बाद दोनों टैंकरों ने सुरक्षा कारणों से अपनी लोकेशन बताने वाला ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर दिया और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के रास्ते लाल सागर से बाहर निकल गए। यह कदम समुद्री सुरक्षा के लिहाज से एहतियात के तौर पर उठाया गया, क्योंकि हाल के महीनों में इस क्षेत्र में कई व्यापारिक जहाजों पर हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

    लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माने जाते हैं। एशिया और यूरोप के बीच बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य सामान इसी रास्ते से भेजा जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव या नाकेबंदी अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर सीधा असर डाल सकती है।

    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है और सऊदी अरब उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। इसलिए इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा भारतीय अर्थव्यवस्था, ईंधन कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकती है। फिलहाल दोनों टैंकरों के सुरक्षित आगे बढ़ने से तत्काल आपूर्ति बाधित होने का खतरा टल गया है।

    हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या लाल सागर के समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक खतरा बना रहता है, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। इससे भारत जैसे आयातक देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक आपूर्ति और समुद्री मार्गों का उपयोग किया जा सके।

  • अमेरिका-ईरान तनाव नरम पड़ते ही फिसले कच्चे तेल के दाम, एक हफ्ते की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज

    अमेरिका-ईरान तनाव नरम पड़ते ही फिसले कच्चे तेल के दाम, एक हफ्ते की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज


    वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों की कीमतें करीब एक सप्ताह के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं। अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरान के खिलाफ प्रस्तावित हवाई कार्रवाई फिलहाल टालने से कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बढ़ी है, जिससे तेल आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंताएं कुछ कम हुई हैं।

    सोमवार को ब्रेंट क्रूड 8.42 डॉलर यानी 8.7 फीसदी टूटकर 88.36 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 17 जुलाई के बाद का सबसे निचला स्तर है। वहीं WTI क्रूड 6.70 डॉलर यानी 7.5 फीसदी गिरकर 82.61 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो 16 जुलाई के बाद का न्यूनतम स्तर माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई फिलहाल रोकने के फैसले से बाजार में राहत का माहौल बना है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद भी मजबूत हुई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर देखने को मिला।

    ट्रंप ने कूटनीति को दी प्राथमिकता

    संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को और समय देने के उद्देश्य से सैन्य कार्रवाई स्थगित करने का फैसला किया है। ट्रंप ने भी कहा कि दोनों देशों के बीच वार्ता सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और समझौते की संभावना बनी हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहे तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।

    सऊदी और रूस से जुड़ी घटनाओं पर भी नजर

    इस बीच सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली ने इराक की ओर से भेजे गए ड्रोन को मार गिराया। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के यनबू तेल निर्यात केंद्र से जुड़ी आपूर्ति लाइनों को निशाना बनाने का दावा किया है। दूसरी ओर, रूस के ब्लैक सी स्थित प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल पर ड्रोन हमलों से कजाकिस्तान के तेल उत्पादन पर भी असर पड़ा, हालांकि बाद में कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम ने टर्मिनल से तेल लोडिंग फिर शुरू होने की पुष्टि की।

    बाजार में बनी रह सकती है अस्थिरता

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही फिलहाल तनाव कम होता दिखाई दे रहा हो, लेकिन जब तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हो जाता, तब तक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। भू-राजनीतिक घटनाक्रम और तेल आपूर्ति की स्थिति आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।

  • पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका से और महंगा हुआ कच्चा तेल, बेंट क्रूड 101 डॉलर के पार

    पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका से और महंगा हुआ कच्चा तेल, बेंट क्रूड 101 डॉलर के पार


    नई दिल्ली।
    अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग और खाड़ी के देशों से क्रूड ऑयल की ग्लोबल सप्लाई बाधित होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड दो महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया। आज ब्रेंट क्रूड तेजी दिखाते हुए 101 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर गया। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी आज 92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ने आज 1.16 डॉलर प्रति बैरल की उछाल के साथ 95.23 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। ट्रेडिंग शुरू होने के बाद इसकी कीमत उछल कर 101.01 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले दो महीने के दौरान ब्रेंट क्रूड का ये सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि बाद में इसकी कीमत में मामूली गिरावट भी आई। भारतीय समय के मुताबिक रात 8:30 बजे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 6.59 डॉलर प्रति बैरल यानी 7.01 प्रतिशत की तेजी के साथ 100.66 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

    उल्लेखनीय है कि दो महीने पहले 24 मई को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 94.92 डॉलर प्रति बैरल से लेकर 96.30 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति होने की उम्मीद की वजह से क्रूड ऑयल की कीमत में गिरावट का रुख बन गया था, जिसकी वजह से एक जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंड क्रड 71.44 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ गया था। हालांकि छह जुलाई के बाद इसकी कीमत में एक बार फिर तेजी का रुख बन गया।

    ब्रेंट क्रूड की तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड ने आज 0.90 डॉलर प्रति बैरल की बढ़त के साथ 87.73 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से आज के कारोबार की शुरुआत की। दिन के कारोबार में डब्ल्यूटीआई क्रूड उछल कर 92.15 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि बाद में इसकी कीमत में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई। भारतीय समय के मुताबिक शाम 8:30 बजे अंतरराष्ट्रीय बाजार में डब्ल्यूटीआई क्रूड 5.20 डॉलर प्रति बैरल यानी 5.99 प्रतिशत की तेजी के साथ 92.03 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

    आपको बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल हो जाने, सीजफायर खत्म होने और दोनों देशों द्वारा एक दूसरे के ठिकानों पर लगातार हमला करने की वजह से कच्चे तेल की कीमत में लगातार तेजी का रुख बना हुआ है। पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 87 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर एक महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था। इसी तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 81 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के ऊपर चला गया था। इसके बाद तीन दिन तक सुस्ती का माहौल बना रहा, लेकिन पिछले पांच ट्रेडिंग सेशन से कच्चे तेल की कीमत में एक बार फिर तेजी का रुख बन गया है, जिसकी वजह से आज इसने पिछले दो महीने के सबसे ऊंचे स्तर को पार कर लिया है।

    जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ रहे तनाव की वजह से एक बार फिर कच्चे तेल की सौ डॉलर के स्तर के ऊपर जा सकती है। कच्चे तेल की कीमत मे होने वाली बढ़ोतरी भारत जैसे कच्चे तेल के आयातक देश की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित कर सकती है। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के एक्जेक्यूटिव डायरेक्टर अनिल भंसाली का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक तेज बनी रही तो भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट काफी बढ़ सकता है। इसके साथ ही देश का इंपोर्ट बिल भी लक्ष्य से काफी अधिक हो सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमत के कारण फॉरेन कैपिटल आउटफ्लो (विदेशी पूंजी की निकासी) भी तेज हो सकता है, जिसके कारण भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले कमजोर हो सकती है।

  • ईरान-अमेरिका तनाव का भारत पर असर, बढ़ा आयात खर्च, जून में व्यापार घाटा 30.4 अरब डॉलर पर पहुंचा

    ईरान-अमेरिका तनाव का भारत पर असर, बढ़ा आयात खर्च, जून में व्यापार घाटा 30.4 अरब डॉलर पर पहुंचा


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारत का आयात बिल बढ़ गया है। इसका सीधा असर देश के व्यापार घाटे पर पड़ा है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर करीब 30.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहा और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो भारत पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

    महंगे तेल ने बढ़ाया आयात खर्च
    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश के आयात खर्च पर पड़ता है। जून महीने में कच्चे तेल का आयात 40 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 19.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके पीछे मध्य-पूर्व में बढ़ा तनाव और सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    इसके अलावा खाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान और मशीनरी के आयात में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके चलते जून में भारत का कुल आयात बढ़कर 70.8 अरब डॉलर हो गया।

    निर्यात बढ़ा, लेकिन घाटे पर नहीं लगी लगाम
    भारत के लिए राहत की बात यह रही कि जून में निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई। देश का कुल निर्यात करीब 40.4 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की तुलना में बेहतर प्रदर्शन है।

    इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां और रसायनों की विदेशी मांग मजबूत रही। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में लगातार सुधार देखा गया, वहीं हीरे और आभूषणों के निर्यात में भी बढ़ोतरी हुई। हालांकि, आयात में हुई तेज वृद्धि के मुकाबले निर्यात की रफ्तार कम रही, जिसके कारण व्यापार घाटा बढ़ गया।

    आम लोगों पर क्या हो सकता है असर?
    व्यापार घाटे में बढ़ोतरी का असर केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता। यदि कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ने से कंपनियां अपने उत्पादों के दाम बढ़ा सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। इसी वजह से सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    आगे की चुनौती और सरकार की रणनीति
    आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो भारत का आयात बिल ऊंचा बना रह सकता है। इससे चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। सरकार फिलहाल निर्यात बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों में जुटी है। इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में बढ़ता निर्यात सकारात्मक संकेत दे रहा है।

    हालांकि, भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए वैश्विक बाजार की स्थिति अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक हालात देश की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • सऊदी अरब की ऐतिहासिक तेल कटौती, 20 साल की सबसे बड़ी कीमत गिरावट से भारत को मिल सकती है बड़ी राहत

    सऊदी अरब की ऐतिहासिक तेल कटौती, 20 साल की सबसे बड़ी कीमत गिरावट से भारत को मिल सकती है बड़ी राहत


    नई दिल्ली । सऊदी अरब ने वैश्विक तेल बाजार में बड़ा कदम उठाते हुए एशियाई ग्राहकों के लिए अपने प्रमुख अरब लाइट क्रूड की कीमत में अगस्त 2026 से प्रभावी ऐतिहासिक कटौती का ऐलान किया है। सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कमी की है, जिसे पिछले दो दशकों की सबसे बड़ी कटौती माना जा रहा है। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय ऑयल मार्केट में हलचल मचा दी है और भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ा दी है।

    क्यों घटाई गई कीमत?

    तेल बाजार में हाल के दिनों में वैश्विक मांग कमजोर हुई है, जबकि आपूर्ति लगातार बढ़ रही है। इजरायल-ईरान तनाव कम होने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। इसी बीच ओपेक प्लस देशों ने भी उत्पादन बढ़ाने पर सहमति बनाई है, जिससे बाजार में सप्लाई और बढ़ गई है। इन परिस्थितियों को देखते हुए सऊदी अरब ने एशियाई बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने के लिए कीमतों में बड़ी कटौती की है।

    भारत को क्या होगा फायदा?

    भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है और सऊदी अरब उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। ऐसे में सऊदी की इस कीमत कटौती का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई स्तरों पर दिखाई दे सकता है।

    सबसे पहले, भारत का तेल आयात बिल कम हो सकता है, जिससे चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) पर दबाव घटेगा। विदेशी मुद्रा भंडार पर बोझ कम होने और रुपये को मजबूती मिलने की भी संभावना है।

    यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे रहती हैं, तो इसका लाभ घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी के रूप में भी मिल सकता है। हालांकि, खुदरा ईंधन कीमतों में बदलाव सरकार की कर नीति और तेल विपणन कंपनियों के मूल्य निर्धारण पर भी निर्भर करेगा।

    महंगाई पर भी पड़ सकता है असर

    कच्चा तेल सस्ता होने से परिवहन लागत घट सकती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों, औद्योगिक उत्पादों और लॉजिस्टिक्स पर पड़ता है। इससे महंगाई नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही तेल विपणन कंपनियों के मुनाफे में भी सुधार होने की संभावना जताई जा रही है।

    एशियाई बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

    विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब के इस फैसले के बाद अन्य तेल निर्यातक देशों पर भी कीमतों में प्रतिस्पर्धी बदलाव का दबाव बढ़ सकता है। इससे एशियाई बाजार में खरीदारों को बेहतर शर्तों पर कच्चा तेल मिलने की संभावना बनेगी। अगर वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारत सहित कई आयातक देशों को आने वाले महीनों में आर्थिक राहत मिल सकती है।

  • कच्चा तेल 60 डॉलर तक गिरने का अनुमान, पेट्रोल-डीजल के सस्ते होने की उम्मीद, जानें आज के ताजा रेट

    कच्चा तेल 60 डॉलर तक गिरने का अनुमान, पेट्रोल-डीजल के सस्ते होने की उम्मीद, जानें आज के ताजा रेट


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर राहत की उम्मीदें बढ़ी हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों इंडियन ऑयल, HPCL और भारत पेट्रोलियम ने 6 जुलाई की सुबह 6 बजे नए रेट जारी किए, जिनमें पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसी तरह सीएनजी के दाम भी स्थिर बने हुए हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.55% की गिरावट के साथ 71.72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कीमतों में और गिरावट संभव है। सिटीग्रुप इंक ने अनुमान जताया है कि साल के अंत तक कच्चा तेल 60 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है, जिससे ईंधन की कीमतों में राहत मिल सकती है।

    वैश्विक स्तर पर तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ओपेक देशों ने अगले महीने के लिए उत्पादन कोटे में मामूली बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व में सात देशों ने मिलकर उत्पादन में 1,88,000 बैरल प्रति दिन की वृद्धि पर सहमति जताई है।

    दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में दूसरी तिमाही के दौरान लगभग 30% की गिरावट दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक अंतरिम शांति समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से तेल परिवहन फिर से शुरू होने का रास्ता साफ हुआ है, हालांकि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।

    पेट्रोल-डीजल के ताज़ा रेट (6 जुलाई)
    सरकारी पंपों पर ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
    दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12, डीजल ₹95.20
    लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05, डीजल ₹99.28
    अयोध्या: पेट्रोल ₹102.04, डीजल ₹99.27
    भोपाल: पेट्रोल ₹114.65, डीजल ₹99.74
    इंदौर: पेट्रोल ₹114.61, डीजल ₹99.70
    कोलकाता: पेट्रोल ₹113.51, डीजल ₹99.82
    पटना: पेट्रोल ₹112.70, डीजल ₹99.87

    CNG के रेट भी स्थिर
    CNG की कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। IGL के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में CNG ₹83.09 प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। गुरुग्राम में यह ₹88.12, नोएडा और गाजियाबाद में ₹91.70 प्रति किलोग्राम पर बनी हुई है।

    अन्य शहरों में भी रेट लगभग स्थिर रहे—
    मुजफ्फरनगर, मेरठ, शामली: ₹91.58
    रेवाड़ी: ₹87.70
    करनाल: ₹87.43
    कैथल: ₹88.43
    कानपुर, हमीरपुर, फतेहपुर: ₹94.42
    अजमेर, पाली, राजसमंद: ₹92.44
    महोबा, बांदा, चित्रकूट: ₹89.42
    हापुड़: ₹92.70
    ग्रेटर नोएडा: ₹91.70

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की गिरावट जारी रहती है, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी कमी देखने को मिल सकती है।

  • कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी…. 70 डॉलर पर आए दाम, जानें पेट्रोल-डीजल के आज के रेट

    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी…. 70 डॉलर पर आए दाम, जानें पेट्रोल-डीजल के आज के रेट


    नई दिल्ली।
    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट (Decline Crude Oil Prices) के बीच आज 30 जून को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (Oil Marketing Companies) ने पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel Rates) के नए रेट जारी कर दी हैं। देश भर में ईंधन की कीमतें स्थिर हैं। दूसरी ओर अमेरिकी WTI क्रूड 0.83 डॉलर सस्ता होकर 70.16 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। वहीं ब्रेंट क्रूड भी 1 प्रतिशत से अधि टूटकर 72.40 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है।

    एक अच्छी खबर यह है कि मॉर्गन स्टेनली ने तेल की कीमतों का अनुमान घटा दिया है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही उम्मीद से जल्दी सामान्य हो रही है। वहीं, अमेरिका से मजबूत सप्लाई और चीन की कमजोर मांग के कारण बाजार में सरप्लस का खतरा बढ़ गया है।


    70 डॉलर पर आएगा कच्चा तेल

    ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक बैंक ने अपने विश्लेषकों मार्टिन रैट्स, शार्लोट फिर्किंस और एमी गोवर के हवाले से सोमवार को जारी एक नोट में कहा कि उसने 2026 की तीसरी तिमाही के लिए ब्रेंट क्रूड के दाम का अनुमान 15 डॉलर घटाकर 75 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है।

    उम्मीद है कि अगले साल की तीसरी तिमाही तक कीमतें और गिरकर 70 डॉलर पर आ जाएंगी। उन्होंने कहा, “होर्मुज के रास्ते निर्यात उम्मीद से तेजी से सुधर रहा है।” हालांकि, सप्ताहांत में संघर्ष बढ़ने के बाद इस रणनीतिक जलमार्ग पर यातायात धीमा हो गया था, जिसमें दो जहाजों को नुकसान पहुंचा, लेकिन इस बात के संकेत मिले हैं कि टैंकर होर्मुज से गुजरने को तैयार हैं।


    35 तेल और गैस टैंकर होर्मुज से बाहर निकले

    मॉर्गन स्टेनली ने बताया कि उसने गुरुवार को 35 तेल और गैस टैंकर होर्मुज से बाहर निकले। यह पहली बार है जब यह संख्या फरवरी में संघर्ष शुरू होने से पहले के आम स्तर (30 से 40) पर लौट आई है।

    बैंक के अनुसार, 2027 में तेल बाजार को संतुलित रखने के लिए होर्मुज से आवाजाही को केवल संघर्ष से पहले के स्तर के लगभग 65% (यानी करीब 11 से 12 लाख बैरल प्रतिदिन) तक पहुंचने की जरूरत है।


    126 डॉलर के ऊपर पहुंच गया था कच्चा तेल

    बता दें अप्रैल में ब्रेंट फ्यूचर्स 126 डॉलर के शिखर से ऊपर चले गए थे, लेकिन अब उनकी सारी बढ़त खत्म हो गई है क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच चार महीने के युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए बातचीत जारी है। सोमवार को सबसे सक्रिय सितंबर कांट्रैक्ट 73.91 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।


    आज क्या हैं पेट्रोल-डीजल के रेट?

    – अयोध्या: पेट्रोल 102.4 और डीजल 97.87 रुपये लीटर
    – लखनऊ: पेट्रोल 102.05 रुपये और डीजल 99.28 रुपये लीटर
    – पटना: पेट्रोल 112.70 रुपये और डीजल 99.87 रुपये लीटर
    – दिल्ली: पेट्रोल 102.12 और डीजल 95.20 रुपये लीटर
    – कोलकाता: पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये लीटर
    – चेन्नई: पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये लीटर
    – मुंबई: पेट्रोल 111.21 और डीजल 97.83 रुपये लीटर
    – भोपाल: पेट्रोल 114.65 रुपये और डीजल 99.74 रुपये प्रति लीटर
    – इंदौर: पेट्रोल 114.61 और डीजल की 99.70 रुपये लीटर
    – जयपुर: पेट्रोल 112.66 रुपये और डीजल 97.78 रुपये लीटर