Tag: crude oil

  • वैश्विक हलचल और घरेलू आंकड़ों के बीच निवेशकों की परीक्षा, बाजार में बढ़ सकती है हलचल

    वैश्विक हलचल और घरेलू आंकड़ों के बीच निवेशकों की परीक्षा, बाजार में बढ़ सकती है हलचल


    नई दिल्ली : भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह कई अहम संकेत लेकर आ रहा है, जहां विभिन्न घरेलू और वैश्विक कारकों का मिला-जुला असर देखने को मिल सकता है। हाल के सत्रों में बाजार ने सीमित दायरे में मजबूती दिखाई है, लेकिन आगे की राह अनिश्चितताओं से भरी हुई नजर आ रही है। निवेशकों की नजर अब उन प्रमुख पहलुओं पर टिकी है, जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

    सबसे बड़ा प्रभाव कच्चे तेल की कीमतों का बना हुआ है, जो लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। वैश्विक तनाव और आपूर्ति से जुड़ी बाधाओं के चलते तेल महंगा बना हुआ है, जिसका असर सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई को बढ़ावा देती हैं और कंपनियों के खर्च में इजाफा करती हैं, जिससे उनके मुनाफे पर दबाव बन सकता है। इसका असर बाजार के समग्र रुझान पर पड़ना तय माना जा रहा है।

    इसके साथ ही, कॉर्पोरेट जगत के तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। कई बड़ी कंपनियां अपने चौथी तिमाही के प्रदर्शन का खुलासा करने वाली हैं, जिससे निवेशकों को यह अंदाजा लगेगा कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में कंपनियों ने किस तरह प्रदर्शन किया है। खास तौर पर मुनाफे, लागत नियंत्रण और भविष्य की योजनाओं पर बाजार की नजर रहेगी। अच्छे नतीजे बाजार को सहारा दे सकते हैं, जबकि निराशाजनक प्रदर्शन निवेशकों की चिंता बढ़ा सकता है।

    आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर से जुड़े पीएमआई डेटा बाजार के लिए अहम संकेत लेकर आएंगे। ये आंकड़े देश की आर्थिक गतिविधियों की गति को दर्शाते हैं और निवेशकों को यह समझने में मदद करते हैं कि अर्थव्यवस्था किस दिशा में बढ़ रही है। मजबूत आंकड़े सकारात्मक माहौल बना सकते हैं, जबकि कमजोर डेटा से बाजार में दबाव बढ़ सकता है।

    पिछले सप्ताह बाजार का प्रदर्शन मिश्रित रहा, हालांकि प्रमुख सूचकांक हल्की बढ़त के साथ बंद हुए। सेक्टरवार नजर डालें तो ऊर्जा, फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर में मजबूती देखने को मिली, जबकि बैंकिंग और आईटी सेक्टर दबाव में रहे। यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि बाजार में फिलहाल एकरूपता की कमी है और निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मिला-जुला रुझान देखने को मिला, जो बाजार की अनिश्चितता को दर्शाता है। निवेशक अभी बड़े जोखिम लेने से बच रहे हैं और चुनिंदा अवसरों पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

  • पेट्रोल-डीजल महंगा होने के संकेत, 4–5 रुपये तक बढ़ सकते हैं दाम, महंगाई का नया दबाव

    पेट्रोल-डीजल महंगा होने के संकेत, 4–5 रुपये तक बढ़ सकते हैं दाम, महंगाई का नया दबाव

    नई दिल्ली। ईंधन की कीमतों को लेकर एक बार फिर बाजार में हलचल बढ़ गई है। ताजा संकेतों के अनुसार आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। अनुमान लगाया जा रहा है कि दोनों ईंधनों की कीमतों में 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा हो सकता है, जिससे आम जनता पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है।

    यह संभावित वृद्धि ऐसे समय में सामने आ रही है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। वैश्विक परिस्थितियों में अस्थिरता और आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण कच्चे तेल के दामों में तेजी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है।

    ईंधन की कीमतों में लंबे समय से स्थिरता बनी हुई थी, लेकिन अब परिस्थितियों में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ने की वजह से कीमतों में संशोधन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यदि यह बदलाव लागू होता है, तो इसका असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा।

    पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने पर सबसे पहले परिवहन लागत प्रभावित होती है। इसके बाद इसका असर माल ढुलाई पर पड़ता है, जिससे बाजार में उपलब्ध हर वस्तु की कीमत बढ़ने लगती है। सब्जी, दूध, अनाज और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें भी महंगी हो सकती हैं।

    इसके अलावा कृषि क्षेत्र पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि सिंचाई पंप और अन्य उपकरणों में डीजल का उपयोग होता है। कीमत बढ़ने पर किसानों की लागत बढ़ जाती है, जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। इसी तरह डिलीवरी सेवाएं और छोटे व्यवसाय भी बढ़ती लागत से प्रभावित होते हैं।

    हालांकि अभी तक इस संभावित बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन बाजार के रुझान और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां इस ओर संकेत कर रही हैं कि आने वाला समय ईंधन की कीमतों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव और आर्थिक नीतियों में बदलाव आने वाले दिनों में इस स्थिति को और स्पष्ट करेंगे। यदि कीमतों में वृद्धि होती है, तो इसका असर सीधे तौर पर आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ेगा।

    फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है और सभी की नजरें आने वाले आर्थिक संकेतों पर टिकी हैं। ईंधन की कीमतों में संभावित बदलाव एक बार फिर महंगाई की दिशा तय कर सकता है और आम जीवन को प्रभावित कर सकता है।

  • कच्चे तेल के दाम आसमान पर… फिर भी भारत में अब तक नहीं बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत

    कच्चे तेल के दाम आसमान पर… फिर भी भारत में अब तक नहीं बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत


    नई दिल्ली।
    इंटरनेशनल मार्केट (International Market) में कच्चे तेल (Crude oil) के दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन सरकारी तेल कंपनियों (Government Oil Companies) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price) में पिछले 4 साल से कोई बढ़ोतरी नहीं की है। हालांकि, बीते महीने शेल इंडिया और नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल के रेट (Petrol Diesel Price) में इजाफा कर दिया था। शेल इंडिया ने पेट्रोल की कीमतों में 7.41 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 25.01 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। कंपनी ने 1 अप्रैल को रेट बढ़ाया था। उसके बाद से इस कंपनी ने भी कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। बता दें, इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंप पर आज दिल्ली में डीजल 87.67 रुपये और पेट्रोल 101.89 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है।


    नायरा एनर्जी ने भी कीमतों में किया है इजाफा (Petrol Price Today)

    26 मार्च को नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल के रेट में बढ़ोतरी कर दी थी। कंपनी ने तब पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था। मौजूदा समय में नायरा के पेट्रोल पंप पर 100.72 रुपये में पेट्रोल और डीजल 91.31 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है।


    प्रीमियम पेट्रोल का रेट 160 रुपये पहुंचा (Petrol Diesel rate today)

    कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल का रेट 149 रुपये से बढ़ाकर 160 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। वहीं, प्रीमियम डीजल का रेट 91.49 रुपये से बढ़ाकर 92.99 रुपये प्रति लीटर कर दिया है।


    HP, IOCL, BPCL के पंप पर क्या है पेट्रोल का रेट? (Petrol price in your city)

    नई दिल्ली – 94.77 रुपये
    कोलकाता – 105.41 रुपये
    मुंबई – 103.54 रुपये
    चेन्नई – 101.06 रुपये
    गुरुग्राम – 95.30 रुपये
    नोएडा – 94.77 रुपये
    बेंगलुरू – 103.96 रुपये
    भुवनेश्वर – 101.03 रुपये
    चंडीगढ़ – 94.30 रुपये
    हैदराबाद – 107.46 रुपये
    जयपुर – 105.03 रुपये
    लखनऊ – 94.73 रुपये
    भोपाल- 106.40 रुपये
    इंदौर – 106.48 रुपये


    आपके शहर में डीजल का क्या है रेट? (Diesel price in your city)

    नई दिल्ली – 87.67 रुपये
    कोलकाता – 92.02 रुपये
    मुंबई – 90.03 रुपये
    गुरुग्राम – 87.77 रुपये
    नोएडा – 87.89 रुपये
    बेंगलुरू – 90.99 रुपये
    भुवनेश्वर – 92.60 रुपये
    चंडीगढ़ – 82.45 रुपये
    हैदराबाद – 95.70 रुपये
    जयपुर – 90.49 रुपये
    लखनऊ – 87.86 रुपये
    भोपाल- 91.8 रुपये
    इंदौर- 91.9 रुपये


    कच्चे तेल की कीमतों में तूफानी तेजी (crude oil price in your city)

    युद्ध की वजह से क्रूड ऑयल का रेट लगातार बढ़ रहा है। जिसकी वजह से तेल कंपनियों पर काफी दबाव है। मौजूदा समय में इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल का रेट 100 डॉलर के पार बरकरार है।

    क्या सरकारी तेल कंपनियां भी बढ़ाएंगी रेट
    आने वाले समय में सरकारी तेल कंपनियां भी पेट्रोल और डीजल का रेट बढ़ा सकती हैं।

  • 4 साल के उच्च स्तर पर पहुंचा क्रूड…. ईरान युद्ध चरम पर था तब भी इतने नहीं बढ़े थे दाम

    4 साल के उच्च स्तर पर पहुंचा क्रूड…. ईरान युद्ध चरम पर था तब भी इतने नहीं बढ़े थे दाम


    तेहरान ।
    ईरान युद्ध (Iran War) जब चरम पर था, तब क्रूड (Crude) ने इतनी बड़ी छलांग नहीं लगाई थी। अब जब बातचीत की कोशिशें दिख रही हैं और युद्ध की रफ्तार धीमी हुई है, तब ब्रेंट क्रूड (Brent crude) उछलकर चार साल के उच्च स्तर 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। यह विरोधाभास नहीं है। तेल बाजार युद्ध की आवाज नहीं, आपूर्ति की सांस सुनता है।

    दरअसल, एक्सिओस की एक रिपोर्ट (Axios reports) आने के बाद बृहस्पतिवार को कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड 126.41 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जो 9 मार्च, 2022 के बाद इसका उच्चतम स्तर है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बृहस्पतिवार को ईरान पर सैन्य हमलों की एक शृंखला की योजनाओं के बारे में जानकारी दी जानी है। ऐसा इस उम्मीद में किया जा रहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए वापस लौट आएगा। ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका के इस रुख से संघर्ष और बढ़ सकता है, जिससे क्रूड आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट आ सकती है। 

    बाद में बिना किसी स्पष्ट कारण के ब्रेंट क्रूड में गिरावट आई और कीमतें 3.5 फीसदी गिरकर 113.89 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गईं। तेल ब्रोकर पीवीएम के तमास वर्गा ने कहा, क्रूड में यह गिरावट किसी खास घटना से जुड़ी नहीं लगती, बल्कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से बाजार में बढ़ी अस्थिरता को दर्शाती है। यह बस ट्रंप की दुनिया में ट्रेडिंग के अप्रत्याशित स्वभाव को संक्षेप में बताती है।


    डर ही नहीं बैरल भी कम

    बाजार में सिर्फ डर नहीं, असल में बैरल भी कम हैं। आईईए के आंकड़े बताते हैं, मार्च में वैश्विक तेल भंडार 8.5 करोड़ बैरल घटा है। खाड़ी के बाहर भंडार में 20.5 करोड़ बैरल की गिरावट आई। समुद्र में चल रहा तेल भी घटा है। ऑयल ऑन वाटर 10.7 करोड़ बैरल कम हुआ, क्योंकि होर्मुज के बंद होने से ट्रांजिट में मौजूद तेल 18.1 करोड़ बैरल घट गया।


    उबाल की असली वजह होर्मुज

    तेल में उबाल की असल वजह है होर्मुज। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, युद्ध से पहले होर्मुज से रोज 2 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और रिफाइंड उत्पाद निकलते थे। अप्रैल के शुरू में यह घटकर सिर्फ 38 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। वैकल्पिक रास्तों से निर्यात जरूर बढ़कर 72 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंचा, लेकिन कुल निर्यात नुकसान अब भी 1.3 करोड़ बैरल प्रतिदिन से ज्यादा है।

    केडिया कमोडिटी के प्रमुख अजय केडिया कहते हैं, यही वह आंकड़ा है, जिसने बाजार को बेचैन किया है। युद्ध रुक भी जाए, तो जहाज तुरंत नहीं चलेंगे। बीमा, रूट, बंदरगाह, लोडिंग और रिफाइनरी आपूर्ति को सामान्य होने में समय लगेगा। यही बात तेल के बाजार को परेशान कर रही है।


    आपूर्ति का प्रभावित होना भी बड़ी वजह

    अर्थवृक्ष फाइनेंशियल सर्विसेज के संस्थापक रविंद्र राव ने बताया, आपूर्ति प्रभावित होने से भी क्रूड में मजबूती दिख रही है। उनका कहना है कि ट्रंप ने साफ कहा है कि जब तक ईरान परमाणु समझौता नहीं करता, जब तक उस पर नाकेबंदी जारी रहेगी, जिससे तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है। जब बाजार को पता है कि तेल अभी नहीं मिल रहा, तो जो कॉन्ट्रैक्ट आज डिलीवरी का है, वो सबसे ज्यादा महंगा हो जाता है। रिफाइनरी और ट्रेडर्स किसी भी दाम पर खरीदने को तैयार हो जाते हैं।

  • कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई चिंता-बिकवाली के दबाव में बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट

    कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई चिंता-बिकवाली के दबाव में बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ तौर पर देखने को मिला, जहां कारोबारी सत्र के अंत में प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल बना रहा, लेकिन अंततः निवेशकों की सतर्कता और बिकवाली के दबाव ने बाजार को लाल निशान में पहुंचा दिया।

    कारोबार की शुरुआत हल्की मजबूती के साथ हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बाजार पर दबाव बढ़ता गया। निवेशकों ने जोखिम लेने के बजाय मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिसके चलते सूचकांक धीरे-धीरे नीचे आते गए। दिन के अंत तक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लगभग 0.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो यह दर्शाती है कि बाजार का मूड फिलहाल कमजोर बना हुआ है।

    इस गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम एक प्रमुख कारण रहा। वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ने के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे आर्थिक अनिश्चितता बढ़ गई। तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई और उत्पादन लागत पर पड़ता है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाते हुए बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी।

    बाजार के विभिन्न सेक्टरों में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला। धातु, बैंकिंग, रियल एस्टेट और उपभोक्ता क्षेत्र से जुड़े शेयरों में खासा दबाव रहा। इन क्षेत्रों में आई गिरावट यह संकेत देती है कि व्यापक स्तर पर निवेशकों का भरोसा डगमगाया है। हालांकि कुछ चुनिंदा सेक्टरों में हल्की बढ़त देखने को मिली, लेकिन वह समग्र गिरावट को संतुलित करने के लिए पर्याप्त नहीं रही।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई, जो यह दर्शाता है कि बाजार का दबाव केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा। व्यापक बाजार में कमजोरी का मतलब है कि निवेशकों ने सभी स्तरों पर सतर्कता अपनाई है और जोखिम कम करने की कोशिश की है।

    व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो कुछ कंपनियों के शेयरों में मजबूती जरूर देखने को मिली, लेकिन गिरावट वाले शेयरों की संख्या ज्यादा रही। यह असंतुलन बाजार की वर्तमान स्थिति को दर्शाता है, जहां सकारात्मक संकेत सीमित हैं और नकारात्मक कारक हावी हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्थिति में स्थिरता नहीं आती और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में नहीं आतीं, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए यह समय सतर्कता और सोच-समझकर फैसले लेने का है।

  • अमेरिकी नाकाबंदी से रुका निर्यात…. ईरान पुराने और कबाड़ टैंकों में स्टोर कर रहा तेल

    अमेरिकी नाकाबंदी से रुका निर्यात…. ईरान पुराने और कबाड़ टैंकों में स्टोर कर रहा तेल


    तेहरान।
    ईरान (Iran) अपने तेल (Oil) को इकट्ठा करने के लिए नए तरीके खोजने में जुटा है। अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी (American naval blockade) ने उसके निर्यात (Export) को लगभग रोक दिया है। ईरान पूरी तरह उत्पादन बंद करना नहीं चाहता। ऐसे में वह पुराने और कबाड़ टैंकों में बिना बिके तेल को भरने में जुटा है। ईरान के भीतर तेल का भंडार बढ़ने के साथ ही वह अब जंक स्टोरेज (कबाड़ भंडारण) के रूप में जाने जाने वाले पुराने स्थलों को फिर से चालू कर रहा है। वह कामचलाऊ कंटेनरों का उपयोग कर रहा है।

    इसके साथ ही रेल के जरिये चीन को कच्चा तेल भेजने की कोशिश भी कर रहा है। वह किसी टैंक, जहाज, कामचलाऊ जगह या फिर उसे जमीन के नीचे ही छोड़ने पर काम कर रहा है। ये असामान्य कदम बुनियादी ढांचे के संकट को टालने और हॉर्मुज को लेकर जारी गतिरोध में वाशिंगटन के दबाव को कम करने के लिए उठाए जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच यह युद्ध अब इस बात की होड़ बन गया कि पहले कौन झुकता है।


    रेल से भेजने की कोशिश काफी महंगी

    ईरान के तेल-निर्यातक संघ के प्रवक्ता हामिद हुसैनी के अनुसार, ईरान अब रेल के जरिये चीन को तेल भेजने की कोशिश कर रहा है। रेल मार्ग तेहरान को चीन के यीवू और शीआन शहरों से जोड़ता है। हालांकि, यह समुद्री मार्ग की तुलना में बहुत महंगा है।

    तेल न बिक पाना और उसे इकट्ठा करना देश की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डालता है। इससे वह देश बातचीत की मेज पर आने या युद्ध की स्थिति में झुकने को मजबूर हो सकता है।


    तेल रखने की जगह जल्द खत्म होगी

    रिपोर्ट के अनुसार, यदि नाकाबंदी जारी रही तो मई के मध्य तक ईरान का उत्पादन मौजूदा स्तर से आधे से भी कम (12 से 13 लाख बैरल रोज) गिर सकता है। ईरान के पास तेल रखने की जगह दो हफ्ते से भी कम समय में खत्म हो सकती है। ईरान के पास जमीन पर मौजूद तेल का भंडार नाकाबंदी के दौरान 46 लाख बैरल बढ़कर अब लगभग 4.9 करोड़ बैरल हो गया।

    1. सबसे पहले तेल को बड़े-बड़े जमीनी टैंकों में भरा जाता है। जब ये टैंक भर जाते हैं, तो वे पुराने या कबाड़ टैंकों का भी इस्तेमाल करते हैं।

    2. जब जमीन पर जगह खत्म हो जाती है, तो तेल को समुद्री जहाजों में भरकर समुद्र में ही खड़ा कर दिया जाता है। इसे फ्लोटिंग स्टोरेज कहते हैं।

    3. अधिक तेल को निकालने के लिए देश भारी छूट पर तेल बेचने लगते हैं ताकि खरीदार आकर्षित हों।

    4. अगर भंडारण की जगह बिल्कुल खत्म होने वाली हो, तो तेल के कुओं को बंद करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सबसे आखिरी और जोखिम भरा रास्ता है। क्योंकि, कुओंको दोबारा शुरू करना तकनीकी रूप से कठिन और महंगा होता है।

  • भू-राजनीतिक तनाव का असर, तेल कीमतों को लेकर नया वैश्विक अनुमान..

    भू-राजनीतिक तनाव का असर, तेल कीमतों को लेकर नया वैश्विक अनुमान..

    नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार इस समय एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर गहरा प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आए नए आकलनों में यह संकेत दिया गया है कि आने वाले समय में तेल की कीमतें पहले के अनुमान से अधिक रह सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

    मध्यपूर्व लंबे समय से विश्व ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने इस क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित किया है। तनाव बढ़ने के कारण तेल उत्पादन और परिवहन दोनों पर दबाव बढ़ा है, जिससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। इसी अनिश्चितता ने कच्चे तेल की कीमतों में संभावित वृद्धि के संकेत दिए हैं।

    नए अनुमान के अनुसार ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड दोनों की औसत कीमतों में पहले की तुलना में वृद्धि देखी जा सकती है। यह बदलाव मुख्य रूप से आपूर्ति में संभावित कमी और बाजार में बढ़ते जोखिम के कारण हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो तेल भंडार में गिरावट और तेज हो सकती है, जिससे कीमतों पर और अधिक दबाव बढ़ेगा।

    तेल बाजार में इस बदलाव का एक बड़ा कारण सप्लाई चेन में आने वाली बाधाएं भी हैं। मध्यपूर्व से होने वाली सप्लाई में कमी के कारण वैश्विक भंडार स्तर में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। यह स्थिति ऊर्जा बाजार के संतुलन को प्रभावित कर रही है और निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा रही है।

    हालांकि मांग की स्थिति में बहुत बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है, लेकिन आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा सीधे कीमतों को प्रभावित कर रही है। इसी कारण बाजार में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है और कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना लगातार बनी हुई है।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भू-राजनीतिक तनाव केवल अल्पकालिक प्रभाव ही नहीं डालता, बल्कि यह दीर्घकालिक निवेश और ऊर्जा रणनीतियों को भी प्रभावित करता है। यही कारण है कि वैश्विक बाजार में सतर्कता का माहौल देखा जा रहा है।

    दूसरी ओर, यदि आने वाले समय में स्थिति में सुधार होता है और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य होती है, तो कीमतों में स्थिरता लौटने की संभावना भी मौजूद है। लेकिन फिलहाल बाजार अनिश्चितता की स्थिति में है और हर नई घटना इसका सीधा असर ऊर्जा कीमतों पर डाल रही है।

  • US-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दामों में नरमी….

    US-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दामों में नरमी….


    तेहरान।
    यूएस-इजरायल और ईरान (US-Israel and Iran) के बीच चल रही जंग में एक बार फ‍िर से समझौते की कोश‍िश की जा रही है. शांत‍ि की उम्‍मीद में शुक्रवार को 110 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंचने वाले क्रूड ऑयल के दाम (Crude Oil Price) में ग‍िरावट देखी जा रही है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi) के उच्‍च स्‍तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुंचने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच रुकी हुई बातचीत फिर से शुरू होने की उम्‍मीद की जा रही है. इससे बाजार को मजबूती म‍िली है. दोनों देशों के बीच शांति वार्ता का यह दूसरा दौर हो सकता है. हालांकि, ईरान ने शांति वार्ता में सीधा ह‍िस्‍सा लेने से साफ मना क‍िया है।

    शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान क्रूड ऑयल का दाम चढ़कर 106 डॉलर प्रत‍ि बैरल के करीब पहुंच गया था. लेक‍िन शाम होते-होते ईरान के प्रत‍िन‍िध‍िमंडल के पाक‍िस्‍तान पहुंचने के बाद इसमें ग‍िरावट देखी गई. WTI क्रूड का दाम ग‍िरकर 94.40 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ब्रेंट क्रूड के दाम में भी नरमी देखी जा रही है और यह 105 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. 28 फरवरी को इजरायल की तरफ से ईरान पर हमला क‍िये जाने के बाद क्रूड के दाम में उठा-पटक बनी हुई है।


    तेल की कीमत में उठा-पटक बनी रहेगी

    होर्मुज बंद होने से तेल की ग्‍लोबल लेवल पर सप्‍लाई चेन टूट चुकी है. इससे आने वाले समय में भी तेल की कीमत में उठा-पटक बनी रहेगी. इससे पहले गुरुवार को भी तेल की कीमत 3% से ज्यादा बढ़ गई थीं. क्रूड ऑयल के दाम में प‍िछले पांच द‍िन से तेजी देखी जा रही थी. अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत नहीं बनी तो लड़ाई फिर से शुरू हो सकती है और तेल के दाम और ज्यादा बढ़ सकते हैं. कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है क‍ि यद‍ि स्थिति और बिगड़ी तो दाम 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं।


    भारत में नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

    सोशल मीडिया पर जारी क‍िये जा रहे दावों को खारिज करते हुए पेट्रोलियम म‍िन‍िस्‍टर ने कहा है कि भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम में इजाफा करने का फिलहाल कोई प्‍लान नहीं है. मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी करते हुए कहा गया कि फिलहाल इसे लेकर कोई योजना नहीं है. उन्होंने उन रिपोर्ट्स को फेक करार दिया, जिसमें दावे किए जा रहे हैं कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम में 25 से 28 रुपये की बढ़ोतरी कर सकती है.

    आज द‍िल्‍ली में पेट्रोल-डीजल के रेट

    – दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.71

    – मुंबईमें पेट्रोल ₹103.54, डीजल ₹90.01

    – कोलकाता में पेट्रोल ₹105.45, डीजल ₹91.81

    – चेन्नई में पेट्रोल ₹100.84, डीजल ₹92.38

  • कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से ग्लोबल मार्केट में हलचल… पेट्रोल-डीजल भी हो सकते हैं महंगे

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से ग्लोबल मार्केट में हलचल… पेट्रोल-डीजल भी हो सकते हैं महंगे


    नई दिल्ली।
    वैश्विक बाजार (Global market) में कच्चे तेल की कीमतों (Crude oil Prices) में मंगलवार को जोरदार उछाल देखने को मिला। डोनॉल्ड ट्रंप (Donald Trump) के एक बयान के बाद तेल की कीमतें करीब 5% तक बढ़ गईं, जिससे पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई। ट्रंप ने साफ कहा कि वे ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम (ceasefire) को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो अमेरिकी सेना कार्रवाई के लिए तैयार है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

    इस बयान का असर तुरंत बाजार पर दिखा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब $99.78 प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल WTI (West Texas Intermediate) भी बढ़कर लगभग $94.36 प्रति बैरल हो गया। तेल की कीमतों में यह उछाल सीधे तौर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का नतीजा है।


    क्यों बढ़ी तेल की कीमत?

    तेल की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईरान-अमेरिका तनाव है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने एक ईरानी ऑयल टैंकर को समुद्र में रोक लिया, जिससे स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई। साथ ही यह भी साफ नहीं है कि ईरान शांति वार्ता में शामिल होगा या नहीं। ऐसी अनिश्चितता के कारण निवेशकों में डर बढ़ जाता है और वे तेल जैसे कमोडिटी में पैसा लगाते हैं, जिससे कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं।


    होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर

    तेल सप्लाई के लिए दुनिया का सबसे अहम रास्ता स्ट्रेट ऑफ हार्मुज (Strait of Hormuz) भी इस तनाव से प्रभावित हुआ है। यह रास्ता दुनिया की लगभग 20% तेल और LNG सप्लाई को संभालता है, लेकिन हालात इतने खराब हैं कि पिछले 24 घंटों में यहां से सिर्फ 3 जहाज ही गुजर पाए। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बाधित रहता है, तो तेल की कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।

    दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
    तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है और ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ सकती है, यानी कि इससे महंगाई (Inflation) बढ़ सकती है। यूरोप में तो हालात को देखते हुए एयरलाइंस के लिए भी एडवाइजरी जारी करने की तैयारी हो रही है, ताकि जेट फ्यूल की कमी जैसी स्थिति से निपटा जा सके।


    रूस और यूरोप की स्थिति

    इस बीच रूस और यूरोप के बीच तेल सप्लाई को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने संकेत दिया है कि एक अहम पाइपलाइन दोबारा शुरू हो सकती है, लेकिन दूसरी तरफ खबर है कि रूस मई से कुछ सप्लाई रोक सकता है। इससे भी वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।


    आगे क्या होगा?

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रह सकता है और सप्लाई चेन बाधित हो सकती है, तो तेल की कीमतें $100 के पार भी जा सकती हैं। हालांकि, अगर कूटनीतिक बातचीत सफल रहती है, तो कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है।

  • ग्‍लोबल मार्केट में Crude Oil की कीमत में गिरावट… ट्रंप की चेतावनी भी बेअसर

    ग्‍लोबल मार्केट में Crude Oil की कीमत में गिरावट… ट्रंप की चेतावनी भी बेअसर


    नई दिल्ली।
    इंटरनेशनल मार्केट (International Market) में क्रूड ऑयल के दाम (Crude Oil Price) में उथल-पुथल मची हुई है. एक द‍िन पहले ज‍िस क्रूड के दाम में ग‍िरावट देखी जा रही थी, अगले द‍िन उसी में तेजी देखी जा रही है. दो द‍िन पहले की ही बात है जब ईरान ने कहा कि होर्मुज स्‍ट्रेट (Strait of Hormuz) को कमर्श‍ियल श‍िप के लि‍ए पूरी तरह खोल द‍िया गया है. इसके बाद क्रूड के दाम 9 प्रत‍िशत तक टूट गए. लेक‍िन डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump.) की तरफ से जब यह बयान आया क‍ि अमेरिकी नौसेना ने ईरानी झंडे वाला कार्गो जहाज को जब्‍त कर ल‍िया है. इसके बाद तेल की कीमत में तेजी देखी गई. अब फ‍िर क्रूड ऑयल के दाम में ग‍िरावट देखी जा रही है।

    मंगलवार सुबह क्रूड ऑयल के दाम में फ‍िर से ग‍िरावट देखी जा रही है. WTI क्रूड के रेट में 0.87 डॉलर प्रत‍ि बैरल की ग‍िरावट देखी गई और यह 86.63 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ब्रेंट क्रूड के दाम में भी नरमी देखी जा रही है और यह टूटकर 95.09 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ईरान और इजरायल के बीच 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद सीजफायर के बीच क्रूड के दाम में उठा-पटक बनी हुई है. आने वाले समय में तेल की कीमत में अस्थिरता बनी रहने उम्मीद है. होर्मुज बंद होने के बाद ग्लोबल सप्लाई चेन टूट चुकी है. दुन‍ियाभर के ऑयल मार्केट का 20 फीसदी इसी रास्ते से होकर गुजरता है।


    ट्रंप ने दी चेतावनी

    इससे पहले अमेर‍िका और ईरान की पाक‍िस्‍तान में सोमवार को होने वाली बातचीत से ईरान ने यह कहकर क‍िनारा कर ल‍िया क‍ि यूएस की लगातार बढ़ती मांगों और धमकी के आगे वह नहीं झुकेगा. इसके बाद दोनों देशों का तनाव फिर से चरम पर पहुंच गया है. दोनों पक्षों के बीच 8 अप्रैल को शुरू हुआ सीजफायद 22 अप्रैल को खत्म होने जा रहा है. ईरान के बातचीत से क‍िनारा क‍िये जाने से नाराज ट्रंप ने कहा कि यद‍ि सीजफायर बिना किसी समझौते के मंगलवार शाम को खत्म हो जाता है तो फिर बहुत सारे बम फटने लगेंगे।


    भारतीय बाजार में पेट्रोल-डीजल का हाल

    क्रूड के दाम में उठा-पटक का असर सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल के रेट पर देखा जाता है. प‍िछले द‍िनों क्रूड के दाम में तेजी आई तो तेल कंपन‍ियों के प्रॉफ‍िट पर सीधा असर पड़ा. इसे मैनेज करने के लि‍ए सरकार ने आम आदमी को राहत देते हुए एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती कर तेल कंपन‍ियों के दबाव को कम क‍िया. अगर क्रूड के दाम लंबे समय तक 100 डॉलर के आसपास बने रहे तो इसका असर आम आदमी पर देखने को म‍िल सकता है।


    पेट्रोल-डीजल के रेट

    > दिल्ली : पेट्रोल 94.77, डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर
    > मुंबई: पेट्रोल 103.54, डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर
    > चेन्नई: पेट्रोल 100.84, डीजल 92.48 रुपये प्रति लीटर
    > कोलकाता: पेट्रोल 105.45, डीजल 91.81 रुपये प्रति लीटर