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  • Russia से कच्चे तेल के आयात में कटौती… विदेश सचिव बोले- भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं

    Russia से कच्चे तेल के आयात में कटौती… विदेश सचिव बोले- भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं


    नई दिल्ली।
    भारत (India) द्वारा रूस (Russia) से कच्चे तेल के आयात में कटौती (Reduction Imports Crude Oil) की खबरों के बीच विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने साफ किया है कि देश की ऊर्जा नीति और इससे जुड़े सभी फैसले राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही लिए जाते रहेंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा आयोजित एक विशेष ब्रीफिंग में विदेश सचिव ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में लिए जाने वाले निर्णय, चाहे सरकार द्वारा हों या व्यावसायिक संस्थाओं द्वारा, राष्ट्रीय हितों से निर्देशित होते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कच्चे तेल की वास्तविक खरीद का निर्णय तेल कंपनियाँ बाजार की परिस्थितियों के आधार पर करती हैं।

    विक्रम मिस्री ने कहा कि तेल कंपनियाँ उपलब्धता, जोखिम, लागत और लॉजिस्टिक्स जैसे कई कारकों का आकलन कर निर्णय लेती हैं और वे अपनी आंतरिक जवाबदेही तथा वित्तीय जिम्मेदारियों का पालन करती हैं। उन्होंने कहा, “किसी भी समय ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसलों में वित्तीय और लॉजिस्टिक पहलुओं सहित कई जटिल कारक शामिल होते हैं।” विदेश सचिव ने दोहराया कि भारत एक विकासशील देश है और तेल एवं गैस क्षेत्र में शुद्ध आयातक (नेट इम्पोर्टर) है। देश की कुल जरूरतों का लगभग 80–85 प्रतिशत हिस्सा आयात पर निर्भर होने के कारण महँगाई का जोखिम बना रहता है।

    उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
    उन्होंने कहा, “जब आप इतने बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर होते हैं, तो आयात लागत से उत्पन्न महँगाई की चिंता स्वाभाविक है। यही कारण है कि भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।” उन्होंने रूस से कच्चे तेल का आयात कम करने के सवाल पर कहा कि ऊर्जा खरीद के लिए कई स्रोतों को बनाए रखना हमारी रणनीति रही है। वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हाल के वर्षों में आई अस्थिरता का उल्लेख करते हुए मिस्री ने कहा कि भारत, अन्य देशों की तरह, स्थिर कीमतों और भरोसेमंद आपूर्ति में साझा रुचि रखता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत न केवल ऊर्जा का बड़ा उपभोक्ता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में एक स्थिरता प्रदान करने वाला कारक भी है।

    भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं
    उन्होंने कहा कि भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं है और कच्चे तेल का आयात दर्जनों देशों से करता है। बाज़ार की परिस्थितियों के अनुसार आयात स्रोतों का मिश्रण बदलना स्वाभाविक है। विदेश सचिव ने कहा, “हमारी ऊर्जा नीति के प्रमुख आधार हैं- पर्याप्त उपलब्धता, उचित कीमत और आपूर्ति की विश्वसनीयता। जितने अधिक विविध हमारे आयात स्रोत होंगे, उतनी ही अधिक हमारी ऊर्जा सुरक्षा मज़बूत होगी।”

  • कच्चे तेल के आयात में भारी कटौती… रूस से ईंधन खरीदने के मामले में तीसरे स्थान पर आया भारत

    कच्चे तेल के आयात में भारी कटौती… रूस से ईंधन खरीदने के मामले में तीसरे स्थान पर आया भारत


    नई दिल्ली।
    रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों (Public sector Refineries) द्वारा कच्चे तेल के आयात (Crude oil Imports) में भारी कटौती (Significant Reduction ) के बाद दिसंबर 2025 में रूस से इस ईंधन को खरीदने के मामले में भारत तीसरे स्थान पर आ गया है। यूरोपीय शोध संस्थान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इसके अनुसार भारत द्वारा रूस से कुल हाइड्रोकार्बन आयात दिसंबर में 2.3 अरब यूरो रहा, जो पिछले महीने के 3.3 अरब यूरो से कम है।

    रिपोर्ट में कहा गया, तुर्की भारत को पीछे छोड़ते हुए दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया, जिसने रूस से दिसंबर में 2.6 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन खरीदे। चीन शीर्ष खरीदार बना रहा, जिसकी रूस के शीर्ष पांच आयातकों से होने वाली निर्यात आय में 48 प्रतिशत (छह अरब यूरो) की हिस्सेदारी रही।

    सीआरईए ने कहा कि भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात में मासिक आधार पर 29 प्रतिशत की भारी गिरावट हुई। रिपोर्ट के अनुसार इस कटौती की मुख्य वजह रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी रही, जिसने दिसंबर में रूस से अपने आयात को आधा कर दिया। सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों ने भी दिसंबर में रूसी आयात में 15 प्रतिशत की कटौती की।


    तेल की कीमतें प्रभावित होने के आसार नहीं

    क्रिसिल रेटिंग्स ने मंगलवार को कहा कि वेनेजुएला के हालिया घटनाक्रमों से कच्चे तेल की कीमतों पर निकट भविष्य में कोई ठोस प्रभाव पड़ने के आसार नहीं है क्योंकि वैश्विक आपूर्ति में इस लातिन अमेरिकी देश की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत बेहद कम है।

    वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति में इस देश की हिस्सेदारी केवल 1.5 प्रतिशत है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें हाल के दिनों में काफी हद तक स्थिर रही हैं जो 60 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के ठीक ऊपर बनी हुई हैं। भारत के संदर्भ में, वेनेजुएला से होने वाला आयात भारत के कुल आयात का 0.25 प्रतिशत से भी कम है। वित्त वर्ष 2024-25 में हुए लगभग 14,000 करोड़ रुपये के आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से अधिक थी।

  • वेनेजुएला टेंशन का ग्लोबल मार्केट पर दिखेगा असर… सोने-चांदी और क्रूड भी होंगे प्रभावित

    वेनेजुएला टेंशन का ग्लोबल मार्केट पर दिखेगा असर… सोने-चांदी और क्रूड भी होंगे प्रभावित


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) द्वारा वेनेजुएला (Venezuela) पर की गई सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक वित्तीय बाजारों (Global financial markets) में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। इससे भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market), सोने, चांदी और कच्चे तेल पर संभावित प्रभावों का आकलन किया जा रहा है। जानें, निवेशकों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।

    अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों के साथ-साथ भारत पर भी पड़ता नजर आ रहा है। वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार रखने वाला देश है, इसलिए इस घटनाक्रम ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है और शेयर बाजार से लेकर सोना-चांदी तथा कच्चे तेल तक सभी एसेट क्लास पर इसका प्रभाव देखा जा रहा है।

    भारतीय शेयर बाजार की बात करें तो फिलहाल किसी बड़ी घबराहट के संकेत नहीं हैं, लेकिन अस्थिरता बढ़ने की संभावना जरूर बनी हुई है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं, जिसका दबाव ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, एयरलाइंस और उपभोक्ता आधारित कंपनियों के शेयरों पर पड़ सकता है।

    दूसरी ओर डॉलर के मजबूत होने की स्थिति में आईटी कंपनियों के शेयरों को कुछ समर्थन मिल सकता है। कुल मिलाकर बाजार में बड़ी गिरावट की बजाय सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनती दिख रही है।


    सोने पर इफेक्ट

    भू-राजनीतिक तनाव का सीधा फायदा सोने को मिलता दिख रहा है। अनिश्चित माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं और सोना पारंपरिक रूप से उनका पसंदीदा विकल्प रहा है। वेनेजुएला संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मजबूती देखी जा रही है। यदि तनाव लंबा खिंचता है तो सोना नए रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंच सकता है।


    चांदी में तेज उतार-चढ़ाव बना रहेगा

    चांदी पर इस घटनाक्रम का असर थोड़ा अलग नजर आता है। एक तरफ सुरक्षित निवेश की मांग चांदी को सहारा देती है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता औद्योगिक मांग को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से चांदी की कीमतों में तेजी के साथ तेज उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।


    महंगा हो सकता है कच्चा तेल

    कच्चे तेल के मोर्चे पर फिलहाल स्थिति संतुलित है, क्योंकि वेनेजुएला से वैश्विक बाजार में पहले ही सीमित मात्रा में तेल की आपूर्ति हो रही थी। हालांकि इस सैन्य कार्रवाई से तेल बाजार में ‘रिस्क प्रीमियम’ जुड़ गया है। यदि तनाव बढ़ता है या तेल आपूर्ति से जुड़े अन्य क्षेत्रों में अस्थिरता आती है, तो कच्चा तेल आने वाले समय में महंगा हो सकता है।

    भारत के लिए राहत की बात यह है कि वह फिलहाल वेनेजुएला से कच्चा तेल आयात नहीं करता और उसकी आपूर्ति रूस तथा पश्चिम एशिया से स्थिर बनी हुई है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भी भारत को इस वैश्विक संकट से निपटने में सहारा दे सकता है।