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  • US-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दामों में नरमी….

    US-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दामों में नरमी….


    तेहरान।
    यूएस-इजरायल और ईरान (US-Israel and Iran) के बीच चल रही जंग में एक बार फ‍िर से समझौते की कोश‍िश की जा रही है. शांत‍ि की उम्‍मीद में शुक्रवार को 110 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंचने वाले क्रूड ऑयल के दाम (Crude Oil Price) में ग‍िरावट देखी जा रही है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi) के उच्‍च स्‍तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुंचने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच रुकी हुई बातचीत फिर से शुरू होने की उम्‍मीद की जा रही है. इससे बाजार को मजबूती म‍िली है. दोनों देशों के बीच शांति वार्ता का यह दूसरा दौर हो सकता है. हालांकि, ईरान ने शांति वार्ता में सीधा ह‍िस्‍सा लेने से साफ मना क‍िया है।

    शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान क्रूड ऑयल का दाम चढ़कर 106 डॉलर प्रत‍ि बैरल के करीब पहुंच गया था. लेक‍िन शाम होते-होते ईरान के प्रत‍िन‍िध‍िमंडल के पाक‍िस्‍तान पहुंचने के बाद इसमें ग‍िरावट देखी गई. WTI क्रूड का दाम ग‍िरकर 94.40 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ब्रेंट क्रूड के दाम में भी नरमी देखी जा रही है और यह 105 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. 28 फरवरी को इजरायल की तरफ से ईरान पर हमला क‍िये जाने के बाद क्रूड के दाम में उठा-पटक बनी हुई है।


    तेल की कीमत में उठा-पटक बनी रहेगी

    होर्मुज बंद होने से तेल की ग्‍लोबल लेवल पर सप्‍लाई चेन टूट चुकी है. इससे आने वाले समय में भी तेल की कीमत में उठा-पटक बनी रहेगी. इससे पहले गुरुवार को भी तेल की कीमत 3% से ज्यादा बढ़ गई थीं. क्रूड ऑयल के दाम में प‍िछले पांच द‍िन से तेजी देखी जा रही थी. अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत नहीं बनी तो लड़ाई फिर से शुरू हो सकती है और तेल के दाम और ज्यादा बढ़ सकते हैं. कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है क‍ि यद‍ि स्थिति और बिगड़ी तो दाम 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं।


    भारत में नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

    सोशल मीडिया पर जारी क‍िये जा रहे दावों को खारिज करते हुए पेट्रोलियम म‍िन‍िस्‍टर ने कहा है कि भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम में इजाफा करने का फिलहाल कोई प्‍लान नहीं है. मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी करते हुए कहा गया कि फिलहाल इसे लेकर कोई योजना नहीं है. उन्होंने उन रिपोर्ट्स को फेक करार दिया, जिसमें दावे किए जा रहे हैं कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम में 25 से 28 रुपये की बढ़ोतरी कर सकती है.

    आज द‍िल्‍ली में पेट्रोल-डीजल के रेट

    – दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.71

    – मुंबईमें पेट्रोल ₹103.54, डीजल ₹90.01

    – कोलकाता में पेट्रोल ₹105.45, डीजल ₹91.81

    – चेन्नई में पेट्रोल ₹100.84, डीजल ₹92.38

  • कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से ग्लोबल मार्केट में हलचल… पेट्रोल-डीजल भी हो सकते हैं महंगे

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से ग्लोबल मार्केट में हलचल… पेट्रोल-डीजल भी हो सकते हैं महंगे


    नई दिल्ली।
    वैश्विक बाजार (Global market) में कच्चे तेल की कीमतों (Crude oil Prices) में मंगलवार को जोरदार उछाल देखने को मिला। डोनॉल्ड ट्रंप (Donald Trump) के एक बयान के बाद तेल की कीमतें करीब 5% तक बढ़ गईं, जिससे पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई। ट्रंप ने साफ कहा कि वे ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम (ceasefire) को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो अमेरिकी सेना कार्रवाई के लिए तैयार है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

    इस बयान का असर तुरंत बाजार पर दिखा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब $99.78 प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल WTI (West Texas Intermediate) भी बढ़कर लगभग $94.36 प्रति बैरल हो गया। तेल की कीमतों में यह उछाल सीधे तौर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का नतीजा है।


    क्यों बढ़ी तेल की कीमत?

    तेल की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईरान-अमेरिका तनाव है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने एक ईरानी ऑयल टैंकर को समुद्र में रोक लिया, जिससे स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई। साथ ही यह भी साफ नहीं है कि ईरान शांति वार्ता में शामिल होगा या नहीं। ऐसी अनिश्चितता के कारण निवेशकों में डर बढ़ जाता है और वे तेल जैसे कमोडिटी में पैसा लगाते हैं, जिससे कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं।


    होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर

    तेल सप्लाई के लिए दुनिया का सबसे अहम रास्ता स्ट्रेट ऑफ हार्मुज (Strait of Hormuz) भी इस तनाव से प्रभावित हुआ है। यह रास्ता दुनिया की लगभग 20% तेल और LNG सप्लाई को संभालता है, लेकिन हालात इतने खराब हैं कि पिछले 24 घंटों में यहां से सिर्फ 3 जहाज ही गुजर पाए। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बाधित रहता है, तो तेल की कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।

    दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
    तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है और ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ सकती है, यानी कि इससे महंगाई (Inflation) बढ़ सकती है। यूरोप में तो हालात को देखते हुए एयरलाइंस के लिए भी एडवाइजरी जारी करने की तैयारी हो रही है, ताकि जेट फ्यूल की कमी जैसी स्थिति से निपटा जा सके।


    रूस और यूरोप की स्थिति

    इस बीच रूस और यूरोप के बीच तेल सप्लाई को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने संकेत दिया है कि एक अहम पाइपलाइन दोबारा शुरू हो सकती है, लेकिन दूसरी तरफ खबर है कि रूस मई से कुछ सप्लाई रोक सकता है। इससे भी वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।


    आगे क्या होगा?

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रह सकता है और सप्लाई चेन बाधित हो सकती है, तो तेल की कीमतें $100 के पार भी जा सकती हैं। हालांकि, अगर कूटनीतिक बातचीत सफल रहती है, तो कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है।

  • ग्‍लोबल मार्केट में Crude Oil की कीमत में गिरावट… ट्रंप की चेतावनी भी बेअसर

    ग्‍लोबल मार्केट में Crude Oil की कीमत में गिरावट… ट्रंप की चेतावनी भी बेअसर


    नई दिल्ली।
    इंटरनेशनल मार्केट (International Market) में क्रूड ऑयल के दाम (Crude Oil Price) में उथल-पुथल मची हुई है. एक द‍िन पहले ज‍िस क्रूड के दाम में ग‍िरावट देखी जा रही थी, अगले द‍िन उसी में तेजी देखी जा रही है. दो द‍िन पहले की ही बात है जब ईरान ने कहा कि होर्मुज स्‍ट्रेट (Strait of Hormuz) को कमर्श‍ियल श‍िप के लि‍ए पूरी तरह खोल द‍िया गया है. इसके बाद क्रूड के दाम 9 प्रत‍िशत तक टूट गए. लेक‍िन डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump.) की तरफ से जब यह बयान आया क‍ि अमेरिकी नौसेना ने ईरानी झंडे वाला कार्गो जहाज को जब्‍त कर ल‍िया है. इसके बाद तेल की कीमत में तेजी देखी गई. अब फ‍िर क्रूड ऑयल के दाम में ग‍िरावट देखी जा रही है।

    मंगलवार सुबह क्रूड ऑयल के दाम में फ‍िर से ग‍िरावट देखी जा रही है. WTI क्रूड के रेट में 0.87 डॉलर प्रत‍ि बैरल की ग‍िरावट देखी गई और यह 86.63 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ब्रेंट क्रूड के दाम में भी नरमी देखी जा रही है और यह टूटकर 95.09 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ईरान और इजरायल के बीच 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद सीजफायर के बीच क्रूड के दाम में उठा-पटक बनी हुई है. आने वाले समय में तेल की कीमत में अस्थिरता बनी रहने उम्मीद है. होर्मुज बंद होने के बाद ग्लोबल सप्लाई चेन टूट चुकी है. दुन‍ियाभर के ऑयल मार्केट का 20 फीसदी इसी रास्ते से होकर गुजरता है।


    ट्रंप ने दी चेतावनी

    इससे पहले अमेर‍िका और ईरान की पाक‍िस्‍तान में सोमवार को होने वाली बातचीत से ईरान ने यह कहकर क‍िनारा कर ल‍िया क‍ि यूएस की लगातार बढ़ती मांगों और धमकी के आगे वह नहीं झुकेगा. इसके बाद दोनों देशों का तनाव फिर से चरम पर पहुंच गया है. दोनों पक्षों के बीच 8 अप्रैल को शुरू हुआ सीजफायद 22 अप्रैल को खत्म होने जा रहा है. ईरान के बातचीत से क‍िनारा क‍िये जाने से नाराज ट्रंप ने कहा कि यद‍ि सीजफायर बिना किसी समझौते के मंगलवार शाम को खत्म हो जाता है तो फिर बहुत सारे बम फटने लगेंगे।


    भारतीय बाजार में पेट्रोल-डीजल का हाल

    क्रूड के दाम में उठा-पटक का असर सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल के रेट पर देखा जाता है. प‍िछले द‍िनों क्रूड के दाम में तेजी आई तो तेल कंपन‍ियों के प्रॉफ‍िट पर सीधा असर पड़ा. इसे मैनेज करने के लि‍ए सरकार ने आम आदमी को राहत देते हुए एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती कर तेल कंपन‍ियों के दबाव को कम क‍िया. अगर क्रूड के दाम लंबे समय तक 100 डॉलर के आसपास बने रहे तो इसका असर आम आदमी पर देखने को म‍िल सकता है।


    पेट्रोल-डीजल के रेट

    > दिल्ली : पेट्रोल 94.77, डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर
    > मुंबई: पेट्रोल 103.54, डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर
    > चेन्नई: पेट्रोल 100.84, डीजल 92.48 रुपये प्रति लीटर
    > कोलकाता: पेट्रोल 105.45, डीजल 91.81 रुपये प्रति लीटर

  • आधी रात को सस्ता हुआ तेल! कच्चे तेल में 10% गिरावट, फिर भी देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम जस के तस

    आधी रात को सस्ता हुआ तेल! कच्चे तेल में 10% गिरावट, फिर भी देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम जस के तस

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बावजूद भारत में आम लोगों को फिलहाल राहत नहीं मिली है। शुक्रवार को ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल 10% तक लुढ़ककर 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, लेकिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने घरेलू कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया।

    देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है।

    सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल य
    हां
    अंडमान-निकोबार की राजधानी पोर्टब्लेयर में अब भी सबसे सस्ता ईंधन मिल रहा है।

    यहां पेट्रोल 78.05 रुपये और डीजल 82.64 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जो बड़े शहरों की तुलना में काफी कम है।

    क्यों गिरे कच्चे तेल के दाम?
    ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वैश्विक शिपिंग को फिर से सुचारू करने के संकेत दिए हैं। इस खबर के बाद सप्लाई को लेकर बनी चिंता कम हुई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई।

    देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल के रेट (₹/लीटर)

    मुंबई – 104.21
    कोलकाता – 103.94
    चेन्नई – 100.75
    अहमदाबाद – 94.49
    बेंगलुरु – 94.49
    हैदराबाद – 107.46
    जयपुर – 104.72
    लखनऊ – 94.69
    पुणे – 104.04
    चंडीगढ़ – 94.30
    इंदौर – 106.48
    सूरत – 95.00
    नाशिक – 95.50

    डीजल के ताजा रेट (₹/लीटर)

    मुंबई – 92.15
    कोलकाता – 90.76
    चेन्नई – 92.34
    अहमदाबाद – 90.17
    बेंगलुरु – 89.02
    हैदराबाद – 95.70
    जयपुर – 90.21
    लखनऊ – 87.80
    पुणे – 90.57
    चंडीगढ़ – 82.45
    इंदौर – 91.88
    पटना – 93.80
    सूरत – 89.00

    पहले बढ़ चुके हैं दाम
    हाल ही में प्राइवेट कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी की थी। शेल इंडिया ने 1 अप्रैल को पेट्रोल 7.41 रुपये और डीजल 25.01 रुपये प्रति लीटर महंगा किया था।

    वहीं, नायरा ने मार्च में पेट्रोल-डीजल के दाम करीब 5 रुपये तक बढ़ाए थे।

    प्रीमियम फ्यूल भी महंगा
    इंडियन ऑयल ने 1 अप्रैल को XP100 पेट्रोल की कीमत 11 रुपये बढ़ाकर 160 रुपये प्रति लीटर कर दी थी। इसके अलावा प्रीमियम डीजल ‘एक्स्ट्रा ग्रीन’ भी 91.49 रुपये से बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर हो गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद घरेलू स्तर पर फिलहाल कोई राहत नहीं है। अब सबकी नजर ऑयल कंपनियों के अगले फैसले पर टिकी है—क्या आम आदमी को सस्ता पेट्रोल-डीजल मिलेगा या इंतजार लंबा चलेगा?

  • पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट…

    पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट…

    नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव में नरमी की उम्मीदों के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में शुक्रवार को तेज गिरावट दर्ज की गई। भू राजनीतिक मोर्चे पर संघर्ष कम होने और संभावित शांति वार्ताओं की उम्मीदों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली। लंबे समय से जारी अस्थिरता के बीच यह गिरावट वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा रही है।

    बाजार में कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में दबाव बना रहा और यह शुरुआती सत्र में गिरकर दिन के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। दिनभर के उतार चढ़ाव के बीच इसमें एक प्रतिशत से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई और यह 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड करता नजर आया। इसी तरह अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड में भी कमजोरी देखने को मिली और यह लगभग 2 प्रतिशत गिरकर 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। इस गिरावट ने ऊर्जा बाजार में सतर्कता का माहौल और गहरा कर दिया है।

    हालांकि इससे पहले के कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में मजबूत तेजी देखने को मिली थी, जब ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई थी। उस समय भू राजनीतिक तनाव और आपूर्ति को लेकर चिंताओं ने कीमतों को ऊपर धकेला था, लेकिन ताजा घटनाक्रमों ने इस रुझान को उलट दिया है।

    घरेलू बाजार में भी कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखा गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में क्रूड ऑयल के भाव में तेज गिरावट आई और यह 2 प्रतिशत से अधिक टूटकर निचले स्तर पर आ गया। वैश्विक संकेतों के असर से घरेलू ट्रेडर्स में भी सतर्कता बढ़ी और खरीदारी का रुझान कमजोर रहा।

    इस बीच पश्चिम एशिया में कूटनीतिक हलचल और संघर्ष विराम की चर्चाओं ने बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई है। प्रमुख वैश्विक संकेतों और शांति की संभावनाओं ने निवेशकों के बीच जोखिम कम होने की उम्मीद को मजबूत किया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं है और किसी भी नए घटनाक्रम से बाजार में तेजी से बदलाव संभव है।

    वैश्विक शेयर बाजारों पर भी इस घटनाक्रम का मिश्रित असर देखने को मिला। एशियाई बाजारों में कमजोरी दर्ज की गई और प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे। दूसरी ओर अमेरिकी बाजारों में हल्की बढ़त के साथ कारोबार बंद हुआ, जिससे वैश्विक निवेश भावना में संतुलन का संकेत मिला।

    घरेलू शेयर बाजार में भी शुरुआती कारोबार में स्थिरता रही और बाद में हल्की तेजी देखने को मिली। निवेशकों ने वैश्विक संकेतों को ध्यान में रखते हुए सतर्क रुख अपनाया और बड़े दांव लगाने से परहेज किया।

    विश्लेषकों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट मुख्य रूप से भू राजनीतिक तनाव में संभावित कमी और आपूर्ति को लेकर चिंता घटने के कारण आई है। हालांकि वे यह भी मानते हैं कि ऊर्जा बाजार अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है और आने वाले समय में वैश्विक घटनाक्रम इसकी दिशा को फिर से प्रभावित कर सकते हैं।

  • वैश्विक अनिश्चितताओं और डॉलर की मजबूती के बीच सोने पर लगातार दबाव और चांदी में सीमित लेकिन स्थिर मजबूती का रुझान

    वैश्विक अनिश्चितताओं और डॉलर की मजबूती के बीच सोने पर लगातार दबाव और चांदी में सीमित लेकिन स्थिर मजबूती का रुझान

    नई दिल्ली: कीमती धातुओं और वैश्विक बाजारों में उतार चढ़ाव का मिला जुला असर निवेशकों की धारणा पर भारी पड़ा सोना दबाव में रहा जबकि चांदी ने मजबूती दिखाई रुपया भी डॉलर के मुकाबले उतार चढ़ाव के बीच हल्की बढ़त के साथ खुला और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना रहा

    सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू कमोडिटी बाजार में अस्थिरता साफ दिखाई दी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में जून डिलीवरी वाला सोना कारोबार की शुरुआत में मजबूती के साथ खुला लेकिन दिन बढ़ने के साथ इसमें गिरावट देखने को मिली सोने ने कारोबार के दौरान एक सीमित दायरे में उतार चढ़ाव दिखाया और निवेशकों की सतर्कता के कारण इसमें बड़ी तेजी नहीं बन सकी शुरुआती कारोबार में जहां सोने को वैश्विक मांग और सुरक्षित निवेश के रुझान से समर्थन मिला वहीं बाद में डॉलर की मजबूती और मुनाफावसूली के चलते इसमें दबाव बढ़ गया

    दूसरी ओर चांदी ने दिनभर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और इसमें हल्की तेजी दर्ज की गई चांदी की कीमतों को औद्योगिक मांग से समर्थन मिला हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार इसमें स्थायी तेजी के लिए अभी और मजबूत संकेतों की आवश्यकता बनी हुई है बाजार प्रतिभागियों का मानना है कि जब तक प्रमुख स्तरों को निर्णायक रूप से पार नहीं किया जाता तब तक इसमें सीमित दायरे में कारोबार जारी रह सकता है

    मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले हल्की मजबूती दिखाई शुरुआती कारोबार में रुपया पिछले सत्र की तुलना में मजबूत खुला जिसका प्रमुख कारण घरेलू शेयर बाजार में स्थिरता और विदेशी बाजारों में जोखिम भावना में सुधार रहा साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भी रुपये को समर्थन मिला हालांकि वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती ने रुपये की बढ़त पर दबाव बनाए रखा और इसका प्रभाव दिनभर देखने को मिला

    कच्चे तेल के बाजार में भी नरमी का रुख रहा ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी कच्चे तेल दोनों में गिरावट दर्ज की गई जिसका कारण वैश्विक मांग को लेकर अनिश्चितता और भू राजनीतिक घटनाक्रम में अपेक्षाकृत स्थिरता माना जा रहा है मध्य पूर्व में तनाव में कमी और संघर्ष विराम की खबरों ने भी ऊर्जा बाजार की धारणा को प्रभावित किया जिससे तेल की कीमतों में नरमी आई

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू राजनीतिक घटनाक्रमों ने बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम की घोषणा और अमेरिका ईरान वार्ता में प्रगति की उम्मीदों ने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ाया है हालांकि इसके बावजूद निवेशक पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिखे और उन्होंने सुरक्षित निवेश विकल्पों में संतुलित रुख बनाए रखा

    घरेलू शेयर बाजार में भी सीमित दायरे में हल्की बढ़त देखने को मिली जिससे रुपये को कुछ समर्थन मिला लेकिन समग्र बाजार माहौल सतर्क ही बना रहा कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल बाजार में स्पष्ट दिशा का अभाव है और यह स्थिति वैश्विक आर्थिक संकेतों तथा भू राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी

    इस पूरे परिदृश्य में निवेशकों की नजर आगामी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की नीतिगत टिप्पणियों पर टिकी हुई है जो आने वाले समय में बाजार की दिशा तय कर सकती हैं फिलहाल बाजार में सतर्कता और अवसर दोनों का मिश्रण बना हुआ है और हर बदलाव पर निवेशक नजर बनाए हुए हैं

  • भारत में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं…. सरकार का दावा – देश में दो माह का भंडार मौजूद

    भारत में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं…. सरकार का दावा – देश में दो माह का भंडार मौजूद


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis) से ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ी आशंकाओं के बीच सरकार रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस बीच, सरकार का कहना है कि देश में कच्चे तेल (Crude oil) की कोई कमी नहीं है। रिफाइनरी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। सरकार का दावा है कि करीब दो माह का कच्चा तेल मौजूद है। पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत (India) के पास कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार है।

    उन्होंने कहा कि सभी घरों को ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पिछले एक माह में तीन लाख 33 हजार पीएनजी कनेक्शन दिए गए। इनमें से दो लाख नब्बे हजार पीएनजी कनेक्शन घरेलू हैं। वहीं, करीब साढ़े तीन लाख से अधिक लोगों ने घरेलू पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है।

    पीएनजी कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं से एलपीजी कनेक्शन छोड़ने की अपील पर 14 हजार चार सौ उपभोक्ताओं ने अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर किया है। सुजाता शर्मा ने अपील करते हुए कहा कि पीएनजी कनेक्शन इस्तेमाल करने वाले दूसरे उपभोक्ता भी अपना एलपीजी कनेक्शन को वापस कर दे।

    पेट्रोलियम मंत्रालय ने व्यवसायिक गतिविधियों व औद्योगिक मांग को सुचारू बनाए रखने के लिए आठ राज्यों के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के कोटे में दस फीसदी अतिरिक्त बढ़ोतरी की भी घोषणा की। सुजाता शर्मा ने बताया कि भारत के पास अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल का भंडार है।


    भारत समुद्र में प्रतिबंधों के खिलाफ

    होर्मुज जलमार्ग के मुद्दे पर ब्रिटेन द्वारा आहूत बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जल मार्ग में बिना किसी रुकावट के आवागहन की नीति पर भारत का पक्ष रखा। भारत ने स्पष्ट तौर पर इस संकट से निकलने के लिए तनाव कम करने और कूटनीति रास्ता निकालने पर जोर दिया। ब्रिटेन द्वारा गुरुवार को बुलाई गई इस बैठक में 60 देशों ने हिस्सा लिया। बैठक वर्चुअल तरीके से हुई जिसमें होर्मुज को खोलने के लिए एक गठबंधन बनाने की दिशा में प्रगति होती हुई दिखी।

    विदेश मंत्रालय की तरफ से इस बैठक को लेकर जारी बयान में कहा गया है कि बैठक में विदेश सचिव मिसरी ने समुद्री परिवहन की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में बिना किसी रुकावट के आने जाने के सिद्धांत के महत्व को रेखांकित किया।


    ईरान जलमार्ग को हाईजैक करने में सफल रहा

    बैठक में ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर ने कहा कि ईरान वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को हाईजैक करने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि हार्मुज को खोलने के लिए सैन्य आपरेशन के बजाय कूटनीतिक तरीके खोजने होंगे। बैठक को होर्मुज पोतों की सुरक्षित निकासी के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की शुरुआती पहल के रूप में देखा जा रहा है। इसमें 28 देशों के भाग लेने की उम्मीद थी लेकिन कहीं ज्यादा 48 देशों ने हिस्सा लिया है।

  • तेल का ‘खेल’: उत्पादन कहीं, खपत कहीं; कीमतों पर बढ़ा दबाव

    तेल का ‘खेल’: उत्पादन कहीं, खपत कहीं; कीमतों पर बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली।
     वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच उत्पादन और खपत का भौगोलिक अंतर फिर चर्चा में है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। यह इलाका दुनिया का प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्र है, जबकि खपत के मामले में एशिया सबसे आगे है। इसी असंतुलन के कारण कीमतों में अस्थिरता बढ़ती जा रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तेल बाजार में उत्पादन और खपत अलग-अलग क्षेत्रों में केंद्रित है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बनता है। रिपोर्ट बताती है कि परिवहन क्षेत्र अकेले करीब 40 प्रतिशत तेल की खपत करता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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  • सबसे ज्यादा तेल उत्पादन वाले क्षेत्र

    • पश्चिम एशिया – 31%
    • यूरेसिया – 30%
    • उत्तरी अमेरिका – 22%
    • अफ्रीका – 9%
    • यूरोप – 8%

    सबसे अधिक खपत करने वाले क्षेत्र

    • एशिया – 38%
    • उत्तरी अमेरिका – 22%
    • यूरोप – 14%
    • यूरेसिया – 8%
    • अफ्रीका – 6%
    • पश्चिम एशिया – 5%

    रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया में ऊर्जा मांग तेजी से बढ़ रही है, जबकि उत्पादन मुख्य रूप से पश्चिम एशिया और उत्तरी अमेरिका पर निर्भर है। इससे वैश्विक आपूर्ति संतुलन बिगड़ रहा है और कीमतों में तेजी का जोखिम बना हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान से जुड़े क्षेत्र में तनाव लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु नीतियों पर पड़ने की आशंका है।

    इसके अलावा, परिवहन क्षेत्र की तेल पर भारी निर्भरता स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेज संक्रमण की जरूरत को भी रेखांकित करती है। जानकारों का कहना है कि उत्पादन और खपत के बीच बढ़ता यह अंतर आने वाले समय में ऊर्जा बाजार को और अस्थिर बना सकता है।

  • देश में पेट्रोल व डीजल और कच्चे तेल का कोई संकट नहीं… सरकार उठा रही ऐहतियाती कदम

    देश में पेट्रोल व डीजल और कच्चे तेल का कोई संकट नहीं… सरकार उठा रही ऐहतियाती कदम

    पश्चिम एशिया संकट (West Asian Crisis) के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल व एलपीजी की कीमतों (Crude Oil and LPG Prices) में उछाल के बीच सरकार (Government) ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार का दावा है कि भारत में पेट्रोल व डीजल और कच्चे तेल का कोई संकट नहीं है। पर रसोई गैस (LPG) और पीएनजी की घरेलू सप्लाई को तरजीह देने के लिए कुछ एहतियाती उपाय किए हैं। इनमें कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई में कमी और घरेलू गैस का बुकिंग टाइम बढ़ाना शामिल है।


    बुकिंग अवधि बढ़ाई

    सरकार ने घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की बुकिंग अवधि भी 15 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी है। मतलब यह कि गैस सिलेंडर सप्लाई के अगले 25 दिन तक उपभोक्ता दूसरा सिलेंडर बुक नहीं कर पाएंगे। हालांकि, सरकार की दलील है कि आम उपभोक्ता एक वर्ष में औसतन सात सिलेंडर इस्तेमाल करता है। ऐसे में वह एक सिलेंडर को तकरीबन 50 दिन इस्तेमाल करता है। ऐसे में 25 दिन की बुकिंग अवधि से कोई मुश्किल नहीं आएगी।


    फिलहाल दाम नहीं बढ़ेंगे

    सरकार ने एक बार फिर दोहराया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की कोई संभावना नहीं है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, पर अभी वह स्थिति नहीं आई है कि कीमतों में इजाफा किया जाए। उनके मुताबिक कच्चे तेल की कीमत 120 -125 डॉलर के आसपास रहती है, तो तेल कंपनियों पर खास दबाव नहीं पड़ेगा। पर कीमत ऊपर चली जाती है, तो वह अलग स्थिति होगी।


    घरेलू पीएनजी को तरजीह

    सरकार का कहना है कि घरेलू पीएनजी उपभोक्ताओं को भी गैस की कोई मुश्किल नहीं आएगी। गैस का ज्यादातर हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है। ऐसे में सरकार ने कुछ उद्योगों को उपलब्धता के आधार पर गैस मुहैया कराने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम उठाना जरूरी है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ज्यादा दिन तक बंद रहता है, तो एलएनजी को लेकर दबाव की स्थिति बन सकती है।


    कमर्शियल एलपीजी कम

    पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच सरकार ने घरेलू एलपीजी सप्लाई को बरकरार रखने के लिए होटल और उद्योगों में एलपीजी की सप्लाई में कमी लाने का फैसला किया है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी जाएगी क्योंकि, इस वक्त घरेलू उपभोक्ताओं को वक्त पर रसोई गैस उपलब्ध कराना सरकार और तेल कंपनियों की पहली प्राथमिकता है।


    कमर्शियल एलएनजी के दामों में बढ़ोतरी

    पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ता है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कमर्शियल एलएनजी की कीमतों में इजाफा उनकी प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है। ऐसे में कमर्शियल एलएनजी के दामों में वृद्धि पर सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। यह सवाल किए जाने पर कि क्या इसका असर सीएनजी की कीमतों पर भी होगा, उन्होंने कहा कि सीएनजी प्राथमिकता वाला क्षेत्र है। उस पर प्रभाव की संभावना कम है।


    रिफाइनरी एलपीजी उत्पादन बढ़ाए

    पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए सरकार ने एक बार फिर सभी रिफाइनरी को दूसरे पेट्रोलियम उत्पाद का उत्पादन कम कर एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि ज्यादा से ज्यादा एलपीजी का उत्पादन किया जाए। इसके साथ सरकार अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया से भी एलपीजी खरीद रही है। सरकार का कहना है कि इन देशों से गैस के आयात को और तेज किया गया है।


    अमेरिका का रुख करेगा तय

    पेट्रोलियम मंत्रालय का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का ज्यादा असर अमेरिका के बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अमेरिका में पेट्रोल डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय होते हैं। ऐसे में अमेरिकी उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ना लाजिमी है। ऐसे में अमेरिका युद्ध को लंबा खींचने का निर्णय करता है, तो उसके उपभोक्ताओं को इसकी ज्यादा कीमत चुकानी होगी।

  • Israel-Iran युद्ध के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति की चिंता… क्या रूस से आयात बढ़ाएगा भारत?

    Israel-Iran युद्ध के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति की चिंता… क्या रूस से आयात बढ़ाएगा भारत?


    नई दिल्ली।
    ईरान संकट (Israel-Iran War) के बीच भारत (India) समेत दुनिया के तमाम देशों के सामने तेल से जुड़ी समस्याएं खड़ी होने की चिंता है। हालांकि जानकारों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे कच्चे तेल (Crude Oil) के प्रमुख आपूर्ति मार्ग के बंद होने से भारत को निकट भविष्य में कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान का सामना करने की आशंका नहीं है। अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि कच्चे तेल का भंडार कम से कम 10 दिन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।


    भारत के पास आकस्मिक योजनाएं

    ईरान पर अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के बाद तेजी से बदलते घटनाक्रम में इस्लामिक गणराज्य के सर्वोच्च नेता के मारे जाने की खबरें भी शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह संघर्ष बहुत लंबा नहीं चलेगा। हालांकि, शीर्ष अधिकारियों और विश्लेषकों का कहना है कि यदि तनाव बढ़ता है, तो भारत के पास आकस्मिक योजनाएं तैयार हैं।


    रूस से आयात बढ़ा सकता है भारत

    ईरान के सरकारी मीडिया ने 28 फरवरी को कहा था कि अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमलों के जवाब में उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा निकासी बिंदुओं में से एक है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। अधिकारियों ने कहा कि कम अवधि के लिए इसके बंद होने से भारत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उसके पास ईंधन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति है। उन्होंने आगे कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो देश रूसी तेल की खरीद बढ़ाकर अपने आयात स्रोतों में बदलाव कर सकता है।


    भारत के पास कितना तेल भंडार

    हालांकि, इसका तत्काल प्रभाव तेल की कीमतों पर दिखेगा। ब्रेंट क्रूड इस सप्ताह सात महीने के उच्चस्तर लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। यदि आपूर्ति बाधित होती है, तो कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ सकती हैं। एक अधिकारी ने कहा, ”भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के पास टैंक और पारगमन में मिलाकर 10 से 15 दिन का कच्चा तेल भंडार है। इसके अलावा, उनके ईंधन टैंक भरे हुए हैं, जो देश की 7-10 दिन की ईंधन जरूरत को आसानी से पूरा कर सकते हैं।” एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भारत वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीका जैसे दूरदराज के देशों से भी तेल खरीद सकता है।