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  • नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 44 हजार ऐंठे, इंटरव्यू और GST के बहाने करते रहे वसूली

    नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 44 हजार ऐंठे, इंटरव्यू और GST के बहाने करते रहे वसूली


    इंदौर  इंदौर में ऑनलाइन नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। डेटा एंट्री जॉब का झांसा देकर ठगों ने एक छात्र से अलग-अलग बहानों से करीब 44 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए। नौकरी और रिफंड का भरोसा देते हुए आरोपियों ने कई किस्तों में रकम वसूली, लेकिन न तो नौकरी दी और न ही पैसा लौटाया। शिकायत के बाद एमआईजी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी हैइंदौर 

    पुलिस के अनुसार नेहरू नगर निवासी छात्र राजेश पाटीदार ने शिकायत में बताया कि 17 जून को उसके मोबाइल पर एक युवती का फोन आया। उसने अपना नाम अनुष्का बताया और कहा कि नौकरी के लिए किया गया उसका आवेदन चयनित हो गया है। बातचीत के दौरान उसने व्यक्तिगत जानकारी और कार्य से जुड़ी कुछ जानकारियां लीं तथा बताया कि डेटा एंट्री की नौकरी के लिए उसका चयन किया गया है। साथ ही जल्द ही टेलीफोनिक इंटरव्यू कराने की बात कही गई।

    कुछ देर बाद युवती ने चयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए 1800 रुपए जमा करने को कहा। उसने भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद 50 रुपए काटकर बाकी रकम वापस कर दी जाएगी। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने फोन कर इंटरव्यू की जानकारी दी और मोबाइल पर ही इंटरव्यू लेने की बात कही।

    शिकायत के मुताबिक इंटरव्यू के बाद आरोपियों ने चयन होने का दावा करते हुए फिर 1800 रुपए जमा कराए। इसके बाद सुरक्षा राशि, सर्विस चार्ज और जीएसटी समेत अलग-अलग मदों के नाम पर लगातार पैसे मांगे जाते रहे। हर बार यह आश्वासन दिया गया कि पूरी प्रक्रिया समाप्त होने पर जमा की गई पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।

    आरोपियों ने राजेश से कुल आठ ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कराए और करीब 44 हजार रुपए अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। रकम जमा कराने के बाद भी न तो नियुक्ति पत्र भेजा गया और न ही किसी प्रकार की नौकरी उपलब्ध कराई गई। जब लगातार संपर्क करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला, तब छात्र को ठगी का एहसास हुआ।

    इसके बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर एमआईजी थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस मोबाइल नंबर, बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि नौकरी दिलाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट या जीएसटी जैसी कोई भी रकम मांगने वाले कॉल और मैसेज से सतर्क रहें। किसी भी कंपनी या भर्ती एजेंसी की सत्यता की पुष्टि किए बिना ऑनलाइन भुगतान न करें और संदिग्ध मामलों की तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को सूचना दें।

  • म्यूल हंट 1.0 बना साइबर ठगों का काल, गुजरात पुलिस ने करोड़ों की ठगी का नेटवर्क तोड़ा

    म्यूल हंट 1.0 बना साइबर ठगों का काल, गुजरात पुलिस ने करोड़ों की ठगी का नेटवर्क तोड़ा


    नई दिल्ली । साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के बीच गुजरात पुलिस ने एक ऐसा अभियान चलाया है जिसने ऑनलाइन ठगी के बड़े नेटवर्क की जड़ें हिला दी हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में संचालित ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 ने साइबर अपराधियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। इस अभियान को राज्य में साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई माना जा रहा है।

    डिजिटल युग में साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। फर्जी कॉल्स, ऑनलाइन निवेश के झांसे, बैंकिंग फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे हथकंडों के जरिए अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में गुजरात पुलिस ने तकनीक और डेटा इंटेलिजेंस का सहारा लेते हुए साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क को निशाने पर लिया।

    ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 के तहत गुजरात पुलिस ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, समन्वय पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन से प्राप्त आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया। इस डेटा के आधार पर ऐसे म्यूल अकाउंट्स और उनसे जुड़े लोगों की पहचान की गई जो साइबर अपराध से अर्जित धन को निकालने और आगे पहुंचाने का काम कर रहे थे।

    अभियान के दौरान राज्यभर में 565 एफआईआर दर्ज की गईं और 638 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 913 म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई तथा कुल 4,052 साइबर अपराधों की पहचान की गई जिनमें 491 मामले गुजरात से जुड़े पाए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस अभियान में 2,289 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ।

    गुजरात पुलिस ने इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रिस्क स्कोरिंग सिस्टम का भी उपयोग किया। इस तकनीक की मदद से संदिग्ध खातों की पहचान पहले से अधिक सटीक तरीके से की जा रही है ताकि साइबर अपराधियों तक तेजी से पहुंचा जा सके।

    साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस गांधीनगर के एसपी राजदीप सिंह झाला ने बताया कि पुलिस ने ऐसे खातों को चिह्नित किया जो सीधे साइबर ठगी की रकम प्राप्त करते थे और बाद में एटीएम या चेक के माध्यम से पैसे निकालते थे। विस्तृत डेटाबेस तैयार कर इन खातों और उनसे जुड़े नेटवर्क पर एक साथ कार्रवाई की गई जिससे साइबर अपराध के बड़े गिरोहों का खुलासा हुआ।

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोगों की सतर्कता भी इस लड़ाई में बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि करनी चाहिए। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और ऐसे नाम पर आने वाले कॉल पूरी तरह फर्जी होते हैं।

    ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 की सफलता के बाद गुजरात सरकार ने साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करते हुए 2 जून 2026 से ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 भी शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य साइबर ठगी के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना और डिजिटल दुनिया को आम नागरिकों के लिए अधिक सुरक्षित बनाना है।

  • साइबर ठगी के पैसों से खरीदा सोना, उज्जैन में पकड़ा गया गिरोह: MBA पास युवकों का नेटवर्क बेनकाब, BJP नेता का बेटा निकला मास्टरमाइंड

    साइबर ठगी के पैसों से खरीदा सोना, उज्जैन में पकड़ा गया गिरोह: MBA पास युवकों का नेटवर्क बेनकाब, BJP नेता का बेटा निकला मास्टरमाइंड


    मध्यप्रदेश । साइबर अपराधियों द्वारा ठगी के पैसों को वैध बनाने के लिए अपनाए जा रहे नए तरीकों का एक चौंकाने वाला मामला उज्जैन में सामने आया है। उज्जैन पुलिस ने ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो साइबर ठगी से हासिल रकम को सोने में निवेश कर उसे नकदी में बदलने की साजिश रच रहा था। मामले में नर्मदापुरम के तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें मुख्य आरोपी एक स्थानीय भाजपा नेता का बेटा बताया जा रहा है।

    पुलिस जांच के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी अनिमेष वर्मा, कशिश बढ़ानी और राहुल गुप्ता आपस में मित्र हैं और तीनों उच्च शिक्षित हैं। आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर उज्जैन के विभिन्न ज्वेलरी शोरूम से करीब 4.65 लाख रुपए का सोना खरीदा। इन खरीदारी का भुगतान साइबर ठगी से प्राप्त रकम के जरिए क्यूआर कोड स्कैन कर किया गया था।

    मामले का खुलासा तब हुआ जब फ्रीगंज स्थित एक ज्वेलर्स के बैंक खाते को संदिग्ध ट्रांजेक्शन के चलते होल्ड कर दिया गया। शोरूम संचालक ने इसकी सूचना माधवनगर थाने में दी। पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज में खरीदारी करने आए युवक के मोबाइल पर आए एक कॉल का नंबर स्क्रीन पर दिखाई दे गया। यही नंबर जांच का सबसे अहम सुराग साबित हुआ।

    माधवनगर थाना पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और लोकेशन ट्रैकिंग की मदद से महाकाल क्षेत्र के एक होटल में दबिश देकर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि मुख्य आरोपी अनिमेष वर्मा कुछ महीने पहले क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के माध्यम से टेलीग्राम पर सक्रिय साइबर ठगों के संपर्क में आया था। ठगों ने उसे मोटे कमीशन और त्वरित मुनाफे का लालच दिया था।

    आरोपियों ने पिछले दस दिनों में उज्जैन के कई ज्वेलरी शोरूम से सोना खरीदा। दुकानदारों के क्यूआर कोड दिल्ली में बैठे साइबर ठगों को भेजे जाते थे। इसके बाद राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश में साइबर ठगी के शिकार लोगों के बैंक खातों से सीधे भुगतान किया जाता था। सोना खरीदने के बाद उसे बेचकर रकम को नकदी में बदलने की योजना थी।

    उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा के अनुसार, प्रारंभिक जांच में राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश के पीड़ितों के खातों से लाखों रुपए के भुगतान की पुष्टि हुई है। पुलिस का मानना है कि यह एक बड़े अंतरराज्यीय और संभवतः अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का हिस्सा है, जो ठगी के पैसों को पेट्रोल पंपों और सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश कर वैध बनाने का प्रयास करता है।

    फिलहाल पुलिस ने आरोपियों को न्यायालय में पेश कर 21 जून तक रिमांड पर लिया है। मामले की गहराई से जांच की जा रही है और नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने के लिए एक विशेष टीम दिल्ली भेजी जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में साइबर अपराध के इस संगठित नेटवर्क से जुड़े कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।

  • इंस्टाग्राम से बोतल मंगाना पड़ा भारी, रिफंड के झांसे में फंसी छात्रा से 2.99 लाख की साइबर ठगी

    इंस्टाग्राम से बोतल मंगाना पड़ा भारी, रिफंड के झांसे में फंसी छात्रा से 2.99 लाख की साइबर ठगी


    मध्यप्रदेश । इंदौर के खजराना क्षेत्र में रहने वाली एक कॉलेज छात्रा ऑनलाइन ठगी और साइबर ब्लैकमेलिंग का शिकार हो गई। आरोप है कि इंस्टाग्राम के माध्यम से किए गए एक ऑनलाइन ऑर्डर के बाद ठगों ने पहले रिफंड का झांसा देकर छात्रा को अपने जाल में फंसाया और फिर कथित अश्लील तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर उससे पैसे वसूले। इसके बाद उसके बैंक खाते से करीब 2 लाख 99 हजार रुपए की राशि भी निकाल ली गई।

    पुलिस के अनुसार, छात्रा वरीदा ने इस मामले की शिकायत खजराना थाने और साइबर क्राइम शाखा में दर्ज कराई है। शिकायत में बताया गया है कि उसकी बहन अलीना ने 11 मई को इंस्टाग्राम पर संचालित एक पेज “सॉफ क्यूक इंडिया” से पानी की दो बोतलें ऑर्डर की थीं। इसके लिए ऑनलाइन भुगतान भी किया गया था।

    शिकायत के मुताबिक, ऑर्डर करने के कुछ समय बाद एक व्यक्ति का फोन आया। उसने स्वयं को कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि ऑर्डर किसी कारणवश रद्द हो गया है और भुगतान की गई राशि वापस की जाएगी। इसके लिए उसने एक लिंक भेजी और रिफंड प्रक्रिया पूरी करने के लिए उस पर क्लिक करने को कहा। पुलिस को आशंका है कि इसी दौरान ठगों ने छात्रा की बैंकिंग और व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर ली।

    मामला यहीं नहीं रुका। छात्रा का आरोप है कि 20 मई को उसे एक अन्य कॉल प्राप्त हुआ। कॉल करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि उसके पास छात्रा की अश्लील तस्वीरें हैं और यदि उसने पैसे नहीं दिए तो वे तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर दी जाएंगी। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने 30 हजार रुपए की मांग की। बदनामी के डर से छात्रा ने बताए गए यूपीआई खाते में राशि ट्रांसफर कर दी।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब 9 जून को छात्रा कॉलेज फीस जमा करने पहुंची। फीस भुगतान के दौरान उसे पता चला कि उसके बैंक खाते में पर्याप्त राशि नहीं बची है। इसके बाद जब उसने बैंक से संपर्क कर खाते की जानकारी ली तो सामने आया कि खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से करीब 2.99 लाख रुपए निकाले जा चुके हैं।

    पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह मामला साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। जिन बैंक खातों और यूपीआई आईडी में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। साइबर विशेषज्ञ भी ट्रांजेक्शन की तकनीकी जांच में जुटे हैं।

    पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान विक्रेता से खरीदारी करते समय सावधानी बरतें। किसी भी रिफंड लिंक, संदिग्ध कॉल या ओटीपी साझा करने से बचें। यदि कोई व्यक्ति फोटो या वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे मांगता है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं।

  • बिजली बिल अपडेट के नाम पर रिटायर्ड अधिकारी से साइबर ठगी, खाते से उड़ाए लाखों रुपए

    बिजली बिल अपडेट के नाम पर रिटायर्ड अधिकारी से साइबर ठगी, खाते से उड़ाए लाखों रुपए


    मध्यप्रदेश। इंदौर में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर आम नागरिकों को निशाना बनाते हुए ऑनलाइन ठगी की वारदात को अंजाम दिया है। इस बार ठगों के जाल में जिला पंजीयक कार्यालय से सेवानिवृत्त अधिकारी फंस गए। बिजली बिल अपडेट नहीं होने और कनेक्शन काटने की चेतावनी देकर साइबर ठगों ने उनके मोबाइल में कथित रूप से एप डाउनलोड करवाए और बैंक खाते से बड़ी राशि निकाल ली। मामले की शिकायत मिलने के बाद कनाड़िया थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार संचार नगर निवासी रमेश कुंबारे, जो जिला पंजीयक कार्यालय से सेवानिवृत्त हैं, इस साइबर ठगी का शिकार हुए हैं। घटना 2 जून की रात की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक उनकी पत्नी ज्योति के मोबाइल नंबर पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को बिजली विभाग का कर्मचारी बताते हुए अपना नाम राकेश बताया।

    फोन पर उसने कहा कि मई माह का बिजली बिल विभाग के सिस्टम में अपडेट नहीं हुआ है। साथ ही उसने व्हाट्सएप पर भी संदेश भेजा। इसके बाद रमेश कुंबारे ने उसी नंबर पर संपर्क कर बताया कि बिजली बिल का भुगतान पहले ही किया जा चुका है और भुगतान संबंधी संदेश भी उनके पास मौजूद है।

    आरोप है कि कॉल करने वाले व्यक्ति ने उन्हें विश्वास में लेते हुए कहा कि विभाग के रिकॉर्ड में भुगतान दिखाई नहीं दे रहा है। उसने यह भी कहा कि यदि तुरंत अपडेट नहीं कराया गया तो बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा। इसके बाद कथित रूप से दो मोबाइल एप डाउनलोड करने और 12 रुपए का अपडेट शुल्क जमा करने की बात कही गई।

    ठग ने व्हाट्सएप पर एक फॉर्म भेजा और उसे खोलने के लिए कहा। शिकायत के अनुसार जैसे ही फॉर्म खोला गया, मोबाइल स्क्रीन कुछ समय के लिए बंद हो गई। शुरुआत में इसे तकनीकी समस्या समझा गया, लेकिन बाद में जब मोबाइल दोबारा चालू किया गया तो उसमें ‘Electricity Online Customer Support’ नाम के दो एप डाउनलोड मिले।

    कुछ ही देर बाद मोबाइल पर बैंक खाते से राशि कटने के संदेश आने लगे। पहले 24 हजार 500 रुपए की निकासी का संदेश मिला। जब खाते की जानकारी जांची गई तो पता चला कि खाते से कई अलग-अलग ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं। शिकायत के अनुसार 25-25 हजार रुपए के तीन ट्रांजेक्शन के अलावा 24 हजार और 68 हजार रुपए की राशि भी खाते से निकाल ली गई।

    घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। कनाड़िया थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर ठगों की पहचान और रकम के ट्रांजेक्शन से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार लोगों को सलाह देते हैं कि बिजली बिल, केवाईसी अपडेट, बैंक सत्यापन या किसी अन्य सेवा के नाम पर आने वाले संदिग्ध कॉल और लिंक से सावधान रहें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में एप डाउनलोड न करें और न ही स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस की अनुमति दें। थोड़ी सी सावधानी साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय साबित हो सकती है।

  • साइबर ठगों का नया जाल, कार्ड एक्टिवेशन के नाम पर धोखाधड़ी

    साइबर ठगों का नया जाल, कार्ड एक्टिवेशन के नाम पर धोखाधड़ी


    ग्वालियर । ग्वालियर में साइबर अपराधियों ने एक युवती को निशाना बनाते हुए उसके क्रेडिट कार्ड से करीब 1.48 लाख रुपए की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को बैंक प्रतिनिधि बताकर पहले क्रेडिट कार्ड एक्टिवेट कराने का झांसा दिया और बाद में राशि वापस दिलाने के नाम पर ओटीपी हासिल कर खाते से रकम निकाल ली। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, 24 वर्षीय अक्षिता बांगड़ के पास एक निजी बैंक का क्रेडिट कार्ड था, जो उन्हें फरवरी 2026 में प्राप्त हुआ था। हालांकि उन्होंने उस कार्ड को सक्रिय नहीं कराया था। 6 अप्रैल को उनके पास एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने स्वयं को बैंक का प्रतिनिधि बताया और क्रेडिट कार्ड एक्टिवेट कराने की प्रक्रिया समझाने लगा।

    कॉल करने वाले व्यक्ति ने अक्षिता को एक मोबाइल एप डाउनलोड करने के लिए कहा। युवती ने उसकी बातों पर भरोसा कर निर्देशों का पालन किया। इसके कुछ समय बाद उनके क्रेडिट कार्ड से करीब 99 हजार 861 रुपए का ट्रांजेक्शन हो गया। पीड़िता को इस लेनदेन की जानकारी तत्काल नहीं मिल सकी, जिससे उन्हें धोखाधड़ी का पता नहीं चला।

    करीब एक महीने बाद 4 मई को अक्षिता को फिर एक अन्य नंबर से कॉल आया। इस बार कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मददगार बताते हुए पिछले ट्रांजेक्शन की जानकारी दी और कहा कि यदि वह चाहें तो निकाली गई राशि वापस दिलाई जा सकती है। बातचीत के दौरान आरोपी ने प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर उनसे ओटीपी साझा करने को कहा।

    पीड़िता ने जब ओटीपी बताया तो ठगों ने कुछ ही मिनटों में उनके क्रेडिट कार्ड से दो और ट्रांजेक्शन कर दिए। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 1 लाख 48 हजार रुपए की राशि निकाल ली गई। इसके बाद जब युवती को ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत के आधार पर मामला कोतवाली थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। जांच के दौरान संबंधित मोबाइल नंबरों, बैंक ट्रांजेक्शन और तकनीकी साक्ष्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर ओटीपी, कार्ड विवरण, सीवीवी नंबर या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। बैंक या वित्तीय संस्थान कभी भी फोन पर ग्राहकों से ओटीपी नहीं मांगते। थोड़ी सी सावधानी साइबर ठगी जैसी घटनाओं से बचा सकती है।

  • वायरल ट्रेंड के पीछे छिपा खतरा, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम पर ऑनलाइन ठगी का नया खेल शुरू

    वायरल ट्रेंड के पीछे छिपा खतरा, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम पर ऑनलाइन ठगी का नया खेल शुरू

    नई दिल्ली ।सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने वाले ट्रेंड और डिजिटल अभियानों का प्रभाव युवाओं के बीच लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन लोकप्रियता और उत्सुकता के इस दौर में साइबर अपराधी भी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हाल के दिनों में एक वायरल डिजिटल ट्रेंड के नाम का इस्तेमाल कर साइबर ठगी का नया मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इसके बाद पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने की चेतावनी जारी की है।

    जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कुछ संदिग्ध लिंक तेजी से प्रसारित किए जा रहे हैं। इन संदेशों में आकर्षक शब्दों और भावनात्मक अपील के जरिए लोगों को किसी डिजिटल अभियान या समूह से जुड़ने का निमंत्रण दिया जा रहा है। युवाओं को विशेष रूप से ध्यान में रखकर ऐसे संदेश तैयार किए जा रहे हैं ताकि वे उत्सुकतावश लिंक पर क्लिक कर दें।

    पुलिस का कहना है कि यह केवल एक साधारण लिंक नहीं बल्कि साइबर ठगी का हिस्सा हो सकता है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये कथित लिंक फिशिंग तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इन पर क्लिक करता है, उसके मोबाइल या डिजिटल डिवाइस की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसके जरिए निजी जानकारी, बैंकिंग विवरण, पासवर्ड और अन्य महत्वपूर्ण डेटा साइबर अपराधियों तक पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है।

    साइबर विशेषज्ञों के अनुसार फिशिंग लिंक आज के समय में ऑनलाइन धोखाधड़ी का सबसे आम तरीका बनते जा रहे हैं। ये लिंक दिखने में सामान्य या भरोसेमंद लग सकते हैं, लेकिन इनके पीछे छिपा उद्देश्य लोगों की निजी जानकारी हासिल करना होता है। कई मामलों में ऐसे हमलों के जरिए बैंक खातों से रकम निकालने और डिजिटल पहचान के दुरुपयोग जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

    इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर ट्रेंड या वायरल अभियान पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता। कई बार लोकप्रिय विषयों का इस्तेमाल करके साइबर ठग लोगों की भावनाओं और उत्सुकता का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। यही कारण है कि पुलिस और साइबर एजेंसियां लगातार जागरूकता अभियान चला रही हैं।

    विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करनी चाहिए। यदि कोई संदेश अत्यधिक आकर्षक, भावनात्मक या असामान्य वादा करता दिखाई दे तो सतर्क रहना आवश्यक है। इसके अलावा संदिग्ध संदेशों को आगे साझा करने से भी बचना चाहिए।

    डिजिटल दुनिया ने लोगों को जोड़ने के नए अवसर दिए हैं, लेकिन इसके साथ सतर्कता और जागरूकता भी उतनी ही जरूरी हो गई है। एक छोटी सी लापरवाही कई बार आर्थिक और व्यक्तिगत नुकसान का कारण बन सकती है। ऐसे में ऑनलाइन सुरक्षा नियमों का पालन करना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।

  • ऑफिस जाने का जमाना खत्म? पीएम मोदी की वर्क फ्रॉम होम पर बड़ी सलाह, छात्रों के लिए नौकरी और फ्रॉड से बचने की पूरी गाइड

    ऑफिस जाने का जमाना खत्म? पीएम मोदी की वर्क फ्रॉम होम पर बड़ी सलाह, छात्रों के लिए नौकरी और फ्रॉड से बचने की पूरी गाइड


    नई दिल्ली ।
    आज के बदलते दौर में काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। ऑफिस जाकर काम करने की पारंपरिक व्यवस्था अब धीरे-धीरे एक नए मॉडल की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है, जहां घर से काम करना या कहीं से भी काम करने की आजादी लोगों के लिए एक नया विकल्प बनता जा रहा है। इस बदलाव के बीच चर्चा तब और तेज हो गई जब वर्क फ्रॉम होम को लेकर एक बड़ा दृष्टिकोण सामने आया, जिसमें इसे सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया गया।

    इस नए कामकाज के मॉडल में यह माना जा रहा है कि अगर लोग रोजाना ऑफिस जाने की बजाय घर से काम करें, तो इससे ट्रैफिक कम होगा, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में भी कमी आ सकती है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि इससे उन लोगों को फायदा मिल सकता है जिन्हें परिवार की जिम्मेदारियों के चलते नौकरी छोड़नी पड़ती है, खासकर महिलाएं, जो घर से ही काम करके करियर को आगे बढ़ा सकती हैं।

    वर्क फ्रॉम होम और रिमोट वर्क को अक्सर एक जैसा समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों में अंतर होता है। वर्क फ्रॉम होम आमतौर पर उसी कंपनी के लिए घर से काम करने की सुविधा होती है, जहां कर्मचारी का ऑफिस पहले से होता है, जबकि रिमोट वर्क में व्यक्ति किसी भी जगह से काम कर सकता है और किसी एक निश्चित स्थान से जुड़ा नहीं होता। यह मॉडल पूरी तरह लोकेशन-इंडिपेंडेंट माना जाता है।

    इस बदलाव के साथ छात्रों और युवाओं के लिए नौकरी के नए रास्ते भी खुल रहे हैं। डिजिटल दौर में कंटेंट क्रिएशन, सोशल मीडिया हैंडलिंग, ऑनलाइन ट्यूशन और बेसिक डेटा वर्क जैसी नौकरियां तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। इन क्षेत्रों में काम करने के लिए घर से ही शुरुआत की जा सकती है और धीरे-धीरे अनुभव के साथ बेहतर अवसर भी मिलते हैं।

    हालांकि इस बढ़ते ट्रेंड के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। घर से काम करने में कई बार एकांत महसूस होता है और काम तथा निजी जीवन के बीच संतुलन बिगड़ सकता है। इसके अलावा तकनीकी समस्याएं जैसे इंटरनेट या बिजली की दिक्कत भी काम को प्रभावित कर सकती हैं।

    सबसे बड़ी चिंता वर्क फ्रॉम होम के नाम पर होने वाले फ्रॉड को लेकर भी है। कई बार फर्जी कंपनियां आकर्षक कमाई के वादे करके लोगों से पैसे मांगती हैं या गलत तरीके से नौकरी का लालच देती हैं। इसलिए किसी भी अवसर को स्वीकार करने से पहले उसकी पूरी जांच करना बेहद जरूरी हो जाता है।

    कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है और आने वाले समय में हाइब्रिड मॉडल यानी ऑफिस और घर दोनों का मिश्रण अधिक देखने को मिल सकता है। यह बदलाव जहां एक तरफ सुविधा और लचीलापन लेकर आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ सतर्कता और समझदारी की भी जरूरत को बढ़ा रहा है।

  • डिजिटल ठगी का नया जाल! बुजुर्ग सबसे ज्यादा निशाने पर, ये 5 उपाय बचाएंगे आपकी मेहनत की कमाई

    डिजिटल ठगी का नया जाल! बुजुर्ग सबसे ज्यादा निशाने पर, ये 5 उपाय बचाएंगे आपकी मेहनत की कमाई



    नई दिल्ली। देश में साइबर ठगी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है और सबसे ज्यादा निशाने पर बुजुर्ग आ रहे हैं। हाल ही में Bilaspur में एक रिटायर्ड महिला प्रोफेसर को ठगों ने 7 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 1.4 करोड़ रुपये ठग लिए। यह कोई अकेला मामला नहीं है—देश में ऐसे मामलों में 60% से ज्यादा पीड़ित वरिष्ठ नागरिक हैं।

    अब ठग सिर्फ OTP या बिजली बिल के बहाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खुद को Central Bureau of Investigation (CBI), पुलिस या TRAI अधिकारी बताकर “टेरर फंडिंग”, “ड्रग्स पार्सल” या “मनी लॉन्ड्रिंग” जैसे गंभीर आरोपों का डर दिखाते हैं और लोगों को मानसिक दबाव में फंसा लेते हैं।

    इसी खतरे को देखते हुए नई तकनीक भी सामने आई है। ‘अभय’ नाम का AI चैटबॉट संदिग्ध नोटिस और कॉल को तुरंत वेरिफाई कर सकता है। अब CBI के असली नोटिस पर QR कोड भी दिया जाएगा, जिसे स्कैन करके उसकी सच्चाई जांची जा सकेगी।

    लेकिन सबसे जरूरी है सतर्कता। अगर आप या आपके घर के बुजुर्ग सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो ये 5 उपाय बेहद काम के हैं

    पहला, मोबाइल में DND (Do Not Disturb) सर्विस एक्टिव करें, जिससे फर्जी कॉल्स काफी हद तक बंद हो जाती हैं।

    दूसरा, फोन में स्पैम कॉल और मैसेज फिल्टर ऑन रखें और अनजान नंबरों से आने वाली कॉल्स को रिसीव करने से बचें।

    तीसरा, WhatsApp में ऑटो डाउनलोड बंद रखें ताकि संदिग्ध फाइल अपने आप डाउनलोड न हो सके।

    चौथा, बैंकिंग और UPI ऐप्स में फिंगरप्रिंट या फेस लॉक जरूर लगाएं, ताकि कोई भी आसानी से आपके पैसे तक पहुंच न सके।

    पांचवां, अगर जरा भी शक हो कि आप ठगी का शिकार हो सकते हैं, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या 112 पर कॉल करें और शिकायत दर्ज कराएं।

    याद रखें ठग हमेशा डर और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। इसलिए किसी भी कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें, पहले परिवार या एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। यही सावधानी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है।

  • MP: इंदौर में साइबर ठगी के चौकाने वाले आंकड़े, रोज 87 लोग शिकार बन गंवा रहे अपनी गाढ़ी कमाई

    MP: इंदौर में साइबर ठगी के चौकाने वाले आंकड़े, रोज 87 लोग शिकार बन गंवा रहे अपनी गाढ़ी कमाई


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर शहर (Indore city) में साइबर ठगी (Cyber ​​fraud) के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उसने पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। केवल मार्च (March) माह के आंकड़ों पर नजर डालें तो क्राइम ब्रांच (Crime Branch.) के पास साइबर धोखाधड़ी की कुल 2600 शिकायतें (2600 Complaints) प्राप्त हुई हैं। इसके अनुसार शहर में हर दिन लगभग 87 लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंसकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवा रहे हैं। हालांकि पुलिस लगातार जागरूकता अभियान और साइबर पाठशाला के माध्यम से लोगों को सचेत कर रही है, लेकिन अपराधियों के नए-नए तरीके आम जनता पर भारी पड़ रहे हैं।

    शेयर ट्रेडिंग और अतिरिक्त आय का लालच फंसा रहा
    ठगी के इन मामलों में सबसे ज्यादा मामले शेयर ट्रेडिंग के नाम पर सामने आ रहे हैं। साइबर अपराधी अतिरिक्त आय का लालच देकर लोगों को निवेश के लिए उकसाते हैं। हैरानी की बात यह है कि इन शिकार होने वालों में केवल कम पढ़े-लिखे लोग ही नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, बड़े व्यापारी और बड़ी संख्या में घरेलू महिलाएं भी शामिल हैं। लालच के इसी चक्रव्यूह का फायदा उठाकर ठग लाखों रुपयों पर हाथ साफ कर रहे हैं।


    ठगी के नए तरीके आ रहे

    अपराधी अब केवल पुराने तरीकों तक सीमित नहीं हैं। अब बिजली कनेक्शन काटने, गैस कनेक्शन बंद होने या बैंक अधिकारी बनकर फोन करने के साथ-साथ एपीके (APK) फाइल का उपयोग किया जा रहा है। अपराधी पीड़ित को एक संदेहास्पद एपीके फाइल भेजते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति उस फाइल पर क्लिक करता है, उसके मोबाइल का पूरा एक्सेस ठगों के पास चला जाता है। इसके बाद बिना किसी ओटीपी के खातों से पैसे निकाल लिए जाते हैं। अक्सर पीड़ित को इस बात की भनक तब लगती है जब बैंक से पैसा कटने का मैसेज प्राप्त होता है।


    1930 पर तुरंत करें शिकायत

    राहत की बात यह है कि क्राइम ब्रांच अब त्वरित कार्रवाई कर रही है। यदि पीड़ित समय रहते पुलिस तक पहुंचता है, तो पैसों की वापसी संभव हो पा रही है। पिछले तीन महीनों में पुलिस ने ठगों के बैंक खाते ब्लॉक करवाकर लगभग पौने दो करोड़ रुपये रिफंड करवाए हैं। इसके अलावा, अब पीड़ितों के लिए ई-एफआईआर की व्यवस्था भी शुरू की गई है। नेशनल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करते ही ई-एफआईआर दर्ज हो जाती है, जिसे बाद में संबंधित थाने में असल कायमी के लिए भेजा जाता है। इस नई व्यवस्था के कारण पिछले दस दिनों में ही इंदौर के विभिन्न थानों में 50 से अधिक केस दर्ज किए जा चुके हैं।