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  • ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम के नाम पर छात्रा से एक लाख रुपये की साइबर ठगी..

    ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम के नाम पर छात्रा से एक लाख रुपये की साइबर ठगी..

    जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर में ठगी के दो अलग-अलग मामलों ने एक बार फिर साइबर फ्रॉड और अंधविश्वास से जुड़ी धोखाधड़ी की गंभीरता को उजागर किया है। एक ओर जहां ऑनलाइन वर्क फ्रॉम होम के नाम पर एक कॉलेज छात्रा से एक लाख रुपये की ठगी की गई, वहीं दूसरी ओर साधु के भेष में आए दो ठगों ने 5 करोड़ रुपये दिलाने का झांसा देकर एक युवक से 28 हजार रुपये ऐंठ लिए।

    पहले मामले में घमापुर क्षेत्र की एक कॉलेज छात्रा को टेलीग्राम पर संपर्क कर ऑनलाइन जॉब और वर्क फ्रॉम होम के नाम पर फंसाया गया। उसे शुरुआत में छोटे-छोटे काम देकर भरोसा दिलाया गया और बाद में निवेश तथा प्रोसेसिंग के नाम पर अलग-अलग चरणों में पैसे जमा करने के लिए कहा गया।

    झांसे में आकर छात्रा ने धीरे-धीरे करीब एक लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब न तो उसे कोई नौकरी मिली और न ही कोई कमाई वापस मिली, तब उसे ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    दूसरे मामले में बरगी थाना क्षेत्र में दो लोगों ने साधु का भेष धारण कर एक युवक को अपने जाल में फंसा लिया। पहले तो उन्होंने मदद के नाम पर पैसे मांगे, फिर हाथ देखकर भविष्य में 5 करोड़ रुपये मिलने का लालच दिया। इसके बाद पूजा-पाठ और कथित चमत्कार के नाम पर युवक को मानसिक रूप से प्रभावित किया गया।

    जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने अलग-अलग तरीकों से युवक से कुल 28 हजार रुपये वसूल लिए। कुछ देर बाद जब युवक को शक हुआ तो उसने पुलिस को सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी लोगों को भ्रमित करने के लिए अलग-अलग तरह के हथकंडे अपनाते थे और लालच व अंधविश्वास का सहारा लेकर ठगी करते थे। दोनों मामलों में पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।

  • पुलिस एक्शन ठगी का खुलासा और रहस्यमयी गोलीकांड ग्वालियर में घटनाओं की भरमार

    पुलिस एक्शन ठगी का खुलासा और रहस्यमयी गोलीकांड ग्वालियर में घटनाओं की भरमार


    ग्वालियर । ग्वालियर में बुधवार को कई घटनाओं ने शहर की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक गतिविधियों को चर्चा में ला दिया। पड़ाव थाना क्षेत्र में रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर चार के बाहर अनैतिक गतिविधियों की सूचना पर पुलिस ने बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया। एएसपी अनु बेनीवाल के नेतृत्व में सीएसपी रॉबिन जैन और पुलिस बल ने होटल और लॉज की तलाशी ली। हालांकि मौके पर कोई अवैध देह व्यापार नहीं मिला लेकिन एक होटल से आपत्तिजनक सामग्री जरूर बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने रेलवे की खाली जमीन पर भी सर्च अभियान चलाया और होटल स्टाफ से पूछताछ की जा रही है।

    दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग में भी विवाद सामने आया है। उपसंचालक डॉ सुनील सिंह यादव ने जॉइंट डायरेक्टर डॉ नीलम सक्सेना के खिलाफ कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें उपसंचालक के पद पर ज्वाइन करने के बावजूद अकाउंट ऑफिसर के रूप में वेतन दिया जा रहा है जिससे उन्हें एनपीए का लाभ नहीं मिल रहा। साथ ही उन्होंने आवास आवंटन में अनियमितता और मानसिक उत्पीड़न के आरोप भी लगाए हैं। एडीएम ने मामले की जांच के लिए उन्हें कार्यालय में बुलाया है।

    इसी बीच साइबर क्राइम का बड़ा मामला भी सामने आया है जहां पिंटो पार्क क्षेत्र के एक फैक्ट्री संचालक से क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर एक करोड़ इकतालीस लाख रुपए की ठगी की गई। ठगों ने ईमेल के जरिए गोल्ड डीजीएम कॉइन कंपनी में निवेश का लालच दिया और दो महीने में बड़ी रकम अलग अलग खातों में ट्रांसफर करवा ली। पुलिस ने जांच के बाद देवास और बड़वानी से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है जो अपने बैंक खाते किराए पर देकर इस गिरोह की मदद कर रहे थे।

    राजनीतिक गलियारों में भी हलचल देखने को मिली है। पूर्व मंत्री अरविंद सिंह भादौरिया अभी तक सरकारी बंगला खाली नहीं कर पाए हैं जबकि उनकी पात्रता समाप्त हो चुकी है। नियमों के अनुसार तय समय में आवास खाली नहीं करने पर कई गुना किराया वसूली का प्रावधान है फिर भी मामला लंबित बना हुआ है।

    वहीं बिजौली थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई जहां घर में सफाई कर रही महिला रामायणी पाल को अचानक गोली लग गई। शुरुआत में इसे सामान्य चोट समझा गया लेकिन सीटी स्कैन में गोली होने का खुलासा हुआ। ऑपरेशन के बाद गोली निकाली गई लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि गोली कहां से आई। पुलिस अब मामले की जांच में जुटी है। माधौगंज क्षेत्र में गाड़ी हटाने को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट की नौबत आ गई। एक व्यक्ति के साथ कई लोगों ने मारपीट की जिसमें एक पुलिसकर्मी पर भी आरोप लगे हैं।

    इन घटनाओं के बीच एक सकारात्मक पहल भी सामने आई है। 25 मार्च से 3 अप्रैल तक मेला ग्राउंड स्थित शिल्प बाजार में पुस्तक मेला आयोजित किया जा रहा है। इसमें छात्रों को सस्ती दरों पर किताबें यूनिफॉर्म और स्टेशनरी उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मेला अवधि में बाजार में स्कूली किताबों की बिक्री पर रोक रहेगी जिससे पारदर्शिता बनी रहे और अभिभावकों को राहत मिल सके।

  • हाईटेक मोड में मिनी मुंबई की पुलिस: इंदौर के हर थाने में तैयार होंगे साइबर एक्सपर्ट, मौके पर ही सुलझेगी फ्रॉड की शिकायत

    हाईटेक मोड में मिनी मुंबई की पुलिस: इंदौर के हर थाने में तैयार होंगे साइबर एक्सपर्ट, मौके पर ही सुलझेगी फ्रॉड की शिकायत


    इंदौर । इंदौर की पुलिस अब तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए हाईटेक रणनीति पर काम कर रही है। मिनी मुंबई के नाम से पहचाने जाने वाले इस शहर में पुलिस कमिश्नरेट ने फैसला लिया है कि अब हर थाने में ऐसे प्रशिक्षित पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, जो साइबर फ्रॉड की शिकायत मिलते ही मौके पर ही कार्रवाई कर सकें। इसका उद्देश्य यह है कि पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने या समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें तुरंत राहत मिल सके।

    इसी योजना के तहत पुलिस कमिश्नर कार्यालय में एक विशेष साइबर ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें शहर के विभिन्न थानों से करीब 80 पुलिसकर्मियों को बुलाकर आधुनिक तकनीक और साइबर अपराध से निपटने की प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन पुलिस कमिश्नर Santosh Kumar Singh के निर्देश पर किया गया, जिनका मानना है कि बदलते तकनीकी दौर में पुलिस को भी लगातार खुद को अपडेट रखना होगा।

    पुलिस कमिश्नरेट की योजना के अनुसार थाना स्तर पर साइबर हेल्प डेस्क को मजबूत किया जाएगा, ताकि किसी भी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी या डिजिटल फ्रॉड होने पर वह सीधे थाने में जाकर शिकायत दर्ज करा सके और तत्काल कार्रवाई शुरू हो सके। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त Amit Singh और आर.के. सिंह सहित शहर के सभी डीसीपी, एडिशनल डीसीपी और एसीपी भी मौजूद रहे।

    प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को यह सिखाया गया कि साइबर अपराध की शिकायत मिलते ही किस तरह त्वरित कार्रवाई की जाए। क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी Rajesh Dandotiya और उनकी तकनीकी टीम ने पुलिसकर्मियों को कई महत्वपूर्ण ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसमें 1930 हेल्पलाइन, cybercrime.gov.in पोर्टल, एनसीआरपी सिस्टम, संचार साथी, समन्वय, ई-DAR, निदान और साइबर पुलिस पोर्टल जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इन पोर्टल्स के जरिए शिकायत मिलते ही ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है और जरूरत पड़ने पर पीड़ित के बैंक खाते से जुड़े लेन-देन को तुरंत होल्ड भी कराया जा सकता है।

    प्रशिक्षण सत्र में यह भी बताया गया कि साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि तुरंत कार्रवाई की जाए तो ठगी की रकम को ट्रैक कर उसे वापस पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसी वजह से पुलिस अब हर थाने में ऐसे प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती करना चाहती है, जो तकनीकी प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए तत्काल कदम उठा सकें।

    पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने इस दौरान कहा कि आज के डिजिटल दौर में अपराधी भी लगातार नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस को उनसे एक कदम आगे रहना होगा। उनका लक्ष्य है कि शहर का हर थाना साइबर अपराधों से निपटने में सक्षम बने और कोई भी पीड़ित व्यक्ति थाने से निराश होकर वापस न लौटे।

    कमिश्नरेट के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे। आने वाले समय में इंदौर के प्रत्येक थाने में साइबर मामलों में दक्ष पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, ताकि शहर में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाया जा सके।

  • 1 मार्च से सख्ती: सिम कार्ड के बिना नहीं चलेंगे WhatsApp और Telegram? सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से किया इनकार

    1 मार्च से सख्ती: सिम कार्ड के बिना नहीं चलेंगे WhatsApp और Telegram? सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से किया इनकार

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सिम बाइंडिंग नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है। 1 मार्च से लागू होने जा रहे इन नए प्रावधानों के तहत यदि मोबाइल फोन में वह सक्रिय सिम कार्ड मौजूद नहीं है जिससे मैसेजिंग ऐप रजिस्टर है तो WhatsApp Telegram और Signal जैसे ऐप्स का उपयोग सीमित या बंद हो सकता है। सरकार का कहना है कि यह कदम साइबर फ्रॉड फर्जी नंबरों और डिजिटल धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा पहले की नीति के तहत सिम बाइंडिंग नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी।

    क्या होगा बड़ा बदलाव? नए नियमों के अनुसार:

    जिस सिम से अकाउंट रजिस्टर है उसका मोबाइल में सक्रिय रहना जरूरी होगा। यदि सिम मौजूद नहीं है तो ऐप की सेवाएं बाधित हो सकती हैं। WhatsApp Web या कंप्यूटर लॉगिन हर 6 घंटे में स्वतः लॉगआउट हो जाएगा। दोबारा उपयोग के लिए QR कोड स्कैन करना होगा। भारत में करोड़ों यूजर्स एक ही नंबर से कई डिवाइस पर WhatsApp चलाते हैं। ऐसे में जिन यूजर्स ने अलग अलग डिवाइस पर अकाउंट एक्टिव कर रखा है या जो बार बार सिम बदलते रहते हैं वे सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं।

    छोटे कारोबारियों पर असर

    विशेषज्ञों का अनुमान है कि 60–80% तक छोटे व्यवसाय जो WhatsApp आधारित संचार और ऑर्डर मैनेजमेंट पर निर्भर हैं उन्हें शुरुआती दिनों में ऑपरेशनल दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर वे बिजनेस जो एक नंबर को कई सिस्टम पर चलाते हैं उन्हें हर कुछ घंटों में दोबारा लॉगिन की प्रक्रिया अपनानी होगी।

    सिर्फ WhatsApp नहीं व्यापक असर

    यह बदलाव केवल एक ऐप तक सीमित नहीं है। Telegram Signal और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म भी इसके दायरे में बताए जा रहे हैं। यानी यह डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम में एक बड़ा नीतिगत परिवर्तन साबित हो सकता है। फिलहाल सरकार अपने फैसले पर अडिग नजर आ रही है। 1 मार्च की डेडलाइन को लेकर टेक कंपनियों और करोड़ों यूजर्स की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि नियमों का क्रियान्वयन किस स्तर पर और किस सख्ती से किया जाता है और आम यूजर्स के डिजिटल अनुभव में कितना बदलाव आता है।

  • शेयर मार्केट निवेश के नाम पर 9.91 लाख की ठगी मंदसौर से दो आरोपी गिरफ्तार

    शेयर मार्केट निवेश के नाम पर 9.91 लाख की ठगी मंदसौर से दो आरोपी गिरफ्तार


    भोपाल /राजधानी भोपाल से साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है जहां शेयर मार्केट में निवेश कर भारी मुनाफे का लालच देकर एक व्यक्ति से 9 लाख 91 हजार 900 रुपये की ठगी की गई। इस मामले में भोपाल क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंदसौर जिले से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

    पुलिस के अनुसार ठगी की यह वारदात M Stock नामक ऐप के माध्यम से की गई। आरोपियों ने फर्जी लिंक और एप्लिकेशन के जरिए पीड़ित को शेयर मार्केट में निवेश कर कम समय में अधिक रिटर्न मिलने का झांसा दिया। आरोपियों की बातों में आकर मिसरोद क्षेत्र निवासी शिकायतकर्ता ने अलग अलग किस्तों में कुल 9 लाख 91 हजार 900 रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।

    जब लंबे समय तक न तो कोई मुनाफा मिला और न ही रकम वापस हुई तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने 4 अगस्त 2024 को भोपाल क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी जांच शुरू की। बैंक ट्रांजेक्शन मोबाइल नंबर और डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।

    तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस को आरोपियों की लोकेशन मंदसौर जिले में मिली। इसके बाद साइबर सेल की टीम ने दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड जब्त किए गए हैं जिनका उपयोग ठगी की वारदात में किया जा रहा था। पुलिस इन मोबाइल और सिम कार्ड के जरिए अन्य पीड़ितों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और निवेश ऐप के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे। सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप के माध्यम से निवेश के ऑफर भेजे जाते थे और भरोसा जीतने के बाद बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली जाती थी।

    भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक एप या निवेश स्कीम पर भरोसा न करें। शेयर मार्केट में निवेश करने से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म की पूरी जांच करें। पुलिस का कहना है कि इस तरह की साइबर ठगी के मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आएगी।

  • शेयर में निवेश का झांसा देकर लाखों की ठगी करने वाला गिरोह गिरफ्तार साइबर अपराधियों को खाते बेचने का भी था काम

    शेयर में निवेश का झांसा देकर लाखों की ठगी करने वाला गिरोह गिरफ्तार साइबर अपराधियों को खाते बेचने का भी था काम


    नई दिल्ली। क्राइम ब्रांच ने शेयर बाजार में भारी मुनाफे का लालच देकर लोगों को ठगने वाले अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों का कारोबार मंदसौर जिले के भावगढ़ से संचालित होता था। ये लोग अपने नाम से बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को बेचते थे, जिनके जरिए देशभर में ठगी के पैसों का लेन-देन किया जाता था।

    क्या था मामला?
    मिसरौद निवासी सुनील वर्मा (परिवर्तित नाम) ने 4 अगस्त 2024 को साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज कराई।

    उन्होंने बताया कि एक फर्जी ‘स्टॉक एप्लीकेशन’ के माध्यम से उन्हें शेयर मार्केट में निवेश करने और कई गुना लाभ दिलाने का झांसा दिया गया।
    इस जाल में फंसकर उन्होंने 9,91,900 रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब ठगी का अहसास हुआ, तब उन्होंने पुलिस को सूचना दी।
    कैसे पकड़े आरोपी?
    साइबर क्राइम टीम ने तकनीकी जांच, बैंक खातों के विवरण और मोबाइल नंबरों की जांच की। जांच की कड़ियाँ मंदसौर जिले तक पहुंचीं। पुलिस टीम ने ग्राम भावगढ़ में दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
    उनकी पहचान गुलशेर खान और रजनीश बारेठ के रूप में हुई।

    पुलिस ने इनके पास से 2 मोबाइल फोन और 2 सिम कार्ड भी जब्त किए हैं। जांच में पता चला है कि इनके द्वारा बेचे गए बैंक खातों का उपयोग देश के अन्य राज्यों में भी धोखाधड़ी के लिए किया गया था। पुलिस फिलहाल इनके अन्य साथियों की तलाश कर रही है।

    ऐसे बचें ठगी का शिकार होने से (महत्वपूर्ण सुझाव)
    टास्क/लाइक-रेटिंग के नाम पर पैसे देने से बचें:
    यूट्यूब सब्सक्राइब, इंस्टा पेज लाइक करने या रेटिंग देने के बदले पैसे मांगने वाली योजनाएं 100% धोखाधड़ी होती हैं। शुरुआत में 50-100 रुपए भेजाकर भरोसा जीतते हैं, फिर बड़े निवेश के नाम पर लाखों ठग लेते हैं।

    फर्जी प्रॉफिट से सावधान रहें:
    ऐप या वेबसाइट पर दिखाया गया ‘प्रॉफिट’ केवल डिजिटल भ्रम है। निकालने के लिए ‘टैक्स’ या ‘प्रोसेसिंग फीस’ के नाम पर और पैसे मांगे जाते हैं।

    गोपनीय जानकारी साझा न करें:
    बैंक या KYC के नाम पर आने वाले कॉल पर OTP, CVV, पासवर्ड या PIN कभी न बताएं। बैंक कभी फोन पर ऐसी जानकारी नहीं मांगता।

    रिमोट एक्सेस ऐप्स से दूरी बनाए रखें:
    AnyDesk या TeamViewer जैसे ऐप्स बिना जरूरत न रखें। इनके जरिए ठग आपके फोन का पूरा कंट्रोल ले लेते हैं।
    अनजान नंबर से वीडियो कॉल रिसीव न करें:
    इससे ‘सेक्स्टॉर्शन’ और ब्लैकमेलिंग का खतरा बढ़ जाता है।

  • छत्तीसगढ़ में बिजली कनेक्शन के नाम पर साइबर ठगी, एपीके फाइल से खाते हुए खाली

    छत्तीसगढ़ में बिजली कनेक्शन के नाम पर साइबर ठगी, एपीके फाइल से खाते हुए खाली


    रायपुर। छत्तीसगढ़ में साइबर अपराधियों ने बिजली उपभोक्ताओं को निशाना बनाकर ठगी का नया तरीका अपनाया है। नए बिजली कनेक्शन के डिमांड भुगतान के नाम पर व्हाट्सएप के जरिए एपीके फाइल भेजकर मोबाइल फोन हैक किए जा रहे हैं और उपभोक्ताओं के बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं। इस खतरे को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) ने उपभोक्ताओं के लिए एडवाइजरी जारी की है और सतर्क रहने की अपील की है।

    कंपनी के कार्यपालक निदेशक वीके साय ने बताया कि ठग उपभोक्ताओं को व्हाट्सएप पर संदिग्ध फाइल भेजते हैं और उसे डाउनलोड करने के लिए कहते हैं। जैसे ही उपभोक्ता फाइल डाउनलोड करता है, उसका मोबाइल हैक हो जाता है और खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा कभी भी कोई एपीके फाइल नहीं भेजी जाती और न ही उपभोक्ताओं से इसे डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है।

    CSPDCL ने उपभोक्ताओं को चेताया है कि वे हमेशा अधिकारिक चैनलों से ही भुगतान करें। कंपनी किसी भी 10 अंकों के निजी मोबाइल नंबर से भुगतान लिंक नहीं भेजती। केवल CSPDCL-एस आईडी से आधिकारिक संदेश ही मान्य होते हैं। भुगतान केवल MOR बिजली एप, ATP केंद्र, आधिकारिक वेबसाइट या बिजली कार्यालय में ही करना चाहिए।

    उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत टोल फ्री नंबर 1912 पर संपर्क करें या नजदीकी वितरण केंद्र को सूचना दें। कंपनी ने चेतावनी दी है कि फर्जी एपीके फाइल डाउनलोड करने पर मोबाइल हैक होने के साथ-साथ बैंक खाते से पैसे भी चोरी हो सकते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठग लगातार नई तकनीक अपनाकर लोगों को फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। बिजली कनेक्शन और बिल भुगतान जैसे सामान्य मामलों में भी उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत है। व्हाट्सएप या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी भी अज्ञात लिंक या फाइल पर क्लिक न करें।

    CSPDCL ने यह भी बताया कि इस तरह के मामलों में विभाग सक्रिय रूप से निगरानी रख रहा है और साइबर अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रहा है। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक चैनलों का उपयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वितरण केंद्र या टोल फ्री नंबर पर दें।

    इस चेतावनी के बावजूद कई उपभोक्ता अब भी धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल और बैंक सुरक्षा के लिए दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (Two-Factor Authentication), मजबूत पासवर्ड और एंटीवायरस ऐप का इस्तेमाल जरूरी है। बिजली उपभोक्ताओं को अपने मोबाइल और बैंक खातों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना ही सबसे प्रभावी तरीका है।

    इस एडवाइजरी से स्पष्ट हो गया है कि छत्तीसगढ़ में बिजली कनेक्शन के नाम पर होने वाली साइबर ठगी गंभीर रूप ले चुकी है और उपभोक्ताओं को अपनी सावधानी बढ़ाने की आवश्यकता है। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि ऐसे मामलों की नियमित निगरानी की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • मेदांता के नाम पर किडनी डोनेशन का झांसा, फर्जी डॉक्टर बन महिला ने मांगे 3 करोड़, साइबर ठगी का बड़ा खुलासा

    मेदांता के नाम पर किडनी डोनेशन का झांसा, फर्जी डॉक्टर बन महिला ने मांगे 3 करोड़, साइबर ठगी का बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली।
    गुरुग्राम में साइबर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसमें एक महिला ने खुद को देश के प्रतिष्ठित मेदांता दी मेडिसिटी अस्पताल की डॉक्टर बताकर लोगों को किडनी डोनेशन के बदले तीन करोड़ रुपये देने का झांसा दिया। आरोपी महिला की पहचान प्रिया संतोष के रूप में हुई है जो सोशल मीडिया फर्जी वेबसाइटों और वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए लोगों से संपर्क कर रही थी। मेदांता अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संजय दुरानी की शिकायत पर सदर थाना पुलिस ने आरोपी महिला और उसके अज्ञात साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया है कि आरोपी महिला ने अस्पताल के नाम और लोगो का अवैध इस्तेमाल कर एक फर्जी वेबसाइट तैयार की थी। इस वेबसाइट पर दावा किया गया था कि मेदांता अस्पताल को किडनी की सख्त जरूरत है और जो व्यक्ति अपनी किडनी डोनेट करेगा उसे इसके बदले तीन करोड़ रुपये दिए जाएंगे। लोगों का भरोसा जीतने के लिए आरोपी खुद को मेदांता की डॉक्टर बताती थी और फर्जी स्टाफ आईडी भी दिखाती थी।पुलिस के अनुसार यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिए जरूरतमंद या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को टारगेट करता था। उन्हें बड़ी रकम का लालच देकर पहले रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर पैसे ऐंठे जाते थे और फिर अलग-अलग बहानों से और रकम मांगी जाती थी। इस ठगी का पर्दाफाश तब हुआ जब एक महिला प्रतीक्षा पुजारी इस जाल में फंस गई।

    पीड़िता प्रतीक्षा पुजारी ने बताया कि प्रिया संतोष ने खुद को मेदांता की डॉक्टर बताकर उससे संपर्क किया और किडनी डोनेशन के बदले तीन करोड़ रुपये देने का वादा किया। शुरुआत में उससे पंजीकरण शुल्क के तौर पर आठ हजार रुपये लिए गए। इसके बाद ठगों ने उससे बीस हजार रुपये और जमा करने को कहा। जब महिला को संदेह हुआ तो उसने सीधे मेदांता अस्पताल प्रशासन से संपर्क किया। यहीं से पूरा मामला उजागर हो गया।अस्पताल प्रशासन ने तुरंत स्पष्ट किया कि प्रिया संतोष नाम की कोई भी डॉक्टर मेदांता में कार्यरत नहीं है और न ही अस्पताल किसी प्रकार के किडनी डोनेशन के बदले पैसे देने जैसी अवैध गतिविधियों में शामिल है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी द्वारा दिखाई गई स्टाफ आईडी पूरी तरह फर्जी थी और वेबसाइट भी नकली थी।

    मेदांता अस्पताल की ओर से कहा गया है कि यह गिरोह न केवल आम लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रहा है बल्कि अस्पताल की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि ऐसे किसी भी झांसे में न आएं और संदिग्ध कॉल वेबसाइट या मैसेज की तुरंत पुलिस को सूचना दें।फिलहाल गुरुग्राम पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी महिला व उसके अन्य साथियों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े और भी लोग सामने आ सकते हैं।

  • टेलीग्राम फ्रॉड का नया मामला: आसान कमाई का झांसा देकर छात्र से लाखों की ठगी

    टेलीग्राम फ्रॉड का नया मामला: आसान कमाई का झांसा देकर छात्र से लाखों की ठगी


    ग्वालियर में ऑनलाइन ठगी का एक और गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें पार्ट-टाइम जॉब और आसान मुनाफे का झांसा देकर एक छात्र से करीब 3.50 लाख रुपए हड़प लिए गए। यह मामला शहर के मुरार थाना क्षेत्र का है, जहां साइबर ठगों ने टेलीग्राम ऐप का उपयोग करके पीड़ित को फंसाया। मुरार थाना पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।पीड़ित छात्र अमन कुशवाह मुरार के लाल टिपारा इलाके का रहने वाला है और बीबीए की पढ़ाई कर रहा है। अमन के मुताबिक कुछ दिन पहले उसके मोबाइल पर एक मैसेज आया, जिसमें पार्ट-टाइम ऑनलाइन काम से कमाई का दावा किया गया था। मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद वह सीधे टेलीग्राम ऐप से जुड़ गया और एक ग्रुप में शामिल हो गया।

    ग्रुप में बताया गया कि होटल और अन्य व्यवसायिक संस्थानों को ऑनलाइन रेटिंग देनी होगी और इसके बदले अच्छा भुगतान मिलेगा। शुरुआत में अमन से केवल 300 रुपए जमा कराए गए और टास्क पूरा होने पर उसके अकाउंट में 500 रुपए ट्रांसफर कर दिए गए। यह छोटा मुनाफा अमन के भरोसे को मजबूत करने का जरिया बना।इसके बाद ठगों ने बड़े टास्क का ऑफर दिया और अमन से 5 हजार रुपए जमा कराए गए। जैसे-जैसे वह टास्क करता गया, उसके अकाउंट में रकम बढ़ती दिखाई देने लगी। हालांकि, जब उसने राशि निकालने की कोशिश की, तो ट्रांजैक्शन पूरा नहीं हो सका। ग्रुप एडमिन ने कहा कि रकम निकालने के लिए और पैसे जमा करना जरूरी है।

    अकाउंट में बढ़ती रकम के लालच में अमन बार-बार पैसे ट्रांसफर करता गया। अलग-अलग खातों में कुल 3.50 लाख रुपए भेजने के बावजूद उसे पैसा नहीं मिला। इसके अलावा, ठगों ने उस पर और पैसे जमा करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया और टास्क अधूरे रहने पर कोर्ट केस में फंसाने की धमकी भी दी।तब जाकर अमन को ठगी का एहसास हुआ। उसने तुरंत मुरार थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार यह एक संगठित साइबर फ्रॉड का मामला है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किया गया है।

    मुरार थाना पुलिस ने बताया कि मामले की जांच में मोबाइल नंबर, बैंक खातों और टेलीग्राम ग्रुप से जुड़े तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे घर बैठे कमाई या बिना मेहनत मुनाफे के दावों से सतर्क रहें। किसी भी अनजान लिंक या ग्रुप से जुड़ने से पहले पूरी जांच करना बेहद जरूरी है।विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फ्रॉड में ज्यादातर छात्र और युवा आसानी से फंस जाते हैं, क्योंकि शुरुआती छोटे मुनाफे का लालच उन्हें बड़ा नुकसान उठाने के लिए प्रेरित करता है। इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सतर्क रहने की जरूरत को उजागर किया है।