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  • शेयर मार्केट निवेश के नाम पर 9.91 लाख की ठगी मंदसौर से दो आरोपी गिरफ्तार

    शेयर मार्केट निवेश के नाम पर 9.91 लाख की ठगी मंदसौर से दो आरोपी गिरफ्तार


    भोपाल /राजधानी भोपाल से साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है जहां शेयर मार्केट में निवेश कर भारी मुनाफे का लालच देकर एक व्यक्ति से 9 लाख 91 हजार 900 रुपये की ठगी की गई। इस मामले में भोपाल क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंदसौर जिले से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

    पुलिस के अनुसार ठगी की यह वारदात M Stock नामक ऐप के माध्यम से की गई। आरोपियों ने फर्जी लिंक और एप्लिकेशन के जरिए पीड़ित को शेयर मार्केट में निवेश कर कम समय में अधिक रिटर्न मिलने का झांसा दिया। आरोपियों की बातों में आकर मिसरोद क्षेत्र निवासी शिकायतकर्ता ने अलग अलग किस्तों में कुल 9 लाख 91 हजार 900 रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।

    जब लंबे समय तक न तो कोई मुनाफा मिला और न ही रकम वापस हुई तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने 4 अगस्त 2024 को भोपाल क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी जांच शुरू की। बैंक ट्रांजेक्शन मोबाइल नंबर और डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।

    तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस को आरोपियों की लोकेशन मंदसौर जिले में मिली। इसके बाद साइबर सेल की टीम ने दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड जब्त किए गए हैं जिनका उपयोग ठगी की वारदात में किया जा रहा था। पुलिस इन मोबाइल और सिम कार्ड के जरिए अन्य पीड़ितों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और निवेश ऐप के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे। सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप के माध्यम से निवेश के ऑफर भेजे जाते थे और भरोसा जीतने के बाद बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली जाती थी।

    भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक एप या निवेश स्कीम पर भरोसा न करें। शेयर मार्केट में निवेश करने से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म की पूरी जांच करें। पुलिस का कहना है कि इस तरह की साइबर ठगी के मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आएगी।

  • शेयर में निवेश का झांसा देकर लाखों की ठगी करने वाला गिरोह गिरफ्तार साइबर अपराधियों को खाते बेचने का भी था काम

    शेयर में निवेश का झांसा देकर लाखों की ठगी करने वाला गिरोह गिरफ्तार साइबर अपराधियों को खाते बेचने का भी था काम


    नई दिल्ली। क्राइम ब्रांच ने शेयर बाजार में भारी मुनाफे का लालच देकर लोगों को ठगने वाले अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों का कारोबार मंदसौर जिले के भावगढ़ से संचालित होता था। ये लोग अपने नाम से बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को बेचते थे, जिनके जरिए देशभर में ठगी के पैसों का लेन-देन किया जाता था।

    क्या था मामला?
    मिसरौद निवासी सुनील वर्मा (परिवर्तित नाम) ने 4 अगस्त 2024 को साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज कराई।

    उन्होंने बताया कि एक फर्जी ‘स्टॉक एप्लीकेशन’ के माध्यम से उन्हें शेयर मार्केट में निवेश करने और कई गुना लाभ दिलाने का झांसा दिया गया।
    इस जाल में फंसकर उन्होंने 9,91,900 रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब ठगी का अहसास हुआ, तब उन्होंने पुलिस को सूचना दी।
    कैसे पकड़े आरोपी?
    साइबर क्राइम टीम ने तकनीकी जांच, बैंक खातों के विवरण और मोबाइल नंबरों की जांच की। जांच की कड़ियाँ मंदसौर जिले तक पहुंचीं। पुलिस टीम ने ग्राम भावगढ़ में दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
    उनकी पहचान गुलशेर खान और रजनीश बारेठ के रूप में हुई।

    पुलिस ने इनके पास से 2 मोबाइल फोन और 2 सिम कार्ड भी जब्त किए हैं। जांच में पता चला है कि इनके द्वारा बेचे गए बैंक खातों का उपयोग देश के अन्य राज्यों में भी धोखाधड़ी के लिए किया गया था। पुलिस फिलहाल इनके अन्य साथियों की तलाश कर रही है।

    ऐसे बचें ठगी का शिकार होने से (महत्वपूर्ण सुझाव)
    टास्क/लाइक-रेटिंग के नाम पर पैसे देने से बचें:
    यूट्यूब सब्सक्राइब, इंस्टा पेज लाइक करने या रेटिंग देने के बदले पैसे मांगने वाली योजनाएं 100% धोखाधड़ी होती हैं। शुरुआत में 50-100 रुपए भेजाकर भरोसा जीतते हैं, फिर बड़े निवेश के नाम पर लाखों ठग लेते हैं।

    फर्जी प्रॉफिट से सावधान रहें:
    ऐप या वेबसाइट पर दिखाया गया ‘प्रॉफिट’ केवल डिजिटल भ्रम है। निकालने के लिए ‘टैक्स’ या ‘प्रोसेसिंग फीस’ के नाम पर और पैसे मांगे जाते हैं।

    गोपनीय जानकारी साझा न करें:
    बैंक या KYC के नाम पर आने वाले कॉल पर OTP, CVV, पासवर्ड या PIN कभी न बताएं। बैंक कभी फोन पर ऐसी जानकारी नहीं मांगता।

    रिमोट एक्सेस ऐप्स से दूरी बनाए रखें:
    AnyDesk या TeamViewer जैसे ऐप्स बिना जरूरत न रखें। इनके जरिए ठग आपके फोन का पूरा कंट्रोल ले लेते हैं।
    अनजान नंबर से वीडियो कॉल रिसीव न करें:
    इससे ‘सेक्स्टॉर्शन’ और ब्लैकमेलिंग का खतरा बढ़ जाता है।

  • छत्तीसगढ़ में बिजली कनेक्शन के नाम पर साइबर ठगी, एपीके फाइल से खाते हुए खाली

    छत्तीसगढ़ में बिजली कनेक्शन के नाम पर साइबर ठगी, एपीके फाइल से खाते हुए खाली


    रायपुर। छत्तीसगढ़ में साइबर अपराधियों ने बिजली उपभोक्ताओं को निशाना बनाकर ठगी का नया तरीका अपनाया है। नए बिजली कनेक्शन के डिमांड भुगतान के नाम पर व्हाट्सएप के जरिए एपीके फाइल भेजकर मोबाइल फोन हैक किए जा रहे हैं और उपभोक्ताओं के बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं। इस खतरे को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) ने उपभोक्ताओं के लिए एडवाइजरी जारी की है और सतर्क रहने की अपील की है।

    कंपनी के कार्यपालक निदेशक वीके साय ने बताया कि ठग उपभोक्ताओं को व्हाट्सएप पर संदिग्ध फाइल भेजते हैं और उसे डाउनलोड करने के लिए कहते हैं। जैसे ही उपभोक्ता फाइल डाउनलोड करता है, उसका मोबाइल हैक हो जाता है और खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा कभी भी कोई एपीके फाइल नहीं भेजी जाती और न ही उपभोक्ताओं से इसे डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है।

    CSPDCL ने उपभोक्ताओं को चेताया है कि वे हमेशा अधिकारिक चैनलों से ही भुगतान करें। कंपनी किसी भी 10 अंकों के निजी मोबाइल नंबर से भुगतान लिंक नहीं भेजती। केवल CSPDCL-एस आईडी से आधिकारिक संदेश ही मान्य होते हैं। भुगतान केवल MOR बिजली एप, ATP केंद्र, आधिकारिक वेबसाइट या बिजली कार्यालय में ही करना चाहिए।

    उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत टोल फ्री नंबर 1912 पर संपर्क करें या नजदीकी वितरण केंद्र को सूचना दें। कंपनी ने चेतावनी दी है कि फर्जी एपीके फाइल डाउनलोड करने पर मोबाइल हैक होने के साथ-साथ बैंक खाते से पैसे भी चोरी हो सकते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठग लगातार नई तकनीक अपनाकर लोगों को फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। बिजली कनेक्शन और बिल भुगतान जैसे सामान्य मामलों में भी उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत है। व्हाट्सएप या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी भी अज्ञात लिंक या फाइल पर क्लिक न करें।

    CSPDCL ने यह भी बताया कि इस तरह के मामलों में विभाग सक्रिय रूप से निगरानी रख रहा है और साइबर अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रहा है। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक चैनलों का उपयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वितरण केंद्र या टोल फ्री नंबर पर दें।

    इस चेतावनी के बावजूद कई उपभोक्ता अब भी धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल और बैंक सुरक्षा के लिए दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (Two-Factor Authentication), मजबूत पासवर्ड और एंटीवायरस ऐप का इस्तेमाल जरूरी है। बिजली उपभोक्ताओं को अपने मोबाइल और बैंक खातों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना ही सबसे प्रभावी तरीका है।

    इस एडवाइजरी से स्पष्ट हो गया है कि छत्तीसगढ़ में बिजली कनेक्शन के नाम पर होने वाली साइबर ठगी गंभीर रूप ले चुकी है और उपभोक्ताओं को अपनी सावधानी बढ़ाने की आवश्यकता है। विभाग ने भरोसा दिलाया है कि ऐसे मामलों की नियमित निगरानी की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • मेदांता के नाम पर किडनी डोनेशन का झांसा, फर्जी डॉक्टर बन महिला ने मांगे 3 करोड़, साइबर ठगी का बड़ा खुलासा

    मेदांता के नाम पर किडनी डोनेशन का झांसा, फर्जी डॉक्टर बन महिला ने मांगे 3 करोड़, साइबर ठगी का बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली।
    गुरुग्राम में साइबर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसमें एक महिला ने खुद को देश के प्रतिष्ठित मेदांता दी मेडिसिटी अस्पताल की डॉक्टर बताकर लोगों को किडनी डोनेशन के बदले तीन करोड़ रुपये देने का झांसा दिया। आरोपी महिला की पहचान प्रिया संतोष के रूप में हुई है जो सोशल मीडिया फर्जी वेबसाइटों और वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए लोगों से संपर्क कर रही थी। मेदांता अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संजय दुरानी की शिकायत पर सदर थाना पुलिस ने आरोपी महिला और उसके अज्ञात साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया है कि आरोपी महिला ने अस्पताल के नाम और लोगो का अवैध इस्तेमाल कर एक फर्जी वेबसाइट तैयार की थी। इस वेबसाइट पर दावा किया गया था कि मेदांता अस्पताल को किडनी की सख्त जरूरत है और जो व्यक्ति अपनी किडनी डोनेट करेगा उसे इसके बदले तीन करोड़ रुपये दिए जाएंगे। लोगों का भरोसा जीतने के लिए आरोपी खुद को मेदांता की डॉक्टर बताती थी और फर्जी स्टाफ आईडी भी दिखाती थी।पुलिस के अनुसार यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिए जरूरतमंद या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को टारगेट करता था। उन्हें बड़ी रकम का लालच देकर पहले रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर पैसे ऐंठे जाते थे और फिर अलग-अलग बहानों से और रकम मांगी जाती थी। इस ठगी का पर्दाफाश तब हुआ जब एक महिला प्रतीक्षा पुजारी इस जाल में फंस गई।

    पीड़िता प्रतीक्षा पुजारी ने बताया कि प्रिया संतोष ने खुद को मेदांता की डॉक्टर बताकर उससे संपर्क किया और किडनी डोनेशन के बदले तीन करोड़ रुपये देने का वादा किया। शुरुआत में उससे पंजीकरण शुल्क के तौर पर आठ हजार रुपये लिए गए। इसके बाद ठगों ने उससे बीस हजार रुपये और जमा करने को कहा। जब महिला को संदेह हुआ तो उसने सीधे मेदांता अस्पताल प्रशासन से संपर्क किया। यहीं से पूरा मामला उजागर हो गया।अस्पताल प्रशासन ने तुरंत स्पष्ट किया कि प्रिया संतोष नाम की कोई भी डॉक्टर मेदांता में कार्यरत नहीं है और न ही अस्पताल किसी प्रकार के किडनी डोनेशन के बदले पैसे देने जैसी अवैध गतिविधियों में शामिल है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी द्वारा दिखाई गई स्टाफ आईडी पूरी तरह फर्जी थी और वेबसाइट भी नकली थी।

    मेदांता अस्पताल की ओर से कहा गया है कि यह गिरोह न केवल आम लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रहा है बल्कि अस्पताल की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि ऐसे किसी भी झांसे में न आएं और संदिग्ध कॉल वेबसाइट या मैसेज की तुरंत पुलिस को सूचना दें।फिलहाल गुरुग्राम पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी महिला व उसके अन्य साथियों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े और भी लोग सामने आ सकते हैं।

  • टेलीग्राम फ्रॉड का नया मामला: आसान कमाई का झांसा देकर छात्र से लाखों की ठगी

    टेलीग्राम फ्रॉड का नया मामला: आसान कमाई का झांसा देकर छात्र से लाखों की ठगी


    ग्वालियर में ऑनलाइन ठगी का एक और गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें पार्ट-टाइम जॉब और आसान मुनाफे का झांसा देकर एक छात्र से करीब 3.50 लाख रुपए हड़प लिए गए। यह मामला शहर के मुरार थाना क्षेत्र का है, जहां साइबर ठगों ने टेलीग्राम ऐप का उपयोग करके पीड़ित को फंसाया। मुरार थाना पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।पीड़ित छात्र अमन कुशवाह मुरार के लाल टिपारा इलाके का रहने वाला है और बीबीए की पढ़ाई कर रहा है। अमन के मुताबिक कुछ दिन पहले उसके मोबाइल पर एक मैसेज आया, जिसमें पार्ट-टाइम ऑनलाइन काम से कमाई का दावा किया गया था। मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करने के बाद वह सीधे टेलीग्राम ऐप से जुड़ गया और एक ग्रुप में शामिल हो गया।

    ग्रुप में बताया गया कि होटल और अन्य व्यवसायिक संस्थानों को ऑनलाइन रेटिंग देनी होगी और इसके बदले अच्छा भुगतान मिलेगा। शुरुआत में अमन से केवल 300 रुपए जमा कराए गए और टास्क पूरा होने पर उसके अकाउंट में 500 रुपए ट्रांसफर कर दिए गए। यह छोटा मुनाफा अमन के भरोसे को मजबूत करने का जरिया बना।इसके बाद ठगों ने बड़े टास्क का ऑफर दिया और अमन से 5 हजार रुपए जमा कराए गए। जैसे-जैसे वह टास्क करता गया, उसके अकाउंट में रकम बढ़ती दिखाई देने लगी। हालांकि, जब उसने राशि निकालने की कोशिश की, तो ट्रांजैक्शन पूरा नहीं हो सका। ग्रुप एडमिन ने कहा कि रकम निकालने के लिए और पैसे जमा करना जरूरी है।

    अकाउंट में बढ़ती रकम के लालच में अमन बार-बार पैसे ट्रांसफर करता गया। अलग-अलग खातों में कुल 3.50 लाख रुपए भेजने के बावजूद उसे पैसा नहीं मिला। इसके अलावा, ठगों ने उस पर और पैसे जमा करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया और टास्क अधूरे रहने पर कोर्ट केस में फंसाने की धमकी भी दी।तब जाकर अमन को ठगी का एहसास हुआ। उसने तुरंत मुरार थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार यह एक संगठित साइबर फ्रॉड का मामला है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किया गया है।

    मुरार थाना पुलिस ने बताया कि मामले की जांच में मोबाइल नंबर, बैंक खातों और टेलीग्राम ग्रुप से जुड़े तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे घर बैठे कमाई या बिना मेहनत मुनाफे के दावों से सतर्क रहें। किसी भी अनजान लिंक या ग्रुप से जुड़ने से पहले पूरी जांच करना बेहद जरूरी है।विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फ्रॉड में ज्यादातर छात्र और युवा आसानी से फंस जाते हैं, क्योंकि शुरुआती छोटे मुनाफे का लालच उन्हें बड़ा नुकसान उठाने के लिए प्रेरित करता है। इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सतर्क रहने की जरूरत को उजागर किया है।

  • दिल्ली में बुजुर्ग NRI दंपति से डिजिटल ठगी: ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 14 करोड़ रुपये की ठगी

    दिल्ली में बुजुर्ग NRI दंपति से डिजिटल ठगी: ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 14 करोड़ रुपये की ठगी

    नई दिल्ली । डिजिटल ठगी के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है जिसमें बुजुर्ग NRI दंपति को 18 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर ठगी का शिकार बनाया गया। यह मामला साइबर ठगी की गंभीरता को सामने लाता है। पीड़िता इंद्रा तनेजा और उनके पति ओम तनेजा ने बताया कि उन्हें 24 दिसंबर 2025 को खुद को TRAI अधिकारी बताने वाले ठग का फोन आया। कॉलर ने आरोप लगाया कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आपत्तिजनक कॉल्स और मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है।ठगों ने दंपति को डराने के लिए लगातार दबाव बनाया और डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया। इसके चलते 77 वर्षीय महिला ने 8 अलग-अलग ट्रांजेक्शन में 14 करोड़ रुपये RTGS के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए। कॉलर ने हर बार नए बहाने और कानूनी तर्क प्रस्तुत किए, जिससे दंपति मानसिक रूप से दबाव में रहे और उन्होंने ठगों की मांगें मान ली।

    पीड़ित दंपति के अनुसार, वे 2015-16 में अमेरिका से रिटायर होकर भारत लौटे थे और समाज सेवा में जुड़े हुए हैं। उनके खातों में इतनी बड़ी राशि का अचानक ट्रांसफर होना, ठगों की योजनाबद्ध साजिश को उजागर करता है। इंद्रा तनेजा ने बताया कि ठगों ने उन्हें बार-बार फोन कर धमकाया और कानून का हवाला देते हुए डराया।10 जनवरी 2026 (शनिवार) को पीड़ित दंपति ने दक्षिण दिल्ली जिले के सीआर पार्क थाने में शिकायत दर्ज कराई और 1930 साइबर हेल्पलाइन पर भी मामला दर्ज कराया। दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने इस मामले में FIR दर्ज कर गहन जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि जांच में इस बात की पुष्टि की जा रही है कि किस तरह ठगों ने डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर दंपति को निशाना बनाया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की साइबर ठगी के मामले डिजिटल अरेस्ट और सरकारी पदों का डर दिखाकर किए जाते हैं, जिससे पीड़ित मानसिक दबाव में आकर बड़ी रकम ट्रांसफर कर देते हैं। पुलिस और साइबर सुरक्षा अधिकारी लगातार इस प्रकार के मामलों को रोकने और आम लोगों को सतर्क करने के लिए अभियान चला रहे हैं।दिल्ली पुलिस ने दंपति को सलाह दी है कि वे अपने बैंक खाते और ट्रांजेक्शन के विवरण को सुरक्षित रखें और किसी भी संदिग्ध कॉल पर विश्वास न करें। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल ठगी सिर्फ तकनीकी मामलों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मानसिक दबाव और डर के जरिये भी बड़े आर्थिक नुकसान कर सकती है।

  • डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक जाल बैतूल में बुजुर्ग से लाखों की ठगी

    डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक जाल बैतूल में बुजुर्ग से लाखों की ठगी


    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में साइबर अपराधियों ने एक नया ठगी का तरीका अपनाया, जिसे डिजिटल अरेस्ट का नाम दिया गया है। अपराधियों ने खुद को दिल्ली पुलिस अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग से 23.50 लाख रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया। यह घटना बुजुर्ग व्यक्ति बसंत कुमार मैदमवार 80 के साथ हुई, जो एसबीआई बैंक से हेड कैशियर पद से सेवानिवृत्त हैं।

    सूत्रों के मुताबिक, 27 नवंबर 2025 को फरियादी को एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल आई, जिसमें स्क्रीन पर “दिल्ली पुलिस” लिखा हुआ था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने उन्हें बताया कि उनके आधार कार्ड का उपयोग करके दिल्ली में एक सिम कार्ड लिया गया है जिसे ब्लैकमेलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल किया गया है। ठगों ने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ दिल्ली क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और उन्हें डिजिटल अरेस्ट” किया जाएगा।

    डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी और बार-बार वीडियो कॉल्स से भयभीत हो गए बुजुर्ग बसंत कुमार से ठगों ने उनके बैंक खातों की “जांच” के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवा लिए। फरियादी ने कई बार अपने बैंक खातों से रकम ट्रांसफर की, और इस प्रक्रिया में कुल 23.50 लाख रुपये की ठगी हो गई। जब दो दिसंबर को बसंत कुमार गोल्ड लोन लेने के लिए बैंक पहुंचे, तब बैंक प्रबंधक ने इस मामले को साइबर ठगी का मामला बताया। इसके बाद, उन्होंने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिससे मामला पुलिस के संज्ञान में आया।

    यह ठगी का तरीका साइबर अपराधियों की बढ़ती चालाकी और तकनीकी ज्ञान को दर्शाता है। वीडियो कॉल और फर्जी पुलिस अधिकारियों के द्वारा बनाई गई डर की स्थिति का फायदा उठाकर बुजुर्गों और अन्य असुरक्षित लोगों को ठगना अब सामान्य होता जा रहा है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, और साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की योजना बनाई है। यह घटना एक चेतावनी है, खासकर उन लोगों के लिए जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिक सक्रिय नहीं होते। ऐसे अपराधियों से बचने के लिए सभी को सतर्क रहने की जरूरत है और कभी भी किसी भी अज्ञात कॉल या मैसेज पर विश्वास नहीं करना चाहिए।