दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा आदेशसंजय कपूर एस्टेट मामले का निपटारायाचिका पर निर्णय सुरक्षित


नई दिल्‍ली । दिल्ली हाईकोर्ट ने उद्योगपति संजय कपूर की निजी संपत्ति को लेकर चल रहे बहुचर्चित विवाद में अहम मोड़ पर सुनवाई पूरी कर ली है। अदालत ने करिश्मा कपूर से हुए विवाह से जन्मे बच्चों की ओर से दायर अंतरिम रोक इंटरिम इंजंक्शन की याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया है और साफ कर दिया है कि अब इस मामले में कोई नई फाइलिंग स्वीकार नहीं की जाएगी। जस्टिस ज्योति सिंह ने स्पष्ट कहा कि मौखिक बहस पूरी हो चुकी है और दोनों पक्षों की लिखित दलीलों को रिकॉर्ड पर ले लिया गया है। ऐसे में आदेश सुनाए जाने से पहले किसी भी तरह की अतिरिक्त अर्जी या दस्तावेज पर विचार नहीं होगा। यह मामला बीते कई महीनों से अदालत में चल रहा था और संजय कपूर की करोड़ों की संपत्ति को लेकर उनके परिवार के बीच गहरे मतभेद सामने आए हैं।

वसीयत को लेकर आरोप-प्रत्यारोपबच्चों ने मांगी संपत्ति पर रोक

संजय कपूर की मौजूदा पत्नी और उनकी विधवा प्रिया सचदेव कपूर इस विवाद के केंद्र में हैं। करिश्मा कपूर से संजय के दो बच्चे समायरा कपूर और कियान राज कपूर ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करते हुए आरोप लगाया था कि प्रिया सचदेव ने संजय कपूर की वसीयत में कथित तौर पर जालसाजी की है। बच्चों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने अदालत से मांग की कि जब तक वसीयत की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं हो जातातब तक प्रिया को संजय कपूर की निजी संपत्ति से किसी भी तरह का लेन-देन करने से रोका जाए। दूसरी ओरप्रिया सचदेव की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि न तो किसी तरह की संपत्ति विदेश भेजी गई और न ही कोई जानकारी छिपाई गई। उन्होंने यह भी चुनौती दी कि संजय कपूर की सालाना आय 60 करोड़ रुपये होने का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है।

संजय कपूर की मां ने उठाए सवाल

इस मामले में एक और अहम पक्ष संजय कपूर की मां रानी कपूर का है। उनकी ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वैभव गग्गर ने अदालत में तर्क दिया कि प्रिया सचदेव द्वारा बताई गई बैंक बैलेंस की राशि महज 1.7 करोड़ रुपये होना संदेह पैदा करता हैजबकि संजय कपूर की बताई गई आमदनी कहीं अधिक थी। उन्होंने यह भी कहा कि यह मानना मुश्किल है कि संजय कपूर अपनी पूरी निजी संपत्ति सिर्फ प्रिया सचदेव के नाम कर दें और अपने बच्चों या परिवार के अन्य सदस्यों को कुछ भी न दें। इन दलीलों के साथ रानी कपूर ने भी वसीयत की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े किए।

संपत्ति विवाद पर टिकी निगाहें

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम रोक की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद अब सबकी निगाहें अदालत के आदेश पर टिकी हैं। यह फैसला तय करेगा कि संजय कपूर की संपत्ति को लेकर आगे की कानूनी लड़ाई किस दिशा में जाएगी। गौरतलब है कि संजय कपूर देश की प्रमुख ऑटो पार्ट्स निर्माता कंपनी सोना कॉमस्टार के चेयरमैन थे। जून महीने में लंदन में पोलो खेलते वक्त उनका निधन हो गया था। संजय कपूर की शादी करिश्मा कपूर से वर्ष 2003 में हुई थीजो 2016 में तलाक के साथ खत्म हुई। इसके बाद उन्होंने 2017 में प्रिया सचदेव से विवाह किया। अब उनकी मौत के बाद संपत्ति को लेकर परिवार के भीतर शुरू हुआ यह विवाद अदालत के फैसले का इंतजार कर रहा है।