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  • 5 से 12 साल की उम्र में सही पोषण है सबसे बड़ी पूंजी, संतुलित आहार से मिलेगा तेज दिमाग और मजबूत शरीर

    5 से 12 साल की उम्र में सही पोषण है सबसे बड़ी पूंजी, संतुलित आहार से मिलेगा तेज दिमाग और मजबूत शरीर

    नई दिल्ली । पांच से बारह वर्ष की आयु बच्चों के संपूर्ण विकास का सबसे महत्वपूर्ण दौर माना जाता है। इसी उम्र में शरीर तेजी से बढ़ता है, मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होती हैं तथा मस्तिष्क नई चीजों को सीखने और समझने की क्षमता विकसित करता है। ऐसे में संतुलित और पोषणयुक्त आहार बच्चों के वर्तमान स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके भविष्य की सेहत की भी मजबूत नींव तैयार करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों की दैनिक डाइट में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल होना चाहिए। प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं के निर्माण, मांसपेशियों के विकास और ऊतकों की मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दाल, दूध, दही, पनीर, अंडा, सोया, चना और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ नियमित रूप से देने से बच्चों की शारीरिक वृद्धि बेहतर होती है और उनकी ताकत भी बढ़ती है।

    हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी भी बेहद आवश्यक हैं। बढ़ती उम्र में हड्डियों का विकास तेज गति से होता है, इसलिए दूध, दही, पनीर, रागी और अन्य कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को भोजन का हिस्सा बनाना चाहिए। साथ ही नियमित रूप से कुछ समय धूप में बिताने से शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन डी प्राप्त करने में मदद मिलती है, जिससे हड्डियां मजबूत बनी रहती हैं।

    फल और हरी सब्जियां बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनमें मौजूद विटामिन, खनिज और फाइबर शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करते हैं। रंग-बिरंगे फल और विभिन्न प्रकार की सब्जियां खाने वाले बच्चों में संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत कम रहता है और उनका मानसिक विकास भी बेहतर माना जाता है।

    ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति के लिए साबुत अनाज को भोजन में शामिल करना लाभदायक होता है। गेहूं, ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस और मल्टीग्रेन खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे बच्चे लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं और पढ़ाई या अन्य गतिविधियों के दौरान उनकी एकाग्रता बनी रहती है। इसके विपरीत अत्यधिक रिफाइंड आटे और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना बेहतर माना जाता है।

    दिमाग के स्वस्थ विकास के लिए हेल्दी फैट भी जरूरी है। बादाम, अखरोट, मूंगफली और विभिन्न बीजों में मौजूद पोषक तत्व याददाश्त, एकाग्रता और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं। इन्हें सीमित मात्रा में नियमित रूप से आहार में शामिल किया जा सकता है।

    पर्याप्त पानी पीना भी बच्चों के स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पानी शरीर में तरल संतुलन बनाए रखने, पाचन प्रक्रिया को बेहतर करने और शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है। वहीं अत्यधिक मीठे पेय और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का सेवन कम करना चाहिए, क्योंकि इनके अधिक उपयोग से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बचपन से ही बच्चों में संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ खान-पान की आदतें विकसित की जाएं तो उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है। यही आदतें आगे चलकर उन्हें स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान जीवन की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करती हैं।

  • राम भक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे, जनता ने बदली राजनीति की दिशा: रामपुर में बोले योगी आदित्यनाथ

    राम भक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे, जनता ने बदली राजनीति की दिशा: रामपुर में बोले योगी आदित्यनाथ

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामपुर में 690 करोड़ रुपये की लागत वाली 102 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और राम भक्तों के खिलाफ कार्रवाई करते थे, वही आज आस्था की बात करते दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे जनता की लोकतांत्रिक शक्ति का परिणाम बताते हुए कहा कि जनसमर्थन ने राजनीतिक दलों को अपना रुख बदलने के लिए मजबूर किया है।

    अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या आज अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के नए स्वरूप में दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ऐसे हालात थे जब “जय श्रीराम” के उद्घोष पर कार्रवाई होती थी और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था। उनका कहना था कि समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदली हैं और अब वही दल भगवान राम और आस्था की बात करते नजर आते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के मतदान और विश्वास ने प्रदेश की राजनीति की दिशा बदली है। उन्होंने दावा किया कि पहले जिन राजनीतिक दलों ने भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया, आज वे भी सार्वजनिक रूप से धार्मिक आस्था की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय ही सबसे बड़ी शक्ति होता है और उसी के कारण राजनीतिक दलों को अपनी सोच बदलनी पड़ी है।

    योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि रामपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में विकास की नई पहचान बनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले गरीबों और कमजोर वर्गों की जमीनों पर अवैध कब्जे होते थे तथा प्रशासनिक व्यवस्था निष्पक्ष नहीं थी। उनका कहना था कि वर्तमान सरकार ने कानून का शासन स्थापित करने और विकास को प्राथमिकता देने का प्रयास किया है।

    उन्होंने राज्य सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार के सहयोग से कई ऐसी परियोजनाएं पूरी हुई हैं जिन्हें पहले असंभव माना जाता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने विकास की नई गति हासिल की है और राज्य आर्थिक प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश अब तेज़ी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।

    सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का अभाव था और न्यायालयों को हस्तक्षेप करना पड़ता था। उनके अनुसार वर्तमान सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में काम किया है, जिससे युवाओं का भरोसा बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब कांवड़ यात्रा, दुर्गा पूजा, दीपावली और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे आयोजन बिना किसी बाधा के पूरे उत्साह और भव्यता के साथ आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और धार्मिक आयोजनों को सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने रामपुर के लिए स्वीकृत विभिन्न विकास परियोजनाओं को क्षेत्र की प्रगति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे, जनसुविधाओं और विकास कार्यों के विस्तार से क्षेत्र के लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा प्रदेश के समग्र विकास को नई गति प्राप्त होगी।

  • योगी आदित्यनाथ का ललितपुर दौरा ,स्वास्थ्य शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस

    योगी आदित्यनाथ का ललितपुर दौरा ,स्वास्थ्य शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज ललितपुर जिले के दौरे पर रहेंगे जहां वे 1766 करोड़ रुपये की लागत से बने राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित कुल 221 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इस दौरे को बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे स्वास्थ्य सेवाओं शिक्षा और बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री का यह दौरा कई धार्मिक और विकासात्मक कार्यक्रमों से जुड़ा रहेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सीएम योगी सुबह मध्य प्रदेश के दतिया स्थित प्रसिद्ध पीतांबरा पीठ मंदिर में विधि विधान से दर्शन पूजन करेंगे और आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। इसके बाद वह राजकीय हेलीकॉप्टर से ललितपुर पहुंचेंगे जहां पुलिस लाइन हेलीपैड पर उनका आगमन होगा।

    वहां से वे सीधे तुवन मंदिर जाएंगे और दर्शन पूजन के बाद कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना होंगे। इस पूरे दौरे को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया गया है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दौरे को लेकर सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि ललितपुर की धरती वीरता और सांस्कृतिक विरासत के लिए जानी जाती है और आज यह विकास के एक नए अध्याय की साक्षी बनेगी। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार का यह प्रयास बुंदेलखंड को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में मजबूत कदम साबित होगा।

    सीएम के अनुसार 1766 करोड़ की इन परियोजनाओं के जरिए क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर किया जाएगा और शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे। मेडिकल कॉलेज के लोकार्पण से स्थानीय स्तर पर चिकित्सा शिक्षा और इलाज की सुविधाएं बढ़ेंगी जिससे लोगों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसके साथ ही 221 परियोजनाओं में सड़कें, भवन, जल आपूर्ति और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य शामिल हैं जो क्षेत्र के समग्र विकास को गति देंगे।

    सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस दौरे को आगामी विकास योजनाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जिससे बुंदेलखंड क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।

  • मोदी सरकार के 12 साल….. विकास और जन कल्याण को रहे समर्पित

    मोदी सरकार के 12 साल….. विकास और जन कल्याण को रहे समर्पित


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कहा कि उनकी सरकार (Government) के पिछले 12 वर्ष विश्वास, विकास और जन कल्याण को समर्पित रहे हैं। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के आशीर्वाद और सबसे पहले राष्ट्र भावना से प्रेरित होकर युवाओं, महिलाओं और किसान भाई-बहनों को सशक्त बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। पीएम मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा, ‘अथक प्रयासों के फलस्वरूप ही आज देश ने बुनियादी ढांचे से लेकर डिजिटल क्रांति तक विश्व स्तर पर एक नई पहचान हासिल की है।’ उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए सरकार सेवा, सुशासन और समृद्धि के इस पथ पर निरंतर अग्रसर रहेगी।

    पीएम मोदी ने कहा, ‘हमारी सरकार के बीते 12 वर्ष विश्वास, विकास और जन कल्याण को समर्पित रहे हैं। देश के140 करोड़ लोगों के आशीर्वाद और राष्ट्र प्रथम की भावना से हमने युवाओं, महिलाओं और अपने किसान भाई-बहनों को सशक्त बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। यह हमारे अथक प्रयासों का ही नतीजा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर डिजिटल क्रांति तक आज देश को दुनिया भर में एक नई पहचान मिली है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए हम सेवा, सुशासन और समृद्धि के इसी पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे।’


    मोदी सरकार का 12 वर्ष का कार्यकाल पूरा

    केंद्र में मोदी सरकार का 12 वर्ष का कार्यकाल पूरा हो गया है। नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। पीएम मोदी की ओर से निम्नलिखित कार्यों का जिक्र किया गया…


    गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएं

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत 81 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 4 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण किया गया है। इसके अलावा उज्ज्वला योजना के तहत 10.5 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन वितरित किए गए हैं और देशभर में 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है।


    महिला सशक्तिकरण

    प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। महिलाओं के नाम पर 32 करोड़ से अधिक जन धन बैंक खाते खोले गए हैं। सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि लखपति दीदी कार्यक्रम के तहत 3 करोड़ महिलाओं की वार्षिक आय 1 लाख रुपये या उससे अधिक हो चुकी है। साथ ही 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं 91 लाख से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।


    बुनियादी ढांचे का विकास

    प्रधानमंत्री ने अपने कार्यकाल में शुरू और पूर्ण किए गए प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उल्लेख किया। इनमें अटल सेतु, सुदर्शन सेतु, चिनाब रेल पुल, बोगीबील पुल और पंबन सी ब्रिज जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत का मेट्रो रेल नेटवर्क अब 26 शहरों में फैलकर 1,100 किलोमीटर से अधिक लंबा हो चुका है। वहीं देश में 164 वंदे भारत ट्रेनें संचालित हो रही हैं। इसके अलावा हवाई अड्डों की संख्या भी 74 से बढ़कर 164 हो गई है।


    युवाओं पर विशेष ध्यान

    प्रधानमंत्री ने कहा कि विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 2 करोड़ लोगों को कौशल प्रशिक्षण (स्किल ट्रेनिंग) प्रदान किया गया है। उन्होंने मुद्रा योजना का भी उल्लेख किया, जिसके तहत 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। साथ ही भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है और अब देश में 2.2 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप मौजूद हैं। छात्रों में नवाचार और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए देशभर में 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित की गई हैं।


    स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार

    प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत 60 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि अब 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को इस योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में संचालित 19,000 से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से लोगों को आवश्यक दवाएं बाजार मूल्य की तुलना में 90 प्रतिशत तक की छूट पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आम नागरिकों के स्वास्थ्य खर्च में काफी कमी आई है।


    राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा

    राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 38,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने आतंकवाद और वामपंथी उग्रवाद (लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म) के खिलाफ सरकार की कड़ी कार्रवाई का भी जिक्र किया और कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए अभियान को और मजबूत किया गया है। प्रधानमंत्री ने औपनिवेशिक दौर के प्रतीकों को हटाने के लिए उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किया गया है। इसके अलावा, भारतीय नौसेना के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत से प्रेरित नए नौसैनिक ध्वज (नेवल एनसाइन) को अपनाया गया है, जो भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को दर्शाता है।

    भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि मोदी सरकार के आने से पहले सरकार में बैठे लोगों के लिए सत्ता का उद्देश्य अपनी सत्ता बरकार रखना मात्र बन गया था, मोदी ने राष्ट्र प्रथम की सोच पैदा की और पूरे देश को उससे जोड़ा। उन्होंने कहा कि दुनिया में अमेरिका, चीन और किसी भी विकसित हुए देश को देखें तो वहां के लोगों ने -एक सपना लेकर तरक्की की। मोदी के नेतृत्व में भारत सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मूल मंत्र के साथ 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के सपने के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने 140 करोड़ की आबादी, और पूरे संगठन को इस सपने के साथ जोड़ा है। विकसित भारत आज सामूहिक संकल्प बन चुका है। सरकार इसी संकल्प के साथ चल रही है।

  • तेलंगाना में विकास को मिली नई रफ्तार, छात्रों के लिए मिड-डे मील से लेकर लाखों घरों तक सरकार ने खोला सौगातों का पिटारा

    तेलंगाना में विकास को मिली नई रफ्तार, छात्रों के लिए मिड-डे मील से लेकर लाखों घरों तक सरकार ने खोला सौगातों का पिटारा


    नई दिल्ली। तेलंगाना में विकास को नई गति देने की दिशा में सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लेकर राज्य के भविष्य की बड़ी तस्वीर पेश करने की कोशिश की है। शिक्षा, आवास, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े नए निर्णयों ने यह संकेत दिया है कि सरकार अब विकास के बहुआयामी मॉडल पर काम कर रही है। हालिया फैसलों को राज्य के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल तात्कालिक लाभ देना नहीं बल्कि लंबे समय में राज्य की विकास यात्रा को नई पहचान देना भी माना जा रहा है।

    सरकार ने छात्रों से जुड़े एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए पोषण संबंधी सुविधा का दायरा बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है। माना जा रहा है कि यह फैसला छात्रों की सेहत, पढ़ाई में एकाग्रता और विद्यालयों में नियमित उपस्थिति बढ़ाने में सहायक हो सकता है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ लंबे समय से इस तरह की पहल की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। अब इसे लागू किए जाने से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    इसी के साथ आवास क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर घरों को स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आवासीय जरूरतों को देखते हुए इसे सामाजिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि पक्के घर केवल रहने की सुविधा नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्थिरता का आधार भी होते हैं।

    विकास की इस योजना में रोजगार और औद्योगिक निवेश को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। राज्य को भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के लिए नई नीतियों को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम बढ़ाए गए हैं। सरकार आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है। यदि योजनाएं तय लक्ष्यों के अनुसार आगे बढ़ती हैं तो इससे युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।

    इसके अलावा सरकार ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। बिजली व्यवस्था, सिंचाई परियोजनाएं और अन्य आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास विकास के व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी राज्य की प्रगति केवल नई योजनाओं से नहीं बल्कि उनकी मजबूत आधारभूत संरचना से तय होती है।

    राज्य में लगातार बढ़ती आबादी और बदलती जरूरतों के बीच विकास की चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे समय में शिक्षा, आवास, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ प्राथमिकता देना संतुलित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। आने वाले समय में इन योजनाओं का प्रभाव जमीन पर किस स्तर तक दिखाई देता है, इस पर लोगों की नजर बनी रहेगी।

    फिलहाल सरकार के इन फैसलों ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि राज्य विकास की गति को तेज करने और समाज के विभिन्न वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर काम करने की तैयारी कर रहा है। आने वाले वर्षों में इन पहलों के परिणाम राज्य की विकास यात्रा को नई दिशा दे सकते हैं।

  • जहां सैनिकों का साहस बना बदलाव की पहचान: सीमावर्ती तंगधार में विकास की नई कहानी लिखी जा रही है

    जहां सैनिकों का साहस बना बदलाव की पहचान: सीमावर्ती तंगधार में विकास की नई कहानी लिखी जा रही है

    नई दिल्ली । देश के सीमावर्ती क्षेत्रों को अक्सर केवल सुरक्षा और रणनीतिक महत्व के नजरिए से देखा जाता रहा है, लेकिन अब इन इलाकों की तस्वीर तेजी से बदलती दिखाई दे रही है। जम्मू-कश्मीर के तंगधार क्षेत्र में एक ऐसी नई पहल सामने आई है, जो वीरता और विकास को एक साथ जोड़ते हुए सीमाओं की नई पहचान बना रही है। बर्फ से ढके पहाड़ों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच तैयार किया गया शौर्य गाथा कॉम्प्लेक्स अब केवल एक संरचना नहीं बल्कि साहस, समर्पण, संस्कृति और जनसेवा का प्रतीक बनता जा रहा है। यह पहल दिखाती है कि सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ वहां रहने वाले लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में भी सकारात्मक प्रयास किए जा सकते हैं।

    कुपवाड़ा जिले के साधना पास के निकट शमशाबरी पर्वत श्रृंखला के बीच विकसित यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य और रणनीतिक महत्व दोनों के लिए जाना जाता है। समुद्र तल से दस हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित यह इलाका लंबे समय से अपनी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विशेष महत्व रखता है। यहां तैनात सैनिक हर मौसम में देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं। अब इसी वीरभूमि पर विकास और पर्यटन की एक नई कहानी आकार लेती दिखाई दे रही है।

    इस विशेष परिसर को इस प्रकार तैयार किया गया है कि यहां आने वाले लोग केवल पहाड़ों और बर्फीली वादियों का आनंद ही न लें, बल्कि उन सैनिकों के साहस, संघर्ष और बलिदान को भी महसूस कर सकें जो सीमाओं की रक्षा में लगातार डटे रहते हैं। परिसर में बनाए गए युद्ध स्मारक और संग्रहालय में सैन्य इतिहास की प्रेरणादायक झलक देखने को मिलती है। यहां वीर सैनिकों की कहानियों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जिससे आने वाले लोगों को देशभक्ति और समर्पण की भावना का अनुभव हो सके।

    इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इसका उद्देश्य केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। सीमावर्ती गांवों को नई पहचान देने और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में भी यह प्रयास महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खानपान, पहाड़ी जीवनशैली और हस्तशिल्प को भी बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। इससे क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है।

    इस परियोजना से पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होने पर स्थानीय युवाओं को नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। छोटे व्यवसाय, स्थानीय उत्पाद और पारंपरिक कलाएं भी इससे लाभान्वित हो सकती हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास का यह मॉडल आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

    इसके अलावा यहां विकसित किया गया हेलिपैड स्थानीय लोगों के लिए बड़ी सुविधा साबित हो सकता है। खराब मौसम और कठिन रास्तों वाले क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं तथा राहत कार्यों को तेजी से संचालित करने में यह मददगार होगा। तंगधार की यह बदलती तस्वीर यह संदेश देती है कि सीमाओं की सुरक्षा के साथ विकास और जनसेवा को भी समान महत्व दिया जा सकता है। यह पहल शौर्य और सेवा की उस भावना को साकार करती दिखाई देती है जो देश की सीमाओं को नई संभावनाओं से जोड़ रही है।

  • असम की जीत पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन: सिंगापुर ने सरमा को दी शुभकामनाएं, सहयोग बढ़ाने पर जोर

    असम की जीत पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन: सिंगापुर ने सरमा को दी शुभकामनाएं, सहयोग बढ़ाने पर जोर


    नई दिल्ली । असम में हाल ही में हुए राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। राज्य में लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हिमंता बिस्वा सरमा को सिंगापुर की ओर से बधाई संदेश प्राप्त हुआ है। इस संदेश में न केवल उनकी जीत की सराहना की गई, बल्कि असम के विकास में सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई है। यह घटनाक्रम भारत और सिंगापुर के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी उजागर करता है।

    सिंगापुर के प्रतिनिधि ने अपने संदेश में कहा कि असम के नए कार्यकाल की शुरुआत राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिसमें विकास और प्रगति की गति को और तेज किया जा सकता है। उन्होंने सरमा को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में असम नई ऊंचाइयों को छुएगा और क्षेत्रीय विकास का एक मजबूत केंद्र बनेगा।

    यह समर्थन केवल औपचारिक बधाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें दीर्घकालिक साझेदारी का स्पष्ट संकेत भी शामिल था। सिंगापुर ने असम को एक भरोसेमंद सहयोगी बताते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच पहले से जारी सहयोग को और अधिक विस्तार दिया जाएगा। खासकर औद्योगिक निवेश, तकनीकी विकास, बुनियादी ढांचे और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

    पिछले कुछ वर्षों में असम और सिंगापुर के बीच संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। राज्य में निवेश आकर्षित करने और आधुनिक उद्योगों को विकसित करने के लिए कई पहल की गई हैं, जिनमें सेमीकंडक्टर निर्माण, हरित ऊर्जा और शहरी विकास जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। इन प्रयासों ने असम को एक उभरते हुए निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने में मदद की है।

    विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दोनों पक्षों के बीच सहयोग को रणनीतिक माना जा रहा है। असम में विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों और टेक्नोलॉजी आधारित परियोजनाओं में विदेशी भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य और कौशल विकास के क्षेत्रों में भी संयुक्त कार्यक्रमों पर काम आगे बढ़ रहा है।

    इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक कूटनीतिक संदेश के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे असम की बढ़ती वैश्विक पहचान का संकेत भी माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निवेश की यह दिशा राज्य की आर्थिक संरचना को नई मजबूती देने में सहायक हो सकती है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम अब क्षेत्रीय विकास से आगे बढ़कर वैश्विक साझेदारियों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इस प्रकार के समर्थन संदेश यह दर्शाते हैं कि राज्य अब अंतरराष्ट्रीय निवेश और सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।

    आने वाले समय में असम और सिंगापुर के बीच सहयोग के और गहरे होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे न केवल आर्थिक विकास को गति मिलेगी बल्कि रोजगार और तकनीकी उन्नति के नए अवसर भी पैदा होंगे।

  • नए उपाध्यक्ष के तौर पर सक्रिय हुए अशोक लाहिड़ी, पीएम से मुलाकात में विकास एजेंडे पर चर्चा..

    नए उपाध्यक्ष के तौर पर सक्रिय हुए अशोक लाहिड़ी, पीएम से मुलाकात में विकास एजेंडे पर चर्चा..

    नई दिल्ली। नीति आयोग के नए उपाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभालने के बाद वरिष्ठ अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी ने राजधानी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद हुई एक महत्वपूर्ण औपचारिक बैठक मानी जा रही है, जिसमें देश की आर्थिक नीतियों और विकास योजनाओं से जुड़े व्यापक मुद्दों पर विचार-विमर्श की संभावना रही।

    अशोक लाहिड़ी लंबे समय से भारत की आर्थिक नीति निर्माण प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं और उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। उनके अनुभव को देखते हुए नीति आयोग में उनकी नियुक्ति को सरकार के आर्थिक दृष्टिकोण को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    इस नई जिम्मेदारी के साथ नीति आयोग में कार्यशैली और प्राथमिकताओं में भी बदलाव की उम्मीद की जा रही है। सरकार का फोकस इस समय विकास, निवेश और आर्थिक सुधारों को गति देने पर है, ऐसे में लाहिड़ी की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    लाहिड़ी का करियर चार दशकों से अधिक का रहा है, जिसमें उन्होंने मुख्य आर्थिक सलाहकार और विभिन्न वैश्विक वित्तीय संस्थानों के साथ काम किया है। उनकी विशेषज्ञता खास तौर पर वित्तीय नीति और मैक्रो-इकोनॉमिक प्लानिंग में मानी जाती है।

    उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश तेजी से बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल के बीच अपनी विकास रणनीतियों को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। इस संदर्भ में नीति आयोग में उनकी भूमिका नीति निर्माण को और अधिक व्यावहारिक और डेटा आधारित बनाने में मदद कर सकती है।

    प्रधानमंत्री से उनकी यह मुलाकात केवल औपचारिकता नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे आने वाले समय की नीति दिशा और प्राथमिकताओं के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

  • शिक्षा से वंचित खमरिया 9 साल बाद भी स्कूल नहीं ग्रामीणों का गुस्सा बरकरार

    शिक्षा से वंचित खमरिया 9 साल बाद भी स्कूल नहीं ग्रामीणों का गुस्सा बरकरार


    कटनी । कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील के ग्राम खमरिया में शिक्षा को लेकर एक पुरानी घोषणा आज भी अधूरी पड़ी है। वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनदर्शन यात्रा के दौरान गांव में हाई स्कूल खोलने की घोषणा की थी, लेकिन नौ साल बीत जाने के बाद भी यह घोषणा जमीन पर उतरती नजर नहीं आई।

    तहसील मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में हाई स्कूल की सुविधा नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। खासकर बेटियों की शिक्षा पर इसका अधिक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे कई परिवारों को मजबूरी में बच्चों की पढ़ाई बीच में ही रोकनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बार-बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    गांव में इस मुद्दे को लेकर आक्रोश इस कदर बढ़ा कि पिछले विधानसभा चुनाव में ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार तक कर दिया था। उस समय भाजपा प्रत्याशी और वर्तमान विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह ने गांव पहुंचकर लोगों को आश्वासन दिया था कि चुनाव जीतने के बाद स्कूल खोलना उनकी प्राथमिकता होगी।

    विधायक बनने के बाद उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए कटनी से लेकर भोपाल तक कई बार पत्राचार किया। उन्होंने शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर मामला विधानसभा में भी उठाया। वहीं शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह भी पिछले कुछ वर्षों से लगातार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर इस समस्या के समाधान की मांग करती रही हैं।

    स्थानीय जनप्रतिनिधियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी अधिकारियों की सुस्ती पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इस तरह की लापरवाही से सरकार की छवि प्रभावित होती है और जनता का विश्वास कमजोर होता है।

    इस मामले पर विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि उन्होंने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है और हाल ही में शिक्षा मंत्री से मुलाकात के बाद आश्वासन मिला है कि आगामी नए शैक्षणिक सत्र में खमरिया में हाई स्कूल शुरू कर दिया जाएगा।

    वहीं शिक्षा विभाग के जबलपुर संभाग के संयुक्त संचालक अरुण इंगले ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था, लेकिन अब जिला शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री की घोषणा पूरी क्यों नहीं हुई, इसकी जांच की जाएगी और जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा।

    यह मामला न केवल एक अधूरी सरकारी घोषणा का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी किस तरह बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि वर्षों से लंबित यह वादा कब तक हकीकत में बदलता है।

  • बिहार की कमान संभालते ही बड़ी परीक्षा: सम्राट चौधरी के सामने विकास की रफ्तार बढ़ाने की चुनौती

    बिहार की कमान संभालते ही बड़ी परीक्षा: सम्राट चौधरी के सामने विकास की रफ्तार बढ़ाने की चुनौती


    पटना। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बिहार की राजनीति में नया अध्याय शुरू हो गया है। लंबे समय तक राज्य की कमान संभालने वाले नीतीश कुमार ने विकास की मजबूत नींव रखी, अब उस पर “विकसित बिहार” की इमारत खड़ी करने की जिम्मेदारी नई सरकार पर आ गई है।

    नई सरकार ने “न्याय के साथ विकास” की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए “बदलता बिहार, बढ़ता बिहार” का नारा दिया है। लेकिन असली चुनौती अब इस बदलाव की गति को तेज करने की है।

    विकास की रफ्तार बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती
    नीतीश कुमार के कार्यकाल में बिहार की औसत विकास दर 10% से अधिक रही। हालांकि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि विकसित राज्यों की श्रेणी में आने के लिए यह रफ्तार 20% के आसपास होनी चाहिए। ऐसे में सम्राट चौधरी के सामने कम समय में दोगुनी गति से विकास करने की बड़ी चुनौती है।

    शपथ लेने के तुरंत बाद ही उन्होंने अधिकारियों को साफ संकेत दे दिया कि काम की रफ्तार बढ़ानी होगी और लटकाने की प्रवृत्ति खत्म करनी होगी।

    डबल इंजन सरकार—ताकत या उम्मीद?
    राज्य में नई सरकार की एक बड़ी ताकत केंद्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन है। “डबल इंजन” मॉडल के चलते केंद्र से सहयोग और संसाधनों की उम्मीद बढ़ जाती है।

    हालांकि, विशेष राज्य का दर्जा अभी तक नहीं मिल पाया है, लेकिन विशेष पैकेज के जरिए कुछ आर्थिक मदद जरूर मिली है।

    आर्थिक संसाधन बढ़ाना बड़ी चुनौती
    बिहार की सबसे बड़ी कमजोरी सीमित आंतरिक आय है। राज्य का आंतरिक राजस्व करीब 75 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचा है, जिसे तेजी से बढ़ाने की जरूरत है।

    केंद्र से करों और अनुदान में बड़ी हिस्सेदारी मिलती है
    बजट में कर्ज का भी प्रावधान है
    लेकिन अपनी आय अभी भी जरूरत के मुकाबले कम है

    ऐसे में सरकार को नए राजस्व स्रोत तलाशने और कठोर आर्थिक फैसले लेने पड़ सकते हैं।

    रोजगार, पलायन और गरीबी—तीन बड़ी चिंताएं
    बिहार की जमीनी चुनौतियां अब भी गंभीर हैं:

    बेरोजगारी
    कम प्रति व्यक्ति आय
    बड़े पैमाने पर पलायन

    जातीय सर्वेक्षण में लाखों परिवार गरीब पाए गए हैं। सरकार ने उन्हें आर्थिक सहायता देने और महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन इन पर भारी खर्च भी आएगा।

    अवसर भी कम नहीं
    नई सरकार के पास चुनौतियों के साथ अवसर भी हैं:

    प्रशासनिक ढांचा पहले से व्यवस्थित
    सुशासन की छवि
    केंद्र का समर्थन
    और नेतृत्व में नई ऊर्जा

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी सम्राट चौधरी की कार्यक्षमता और जमीनी अनुभव पर भरोसा जताया है।

    बिहार आज एक अहम मोड़ पर खड़ा है। मजबूत नींव तैयार है, लेकिन ऊंची उड़ान के लिए तेज फैसले, बेहतर संसाधन प्रबंधन और रोजगार सृजन पर फोकस जरूरी होगा।

    अब देखना यह है कि सम्राट चौधरी इन चुनौतियों को अवसर में बदलकर “विकसित बिहार” के लक्ष्य को कितनी तेजी से हासिल कर पाते हैं।