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  • राष्ट्रीय एकता दिवस पर पीएम मोदी ने सरदार पटेल को किया नमन, एकता नगर को दी 400 करोड़ रुपये की सौगात

    राष्ट्रीय एकता दिवस पर पीएम मोदी ने सरदार पटेल को किया नमन, एकता नगर को दी 400 करोड़ रुपये की सौगात

    नई दिल्ली । देश के पहले गृहमंत्री और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया। इस अवसर पर गुजरात के नर्मदा जिले स्थित एकता नगर (केवड़िया) में मुख्य राष्ट्रीय समारोह आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां पहुंचकर दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पुष्पांजलि अर्पित की और सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने देशवासियों को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई। कार्यक्रम के साथ ही प्रधानमंत्री ने एकता नगर के विकास को गति देने के लिए 400 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने एकता नगर में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने से जुड़ी योजनाओं की शुरुआत की। इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। विकास योजनाओं में स्मार्ट परिवहन संपर्क व्यवस्था, हरित ऊर्जा से जुड़ी पहल, पर्यटकों की आवाजाही आसान बनाने के लिए नए वॉकवे और सुरक्षा व्यवस्था का आधुनिकीकरण शामिल है। इसके अलावा स्थानीय जनजातीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने से जुड़ी योजनाएं भी इन परियोजनाओं का हिस्सा हैं।

    प्रधानमंत्री ने एकता नगर के विकास और उसकी भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि यह स्थान अब केवल एक स्मारक तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता और पर्यावरण के अनुकूल विकास के वैश्विक मॉडल के रूप में आगे बढ़ रहा है। इन परियोजनाओं के माध्यम से पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी और सुविधाओं को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

    विकास परियोजनाओं के कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री ने एकता नगर में तैयार किए गए रेन फॉरेस्ट और वामन वृक्ष वाटिका का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद जैव विविधता, दुर्लभ वनस्पतियों और विभिन्न पौधों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए किए गए इंतजामों की जानकारी ली। अधिकारियों ने उन्हें इन हरित क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रबंधों के बारे में बताया।

    नर्मदा नदी के साधु बेट द्वीप पर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित स्मारक है। इसकी मुख्य प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर यानी 597 फीट है। आधार सहित इसकी कुल ऊंचाई लगभग 240 मीटर बताई जाती है। यह अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से लगभग दोगुनी ऊंची है। प्रसिद्ध मूर्तिकार राम वी. सुतार ने इस प्रतिमा को डिजाइन किया था, जबकि इसका निर्माण लार्सन एंड टुब्रो कंपनी ने किया। निर्माण कार्य 33 महीने में पूरा किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2018 को सरदार पटेल की 143वीं जयंती के अवसर पर इस स्मारक को राष्ट्र को समर्पित किया था।

    राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह के दौरान भव्य परेड का भी आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री ने परेड की सलामी ली। इसमें सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और गुजरात पुलिस के जवानों ने हिस्सा लिया। सुरक्षा बलों के दस्तों ने अनुशासन और शौर्य का प्रदर्शन किया। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक नृत्यों और डेयरडेविल्स जवानों के हैरतअंगेज करतबों ने समारोह को विशेष बनाया। कार्यक्रम के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया गया।

    समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से सरदार पटेल के आदर्शों पर चलने और देश की एकता एवं अखंडता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद सरदार पटेल ने 562 से अधिक देसी रियासतों का विलय कर भारत को एकजुट करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। प्रधानमंत्री ने इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए देश के 140 करोड़ नागरिकों से संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करने का संकल्प दोहराने की अपील की।

  • MP के बालाघाट में 100 गांवों के विकास का अभियान शुरू, सड़क, पानी, शिक्षा और रोजगार पर रहेगा खास जोर..

    MP के बालाघाट में 100 गांवों के विकास का अभियान शुरू, सड़क, पानी, शिक्षा और रोजगार पर रहेगा खास जोर..

    मध्य प्रदेश: के बालाघाट जिले में लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहे 100 गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। राज्य सरकार की इस पहल के तहत गांवों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य ग्रामीणों की जरूरतों को समझकर ऐसे विकास कार्यों की योजना बनाना है, जिनसे स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं और रोजगार के अवसर मिल सकें।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर शुरू किए गए इस अभियान में विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन अधिकारियों को अपने निर्धारित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से सीधे बातचीत करने, समस्याओं की जानकारी जुटाने और उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। यह पूरी प्रक्रिया 14 दिनों के भीतर पूरी की जानी है। इसके बाद गांवों की जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।

    अभियान के लिए बालाघाट जिले के 100 गांवों को चार क्लस्टर में विभाजित किया गया है। इनमें बैहर, बिरसा, लांजी और किरनापुर विकासखंड के गांव शामिल हैं। अलग-अलग विभागों की टीमें अपने निर्धारित क्षेत्रों में पहुंचकर स्थानीय परिस्थितियों और विकास की संभावनाओं का आकलन कर रही हैं। ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर यह तय करने की कोशिश की जा रही है कि किन सुविधाओं की सबसे अधिक जरूरत है और किन कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    26 अक्टूबर को अधिकारियों की टीमों ने विभिन्न गांवों का दौरा कर लोगों से चर्चा की। लांजी क्षेत्र में कट्टीपार, सतोना, बरगुड़ और देवरबेली गांवों में ग्रामीणों की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली गई। बैहर क्षेत्र की टीम दड़ेकसा, बिलालकसा, सोनगुड्डा, लूद, हिर्री, भर्री, सोनपुरी और बिठरी सहित कई गांवों में पहुंची। वहीं, किरनापुर क्षेत्र के सीतापार और बोरवन गांवों में भी स्थानीय लोगों से बातचीत कर विकास की जरूरतों का पता लगाया गया।

    28 अक्टूबर को कलेक्टर आदित्य सिंह ने लांजी विकासखंड की देवरबेली ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले बरगुड़-सतोना, केराडीह, सायर और संदूका गांवों का भ्रमण किया। जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी और अन्य विभागों की टीमों ने भी अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद किया। इसके अतिरिक्त जनजातीय कार्य, पशु चिकित्सा, मत्स्यपालन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी अपने क्षेत्रों में सुविधाओं की स्थिति की जानकारी जुटाई।

    अभियान में सड़क, पुल-पुलिया, पेयजल, सिंचाई और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही सरकारी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, छात्रावासों और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता का भी आकलन किया जा रहा है। जहां सुविधाओं की कमी सामने आएगी, वहां जरूरत के अनुसार विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। पात्र ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    ग्रामीणों की आजीविका मजबूत करना भी इस पहल का अहम हिस्सा है। इसके लिए कृषि, उद्यानिकी, डेयरी, पशुपालन और मत्स्यपालन जैसी गतिविधियों में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। प्रशासन स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ऐसे अवसरों की पहचान करना चाहता है, जिनसे ग्रामीण अपने क्षेत्र में ही आर्थिक गतिविधियों से जुड़ सकें।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इससे पहले बालाघाट जिले के 100 पिछड़े गांवों में विकास कार्यों के लिए लगभग 225 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी। अब जारी सर्वेक्षण और ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों के आधार पर योजनाओं की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी। अधिकारियों को 14 दिनों के भीतर भ्रमण और रिपोर्ट तैयार करने का काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इस अभियान का लक्ष्य गांवों में जरूरी सुविधाओं का विस्तार करना और स्थानीय लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आजीविका के बेहतर अवसर विकसित करना है।

  • भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर कांग्रेस की आपत्ति, 21 साल से नई विकास योजना नहीं होने और कानूनी खामियों का उठाया मुद्दा

    भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर कांग्रेस की आपत्ति, 21 साल से नई विकास योजना नहीं होने और कानूनी खामियों का उठाया मुद्दा


    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति दर्ज कराई है। पार्टी का कहना है कि शहर की पिछली विकास योजना वर्ष 2005 में समाप्त हो गई थी और इसके बाद से भोपाल में नई विकास योजना लागू नहीं हो सकी है। कांग्रेस ने प्रस्तावित प्रारूप में कानूनी प्रक्रियाओं, भूमि उपयोग, सार्वजनिक परिवहन, सस्ते आवास, हरित क्षेत्रों और जल प्रबंधन से जुड़ी कई कमियां होने का दावा किया है।
    कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे के मुताबिक, कांग्रेस सरकार के 15 महीने के कार्यकाल के दौरान भोपाल विकास योजना 2031 का प्रारूप प्रकाशित किया गया था। उनके अनुसार, उस प्रक्रिया में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई थी और 3,000 से अधिक आपत्तियों पर सुनवाई भी हो चुकी थी। उन्होंने दावा किया कि केवल अंतिम अधिसूचना जारी होना बाकी था, लेकिन बाद में भाजपा सरकार ने उस योजना को निरस्त कर दिया। कांग्रेस ने इस फैसले की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं।

    कांग्रेस ने प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 में पांच प्रमुख कानूनी खामियां होने का आरोप लगाया है। पार्टी के अनुसार, प्रारूप में वर्ष 2024 के मौजूदा भूमि उपयोग मानचित्र का राजपत्र में उल्लेख तो किया गया, लेकिन उसका विधिवत प्रकाशन और उस पर आपत्तियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। कांग्रेस ने नगर विकास योजनाओं की अनंतिम सीमाएं दिखाने से जुड़े प्रावधानों का पालन नहीं होने का भी दावा किया है।

    पार्टी ने आरक्षित भूमि के मालिकों के लिए मुआवजे या क्षतिपूर्ति की व्यवस्था, शहर के जल निकायों के जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण और वर्ष 2005 की योजना के हरित क्षेत्रों में किए गए बदलावों का तुलनात्मक विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। कांग्रेस के मुताबिक, भोपाल के 18 जल निकायों में से केवल बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र को शामिल किया गया है, जबकि सभी जल निकायों के लिए स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।

    प्रस्तावित योजना की परिवहन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने कहा कि विकास का प्रारूप लोगों की जरूरतों के बजाय वाहनों की आवाजाही पर अधिक केंद्रित है। अभय दुबे के अनुसार, शहर में लगभग 54 प्रतिशत यात्राएं पैदल, साइकिल या ऑटो से होती हैं, लेकिन मास्टर प्लान में सार्वजनिक परिवहन के लिए स्पष्ट लक्ष्य, बस नेटवर्क, साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए निर्धारित क्षेत्रों का पर्याप्त प्रावधान नहीं है।

    कांग्रेस ने ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी टीओडी के प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी के अनुसार, मेट्रो के दोनों ओर 500 मीटर के दायरे में करीब 9,500 हेक्टेयर क्षेत्र को विकास के लिए प्रस्तावित किया गया है, लेकिन घनत्व, फ्लोर एरिया रेशियो और किफायती आवास जैसे जरूरी प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं। इसी तरह, 51 किलोमीटर लंबे बायपास के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में 2,449 हेक्टेयर भूमि पर सघन विकास प्रस्तावित होने पर भी आपत्ति जताई गई है। कांग्रेस का कहना है कि इस क्षेत्र में मेट्रो या बस लेन जैसी परिवहन सुविधाएं नहीं हैं।

    भूमि उपयोग और आवास के संबंध में भी पार्टी ने प्रारूप की आलोचना की है। कांग्रेस के दावे के अनुसार, आवासीय भूमि का हिस्सा निर्धारित मानकों से 5 से 7 प्रतिशत अधिक है, जबकि घनत्व 28 से 48 प्रतिशत कम है। इसी वजह से योजना का क्षेत्रफल 601 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 1,017 वर्ग किलोमीटर किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी ने करीब 4.8 लाख झुग्गीवासियों वाले शहर में आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के लिए पर्याप्त भूमि आरक्षित नहीं होने का मुद्दा भी उठाया।

    हरित क्षेत्र और जल आपूर्ति को लेकर कांग्रेस ने कहा कि प्रति व्यक्ति हरित क्षेत्र के लिए 10 से 12 वर्ग मीटर के मानक के मुकाबले प्रस्तावित योजना में लगभग 7 वर्ग मीटर का प्रावधान है। पार्टी ने पानी की उपलब्धता के अनुमान पर भी सवाल उठाए हैं। उसके अनुसार, योजना में जल जरूरतों का आकलन वर्ष 2031 तक किया गया है और 45 लाख की अनुमानित आबादी के लिए 209 एमएलडी पानी की कमी बताई गई है, लेकिन इसके स्रोत स्पष्ट नहीं हैं। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए भूमि चिन्हित नहीं होने का आरोप भी लगाया गया है।

    कांग्रेस ने शहर के विस्तार पर अनुमानित 59 हजार करोड़ रुपये के खर्च के लिए स्पष्ट वित्तीय योजना की मांग की है। पार्टी ने भूमि उपयोग मानचित्र की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने, संशोधित प्रारूप दोबारा प्रकाशित करने और सार्वजनिक परिवहन, किफायती आवास, हरित क्षेत्रों तथा जल प्रबंधन को लेकर ठोस प्रावधान शामिल करने की मांग की है। ये सभी आपत्तियां कांग्रेस की ओर से उठाई गई हैं; प्रस्तावित मास्टर प्लान पर अंतिम निर्णय और संबंधित विभागों का पक्ष इस विवरण में शामिल नहीं है।

  • शिवपुरी नगर पालिका में सात महीने से सम्मेलन नहीं, आपसी खींचतान में करोड़ों के विकास कार्य अटके

    शिवपुरी नगर पालिका में सात महीने से सम्मेलन नहीं, आपसी खींचतान में करोड़ों के विकास कार्य अटके


    शिवपुरी: शहर में नगर पालिका परिषद का सम्मेलन लंबे समय से नहीं होने के कारण विकास कार्यों की मंजूरी और प्रशासनिक फैसलों पर असर पड़ रहा है। नियमानुसार नगर पालिका का साधारण सम्मेलन प्रत्येक दो महीने में आयोजित किया जाना चाहिए, लेकिन शिवपुरी में पिछले सात महीनों से परिषद की बैठक नहीं हुई है। इस स्थिति में शहर से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव स्वीकृति के इंतजार में हैं। नगर पालिका अध्यक्ष और मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) सम्मेलन आयोजित करने के लिए एक-दूसरे को पत्र लिखने की बात कह रहे हैं, लेकिन बैठक की तारीख अब तक तय नहीं हो सकी है।

    नगर पालिका में सम्मेलन नहीं होने की प्रमुख वजह अध्यक्ष और 20 से अधिक विरोधी पार्षदों के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद बताया जा रहा है। पार्षदों और अध्यक्ष के बीच कुछ मुद्दों पर करीब दो साल से मतभेद हैं। परिषद की बैठकों के दौरान विरोधी पार्षदों के हंगामे और पहले हुए बहिष्कार के कारण भी बैठक आयोजित करने को लेकर मुश्किलें सामने आती रही हैं। इसी राजनीतिक खींचतान के बीच शहर के विकास से जुड़े प्रस्ताव लंबित हैं।

    नगर पालिका के सीएमओ यशवंत राठौर जुलाई में पदस्थ हुए थे। उनके मुताबिक, परिषद सम्मेलन का एजेंडा तैयार कर लिया गया है और बैठक आयोजित करने के संबंध में अध्यक्ष को पत्र भी भेजे जा चुके हैं। उन्होंने जल्द सम्मेलन कराने की बात कही है। दूसरी ओर, नगर पालिका अध्यक्ष का कहना है कि वह सीएमओ को तीन बार पत्र लिखकर सम्मेलन आयोजित करने के लिए कह चुकी हैं। अध्यक्ष के अनुसार, एजेंडे के कुछ बिंदु भी निर्धारित किए जा चुके हैं और उनकी ओर से बैठक बुलाने में कोई बाधा नहीं है। इस तरह दोनों पक्ष सम्मेलन में देरी के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी बता रहे हैं।

    प्रस्तावित सम्मेलन में शहर की पेयजल व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। मड़ीखेड़ा और सतनवाड़ा फिल्टर प्लांट के लिए तीन-तीन मोटरों की दरों को स्वीकृति देने का प्रस्ताव एजेंडे में रखा गया है। इनमें से एक फिल्टर प्लांट की तीन मोटरें आ चुकी हैं और अब उनके संबंध में नगर पालिका से स्वीकृति ली जानी है। इसके अतिरिक्त बस स्टैंड के संचालन के लिए ठेका देने से संबंधित प्रस्ताव भी विचार के लिए रखा गया है।

    वार्ड नंबर 29, 30 और 35 में पानी की टंकियों के निर्माण पर हुए व्यय से संबंधित प्रस्ताव भी सम्मेलन में शामिल किए जाने हैं। शहर में बाजार बैठक की वसूली, सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए दो नई जेसीबी मशीनों की खरीद तथा दो नए डंपर और एक पोकलेन मशीन खरीदने के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के मुद्दे भी लंबित एजेंडे का हिस्सा हैं। इन प्रस्तावों पर निर्णय होने से नगर पालिका के संसाधनों और शहर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    इसके अलावा वर्ष 2026-27 में आयोजित होने वाले सिद्धेश्वर वाणगंगा मेले, गांधी पार्क मेले और अन्य मेलों के आयोजन पर भी परिषद में विचार किया जाना है। इन सभी प्रस्तावों पर निर्णय के लिए सम्मेलन आवश्यक है। नगर पालिका में कुछ कार्य बिना पूर्व स्वीकृति के किए जाने और बाद में उनकी मंजूरी लेने की स्थिति भी सामने आई है। इससे परिषद की नियमित बैठक और निर्धारित प्रक्रिया के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    नगर पालिका परिषद के वर्तमान कार्यकाल में करीब दस महीने शेष बताए गए हैं। ऐसे में लंबित प्रस्तावों पर निर्णय लेने और विकास कार्यों को गति देने के लिए परिषद तथा पीआईसी की बैठकें समय पर आयोजित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन में लगातार देरी जारी रहने पर शहर की पेयजल व्यवस्था, सफाई, परिवहन सुविधाओं और अन्य विकास योजनाओं से जुड़े फैसले प्रभावित हो सकते हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि अध्यक्ष और सीएमओ के बीच पत्राचार के बाद परिषद की बैठक कब आयोजित होती है और लंबित प्रस्तावों पर कब निर्णय लिया जाता है।

  • भारत की आर्थिक प्रगति जश्न के काबिल, अगले वर्षों में भी सात प्रतिशत से अधिक विकास की उम्मीद

    भारत की आर्थिक प्रगति जश्न के काबिल, अगले वर्षों में भी सात प्रतिशत से अधिक विकास की उम्मीद

    नई दिल्ली । भारत की आर्थिक प्रगति को पिछले एक दशक की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए शीर्ष अर्थशास्त्री क्युंघून किम ने कहा है कि देश की लगातार मजबूत आर्थिक वृद्धि और बेहतर होती आर्थिक स्थिति भविष्य के लिए आशावाद का आधार प्रदान करती है। उनके अनुसार, भारत के सामने अभी कई चुनौतियां हैं, लेकिन इसके बावजूद देश ने आर्थिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि मध्यम अवधि में भी भारत के मजबूत विकास की संभावनाएं बनी हुई हैं और यह उपलब्धि सराहना के साथ जश्न मनाने योग्य है।

    क्युंघून किम ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने विचारों में कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति को उसके आकार और आबादी के संदर्भ में समझना जरूरी है। करीब 1.4 अरब लोगों वाले देश के लिए लगातार मजबूत विकास दर हासिल करना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक रूप से आगे बढ़ने की क्षमता और आने वाले वर्षों में विकास की संभावनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं।

    उनकी यह टिप्पणी भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर वैश्विक संस्थानों के बदले आकलन के बीच आई है। एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, एशियाई विकास बैंक और विश्व बैंक जैसे प्रमुख वैश्विक संस्थानों ने चालू वर्ष और अगले वर्ष के लिए भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमानों को बढ़ाकर सात प्रतिशत से अधिक कर दिया है। उनके अनुसार, विभिन्न संस्थानों के अनुमानों में हुआ यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और विकास की संभावनाओं को दर्शाता है।

    किम ने कोविड-19 महामारी के बाद भारत की आर्थिक स्थिति में आए सुधार का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, महामारी के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में 5.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि, इसके बाद अर्थव्यवस्था ने तेजी से वापसी की और वर्ष 2021 में 9.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसके बाद अगले चार वर्षों तक विकास दर सात प्रतिशत से ऊपर बनी रही। इस प्रदर्शन को उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।

    अर्थशास्त्री ने कहा कि लगातार बेहतर होते आर्थिक आंकड़ों के कारण उन्हें और कई अन्य अर्थशास्त्रियों को अपनी विकास दर संबंधी भविष्यवाणियों में बार-बार संशोधन करना पड़ा। हर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के आंकड़े उम्मीदों से बेहतर रहे। इसके परिणामस्वरूप भारत ने लगातार पांच वर्षों तक सात प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर्ज की। उनके मुताबिक, यह प्रदर्शन वर्ष 2003 से 2007 के उस दौर की याद दिलाता है, जब भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ था।

    किम ने वर्ष 2021 से 2025 के बीच भारत की औसत वार्षिक विकास दर 7.83 प्रतिशत रहने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1960 के बाद किसी भी पांच वर्षीय अवधि में यह दूसरी सबसे ऊंची औसत वृद्धि दर है। इससे अधिक औसत वृद्धि केवल वर्ष 2003 से 2007 के दौरान दर्ज की गई थी, जब यह आंकड़ा 7.89 प्रतिशत रहा था। इस तुलना के जरिए उन्होंने भारत की हालिया आर्थिक वृद्धि के महत्व को रेखांकित किया।

    भारत की अर्थव्यवस्था के आकार में आए बदलाव को भी किम ने अहम बताया। उनके अनुसार, वर्ष 2007 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार एक ट्रिलियन डॉलर से थोड़ा अधिक था, जबकि अब यह चार ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच रही है। इसका अर्थ है कि आज समान विकास दर से होने वाला आर्थिक विस्तार दो दशक पहले की तुलना में कहीं बड़े पैमाने पर मूल्य सृजन करता है। किम ने कहा कि भारत की पिछले दशक की प्रगति और मध्यम अवधि में मजबूत विकास की संभावनाएं महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि देश के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं।

  • पीयूष गोयल का दावा, भारत अगले 20-25 वर्षों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा

    पीयूष गोयल का दावा, भारत अगले 20-25 वर्षों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा


    नई दिल्ली ।केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत अगले 20-25 वर्षों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दशकों में वैश्विक आर्थिक विकास और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति को गति देने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उनके मुताबिक, देश की युवा आबादी, विशाल उपभोक्ता बाजार और उद्यमशीलता की क्षमता भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को मजबूती देती है।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एसआरसीसी शताब्दी सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि दुनिया के कई देश भारत के साथ जुड़ना चाहते हैं। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ओर बढ़ती दिलचस्पी का प्रमुख कारण यहां की युवा और महत्वाकांक्षी आबादी है। उन्होंने कहा कि वैश्विक समुदाय भारत की क्षमता को पहचान रहा है और आने वाले समय में देश अंतरराष्ट्रीय विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

    केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आकांक्षाओं से भरा युवा भारत वैश्विक विकास का नेतृत्व करने की स्थिति में है। उन्होंने प्रौद्योगिकी और वैश्विक व्यापार में देश की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, भारत आने वाले वर्षों में इन दोनों क्षेत्रों में प्रगति को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हो सकता है। उन्होंने देश की विकास क्षमता को भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़कर प्रस्तुत किया।

    भारत की लंबी अवधि की आर्थिक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए गोयल ने जनसांख्यिकीय क्षमता, युवा आबादी और बड़े उपभोक्ता बाजार को देश की प्रमुख ताकत बताया। उन्होंने कहा कि इन विशेषताओं के साथ उद्यमशील ऊर्जा भी भारत की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने में योगदान देगी। उनके अनुसार, इन क्षमताओं के कारण भारत आने वाले दो से ढाई दशकों तक तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए रख सकता है।

    गोयल ने कहा कि भारत की आबादी और बाजार का आकार देश को भविष्य के वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर देता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की आर्थिक प्रगति केवल वर्तमान उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों में भी इसके व्यापक प्रभाव की संभावना है। हालांकि, उनके संबोधन में इस अनुमान के समर्थन में कोई विशिष्ट आर्थिक आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया गया।

    केंद्रीय मंत्री ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के नागरिकों को सामूहिक रूप से योगदान देना होगा। उनके मुताबिक, राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी स्वीकार करना आवश्यक है और लोगों को चुनौतियों से बचने की मानसिकता छोड़कर अपने दायित्वों को निभाने पर ध्यान देना चाहिए।

    गोयल ने कहा कि समाज के एक बड़े वर्ग में समस्याओं से बचने की प्रवृत्ति दिखाई देती है और लोग कई बार यह स्वीकार नहीं करते कि भविष्य को दिशा देने की जिम्मेदारी उनके अपने हाथों में है। उन्होंने इस सोच में बदलाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य सभी के प्रयासों से ही पूरा हो सकता है।

    अपने संबोधन के अंत में केंद्रीय मंत्री ने बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने की महत्वाकांक्षा को आधुनिक भारत की पहचान बताया। उन्होंने कहा कि यही महत्वाकांक्षा देश की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा के पीछे प्रमुख कारणों में से एक है। उनके वक्तव्य का मुख्य संदेश यह रहा कि भारत की युवा शक्ति, आर्थिक क्षमता और सामूहिक जिम्मेदारी आने वाले दशकों में देश की विकास यात्रा को दिशा देने में अहम होंगी।

  • पीएम मोदी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को दिया केंद्र की मदद का भरोसा, 13 हजार करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास

    पीएम मोदी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को दिया केंद्र की मदद का भरोसा, 13 हजार करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु के विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र पूरी प्रतिबद्धता के साथ तमिलनाडु के साथ खड़ा है। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व में तमिलनाडु के विकास और देश को विकसित बनाने के साझा लक्ष्य पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों मिलकर विकसित तमिलनाडु के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प को साकार कर सकते हैं।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार तमिलनाडु को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक सहयोग देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि राज्य को केंद्र से जिस भी सहायता की जरूरत होगी, उसे उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उनके मुताबिक, तमिलनाडु के विकास को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है। उन्होंने राज्य के लोगों को विकास परियोजनाओं से जुड़े इस अवसर पर बधाई भी दी।

    चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम में लगभग 13 हजार करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। प्रधानमंत्री ने इसे तमिलनाडु के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के तहत कुछ ऐसी परियोजनाएं जनता को समर्पित की जा रही हैं, जिनका काम पूरा हो चुका है, जबकि कई नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी जा रही है। इन योजनाओं का संबंध परिवहन, उद्योग, व्यापार और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों से है।

    मोदी ने कहा कि विकास परियोजनाओं में से कुछ लोगों की रोजमर्रा की यात्रा को आसान बनाएंगी। वहीं, दूसरी परियोजनाओं से उद्योग और व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इन पहलों का संयुक्त उद्देश्य तमिलनाडु के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। प्रधानमंत्री ने राज्य के विकास में बुनियादी ढांचे की भूमिका को भी रेखांकित किया।

    अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने चेन्नई मेट्रो के एक अन्य चरण को जनता को समर्पित करने का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उन्हें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में ब्रेन रिसर्च सेंटर जाने का अवसर मिला। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस क्षेत्र में होने वाला अनुसंधान सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई नए अवसर पैदा कर सकता है। इस तरह उनके कार्यक्रम में आधुनिक परिवहन व्यवस्था के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान और स्वास्थ्य से जुड़े विषय भी शामिल रहे।

    प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास के बीच संबंध पर भी बात की। उन्होंने कहा कि मंदिरों से लेकर मेट्रो तक राज्य के अनुभव आज के भारत की भावना को दर्शाते हैं। उनके अनुसार, भारत अपनी सांस्कृतिक शक्ति से प्रेरणा लेते हुए विज्ञान में प्रगति कर रहा है और आधुनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से नए अवसर तैयार कर रहा है। उन्होंने विरासत और भविष्य की आकांक्षाओं को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    प्रधानमंत्री का यह संबोधन तमिलनाडु में विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास के अवसर पर हुआ। उन्होंने राज्य के विकास के लिए केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सरकार तमिलनाडु को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सहायता देने को तैयार है। 13 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं के जरिए परिवहन, उद्योग, व्यापार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में विकास को गति देने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में मुख्यमंत्री विजय की ओर से इस प्रस्ताव पर किसी प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।

  • वैश्विक विशेषज्ञों ने भारत की विकास क्षमता पर जताया भरोसा, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजार संभावनाएं निवेशकों को कर रहीं आकर्षित

    वैश्विक विशेषज्ञों ने भारत की विकास क्षमता पर जताया भरोसा, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजार संभावनाएं निवेशकों को कर रहीं आकर्षित


    नई दिल्ली ।
    कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 में दुनियाभर से आए अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक चुनौतियों के बीच मजबूत अर्थव्यवस्थाओं की जरूरत पर जोर दिया। सम्मेलन में भारत की विकास संभावनाओं, वैश्विक व्यापार व्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु जोखिम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने भारत की आर्थिक वृद्धि, बाजार क्षमता और निवेश की संभावनाओं को महत्वपूर्ण बताया।

    स्वीडिश अर्थशास्त्री एरिक बर्गलोफ ने कहा कि वह इस सम्मेलन से इसकी शुरुआत से जुड़े हुए हैं और समय के साथ इसकी गुणवत्ता तथा अंतरराष्ट्रीय भागीदारी में सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि इस बार पहले की तुलना में अधिक देशों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया है। उनके अनुसार, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां काफी अनिश्चित हैं और ऐसे समय में ऊर्जा, व्यापार तथा आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़े जोखिमों के बीच अर्थव्यवस्थाओं को अधिक लचीला बनाने पर चर्चा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत की विकास संभावनाएं मजबूत हैं और कोविड-19 के बाद देश ने प्रभावशाली आर्थिक गति हासिल की है।

    बर्गलोफ ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूत वृद्धि की क्षमता बनी हुई है। हालांकि, ईरान से जुड़े संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत सहित कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आम लोगों और कारोबारों को राहत देने के प्रयास किए हैं, लेकिन इससे राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, वैश्विक संकटों के बीच विकास की गति बनाए रखना नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।

    ब्राजील स्थित क्लाइमेट पॉलिसी इनिशिएटिव के कार्यकारी निदेशक जुलियानो असुन्साओ ने जलवायु परिवर्तन को दुनिया के सबसे बड़े साझा जोखिमों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि जलवायु संकट किसी एक देश तक सीमित नहीं है और इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। उनके अनुसार, भारत और ब्राजील जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के साथ-साथ समाधान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स जैसे मंचों के माध्यम से दोनों देशों के बीच संस्थागत संबंध हैं और भारतीय कंपनियों का ब्राजील में निवेश भी बढ़ रहा है। विकास, जलवायु, कृषि और सतत आर्थिक वृद्धि जैसी समान चुनौतियां दोनों देशों के सहयोग की संभावनाओं को मजबूत करती हैं।

    न्यूजीलैंड के अर्थशास्त्री प्रो. जॉन गिब्सन ने सम्मेलन को शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि यहां भारत के साथ एशिया-प्रशांत और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा हो रही है। बढ़ती अनिश्चितता और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था पर दबाव के बीच उन्होंने मुक्त व्यापार समझौतों को स्थिरता देने वाला माध्यम बताया और भारत-न्यूजीलैंड के हालिया मुक्त व्यापार समझौते का उल्लेख किया।

    जापान के इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइकॉनॉमिक्स के निदेशक काजुतो सुजुकी ने कहा कि अर्थव्यवस्था, भू-राजनीति और जियोइकॉनॉमिक्स एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि चीन के साथ जटिल संबंधों के कारण जापानी उद्योग लंबे समय से भारत को महत्वपूर्ण बाजार मानते हैं। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में जापानी कंपनियां भारत में निवेश के अवसर तलाश रही हैं और देश को दीर्घकालिक विकास तथा विनिर्माण केंद्र के रूप में देख रही हैं। भारत की बाजार क्षमता, जनसांख्यिकीय ताकत और आर्थिक विस्तार की संभावनाएं विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।

  • भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट पर विवाद, संरक्षित जंगलों में सड़कों के प्रस्ताव को लेकर उठे सवाल

    भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट पर विवाद, संरक्षित जंगलों में सड़कों के प्रस्ताव को लेकर उठे सवाल

    भोपाल: के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शहर के व्यवस्थित विकास के उद्देश्य से तैयार किए गए इस प्रारूप में संरक्षित वन क्षेत्रों से होकर कई सड़कों के निर्माण का प्रावधान किए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इन प्रावधानों से जंगलों और बाघों के आवास क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।

    ड्राफ्ट में भोपाल के संरक्षित वन क्षेत्र के भीतर एक दर्जन से अधिक सड़कों का प्रस्ताव बताया गया है। इनमें 18 मीटर, 24 मीटर और 60 मीटर चौड़ी सड़कों के प्रावधान शामिल हैं। जिन क्षेत्रों में इन सड़कों का प्रस्ताव किया गया है, वहां बाघों की आवाजाही और प्रजनन गतिविधियां होने की बात कही गई है। इन वन क्षेत्रों को संरक्षित दर्जा भी प्राप्त है।

    मामले में कालियाखेड़ा, करवा चौथ, मंडोर और मंदोरी सहित कुछ वन क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। इन इलाकों में बाघों की मौजूदगी और आवाजाही लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। साथ ही, इन क्षेत्रों की जमीन को बेहद मूल्यवान माना जाता है। आरोप लगाया गया है कि ऐसी जमीनों पर प्रभावशाली लोगों के हित जुड़े हुए हैं।

    कांग्रेस का कहना है कि इससे पहले प्रस्तावित मास्टर प्लान 2031 में भी जंगलों के बीच सड़क नेटवर्क विकसित करने के प्रावधान किए गए थे। उस समय दावे और आपत्तियां आमंत्रित किए जाने पर बड़ी संख्या में लोगों ने इन प्रावधानों का विरोध किया था। दावा है कि उस प्रक्रिया के दौरान 1500 से अधिक आपत्तियां दर्ज हुई थीं।

    कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने मास्टर प्लान के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें कई स्तर पर गड़बड़ियां की गई हैं। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए जंगलों को नुकसान पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले इस मामले में आपत्ति दर्ज कराई जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।

    दूसरी ओर, भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी बृज गोपाल लोया ने इन आरोपों पर अलग पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान शहर के विकास और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसके लिए विभिन्न प्रावधानों और संबंधित दिशा-निर्देशों का अध्ययन किया गया है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर के जंगलों को किसी भी स्थिति में बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। उनके अनुसार, विकास के साथ वन संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा और दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।

    मास्टर प्लान 2047 का उद्देश्य आने वाले वर्षों में भोपाल के विस्तार और बुनियादी ढांचे को दिशा देना है, लेकिन संरक्षित वन क्षेत्रों से प्रस्तावित सड़कें अब इसके पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर बहस का प्रमुख विषय बन गई हैं। एक ओर शहर के विकास और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर वन क्षेत्र, बाघों के आवास और जैव विविधता के संरक्षण को लेकर चिंताएं सामने आई हैं।

    अब इस ड्राफ्ट पर आने वाली आपत्तियों और सुझावों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसी दौरान यह स्पष्ट होगा कि संरक्षित वन क्षेत्रों से संबंधित प्रस्तावों में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं। फिलहाल मास्टर प्लान 2047 को लेकर राजनीतिक पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो चुके हैं और जंगलों के संरक्षण तथा शहरी विकास के बीच संतुलन का मुद्दा केंद्र में आ गया है।

  • उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पैतृक घर पर खुद गेती चलाकर शुरुआत की

    उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पैतृक घर पर खुद गेती चलाकर शुरुआत की

    उज्जैन: में सिंहस्थ की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पैतृक मकान तक पहुंच गई है। रविवार को मुख्यमंत्री ने अपने पैतृक घर के प्रभावित हिस्से पर खुद गेती चलाकर सड़क चौड़ीकरण के काम की शुरुआत की। इस दौरान उनके बचपन से जुड़ा यह मकान भी विकास योजना के दायरे में आया।

    जिस घर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बचपन बीता, उसी मकान का हिस्सा अब प्रस्तावित सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के लिए हटाया जा रहा है। यह घर उनके परिवार की पुरानी स्मृतियों से जुड़ा रहा है। ऐसे में मकान के प्रभावित हिस्से को खुद हटाने की शुरुआत करना इस पूरी कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा।

    सिंहस्थ की तैयारियों को देखते हुए उज्जैन में सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मार्गों के चौड़ीकरण का काम किया जा रहा है। इसी क्रम में खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक जाने वाले मार्ग को चौड़ा किया जाना है।

    करीब 730 मीटर लंबे इस मार्ग की प्रस्तावित चौड़ाई 15 मीटर रखी गई है। सड़क चौड़ीकरण और इससे जुड़े विकास कार्य पर लगभग 9.80 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इस मार्ग को चौड़ा करने की कार्रवाई सिंहस्थ के दौरान यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।

    प्रस्तावित चौड़ीकरण की जद में कई भवन आए हैं। इनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पैतृक मकान भी शामिल है। रविवार को मुख्यमंत्री ने स्वयं अपने मकान के प्रभावित हिस्से पर गेती चलाकर इस काम की शुरुआत की। इस दौरान घर और उससे जुड़ी पुरानी स्मृतियों का भावनात्मक पक्ष भी सामने आया।

    पैतृक घर किसी भी व्यक्ति के लिए सिर्फ एक इमारत नहीं होता। उसमें परिवार के साथ बिताया समय, बचपन की यादें और जीवन के शुरुआती दौर से जुड़ी कई स्मृतियां होती हैं। मुख्यमंत्री के मामले में भी यह मकान उनके बचपन से जुड़ा रहा है। ऐसे में सड़क चौड़ीकरण के लिए इसके हिस्से को हटाने की प्रक्रिया सामान्य निर्माण कार्य से अलग भावनात्मक संदर्भ रखती है।

    हालांकि सड़क चौड़ीकरण का काम सार्वजनिक सुविधा और आगामी सिंहस्थ की तैयारियों से जुड़ा है। इसी योजना के तहत खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक मार्ग को निर्धारित चौड़ाई में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए प्रभावित भवनों के हिस्सों को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    रविवार की कार्रवाई में मुख्यमंत्री का अपने ही पैतृक मकान पर गेती चलाना इस बात को भी रेखांकित करता है कि प्रस्तावित सड़क परियोजना का असर उनके परिवार की संपत्ति पर भी पड़ा है। जिस घर से उनका बचपन जुड़ा रहा, उसी के हिस्से को उन्होंने स्वयं हटाने की शुरुआत की।

    उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण का यह काम शहर की यातायात व्यवस्था से जुड़ा है। 730 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा करने की योजना पर लगभग 9.80 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मुख्यमंत्री के पैतृक मकान पर रविवार को गेती चलने के साथ इस हिस्से में चौड़ीकरण की कार्रवाई ने एक अलग मानवीय पहलू भी सामने रखा।