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  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने धारा 122 के तहत टैरिफ लगाया, 150 दिनों के लिए आयात शुल्क लागू

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने धारा 122 के तहत टैरिफ लगाया, 150 दिनों के लिए आयात शुल्क लागू


    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आयातित वस्तुओं के लिए 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ लगाने का आदेश दिया है यह आदेश 24 फरवरी से प्रभावी होगा और 150 दिनों तक लागू रहेगा इस टैरिफ का उद्देश्य अमेरिकी व्यापार घाटे और अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं को संबोधित करना है

    धारा 122 क्या है और इसे क्यों लागू किया गया
    ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 राष्ट्रपति को अधिकार देती है कि वे सरचार्ज और विशेष आयात प्रतिबंधों के माध्यम से अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित करने वाले अंतरराष्ट्रीय भुगतान संकटों का समाधान कर सकें इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति औपचारिक जांच की आवश्यकता के बिना त्वरित कार्रवाई कर सकते हैं

    कौन-कौन सी वस्तुएं टैरिफ से मुक्त रहेंगी
    व्हाइट हाउस की फैक्टशीट के अनुसार, कुछ महत्वपूर्ण वस्तुएं टैरिफ से मुक्त रहेंगी इनमें खनिज, मुद्रा और बुलियन धातुएं, ऊर्जा और ऊर्जा उत्पाद, प्राकृतिक संसाधन और उर्वरक, कुछ कृषि उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स और उनका कच्चा माल, इलेक्ट्रॉनिक्स, यात्री वाहन और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं

    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को दिए गए निर्देश
    राष्ट्रपति ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय को धारा 301 के तहत निर्देश दिया है कि वे उन देशों की जांच करें जिनकी नीतियां और कानून अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुंचा रही हैं या भेदभाव कर रहे हैं इस कदम का मकसद अनुचित व्यापार प्रथाओं का विरोध करना और अमेरिकी कंपनियों को सुरक्षित रखना है

    अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और आगे की संभावनाएँ
    राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार अमेरिका को व्यापार घाटे और घरेलू उत्पादन में कमी के कारण अपनी अधिकांश वस्तुएं आयात करनी पड़ती हैं जिससे अमेरिकी डॉलर विदेशों में चले जाते हैं टैरिफ 150 दिनों के बाद अपने आप समाप्त हो जाएगा लेकिन यदि आवश्यक हुआ तो राष्ट्रपति नई भुगतान संतुलन आपातकाल की घोषणा कर इसे फिर से लागू कर सकते हैं

    विशेषज्ञों की राय
    व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि धारा 122 के तहत टैरिफ लगाना अन्य व्यापार कानूनों की तुलना में तेज और अधिक प्रभावी है क्योंकि इसके लिए लंबी औपचारिक जांच की आवश्यकता नहीं होती यह अमेरिकी व्यापार हितों की रक्षा के लिए तात्कालिक कदम उठाने की अनुमति देता है
    ट्रंप प्रशासन का यह कदम अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति को मजबूत करने और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में एक रणनीतिक पहल है हालांकि इसके प्रभाव और प्रतिक्रिया दुनिया भर में निगरानी के दायरे में रहेंगे

  • ईरान पर दबाव बढ़ाने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भेजा सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर

    ईरान पर दबाव बढ़ाने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भेजा सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर

    नई दिल्ली। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया कि वह अपने सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड को पूरी टीम के साथ मध्य एशिया की ओर भेज रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद अभी भी कायम हैं।

    यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड की तैनाती
    ट्रंप ने कहा कि एयरक्राफ्ट कैरियर को जल्द ही रवाना किया जाएगा और यदि ईरान के साथ समझौता नहीं होता है तो इसकी आवश्यकता पड़ेगी। इसके साथ ही यूएसएस अब्राहम लिंकन को भी भेजा गया है, जो पहले से अरब सागर में गाइडेड मिसाइलों के साथ तैनात है। पिछले सप्ताह इसी युद्धपोत ने ईरानी ड्रोन को निशाना बनाकर मार गिराया था।

    ईरान में विरोध और बढ़ता तनाव
    ईरान में हाल के विरोध प्रदर्शनों और उन्हें दबाने के लिए आयातुल्ला खामेनेई के कदमों के बाद अमेरिका-ईरान संबंध और तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिकी शर्तों का पालन नहीं करता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

    दबाव बढ़ाने की रणनीति
    यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड, जो पहले वेनेजुएला अभियान पर था, अब सीधे मध्य एशिया की ओर भेजा गया है। दोनों देशों के बीच ओमान में हुई बातचीत के बावजूद कोई ठोस समझौता नहीं हुआ। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच वाशिंगटन की सैन्य क्षमता दिखाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि दो विमानवाहक पोतों की एक साथ मौजूदगी अमेरिका की नौसैनिक ताकत को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाएगी और ईरान पर कूटनीतिक और सैन्य दबाव मजबूत करेगी। इस तैनाती में गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक और निगरानी विमान भी शामिल हैं।

  • रूस से तेल आयात पर क्या बदलेगा भारत का रुख? ट्रंप के दावे के बाद विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब

    रूस से तेल आयात पर क्या बदलेगा भारत का रुख? ट्रंप के दावे के बाद विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब


    नई दिल्ली । यूएस-इंडिया ट्रेड डील के ऐलान के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया था कि भारत अब रूस से तेल की खरीद रोक देगा। इस बयान के बाद अब भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) की प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को रूसी तेल आयात को लेकर अपने पहले से चले आ रहे रुख को दोहराते हुए साफ कहा है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

    विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, ‘भारत के लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता बनाए रखना हमारी नीति का अहम हिस्सा है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सरकार कई बार सार्वजनिक मंचों से यह स्पष्ट कर चुकी है कि 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।’

    MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘वैश्विक बाजार की स्थिति और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात के अनुसार ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी रणनीति का केंद्र है। भारत के फैसले इसी सोच के आधार पर लिए गए हैं और भविष्य में भी इसी दिशा में आगे बढ़ेंगे।’

    रूसी तेल को लेकर भारत ने दोहराया अपना रुख

    अमेरिका लंबे समय से चाहता है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना पूरी तरह बंद करे। इस पर भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि देश की ऊर्जा आवश्यकताएं किसी भी अन्य दबाव से ऊपर हैं। रूस से तेल आयात को लेकर यह भारत का लगातार रुख रहा है। अमेरिका का कहना है कि रूस तेल से होने वाली आय का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में करता है, जबकि रूस इन आरोपों को लगातार खारिज करता आया है।

    व्हाइट हाउस के बयान के बाद सामने आया MEA का पक्ष

    विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया व्हाइट हाउस के उस दावे के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि भारत ने रूस से सीधे या किसी तीसरे देश के माध्यम से तेल खरीद रोकने और अमेरिका से तेल आयात बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। यह बयान उस समय सामने आया था, जब अमेरिका ने रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाए गए 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को हटाने का ऐलान किया था।

    रूसी तेल पर भारत की स्वतंत्रता पर क्रेमलिन की टिप्पणी

    इस बीच, जब इस मुद्दे पर क्रेमलिन से सवाल किया गया तो उसने कहा कि भारत को जहां से चाहे वहां से तेल खरीदने का पूरा अधिकार है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस इस तथ्य से भली-भांति अवगत है कि वह भारत का अकेला तेल और पेट्रोलियम उत्पाद आपूर्तिकर्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत पहले भी अन्य देशों से इन उत्पादों की खरीद करता रहा है, इसलिए इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।

  • यूनुस की भविष्यवाणी पड़ी उलटी, कहा था भारतीय कंपनियां बांग्लादेश आएंगी, अब खुद की मिलों पर गहराया संकट

    यूनुस की भविष्यवाणी पड़ी उलटी, कहा था भारतीय कंपनियां बांग्लादेश आएंगी, अब खुद की मिलों पर गहराया संकट


    नई दिल्ली। भारत को लेकर बांग्लादेश में हालिया घटनाक्रम लगातार सुर्खियों में है। इसी बीच अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस की एक पुरानी टिप्पणी फिर चर्चा में आ गई है। वर्ष 2025 में यूनुस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ को लेकर उत्साहित नजर आए थे। तब उन्होंने दावा किया था कि ऊंचे टैरिफ और ज्यादा लागत के चलते भारतीय उद्योग, खासकर टेक्सटाइल सेक्टर, भारत छोड़कर बांग्लादेश में निवेश करेंगे।

    अमेरिकी पत्रकार मेहदी हसन को दिए एक इंटरव्यू में यूनुस ने कहा था कि अमेरिका के भारी टैरिफ के कारण भारतीय कंपनियां भारत में उत्पादन करना छोड़ेंगी और बांग्लादेश में फैक्ट्रियां लगाएंगी, क्योंकि वहां लागत कम है और टैरिफ भी अपेक्षाकृत कम हैं। हालांकि मौजूदा हालात उनकी इस भविष्यवाणी से बिल्कुल उलट दिखाई दे रहे हैं।

    खुद का टेक्सटाइल सेक्टर संकट में

    जनवरी 2026 के अंत तक बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग गंभीर संकट में फंस गया है। जहां एक ओर भारत पर अमेरिकी टैरिफ को लेकर बयानबाजी की जा रही थी, वहीं दूसरी ओर देश की घरेलू टेक्सटाइल मिलें बंद होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन BTMA ने ऐलान किया है कि 1 फरवरी 2026 से देशभर की टेक्सटाइल मिलें अनिश्चितकाल के लिए बंद की जाएंगी।

    BTMA अध्यक्ष शौकत अजीज रसेल के अनुसार मिल मालिक बैंक कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं हैं। उद्योग की पूंजी 50 प्रतिशत से अधिक घट चुकी है और कई यूनिट पहले ही ताले लगा चुकी हैं। उद्योग का आरोप है कि भारत से आयातित सस्ते सूत ने स्थानीय बाजार को नुकसान पहुंचाया है। करीब 12 हजार करोड़ टका का तैयार माल गोदामों में बिना बिके पड़ा है। वहीं गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के चलते उत्पादन क्षमता भी 50 प्रतिशत तक गिर गई है। संगठन ने सरकार से 10 से 30 काउंट के सूत पर ड्यूटी-फ्री आयात सुविधा खत्म करने और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।

    भारत–EU समझौता बढ़ाएगा दबाव

    भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। यह समझौता बांग्लादेश के गारमेंट निर्यात के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अभी LDC श्रेणी में होने के कारण बांग्लादेश को EU बाजार में ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलती है, जबकि भारत को करीब 12 प्रतिशत शुल्क देना पड़ता है।

    समझौता लागू होने के बाद भारत को भी शून्य टैरिफ का लाभ मिलेगा। भारत के पास कपास और सूत जैसे कच्चे माल की मजबूत उपलब्धता है, जिससे उसके उत्पाद सस्ते और बेहतर गुणवत्ता वाले हो सकते हैं। वहीं बांग्लादेश 2026-27 तक LDC सूची से बाहर हो जाएगा, जिससे उसका ड्यूटी-फ्री लाभ समाप्त हो जाएगा। ऐसे में यूरोपीय बाजार में भारत से प्रतिस्पर्धा करना उसके लिए बेहद कठिन होगा। फिलहाल EU में हर तीसरा व्यक्ति बांग्लादेशी डेनिम पहनता है, लेकिन इस डील के बाद भारत इस बाजार का बड़ा हिस्सा अपने कब्जे में कर सकता है।

    कुल मिलाकर, जहां मोहम्मद यूनुस भारतीय कंपनियों के बांग्लादेश आने की उम्मीद जता रहे थे, वहीं जमीनी सच्चाई यह है कि बांग्लादेश का अपना टेक्सटाइल आधार और बैकवर्ड लिंकेज तेजी से कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।

  • क्यूबा पर ट्रंप का कड़ा वार, तेल सप्लाई करने वालों पर अमेरिकी ने की टैरिफ की तैयारी

    क्यूबा पर ट्रंप का कड़ा वार, तेल सप्लाई करने वालों पर अमेरिकी ने की टैरिफ की तैयारी


    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के बाद अब क्यूबा को निशाने पर लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। गुरुवार को उन्होंने एक ऐसे आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत क्यूबा को तेल देने वाले देशों से अमेरिका आने वाले उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। इस फैसले को क्यूबा पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की नई रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इससे पहले से जूझ रहे क्यूबा के ऊर्जा संकट की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
    क्या है ट्रंप की मंशा?
    सूत्रों के मुताबिक ट्रंप प्रशासन का यह कदम सीधे तौर पर मेक्सिको को चेतावनी देने जैसा है। क्यूबा को लंबे समय से तेल सप्लाई करने वाला मेक्सिको अब अमेरिका की सख्त निगरानी में है। माना जा रहा है कि यह आदेश उन देशों पर दबाव बनाने के लिए है, जो क्यूबा के साथ ऊर्जा व्यापार जारी रखे हुए हैं।

    मेक्सिको-क्यूबा संबंधों पर असर की आशंका

    ट्रंप के फैसले के बाद अटकलें तेज हैं कि अमेरिकी दबाव के चलते मेक्सिको क्यूबा को तेल आपूर्ति में कटौती कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो दोनों देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक रिश्तों में तनाव बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    क्यूबा में और गहराएगा संकट?

    अमेरिका के प्रतिबंधों के चलते क्यूबा पहले ही गंभीर आर्थिक और ऊर्जा संकट से गुजर रहा है और उसे विदेशी सहयोग पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अब तक वह मेक्सिको, वेनेजुएला और रूस जैसे देशों से तेल मंगाता रहा है। इससे पहले ट्रंप यह भी साफ कर चुके हैं कि वेनेजुएला का तेल अब क्यूबा नहीं पहुंचेगा। ऐसे में नए अमेरिकी आदेश ने क्यूबा की सरकार के सामने चुनौतियां और बढ़ा दी हैं।

    मेक्सिको से क्यूबा को कितनी तेल सप्लाई होती है?

    मेक्सिको की सरकारी तेल कंपनी पेमेक्स  के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2025 के बीच क्यूबा को रोजाना करीब 20 हजार बैरल तेल की आपूर्ति की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह सप्लाई प्रभावित होती है, तो क्यूबा को बड़े आर्थिक और ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।

  • मिनियापोलिस में ICE फायरिंग: एक की मौत, ट्रंप और राज्य सरकार के बीच तनाव बढ़ा

    मिनियापोलिस में ICE फायरिंग: एक की मौत, ट्रंप और राज्य सरकार के बीच तनाव बढ़ा


    वॉशिंगटन। अमेरिका के मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस में ICE एजेंट की गोलीबारी से एक शख्स की मौत हो गई, जिससे इलाके में तनाव बढ़ गया है। इस घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मिनेसोटा के गवर्नर टिम वॉल्ज़ के बीच विवाद तेज हो गया।

    ट्रंप ने मिनेसोटा के गवर्नर और मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे पर आरोप लगाया कि वे विद्रोह भड़का रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि नेता अपनी “घमंडी और अहंकारी बयानबाजी” से हिंसा बढ़ा रहे हैं और उन्हें लोगों के पैसे और सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। ट्रंप ने ICE एजेंट पर हमला करने वाले व्यक्ति की फिंगर की तस्वीरें भी साझा कीं।राष्ट्रपति ने सवाल उठाया कि स्थानीय पुलिस को ICE अधिकारियों की सुरक्षा के लिए क्यों तैनात नहीं किया गया और दावा किया कि मृतक हथियारबंद था। ट्रंप ने कहा कि ICE एजेंट्स को आत्मरक्षा में कार्रवाई करनी पड़ी और उन्हें अपना काम करने दिया जाना चाहिए।

    वहीं, गवर्नर टिम वॉल्ज़ ने संघीय कार्रवाई की निंदा की और अधिकारियों को मिनेसोटा से तुरंत बाहर निकालने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह अभियान गलत है और राष्ट्रपति को इसे तुरंत रोकना चाहिए।घटना मिनियापोलिस के दक्षिणी हिस्से में हुई, और स्थानीय अधिकारी जांच में जुटे हैं। लोगों से शांति बनाए रखने और प्रभावित इलाके से दूर रहने की अपील की गई है।

    यह घटना ICE के बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे एंटी-इमिग्रेशन ऑपरेशन के दौरान हुई। इससे पहले 7 जनवरी को 37 वर्षीय रेनी गुड नामक महिला की ICE फायरिंग में मौत हो गई थी, जिससे अमेरिका में भारी विरोध हुआ था। रेनी गुड तीन बच्चों की मां थीं, और DHS का दावा था कि वह एजेंट पर हमला कर रही थी। उस समय राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ICE एजेंट का बचाव किया था

  • कनाडा को एक साल में ही निगल जाएगा चीन बोर्ड ऑफ पीस से हटाने के बाद ट्रंप की कड़ी चेतावनी

    कनाडा को एक साल में ही निगल जाएगा चीन बोर्ड ऑफ पीस से हटाने के बाद ट्रंप की कड़ी चेतावनी


    नई दिल्ली।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयान को लेकर वैश्विक सुर्खियों में आ गए हैं ताजा बयान में उन्होंने कनाडा को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने अमेरिका के बजाय चीन के साथ नजदीकी बढ़ाई तो वह एक साल के भीतर ही उसे निगल जाएगा

    ट्रंप ने यह बयान उस समय दिया जब कनाडा ने अमेरिका के प्रस्तावित गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम का विरोध किया यह सिस्टम इजरायल के आयरन डोम से प्रेरित बताया जा रहा है और ग्रीनलैंड के ऊपर तैनात किए जाने की योजना है अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि यह सिस्टम न केवल अमेरिका बल्कि कनाडा की सुरक्षा के लिए भी जरूरी हैडोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि कनाडा ग्रीनलैंड के ऊपर बनने वाले गोल्डन डोम के खिलाफ है जबकि यह सिस्टम कनाडा को भी सुरक्षा प्रदान करेगा इसके बजाय कनाडा ने चीन के साथ व्यापार बढ़ाने के समर्थन में रुख अपनाया है जो आने वाले एक साल में ही उसे खत्म कर देगा

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि गोल्डन डोम ग्रीनलैंड को पूरी तरह कवर करे उनका तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र पर नियंत्रण से अमेरिका को रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने में मदद मिलेगीइससे पहले दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा था कि कनाडा को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका का आभारी होना चाहिए उन्होंने यह भी कहा था कि कनाडा अमेरिका की वजह से ही जीवित है

    हालांकि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया कार्नी ने कहा कि कनाडा और अमेरिका के बीच मजबूत साझेदारी जरूर है लेकिन कनाडा की प्रगति का श्रेय अमेरिका को नहीं दिया जा सकता उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी दबदबे पर आधारित वैश्विक व्यवस्था टूटने की कगार पर हैकार्नी के इस बयान के बाद ट्रंप ने कड़ा कदम उठाते हुए उन्हें अपने बोर्ड ऑफ पीस से बाहर कर दिया यह बोर्ड दुनिया में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से ट्रंप द्वारा शुरू किया गया था

    बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए ट्रंप ने दुनिया के लगभग साठ देशों को आमंत्रण भेजा था इजरायली मीडिया के अनुसार इनमें से पच्चीस देशों ने इस न्योते को स्वीकार कर लिया है बोर्ड में शामिल देशों में इजरायल सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात पाकिस्तान कतर तुर्किए मिस्र इंडोनेशिया अर्जेंटीना और मंगोलिया समेत कई देश शामिल हैंट्रंप का यह बयान और कदम एक बार फिर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच बढ़ते मतभेदों को उजागर करता है

  • अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाने का संकेत, वित्त मंत्री बेसेंट ने कहा-रूसी तेल खरीद घटने से बड़ी जीत

    अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाने का संकेत, वित्त मंत्री बेसेंट ने कहा-रूसी तेल खरीद घटने से बड़ी जीत


    नई दिल्ली। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ट्रम्प सरकार भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ में से आधा हटाने पर विचार कर सकती है, क्योंकि भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद काफी कम कर दी है। बेसेंट ने यह दावा किया कि 25% टैरिफ ने भारत की रूसी तेल खरीद घटाने में असर दिखाया है और अब राहत देने का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने इसे अमेरिका की बड़ी जीत बताया और कहा कि टैरिफ अभी भी लागू हैं,
    लेकिन धीरे-धीरे इन्हें हटाने की संभावना है।

    अमेरिका ने अगस्त 2025 में भारत पर दो बार 25-25% टैरिफ लगाए थेपहला व्यापार घाटे के आधार पर और दूसरा रूस से तेल खरीदने के कारण। बेसेंट ने यह भी आरोप लगाया कि यूरोपीय देश भारत पर टैरिफ इसलिए नहीं लगा रहे क्योंकि वे भारत के साथ बड़े व्यापार समझौते के लिए इच्छुक हैं, जबकि यूरोप खुद रिफाइंड तेल खरीदकर रूस की मदद कर रहा है।

    बेसेंट 500% टैरिफ के प्रस्ताव पर भी बोले
    बेसेंट ने कहा कि रूसी तेल खरीदने पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सीनेटर ग्राहम ने रखा है, लेकिन ट्रम्प को इसकी जरूरत नहीं है।

    राष्ट्रपति के पास पहले से ही IEEPA कानून के तहत राष्ट्रीय आपात स्थिति का हवाला देकर अन्य देशों पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लगाने का अधिकार है।

    भारत ने रूस से तेल खरीद घटाई, पर पूरी तरह नहीं रोकी
    अमेरिकी दावों के बावजूद भारत सरकार का कहना है कि रूस से तेल खरीद अभी भी जारी है और भारत अपनी ऊर्जा नीति अपने हितों के आधार पर तय करता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में भारत की रूस से तेल खरीद में गिरावट आई और वह तीसरे नंबर पर खिसक गया। वहीं तुर्की दूसरे सबसे बड़े खरीदार बन गया।

    चीन अभी भी रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है।

    भारत की खरीद में गिरावट का कारण
    रूस ने अब तेल की छूट घटा दी है और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत भी कम हो गई है, जिससे भारत के लिए रूस से तेल खरीदना पहले जैसा लाभकारी नहीं रहा। इसके अलावा शिपिंग, बीमा और भुगतान में दिक्कतें भी बढ़ीं। इसी वजह से भारत सऊदी, UAE और अमेरिका जैसे स्थिर सप्लायर्स से भी तेल खरीद बढ़ा रहा है।

    अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता और टैरिफ में नरमी
    अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते की बातचीत चल रही है, ऐसे में टैरिफ घटाने के संकेत दोनों देशों के रिश्तों में नरमी की तरफ माना जा रहा है।
    अमेरिका के टैरिफ में राहत के संकेत से भारत-यूएस संबंधों में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, लेकिन रूस से तेल खरीद पर भारत की नीति अभी भी अपने हितों पर आधारित है।

  • ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता इन देशों ने ठुकराया, भारत कर रहा विचार

    ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता इन देशों ने ठुकराया, भारत कर रहा विचार


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस Board of Peace में शामिल होने के लिए कई देशों को आमंत्रित किया गया, लेकिन कुछ प्रमुख देशों ने इसे ठुकरा दिया है। वहीं, कई देशों ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है जिसमें भारत भी शामिल है। खबर है कि भारत इस पहल के संवेदनशील पहलुओं पर विचार कर रहा है और अंतिम फैसला अभी नहीं लिया गया है।अमेरिका ने गाजा पट्टी में इजरायल और हमास के बीच हुए युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत यह बोर्ड गठित किया है। इसमें विश्व के कई नेताओं को शामिल होने का न्योता दिया गया है।

    बोर्ड में शामिल नहीं हो रहे प्रमुख देश:
    फ्रांस, नॉर्वे, स्वीडन ने ट्रंप के न्योते को ठुकराया। वहीं, ब्रिटेन, चीन, क्रोएशिया, इटली, यूरोपीय यूनियन की कार्यकारी शाखा, पराग्वे, रूस, सिंगापुर, स्लोवेनिया, तुर्किये और यूक्रेन ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है।

    न्योता स्वीकार करने वाले देश:
    अर्जेंटीना, आर्मीनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, कजाखस्तान, कोसोवो, मोरक्को, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम और पाकिस्तान ने न्योता स्वीकार कर लिया है। वाइट हाउस के अनुसार, बोर्ड में कुल 30 देशों को शामिल किया जा सकता है, जबकि 50 देशों को न्योता भेजा गया था।भारत के इस कदम पर ध्यान दुनिया भर की नजरें बनी हुई हैं। कहा जा रहा है कि भारत बोर्ड के कुछ बिंदुओं पर विचार कर रहा है और जल्द ही अपनी स्थिति साफ करेगा।

  • ग्रीनलैंड विवाद पर रूस का कड़ा बयान, ट्रंप ने नोबेल यू-टर्न लिया; जानें आज की बड़ी खबरें

    ग्रीनलैंड विवाद पर रूस का कड़ा बयान, ट्रंप ने नोबेल यू-टर्न लिया; जानें आज की बड़ी खबरें


    नई दिल्ली। आज की टॉप खबरों में ग्रीनलैंड विवादट्रंप का नोबेल यू-टर्न और ठगी के मामले शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू राजनीति में उठापटक के बीच लोगों की नजरें इन घटनाओं पर टिक गई हैं।

    डेनमार्क का हिस्सा नहीं ग्रीनलैंडरूस का बयान

    ग्रीनलैंड विवाद ने वैश्विक राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार ग्रीनलैंड को खरीदने या नियंत्रण में लेने की बात कही और यूरोपीय संघ व डेनमार्क पर टैरिफ युद्ध की धमकी दी। अब रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बयान देकर इस मुद्दे को और गरमा दिया। लावरोव ने कहा कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वाभाविक हिस्सा नहीं है और इसे लेकर रूस की अपनी स्थिति स्पष्ट है।

    मुझे नोबेल की कोई परवाह नहींट्रंप का यू-टर्न
    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कई बार शांति नोबेल पुरस्कार की इच्छा जाहिर की थीलेकिन अब उन्होंने पूरी तरह पलटी ले ली है। उन्होंने कहा कि उन्हें नोबेल पुरस्कार की कोई परवाह नहीं है। यह बयान उस चिट्ठी के लीक होने के बाद आयाजो उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को लिखी थी। इसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया में शांति की चिंता उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं हैक्योंकि उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार तो मिला ही नहीं।

    जामिया प्रोफेसर पर हमलाआदिवासी युवक घायल
    दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसमें एक एसोसिएट प्रोफेसर ने अनुसूचित जनजाति के एक कर्मचारी को जमकर पीटामुंह भी तोड़ दिया और जातिसूचक गालियां दीं। इस मामले में पुलिस को मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों के साथ लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है।

    एलन मस्क के नाम पर ठगीशिमला का शख्स हुआ लाखों का शिकार

    हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने एलन मस्क के नाम का इस्तेमाल कर शख्स को फंसाया और लाखों रुपये ठग लिए। ठगी के चक्कर में पीड़ित को टेस्ला कारनकद राशि और 2.3 करोड़ रुपये के सोने का लालच दिया गया।

    दिल्ली-NCR में GRAP-4 हटायास्टेज-3 प्रतिबंध जारी
    दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू GRAP-4 प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण यह फैसला लिया गया है। हालांकि स्टेज-1स्टेज-2 और स्टेज-3 के तहत लगाए गए कुछ प्रतिबंध अभी भी जारी रहेंगे।आज की इन खबरों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और घरेलू मुद्दों पर लोगों की निगाहें टिकाए रखीं। रूस और अमेरिका की बयानबाजीशिक्षा संस्थानों में हिंसा और ठगी जैसे मामले लगातार चर्चा में बने हुए हैं