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  • अमेरिका: रूस से तेल खरीदने की छूट पर घर में घिरे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, सांसद बोले- शर्मनाक कदम

    अमेरिका: रूस से तेल खरीदने की छूट पर घर में घिरे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, सांसद बोले- शर्मनाक कदम

    वाशिंगटन। अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने एक फैसले से घर में विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ट्रंप ने रूस से पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद की अनुमति देने वाली छूट की अवधि को एक माह के लिए बढ़ा दिया है, जबकि कुछ दिन पूर्व उन्होेंने यह विशेष राहत आगे न बढ़ाने की बात कही थी। अमेरिकी डेमोक्रेट सांसदों ने रूस से तेल खरीदी को दोबारा छूट देना ट्रंप प्रशासन का 180 डिग्री यू-टर्न और शर्मनाक कदम बताया है। सीनेट में भी इसका विरोध हुआ।

    अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार देर रात आदेश जारी कर रूसी तेल पर लगी पाबंदी से छूट की अवधि 16 मई तक बढ़ा दी।

    डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि एक तरफ रूस की ओर से यूक्रेन पर बड़े हमले जारी हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका उसे आर्थिक लाभ पहुंचा रहा है। डेमोक्रेटिक नेता जीन शाहीन, चक शूमर और एलिजाबेथ वॉरेन ने साझा बयान जारी कर ‘रूस जनरल लाइसेंस 134’ को फिर से लागू करने की निंदा की। यह लाइसेंस उन कंपनियों को सजा से बचाता है जो रूसी तेल खरीद रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 15 अप्रैल को व्हाइट हाउस में कहा था कि सरकार रूस-ईरान के तेल पर पाबंदी में और ढील नहीं देगी। लेकिन सिर्फ दो दिन में सरकार ने फैसला बदल लिया।

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने कई वैश्विक विवादों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है। इसी दावे के साथ, उन्होंने ट्रुथ सोशल पर ट्रंप वॉर रूम की एक पोस्ट में एक डिजिटल पोस्टर दिखाया, जिसमें ट्रंप को शांति के राष्ट्रपति के तौर पर बताया गया है। ट्रुथ सोशल के हैंडल ने कहा, ट्रंप पर भरोसा करें।

    घबराने वालों पर नहीं। इससे पहले ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान समेत आठ युद्धों को खत्म कराने पर अपनी भूमिका याद दिलाई।

    ट्रंप ने जोर देकर कहा, मेरे दखल से बड़े पैमाने पर जानमाल की क्षति रोकने में मदद मिली। एरिजोना के फीनिक्स में टर्निंग प्वाइंट यूएसए कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय विवादों पर बोलते हुए उन्होंने कहा, मैं शांतिदूत हूं। मैं ही वह व्यक्ति हूं जिसने आठ युद्धों को सुलझाया। मैंने भारत-पाकिस्तान के बीच एक ऐसे युद्ध को सुलझाया जिसमें 3-5 करोड़ लोगों की जान जा सकती थी। एजेंसी

    नई समयसीमा और भारत पर असर…
    अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अधिकृत दस्तावेज के मुताबिक, अब 17 अप्रैल तक जहाजों पर लोड हुए रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को 16 मई तक खरीदी की मंजूरी मिल गई है। पिछली छूट 11 अप्रैल को खत्म हो गई थी। नए फैसले का लाभ भारत समेत उन तमाम देशों को मिलेगा जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर हैं।

    सरकार का तर्क है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें न बढ़ें, इसलिए यह कदम उठाया गया है। हालांकि, अमेरिका में विपक्षी सांसद इस तर्क से सहमत नहीं हैं।

    दूसरे दौर की वार्ता की तैयारी में पाकिस्तान
    होर्मुज पर जारी तनाव के बावजूद मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका और ईरान के बीच 22 अप्रैल की युद्धविराम की समयसीमा से पहले समझौता हो जाएगा। विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि लेबनान में युद्धविराम सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच लड़ाई प्रमुख मुद्दा था। पाकिस्तान अगले सप्ताह की शुरुआत में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता के दूसरे दौर की मेजबानी करेगा।

    नए अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे: ईरान
    ईरान ने कहा कि वह अमेरिका की ओर से भेजे गए नए प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने हाल ही में तेहरान दौरे के दौरान ईरान को ये प्रस्ताव सौंपे थे। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ वार्ता अच्छी चल रही है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है, लेकिन उसने यह बताने से इन्कार कर दिया कि प्रस्ताव में क्या है।

  • ईरान-अमेरिका तनाव के बीच फ्रांस की सक्रिय कूटनीति, क्या मैक्रों दिला पाएंगे राहत?

    ईरान-अमेरिका तनाव के बीच फ्रांस की सक्रिय कूटनीति, क्या मैक्रों दिला पाएंगे राहत?


    वाशिंगटन
    । मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब इमैनुएल मैक्रों ने शांति बहाली की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी है। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेश्कियन से अलग-अलग बातचीत कर गतिरोध तोड़ने की कोशिश की है।

    होर्मुज स्ट्रेट बना तनाव का केंद्र

    होर्मुज जलडमरूमध्य में बनी तनावपूर्ण स्थिति इस पूरे विवाद की मुख्य वजह है। अमेरिका द्वारा यहां नौसैनिक नाकाबंदी लगाए जाने के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। इस बीच ईरान ने संकेत दिया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन शर्त यह है कि चर्चा अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में हो।

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  • ईरान की शर्तें और रुख

    ईरान ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पूर्ण युद्धविराम के लिए लेबनान में जारी शत्रुता को खत्म करना जरूरी होगा। तेहरान का मानना है कि यूरोप, खासकर फ्रांस, इस गतिरोध को खत्म करने में अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि इस्लामाबाद में हालिया वार्ता बेनतीजा रही, लेकिन ईरान ने आगे बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई है।

    मैक्रों का शांति फॉर्मूला

    मैक्रों ने दोनों नेताओं से बातचीत के बाद तीन अहम प्रस्ताव सामने रखे—

    क्षेत्रीय स्थिरता के लिए युद्धविराम का विस्तार, जिसमें लेबनान को भी शामिल किया जाए
    होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त और शुल्क के तुरंत खोला जाए
    फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में बहुपक्षीय मिशन बनाकर नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जाए

    फ्रांस और ब्रिटेन इस मुद्दे पर पेरिस में एक वीडियो कॉन्फ्रेंस की मेजबानी भी करने जा रहे हैं, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा होगी।

    ट्रंप का दावा—ईरान बातचीत को तैयार

    डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में दावा किया कि ईरान की ओर से बातचीत के संकेत मिले हैं और तेहरान समझौता करने को इच्छुक है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका का रुख सख्त बना रहेगा।

    क्या संभव है समाधान?

    विशेषज्ञों के मुताबिक, हालात बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी छोटी चूक से बड़ा संघर्ष हो सकता है। ऐसे में फ्रांस की मध्यस्थता अहम साबित हो सकती है, लेकिन अंतिम समाधान दोनों पक्षों की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस की पहल एक उम्मीद जरूर जगाती है, लेकिन शांति की राह अभी भी आसान नहीं दिख रही। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कूटनीति जीतती है या टकराव और गहराता है।

  • तेहरान के पास पुल पर हमला, अमेरिका-ईरान टकराव गहराया, ट्रंप ने दी बड़ी चेतावनी

    तेहरान के पास पुल पर हमला, अमेरिका-ईरान टकराव गहराया, ट्रंप ने दी बड़ी चेतावनी


    वाशिंगटन । अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब और गहराता नजर आ रहा है। अमेरिकी सेना ने तेहरान के पास एक महत्वपूर्ण हाईवे पुल पर हमला किया है, जिससे क्षेत्रीय हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। यह हमला उस पुल पर किया गया जो तेहरान को करज शहर से जोड़ता है और जिसे रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है।

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह पुल ईरान की मिसाइल और ड्रोन प्रणाली के लिए जरूरी आपूर्ति मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी वजह से इसे निशाना बनाया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हथियारों और सैन्य उपकरणों की आवाजाही को रोकना है।

    हालांकि ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया है। सरकारी मीडिया के अनुसार, यह पुल अभी पूरी तरह चालू नहीं था और सेना द्वारा इसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। ईरानी अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं। घायलों में आम नागरिक भी शामिल हैं, जो नवरोज के मौके पर बाहर मौजूद थे।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के बाद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि ईरान का एक बड़ा पुल नष्ट कर दिया गया है और अब इसका उपयोग संभव नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अभी बहुत कुछ होना बाकी है और ईरान को जल्द से जल्द समझौता कर लेना चाहिए, अन्यथा आगे और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

    ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ ने कहा कि जब देश की सुरक्षा की बात आती है तो हर नागरिक सैनिक बन जाता है। उन्होंने साफ किया कि ईरान इस तरह के हमलों से डरने वाला नहीं है और पूरी मजबूती के साथ जवाब देगा।

    इस बीच, तेहरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मौजूदा हालात में वार्ता संभव नहीं है। इससे यह साफ हो गया है कि कूटनीतिक स्तर पर भी हालात सामान्य होने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं।

    स्थिति को और गंभीर बनाते हुए अन्य क्षेत्रों में भी तनाव बढ़ गया है। इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान से दागी गई मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल की ओर मिसाइल दागी, जिससे संघर्ष का दायरा और फैलता नजर आ रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर मतभेद देखने को मिले हैं। रूस चीन और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए बल प्रयोग की अनुमति देने के प्रस्ताव को रोक दिया है।इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक चिंता को बढ़ा दिया है और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।

  • US: ट्रंप ने पैम बॉन्डी से छीना अटॉर्नी जनरल का पद… क्या है पूरा मामला?

    US: ट्रंप ने पैम बॉन्डी से छीना अटॉर्नी जनरल का पद… क्या है पूरा मामला?


    वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी की सराहना करते हुए उन्हें एक महान देशभक्त और वफादार सहयोगी बताया। ट्रंप ने बताया कि पैम बॉन्डी निजी क्षेत्र में नई जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं। ट्रंप ने कहा कि अटॉर्नी जनरल के रूप में पैम ने देशभर में अपराध पर कड़ा प्रहार किया। वहीं, डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच को कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया है।
    टॉड ब्लैंच संभालेंगे कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल का जिम्मा
    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा, ‘पैम बॉन्डी एक महान अमेरिकी देशभक्त और एक वफादार दोस्त हैं, जिन्होंने पिछले एक साल से मेरे अटॉर्नी जनरल के तौर पर पूरी निष्ठा से सेवा की है। पैम ने पूरे देश में अपराधों पर नकेल कसने का जबरदस्त काम किया है, जिसके चलते हत्याओं की दर 1900 के बाद से अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।
    हम पैम से बहुत प्यार करते हैं, और वह अब निजी क्षेत्र में एक बेहद जरूरी और अहम नई जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं, जिसकी घोषणा जल्द ही की जाएगी। वहीं, हमारे डिप्टी अटॉर्नी जनरल जो कि एक बेहद प्रतिभाशाली और सम्मानित कानूनी विशेषज्ञ हैं, टॉड ब्लैंच, अब कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल के तौर पर कार्यभार संभालेंगे।’
    विवादों भरा पैम बॉन्डी का कार्यकाल
    पैम बॉन्डी के कार्यकाल में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया और कई अनुभवी अधिकारियों ने खुद इस्तीफा दे दिया। इससे विभाग के अंदर अस्थिरता और तनाव का माहौल बन गया। सबसे बड़ा विवाद जेफरी एपस्टीन केस से जुड़ा रहा। जेफरी एपस्टीन के ट्रैफिकिंग मामले की फाइलों को लेकर बॉन्डी पर भारी दबाव था। उन्होंने पहले दावा किया था कि उनके पास एपस्टीन की क्लाइंट लिस्ट मौजूद है, लेकिन बाद में विभाग ने माना कि ऐसा कोई दस्तावेज है ही नहीं। इस मामले को लेकर उन्हें अपने ही समर्थकों की आलोचना झेलनी पड़ी।
    पैम बॉन्डी पर लगे कई आरोप
    बॉन्डी पर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने ट्रंप के राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ जांच शुरू कराई। इनमें जेरोम पॉवेल, लेटिशिया जेम्स, जेम्स कोमी और जॉन ब्रेनन जैसे नाम शामिल थे। हालांकि इन मामलों में से कई को अदालतों ने खारिज कर दिया, जिससे उनकी कार्यशैली पर सवाल और बढ़ गए। डेमोक्रेट नेताओं ने बॉन्डी पर आरोप लगाया कि उन्होंने न्याय विभाग को बदले का हथियार बना दिया। वहीं खुद बॉन्डी का कहना था कि वह विभाग की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए काम कर रही थीं और पिछली सरकार में हुई कथित गलतियों को सुधार रही थीं।

    ट्रंप के साथ उनका रिश्ता बेहद करीबी माना जाता था। वह खुले तौर पर ट्रंप का समर्थन करती थीं और कई बार सार्वजनिक मंचों पर उनकी तारीफ भी करती थीं। लेकिन समय के साथ ट्रंप खुद भी उनके काम से नाखुश दिखे, खासकर तब जब वह उनके राजनीतिक विरोधियों पर कार्रवाई नहीं कर पाईं।

    बॉन्डी के हटने के साथ ही ट्रंप के शासन में न्याय विभाग में लगातार हो रहे बदलाव की एक और कड़ी जुड़ गई है। उनके दोनों कार्यकाल में कई अटॉर्नी जनरल या तो हटाए गए या इस्तीफा देने पर मजबूर हुए, जिससे यह साफ होता है कि इस पद पर स्थिरता बनाए रखना ट्रंप प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।

    राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल का शपथ
    बता दें एक दिन पहले बुधवार को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कोलिन मैकडॉनल्ड को राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के तौर पर शपथ दिलाई।

    उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के तौर पर शपथ लेने से पहले कोलिन मैकडॉनल्ड का परिचय कराते हुए कहा, ‘कोलिन जिन कामों को करेंगे, उनमें से एक यह पक्का करना है कि कोई भी धोखाधड़ी इतनी छोटी या इतनी बड़ी न हो कि उसे नजरअंदाज किया जा सके।’ राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल की शपथ लेने के बाद कोलिन मैकडॉनल्ड ने कहा, ‘मैं दिन-रात बिना थके काम करूंगा, ताकि यह पक्का कर सकूं कि अगर कोई आपके टैक्स के पैसे चुराने की हिम्मत करता है तो उस गलत फैसले के बाद उसे एक संघीय अभियोजक का सामना करना पड़े।’
  • ट्रंप की करीबी का दावा—‘पत्नी की वजह से भड़क सकता है तीसरा विश्व युद्ध’, ईरान-इजरायल तनाव पर तीखे बयान

    ट्रंप की करीबी का दावा—‘पत्नी की वजह से भड़क सकता है तीसरा विश्व युद्ध’, ईरान-इजरायल तनाव पर तीखे बयान

    वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की राजनीति में भी तीखी बयानबाजी सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की करीबी मानी जाने वाली टिप्पणीकार Candace Owens ने दावा किया है कि मौजूदा हालात तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं।

    उन्होंने सोशल मीडिया मंच X (social media platform) पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस युद्ध को कुछ प्रभावशाली लोग बढ़ावा दे रहे हैं और इससे वैश्विक संकट पैदा हो सकता है।

    नेतन्याहू पर युद्ध भड़काने का आरोप

    ओवेन्स ने Benjamin Netanyahu पर आरोप लगाया कि ईरान के साथ तनाव को जानबूझकर बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि युद्ध को लेकर आम जनता का समर्थन नहीं है, बल्कि कुछ समूह इसे आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह इजरायल या किसी भी युद्ध का समर्थन नहीं करती हैं।

    ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम

    तनाव के बीच United States और Iran ने एक-दूसरे के अहम ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। तेहरान ने कहा कि यदि उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ तो Strait of Hormuz को बंद किया जा सकता है। इससे पहले ट्रंप ने समुद्री मार्ग खुला रखने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था।

    इजरायल का पलटवार

    इस बीच Israel के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेंगे। उन्होंने Dimona और Arad का दौरा कर हमलों की स्थिति का जायजा लिया। उनका आरोप है कि ईरान ने रिहायशी इलाकों और संवेदनशील स्थलों को निशाना बनाया।

    ईरान का जवाब

    ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने ट्रंप के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान किसी दबाव में आने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि होर्मुज क्षेत्र अन्य देशों के लिए खुला रहेगा, लेकिन ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने वालों को जवाब दिया जाएगा।

    पश्चिम एशिया में बढ़ते इस टकराव ने वैश्विक राजनीति में नई चिंता पैदा कर दी है और कई विश्लेषक इसे बड़े संघर्ष की आशंका से जोड़कर देख रहे हैं।

  • ईरान युद्ध में अमेरिकी सैनिक नहीं भेजेंगे: ट्रंप का यू-टर्न, बोले-‘कहीं भी सेना तैनात नहीं कर रहा’

    ईरान युद्ध में अमेरिकी सैनिक नहीं भेजेंगे: ट्रंप का यू-टर्न, बोले-‘कहीं भी सेना तैनात नहीं कर रहा’


    वॉशिंगटन। अमेरिका 
    राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि वह ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी जमीनी सैनिक नहीं भेजेंगे। यह बयान ऐसे समय आया है, जब युद्ध चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है और अमेरिका की भूमिका को लेकर अटकलें तेज थीं।

    व्हाइट हाउस में Sanae Takaichi के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “मैं कहीं भी सैनिक नहीं भेज रहा हूं… और अगर भेज भी रहा होता, तो आपको नहीं बताता। लेकिन स्पष्ट कर दूं—हम वहां सैनिक नहीं भेज रहे।”

    गौरतलब है कि युद्ध की शुरुआत के कुछ दिन बाद ट्रंप ने जमीनी सेना भेजने की संभावना से इनकार नहीं किया था, लेकिन अब उनका रुख बदलता नजर आ रहा है।

    ‘जरूरत पड़ी तो कार्रवाई करेंगे’
    हालांकि ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका पूरी तरह पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि हालात के मुताबिक जो जरूरी होगा, वह किया जाएगा। ट्रंप लंबे समय से विदेशी जमीन पर अमेरिकी सैनिक भेजने के आलोचक रहे हैं। अपने पहले कार्यकाल में भी उन्होंने Afghanistan से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया शुरू की थी।

    ईरान को बताया बड़ा खतरा
    ट्रंप ने Iran को वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि “जब यह अभियान खत्म होगा, तो दुनिया पहले से ज्यादा सुरक्षित होगी।”

    उन्होंने अमेरिकी सेना की ताकत का जिक्र करते हुए दावा किया कि हालिया हमलों में दागे गए 114 रॉकेट्स को एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया।

    जंग लंबी खिंचने के संकेत
    28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में United States और Israel एक ओर हैं, जबकि दूसरी ओर Iran डटा हुआ है। शुरुआती आकलन था कि ईरान में सत्ता परिवर्तन जल्दी हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल हवाई हमलों के जरिए न तो सत्ता परिवर्तन संभव है और न ही ईरान के संवर्धित यूरेनियम कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है, क्योंकि इसे गहरे भूमिगत ठिकानों में सुरक्षित रखा गया है।

    जमीनी युद्ध से क्यों बच रहा अमेरिका?
    विश्लेषकों के मुताबिक, ईरान में जमीनी युद्ध बेहद महंगा और जोखिम भरा साबित हो सकता है। वहां की भौगोलिक परिस्थितियां और सैन्य ताकत अमेरिकी सेना के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।

    ऐसे में ट्रंप का सैनिक न भेजने का फैसला संकेत देता है कि अमेरिका फिलहाल इस युद्ध को सीमित दायरे में रखकर ही आगे बढ़ना चाहता है, ताकि बड़े और लंबे जमीनी संघर्ष से बचा जा सके।

  • नेतन्याहू को लेकर अटकलें तेज, डोनाल्ड ट्रंप की पहल के बाद सामने आया नया वीडियो

    नेतन्याहू को लेकर अटकलें तेज, डोनाल्ड ट्रंप की पहल के बाद सामने आया नया वीडियो


    नई दिल्ली।
     मौत की अटकलों के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का एक और वीडियो सामने आया है। इस बार नेतन्याहू ने अपने जीवित होने का सबूत पेश करते हुए दिलचस्प वीडियो शेयर किया। मंगलवार को पोस्ट किए गए इस वीडियो में वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत के साथ नजर आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक अमेरिकी दूत को यह सुनिश्चित करने के लिए ही भेजा गया था कि नेतन्याहू जिंदा हैं। इजरायली प्रधानमंत्री ने खुद इसकी जानकारी दी।

    इस वीडियो में नेतन्याहू और अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी साथ साथ नजर आ रहे हैं। सबसे पहले नेतन्याहू मुस्कुराते हुए कहते हैं, “मैं जिंदा हूं।” और फिर मौत की अटकलों पर तंज कसते हुए कहते हैं, “हम हर हाथ की पांच उंगलियों से हाथ मिलाते हैं।” इससे वह उन खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिनमें यह दावा किया गया था कि नेतन्याहू का AI जनरेटेड वीडियो शेयर किया जा रहा है और उनके हाथों पर छह उंगलियां दिखाई देने की बात कही गई थी।

    नए वीडियो पर भी उठे थे सवाल
    इसके बाद नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई वीडियो साझा कर इस बात को साबित करने की कोशिश की है वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने बीते दिनों एक कॉफी हाउस का वीडियो भी पोस्ट किया जिसमें वे अपने जिंदा होने की पुष्टि करने की कोशिश करते दिखे। हालांकि इंटरनेट पर लोगों ने इस वीडियो की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठा दिए। वहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के चैट बॉट Grok ने इसे डीपफेक वीडियो बता दिया।

    अमेरिकी दूत से क्या बोले नेतन्याहू?
    अब नेतन्याहू ने अमेरिकी दूत के साथ वीडियो पोस्ट किया है। वीडियो में वह हकाबी के साथ बातचीत करते हुए देखे जा सकते हैं। इस बीच हकाबी मजाक मजाक में कहते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उन्हें इजरायली नेता का हालचाल जानने के लिए भेजा था। हकाबी ने कहा, “मिस्टर प्राइम मिनिस्टर, मैं चाहता हूं कि आप यह जानें कि राष्ट्रपति ने मुझे यहाँ आकर यह पक्का करने के लिए कहा था कि आप ठीक हैं।” इस पर नेतन्याहू जवाब देते हैं “हां, माइक। हां मैं ज़िंदा हूं।वीडियो में नेतन्याहू ने ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी आहे बासिज प्रमुख गुलाम रजा सुलेमानी की मौत को लेकर भी ईरान पर तंज कसा। नेतन्याहू ने कहा, “आज, मैंने पंच कार्ड से दो नाम मिटा दिए।” बता दें कि मंगलवार को इजरायल ने इन दोनों नेताओं के मारे जाने का दावा किया था। बुधवार को ईरान ने भी इसकी पुष्टि की है और बदला लेने की कसम खाई है।

  • Donald Trump on Iran: ईरान अपने ही सत्यानाश पर तुला है, झूठी खबरों और AI वीडियो को लेकर ईरान के साथ अमेरिकी मीडिया पर भी भड़के ट्रंप

    Donald Trump on Iran: ईरान अपने ही सत्यानाश पर तुला है, झूठी खबरों और AI वीडियो को लेकर ईरान के साथ अमेरिकी मीडिया पर भी भड़के ट्रंप


    नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और अपने ही देश के कुछ प्रमुख मीडिया संगठनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रंप ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AIऔर फर्जी वीडियो के सहारे झूठी खबरें फैलाकर दुनिया को गुमराह कर रहा है और ऐसा करके वह अपने ही विनाश को न्योता दे रहा है। ट्रंप ने ईरान के उन दावों का कड़ाई से खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि ईरान ने अमेरिका के पांच रीफ्यूलिंग लड़ाकू विमानों को मार गिराया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ये सभी विमान पूरी तरह सुरक्षित हैं और जल्द ही अपनी अगली उड़ान भरेंगे। राष्ट्रपति ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ईरान सैन्य रूप से कमजोर है, लेकिन मीडिया मैनिपुलेशन में माहिर हो चुका है।

    इस दौरान ट्रंप का गुस्सा केवल ईरान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने अमेरिकी मीडिया, विशेषकर ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ भ्रष्ट मीडिया संस्थान ईरान के झूठे दावों को बढ़ावा देकर यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि ईरान इस युद्ध में जीत रहा है। ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जो भी मीडिया संगठन देश के खिलाफ ऐसी भ्रामक खबरें फैला रहे हैं, उन्हें ‘राजद्रोह’ का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में धमकी दी कि ऐसे संगठनों के लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं, क्योंकि वे सरकार द्वारा दी गई फ्री एयरवेव्स का इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ झूठ फैलाने के लिए कर रहे हैं।

    ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच जारी यह संघर्ष अब वैश्विक संकट का रूप ले चुका है। गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला किया था, जिसके बाद ईरान ने भी फारस की खाड़ी और पड़ोसी देशों पर जवाबी हमले शुरू कर दिए। इस युद्ध के कारण दुनिया भर में विमानन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और तेल निर्यात बाधित होने से ईंधन की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए तेल पर निर्भर देशों से हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा हेतु अपने युद्धपोत भेजने की अपील की है।

    मौजूदा स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है क्योंकि इजराइल ने रविवार को भी ईरान पर अपने हमले जारी रखे। वहीं, बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने अपने नागरिकों को मिसाइल हमलों के प्रति अलर्ट कर दिया है। ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि वे न केवल ईरान के सैन्य हमलों बल्कि उसके ‘सूचना युद्ध’ Information Warका भी पूरी ताकत से जवाब देंगे। राष्ट्रपति ने सीधे तौर पर लोकप्रिय टीवी शो ‘लेट नाइट मोरन्स’ और अन्य पत्रकारों को भी चेतावनी दी कि रेटिंग और पैसे के चक्कर में देश विरोधी एजेंडा चलाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • ट्रंप का आरोप: अमेरिकी अदालतें रिपब्लिकन के खिलाफ पक्षपाती, जजों की सोच ने फैसलों को प्रभावित किया

    ट्रंप का आरोप: अमेरिकी अदालतें रिपब्लिकन के खिलाफ पक्षपाती, जजों की सोच ने फैसलों को प्रभावित किया


    नई दिल्ली:  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अदालतों पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका जरूरत से ज्यादा राजनीतिक हो चुकी है और कई मामलों में जजों की सोच फैसलों से अधिक प्रभाव डालती है। ट्रंप का आरोप है कि अदालतें अक्सर रिपब्लिकन नेताओं और उनके साथ जुड़े मामलों में अनुचित रुख अपनाती हैं और कई बार ऐसे लोगों को संरक्षण देती दिखाई देती हैं जिन्हें नहीं बचाया जाना चाहिए।

    इसके साथ ही ट्रंप ने वॉशिंगटन डीसी में स्थित फेडरल रिजर्व कॉम्प्लेक्स के नवीनीकरण प्रोजेक्ट में बजट और समय की अनियमितताओं की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट बजट से कहीं अधिक खर्च कर रहा है और तय समय से पीछे चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले की पूरी पारदर्शी जांच होनी चाहिए और प्रोजेक्ट से जुड़े कॉन्ट्रैक्टरों की जिम्मेदारी तय की जाए।

    ट्रंप ने विशेष रूप से जज जेम्स बोसबर्ग पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनके और रिपब्लिकन नेताओं से जुड़े मामलों में पक्षपातपूर्ण रुख अपनाया। ट्रंप ने कहा कि बोसबर्ग ने डी.सी. सर्किट में बेगुनाह रिपब्लिकन को दोषी ठहराने का समर्थन किया और अब फेडरल रिजर्व की वित्तीय गड़बड़ी की जांच रोक रहे हैं। उन्होंने जज बोसबर्ग को ट्रंप डिरेंजमेंट सिंड्रोम (टीडीएस) के उच्च स्तर से पीड़ित बताया।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने अदालतों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक एजेंडे से दूर रहकर केवल कानून और न्याय के सिद्धांतों पर ध्यान दें। ट्रंप ने बोसबर्ग को उनके और रिपब्लिकन से जुड़े सभी केसों से हटाने और उन पर गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई लेने की मांग की।

    ट्रंप के बयान ने अमेरिकी न्यायपालिका और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि उन्होंने न्यायिक निष्पक्षता और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

  • खार्ग द्वीप: ईरान की आर्थिक धड़कन, ट्रंप की चेतावनी ने बढ़ाई वैश्विक चिंता

    खार्ग द्वीप: ईरान की आर्थिक धड़कन, ट्रंप की चेतावनी ने बढ़ाई वैश्विक चिंता


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान का खर्ग द्वीप एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। फारस की खाड़ी में स्थित यह छोटा सा द्वीप लंबे समय से ईरान की तेल अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में इस द्वीप पर मौजूद सभी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। उनका यह बयान वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में नई बहस पैदा कर गया है।

    खार्ग द्वीप ईरान के दक्षिण में बुशेहर तट से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित है। यह एक कोरल द्वीप है जिसकी समुद्री गहराई इतनी अधिक है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल टैंकर भी यहां आसानी से लंगर डाल सकते हैं। 20वीं सदी के मध्य में ईरान ने इसे विशाल तेल निर्यात टर्मिनल के रूप में विकसित किया। पाइपलाइनों के माध्यम से देश के कई बड़े तेल क्षेत्रों से कच्चा तेल यहां लाया जाता है और फिर टैंकरों के जरिए दुनिया भर में भेजा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार ईरान के कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा इसी द्वीप से होकर गुजरता है।

    इतिहास में भी खार्ग द्वीप का महत्व कम नहीं रहा। प्राचीन फारसी साम्राज्यों के समय से यह समुद्री व्यापार का अहम केंद्र रहा। द्वीप पर चट्टानों में बने मकबरों और प्रारंभिक ईसाई मठों के अवशेष मिले हैं। मध्यकाल में यह फारस, भारत और बसरा के बीच व्यापारिक मार्ग का हिस्सा था। 18वीं सदी में डच ईस्ट इंडिया कंपनी और बाद में ब्रिटिश सेना ने भी यहां व्यापारिक चौकियां स्थापित की थीं।

    आधुनिक दौर में इस द्वीप का सबसे बड़ा परीक्षण ईरान इराक युद्ध 1980–1988 के दौरान हुआ, जब इराक ने कई बार यहां मौजूद तेल टर्मिनलों पर हमला किया। ऊर्जा इतिहासकार डैनियल येरगिन के अनुसार, “खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का ‘नर्व सिस्टम’ था; इस पर हमला करना सीधे उसकी आर्थिक जीवनरेखा पर वार करने जैसा था।

    हाल ही में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मध्य पूर्व के सबसे शक्तिशाली बमबारी अभियानों में से एक अंजाम दिया और खार्ग द्वीप पर मौजूद सभी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने द्वीप के तेल ढांचे को नष्ट नहीं किया, लेकिन चेतावनी दी कि यदि कोई पक्ष स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही में बाधा डालता है, तो अमेरिकी प्रतिक्रिया हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खार्ग द्वीप पर किसी भी बड़े हमले का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। यह द्वीप वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा है। यहां की तेल सुविधाओं को नुकसान पहुंचने पर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी उथल पुथल मच सकती है। यही कारण है कि यह छोटा सा द्वीप लंबे समय से पश्चिम एशिया की भू राजनीति में रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बना हुआ है।