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  • ट्रंप की एक पोस्ट से फिर गरमाया पश्चिम एशिया! ईरान पर नए हमले की अटकलों से दुनिया में हलचल

    ट्रंप की एक पोस्ट से फिर गरमाया पश्चिम एशिया! ईरान पर नए हमले की अटकलों से दुनिया में हलचल


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट ने नए सैन्य टकराव की आशंकाओं को हवा दे दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह युद्धपोत पर सैन्य अधिकारियों के साथ खड़े नजर आए। तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा— “तूफान से पहले की शांति।” इस एक लाइन ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है और माना जा रहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ फिर बड़ा कदम उठा सकता है।

    तस्वीर में ट्रंप समुद्र के बीच युद्धपोत पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। पीछे ईरान का झंडा लगे जहाज और तूफानी मौसम जैसे दृश्य नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पोस्ट केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि ईरान को सीधी चेतावनी भी हो सकती है। खास बात यह है कि हाल के दिनों में ट्रंप कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि अगर ईरान के साथ समझौता नहीं हुआ तो उसे “गंभीर परिणाम” भुगतने पड़ सकते हैं।

    इसी बीच अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स ने तनाव और बढ़ा दिया है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी रक्षा विभाग ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 2.0” नाम की योजना तैयार की है। रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना में ईरान के सैन्य ठिकानों और अहम बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा विशेष सैन्य अभियान और रणनीतिक इलाकों पर कब्जे जैसे विकल्पों पर भी चर्चा चल रही है।

    अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका सैन्य कार्रवाई तेज कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि हमला कब और किस स्तर पर हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना के पास कई विकल्प तैयार हैं, लेकिन अंतिम फैसला अब भी राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ में है।

    दूसरी तरफ ईरान ने भी कड़ा रुख अपना लिया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने गलत कदम उठाया तो उसका जवाब भी उसी भाषा में मिलेगा। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन युद्ध की स्थिति में पीछे हटने वाला नहीं है।

    गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान से जुड़े ठिकानों पर संयुक्त कार्रवाई की थी। इसके बाद 8 अप्रैल को अस्थायी सीजफायर जरूर हुआ, लेकिन दोनों पक्षों के बीच तनाव खत्म नहीं हुआ। अब ट्रंप की नई पोस्ट और अमेरिकी सैन्य तैयारियों की खबरों ने पश्चिम एशिया में फिर बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है। दुनिया की नजरें अब वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं, क्योंकि एक गलत फैसला पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक सकता है।

  • ट्रंप-शी की नजदीकी से भारत की बढ़ी टेंशन! सुरक्षा से व्यापार तक बदल सकते हैं एशिया के समीकरण

    ट्रंप-शी की नजदीकी से भारत की बढ़ी टेंशन! सुरक्षा से व्यापार तक बदल सकते हैं एशिया के समीकरण



    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हालिया मुलाकात ने भारत की रणनीतिक चिंताओं को बढ़ा दिया है। 13 से 15 मई तक बीजिंग में हुई इस बैठक को वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि अगर अमेरिका और चीन के रिश्तों में नरमी आती है तो इसका सीधा असर भारत की सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय प्रभाव पर पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले दो दशकों में भारत ने अमेरिका-चीन तनाव के बीच खुद को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक मजबूत साझेदार के रूप में स्थापित किया था। लेकिन अगर वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच समझौते बढ़ते हैं तो अमेरिका के लिए भारत की रणनीतिक अहमियत कम हो सकती है। इससे रक्षा सहयोग, खुफिया साझेदारी और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर असर पड़ने की आशंका है।

    व्यापार के मोर्चे पर भी भारत के लिए खतरे की घंटी मानी जा रही है। हाल के वर्षों में कई वैश्विक कंपनियां चीन से बाहर निकलकर भारत में निवेश कर रही थीं, लेकिन अगर अमेरिका चीन पर लगाए गए टैरिफ और तकनीकी प्रतिबंधों में ढील देता है तो निवेश दोबारा चीन की ओर लौट सकता है। इससे भारत के “चीन प्लस वन” रणनीति के तहत मिले फायदे कमजोर पड़ सकते हैं।

    चीन-पाकिस्तान गठजोड़ भी भारत की चिंता का बड़ा कारण है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर अमेरिका चीन के साथ रिश्ते सुधारने की दिशा में आगे बढ़ता है तो पाकिस्तान में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर उसका दबाव कम हो सकता है। इससे चीन खुलकर पाकिस्तान का समर्थन कर सकता है, जिसका असर कश्मीर और सीमा सुरक्षा से जुड़े मामलों पर दिखाई दे सकता है।

    पश्चिम एशिया और ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर भी भारत सतर्क नजर आ रहा है। भारत की बड़ी तेल जरूरतें होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं। अगर अमेरिका और चीन ईरान और खाड़ी क्षेत्र को लेकर किसी नई रणनीति पर साथ आते हैं तो भारत की भूमिका सीमित हो सकती है। इससे क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप-शी मुलाकात केवल दो देशों की कूटनीतिक बैठक नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की शक्ति संतुलन पर पड़ेगा। भारत के लिए यह संकेत है कि आने वाले समय में उसे अपनी विदेश नीति, आर्थिक रणनीति और सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करना होगा, ताकि बदलते वैश्विक समीकरणों में उसका प्रभाव कायम रह सके।

  • अमेरिका का बड़ा एंटी-ISIS ऑपरेशन: अफ्रीका में छिपा नंबर-2 कमांडर ढेर, ट्रम्प का दावा,संगठन की कमर टूटी

    अमेरिका का बड़ा एंटी-ISIS ऑपरेशन: अफ्रीका में छिपा नंबर-2 कमांडर ढेर, ट्रम्प का दावा,संगठन की कमर टूटी



    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अफ्रीका में एक बड़े सैन्य ऑपरेशन के दौरान आतंकी संगठन ISIS का दूसरा सबसे बड़ा कमांडर अबू बिलाल अल मिनुकी मारा गया है। यह कार्रवाई अमेरिकी सेना और नाइजीरियाई सुरक्षा बलों के संयुक्त ऑपरेशन के तहत की गई, जिसमें लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।

    ट्रम्प के अनुसार, यह आतंकी संगठन के सबसे सक्रिय और रणनीतिक दिमागों में से एक था, जो फंडिंग नेटवर्क और हमलों की योजना बनाने में अहम भूमिका निभाता था। उसके मारे जाने से ISIS के कमांड स्ट्रक्चर और वित्तीय नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचा है। हालांकि इस ऑपरेशन की सटीक जगह और समय को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।

    सूत्रों के मुताबिक, अबू बिलाल अल मिनुकी का जन्म 1982 में नाइजीरिया के बोर्नो राज्य में हुआ था और वह लंबे समय से अफ्रीका में छिपकर ISIS की गतिविधियों को संचालित कर रहा था। उसे 2023 में अमेरिका ने “ग्लोबल टेररिस्ट” घोषित किया था, जिसके बाद उसकी संपत्तियां फ्रीज कर दी गई थीं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी गतिविधियों पर रोक लगा दी गई थी।

    ISIS के इस नंबर-2 कमांडर को संगठन के भीतर “शैडो ऑपरेटर” माना जाता था, क्योंकि वह सीधे सामने नहीं आता था और नेटवर्क व फंडिंग को नियंत्रित करता था। उसके कई नाम भी बताए जाते थे, लेकिन उसकी कोई आधिकारिक तस्वीर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थी।

    नाइजीरिया और आसपास के पश्चिमी अफ्रीकी देशों में ISIS और उससे जुड़े संगठनों की गतिविधियां लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई हैं। बोको हराम और इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस जैसे संगठन इस क्षेत्र में लगातार हिंसा फैला रहे हैं, जिसमें हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस ऑपरेशन को ISIS के खिलाफ एक बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है, लेकिन संगठन के पूरी तरह खत्म होने की संभावना अभी भी नहीं है क्योंकि इसके नेटवर्क कई देशों में फैले हुए हैं और यह समय-समय पर नए नेतृत्व के साथ सक्रिय हो जाता है।

    कुल मिलाकर, यह कार्रवाई अफ्रीका में आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक अहम उदाहरण मानी जा रही है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • ट्रंप का चीन दौरा रहा बेनतीजा! जिनपिंग के सामने ईरान, ताइवान और व्यापार पर नहीं बनी कोई सहमति

    ट्रंप का चीन दौरा रहा बेनतीजा! जिनपिंग के सामने ईरान, ताइवान और व्यापार पर नहीं बनी कोई सहमति


    नई दिल्ली।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बहुचर्चित चीन यात्रा इस बार किसी बड़े नतीजे के बिना खत्म हो गई। बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद ईरान, ताइवान और व्यापार जैसे अहम मुद्दों पर कोई ठोस समझौता सामने नहीं आया।

    दोनों नेताओं ने बातचीत को सकारात्मक बताया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार इस दौरे से कोई बड़ा कूटनीतिक या आर्थिक ऐलान नहीं हुआ। ट्रंप लगभग 40 घंटे से ज्यादा बीजिंग में रहे और कई बैठकों में शामिल हुए, फिर भी दोनों देशों के बीच रणनीतिक मतभेद जस के तस बने रहे।

    सबसे बड़ा मुद्दा ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य रहा, जहां ऊर्जा आपूर्ति और सैन्य तनाव को लेकर अमेरिका और चीन की स्थिति अलग-अलग दिखाई दी। अमेरिकी पक्ष ने दावा किया कि दोनों देश ऊर्जा प्रवाह को लेकर सहमत हैं, लेकिन चीन की ओर से इस पर कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता सामने नहीं आई।

    ताइवान को लेकर स्थिति और भी सख्त नजर आई, जहां शी जिनपिंग ने इसे चीन की “रेड लाइन” बताते हुए किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को अस्वीकार्य करार दिया। इस बयान को अमेरिका के लिए एक स्पष्ट कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    व्यापार और आर्थिक सहयोग के मोर्चे पर भी कोई बड़ा समझौता नहीं हो सका। उम्मीद थी कि चीन बड़ी मात्रा में अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों की खरीद बढ़ाने का ऐलान करेगा, लेकिन ऐसा कोई महत्वपूर्ण निर्णय सामने नहीं आया।

    कुल मिलाकर इस दौरे को विशेषज्ञों ने “बिना ठोस नतीजे वाली कूटनीतिक मुलाकात” बताया है, जहां दोनों देशों ने रिश्तों में सुधार की बात जरूर कही, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा।

  • शी जिनपिंग की सीट से उठते ही फाइलें देखने लगे ट्रंप! चीन समिट का VIDEO वायरल, सोशल मीडिया पर मचा बवाल

    शी जिनपिंग की सीट से उठते ही फाइलें देखने लगे ट्रंप! चीन समिट का VIDEO वायरल, सोशल मीडिया पर मचा बवाल



    नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर अपने व्यवहार को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। चीन दौरे के दौरान उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह कथित तौर पर Xi Jinping के सामने रखे दस्तावेजों और डायरी को देखने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है और लोग ट्रंप के व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं।

    वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि अमेरिका-चीन बैठक के दौरान शी जिनपिंग अपनी सीट से कुछ देर के लिए उठते हैं। इसी बीच ट्रंप सामने रखे दस्तावेजों की तरफ झुकते हैं और एक नोटबुक या डायरी जैसी चीज को देखने लगते हैं। वीडियो में मौजूद कुछ अमेरिकी अधिकारी भी इस दौरान असहज दिखाई देते हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप वास्तव में क्या पढ़ रहे थे और वह दस्तावेज निजी थे या बैठक से जुड़े आधिकारिक कागज।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई यूजर्स ने इसे “डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल के खिलाफ” बताया, जबकि कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि ट्रंप “चीन के सीक्रेट” जानने की कोशिश कर रहे थे। कुछ पोस्ट्स में ट्रंप के व्यवहार को लेकर उनकी कार्यशैली और सार्वजनिक आचरण पर भी सवाल उठाए गए।

    बांग्लादेशी पत्रकार Salah Uddin Shoaib Choudhury ने भी इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इतने संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसा व्यवहार कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसे कूटनीतिक माहौल के लिहाज से असामान्य बताया।

    हालांकि अब तक अमेरिका या चीन की ओर से इस वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह भी साफ नहीं हो पाया है कि वीडियो किस संदर्भ में रिकॉर्ड हुआ और ट्रंप वास्तव में क्या देख रहे थे। बावजूद इसके, यह क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • शी जिनपिंग के ‘पतनशील अमेरिका’ वाले बयान पर ट्रंप की मुहर, बोले- बाइडेन ने देश को कमजोर कर दिया

    शी जिनपिंग के ‘पतनशील अमेरिका’ वाले बयान पर ट्रंप की मुहर, बोले- बाइडेन ने देश को कमजोर कर दिया



    नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रम्प  ने चीन दौरे के दौरान बड़ा बयान देते हुए कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग
    द्वारा अमेरिका को “पतनशील राष्ट्र” कहे जाने पर वह कुछ हद तक सहमत हैं। हालांकि ट्रंप ने साफ किया कि यह टिप्पणी मौजूदा अमेरिकी स्थिति पर नहीं, बल्कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल की नीतियों पर लागू होती है।

    नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि उनकी बीजिंग यात्रा बेहद सफल रही और शी जिनपिंग ने कई मुद्दों पर उनकी सराहना भी की। ट्रंप के मुताबिक, चीन के राष्ट्रपति ने अमेरिका की स्थिति को लेकर जो टिप्पणी की, उसका इशारा बाइडेन प्रशासन की आर्थिक और विदेश नीति की ओर था।

    ट्रंप ने कहा कि बाइडेन सरकार के दौरान अमेरिका को आर्थिक कमजोरी, वैश्विक दबाव और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेतृत्व संकट का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत नीतियों की वजह से अमेरिका की वैश्विक छवि कमजोर हुई और चीन जैसे देशों को बढ़त मिली। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी वापसी के बाद अमेरिका फिर से मजबूत स्थिति में आ रहा है।

    हालांकि यह साफ नहीं हो पाया कि ट्रंप ने शी जिनपिंग के किस बयान का जिक्र किया। माना जा रहा है कि वह चीन-अमेरिका संबंधों पर हुई बंद कमरे की बातचीत या “थ्यूसीडाइड्स ट्रैप” से जुड़े बयान की ओर इशारा कर रहे थे। अपनी मुलाकात के दौरान शी जिनपिंग ने कहा था कि दुनिया की स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अमेरिका और चीन के रिश्तों का संतुलित रहना बेहद जरूरी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान अमेरिकी राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकता है, क्योंकि उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से चीन की आलोचनात्मक टिप्पणी को सही ठहराने जैसा संकेत दिया है। वहीं रिपब्लिकन खेमे में इसे बाइडेन प्रशासन पर सीधा हमला माना जा रहा है।

  • ट्रंप का बड़ा दावा: चीन अब ईरान को नहीं देगा हथियार, शी जिनपिंग से बातचीत में बनी सहमति

    ट्रंप का बड़ा दावा: चीन अब ईरान को नहीं देगा हथियार, शी जिनपिंग से बातचीत में बनी सहमति

    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ईरान को सैन्य उपकरण नहीं भेजने पर सहमति जताई है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बना हुआ है। माना जा रहा है कि यदि चीन हथियारों की सप्लाई रोकता है तो इसका बड़ा रणनीतिक असर पड़ सकता है।

    बीजिंग बैठक के बाद ट्रंप का बयान
    13 से 15 मई के बीच चीन दौरे पर पहुंचे ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि बीजिंग में हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान ईरान के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि शी जिनपिंग ने स्पष्ट किया है कि चीन ईरान को सैन्य उपकरण उपलब्ध नहीं कराएगा। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “उन्होंने कहा कि वे ईरान को हथियार या सैन्य उपकरण नहीं देंगे। यह बहुत बड़ा कदम है।”

    तेल कारोबार जारी रखना चाहता है चीन
    हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि चीन ईरान से तेल खरीद जारी रखना चाहता है। उनके मुताबिक चीन ने साफ किया है कि वह ईरानी तेल आयात को बंद नहीं करेगा, क्योंकि उसकी ऊर्जा जरूरतों के लिए यह महत्वपूर्ण है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार चीन ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। अमेरिका-चीन आर्थिक एवं सुरक्षा समीक्षा आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2025 और 2026 की पहली तिमाही में चीन ने प्रतिदिन करीब 14 लाख बैरल ईरानी तेल खरीदा। यह चीन के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 12 से 15 प्रतिशत हिस्सा रहा।

    अमेरिका-चीन के बीच तेल पर भी चर्चा
    व्हाइट हाउस की ओर से जानकारी दी गई कि ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच अमेरिका से तेल खरीद के मुद्दे पर भी बातचीत हुई। इससे पहले ट्रेड वॉर के दौरान चीन ने अमेरिकी कच्चे तेल पर 20 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था, जिसके बाद मई 2025 में उसने अमेरिकी तेल खरीद लगभग बंद कर दी थी।

    बोइंग को मिल सकता है बड़ा ऑर्डर
    ट्रंप ने बातचीत के दौरान यह दावा भी किया कि चीन अमेरिकी विमान निर्माता बोइंग से 200 विमान खरीदने पर सहमत हो गया है। उन्होंने कहा कि यह डील बोइंग के लिए बड़ी उपलब्धि साबित होगी और इससे अमेरिका में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। ट्रंप ने कहा, “बोइंग 150 विमानों के ऑर्डर की उम्मीद कर रहा था, लेकिन अब 200 विमानों का ऑर्डर मिलने जा रहा है।”

    पहले भी मिल चुके थे संकेत
    इससे पहले अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भी बोइंग को बड़े ऑर्डर मिलने के संकेत दिए थे। वहीं Kelly Ortberg भी ट्रंप के साथ चीन दौरे पर मौजूद हैं, जिससे इस संभावित समझौते को और बल मिला है।

  • थ्यूसीडाइड्स ट्रैप पर जिनपिंग का बड़ा संदेश, ट्रंप से बातचीत में टकराव टालने की अपील; क्या बदलेंगे अमेरिका-चीन रिश्ते?

    थ्यूसीडाइड्स ट्रैप पर जिनपिंग का बड़ा संदेश, ट्रंप से बातचीत में टकराव टालने की अपील; क्या बदलेंगे अमेरिका-चीन रिश्ते?




    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में हुई हालिया उच्च स्तरीय बैठक एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गई है। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा, तकनीक और ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। लेकिन इस बैठक का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला पहलू वह रहा, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का जिक्र किया और स्पष्ट रूप से टकराव से बचने की अपील की। उनके इस बयान को अमेरिका-चीन रिश्तों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    शी जिनपिंग ने बातचीत के दौरान सवाल उठाया कि क्या दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका और चीन इस ऐतिहासिक “ट्रैप” से बाहर निकलकर सहयोग और स्थिरता का नया मॉडल विकसित कर सकती हैं? उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों का साथ आना आवश्यक है, ताकि दुनिया में शांति और आर्थिक स्थिरता बनी रह सके। उनके बयान का अर्थ यह भी निकाला जा रहा है कि चीन टकराव के बजाय सहयोग की नीति को प्राथमिकता देना चाहता है, हालांकि इसके पीछे वैश्विक शक्ति संतुलन में अपनी भूमिका को मजबूत करने की रणनीति भी देखी जा रही है।

    ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ शब्द कोई नया राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जिसे हार्वर्ड विश्वविद्यालय के राजनीतिक वैज्ञानिक ग्राहम एलिसन ने आधुनिक राजनीति में लोकप्रिय बनाया था। यह सिद्धांत प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसीडाइड्स के अध्ययन पर आधारित है, जिन्होंने लगभग ढाई हजार साल पहले एथेंस और स्पार्टा के बीच हुए पेलोपोनेसियन युद्ध का विश्लेषण किया था। थ्यूसीडाइड्स का मानना था कि जब कोई उभरती हुई शक्ति किसी स्थापित महाशक्ति को चुनौती देती है, तो दोनों के बीच तनाव बढ़ना लगभग स्वाभाविक हो जाता है और कई बार यह स्थिति युद्ध तक पहुंच जाती है।

    आधुनिक वैश्विक राजनीति में इस सिद्धांत को अमेरिका और चीन के रिश्तों से जोड़ा जाता है। पिछले कुछ दशकों में चीन ने आर्थिक, सैन्य और तकनीकी क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है, जिससे वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव आया है। दूसरी ओर अमेरिका लंबे समय से वैश्विक सुपरपावर की भूमिका में रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती गई है। व्यापार युद्ध, टैरिफ विवाद, टेक्नोलॉजी पर प्रतिबंध, साइबर सुरक्षा, ताइवान मुद्दा और दक्षिण चीन सागर में सैन्य गतिविधियों ने इस तनाव को और गहरा किया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच मौजूदा हालात काफी हद तक ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ जैसी स्थिति को दर्शाते हैं, जहां एक उभरती हुई शक्ति और एक स्थापित महाशक्ति के बीच टकराव की संभावना बनी रहती है, भले ही कोई भी पक्ष युद्ध नहीं चाहता हो। इसी कारण शी जिनपिंग का यह बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह केवल चेतावनी नहीं बल्कि कूटनीतिक संदेश भी है कि दोनों देशों को बातचीत और सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए।

    जिनपिंग ने पहले भी कई मौकों पर इस सिद्धांत का उल्लेख किया है और हमेशा यही संदेश दिया है कि अमेरिका और चीन यदि साझा हितों पर काम करें तो वैश्विक स्थिरता और विकास को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान चीन की उस रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जिसमें वह खुद को अमेरिका के बराबर एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

    कुल मिलाकर यह बैठक और ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ पर दिया गया बयान केवल एक राजनीतिक चर्चा नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में अमेरिका-चीन संबंधों की दिशा तय करने वाला संकेत भी माना जा रहा है। दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के बीच संतुलन, प्रतिस्पर्धा और सहयोग—इन तीनों के बीच आगे का रास्ता किस दिशा में जाएगा, यह वैश्विक राजनीति के लिए सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।

  • ट्रंप का बाइडन पर बड़ा हमला: बोले- 4 साल में अमेरिका को किया कमजोर, शी जिनपिंग की बात सही

    ट्रंप का बाइडन पर बड़ा हमला: बोले- 4 साल में अमेरिका को किया कमजोर, शी जिनपिंग की बात सही

    नई दिल्ली। अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें अमेरिका को “ढलता हुआ देश” कहा गया था। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि जिनपिंग की यह टिप्पणी “100 प्रतिशत सही” थी। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के चार साल के कार्यकाल में अमेरिका को कई स्तर पर नुकसान झेलना पड़ा, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।

    बाइडन सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
    ट्रंप ने आरोप लगाया कि बाइडन प्रशासन की नीतियों ने देश को कमजोर किया। उन्होंने खुली सीमा नीति, बढ़े हुए टैक्स, DEI नीतियां, महिलाओं के खेलों में पुरुष खिलाड़ियों की भागीदारी, खराब व्यापार समझौते और बढ़ते अपराध को अमेरिका की गिरती स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप के मुताबिक, इन फैसलों का असर देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था दोनों पर पड़ा।

    ट्रंप बोले- मेरे नेतृत्व में तेजी से बदली स्थिति
    अपने पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ने पिछले 16 महीनों में तेजी से सुधार किया है। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, रोजगार के अवसर बढ़े हैं और विदेशी निवेश में भी लगातार इजाफा हुआ है। ट्रंप ने यह भी कहा कि शी जिनपिंग ने इन उपलब्धियों के लिए उन्हें बधाई दी है।

    अमेरिका फिर बना मजबूत देश
    ट्रंप ने कहा कि अब अमेरिका आर्थिक और सैन्य दोनों स्तरों पर पहले से ज्यादा मजबूत हो चुका है। उन्होंने वेनेजुएला और ईरान से जुड़े सैन्य कदमों का जिक्र करते हुए अमेरिकी सेना को दुनिया की सबसे ताकतवर सेना बताया। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले तक अमेरिका कमजोर स्थिति में था, लेकिन अब देश दोबारा वैश्विक ताकत के रूप में उभर रहा है। साथ ही ट्रंप ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में अमेरिका और चीन के संबंध और बेहतर हो सकते हैं।

  • चीन दौरे से पहले ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- ईरान संकट सुलझाने में शी जिनपिंग की जरूरत नहीं

    चीन दौरे से पहले ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- ईरान संकट सुलझाने में शी जिनपिंग की जरूरत नहीं

    नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज तीन दिवसीय चीन दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इस यात्रा के दौरान उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कई अहम वैश्विक मुद्दों पर द्विपक्षीय बातचीत होगी। हालांकि बीजिंग रवाना होने से पहले ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान संकट को हल करने के लिए उन्हें शी जिनपिंग की किसी मदद की जरूरत नहीं है। ट्रंप ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि ईरान को अब सही रास्ता चुनना होगा, नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

    चीन दौरे पर हाई-प्रोफाइल डेलिगेशन
    13 से 15 मई तक चलने वाले इस दौरे में ट्रंप के साथ अमेरिका का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी चीन जा रहा है। इसमें उनके परिवार के सदस्य एरिक ट्रंप और लारा ट्रंप के अलावा कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। डेलिगेशन में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी पीट हेगसेथ, और अन्य कूटनीतिक व सुरक्षा सलाहकार जैसे जेमीसन ग्रीर, स्टीफन मिलर, स्टीवन चेउंग, जेम्स ब्लेयर और अन्य प्रमुख नाम शामिल हैं।

    ईरान मुद्दा प्राथमिकता में नहीं
    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि चीन में शी जिनपिंग के साथ उनकी बातचीत का मुख्य फोकस ईरान मुद्दा नहीं होगा, हालांकि इस पर चर्चा जरूर होगी। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हो चुकी है और किसी भी समझौते का उद्देश्य अमेरिका और ईरान दोनों देशों के हित में होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि “हम सिर्फ अच्छी डील करेंगे।”

    रूस-यूक्रेन युद्ध पर दावा
    ट्रंप ने यह भी दावा किया कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध जल्द ही समाप्त होने की दिशा में है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वैश्विक हालात में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि चीन दौरे के दौरान ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात से वैश्विक राजनीति और खासकर ईरान संकट पर क्या नई दिशा निकलती है।