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  • सीजफायर के बीच फिर भड़की जंग! अमेरिका की ईरान पर बमबारी, ट्रम्प की खुली धमकी से मचा हड़कंप

    सीजफायर के बीच फिर भड़की जंग! अमेरिका की ईरान पर बमबारी, ट्रम्प की खुली धमकी से मचा हड़कंप



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्धविराम के दावों के बीच हालात एक बार फिर विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ता दिख रहा है। ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने सीजफायर तोड़ते हुए ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इसके बाद तेहरान ने साफ चेतावनी दी है कि अब किसी भी हमले का जवाब बेहद कड़े और सीधे सैन्य एक्शन से दिया जाएगा।

    ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने जास्क क्षेत्र के पास उस तेल टैंकर पर हमला किया, जो होर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़ रहा था। ईरान ने इसे युद्धविराम का खुला उल्लंघन बताया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर ईरान परमाणु समझौते पर आगे नहीं बढ़ता तो अमेरिका और भी बड़े हमले करेगा।

    ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया था, लेकिन अमेरिकी सेना ने सभी हमलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि जवाबी कार्रवाई में ईरान की कई सैन्य नावों और ठिकानों को तबाह कर दिया गया। ट्रम्प ने दो टूक कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

    बढ़ते संघर्ष का सबसे बड़ा असर दुनिया की सबसे अहम समुद्री व्यापारिक लाइन होर्मुज स्ट्रेट पर दिखाई दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी IMO के मुताबिक, संकट के कारण खाड़ी क्षेत्र में करीब 1500 जहाज फंस गए हैं। इन जहाजों पर लगभग 20 हजार नाविक मौजूद हैं। इससे वैश्विक तेल सप्लाई, गैस कारोबार और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ने लगा है। कई देशों में ईंधन और जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    इस बीच अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच बैक चैनल बातचीत की खबरें भी सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश 30 दिन के अस्थायी समझौते और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि जमीन पर जारी सैन्य गतिविधियां किसी स्थायी शांति की संभावना को कमजोर करती नजर आ रही हैं।

    ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि ईरान का मिसाइल भंडार खत्म हो चुका है। अराघची ने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह सक्रिय है और देश अपनी सुरक्षा के लिए हर स्तर पर तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बनती है, अमेरिका सैन्य कार्रवाई शुरू कर देता है।

    उधर संयुक्त अरब अमीरात ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइल और तीन ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। वहीं लेबनान में भी तनाव तेजी से बढ़ रहा है। इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष फिर तेज हो गया है और दक्षिणी लेबनान में लगातार हवाई हमलों की खबरें सामने आ रही हैं।

    भारत सरकार ने भी पश्चिम एशिया के हालात पर करीबी नजर बनाए रखी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए विशेष कंट्रोल रूम सक्रिय किए गए हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाने की तैयारी की गई है।

  • US-Cuba Relations: ट्रंप ने क्यूबा पर हमले की अटकलों को किया खारिज, लूला बोले- सैन्य कार्रवाई की कोई योजना नहीं

    US-Cuba Relations: ट्रंप ने क्यूबा पर हमले की अटकलों को किया खारिज, लूला बोले- सैन्य कार्रवाई की कोई योजना नहीं



    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा की व्हाइट हाउस में हुई बंद कमरे की अहम बैठक के बाद बड़ा बयान सामने आया है। ब्राजीलियाई राष्ट्रपति लूला ने दावा किया कि अमेरिका की क्यूबा पर हमला करने की कोई योजना नहीं है।

    करीब ढाई घंटे चली इस बैठक में क्यूबा, क्षेत्रीय सुरक्षा और लैटिन अमेरिका की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद वाशिंगटन स्थित ब्राजील दूतावास में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए लूला ने कहा कि ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि वह क्यूबा के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं चाहते।

    लूला बोले- बातचीत से हल चाहता है क्यूबा
    ब्राजीलियाई राष्ट्रपति ने कहा कि क्यूबा लंबे समय से आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और अब वह बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। लूला के मुताबिक, लगातार लगे प्रतिबंधों ने क्यूबा के विकास और उसकी आर्थिक स्वतंत्रता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।उन्होंने इस मुलाकात को सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संवाद जरूरी है।

    अमेरिका की नीति अब भी सख्त
    हालांकि ट्रंप के बयान के बावजूद अमेरिका ने क्यूबा पर दबाव बनाए रखा है। हाल ही में अमेरिका ने क्यूबा की कई कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं।

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि क्यूबा की सैन्य कंपनी GAISA और खनन क्षेत्र से जुड़ी कुछ संस्थाओं को निशाना बनाया गया है। इन प्रतिबंधों का असर क्यूबा-कनाडा साझेदारी वाली कंपनी Moa Nickel पर भी पड़ा है।

    क्यूबा पर बढ़ता आर्थिक दबाव
    अमेरिका का कहना है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य क्यूबा सरकार पर दबाव बनाना है। वहीं आलोचकों का मानना है कि इन कदमों से क्यूबा की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर बोझ बढ़ेगा।ट्रंप और लूला की मुलाकात के बाद फिलहाल क्यूबा पर सैन्य कार्रवाई की आशंकाएं कम होती दिख रही हैं, लेकिन अमेरिका-क्यूबा संबंधों में तनाव अब भी बरकरार है।

  • West Asia Crisis: युद्धविराम के बावजूद भड़का तनाव, लेबनान में इस्राइल का बड़ा एक्शन; ईरान-अमेरिका आमने-सामने

    West Asia Crisis: युद्धविराम के बावजूद भड़का तनाव, लेबनान में इस्राइल का बड़ा एक्शन; ईरान-अमेरिका आमने-सामने



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू होने के बावजूद हालात लगातार विस्फोटक बने हुए हैं। दक्षिणी लेबनान में इस्राइल ने सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव और गहरा गया है। पूरे क्षेत्र में एक बार फिर बड़े संघर्ष का खतरा मंडराने लगा है।

    लेबनान के गांव को खाली करने का आदेश
    इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के अल-अब्बासियाह गांव के लोगों को तत्काल इलाका खाली करने का आदेश दिया है। इस्राइल के अरबी भाषा के प्रवक्ता अविचाई अद्राई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर लोगों से गांव छोड़कर कम से कम 1000 मीटर दूर खुले इलाकों में जाने को कहा।

    युद्धविराम के बावजूद दक्षिण लेबनान में इस्राइली हवाई हमले और सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। हिजबुल्लाह और इस्राइली सेना के बीच रुक-रुक कर झड़पें भी जारी हैं, जिससे स्थानीय लोगों में डर और पलायन का माहौल बना हुआ है।

    दक्षिण लेबनान में हवाई हमला, 11 लोगों की मौत
    अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्राइल ने नबातियेह जिले के दुएर, हारौफ और हब्बौश कस्बों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। वहीं 36 लोग घायल बताए जा रहे हैं।

    होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका-ईरान आमने-सामने
    उधर, होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, लेकिन अमेरिकी सेना ने सभी हमलों को नाकाम कर दिया।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के तीन बड़े युद्धपोत सुरक्षित हैं और जवाबी कार्रवाई में ईरानी हमलावरों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने जल्द समझौता नहीं किया तो अमेरिका और कड़ी कार्रवाई करेगा।

    ईरान ने अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप
    ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम उल्लंघन और तेल टैंकरों पर हमला करने का आरोप लगाया है। ईरानी सेना के अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज जलमार्ग और फुजैराह के पास जहाजों को निशाना बनाया, जिसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य जहाजों पर जवाबी हमला किया। ईरान ने दावा किया कि उसकी जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही तेहरान ने साफ कहा कि किसी भी हमले का “बिना हिचकिचाहट करारा जवाब” दिया जाएगा।

    खाड़ी क्षेत्र से 5 भारतीयों की सुरक्षित वापसी
    इस बीच लेबनान स्थित भारतीय दूतावास ने खाड़ी क्षेत्र में फंसे पांच भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया है। दूतावास ने लेबनानी प्रशासन के सहयोग के लिए आभार जताया है।पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच दुनिया की नजर अब अमेरिका, ईरान और इस्राइल की अगली चाल पर टिकी हुई है।

  • ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी अदालत का बड़ा झटका, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बढ़ी

    ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी अदालत का बड़ा झटका, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बढ़ी


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका की संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ को गैर-कानूनी बताते हुए रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद दुनिया भर में अमेरिका की व्यापार नीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (BTA) पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

    अदालत ने क्यों रद्द किए टैरिफ?
    अमेरिकी संघीय अदालत ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत मिली सीमित शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। अदालत के मुताबिक, राष्ट्रपति को इस तरह व्यापक वैश्विक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं था। ट्रंप ने फरवरी में 150 दिनों के लिए 10% टैरिफ लागू किए थे, जिन्हें उन्होंने अमेरिकी उद्योगों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया था। लेकिन अदालत ने इन्हें कानून के दायरे से बाहर माना।

    भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?
    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की व्यापार नीति में लगातार हो रहे कानूनी बदलाव भारत के लिए चिंता का विषय हैं। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन मौजूदा हालात में इस समझौते पर जल्दबाजी भारत के लिए जोखिम भरी हो सकती है।

    ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का मानना है कि जब तक अमेरिका अपनी व्यापार नीति को स्थिर और भरोसेमंद नहीं बनाता, तब तक भारत को किसी बड़े व्यापारिक समझौते में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।

    अमेरिका क्या चाहता है?
    विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका चाहता है कि भारत अपने आयात शुल्क कम करे या खत्म करे, जबकि खुद अमेरिका अपने “मोस्ट फेवर्ड नेशन” (MFN) टैरिफ में बड़ी कटौती करने को तैयार नहीं दिख रहा। ऐसे में भारत को व्यापारिक संतुलन बनाए रखने में सावधानी बरतनी होगी।

    क्या पूरी दुनिया पर तुरंत असर पड़ेगा?
    फिलहाल अदालत का फैसला केवल उन पक्षों पर लागू हुआ है जिन्होंने यह मामला दायर किया था। हालांकि माना जा रहा है कि इस फैसले का असर आगे चलकर अमेरिका की पूरी व्यापार नीति पर पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन अब फैसले के खिलाफ अपील की तैयारी कर सकता है। साथ ही धारा 301 और धारा 232 जैसे अन्य सख्त कानूनों के जरिए व्यापारिक दबाव बढ़ाने की कोशिश भी की जा सकती है।

    WTO और वैश्विक व्यापार को राहत
    विश्व व्यापार संगठन (WTO) से जुड़े विशेषज्ञों ने अदालत के फैसले को वैश्विक व्यापार नियमों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। उनका कहना है कि इससे अमेरिका की व्यापार प्रणाली फिर पुराने MFN ढांचे की ओर लौट सकती है।

    भारत के लिए क्या है रणनीति?
    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत को सतर्क रणनीति अपनानी चाहिए। अमेरिका की घरेलू व्यापार नीतियों में स्थिरता आने तक किसी दीर्घकालिक समझौते से बचना भारत के हित में हो सकता है। कई अन्य देश भी अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक समझौतों पर दोबारा विचार कर रहे हैं।

  • वेस्ट एशिया में तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ईरान विवाद जल्द होगा खत्म; परमाणु मुद्दे पर अमेरिका का सख्त रुख

    वेस्ट एशिया में तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ईरान विवाद जल्द होगा खत्म; परमाणु मुद्दे पर अमेरिका का सख्त रुख



    नई दिल्ली। 28 फरवरी से जारी संघर्ष के बीच क्षेत्र में हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं, हालांकि युद्धविराम के प्रयासों और अमेरिका-ईरान बातचीत की कोशिशों ने कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान विवाद जल्द सुलझ सकता है।

    ट्रंप का दावा: जल्द खत्म होगा विवाद
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने अपने समर्थकों से बातचीत में कहा कि ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति जल्द खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है और इसी वजह से कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

    ट्रंप ने अपनी नीति का बचाव करते हुए कहा कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है और अधिकतर लोग इसे सही मानते हैं।

    क्षेत्र में लगातार हिंसा जारी
    हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं

    दक्षिणी तेहरान में अमेरिकी-इस्राइली हमलों में 12 लोगों की मौत

    लेबनान में पिछले 24 घंटों में 33 लोगों की मौत, जिनमें एक किशोर भी शामिल

    लेबनान से उत्तरी इस्राइल पर रॉकेट हमले में 1 व्यक्ति की मौत और 2 घायल

    ईरानी हमले में बहरीन में मोरक्को के सैनिक की मौत और कई घायल

    ईरान का पलटवार और बयान
    ईरान की संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उन्हें अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान वैश्विक वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने के लिए दिए जा रहे हैं।उन्होंने अमेरिकी सैन्य अभियानों पर तंज कसते हुए इन्हें “ऑपरेशन ट्रस्ट मी ब्रो” और “ऑपरेशन फॉक्सियोस” कहा और कहा कि ये रणनीतियां विफल साबित हो रही हैं।


    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जर्मनी के राष्ट्रपति के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें अमेरिका-इस्राइल की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया गया था।

    वेस्ट एशिया में हालात अभी भी विस्फोटक बने हुए हैं। एक तरफ सैन्य टकराव और जवाबी हमले जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदें भी जिंदा हैं, जिससे आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव संभव माना जा रहा है।

  • होर्मुज में हमला, दुनिया में हड़कंप! फ्रांसीसी जहाज बना निशाना, ट्रंप ने अचानक रोका ऑपरेशन,क्या बढ़ने वाला है बड़ा युद्ध?

    होर्मुज में हमला, दुनिया में हड़कंप! फ्रांसीसी जहाज बना निशाना, ट्रंप ने अचानक रोका ऑपरेशन,क्या बढ़ने वाला है बड़ा युद्ध?



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक समुद्री व्यापार को गहरे संकट में डाल दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात उस समय और बिगड़ गए, जब फ्रांस की शिपिंग कंपनी CMA CGM के एक कार्गो जहाज पर हमला कर दिया गया। बताया जा रहा है कि ‘सैन एंटोनियो’ नाम का यह जहाज जब होर्मुज से गुजर रहा था, तभी उस पर मिसाइल या ड्रोन से हमला हुआ, जिसमें कई क्रू मेंबर घायल हो गए। हालांकि कंपनी ने पुष्टि की है कि सभी घायलों को सुरक्षित निकालकर इलाज के लिए भेज दिया गया है।

    इस हमले के बाद क्षेत्र में पहले से जारी तनाव और गहरा गया है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, जहां से हर दिन सैकड़ों जहाज गुजरते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में यह संख्या बुरी तरह प्रभावित हुई है।

    इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा फैसला लेते हुए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ ऑपरेशन को अचानक बंद कर दिया। यह ऑपरेशन होर्मुज में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन दो दिनों में महज तीन जहाजों को ही सुरक्षित निकाल पाने के बाद इसे रोक दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऑपरेशन को रोकने के पीछे क्षेत्रीय दबाव और बढ़ते सैन्य जोखिम बड़ी वजह माने जा रहे हैं।

    संयुक्त राष्ट्र में भी इस संकट को लेकर हलचल तेज हो गई है। अमेरिका ने सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश कर ईरान से हमले रोकने, समुद्री मार्ग सुरक्षित रखने और अवरोध हटाने की मांग की है। वहीं, चीन ने भी दोनों देशों से तुरंत तनाव कम करने और युद्ध जैसे हालात खत्म करने की अपील की है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच खाड़ी क्षेत्र में हमलों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा। ब्रिटेन की समुद्री एजेंसी के अनुसार, हाल के महीनों में इस क्षेत्र में 40 से ज्यादा घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 26 सीधे हमले शामिल हैं। इसके अलावा संदिग्ध गतिविधियां और जहाजों के अपहरण की घटनाएं भी सामने आई हैं।

    इस तनाव का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। तेल सप्लाई प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है, जबकि हजारों नाविक समुद्र में फंसे हुए हैं। अनुमान है कि इस इलाके में 1500 से ज्यादा जहाज और हजारों क्रू मेंबर अभी भी जोखिम के बीच मौजूद हैं।

    कुल मिलाकर, होर्मुज में बढ़ता टकराव अब सिर्फ एक क्षेत्रीय संकट नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। अब नजर इस बात पर है कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम कर पाएंगे या हालात और बिगड़ेंगे

  • अमेरिका पर बढ़ रहा कर्ज, जीडीपी से ज्यादा हुआ राष्ट्रीय ऋण, डोनाल्ड ट्रंप के लिए बनी बड़ी चुनौती

    अमेरिका पर बढ़ रहा कर्ज, जीडीपी से ज्यादा हुआ राष्ट्रीय ऋण, डोनाल्ड ट्रंप के लिए बनी बड़ी चुनौती



    नई दिल्ली। अमेरिका में आर्थिक संकट की चिंता गहराती जा रही है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समय से जुड़ी चर्चाओं के बीच अब सबसे बड़ा मुद्दा देश पर बढ़ता कर्ज है, जो अब देश की जीडीपी से भी अधिक हो चुका है। यह स्थिति द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार देखने को मिली है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    कमेटी फॉर ए रिस्पॉन्सिबल फेडरल बजट की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल के अंत तक अमेरिका पर कुल कर्ज लगभग 31.27 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि इसी अवधि में देश की जीडीपी करीब 31.22 ट्रिलियन डॉलर रही। यानी कर्ज ने आर्थिक उत्पादन को पीछे छोड़ दिया है।

    ताजा आंकड़ों के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज 2026 में बढ़कर लगभग 39.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह स्थिति 1940 के दशक के बाद पहली बार बनी है, जब युद्धकालीन खर्चों के कारण कर्ज जीडीपी से अधिक हो गया था।

    कर्ज बढ़ने की वजह क्या है?
    अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मौजूदा कर्ज वृद्धि के पीछे कई कारण हैं टैक्स कटौती, बढ़ता ब्याज भुगतान, और सामाजिक सुरक्षा व स्वास्थ्य योजनाओं जैसे मेडिकेयर और सोशल सिक्योरिटी पर बढ़ता खर्च। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अब रक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर जितना खर्च करती है, उससे अधिक पैसा सिर्फ कर्ज के ब्याज भुगतान में जा रहा है। अनुमान है कि नेट ब्याज भुगतान ही सालाना 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक पहुंच चुका है।

    तेजी से बढ़ता कर्ज
    आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में अमेरिकी कर्ज लगभग दोगुना हो गया है। 2017 में यह करीब 20.2 ट्रिलियन डॉलर था, जो अब 39 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है। 1990 की तुलना में यह वृद्धि कई गुना अधिक है। कांग्रेस बजट कार्यालय के अनुमान के अनुसार, अगर यही रफ्तार बनी रही तो 2036 तक अमेरिका का कुल कर्ज 53 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

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    आर्थिक खतरे की आशंका
    विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ता कर्ज अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है। इससे ब्याज दरों में वृद्धि, निवेशकों का भरोसा कमजोर होना और देश की क्रेडिट रेटिंग में गिरावट जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा, सरकार पर बढ़ते कर्ज का दबाव आम नागरिकों की जीवन-लागत को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे महंगाई और आर्थिक अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
  • ईरान-अमेरिका टकराव पर सस्पेंस गहराया: हमले के दावे पर नहीं लगी मुहर, दुनिया की नजरें खाड़ी पर टिकीं

    ईरान-अमेरिका टकराव पर सस्पेंस गहराया: हमले के दावे पर नहीं लगी मुहर, दुनिया की नजरें खाड़ी पर टिकीं


    नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच समुद्री टकराव को लेकर बड़ा सस्पेंस खड़ा हो गया है। ईरान ने जहां रणनीतिक जलमार्ग में कार्रवाई का दावा किया है, वहीं अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होने की बात कही है। इससे पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए हैं और हालात अब भी धुंधले बने हुए हैं।

    सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह साफ नहीं हो पा रहा कि जमीनी स्तर पर वास्तव में क्या हुआ है और दोनों देशों के बीच टकराव किस स्तर तक पहुंच चुका है।

    इससे पहले ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिकी सेना इस रणनीतिक जलमार्ग में प्रवेश करती है तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। यह बयान उस वक्त आया था जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए अभियान शुरू करने की घोषणा की थी।

    मौजूदा हालात में एक ओर ईरान के सख्त तेवर हैं, तो दूसरी ओर अमेरिका की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। दावों और हकीकत के बीच की दूरी ने पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा रहस्यमयी बना दिया है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस संवेदनशील टकराव पर टिकी हैं, जहां हर नया अपडेट हालात को और गंभीर बना सकता है।

  • होर्मुज में भड़का टकराव! ईरान का अमेरिकी युद्धपोत पर मिसाइल हमले का दावा, सीजफायर टूटने के संकेत

    होर्मुज में भड़का टकराव! ईरान का अमेरिकी युद्धपोत पर मिसाइल हमले का दावा, सीजफायर टूटने के संकेत


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के एक युद्धपोत पर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास मिसाइल हमला किया है। ईरान की सरकारी एजेंसी फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जास्क के नजदीक अमेरिकी जहाज पर दो मिसाइलें दागी गईं, क्योंकि उसने रिवोल्यूशनरी गार्ड की चेतावनियों को नजरअंदाज किया था।

    इस घटनाक्रम के बाद यह माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच जारी युद्धविराम अब खत्म हो चुका है और हालात फिर से युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ईरानी युद्धपोतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दे चुके हैं।

    यह कथित हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” मिशन शुरू करने का ऐलान किया है। CENTCOM के मुताबिक इस ऑपरेशन में 15,000 सैनिक, 100 से ज्यादा एयर और सी प्लेटफॉर्म, युद्धपोत और ड्रोन शामिल हैं, जिनका मकसद होर्मुज में फंसे जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना है।

    अमेरिका ने समुद्री मार्गों के पास एक “उन्नत सुरक्षा क्षेत्र” भी बनाया है और जहाजों को ओमान के अधिकारियों के साथ समन्वय करने की सलाह दी है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि सामान्य रूट के आसपास से गुजरना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि वहां बारूदी सुरंगों की आशंका है।

    वहीं यूरोप ने इस मिशन से दूरी बना ली है। इमैनुएल मैक्रों ने साफ कहा कि फ्रांस “प्रोजेक्ट फ्रीडम” में शामिल नहीं होगा और वह बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। उन्होंने इसे अस्पष्ट योजना बताते हुए यूरोप के अलग सुरक्षा समाधान पर जोर दिया।

    कुल मिलाकर, होर्मुज जैसे रणनीतिक मार्ग पर बढ़ता तनाव वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सप्लाई और समुद्री व्यापार के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अगर हालात नहीं सुधरे, तो यह टकराव बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।

  • होर्मुज पर टकराव तेज! अमेरिका की एंट्री पर ईरान का सीधा वार्निंग, ‘घुसे तो हमला होगा’

    होर्मुज पर टकराव तेज! अमेरिका की एंट्री पर ईरान का सीधा वार्निंग, ‘घुसे तो हमला होगा’


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की सेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में घुसने की कोशिश करती है, तो उस पर सीधा हमला किया जाएगा।

    ईरान की संयुक्त सैन्य कमान खातम अल-अंबिया मुख्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह जलमार्ग उसकी निगरानी में है और किसी भी विदेशी सैन्य दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खासतौर पर अमेरिकी सेना को “आक्रामक ताकत” बताते हुए कड़ा संदेश दिया गया है।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नाम के मिशन का ऐलान किया है। इसके तहत अमेरिका होर्मुज में फंसे अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए सैन्य अभियान शुरू करने जा रहा है।

    अमेरिका का दावा है कि कई देशों ने मदद मांगी है, क्योंकि उनके जहाज इस अहम समुद्री रास्ते में फंसे हुए हैं। ट्रंप के मुताबिक, इन जहाजों का मौजूदा संघर्ष से कोई लेना-देना नहीं है और वे “निर्दोष” हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालना जरूरी है।

    CENTCOM के अनुसार 4 मई से शुरू होने वाले इस ऑपरेशन में गाइडेड मिसाइल विध्वंसक जहाज, 100 से ज्यादा विमान, ड्रोन और करीब 15,000 सैनिक शामिल होंगे। इसका मकसद व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित समुद्री रास्ता सुनिश्चित करना है।

    हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि इस तरह की किसी भी सैन्य गतिविधि को वह अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानेगा। ऐसे में दोनों देशों के बीच सीधा टकराव बढ़ने की आशंका और गहरा गई है।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बड़े संकट का संकेत दे रहा है।