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  • हरियाणा के 60 साल पूरे होने पर सोनीपत में वैश्विक विचारों का नया मंच तैयार करेगी जिंदल यूनिवर्सिटी

    हरियाणा के 60 साल पूरे होने पर सोनीपत में वैश्विक विचारों का नया मंच तैयार करेगी जिंदल यूनिवर्सिटी

    नई दिल्ली ।हरियाणा के गठन की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर राज्य में शिक्षा, नवाचार और वैश्विक विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल की घोषणा की गई है। ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी जनवरी 2027 में अपने पहले वर्ल्ड आइडियाज फोरम का आयोजन करेगी। यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 23 से 25 जनवरी 2027 तक सोनीपत स्थित विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित होगा। इसका विषय ‘वियर द वर्ल्ड आइडिया मीट’ रखा गया है, जिसका उद्देश्य दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले विचारों और दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाना है।

    इस सम्मेलन में सार्वजनिक जीवन, विश्वविद्यालयों, उद्योग, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला और नागरिक समाज से जुड़े प्रमुख लोगों के शामिल होने की योजना है। आयोजन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे और वर्तमान समय की प्रमुख चुनौतियों के समाधान पर चर्चा करेंगे। इसे वार्षिक वैश्विक सम्मेलन के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है, ताकि प्रत्येक वर्ष नए विषयों और विचारों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय संवाद को आगे बढ़ाया जा सके।

    हरियाणा का गठन 1 नवंबर 1966 को हुआ था। राज्य के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह पहल उसकी विकास यात्रा को भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने का प्रयास है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य हरियाणा को शिक्षा, शोध, रचनात्मकता और अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संवाद के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने में योगदान देना है। इसके साथ ही सोनीपत को वैश्विक स्तर पर विचारों और ज्ञान के आदान-प्रदान के प्रमुख स्थान के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है।

    विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलाधिपति एवं संरक्षक नवीन जिंदल ने कहा कि हरियाणा की छह दशक की यात्रा उसके लोगों की उद्यमशीलता, दृढ़ संकल्प और आकांक्षाओं को दर्शाती है। कृषि, उद्योग और खेल के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियां उसे शिक्षा, नवाचार और ज्ञान के वैश्विक केंद्र के रूप में आगे बढ़ने का आधार प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना के पीछे भी यही सोच थी कि हरियाणा में विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्थान विकसित हों और उनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ाव मजबूत हो।

    उन्होंने बताया कि वर्ल्ड आइडियाज फोरम के माध्यम से दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख आवाजों को सोनीपत तक लाने और युवाओं को भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विमर्श का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जाएगा।

    फोरम के पहले संस्करण में शासन व्यवस्था, आर्थिक विकास, शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, सतत विकास, संस्कृति और मानव कल्याण जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसके अलावा तकनीकी बदलावों के प्रभाव, सार्वजनिक संस्थाओं की मजबूती, रोजगार और अवसरों के विस्तार तथा आने वाली पीढ़ियों की तैयारी जैसे मुद्दे भी विचार-विमर्श का हिस्सा बनेंगे।

    कार्यक्रम में मुख्य भाषण, नेतृत्व संवाद, सार्वजनिक व्याख्यान, साहित्यिक चर्चाएं, पुस्तक विमोचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित करने की योजना है। इसके साथ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रदर्शनी, छात्र वाद-विवाद, नीति आधारित सिमुलेशन तथा कला, संगीत, रंगमंच और डिजाइन से संबंधित प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी। आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ विद्यार्थियों और युवा प्रतिभाओं की भागीदारी पर विशेष जोर रहेगा।

    विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति प्रोफेसर सी. राज कुमार के अनुसार, इस मंच का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां लोग स्वतंत्र रूप से विचार रख सकें, एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझें और अलग-अलग विषयों के बीच संवाद स्थापित कर सकें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज और भविष्य से जुड़े सवालों पर सार्थक चर्चा के अवसर भी उपलब्ध कराने चाहिए।

    फोरम को दीर्घकालिक संस्थागत पहल के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसके तहत वर्ल्ड आइडियाज लेक्चर, वर्ल्ड आइडियाज अवॉर्ड, वर्ल्ड आइडियाज बुक प्राइज और ग्लोबल यंग आइडियाज फेलोशिप जैसी योजनाएं प्रस्तावित हैं। इसके अलावा इंडिया आइडियाज लेक्चर, फ्यूचर लीडर्स डायलॉग और ग्लोबल यूनिवर्सिटीज राउंडटेबल के माध्यम से सार्वजनिक नेतृत्व, उच्च शिक्षा और युवा प्रतिभाओं को जोड़ने की योजना है।

    इस पहल के तहत वर्ल्ड आइडियाज डिक्लेरेशन, ग्लोबल फ्यूचर्स रिपोर्ट और वर्ल्ड आइडियाज इंडेक्स भी प्रस्तावित हैं। इनके जरिए सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं को व्यापक सार्वजनिक विमर्श और भविष्य की साझेदारियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

    जनवरी 2027 में होने वाला पहला सम्मेलन हरियाणा की 60वीं वर्षगांठ और वर्ष 2047 तक भारत के विकास लक्ष्यों के बीच भविष्य की दिशा पर चर्चा का अवसर बनेगा। आयोजन से सोनीपत में अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक और सांस्कृतिक संपर्क बढ़ने तथा नई संस्थागत साझेदारियों के अवसर बनने की उम्मीद है।

  • शिवपुरी में बीआरसीसी और एपीसी की नियुक्तियों पर फिर लगी रोक, राज्य शिक्षा केंद्र ने जारी किए नए निर्देश

    शिवपुरी में बीआरसीसी और एपीसी की नियुक्तियों पर फिर लगी रोक, राज्य शिक्षा केंद्र ने जारी किए नए निर्देश

    मध्य प्रदेश । के शिवपुरी जिले में बीआरसीसी और एपीसी पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। 30 अक्टूबर को जिला पंचायत सभागार में प्रस्तावित काउंसलिंग के जरिए 12 रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जानी थीं, लेकिन राज्य शिक्षा केंद्र से मिले नए निर्देशों के बाद फिलहाल इस प्रक्रिया पर रोक लग गई है। निर्देशों के अनुसार, संबंधित न्यायालयीन प्रकरणों का निराकरण होने तक नियुक्ति की आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी। इससे नियुक्ति की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को फिलहाल इंतजार करना पड़ेगा।

    जिला परियोजना समन्वयक दफेदार सिंह सिकरवार के अनुसार, शिवपुरी में नियुक्ति प्रक्रिया के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। निर्धारित कार्यक्रम के तहत 30 अक्टूबर को जिला पंचायत सभागार में काउंसलिंग होनी थी। इसके बाद परीक्षा के परिणाम के आधार पर रिक्त पदों पर चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी। हालांकि, राज्य स्तर से मिले नए दिशा-निर्देशों के कारण तय कार्यक्रम को रोकना पड़ा है।

    यह मामला सहायक परियोजना समन्वयक यानी एपीसी और बीआरसीसी पदों पर नियोजन से जुड़ा है। राज्य शिक्षा केंद्र, भोपाल ने न्यायालय के निर्णय और उसके अनुपालन को लेकर कलेक्टर को पत्र जारी किया है। इसमें उच्च प्रभार और कूलिंग पीरियड से संबंधित प्रावधानों के तहत आवेदकों को परीक्षा में शामिल करने के न्यायालयीन निर्देशों का उल्लेख किया गया है।

    इन निर्देशों के अनुपालन में शिवपुरी जिले में 16 याचिकाकर्ताओं को परीक्षा में शामिल किया गया था। योजना के अनुसार, परीक्षा परिणाम के आधार पर 30 अक्टूबर को होने वाली काउंसलिंग के बाद नियुक्ति से संबंधित अगली प्रक्रिया पूरी की जानी थी। लेकिन नियुक्तियों से जुड़े न्यायालयीन मामलों के चलते अब पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि काउंसलिंग की अगली तारीख कब निर्धारित की जाएगी।

    राज्य शिक्षा केंद्र ने अपने नए निर्देशों में न्यायालयीन प्रकरणों से निपटने के लिए जिला स्तर पर जिम्मेदारी तय करने को कहा है। जिन जिलों में नियुक्ति से जुड़े मामले न्यायालय में लंबित हैं, वहां संबंधित याचिका के अनुसार एक प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया जाना है। इस अधिकारी को प्रकरण से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय में जवाबदावा प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

    निर्देशों में यह भी कहा गया है कि जवाबदावा तत्काल प्रस्तुत किया जाए और न्यायालय से मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया जाए। इसका उद्देश्य लंबित प्रकरणों में न्यायालय के समक्ष संबंधित पक्ष का जवाब समय पर प्रस्तुत करना है। राज्य शिक्षा केंद्र ने उन जिलों के लिए भी स्थिति स्पष्ट की है, जहां इस प्रकार के न्यायालयीन प्रकरण नहीं हैं। ऐसे जिलों में 2 सितंबर 2026 को जारी पूर्व पत्र के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जानी है।

    ये निर्देश राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह की ओर से 29 अक्टूबर को जारी किए गए। इसके बाद शिवपुरी में नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय न्यायालयीन मामलों से संबंधित निर्देशों के पालन की तैयारी शुरू कर दी गई है।

    दफेदार सिंह सिकरवार ने बताया कि नए आदेश के बाद नियुक्ति प्रक्रिया कब शुरू हो सकेगी, इसका पता आगे की स्थिति स्पष्ट होने पर ही चलेगा। फिलहाल जिला स्तर पर प्रभारी अधिकारी नियुक्त करने और निर्देशों के अनुपालन की तैयारी की जा रही है। ऐसे में 12 पदों पर चयन की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को काउंसलिंग और नियुक्ति के लिए नई तारीख घोषित होने तक इंतजार करना होगा।

  • लेक्चरर से IAS बनने तक सौम्या मिश्रा का सफर, तीन असफलताओं के बाद चौथे प्रयास में हासिल की 18वीं रैंक

    लेक्चरर से IAS बनने तक सौम्या मिश्रा का सफर, तीन असफलताओं के बाद चौथे प्रयास में हासिल की 18वीं रैंक

    नई दिल्ली । सफलता की राह में आने वाली असफलताएं कई बार इंसान के धैर्य और संकल्प की परीक्षा लेती हैं। मध्य प्रदेश के सिंगरौली में पदस्थ IAS अधिकारी सौम्या मिश्रा की कहानी इसी बात का उदाहरण है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कॉलेज में लेक्चरर के रूप में की थी, लेकिन उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में पहुंचना था। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत की और शुरुआती तीन प्रयासों में असफल रहने के बाद भी तैयारी जारी रखी। आखिरकार चौथे प्रयास में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 18वीं रैंक हासिल की।

    सौम्या मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की रहने वाली हैं। शिक्षा के क्षेत्र में लेक्चरर के रूप में काम करने के दौरान उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की दिशा में कदम बढ़ाया। उनका सफर बताता है कि करियर की शुरुआत किसी एक क्षेत्र से होने के बावजूद व्यक्ति अपने लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ सकता है। इसके लिए निरंतर प्रयास और कठिन परिस्थितियों में भी तैयारी जारी रखना महत्वपूर्ण होता है।

    सौम्या ने वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी UPPSC की परीक्षा पास की थी। इस परीक्षा में उन्होंने दूसरा स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि उनके लिए महत्वपूर्ण पड़ाव रही। हालांकि, उनका प्रयास यहीं तक सीमित नहीं रहा। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की, जिसे देश की प्रमुख और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में गिना जाता है।

    UPSC की तैयारी के दौरान सौम्या को लगातार तीन प्रयासों में सफलता नहीं मिली। किसी भी अभ्यर्थी के लिए बार-बार असफल होना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर तब जब परीक्षा की तैयारी में लंबा समय और निरंतर मेहनत लगती हो। इसके बावजूद सौम्या ने अपने लक्ष्य से दूरी नहीं बनाई। उन्होंने चौथे प्रयास में परीक्षा पास करते हुए ऑल इंडिया रैंक 18 हासिल की। इस उपलब्धि ने उन्हें प्रशासनिक सेवा तक पहुंचाया और उनकी मेहनत को एक नई पहचान मिली।

    वर्तमान में सौम्या मिश्रा मध्य प्रदेश के सिंगरौली में पदस्थ IAS अधिकारी हैं। उनकी यात्रा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो शुरुआती नाकामी के बाद अपने लक्ष्य को लेकर असमंजस में पड़ जाते हैं। उनकी उपलब्धियों से यह स्पष्ट होता है कि असफलता के बाद तैयारी जारी रखना और अपने प्रयासों में सुधार करते रहना सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    सौम्या मिश्रा की कहानी की एक और खास बात यह है कि उनकी छोटी बहन सुमेघा मिश्रा ने भी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की है। सुमेघा ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 253वीं रैंक प्राप्त की। दोनों बहनों की उपलब्धियां परिवार के लिए गौरव का विषय हैं। एक ओर सौम्या ने कई प्रयासों के बाद देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में 18वीं रैंक हासिल की, वहीं सुमेघा ने भी अपनी मेहनत से परीक्षा में स्थान बनाया।

    दोनों बहनों की सफलता यह दिखाती है कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए नियमित मेहनत, धैर्य और निरंतर प्रयास का महत्व बना रहता है। सौम्या का लेक्चरर से IAS अधिकारी बनने तक का सफर खास तौर पर उन युवाओं को प्रेरित कर सकता है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार प्रयास कर रहे हैं। उनकी कहानी का मुख्य संदेश यही है कि शुरुआती असफलताओं को अंतिम परिणाम मानने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

  • यूपी कैबिनेट के 22 प्रस्तावों को मंजूरी, मैनपुरी सैनिक स्कूल को मुफ्त जमीन और शिक्षा कर्मचारियों को कैशलेस इलाज

    यूपी कैबिनेट के 22 प्रस्तावों को मंजूरी, मैनपुरी सैनिक स्कूल को मुफ्त जमीन और शिक्षा कर्मचारियों को कैशलेस इलाज

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों में शिक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों के स्वास्थ्य और प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने से जुड़े विषय शामिल हैं। बैठक में मैनपुरी स्थित सैनिक स्कूल के लिए 9.524 हेक्टेयर जमीन मुफ्त हस्तांतरित करने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। इसके अलावा माध्यमिक, संस्कृत और बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने से संबंधित प्रस्ताव भी मंजूर किए गए। प्रदेश की ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी जीसीसी नीति-2024 के तहत उच्चस्तरीय समिति की संस्तुतियों को भी स्वीकृति दी गई।

    मैनपुरी सैनिक स्कूल को 9.524 हेक्टेयर जमीन मुफ्त मिलेगी
    कैबिनेट के फैसले के अनुसार, मैनपुरी स्थित सैनिक स्कूल को 9.524 हेक्टेयर भूमि निःशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस निर्णय के तहत स्कूल के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। सैनिक स्कूलों का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ अनुशासन और रक्षा सेवाओं में करियर बनाने के लिए तैयार करना है। मैनपुरी के सैनिक स्कूल को भूमि हस्तांतरित करने का फैसला इसी संस्थान से संबंधित व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा

    कैबिनेट बैठक में शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के स्वास्थ्य से जुड़ा प्रस्ताव भी मंजूर किया गया। इसके तहत माध्यमिक और संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का प्रावधान शामिल है। इस फैसले से संबंधित पात्र कर्मचारियों को इलाज के दौरान निर्धारित व्यवस्था के तहत कैशलेस सुविधा मिल सकेगी।

    बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रितों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा के दायरे में लाने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इससे कर्मचारियों के परिवारों को भी इस व्यवस्था का लाभ मिल सकेगा। कैशलेस इलाज का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को चिकित्सा खर्च का भुगतान सीधे करने की जरूरत कम करना है। हालांकि, सुविधा के वास्तविक लाभ और उसके इस्तेमाल से संबंधित नियमों का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

    जीसीसी नीति-2024 के प्रस्ताव को मंजूरी
    उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी जीसीसी नीति-2024 के तहत उच्चस्तरीय समिति की संस्तुतियों को मंजूरी देने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर ऐसी इकाइयां होती हैं, जहां कंपनियां तकनीक, वित्त, शोध और दूसरी व्यावसायिक सेवाओं से जुड़े काम करती हैं। इन केंद्रों के माध्यम से कंपनियां अपने विभिन्न व्यावसायिक कार्यों का संचालन और प्रबंधन करती हैं।

    प्रदेश की जीसीसी नीति निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने से संबंधित है। उच्चस्तरीय समिति की संस्तुतियों को मंजूरी मिलने के बाद नीति के तहत संबंधित प्रस्तावों पर आगे की कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, बैठक में स्वीकृत संस्तुतियों के विशिष्ट विवरण और उनसे जुड़ी परियोजनाओं की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

    शिक्षा, स्वास्थ्य और निवेश से जुड़े फैसले

    कैबिनेट बैठक में कुल 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें सैनिक स्कूल मैनपुरी के लिए भूमि हस्तांतरण, शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा तथा जीसीसी नीति-2024 के तहत उच्चस्तरीय समिति की संस्तुतियां प्रमुख रहीं।

    इन निर्णयों के जरिए सरकार ने शिक्षा संस्थानों से जुड़ी भूमि व्यवस्था, कर्मचारियों के स्वास्थ्य लाभ और निवेश नीति से संबंधित विषयों पर स्वीकृति दी है। मंजूर किए गए प्रस्तावों के क्रियान्वयन और उनसे जुड़े लाभों की विस्तृत जानकारी संबंधित विभागों की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

  • शरद पूर्णिमा पर गौतम अदाणी ने अदाणी विद्या मंदिर के 14 पूर्व छात्रों से की मुलाकात, शिक्षा की ताकत पर दिया संदेश

    शरद पूर्णिमा पर गौतम अदाणी ने अदाणी विद्या मंदिर के 14 पूर्व छात्रों से की मुलाकात, शिक्षा की ताकत पर दिया संदेश

    नई दिल्ली । शरद पूर्णिमा के अवसर पर अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने अदाणी विद्या मंदिर के 14 पूर्व छात्रों से मुलाकात की। इन पूर्व छात्रों ने शिक्षा के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है। इनमें डॉक्टर, वकील, आईआईटी इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वैज्ञानिक, पुलिसकर्मी और मर्चेंट नेवी अधिकारी शामिल हैं। इस मुलाकात के दौरान अदाणी ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रतिभा को सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर युवा अपनी क्षमताओं को पहचानकर आगे बढ़ सकते हैं।

    गौतम अदाणी ने इस मुलाकात को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इन युवाओं की उपलब्धियां दिखाती हैं कि शिक्षा किस तरह जीवन में बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि जब प्रतिभाशाली बच्चों को अवसर मिलता है और शिक्षक उनके सपनों पर भरोसा करते हैं, तो वे अपने लिए नए रास्ते बना सकते हैं। उनके मुताबिक, इन पूर्व छात्रों की जीवन यात्राएं शिक्षा की ताकत और सही मार्गदर्शन के महत्व को सामने लाती हैं।

    अदाणी ने अपने संदेश में 14 युवाओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कहानियों की शुरुआत अदाणी विद्या मंदिर से हुई थी। अलग-अलग पेशों में काम कर रहे ये युवा इस बात का उदाहरण हैं कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अवसर मिलने पर विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने सभी पूर्व छात्रों पर गर्व जताया और उन्हें इसी तरह आगे बढ़ते रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

    अदाणी विद्या मंदिर की स्थापना आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। संस्थान का लक्ष्य बच्चों को सीखने, अपने सपने पूरे करने और अपनी क्षमताओं का विकास करने का अवसर देना है। यहां ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षा दी जाती है, जिनके परिवारों में कई बच्चे पहली बार स्कूल तक पहुंचते हैं।

    यह सह-शिक्षा संस्थान वंचित वर्गों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करता है। इसका उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि उनमें सामाजिक जागरूकता और भारतीय मूल्यों के प्रति समझ भी विकसित करना है। संस्थान बच्चों को बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक अवसर उपलब्ध कराने पर जोर देता है।

    गौतम अदाणी की पूर्व छात्रों से हुई मुलाकात ने शिक्षा के जरिए हासिल की गई उपलब्धियों को सामने रखा। डॉक्टरों, इंजीनियरों, वकीलों, वैज्ञानिकों और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में पहुंचे इन युवाओं की यात्रा इस बात को रेखांकित करती है कि शिक्षा विद्यार्थियों के लिए नए अवसर खोल सकती है। साथ ही, शिक्षकों का विश्वास और उचित मार्गदर्शन बच्चों को अपने लक्ष्यों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    अदाणी विद्या मंदिर का उद्देश्य वंचित बच्चों को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाना और उन्हें आर्थिक कठिनाइयों से आगे बढ़ने का अवसर देना है। संस्थान की पृष्ठभूमि और पूर्व छात्रों की उपलब्धियां इसी लक्ष्य से जुड़ी हैं। शरद पूर्णिमा पर आयोजित यह मुलाकात इन युवाओं की सफलता और शिक्षा के व्यापक प्रभाव को रेखांकित करने का अवसर बनी।

  • योगी आदित्यनाथ ने देवीपाटन मंदिर में कन्या पूजन कर बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन को राम राज्य का आधार बताया

    योगी आदित्यनाथ ने देवीपाटन मंदिर में कन्या पूजन कर बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन को राम राज्य का आधार बताया

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा और अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर बलरामपुर स्थित देवीपाटन मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने नवदुर्गा के स्वरूप में नौ कन्याओं का पूजन किया। कन्याओं को तिलक लगाने के साथ चुनरी ओढ़ाई गई। मंदिर परिसर में आयोजित ‘शिक्षा की उड़ान’ पहल के अंतर्गत मुख्यमंत्री ने स्कूली बच्चों को स्टडी टेबल, आशीर्वाद पत्र और स्टेशनरी किट वितरित कीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन देना राम राज्य की स्थापना का मूल आधार है।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले पांचवीं कक्षा तक पहुंचने से पहले ही हर पांचवीं बेटी स्कूल छोड़ देती थी। उस समय 60 से 70 प्रतिशत बच्चे नंगे पैर विद्यालय जाते थे। स्कूलों में शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। उन्होंने कहा कि सरकार ने कार्यभार संभालने के बाद बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, स्वच्छ पेयजल और गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन की व्यवस्था की।

    योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के माध्यम से प्रदेश के 1.60 करोड़ परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को हर साल दो जोड़ी यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर, स्कूल बैग और पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं। कार्यक्रम में शिक्षा और बालिकाओं के विकास से जुड़े प्रयासों पर भी जोर दिया गया। ‘शिक्षा की उड़ान’ के तहत बच्चों को अध्ययन के लिए आवश्यक सामग्री देकर उनकी पढ़ाई को प्रोत्साहित किया गया।

    महिला सशक्तिकरण के विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं में महिलाओं को संपत्ति का मालिकाना हक देने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मकानों की रजिस्ट्री तथा धनराशि परिवार की महिला मुखिया के नाम पर दी जा रही है। उन्होंने बताया कि एक करोड़ से अधिक परिवारों को वितरित की गई घरौनियों में भी महिलाओं को मालिकाना अधिकार मिला है। इसके अलावा उज्ज्वला योजना और तीन करोड़ से अधिक शौचालयों के निर्माण को महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े प्रयासों के रूप में प्रस्तुत किया।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों की विकास प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसके साथ ही विराट किसान मेले का शुभारंभ भी किया गया। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर की चाबियां और कीटनाशक छिड़काव करने वाले यंत्र वितरित किए गए। इन गतिविधियों के माध्यम से कृषि क्षेत्र से जुड़े उपकरणों और सुविधाओं को किसानों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया गया।

    मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को ट्रैक सूट देकर सम्मानित किया। वहीं, बेसिक विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को स्टेशनरी किट प्रदान की गईं। कार्यक्रम में देवीपाटन मंदिर के महंत मिथिलेश नाथ, विधायक कैलाश नाथ शुक्ला, पल्टूराम और रामप्रताप वर्मा सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर कन्या पूजन, बालिका शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, किसानों को उपकरणों के वितरण और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए।

  • मध्य प्रदेश के रतलाम में सरकारी स्कूल सुधारने वाले शिक्षक को मिला नोटिस, ग्रामीणों की मदद से बदली थी रूपनगर स्कूल की तस्वीर

    मध्य प्रदेश के रतलाम में सरकारी स्कूल सुधारने वाले शिक्षक को मिला नोटिस, ग्रामीणों की मदद से बदली थी रूपनगर स्कूल की तस्वीर

    मध्य प्रदेश। के रतलाम जिले के जावरा ब्लॉक स्थित रूपनगर सरकारी स्कूल में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए किए गए प्रयास अब चर्चा में हैं। स्कूल को आदर्श बनाने में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ और शिक्षक-पालक संघ ने ग्रामीणों की मदद से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्कूल में साफ-सफाई, हरियाली, बेहतर फर्नीचर, पानी का फिल्टर और कूलर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य बच्चों को सरकारी स्कूल में ही अच्छी शिक्षा और सुविधाएं देना था। हालांकि, स्कूल में हुए निर्माण और सुविधाओं को लेकर शिक्षक को कारण बताओ नोटिस मिलने के बाद मामला विवाद का विषय बन गया है।

    रूपनगर स्कूल को बेहतर बनाने के लिए शिक्षक और शिक्षक-पालक संघ ने स्थानीय लोगों के सहयोग से संसाधन जुटाए थे। स्कूल में रंग-रोगन, बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सुविधाओं से संबंधित काम कराए गए। फर्नीचर तथा अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था भी जनभागीदारी और शिक्षक के निजी खर्च से की गई थी। स्कूल का वातावरण बेहतर होने से गांव के बच्चों को सरकारी संस्थान में पढ़ाई करने के लिए सुविधाजनक माहौल मिला। इस पहल के बाद स्कूल को आदर्श विद्यालय के रूप में देखा जाने लगा था।

    मामले में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ को निर्माण कार्य और सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर कारण बताओ नोटिस मिलने की जानकारी सामने आई। नोटिस में पूछा गया कि स्कूल में रंग-रोगन, फर्नीचर, वाटर कूलर और अन्य कार्य किसकी अनुमति से कराए गए। बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सामग्री की व्यवस्था के लिए किस प्रशासनिक आदेश का सहारा लिया गया, इस पर भी सवाल किए गए। इसके अलावा, स्कूल में निशुल्क सेवाएं दे रहे तीन शिक्षकों की अनुमति से संबंधित जानकारी मांगे जाने की बात कही गई। इन सवालों के बीच यह मुद्दा उठ रहा है कि ग्रामीणों के सहयोग से स्कूल में किए गए सुधारों की प्रक्रिया को लेकर विभाग की क्या आपत्ति थी।

    राठौड़ का करीब दो महीने पहले जावरा क्षेत्र के रूपनगर स्कूल से सेमलिया के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में तबादला कर दिया गया था। अपने पसंदीदा शिक्षक का स्थानांतरण रुकवाने के लिए बच्चे और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उन्होंने शिक्षक का तबादला रोकने की मांग को लेकर विरोध भी किया, लेकिन स्थानांतरण नहीं रुका। इसके बाद रूपनगर स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या धीरे-धीरे कम होने की बात सामने आई। बताया गया है कि स्कूल की व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ा और पहले जैसी स्थिति बनाए रखने में कठिनाइयां सामने आने लगीं।

    रिटायर्ड नारकोटिक्स इंस्पेक्टर जगदीश यादव भी रूपनगर स्कूल में बच्चों को निशुल्क पढ़ाते थे। उनके अनुसार, शिक्षक को सम्मानित करने के बजाय नोटिस दिया जाना निराशाजनक है। उन्होंने स्कूल में शिक्षक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके काम को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए था। दूसरी ओर, बद्रीलाल राठौड़ ने बताया कि उन्होंने नोटिस का जवाब निर्धारित समय के भीतर दे दिया था। उनका कहना है कि स्कूल में कराए गए सभी काम ग्रामीणों और शिक्षक-पालक संघ की मदद से हुए थे।

    राठौड़ ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक-पालक संघ को स्कूल के विकास के लिए कई अधिकार प्राप्त हैं। उनके अनुसार, संघ नए प्रयोग करने, विकास की योजना बनाने और लोगों की मदद से फर्नीचर, खेल सामग्री तथा पढ़ाई से जुड़ी दूसरी आवश्यक चीजें जुटाने में भूमिका निभा सकता है। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी सिमरन सूर्यवंशी ने कहा कि शिक्षक को स्कूल का रिनोवेशन कराने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कार्यालय से जानकारी लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की बात कही थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्कूल में अब केवल दो शिक्षक पदस्थ हैं और विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज होने की बात कही गई है।
    नई दिल्ली ।

    मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के जावरा ब्लॉक स्थित रूपनगर सरकारी स्कूल में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए किए गए प्रयास अब चर्चा में हैं। स्कूल को आदर्श बनाने में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ और शिक्षक-पालक संघ ने ग्रामीणों की मदद से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्कूल में साफ-सफाई, हरियाली, बेहतर फर्नीचर, पानी का फिल्टर और कूलर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य बच्चों को सरकारी स्कूल में ही अच्छी शिक्षा और सुविधाएं देना था। हालांकि, स्कूल में हुए निर्माण और सुविधाओं को लेकर शिक्षक को कारण बताओ नोटिस मिलने के बाद मामला विवाद का विषय बन गया है।

    रूपनगर स्कूल को बेहतर बनाने के लिए शिक्षक और शिक्षक-पालक संघ ने स्थानीय लोगों के सहयोग से संसाधन जुटाए थे। स्कूल में रंग-रोगन, बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सुविधाओं से संबंधित काम कराए गए। फर्नीचर तथा अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था भी जनभागीदारी और शिक्षक के निजी खर्च से की गई थी। स्कूल का वातावरण बेहतर होने से गांव के बच्चों को सरकारी संस्थान में पढ़ाई करने के लिए सुविधाजनक माहौल मिला। इस पहल के बाद स्कूल को आदर्श विद्यालय के रूप में देखा जाने लगा था।

    मामले में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ को निर्माण कार्य और सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर कारण बताओ नोटिस मिलने की जानकारी सामने आई। नोटिस में पूछा गया कि स्कूल में रंग-रोगन, फर्नीचर, वाटर कूलर और अन्य कार्य किसकी अनुमति से कराए गए। बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सामग्री की व्यवस्था के लिए किस प्रशासनिक आदेश का सहारा लिया गया, इस पर भी सवाल किए गए। इसके अलावा, स्कूल में निशुल्क सेवाएं दे रहे तीन शिक्षकों की अनुमति से संबंधित जानकारी मांगे जाने की बात कही गई। इन सवालों के बीच यह मुद्दा उठ रहा है कि ग्रामीणों के सहयोग से स्कूल में किए गए सुधारों की प्रक्रिया को लेकर विभाग की क्या आपत्ति थी।

    राठौड़ का करीब दो महीने पहले जावरा क्षेत्र के रूपनगर स्कूल से सेमलिया के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में तबादला कर दिया गया था। अपने पसंदीदा शिक्षक का स्थानांतरण रुकवाने के लिए बच्चे और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उन्होंने शिक्षक का तबादला रोकने की मांग को लेकर विरोध भी किया, लेकिन स्थानांतरण नहीं रुका। इसके बाद रूपनगर स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या धीरे-धीरे कम होने की बात सामने आई। बताया गया है कि स्कूल की व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ा और पहले जैसी स्थिति बनाए रखने में कठिनाइयां सामने आने लगीं।

    रिटायर्ड नारकोटिक्स इंस्पेक्टर जगदीश यादव भी रूपनगर स्कूल में बच्चों को निशुल्क पढ़ाते थे। उनके अनुसार, शिक्षक को सम्मानित करने के बजाय नोटिस दिया जाना निराशाजनक है। उन्होंने स्कूल में शिक्षक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके काम को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए था। दूसरी ओर, बद्रीलाल राठौड़ ने बताया कि उन्होंने नोटिस का जवाब निर्धारित समय के भीतर दे दिया था। उनका कहना है कि स्कूल में कराए गए सभी काम ग्रामीणों और शिक्षक-पालक संघ की मदद से हुए थे।

    राठौड़ ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक-पालक संघ को स्कूल के विकास के लिए कई अधिकार प्राप्त हैं। उनके अनुसार, संघ नए प्रयोग करने, विकास की योजना बनाने और लोगों की मदद से फर्नीचर, खेल सामग्री तथा पढ़ाई से जुड़ी दूसरी आवश्यक चीजें जुटाने में भूमिका निभा सकता है। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी सिमरन सूर्यवंशी ने कहा कि शिक्षक को स्कूल का रिनोवेशन कराने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कार्यालय से जानकारी लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की बात कही थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्कूल में अब केवल दो शिक्षक पदस्थ हैं और विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज होने की बात कही गई है।

  • फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का उग्र प्रदर्शन, धमाके में 15 वर्षीय छात्र का हाथ उड़ा

    फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का उग्र प्रदर्शन, धमाके में 15 वर्षीय छात्र का हाथ उड़ा


    पेरिस। फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था की कथित खामियों के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। स्कूलों में बढ़ती छात्र संख्या, शिक्षकों की कमी, जर्जर इमारतों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प के बाद हालात हिंसक हो गए। रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान करीब 1,000 लोग घायल हुए हैं।

    धमाके में 15 वर्षीय छात्र गंभीर घायल

    रिपोर्ट्स के अनुसार, लेंस शहर में प्रदर्शन के दौरान हुए एक धमाके में 15 वर्षीय छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया। धमाके में उसका हाथ उड़ गया। उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसके जबड़े की भी सर्जरी करनी पड़ी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 5,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें करीब 90 प्रतिशत नाबालिग छात्र बताए जा रहे हैं।

    पुलिस कार्रवाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच मंगलवार को देशभर में आंदोलन के समर्थन में रैलियां आयोजित होने की उम्मीद है, जिनमें हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री ने छात्रों की मांगों को बताया जायज

    फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने देशव्यापी छात्र विरोध-प्रदर्शनों को शांत करने की कोशिश के तहत हड़ताल कर रहे स्कूली छात्रों की शिकायतों को “जायज” बताया है। ‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने मंत्रियों को छात्रों की पांच प्रमुख मांगों पर काम करने और अक्टूबर 2026 के अंत तक प्रस्ताव तैयार कर पेश करने का निर्देश दिया है।

    400 से 500 स्कूलों में कक्षाएं प्रभावित

    फ्रांस के शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी नहीं होने के कारण करीब 400 से 500 उच्च विद्यालयों में कक्षाएं पूर्ण या आंशिक रूप से निलंबित कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन शुरू होने के बाद से 24 विद्यालयों में आगजनी या तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं। हिंसा में शिक्षा विभाग के 85 कर्मचारी घायल हुए हैं। मंत्री ने मौजूदा स्थिति को अभूतपूर्व बताया।

    बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह पेरिस से शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब मोंटपेलियर, नांत और मार्सिले सहित कई प्रमुख शहरों तक फैल चुका है। छात्र शिक्षा के गिरते स्तर में सुधार के साथ स्कूलों में बेहतर बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

    फ्रांस के न्याय मंत्री गेराल्ड डारमानिन के अनुसार, देश के करीब 3,700 विद्यालयों में से लगभग 735 विद्यालय इस उग्र आंदोलन से किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए हैं।

    प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधाओं में सुधार पर जोर

    प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कहा कि सरकार छात्रों और शैक्षणिक कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए तेजी से कदम उठा रही है। इसमें कक्षाओं का सुचारू संचालन, स्कूलों में सुविधाओं का सुधार और विश्वविद्यालय प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दे शामिल हैं। सरकार विद्यालयों में तोड़फोड़ करने वालों से ही हुए नुकसान की भरपाई कराने संबंधी विधेयक को भी जल्द आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

  • फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का आंदोलन तेज, स्कूलों में भीड़ और शिक्षकों की कमी से सड़कों पर उतरे छात्र

    फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का आंदोलन तेज, स्कूलों में भीड़ और शिक्षकों की कमी से सड़कों पर उतरे छात्र

    नई दिल्ली ।फ्रांस की राजधानी पेरिस से शुरू हुआ शिक्षा व्यवस्था में सुधार का छात्र आंदोलन अब देश के कई हिस्सों तक फैल गया है। स्कूलों में बढ़ती छात्र संख्या, कक्षाओं की कमी, शिक्षकों की कमी और अन्य सुविधाओं के अभाव को लेकर छात्र सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान अलग-अलग स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच झड़प की घटनाएं भी सामने आई हैं। लेंस शहर में एक स्कूल के पास हुए धमाके में 15 साल का एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया। एक अन्य छात्र के सिर में आंसू गैस का गोला लगने और जबड़े में दो जगह फ्रैक्चर होने की जानकारी सामने आई है।

    आंदोलन से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, अब तक करीब 190 छात्र घायल हुए हैं, जबकि पुलिस ने लगभग 5 हजार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में करीब 85 प्रतिशत छात्र नाबालिग बताए गए हैं। छात्र संगठनों ने मंगलवार को होने वाले आंदोलन में अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील की थी। कई शिक्षक संगठनों ने भी प्रदर्शन को समर्थन देने का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उसके अनुपात में कक्षाएं, शिक्षक और दूसरी जरूरी सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई हैं।

    आंदोलन के बीच फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू ने छात्रों और शिक्षकों की समस्याओं को दूर करने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाने का ऐलान किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि हिंसक प्रदर्शन के मामले में सरकार की ओर से नरमी नहीं बरती जाएगी। शिक्षा मंत्री एडुआर जॉफ्रे ने बताया कि आंदोलन शुरू होने के बाद से 24 स्कूलों में बड़े स्तर पर तोड़फोड़ की गई और कुछ स्कूलों को आग के हवाले भी किया गया।

    इस आंदोलन की शुरुआत 21 सितंबर को पेरिस के एक स्कूल से हुई थी। छात्रों ने स्कूल में स्टाफ और संसाधनों की कमी को दूर करने की मांग उठाई थी। जब उनकी मांगें पूरी हुईं तो संबंधित छात्रों ने हड़ताल खत्म कर दी, लेकिन तब तक आंदोलन दूसरे इलाकों तक पहुंच चुका था। धीरे-धीरे इसका विस्तार कॉलेज और विश्वविद्यालयों तक भी हो गया। पिछले दो दशकों में फ्रांस के माध्यमिक स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ी है, जबकि उसके अनुपात में शिक्षकों की संख्या नहीं बढ़ सकी है। इस अवधि में छात्रों की संख्या करीब ढाई लाख बढ़ने की बात सामने आई है।

    फ्रांस में 2010 में करीब साढ़े 8 लाख बच्चों का जन्म हुआ था, जो 1980 के दशक के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा बताया गया है। बच्चों के जन्म में इस बढ़ोतरी के पीछे 30 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में बढ़ी प्रजनन दर को प्रमुख कारण बताया गया है। 2010 में जन्मे बच्चे अब करीब 15 से 16 साल के हो चुके हैं और हाई स्कूलों में पढ़ रहे हैं। छात्रों की संख्या बढ़ने के बावजूद स्कूलों में कक्षाओं, सुविधाओं और शिक्षकों की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ी।

    फ्रांस में जारी विरोध केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है। सरकारी कर्मचारी, फायर फाइटर, शिक्षक और स्वास्थ्यकर्मी भी वेतन बढ़ोतरी समेत अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। देश इस समय ईरान और यूक्रेन युद्ध की वजह से आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। फ्रांस पर करीब 4 ट्रिलियन डॉलर का सरकारी कर्ज बताया गया है, जो उसकी सालाना अर्थव्यवस्था के करीब 119 प्रतिशत के बराबर है। आबादी के बूढ़े होने के कारण पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकारी खर्च भी लगातार बढ़ रहा है।

  • जम्मू-कश्मीर में हजारों किताबों पर कार्रवाई से सियासी बहस तेज, उमर और मीरवाइज ने उठाए सवाल

    जम्मू-कश्मीर में हजारों किताबों पर कार्रवाई से सियासी बहस तेज, उमर और मीरवाइज ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर के कॉलेजों और पुस्तकालयों में मौजूद किताबों की व्यापक स्क्रीनिंग और हजारों पुस्तकों को हटाए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सरकार के अनुसार 21,81,582 किताबों और प्रकाशनों की जांच की गई, जिनमें से 4,767 किताबों को प्रचलन से हटाया गया है। इनमें 518 ऐसी किताबें शामिल हैं, जिन पर पहले से प्रतिबंध लागू था। इसके अलावा 1,752 किताबों को विशेषज्ञ जांच के लिए भेजा गया है।

    इस कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किताबों पर प्रतिबंध लगाने का मुद्दा लोकतंत्र में व्यापक बहस का विषय है। उनके अनुसार मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था में निर्वाचित सरकार के पास ऐसे फैसले खुद लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि परिस्थितियां बदलने पर इस पूरे मामले की दोबारा समीक्षा की जा सकती है।

    मामले पर मीरवाइज उमर फारूक ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने हजारों किताबों को हटाए जाने की कार्रवाई को चिंताजनक बताते हुए संबंधित किताबों के नाम और उन्हें हटाने के कारण सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अकादमिक स्वतंत्रता तथा अलग-अलग विचारों और दृष्टिकोणों तक छात्रों की पहुंच शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में किताबों को हटाने के पीछे आखिर किस तरह की नीति और उद्देश्य काम कर रहा है।

    सरकार की ओर से कार्रवाई को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया गया है। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने कहा कि किताबों की जांच करना और उनकी सामग्री का तथ्यात्मक परीक्षण करना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। उनका कहना है कि यदि कोई किताब आधिकारिक रूप से प्रतिबंधित है या उसमें आपत्तिजनक सामग्री पाई गई है, तो उसे सरकारी संस्थानों और पुस्तकालयों में नहीं रखा जाना चाहिए।

    भाजपा विधायक आरएस पठानिया ने भी कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में इतिहास तथ्यों के आधार पर पढ़ाया जाना चाहिए। उनके अनुसार काल्पनिक किस्सों, अफवाहों या किंवदंतियों को इतिहास के रूप में शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता।

    भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता जोरवार सिंह जमवाल ने भी हटाई गई किताबों की सामग्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐतिहासिक विषयों पर आधारित पुस्तकों में तथ्यात्मकता और विश्वसनीयता जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में ऐसी सामग्री नहीं होनी चाहिए जो युवाओं को भ्रमित करने वाली हो।

    किताबों की स्क्रीनिंग से जुड़े आंकड़े विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सामने आए। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार जम्मू क्षेत्र में 9,32,941 और कश्मीर क्षेत्र में 12,48,641 किताबों तथा प्रकाशनों की जांच की गई। कार्रवाई के तहत कश्मीर क्षेत्र से 4,474 और जम्मू क्षेत्र से 293 किताबें हटाई गईं। वहीं 1,752 किताबों को विशेषज्ञ परीक्षण के लिए भेजा गया है, जिनमें जम्मू क्षेत्र की 538 और कश्मीर क्षेत्र की 1,214 किताबें शामिल हैं।

    सरकार के मुताबिक यह स्क्रीनिंग जुलाई में दो किताबों की खरीद को लेकर उठे विवाद के बाद शुरू हुई। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों और संबंधित पुस्तकालयों में उपलब्ध पुरानी और नई किताबों की सामग्री की जांच के निर्देश दिए। सरकार ने कहा है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में संवैधानिक मूल्यों, अकादमिक स्वतंत्रता, आलोचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिम्मेदार नागरिकता को बढ़ावा देने वाला वातावरण बनाए रखना जरूरी है। मामले में राजनीतिक दलों और विभिन्न पक्षों के अलग-अलग रुख के बीच अब किताबों की जांच और उन्हें हटाने के कारणों को लेकर बहस जारी है।