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  • कोर्स के दौरान शादी पर रोक ,नर्सिंग स्कूल का सख्त; फरमान छात्राओं में मचा हड़कंप

    कोर्स के दौरान शादी पर रोक ,नर्सिंग स्कूल का सख्त; फरमान छात्राओं में मचा हड़कंप


    नई दिल्ली । बिहार के गोपालगंज जिले के हथुआ स्थित जीएनएम नर्सिंग स्कूल से एक ऐसा आदेश सामने आया है जिसने शिक्षा व्यवस्था और छात्राओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर बहस छेड़ दी है। स्कूल प्रशासन की ओर से जारी इस निर्देश के अनुसार वहां पढ़ने वाली किसी भी छात्रा को कोर्स की अवधि के दौरान शादी करने की अनुमति नहीं होगी। यह अवधि लगभग तीन साल की बताई जा रही है। आदेश में साफ कहा गया है कि अगर इस दौरान किसी छात्रा के विवाह करने की जानकारी मिलती है तो उसका नामांकन तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित छात्रा की होगी।

    यह आदेश 16 अप्रैल 2026 को जारी किया गया बताया जा रहा है। आधिकारिक लेटर पर संस्थान की मुहर और प्राचार्या के हस्ताक्षर होने के कारण इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। आदेश में छात्राओं को सीधे तौर पर चेतावनी दी गई है कि वे शैक्षणिक सत्र के दौरान विवाह जैसे किसी भी व्यक्तिगत निर्णय से बचें अन्यथा उन्हें अपनी पढ़ाई से हाथ धोना पड़ सकता है।

    इस फरमान के सामने आने के बाद छात्राओं के बीच असमंजस और तनाव की स्थिति बन गई है। कई छात्राएं इसे अपनी निजी जिंदगी में हस्तक्षेप मान रही हैं तो कुछ इसे अनुशासन के नाम पर थोपे गए नियम के रूप में देख रही हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या किसी शैक्षणिक संस्थान को इस तरह का अधिकार है कि वह छात्राओं के निजी फैसलों पर रोक लगा सके।

    स्थानीय स्तर पर भी यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया है। शिक्षा और महिला अधिकारों से जुड़े लोग इसे असंवैधानिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ बता रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य छात्राओं को सशक्त बनाना होना चाहिए न कि उनके निजी जीवन पर नियंत्रण स्थापित करना।

    हालांकि इस पूरे मामले में स्कूल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्राचार्या से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। ऐसे में यह भी साफ नहीं हो पाया है कि यह आदेश किस आधार पर जारी किया गया और इसके पीछे प्रशासन की मंशा क्या है।

    इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आज के समय में भी शिक्षा संस्थानों में इस तरह के नियम लागू किए जा सकते हैं। जहां एक ओर देश में महिलाओं को बराबरी और स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है वहीं दूसरी ओर इस तरह के आदेश उन अधिकारों पर सवाल खड़े करते नजर आते हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है और संभव है कि उच्च स्तर पर इसकी जांच या हस्तक्षेप भी देखने को मिले।

  • कितनी पढ़ाई की डॉ. अंबेडकर ने? जानिए उनके जीवन के ऐतिहासिक योगदान

    कितनी पढ़ाई की डॉ. अंबेडकर ने? जानिए उनके जीवन के ऐतिहासिक योगदान


    नई दिल्ली। Dr. BR Ambedkar भारतीय इतिहास के सबसे शिक्षित और प्रभावशाली नेताओं में से एक माने जाते हैं। उन्होंने न सिर्फ उच्च शिक्षा हासिल की, बल्कि अपने ज्ञान और संघर्ष से देश के सामाजिक और संवैधानिक ढांचे को मजबूत किया।

    डॉ. अंबेडकर ने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी पढ़ाई की। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया और इसके बाद अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में मास्टर्स और पीएचडी की डिग्री हासिल की। इसके अलावा उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से भी डॉक्टरेट और कानून की पढ़ाई (Barrister-at-Law) पूरी की। उस दौर में इतनी उच्च शिक्षा हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी।

    डॉ. अंबेडकर जयंती के मौके पर पीएम मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

    Dr. BR Ambedkar ने कितनी पढ़ाई की और क्यों माने जाते हैं सबसे शिक्षित नेता
    डॉ. अंबेडकर ने कुल मिलाकर कई उच्च डिग्रियां हासिल की थीं, जिनमें अर्थशास्त्र, कानून और राजनीति जैसे विषय शामिल थे। वे पहले भारतीयों में से थे जिन्होंने विदेश जाकर इतनी ऊंची शिक्षा प्राप्त की।

    उनकी पढ़ाई सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने समाज को समझने और सुधारने के लिए अपने ज्ञान का इस्तेमाल किया। शिक्षा को वे सामाजिक बदलाव का सबसे बड़ा हथियार मानते थे और उन्होंने दलितों व पिछड़े वर्गों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया।

    संविधान निर्माण से लेकर सामाजिक सुधार तक योगदान
    डॉ. अंबेडकर का सबसे बड़ा योगदान भारतीय संविधान के निर्माण में रहा। उन्हें संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया गया था और उन्होंने देश को एक मजबूत लोकतांत्रिक ढांचा दिया।

    इसके अलावा उन्होंने दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया। उन्होंने छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और समाज में समानता की नींव रखी।

    उन्होंने श्रम कानूनों, महिलाओं के अधिकार और शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण काम किए। रिजर्वेशन नीति और सामाजिक न्याय की अवधारणा को मजबूत करने में उनका योगदान बेहद अहम रहा।

    कुल मिलाकर, डॉ. भीमराव अंबेडकर न सिर्फ एक महान विद्वान थे, बल्कि ऐसे समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने अपने ज्ञान और संघर्ष से भारत को नई दिशा दी।

  • अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक- उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक- उप मुख्यमंत्री शुक्ल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक है। रीवा में शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार को बेहतर बनाने के सभी प्रयास जारी हैं। हमारा प्रयास है कि गुणात्मक शिक्षा व बेहतर इलाज की सभी व्यवस्थायें रहें ताकि यहां के लोगों को उच्च शिक्षा व इलाज के लिये बाहर न जाना पड़े।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रविवार को यह विचार ीवा में लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा भवन के लोकार्पण अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपने संभाग को आदर्श संभाग बनायें। महाविद्यालय के प्राचार्यों का दायित्व है कि वह अपने महाविद्यालय में नवीन पाठ¬क्रम संचालन के लिये प्रयासरत रहें तथा प्राध्यापकों व विद्यार्थियों के साथ जीवंत संबंध बनायें रखें।

    उन्होंने कहा कि अच्छा प्रशासक वही है जो जमीनी फीड बैक लेकर कार्य करे। यह भवन उच्च स्तरीय सुविधाओं से युक्त है। जब कार्यालय अच्छा होता है तो कार्य करने की इच्छा भी बढ़ जाती है। इस कार्यालय भवन के द्वारा संभाग के सभी महाविद्यालयों के विकास व उच्च शिक्षा के गुणात्मक सुधार के सभी प्रयास तत्परता से होंगे।

    अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ. आर.पी. सिंह ने बताया कि लगभग 3 करोड़ रूपये से निर्मित भवन में सभी सुविधाएँ हैं। यहां से शासकीय, अशासकीय व अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों पर नियंत्रण होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विधि विधान से पूजन अर्चन कर भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर आयुक्त रीवा संभाग बीएस जामोद, अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय सहित महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।

  • दिल्ली बजट 2026 इंफ्रास्ट्रक्चर स्वास्थ्य शिक्षा और ग्रीन पहल को बड़ा बढ़ावा

    दिल्ली बजट 2026 इंफ्रास्ट्रक्चर स्वास्थ्य शिक्षा और ग्रीन पहल को बड़ा बढ़ावा

    नई दिल्ली में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट में विकास और जनकल्याण की बड़ी तस्वीर सामने आई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 1,03,700 करोड़ रुपए का बजट पेश करते हुए इसे केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि राजधानी के भविष्य का रोडमैप बताया। इस बजट में खास बात यह रही कि विकास के साथ पर्यावरण संतुलन पर जोर देते हुए कुल बजट का 21 प्रतिशत हिस्सा ग्रीन बजट के रूप में रखा गया है

    सरकार के अनुसार दिल्ली की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और जीएसडीपी में भी वृद्धि दर्ज की गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया गया है। लोक निर्माण विभाग को 5,921 करोड़ और शहरी विकास विभाग को 7,887 करोड़ रुपए देने का प्रस्ताव है। यमुनापार, अनधिकृत कॉलोनियों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए भी अलग से बजट निर्धारित किया गया है

    राजधानी में सड़कों और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 750 किलोमीटर सड़कों का पुनर्विकास, नए फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए जाएंगे। इसके साथ ही बारापुल्ला कॉरिडोर को जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है

    बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पावर सेक्टर के लिए 3,942 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसमें सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली लाइनों को भूमिगत करने की योजना शामिल है

    जल और सीवर व्यवस्था को सुधारने के लिए 9,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाकर 1,500 एमजीडी तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे स्वच्छता और जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी

    स्वास्थ्य क्षेत्र में 12,645 करोड़ रुपए का बजट रखते हुए सरकार ने अधूरे अस्पतालों को पूरा करने, आईसीयू सुविधाओं के विस्तार और नई स्वास्थ्य योजनाओं की घोषणा की है। आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ाया गया है और 750 नए आरोग्य केंद्र खोले जाएंगे। नवजात शिशुओं के लिए नई जांच सुविधाएं भी शुरू की जाएंगी

    शिक्षा क्षेत्र को भी इस बजट में विशेष प्राथमिकता दी गई है। 19,148 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ हजारों स्मार्ट क्लासरूम बनाए जाएंगे, छात्राओं को मुफ्त साइकिल और मेधावी छात्रों को लैपटॉप देने की योजना है। नई आईटीआई, एडुसिटी और खेल विश्वविद्यालय जैसे प्रोजेक्ट्स भी प्रस्तावित हैं

    महिला और बाल विकास के लिए 7,406 करोड़ रुपए का बजट रखते हुए महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा पर जोर दिया गया है। मुफ्त बस यात्रा, गैस सिलेंडर और नई योजनाएं जारी रहेंगी। साथ ही शहर में 50,000 नए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और वन स्टॉप सेंटर बनाए जाएंगे

    परिवहन क्षेत्र में 8,374 करोड़ रुपए के बजट के साथ इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा दिया जाएगा। 2027 तक 7,500 बसें और 2029 तक 12,000 ई बसों का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा मेट्रो और नमो भारत कॉरिडोर पर भी निवेश बढ़ाया जाएगा

    एमएसएमई सेक्टर और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां लाई जाएंगी, जिसमें वेयरहाउसिंग, सेमीकंडक्टर और ड्रोन पॉलिसी शामिल हैं। वहीं पर्यटन बजट में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है और पहली बार इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल आयोजित करने की योजना है

    पर्यावरण संरक्षण के लिए 822 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण, वेस्ट टू एनर्जी प्लांट और कार्बन क्रेडिट जैसी योजनाएं शामिल हैं। कचरा निपटान क्षमता को दोगुना करने का लक्ष्य भी तय किया गया है

  • उपराष्ट्रपति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में 1.2 लाख विद्यार्थियों को दी उपाधियां, महिला शिक्षा और राष्ट्र सेवा पर दिया जोर

    उपराष्ट्रपति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में 1.2 लाख विद्यार्थियों को दी उपाधियां, महिला शिक्षा और राष्ट्र सेवा पर दिया जोर


    नई दिल्ली । दिल्ली उपराष्ट्रपति एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और 1.2 लाख से अधिक स्नातकों को उपाधियां प्रदान कीं। समारोह में उन्होंने विश्वविद्यालय की 104 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा की सराहना करते हुए इसे भारत के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थानों में से एक बताया।

    उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय की शुरुआत मात्र तीन कॉलेजों दो संकायों आठ विभागों और 750 विद्यार्थियों से हुई थी वहीं आज यह 16 संकाय 86 विभाग 90 कॉलेज और छह लाख से अधिक विद्यार्थियों वाला एक विशाल शैक्षणिक संस्थान बन चुका है। उन्होंने विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार का भी उल्लेख किया और कहा कि यह शिक्षा में निरंतरता और उत्कृष्टता का प्रतीक है।

    उन्होंने स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि उपाधि केवल प्रमाण-पत्र नहीं है बल्कि समाज की सेवा राष्ट्र के कल्याण और राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत को निभाने की प्रतिबद्धता है। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि विकसित भारत @2047 को साकार करने की कुंजी युवाओं में निहित है और हर विद्यार्थी चाहे वह वैज्ञानिक शिक्षक कलाकार उद्यमी या नवोन्मेषक बने वह इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    विशेष रूप से उन्होंने महिला शिक्षा में हुई प्रगति की सराहना की। उपराष्ट्रपति ने बताया कि स्नातकों में 50 प्रतिशत से अधिक और स्वर्ण पदक विजेताओं में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं जो देश में शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास का प्रतीक है।

    स्नातकों को सामाजिक जिम्मेदारी नवाचार और प्रौद्योगिकी अनुसंधान तथा उद्यमिता के माध्यम से देश के विकास में योगदान देने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने उन्हें नशीले पदार्थों से दूर रहने और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने की सलाह दी।

  • शिक्षा के विस्तार के साथ भारतीय संस्कृति से जुड़ाव आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    शिक्षा के विस्तार के साथ भारतीय संस्कृति से जुड़ाव आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शिक्षा का विस्तार होना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों से जुड़ाव भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने यह विचार शुक्रवार शाम गांधी नगर स्थित सागर पब्लिक स्कूल के रजत जयंती समारोह में व्यक्त किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्कूल के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और सेवाभावी पदाधिकारियों का सम्मान भी किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यार्थियों का लक्ष्य केवल प्रशासनिक या पुलिस अधिकारी बनने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्हें श्रेष्ठ शिक्षक, समर्पित जनप्रतिनिधि, कुशल व्यापारी और अच्छे किसान बनने की भावना भी विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी ऐसे प्रकल्पों से जुड़ें, जिससे वे केवल नौकरी पाने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनें।

    डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारी संस्कृति मानवीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने यह भी कहा कि नई तकनीक के उपयोग के साथ भारतीय संस्कृति से जुड़े रहना हमेशा प्राथमिकता होनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की प्रगति की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि आज गूगल और अन्य वैश्विक संस्थाओं में भारतीय उच्च पदों पर कार्यरत हैं और देश का नाम रौशन कर रहे हैं।

    इस अवसर पर डॉ. यादव ने सागर समूह के स्कूल सहित सातवें शिक्षण संस्थान के शुभारंभ पर बधाई दी और समूह की शिक्षा क्षेत्र में 25 वर्ष की उपलब्धियों को सराहा। समारोह में उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा निर्मित विज्ञान मॉडल—जैसे प्लांट्स द्वारा जल प्रदूषण रोकना, विंड मिल और लाइव गार्ड मैनेजमेंट—का अवलोकन किया। साथ ही मिट्टी के शिल्प निर्माण करने वाले बच्चों से संवाद कर उनकी प्रतिभा की प्रशंसा की।

    मुख्यमंत्री ने कक्षा 10 वीं में अंशुमन मौर्य को भी सम्मानित किया, जिन्होंने 99.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया में तीसरी रैंक हासिल की।

    कार्यक्रम को रामेश्वर शर्मा ने भी संबोधित किया। समारोह की शुरुआत में सागर समूह के प्रमुख सुधीर अग्रवाल, सिद्धार्थ अग्रवाल और सागर अग्रवाल ने मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों का स्वागत किया।

    डॉ. यादव ने कहा कि शिक्षा सिर्फ ज्ञान देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संस्कार, मूल्य और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव का मार्ग भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में श्रेष्ठता, नैतिक मूल्यों और समाज के लिए योगदान देने की प्रेरणा दी।

  • भारत-फ्रांस मिलकर बनाएंगे एवरेस्ट ऊंचाई तक उड़ने वाला हेलीकॉप्टर

    भारत-फ्रांस मिलकर बनाएंगे एवरेस्ट ऊंचाई तक उड़ने वाला हेलीकॉप्टर


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि भारत और फ्रांस मिलकर विश्व का पहला हेलीकॉप्टर बनाएंगे, जो माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकेगा।

    पीएम मोदी ने इस अवसर पर कहा:

    फ्रांस भारत का सबसे पुराना स्ट्रैटजिक पार्टनर है। दोनों देश अब स्पेशल, ग्लोबल और स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप के रूप में संबंधों को आगे बढ़ा रहे हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य वैश्विक स्थिरता और प्रगति सुनिश्चित करना है। भारत और फ्रांस मिलकर इंडस्ट्री और इनोवेशन में सहयोग करेंगे, और स्टूडेंट और रिसर्च एक्सचेंज को बढ़ावा देंगे।

    हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी भारत-फ्रांस संबंधों में अभूतपूर्व गति लाएगा। यह परियोजना दोनों देशों के उच्च तकनीक और एविएशन अनुसंधान में सहयोग को भी दर्शाती है और हेलीकॉप्टर उद्योग में नई प्रौद्योगिकी के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।

    एवरेस्ट तक उड़ान भरने वाला हेलीकॉप्टर: दुनिया में पहला भारत-फ्रांस तकनीकी और औद्योगिक सहयोग ग्लोबल स्ट्रैटिजिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूती शिक्षा और रिसर्च एक्सचेंज को सुगम बनाना यह घोषणा भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते तकनीकी, औद्योगिक और वैश्विक सहयोग का प्रतीक है।

    तीन दिन का आधिकारिक दौरा
    फ्रांस के राष्ट्रपति 17 से 19 फरवरी तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। यह राष्ट्रपति मैक्रों का भारत का चौथा दौरा है और मुंबई में उनका पहला आधिकारिक कार्यक्रम है। राष्ट्रपति मैक्रों भारत सरकार के निमंत्रण पर एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए हैं। इस दौरे के दौरान वह 19 फरवरी को नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट में भी शामिल होंगे।

    भारत रवाना होने से पहले क्या बोले मैक्रों
    भारत आने से पहले राष्ट्रपति मैक्रों ने एक्स पर लिखा था कि वह मुंबई से नई दिल्ली तक तीन दिन के दौरे पर आ रहे हैं, ताकि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने बताया कि उनके साथ व्यापार, उद्योग, संस्कृति और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े प्रमुख लोग भी भारत आ रहे हैं, जो दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आगे लिखा, साथ मिलकर हम अपने सहयोग को और आगे बढ़ाएंगे। कल मिलते हैं, मेरे प्यारे दोस्त नरेंद्र मोदी।

  • मध्यप्रदेश ने प्रस्तुत किया संतुलित विकास का आदर्श उदाहरण: उप मुख्यमंत्री देवड़ा, जीडीपी में 11.14% वृद्धि और प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,69,050 रुपये

    मध्यप्रदेश ने प्रस्तुत किया संतुलित विकास का आदर्श उदाहरण: उप मुख्यमंत्री देवड़ा, जीडीपी में 11.14% वृद्धि और प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,69,050 रुपये


    भोपाल । मध्यप्रदेश ने अपनी दूरदर्शी आर्थिक नीतियों और योजनाबद्ध विकास रणनीतियों के जरिए संतुलित और समावेशी विकास का आदर्श प्रस्तुत किया है। उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश करते हुए कहा कि राज्य योजनाबद्ध, संतुलित और परिणामोन्मुख विकास पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि कृषि, उद्योग, सेवा, सामाजिक क्षेत्र और वित्तीय अनुशासन हर क्षेत्र में निरंतर प्रगति हुई है।

    देवड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत को विश्व की मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने में मध्यप्रदेश पूरी क्षमता से योगदान दे रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य ने जो आर्थिक सुधारात्मक कदम उठाए, उनके परिणाम दिखाई देने लगे हैं।

    आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद GSDP प्रचलित भाव पर 16,69,750 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 15,02,428 करोड़ रुपये की तुलना में 11.14 प्रतिशत अधिक है। स्थिर 2011-12 भाव पर GSDP 7,81,911 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को दर्शाता है। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय प्रचलित भाव में 1,69,050 रुपये और स्थिर भाव में 76,971 रुपये तक बढ़ गई है।

    प्राथमिक क्षेत्र में कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन 6,79,817 करोड़ रुपये रहा, जिसमें फसलें 30.17 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रमुख रहीं। पशुधन, वानिकी, मत्स्य एवं खनन ने भी योगदान दिया। कृषि एवं ग्रामीण विकास के मोर्चे पर फसल उत्पादन में 7.66 प्रतिशत तथा खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत वृद्धि हुई। दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन और 72,975 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण से ग्रामीण आधार मजबूत हुआ।

    द्वितीयक क्षेत्र का GSVA 3,12,350 करोड़ रुपये रहा, जिसमें निर्माण, विनिर्माण और उपयोगी सेवाओं का योगदान प्रमुख रहा। इस क्षेत्र में 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई, जिससे ₹1.17 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश और लगभग 1.7 लाख रोजगार सृजित हुए। वर्ष 2024-25 में MSME सहायता 2,162 करोड़ रुपये रही। स्टार्टअप्स और इनक्यूबेशन केंद्र सक्रिय हैं, जबकि CSR व्यय 600.47 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

    तृतीयक क्षेत्र ने सर्वाधिक तेज वृद्धि दिखाई। वर्ष 2025-26 में इसका GSVA 5,85,588 करोड़ रुपये रहा, जिसमें व्यापार, वित्तीय सेवाएँ, रियल एस्टेट, होटल-रेस्टोरेंट और पर्यटन प्रमुख योगदानकर्ता रहे। 13.18 करोड़ पर्यटकों की आवक इस क्षेत्र की गति को दिखाती है।

    वित्तीय अनुशासन में सुधार भी दिखा; राजस्व 618 करोड़ रुपये बढ़ा और ऋण-GSDP अनुपात 31.3 प्रतिशत रहा। नगरीय विकास के तहत AMRUT 2.0 में 4,065 करोड़ रुपये का आवंटन और 1,134 परियोजनाओं की स्वीकृति दी गई। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत 8.75 लाख आवास पूरे हुए। स्वास्थ्य क्षेत्र में 34,112 करोड़ रुपये खर्च किए गए और मातृ मृत्यु दर घटकर 142 प्रति लाख जन्म रह गई।

    शिक्षा एवं कौशल विकास में बजट का 10.37 प्रतिशत आवंटित किया गया। कक्षा 1-5 में ड्रॉपआउट शून्य और कक्षा 6-8 में 6.3 प्रतिशत रह गया। तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संख्या 1,625 से बढ़कर 2,070 हो गई और 45,668 विद्यार्थियों को 500 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई। देवड़ा ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित रही, लेकिन उद्योग और सेवा क्षेत्र में भी संतुलित विस्तार हुआ है, जिससे मध्यप्रदेश ने संतुलित विकास का आदर्श प्रस्तुत किया है।

  • दिल्ली में नाबालिग अपराध बढ़ा, नई पीढ़ी क्यों भटक रही है? खेल-खेल से अपराध तक का रास्ता

    दिल्ली में नाबालिग अपराध बढ़ा, नई पीढ़ी क्यों भटक रही है? खेल-खेल से अपराध तक का रास्ता


    नई दिल्ली । दिल्ली में नाबालिगों द्वारा किए जा रहे अपराध अब गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं। खासकर झुग्गी बस्तियों में रहने वाले 12 से 17 वर्ष के किशोर जघन्य वारदातों में अधिक शामिल पाए जा रहे हैं। चोरी लूट हिंसा और नशे से जुड़े अपराधों में नाबालिगों की बढ़ती संलिप्तता कानूनव्यवस्था के लिए चुनौती बन रही है। पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद अपराध का ग्राफ कम नहीं हो रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नाबालिग अपराध केवल व्यक्तिगत प्रवृत्ति नहीं बल्कि सामाजिक और पारिवारिक उपेक्षा का नतीजा है। दिल्ली में करीब 75% जुवेनाइल अपराध झुग्गी-झोपड़ी और पुनर्वास कॉलोनियों से आते हैं जबकि 22% निम्न मध्यम वर्ग और केवल 3% मध्यम वर्गीय परिवारों से जुड़े हैं।

    प्रमुख कारणों में शामिल हैं

    परिवारिक अस्थिरता और निगरानी की कमी: गरीब परिवारों में माता-पिता की व्यस्तता या घरेलू हिंसा के कारण बच्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता।शिक्षा से दूरी: स्कूल छोड़ने और पढ़ाई में रुचि कम होने से किशोर गलत संगत की ओर जाते हैं। गलत संगत और गैंग संस्कृति: स्थानीय गैंग के प्रभाव में जल्दी पैसा और दबदबा पाने की चाह में अपराध की राह अपनाई जाती है। नशे और डिजिटल प्रभाव: नशे की उपलब्धता और हिंसक कंटेंट किशोरों के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। सामाजिक उपेक्षा: खेल कौशल विकास और काउंसलिंग की कमी बच्चों की ऊर्जा गलत दिशा में ले जाती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़े केवल अपराध नहीं बल्कि सामाजिक ढांचे की कहानी हैं जहां बचपन धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।दिल्ली में लगातार नाबालिग अपराधों ने समाज और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। कम उम्र में अपराध की ओर झुकाव केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक संकट का संकेत है। बार-बार अपराध में शामिल किशोरों के लिए पुनर्वास और सुधार चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है।

    प्रमुख प्रवृत्तियां जो सामने आईं

    छोटी उम्र में गंभीर अपराधों में संलिप्तता जैसे लूट चाकूबाजी हत्या का प्रयास। गैंग का प्रभाव और बार-बार अपराध करना। नशे की लत और उससे जुड़े अपराध। जुवेनाइल कानून के कारण सख्त सजा का डर कम होना। मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता सुझाव देते हैं कि समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं आएगा। इसके लिए परिवार स्कूल समुदाय और सरकार को मिलकर शिक्षा कौशल विकास और पुनर्वास पर काम करना होगा तभी किशोर अपराध की प्रवृत्ति को रोका जा सकता है।

  • पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन की जयंती पर CM मोहन यादव ने किया स्मरण, शिक्षा और गरीब कल्याण को बताया जीवन लक्ष्य

    पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन की जयंती पर CM मोहन यादव ने किया स्मरण, शिक्षा और गरीब कल्याण को बताया जीवन लक्ष्य


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत रत्न से सम्मानित पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. जाकिर हुसैन का जीवन शिक्षा, सामाजिक न्याय और गरीब कल्याण के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि डॉ. जाकिर हुसैन ने देश के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए जो योगदान दिया, वह सदैव याद रखा जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि डॉ. जाकिर हुसैन शिक्षा के क्षेत्र में विशेष रूप से सक्रिय रहे और उन्होंने शिक्षा को समाज के विकास का मूलाधार माना। उनकी सोच में शिक्षा को समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता साफ झलकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी शिक्षा और सामाजिक कल्याण के लिए की गई मेहनत और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि डॉ. जाकिर हुसैन का जीवन हमें यह संदेश देता है कि देश की प्रगति में शिक्षा और सामाजिक न्याय का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि हम सभी को उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की आवश्यकता है और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास करने चाहिए।