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  • अद्वितीय है महर्षि सांदीपनि आश्रम, भगवान श्रीकृष्ण ने 5100 वर्ष पूर्व इसी पावन स्थल पर ग्रहण की थी विद्या

    अद्वितीय है महर्षि सांदीपनि आश्रम, भगवान श्रीकृष्ण ने 5100 वर्ष पूर्व इसी पावन स्थल पर ग्रहण की थी विद्या


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम अत्यंत गौरवशाली और अद्वितीय है। लगभग 5100 वर्ष पूर्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने इसी पावन स्थल पर महर्षि सांदीपनि से विद्या ग्रहण की थी। भगवान श्रीकृष्ण से शिक्षा प्राप्त कर जगद्गुरु की उपाधि से विभूषित हुए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार देर शाम उज्जैन स्थित ऐतिहासिक महर्षि सांदीपनि आश्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर उज्जैन के प्रमुख देवस्थानों के विकास कार्यों का शुभारंभ हो रहा है, जिसमें शहर को गीता भवन की बड़ी सौगात भी मिल रही है। उन्होंने कहा कि आज गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर हम सभी गुरुओं का सम्मान कर अपने जीवन को धन्य करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर उज्जैन स्थित ऐतिहासिक महर्षि सांदीपनि आश्रम पहुंचे और यहां पूजन-अर्चन और आरती की। पूजा-अर्चना पं. कीर्ति रूपम व्यास एवं राहुल व्यास के द्वारा संपन्न कराई गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अपनी स्वरचित पुस्तक ‘महर्षि सांदीपनि: भारतीय गुरुकुल परंपरा के शिल्पी’ की प्रति महर्षि सांदीपनि की प्रतिमा के समक्ष अर्पित की।

    मुख्यमंत्री ने आश्रम परिसर में स्थित अति प्राचीन श्री कुंडेश्वर महादेव और श्री सर्वेश्वर महादेव मंदिर में भी दर्शन-पूजन किया। आश्रम के मुख्य पुजारी परिवार द्वारा मुख्यमंत्री का अंगवस्त्रम् ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत-सम्मान किया गया।

    आश्रम में हुआ पंचामृत अभिषेक और स्लेट पूजन

    महर्षि सांदीपनि व्यास के वंशज एवं मंदिर के मुख्य पुजारी पं. कीर्ति रुपम व्यास ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पर आश्रम में प्रतिवर्षानुसार विशेष अनुष्ठान आयोजित किए गए। प्रात:काल भगवान श्रीकृष्ण, भगवान श्री बलराम और गुरु सांदीपनि का पंचामृत अभिषेक एवं विशेष पूजन किया गया। परंपरा अनुसार, प्रथम बार शिक्षा प्रारंभ करने वाले छोटे बच्चों द्वारा ‘स्लेट पूजन’ का आयोजन भी हुआ।

    गुरु गादी परिसर को भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान किया जाएगा

    गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन स्थित वृंदावन पूरा में संत शिरोमणि रविदास महाराज की चरण पादुका और गुरु गादी स्थल पहुंचकर श्रद्धापूर्वक नमन किया एवं श्रद्धापूर्वक चादर चढ़ाई। राज्य के सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि संत रविदास जी महाराज के इस चरण पादुका एवं गुरु गादी परिसर को भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान किया जाएगा, जिसके लिए जल्द ही आवश्यक विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा शिरोमणि रविदास महाराज के आदर्श, उपदेश और विचार आज भी समाज में समानता, सद्भाव और मानवता की भावना का संचार करते हैं। उनका जीवन पूरी मानव जाति के लिए एक मार्गदर्शक है।

    इस गरिमामय आयोजन में जन प्रतिनिधियों और रविदास समाज के प्रमुख लोगों की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही। कार्यक्रम में नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, महापौर मुकेश टटवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी और उपाध्यक्ष मुकेश यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया सहित रविदास समाज के संभागीय अध्यक्ष मनोहर सुरेश कुसुमारिया, विजेंद्र चौहान, कमल हनोतिया, कमलकांत राजोरिया, विक्रम परमार, रितेश जटिया, अंबाराम चौहान, प्रशासनिक अधिकारी एवं भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

  • शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर संजय राउत का तंज, बोले- देवेंद्र फडणवीस इस जिम्मेदारी के लिए बेहतर विकल्प

    शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर संजय राउत का तंज, बोले- देवेंद्र फडणवीस इस जिम्मेदारी के लिए बेहतर विकल्प

    नई दिल्ली । शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार में शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने नए शिक्षा मंत्री के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को दी जानी चाहिए, जिसका इस क्षेत्र से गहरा जुड़ाव और समझ हो। इसी दौरान उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का नाम लेते हुए तंज भरे अंदाज में उन्हें इस पद के लिए बेहतर विकल्प बताया।

    संजय राउत ने कहा कि उनके अनुसार देवेंद्र फडणवीस शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी बेहतर तरीके से निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि फडणवीस शिक्षित और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले नेता हैं तथा उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि वर्तमान व्यवस्था में जिस तरह मंत्रालयों का बंटवारा किया जा रहा है, उस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

    राउत ने नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि शिक्षा क्षेत्र से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े अनुभव वाले व्यक्ति को यह जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रह्लाद जोशी को उनके पहले के मंत्रालय में ही रहने दिया जाता तो अधिक उचित होता। हालांकि यह उनका राजनीतिक मत है और इसे लेकर सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    राज्यसभा सांसद ने यह भी दावा किया कि इससे पहले भी वह कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि देवेंद्र फडणवीस शिक्षा मंत्री की भूमिका निभाने में सक्षम हैं। उन्होंने अपने पुराने बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय जैसे अहम विभाग में ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है, जो नीति निर्माण और प्रशासनिक निर्णयों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सके।

    केंद्र सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर निशाना साधते हुए संजय राउत ने आरोप लगाया कि देश में शिक्षा क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। उनके अनुसार समय-समय पर सामने आने वाले पेपर लीक जैसे मामलों ने विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ाई है।

    राउत ने अपने बयान में केंद्र सरकार की नीतियों की भी आलोचना की और कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल मंत्रालय में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि सरकार को शिक्षा की गुणवत्ता, संस्थानों की मजबूती और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली जैसे मुद्दों पर अधिक गंभीरता से काम करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कुछ राजनीतिक टिप्पणियां भी कीं, जिनमें उन्होंने सरकार के निर्णयों पर सवाल उठाए।

    राजनीतिक हलकों में संजय राउत का यह बयान चर्चा का विषय बन गया है। शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर दिए गए उनके बयान को विपक्ष की ओर से केंद्र सरकार पर एक और राजनीतिक हमला माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • एयरफोर्स बाल भारती स्कूल पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, छात्रों से संवाद कर शिक्षा और नैतिक मूल्यों का दिया संदेश

    एयरफोर्स बाल भारती स्कूल पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, छात्रों से संवाद कर शिक्षा और नैतिक मूल्यों का दिया संदेश


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को नई दिल्ली के लोदी रोड स्थित एयरफोर्स बाल भारती स्कूल का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद कर उन्हें शिक्षा, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया। स्कूल प्रशासन ने इस दौरे को संस्थान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक अवसर बताया। राष्ट्रपति की मौजूदगी से विद्यार्थियों और शिक्षकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

    स्कूल पहुंचने पर राष्ट्रपति का स्वागत भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और एयर फोर्स फैमिलीज वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष सरिता सिंह ने किया। विद्यालय परिसर में उनके स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। विद्यार्थियों ने पारंपरिक तरीके से उनका अभिनंदन किया और पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन तथा उत्साह का परिचय दिया।

    दौरे की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसमें विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति पर आधारित रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। विभिन्न प्रस्तुतियों में छात्रों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और रचनात्मक क्षमता की झलक दिखाई दी। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सराहना की और उनके प्रयासों की प्रशंसा की।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से सीधे संवाद भी किया। उन्होंने छात्रों से उनकी पढ़ाई, भविष्य की योजनाओं, रुचियों और जीवन के लक्ष्यों के बारे में जानकारी ली। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं बल्कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच से हासिल होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए समर्पण और ईमानदारी के साथ प्रयास करने की प्रेरणा दी।

    उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार, संवेदनशील और जागरूक नागरिक तैयार करना भी है। राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से अच्छे नैतिक मूल्यों को अपनाने, समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और देश के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उनके अनुसार शिक्षा और चरित्र निर्माण साथ-साथ आगे बढ़ने चाहिए, तभी व्यक्ति और राष्ट्र दोनों मजबूत बनते हैं।

    अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति ने स्कूल परिसर में आयोजित कला प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। प्रदर्शनी में जूनियर और सीनियर वर्ग के विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई चित्रकृतियों और विभिन्न रचनात्मक कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया था। उन्होंने छात्रों की कल्पनाशीलता, कलात्मक अभिव्यक्ति और सृजनात्मक सोच की सराहना करते हुए कहा कि कला व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है और शिक्षा के साथ इसका संतुलित विकास आवश्यक है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्कूल के आधुनिक बुनियादी ढांचे, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की प्रतिबद्धता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षण संस्थान भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यालय आगे भी शिक्षा, अनुशासन और उत्कृष्टता के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेगा तथा विद्यार्थियों को देश और समाज की सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

  • IIT कानपुर से IAS तक का सफर, शिक्षा सचिव पद से हटाए गए विनीत जोशी का प्रशासनिक और शैक्षणिक सफर चर्चा में

    IIT कानपुर से IAS तक का सफर, शिक्षा सचिव पद से हटाए गए विनीत जोशी का प्रशासनिक और शैक्षणिक सफर चर्चा में

    नई दिल्ली । पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनीत जोशी का शिक्षा मंत्रालय से तबादला कर उन्हें पंचायती राज मंत्रालय में सचिव नियुक्त किया है। उनके स्थान पर उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी नए अधिकारी को सौंपी गई है। इस प्रशासनिक बदलाव के बाद विनीत जोशी का लंबा शैक्षणिक और प्रशासनिक सफर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण संस्थानों का नेतृत्व कर चुके जोशी देश की परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रमुख अधिकारियों में गिने जाते रहे हैं।

    विनीत जोशी 1992 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। उनका जन्म 2 नवंबर 1968 को उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। इसके बाद भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी), नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एमबीए किया, जिसमें उन्हें स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ। आगे चलकर उन्होंने गुणवत्ता प्रबंधन विषय में पीएचडी भी पूरी की। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में तकनीकी और प्रबंधन दोनों क्षेत्रों की समझ रखने वाले अधिकारी के रूप में पहचान दिलाई।

    शिक्षा क्षेत्र में उनकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के पहले महानिदेशक का पद शामिल रहा। वर्ष 2018 में उन्हें इस नवगठित संस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके कार्यकाल में जेईई मेन, नीट और अन्य राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के संचालन की व्यवस्था को संस्थागत रूप दिया गया। हालांकि हाल के वर्षों में विभिन्न परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों के बाद एनटीए लगातार सार्वजनिक और राजनीतिक बहस के केंद्र में रही।

    विनीत जोशी इससे पहले केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनके कार्यकाल के दौरान बोर्ड ने मूल्यांकन प्रणाली में कई बदलाव किए, जिनमें सतत एवं व्यापक मूल्यांकन प्रणाली (सीसीई) को लागू करना प्रमुख रहा। उनका कार्यकाल शिक्षा प्रणाली में सुधार और प्रशासनिक बदलावों के लिए जाना गया, हालांकि कुछ नीतियों पर समय-समय पर बहस भी होती रही।

    शिक्षा मंत्रालय में सचिव के रूप में उन्होंने उच्च शिक्षा और बाद में स्कूली शिक्षा विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभाली। इसके अलावा वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के कार्यवाहक अध्यक्ष की भूमिका में भी रहे। वर्ष 2023 में मणिपुर में हिंसा के दौरान उन्हें राज्य का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था, जहां उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था संभाली। बाद में उन्हें फिर केंद्र सरकार में वापस बुलाकर शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।

    हालिया प्रशासनिक फेरबदल ऐसे समय हुआ है जब देश में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है। सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में नए अधिकारियों की नियुक्ति करते हुए उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा दोनों विभागों में नेतृत्व परिवर्तन किया है। माना जा रहा है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जाएगा। विनीत जोशी का प्रशासनिक अनुभव और शिक्षा क्षेत्र में उनका लंबा योगदान उन्हें भारतीय शिक्षा प्रशासन के प्रमुख अधिकारियों में शामिल करता है।

  • शिक्षा बजट, निजीकरण और पेपर लीक पर सोनिया गांधी का सरकार पर हमला, छात्र आंदोलनों को बताया नीतियों का नतीजा

    शिक्षा बजट, निजीकरण और पेपर लीक पर सोनिया गांधी का सरकार पर हमला, छात्र आंदोलनों को बताया नीतियों का नतीजा

    नई दिल्ली । कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने देशभर में जारी छात्र आंदोलनों के बीच केंद्र सरकार की शिक्षा और रोजगार संबंधी नीतियों पर तीखा हमला बोला है। एक विशेष लेख के माध्यम से उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में शिक्षा व्यवस्था कई गंभीर चुनौतियों से घिरी है और छात्रों के बीच बढ़ता असंतोष सरकार की नीतियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रहे विवाद, शिक्षा संस्थानों की स्थिति और युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी ने व्यापक चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।

    सोनिया गांधी ने कहा कि पिछले कुछ सप्ताह से देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके अनुसार छात्र सरकार से पारदर्शिता, जवाबदेही और ठोस सुधार चाहते हैं, लेकिन उनकी मांगों पर संवाद स्थापित करने के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया, जिससे लोकतांत्रिक संवाद की भावना कमजोर हुई है।

    अपने लेख में उन्होंने शिक्षा बजट को भी प्रमुख मुद्दा बनाया। उनका कहना है कि स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा के लिए बजट आवंटन में कमी आने से सरकारी संस्थानों की स्थिति प्रभावित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों की अपेक्षा निजी संस्थानों को बढ़ावा मिलने से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आम परिवारों की पहुंच से धीरे-धीरे दूर होती जा रही है। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में संतुलित निवेश और सरकारी संस्थानों को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।

    सोनिया गांधी ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा प्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं के संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। उनका आरोप है कि हाल के वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं, जिससे लाखों विद्यार्थियों का विश्वास प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच और भविष्य में इन्हें रोकने के लिए प्रभावी सुधार लागू किए जाने चाहिए।

    रोजगार के मुद्दे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के बीच बेरोजगारी एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। उनके अनुसार शिक्षा पूरी करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवाओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए योग्यता आधारित और पारदर्शी व्यवस्था आवश्यक है। उनका मानना है कि शिक्षा और रोजगार की नीतियों को एक-दूसरे से जोड़कर दीर्घकालिक समाधान तैयार किए जाने चाहिए।

    लेख के अंत में सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का दायित्व है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से निकालना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने पूर्व के छात्र आंदोलनों और सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल पहचान है। उनके इन बयानों के बाद शिक्षा, रोजगार और छात्र आंदोलनों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

  • निजी कॉलेजों की फीस निर्धारण पर घिरी सरकार चार साल में 5062 संस्थानों का शुल्क तय करने की प्रक्रिया पर सवाल

    निजी कॉलेजों की फीस निर्धारण पर घिरी सरकार चार साल में 5062 संस्थानों का शुल्क तय करने की प्रक्रिया पर सवाल


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए लिखित जवाब का हवाला देते हुए फीस निर्धारण में पारदर्शिता और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति ने वर्ष 2022 से 2025-26 के बीच 5062 निजी शिक्षण संस्थानों की फीस तय की, जबकि वर्ष 2025-26 में एक ही बैठक के दौरान 355 निजी संस्थानों की फीस निर्धारित कर दी गई। उन्होंने इसे नियमों और व्यावहारिक प्रक्रिया के विपरीत बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

    विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति निर्धारित प्रक्रिया के तहत निजी शिक्षण संस्थानों की फीस तय करती है। उन्होंने जानकारी दी कि चार्टर्ड अकाउंटेंट अधिकतम 15 दिनों के भीतर संस्थानों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट समिति को सौंपता है। इसी रिपोर्ट के आधार पर शुल्क निर्धारण किया जाता है।

    सरकार के जवाब के बाद कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने दावा किया कि उनके मूल प्रश्न का महत्वपूर्ण हिस्सा अनुत्तरित छोड़ दिया गया। उनका कहना है कि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट ने कितने दिनों में कितने संस्थानों के आवेदन और वित्तीय दस्तावेजों का परीक्षण किया। उनके अनुसार वर्ष 2008 के राजपत्र में स्पष्ट प्रावधान हैं कि किसी भी शिक्षण संस्थान की फीस तय करने से पहले उसके आय-व्यय, बैलेंस शीट, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किया जाना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर संस्थान से अतिरिक्त जानकारी और स्पष्टीकरण भी लिया जाता है। ऐसे में एक ही दिन में बड़ी संख्या में संस्थानों की फीस तय होना कई सवाल खड़े करता है।

    उपाध्याय ने विशेष रूप से वर्ष 2025-26 का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ही बैठक में 355 निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारित कर दी गई। उनका कहना है कि प्रत्येक संस्थान के दस्तावेजों, निरीक्षण दल की रिपोर्ट और चार्टर्ड अकाउंटेंट की रिपोर्ट का अलग-अलग परीक्षण किए बिना इतनी बड़ी संख्या में शुल्क निर्धारण करना संभव नहीं लगता। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई।

    विधायक ने नर्सिंग कॉलेजों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि हर वर्ष 60 से 100 नर्सिंग संस्थानों की फीस तय की जाती है, जबकि कई संस्थानों पर पहले से नियमों के उल्लंघन और अनियमित संचालन के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे संस्थानों के मामलों में निरीक्षण दल और चार्टर्ड अकाउंटेंट ने किन मानकों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की और शुल्क निर्धारण की अनुमति कैसे दी गई।

    कांग्रेस विधायक ने मांग की कि निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण प्रक्रिया की सीबीआई अथवा किसी स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच समिति से जांच कराई जाए। उनका कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में मुनाफाखोरी पर रोक लगाने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पूरे प्रदेश में समान पाठ्यक्रमों के लिए पारदर्शी और एक समान शुल्क व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

    यह मुद्दा विधानसभा में सामने आने के बाद निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण प्रक्रिया, नियामक समिति की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इन आरोपों पर क्या आगे की कार्रवाई करती है।

  • सांदीपनि विद्यालयों पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बड़ा दावा, बोले- निजी स्कूल छोड़कर सरकारी विद्यालयों में बढ़ रहा विद्यार्थियों का भरोसा

    सांदीपनि विद्यालयों पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बड़ा दावा, बोले- निजी स्कूल छोड़कर सरकारी विद्यालयों में बढ़ रहा विद्यार्थियों का भरोसा

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र में दो नए सांदीपनि विद्यालयों के लोकार्पण अवसर पर कहा कि प्रदेश में सरकारी शिक्षा व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित सांदीपनि विद्यालयों के कारण अब विद्यार्थी निजी विद्यालयों से निकलकर शासकीय संस्थानों में प्रवेश ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर संसाधनों के माध्यम से राज्य सरकार बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मैत्री भारतीय संस्कृति में समानता, आत्मीयता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम में शिक्षा प्राप्त कर ज्ञान और संस्कार का महत्व स्थापित किया था। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश में आधुनिक सुविधाओं से युक्त सांदीपनि विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं, जहां पारंपरिक मूल्यों और आधुनिक शिक्षा का संतुलित समावेश किया गया है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने झिंझरी और बहोरीबंद में निर्मित दो नए सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण किया। इन विद्यालयों में आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के साथ डिजिटल शिक्षा, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, साइकिलें और विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उपलब्ध करा रही है। बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप तथा विद्यालय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को स्कूटी प्रदान की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ किसानों के कल्याण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर भी सरकार समान रूप से कार्य कर रही है। उन्होंने स्लीमनाबाद टनल परियोजना को बघेलखंड और बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे रीवा, सतना, मैहर, पन्ना और कटनी सहित कई जिलों में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए लगभग 1400 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और इसका लाभ बड़ी संख्या में किसानों को मिलेगा।

    उन्होंने आगे कहा कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना तथा पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना भी प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाने और कृषि उत्पादन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश के कई जिलों में खेती की स्थिति बेहतर होगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी विधानसभा सत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार समान नागरिक संहिता के प्रारूप को मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने बताया कि विधानसभा के वर्षाकालीन सत्र से पहले जगदीशपुर में मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित कर इस संबंध में आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सभी नागरिकों के लिए समान व्यवस्था लागू करने की दिशा में कार्य कर रही है।

    अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र हितग्राहियों के बैंक खातों में 1500 रुपये की राशि हस्तांतरित की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा, सिंचाई, सामाजिक सुरक्षा और आधारभूत विकास से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के सर्वांगीण विकास को गति देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  • NEET और भर्ती घोटालों के खिलाफ छात्रों का अनोखा आंदोलन, डिलीवरी बॉय से ड्राइवर तक कर रहे सहयोग

    NEET और भर्ती घोटालों के खिलाफ छात्रों का अनोखा आंदोलन, डिलीवरी बॉय से ड्राइवर तक कर रहे सहयोग


    इंदौर । इंदौर के टंट्याभील चौराहे पर 23 सूत्रीय मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार आठवें दिन भी जारी रहा। इस आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे किसी राजनीतिक दल या बड़े संगठन के बजाय आम लोगों का सहयोग मिल रहा है। धरना स्थल पर टेंट, गद्दे, भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं समाज के लोगों और छात्रों के सहयोग से संचालित की जा रही हैं। कई युवा अपनी रोज की कमाई का हिस्सा भी आंदोलन के लिए दे रहे हैं ताकि प्रदर्शन बिना किसी बाधा के जारी रह सके।

    प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि जब उन्होंने आंदोलन शुरू किया था तब उनके पास बैठने और बारिश से बचने तक की व्यवस्था नहीं थी। शुरुआती दिनों में बारिश से बचने के लिए उन्हें अपने बैठने वाले गद्दों को ही ओढ़ना पड़ा। इस दौरान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो कई सामाजिक संगठन और स्थानीय नागरिक उनकी मदद के लिए आगे आए। इसके बाद धरना स्थल पर टेंट, गद्दे और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई।

    छात्रों की मांग है कि नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, रिक्त और बैकलॉग पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू हो तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि जब तक उनकी 23 सूत्रीय मांगों पर सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    धरना स्थल पर मौजूद पवन अहिरवार और अरुण बड़ोले ने बताया कि रोजाना टेंट और अन्य व्यवस्थाओं पर करीब 1500 रुपये खर्च होते हैं। यह राशि आम नागरिकों के स्वैच्छिक सहयोग से जुटाई जा रही है। इसके लिए धरना स्थल पर सहयोग पेटी भी रखी गई है, जिसमें लोग अपनी इच्छा से आर्थिक सहायता दे रहे हैं। कई छात्र स्वयं लोगों से संपर्क कर आंदोलन के लिए सहयोग की अपील भी कर रहे हैं।

    इस आंदोलन में आम लोगों की भागीदारी भी देखने को मिल रही है। पेशे से ड्राइवर दिनेश वास्कले ने बताया कि उनके छोटे बच्चे हैं और वे नहीं चाहते कि भविष्य में उन्हें भी भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का सामना करना पड़े। उन्होंने अपना जन्मदिन भी धरना स्थल पर मनाया और उस दिन सभी छात्रों के भोजन की व्यवस्था की। वहीं डिलीवरी बॉय चंदन मोवेल ने कहा कि वह अपनी कमाई का एक हिस्सा आंदोलन के लिए नियमित रूप से दे रहे हैं। इसी तरह कई अन्य युवाओं ने भी छात्रों के समर्थन में आर्थिक सहयोग दिया है।

    धरने में शामिल छात्रों के अनुसार रात के समय भी 15 से 20 छात्र लगातार धरना स्थल पर मौजूद रहते हैं, जबकि सुबह और शाम करीब 100 छात्र आंदोलन में शामिल होते हैं। उनका आरोप है कि अब तक प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी उनकी मांगों पर चर्चा करने नहीं पहुंचा है।

    एलएलएम के छात्र अनिल विद्याराणा ने बताया कि विभिन्न छात्र संगठनों का भी आंदोलन को समर्थन मिल रहा है। कई संगठन धरना स्थल पर पहुंचकर छात्रों का मनोबल बढ़ा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को प्रदेश स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।

  • मार्क्स नहीं हुनर बनाएगा सफल पेरेंट्स को डॉ संजीव अग्रवाल की सीख बच्चों को दें सीखने की आजादी

    मार्क्स नहीं हुनर बनाएगा सफल पेरेंट्स को डॉ संजीव अग्रवाल की सीख बच्चों को दें सीखने की आजादी


    मध्‍य प्रदेश। आज के समय में शिक्षा केवल परीक्षा में अधिक अंक लाने तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि बदलते दौर में सफलता का असली आधार ज्ञान के साथ कौशल और व्यक्तित्व विकास बन चुका है। ऐसे समय में सेज यूनिवर्सिटी के चांसलर और सेज ग्रुप के सीएमडी डॉ संजीव अग्रवाल ने अभिभावकों को महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा है कि बच्चों को केवल नंबरों की दौड़ में उलझाने के बजाय उनकी प्रतिभा और स्किल्स को विकसित करने पर जोर देना चाहिए। उनका मानना है कि भविष्य में वही युवा सबसे आगे होंगे जिनके पास व्यावहारिक ज्ञान नई सोच और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता होगी।

    डॉ संजीव अग्रवाल का कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री दिलाना नहीं बल्कि ऐसे युवाओं का निर्माण करना होना चाहिए जो आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार करें। उनका मानना है कि विश्वविद्यालयों को ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जहां छात्र सिर्फ नौकरी पाने की तैयारी न करें बल्कि नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से जॉब क्रिएटर बनकर समाज और देश के विकास में योगदान दें।

    उन्होंने बताया कि सेज यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यदि कोई छात्र नियमित रूप से कक्षा में उपस्थित नहीं होता तो केवल सूचना देकर जिम्मेदारी पूरी नहीं की जाती बल्कि शिक्षक स्वयं उसके घर तक पहुंचते हैं और उसकी पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं को समझने का प्रयास करते हैं। संस्थान का उद्देश्य हर छात्र को शिक्षा से जोड़कर रखना और उसकी क्षमता को सही दिशा देना है।

    डॉ अग्रवाल के अनुसार आज की शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रह सकती। इसलिए विश्वविद्यालय में स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों के साथ उद्योग जगत के विशेषज्ञों को भी छात्रों से संवाद के लिए बुलाया जाता है। कैंपस में स्टार्टअप कॉन्क्लेव करियर डे और विभिन्न व्यावसायिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ताकि विद्यार्थी वास्तविक दुनिया की चुनौतियों को समझ सकें और अपने करियर की बेहतर तैयारी कर सकें। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को प्रकृति के करीब रहने व्यावहारिक सोच विकसित करने और नई परिस्थितियों में स्वयं निर्णय लेने का अवसर भी मिलना चाहिए।

    अपने छात्र जीवन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि पहले शिक्षा का स्वरूप काफी अलग था। उस समय शिक्षक केवल किताबों तक सीमित ज्ञान देते थे लेकिन अब समय बदल चुका है। आज सफल होने के लिए कम्युनिकेशन स्किल्स लीडरशिप टीमवर्क और तकनीकी दक्षता जैसी क्षमताएं भी उतनी ही जरूरी हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके समय में भी कम अंक आने का डर रहता था लेकिन आज कई अभिभावक बच्चों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाल देते हैं जिससे उनका आत्मविश्वास प्रभावित होता है और वे अपनी वास्तविक प्रतिभा का प्रदर्शन नहीं कर पाते।

    युवाओं के लिए उनका संदेश भी स्पष्ट है कि सफलता मेहनत धैर्य और निरंतर सीखने की प्रक्रिया से मिलती है। यदि किसी प्रयास में तुरंत सफलता न मिले तो निराश होने की जरूरत नहीं बल्कि उसे अनुभव मानकर आगे बढ़ना चाहिए। उनका विश्वास है कि लगातार मेहनत करने वाले लोगों के लिए अवसर जरूर बनते हैं और ईमानदारी के साथ किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।

    डॉ संजीव अग्रवाल का मानना है कि भारत का भविष्य ऐसी शिक्षा व्यवस्था में छिपा है जो बच्चों को केवल अच्छे अंक नहीं बल्कि बेहतर इंसान जिम्मेदार नागरिक और सफल पेशेवर बनने की प्रेरणा दे। जब शिक्षा में स्किल्स नवाचार और नैतिक मूल्यों को बराबर महत्व मिलेगा तभी देश की युवा शक्ति वास्तव में राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बन सकेगी।

  • स्कूली शिक्षा में डिजिटल क्रांति का केंद्र बना ‘दीक्षा’ प्लेटफॉर्म, बहुभाषी और समावेशी लर्निंग सिस्टम को मिला राष्ट्रीय विस्तार

    स्कूली शिक्षा में डिजिटल क्रांति का केंद्र बना ‘दीक्षा’ प्लेटफॉर्म, बहुभाषी और समावेशी लर्निंग सिस्टम को मिला राष्ट्रीय विस्तार

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने कहा है कि स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन को गति देने वाला ‘दीक्षा’ प्लेटफॉर्म अब देश में ‘वन नेशन, वन डिजिटल प्लेटफॉर्म’ के रूप में एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है। यह प्लेटफॉर्म शिक्षा को अधिक सुलभ, समावेशी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में लगातार विस्तार कर रहा है।

    दीक्षा की शुरुआत वर्ष 2017 में की गई थी और इसे नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) के तहत सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल टेक्नोलॉजी (CIET) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य देशभर के छात्रों और शिक्षकों को एकीकृत डिजिटल लर्निंग इकोसिस्टम उपलब्ध कराना है।

    सरकारी जानकारी के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म कक्षा 1 से 12 तक के लिए व्यापक डिजिटल लर्निंग सपोर्ट प्रदान करता है। इसमें प्रारंभिक साक्षरता और अंक ज्ञान से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक की पढ़ाई शामिल है, जिससे विद्यार्थियों को एक समान और संरचित शैक्षिक अनुभव मिल सके।

    दीक्षा को लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा बोर्डों ने अपनाया है। यह प्लेटफॉर्म क्षेत्रीय भाषाओं, पाठ्यक्रम और शिक्षण आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है, जिससे स्थानीय स्तर पर शिक्षा की पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ती है।

    इस डिजिटल प्लेटफॉर्म में 2D और 3D एनिमेशन, ऑगमेंटेड रियलिटी अनुभव, सिमुलेशन, वर्चुअल लैब और साइन लैंग्वेज वीडियो जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। इन तकनीकों का उद्देश्य छात्रों के लिए सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक और समझने योग्य बनाना है।

    सरकार ने बताया कि QR-कोड आधारित पाठ्यपुस्तकें NCERT की किताबों को वीडियो, इंटरैक्टिव सामग्री और शिक्षक गाइड से जोड़ती हैं। इससे कक्षा शिक्षण में डिजिटल सामग्री का सहज उपयोग संभव होता है और विषयों की बेहतर समझ विकसित होती है।

    दिव्यांग शिक्षार्थियों के लिए भी इस प्लेटफॉर्म पर विशेष सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसमें DAISY प्रारूप, टेक्स्ट-टू-स्पीच फीचर और भारतीय सांकेतिक भाषा वीडियो शामिल हैं, जिससे समावेशी शिक्षा को बढ़ावा मिलता है और हर वर्ग के विद्यार्थियों तक समान अवसर पहुंचते हैं।

    दीक्षा प्लेटफॉर्म व्यक्तिगत शिक्षण को भी समर्थन देता है। अभ्यास प्रश्नों, अनुकूली मूल्यांकन और योग्यता आधारित प्रश्न बैंक के माध्यम से विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता का आकलन किया जाता है और कमजोर क्षेत्रों की पहचान कर समय पर सुधार किया जाता है।

    इसके साथ ही यह प्लेटफॉर्म शिक्षक प्रशिक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एनआईएसएचटीएचए जैसे कार्यक्रमों के जरिए शिक्षकों को स्व-गति आधारित प्रमाणित पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे उनकी व्यावसायिक क्षमता में निरंतर सुधार हो सके।

    सरकार के अनुसार, दीक्षा एक संघबद्ध और विकेंद्रीकृत मॉडल पर काम करता है, जिसमें राज्यों और संस्थानों को स्थानीय भाषाओं में सामग्री अपलोड करने की स्वतंत्रता मिलती है। हालांकि गुणवत्ता नियंत्रण सीआईईटी-एनसीईआरटी द्वारा समय-समय पर किया जाता है।

    यह प्लेटफॉर्म ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में उपलब्ध है, जिससे इंटरनेट की सीमित पहुंच वाले क्षेत्रों में भी शिक्षा बाधित नहीं होती। स्मार्ट क्लासरूम और डाउनलोड सुविधा के माध्यम से छात्रों को निरंतर अध्ययन का अवसर मिलता है, जिससे डिजिटल शिक्षा का दायरा और अधिक व्यापक हो रहा है।