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  • राजनीति में नया चेहरा, सबसे ज्यादा दौलत थलपति विजय के पास, लेकिन पढ़ाई में पीछे रह गए सभी सीएम

    राजनीति में नया चेहरा, सबसे ज्यादा दौलत थलपति विजय के पास, लेकिन पढ़ाई में पीछे रह गए सभी सीएम


    नई दिल्ली ।भारतीय राजनीति में हाल ही में हुए चुनावों के बाद पांच अलग-अलग राज्यों में नए नेतृत्व की तस्वीर सामने आई है, जिसमें फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए Thalapathy Vijay सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थलपति विजय ने न केवल अपनी राजनीतिक जीत से सबको चौंकाया है, बल्कि संपत्ति के मामले में भी वह इन पांचों मुख्यमंत्रियों में सबसे आगे निकल गए हैं। उनके साथ पश्चिम बंगाल के नेता Shubhendu Adhikari, असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma, केरल के नेता वीडी सतीशन और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी की तुलना ने एक दिलचस्प राजनीतिक तस्वीर पेश की है, जिसमें संपत्ति, शिक्षा और आपराधिक मामलों के आधार पर स्पष्ट अंतर देखने को मिला है।

    थलपति विजय की सबसे बड़ी पहचान उनकी लोकप्रियता और फिल्मी करियर रही है, लेकिन अब राजनीति में भी उन्होंने मजबूत पकड़ बना ली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उनके पास करीब 648.85 करोड़ रुपये की संपत्ति बताई जाती है, जो इस सूची में शामिल सभी मुख्यमंत्रियों में सबसे अधिक है। शिक्षा के मामले में वह 12वीं पास हैं, जो इस तुलना में उन्हें सबसे कम शैक्षणिक योग्यता वाले नेता के रूप में दर्शाता है। हालांकि उनके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या सीमित बताई जाती है, लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा ने उन्हें बेहद तेज़ी से एक बड़े नेता के रूप में स्थापित कर दिया है।

    पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर भी काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। कांग्रेस और तृणमूल जैसे दलों से होते हुए उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान बनाई और बाद में सत्ता की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी संपत्ति अन्य नेताओं की तुलना में काफी कम बताई जाती है, लेकिन उनके खिलाफ सबसे अधिक आपराधिक मामले दर्ज होने की चर्चा है, जो उन्हें विवादों के घेरे में भी रखता है।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा इस सूची में सबसे अधिक शिक्षित नेता के रूप में सामने आते हैं। डॉक्टरेट की डिग्री रखने वाले हिमंत का राजनीतिक अनुभव भी लंबा रहा है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक का सफर तय किया है। उनकी संपत्ति मध्यम स्तर पर बताई जाती है और उनके खिलाफ किसी प्रकार के आपराधिक मामलों की अनुपस्थिति उन्हें एक अलग छवि प्रदान करती है।

    केरल के नेता वीडी सतीशन का पेशेवर पृष्ठभूमि वकालत से जुड़ा रहा है। उनकी संपत्ति इन सभी नेताओं में सबसे कम मानी जाती है, जबकि उनके खिलाफ कई कानूनी मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आती है। इसके बावजूद वे लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं और कांग्रेस संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

    पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी इस सूची में सबसे अनुभवी नेता के रूप में देखे जाते हैं। कई बार मुख्यमंत्री रह चुके रंगास्वामी की छवि एक स्थिर और अनुभवी नेतृत्व की रही है। उनकी संपत्ति मध्यम स्तर की बताई जाती है और उनके खिलाफ किसी प्रकार के आपराधिक मामलों का उल्लेख नहीं मिलता, जो उन्हें एक साफ छवि वाला नेता बनाता है।

    इन पांचों नेताओं की तुलना से यह साफ होता है कि भारतीय राजनीति में नेतृत्व केवल लोकप्रियता या अनुभव पर ही नहीं, बल्कि संपत्ति, शिक्षा और छवि जैसे कई पहलुओं पर भी निर्भर करता है। थलपति विजय का सबसे अमीर होना, हिमंत बिस्वा सरमा का सबसे शिक्षित होना और अन्य नेताओं की अलग-अलग विशेषताएं मिलकर यह दिखाती हैं कि राजनीतिक नेतृत्व की तस्वीर कितनी विविध और जटिल हो चुकी है।

  • चित्रकूट विश्वविद्यालय में भव्य दीक्षा समारोह, 2377 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, रामभद्राचार्य ने दिया प्रेरक संदेश

    चित्रकूट विश्वविद्यालय में भव्य दीक्षा समारोह, 2377 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, रामभद्राचार्य ने दिया प्रेरक संदेश


    नई दिल्ली। चित्रकूट स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में नवम दीक्षा समारोह का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें कुल 2377 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर दिव्यांग विद्यार्थियों की उपलब्धियों की विशेष सराहना की गई और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को प्रेरणादायक बताया गया।

    समारोह में 140 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 6 विद्यार्थियों को कुलाधिपति पदक तथा 50 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के आजीवन कुलाधिपति जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने की।

    मुख्य अतिथि नरेंद्र कश्यप ने दिव्यांग विद्यार्थियों की मेहनत और सफलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय समाज में प्रेरणा का केंद्र बन रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के विकास और वैश्विक पहचान दिलाने के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।

    इस अवसर पर सुहास एलवाई और अजीत कुमार को मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। समारोह में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों की बड़ी संख्या मौजूद रही।

    अपने संबोधन में रामभद्राचार्य ने कहा कि सच्ची दीक्षा वही है, जो व्यक्ति को केवल ज्ञान ही नहीं देती, बल्कि उसे राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिए प्रेरित भी करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में अनुशासन, सेवा और समर्पण को अपनाने का आह्वान किया।

  • अदाणी पब्लिक स्कूल के 25 वर्ष पूरे, हजारों छात्रों के भविष्य को मिली नई दिशा..

    अदाणी पब्लिक स्कूल के 25 वर्ष पूरे, हजारों छात्रों के भविष्य को मिली नई दिशा..

    नई दिल्ली। मुंद्रा स्थित अदाणी पब्लिक स्कूल ने अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस खास मौके पर स्कूल में सिल्वर जुबली समारोह का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें छात्र-छात्राएं, शिक्षक, पूर्व विद्यार्थी और अभिभावक बड़ी संख्या में शामिल हुए। पूरे कार्यक्रम में उत्साह और भावनाओं का माहौल देखने को मिला, जहां स्कूल की 25 साल की यात्रा और उपलब्धियों को याद किया गया।

    इस अवसर पर डॉ. प्रीति अदाणी ने स्कूल के सफर को बेहद भावुक अंदाज़ में साझा किया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान एक छोटे से विचार से शुरू होकर आज एक मजबूत शैक्षणिक परिवार बन चुका है, जिसने हजारों छात्रों के भविष्य को दिशा दी है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी सपना छोटा नहीं होता, जरूरत सिर्फ उसे पूरा करने के लिए साहस और लगातार मेहनत की होती है।

    समारोह के दौरान छात्रों के लिए नए इनडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और आधुनिक ऑडिटोरियम का उद्घाटन भी किया गया। इन सुविधाओं को शिक्षा के साथ-साथ खेल और अन्य गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    अपने संबोधन में उन्होंने स्कूल के शुरुआती दौर की चुनौतियों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि निर्माण के समय कई कठिन परिस्थितियां सामने आईं, लेकिन टीम ने हिम्मत नहीं हारी और हर चुनौती का सामना करते हुए काम को आगे बढ़ाया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी सफलता के पीछे धैर्य, मेहनत और सामूहिक प्रयास सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    आज यह स्कूल केवल एक शिक्षा संस्थान नहीं, बल्कि एक ऐसी विरासत बन चुका है जो लगातार आगे बढ़ रही है और नई पीढ़ियों को प्रेरित कर रही है। समारोह ने इस बात को और मजबूत किया कि सही दृष्टि और निरंतर प्रयास से बड़े से बड़ा सपना भी हकीकत बन सकता है।

  • कोर्स के दौरान शादी पर रोक ,नर्सिंग स्कूल का सख्त; फरमान छात्राओं में मचा हड़कंप

    कोर्स के दौरान शादी पर रोक ,नर्सिंग स्कूल का सख्त; फरमान छात्राओं में मचा हड़कंप


    नई दिल्ली । बिहार के गोपालगंज जिले के हथुआ स्थित जीएनएम नर्सिंग स्कूल से एक ऐसा आदेश सामने आया है जिसने शिक्षा व्यवस्था और छात्राओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर बहस छेड़ दी है। स्कूल प्रशासन की ओर से जारी इस निर्देश के अनुसार वहां पढ़ने वाली किसी भी छात्रा को कोर्स की अवधि के दौरान शादी करने की अनुमति नहीं होगी। यह अवधि लगभग तीन साल की बताई जा रही है। आदेश में साफ कहा गया है कि अगर इस दौरान किसी छात्रा के विवाह करने की जानकारी मिलती है तो उसका नामांकन तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित छात्रा की होगी।

    यह आदेश 16 अप्रैल 2026 को जारी किया गया बताया जा रहा है। आधिकारिक लेटर पर संस्थान की मुहर और प्राचार्या के हस्ताक्षर होने के कारण इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। आदेश में छात्राओं को सीधे तौर पर चेतावनी दी गई है कि वे शैक्षणिक सत्र के दौरान विवाह जैसे किसी भी व्यक्तिगत निर्णय से बचें अन्यथा उन्हें अपनी पढ़ाई से हाथ धोना पड़ सकता है।

    इस फरमान के सामने आने के बाद छात्राओं के बीच असमंजस और तनाव की स्थिति बन गई है। कई छात्राएं इसे अपनी निजी जिंदगी में हस्तक्षेप मान रही हैं तो कुछ इसे अनुशासन के नाम पर थोपे गए नियम के रूप में देख रही हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या किसी शैक्षणिक संस्थान को इस तरह का अधिकार है कि वह छात्राओं के निजी फैसलों पर रोक लगा सके।

    स्थानीय स्तर पर भी यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया है। शिक्षा और महिला अधिकारों से जुड़े लोग इसे असंवैधानिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ बता रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य छात्राओं को सशक्त बनाना होना चाहिए न कि उनके निजी जीवन पर नियंत्रण स्थापित करना।

    हालांकि इस पूरे मामले में स्कूल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्राचार्या से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। ऐसे में यह भी साफ नहीं हो पाया है कि यह आदेश किस आधार पर जारी किया गया और इसके पीछे प्रशासन की मंशा क्या है।

    इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आज के समय में भी शिक्षा संस्थानों में इस तरह के नियम लागू किए जा सकते हैं। जहां एक ओर देश में महिलाओं को बराबरी और स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है वहीं दूसरी ओर इस तरह के आदेश उन अधिकारों पर सवाल खड़े करते नजर आते हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है और संभव है कि उच्च स्तर पर इसकी जांच या हस्तक्षेप भी देखने को मिले।

  • कितनी पढ़ाई की डॉ. अंबेडकर ने? जानिए उनके जीवन के ऐतिहासिक योगदान

    कितनी पढ़ाई की डॉ. अंबेडकर ने? जानिए उनके जीवन के ऐतिहासिक योगदान


    नई दिल्ली। Dr. BR Ambedkar भारतीय इतिहास के सबसे शिक्षित और प्रभावशाली नेताओं में से एक माने जाते हैं। उन्होंने न सिर्फ उच्च शिक्षा हासिल की, बल्कि अपने ज्ञान और संघर्ष से देश के सामाजिक और संवैधानिक ढांचे को मजबूत किया।

    डॉ. अंबेडकर ने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी पढ़ाई की। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया और इसके बाद अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में मास्टर्स और पीएचडी की डिग्री हासिल की। इसके अलावा उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से भी डॉक्टरेट और कानून की पढ़ाई (Barrister-at-Law) पूरी की। उस दौर में इतनी उच्च शिक्षा हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी।

    डॉ. अंबेडकर जयंती के मौके पर पीएम मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

    Dr. BR Ambedkar ने कितनी पढ़ाई की और क्यों माने जाते हैं सबसे शिक्षित नेता
    डॉ. अंबेडकर ने कुल मिलाकर कई उच्च डिग्रियां हासिल की थीं, जिनमें अर्थशास्त्र, कानून और राजनीति जैसे विषय शामिल थे। वे पहले भारतीयों में से थे जिन्होंने विदेश जाकर इतनी ऊंची शिक्षा प्राप्त की।

    उनकी पढ़ाई सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने समाज को समझने और सुधारने के लिए अपने ज्ञान का इस्तेमाल किया। शिक्षा को वे सामाजिक बदलाव का सबसे बड़ा हथियार मानते थे और उन्होंने दलितों व पिछड़े वर्गों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया।

    संविधान निर्माण से लेकर सामाजिक सुधार तक योगदान
    डॉ. अंबेडकर का सबसे बड़ा योगदान भारतीय संविधान के निर्माण में रहा। उन्हें संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया गया था और उन्होंने देश को एक मजबूत लोकतांत्रिक ढांचा दिया।

    इसके अलावा उन्होंने दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया। उन्होंने छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और समाज में समानता की नींव रखी।

    उन्होंने श्रम कानूनों, महिलाओं के अधिकार और शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण काम किए। रिजर्वेशन नीति और सामाजिक न्याय की अवधारणा को मजबूत करने में उनका योगदान बेहद अहम रहा।

    कुल मिलाकर, डॉ. भीमराव अंबेडकर न सिर्फ एक महान विद्वान थे, बल्कि ऐसे समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने अपने ज्ञान और संघर्ष से भारत को नई दिशा दी।

  • अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक- उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक- उप मुख्यमंत्री शुक्ल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक है। रीवा में शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार को बेहतर बनाने के सभी प्रयास जारी हैं। हमारा प्रयास है कि गुणात्मक शिक्षा व बेहतर इलाज की सभी व्यवस्थायें रहें ताकि यहां के लोगों को उच्च शिक्षा व इलाज के लिये बाहर न जाना पड़े।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रविवार को यह विचार ीवा में लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा भवन के लोकार्पण अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपने संभाग को आदर्श संभाग बनायें। महाविद्यालय के प्राचार्यों का दायित्व है कि वह अपने महाविद्यालय में नवीन पाठ¬क्रम संचालन के लिये प्रयासरत रहें तथा प्राध्यापकों व विद्यार्थियों के साथ जीवंत संबंध बनायें रखें।

    उन्होंने कहा कि अच्छा प्रशासक वही है जो जमीनी फीड बैक लेकर कार्य करे। यह भवन उच्च स्तरीय सुविधाओं से युक्त है। जब कार्यालय अच्छा होता है तो कार्य करने की इच्छा भी बढ़ जाती है। इस कार्यालय भवन के द्वारा संभाग के सभी महाविद्यालयों के विकास व उच्च शिक्षा के गुणात्मक सुधार के सभी प्रयास तत्परता से होंगे।

    अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ. आर.पी. सिंह ने बताया कि लगभग 3 करोड़ रूपये से निर्मित भवन में सभी सुविधाएँ हैं। यहां से शासकीय, अशासकीय व अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों पर नियंत्रण होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विधि विधान से पूजन अर्चन कर भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर आयुक्त रीवा संभाग बीएस जामोद, अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय सहित महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।

  • दिल्ली बजट 2026 इंफ्रास्ट्रक्चर स्वास्थ्य शिक्षा और ग्रीन पहल को बड़ा बढ़ावा

    दिल्ली बजट 2026 इंफ्रास्ट्रक्चर स्वास्थ्य शिक्षा और ग्रीन पहल को बड़ा बढ़ावा

    नई दिल्ली में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट में विकास और जनकल्याण की बड़ी तस्वीर सामने आई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 1,03,700 करोड़ रुपए का बजट पेश करते हुए इसे केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि राजधानी के भविष्य का रोडमैप बताया। इस बजट में खास बात यह रही कि विकास के साथ पर्यावरण संतुलन पर जोर देते हुए कुल बजट का 21 प्रतिशत हिस्सा ग्रीन बजट के रूप में रखा गया है

    सरकार के अनुसार दिल्ली की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और जीएसडीपी में भी वृद्धि दर्ज की गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया गया है। लोक निर्माण विभाग को 5,921 करोड़ और शहरी विकास विभाग को 7,887 करोड़ रुपए देने का प्रस्ताव है। यमुनापार, अनधिकृत कॉलोनियों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए भी अलग से बजट निर्धारित किया गया है

    राजधानी में सड़कों और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 750 किलोमीटर सड़कों का पुनर्विकास, नए फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए जाएंगे। इसके साथ ही बारापुल्ला कॉरिडोर को जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है

    बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पावर सेक्टर के लिए 3,942 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसमें सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली लाइनों को भूमिगत करने की योजना शामिल है

    जल और सीवर व्यवस्था को सुधारने के लिए 9,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाकर 1,500 एमजीडी तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे स्वच्छता और जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी

    स्वास्थ्य क्षेत्र में 12,645 करोड़ रुपए का बजट रखते हुए सरकार ने अधूरे अस्पतालों को पूरा करने, आईसीयू सुविधाओं के विस्तार और नई स्वास्थ्य योजनाओं की घोषणा की है। आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ाया गया है और 750 नए आरोग्य केंद्र खोले जाएंगे। नवजात शिशुओं के लिए नई जांच सुविधाएं भी शुरू की जाएंगी

    शिक्षा क्षेत्र को भी इस बजट में विशेष प्राथमिकता दी गई है। 19,148 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ हजारों स्मार्ट क्लासरूम बनाए जाएंगे, छात्राओं को मुफ्त साइकिल और मेधावी छात्रों को लैपटॉप देने की योजना है। नई आईटीआई, एडुसिटी और खेल विश्वविद्यालय जैसे प्रोजेक्ट्स भी प्रस्तावित हैं

    महिला और बाल विकास के लिए 7,406 करोड़ रुपए का बजट रखते हुए महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा पर जोर दिया गया है। मुफ्त बस यात्रा, गैस सिलेंडर और नई योजनाएं जारी रहेंगी। साथ ही शहर में 50,000 नए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और वन स्टॉप सेंटर बनाए जाएंगे

    परिवहन क्षेत्र में 8,374 करोड़ रुपए के बजट के साथ इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा दिया जाएगा। 2027 तक 7,500 बसें और 2029 तक 12,000 ई बसों का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा मेट्रो और नमो भारत कॉरिडोर पर भी निवेश बढ़ाया जाएगा

    एमएसएमई सेक्टर और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां लाई जाएंगी, जिसमें वेयरहाउसिंग, सेमीकंडक्टर और ड्रोन पॉलिसी शामिल हैं। वहीं पर्यटन बजट में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है और पहली बार इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल आयोजित करने की योजना है

    पर्यावरण संरक्षण के लिए 822 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण, वेस्ट टू एनर्जी प्लांट और कार्बन क्रेडिट जैसी योजनाएं शामिल हैं। कचरा निपटान क्षमता को दोगुना करने का लक्ष्य भी तय किया गया है

  • उपराष्ट्रपति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में 1.2 लाख विद्यार्थियों को दी उपाधियां, महिला शिक्षा और राष्ट्र सेवा पर दिया जोर

    उपराष्ट्रपति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में 1.2 लाख विद्यार्थियों को दी उपाधियां, महिला शिक्षा और राष्ट्र सेवा पर दिया जोर


    नई दिल्ली । दिल्ली उपराष्ट्रपति एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और 1.2 लाख से अधिक स्नातकों को उपाधियां प्रदान कीं। समारोह में उन्होंने विश्वविद्यालय की 104 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा की सराहना करते हुए इसे भारत के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थानों में से एक बताया।

    उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय की शुरुआत मात्र तीन कॉलेजों दो संकायों आठ विभागों और 750 विद्यार्थियों से हुई थी वहीं आज यह 16 संकाय 86 विभाग 90 कॉलेज और छह लाख से अधिक विद्यार्थियों वाला एक विशाल शैक्षणिक संस्थान बन चुका है। उन्होंने विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार का भी उल्लेख किया और कहा कि यह शिक्षा में निरंतरता और उत्कृष्टता का प्रतीक है।

    उन्होंने स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि उपाधि केवल प्रमाण-पत्र नहीं है बल्कि समाज की सेवा राष्ट्र के कल्याण और राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत को निभाने की प्रतिबद्धता है। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि विकसित भारत @2047 को साकार करने की कुंजी युवाओं में निहित है और हर विद्यार्थी चाहे वह वैज्ञानिक शिक्षक कलाकार उद्यमी या नवोन्मेषक बने वह इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    विशेष रूप से उन्होंने महिला शिक्षा में हुई प्रगति की सराहना की। उपराष्ट्रपति ने बताया कि स्नातकों में 50 प्रतिशत से अधिक और स्वर्ण पदक विजेताओं में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं जो देश में शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास का प्रतीक है।

    स्नातकों को सामाजिक जिम्मेदारी नवाचार और प्रौद्योगिकी अनुसंधान तथा उद्यमिता के माध्यम से देश के विकास में योगदान देने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने उन्हें नशीले पदार्थों से दूर रहने और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने की सलाह दी।

  • शिक्षा के विस्तार के साथ भारतीय संस्कृति से जुड़ाव आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    शिक्षा के विस्तार के साथ भारतीय संस्कृति से जुड़ाव आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शिक्षा का विस्तार होना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों से जुड़ाव भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने यह विचार शुक्रवार शाम गांधी नगर स्थित सागर पब्लिक स्कूल के रजत जयंती समारोह में व्यक्त किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्कूल के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और सेवाभावी पदाधिकारियों का सम्मान भी किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यार्थियों का लक्ष्य केवल प्रशासनिक या पुलिस अधिकारी बनने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्हें श्रेष्ठ शिक्षक, समर्पित जनप्रतिनिधि, कुशल व्यापारी और अच्छे किसान बनने की भावना भी विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी ऐसे प्रकल्पों से जुड़ें, जिससे वे केवल नौकरी पाने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनें।

    डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारी संस्कृति मानवीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने यह भी कहा कि नई तकनीक के उपयोग के साथ भारतीय संस्कृति से जुड़े रहना हमेशा प्राथमिकता होनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की प्रगति की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि आज गूगल और अन्य वैश्विक संस्थाओं में भारतीय उच्च पदों पर कार्यरत हैं और देश का नाम रौशन कर रहे हैं।

    इस अवसर पर डॉ. यादव ने सागर समूह के स्कूल सहित सातवें शिक्षण संस्थान के शुभारंभ पर बधाई दी और समूह की शिक्षा क्षेत्र में 25 वर्ष की उपलब्धियों को सराहा। समारोह में उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा निर्मित विज्ञान मॉडल—जैसे प्लांट्स द्वारा जल प्रदूषण रोकना, विंड मिल और लाइव गार्ड मैनेजमेंट—का अवलोकन किया। साथ ही मिट्टी के शिल्प निर्माण करने वाले बच्चों से संवाद कर उनकी प्रतिभा की प्रशंसा की।

    मुख्यमंत्री ने कक्षा 10 वीं में अंशुमन मौर्य को भी सम्मानित किया, जिन्होंने 99.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया में तीसरी रैंक हासिल की।

    कार्यक्रम को रामेश्वर शर्मा ने भी संबोधित किया। समारोह की शुरुआत में सागर समूह के प्रमुख सुधीर अग्रवाल, सिद्धार्थ अग्रवाल और सागर अग्रवाल ने मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों का स्वागत किया।

    डॉ. यादव ने कहा कि शिक्षा सिर्फ ज्ञान देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संस्कार, मूल्य और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव का मार्ग भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में श्रेष्ठता, नैतिक मूल्यों और समाज के लिए योगदान देने की प्रेरणा दी।

  • भारत-फ्रांस मिलकर बनाएंगे एवरेस्ट ऊंचाई तक उड़ने वाला हेलीकॉप्टर

    भारत-फ्रांस मिलकर बनाएंगे एवरेस्ट ऊंचाई तक उड़ने वाला हेलीकॉप्टर


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि भारत और फ्रांस मिलकर विश्व का पहला हेलीकॉप्टर बनाएंगे, जो माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकेगा।

    पीएम मोदी ने इस अवसर पर कहा:

    फ्रांस भारत का सबसे पुराना स्ट्रैटजिक पार्टनर है। दोनों देश अब स्पेशल, ग्लोबल और स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप के रूप में संबंधों को आगे बढ़ा रहे हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य वैश्विक स्थिरता और प्रगति सुनिश्चित करना है। भारत और फ्रांस मिलकर इंडस्ट्री और इनोवेशन में सहयोग करेंगे, और स्टूडेंट और रिसर्च एक्सचेंज को बढ़ावा देंगे।

    हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी भारत-फ्रांस संबंधों में अभूतपूर्व गति लाएगा। यह परियोजना दोनों देशों के उच्च तकनीक और एविएशन अनुसंधान में सहयोग को भी दर्शाती है और हेलीकॉप्टर उद्योग में नई प्रौद्योगिकी के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।

    एवरेस्ट तक उड़ान भरने वाला हेलीकॉप्टर: दुनिया में पहला भारत-फ्रांस तकनीकी और औद्योगिक सहयोग ग्लोबल स्ट्रैटिजिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूती शिक्षा और रिसर्च एक्सचेंज को सुगम बनाना यह घोषणा भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते तकनीकी, औद्योगिक और वैश्विक सहयोग का प्रतीक है।

    तीन दिन का आधिकारिक दौरा
    फ्रांस के राष्ट्रपति 17 से 19 फरवरी तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। यह राष्ट्रपति मैक्रों का भारत का चौथा दौरा है और मुंबई में उनका पहला आधिकारिक कार्यक्रम है। राष्ट्रपति मैक्रों भारत सरकार के निमंत्रण पर एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए हैं। इस दौरे के दौरान वह 19 फरवरी को नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट में भी शामिल होंगे।

    भारत रवाना होने से पहले क्या बोले मैक्रों
    भारत आने से पहले राष्ट्रपति मैक्रों ने एक्स पर लिखा था कि वह मुंबई से नई दिल्ली तक तीन दिन के दौरे पर आ रहे हैं, ताकि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने बताया कि उनके साथ व्यापार, उद्योग, संस्कृति और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े प्रमुख लोग भी भारत आ रहे हैं, जो दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आगे लिखा, साथ मिलकर हम अपने सहयोग को और आगे बढ़ाएंगे। कल मिलते हैं, मेरे प्यारे दोस्त नरेंद्र मोदी।