Tag: Education

  • ज्ञान भारतम मिशन और सोमनाथ स्वाभिमान पर्व से जुड़ने का पीएम मोदी ने किया आह्वान

    ज्ञान भारतम मिशन और सोमनाथ स्वाभिमान पर्व से जुड़ने का पीएम मोदी ने किया आह्वान


    नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को स्वामीनारायण शिक्षापत्री के द्विशताब्दी महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भगवान स्वामीनारायण के जीवन और उनके उपदेश भारतवासियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहे हैं इस महोत्सव में भाग लेना हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है मोदी ने संतों और अनुयायियों को महोत्सव की शुभकामनाएं दी

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हमेशा से ज्ञानयोग का केंद्र रहा है हमारे ऋषि मुनियों ने वेदों उपनिषदों पुराणों और कथावचन के माध्यम से समाज को शिक्षित किया समय के अनुसार उन्होंने परंपराओं में नए अध्याय जोड़े ताकि समाज में शिक्षा और ज्ञान का प्रवाह लगातार बना रहे

    पीएम मोदी ने भगवान स्वामीनारायण के जीवन को साधना और सेवा का उदाहरण बताते हुए कहा कि उनका जीवन केवल आध्यात्मिक नहीं था बल्कि समाज और मानवता के लिए समर्पित था उन्होंने सरल शब्दों में जीवन का मार्गदर्शन दिया और लोकसेवा के महत्व को समझाया उनके अनुयायी आज भी शिक्षा स्वास्थ्य किसान कल्याण और जल संरक्षण के अभियान चला रहे हैं

    प्रधानमंत्री ने वोकल फॉर लोकल स्वच्छता और स्वदेशी अभियानों के महत्व को भी बताया और कहा कि इन प्रयासों से शिक्षापत्री के द्विशताब्दी समारोह का महत्व और बढ़ जाएगा उन्होंने ज्ञान भारतम मिशन का उल्लेख करते हुए देश के प्राचीन ज्ञान और पांडुलिपियों के संरक्षण में संगठन और नागरिकों से सहयोग करने का आग्रह किया

    पीएम मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का भी जिक्र किया और कहा कि सोमनाथ मंदिर की हजार साल की यात्रा को देश इस पर्व के रूप में मना रहा है उन्होंने अनुयायियों से कहा कि इस महोत्सव से जुड़कर इसके उद्देश्यों को जन-जन तक पहुँचाएं और देश की विकास यात्रा में भगवान स्वामीनारायण का आशीर्वाद हमेशा मिलता रहे

    प्रधानमंत्री ने कहा कि इस द्विशताब्दी समारोह से हमें अपने जीवन में साधना सेवा और शिक्षा के आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में कदम बढ़ाने की जरूरत है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को स्वामीनारायण शिक्षापत्री के द्विशताब्दी महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भगवान स्वामीनारायण के जीवन और उनके उपदेश भारतवासियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहे हैं इस महोत्सव में भाग लेना हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है मोदी ने संतों और अनुयायियों को महोत्सव की शुभकामनाएं दीप्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हमेशा से ज्ञानयोग का केंद्र रहा है हमारे ऋषि मुनियों ने वेदों उपनिषदों पुराणों और कथावचन के माध्यम से समाज को शिक्षित किया समय के अनुसार उन्होंने परंपराओं में नए अध्याय जोड़े ताकि समाज में शिक्षा और ज्ञान का प्रवाह लगातार बना रहे

    पीएम मोदी ने भगवान स्वामीनारायण के जीवन को साधना और सेवा का उदाहरण बताते हुए कहा कि उनका जीवन केवल आध्यात्मिक नहीं था बल्कि समाज और मानवता के लिए समर्पित था उन्होंने सरल शब्दों में जीवन का मार्गदर्शन दिया और लोकसेवा के महत्व को समझाया उनके अनुयायी आज भी शिक्षा स्वास्थ्य किसान कल्याण और जल संरक्षण के अभियान चला रहे हैंप्रधानमंत्री ने वोकल फॉर लोकल स्वच्छता और स्वदेशी अभियानों के महत्व को भी बताया और कहा कि इन प्रयासों से शिक्षापत्री के द्विशताब्दी समारोह का महत्व और बढ़ जाएगा उन्होंने ज्ञान भारतम मिशन का उल्लेख करते हुए देश के प्राचीन ज्ञान और पांडुलिपियों के संरक्षण में संगठन और नागरिकों से सहयोग करने का आग्रह किया

    पीएम मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का भी जिक्र किया और कहा कि सोमनाथ मंदिर की हजार साल की यात्रा को देश इस पर्व के रूप में मना रहा है उन्होंने अनुयायियों से कहा कि इस महोत्सव से जुड़कर इसके उद्देश्यों को जन-जन तक पहुँचाएं और देश की विकास यात्रा में भगवान स्वामीनारायण का आशीर्वाद हमेशा मिलता रहेप्रधानमंत्री ने कहा कि इस द्विशताब्दी समारोह से हमें अपने जीवन में साधना सेवा और शिक्षा के आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में कदम बढ़ाने की जरूरत है

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खाचरौद में 78.61 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया लोकार्पण

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खाचरौद में 78.61 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया लोकार्पण


    उज्जैन । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन जिले के खाचरौद में 78.61 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने क्षेत्र में शिक्षा, कृषि, और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के लिए कई योजनाओं का उद्घाटन किया।
    मुख्यमंत्री ने खाचरौद में 39 विकास कार्यों की शुरुआत की, जिनमें 16 पूर्ण और 23 नए कार्य शामिल हैं। इनमें 35.40 करोड़ रुपये की लागत से सांदीपनि विद्यालय भवन और 11.30 करोड़ रुपये की लागत से नई कृषि उपज मंडी प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय में आधुनिक शिक्षा सुविधाओं का प्रबंध किया जाएगा, जिससे छात्रों का भविष्य उज्जवल होगा।
    इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में स्मार्ट क्लासेस, संयुक्त तहसील कार्यालय, जनपद पंचायत भवन और स्वच्छ भारत मिशन से जुड़ी परियोजनाओं का भी भूमिपूजन किया। कृषि उपज मंडी में विश्राम भवन, भोजनालय और पेयजल की सुविधा भी प्रदान की जाएगी, ताकि किसानों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर खाचरौद में फूड प्रोसेसिंग पार्क की घोषणा की, जो क्षेत्र के कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार प्रदान करेगा। इसके अलावा, उन्होंने नागदा से खाचरौद होते हुए उज्जैन और जावरा तक फोरलेन हाईवे बनाने की योजना की भी जानकारी दी, जिससे क्षेत्र के नागरिकों को इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र से सीधा लाभ मिलेगा।
    किसानों के हित में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ घोषित किया और बताया कि सरकार गेहूं खरीदी पर 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दे रही है। इसके साथ ही, अगले तीन वर्षों में 32 लाख किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे।
    मुख्यमंत्री ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी लिंक परियोजना और केन-बेतवा परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे प्रदेश की सिंचाई क्षमता 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाई जाएगी, जिससे किसानों को  फायदेमंद होगा।कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों ने इन विकास कार्यों को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बताया। इस मौके पर उज्जैन सांसद अनि फिरोजिया, राज्यसभा सदस्य उमेशनाथ महाराज, खाचरौद विधायक डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान सहित अन्य जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहे।

  • कौन है बॉलीवुड का सबसे पढ़ा-लिखा खान: सलमान, शाहरुख या आमिर?

    कौन है बॉलीवुड का सबसे पढ़ा-लिखा खान: सलमान, शाहरुख या आमिर?


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के तीन दिग्गज खानों-सलमान खान, शाहरुख खान और आमिर खान-को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं कि इनमें से कौन सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा है। आइए जानते हैं उनके शैक्षणिक सफर के बारे में। सलमान खान का जन्म 1965 में हुआ। उन्होंने अपने शुरुआती साल ग्वालियर के द सिंधिया स्कूल में बिताए और बाद में मुंबई के सेंट स्टैनिस्लास हाई स्कूल से पढ़ाई पूरी की। हालांकि सलमान ने कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं की और 23 साल की उम्र में एक्टिंग करियर शुरू कर दिया। उनका पहला फिल्म प्रोजेक्ट 1988 की बीवी हो तो ऐसी में सपोर्टिंग रोल था और इसके बाद 1989 में सूरज बड़जात्या की मैंने प्यार किया में उन्होंने लीड रोल निभाया।

    शाहरुख खान की पढ़ाई थोड़ी अलग रही। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से इकोनॉमिक्स में बैचलर ऑफ आर्ट्स ऑनर्स की पढ़ाई की। हालांकि अपनी डिग्री उन्होंने साल 2016 में ही प्राप्त की क्योंकि वह खुद जाकर डिग्री लेना चाहते थे। शाहरुख ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी IIT में इंजीनियरिंग करने के लिए एंट्रेंस एग्जाम भी दिया और पास हुए, लेकिन उन्होंने IIT में दाखिला लेने के बजाय जामिया मिलिया इस्लामिया से मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री शुरू की। हालांकि इस कोर्स को उन्होंने बीच में ही छोड़ दिया।

    आमिर खान ने स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई के प्रतिष्ठित नरसी मोंजी कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स में दाखिला लिया। यहाँ उन्होंने दो साल तक इकोनॉमिक्स, बिजनेस स्टडीज और फाइनेंशियल अकाउंटिंग के लेक्चर अटेंड किए। इसके बाद उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया और फिल्म उद्योग में कदम रखा। आमिर ने नासिर हुसैन के तहत असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम शुरू किया और फिर बॉलीवुड में डेब्यू किया।

    इन तीनों खानों की पढ़ाई के आधार पर देखा जाए तो सलमान खान ने सबसे कम पढ़ाई की है, जबकि आमिर खान ने कॉलेज तक पढ़ाई पूरी की लेकिन उसे बीच में छोड़ दिया। शाहरुख खान पढ़ाई के मामले में सबसे आगे हैं, उन्होंने बैचलर की डिग्री पूरी की और आईआईटी की परीक्षा भी पास की। हालांकि उन्होंने मास्टर डिग्री पूरी नहीं की, फिर भी उनकी शिक्षा का स्तर अन्य दो खानों की तुलना में ज्यादा माना जाता है।इस प्रकार, शाहरुख खान को बॉलीवुड का सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा खान कहा जा सकता है। वहीं सलमान और आमिर ने अपने करियर की सफलता के लिए पढ़ाई के रास्ते को जल्दी छोड़ दिया और फिल्म इंडस्ट्री में अपना नाम बनाया। यह साबित करता है कि पढ़ाई और करियर की राह हमेशा एक जैसी नहीं होती; कुछ लोग शिक्षा पूरी करके भी बॉलीवुड में चमकते हैं, तो कुछ अपने हुनर से सफलता हासिल करते हैं।

  • वडोदरा का वेमार प्राइमरी स्कूल बना प्रेरणा का स्रोत, बच्चों को शिक्षा से बढ़कर भविष्य की दिशा दे रहा है

    वडोदरा का वेमार प्राइमरी स्कूल बना प्रेरणा का स्रोत, बच्चों को शिक्षा से बढ़कर भविष्य की दिशा दे रहा है


    अहमदाबाद । वडोदरा जिले के सावली तालुका स्थित वेमार प्राइमरी स्कूल आज गुजरात के सरकारी स्कूलों के लिए एक आदर्श उदाहरण बनकर उभर रहा है। यह स्कूल बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखता बल्कि उन्हें व्यावहारिक शिक्षा के जरिए भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है।गुजरात सरकार की ज्ञान ही शक्ति है पहल के तहत स्कूल में रचनात्मकता आत्मनिर्भरता और नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    स्कूल में नियमित पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को विभिन्न सह-पाठ्यक्रम और कौशल-आधारित गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से शामिल किया जाता है। इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनकी छिपी प्रतिभाएं सामने आ रही हैं। यहां रोबोट निर्माण हस्तशिल्प मार्बल आर्ट मार्शल आर्ट और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां शुरू की गई हैं जिन्हें लेकर छात्रों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।वेमार प्राइमरी स्कूल के शिक्षक बच्चों के मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं। वे न केवल पढ़ाई पर ध्यान देते हैं बल्कि बच्चों को प्रयोगात्मक सीख के लिए भी प्रेरित करते हैं। कक्षा में पढ़ाई और हाथों से सीखने के इस संतुलन ने प्राथमिक स्तर पर शिक्षा को अधिक रोचक और प्रभावी बना दिया है।

    शिक्षकों का मानना है कि बच्चों के शुरुआती वर्ष उनके बौद्धिक विकास और जीवन कौशल को मजबूत करने के लिए बेहद अहम होते हैं। इसी सोच के साथ यह स्कूल मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में लागू मिशन स्कूल्स ऑफ एक्सीलेंस और समग्र शिक्षा अभियान की नीतियों को जमीन पर उतार रहा है। अकादमिक पढ़ाई के साथ कौशल विकास पर जोर देकर वेमार प्राइमरी स्कूल ने गुजरात के सरकारी स्कूल तंत्र में समग्र और व्यावहारिक शिक्षा का एक नया मानक स्थापित किया है।गुजरात ने शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत और लगातार बढ़ता हुआ बुनियादी ढांचा तैयार किया है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च और तकनीकी शिक्षा तक राज्य में सार्वजनिक निवेश और नीतिगत फोकस के चलते हजारों सरकारी और अनुदानित स्कूलों को उन्नत कक्षाओं डिजिटल लर्निंग टूल्स विज्ञान प्रयोगशालाओं और पुस्तकालयों से लैस किया गया है।

    उच्च शिक्षा के स्तर पर गुजरात में विश्वविद्यालयों इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों का व्यापक नेटवर्क है। आईआईटी गांधीनगर आईआईएम अहमदाबाद और एम्स राजकोट जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान राज्य की शैक्षणिक पहचान को मजबूत करते हैं। अहमदाबाद गांधीनगर वडोदरा सूरत और राजकोट जैसे शिक्षा केंद्रों में मजबूत ढांचा छात्रावास शोध सुविधाएं और इनक्यूबेशन सेंटर उपलब्ध हैं। वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्मार्ट क्लासरूम ग्रामीण इलाकों तक शिक्षा की पहुंच को मजबूत कर रहे हैं जिससे गुजरात देश के अग्रणी शिक्षा राज्यों में अपनी जगह बना रहा है।

  • धार में भूमि पूजन देश का पहला पीपीपी मॉडल मेडिकल कॉलेज बनेगा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वास्थ्य क्रांति का केंद्र

    धार में भूमि पूजन देश का पहला पीपीपी मॉडल मेडिकल कॉलेज बनेगा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वास्थ्य क्रांति का केंद्र


    धार । मध्य प्रदेश के धार जिले में मंगलवार को एक ऐतिहासिक अवसर आया जब देश के पहले पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के मेडिकल कॉलेज का भूमि पूजन हुआ। इस ऐतिहासिक समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने प्रमुख रूप से हिस्सा लिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि यह मेडिकल कॉलेज अपने आप में एक अनोखा प्रयास है जो केवल शहरी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यह मेडिकल कॉलेज ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार देने का काम करेगा।

    नड्डा ने इस मौके पर बताया कि यह मेडिकल कॉलेज पब्लिक और प्राइवेट क्षेत्र की साझेदारी से बनाया जा रहा है और यह देश में अपनी तरह का पहला संस्थान है। उन्होंने यह भी कहा कि धार में स्थापित होने वाला यह मेडिकल कॉलेज स्वास्थ्य सेवा में क्रांति लाएगा। यहां से पास होने वाले एमबीबीएस डॉक्टर देश के दूरदराज के गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेंगे जिससे ग्रामीण इलाकों में चिकित्सकीय सेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा।

    इस परियोजना के तहत छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा दी जाएगी और उन्हें प्रैक्टिकल अनुभव के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा जाएगा जिससे वे वहां के स्वास्थ्य मुद्दों को समझकर समाधान ढूंढ सकें। साथ ही कॉलेज के निर्माण से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे जिससे जिले की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।

    इस योजना के सफल होने के बाद इसे दूसरे राज्यों में भी लागू किया जा सकता है जिससे भारत के अन्य क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो सके। इस पहल से यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि दूरदराज के क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी को दूर किया जाएगा और गांवों में अधिक से अधिक डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अपने संबोधन में बताया कि यह मेडिकल कॉलेज न केवल शिक्षा का केंद्र बनेगा बल्कि यह धार जिले और आसपास के क्षेत्रों के लिए एक स्वस्थ भविष्य का मार्गदर्शन करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रोजेक्ट के जरिए प्रदेश में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा प्राप्त होगी।