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  • SIR से जुड़े प्रमुख फैसले सामूहिक रूप से लिए गए…. SC में चुनाव आयोग ने किया अपना बचाव!

    SIR से जुड़े प्रमुख फैसले सामूहिक रूप से लिए गए…. SC में चुनाव आयोग ने किया अपना बचाव!


    नई दिल्ली।
    चुनाव आयोग ( Election Commission) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अपने कामकाज और फैसले लेने की प्रक्रिया का बचाव किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची (Electoral Roll) के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special In-depth Review- SIR) से जुड़े प्रमुख फैसले सामूहिक रूप से लिए गए थे। आयोग के तीनों सदस्यों ने हलफनामा दाखिल करने को भी सर्वसम्मति से मंजूरी दी।

    हालांकि, आयोग के इस जवाब से उसके कामकाज को लेकर उठे सभी सवालों का समाधान नहीं हुआ है। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार अपनी टिप्पणियां दर्ज की थीं। इनमें कई मामलों में उन्होंने फैसले लिए जाने के बाद इसकी जानकारी मिलने की बात कही थी। यही इस पूरे विवाद का अहम पहलू है। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आयोग ने आखिरकार किसी फैसले को मंजूरी दी या नहीं, बल्कि यह भी है कि क्या उसके दोनों अन्य सदस्यों को आयोग के नाम पर की जा रही कार्रवाई की जानकारी और उसमें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिला। आरोप ये लग रहे हैं कि सभी फैसले ज्ञानेश कुमार खुद ले रहे थे।


    फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर क्या विवाद है?

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 को लेकर भी आयोग के हलफनामे में सफाई दी गई है। मई में चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि मतदाता पंजीकरण के लिए निर्धारित फॉर्म 6 में बदलाव करने के लिए निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 में संशोधन जरूरी है। सुखबीर सिंह संधू ने भी इस बात से सहमति जताई थी।

    इसके बावजूद जुलाई में फॉर्म 6 के ऑनलाइन वर्जन में बदलाव दिखाई दिया। संधू को इसकी जानकारी एक अखबार की रिपोर्ट से मिली। अगस्त में उन्होंने ऑनलाइन फॉर्म में जोड़ी गई घोषणा को अनधिकृत और अवैध बताया था।

    अब आयोग ने हलफनामे में कहा है कि SIR के दौरान जोड़ी गई घोषणा फॉर्म 6 में संशोधन नहीं थी, बल्कि एक अलग दस्तावेज था। हालांकि, आयोग ने यह भी स्वीकार किया कि ऑनलाइन आवेदन में घोषणा को जिस तरह दिखाया गया, उससे ऐसा लग सकता था कि फॉर्म 6 में बदलाव किया गया है।

    आयोग ने माना कि अधिकारियों की ओर से उठाए गए कुछ कदमों में सुधार की जरूरत थी। इसके बाद आयोग के निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण प्रभाग ने 21 अक्टूबर को ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में वैधानिक फॉर्म 6 और SIR से जुड़ी घोषणा को अलग-अलग करने का फैसला लिया।

    लेकिन हलफनामे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि जुलाई में ऑनलाइन फॉर्म में घोषणा जोड़ने की मंजूरी किसने दी थी। यह भी नहीं बताया गया कि दो चुनाव आयुक्तों की ओर से इस संबंध में लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने के बावजूद यह बदलाव कैसे लागू हुआ।


    ECINet के कामकाज पर भी उठे सवाल

    चुनाव आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। इस प्लेटफॉर्म के जरिये मतदाता सूची से जुड़े कई काम किए जाते हैं। हलफनामे में आयोग ने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें बदलाव करने की वैधानिक जिम्मेदारी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) की होती है। आयोग के मुताबिक, ERO के आदेश के बिना किसी मतदाता का नाम जोड़ा, हटाया या संशोधित नहीं किया जाता। सॉफ्टवेयर का उद्देश्य अधिकारियों को उनके अधिकारों का इस्तेमाल करने में मदद करना है।

    आयोग ने प्लेटफॉर्म की कानूनी अनुपालन प्रक्रिया की समीक्षा और नए आईटी मॉड्यूल की जांच के लिए भी नई व्यवस्था का उल्लेख किया। इसके तहत आईआईटी मुंबई और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के विशेषज्ञों वाली समिति का प्रावधान किया गया है।

    हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी ही व्यवस्था का सुझाव विवेक जोशी ने 29 मई को दिया था। उन्होंने मतदाता सूची के डेटाबेस में अधिकारों के धीरे-धीरे केंद्रीकरण को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने सुझाव दिया था कि आईआईटी के किसी बाहरी विशेषज्ञ की मदद से यह प्रमाणित कराया जाए कि डेटाबेस में बदलाव करने का अधिकार केवल संबंधित वैधानिक अधिकारियों के पास हो।

    सुखबीर सिंह संधू ने भी जुलाई में इस सुझाव का समर्थन किया था। लेकिन 14 अगस्त को दर्ज अपनी टिप्पणी में संधू ने कहा था कि उनके पहले के सुझावों पर क्या हुआ, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। आयोग के हलफनामे में समिति बनाने के फैसले का जिक्र है, लेकिन मई में दिए गए इस सुझाव का उल्लेख नहीं किया गया है।


    गोवा में 97 मतदाताओं के नाम का मामला

    गोवा में मतदाता सूची से जुड़े मामले का भी हलफनामे में उल्लेख है। आयोग के अनुसार, अंतिम मतदाता सूची से बाहर रह गए 97 मतदाताओं में से 88 ने बाद में फॉर्म 6 के जरिए आवेदन किया। हालांकि, इससे पहले फरवरी में सामने आई समस्या का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा के निर्वाचन अधिकारियों ने सात दिनों के भीतर आठ बार सॉफ्टवेयर में जरूरी बदलाव करने का अनुरोध किया था, ताकि हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने के उनके फैसलों को लागू किया जा सके।

    आयोग के एक उप निर्वाचन आयुक्त ने भी टिप्पणी की थी कि आईटी सिस्टम जरूरी कार्रवाई को नहीं रोक सकता। हलफनामे में बाद में 88 मतदाताओं के आवेदन करने की जानकारी तो दी गई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि फरवरी में अधिकारियों को अपने फैसले लागू करने में परेशानी क्यों हुई थी।


    पश्चिम बंगाल में अपीलों को लेकर भी सवाल

    पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ दाखिल अपीलों का मामला भी हलफनामे में उठाया गया है। आयोग ने कहा कि ये अपीलें राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अधिकारियों ने दाखिल की थीं और इस मामले को आयोग के सामने नहीं लाया गया था। आयोग ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत संबंधित अधिकारियों को अपील दाखिल करने का अधिकार था। हालांकि, इस मामले में भी कुछ सवाल बिना जवाब के ही रहे।

  • इंदौर में कांग्रेस को घेरने की तैयारी में BJP, 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक अभियान, कैलाश विजयवर्गीय ने विदेशी ताकतों पर साधा निशाना

    इंदौर में कांग्रेस को घेरने की तैयारी में BJP, 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक अभियान, कैलाश विजयवर्गीय ने विदेशी ताकतों पर साधा निशाना


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर जारी सियासी बहस के बीच भाजपा ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के आरोपों का जवाब देने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक लोकतंत्र बचाओ भीड़तंत्र हटाओ अभियान चलाएगी। इसके तहत पदयात्रा से लेकर प्रबुद्धजन गोष्ठी और युवा संवाद तक कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भाजपा का कहना है कि इन गतिविधियों के जरिए चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस तथा इंडी गठबंधन की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब जनता तक पहुंचाया जाएगा।

    भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के मुताबिक कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों से संवैधानिक संस्थाओं के प्रति लोगों के विश्वास को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। पार्टी इसी मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है। भाजपा का आरोप है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाकर भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। हालांकि चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर विपक्ष की आपत्तियों पर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बहस जारी है। भाजपा इस अभियान के माध्यम से अपना पक्ष जनता के सामने रखने की कोशिश करेगी।

    अभियान की तैयारियों को लेकर बुधवार रात इंदौर में बैठक आयोजित की गई। इसमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समेत पार्टी के कई जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में अभियान की रूपरेखा और अलग-अलग कार्यक्रमों की जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई। भाजपा ने तय किया है कि अभियान को केवल राजनीतिक सभाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि विभिन्न वर्गों के लोगों से संवाद कर पार्टी अपनी बात पहुंचाएगी।

    सुमित मिश्रा ने बताया कि अभियान के तहत 1 नवंबर को लोकतंत्र बचाओ भीड़तंत्र हटाओ पदयात्रा निकाली जाएगी। हालांकि पदयात्रा का शुरुआती स्थान और रूट अभी तय नहीं किया गया है। इसके अलावा प्रबुद्धजनों की गोष्ठी आयोजित होगी जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को शामिल करने की योजना है। युवाओं के साथ संवाद और छात्रों के लिए प्रतिस्पर्धाएं भी आयोजित की जाएंगी। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ बातचीत के जरिए भी अभियान का संदेश लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है।

    बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि श्रीलंका फ्रांस बांग्लादेश और नेपाल सहित कई देशों में अशांति का माहौल देखने को मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी ताकतें भारत को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहतीं और देश के विकास में बाधा डालने की कोशिश कर रही हैं। विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा की लड़ाई केवल किसी एक राजनीतिक दल या संस्था तक सीमित नहीं है बल्कि उन ताकतों के खिलाफ भी है जो उनके मुताबिक भारत की प्रगति को रोकना चाहती हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अभियान के जरिए विपक्ष के कथित षड्यंत्र को जनता के सामने रखें।

    अभियान को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए भाजपा ने अलग-अलग टोलियां भी बनाई हैं। नगर स्तरीय टोली के संयोजक सुधीर कोल्हे को बनाया गया है जबकि महेश कुकरेजा कैलाश पीपले हरप्रीत सिंह बक्शी मुकेश मंगल नेहा शर्मा और दीपक बागवान को जिम्मेदारी दी गई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस की टोली में आलोक दुबे वरुण पाल रितेश शर्मा और नितीन शर्मा शामिल हैं। पदयात्रा की जिम्मेदारी विधायक रमेश मेंदोला मधु वर्मा गोलू शुक्ला पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय स्वप्निल कोठारी और अक्षय कांति बम को सौंपी गई है। वहीं राष्ट्र चिंतन संवाद टोली में सांसद शंकर लालवानी सहित कई नेताओं को शामिल किया गया है।

    भाजपा का यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब चुनाव आयोग की भूमिका और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अब देखना होगा कि अभियान के दौरान भाजपा अपने तर्कों को जनता तक किस तरह पहुंचाती है और विपक्ष इन कार्यक्रमों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

  • यूपी MLC चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर बवाल, वायरल सूची में अजीबोगरीब नामों का दावा, भाजपा की शिकायत पर जांच तेज

    यूपी MLC चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर बवाल, वायरल सूची में अजीबोगरीब नामों का दावा, भाजपा की शिकायत पर जांच तेज

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन सीटों पर मतदान से ठीक पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इलाहाबाद झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की एक मतदाता सूची सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। वायरल सूची में कुछ ऐसे नाम और पिता के नाम दर्ज होने का दावा किया गया है जिन्हें देखकर लोग हैरान हैं। मामला सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने जांच के निर्देश दिए हैं। झांसी के मंडलायुक्त से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है और गुरुवार दोपहर तक रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। शुक्रवार 23 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों पर मतदान होना है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले उठे इन सवालों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रही सूची में राम ने यादव को मारा और मूर्खचंद जैसे नामों का उल्लेख किया जा रहा है। कुछ प्रविष्टियों में मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम असामान्य बताए गए हैं। सूची में नरेंद्र यादव के पिता का नाम बीकाम लिखे होने और कुछ अन्य मतदाताओं के नामों में भी गड़बड़ी होने का दावा किया गया है। हालांकि इन वायरल प्रविष्टियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि ये वास्तविक मतदाता सूची की त्रुटियां हैं या किसी अन्य कारण से ऐसे नाम दर्ज दिखाई दे रहे हैं। निर्वाचन आयोग की जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

    निर्वाचन आयोग ने आधी रात के बाद अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर जानकारी दी कि इलाहाबाद झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में अजीब नाम होने की सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से मिली है। इसके बाद झांसी के मंडलायुक्त को जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया। मंडलायुक्त इस निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी भी हैं। मतदान से कुछ घंटे पहले मामला सामने आने के कारण जांच और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

    इस विवाद के बीच भाजपा ने भी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव अधिकारियों से शिकायत की है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया है कि सूची में बड़ी संख्या में फर्जी और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम शामिल हैं। भाजपा के चुनाव आयोग संपर्क विभाग के प्रदेश संयोजक अखिलेश कुमार अवस्थी ने दावा किया कि कुछ प्रभावशाली स्नातक नेताओं ने एक ही व्यक्ति के नाम को दो से तीन बार दर्ज कराया है। पार्टी की ओर से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर ऐसे नामों की जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

    भाजपा नेताओं के शिकायती पत्र के मुताबिक मतदाता सूची में कुल 4397 डुप्लीकेट मतदाता होने का दावा किया गया है। इनमें प्रयागराज में 3163 नाम होने की बात कही गई है। इसके अलावा कौशांबी में 320 जालौन में 179 झांसी में 178 बांदा में 140 फतेहपुर में 139 ललितपुर में 109 हमीरपुर में 81 चित्रकूट में 68 और महोबा में 20 डुप्लीकेट नाम होने का आरोप लगाया गया है। इन आंकड़ों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मतदाता सूची में उम्र और पात्रता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। भाजपा का कहना है कि कुछ ऐसे लोगों के नाम सूची में शामिल हैं जिनकी जन्मतिथि के आधार पर उनकी पात्रता संदिग्ध है। स्नातक निर्वाचन में मतदान के लिए निर्धारित कानूनी शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है। प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि यदि उनका नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है तो वे निर्धारित मतदान केंद्र पर ही वोट डालें। एक से अधिक स्थानों पर मतदान करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

    अब सबकी नजर निर्वाचन आयोग की जांच रिपोर्ट पर है। जांच से यह स्पष्ट होगा कि वायरल सूची में दिखाई गई गड़बड़ियां कितनी वास्तविक हैं और डुप्लीकेट नामों को लेकर किए गए दावों में कितनी सच्चाई है। मतदान से पहले मतदाता सूची की शुद्धता और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

  • भारत में वोट चोरी के आरोपों से लेकर लंदन की संसद तक गरमाई सियासत, ध्रुव राठी के खिलाफ भी जुटे लोग, दोनों गुटों को पुलिस ने किया अलग

    भारत में वोट चोरी के आरोपों से लेकर लंदन की संसद तक गरमाई सियासत, ध्रुव राठी के खिलाफ भी जुटे लोग, दोनों गुटों को पुलिस ने किया अलग


    नई दिल्ली। लंदन में यूट्यूबर ध्रुव राठी के प्रदर्शन को लेकर सियासी माहौल गरमा गया। शनिवार को लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में ध्रुव राठी के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग जुटे तो दूसरी ओर उनके विरोध में भी लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते दोनों समूहों के बीच तनाव बढ़ने लगा। हालात को संभालने के लिए मेट्रोपॉलिटन पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। पुलिस अधिकारियों ने दोनों गुटों को अलग रखा ताकि स्थिति बिगड़ने से रोकी जा सके। इस प्रदर्शन के केंद्र में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारत में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवाल रहे।
    ध्रुव राठी ने संसद चौक पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह वही देश है जिसने कभी भारत पर शासन किया था और आज भारतीय नागरिक उसी देश की संसद के सामने खड़े होकर अपनी बात रख रहे हैं। राठी ने इसे लोकतंत्र की ताकत बताते हुए कहा कि अपने देश में विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं मिलती लेकिन लंदन में लोग खुलकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में प्रदर्शन रोकने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी और हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया था। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के साथ मारपीट हुई और उन्हें उनके घर से जबरन ले जाया गया। हालांकि ये आरोप राठी के बयान का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से जरूरी है।
    राठी ने कहा कि उनका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति को इस पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए जिस पर सरकार और विपक्ष दोनों की सहमति हो। उनके मुताबिक यह मांग इसलिए उठाई जा रही है ताकि आगामी चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराए जा सकें और प्रत्येक नागरिक को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर मिले। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपने परिवार और परिचितों के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा करने की अपील की।
    इस प्रदर्शन का आयोजन इंडियन ओवरसीज कांग्रेस की युवा शाखा ने किया था। इसे ब्रिटेन में सक्रिय कुछ भारतीय छात्र संगठनों और प्रवासी भारतीय समूहों का समर्थन भी मिला। प्रदर्शन के दौरान इंकलाब जिंदाबाद और वंदे मातरम के नारे लगाए गए। इसके साथ ही भारतीय संविधान की प्रस्तावना पढ़कर लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों का संदेश देने की कोशिश की गई। आयोजकों ने कहा कि मतदाता सूची और चुनाव व्यवस्था से जुड़े सवालों पर आवाज उठाना जरूरी है।
    दूसरी ओर ध्रुव राठी के विरोध में भी एक जवाबी प्रदर्शन आयोजित किया गया। इंडिया डायस्पोरा यूके ने भारत समर्थक लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की थी। संगठन के संस्थापक हृदेश गुप्ता ने कहा कि ब्रिटेन में भारतीय प्रवासी समुदाय मजबूत और विकसित भारत के दृष्टिकोण के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के समर्थन में खड़ा है। इस तरह एक ही स्थान पर अलग-अलग राजनीतिक विचार रखने वाले समूह आमने-सामने आ गए।
    दोनों पक्षों की ओर से लगातार नारेबाजी के कारण माहौल तनावपूर्ण होता गया। हर समूह दूसरे की आवाज को दबाने के लिए तेज नारे लगाने लगा। इसके बाद पुलिस ने दोनों समूहों के बीच दूरी बनाए रखी। लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में हुआ यह घटनाक्रम एक बार फिर दिखाता है कि भारत की चुनावी राजनीति और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी चर्चा और बहस का विषय बने हुए हैं।

  • प्रदर्शन से कौन-कौन सांसद रहा गायब, राहुल गांधी की नजर में आए सभी सांसद, सहयोगियों ने मिलकर दिखाई एकजुटता

    प्रदर्शन से कौन-कौन सांसद रहा गायब, राहुल गांधी की नजर में आए सभी सांसद, सहयोगियों ने मिलकर दिखाई एकजुटता


    नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की मुहिम को मजबूत बनाने के लिए इस बार संगठन और रणनीति दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभाई है। INDIA गठबंधन के प्रदर्शन में बढ़ती भागीदारी के पीछे राहुल गांधी की निगरानी और सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल को अहम वजह माना जा रहा है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक राहुल गांधी ने न केवल प्रदर्शन में शामिल होने वाले सांसदों की मौजूदगी पर नजर रखी बल्कि गैरहाजिर रहने वाले नेताओं की सूची तैयार करने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही उन्होंने सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं से सीधे संपर्क कर उन्हें आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।

    कांग्रेस सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी अपनी कोर टीम के साथ लगातार बैठकें कर रहे थे। इस टीम में प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा केसी वेणुगोपाल और अन्य रणनीतिक सहयोगी शामिल थे। बैठकों में प्रदर्शन की रूपरेखा तय करने के साथ सांसदों और पार्टी नेताओं की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई। शुरुआती प्रदर्शनों में कुछ कांग्रेस सांसदों की गैरमौजूदगी को गंभीरता से लिया गया। इसके बाद राहुल गांधी ने संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से प्रदर्शन में शामिल होने वाले और गैरहाजिर रहने वाले सांसदों की सूची तैयार करने को कहा। पार्टी के एक सूत्र के मुताबिक जब सांसदों को पता चला कि राहुल गांधी खुद उनकी मौजूदगी पर नजर रख रहे हैं तो प्रदर्शन में उनकी भागीदारी बढ़ने लगी।

    राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने पार्टी नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि आंदोलन में भागीदारी को लेकर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस की कोशिश थी कि सांसद केवल सोशल मीडिया पर बयान देने तक सीमित न रहें बल्कि जमीन पर उतरकर भी अपनी भूमिका निभाएं। प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ाने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए। दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय को कार्यकर्ताओं के ठहरने के लिए खोला गया। हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के नेताओं ने कार्यकर्ताओं के आने और उनके ठहरने की व्यवस्था में सहयोग किया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विभिन्न राज्यों के नेताओं से संपर्क कर उन्हें जल्द दिल्ली पहुंचने का आग्रह किया।

    इस पूरी रणनीति का दूसरा अहम हिस्सा INDIA गठबंधन के सहयोगियों को साथ लेकर चलना था। राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और माकपा के एमए बेबी समेत कई नेताओं से संपर्क किया। इससे पहले कुछ प्रदर्शनों के दौरान सहयोगी दलों को पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने और कांग्रेस नेताओं को अधिक प्रमुखता दिए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इन मतभेदों को दूर करने के लिए कांग्रेस ने इस बार छोटे दलों को भी महत्व देने पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए मार्च के दौरान राहुल गांधी जिस खुले ट्रक से नेतृत्व कर रहे थे उसमें सहयोगी दलों और छात्र संगठनों के नेताओं को भी जगह दी गई। इससे यह संदेश देने की कोशिश हुई कि आंदोलन किसी एक पार्टी का शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि विपक्ष की साझा मुहिम है।

    राहुल गांधी की पहल का असर गठबंधन के भीतर समन्वय में भी दिखाई दिया। समाजवादी पार्टी समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने इस बार कांग्रेस के साथ बेहतर तालमेल की बात कही। कांग्रेस ने राजनीतिक दलों के साथ छात्र संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को भी आंदोलन से जोड़ने की कोशिश की। सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं को प्रदर्शन में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया ताकि चुनाव आयोग से जुड़े सवालों पर व्यापक समर्थन जुटाया जा सके।

    कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक चुनाव आयोग से संबंधित मुद्दों और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस कार्यसमिति तथा INDIA गठबंधन की बैठकों में चर्चा हुई। विपक्षी दलों ने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इस विषय पर एकजुट होकर आवाज उठाने पर जोर दिया। कांग्रेस का मानना है कि सांसदों की सक्रिय भागीदारी सहयोगियों के साथ बेहतर समन्वय और नागरिक समाज की हिस्सेदारी से आंदोलन को व्यापक बनाया जा सकता है। हालांकि इस रणनीति का वास्तविक राजनीतिक असर आने वाले समय में स्पष्ट होगा लेकिन फिलहाल राहुल गांधी की सक्रियता ने विपक्षी एकजुटता और संगठनात्मक अनुशासन को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • उमर अब्दुल्ला ने पीएम मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर की तारीफ की, INDIA गठबंधन के प्रदर्शन पर भी दी प्रतिक्रिया

    उमर अब्दुल्ला ने पीएम मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर की तारीफ की, INDIA गठबंधन के प्रदर्शन पर भी दी प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने पर उन्हें बधाई दी है। श्रीनगर में मीडिया से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि 25 साल तक लगातार चुनाव जीतते रहना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी सफलता प्रधानमंत्री मोदी के मतदाताओं के साथ मजबूत और लंबे समय से चले आ रहे जुड़ाव को दर्शाती है। उमर अब्दुल्ला ने अपनी और अपनी सरकार के सहयोगियों की ओर से प्रधानमंत्री को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 साल तक लगातार चुनाव जीतना आसान नहीं है। यह सफर पहले राज्य स्तर पर और फिर केंद्र स्तर पर जारी रहा है। उन्होंने लगातार जीत के सिलसिले को आधुनिक राजनीति में एक असाधारण उपलब्धि बताया। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इतने लंबे समय तक चुनावी सफलता बनाए रखना अपने आप में महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद वे देश के प्रधानमंत्री बने और अब सरकार के मुखिया के रूप में 25 साल पूरे कर चुके हैं।

    उमर अब्दुल्ला ने INDIA गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर दिए गए बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ INDIA गठबंधन की ओर से किए जा रहे प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि यह विरोध पिछले दिनों दिल्ली में हुई गठबंधन की बैठक का नतीजा है। उन्होंने प्रदर्शन को मनगढ़ंत और फर्जी बताए जाने के दावों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने इस मुद्दे को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

    मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर जारी सार्वजनिक विरोध और राजनीतिक विवाद पर उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार के उस दावे को चुनौती दी, जिसमें खोजी पत्रकारिता की रिपोर्टों को बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताया गया है। उन्होंने प्रदर्शन के संदर्भ में कहा कि अगर यह मामला फर्जी होता तो सबसे पहले उस अखबार के खिलाफ कार्रवाई की जाती, जिसकी रिपोर्ट के जरिए यह पूरा मामला सामने आया है। उमर अब्दुल्ला ने इस आधार पर प्रदर्शन को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई।

    श्रीनगर में कश्मीर घाटी के एक बड़े खेल आयोजन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 साल की राजनीतिक यात्रा के महत्व को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी जीत हासिल करना आसान नहीं है और लंबे समय तक मतदाताओं के साथ जुड़ाव बनाए रखना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसी बातचीत के दौरान उन्होंने INDIA गठबंधन के प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे विरोध को लेकर भी अपना पक्ष रखा।

  • राहुल गांधी ने शुरू की ‘सत्याग्रह’ पहल, लोगों से अन्याय और अधिकारों से जुड़े संघर्ष की कहानी भेजने की अपील

    राहुल गांधी ने शुरू की ‘सत्याग्रह’ पहल, लोगों से अन्याय और अधिकारों से जुड़े संघर्ष की कहानी भेजने की अपील

    नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देशभर में अपने अधिकारों और अलग-अलग मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे लोगों की आवाज को एक मंच पर लाने के लिए ‘सत्याग्रह’ नाम से डिजिटल पहल शुरू की है। उन्होंने शनिवार को लोगों से अपील की कि जो भी व्यक्ति किसी अन्याय के खिलाफ लड़ रहा है, वह अपनी कहानी साझा करे। इस पहल के तहत लोगों के संघर्ष और आंदोलनों की जानकारी एक डिजिटल नक्शे पर दिखाई जाएगी, जिससे समान मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे अन्य लोगों और समूहों के बारे में भी जानकारी मिल सकेगी। राहुल गांधी ने कहा कि नेता विपक्ष के तौर पर वह संसद से लेकर सड़क तक जरूरत पड़ने पर लोगों के साथ खड़े रहेंगे।

    राहुल गांधी ने कहा कि देशभर में लोग अपने हक के लिए लड़ रहे हैं और अक्सर उनकी लड़ाई अकेले रह जाती है। उन्होंने जेन-जी, छात्रों, किसानों, आदिवासियों, दलितों और महिलाओं के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर संघर्ष की अपनी कहानी है, लेकिन अकेले उठने वाली आवाज अक्सर दब जाती है। उनके अनुसार, ‘सत्याग्रह’ का उद्देश्य इन आवाजों को एक साथ लाना है। उन्होंने महात्मा गांधी की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य एक बड़ा हथियार है और सत्य के साथ एकजुट होकर खड़ा होना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से अपनी कहानी साझा करने को कहा और बताया कि इसमें करीब दो मिनट लगेंगे।

    इस पहल का नाम महात्मा गांधी के सत्याग्रह से जुड़ा है। गांधी हेरिटेज पोर्टल महात्मा गांधी के जीवन, लेखन, सत्याग्रह और अन्य गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों का डिजिटल संग्रह उपलब्ध कराता है। उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड में गांधीजी के लेखन और पत्राचार का व्यापक संग्रह दर्ज है। हालांकि, दी गई खबर में गांधीजी को भेजे गए 8,500 से अधिक पत्रों का जो विशेष आंकड़ा बताया गया है, उसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से स्पष्ट रूप से नहीं हो सकी। आधिकारिक अभिलेखों में गांधीजी से संबंधित पत्रों का बड़ा संग्रह दर्ज होने की जानकारी उपलब्ध है।

    राहुल गांधी की इस पहल के साथ देश में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और अन्य समूहों की ओर से प्रदर्शन किए गए हैं। 2 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। इसी बीच विपक्षी सांसदों के 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च करने की योजना भी घोषित की गई थी।

    मतदाता सूची से जुड़े विवाद के बीच फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता डेटा तक राज्यों की पहुंच, पश्चिम बंगाल में अपीलों और गोवा के 97 मतदाताओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के सॉफ्टवेयर में बदलावों की समीक्षा शुरू की है और एक समिति को इसकी जांच की जिम्मेदारी दी है। राहुल गांधी की ‘सत्याग्रह’ पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब देशभर में अलग-अलग मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलनों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विवाद सार्वजनिक चर्चा में हैं।

  • SIR प्रक्रिया पर बॉम्बे हाईकोर्ट की चुनाव आयोग को फटकार, बिना सुनवाई नाम हटाने पर कानून का पालन करने को कहा

    SIR प्रक्रिया पर बॉम्बे हाईकोर्ट की चुनाव आयोग को फटकार, बिना सुनवाई नाम हटाने पर कानून का पालन करने को कहा


    नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। गोवा में SIR के दौरान एक ही परिवार के छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से यह भी पूछा कि किस कानून के तहत किसी व्यक्ति को सुनवाई का मौका दिए बिना मतदाता सूची से उसका नाम हटाया जा सकता है। अदालत ने चुनाव आयोग की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी मतदाता सूची से छूट न जाए।

    मामला गोवा में SIR के दौरान एक परिवार के छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने से जुड़ा है। इस मामले में परिवार का नाम हटाने से पहले उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। इसी बिंदु पर सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाया जाना है तो उससे पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। अदालत ने बिना सुनवाई के नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग से संबंधित कानूनी आधार स्पष्ट करने को कहा।

    सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से तकनीक के बजाय कानून और नियमों के अनुसार प्रक्रिया अपनाने को कहा। अदालत ने SIR के दौरान इस्तेमाल की जा रही प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। कोर्ट की टिप्पणी थी कि मौजूदा प्रक्रिया को देखने पर ऐसा लग रहा है कि कानून और नियमों को कुछ समय के लिए किनारे कर दिया गया है और काम सॉफ्टवेयर के हिसाब से किया जा रहा है। इस टिप्पणी के जरिए अदालत ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में तकनीकी प्रक्रिया के साथ कानूनी प्रावधानों के पालन के महत्व पर सवाल उठाया।

    अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित चुनाव अधिकारी को भी कोर्ट में बुलाया है। हाईकोर्ट की सुनवाई का केंद्र यह रहा कि मतदाता सूची से किसी व्यक्ति या परिवार के सदस्यों के नाम हटाने की कार्रवाई किस कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई और क्या संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। अदालत ने स्पष्ट रूप से चुनाव आयोग से उस कानून का आधार बताने को कहा जिसके तहत बिना सुनवाई के किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। मामले में गोवा के परिवार के छह सदस्यों के नाम हटाए जाने की कार्रवाई इसी प्रक्रिया के संदर्भ में जांच के दायरे में है।

    बॉम्बे हाईकोर्ट की इस सुनवाई में SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया, सुनवाई का अवसर और कानून के पालन से जुड़े सवाल प्रमुख रहे। अदालत ने कहा कि तकनीकी व्यवस्था के आधार पर प्रक्रिया चलाने के बजाय संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए। साथ ही, मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है कि किसी मतदाता का नाम अनावश्यक रूप से छूट न जाए। मामले में संबंधित चुनाव अधिकारी को अदालत के समक्ष बुलाए जाने के बाद अब नाम हटाने की प्रक्रिया और उसके कानूनी आधार से जुड़े पहलुओं पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।

  • भोपाल के बाद पूरे MP में कांग्रेस का आंदोलन, जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और कलेक्टर कार्यालय घेराव

    भोपाल के बाद पूरे MP में कांग्रेस का आंदोलन, जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और कलेक्टर कार्यालय घेराव


    भोपाल । मध्यप्रदेश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का आंदोलन बुधवार को जिला स्तर तक पहुंचने जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस के आह्वान पर सभी जिला मुख्यालयों में कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन करेंगे और कलेक्टर कार्यालयों का घेराव करने की तैयारी है। पार्टी की ओर से यह आंदोलन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद के बीच किया जा रहा है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई है। देश के दूसरे हिस्सों में भी कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रही है और उनके इस्तीफे की मांग सामने रख रही है।

    मध्यप्रदेश में इस आंदोलन की शुरुआत भोपाल से हो चुकी है। 28 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस ने भोपाल स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय का घेराव किया था। प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने किया था। इसमें प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अलावा विधायक पूर्व विधायक पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए थे। उस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की की स्थिति भी बनी थी और कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए थे। अब कांग्रेस ने इसी आंदोलन को प्रदेश के अलग अलग जिलों तक ले जाने की रणनीति बनाई है। भोपाल के प्रदर्शन की रिपोर्ट भी सामने आई है जिसमें SIR को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों और CEC के इस्तीफे की मांग का उल्लेख है।

    कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर गंभीर सवाल हैं। पार्टी इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है। बुधवार को जिला मुख्यालयों पर होने वाले प्रदर्शनों में यही मुद्दे प्रमुख रूप से उठाए जाने हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता अपने अपने जिलों में एकत्र होकर कलेक्टर कार्यालयों की ओर मार्च करेंगे और वहां प्रदर्शन करेंगे।

    इस बीच चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR 2026 से जुड़ी मतदाता सेवाएं उपलब्ध हैं। आयोग की वेबसाइट पर अंतिम SIR मतदाता सूची में नाम खोजने की सुविधा दी गई है। आयोग के अनुसार मतदाता अपने EPIC नंबर या मतदाता संबंधी विवरण के माध्यम से जानकारी देख सकते हैं।

    CEC ज्ञानेश कुमार फिलहाल भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक उन्होंने 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था।

    SIR को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस की ओर से विरोध प्रदर्शन का सिलसिला लगातार जारी है। दूसरी ओर इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच अलग अलग दावे सामने आ रहे हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश में बुधवार को होने वाले जिला स्तरीय प्रदर्शनों पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर रहेगी। कांग्रेस का आंदोलन कितना व्यापक रहता है और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन के दौरान क्या स्थिति बनती है यह दिनभर की प्रमुख राजनीतिक गतिविधियों में शामिल रहेगा।

  • INDIA ब्लॉक की बैठक कल, SIR और चुनाव आयोग पर विपक्ष बनाएगा संयुक्त रणनीति, अखिलेश यादव नहीं होंगे शामिल

    INDIA ब्लॉक की बैठक कल, SIR और चुनाव आयोग पर विपक्ष बनाएगा संयुक्त रणनीति, अखिलेश यादव नहीं होंगे शामिल


    नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. ब्लॉक की बैठक 30 सितंबर को दिल्ली में होगी। बैठक में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR, चुनाव आयोग के भीतर सामने आए मतभेद और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी दल संसद में प्रस्ताव लाने और इन मुद्दों पर संयुक्त रूप से आगे की रणनीति तैयार करने पर भी विचार कर सकते हैं। करीब साढ़े तीन महीने बाद होने वाली इस बैठक में चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों के बीच समन्वय को लेकर भी चर्चा हो सकती है।

    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव बैठक में शामिल नहीं होंगे। उनकी जगह पार्टी का एक अन्य नेता प्रतिनिधित्व करेगा। वहीं, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़ेंगे। शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत के मुताबिक, पार्टी 2 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन की तैयारियों में व्यस्त है। पार्टी ने संबंधित प्रदर्शन को समर्थन देने की बात भी कही है। ऐसे में बैठक में उद्धव ठाकरे की भागीदारी ऑनलाइन होगी, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से अखिलेश यादव के स्थान पर दूसरा नेता मौजूद रहेगा।

    बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के शामिल होने की संभावना है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, सांसद अभिषेक बनर्जी, राजद नेता तेजस्वी यादव, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और CPI(M) महासचिव एमए बेबी के भी पहुंचने की उम्मीद है। एमए बेबी ने अरविंद केजरीवाल से मुलाकात के बाद बताया था कि कांग्रेस बैठक के लिए विपक्षी दलों के बीच समन्वय कर रही है। उनके मुताबिक, केजरीवाल ने चुनाव आयोग के खिलाफ अभियान की जरूरत पर जोर दिया और इस मुद्दे पर अपनी पार्टी में चर्चा करने की बात कही।

    I.N.D.I.A. ब्लॉक की पिछली बैठक 8 जून को हुई थी, जिसमें 23 विपक्षी दल शामिल हुए थे। उस बैठक में SIR और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। हालांकि, आम आदमी पार्टी और DMK उस बैठक में शामिल नहीं हुई थीं। इसके बावजूद 28 जून को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को भेजे गए विपक्षी दलों के संयुक्त पत्र पर AAP और DMK ने भी हस्ताक्षर किए थे। पत्र में चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे। पिछली बैठक के बाद अब विपक्षी दल एक बार फिर इन विषयों पर साथ बैठने जा रहे हैं।

    30 सितंबर की बैठक में विपक्षी दलों के बीच समन्वय, SIR के खिलाफ संभावित संयुक्त कार्रवाई और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर आगे की दिशा तय करने पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग और संसद में प्रस्ताव लाने से जुड़े विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। बैठक में अलग-अलग विपक्षी दलों के रुख और आगे की संयुक्त रणनीति को लेकर चर्चा होने की उम्मीद है।