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  • मैं हारी नहीं, हराई गई हूं, ममता का बड़ा हमला इस्तीफा से इनकार, चुनाव आयोग और BJP पर 100 सीट ‘लूटने’ का आरोप

    मैं हारी नहीं, हराई गई हूं, ममता का बड़ा हमला इस्तीफा से इनकार, चुनाव आयोग और BJP पर 100 सीट ‘लूटने’ का आरोप


    नई दिल्ली। ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद भी साफ कर दिया है कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता ने कहा, हम हारे नहीं हैं, हमें हराया गया है। यह जनादेश नहीं, साजिश है। उन्होंने दो टूक कहा कि वह राजभवन नहीं जाएंगी और इस्तीफा देने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

    ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग विलेन की तरह काम कर रहा था और भाजपा के साथ मिलकर करीब 100 सीटें “लूटी गईं।” ममता ने दावा किया कि काउंटिंग सेंटरों पर कब्जा किया गया, कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों के साथ बदसलूकी हुई और प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग किया गया।

    उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले उनके समर्थकों को गिरफ्तार किया गया, छापेमारी की गई और कई आईएएस-आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया गया। ममता ने आरोप लगाया कि पूरे चुनाव में सत्ता पक्ष ने दबाव और डर का माहौल बनाया। उनका कहना था कि “आधिकारिक तौर पर वे हमें हरा सकते हैं, लेकिन नैतिक रूप से हमने ही चुनाव जीता है।”

    ममता ने अपने राजनीतिक तेवर भी साफ कर दिए। उन्होंने कहा,अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ूंगी, सड़कों पर रहूंगी और शेर की तरह लड़ाई जारी रखूंगी। साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि चुनाव आयोग के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए 5 सांसदों समेत 10 सदस्यों की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई जाएगी।

    गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 294 में से 207 सीटें हासिल की हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस महज 80 सीटों पर सिमट गई। इस नतीजे के साथ ही 15 साल से सत्ता में काबिज ममता सरकार का अंत हो गया।

    इन चुनावों में सिर्फ बंगाल ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में भी बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिले। तमिलनाडु में विजय की पार्टी TVK ने चौंकाने वाली जीत दर्ज की, जबकि केरल में कांग्रेस की वापसी हुई और असम-पुडुचेरी में NDA ने सत्ता बरकरार रखी। कुल मिलाकर, ममता बनर्जी के तीखे तेवर और चुनाव नतीजों पर उठाए गए सवाल आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति को और गर्माने वाले हैं।

  • हम हारे नहीं, हराए गए, ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल; बंगाल में सियासी संग्राम तेज

    हम हारे नहीं, हराए गए, ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल; बंगाल में सियासी संग्राम तेज



    नई दिल्ली। ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनकी पार्टी चुनाव नहीं हारी, बल्कि उन्हें हराया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए।ममता बनर्जी ने भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं कराए गए। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया में कई अनियमितताएं देखने को मिलीं।

    ‘सीटों में गड़बड़ी’ का दावा
    TMC प्रमुख ने आरोप लगाया कि कई सीटों पर नतीजे प्रभावित किए गए। उनका कहना है कि विपक्ष के वोटों को व्यवस्थित तरीके से कमजोर किया गया, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    मतदाता सूची को लेकर विवाद
    ममता ने SIR (स्पेशल रिवीजन) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इससे चुनाव परिणामों पर असर पड़ा। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है।

    विपक्ष का समर्थन
    उन्होंने बताया कि राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे और अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने उनसे बातचीत कर समर्थन जताया है।कोलकाता की एक महत्वपूर्ण सीट पर मतों की दोबारा गिनती जारी है। अधिकारियों के अनुसार, अंतिम नतीजे पुनर्गणना पूरी होने के बाद ही घोषित किए जाएंगे।

    ED की कार्रवाई से बढ़ा सियासी तापमान
    इस बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने भी माहौल को और गरमा दिया है। एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।

    भाजपा का पलटवार
    भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह जनता का स्पष्ट जनादेश है। पार्टी नेताओं का दावा है कि जीत संगठन की मेहनत और रणनीति का नतीजा है। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक टकराव अपने चरम पर है। एक ओर विपक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर सत्ताधारी पक्ष इसे लोकतांत्रिक जनादेश बता रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के संकेत हैं।

  • फाल्टा विधानसभा में दोबारा वोटिंग: डर, टकराव और आरोपों के बाद चुनाव आयोग का सख्त कदम

    फाल्टा विधानसभा में दोबारा वोटिंग: डर, टकराव और आरोपों के बाद चुनाव आयोग का सख्त कदम

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां मतदान प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया गया है। इस फैसले के तहत सभी 285 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान होगा, जिससे यह सीट राज्य की सबसे विवादित चुनावी सीटों में शामिल हो गई है।

    मामला तब और गंभीर हो गया जब मतदान के दौरान मतदाताओं को डराने-धमकाने, बूथों के अंदर अनधिकृत व्यक्तियों की मौजूदगी और मतदान प्रक्रिया में बाधा डालने जैसे आरोप सामने आए। इन घटनाओं ने चुनावी माहौल को तनावपूर्ण बना दिया और कई जगहों पर झड़प और अफरा-तफरी की स्थिति भी देखने को मिली।

    रिपोर्टों के अनुसार, मतदान के दिन कई बूथों पर हालात इतने बिगड़ गए कि मतदाता अपने मताधिकार का सही ढंग से उपयोग नहीं कर सके। कुछ स्थानों पर लोगों को वोट डालने से रोके जाने की शिकायतें भी सामने आईं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए। इसी आधार पर पूरे क्षेत्र में री-पोलिंग का निर्णय लिया गया।

    इस पूरे घटनाक्रम के दौरान चुनावी माहौल में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप भी तेज रहे। एक ओर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को लेकर सख्त रुख अपनाया गया, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जिससे तनाव और बढ़ गया।

    स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से भारी सुरक्षा बलों की तैनाती का निर्णय लिया गया है। दोबारा मतदान के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए अतिरिक्त निगरानी, वेबकास्टिंग और सूक्ष्म पर्यवेक्षण की व्यवस्था की जा रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

    स्थानीय स्तर पर यह मामला सिर्फ चुनावी विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक टकराव और शक्ति प्रदर्शन का केंद्र भी बन गया है। आरोपों और जवाबी आरोपों के बीच माहौल लगातार गरमाता गया, जिससे आम मतदाताओं में असहजता और चिंता का माहौल बन गया।

    अब जबकि सभी बूथों पर दोबारा मतदान की घोषणा हो चुकी है, प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बार प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और व्यवस्थित रहती है, ताकि मतदाताओं का भरोसा बहाल किया जा सके।

    फाल्टा की यह स्थिति यह दर्शाती है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी न केवल व्यवस्था को प्रभावित करती है, बल्कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर देती है। अब पूरा ध्यान इस बात पर है कि दोबारा मतदान में हालात कितने सुधरते हैं और क्या मतदाता बिना किसी डर के अपने अधिकार का उपयोग कर पाते हैं।

  • पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में सुरक्षा बलों पर आरोप से बढ़ा सियासी तनाव, निष्पक्षता पर उठे सवाल..

    पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में सुरक्षा बलों पर आरोप से बढ़ा सियासी तनाव, निष्पक्षता पर उठे सवाल..

    नई दिल्ली :पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। तृणमूल कांग्रेस ने केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कुछ जवान कथित रूप से भाजपा के पक्ष में गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    तृणमूल कांग्रेस की ओर से मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ जवान भाजपा उम्मीदवारों के साथ क्षेत्र में देखे गए और कथित रूप से प्रचार सामग्री के वितरण में भी शामिल थे। इसके अलावा यह भी दावा किया गया है कि मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई, जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर असर पड़ सकता है।

    पार्टी ने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए कहा है कि चुनावी प्रक्रिया में सुरक्षा बलों की भूमिका पूरी तरह निष्पक्ष और सीमित होती है। उनका कार्य केवल सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना है, न कि किसी भी राजनीतिक गतिविधि में भाग लेना। ऐसे में यदि इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रभाव डाल सकती हैं।

    आरोपों में यह भी कहा गया है कि यह स्थिति चुनावी आचार संहिता और संबंधित नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकती है। पार्टी का तर्क है कि किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि में सुरक्षा बलों की भागीदारी न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि यह मतदाताओं के विश्वास को भी प्रभावित करती है।

    तृणमूल कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी तैनात केंद्रीय बलों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं कि वे किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि से पूरी तरह दूर रहें।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के दौरान इस तरह के आरोप माहौल को और अधिक संवेदनशील बना सकते हैं। पश्चिम बंगाल जैसे राजनीतिक रूप से सक्रिय राज्य में ऐसे विवाद मतदाताओं की धारणा और चुनावी रणनीतियों पर असर डाल सकते हैं।

    फिलहाल इस पूरे मामले में सभी की नजरें चुनाव आयोग की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। आयोग की प्रतिक्रिया से यह तय होगा कि इस विवाद का राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव किस दिशा में जाएगा।

  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, किसी भी पात्र मतदाता को वोट से वंचित नहीं किया जाएगा..

    सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, किसी भी पात्र मतदाता को वोट से वंचित नहीं किया जाएगा..


    नई दिल्ली:   पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और निर्णायक आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित नहीं रहेगा और यदि मतदान से ठीक अंतिम समय तक भी किसी व्यक्ति को कानूनी रूप से राहत मिलती है तो उसे वोट डालने का पूरा अधिकार होगा। इस निर्णय को चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदान केवल एक संवैधानिक अधिकार नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की आत्मा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अधिकार भी है। अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि अपीलीय निर्णयों के आधार पर तुरंत एक पूरक संशोधित मतदाता सूची तैयार की जाए, ताकि किसी भी योग्य मतदाता का नाम मतदान के समय तक सूची में शामिल किया जा सके और उसे मतदान का अवसर मिल सके।

    अदालत ने व्यवस्था दी है कि जिन मामलों में अपील पर ट्रिब्यूनल मतदान से दो दिन पहले तक निर्णय देता है, उन सभी मतदाताओं के नाम संशोधित सूची में जोड़े जाएंगे। इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि अपीलीय प्रक्रिया का दुरुपयोग कर चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए, जिससे चुनाव की समयबद्धता और सुचारु संचालन प्रभावित हो।

    सुप्रीम कोर्ट ने मतदान की तिथियों के अनुसार स्पष्ट समय सीमा भी निर्धारित की है। पहले चरण के मतदान के लिए यह निर्देश दिया गया है कि जिन अपीलों पर समय रहते निर्णय हो जाता है, उनके नाम निर्धारित समय सीमा के भीतर अंतिम सूची में शामिल किए जाएं। इसी तरह दूसरे चरण के मतदान के लिए भी अपीलीय निर्णयों को आधार बनाकर संशोधित सूची जारी करने का आदेश दिया गया है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता को मतदान से वंचित न रहना पड़े।

    अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि ट्रिब्यूनल के निर्णय के तुरंत बाद मतदाता सूची संबंधित अधिकारियों और संबंधित पक्षों तक पहुंचाई जाए, जिससे मतदान के दिन किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा उत्पन्न न हो। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य चुनावी प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज और न्यायसंगत बनाना बताया गया है।

    यह पूरा मामला राज्य में चल रही मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था, जिसमें बड़ी संख्या में अपीलें लंबित थीं। कम समय में इन सभी मामलों का निपटारा करना एक बड़ी चुनौती बन गया था। इसी पृष्ठभूमि में अदालत ने अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए यह सुनिश्चित किया कि किसी भी पात्र नागरिक का अधिकार प्रभावित न हो।

    इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मतदाता अधिकारों को 

  • चुनाव आयोग आज बंगाल में जारी करेगा अंतिम मतदाता सूची, पूरे राज्य में अलर्ट

    चुनाव आयोग आज बंगाल में जारी करेगा अंतिम मतदाता सूची, पूरे राज्य में अलर्ट

    कोलकाता। चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में सोमवार को ही पहली पूरक मतदाता सूची प्रकाशित कर सकता है। इसको देखते हुए पूरे बंगाल के थानों को अलर्ट पर रखा गया है। निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया,उचित सत्यापन के बाद 27 लाख से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है।

    निर्वाचन आयोग सोमवार शाम को पश्चिम बंगाल में चुनाव के लिए पहली सप्लिमेंट्री वोटर लिस्ट प्रकाशित कर सकता है। यह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।

    अधिकारियों ने बताया कि यह सूची अंतिम मतदाता सूची की तरह ही जारी की जाएगी, जिसकी प्रतियां जिला निर्वाचन अधिकारियों को भेजी जाएंगी और बाद में राज्य भर के मतदान केंद्रों पर प्रदर्शित की जाएंगी।

    निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया, ‘विचाराधीन मामलों की समीक्षा की प्रक्रिया व्यापक रही है और उचित सत्यापन के बाद 27 लाख से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है। पूरक सूची में इन परिणामों को पारदर्शी रूप से शामिल किया जाएगा।” उन्होंने बताया कि ये 27 लाख मतदाता उन 60 लाख मतदाताओं में शामिल थे जिन्हें 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में ‘विचाराधीन’ के रूप में चिह्नित किया गया था।
    बंगाल में हाई अलर्ट

    पहली पूरक मतदाता सूची के सोमवार को जारी होने की संभावना के मद्देनजर राज्य प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते सभी थानों और पुलिस प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा है। राज्य के गृह विभाग ने जिलाधिकारियों को विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया है। विभाग ने सभी थानों को सरकारी कार्यालयों में भीड़ संभालने के लिए पर्याप्त पुलिस तैनाती का इंतजाम करने और किसी भी व्यवधान को रोकने के लिए कानून लागू करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय बनाये रखने को भी कहा है।

    मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय ने सोमवार को अनुपूरक मतदाता सूची जारी होने की पुष्टि की है।

    इस सूची से बड़ी संख्या में मतदाताओं को लेकर बनी अनिश्चितता दूर होने की उम्मीद है। इससे पहले 28 फरवरी को जारी अंतिम एसआईआर सूची में 60 लाख से अधिक नामों को विचाराधीन श्रेणी में रखा गया था, जिससे उनकी स्थिति अनसुलझी रह गयी थी।

    सीईओ कार्यालय के सूत्रों ने संकेत दिया है कि शुक्रवार तक, इनमें से लगभग 27 लाख मामलों की समीक्षा की जा चुकी है और राज्य तथा पड़ोसी क्षेत्रों से लाये गये न्यायिक अधिकारियों के पैनल ने इन्हें निपटाया है। तार्किक विसंगति के तहत रखे गये मामलों की समीक्षा के लिए कुल मिलाकर 700 से अधिक न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों को लगाया गया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने पहले उल्लेख किया था कि चुनाव से पहले विचाराधीन सभी मामलों के हल होने की संभावना है।

    इसके अलावा भारत के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भारत चुनाव आयोग ने पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े विवादों को निपटाने के लिए राज्य भर में 19 जिला-स्तरीय अपीलीय निकाय स्थापित किए हैं।

    ये अपीलीय निकाय उन मामलों की सुनवाई के लिए जिम्मेदार होंगे जो आधिकारिक निबटारे में विफल रहे थे।

    स्थिति की गंभीरता के मद्देनजर कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी एस शिवगणनम को कोलकाता और उत्तर 24 परगना जैसे प्रमुख जिलों में अपीलों की निगरानी के लिए नियुक्त किया गया है, जबकि अन्य सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को शेष जिलों में इसी तरह के मामलों को संभालने का जिम्मा सौंपा गया है। पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी करने में हुई देरी पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिन्होंने अधिकारियों पर वैध मतदाताओं को बेवजह परेशान करने का आरोप लगाया है।

  • बंगाल चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: मुख्य सचिव-DGP बदले, कोलकाता पुलिस कमिश्नर समेत 6 अफसरों का ट्रांसफर

    बंगाल चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: मुख्य सचिव-DGP बदले, कोलकाता पुलिस कमिश्नर समेत 6 अफसरों का ट्रांसफर



    नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए मुख्य सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर समेत 6 वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया है।

    आयोग ने Piyush Pandey की जगह Siddhnath Gupta को नया डीजीपी नियुक्त किया है। वहीं, मुख्य सचिव Nandini Chakraborty को हटाकर 1993 बैच के IAS Dushmant Nariala को नया मुख्य सचिव बनाया गया है।

    कोलकाता पुलिस कमिश्नर सुप्रतिम सरकार की जगह अजय कुमार नंद को जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा की जगह 1997 बैच की आईएएस संघमित्रा घोष को नया गृह सचिव बनाया गया है।

    इसके अलावा नटराजन रमेश बाबू को सुधार सेवा बहाल और अजय मुकुंद रानाडे को अतिरिक्त पुलिस बहाल व आईजीपी (कानून-व्यवस्था) नियुक्त किया गया है।

    चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार तबादला किए गए सभी अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी चुनाव संबंधी पद पर तैनात नहीं किया जाएगा।

    23 और 29 अप्रैल को वोटिंग
    आयोग ने रविवार को West Bengal समेत Tamil Nadu, Kerala, Assam और Puducherry में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया था। पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे।

    14 साल से सत्ता में ममता सरकार
    राज्य में पिछले 14 वर्षों से Mamata Banerjee की सरकार है और इस बार भी मुख्य मुकाबला टीएमसी और Bharatiya Janata Party के बीच माना जा रहा है। यदि टीएमसी जीतती है तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बन सकती हैं।

  • पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की आहट: चुनाव से पहले राजनीतिक तूफ़ान तेज, एसआईआर और दस्तावेज़ विवाद से बढ़ी चिंता

    पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की आहट: चुनाव से पहले राजनीतिक तूफ़ान तेज, एसआईआर और दस्तावेज़ विवाद से बढ़ी चिंता

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रपति शासन की अटकलों ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। राज्यपाल के अचानक बदलाव, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे पर विवाद और चुनाव आयोग की टीम के दौरे के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन ने इस संभावना को और गहरा कर दिया है।

    इतिहास और संवैधानिक पहलू
    पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू होने का इतिहास बहुत लंबा नहीं है। 30 अप्रैल 1977 को तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया गया था, जो वाममोर्चा सरकार के शपथ ग्रहण तक 52 दिनों तक जारी रहा। अब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि क्या बंगाल एक बार फिर राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा है।

    चुनाव आयोग का दौरा और विरोध प्रदर्शन
    चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ ने कोलकाता दौरे के दौरान सभी राजनीतिक दलों और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों का जायजा लिया। हालांकि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर सीधे जवाब देने से परहेज किया और कहा कि कानून-व्यवस्था की समीक्षा के बाद चुनाव की तारीख और चरण तय किए जाएंगे।

    तृणमूल कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों ने एक या दो चरणों में मतदान कराने की मांग की। आयोग को कोलकाता और आसपास बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। तृणमूल समर्थकों ने काले झंडे दिखाए और “लोकतंत्र का हत्यारा” जैसे पोस्टर भी लगाए।

    एसआईआर प्रक्रिया पर विवाद
    राज्य में नवंबर से चल रही एसआईआर (Special Summary Revision) प्रक्रिया के तहत लगभग 60 लाख मतदाताओं के दस्तावेज विचाराधीन हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दस्तावेजों की जांच में न्यायिक अधिकारियों को दो महीने का समय लगने की संभावना है। राजनीतिक दलों का कहना है कि इस स्थिति में चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण होगा।

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से वैध वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अचानक राज्यपाल सीवी आनंद बोस की जगह आर.एन. रवि को क्यों नियुक्त किया गया, जो तमिलनाडु में विवादित रहे हैं।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दौरा और विवाद
    राष्ट्रपति का दौरा सिलीगुड़ी में आदिवासी सम्मेलन के लिए था। हालांकि मुख्यमंत्री ने इसे लेकर असंतोष जताया और कहा कि उन्हें न्यूनतम प्रोटोकॉल तक नहीं मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए तृणमूल कांग्रेस पर राष्ट्रपति के अपमान का आरोप लगाया।

    राजनीतिक माहौल और भविष्य की चुनौतियां
    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एसआईआर के तहत विचाराधीन 60 लाख मतदाताओं के दस्तावेज समय पर जांच कर लिए जाएंगे। यदि यह कार्य पूरा नहीं हुआ, तो या तो चुनाव टालना पड़ सकता है या बिना पूरी सूची के चुनाव कराना पड़ सकता है। इससे राष्ट्रपति शासन की संभावना बढ़ सकती है।अगले कुछ दिनों में केंद्र और चुनाव आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पश्चिम बंगाल की राजनीतिक दिशा साफ होगी।

  • SIR पूरा, लेकिन सियासत जारी: दिग्विजय ने चुनाव आयोग में मतदाता गड़बड़ी का आरोप लगाया

    SIR पूरा, लेकिन सियासत जारी: दिग्विजय ने चुनाव आयोग में मतदाता गड़बड़ी का आरोप लगाया


    भोपाल । भोपाल में एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण का काम पूरा हो गया है लेकिन सियासत थमने का नाम नहीं ले रही। सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह चुनाव आयोग पहुंचे। उन्होंने मतदाता सूची में गड़बड़ी के सबूत प्रस्तुत किए और गंभीर आरोप लगाए कि एसआईआर में फर्जी नाम जोड़े गए और कुछ नाम हटा दिए गए। उनका कहना है कि यह बीजेपी सरकार के दबाव में हुआ।

    दिग्विजय सिंह के साथ पूर्व मंत्री पीसी शर्मा समेत कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। उन्होंने चुनाव आयोग से मुलाकात कर शिकायत की और आश्वासन प्राप्त किया कि मामले की जांच की जाएगी। दिग्विजय ने चुनाव आयोग का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने उनकी बात सुनी और गड़बड़ी के दस्तावेजों को स्वीकार किया।

    विशेष रूप से उन्होंने तीन अलग अलग घरों में 30 से अधिक मतदाता होने की शिकायत दी। मकान मालिकों ने बताया कि उनके घर में वास्तविक तौर पर केवल 6 या 7 सदस्य हैं लेकिन एसआईआर प्रक्रिया के बाद जारी हुई मतदाता सूची में एक मकान नंबर पर 30 से अधिक सदस्य दर्शाए गए।
    दिग्विजय सिंह ने यह शिकायत भोपाल की नरेला विधानसभा क्षेत्र से लेकर गए थे।

    उनका कहना है कि यह गंभीर अनियमितता है और इससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित होती है।चुनाव आयोग ने इस मामले में जांच का आश्वासन दिया है और कहा है कि शिकायत का उचित समाधान किया जाएगा। इस घटनाक्रम ने मध्यप्रदेश में मतदाता सूची सुधार और उसकी वैधता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • UP Panchayat Election 2026: यूपी पंचायत चुनाव लेकर बड़ी खबर आई सामने, अब राज्य आयोग ने जारी किया ये खास आदेश

    UP Panchayat Election 2026: यूपी पंचायत चुनाव लेकर बड़ी खबर आई सामने, अब राज्य आयोग ने जारी किया ये खास आदेश


    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं. जिसके तहत जिला निर्वाचन अधिकारियो को सूचनाओं में विसंगतियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं. चुनाव आयोग के आदेश के बाद प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं.  राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से इस संबंध में सभी जिला मजिस्ट्रेट और जिला निर्वाचन अधिकारी पंचायत एवं नगरीय निकाय को जानकारी दे दी है. जिसमें पंचायती राज द्वारा उपलब्ध कराए गए सदस्य ग्राम पंचायत एवं सदस्य क्षेत्र पंचायत के आंकड़ों में अंतर मिला है. इसलिए आयोग ने इसे पोर्टल पर ठीक करने का निर्देश दिया है.

    चुनाव आयोग ने दिए निर्देश

    जिला निर्वाचन अधिकारी के ये कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. जिसमें ग्राम पंचायत, सदस्य क्षेत्र पंचायत विवरण का मिलान करने को कहा गया है. आयोग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर सदस्य ग्राम पंचायत, प्रधान ग्राम पंचायत, सदस्य क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत के परिसीमन के बाद सूचना उपलब्ध कराई गई है.  आयोग ने निदेशक को निर्देश दिए हैं कि पंचायती राज द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना से आयोग के पोर्टल पर जनपदों द्वारा फ़ीड की गई सदस्य ग्राम पंचायत एवं सदस्य क्षेत्र पंचायत की सूचना में भिन्नता पाई गई है. इसलिए इस सूचना का ग्राम पंचायत की सूचना को मिलान करते हुए आयोग के पोर्टल पर शुद्ध किया जाए.

    ग्राम पंचायत डाटा में मिली अशुद्धता
    चुनाव आयोग ने साफ़ कहा कि डाटा की शुद्धता निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुचारू संचालन के लिए जरूरी है. इसलिए जल्द से जल्द ये सूचनाओं के विवरण का सत्यापन कर पोर्टल पर सही विवरण दर्ज कराया जाए. बता दें उत्तर प्रदेश में जल्द ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने जा रहे हैं, जिसे लेकर राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारी शुरू कर दी है. कयास लग रहे है कि इस साल अप्रैल-मई में ये चुनाव कराए जा सकते हैं, चुनाव की ये पूरी प्रक्रिया दो महीने में पूरी हो जाएगी.