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  • एमएसपी पर गेहूं खरीद की तैयारी पूरी, इंदौर संभाग में 1 अप्रैल से शुरू, किसानों को मिलेगा बोनस का फायदा

    एमएसपी पर गेहूं खरीद की तैयारी पूरी, इंदौर संभाग में 1 अप्रैल से शुरू, किसानों को मिलेगा बोनस का फायदा

    मध्यप्रदेश के इंदौर संभाग में किसानों के लिए राहत और उत्साह की खबर सामने आई है। प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर गेहूं की सरकारी खरीद 1 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। इस बार गेहूं खरीद को लेकर किसानों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है, जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बड़ी संख्या में किसानों ने पंजीकरण कराया है।

    इंदौर संभाग में इस बार कुल 1.91 लाख किसानों ने गेहूं बेचने के लिए अपना पंजीयन कराया है। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि सरकारी खरीद व्यवस्था पर किसानों का भरोसा बढ़ा है। पूरे प्रदेश की बात करें तो करीब 19.04 लाख किसानों ने इस योजना के तहत पंजीकरण कराया है, जो राज्य में व्यापक स्तर पर होने वाली खरीदी को दर्शाता है।

    जिलावार आंकड़ों की बात करें तो इंदौर जिले में सबसे अधिक 71,713 किसानों ने पंजीकरण कराया है। इसके बाद धार में 44,466, खंडवा में 35,104, खरगोन में 27,557 और झाबुआ में 7,120 किसानों ने पंजीकरण कराया है। वहीं बड़वानी में 4,724, बुरहानपुर में 523 और अलीराजपुर में 476 किसानों ने भी इस प्रक्रिया में भाग लिया है। इन आंकड़ों से साफ है कि पूरे संभाग में किसानों ने इस योजना में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी दी है कि इंदौर के साथ-साथ उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभागों में भी 1 अप्रैल से गेहूं की खरीदी शुरू की जाएगी। जबकि अन्य संभागों में यह प्रक्रिया 7 अप्रैल से प्रारंभ होगी। खरीद का समय सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक निर्धारित किया गया है और यह केवल सरकारी कार्यदिवसों में ही संचालित होगी, जिससे व्यवस्था को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।

    इस बार सरकार ने किसानों को अतिरिक्त लाभ देने के लिए गेहूं की एमएसपी के साथ प्रति क्विंटल ₹40 का बोनस देने का निर्णय लिया है। इस बोनस के बाद किसानों को गेहूं का कुल भाव ₹2,625 प्रति क्विंटल प्राप्त होगा। यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें उनकी उपज का बेहतर मूल्य देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    प्रशासन ने खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली हैं, ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। खरीद केंद्रों पर तौल, परिवहन और भुगतान की प्रक्रिया को भी सरल और तेज बनाने की दिशा में काम किया गया है।

     इस बार की गेहूं खरीद प्रक्रिया किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होने की उम्मीद है। पंजीकरण में आई बढ़ोतरी और सरकार द्वारा दिए जा रहे बोनस ने किसानों की उम्मीदों को और मजबूत किया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि खरीद प्रक्रिया कितनी सुचारू और सफल रहती है।

  • मुख्यमंत्री के प्रयासों से मप्र के किसानों को मिली बड़ी सौगात, केंद्र ने दी कई अहम मंजूरियां

    मुख्यमंत्री के प्रयासों से मप्र के किसानों को मिली बड़ी सौगात, केंद्र ने दी कई अहम मंजूरियां


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से प्रदेश के किसानों को केंद्र सरकार से कई और बड़ी महत्वपूर्ण मंजूरियां मिली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर राज्य के किसानों और ग्रामीण विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, जिस पर केंद्र ने सकारात्मक निर्णय लिए।

    बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस उच्च स्तरीय चर्चा में ग्रामीण सड़कों सहित अनेक विषयों पर मध्यप्रदेश को बड़ी राहत देने वाले निर्णय लिये गये। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से केन्द्र के मप्र के किसानों के लिए निर्णयों की जानकारी साझा की है।


    सरसों किसानों को मिलेगा भावांतर भुगतान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के आग्रह पर सरसों की खरीद से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने भावांतर भुगतान योजना के तहत मध्यप्रदेश के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए संबंधित विभागों को भुगतान प्रक्रिया तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। इससे राज्य के सरसों उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।


    तुअर की शत-प्रतिशत खरीद का मार्ग प्रशस्त

    केंद्रीय मंत्री चौहान ने बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को तुअर (अरहर) की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद का स्वीकृति-पत्र भी सौंपा। इस निर्णय से मध्य प्रदेश के तुअर उत्पादक किसानों की उपज का पूर्ण सरकारी उपार्जन सुनिश्चित होगा, जिससे उन्हें बाजार में भाव गिरने का जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा और आय में स्थिरता आयेगी।


    दलहन–तिलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में पहल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को दलहन और तिलहन उत्पादन का अग्रणी केंद्र बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस पर केंद्र और राज्य की संयुक्त टीम द्वारा मूंग, उड़द, चना, तिल, सरसों और पाम ऑयल जैसी फसलों के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने पर सहमति बनी।


    फसल बीमा में किसानों के हितों की सुरक्षा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के हितों की बेहतर सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। केंद्रीय मंत्री चौहान ने निर्देश दिए कि सोयाबीन जैसी फसलों के आंकलन में केवल सैटेलाइट डेटा के बजाय क्रॉप कटिंग और रिमोट सेंसिंग तरीकों का उपयोग किया जाए, जिससे किसानों को वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा मिल सके।


    कृषि से जुड़े मुद्दों और योजनाओं की हुई समीक्षा

    बैठक में मध्य प्रदेश के लिए सरसों और सोयाबीन के भावांतर भुगतान, दलहन मिशन के तहत मूंग-उड़द के अतिरिक्त लक्ष्य, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता कार्यक्रम, मनरेगा मजदूरी और सामग्री भुगतान, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़े मुद्दों पर बिंदुवार चर्चा की गई। केन्द्रीय मंत्री चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मध्यप्रदेश से जुड़े लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाया जाए, जिससे राज्य के किसानों, मजदूरों और ग्रामीण गरीबों को शीघ्र राहत मिल सके।


    ग्रामीण विकास योजनाओं को मिलेगी गति

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाते हुए किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण विकास को नई गति देने के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान ने मध्य प्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश मेरा अपना घर है। किसान कल्याण वर्ष में यह सुनिश्चित किया जायेगा कि सरसों, तुअर, मूंग, उड़द और तिलहनों की खेती करने वाले किसानों को हर संभव सहायता मिले और राज्य ग्रामीण विकास के हर पैमाने पर अग्रणी बने।

  • किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार कृषि कल्याण वर्ष 2026 में किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। किसानों की फसलों का उचित दाम मिले, इसके लिए उड़द खरीदी पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस की घोषणा की गई है। प्रदेश के किसान उड़द लगाएं, ताकि उन्हें इस बोनस का भरपूर लाभ मिल सके और अगली फसल की तैयारी भी हो जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों के साथ समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, नीरज मंडलोई सहित कृषि, राजस्व, सहकारिता, जल संसाधन, उद्यानिकी तथा अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने गेहूं उत्पादक किसानों को भी गत वर्षों के तरह बोनस की सौगात दी है। इस वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा। इससे किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं का भुगतान प्राप्त होगा। राज्य सरकार ने किसानों के हित में अपने संकल्प-पत्र में वर्ष 2028 तक 2700 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदने का संकल्प लिया है। आगामी वर्षों में हम इस लक्ष्य को पूरा कर उससे भी आगे निकलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिजली संबंधी शिकायतों का निराकरण स्थानीय स्तर पर करने की व्यवस्था स्थापित करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश, देश का फूड बास्केट है, जहां दलहन, तिलहन और सब्जी उत्पादन अच्छी मात्रा में हो रहा है। हमारे राज्य के किसान आगे बढ़ें और समृद्ध हों, इसके लिए सरकार निरंतर किसान हितैषी निर्णय ले रही है। कुछ स्थानों पर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन में कठिनाई सामने आई है। इसे ध्यान में रखकर गेहूँ उपार्जन पंजीयन की अंतिम तिथि 7 मार्च से बढ़ाकर 10 मार्च की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए दिन में बिजली उपलब्ध कराई जाएगी, इससे रात के समय बिजली से सिंचाई के कारण होने वाले संकटों से बचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान संघ की ओर से किसानों के हित में प्राप्त सुझावों पर भी राज्य सरकार विचार करेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में भूमि अधिग्रहण पर मुआवजा राशि बढ़ाने, जंगली जानवरों द्वारा फसल नुकसान पर मुआवजे, मंडी अधिनियम के प्रावधानों, फसल गिरदावरी, अविवादित नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन के लिए समय-सीमा निर्धारित करने, विद्युत प्रदाय और सिंचाई व्यवस्था जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

  • गेहूं उपार्जन प्रक्रिया में किसानों को न हो कोई परेशानी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    गेहूं उपार्जन प्रक्रिया में किसानों को न हो कोई परेशानी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन प्रक्रिया में किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। जिला कलेक्टर पंजीकृत किसानों में से चिन्हित किसानों के सत्यापन, उपार्जन केन्द्रों पर बारदानों की उपलब्धता और किसानों को समय पर भुगतान के लिए शत-प्रतिशत व्यवस्था सुनिश्चित करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित अभियान की राज्य स्तरीय बैठक के बाद जिला कलेक्टर्स से वर्चुअल संवाद में दिए। उन्होंने कहा कि गेहूं का उपार्जन इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 16 मार्च से 5 मई तक होगा और शेष संभागों जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, शहडोल, चम्बल व सागर में 23 मार्च से 12 मई तक किया जाएगा। किसान अपना पंजीयन 7 मार्च तक करा सकेंगे।

    मुख्यमंत्री ने उपार्जन केन्द्रों का समय-सीमा में निर्धारण, उनकी स्थापना और इन केन्द्रों पर सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपार्जन कार्य में लगे अमले के उपयुक्त प्रशिक्षण सहित जिला उपार्जन समिति द्वारा नियमित बैठक कर समस्याओं के त्वरित निदान की व्यवस्था की जाए। किसानों को अद्यतन जानकारियां सरलता से उपलब्ध कराना भी सुनिश्चित हो।

    मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टर्स को खाड़ी देशों में वर्तमान में निर्मित अप्रत्याशित परिस्थितियों को देखते हुए इन देशों में रह रहे जिले के विद्यार्थियों, नागरिकों के परिवारों से सम्पर्क में रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश भवन नई दिल्ली और वल्लभ भवन मंत्रालय में प्रदेशवासियों की सहायता के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। जिला स्तर पर ऐसे व्यक्तियों और परिवारों से कलेक्टर्स निरंतर समन्वय और सम्पर्क रखें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि संकल्प से समाधान अभियान का अंतिम चरण जारी है। अभियान के अंतर्गत 40 लाख आवेदनों का निराकरण हुआ है। अब 16 मार्च तक जिला स्तरीय शिविर लगना है। विकास और जनकल्याण की इस गतिविधि की जिला कलेक्टर सघन मॉनीटरिंग सुनिश्चित करें। अभियान में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो कलेक्टर्स जिले की सभी गतिविधियों में परफार्मेंस और परिणाम देंगे वे ही मैदान में रहेंगे, यह सिद्धांत सभी अधिकारी-कर्मचारियों पर भी लागू होगा।

    मुख्यमंत्री ने जिलों में वीसी सेटअप के संबंध में आलीराजपुर, छिंदवाड़ा, पांर्ढुणा, बालाघाट, भोपाल जिलों को तत्काल कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वीसी सेटअप से सभी विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को पंचायत स्तर तक संवाद स्थापित करने में मदद मिलेगी। इससे विकास और जनकल्याण के कार्यों की समीक्षा में सुविधा होगी। मुख्यमंत्री ने विधानसभा स्तर के विजन डॉक्यूमेंट के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि शासन और व्यवस्था के संबंध में मिथ्या या भ्रम फैलाने वाली जानकारियों का जिला स्तर पर तत्काल प्रभावी रूप से खंडन किया जाए। सोशल मीडिया के युग में ऐसी गतिविधियों पर त्वरित रूप से वस्तुस्थिति रखना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में शाला और महाविद्यालयीन स्तर पर परीक्षाओं का समय चल रहा है। जिला अधिकारी शैक्षणिक संस्थाओं, छात्रावासों, विश्वविद्यालय परिसरों का आकस्मिक निरीक्षण आवश्यक रूप से करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि परीक्षाओं का संचालन और आगामी सत्रारंभ निर्विघ्न रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला अधिकारियों को जिला स्तर पर नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित भी किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के अधिकारियों-कर्मचारियों से कार्यालयीन समय का पालन करने की अपेक्षा है। इस संबंध में गत दिवस मंत्रालय में कार्यालयीन समय अनुसार उपस्थिति का आकस्मिक निरीक्षण कराया गया था। जिला स्तर पर जिला कलेक्टर्स द्वारा अपने स्तर पर इस प्रकार के निरीक्षण की व्यवस्था की जाए। कार्यालयीन स्टॉफ को दी गई सुविधाएं, उनका अधिकार है, इसके साथ उनसे नियमानुसार कार्य लेना भी सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि आकस्मिक निरीक्षण की प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी। यदि कार्यालयीन समय के पालन में सुधार नहीं आया तो राज्य में 6 कार्य दिवसीय सप्ताह की व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। शासकीय कार्यालयों में आम नागरिकों के लिए सुगम व्यवस्था स्थापित करना हमारा उद्देश्य है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2026 किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। जिलों में होने वाले परम्परागत मेलों में कृषि-पशुपालन आदि क्षेत्र में नवाचार करने वालों या विशेष उपलब्धि अर्जित करने वालों की प्रदर्शनी लगाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला स्तर पर होम-स्टे को प्रोत्साहित करने के भी कलेक्टर्स को निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अशोक बर्णवाल, संजय दुबे, नीरज मंडलोई, दीपाली रस्तोगी, शिवशेखर शुक्ला एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में समस्त जिला कलेक्टर्स वर्चुअली शामिल हुए।

  • ईरान-इजरायल युद्ध लंबा चला तो भारत में खाद और उर्वरक की हो सकती है किल्लत

    ईरान-इजरायल युद्ध लंबा चला तो भारत में खाद और उर्वरक की हो सकती है किल्लत


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब सिर्फ तेल और गैस पर ही नहीं, बल्कि भारत के कृषि और व्यापार क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच जंग लंबी खिंचती है और खाड़ी देशों में तनाव बढ़ता है, तो भारत को पेट्रोलियम उत्पादों के साथ-साथ उर्वरक, खाद्य सामग्री और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की सप्लाई में भी समस्या हो सकती है।
    उर्वरक की आपूर्ति हो सकती है प्रभावित
    भारत यूरिया और फॉस्फेट जैसे उर्वरकों के बड़े हिस्से के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है। विशेष रूप से डीएपी और यूरिया का करीब 46 प्रतिशत आयात अकेले ओमान से होता है। अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है, तो उर्वरक की कमी के कारण कृषि क्षेत्र पर सीधे असर पड़ेगा और कीमतों में तेजी आएगी।

    सोना और अन्य आयातित उत्पाद महंगे हो सकते हैं
    संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों से भारत में सोने का आयात होता है। शिपिंग लागत बढ़ने से सोने की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसके अलावा खजूर और कुछ प्रोसेस्ड फूड जैसे उत्पादों की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। भारत अपनी कुल खजूर का लगभग 80-90 प्रतिशत खाड़ी देशों से आयात करता है, खासकर यूएई और ओमान से। तनाव बढ़ने और समुद्री मार्ग बंद होने की स्थिति में इन उत्पादों की कीमतों में उछाल आ सकता है।

    निर्यात क्षेत्र भी होगा प्रभावित
    भारत के निर्यात पर भी खाड़ी देशों में तनाव का असर पड़ेगा। प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं:-

    खाद्यान्न और चावल: सऊदी अरब, ईराक, यूएई और ओमान भारत के बड़े खरीदार हैं। समुद्री मार्ग बंद होने पर शिपमेंट में देरी होगी, नई आपूर्ति रूट लंबा होगा और ढुलाई लागत बढ़ेगी। भारत का लगभग 50 प्रतिशत बासमती निर्यात खाड़ी देशों और ईरान को जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 60 लाख टन बासमती निर्यात किया, जिसकी कीमत लगभग 50,312 करोड़ रुपये थी।

    मांस और समुद्री उत्पाद: जमी हुई मछली और झींगा जैसी वस्तुएं खाड़ी देशों में बड़ी मांग में हैं। लॉजिस्टिक बाधाओं से निर्यात घट सकता है।

    फार्मास्यूटिकल्स: भारत जेनेरिक दवाओं का बड़ा सप्लायर है। आपूर्ति बाधित होने पर निर्यात राजस्व प्रभावित होगा और कंपनियों को सामान पहुंचाने में मुश्किलें आएंगी।

    इंजीनियरिंग और ऑटो पार्ट्स: मशीनरी, ऑटो पार्ट्स और निर्माण सामग्री की खेप में देरी से विशेषकर एमएसएमई प्रभावित होंगे। जनवरी में खाड़ी देशों को मशीनरी निर्यात में 16 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी।

    कपड़ा और परिधान: खाड़ी देशों का बाजार रेडीमेड गारमेंट और टेक्सटाइल निर्यात के लिए अहम है। भारत का खाड़ी देशों को कुल परिधान निर्यात लगभग 1.79 बिलियन डॉलर का है। शिपिंग लागत बढ़ने से प्रतिस्पर्धा घट सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चलता है और हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव जारी रहता है, तो किसानों और निर्यातक दोनों के लिए चुनौतियां गंभीर रूप से बढ़ सकती हैं।

  • एक लाख करोड़ के बजट से संवरेगा मध्य प्रदेश के किसान का जीवन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एक लाख करोड़ के बजट से संवरेगा मध्य प्रदेश के किसान का जीवन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार सभी के कल्या

    Chief Minister

    ण के लिए काम कर रही है। किसान कल्याण के लिए इस साल बजट में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि प्रस्तावित है। किसान कल्याण वर्ष में कृषि आधारित व्यापार गतिविधियां बढ़ाने के लिए प्रयास जारी हैं, जिससे किसानों के जीवन में समृद्धि आएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को सागर जिले के गढ़ाकोटा के ऐतिहासिक रहस मेले के शुभारंभ एवं सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के हितग्राहियों के राशि अंतरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सागर जिले के रहली क्षेत्र में कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देते हुए फूड पार्क स्थापित किया जाएगा। इससे क्षेत्र के स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुंदेलखंड की धरती आल्हा-ऊदल जैसे वीरों की धरती है। सागर जिले का रहस मेला ऐतिहासिक है। उन्होंने रहस मेले के 217 साल पुराने गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए और उनके शौर्य को प्रणाम करते हुए कहा -“बड़े लडैया महोबा वाले, जिन की मार सही ना जाये। एक को मारे दोई मर जावे, तीजा खौफ खाये मर जाये।।”- ऐसी वीरता और पराक्रम का लोहा मनवाने वाले मातृभूमि पर सर्वस्व न्योछावर करने वाले महान योद्धाओं की भूमि को कोटिशः नमन।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में परमात्मा ने ऋतुओं और मौसम के साथ मेलों का अद्भुत संबंध बनाया है। जब धान और सोयाबीन कटे तो दीवाली और गेहूं की फसल आने पर होली मनाई जाती है। बुंदेलखंड की धरती पर आकर मन आनंदित हो जाता है। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में राज्य सरकार पशुपालन और दूध उत्पादन बढ़ाने को प्राथमिकता दे रही है। बजट 2026-27 में नई यशोदा योजना की शुरुआत की गई है। अब हमारे स्कूलों में 8वीं तक के विद्यार्थियों को ट्रेटा पैक दूध नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेश की बहनों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। लाड़ली बहनों को हर माह 1500 रुपये की राशि मिल रही है।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लघु एवं कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए संकल्पित है। रहली में सूक्ष्म औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए कमेटी गठित की जाए। यहां पारम्परिक बीड़ी उद्योग के साथ हस्त शिल्प कलाओं को भी आगे बढ़ाया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना की माह जनवरी पेड इन फरवरी 2026 की राशि हितग्राहियों के खातों में सिंगल क्लिक से अंतरित की। इस पेंशन योजनाओं में प्रति हितग्राही प्रतिमाह 600 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। मुख्यमंत्री ने 32.78 लाख से अधिक हितग्राहियों के खाते में 196.72 करोड़ की राशि ट्रांसफर की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रहली विधासभा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूती देते हुए खेजरा-शाहपुर-मोकलपुर फ्लाईओवर के निर्माण की स्वीकृति दी। उन्होंने रहली एवं गढ़ाकोटा कृषि उपज मंडी के उन्नयन के लिए 5-5 करोड़ रुपये एवं शाहपुर उपमंडी के विकास हेतु एक करोड़ रुपये की स्वीकृति दी जिससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज का सही दाम और आधुनिक सुविधाएं मिल सकें, इसके साथ ही उन्होंने रहली रमखरिया, सिमरिया नायक बहेरिया मढ़ि (लगभग 22 किलोमीटर) मार्ग के उन्नयन और चौड़ीकरण की भी घोषणा की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड में बीड़ी उद्योग और तेंदूपत्ता संग्रहण केवल व्यापार नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की जीविका रहा है। यहां बीड़ी, तेंदूपत्ते और हस्तकला आधारित लघु इकाइयों को मिलेगा प्रोत्साहन दिया जाएगा। बीड़ी बनाने वाले एवं तेंदूपत्ता का संग्रहण करने वाले व्यक्तियों के उन्नयन के लिए सांसद, विधायक एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि एक कमेटी बनाकर लिये गये निर्णय अनुसार कार्यवाही की जाएगी। इसके साथ ही क्षेत्र के खिलाड़ियों के लिए स्पोर्ट्स एवं स्टेडियम कॉम्प्लेक्स का निर्माण होगा। इसी प्रकार ढाना में शासकीय महाविद्यालय में वाणिज्य संकाय और इतिहास के नए विषय खोलने को भी मंजूरी दी।

    उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की सेवा के लिए सरकार के खजाने में कोई कमी नहीं है। रहली क्षेत्र के विद्यार्थियों को भव्य सांदीपनि विद्यालय की सौगात मिली है। अब बच्चों को गणवेश, किताबें, साइकिलें नि:शुल्क वितरित की जा रही हैं। स्कूल टॉपर को स्कूटी दी जाती है। प्रदेश के सांदीपनि विद्यालय प्राइवेट स्कूलों को पीछे छोड़ रहे हैं।

    प्रमुख घोषणाएं

    – गढ़ाकोटा और रहली में मल्टी स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स बनेगा।
    – महाविद्यालय में वाणिज्य और इतिहास के नए संकाय की कक्षाएं शुरू होंगी।
    – क्षेत्र में नया फ्लाई-ओवर और सड़कों का उन्नयन किया जाएगा।
    – गढ़ाकोटा और रहली कृषि उपज मंडी में विकास कार्यों के लिए 5-5 करोड़ की राशि मिलेगी।
    – शाहपुरा कृषि उपज मंडी के विकास कार्यों के लिए भी एक करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
    – सोनार नदी के माध्यम से सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।

    कार्यक्रम में पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा कि रहस मेले की शुरुआत 217 साल पहले बुंदेलखंड के तत्कालीन शासक मर्दन सिंह जूदेव के राज्यारोहण के उपलक्ष में हुई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. सुंदरलाल पटवा भी वर्ष 1990 में यहां पधारे थे। मेला परंपरागत रूप से हर वर्ष भव्यता के साथ आयोजित हो रहा है। रहली-गढ़ाकोटा क्षेत्र पहले काफी पिछड़ा था, लेकिन 2003 में राज्य और उसके बाद वर्ष 2014 में केंद्र में हमारी सरकार बनने के बाद यहां विकास की गति तेज हुई। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विशेष आशीर्वाद से रहली क्षेत्र की जरूरी आवश्यकताएं पूर्ण हुई हैं। क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं को विस्तार देने की जरूरत है। भार्गव ने लव-कुश धाम निर्माण और राज्य के भीतर नदी जोड़ो प्रकल्प के तहत बुंदेलखंड में मां नर्मदा को सोनार नदी से जोड़ने का सुझाव दिया।

  • इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन रोड निर्माण में किसान हित सर्वोपरि: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन रोड निर्माण में किसान हित सर्वोपरि: मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मेट्रो पॉलिटन सिटी इंदौर-उज्जैन भविष्य की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होगा। इस नाते इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन प्रोजेक्ट भी किसानों के हित में उनके सुझाव के अनुरूप एलिवेटेड नहीं जमीनी स्तर पर बनाया जायेगा। जिन किसानों की भूमि प्रभावित होगी, उन्हें उचित मुआवजा देने के लिये शासन-प्रशासन प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार देर शाम उनके निवास पर भेंट करने आए इंदौर और उज्जैन जिलों के विभिन्न ग्रामों के किसान प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इंदौर और उज्जैन के किसान प्रतिनिधियों ने इंदौर उज्जैन ग्रीनफील्ड फोर लेन मार्ग का निर्माण कार्य किसानों के हित में करने के निर्णय के लिए आभार व्यक्त किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के माध्यम से 2935.15 करोड़ रूपये की परियोजना के अंतर्गत क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 2 जिलों के 28 ग्रामों को नया स्वरूप और जनसुविधा देने के लिये फोर लेन मार्ग निर्मित किया जायेगा। उन्नत संरचना के अंतर्गत इंदौर-उज्जैन के मध्य 2 स्थानों वेस्टर्न रिंग रोड और उज्जैन बदनावर मार्ग क्रॉसिंग पर वृहद जंक्शन का प्रावधान है। परिवहन तेज और सुरक्षित रहे इसके लिये प्रत्येक टोल प्लाजा पर आवश्यक प्रबंध भी होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर-उज्जैन के इस पुराने मार्ग से जानापाव आने-जाने के लिये भी परिवहन होता रहा है। पूर्व के वर्षों में मार्ग के संकुचित होते जाने से जो दुर्घटनाएं होती रही हैं, वह सिलसिला अब थम जायेगा। किसानों से विचार विमर्श के पश्चात इस ग्रीन फील्ड फोर लेन मार्ग परियोजना के कार्यों को गति दी जा रही है। गत 20 फरवरी को अनुबंध निष्पादन के पश्चात अन्य कार्यवाही प्रचलन में है। आगामी सिंहस्थ को देखते हुए यह परियोजना बड़ी जनसंख्या को लाभान्वित करेगी। प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को सशक्त करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।

  • राहुल गांधी और खरगे के झूठे दावों के झांसे में नहीं आएंगे देश के किसानः मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    राहुल गांधी और खरगे के झूठे दावों के झांसे में नहीं आएंगे देश के किसानः मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को कांग्रेस द्वारा आयोजित किसान महाचौपाल में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के बयानों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि देश के किसान राहुल और खड़गे के झूठे दावों के झांसे मे नहीं आएंगे।

    भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के विरोध में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार को कांग्रेस ने ‘किसान महाचौपाल’ का आयोजन किया, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने इस डील को किसानों के खिलाफ बताया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस नेताओं के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को देश की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों, युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर लेकर आएगा। उन्होंने कहा कि यह डील भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक होगी।

    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2018 में कर्जमाफी का वादा कर सरकार बनाने वाली कांग्रेस किसानों का पूरा कर्ज माफ नहीं कर पाई और कई किसानों को डिफॉल्टर बना दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले किसानों से माफी मांगनी चाहिए। किसान चौपाल करने वाले राहुल गांधी से उन्होंने तंज भरे अंदाज में पूछा कि वे बताएं दलहन में कौन-कौन सी फसलें आती हैं।

    डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने कहा कि सिंचाई के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक विस्तार किया गया है और बीते वर्षों में लगभग 10 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र बढ़ाया गया है। मध्य प्रदेश आज खाद्यान्न, दलहन और तिलहन उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार राज्य 46.63 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन के साथ देश में दूसरे स्थान पर है। दलहन उत्पादन में मध्य प्रदेश प्रथम और तिलहन उत्पादन में दूसरा स्थान रखता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए खेत से बाजार तक मजबूत वैल्यू चेन विकसित कर रही है। उनका कहना था कि सरकार की प्राथमिकता राजनीति नहीं, बल्कि किसान और प्रदेश की समृद्धि है।

  • रबी-खरीफ फसल तक का ज्ञान चाहिए, राहुल गांधी को CM मोहन यादव का तंज

    रबी-खरीफ फसल तक का ज्ञान चाहिए, राहुल गांधी को CM मोहन यादव का तंज


    भोपाल । कांग्रेस की किसान महा चौपाल में शामिल होने राजधानी में पहुँचे राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के स्वागत से पहले ही सियासी तापमान बढ़ गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस और उसके नेताओं पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसान महा चौपाल लगाना अच्छी बात है लेकिन राहुल गांधी को यह भी समझना चाहिए कि रबी और खरीफ फसल क्या होती है। उनका तंज सीधे कांग्रेस के किसान दृष्टिकोण पर था।

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा मध्य प्रदेश के दूध उत्पादन पर भी कुछ कहें। हम 365 दिन किसानों के लिए काम कर रहे हैं। राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए क्योंकि कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में किसानों के साथ अन्याय किया है। 2003 तक साढ़े सात लाख हेक्टेयर सिंचाई रकबा ही क्यों रहा जबकि हमने डेढ़ साल में उससे अधिक कार्य कर दिया।

    मोहन यादव ने कांग्रेस के पुराने कार्यकाल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पिछले 55 सालों में सिंचाई का विस्तार बहुत कम हुआ वहीं वर्तमान सरकार ने इसे तेजी से बढ़ाया है। उन्होंने भावांतर योजना और किसान कल्याण योजनाओं का भी जिक्र किया जिससे किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है।

    मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी को सुझाव भी दिया कि अपने कार्यकर्ताओं को अनुशासित करें। उन्होंने कहा कपड़े खोलकर प्रदर्शन करने वालों को डांट लगानी चाहिए और छमा मांगनी चाहिए। यह आदर्श जगह है और देश भी आदर्श होना चाहिए।

    कांग्रेस की किसान महा चौपाल राजधानी भोपाल के जवाहर चौक में आयोजित की जा रही है जिसमें किसानों की समस्याओं और भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर प्रतिक्रिया जुटाई जाएगी। इस अवसर पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे किसानों की आवाज़ को केंद्रित करेंगे और कृषि नीतियों पर अपनी पार्टी की प्राथमिकताओं को उजागर करेंगे।

    सियासत की इस गरमाई हुई स्थिति में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार किसानों के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने सिंचाई मूल्य सुरक्षा और किसान कल्याण योजनाओं का उल्लेख करते हुए यह संदेश दिया कि मध्य प्रदेश में किसानों के हित सर्वोपरि हैं।

    राहुल गांधी के आगमन से पहले किए गए इस बयान ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी किसान मुद्दों को लेकर सक्रिय हैं और आगामी समय में इस मुद्दे पर और बहस होने की संभावना है।

  • एमपी बजट 2026‑27: 8वीं तक टेट्रा पैक दूध फ्री, 15,000 शिक्षक भर्ती, लाड़ली बहनों के लिए 23,882 करोड़ का बड़ा प्रावधान

    एमपी बजट 2026‑27: 8वीं तक टेट्रा पैक दूध फ्री, 15,000 शिक्षक भर्ती, लाड़ली बहनों के लिए 23,882 करोड़ का बड़ा प्रावधान


    भोपाल । मध्य प्रदेश विधानसभा में बुधवार को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने वित्तीय वर्ष 2026‑27 का बजट ₹4,38,317 करोड़ के प्रावधान के साथ पेश किया, जिसे सरकार गरीब, महिला, युवा, किसान और इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित बताया। इस बजट में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है और शिक्षा, महिला सशक्तिकरण व पोषण जैसे कई बड़े लाभार्थी कदम उठाए गए हैं।

    सबसे बड़ा ऐलान लाड़ली बहना योजना के लिए ₹23,882 करोड़ के भारी प्रावधान का रहा, जिससे महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता जारी रहेगी। योजना के तहत लगभग 1.25 करोड़ महिलाएं प्रतिमाह ₹1,500 की राशि पा रही हैं और सरकार ने इसे प्राथमिकता देने की बात कही।

    शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार ने घोषणा की कि 8वीं कक्षा तक के सभी बच्चों को सरकारी स्कूलों में टेट्रा पैक दूध मुफ्त मिलेगा, जिससे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार होगा और स्कूल उपस्थिति भी बढ़ेगी। इसके साथ ही 15,000 नए शिक्षकों की भर्ती की घोषणा कर शिक्षा तंत्र को और मजबूत किए जाने का लक्ष्य रखा गया।

    बजट में 5,700 वर्किंग वुमन हॉस्टल बनाये जाने का प्रावधान किया गया है, जिससे कामकाजी महिलाओं को बेहतर आवास सुविधाएं मिल सकें, और पंचायत एवं ग्रामीण विकास के लिए लगभग ₹40,062 करोड़ आवंटित किया गया है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के विकास व बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में कदम है।

    सरकार ने किसानों के लिए भी बड़े ऐलान किए। बजट में 1 लाख किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है, जिससे विद्युत लागत बचाने और सिंचाई क्षमताओं का विस्तार करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा जी‑राम‑जी योजना और पीएम जनमन योजना के लिए भी करोड़ों रुपये का प्रावधान किया गया है।

    वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि यह बजट “PM के सपनों को साकार करने वाला बजट” और हर नारी को न्याय देने वाला है, जिससे प्रदेश को युवा, रोजगार और महिला सशक्तिकरण की नई दिशा मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि यह पहला “रोलिंग बजट” है, जिसमें अगले तीन वित्तीय वर्षों के लिए योजनाएं शामिल की गई हैं।

    बजट पेश करते समय विधानसभा में विपक्ष के कुछ विधायकों ने विधायक निधि नहीं बढ़ाये जाने पर हंगामा भी किया। कांग्रेस विधायकों ने कर्ज बढ़ने की चिंता जताते हुए खाली डिब्बे और गुल्लक लेकर विरोध प्रदर्शन किया और बजट पर सवाल उठाये।

    कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश का यह बजट शिक्षा, पोषण, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास पर बड़ी योजनाओं के साथ अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक कल्याण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी रूपरेखा पेश करता है।