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  • प्रयागराज में अशरफ की कुर्क जमीन पर अवैध कब्जे और प्लाटिंग का खुलासा, तीन बिल्डरों पर एफआईआर दर्ज

    प्रयागराज में अशरफ की कुर्क जमीन पर अवैध कब्जे और प्लाटिंग का खुलासा, तीन बिल्डरों पर एफआईआर दर्ज


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद के भाई अशरफ की गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क की गई जमीन पर कथित अवैध कब्जे और प्लाटिंग का मामला सामने आया है। प्रशासन की कार्रवाई के बाद इस मामले में तीन बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित जमीन को पहले ही कुर्क किया जा चुका था और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर तय थी।

    मामला एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के शाहा उर्फ पीपल गांव से जुड़ा है। दर्ज एफआईआर के मुताबिक, आराजी संख्या 1115 की करीब 0.4680 हेक्टेयर जमीन गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क की गई थी। इस जमीन को सरकारी अभिरक्षा में रखा गया था और संबंधित थाना प्रभारी को इसका कस्टोडियन बनाया गया था।

    आरोप है कि मोहम्मद मुस्लिम, मोहम्मद नसरत और मोहम्मद आफताब अहमद ने इस जमीन पर कब्जा कर वहां अवैध तरीके से प्लाटिंग शुरू कर दी। आरोप यह भी है कि जमीन को प्लॉट के रूप में विकसित कर उसे बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। तीनों को अतीक अहमद के कथित फाइनेंसर के तौर पर भी बताया गया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

    प्रशासन को जब जमीन पर कथित कब्जे और प्लाटिंग की जानकारी मिली तो अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। 22 अगस्त को एसडीएम सदर की मौजूदगी में बुलडोजर कार्रवाई की गई और जमीन पर की गई कथित अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त कर दिया गया। इसके बाद मामले में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

    सोमवार को लेखपाल मनीष कुमार की ओर से तीनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। अब जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कुर्क जमीन पर कब्जा किस तरह किया गया और वहां प्लाटिंग की गतिविधियां कब से चल रही थीं।

    इस घटना ने कुर्क संपत्तियों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। जब जमीन गैंगस्टर एक्ट के तहत पहले से कुर्क थी और उसकी देखरेख के लिए जिम्मेदारी निर्धारित थी, तब कथित तौर पर वहां निर्माण और प्लाटिंग की गतिविधियां कैसे शुरू हुईं, यह जांच का अहम हिस्सा रहेगा। प्रशासन यह भी देखेगा कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों और बिक्री की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही।

    मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच में यदि किसी अन्य व्यक्ति या अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन का ध्यान जमीन की स्थिति, कथित कब्जे और प्लाटिंग से जुड़े रिकॉर्ड की जांच पर है।

    अतीक अहमद और अशरफ की हत्या 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में उस समय हुई थी, जब दोनों को चिकित्सकीय जांच के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था। दोनों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे और उनकी कई संपत्तियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। ऐसे में कुर्क जमीन पर कथित कब्जे का यह मामला प्रशासनिक निगरानी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अब जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कुर्क संपत्ति पर कब्जा और प्लाटिंग किस अवधि में हुई, इसमें किन लोगों की भूमिका रही और जमीन से संबंधित गतिविधियों को रोकने में प्रशासनिक स्तर पर कोई चूक हुई या नहीं। फिलहाल तीनों नामजद आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

  • पैलेट गन मामले में राहुल गांधी का धरना, घायल छात्र साहिल के साथ थाने पहुंचे, कांग्रेस ने FIR दर्ज करने की मांग दोहराई

    पैलेट गन मामले में राहुल गांधी का धरना, घायल छात्र साहिल के साथ थाने पहुंचे, कांग्रेस ने FIR दर्ज करने की मांग दोहराई


    नई दिल्ली । 
    दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल का मामला शुक्रवार को उस समय और गरमा गया, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी घायल छात्र साहिल लोचव के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे। कांग्रेस ने छात्र की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस स्टेशन पहुंचने के बाद राहुल गांधी वहीं धरने पर बैठ गए और कहा कि जब तक FIR दर्ज नहीं होती, वे वहां से नहीं हटेंगे।

    साहिल लोचव का दावा है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान उस पर पैलेट गन से हमला हुआ था। उसके अनुसार, घटना के बाद उसे लेडी हार्डिंग अस्पताल ले जाया गया, जहां से आगे एम्स रेफर किया गया। एम्स में उसकी सर्जरी हुई, लेकिन उसकी आंख की रोशनी अब भी स्पष्ट नहीं है। साहिल ने बताया कि उसने 14 अगस्त को सात पन्नों की शिकायत पुलिस को दी थी, लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई।

    राहुल गांधी ने पुलिस स्टेशन के बाहर कहा कि चिकित्सा रिपोर्ट में साहिल के शरीर में 200 से अधिक छर्रे होने की बात सामने आई है और कुछ छर्रे उसकी आंख में भी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दिल्ली पुलिस पैलेट गन चलाने से इनकार कर रही है तो फिर छात्र को चोट कैसे लगी। राहुल गांधी ने कहा कि मामले में अपराध हुआ है और इसकी जांच के लिए FIR दर्ज होना जरूरी है।

    कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि शिकायत दर्ज कराने के लिए साहिल और उसके वकील को अलग-अलग पुलिस अधिकारियों के पास भेजा गया। साहिल की वकील के मुताबिक, पहले कनॉट प्लेस और फिर संसद मार्ग थाने से संबंधित क्षेत्र को लेकर उन्हें भेजा गया। वकील ने यह भी दावा किया कि उन्हें बताया गया कि शिकायत पर कार्रवाई नहीं की जा सकती क्योंकि ऊपर से निर्देश मिले हैं। कांग्रेस का कहना है कि लिखित शिकायत मिलने के बावजूद अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।

    राहुल गांधी के धरने के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेता और कार्यकर्ता भी पुलिस स्टेशन के बाहर पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और कुछ लोगों ने भजन गाते हुए तथा चरखे का इस्तेमाल करते हुए विरोध दर्ज कराया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया गया और संसद मार्ग के दोनों ओर यातायात प्रभावित रहा।

    कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि पार्टी की मांग स्पष्ट है कि शिकायत पर FIR दर्ज की जाए और उसका नंबर दिया जाए। उन्होंने कहा कि साहिल की शिकायत को लेकर राहुल गांधी उसके साथ खड़े हैं और प्राथमिकी दर्ज होने तक धरना जारी रखने का निर्णय लिया गया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे छात्रों के अधिकार और पुलिस की जवाबदेही से जुड़ा मामला बताया।

    वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाए। भाजपा नेताओं ने कहा कि 20 जुलाई की घटना को लेकर पहले से कानूनी प्रक्रिया चल रही है और सर्वोच्च न्यायालय ने भी मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है। भाजपा ने राहुल गांधी पर न्यायिक प्रक्रिया के समानांतर राजनीतिक प्रदर्शन करने का आरोप लगाया और कहा कि इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।

    केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के धरने को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे राजनीतिक प्रदर्शन बताया। उन्होंने कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय मामले को देख रहा है, तब पुलिस स्टेशन के बाहर धरना देने का औचित्य क्या है। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी कहा कि घटना की जांच चल रही है और कांग्रेस को कानून की प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।

    इस बीच कांग्रेस का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी जांच को प्रभावित करना नहीं, बल्कि घायल छात्र की शिकायत पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित कराना है। पैलेट गन के इस्तेमाल और साहिल की चोटों से जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल विवाद का केंद्र यही है कि छात्र की शिकायत पर FIR दर्ज होती है या नहीं और इस मामले में आगे पुलिस तथा न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

  • 82 लाख की जमीन 18 लाख में रजिस्ट्री का आरोप, कटनी की DSP नेहा पच्चीसिया सहित 3 पर FIR

    82 लाख की जमीन 18 लाख में रजिस्ट्री का आरोप, कटनी की DSP नेहा पच्चीसिया सहित 3 पर FIR


    कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी में पदस्थ सीएसपी नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विभागीय जांच रिपोर्ट के बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मामला हत्या के एक आरोपी के परिवार की बेशकीमती जमीन के कथित दबाव में कराए गए सौदे से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज और मारूफ अहमद के खिलाफ BNS की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। कटनी एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने FIR की पुष्टि की है।

    82.86 लाख की जमीन 18.20 लाख में रजिस्ट्री का आरोप

    शिकायत और विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, सरकारी गाइडलाइन के अनुसार जमीन की कीमत 82 लाख 86 हजार रुपए थी। आरोप है कि इसकी रजिस्ट्री महज 18 लाख 20 हजार रुपए में कराई गई। दस्तावेजों में 15 लाख रुपए चेक और 3.20 लाख रुपए नकद भुगतान का उल्लेख है।

    मामला कुठला थाना क्षेत्र में एक युवक की हत्या के केस से जुड़ा है। इस मामले में आकाश लोधी को मुख्य आरोपी बनाया गया था। गिरफ्तारी के बाद डिफॉल्ट जमानत पर बाहर आए आकाश ने जमीन के सौदे को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।

    DSP पर परिवार पर दबाव बनाने का आरोप

    आकाश लोधी का आरोप है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद DSP नेहा पच्चीसिया ने उसके परिवार पर जमीन बेचने के लिए दबाव बनाया। उसने दावा किया कि उसके पिता रमेश लोधी को दो दिन तक DSP के घर पर बैठाकर रखा गया। इसके बाद सरकारी वाहन से ग्राम कन्हवारा स्थित करीब 2.15 हेक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री कराई गई।

    आकाश के मुताबिक, जमीन की गाइडलाइन कीमत करीब 82 लाख रुपए थी, जबकि सौदा 1 करोड़ 7 लाख रुपए में तय किया गया था। आरोप है कि रजिस्ट्री के समय सिर्फ 15 लाख रुपए का चेक दिया गया और बाकी 92 लाख रुपए सात दिन में देने की बात कही गई।

    रकम नहीं मिली तो CM हेल्पलाइन में शिकायत

    आरोप के मुताबिक, बाकी रकम नहीं मिलने पर रमेश लोधी ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत की। उन्होंने जमीन के नामांतरण पर भी आपत्ति जताई। इसके बाद रमेश लोधी और उनके दामाद को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने का भी आरोप लगाया गया।

    शिकायत के बाद जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और IPS अधिकारी अनु बेनीवाल को जांच सौंपी गई। जांच में जमीन के सौदे, रजिस्ट्री और रकम के लेनदेन से जुड़े कई पहलुओं की पड़ताल की गई।

    बैंक खाते में ट्रांसफर हुए 15 लाख रुपए

    जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के मुताबिक, जमीन के खरीदार मारूफ अहमद हनफी के खाते में 15 लाख रुपए क्षितिज राज के खाते से ट्रांसफर किए गए थे। शिकायत में क्षितिज राज को नेहा पच्चीसिया का कथित पार्टनर और संबंधी बताया गया है।

    जांच में कथित तौर पर यह भी देखा गया कि आपराधिक मामले की जांच के दौरान रमेश लोधी पर जमीन कम कीमत में बेचने का दबाव बनाया गया या नहीं।

    पहले भी विवादों में रही हैं नेहा पच्चीसिया

    DSP नेहा पच्चीसिया इससे पहले भी शिकायतों और विवादों को लेकर चर्चा में रही हैं। एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी की कथित अवैध वसूली की शिकायत के बाद कटनी एसपी ने उनके ड्राइवर केशव सिंह को सस्पेंड किया था। साथ ही DSP से तीन थानों का प्रभार भी वापस लिया गया था।

    इसके अलावा हत्या के एक मामले में समय पर चालान पेश नहीं होने के कारण आरोपी को डिफॉल्ट बेल मिलने का मामला भी विभागीय जांच के दायरे में आया था। इसी मामले में आरोपी ने नेहा पच्चीसिया के खिलाफ न्यायालय में परिवाद पेश कर जमीन से जुड़े गंभीर आरोप लगाए थे।

    अब पुलिस जांच से साफ होगी पूरी तस्वीर

    लगातार सामने आई शिकायतों के बाद जबलपुर रेंज के आईजी के निर्देश पर मामलों की जांच कराई गई। विभागीय जांच और शिकायतों के आधार पर अब कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज और मारूफ अहमद के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

    फिलहाल पुलिस जमीन के सौदे, कथित दबाव और बैंक खातों के जरिए हुए लेनदेन की जांच कर रही है। FIR में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

  • CJI सूर्यकांत ने सरकार से जांच जारी रखने वाली FIR की सूची मांगी, सभी पक्षों को कमेटी के सामने रखने होंगे अपने तर्क

    CJI सूर्यकांत ने सरकार से जांच जारी रखने वाली FIR की सूची मांगी, सभी पक्षों को कमेटी के सामने रखने होंगे अपने तर्क

    नई दिल्ली ।पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर सहित विभिन्न स्थानों पर हुए प्रदर्शनों के दौरान दर्ज FIR को रद्द करने की मांग पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में प्रदर्शनकारियों की ओर से सभी FIR खत्म करने की मांग रखी गई, जबकि सरकार ने इसका विरोध करते हुए कुछ मामलों में जांच जारी रखने की जरूरत बताई।

    सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने पूरे मामले के लिए हाई पावर्ड कमेटी गठित करने की बात कही। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित पक्ष कमेटी के सामने अपनी बात रख सकेंगे। कमेटी मामले से जुड़े तथ्यों और विभिन्न पक्षों के तर्कों पर विचार करने के बाद अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी।

    प्रदर्शनकारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत से सभी FIR रद्द करने का आदेश देने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों पर व्यापक स्तर पर विचार किया जाना चाहिए। वहीं सरकार की ओर से इसका विरोध किया गया और कुछ मामलों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले आरोपियों को राहत देने पर आपत्ति जताई गई।

    सरकार की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि प्रत्येक मामले की परिस्थितियों को अलग-अलग देखना जरूरी है। उनका तर्क था कि यदि सभी FIR एक साथ रद्द कर दी जाती हैं तो इससे गलत संदेश जा सकता है। संसद मार्च का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान उठाया गया और इसे कानून के दायरे में रहने की आवश्यकता से जोड़ा गया।

    इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि संविधान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने का अधिकार देता है। हालांकि, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि प्रदर्शन के दौरान कानून का उल्लंघन या गंभीर आपराधिक गतिविधि के आरोपों वाले मामलों को अलग नजरिए से देखा जा सकता है।

    सरकार की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट से अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर सभी FIR खत्म करने की मांग की जा रही है। अदालत ने सरकार की आपत्तियों और सुझावों को सुनते हुए कहा कि सभी पक्षों की बात को प्रस्तावित कमेटी के समक्ष रखा जा सकता है।

    सुनवाई के दौरान घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की ओर से भी अपनी बात रखने की मांग की गई। उनके पक्ष का कहना था कि FIR या अन्य मामलों में कोई निर्णय लेने से पहले प्रभावित पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की स्थिति पर भी विचार किया जाना चाहिए।

    मुख्य न्यायाधीश ने सरकार से उन मामलों की सूची भी मांगी जिनमें जांच आगे जारी रखना आवश्यक समझा जा रहा है। अदालत ने संकेत दिया कि प्रस्तावित कमेटी सभी मामलों को देखने के बाद यह समझने में मदद करेगी कि किन मामलों में कार्रवाई जारी रहनी चाहिए और किन मामलों में राहत पर विचार किया जा सकता है।

    कमेटी की संरचना को लेकर अदालत ने बताया कि एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश, पूर्व पुलिस महानिदेशक और पूर्व सीबीआई निदेशक से सहमति ली गई है। इसके अलावा कमेटी में अन्य सदस्यों को शामिल करने के सुझावों पर भी विचार किया जाएगा।

    अदालत की इस पहल से अब FIR से जुड़े सभी पक्षों को अपनी स्थिति विस्तार से रखने का अवसर मिलेगा। कमेटी की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा। फिलहाल अदालत ने सभी संबंधित मामलों की सूची और पक्षों की दलीलों को एक व्यापक प्रक्रिया के तहत देखने का रास्ता तैयार किया है।

  • JPSC-JSSC विवाद में झारखंड पुलिस की कार्रवाई, विधानसभा घेराव के बाद करीब 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज

    JPSC-JSSC विवाद में झारखंड पुलिस की कार्रवाई, विधानसभा घेराव के बाद करीब 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज

    नई दिल्ली । झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन विधानसभा घेराव के बाद और तेज हो गया है। 10 अगस्त को रांची में विधानसभा की ओर मार्च के दौरान हुए हंगामे के बाद पुलिस ने करीब 600 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें लगभग 100 लोग नामजद हैं, जबकि करीब 500 अज्ञात प्रदर्शनकारियों को आरोपी बनाया गया है।

    छात्र संगठन लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए आंदोलन कर रहे हैं। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर विधानसभा घेराव के लिए आगे बढ़े थे। प्रदर्शनकारियों को विधानसभा की ओर जाने से रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी।

    स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस, वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। पुलिस की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पथराव किया और स्थिति को हिंसक बनाने की कोशिश की। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

    हंगामे के बाद दर्ज की गई प्राथमिकी में नामजद लोगों के अलावा बड़ी संख्या में अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस अब उपलब्ध CCTV फुटेज और मौके पर बनाए गए वीडियो के आधार पर प्रदर्शन में कथित तौर पर हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों की पहचान करने में जुटी है।

    पुलिस की जांच का मुख्य आधार घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरे और उपलब्ध वीडियो फुटेज हैं। अधिकारियों की ओर से कथित तौर पर हिंसा में शामिल लोगों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से तय नहीं किया जा सकता।

    छात्र संगठनों की प्रमुख मांग भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराना है। प्रदर्शनकारी विवादित परीक्षाओं की समीक्षा या उन्हें रद्द करने, कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और पूरे मामले की केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

    आंदोलन कई सप्ताह से जारी है और विधानसभा घेराव के बाद सरकार तथा प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के बीच विवाद और बढ़ गया है। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि अभ्यर्थियों के भविष्य पर किसी प्रकार का असर न पड़े।

    FIR दर्ज होने के बावजूद छात्र आंदोलन के पूरी तरह समाप्त होने के संकेत नहीं हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदर्शनकारी 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की तैयारी कर रहे हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए रांची प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की तैयारी की है।

    मुख्यमंत्री आवास के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है। प्रशासन के सामने अब एक ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर भर्ती परीक्षाओं से जुड़े छात्रों के आरोपों और मांगों को लेकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

    JPSC और JSSC से जुड़ा विवाद अब परीक्षा संबंधी शिकायतों से आगे बढ़कर पुलिस कार्रवाई और बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में प्रस्तावित प्रदर्शन और जांच की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि सरकार और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के बीच गतिरोध किस दिशा में जाता है।

  • पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR मांग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग और सस्ती लोकप्रियता

    पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR मांग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग और सस्ती लोकप्रियता


    नई दिल्ली ।
    पूर्व हाई कोर्ट जज यशवंत वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई से इनकार करते हुए उसे खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने याचिका को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया और कहा कि इस तरह की याचिकाएं सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से दाखिल की जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता को कड़ी टिप्पणी करते हुए मामले को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया।

    जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई की। याचिका में मांग की गई थी कि पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। याचिकाकर्ता का कहना था कि दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायाधीश रहते हुए उनके आवास से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में जली हुई नकदी बरामद हुई थी और इस मामले में पुलिस कार्रवाई होनी चाहिए।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उन्होंने पुलिस को शिकायत दी थी, लेकिन इसके बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने कहा कि पूर्व न्यायाधीश अब पद पर नहीं हैं और उन्हें किसी तरह की कानूनी छूट प्राप्त नहीं है। याचिकाकर्ता का कहना था कि मामले की जांच जरूरी है और कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। पीठ ने कहा कि इससे पहले भी इसी तरह की एक याचिका अदालत द्वारा खारिज की जा चुकी है। जब वकील ने कहा कि पिछली याचिका तकनीकी आधार पर खारिज हुई थी क्योंकि उस समय शिकायत दर्ज नहीं की गई थी, तो अदालत ने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया को बार-बार दोहराना उचित नहीं है।

    जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता एक अधिवक्ता हैं और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता को समझना चाहिए। अदालत ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग हैं और केवल प्रचार हासिल करने के उद्देश्य से दाखिल की जा रही हैं। इसके बाद पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया।

    यशवंत वर्मा इससे पहले भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में आए थे। उनके खिलाफ पद से हटाने की प्रक्रिया के तहत महाभियोग की कार्रवाई शुरू की गई थी। हालांकि, उन्होंने बाद में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद महाभियोग की प्रक्रिया प्रभावी नहीं रही। नियमों के अनुसार, संसद द्वारा हटाए जाने की प्रक्रिया से बचने के लिए संबंधित न्यायाधीश के पास इस्तीफा देने का विकल्प उपलब्ध होता है।

    मामला उस घटना से जुड़ा है, जब दिल्ली स्थित यशवंत वर्मा के आवास पर आग लगने के बाद कथित रूप से जली हुई नकदी मिलने की बात सामने आई थी। घटना के बाद इस मामले ने काफी चर्चा बटोरी थी और जांच की मांग उठी थी। हालांकि, एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है।

    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि अदालत किसी भी मामले में केवल आरोपों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया के इस्तेमाल को मंजूरी नहीं देगी। शीर्ष अदालत ने अपने रुख से यह संदेश दिया है कि न्यायिक व्यवस्था में दाखिल होने वाली याचिकाएं ठोस आधार और वास्तविक कानूनी जरूरतों पर आधारित होनी चाहिए।

  • महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, वर्चुअल पेशी की मांग खारिज, सांसद होने पर अलग सुविधा देने से कोर्ट का इनकार

    महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, वर्चुअल पेशी की मांग खारिज, सांसद होने पर अलग सुविधा देने से कोर्ट का इनकार

    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े आपराधिक मामले में राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने पुलिस के सामने वर्चुअल तरीके से पेश होने की उनकी मांग वाली याचिका खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल सांसद होने के आधार पर किसी आरोपी को जांच एजेंसी के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट नहीं दी जा सकती।

    जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ के सामने महुआ मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि एक फेसबुक पोस्ट के संबंध में महुआ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और पुलिस ने उन्हें उनके संसदीय क्षेत्र के संबंधित थाने में जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होने को कहा है। उनकी ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति मांगी गई थी।

    महुआ की ओर से अदालत में सुरक्षा संबंधी चिंता भी रखी गई। उनके वकील ने कहा कि पिछली बार जब वह पुलिस के सामने पेश हुई थीं, तब उनके खिलाफ प्रदर्शन और विरोध की स्थिति बनी थी। उनका दावा था कि अंडे फेंके जाने की आशंका के कारण उन्हें व्यक्तिगत रूप से थाने पहुंचने में खतरा महसूस हो रहा है। इसी आधार पर पुलिस के सामने वर्चुअल उपस्थिति की मांग की गई थी।

    इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने सवाल किया कि वर्चुअल पेशी की मांग क्या इसलिए की जा रही है क्योंकि महुआ मोइत्रा संसद सदस्य हैं। पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि राजनीति में आने के बाद सार्वजनिक विरोध जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। सुनवाई के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं केवल राजनीतिक पद के आधार पर स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि कलकत्ता हाई कोर्ट पहले ही महुआ मोइत्रा को जांच एजेंसी के साथ सहयोग करने का निर्देश दे चुका है। अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश के संबंधित हिस्से का पालन करने की बात कही और स्पष्ट किया कि यदि वह जांच अधिकारी के सामने पेश नहीं होती हैं, तो इसके परिणाम उन्हें हाई कोर्ट में भुगतने पड़ सकते हैं।

    आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की याचिका खारिज कर दी। इसका मतलब है कि उन्हें जांच प्रक्रिया में व्यक्तिगत रूप से शामिल होकर पुलिस के निर्देशों का पालन करना होगा। अदालत ने फिलहाल उनके लिए वर्चुअल पेशी की विशेष व्यवस्था को मंजूरी नहीं दी है।

    महुआ मोइत्रा के खिलाफ यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद सोशल मीडिया पर किए गए दो वीडियो पोस्ट से जुड़ा है। एक बीजेपी नेता की शिकायत के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था। यह विवाद उस समय और बढ़ा जब उनके संसदीय क्षेत्र कृष्णानगर में एक अदालत के बाहर उनके खिलाफ प्रदर्शन की स्थिति बनी और प्रदर्शनकारियों के पास अंडे और टमाटर होने की बात सामने आई।

    इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने पिछले महीने महुआ मोइत्रा की एफआईआर रद्द करने की मांग पर उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी थी, लेकिन साथ ही जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया था। हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होना है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब जांच में उनकी व्यक्तिगत पेशी का रास्ता साफ हो गया है।

  • पीएम मोदी की अपील के बाद नाबालिग लड़की की मां ने जताया आभार, एफआईआर वापस लेने की लगाई गुहार

    पीएम मोदी की अपील के बाद नाबालिग लड़की की मां ने जताया आभार, एफआईआर वापस लेने की लगाई गुहार

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र नारेबाजी करने के आरोप में चर्चा में आई 15 वर्षीय नाबालिग लड़की की मां ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि उनकी बेटी को सुधार का अवसर देकर नया जीवन मिला है। उन्होंने कहा कि कठोर कार्रवाई की बजाय क्षमा और मार्गदर्शन का संदेश समाज के लिए सकारात्मक उदाहरण है। साथ ही उन्होंने बेटी के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की भी अपील की है।

    यह मामला उस समय चर्चा में आया जब एक प्रदर्शन के दौरान नाबालिग लड़की का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें वह प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाती दिखाई दी। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया शुरू की और इस संबंध में मामला दर्ज किया गया। बाद में यह मामला संबंधित थाने को स्थानांतरित कर दिया गया, जहां आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    इस घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश साझा करते हुए कहा कि प्रदर्शनों के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले कई बच्चे परिस्थितियों और बहकावे का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि गाली-गलौज या अपमानजनक भाषा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। समाज को ऐसे बच्चों को अपराधी की तरह देखने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास करना चाहिए ताकि वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

    प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद संबंधित नाबालिग लड़की ने भी सार्वजनिक रूप से हाथ जोड़कर माफी मांगी। उसने कहा कि वह अपने दोस्तों के साथ दिल्ली के कनॉट प्लेस घूमने गई थी और वहीं पास में चल रहे प्रदर्शन के दौरान दूसरों के प्रभाव में आकर आपत्तिजनक नारे लगाने लगी। लड़की ने स्वीकार किया कि उससे गंभीर गलती हुई और उसने इसे अपने जीवन की पहली तथा अंतिम भूल बताते हुए देशवासियों से क्षमा मांगी।

    लड़की की मां ने भावुक होकर कहा कि संयोग से जिस दिन प्रधानमंत्री ने क्षमा का संदेश दिया, उसी दिन उनकी बेटी का जन्मदिन भी था। उनके अनुसार यह उनकी बेटी के लिए सबसे बड़ा उपहार है, क्योंकि उसे अपनी गलती सुधारने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि परिवार अपनी भूल स्वीकार करता है और चाहता है कि गलत नाम और उम्र के साथ दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाए, ताकि उनकी बेटी सामान्य जीवन की ओर लौट सके और अपनी पढ़ाई तथा भविष्य पर ध्यान दे सके।

    मां ने इस पूरे घटनाक्रम के बाद सरकार से एक व्यापक नीति बनाने की भी मांग की। उनका कहना है कि कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए सख्त नियम बनाए जाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि नाबालिगों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण हो और उन्हें राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल होने से भी रोका जाए, क्योंकि कम उम्र में बच्चे आसानी से दूसरों के प्रभाव में आ सकते हैं।

    इस बीच पूरे घटनाक्रम को लेकर सार्वजनिक स्तर पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री के सुधारवादी दृष्टिकोण की सराहना की है, जबकि कुछ ने कानूनी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। फिलहाल संबंधित एफआईआर और मामले की आगे की कार्रवाई पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार जारी है। यह प्रकरण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सोशल मीडिया की भूमिका, नाबालिगों की जिम्मेदारी और कानून के बीच संतुलन को लेकर भी नई चर्चा का विषय बन गया है।

  • इंस्टाग्राम पोस्ट से बढ़ा विवाद, RSS शाखा का वीडियो शेयर करने वाले छात्र पर पुलिस ने दर्ज की FIR

    इंस्टाग्राम पोस्ट से बढ़ा विवाद, RSS शाखा का वीडियो शेयर करने वाले छात्र पर पुलिस ने दर्ज की FIR


    इंदौर इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शाखा का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। संघ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद पुलिस ने एक छात्र के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि छात्र ने शाखा का वीडियो रिकॉर्ड कर इंस्टाग्राम पर साझा किया और उसके साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी पोस्ट कीं, जिससे संगठन की छवि खराब करने और माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया गया।

    पुलिस के अनुसार मामला संघ के सदस्य मोहनलाल मालवीय की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायत में बताया गया है कि वीणा नगर निवासी छात्र क्षितिज वाने ने आरएसएस की नियमित शाखा का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वीडियो के साथ संगठन के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी गईं और धमकी भरे अंदाज में पोस्ट साझा किए गए।

    जानकारी के मुताबिक हीरानगर क्षेत्र के नॉर्थ एवेन्यू स्थित एक खाली मैदान में आरएसएस की शाखा प्रतिदिन संचालित होती है। यहां संघ के सदस्य मोहनलाल मालवीय, दीपक शर्मा, लोकेंद्र कोष्ठी, लालजी प्रतापत, नितिन विश्वकर्मा सहित कई स्वयंसेवक नियमित रूप से शाखा में शामिल होते हैं। शिकायत में कहा गया है कि करीब छह महीने पहले भी संबंधित छात्र शाखा स्थल पर पहुंचा था और वीडियो रिकॉर्ड करते हुए शाखा लगाए जाने पर सवाल उठाए थे। उस समय स्वयंसेवकों ने उसे समझाकर वहां से भेज दिया था।

    संघ के सदस्यों का आरोप है कि हाल ही में छात्र दोबारा शाखा का वीडियो रिकॉर्ड करने पहुंचा और बाद में उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर साझा कर दिया। शिकायत के अनुसार उसने कथित रूप से “आरएसएस देशद्रोही” शीर्षक से पोस्ट भी साझा की, जिसे संगठन के सदस्यों ने आपत्तिजनक बताया। उनका कहना है कि इस तरह की पोस्ट से सामाजिक माहौल खराब हो सकता है और संगठन की छवि प्रभावित होती है।

    घटना के बाद संघ के पदाधिकारियों ने पहले आपस में चर्चा की और फिर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद शनिवार देर रात संघ के सदस्य हीरानगर थाने पहुंचे और कथित वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट तथा अन्य डिजिटल सामग्री पुलिस को सौंपते हुए शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर छात्र के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

    हीरानगर थाना पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो, पोस्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। संबंधित इंस्टाग्राम अकाउंट, पोस्ट की सामग्री और वीडियो की सत्यता का परीक्षण किया जाएगा। जांच के दौरान सभी पक्षों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो के पीछे क्या उद्देश्य था तथा कानून के तहत कौन-कौन सी धाराएं लागू होती हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संवेदनशील विषय से जुड़ी सामग्री सोशल मीडिया पर साझा करते समय जिम्मेदारी और कानून का पूरा ध्यान रखें, ताकि अनावश्यक विवाद और सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा न हो।

  • शिवपुरी में लेब्राडोर की संदिग्ध मौत, शव लेकर थाने पहुंची महिला ने FIR की मांग की

    शिवपुरी में लेब्राडोर की संदिग्ध मौत, शव लेकर थाने पहुंची महिला ने FIR की मांग की


    शिवपुरी मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक पालतू लेब्राडोर कुत्ते की मौत को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शांति नगर क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने अपने पड़ोसियों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उसके आठ माह के पालतू लेब्राडोर को लाठियों से पीट-पीटकर मार डाला। घटना के विरोध में महिला शुक्रवार को कुत्ते का शव लेकर फिजिकल थाना पहुंची और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    महिला प्रीति परिहार के मुताबिक गुरुवार शाम उनका पालतू लेब्राडोर खाना खाने के बाद घर से बाहर निकल गया था। कुछ देर बाद वह पास स्थित एक आरओ प्लांट संचालक के घर की ओर चला गया। देर रात तक कुत्ता वापस नहीं लौटा तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। इस दौरान आसपास के लोगों से जानकारी मिली कि कुत्ते के साथ मारपीट की गई है।

    प्रीति परिहार का आरोप है कि आरओ प्लांट संचालक, उसके बेटे और ड्राइवर ने मिलकर लाठियों से उनके पालतू कुत्ते की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई। उनका यह भी आरोप है कि घटना के बाद कुत्ते के शव को दूर फेंक दिया गया ताकि मामला सामने न आए।

    महिला का कहना है कि जब वह घटना की जानकारी लेने आरोपियों के घर पहुंचीं तो उनके साथ गाली-गलौज की गई। विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और मारपीट करने की कोशिश भी की गई। शुक्रवार सुबह कुत्ते का शव मिलने के बाद वह उसे लेकर सीधे फिजिकल थाना पहुंचीं और पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

    अपनी शिकायत में महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित आरओ प्लांट में रात के समय संदिग्ध और अनैतिक गतिविधियां संचालित होती हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    फिजिकल थाना पुलिस का कहना है कि शिकायत प्राप्त हो गई है। मामले में लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।