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  • IPL क्रिकेटर शशांक सिंह और रिटायर्ड IPS पिता पर भोपाल में FIR कुक से मारपीट और गाली गलौज के आरोप जांच शुरू

    IPL क्रिकेटर शशांक सिंह और रिटायर्ड IPS पिता पर भोपाल में FIR कुक से मारपीट और गाली गलौज के आरोप जांच शुरू


    नई दिल्ली। भोपाल में आईपीएल क्रिकेटर शशांक सिंह और उनके पिता रिटायर्ड स्पेशल डीजी शैलेष सिंह के खिलाफ कुक से कथित मारपीट और गाली गलौज के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। रातीबड़ थाना पुलिस ने शिकायत और प्रारंभिक जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस सभी पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

    शिकायतकर्ता रीवा निवासी विपेंद्र सिंह तोमर ने आरोप लगाया है कि उन्हें परिचित के माध्यम से भोपाल बुलाया गया था। उनके अनुसार उन्हें शैलेष सिंह के घर खाना बनाने की नौकरी का प्रस्ताव दिया गया था और भविष्य में सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा भी दिया गया था। तय वेतन के साथ रहने और खाने की व्यवस्था का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने काम शुरू किया।

    विपेंद्र का आरोप है कि काम शुरू करने के कुछ ही समय बाद उनसे लगातार काम कराया जाने लगा। उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने काम छोड़ने की इच्छा जताई तो उनके साथ गाली गलौज की गई। शिकायत के अनुसार उनका मोबाइल भी छीन लिया गया और उन्हें जबरन काम करने के लिए कहा गया। पीड़ित का कहना है कि वह डरकर कमरे में चला गया था लेकिन बाद में उनके साथ कथित रूप से मारपीट की गई।

    शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस दौरान शैलेष सिंह उनके बेटे शशांक सिंह और एक कर्मचारी ने उनके साथ मारपीट की। उन्होंने शरीर और चेहरे पर चोट आने का भी दावा किया है। घटना के बाद विपेंद्र ने रोते हुए एक वीडियो भी जारी किया जिसमें उन्होंने अपने साथ हुई कथित घटना का जिक्र किया। हालांकि वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    रातीबड़ थाना पुलिस के अनुसार शिकायत मिलने के बाद फरियादी और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर शैलेष सिंह शशांक सिंह और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

    इस मामले में एक और पहलू भी सामने आया है। इससे पहले विदिशा निवासी एक युवक ने भी रिटायर्ड अधिकारी शैलेष सिंह के खिलाफ नौकरी के दौरान कथित रूप से बंधक बनाने मारपीट करने और धमकी देने जैसी शिकायत दर्ज कराई थी। उस शिकायत में भी मोबाइल और सामान वापस नहीं करने के आरोप लगाए गए थे। हालांकि उन आरोपों की कानूनी स्थिति और अंतिम निष्कर्ष अलग जांच प्रक्रिया का विषय हैं।

    क्रिकेट की बात करें तो शशांक सिंह ने आईपीएल में पंजाब किंग्स सहित कई टीमों का प्रतिनिधित्व किया है। उन्हें 2024 सीजन में शानदार प्रदर्शन के बाद पहचान मिली थी जबकि 2026 का सीजन उनके लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। उन्होंने इस सीजन में सीमित रन बनाए और टीम के लिए अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके।

    फिलहाल इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच जारी है। आरोपों की सत्यता का अंतिम फैसला पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • भोपाल में IPL क्रिकेटर शशांक सिंह और पूर्व IPS पिता पर FIR, कुक से मारपीट का आरोप

    भोपाल में IPL क्रिकेटर शशांक सिंह और पूर्व IPS पिता पर FIR, कुक से मारपीट का आरोप


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें IPL खिलाड़ी शशांक सिंह और उनके रिटायर्ड IPS पिता शैलेश सिंह पर अपने घरेलू रसोइए के साथ मारपीट, गाली-गलौज और अवैध रूप से बंधक बनाने के आरोप लगे हैं। पुलिस ने दोनों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में परिवार के ड्राइवर को भी सह-आरोपी बनाया गया है। घटना भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र के मेंदोरी गांव स्थित आवास की बताई जा रही है।

    कुक ने दर्ज कराई शिकायत
    रीवा जिले के रहने वाले 31 वर्षीय कुक विपेंद्र सिंह तोमर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि उन्हें 15,000 रुपये मासिक वेतन, रहने-खाने की सुविधा और भविष्य में सरकारी नौकरी दिलाने के आश्वासन पर नौकरी पर रखा गया था।

    शिकायत के अनुसार, काम शुरू होने के कुछ ही घंटों में खाने की गुणवत्ता को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद उन पर दबाव बनाया गया और गाली-गलौज की गई।

    मोबाइल छीना, कमरे में बंद होने का आरोप
    पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने नौकरी छोड़कर घर लौटने की बात कही तो स्थिति बिगड़ गई। उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया ताकि वह किसी से संपर्क न कर सकें। इसके बाद उन्हें जबरन काम करने के लिए मजबूर किया गया।

    कुक के अनुसार, खुद को बचाने के लिए उन्होंने एक कमरे में खुद को बंद कर लिया, लेकिन आरोप है कि पिता-पुत्र और ड्राइवर ने दरवाजा खोलकर उनके साथ मारपीट की। पुलिस के अनुसार, मेडिकल जांच में पीड़ित के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे मारपीट की पुष्टि हुई है।

    FIR दर्ज, BNS की धाराएं लागू
    रातीबड़ पुलिस ने शिकायत और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296(B), 115(2) और 3(5) के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।

  • अवैध मिट्टी उत्खनन रोकने गई टीम पर माफिया का हमला, तहसीलदार को दी जान से मारने की धमकी, वीडियो वायरल, एफआईआर दर्ज

    अवैध मिट्टी उत्खनन रोकने गई टीम पर माफिया का हमला, तहसीलदार को दी जान से मारने की धमकी, वीडियो वायरल, एफआईआर दर्ज


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में अवैध मिट्टी उत्खनन रोकने गई राजस्व टीम पर खनन माफिया द्वारा खुलेआम धमकी देने और सरकारी कार्य में बाधा डालने का गंभीर मामला सामने आया है। बदरवास तहसील के सड़बूड़ गांव में हुई इस घटना में तहसीलदार सचिन भार्गव और उनकी टीम को जान से मारने की धमकी दी गई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया है।

    जानकारी के अनुसार, राजस्व विभाग की टीम को सूचना मिली थी कि सिंध नदी के पास सरकारी जमीन पर अवैध रूप से मिट्टी का उत्खनन किया जा रहा है। इस पर तहसीलदार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान पाया गया कि भारी मशीनों की मदद से मिट्टी निकाली जा रही थी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए उसका अवैध परिवहन किया जा रहा था। टीम ने मौके पर कार्रवाई शुरू की, तभी स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

    कार्रवाई के दौरान आरोपियों ने विरोध शुरू कर दिया और सरकारी अमले के साथ अभद्रता की। इसी दौरान मुख्य आरोपी जयमंडल यादव ने तहसीलदार को खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि यदि कार्रवाई नहीं रोकी गई तो वह गोली चला देगा और जेल जाने के लिए भी तैयार है। इसके साथ ही उसने अपने बेटे को घर से हथियार लाने के लिए भी कहा, जिससे मौके पर मौजूद अधिकारी और कर्मचारी दहशत में आ गए।

    घटना के दौरान अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और आरोपी पक्ष ने मौके से हाइड्रा मशीन और एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को भगा दिया। हालांकि राजस्व टीम ने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर बदरवास थाने में खड़ा करा दिया। अधिकारियों के अनुसार, सरकारी भूमि पर करीब 15-15 फीट गहरे गड्ढे बनाकर अवैध खनन किया गया था, जिससे बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन सामने आया है।

    कोटवार और मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने भी इस पूरी घटना की पुष्टि की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने न केवल गाली-गलौज की बल्कि जान से मारने की धमकी देकर शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के वीडियो के सामने आने के बाद प्रशासनिक अमले में चिंता बढ़ गई है और अवैध खनन पर कार्रवाई को लेकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की जा रही है।

    यह मामला राज्य में अवैध खनन पर बढ़ते दबाव और प्रशासनिक टीमों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी उजागर करता है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

  • तुअर दाल के कारोबार में मुनाफे का झांसा देकर 65 लाख की ठगी, स्टॉक के फोटो दिखाकर कारोबारी को फंसाया; दो पर केस दर्ज

    तुअर दाल के कारोबार में मुनाफे का झांसा देकर 65 लाख की ठगी, स्टॉक के फोटो दिखाकर कारोबारी को फंसाया; दो पर केस दर्ज


    मध्य प्रदेश:
    की आर्थिक राजधानी इंदौर में व्यापारिक निवेश के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। तुअर दाल के कारोबार में अधिक मुनाफा दिलाने का भरोसा देकर एक कारोबारी से 65 लाख रुपए की राशि हासिल कर ली गई। आरोप है कि रकम लेने के बाद न तो माल की आपूर्ति की गई और न ही निवेश की गई राशि लौटाई गई। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार भंवरकुआं थाना क्षेत्र निवासी कारोबारी गिरीश रामनानी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनकी पहचान महाराष्ट्र के सोलापुर निवासी गुरुशांतलिंग कुंभार और सोमनाथ हलगोदे से कई वर्ष पहले हुई थी। दोनों व्यापारियों से पूर्व में भी विभिन्न स्थानों पर व्यापारिक लेन-देन हो चुका था। इसी पुराने परिचय और विश्वास का फायदा उठाकर आरोपियों ने उन्हें नए व्यापारिक निवेश का प्रस्ताव दिया।

    शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने खुद को तुअर दाल के बड़े कारोबारी के रूप में प्रस्तुत किया और अपनी फर्म के माध्यम से व्यापार में निवेश करने पर आकर्षक मुनाफा मिलने का दावा किया। फरवरी 2026 में एक आरोपी इंदौर पहुंचा और कारोबारी से मुलाकात की। इस दौरान उसने मोबाइल फोन पर बड़े पैमाने पर तुअर दाल के स्टॉक की तस्वीरें और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े विवरण दिखाए। साथ ही निवेश करने पर कम समय में अच्छा लाभ मिलने का भरोसा भी दिलाया।

    व्यापारिक अवसर को लाभदायक मानते हुए गिरीश रामनानी ने निवेश का निर्णय लिया। शिकायत के अनुसार उन्होंने विभिन्न बैंकों से ऋण लेकर कुल 65 लाख रुपए की व्यवस्था की। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में यह पूरी राशि आरोपियों द्वारा संचालित फर्म के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई। लेन-देन के दौरान कारोबारी को भरोसा दिलाया गया था कि तय समय के भीतर माल की आपूर्ति कर दी जाएगी और व्यापारिक लाभ भी मिलेगा।

    फरियादी का आरोप है कि रकम जमा होने के बाद आरोपियों का व्यवहार बदलने लगा। निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद तुअर दाल की खेप नहीं भेजी गई। जब माल की आपूर्ति को लेकर लगातार संपर्क किया गया तो आरोपियों ने विभिन्न कारण बताते हुए समय मांगना शुरू कर दिया। कई बार बातचीत के बावजूद न तो व्यापार पूरा हुआ और न ही निवेश की गई राशि वापस की गई।

    समय बीतने के साथ कारोबारी को संदेह हुआ कि उनके साथ सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की गई है। उन्होंने अपने स्तर पर आरोपियों से संपर्क कर समाधान निकालने की कोशिश की, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की और उपलब्ध दस्तावेज, बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी तथा अन्य साक्ष्य जांच एजेंसी को सौंपे।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए तथ्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया है। शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां अब धनराशि के लेन-देन, व्यापारिक दस्तावेजों और आरोपियों की गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं।

    यह मामला व्यापारिक निवेश के दौरान सतर्कता बरतने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े वित्तीय लेन-देन से पहले संबंधित व्यक्ति, फर्म और कारोबार की स्वतंत्र जांच करना आवश्यक है। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और आरोपियों की भूमिका तथा धनराशि के उपयोग से जुड़े पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।

  • हापुड़ में प्रॉपर्टी डीलर की दिनदहाड़े हत्या से सनसनी, बीजेपी नेता समेत 8 पर केस दर्ज, एनकाउंटर की मांग पर अड़ी परिवार

    हापुड़ में प्रॉपर्टी डीलर की दिनदहाड़े हत्या से सनसनी, बीजेपी नेता समेत 8 पर केस दर्ज, एनकाउंटर की मांग पर अड़ी परिवार




    नई दिल्ली। हापुड़ में प्रॉपर्टी विवाद को लेकर एक दर्दनाक वारदात सामने आई है, जहां सोमवार रात शादी समारोह से लौट रहे प्रॉपर्टी डीलर अतुल तोमर (32) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना पिलखुआ थाना क्षेत्र के रिलायंस रोड इलाके में हुई, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।

    जानकारी के अनुसार अतुल तोमर गाजियाबाद के भोजपुर में एक शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे, तभी रास्ते में बाइक सवार बदमाशों ने उनकी कार को रोक लिया। आरोप है कि हमलावरों ने पहले कार का शीशा तोड़ने की कोशिश की और फिर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी, जिसमें एक गोली अतुल के सीने में लग गई। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    परिजनों का आरोप है कि पिछले तीन साल से एक प्लॉट को लेकर विवाद चल रहा था, जिसमें कुछ स्थानीय प्रॉपर्टी डीलर शामिल थे। इसी रंजिश के चलते हत्या को अंजाम दिया गया है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि धमकियों के बावजूद पुलिस ने पहले गंभीरता से कार्रवाई नहीं की।

    इस मामले में पुलिस ने बीजेपी जिला मंत्री नवीन तोमर समेत 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि मुख्य आरोपी मंजीत सहित अन्य फरार हैं। पुलिस टीम लगातार दबिश दे रही है और सीसीटीवी फुटेज व कॉल डिटेल्स के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    परिजनों में गुस्सा है और उन्होंने आरोपियों के एनकाउंटर की मांग करते हुए अंतिम संस्कार रोक दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया जाएगा।

  • सुप्रीम कोर्ट सख्त: पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक, तीन हफ्ते में जवाब तलब

    सुप्रीम कोर्ट सख्त: पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक, तीन हफ्ते में जवाब तलब


    नई दिल्ली।
    पवन खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने कांग्रेस नेता को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

    न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने यह आदेश असम सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा दी गई एक सप्ताह की ट्रांजिट बेल को चुनौती दी गई थी।

    कोर्ट का स्पष्ट निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फिलहाल ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक रहेगी। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पवन खेड़ा असम की सक्षम अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो इस आदेश से उस प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की गई है।

    असम सरकार की दलील

    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि इस मामले में तेलंगाना हाई कोर्ट को सुनवाई का अधिकार क्षेत्र नहीं था, क्योंकि एफआईआर और कथित अपराध दोनों असम में दर्ज हुए हैं। उन्होंने इसे ‘फोरम शॉपिंग’ बताते हुए कानून के दुरुपयोग का आरोप लगाया।

    क्या है पूरा मामला

    यह विवाद हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भूयान सरमा को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा है। असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप शामिल हैं।

    खेड़ा का पक्ष

    खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और अधिकतम मानहानि का मामला बनता है, जिसमें गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है।

    पहले क्या हुआ था

    तेलंगाना हाई कोर्ट की एकल पीठ ने 10 अप्रैल को खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे संबंधित अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें। इसी आदेश को चुनौती देते हुए असम सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।

    राजनीतिक माहौल गर्म

    इस मामले ने राज्य की सियासत को भी गरमा दिया है। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है, जबकि बीजेपी ने खेड़ा के बयान को गैरजिम्मेदार और मानहानिकारक करार दिया है।

  • Punjab: वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के जिला प्रबंधक सुसाइड केस में पूर्व मंत्री भुल्लर के खिलाफ FIR…. हो सकती है गिरफ्तारी

    Punjab: वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के जिला प्रबंधक सुसाइड केस में पूर्व मंत्री भुल्लर के खिलाफ FIR…. हो सकती है गिरफ्तारी


    चंडीगढ़।
    पंजाब (Punjab) के अमृतसर (Amritsar) में पंजाब वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (Punjab Warehousing Corporation) के जिला प्रबंधक (District Manager) गगनदीप सिंह रंधावा (Gagandeep Singh Randhawa) की आत्महत्या के मामले ने एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। अमृतसर पुलिस ने इस मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) नेता और पंजाब के पूर्व परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर, उनके पिता सुखदेव सिंह भुल्लर और निजी सहायक (PA) दिलबाग सिंह उर्फ बागा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने रंधावा की पत्नी उपिंदर कौर की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें आत्महत्या के लिए उकसाना (धारा 108), आपराधिक धमकी (धारा 351) और समान मंशा (धारा 3(5)) शामिल हैं।

    मृतक की पत्नी उपिंदर कौर ने अपनी शिकायत में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, पिछले कई महीनों से वेयरहाउस टेंडर के आवंटन को लेकर उनके पति पर भारी दबाव बनाया जा रहा था। आरोपी उन पर नियमों के विरुद्ध जाकर अपने पक्ष में टेंडर अलॉट करने का दबाव डाल रहे थे। आरोप है कि पूर्व मंत्री और उनके सहयोगियों ने रंधावा के साथ मारपीट की और उन पर पिस्तौल से वार भी किया। उन्हें इस हद तक अपमानित किया गया कि वे टूट गए।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि रंधावा को बंदूक की नोक पर एक झूठा वीडियो बयान रिकॉर्ड करने के लिए मजबूर किया गया था। रंधावा को धमकाया गया था कि यदि उन्होंने बात नहीं मानी, तो गैंगस्टरों के जरिए उन्हें और उनके बच्चों को नुकसान पहुंचाया जाएगा।


    सोशल मीडिया पर आया आखिरी वीडियो

    लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर रंधावा ने शनिवार तड़के करीब 5:30 बजे जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। अपनी मृत्यु से ठीक पहले उन्होंने एक छोटा वीडियो रिकॉर्ड किया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसी वीडियो और पत्नी के बयानों को पुलिस ने जांच का मुख्य आधार बनाया है।


    विपक्ष ने खोला मोर्चा

    इस घटना के बाद पंजाब की विपक्षी पार्टियों ने ‘आप’ सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने रंजीत एवेन्यू स्थित रंधावा के आवास पर जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की। विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और रविवार को मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़े विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। रंधावा की आत्महत्या ने राज्य में भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज मामले में कांग्रेस MLA मसूद को सुप्रीम कोर्ट से राहत

    इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज मामले में कांग्रेस MLA मसूद को सुप्रीम कोर्ट से राहत

    भोपाल । भोपाल के कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। मामला इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज के संचालन से जुड़ा है जहां कथित फर्जी सेल डीड के आधार पर मसूद और अमन एजुकेशन सोसाइटी के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही थी। हाईकोर्ट ने पहले पुलिस कमिश्नर को मसूद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और पुलिस महानिदेशक को एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को निरस्त कर दिया।

    सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच जिसमें जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदूरकर शामिल थे ने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार का जवाब आए बिना ऐसा अंतरिम आदेश देना उचित नहीं था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट द्वारा लगाए गए सख्त निर्देश पहली नजर में उचित नहीं लगते।

    आरिफ मसूद की पैरवी सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तंखा ने की। तंखा ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट ने बिना सरकार का पक्ष सुने ही एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी गठित करने का आदेश दिया जो सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला हाईकोर्ट में लंबित है इसलिए सभी पक्ष जल्द अपनी दलीलें प्रस्तुत करें। इसके बाद ही हाईकोर्ट मामले में मेरिट के आधार पर निर्णय लेगा।

    मामला इस प्रकार शुरू हुआ कि मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने 9 जून 2025 को इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी। कॉलेज का संचालन अमन एजुकेशन सोसाइटी करती है और कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद इस सोसाइटी के सचिव हैं। मसूद ने मान्यता रद्द होने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

    पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह ने इस मामले की शिकायत की थी। जांच के दौरान आयुक्त उच्च शिक्षा ने पाया कि अमन एजुकेशन सोसाइटी ने कॉलेज के संचालन के लिए फर्जी दस्तावेजों पर एनओसी और मान्यता ली थी। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सेल डीड तैयार करवाई गई और इसे पंजीयन कार्यालय में फर्जी तरीके से दर्ज किया गया।

    इस मामले से कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक चर्चा भी शुरू हो गई थी क्योंकि मसूद कांग्रेस विधायक हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मसूद को फिलहाल कानूनी राहत मिल गई है लेकिन हाईकोर्ट में मामला अब भी लंबित है और वहीं अंतिम निर्णय होगा।

    राजनीतिक और शिक्षा जगत दोनों में इस मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि बिना पक्षकार की सुनवाई के सख्त आदेश देना न्यायसंगत नहीं होता जिससे राज्य के प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठ सकते हैं। अब हाईकोर्ट मामले में दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर निर्णय करेगा।

  • भोपाल: रंगपंचमी पर युवती की कार पर एसिड फेंकने का गंभीर मामला

    भोपाल: रंगपंचमी पर युवती की कार पर एसिड फेंकने का गंभीर मामला


    भोपाल भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र में रंगपंचमी के दिन एक युवती की कार पर कथित रूप से एसिड मिला रंग फेंकने की घटना सामने आई है। घटना में कार का पेंट पूरी तरह जल गया, जिससे संपत्ति को गंभीर नुकसान हुआ। 24 वर्षीय पीड़िता एक निजी कंपनी में एचआर के पद पर कार्यरत हैं और वह अभिरुचि परिसर में रहती हैं।

    युवती ने बताया कि रविवार को वह अपनी कार घर के बाहर पार्क कर चुकी थीं। शाम के समय जब वह कार के पास पहुंचीं, तो देखा कि कार पर रंग डाला हुआ था। पेंट बुरी तरह जल चुका था, जिससे साफ तौर पर यह अंदेशा जताया जा रहा है कि रंग में एसिड मिलाकर कार पर फेंका गया। पीड़िता ने तुरंत ऐशबाग थाना जाकर शिकायत दर्ज कराई।

    थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी संदीप पंवार ने बताया कि कॉलोनी में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।

    इस घटना ने सिर्फ संपत्ति को नुकसान नहीं पहुँचाया, बल्कि एसिड के इस्तेमाल से सुरक्षा की गंभीर चिंता भी पैदा कर दी है। फिलहाल पीड़िता सुरक्षित हैं और उन्हें कोई शारीरिक चोट नहीं आई है।

    जांच अधिकारी आसपास के अन्य CCTV और पड़ोसियों से पूछताछ कर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने जनता से भी अपील की है कि अगर किसी के पास इस घटना से संबंधित कोई जानकारी है, तो वह तुरंत पुलिस को सूचित करें।

    यह मामला याद दिलाता है कि त्योहारों के समय सावधानी और सुरक्षा दोनों जरूरी हैं। रंगपंचमी का त्योहार खुशी और मस्ती का प्रतीक है, लेकिन इस तरह की घटनाओं से इसे डर और चिंता का माहौल भी मिल सकता है। पुलिस की सक्रियता और नागरिकों की सतर्कता इस तरह की घटनाओं को रोकने में अहम भूमिका निभा सकती है।

  • जबलपुर में चर्च में हंगामा: महिला दिवस कार्यक्रम में निलंबित प्राचार्य ने किया उत्पात, ईसाई समुदाय ने FIR की मांग की

    जबलपुर में चर्च में हंगामा: महिला दिवस कार्यक्रम में निलंबित प्राचार्य ने किया उत्पात, ईसाई समुदाय ने FIR की मांग की


    जबलपुर जबलपुर के क्राइस्टचर्च गर्ल्स स्कूल परिसर में स्थित चर्च में रविवार सुबह आराधना के दौरान हंगामा हो गया। महिला दिवस के अवसर पर आयोजित महिला सम्मान कार्यक्रम में अचानक व्यवधान उत्पन्न होने से ईसाई समुदाय में नाराजगी फैल गई। समाज और चर्च के पदाधिकारियों ने तुरंत ओमती थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और हंगामा करने वाले के खिलाफ FIR दर्ज कर कार्रवाई की मांग की।

    ओमती पुलिस के अनुसार, शिकायत में बताया गया कि क्राइस्टचर्च बॉयज स्कूल से निलंबित प्राचार्य लेडली मैथ्यूज सुबह आराधना के दौरान चर्च में घुस आए। उन्होंने पवित्र स्थान में पहुंचकर माइक छीन लिया और बेवजह की बातें करने लगे, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    चर्च पदाधिकारियों के विरोध करने पर मैथ्यूज ने वहां मौजूद लोगों को धमकाया और पदाधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की की। इस घटना से उपस्थित लोग आहत हुए और महिलाओं के सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न हुआ। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं के साथ भी अभद्रता की शिकायत की गई है।

    पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और बताया कि जल्द ही दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चर्च और समाज के पदाधिकारी पूरे मामले में सतर्क हैं और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

    इस घटना ने न केवल चर्च परिसर में सुरक्षा की चिंता बढ़ाई है, बल्कि समुदाय के बीच तनाव भी पैदा किया है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करने की अपील की है।