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  • जामिया विवाद पर इमरान मसूद का प्रशासन पर हमला, बोले- छात्रों की समस्याएं सुनने के बजाय दर्ज हो रही एफआईआर

    जामिया विवाद पर इमरान मसूद का प्रशासन पर हमला, बोले- छात्रों की समस्याएं सुनने के बजाय दर्ज हो रही एफआईआर

    नई दिल्ली ।जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। मसूद ने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था, अधिकारियों की नियुक्ति और छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मामलों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज होने से वह डरने वाले नहीं हैं और छात्रों के मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

    अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर के संदर्भ में मसूद ने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनकी मांगों और परेशानियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहा है। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में प्रशासन की प्राथमिकता छात्रों से बातचीत कर समस्याओं का समाधान निकालना होनी चाहिए। उन्होंने प्रॉक्टर और रजिस्ट्रार की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए। मसूद ने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी की नियुक्ति गैरकानूनी है और उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने बातचीत के दौरान कोई विस्तृत दस्तावेजी जानकारी नहीं दी।

    विश्वविद्यालय परिसर में कश्मीर से संबंधित नारे लिखे जाने के मामले पर भी कांग्रेस सांसद ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि आईटीबीपी की फर्जी वर्दी पहनकर एक व्यक्ति को पकड़ा गया था और छात्रों ने उसे पकड़ा था। मसूद ने कहा कि परिसर में निगरानी की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल किया कि जब विश्वविद्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, तो संबंधित घटना की फुटेज सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है। उनके बयान में सुरक्षा व्यवस्था और घटना की जानकारी सामने लाने की मांग प्रमुख रही।

    मसूद ने प्रॉक्टर मेहताब रिजवी की नियुक्ति का जिक्र करते हुए प्रशासन के रवैये की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब छात्र भूख हड़ताल पर बैठे थे, तब उनकी समस्याओं को सुनना और उन पर ध्यान देना जरूरी था। उनके अनुसार, छात्रों की शिकायतों के बीच प्रशासन की ओर से की जा रही कार्रवाई से विवाद बढ़ रहा है।

    विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश के लिए दीवार फांदने के सवाल पर भी मसूद ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि रास्ते बंद कर दिए गए थे, जिसके कारण अंदर जाने के लिए दूसरा विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने सवाल किया कि परिसर के चारों ओर रास्ते बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी और लोगों को अपने बच्चों से मिलने से क्यों रोका गया। इस मुद्दे पर उन्होंने प्रशासन से व्यवस्था और निर्णयों को लेकर जवाब मांगा।

    जामिया विवाद के अलावा मसूद ने लखनऊ में गठबंधन को लेकर लगाए गए पोस्टरों और होर्डिंग पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि ऐसे पोस्टर भाजपा के डर को दर्शाते हैं। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि पोस्टर किसने लगवाए और उनके लिए धन किसने उपलब्ध कराया। मसूद ने कहा कि गठबंधन मजबूत है और पोस्टरों के जरिए उसमें दरार पैदा नहीं की जा सकती। सीटों के बंटवारे पर भी उचित समय पर फैसला हो जाएगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की विवादित टिप्पणी पर मसूद ने खड़गे का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि खड़गे ने सही जवाब दिया है और आगे भी इसी तरह जवाब देते रहेंगे। मसूद ने सरकार पर गुंडागर्दी का आरोप लगाते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने से वह पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने दोहराया कि जामिया के छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय प्रशासन को उनकी बात सुननी चाहिए।

  • शिवपुरी में कब्रिस्तान की जमीन बदलने की मांग पर विवाद, बजरंग दल कार्यकर्ता को धमकी देने के आरोप में FIR दर्ज

    शिवपुरी में कब्रिस्तान की जमीन बदलने की मांग पर विवाद, बजरंग दल कार्यकर्ता को धमकी देने के आरोप में FIR दर्ज

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले के बैराड़ में कब्रिस्तान की भूमि को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग को लेकर विवाद सामने आया है। इस मामले में बजरंग दल के कार्यकर्ता प्रिंस प्रजापति को जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के आधार पर बैराड़ थाना पुलिस ने साबिर खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार, 10 अक्टूबर को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने स्थानीय हिंदू समाज के लोगों के साथ मिलकर बैराड़ की हनुमान कॉलोनी में हनुमान मंदिर के सामने आवंटित कब्रिस्तान की भूमि को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग उठाई थी। इस संबंध में तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया था। इसके दो दिन बाद, 12 अक्टूबर को प्रिंस प्रजापति को फोन पर धमकी दिए जाने का आरोप सामने आया।

    विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष राम सिंह यादव के मुताबिक, साबिर खान ने कथित तौर पर फोन करके प्रिंस प्रजापति को जान से मारने की धमकी दी थी। संगठन ने दावा किया है कि इस बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध है। हालांकि, धमकी से जुड़े आरोपों की विस्तृत पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    मामले में एक अन्य घटना गुरुवार को सामने आने का आरोप है। राम सिंह यादव के अनुसार, प्रिंस प्रजापति शिवपुरी से बैराड़ पहुंचे थे और मोटरसाइकिल से अपने घर जा रहे थे। इसी दौरान पशु चिकित्सालय के पास साबिर खान ने कथित तौर पर उन्हें रास्ते में रोक लिया। आरोप है कि यहां उनके साथ गाली-गलौज की गई।

    शिकायत के मुताबिक, कब्रिस्तान की जमीन को स्थानांतरित करने की मांग को लेकर दोबारा आवाज उठाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। आरोप है कि प्रिंस प्रजापति को जान से मारने और उनके हाथ-पैर तोड़ने की बात कही गई। घटना के बाद प्रिंस प्रजापति थाने पहुंचे और पुलिस को शिकायत दी। इसके बाद पुलिस ने साबिर खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।

    इस मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के प्रतिनिधियों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। संगठनों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जाने चाहिए।

    राम सिंह यादव ने दावा किया कि साबिर खान के खिलाफ पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस आधार पर संगठनों ने उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच कराने और नाम गुंडा सूची में शामिल करने की मांग की है। इसके साथ ही जिला बदर की कार्रवाई शुरू करने तथा प्रिंस प्रजापति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है।

    संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं की गई तो जिलेभर में आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल, बैराड़ थाना पुलिस ने साबिर खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले में पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

  • इंदौर गरबा विवाद में बीजेपी नेता कमल सिंह चौहान पर पॉक्सो की धाराएं, एफआईआर में नाबालिग ने लगाए गंभीर आरोप

    इंदौर गरबा विवाद में बीजेपी नेता कमल सिंह चौहान पर पॉक्सो की धाराएं, एफआईआर में नाबालिग ने लगाए गंभीर आरोप


    मध्य प्रदेश:
    के इंदौर में गरबा आयोजन के दौरान नाबालिग लड़की के साथ कथित अभद्रता का मामला सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष कमल सिंह चौहान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 7 और 8 के साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74 और 75(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में लड़की ने आरोप लगाया है कि चौहान ने उसका हाथ पकड़ा, खींचा और सीने पर हाथ मारते हुए धक्का दिया। दूसरी ओर, चौहान ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई देते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

    यह मामला विधानसभा क्षेत्र क्रमांक दो में आयोजित मां कनकेश्वरी गरबा उत्सव से जुड़ा है। घटना 15 और 16 अक्टूबर की दरमियानी रात की बताई गई है। शिकायत 17 वर्षीय लड़की ने 17 अक्टूबर को दर्ज कराई। आयोजन के दौरान लड़की को धक्का दिए जाने का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया। इसके बाद पार्टी ने भी चौहान से जवाब मांगा और उन्हें तीन दिन के भीतर अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया।

    एफआईआर में दर्ज शिकायत के मुताबिक, लड़की की छोटी बहन गरबा आयोजन में शामिल थी। गरबा करते समय उसे प्यास लगी तो बड़ी बहन ने उसे पानी पिलाया। इस दौरान छोटी बहन का पास बड़ी बहन के पास ही रह गया। वह पास लौटाने के लिए अपनी बहन को आवाज लगा रही थी। इसी बीच कमल सिंह चौहान वहां पहुंचे और उससे पूछने लगे कि वह पास क्यों बदल रही है।

    लड़की ने शिकायत में बताया कि उसने चौहान को स्पष्ट किया कि वह पास नहीं बदल रही, बल्कि उसकी बहन का पास उसके पास रह गया है। आरोप है कि इसके बाद चौहान ने उसका हाथ गलत तरीके से पकड़ा और खींचा। लड़की के मुताबिक, उन्होंने उसके सीने पर हाथ मारते हुए जोर से धक्का भी दिया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि चौहान ने कहा कि यहां हजारों लड़कियां आती हैं और उन्हें मालूम है कि वे क्या करती हैं। लड़की ने कहा कि इस तरह छुआ जाना उसे अच्छा नहीं लगा। उसने अपने पिता के साथ भी गलत व्यवहार किए जाने का आरोप लगाते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की।

    मामले में पॉक्सो एक्ट की धारा 7 और 8 लगाए जाने की वजह भी शिकायत में दर्ज आरोपों से जुड़ी है। धारा 7 के तहत बच्चे के साथ यौन मंशा से शारीरिक संपर्क बनाने या ऐसा कृत्य करने का आरोप आने पर कार्रवाई हो सकती है। इसमें कपड़ों के ऊपर से किया गया संपर्क भी परिस्थितियों और कथित मंशा के आधार पर शामिल हो सकता है। धारा 8 में इस अपराध के लिए सजा का प्रावधान है। दोष सिद्ध होने पर तीन से पांच साल तक की कैद और जुर्माना लगाया जा सकता है।

    इसके अलावा, बीएनएस की धारा 74 महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने की नीयत से हमला करने या आपराधिक बल के इस्तेमाल से संबंधित है। धारा 75 यौन उत्पीड़न से जुड़े कृत्यों को परिभाषित करती है, जब
    कि इसकी उपधारा 75(2) में संबंधित अपराध के लिए सजा का प्रावधान है। इन धाराओं के तहत कार्रवाई का आधार शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। आरोप सही हैं या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।

    उधर, कमल सिंह चौहान ने वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वह पिछले दस वर्षों से गरबा आयोजन में सेवा दे रहे हैं और अब तक ऐसी घटना नहीं हुई। चौहान का दावा है कि लड़की के पिता शराब पीकर आयोजन में आए थे। उनके मुताबिक, वह पिता को समझाने पहुंचे थे, तभी लड़की बीच में आ गई और उनसे बहस करने लगी। उन्होंने आरोप लगाया कि लड़की ने गाली भी दी और समझाने के बावजूद नहीं मानी। चौहान ने कहा कि जब उन्होंने उसे बाहर निकाला, तब यह घटना हुई।

    चौहान ने यह भी कहा कि यदि उनके व्यवहार से किसी को बुरा लगा है तो वह माफी मांगते हैं। उन्होंने लड़की से भी माफी मांगने की बात कही और मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तथा नगर अध्यक्ष से मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि जांच में वह दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया जाए। फिलहाल, मामला दर्ज होने के बाद आरोपों की जांच और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • प्रियंका-राहुल गांधी समेत कई नेताओं पर दूसरी FIR, आकाशवाणी भवन में जाने की कोशिश और पुलिस से धक्कामुक्की का आरोप

    प्रियंका-राहुल गांधी समेत कई नेताओं पर दूसरी FIR, आकाशवाणी भवन में जाने की कोशिश और पुलिस से धक्कामुक्की का आरोप

    नई दिल्ली: दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस और INDIA गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने एक और FIR दर्ज की है। इस मामले में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम शामिल किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान सरकारी काम में रुकावट डालने और सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करने का आरोप है। यह इस प्रदर्शन को लेकर दर्ज की गई दूसरी FIR है। पुलिस का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारी बिना अनुमति आकाशवाणी भवन के अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे, जिसके दौरान सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई।

    पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ कांग्रेस नेताओं और समर्थकों ने आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश करने की कोशिश की। पुलिस का दावा है कि इसके लिए किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई थी। प्रदर्शनकारियों की इस कोशिश के दौरान वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। पुलिस का कहना है कि इस घटनाक्रम में आकाशवाणी भवन के दो सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। दोनों का मेडिकल कराया गया है। पुलिस ने प्रदर्शन वाली जगह और भवन परिसर की तस्वीरें भी जुटाई हैं। इसके अलावा कुछ दीवारों को नुकसान पहुंचने की बात भी पुलिस की ओर से कही गई है।

    FIR में सरकारी काम में बाधा डालने और सुरक्षाकर्मियों के साथ कथित बदसलूकी से जुड़े आरोपों को शामिल किया गया है। पुलिस प्रदर्शन के दौरान हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है। आकाशवाणी भवन में प्रवेश की कोशिश, सुरक्षाकर्मियों के साथ हुई कथित धक्का-मुक्की और परिसर में हुए नुकसान से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। मामले में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा के अलावा कई अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम दर्ज किए गए हैं।

    नई FIR को लेकर राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पहले ही 45 FIR दर्ज हैं और उनके लिए हर FIR एक “मेडल” की तरह है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उनका लक्ष्य 100 FIR तक पहुंचने का है। उनके इस बयान के बाद मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। पार्टी का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को उठाने के कारण विपक्षी नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

    चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस और INDIA गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर पहले से ही राजनीतिक विवाद बना हुआ है। विपक्षी नेता SIR से जुड़े मुद्दों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रख रहे हैं। इसी दौरान प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी। अब दूसरी FIR दर्ज होने के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है। एक तरफ पुलिस प्रदर्शन के दौरान सरकारी काम में रुकावट और सुरक्षाकर्मियों के साथ कथित धक्का-मुक्की को आधार बनाकर कार्रवाई कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रही है। इस मामले में पुलिस द्वारा जुटाए गए फोटो और अन्य जानकारी जांच का हिस्सा हैं।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन में पुलिस से कथित मारपीट की जांच तेज, वीडियो फुटेज से प्रदर्शनकारियों की पहचान में जुटी दिल्ली पुलिस

    जंतर-मंतर प्रदर्शन में पुलिस से कथित मारपीट की जांच तेज, वीडियो फुटेज से प्रदर्शनकारियों की पहचान में जुटी दिल्ली पुलिस

    नई दिल्ली: जंतर-मंतर के पास कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों से कथित धक्का-मुक्की और मारपीट के मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। पुलिस के सामने कई मोबाइल वीडियो और अन्य फुटेज आए हैं, जिनकी मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रदर्शन के दौरान किन लोगों की पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी या मारपीट हुई। इन वीडियो के जरिए प्रदर्शनकारियों की पहचान करने के साथ घटनाक्रम की पूरी कड़ी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

    जांच के दौरान पुलिस यह भी देख रही है कि घटना की शुरुआत किस तरह हुई और अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान क्या-क्या हुआ। सामने आए वीडियो में महिला पुलिस अधिकारियों और कांस्टेबलों के साथ कथित धक्का-मुक्की और मारपीट के दृश्य होने की बात कही गई है। पुलिस अन्य माध्यमों से मिले वीडियो और फुटेज की भी जांच कर रही है, ताकि घटनाओं का क्रम स्पष्ट किया जा सके और कथित तौर पर शामिल लोगों की पहचान की जा सके। मौजूदा जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

    पुलिस के मुताबिक, इस मामले में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की उन धाराओं के तहत FIR दर्ज होने की संभावना है, जिनमें सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने, उनके काम में बाधा डालने और ड्यूटी के दौरान उन्हें रोकने जैसे अपराध शामिल हैं। इस कार्रवाई से पहले पुलिस अलग-अलग वीडियो फुटेज का मिलान कर रही है। जांच का मुख्य फोकस प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ हुई कथित बदसलूकी और मारपीट की घटनाओं तथा उनमें शामिल लोगों की पहचान पर है।

    यह मामला 7 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास हुए INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन से जुड़ा है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। विपक्षी नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों ने पुलिस बैरिकेड पार करके जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश की। राहुल गांधी ने बैरिकेड से लगे गेट को खोलने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी।

    प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस ने पुलिस पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया और कहा कि कई विपक्षी नेता घायल हुए। प्रियंका गांधी भी प्रदर्शन के दौरान जमीन पर लेटी हुई नजर आईं। उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों पर बदसलूकी करने और जमीन पर गिराने का आरोप लगाया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य नेताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट के आरोपों की अलग से जांच की जा रही है। दिल्ली पुलिस की ओर से सामने आए मामलों में पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और ड्यूटी में बाधा डालने से जुड़े पहलुओं को देखा जा रहा है। इससे पहले 6 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर भी दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की थी। पुलिस के अनुसार, INDIA ब्लॉक ने संसद से निर्वाचन सदन तक मार्च की योजना बनाई थी, लेकिन इसके लिए आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी।

  • मंदसौर में गाय के साथ कुकृत्य का आरोप, अधेड़ मोहम्मद अबरार गिरफ्तार; पुलिस ने निकाला जुलूस, FIR दर्ज

    मंदसौर में गाय के साथ कुकृत्य का आरोप, अधेड़ मोहम्मद अबरार गिरफ्तार; पुलिस ने निकाला जुलूस, FIR दर्ज


    मध्य प्रदेश:
    के मंदसौर में गाय के साथ कुकृत्य का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक अधेड़ व्यक्ति ने मंदसौर बस स्टैंड परिसर में गाय के साथ रेप किया। घटना की जानकारी सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया और मामला पुलिस तक पहुंचा। कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की। आरोपी की पहचान मोहम्मद अबरार के रूप में हुई है। वह मूल रूप से मंदसौर जिले के नाहरगढ़ क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि मंदसौर बस स्टैंड परिसर में आरोपी मोहम्मद अबरार द्वारा गाय के साथ कुकृत्य किया गया। घटना की जानकारी लोगों को मिलने के बाद इसकी सूचना कोतवाली पुलिस को दी गई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आरोपी को हिरासत में लिया। इसके बाद उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया। घटना सार्वजनिक स्थान पर सामने आने के कारण बस स्टैंड क्षेत्र में लोगों के बीच इसकी चर्चा रही और मामले को लेकर आक्रोश भी दिखाई दिया।

    पुलिस ने आरोपी का जुलूस भी निकाला। आरोपी को पुलिस की निगरानी में ले जाते हुए उसका जुलूस निकाला गया। इस दौरान पुलिसकर्मी उसे अपने साथ ले जाते हुए दिखाई दिए। आरोपी के जुलूस का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिस उसे अपने साथ लेकर जाती हुई नजर आ रही है। घटना के बाद पुलिस की ओर से की गई इस कार्रवाई की भी चर्चा हो रही है। आरोपी को हिरासत में लिए जाने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    आरोपी मोहम्मद अबरार मूल रूप से मंदसौर जिले के नाहरगढ़ क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। जांच के दौरान घटना से जुड़े तथ्यों को जुटाया जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपी बस स्टैंड परिसर में किस परिस्थिति में पहुंचा और घटना किस तरह हुई। मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी पुलिस की जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी।

    कोतवाली पुलिस ने मोहम्मद अबरार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे हिरासत में लिया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। सार्वजनिक स्थान पर हुई इस घटना के बाद क्षेत्र में इसकी चर्चा रही। पुलिस घटना से संबंधित तथ्यों और परिस्थितियों की जांच कर रही है। फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और कोतवाली पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। जांच के बाद ही घटना से जुड़े अन्य तथ्यों का पता चल सकेगा।

  • कौशांबी में CEC का पुतला फूंकना सपाइयों को पड़ा भारी, जिलाध्यक्ष समेत 9 नामजद, अज्ञात पर भी FIR

    कौशांबी में CEC का पुतला फूंकना सपाइयों को पड़ा भारी, जिलाध्यक्ष समेत 9 नामजद, अज्ञात पर भी FIR


    कौशांबी। SIR के विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का सांकेतिक पुतला फूंकना समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को भारी पड़ गया। मंझनपुर चौराहे पर प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम करने, नारेबाजी और पुतला दहन के आरोप में पुलिस ने सपा जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव समेत 9 नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

    पुलिस के मुताबिक, 5 अक्टूबर को सपा के सैकड़ों कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय से नारेबाजी करते हुए मंझनपुर चौराहे पहुंचे थे। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मुख्य मार्ग पर बैठकर और खड़े होकर यातायात बाधित किया। इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सांकेतिक पुतले को आग लगा दी गई।

    पुलिस ने बुझाई आग, हटाकर खुलवाया रास्ता
    उप निरीक्षक अभिषेक कुमार यादव की तहरीर के आधार पर दर्ज मुकदमे में कहा गया है कि प्रदर्शन के कारण चौराहे पर यातायात प्रभावित हुआ। पुतला जलाए जाने के बाद धुआं फैलने से मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई और प्रदर्शनकारियों को हटाकर यातायात व्यवस्था सामान्य कराई।

    घटना के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक की भी जानकारी सामने आई है। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने जलते हुए पुतले को अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

    इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
    पुलिस ने सपा जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव, शहनवाज, चंद्रजीत यादव, राजू सिंह पटेल, भरत सिंह लोधी, आनंद मोहन पटेल, विभा यादव, सुमित पांडे और आफताब शेख को नामजद किया है। इनके अलावा अन्य अज्ञात लोगों को भी मुकदमे में आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन और पुतला दहन की घटना की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई गई थी। इन्हें जांच में साक्ष्य के तौर पर शामिल किया जा रहा है।

    SIR के विरोध में प्रदर्शन कर रही सपा
    समाजवादी पार्टी SIR को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है। कौशांबी में भी इसी मुद्दे को लेकर 5 अक्टूबर को पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की गई और उनका सांकेतिक पुतला जलाया गया।

    अब पुलिस दर्ज मुकदमे के आधार पर मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध वीडियो और फोटो समेत अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • इंदौर में मामूली विवाद ने लिया हिंसक रूप, BJP नेत्री और पति की सड़क पर पिटाई, दोनों पक्षों ने कराया केस

    इंदौर में मामूली विवाद ने लिया हिंसक रूप, BJP नेत्री और पति की सड़क पर पिटाई, दोनों पक्षों ने कराया केस


    इंदौर  । इंदौर के नंदबाग इलाके में शनिवार देर रात पड़ोसियों के बीच हुआ विवाद मारपीट में बदल गया। इस घटना में वार्ड 16 बूथ की बीजेपी अध्यक्ष रिंकू उर्फ दीक्षा और उनके पति के साथ मारपीट किए जाने की बात सामने आई है। विवाद के बाद दोनों पक्षों के लोग बाणगंगा थाने पहुंचे जहां पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने घटना के बाद संबंधित लोगों का मेडिकल परीक्षण भी कराया है।
    बाणगंगा पुलिस के मुताबिक नंदबाग इलाके में रहने वाले पड़ोसियों के बीच किसी बात को लेकर पहले कहासुनी हुई थी। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। आरोप है कि विजय राहुल शर्मा और उनके साथ मौजूद अन्य लोगों ने बीजेपी नेत्री दीक्षा और उनके पति के साथ मारपीट की। बताया गया है कि इस दौरान दोनों को सड़क पर पटककर भी पीटा गया।

    घटना के बाद मौके पर काफी देर तक विवाद की स्थिति बनी रही। इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें दोनों पक्षों के बीच मारपीट होती दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान दोनों पक्ष एक दूसरे के वीडियो बनाते रहे। इसके बाद मामला शांत होने पर दोनों पक्ष अपने अपने लोगों के साथ थाने पहुंचे।

    पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत को दर्ज करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। शिकायतों में दोनों तरफ से मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित लोगों का मेडिकल कराया है ताकि चोटों की स्थिति का भी पता लगाया जा सके। अधिकारियों के मुताबिक जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    वहीं स्थानीय रहवासियों की ओर से बीजेपी नेत्री को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। कुछ रहवासियों का कहना है कि दीक्षा स्थानीय पार्षद का नाम लेकर आए दिन उनके साथ बदसलूकी करती हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों और आरोपों की जांच कर रही है।

    घटना के बाद सोशल मीडिया पर मारपीट से जुड़े वीडियो वायरल हो रहे हैं। वीडियो और शिकायतों के आधार पर पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। फिलहाल मामला दोनों पक्षों की शिकायत और एफआईआर के बाद जांच के चरण में है। पुलिस का कहना है कि जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • सीजेपी प्रदर्शन में एआई से महिला की फोटो से छेड़छाड़ का आरोप, चार नामों के साथ एफआईआर दर्ज

    सीजेपी प्रदर्शन में एआई से महिला की फोटो से छेड़छाड़ का आरोप, चार नामों के साथ एफआईआर दर्ज

    नई दिल्ली । दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान एक महिला की निजी तस्वीर के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। महिला की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उसकी निजी तस्वीर को एआई और फेस-स्वैप टूल की मदद से बदलकर फर्जी तस्वीर तैयार की गई और बाद में उसका इस्तेमाल प्रदर्शन से जुड़े पोस्टर और बैनर में किया गया।

    महिला ने साइबर पुलिस थाने में दी शिकायत में आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने उसकी तस्वीर का उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल किया। उसके मुताबिक, मूल तस्वीर में डिजिटल तरीके से बदलाव कर उसे आपत्तिजनक और गलत रूप दिया गया। महिला का कहना है कि इस तस्वीर का इस्तेमाल उसकी सामाजिक छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया।

    शिकायत के अनुसार, कथित तौर पर तैयार की गई फर्जी तस्वीर के बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर जंतर-मंतर पर लगाए गए। महिला ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उसके खिलाफ अमर्यादित नारे भी लगाए गए। उसने कहा कि उसकी निजी तस्वीर को सार्वजनिक प्रदर्शन में इस तरह इस्तेमाल किए जाने से उसकी गरिमा प्रभावित हुई और उसे सामाजिक स्तर पर नुकसान उठाना पड़ा।

    महिला ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान वीडियो बनाए गए और बाद में उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। शिकायत में विशेष रूप से इंस्टाग्राम के माध्यम से वीडियो वायरल किए जाने का उल्लेख है। महिला के अनुसार, तस्वीर और वीडियो के प्रसार से उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा तथा निजी जीवन से जुड़ी सामग्री उसकी सहमति के बिना सार्वजनिक हुई।

    इस मामले में एफआईआर में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह के नाम दर्ज किए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन चारों को एफआईआर में आरोपी नहीं बनाया गया है। एफआईआर में नाम दर्ज होने और आरोपी बनाए जाने की स्थिति अलग-अलग होती है, इसलिए मामले में उनकी भूमिका जांच के दौरान स्पष्ट होगी।

    महिला ने अपनी शिकायत में यह भी स्पष्ट किया है कि उसका सीजेपी या जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है। उसका आरोप है कि इसके बावजूद उसकी तस्वीर को बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया। उसने कहा कि तस्वीर में डिजिटल छेड़छाड़ कर उसे ऐसे तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे उसकी व्यक्तिगत गरिमा और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई।

    मामले में अब पुलिस द्वारा प्रदर्शन से संबंधित पोस्टर, बैनर, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच की जा सकती है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि महिला की मूल तस्वीर कहां से प्राप्त की गई, उसमें बदलाव किस माध्यम से किया गया और तैयार की गई सामग्री को प्रदर्शन तक कैसे पहुंचाया गया।

    इसके अलावा सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित वीडियो और तस्वीरों की भी पड़ताल की जा सकती है। डिजिटल सामग्री तैयार करने, उसे सार्वजनिक करने और प्रदर्शन में इस्तेमाल करने वालों की भूमिका जांच का हिस्सा हो सकती है। एफआईआर दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

    महिला ने पूरे घटनाक्रम को अपनी निजता, गरिमा और प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि या जिम्मेदारी तय होना पुलिस जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करेगा।

  • SC-ST एक्ट को चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, 2020 के फैसले की समीक्षा से किया इनकार

    SC-ST एक्ट को चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, 2020 के फैसले की समीक्षा से किया इनकार


    नई दिल्ली ।
    अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अत्याचार रोकने के लिए बनाए गए SC/ST अत्याचार निवारण कानून के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि कानून में आरोपी को उत्पीड़न से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं और 2020 में दिए गए फैसले के कुछ ही वर्षों बाद उसकी दोबारा समीक्षा करने का फिलहाल कोई आधार नहीं दिखता।

    याचिका में SC/ST एक्ट के कई प्रावधानों को समानता के अधिकार के खिलाफ बताते हुए उनमें बदलाव की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता बृजभूषण सैनी की ओर से कानून के प्रावधानों पर सवाल उठाए गए और यह दलील दी गई कि एक वर्ग को सुरक्षा देने के उद्देश्य से बनाए गए कानून का इस्तेमाल दूसरे वर्ग के उत्पीड़न के लिए नहीं होना चाहिए।

    याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत के सामने कानून के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया। उनका तर्क था कि कई मामलों में कानून के प्रावधानों का गलत इस्तेमाल होने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने सजा की दर कम होने का भी उल्लेख किया और कहा कि गलत मामलों के कारण आरोपियों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

    याचिका में FIR दर्ज करने और गिरफ्तारी से पहले शुरुआती जांच की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया गया। दलील दी गई कि बिना प्रारंभिक जांच के FIR दर्ज करने और आरोपी की गिरफ्तारी की व्यवस्था से कानून के दुरुपयोग की संभावना बढ़ सकती है। इसके साथ ही SC/ST एक्ट के तहत अग्रिम जमानत पर लागू प्रतिबंध को भी चुनौती दी गई।

    याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि कानून के तहत गलत तरीके से दर्ज किए गए मामलों में आरोपियों को आर्थिक नुकसान और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी आधार पर कानून के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता पर पुनर्विचार की मांग की गई थी।

    मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। पीठ में जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए 2020 के अपने फैसले का संदर्भ दिया।

    पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही SC/ST एक्ट से जुड़े प्रावधानों और उनमें किए गए बदलावों को लेकर अपना फैसला दे चुका है। उस निर्णय के बाद अभी केवल छह वर्ष का समय बीता है। ऐसे में इस अवधि के भीतर ही पुराने फैसले की दोबारा समीक्षा करने का कोई पर्याप्त आधार अदालत को नजर नहीं आता।

    अदालत की टिप्पणी के बाद SC/ST एक्ट के संबंधित प्रावधानों में तत्काल बदलाव की मांग वाली यह याचिका आगे नहीं बढ़ सकी। मामले में उठाए गए मुद्दों में FIR, गिरफ्तारी, अग्रिम जमानत और कानून के संभावित दुरुपयोग से जुड़े सवाल प्रमुख थे।

    SC/ST एक्ट का उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों को रोकना और ऐसे मामलों में कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराना है। मौजूदा सुनवाई में अदालत ने कानून के मूल उद्देश्य के साथ-साथ आरोपियों के लिए उपलब्ध कानूनी सुरक्षा उपायों को भी ध्यान में रखा और 2020 के फैसले को तत्काल दोबारा खोलने से इनकार किया।