Tag: Geopolitics

  • सोना फिर रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ा, चांदी में भी जोरदार तेजी, वैश्विक घटनाक्रमों से बाजार पर असर

    सोना फिर रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ा, चांदी में भी जोरदार तेजी, वैश्विक घटनाक्रमों से बाजार पर असर


    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में अगस्त के दौरान एक बार फिर तेज तेजी देखने को मिली है। महीने के शुरुआती दौर में अपेक्षाकृत नरम रहने के बाद दोनों कीमती धातुओं ने तेजी पकड़ी और पिछले करीब 20 दिनों में सोने का भाव लगभग 10 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तथा चांदी का भाव करीब 32 हजार रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ गया है। इस तेजी ने निवेशकों की नजर एक बार फिर सर्राफा बाजार पर केंद्रित कर दी है।

    इस साल की शुरुआत में भी सोने और चांदी ने रिकॉर्ड स्तर बनाया था। 29 जनवरी को सोने की कीमत करीब 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थी, जबकि चांदी का भाव करीब 3.86 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर रहा था। इसके बाद फरवरी से जुलाई के बीच वैश्विक बाजार की परिस्थितियों और अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़े फैसलों के कारण दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट आई।

    जुलाई के अंत तक सोने का भाव घटकर करीब 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया था। हालांकि अगस्त में बाजार की दिशा फिर बदल गई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव तथा डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी को सोने और चांदी की हालिया तेजी से जोड़कर देखा जा रहा है। अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशकों का रुझान अक्सर सुरक्षित निवेश माने जाने वाली कीमती धातुओं की ओर बढ़ता है।

    रविवार को भारतीय बुलियन बाजार में कारोबार बंद रहता है। इसलिए 23 अगस्त को सोने के भाव शुक्रवार के बंद स्तर के आधार पर रहे। प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में करीब 1,63,090 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। दिल्ली में इसका भाव करीब 1,63,240 रुपये और अहमदाबाद में करीब 1,63,140 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    22 कैरेट सोने की कीमत भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। कई बड़े शहरों में इसका भाव करीब 1,49,500 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। दिल्ली में 22 कैरेट सोने की कीमत लगभग 1,49,650 रुपये और अहमदाबाद में करीब 1,49,550 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई।

    चांदी की बात करें तो इसकी कीमत भी अगस्त में काफी मजबूत हुई है। मौजूदा स्तर करीब 2.60 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास है। शहर, गुणवत्ता और स्थानीय बाजार की स्थिति के आधार पर वास्तविक खुदरा कीमत में मामूली अंतर हो सकता है।

    साल 2026 की शुरुआत से भी सोने और चांदी ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। 31 दिसंबर 2025 को 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1,33,195 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो अब औसतन करीब 1,60,620 रुपये तक पहुंच चुकी है। यानी साल की शुरुआत से इसमें लगभग 27,425 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इसी अवधि में चांदी 2,30,420 रुपये से बढ़कर करीब 2,46,630 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।

    आगे की दिशा वैश्विक तनाव, डॉलर की चाल, ब्याज दरों और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी जैसे कारकों पर निर्भर करेगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव बना रहता है और केंद्रीय बैंक सोने की खरीद जारी रखते हैं, तो साल के अंत तक कीमतों में और तेजी की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि कीमती धातुओं में निवेश से पहले बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिम को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • निफ्टी में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट, एफआईआई ने 1,602 करोड़ रुपये निकाले, डीआईआई की खरीदारी ने बाजार को संभाला

    निफ्टी में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट, एफआईआई ने 1,602 करोड़ रुपये निकाले, डीआईआई की खरीदारी ने बाजार को संभाला

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे सप्ताह दबाव देखने को मिला। ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका ईरान तनाव के बीच निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। इस दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने भारतीय बाजार से 1,602 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई ने मजबूत खरीदारी जारी रखते हुए बाजार को सहारा दिया।

    सप्ताह के दौरान एफआईआई का निवेश व्यवहार उतार चढ़ाव वाला रहा। कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की। इसके बाद लगातार दो कारोबारी सत्रों में उन्होंने खरीदारी की, लेकिन सप्ताह के अंतिम दो सत्रों में फिर से बिकवाली का रुख अपनाया। इससे बाजार में विदेशी पूंजी के प्रवाह को लेकर सतर्कता बढ़ी है।

    20 जुलाई से 21 अगस्त के बीच एफआईआई की गतिविधियों पर नजर डालें तो शुरुआती सप्ताह में वे शुद्ध विक्रेता रहे। इसके बाद लगातार तीन सप्ताह तक उन्होंने खरीदारी की। हालांकि मौजूदा सप्ताह में उनका रुख फिर बदल गया और उन्होंने शुद्ध निकासी की। इसके बावजूद पिछले एक महीने की कुल अवधि में एफआईआई अभी भी 1,282 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार रहे हैं।

    दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में लगातार मजबूती दिखाई। पिछले एक महीने के दौरान डीआईआई ने प्रत्येक सप्ताह शुद्ध खरीदारी की। इस अवधि में उनका कुल निवेश 48,390 करोड़ रुपये रहा। केवल मौजूदा सप्ताह में ही घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 17,320 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की, जिससे विदेशी बिकवाली के दबाव को काफी हद तक संतुलित करने में मदद मिली।

    अगस्त महीने के अब तक के आंकड़ों से भी घरेलू निवेशकों की मजबूत भूमिका सामने आती है। इस अवधि में एफआईआई ने कुल 2,510 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जबकि डीआईआई का निवेश 34,370 करोड़ रुपये रहा है। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू संस्थागत पूंजी बाजार की स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    प्रमुख सूचकांकों की बात करें तो निफ्टी ने सप्ताह की शुरुआत कमजोरी के साथ की। मध्य सप्ताह में सूचकांक 24,026 के स्तर तक फिसल गया। हालांकि सप्ताह के अंतिम दो कारोबारी सत्रों में इसमें सुधार देखने को मिला और निफ्टी अपने निचले स्तर से ऊपर आया। इसके बावजूद सप्ताह के अंत में यह 24,252 के स्तर पर बंद हुआ, जो पिछले सप्ताह के मुकाबले करीब 0.5 प्रतिशत की गिरावट है।

    व्यापक बाजार में तस्वीर अपेक्षाकृत बेहतर रही। निफ्टी मिडकैप 100 लगभग सपाट स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 ने नया सर्वकालिक उच्च स्तर बनाया और सप्ताह के दौरान एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों की दिलचस्पी छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों में बनी हुई है।

    बाजार के लिए आगे कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका ईरान के बीच भू राजनीतिक घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहेंगे। कच्चे तेल की कीमत 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहने से भारतीय बाजार पर दबाव की आशंका है। आने वाले दिनों में एफआईआई की दिशा भी बाजार की चाल तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेगी। वहीं डीआईआई की मजबूत खरीदारी बाजार को समर्थन देती रह सकती है।

  • बलूचिस्तान ने 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने का किया ऐलान, अंतरराष्ट्रीय समर्थन की भी अपील

    बलूचिस्तान ने 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने का किया ऐलान, अंतरराष्ट्रीय समर्थन की भी अपील


    नई दिल्ली ।
    बलूचिस्तान के राष्ट्रवादी संगठनों ने 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस आयोजित करने की औपचारिक घोषणा की है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से समर्थन की अपील की है। इस रणनीतिक घोषणा के सामने आने के बाद बलूचिस्तान का संवेदनशील मुद्दा एक बार फिर वैश्विक कूटनीतिक मंचों पर सुर्खियों में आ गया है। बलोच नेतृत्व का तर्क है कि 11 अगस्त 1947 को बलूचिस्तान को संप्रभु घोषित किया गया था, इसलिए उसी ऐतिहासिक संदर्भ में हर साल इस तिथि को स्वाधीनता दिवस के रूप में याद किया जाएगा।

    राष्ट्रवादी गुटों की ओर से जारी सार्वजनिक बयान में नागरिकों से अपने आवासों, व्यावसायिक केंद्रों और प्रमुख स्थलों पर प्रस्तावित रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान का ध्वज फहराने का आह्वान किया गया है। इसके अतिरिक्त, दुनिया भर के अलग-अलग मुल्कों में निवास करने वाले बलोच प्रवासियों से भी इस दिन विशेष जागरूकता कार्यक्रम और रैलियां आयोजित करने का आग्रह किया गया है। बलोच प्रतिनिधियों का मानना है कि यह आयोजन उनकी ऐतिहासिक अस्मिता और दीर्घकालिक राजनीतिक आकांक्षाओं को मजबूती से रेखांकित करेगा।

    अपने आधिकारिक वक्तव्य में बलोच नेताओं ने इस्लामाबाद की शासन नीतियों की सख्त आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि यह क्षेत्र दशकों से मानवाधिकारों के उल्लंघन और गंभीर सुरक्षा संकट से जूझ रहा है। उनका तर्क है कि केंद्रीय नीतियों के चलते बलूचिस्तान का बुनियादी ढांचागत और सामाजिक विकास पूरी तरह बाधित रहा है। इस पूरी कवायद का मुख्य ध्येय संयुक्त राष्ट्र संघ और विश्व के प्रमुख देशों का ध्यान इस मानवीय व राजनीतिक संकट की ओर आकर्षित करना है।

    इस वैश्विक रणनीति के तहत प्रवासी बलोच समुदाय 11 अगस्त को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय राजधानियों में विशेष सभाओं का आयोजन करेगा। बलोच रणनीतिकारों का मानना है कि अपने अधिकारों की आवाज को अधिक सशक्त बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करना बेहद अनिवार्य हो गया है। मध्य प्रदेश समेत भारत और वैश्विक मीडिया में भी इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम और इसके भावी प्रभावों पर गहन समीक्षा शुरू हो गई है।

    ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य का हवाला देते हुए राष्ट्रवादी नेताओं ने कहा कि 1947 में विभाजन काल के दौरान 11 अगस्त को बलूचिस्तान की स्वायत्त स्थिति को स्वीकार किया गया था। यद्यपि इस ऐतिहासिक दावे पर विभिन्न इतिहासकारों और विशेषज्ञों के अलग-अलग मत रहे हैं। पाकिस्तान सरकार बलूचिस्तान को अपना अखंड और अभिन्न अंग मानती है तथा किसी भी प्रकार की अलगाववादी गतिविधियों को पूरी तरह खारिज करती रही है।

    दक्षिण एशिया में बलूचिस्तान का मामला अत्यंत संवेदनशील सुरक्षा चिंताओं से जुड़ा हुआ है। वहां सक्रिय स्वाधीनता समर्थक समूहों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच अक्सर गतिरोध की स्थिति उत्पन्न होती रही है। ताजा घोषणा के पश्चात क्षेत्र में राजनीतिक और कूटनीतिक सुगबुगाहट का तेज होना स्वाभाविक माना जा रहा है। फिलहाल 11 अगस्त को होने वाले कार्यक्रमों और उस पर आने वाली आधिकारिक प्रतिक्रियाओं पर वैश्विक पर्यवेक्षकों की नजरें टिकी हुई हैं।

  • वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का भारतीय बाजार पर असर, सेंसेक्स 443 अंक टूटा, निफ्टी भी गिरावट के साथ बंद, बैंकिंग शेयर रहे सबसे कमजोर

    वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का भारतीय बाजार पर असर, सेंसेक्स 443 अंक टूटा, निफ्टी भी गिरावट के साथ बंद, बैंकिंग शेयर रहे सबसे कमजोर


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक स्तर पर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। कारोबारी सत्र के दौरान निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। दिन के अंत में बीएसई सेंसेक्स 442.93 अंक यानी 0.57 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,708.52 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 95.80 अंक यानी 0.39 प्रतिशत फिसलकर 24,238.50 अंक पर आ गया। इसके साथ ही सेंसेक्स एक बार फिर 78 हजार के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बंद हुआ।

    बाजार में सबसे अधिक दबाव वित्तीय और निजी बैंकिंग शेयरों पर रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक सूचकांक में 2.27 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा ऑटो, सूचना प्रौद्योगिकी, रियल्टी और सर्विसेज क्षेत्र के अधिकांश शेयर भी कमजोर रहे। निवेशकों ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच इन क्षेत्रों में मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे बाजार की चाल प्रभावित हुई।

    हालांकि व्यापक बाजार में तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं रही। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, फार्मा, हेल्थकेयर, ऊर्जा, धातु, मीडिया, कमोडिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स से जुड़े शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इन क्षेत्रों में निवेशकों की रुचि बनी रहने से गिरावट का दायरा कुछ हद तक सीमित रहा और बाजार को आंशिक सहारा मिला।

    सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में ट्रेंट, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, भारती एयरटेल, भारतीय स्टेट बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक, एचसीएल टेक, सन फार्मा, आईटीसी, एलएंडटी, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, अदाणी पोर्ट्स, टाइटन, टाटा स्टील, एशियन पेंट्स और बजाज फिनसर्व के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। दूसरी ओर एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा बैंक, इन्फोसिस, टीसीएस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडिगो, बीईएल और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।

    लार्जकैप शेयरों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 373.70 अंकों की बढ़त के साथ 62,801.75 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक भी 30.15 अंकों की मजबूती के साथ 19,326.45 के स्तर पर पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि चुनिंदा क्षेत्रों और मध्यम आकार की कंपनियों में निवेशकों की खरीदारी जारी रही।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों की चिंता का प्रमुख कारण बना हुआ है। इस तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। ऊंचे कच्चे तेल के दाम आयात लागत, महंगाई और कॉर्पोरेट मुनाफे पर दबाव बढ़ा सकते हैं, जिससे निवेशकों का रुझान फिलहाल सतर्क बना हुआ है।

    विश्लेषकों का कहना है कि निकट अवधि में निफ्टी के लिए 24,370 से 24,400 अंक का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस दायरे के ऊपर टिकता है तो आगे तेजी की संभावना बन सकती है। वहीं नीचे की ओर 24,130 से 24,100 अंक का क्षेत्र प्रमुख समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की चाल आने वाले कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • ईरान के विदेश मंत्री अराघची का अमेरिका और इजरायल पर तीखा आरोप, बोले- आलोचकों की आवाज दबाने में हो रहा टैक्सदाताओं के धन का इस्तेमाल

    ईरान के विदेश मंत्री अराघची का अमेरिका और इजरायल पर तीखा आरोप, बोले- आलोचकों की आवाज दबाने में हो रहा टैक्सदाताओं के धन का इस्तेमाल

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी करदाताओं के धन का उपयोग इजरायल की आलोचना करने वाली आवाजों को दबाने के लिए किया जा रहा है। अराघची का यह बयान ऐसे समय आया है, जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हैं और अमेरिका तथा ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।

    विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका की रिपोर्ट साझा करते हुए कहा कि अमेरिका में विदेशी प्रभाव को लेकर लगातार चर्चा होती है, लेकिन इजरायल से जुड़े कथित प्रभाव अभियानों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। उनके अनुसार यह गंभीर विषय है और इससे अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा सार्वजनिक विमर्श पर असर पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे मामले से जुड़े तथ्यों को समय के साथ सार्वजनिक किया जाएगा।

    अराघची ने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिका को ऐसे संघर्षों में शामिल करने की कोशिश की जा रही है, जो उसकी प्राथमिकताओं का हिस्सा नहीं रहे हैं। उनका कहना था कि पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों में सभी पक्षों को संयम और कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास करना चाहिए। हालांकि उनके आरोपों पर अमेरिका या इजरायल की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    इस बीच क्षेत्रीय तनाव को लेकर ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व की ओर से भी कड़े बयान सामने आए हैं। ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व से जुड़े एक वरिष्ठ सैन्य सलाहकार ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो संघर्ष का दायरा और व्यापक हो सकता है। उन्होंने कहा कि अब तक ईरान ने स्थिति को बड़े क्षेत्रीय संकट में बदलने से रोकने के लिए संयम बरता है, लेकिन लगातार हमलों की स्थिति में उसकी प्रतिक्रिया अधिक व्यापक हो सकती है।

    सैन्य सलाहकार ने यह भी संकेत दिया कि यदि हालात नहीं बदले तो ईरान अपनी अतिरिक्त सैन्य क्षमताओं को सक्रिय कर सकता है। उनके अनुसार भविष्य की रणनीति परिस्थितियों के अनुसार तय की जाएगी। इन बयानों ने पहले से ही संवेदनशील पश्चिम एशियाई स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा समय में पश्चिम एशिया की स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। एक ओर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है, वहीं दूसरी ओर सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक प्रयासों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ती जा रही है। ऐसे हालात में किसी भी पक्ष की ओर से उठाया गया बड़ा कदम क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

    अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच आगे होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीतिक पहल सबसे प्रभावी विकल्प हो सकते हैं। फिलहाल सभी पक्षों के बयानों और संभावित कदमों पर वैश्विक स्तर पर करीबी नजर रखी जा रही है, क्योंकि इनका प्रभाव केवल पश्चिम एशिया ही नहीं बल्कि वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक परिस्थितियों पर भी पड़ सकता है।

  • सोना-चांदी बाजार में बड़ी गिरावट, एक सप्ताह में सोना करीब 3 हजार और चांदी 13 हजार रुपये से अधिक टूटी, निवेशकों की बढ़ी चिंता

    सोना-चांदी बाजार में बड़ी गिरावट, एक सप्ताह में सोना करीब 3 हजार और चांदी 13 हजार रुपये से अधिक टूटी, निवेशकों की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच इस सप्ताह घरेलू बुलियन बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। सप्ताहभर के कारोबार में सोना लगभग तीन हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हुआ, जबकि चांदी के दाम में 13 हजार रुपये से अधिक प्रति किलोग्राम की कमी दर्ज की गई। कीमतों में आई इस नरमी ने निवेशकों और सर्राफा कारोबार से जुड़े लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

    ताजा बाजार आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत सप्ताह के अंत तक 2,976 रुपये घटकर 1,43,368 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। सप्ताह की शुरुआत में इसका भाव 1,46,344 रुपये प्रति 10 ग्राम था। इसी प्रकार 22 कैरेट सोने की कीमत घटकर 1,31,325 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई, जबकि सप्ताह की शुरुआत में यह 1,34,051 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 18 कैरेट सोने में भी गिरावट देखने को मिली और इसका भाव 1,09,758 रुपये से घटकर 1,07,526 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।

    साप्ताहिक कारोबार के दौरान सोने में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। सप्ताह का उच्चतम स्तर 6 जुलाई के सुबह के सत्र में 1,45,583 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया, जबकि सबसे निचला स्तर 8 जुलाई के शाम के सत्र में 1,42,350 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। इससे स्पष्ट है कि बाजार में पूरे सप्ताह अस्थिरता बनी रही और निवेशकों को लगातार बदलते भावों का सामना करना पड़ा।

    सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान चांदी 13,468 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती होकर 2,20,390 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। सप्ताह की शुरुआत में इसका भाव 2,33,858 रुपये प्रति किलोग्राम था। कारोबार के दौरान चांदी का उच्चतम स्तर 6 जुलाई के शाम के सत्र में 2,33,158 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया, जबकि सबसे निचला स्तर 10 जुलाई के शाम के सत्र में 2,20,390 रुपये प्रति किलोग्राम रहा।

    सर्राफा बाजार में कीमतों का निर्धारण दिन में दो बार सुबह और शाम के कारोबारी सत्र के आधार पर किया जाता है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाजार में आए बदलावों का सीधा असर घरेलू कीमतों पर भी देखने को मिलता है। इसी कारण वैश्विक स्तर पर होने वाली आर्थिक और राजनीतिक घटनाओं पर निवेशकों की लगातार नजर बनी रहती है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इस सप्ताह सोने का भाव लगभग 4,100 डॉलर प्रति औंस और चांदी का भाव करीब 60 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा पश्चिम एशिया में विकसित हो रहे हालात ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है। इन परिस्थितियों का प्रभाव कीमती धातुओं के कारोबार पर भी पड़ा, जिसके चलते घरेलू बाजार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और निवेशकों की धारणा के आधार पर बुलियन बाजार की दिशा तय होने की संभावना जताई जा रही है।

  • मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कीमती धातुओं में नरमी, सोना-चांदी शुरुआती कारोबार में फिसले, निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर

    मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कीमती धातुओं में नरमी, सोना-चांदी शुरुआती कारोबार में फिसले, निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर

    नई दिल्ली । मध्यपूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में जारी अनिश्चितता के बीच शुक्रवार को घरेलू सर्राफा बाजार की शुरुआत नरमी के साथ हुई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी दोनों की कीमतों में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई। हालांकि दोनों धातुओं में गिरावट की तीव्रता अलग-अलग रही, लेकिन शुरुआती रुझान निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाते रहे।

    एमसीएक्स पर सोने का अगस्त 2026 वायदा अनुबंध पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले कमजोर स्तर पर खुला। शुरुआती कारोबार में इसकी कीमत लगातार दबाव में रही और कुछ ही समय में गिरावट बढ़कर लगभग आधा प्रतिशत के करीब पहुंच गई। कारोबार के दौरान सोने का भाव प्रति 10 ग्राम लगभग 1.44 लाख रुपये के स्तर के आसपास पहुंच गया। इससे स्पष्ट हुआ कि वैश्विक तनाव के बावजूद निवेशकों की खरीदारी सीमित रही और बाजार में मुनाफावसूली का असर दिखाई दिया।

    चांदी के वायदा कारोबार में भी नरमी देखने को मिली। हालांकि इसकी गिरावट सोने की तुलना में अपेक्षाकृत कम रही। सितंबर डिलीवरी वाले अनुबंध में शुरुआती कारोबार के दौरान मामूली कमजोरी दर्ज की गई और कीमतें पिछले बंद स्तर से नीचे कारोबार करती रहीं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की कीमतों पर औद्योगिक मांग और अंतरराष्ट्रीय रुझानों का भी महत्वपूर्ण प्रभाव रहता है, जिसके कारण इसमें उतार-चढ़ाव की प्रकृति सोने से कुछ अलग दिखाई देती है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दोनों कीमती धातुओं का प्रदर्शन मिश्रित रहा। वैश्विक कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई, जबकि चांदी सीमित बढ़त के साथ कारोबार करती दिखाई दी। इससे यह संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, अमेरिकी मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक घटनाक्रम का आकलन करते हुए सतर्क रणनीति अपना रहे हैं।

    मध्यपूर्व में हाल के दिनों में बढ़े सैन्य तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों की चिंता बढ़ाई है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के तेज होने और जवाबी कार्रवाइयों के बाद निवेशकों की नजर लगातार घटनाक्रम पर बनी हुई है। ऐसे समय में सामान्यतः सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की मांग बढ़ने की संभावना रहती है, लेकिन बाजार में मुनाफावसूली, डॉलर की चाल और निवेशकों की रणनीति जैसे अन्य कारक भी कीमतों को प्रभावित करते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि कीमती धातुओं की कीमतें केवल भू-राजनीतिक घटनाओं से ही तय नहीं होतीं, बल्कि वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर इंडेक्स, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता जैसे कई आर्थिक कारकों का भी उन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसी एक घटना के आधार पर कीमतों की दिशा तय करना उचित नहीं माना जाता।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर मध्यपूर्व की स्थिति, वैश्विक आर्थिक संकेतकों और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार के रुख पर बनी रहेगी। यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है या वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव आता है, तो इसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक प्रत्येक नए घटनाक्रम का इंतजार कर रहे हैं, जिससे आगे की कीमतों की दिशा स्पष्ट हो सके।

  • सोने की कीमतों में दिनभर रहा उतार-चढ़ाव, वैश्विक तनाव के बीच फिर बढ़े दाम; जानिए 24 से 10 कैरेट तक का ताजा भाव और बाजार का रुख

    सोने की कीमतों में दिनभर रहा उतार-चढ़ाव, वैश्विक तनाव के बीच फिर बढ़े दाम; जानिए 24 से 10 कैरेट तक का ताजा भाव और बाजार का रुख

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की बदलती रणनीतियों के बीच गुरुवार को घरेलू सर्राफा बाजार और वायदा कारोबार में सोने की कीमतों में फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबारी सत्र की शुरुआत में कमजोरी के संकेत मिलने के बावजूद दोपहर तक सोने के भाव में सुधार दर्ज किया गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग आने वाले दिनों में भी सोने के दामों को प्रभावित कर सकती है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में 24 कैरेट सोने के वायदा भाव में दोपहर तक लगभग आधा प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। प्रति 10 ग्राम सोने का भाव बढ़कर 1.44 लाख रुपये के पार पहुंच गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह इससे नीचे बंद हुआ था। इसी दौरान भौतिक बाजार में भी सोने की कीमतों में सुधार देखने को मिला और विभिन्न कैरेट के सोने के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। शुद्धता के आधार पर 24, 22, 20, 18, 16, 14, 12 और 10 कैरेट सोने की कीमतों में अलग-अलग स्तर पर तेजी देखने को मिली।

    देश के प्रमुख शहरों में भी सोने के दामों में मामूली अंतर बना रहा। दिल्ली, लखनऊ, जयपुर और चंडीगढ़ जैसे शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर रहा, जबकि मुंबई, कोलकाता, पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद में कीमतें इससे कुछ कम दर्ज की गईं। चेन्नई में अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में सोने का भाव अपेक्षाकृत अधिक रहा। 22 और 18 कैरेट सोने के दामों में भी इसी प्रकार का अंतर देखने को मिला, जो स्थानीय करों और बाजार परिस्थितियों के कारण सामान्य माना जाता है।

    बाजार जानकारों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों की रणनीति को प्रभावित किया है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और वैश्विक आर्थिक संकेतों में बदलाव के कारण निवेशक लगातार सुरक्षित निवेश विकल्पों पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि डॉलर में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि जैसे कारकों ने सोने की तेजी को सीमित करने का भी काम किया है। यही कारण है कि दिनभर बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहा।

    विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं। इसका असर वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ-साथ कीमती धातुओं पर भी देखने को मिल रहा है। कई निवेशकों ने अल्पकालिक लाभ के लिए मुनाफावसूली की रणनीति अपनाई, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बना। वहीं दूसरी ओर वैश्विक अस्थिरता के कारण सुरक्षित निवेश की मांग पूरी तरह समाप्त नहीं हुई, जिससे गिरावट के बाद कीमतों में फिर सुधार देखने को मिला।

    पिछले कारोबारी सत्र में घरेलू सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी और वायदा बाजार में भी तेज कमजोरी देखने को मिली थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हाजिर और वायदा दोनों प्रकार के सोने के भाव दबाव में रहे थे। इसके बावजूद गुरुवार को बाजार खुलने के बाद निवेशकों की नई खरीदारी और बदलते वैश्विक संकेतों ने कीमतों को फिर सहारा दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियां सोने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। ऐसे में निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय बाजार के व्यापक संकेतों पर नजर रखते हुए निवेश संबंधी निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।

  • भारी गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, 24,000 के करीब पहुंचा निफ्टी लेकिन वैश्विक तनाव से ऊपरी स्तरों पर दबाव कायम

    भारी गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, 24,000 के करीब पहुंचा निफ्टी लेकिन वैश्विक तनाव से ऊपरी स्तरों पर दबाव कायम

    नई दिल्ली । बुधवार की तेज गिरावट के बाद गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार ने राहत की सांस ली और शुरुआती कारोबार में सकारात्मक रुख के साथ शुरुआत की। शुरुआती घंटों में निवेशकों की चुनिंदा खरीदारी के दम पर प्रमुख सूचकांक बढ़त में दिखाई दिए। हालांकि बाजार में रिकवरी के संकेत जरूर मिले, लेकिन निवेशकों का विश्वास अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुआ है। वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच बाजार की चाल अब भी सतर्कता का संकेत दे रही है।

    कारोबार की शुरुआत में निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ने बढ़त दर्ज की। निफ्टी शुरुआती कारोबार में 24,000 के करीब पहुंच गया, जबकि सेंसेक्स भी हरे निशान में कारोबार करता दिखाई दिया। पिछले कारोबारी सत्र में आई भारी गिरावट के बाद यह तेजी निवेशकों के लिए कुछ राहत लेकर आई, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल शुरुआती बढ़त को स्थायी मजबूती का संकेत नहीं माना जा सकता।

    तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के सामने ऊपरी स्तरों पर अब भी मजबूत प्रतिरोध मौजूद है। यदि सूचकांक 24,000 के आसपास मजबूती के साथ टिककर कारोबार करता है और कुछ समय तक स्थिरता बनाए रखता है, तभी आगे की रिकवरी को मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली का दबाव भी लगातार बना रह सकता है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहने की संभावना है।

    बाजार की दिशा पर वैश्विक घटनाक्रम का भी स्पष्ट प्रभाव दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि ऊर्जा लागत लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है तो महंगाई, कंपनियों के परिचालन खर्च और कॉर्पोरेट आय पर दबाव बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी।

    गुरुवार के कारोबार में कुछ बड़े शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। चुनिंदा लार्जकैप कंपनियों में खरीदारी के कारण प्रमुख सूचकांकों को शुरुआती मजबूती मिली। विशेष रूप से फार्मा क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही, जबकि रियल एस्टेट सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। इसके विपरीत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों पर दबाव बना रहा, जिससे इस सेक्टर का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दिया।

    विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल निवेशक व्यापक खरीदारी के बजाय गुणवत्ता वाले और मजबूत मूलभूत आधार वाली कंपनियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। बाजार में जोखिम लेने की प्रवृत्ति पहले की तुलना में सीमित बनी हुई है और अधिकांश निवेशक वैश्विक संकेतों पर करीबी नजर रख रहे हैं। यही वजह है कि हर बढ़त पर सीमित मुनाफावसूली भी देखने को मिल रही है।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक माहौल में स्थिरता आती है और घरेलू बाजार महत्वपूर्ण स्तरों के ऊपर टिकने में सफल रहता है तो निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे मजबूत हो सकता है। फिलहाल बाजार में सावधानी के साथ निवेश की रणनीति अपनाई जा रही है और विशेषज्ञ भी चुनिंदा क्षेत्रों में संतुलित निवेश की सलाह दे रहे हैं।

  • अमेरिका-ईरान तनाव और गहराया, ट्रंप बोले- समझौते का दौर खत्म; मध्य पूर्व में बढ़ी नई टकराव की आशंका

    अमेरिका-ईरान तनाव और गहराया, ट्रंप बोले- समझौते का दौर खत्म; मध्य पूर्व में बढ़ी नई टकराव की आशंका

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह ईरान के साथ किसी भी नए समझौते के पक्ष में नहीं हैं और उनके अनुसार दोनों देशों के बीच समझौते की संभावना अब समाप्त हो चुकी है। ट्रंप के इस बयान ने पहले से तनावपूर्ण हालात के बीच नई कूटनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

    मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व और उसकी नीतियों की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी नए समझौते की कोई आवश्यकता नहीं है और अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों तथा क्षेत्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देता रहेगा। उनके बयान को हाल के सैन्य घटनाक्रम और दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि हाल की घटनाओं के बाद उन्हें नहीं लगता कि संघर्ष विराम से जुड़े प्रयास प्रभावी रूप से लागू हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात यह दर्शाते हैं कि दोनों देशों के बीच विश्वास का स्तर काफी कमजोर हो चुका है। ऐसे में किसी नए समझौते की संभावना फिलहाल बेहद सीमित दिखाई देती है।

    हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों में भी तेजी देखने को मिली है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसने क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों और समुद्री मार्गों की रक्षा के उद्देश्य से आवश्यक कार्रवाई की है। वहीं दूसरी ओर ईरान भी लगातार अपने रुख पर कायम है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और अधिक बढ़ गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू बने हुए हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

    ट्रंप ने अपनी टिप्पणी के दौरान नाटो और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ सुरक्षा और रणनीतिक हितों पर लगातार विचार कर रहा है। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई विषयों पर नए सिरे से रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है।

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों और ऊर्जा क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, निवेशकों की बढ़ती सतर्कता और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित किया है। कई देशों ने स्थिति पर करीबी नजर बनाए रखते हुए संयम और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले घटनाक्रम पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होंगे। यदि तनाव कम करने के लिए प्रभावी कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऐसे में दुनिया की निगाहें दोनों देशों के अगले कदम और संभावित कूटनीतिक पहल पर टिकी हुई हैं।