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  • FASTag: सरकार ने लागू किए सख्त नियम….टोल नहीं कटा तो अब भरना होगा डबल जुर्माना

    FASTag: सरकार ने लागू किए सख्त नियम….टोल नहीं कटा तो अब भरना होगा डबल जुर्माना


    नई दिल्ली।
    हाईवे (Highway) पर सफर करने वालों के लिए बड़ी खबर है। सरकार (Government) ने FASTag Rules में बदलाव करते हुए नया सख्त नियम (New Strict Rule) लागू किया है। अब अगर टोल प्लाजा पर किसी कारण से FASTag से भुगतान नहीं हो पाता है, तो वाहन मालिक को तय समय में भुगतान करना जरूरी होगा, वरना दोगुना जुर्माना देना पड़ेगा।


    72 घंटे में भुगतान नहीं किया तो देना होगा डबल चार्ज

    नए नियम के अनुसार, अगर कोई वाहन बिना टोल भुगतान किए बैरियर-फ्री टोल प्लाजा से गुजर जाता है और 72 घंटे के भीतर बकाया राशि नहीं चुकाता, तो उस पर दोगुना शुल्क लगाया जाएगा। यानी अगर आपने समय पर भुगतान नहीं किया, तो आपको मूल टोल से दो गुना रकम चुकानी पड़ेगी।

    क्यों लाए गए ये नए नियम?
    सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि बिना भुगतान के टोल पार करने वालों पर रोक लगे और डिजिटल टोल सिस्टम को और मजबूत किया जा सके। नियमों का पालन सुनिश्चित हो। यह बदलाव नेशनल हाईवे फीस नियमों में संशोधन के तहत लागू किया गया है।


    टोल एजेंसियों की जिम्मेदारी भी तय

    सिर्फ वाहन चालकों पर ही नहीं, बल्कि टोल एजेंसियों पर भी जिम्मेदारी तय की गई है। अगर किसी उपभोक्ता की शिकायत पर टोल एजेंसी 5 दिनों के अंदर कार्रवाई नहीं करती है तो उस मामले में बकाया टोल की मांग अपने आप खत्म हो जाएगी। यानी अगर गलती एजेंसी की है और समय पर समाधान नहीं हुआ, तो आपको राहत मिल सकती है।


    क्या है ‘अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क’?

    संशोधित नियमों में ‘अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क’ को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। यह वह टोल है जो इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली द्वारा वाहन के गुजरने की पुष्टि के बावजूद प्राप्त नहीं होता है। ऐसे मामलों में, पंजीकृत वाहन मालिकों को एक इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजा जाएगा, जिसमें वाहन का विवरण, टोल पार करने की तारीख और स्थान, और देय राशि की जानकारी होगी।

    ये नोटिस एसएमएस, ईमेल, मोबाइल ऐप और एक विशेष पोर्टल के माध्यम से भेजे जाएंगे। साथ ही, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को वाहन डेटाबेस ‘वाहन’ से जोड़ा जाएगा, ताकि बकाया राशि वाले वाहनों की आसानी से पहचान की जा सके।


    FASTag यूजर्स के लिए जरूरी सलाह

    FASTag में हमेशा पर्याप्त बैलेंस रखें। ट्रांजैक्शन अलर्ट चेक करते रहें। कोई समस्या हो तो तुरंत शिकायत दर्ज करें। 72 घंटे के अंदर भुगतान जरूर करें। कुल मिलाकर, सरकार ने टोल वसूली को पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इससे जहां नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी, वहीं सही यूजर्स को भी सुरक्षा और राहत मिलेगी।

  • ईरान युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में तेल का संकट, क्या है भारत की स्थिति; सरकार ने बताया

    ईरान युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में तेल का संकट, क्या है भारत की स्थिति; सरकार ने बताया




    तेहरान। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण समुद्री मार्ग बाधित होने के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि कच्चे तेल और ईंधन से संबंधित किसी भी हालात से निपटने के लिए भारत अच्छी स्थिति में है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार ने आम आदमी के लिए वैकल्पिक विकल्प प्रदान करने हेतु केरोसिन उत्पादन में वृद्धि की है।

    गोयल ने ‘सीएनबीसी-टीवी18 इंडिया बिजनेस लीडर्स अवार्ड्स 2026′ समारोह में कहा कि सरकार निर्यातकों को समर्थन देने के लिए अगले सप्ताह कुछ ”ठोस एजेंडा” लेकर आने की योजना बना रही है। गोयल ने कहा, “कच्चे तेल और ईंधन के मामले में हमारी स्थिति काफी अच्छी है। हमारे पास पर्याप्त भंडार मौजूद है। कच्चे तेल या ईंधन, पेट्रोल, डीजल, विमानन ईंधन के मोर्चे पर किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।”
    बढ़ाया गया केरोसीन का उत्पादन

    उन्होंने कहा कि भारत ने केरोसिन का उत्पादन बढ़ा दिया है ताकि एलपीजी की आपूर्ति में किसी भी देरी की स्थिति में आम आदमी के लिए खाना पकाने का एक वैकल्पिक साधन उपलब्ध हो सके। गोयल ने कहा, ”इसके साथ ही, हम विविध स्रोतों से आयात के माध्यम से एलपीजी और एलएनजी संबंधी आवश्यकताओं को भी पूरा कर रहे हैं।’
    होर्मुज स्ट्रेट को बचाने का आह्वान

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘बंद करने’ के ईरान के प्रयास से प्रभावित देशों से आग्रह किया कि वे वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण इस संकरे समुद्री मार्ग को सुरक्षित करने के लिए जहाज भेजें। अमेरिका और इजराइल का ईरान के खिलाफ युद्ध तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया।

    ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज भेजने का आग्रह किया तथा कहा कि अमेरिका तटरेखा पर बमबारी जारी रखेगा और ईरानी जहाजों व नौकाओं को निशाना बनाएगा। अमेरिका व इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर एक बड़ा संयुक्त हमला शुरू किया था और ईरान की जवाबी कार्रवाई के साथ यह पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल गया।

    ईरानी हमलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को प्रभावित किया है, जो कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस संबंध में कोई औपचारिक समझौता हुआ है या राष्ट्रपति ट्रंप ही ऐसा चाहते हैं।

    ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका, ईरान की सैन्य क्षमता को शत प्रतिशत नष्ट कर चुका है लेकिन चाहे वे कितने भी बुरी तरह पराजित क्यों न हो जाएं, उनके लिए एक-दो ड्रोन भेजना, बारूदी सुरंग गिराना या इस जलमार्ग में कहीं भी निकट दूरी की मिसाइल दागना आसान है। उन्होंने कहा, “उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश इस क्षेत्र में जहाज भेजेंगे ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य एक ऐसे राष्ट्र के लिए खतरा न रहे जिसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है।”

  • ईरान में फंसे भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी कराने में जुटी सरकार, ये दो देश कर रहे मदद

    ईरान में फंसे भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी कराने में जुटी सरकार, ये दो देश कर रहे मदद


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते संघर्ष के बीच भारत सरकार (Indian Government) अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर लगातार सक्रिय है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि ईरान में मौजूद भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। सरकार उन भारतीयों की मदद कर रही है जो ईरान से बाहर निकलना चाहते हैं। इसके लिए आर्मेनिया (Armenia) और अजरबैजान (Azerbaijan) के रास्ते लोगों को सुरक्षित बाहर लाने की व्यवस्था की जा रही है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय है और हाई अलर्ट पर काम कर रहा है। दूतावास भारतीय छात्रों, तीर्थयात्रियों और अन्य नागरिकों से लगातार संपर्क में है। जो लोग ईरान छोड़ना चाहते हैं उन्हें जमीन के रास्ते आर्मेनिया और अजरबैजान भेजा जा रहा है, जहां से वे व्यावसायिक उड़ानों के जरिए भारत लौट सकते हैं।


    ईरान में कितने भारतीय मौजूद हैं?

    विदेश मंत्रालय के मुताबिक ईरान में करीब नौ हजार भारतीय नागरिक मौजूद हैं। इनमें बड़ी संख्या में छात्र और तीर्थयात्री शामिल हैं। सरकार ने कहा कि कई भारतीय पहले ही सरकार की एडवाइजरी का पालन करते हुए स्वदेश लौट चुके हैं। बाकी लोगों से भी लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके।


    सरकार ने सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए हैं?

    सरकार ने बताया कि कुछ छात्रों और आगंतुकों को सुरक्षा कारणों से ईरान के अलग-अलग शहरों में स्थानांतरित किया गया है। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है, जो चौबीसों घंटे काम कर रहा है। यहां परिवार के लोग फोन या ईमेल के जरिए जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और अधिकारियों से मदद ले सकते हैं।


    खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा क्यों अहम है?

    विदेश मंत्रालय के अनुसार खाड़ी सहयोग परिषद के देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं। सरकार ने कहा कि इन सभी भारतीयों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर लगातार क्षेत्र के कई नेताओं के संपर्क में हैं और भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर जोर दे रहे हैं।


    संघर्ष में भारतीयों को कितना नुकसान हुआ?

    सरकार ने बताया कि हालिया घटनाओं में दो भारतीय नागरिकों की मौत हुई है और एक व्यक्ति लापता है। ये तीनों एक व्यापारी जहाज पर मौजूद थे, जो हमले का शिकार हुआ था। इसके अलावा कुछ भारतीय घायल भी हुए हैं। एक भारतीय इस्राइल में और एक दुबई में घायल हुआ है। दोनों का इलाज चल रहा है और भारतीय दूतावास उनके संपर्क में है।

  • मां के साथ रूस गए बच्चे का पता लगाए सरकार, उसके भारतीय पिता से मिलाने का करे प्रयास: SC

    मां के साथ रूस गए बच्चे का पता लगाए सरकार, उसके भारतीय पिता से मिलाने का करे प्रयास: SC


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को केंद्र सरकार (Central Government) से उस नाबालिग बच्चे का पता लगाने और उसे उसके भारतीय पिता (Indian Father) से वर्चुअल माध्यम से मिलाने के प्रयास करने को कहा, जिसे उसकी मां रूस ले गई है। बच्चे की कस्टडी को लेकर रूसी महिला और उसके भारतीय पति के बीच अदालत में मुकदमा चल रहा है, इस बीच महिला बच्चे को अपने साथ लेकर मॉस्को चली गई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि महिला और उसके बेटे के ठिकाने को गुप्त रखा जा सकता है। फिलहाल उन्हें भारत वापस लाने का कोई प्रयास न किया जाए।

    पीठ ने कहा कि नाबालिग बच्चे को उसके पिता से आभासी रूप से मिलाने के लिए राजनयिक प्रयास जारी रखे जाने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने रूस स्थित भारतीय दूतावास से भी अपील किया कि अधिकारी सीमित उद्देश्य से महिला और बच्चे का पता लगाने के लिए वहां के अधिकारियों से इस मामले पर बात करें। केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि भारत और रूस के विदेश सचिवों की बैठक और इंटरपोल के ब्लू कॉर्नर नोटिस सहित कई प्रयासों के बावजूद बच्चे का पता लगाने में कोई खास प्रगति नहीं हुई है।


    आखिर क्या है पूरा मामला

    महिला वर्ष 2019 से भारत में रह रही थी और वह एक्स-1 वीजा पर भारत आई थी, जिसकी अवधि समाप्त हो चुकी थी। हालांकि, अदालती कार्यवाही के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर वीजा की अवधि बढ़ाने का निर्देश दिया। पिछले साल 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया गया कि शायद रूसी महिला नाबालिग बेटे के साथ नेपाल सीमा के रास्ते देश छोड़कर चली गई है और संभवतः शारजाह के रास्ते अपने देश पहुंच गई है।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस स्थिति को अस्वीकार्य बताया और अदालत की घोर अवमानना का मामला कहा। बच्चे के पिता ने आरोप लगाया कि उनकी अलग रह रही पत्नी बच्चे की कस्टडी से जुड़े अदालती आदेश का पालन नहीं कर रही है। उस व्यक्ति ने दावा किया कि उसे महिला और अपने बेटे के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने 22 मई, 2025 को निर्देश दिया कि बच्चे की स्पेशल कस्टडी सप्ताह में तीन दिन (सोमवार, मंगलवार और बुधवार) के लिए मां को दी जाए और शेष दिनों के लिए बच्चा अपने पिता की विशेष अभिरक्षा में रहे।

  • उमंग सिंघार ने आदिवासी इलाकों से बढ़ते पलायन पर सरकार पर साधा निशाना, बोले- ये गंभीर मानवीय संकट है

    उमंग सिंघार ने आदिवासी इलाकों से बढ़ते पलायन पर सरकार पर साधा निशाना, बोले- ये गंभीर मानवीय संकट है


    भोपाल। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचलों से लगातार हो रहे पलायन को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति बेहद चिंताजनक है, जहां बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार रोजगार, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन की तलाश में अपने ही राज्य से बाहर जाने को मजबूर हो रहे हैं। उनके अनुसार यह केवल आर्थिक समस्या नहीं बल्कि आदिवासी समाज के सम्मान और अस्तित्व से जुड़ा गंभीर मानवीय संकट है।

    सिंघार ने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन से जुड़े आदिवासी समुदाय आज अपने गांव और खेत छोड़कर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने के लिए विवश हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का यह पलायन उनकी पहचान और सम्मान से जुड़ा एक गहरा सामाजिक संकट बनता जा रहा है।

    भाजपा सरकार की नीतियों को ठहराया जिम्मेदार

    आदिवासियों के पलायन के मुद्दे पर उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप है कि वर्षों से सत्ता में रही सरकार दलित और आदिवासी समाज के मुद्दों पर केवल घोषणाएं और प्रचार तक सीमित रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी गौरव के नाम पर कार्यक्रम तो आयोजित किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर आदिवासी परिवारों को रोजगार और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिसके कारण उन्हें प्रदेश छोड़कर जाना पड़ रहा है।

    सरकार की नीतियों की विफलता का स्पष्ट संकेत

    नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की भी कमी बनी हुई है। उनका कहना है कि जब किसी प्रदेश के मूल निवासी ही अपनी जमीन और गांव छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएं, तो यह सरकार की नीतियों की विफलता का स्पष्ट संकेत है।

    उल्लेखनीय है कि मध्‍य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों से हर वर्ष बड़ी संख्या में मजदूर काम की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन करते हैं। इस मुद्दे को लेकर अब कांग्रेस ने राज्य सरकार पर आदिवासी समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया है।

  • किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार कृषि कल्याण वर्ष 2026 में किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। किसानों की फसलों का उचित दाम मिले, इसके लिए उड़द खरीदी पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस की घोषणा की गई है। प्रदेश के किसान उड़द लगाएं, ताकि उन्हें इस बोनस का भरपूर लाभ मिल सके और अगली फसल की तैयारी भी हो जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों के साथ समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, नीरज मंडलोई सहित कृषि, राजस्व, सहकारिता, जल संसाधन, उद्यानिकी तथा अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने गेहूं उत्पादक किसानों को भी गत वर्षों के तरह बोनस की सौगात दी है। इस वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा। इससे किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं का भुगतान प्राप्त होगा। राज्य सरकार ने किसानों के हित में अपने संकल्प-पत्र में वर्ष 2028 तक 2700 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदने का संकल्प लिया है। आगामी वर्षों में हम इस लक्ष्य को पूरा कर उससे भी आगे निकलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बिजली संबंधी शिकायतों का निराकरण स्थानीय स्तर पर करने की व्यवस्था स्थापित करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश, देश का फूड बास्केट है, जहां दलहन, तिलहन और सब्जी उत्पादन अच्छी मात्रा में हो रहा है। हमारे राज्य के किसान आगे बढ़ें और समृद्ध हों, इसके लिए सरकार निरंतर किसान हितैषी निर्णय ले रही है। कुछ स्थानों पर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन में कठिनाई सामने आई है। इसे ध्यान में रखकर गेहूँ उपार्जन पंजीयन की अंतिम तिथि 7 मार्च से बढ़ाकर 10 मार्च की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए दिन में बिजली उपलब्ध कराई जाएगी, इससे रात के समय बिजली से सिंचाई के कारण होने वाले संकटों से बचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान संघ की ओर से किसानों के हित में प्राप्त सुझावों पर भी राज्य सरकार विचार करेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में भूमि अधिग्रहण पर मुआवजा राशि बढ़ाने, जंगली जानवरों द्वारा फसल नुकसान पर मुआवजे, मंडी अधिनियम के प्रावधानों, फसल गिरदावरी, अविवादित नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन के लिए समय-सीमा निर्धारित करने, विद्युत प्रदाय और सिंचाई व्यवस्था जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

  • Iran war: पश्चिम एशिया में फंसे लोगो की वापसी की तैयारी में जुटी सरकार.. आज 58 फ्लाइट्स भरेंगी उड़ान

    Iran war: पश्चिम एशिया में फंसे लोगो की वापसी की तैयारी में जुटी सरकार.. आज 58 फ्लाइट्स भरेंगी उड़ान

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे तनाव के कारण हवाई सेवाओं पर बड़ा असर पड़ा है। इस बीच केंद्र सरकार (Central Government) ने मंगलवार को जानकारी दी कि एयरलाइनों ने अपनी उड़ानों के शेड्यूल में सावधानीपूर्वक बदलाव किए हैं और 4 मार्च को कुल 58 उड़ानें संचालित करने की योजना बनाई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने बताया कि फंसे हुए यात्रियों की मदद के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर एयरलाइंस अतिरिक्त उड़ानें चला रही हैं और विदेशी विमानन प्राधिकरणों तथा भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर काम कर रही हैं, ताकि यात्रियों की सुरक्षित और व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।

    मंत्रालय के अनुसार, आज भारतीय एयरलाइनों की तरफ से 24 उड़ानें संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा पिछले 24 घंटों में खाड़ी देशों से एमिरेट्स और एतिहाद एयरवेज ने 9 उड़ानें संचालित की हैं। सरकार ने कहा कि वह लगातार एयरलाइनों के संपर्क में है और हवाई किरायों पर नजर रख रही है, ताकि इस संकट के समय टिकट की कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी न हो। मंत्रालय ने बताया कि भारतीय एयरलाइनों ने लंबी दूरी और अति लंबी दूरी की उड़ानों को वैकल्पिक मार्गों से धीरे-धीरे फिर से शुरू करना शुरू कर दिया है।


    क्या है चार मार्च की योजना?

    ये उड़ानें उन हवाई क्षेत्रों से बचकर चलाई जा रही हैं, जो फिलहाल बंद या प्रतिबंधित हैं। बता दें कि 4 मार्च को कुल 58 उड़ानों की योजना बनाई गई है। इनमें 30 उड़ानें इंडिगो की तरफ से और 23 उड़ानें एअर इंडिया तथा एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा संचालित की जाएंगी। भारत और खाड़ी क्षेत्र के बीच विदेशी एयरलाइंस भी सीमित संख्या में उड़ानें चला रही हैं, जो संचालन और हवाई क्षेत्र की स्थिति पर निर्भर हैं। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ा है।


    डीजीसीए ने दी जानकारी

    मंत्रालय के अनुसार, अब तक भारतीय एयरलाइनों की 1,221 उड़ानें और विदेशी एयरलाइनों की 388 उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं। केवल मंगलवार को ही भारतीय एयरलाइनों ने 104 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कीं। 28 फरवरी से अब तक तीन दिनों में कुल 1,117 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हुई हैं। सरकार ने सभी एयरलाइनों को निर्देश दिया है कि वे यात्रियों को स्पष्ट और समय पर जानकारी दें तथा रिफंड, री-शेड्यूलिंग और अन्य सहायता से जुड़े नियमों का पालन करें।


    एअर इंडिया ने क्या जानकारी दी?

    इस बीच एअर इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि पश्चिम एशिया की स्थिति को देखते हुए उसने संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इस्राइल और कतर के लिए अपनी अधिकांश उड़ानों को 4 मार्च 2026 की रात 11:59 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया है। एयरलाइन ने कहा है कि वह क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे की स्थिति के अनुसार निर्णय लेगी। इसके साथ ही सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वह एयरलाइनों, एयरपोर्ट ऑपरेटरों, नियामक संस्थाओं और विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रही है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और सेवाओं को धीरे-धीरे सामान्य किया जा सके।

  • बगैर SIM के नहीं चलेगा WhatsApp… 1 मार्च से लागू होगा सरकार का ये नया नियम

    बगैर SIM के नहीं चलेगा WhatsApp… 1 मार्च से लागू होगा सरकार का ये नया नियम


    नई दिल्ली।
    अगर आप वाट्सएप (WhatsApp) यूजर हैं, तो यह खबर आपके काम की है। दरअसल केंद्र सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि SIM-Binding नियम में कोई बदलाव या ढील नहीं दी जाएगी। यह नियम WhatsApp, Telegram, Signal मैसेजिंग ऐप्स लागू होते हैं, और इसका लक्ष्य डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाना है। यानी 1 मार्च से यह नियम लागू रहेगा और कंपनियों को इसे मानना ही होगा। सरकार के अनुसार, इन ऐप्स को एक्टिव SIM कार्ड से लगातार जुड़े रहना होगा, जिससे यह कन्फर्म किया जा सके कि व्हाट्सऐप उपयोग होने वाला नंबर असली और एक्टिव है। अगर SIM हटाई जाती है या इनएक्टिव होती है, तो ऐप की सेवाएं उस डिवाइस पर काम नहीं करेंगी।


    SIM-Binding क्या है?

    जिस मोबाइल नंबर से आपने WhatsApp अकाउंट बनाया है, वही SIM आपके फोन में एक्टिव रहनी चाहिए। अगर वह SIM आपके फोन में नहीं है या बंद हो गई है, तो WhatsApp ठीक से काम नहीं करेगा। अब तक मैसेजिंग ऐप्स में 6-डिजिट OTP डालकर एक बार लॉगिन होने के बाद SIM की मौजूदगी लगातार नहीं चेक होती थी। नया नियम यह बदलने वाला है अब हर समय SIM को एक्टिव और फोन में मौजूद होना जरूरी होगा। सरकार ने यह बदलाव इसलिए किया है क्योंकि वह डिजिटल धोखाधड़ी, फर्जी नंबरों का दुरुपयोग और साइबर अपराध को रोकने पर जोर दे रही है। जब हर अकाउंट एक वेरिफाइड SIM से जुड़ा होगा, तो फ्रॉड और फेक अकाउंट्स को पहचानना आसान हो जाएगा।


    1 मार्च 2026 के बाद कोई ढील नहीं

    डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्यूनिकेशंस (DoT) ने SIM-Binding नियम को 28 नवंबर 2025 को जारी किया था और कंपनियों को इसे पूरा करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है। इसका मतलब है कि 1 मार्च 2026 तक सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को इस सिस्टम को लागू करना पड़ेगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि अलग-अलग डिवाइस पर लॉगिन किए गए Web या Desktop के लिए भी छह घंटे का ऑटो लॉग-आउट नियम भी लागू रहेगा। इसका यह मतलब है कि अगर आप कंप्यूटर या वेब पर WhatsApp चला रहे हैं, तो हर छह घंटे में आपको QR कोड से फिर से लॉगिन करना पड़ेगा।


    आम लोगों पर पड़ेगा ये असर

    अगर आपका नंबर एक्टिव है और वही SIM आपके फोन में लगी है, तो आपको ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। आपका WhatsApp सामान्य तरीके से चलता रहेगा।लेकिन अगर आपने फोन से SIM निकाल दी या वहीं SIM दूसरे फोन में डाल दी तो आपका व्हट्सऐप टेम्पररी इनएक्टिव हो जाएगा। साथ ही आपका नंबर बंद हो गया (रिचार्ज न होने की वजह से) तो WhatsApp दोबारा वेरिफिकेशन मांग सकता है या बंद भी हो सकता है। दरअसल केंद्र सरकार का मानना है कि अगर हर अकाउंट एक एक्टिव SIM से जुड़ा होगा, तो फर्जी नंबर, स्कैम और साइबर अपराधों के खिलाफ लड़ाई और मजबूती से लड़ी जा सकती है।

  • वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा – सरकार के पास बैंकों के विलय की फिलहाल कोई रूपरेखा नहीं

    वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा – सरकार के पास बैंकों के विलय की फिलहाल कोई रूपरेखा नहीं


    नई दिल्ली।
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने सोमवार को कहा कि सरकार के पास सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (Banks) के विलय की कोई रूपरेखा नहीं है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट (Union Budget) में प्रस्तावित विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर एक उच्च-स्तरीय समिति इस विषय और अन्य पहलुओं पर गौर करेगी।

    वित्त मंत्री ने क्या कहा
    आरबीआई (RBI) के केंद्रीय निदेशक मंडल को बजट के बाद संबोधित करने के उपरांत पत्रकारों से बातचीत में सीतारमण ने कहा, ”मैं किसी भी रूपरेखा से परिचित नहीं हूं… ऐसी कोई योजना अभी मौजूद नहीं है। बैंकों का विलय यहां चर्चा का विषय नहीं था, न ही बजट से पहले था। लेकिन अब जो समिति बनाई जा रही है, उसके कार्यक्षेत्र तय होने के बाद, वह भारतीय बैंकिंग को मजबूत बनाने के हर पहलू पर ध्यान देंगी।”

    बजट में सीतारमण ने भारत के बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करने और इसे देश के विकास लक्ष्यों के अनुरूप ढालने के लिए उच्च स्तरीय बैंकिंग समिति’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि बैंक बेहतर तरीके से पूंजीकृत हैं और वे अगले चार-पांच साल तक ऋण वृद्धि को संभाल सकते हैं।


    बैंकों को दिए ये आदेश

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों द्वारा बीमा सहित वित्तीय उत्पादों की गलत तरीके से बिक्री पर कड़ा रुख अपनाते हुए सोमवार को कहा कि उन्हें (बैंकों को) अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान देना चाहिए। पत्रकारों से बातचीत में सीतारमण ने कहा, ” बैंकों को अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान देना चाहिए…। मैंने हमेशा से इस बात पर आपत्ति जतायी है कि आप उस बीमा को बेचने में अधिक समय लगा रहे हैं जिसकी आवश्यकता ही नहीं है और यह मामला आरबीआई और बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के बीच फंसा रहा।”

    आरबीआई ने ग्राहक को भ्रामक जानकारी देकर उत्पाद की बिक्री पर दिशानिर्देशों का मसौदा 11 फरवरी को जारी किया था। इसमें कहा गया है कि यदि किसी ग्राहक को गलत तरीके से उत्पाद या सेवा दी जाती है, तो बैंक को ग्राहक द्वारा चुकाई गई पूरी राशि लौटानी होगी और स्वीकृत नीति के अनुसार हुए नुकसान की भरपाई भी करनी होगी। इस पर चार मार्च तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी गई हैं।

    आरबीआई ने कहा कि गलत तरीके से बिक्री पर कड़े नियम एक जुलाई से लागू होंगे। सीतारमण ने कहा, ”मुझे खुशी है कि आरबीआई यह स्पष्ट मार्गदर्शन दे रहा है कि गलत तरीके से बिक्री क्यों बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संदेश, बैंकों तक जाना चाहिए कि आप गलत बिक्री नहीं कर सकते। यह शब्द ‘गलत बिक्री’, किसी को ठेस पहुंचाने के बजाय, शब्दकोश में एक और शब्द बनकर रह गया है।”

  • निवेशकों को बड़ा तोहफा देने की तैयारी में सरकार … पेंशन के साथ हेल्थ इंश्योरेंस भी…डबल बेनेफिट

    निवेशकों को बड़ा तोहफा देने की तैयारी में सरकार … पेंशन के साथ हेल्थ इंश्योरेंस भी…डबल बेनेफिट


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) अब निवेशकों (Investors) को पेंशन के साथ-साथ हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) कवर भी देने की तैयारी में है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के चेयरमैन एस. रमन ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीन प्रमुख पेंशन फंड इस समय हेल्थ इंश्योरेंस कवर देने वाली पेंशन योजनाओं पर काम कर रहे हैं।

    यह नई पेंशन योजना या तो हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के साथ साझेदारी में, या फिर सीधे हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर्स के सहयोग से पेश की जा सकती है। रमन ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य ‘स्वास्थ्य पेंशन योजना’ के तहत लोगों को चिकित्सा खर्चों के लिए अलग से बचत करने के लिए प्रेरित करना है, जिससे वे भविष्य में किसी भी आकस्मिक स्वास्थ्य स्थिति का सामना बेहतर तरीके से कर सकें।

    यह पहल निवेशकों के लिए एक बड़ा तोहफा साबित हो सकती है, जो अब अपनी पेंशन के साथ-साथ अपनी स्वास्थ्य सुरक्षा को भी सुनिश्चित कर सकेंगे।

    पीएफआरडीए के चेयरमैन ने कहा- हम चाहते हैं कि लोग खुद को सुरक्षित रखने की अहमियत को समझें। हम चाहते हैं कि लोग मेडिकल पेंशन योजना में पैसा बचत करें। यह राशि केवल चिकित्सा उद्देश्यों के भुगतान के लिए समर्पित होगी। बता दें कि PFRDA ने इस साल जनवरी में ‘स्वास्थ्य’ प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत निवेशक की पेंशन राशि का अधिकतम 30 प्रतिशत हिस्सा चिकित्सा खर्चों के लिए अलग रखा जा सकता है।


    स्वास्थ्य बीमा कंपनियों से सस्ते टॉप-अप कवर

    पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) के प्रमुख ने कहा कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत बड़ी संख्या में निवेशकों का एकसाथ आना पेंशन फंड को बेहतर सौदे तय करने में मदद करता है। इससे हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों से सस्ते टॉप-अप कवर और अस्पतालों से उपचार पर रियायतें मिल सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना में अस्पतालों को मरीज के इलाज के तुरंत बाद ही भुगतान मिल सकेगा जबकि केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना के तहत भुगतान में कई महीने लग जाते हैं। रमन ने बताया कि आईसीआईसीआई, एक्सिस और टाटा की तरफ से प्रायोजित पेंशन फंड इस तरह की हेल्थ कवरेज योजनाएं पेश करने को लेकर प्रयोग कर रहे हैं और आईसीआईसीआई जल्द ही अपना उत्पाद पेश कर देगा।

    सोना-चांदी ईटीएफ में निवेश की योजना
    उन्होंने कहा कि रिटर्न को लंबे समय तक दहाई अंकों में बनाए रखने के उपायों का अध्ययन किया जा रहा है। इसके लिए परियोजना वित्त, रियल एस्टेट, वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) के साथ सोना और चांदी ईटीएफ में सीमित निवेश की भी योजना है। उन्होंने एनपीएस के कम कवरेज (करीब एक करोड़ रुपये) को स्वीकार करते हुए कहा कि निवेशक आधार बढ़ाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) से बातचीत जारी है ताकि डिजिटल माध्यम से लोगों को जोड़ने में तेजी लाई जा सके। इसके साथ ही रमन ने कहा कि कम-से-कम चार बैंकों या बैंकों के समूह ने पेंशन कोष कारोबार में उतरने की इच्छा जताई है। इनमें एक्सिस बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक एवं स्टार डायची का समूह शामिल हैं।