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  • मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग

    मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग




    मुरैना।
    वकील मृत्युंजय चौहान के सुसाइड केस में नया मोड़ आया है। बुधवार को मृतक वकील की मां, शिवकुमारी जादौन, मुरैना एसपी समीर सौरभ से मिलने पहुंचीं और भावुक होकर बोलीं कि उनके बेटे के साथ जो अत्याचार हुआ, उसकी न्यायिक कार्रवाई सिर्फ ग्वालियर में नहीं, बल्कि मुरैना में भी हो। उन्होंने कहा, “मुझे भी यहीं मार डालो, मेरा बेटा तो चला ही गया।

    मृत्युंजय की मां ने आरोप लगाया कि मुरैना पुलिस अब तक किसी ठोस कार्रवाई में नहीं जुटी है।

    12 दिसंबर को मुरैना सिविल लाइन की महिला एसआई प्रीति जादौन और कॉन्स्टेबल अराफात खान ने मृत्युंजय के साथ मारपीट की थी। इसी के चलते मृत्युंजय ने 15 दिसंबर को ग्वालियर में अपने किराए के मकान में फांसी लगाई। उन्होंने मांग की कि आरोपी महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी एफआईआर दर्ज की जाए, अवैध पिस्टल जब्त की जाए और दोनों को जिले से बाहर अटैच किया जाए क्योंकि वे परिवार को धमका रहे हैं।

    ग्वालियर पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन से पुष्टि हुई कि घटना वाले दिन आरोपी और वकील साथ थे।

    जांच में यह भी खुलासा हुआ कि महिला एसआई ने शादी का दबाव बनाया, पूर्व पत्नी से तलाक, जमीन-जायदाद और जेवरात हड़पने की कोशिश की। इस मामले में ग्वालियर पुलिस ने बीएनएस की धारा 108 और 3(5) के तहत महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    एसपी ने कहा कि जांच जारी है और जैसे ही ग्वालियर पुलिस का एफआईआर प्रतिवेदन मिलेगा, दोनों आरोपियों को पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया जाएगा। शिवकुमारी जादौन की यह मांग न्यायपालिका और पुलिस पर दबाव डालती है कि किसी भी तरह की अवहेलना या विलंब न्याय में बाधक न बने।

    इस पूरे मामले ने मुरैना और ग्वालियर में पुलिस और न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक वकील के परिवार ने स्पष्ट किया कि केवल ग्वालियर में कार्रवाई से संतोष नहीं होगा, बल्कि मुरैना में भी एफआईआर दर्ज होना जरूरी है ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।

  • मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का असरदिल्ली से आने वाली ट्रेनें लेट. स्कूलों में छुट्टी जारी

    मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का असरदिल्ली से आने वाली ट्रेनें लेट. स्कूलों में छुट्टी जारी


    भोपाल । मध्यप्रदेश में इस समय कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे का प्रभाव बहुत गहरा है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में रात का तापमान 10 डिग्री से नीचे चला गया है. और कई इलाकों में यह और भी नीचे पहुंच चुका है। उमरिया में तापमान 3.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. जबकि राजगढ़. खजुराहो और शिवपुरी में 4.5 से 5 डिग्री सेल्सियस तक तापमान गिरा है। वहीं. रीवा में भी 5.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    बुधवार की सुबह कोहरे के कारण प्रदेश के आधे हिस्से में दृश्यता कम रही। विशेष रूप से सतना. दतिया. गुना. रीवा. ग्वालियर. राजगढ़. खजुराहो. नौगांव और सीधी जैसे इलाकों में कोहरे का असर सबसे ज्यादा रहा। इस कारण दिल्ली से आने वाली एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनें लेट हो गई हैं. जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    इसके साथ ही. इंदौर. रायसेन. ग्वालियर. मऊगंज. धार और नर्मदापुरम जिलों के स्कूलों में भी बुधवार को छुट्टी घोषित कर दी गई है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में कोल्ड वेव और शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। इससे पहले भी शाजापुर. शहडोल. सिवनी. मंदसौर. सीहोर में शीतलहर का असर देखा गया था. और भोपाल-राजगढ़ में तीव्र शीतलहर भी चली थी।

    प्रदेश में पिछले तीन दिन से लगातार कड़ाके की सर्दी पड़ रही है. जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। इस सर्दी की वजह से ही इंदौर. उज्जैन. मंदसौर. शाजापुर. विदिशा. ग्वालियर. अशोकनगर. रायसेन. आगर-मालवा. भिंड. टीकमगढ़. हरदा. नीमच. रतलाम. राजगढ़. मंडला. जबलपुर. दमोह. डिंडौरी. नर्मदापुरम. झाबुआ. छतरपुर. सीधी. बैतूल और कई अन्य जिलों में स्कूलों की छुट्टी घोषित की गई है।

    इंदौर. रायसेन. ग्वालियर और नर्मदापुरम में बुधवार को भी स्कूलों की छुट्टियां जारी रही। वहीं. भोपाल. धार. सीहोर. अनूपपुर. बड़वानी. मुरैना और खरगोन में स्कूल सुबह 9 बजे के बाद ही खोले गए हैं। इस कड़ाके की ठंड ने बच्चों को स्कूलों तक पहुंचने में दिक्कतें दी हैं. खासकर छोटे बच्चों को सुबह-सुबह ठंड में स्कूल पहुंचने में काफी परेशानी हो रही है।

    इस बार कड़ाके की ठंड का असर खास रहा है। नवंबर और दिसंबर के महीनों में प्रदेश में कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। नवंबर में 84 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी थी. और दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है। जनवरी के पहले सप्ताह में भी प्रदेश में माइनस तापमान की स्थिति देखने को मिली।

    सर्दी का यह मौसम क्यों खास है

    मौसम विभाग के मुताबिक. दिसंबर और जनवरी में उत्तर भारत से सर्द हवाएं प्रदेश की ओर आती हैं. जिसके कारण इन महीनों में कड़ाके की ठंड होती है। इन दो महीनों में खासतौर पर शीतलहर और कोल्ड वेव जैसी स्थितियां बनती हैं। पिछले 10 सालों में ऐसे ही ट्रेंड देखे गए हैं. और इस बार भी जनवरी में मावठा हल्की बारिश का असर कुछ जिलों में देखा गया है।

    प्रदेश के प्रमुख शहरों में जनवरी के मौसम का ट्रेंड भी बहुत दिलचस्प है

    भोपाल18 जनवरी 1935 को यहां का रात का तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका था। 26 जनवरी 2009 को दिन का तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था।इंदौरजनवरी में माइनस तापमान का रिकॉर्ड 16 जनवरी 1935 को माइनस 1.1 डिग्री सेल्सियस था।उज्जैन22 जनवरी 1962 को यहां पारा 0 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका था।

    अंत में. मध्यप्रदेश में इस बार सर्दी और कोहरे का असर अत्यधिक देखा जा रहा है. जिससे न सिर्फ आम जनजीवन प्रभावित हुआ है. बल्कि स्कूलों और ट्रेनों की समय सारणी भी गड़बड़ाई है। ठंड और कोहरे के कारण कई ट्रेनें लेट हो रही हैं. और छोटे बच्चों को स्कूल पहुंचने में परेशानी हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार. यह स्थिति आने वाले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है।

  • BB 19 Dubai Party: ‘तान्या जीतेगी…’, ग्वालियर गर्ल की बिग बॉस 19 सक्सेस पार्टी में हुई तारीफ, वीडियो वायरल

    BB 19 Dubai Party: ‘तान्या जीतेगी…’, ग्वालियर गर्ल की बिग बॉस 19 सक्सेस पार्टी में हुई तारीफ, वीडियो वायरल

    नई दिल्ली। बिग बॉस 19 की कंटेस्टेंट तान्या मित्तल अब किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। हाल ही में दुबई में आयोजित बिग बॉस 19 की ग्रैंड सक्सेस पार्टी में तान्या ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा और जमकर तारीफें बटोरी। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

    6 जनवरी 2026 की रात दुबई के एक आलीशान स्थल पर यह पार्टी आयोजित की गई थी। जैसे ही तान्या ने एंट्री ली, पैपराजी और फैंस ने उन्हें घेर लिया। तान्या ने अपने ट्रेडमार्क ‘देसी और बोल्ड’ अंदाज से सबका दिल जीत लिया। वीडियो में देखा जा सकता है कि होस्ट ने कहा, “तान्या ने दो महीने पहले ही कह दिया था कि ‘तुम जीतेगी’, और यही बात अब सबके सामने सच साबित हुई।” इस पर तान्या मुस्कुराते हुए सबका आभार व्यक्त करती नजर आईं।

    दुबई की इस महफिल में ग्वालियर गर्ल का दबदबा साफ नजर आया। बिग बॉस के घर के अंदर तान्या का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन उनकी ईमानदारी और बेबाकी ने दर्शकों का दिल जीत लिया। सोशल मीडिया पर पोल और ट्रेंड्स में भी तान्या को भर-भरकर वोट किए गए। घर से बाहर आकर अमाल मलिक ने भी उनकी तारीफ की और कहा कि तान्या ने जिस तरह से गेम खेला, वह काबिले तारीफ है।

    तान्या ने शो में किसी भी मुद्दे पर अपने विचार रखने में कभी डर नहीं दिखाया। उनका यही खुला और स्पष्ट अंदाज दर्शकों को बेहद पसंद आया। दुबई पार्टी में सिर्फ तारीफें ही नहीं, बल्कि खूब मस्ती भी हुई। पार्टी के दौरान के कुछ इनसाइड मोमेंट्स सोशल मीडिया पर साझा किए गए, जिन्हें फैंस ने खूब पसंद किया।

    वीडियो वायरल होते ही ट्विटर (X) पर #TanyaBB19 और #GwaliorGirl जैसे हैशटैग टॉप ट्रेंड करने लगे। लोग वीडियो पर कमेंट्स कर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और तान्या के जीतने के कयास भी लगाने लगे हैं।

    इस तरह, दुबई सक्सेस पार्टी में तान्या मित्तल ने अपनी शानदार उपस्थिति और आकर्षक अंदाज से सबका दिल जीत लिया। उनके इस वायरल वीडियो ने फैंस को और उत्साहित कर दिया है, और बिग बॉस 19 के चर्चे अब भी सोशल मीडिया पर जोर पकड़ते दिख रहे हैं।
  • MP: ग्वालियर में BJP पार्षद ने गंदे पानी की आपूर्ति के विरोध में निकाली दंडवत यात्रा, दी ये चेतावनी

    MP: ग्वालियर में BJP पार्षद ने गंदे पानी की आपूर्ति के विरोध में निकाली दंडवत यात्रा, दी ये चेतावनी


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर शहर (Gwalior City) में गंदे पानी की आपूर्ति (Contaminated Water Supply) और विभिन्न अव्यवस्थाओं के विरोध में भाजपा पार्षद बृजेश श्रीवास (BJP councilor Brijesh Shriwas) ने सोमवार को दंडवत यात्रा निकालकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। इस यात्रा का उद्देश्य महापौर और नगर निगम प्रशासन का ध्यान नागरिकों की समस्याओं की ओर आकर्षित करना था।

    दंडवत यात्रा श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा से शुरू होकर परिषद कार्यालय तक पहुंची। इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में “स्वच्छ पानी दो”, “गंदे पानी से परेशान जनता” और “जल समस्या का समाधान करो” जैसे नारे लिखी तख्तियां थीं।

    प्रदर्शनकारियों का कहना था कि क्षेत्र में पीने योग्य पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। गंदे और बदबूदार पानी के कारण लोगों को गंभीर बीमारियों का खतरा बना हुआ है, लेकिन बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। यात्रा के दौरान लगाए गए बैनरों में केवल जल संकट ही नहीं, बल्कि शहर की बदहाल स्थिति को भी दर्शाया गया। इनमें टूटी सड़कें, खराब सफाई व्यवस्था, उफनते सीवर और कॉलोनियों में अंधेरे जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह मार्च नगर सरकार और महापौर को “जगाने” के लिए किया गया है।

    इस मौके पर पार्षद बृजेश श्रीवास ने कहा कि यह आंदोलन जनता की पीड़ा और नाराजगी को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द ठोस कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, हालांकि लोगों में गहरी नाराजगी साफ नजर आई।

    महापौर शोभा सिकरवार का कहना था कि यह सब सिर्फ मीडिया में आने की स्टंटबाजी है। इंदौर में जो घटनाक्रम हुआ वहां बीजेपी के महापौर हैं, जो खुद कह रहे हैं कि अधिकारी उनकी सुनते नहीं हैं। जब सत्ता सरकार में होने के बाद भी बीजेपी महापौर की बात नहीं सुनी जाती तो यहां गलती महापौर की कैसे हो सकती है। इस तरह के स्टंट से विपक्ष के पार्षद सिर्फ ध्यान भटकाने का प्रयास करते हैं। यहां सब मिलकर काम कर रहे हैं और समस्या का समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं।

  • ग्वालियर में एआई की मदद से महिला की लाश की पहचान पुलिस ने स्कैच से संदेही तक पहुंचा

    ग्वालियर में एआई की मदद से महिला की लाश की पहचान पुलिस ने स्कैच से संदेही तक पहुंचा


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई जहां पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई की मदद से एक महिला की लाश की पहचान की। यह महिला गोला का मंदिर स्थित कटारे फार्म में झाड़ियों के बीच अर्द्धनग्न अवस्था में मृत पाई गई थी महिला का सिर पत्थर से कुचला गया था जिससे उसकी हत्या की आशंका जताई जा रही थी।

    पुलिस ने एआई तकनीक का उपयोग कर महिला का स्कैच तैयार कराया। इस स्कैच के आधार पर जब पुलिस ने स्थानीय लोगों से संपर्क किया तो उन्होंने महिला की पहचान “कल्लो उर्फ कालीबाई” के रूप में की। वह अक्सर उस क्षेत्र में घूमती रहती थी और वहां के स्थानीय लोग उसे पहचानते थे।

    स्कैच के आधार पर पुलिस ने फिर से सीसीटीवी फुटेज की जांच की और देखा कि महिला एक युवक के साथ घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर सड़क पर चलती हुई दिखाई दी थी। पुलिस ने इस युवक को प्रमुख संदेही मानते हुए उसकी तलाश शुरू की। संदेही की जैकेट भी घटनास्थल से मिले महिला के कपड़ों के पास पाई गई जिससे पुलिस को और सबूत मिले हैं।

    इस खोज ने पुलिस को मामले की दिशा में महत्वपूर्ण मदद दी है और इस जघन्य हत्या के आरोपी तक पहुंचने के प्रयासों को तेज किया है। पुलिस का कहना है कि वे जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पूरी कोशिश करेंगे।यह घटना ग्वालियर के कटारे फार्म में सोमवार को हुई थी जब महिला की लाश झाड़ियों में पाई गई। पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी थी और अब एआई तकनीक के सहारे इस हत्याकांड के पीछे के रहस्यों को सुलझाने में मदद मिल रही है।

  • दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस में मचा घमासान ग्वालियर-चंबल में खामोशी

    दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस में मचा घमासान ग्वालियर-चंबल में खामोशी


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के बाद कांग्रेस पार्टी में घमासान मच गया है लेकिन उनके राजनीतिक गढ़ ग्वालियर-चंबल अंचल में अब तक इस मामले पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दिग्विजय सिंह ने हाल ही में संघ और भाजपा की प्रशंसा करते हुए सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट किया था जिस पर विवाद छिड़ गया है। इस पोस्ट को लेकर कांग्रेस के कई नेताओं ने नाराजगी जताई है लेकिन ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में खामोशी का माहौल बना हुआ है।

    कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि यह पोस्ट पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ है जबकि पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थक खासकर उनके बेटे जयवर्धन सिंह और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह उनके समर्थन में खड़े हैं। जयवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर अपने पिता के संगठन के प्रति समर्पण को व्यक्त करते हुए राहुल गांधी की यात्रा से जुड़े कुछ फोटो भी पोस्ट किए और कहा कि उनके पिता के लिए संगठन सर्वोपरि है।पूर्व मुख्यमंत्री के संगठन के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाने वालों को डॉ. गोविंद सिंह ने गलत बताया।

    उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह के संगठन के प्रति समर्पण पर संदेह करना अनुचित है और उनके द्वारा की गई पोस्ट केवल एक व्यंग्य है न कि भाजपा या संघ की प्रशंसा।दिग्विजय सिंह की पोस्ट के बाद ग्वालियर-चंबल अंचल में उनके कट्टर समर्थक माने जाने वाले नेताओं जैसे पूर्व मंत्री केपी सिंह और राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसके साथ ही उनके विरोधी भी फिलहाल चुप हैं जिससे यह साफ है कि कांग्रेस के नेता शायद पार्टी नेतृत्व के रूख का इंतजार कर रहे हैं।

    वहीं भाजपा के नेताओं ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ हमलावर रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का न्योता दिया जबकि नगरीय निकाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें सरदार पटेल के रूप में निरूपित किया। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इसे दिग्विजय सिंह की राज्यसभा में दोबारा जाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश बताया। अब देखना होगा कि दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट का असर कांग्रेस पार्टी और उनके गढ़ ग्वालियर-चंबल में किस प्रकार होता है और क्या इस विवाद से पार्टी में कोई बड़े बदलाव होते हैं।

  • ग्वालियर निजी स्कूलों पर फीस स्ट्रक्चर अपलोड न करने पर होगी कार्रवाई

    ग्वालियर निजी स्कूलों पर फीस स्ट्रक्चर अपलोड न करने पर होगी कार्रवाई


    ग्वालियर । ग्वालियर के निजी स्कूलों में फीस को लेकर हो रही मनमानी पर लगाम लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक सख्त कदम उठाया है। अब सभी प्राइवेट स्कूलों को फीस स्ट्रक्चर पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है और इस जानकारी की हार्ड कॉपी जिला शिक्षा विभाग में भी जमा करानी होगी। 31 दिसंबर तक सभी स्कूलों को यह काम पूरा करना था लेकिन अब भी कई स्कूलों ने समय सीमा का पालन नहीं किया है। शिक्षा विभाग ने कहा कि जिन स्कूलों ने यह जानकारी अपलोड नहीं की उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    इस बार विभाग ने एक बड़ा बदलाव किया है। पहले केवल पोर्टल पर जानकारी अपलोड करना आवश्यक था लेकिन अब पहली बार यह आदेश दिया गया है कि हर स्कूल को पोर्टल के साथ-साथ हार्ड कॉपी भी जमा करनी होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी स्कूल अपनी फीस संरचना को छुपाने या उसे बदलने की कोशिश न कर सके। सभी प्राइवेट स्कूलों को विभाग के पोर्टल पर फीस संरचना 31 दिसंबर तक अपलोड करना था। अब विभाग तीन-चार दिन के भीतर इन आंकड़ों का मिलान करेगा। जिन स्कूलों ने यह जानकारी अपलोड नहीं की है या हार्ड कॉपी जमा नहीं की है उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    इस वर्ष कई स्कूलों ने पोर्टल पर फीस जानकारी तो अपलोड की लेकिन हार्ड कॉपी जमा करने में लापरवाही बरती। अब विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि हर स्कूल को पूर्ण जानकारी देनी होगी। शिक्षा विभाग ने यह भी बताया कि जिन स्कूलों के अपने पोर्टल हैं उन्हें भी अपनी फीस संरचना वहां दिखानी होगी ताकि अभिभावकों को सही और स्पष्ट जानकारी मिल सके। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह कदम बच्चों के अभिभावकों को सही जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि स्कूलों द्वारा फीस की अवैध वृद्धि नहीं की जा सके और पारदर्शिता बनी रहे।

  • ग्वालियर में नए साल की सुबह ‘दूध अभियान’: शराब छोड़, सेहत से की नववर्ष की शुरुआत

    ग्वालियर में नए साल की सुबह ‘दूध अभियान’: शराब छोड़, सेहत से की नववर्ष की शुरुआत

    ग्वालियर। नए साल 2026 की शुरुआत शहर में कुछ अलग अंदाज में हुई। इंदरगंज चौराहे पर आयोजित दूध अभियान में लोगों ने शराब छोड़कर दूध पीकर नववर्ष का स्वागत किया। एसोसिएशन ऑफ ग्वालियर यूथ सोसाइटी और यातायात पुलिस के संयुक्त प्रयास से यह अनोखा अभियान चलाया गया।सुबह-सुबह पंडाल पर 2 क्विंटल केसरिया दूध तैयार कर निशुल्क वितरण किया गया। राहगीरों, वाहन चालकों, युवाओं और बुजुर्गों ने रुककर दूध पिया और अभियान का समर्थन किया। एडिशनल एसपी अनु बेनीवाल ने खुद लोगों को दूध दिया और नशामुक्त नववर्ष का संदेश फैलाया। पंडाल के आसपास बड़े-बड़े बैनरों और साउंड सिस्टम के जरिए संदेश दिया गया-दारू से नहीं, दूध से करें नववर्ष की शुरुआत।

    आयोजकों का कहना है कि नए साल पर शराब पीने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे सड़क दुर्घटनाएं, घरेलू हिंसा और स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं। युवाओं में नशे की लत चिंता का विषय है। इसी चुनौती के समाधान के लिए यह अभियान शुरू किया गया।दूध वितरण कार्यक्रम में लोगों की लंबी कतारें लग गईं। कई लोगों ने इसे नए साल की सबसे अच्छी और सार्थक शुरुआत बताया। युवाओं ने कहा कि ऐसे अभियान नशे के प्रति सोच बदलने में मददगार हैं। स्थानीय निवासियों ने आयोजन की सराहना की और इसे आगे जारी रखने की मांग की।

    यातायात पुलिस ने भी मौके पर लोगों से नशे में वाहन न चलाने, ट्रैफिक नियमों का पालन करने और सुरक्षित जीवनशैली अपनाने की अपील की। अधिकारियों ने कहा कि जश्न वही बेहतर है, जो खुद के साथ दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।ग्वालियर की यह पहल केवल एक आयोजन नहीं बल्कि सार्वजनिक जागरूकता का संदेश है। नए साल की सुबह दूध के माध्यम से लोगों को यह बताया गया कि जश्न और जिम्मेदारी साथ-साथ चल सकते हैं। शहर की इस अनोखी शुरुआत ने साबित कर दिया कि बदलाव छोटे कदमों से ही शुरू होता है।

  • ग्वालियर हाईकोर्ट ने 48 साल पुराने भूमि विवाद में किया फैसला, कब्जा अवैध, नगर निगम को कार्रवाई की अनुमति

    ग्वालियर हाईकोर्ट ने 48 साल पुराने भूमि विवाद में किया फैसला, कब्जा अवैध, नगर निगम को कार्रवाई की अनुमति



    ग्वालियर।
    ग्वालियर के तानसेन रोड पर नेचुरोपैथी अस्पताल के सामने की जमीन को लेकर 48 साल से चल रहे विवाद में हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लीज की अवधि समाप्त होने के बाद जमीन पर कब्जा रखना पूरी तरह गैरकानूनी है। हाईकोर्ट ने कहा कि लीज खत्म होते ही उसका स्वतः अंत हो जाता है और उसके बाद जमीन पर बने रहना अतिक्रमण माना जाएगा।

    हाईकोर्ट ने निचली अदालतों के फैसले को सही ठहराते हुए अपीलकर्ताओं की दूसरी अपील खारिज कर दी।

    कोर्ट ने साथ ही नगर निगम ग्वालियर को जमीन पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने की पूरी अनुमति दे दी है। अब नगर निगम इस जमीन पर उचित कार्रवाई कर सकता है और भविष्य में ऐसे मामलों को नियंत्रित कर सकेगा।

    यह विवाद तानसेन रोड पर स्थित नेचुरोपैथी अस्पताल के सामने की 3161.6 वर्गफुट जमीन को लेकर था। अपीलकर्ता, डॉ. मणिकांत शर्मा के वारिस, नगर निगम के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर रहे थे। उनका दावा था कि यह जमीन उनके पिता को लीज पर दी गई थी और बाद में इसका नवीनीकरण भी हुआ।

    सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि लीज केवल 31 मार्च 1977 तक वैध थी और उसके बाद कोई वैध नवीनीकरण नहीं हुआ।

    अपीलकर्ताओं के वकील ने भी कोर्ट में माना कि लीज बढ़ाने से जुड़े कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर मान भी लिया जाए कि 1976 में लीज को 30 साल के लिए बढ़ाया गया था, तो वह 2007 में समाप्त हो चुकी थी।

    इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि बिना वैध लीज के जमीन पर कब्जा अवैध है, और अब नगर निगम को कानून के अनुसार कार्रवाई करने का अधिकार है। इस निर्णय से ग्वालियर में भूमि विवादों को लेकर प्रशासनिक स्पष्टता बढ़ेगी और भविष्य में ऐसे मामलों में कानून के पालन को मजबूती मिलेगी।

    हाईकोर्ट का यह फैसला यह संदेश देता है कि जमीन पर कब्जा कानून और दस्तावेजों के आधार पर ही वैध माना जाएगा और किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 48 साल पुराने इस विवाद का यह निपटारा ग्वालियर के भूमि विवाद मामलों में नियम और अनुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • MP: ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला में 15 गायों की की मौत, सैकड़ों बीमार

    MP: ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला में 15 गायों की की मौत, सैकड़ों बीमार


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की आदर्श गौशाला (Model cow shelter) मानी जाने वाली ग्वालियर (Gwalior) की मशहूर लाल टिपारा गौशाला (Lal Tipara Gaushala) से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। गौशाला में अचानक 15 गायों की मौत हो गई और सबसे शर्मनाक बात यह रही कि गौशाला का स्टाफ इन मौतों को छिपाने की कोशिश करता रहा। मरी हुई गायों के शरीर एक-दूसरे के ऊपर ऐसे फेंके गए थे जैसे वे कोई बेजान कूड़ा हों।

    नगर निगम इस गौशाला पर हर साल 25 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा करता है। इस गौशाला में 10 हजार से ज्यादा गायें रखी गई हैं। दावे यह भी हैं कि यहां डॉक्टर भी तैनात हैं, लेकिन बीमार गायों की मौत सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब मेडिकल ऑफिसर आशुतोष आर्या एक घायल गाय को ठीक करने के बाद वहां छोड़ने पहुंचे।

    उन्होंने बताया कि जिस गाय का उन्होंने 15 दिन तक अपने खर्चे पर इलाज किया था, उसे वहां मरते देखा और साथ ही टिनशेड में 15 अन्य गायों की लाशें भी ढेर की तरह पड़ी मिलीं। जब उन्होंने स्टाफ से पूछा, तो कोई सही जवाब नहीं मिला। यह भी कहा गया कि शायद गायें आपस में टकराकर मर गई होंगी। इस मामले में कलेक्टर से भी शिकायत की गई है।

    वहीं नगर निगम कमिश्नर संघ प्रिय का कहना है कि गौशाला में गायों के मरने की जानकारी मिली है। मामले की जांच कराई जाएगी। फिलहाल गौशाला के बीमार सेक्शन में 400 से 500 के करीब गायें भर्ती हैं, जिनमें से 60 की हालत बेहद नाजुक है। इनका इलाज किया जा रहा है। मामला बढ़ने पर ग्वालियर की कलेक्टर रुचिका चौहान ने खुद गौशाला का दौरा किया।

    कलेक्टर रुचिका चौहान ने गौशाला के रजिस्टर चेक किए। उन्होंने बीमार और मृत गायों के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की। कलेक्टर ने इलाज के बाद स्वस्थ होकर छोड़ी गई गायों का रिकॉर्ड भी तलब किया। साथ ही मृत गायों के निपटान की व्यवस्था से संबंधित दस्तावेज देखे और अधिकारियों से जानकारी ली। इतनी रकम खर्च होने के बावजूद गायों की ऐसी हालत से इंतजामों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।