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  • बारिश का मजा भी और सेहत की सुरक्षा भी, मानसून में खुद की देखभाल के लिए अपनाएं ये आसान और असरदार उपाय

    बारिश का मजा भी और सेहत की सुरक्षा भी, मानसून में खुद की देखभाल के लिए अपनाएं ये आसान और असरदार उपाय


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम गर्मी से राहत लेकर आता है और हरियाली के साथ वातावरण को खुशनुमा बना देता है लेकिन इस मौसम में सेहत का खास ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी होता है। बारिश के दौरान हवा में नमी बढ़ जाती है और मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिलता है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी सर्दी खांसी बुखार पेट से जुड़ी परेशानी और त्वचा संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए मानसून का आनंद लेने के साथ साथ खुद की देखभाल पर ध्यान देना जरूरी है। सही खानपान साफ सफाई और रोजमर्रा की कुछ अच्छी आदतें अपनाकर इस मौसम में खुद को स्वस्थ और फिट रखा जा सकता है।

    बरसात के मौसम में सबसे पहले साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए क्योंकि जमा हुआ पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। बारिश में बाहर से आने के बाद गीले कपड़ों को तुरंत बदल देना चाहिए और शरीर को अच्छी तरह सुखाना चाहिए। लंबे समय तक गीले कपड़े पहनने से त्वचा में खुजली और फंगल संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पैरों को भी साफ और सूखा रखना जरूरी है क्योंकि मानसून में पैरों में संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है। बाहर से आने के बाद हाथ और पैरों को अच्छी तरह धोने की आदत स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है।

    इस मौसम में खानपान का भी विशेष महत्व होता है। बाहर का खुला और लंबे समय से रखा हुआ खाना खाने से बचना चाहिए। बारिश के दिनों में ताजा और घर का बना भोजन ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना जाता है। भोजन में फल सब्जियां दाल और अन्य पौष्टिक चीजों को शामिल करना चाहिए ताकि शरीर को जरूरी पोषण मिल सके। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है क्योंकि कई लोग ठंडे मौसम में पानी कम पीने लगते हैं। शरीर को हाइड्रेट रखना सेहत के लिए हर मौसम में जरूरी है। पीने के पानी और खाने की स्वच्छता का ध्यान रखना भी इस मौसम में महत्वपूर्ण होता है।

    मानसून में त्वचा की देखभाल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बढ़ी हुई नमी के कारण त्वचा चिपचिपी हो सकती है और कुछ लोगों को पिंपल्स या रैशेज की परेशानी हो सकती है। इसलिए चेहरे और शरीर को साफ रखना जरूरी है। त्वचा पर बहुत ज्यादा भारी उत्पादों का इस्तेमाल करने के बजाय अपनी स्किन टाइप के अनुसार हल्के और उपयुक्त उत्पादों का चयन किया जा सकता है। किसी भी नई स्किन प्रोडक्ट से एलर्जी या जलन महसूस होने पर उसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    बरसात के दिनों में पर्याप्त नींद और आराम भी जरूरी है। मौसम में बदलाव के कारण शरीर थका हुआ महसूस कर सकता है इसलिए रोजाना पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करनी चाहिए। हल्की एक्सरसाइज योग या घर पर स्ट्रेचिंग जैसी गतिविधियां शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती हैं। अगर बाहर बारिश हो रही हो तो घर के अंदर ही कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए निकालना बेहतर हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना भी सेल्फ केयर का महत्वपूर्ण हिस्सा है इसलिए अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना चाहिए।

    बारिश में भीगने का आनंद लेना गलत नहीं है लेकिन लंबे समय तक गीले रहने से बचना चाहिए। अगर बारिश में भीग जाएं तो घर पहुंचकर जल्द से जल्द सूखे कपड़े पहनें और शरीर को गर्म और आरामदायक रखें। किसी भी तरह के लगातार बुखार तेज कमजोरी सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। मानसून में छोटी छोटी सावधानियां अपनाकर न केवल बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है बल्कि पूरे मौसम का आनंद भी बेहतर तरीके से लिया जा सकता है। साफ सफाई पौष्टिक भोजन पर्याप्त पानी अच्छी नींद और सक्रिय दिनचर्या ही बरसात के मौसम में खुद की बेहतर देखभाल का सबसे आसान तरीका है।

  • हाई BP को हल्के में न लें! शरीर में बढ़ता दबाव इन वजहों से हो सकता है खतरनाक, जानें बचाव के आसान तरीके

    हाई BP को हल्के में न लें! शरीर में बढ़ता दबाव इन वजहों से हो सकता है खतरनाक, जानें बचाव के आसान तरीके


    नई दिल्ली । ब्लड प्रेशर यानी रक्तचाप का बढ़ना आज के समय में एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। कई बार लोगों को पता भी नहीं चलता कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते। इसी वजह से हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर भी कहा जाता है। सामान्य स्थिति में रक्तचाप शरीर में खून के प्रवाह को बनाए रखने के लिए जरूरी होता है लेकिन जब यह लंबे समय तक सामान्य स्तर से अधिक बना रहे तो हृदय और रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ सकता है।

    ब्लड प्रेशर बढ़ने की एक बड़ी वजह खराब लाइफस्टाइल हो सकती है। आजकल लोगों की दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि कम हो गई है और लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत बढ़ गई है। नियमित व्यायाम की कमी से वजन बढ़ सकता है और मोटापे के कारण हाई BP का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा खाने में ज्यादा नमक का सेवन भी कुछ लोगों में रक्तचाप बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। पैकेज्ड फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन में सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन सीमित रखना बेहतर माना जाता है।

    तनाव भी ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है। जब व्यक्ति लंबे समय तक तनाव में रहता है तो शरीर में ऐसे हार्मोन सक्रिय होते हैं जो कुछ समय के लिए हृदय की धड़कन और रक्तचाप बढ़ा सकते हैं। लगातार तनाव बना रहने पर यह समस्या और गंभीर हो सकती है। इसके साथ ही नींद पूरी न होना भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। नियमित रूप से कम नींद लेने वाले लोगों में हाई BP का खतरा बढ़ सकता है।

    धूम्रपान और तंबाकू का सेवन भी रक्त वाहिकाओं पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसी तरह अत्यधिक शराब का सेवन कुछ लोगों में रक्तचाप बढ़ने से जुड़ा हो सकता है। इसलिए BP को नियंत्रित रखने के लिए इन आदतों से दूरी बनाना महत्वपूर्ण है।

    कई बार हाई ब्लड प्रेशर के पीछे दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं या कुछ दवाएं भी कारण हो सकती हैं। किडनी से जुड़ी समस्याएं हार्मोन संबंधी परेशानियां और कुछ अन्य स्थितियां रक्तचाप को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति का BP बार बार बढ़ रहा है तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

    ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद और तनाव को कम करने वाली स्वस्थ आदतें अपनाना फायदेमंद हो सकता है। खाने में नमक की मात्रा सीमित रखना फल सब्जियां और साबुत अनाज जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना भी मददगार हो सकता है। साथ ही डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से BP की जांच करवानी चाहिए।

    अगर BP बहुत ज्यादा बढ़ जाए और इसके साथ तेज सिरदर्द सीने में दर्द सांस लेने में परेशानी कमजोरी बोलने में दिक्कत या दिखाई देने में परेशानी जैसे गंभीर लक्षण हों तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। हाई BP का सही कारण जानने और उचित उपचार के लिए चिकित्सकीय सलाह सबसे जरूरी है। यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है और किसी डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह का विकल्प नहीं है।

  • फिट और स्वस्थ रहने का आसान फॉर्मूला, अच्छी डाइट से पर्याप्त नींद तक रोज अपनाएं ये जरूरी आदतें और रहें बीमारियों से दूर

    फिट और स्वस्थ रहने का आसान फॉर्मूला, अच्छी डाइट से पर्याप्त नींद तक रोज अपनाएं ये जरूरी आदतें और रहें बीमारियों से दूर


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम और जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। लंबे समय तक बैठे रहना अनियमित खानपान कम नींद और लगातार तनाव जैसी आदतें धीरे धीरे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। स्वस्थ रहने के लिए किसी एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ अच्छी आदतों को शामिल करना ज्यादा जरूरी है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद और मानसिक शांति पर ध्यान देना चाहिए।

    सबसे पहले खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। भोजन में अलग अलग तरह की सब्जियां फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को शामिल करना चाहिए। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन अत्यधिक मीठा और ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर माना जाता है। भोजन की मात्रा और समय का भी ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक भूखे रहने या बार बार जरूरत से ज्यादा खाने की आदत से बचना चाहिए।

    शरीर को स्वस्थ रखने में पानी की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना शरीर में हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद करता है। गर्मी या अधिक शारीरिक गतिविधि के दौरान शरीर को पानी की जरूरत और बढ़ सकती है। हालांकि पानी की जरूरत हर व्यक्ति की उम्र गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।

    व्यायाम को स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा माना जाता है। रोज कुछ समय पैदल चलना योग करना स्ट्रेचिंग करना या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य शारीरिक गतिविधि करना शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। अगर आपका काम लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर करने वाला है तो बीच बीच में उठकर थोड़ा चलना भी उपयोगी आदत हो सकती है। किसी नई या कठिन एक्सरसाइज की शुरुआत धीरे धीरे करना बेहतर रहता है।

    अच्छी सेहत के लिए नींद को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर को आराम देने के साथ मानसिक ताजगी बनाए रखने में मदद करती है। रात में देर तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन देखने की आदत कम करने और सोने का नियमित समय तय करने से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। हर व्यक्ति की नींद की जरूरत अलग हो सकती है लेकिन लगातार नींद की कमी को सामान्य मानकर नहीं चलना चाहिए।

    मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। लगातार तनाव महसूस होने पर काम के बीच आराम लेना परिवार और दोस्तों से बातचीत करना संगीत पढ़ने या पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना मददगार हो सकता है। अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे और रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करे तो विशेषज्ञ की मदद लेना उचित है।

    इसके अलावा नियमित स्वास्थ्य जांच भी महत्वपूर्ण है। उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार ब्लड प्रेशर ब्लड शुगर आंखों और अन्य जरूरी स्वास्थ्य जांच के बारे में डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है। किसी बीमारी के लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

    कुल मिलाकर अच्छी सेहत किसी एक दिन की मेहनत से नहीं बल्कि रोज की छोटी छोटी आदतों से बनती है। संतुलित भोजन नियमित गतिविधि पर्याप्त नींद तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश और समय समय पर स्वास्थ्य जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर लंबे समय तक स्वस्थ रहने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

  • कैंसर पर जोंटी रोड्स का बड़ा संदेश, फिटनेस के साथ सही खानपान और जीवनशैली को बताया अहम

    कैंसर पर जोंटी रोड्स का बड़ा संदेश, फिटनेस के साथ सही खानपान और जीवनशैली को बताया अहम


    नई दिल्ली । दक्षिण अफ्रीका के पूर्व क्रिकेटर जोंटी रोड्स ने कैंसर को लेकर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है। अपने क्रिकेट करियर में शानदार फील्डिंग के लिए दुनिया भर में पहचान बनाने वाले रोड्स ने मुंबई में आयोजित एक कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में जीवनशैली और स्वास्थ्य से जुड़े विकल्पों पर बात की। वह SSO Cancer Hospitals से ब्रांड एंबेसडर के तौर पर जुड़े हुए हैं और हाल ही में अस्पताल की ओर से शुरू किए गए Head and Neck Cancer Centre of Excellence के उद्घाटन कार्यक्रम में भी शामिल हुए।

    रोड्स ने कहा कि कैंसर जैसी बीमारी को केवल अचानक होने वाली समस्या के तौर पर नहीं देखना चाहिए। उन्होंने अपनी बात रखते हुए आदतों तनाव और जीवनशैली से जुड़े फैसलों को स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि व्यक्ति को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसे विकल्प चुनने चाहिए जो लंबे समय तक उसके स्वास्थ्य के लिए बेहतर साबित हों। हालांकि कैंसर के मामले में यह समझना भी जरूरी है कि बीमारी का कोई एक कारण नहीं होता और हर मरीज के कैंसर को उसकी जीवनशैली से जोड़ना सही नहीं है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कैंसर कई तरह की बीमारियों का समूह है और इसके पीछे आनुवंशिक कारणों के साथ पर्यावरणीय और व्यवहार से जुड़े कई कारक हो सकते हैं। तंबाकू का सेवन शराब अस्वास्थ्यकर खानपान शारीरिक निष्क्रियता अधिक वजन वायु प्रदूषण और कुछ संक्रमण कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। WHO के मुताबिक 2022 में दुनिया भर में कैंसर के नए मामलों में करीब 37 प्रतिशत मामले ऐसे कारणों से जुड़े थे जिन्हें रोकथाम की रणनीतियों के जरिए कम किया जा सकता है।

    रोड्स ने अपनी फिटनेस यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि खिलाड़ी होने के कारण व्यायाम और फिटनेस उनकी जीवनशैली का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिट व्यक्ति को कैंसर नहीं हो सकता ऐसा कहना सही नहीं होगा। उनका संदेश मुख्य रूप से लोगों को अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक करने और बेहतर विकल्प चुनने पर केंद्रित था। दरअसल कैंसर का जोखिम कम करने के लिए केवल व्यायाम ही पर्याप्त नहीं है बल्कि तंबाकू से दूरी स्वस्थ वजन संतुलित खानपान नियमित शारीरिक गतिविधि और शराब से बचाव जैसे कई कदम महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    जोंटी रोड्स ने भारत में अपने परिवार के साथ लंबे समय तक रहने का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह भारत को केवल एक पर्यटक के रूप में नहीं देखते। उन्होंने यहां लोगों की जीवनशैली और स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों को करीब से देखने की बात कही। उनका उद्देश्य अपने अनुभव के जरिए लोगों को कैंसर के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल करने और समय रहते जागरूक होने के लिए प्रेरित करना है।

    कैंसर को लेकर जागरूकता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू समय पर जांच और इलाज भी है। WHO के अनुसार कई तरह के कैंसर का शुरुआती चरण में पता चलने और उचित उपचार मिलने पर इलाज संभव है। यही वजह है कि शरीर में लगातार बने रहने वाले असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच और जोखिम कारकों को कम करने की कोशिश बीमारी के बोझ को घटाने में मदद कर सकती है।

    रोड्स ने कैंसर को लेकर डर के बजाय जागरूकता और सकारात्मक सोच पर जोर दिया। उनका कहना था कि भारत में कैंसर के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर और चिकित्सा सुविधाएं मौजूद हैं और मरीजों को बीमारी का सामना हिम्मत के साथ करना चाहिए। उनका संदेश यही है कि स्वास्थ्य को लेकर छोटे लेकिन लगातार किए जाने वाले सही फैसले लंबे समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति को कैंसर होने या न होने का फैसला केवल उसकी जीवनशैली से नहीं किया जा सकता और किसी भी लक्षण या जोखिम की स्थिति में डॉक्टर की सलाह ही सबसे महत्वपूर्ण है।

  • आईने में चेहरा गौर से देखिए, कहीं शरीर कोई खतरे का संकेत तो नहीं दे रहा? इन बदलावों पर तुरंत दें ध्यान

    आईने में चेहरा गौर से देखिए, कहीं शरीर कोई खतरे का संकेत तो नहीं दे रहा? इन बदलावों पर तुरंत दें ध्यान


    नई दिल्ली । चेहरा सिर्फ हमारी पहचान और खूबसूरती का हिस्सा नहीं है बल्कि कई बार यह शरीर के अंदर चल रही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के संकेत भी दे सकता है। आंखों का रंग बदलना हो या त्वचा का असामान्य रूप से पीला पड़ना होंठों का नीला दिखना या आंखों के आसपास लगातार सूजन रहना इन बदलावों को हमेशा केवल कॉस्मेटिक समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में होने वाले कई बदलाव चेहरे और आंखों पर दिखाई देने लगते हैं। हालांकि केवल चेहरे के लक्षणों के आधार पर किसी बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती लेकिन ऐसे बदलाव लगातार बने रहें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।

    सबसे पहले बात आंखों और त्वचा के पीले पड़ने की करें तो यह पीलिया का संकेत हो सकता है। शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने पर आंखों का सफेद हिस्सा और त्वचा पीली दिखाई देने लगती है। इसके पीछे हेपेटाइटिस लिवर से जुड़ी बीमारी पित्त की पथरी या पित्त की नलियों से जुड़ी समस्या समेत कई कारण हो सकते हैं। कई मामलों में इसके साथ पेशाब का रंग गहरा और मल का रंग सामान्य से हल्का भी दिखाई दे सकता है। इसलिए आंखों में अचानक पीलापन नजर आए तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है।

    इसी तरह चेहरे या त्वचा का रंग सामान्य से ज्यादा फीका या पीला नजर आना भी शरीर में आयरन की कमी से जुड़े एनीमिया का संकेत हो सकता है। आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी होता है और हीमोग्लोबिन शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर त्वचा के रंग में बदलाव के साथ लगातार थकान कमजोरी या थोड़ी मेहनत में सांस फूलने जैसी समस्या हो रही है तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

    चेहरे और होंठों का नीला पड़ना भी गंभीर संकेत हो सकता है। होंठ जीभ या चेहरे का अचानक नीला दिखना सायनोसिस कहलाता है और यह रक्त में ऑक्सीजन की कमी या रक्त संचार से जुड़ी परेशानी की ओर इशारा कर सकता है। फेफड़ों की बीमारी वायुमार्ग में रुकावट कुछ हृदय संबंधी समस्याएं या रक्त प्रवाह में बाधा इसके संभावित कारणों में शामिल हो सकते हैं। ऐसा बदलाव अचानक दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

    आंखों की पलकों के आसपास छोटे पीले या पीले-सफेद उभार भी ध्यान देने लायक होते हैं। इन्हें जैंथेलाज्मा कहा जाता है और ये कुछ लोगों में बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल से जुड़े हो सकते हैं। ऐसे संकेत दिखाई देने पर डॉक्टर की सलाह से लिपिड प्रोफाइल जैसी जांच कराई जा सकती है।

    चेहरे पर लगातार सूजन भी शरीर में किसी गड़बड़ी का संकेत हो सकती है। आंखों के आसपास सूजन कई कारणों से हो सकती है और कुछ मामलों में यह किडनी से जुड़ी समस्याओं में भी देखी जाती है। वहीं चेहरे का फूला हुआ दिखना अंडरएक्टिव थायरॉयड जैसी स्थितियों से जुड़ा हो सकता है। दूसरी ओर एलर्जी या किसी दवा की प्रतिक्रिया के कारण भी चेहरे और आंखों के आसपास सूजन आ सकती है।

    खास बात यह है कि चेहरे में दिखने वाले हर बदलाव का मतलब किसी गंभीर बीमारी से नहीं होता। मौसम त्वचा की सामान्य स्थिति एलर्जी खानपान या दूसरी वजहों से भी बदलाव हो सकते हैं। लेकिन अगर कोई असामान्य बदलाव अचानक दिखाई दे लगातार बना रहे या उसके साथ कमजोरी सांस लेने में परेशानी दर्द अथवा अन्य लक्षण भी मौजूद हों तो खुद से बीमारी का अनुमान लगाने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना सबसे सुरक्षित तरीका है। आईना बीमारी की पुष्टि नहीं करता लेकिन शरीर के संकेतों पर समय रहते ध्यान देने में जरूर मदद कर सकता है।

  • रात की अधूरी नींद दिनभर बिगाड़ सकती है दिमाग की चाल, बढ़ सकता है तनाव और कई बीमारियों का खतरा

    रात की अधूरी नींद दिनभर बिगाड़ सकती है दिमाग की चाल, बढ़ सकता है तनाव और कई बीमारियों का खतरा


    नई दिल्ली । नींद हमारे शरीर और दिमाग को आराम देने के साथ अगले दिन बेहतर तरीके से काम करने के लिए तैयार करती है। यही वजह है कि पर्याप्त नींद को स्वस्थ जीवनशैली का बेहद जरूरी हिस्सा माना जाता है। अगर रात की नींद बार-बार अधूरी रह रही है तो इसका असर सिर्फ सुबह की थकान या दिनभर की सुस्ती तक सीमित नहीं रहता बल्कि धीरे-धीरे व्यक्ति के व्यवहार याददाश्त एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगता है। गुस्सा जल्दी आना छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन महसूस होना किसी काम पर ध्यान केंद्रित न कर पाना और जरूरी बातें भूल जाना कई बार नींद पूरी न होने से भी जुड़ा हो सकता है।

    एक रात नींद कम होने पर अगले दिन थकान सिरदर्द सुस्ती और काम करने में परेशानी महसूस होना सामान्य हो सकता है। कभी-कभार ऐसा होने पर आमतौर पर ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं होती लेकिन जब नींद की कमी लगातार बनी रहती है तो इसका असर रोजमर्रा की कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। व्यक्ति को छोटे-छोटे फैसले लेने में भी परेशानी हो सकती है और पढ़ाई या काम के दौरान ध्यान भटकने की समस्या बढ़ सकती है। लंबे समय तक पर्याप्त नींद न मिलने की स्थिति में शरीर और दिमाग दोनों पर दबाव बढ़ता है।

    नींद की कमी का सीधा असर व्यवहार पर भी दिखाई दे सकता है। पर्याप्त आराम न मिलने पर व्यक्ति सामान्य परिस्थितियों में भी ज्यादा चिड़चिड़ा हो सकता है और छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है। भावनाओं को नियंत्रित करना भी मुश्किल महसूस हो सकता है। यही समस्या अगर लंबे समय तक जारी रहे तो तनाव और बेचैनी बढ़ सकती है। नींद और मानसिक स्वास्थ्य का संबंध काफी गहरा माना जाता है और लगातार नींद की समस्या रहने पर चिंता तथा अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का जोखिम भी बढ़ सकता है।

    याददाश्त और एकाग्रता पर भी नींद की कमी का असर पड़ता है। रात में शरीर और दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिलने पर अगले दिन किसी काम पर ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है। चीजें याद रखने में दिक्कत हो सकती है और काम या पढ़ाई का प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। बच्चों और किशोरों के लिए पर्याप्त नींद विशेष रूप से जरूरी है क्योंकि नींद उनकी सीखने की क्षमता ध्यान याददाश्त और व्यवहार से जुड़ी होती है। इसलिए बच्चों में लगातार नींद की परेशानी को केवल आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    कम नींद का असर केवल मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। लंबे समय तक पर्याप्त नींद न लेने को वजन बढ़ने मधुमेह और हृदय स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों से भी जोड़ा जाता है। कुछ लोगों को रात में सोने में परेशानी होती है जबकि कुछ लोग पर्याप्त समय बिस्तर पर रहने के बाद भी सुबह तरोताजा महसूस नहीं करते। कुछ नींद संबंधी विकारों में रात के समय सांस लेने में रुकावट या सांस के अनियमित होने जैसी समस्या भी हो सकती है। ऐसे मामलों में व्यक्ति को पर्याप्त समय सोने के बावजूद अच्छी गुणवत्ता वाली नींद नहीं मिल पाती।

    कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। अगर गाड़ी चलाते समय बार-बार झपकी आने लगे टीवी देखते या किताब पढ़ते समय थोड़ी देर में ही नींद आने लगे दिन के समय बहुत ज्यादा नींद महसूस हो काम या पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाए या चीजें याद रखने में पहले से ज्यादा परेशानी होने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसी तरह छोटी-छोटी बातों पर भावनात्मक प्रतिक्रिया बढ़ना और काम करने की क्षमता में कमी आना भी लगातार खराब नींद के संकेत हो सकते हैं।

    इसलिए नींद को केवल आराम का समय समझने के बजाय स्वास्थ्य की बुनियादी जरूरत मानना जरूरी है। अगर रात में लगातार सोने में परेशानी हो रही है या पर्याप्त समय सोने के बाद भी दिनभर अत्यधिक नींद और थकान बनी रहती है तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। समय रहते नींद से जुड़ी समस्या के कारणों की पहचान करने और जरूरी सुधार करने से रोजमर्रा की कार्यक्षमता मानसिक संतुलन और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

  • रोज योग करते हैं फिर भी नहीं दिख रहा असर तो अपनाइए सही नियम बढ़ेगी ऊर्जा मिलेगा बेहतर स्वास्थ्य

    रोज योग करते हैं फिर भी नहीं दिख रहा असर तो अपनाइए सही नियम बढ़ेगी ऊर्जा मिलेगा बेहतर स्वास्थ्य


    नई दिल्ली। योग भारत की प्राचीन जीवन पद्धति है जो केवल शरीर को स्वस्थ रखने तक सीमित नहीं है बल्कि मानसिक शांति आत्मिक संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली का भी आधार मानी जाती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लाखों लोग योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं लेकिन कई लोग सही नियमों की जानकारी के बिना योग करते हैं जिसकी वजह से उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। योग का वास्तविक फायदा तभी मिलता है जब इसे सही समय सही स्थान और सही विधि से किया जाए।

    योग करने का सबसे उपयुक्त समय सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के आसपास माना जाता है। इस समय वातावरण शुद्ध रहता है और शरीर तथा मन दोनों अधिक सक्रिय होते हैं। यदि सुबह समय न मिल पाए तो शाम को भी योग किया जा सकता है लेकिन भोजन के कम से कम तीन से चार घंटे बाद ही अभ्यास करना चाहिए। भरे पेट योग करने से शरीर पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है और कई बार पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।

    योग हमेशा शांत स्वच्छ और हवादार स्थान पर करना चाहिए। खुली हवा में किया गया योग शरीर को अधिक ऑक्सीजन उपलब्ध कराता है जिससे फेफड़े बेहतर तरीके से काम करते हैं। योग करते समय ढीले और आरामदायक सूती कपड़े पहनना सबसे अच्छा माना जाता है ताकि शरीर की गतिविधियों में किसी तरह की रुकावट न आए।

    योग शुरू करने से पहले कुछ मिनट गहरी सांस लेकर शरीर और मन को शांत करना चाहिए। इसके बाद हल्के वार्मअप से मांसपेशियों को तैयार करें ताकि चोट लगने की संभावना कम हो जाए। किसी भी आसन को जल्दबाजी में करने की बजाय धीरे धीरे और पूरी एकाग्रता के साथ करना चाहिए। योग प्रतियोगिता नहीं बल्कि संतुलन और संयम का अभ्यास है इसलिए अपनी क्षमता से अधिक शरीर पर दबाव नहीं डालना चाहिए।

    योग के दौरान सांसों का विशेष महत्व होता है। प्रत्येक आसन में सांस लेने और छोड़ने की सही प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है क्योंकि प्राणायाम और नियंत्रित श्वास शरीर में ऊर्जा का संचार करती है। यदि सांसों पर नियंत्रण सही रहेगा तो योग का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है और मानसिक तनाव भी तेजी से कम होता है।

    किसी भी गंभीर बीमारी उच्च रक्तचाप हृदय रोग गर्भावस्था या हाल ही में हुई सर्जरी की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही योग करना चाहिए। कुछ कठिन आसनों का अभ्यास प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में करना अधिक सुरक्षित माना जाता है। गलत तरीके से किया गया योग लाभ की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है।

    योग करने के बाद तुरंत भारी भोजन नहीं करना चाहिए। पहले कुछ मिनट शवासन में आराम करें ताकि शरीर सामान्य अवस्था में लौट सके। इसके बाद हल्का गुनगुना पानी या पौष्टिक आहार लिया जा सकता है। योग के साथ संतुलित भोजन पर्याप्त नींद और सकारात्मक सोच भी जरूरी है क्योंकि स्वस्थ जीवन केवल आसनों से नहीं बल्कि अच्छी दिनचर्या से बनता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित और अनुशासित तरीके से किया गया योग शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है मानसिक तनाव कम करता है पाचन सुधारता है हृदय को स्वस्थ रखता है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार करता है। यदि योग को रोजमर्रा की आदत बना लिया जाए और उसके मूल नियमों का पालन किया जाए तो यह केवल बीमारी से बचाने का माध्यम नहीं बल्कि संपूर्ण स्वस्थ और संतुलित जीवन की मजबूत नींव बन सकता है।

  • फिट दिखना नहीं है स्वस्थ दिल की गारंटी ICMR की रिपोर्ट में सामने आई भारतीयों के कोलेस्ट्रॉल की चौंकाने वाली सच्चाई

    फिट दिखना नहीं है स्वस्थ दिल की गारंटी ICMR की रिपोर्ट में सामने आई भारतीयों के कोलेस्ट्रॉल की चौंकाने वाली सच्चाई


    नई दिल्ली । भारत में हृदय रोग तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हो चुके हैं और अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक नई स्टडी ने इस खतरे को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। अध्ययन के अनुसार देश के लगभग 10 में से 9 वयस्क किसी न किसी प्रकार की असामान्य कोलेस्ट्रॉल समस्या से प्रभावित हैं। यह स्थिति केवल बुजुर्गों या अधिक वजन वाले लोगों तक सीमित नहीं है बल्कि कम उम्र के युवा और सामान्य दिखने वाले स्वस्थ लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ नियमित स्वास्थ्य जांच और बेहतर जीवनशैली अपनाने पर लगातार जोर दे रहे हैं।

    इस अध्ययन में देशभर के 23665 लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में पाया गया कि लगभग 87 प्रतिशत से अधिक लोगों में रक्त में वसा का स्तर सामान्य नहीं था। किसी में खराब कोलेस्ट्रॉल अधिक मिला तो किसी में ट्राइग्लिसराइड्स बढ़े हुए पाए गए जबकि बड़ी संख्या में लोगों में अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से कम था। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहने पर हृदय रोग हार्ट अटैक स्ट्रोक और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा सकती है।

    अध्ययन का सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि 30 से 39 वर्ष की आयु वर्ग में यह समस्या सबसे अधिक देखने को मिली। इसका मतलब है कि जिस उम्र में लोग अपने करियर और परिवार की जिम्मेदारियों में सबसे अधिक सक्रिय होते हैं उसी समय उनके दिल की सेहत सबसे बड़े खतरे का सामना कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली फास्ट फूड शारीरिक गतिविधि की कमी तनाव और अनियमित दिनचर्या इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में असामान्य कोलेस्ट्रॉल की समस्या अधिक पाई गई लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति भी बहुत अलग नहीं रही। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह समस्या अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई बल्कि पूरे देश में तेजी से फैल रही है। महिलाओं में भी पुरुषों की तुलना में यह समस्या अधिक दर्ज की गई जिससे महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत महसूस की जा रही है।

    विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि केवल मोटापा मधुमेह या उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों में ही नहीं बल्कि ऐसे लोगों में भी असामान्य कोलेस्ट्रॉल पाया गया जो देखने में पूरी तरह स्वस्थ थे और जिन्हें पहले से कोई बड़ी बीमारी नहीं थी। इससे यह धारणा भी टूटती है कि केवल अधिक वजन वाले लोगों को ही हृदय रोग का खतरा होता है।

    डॉक्टरों के अनुसार समय समय पर लिपिड प्रोफाइल जांच कराना बेहद जरूरी है। इस साधारण रक्त जांच से कुल कोलेस्ट्रॉल अच्छे कोलेस्ट्रॉल खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर आसानी से पता चल जाता है। यदि शुरुआत में ही गड़बड़ी का पता चल जाए तो खानपान में सुधार नियमित व्यायाम वजन नियंत्रित रखने धूम्रपान और शराब से दूरी बनाने तथा आवश्यकता पड़ने पर दवा के जरिए इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

    दिल को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना कम से कम तीस मिनट व्यायाम करना हरी सब्जियां फल साबुत अनाज और फाइबर युक्त भोजन लेना तले भुने और अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थों से बचना पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना बेहद आवश्यक माना जाता है। साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहना भी उतना ही जरूरी है ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता चल सके।

    स्वस्थ जीवन केवल बाहरी फिटनेस से नहीं बल्कि शरीर के भीतर संतुलित स्वास्थ्य से बनता है। इसलिए यदि आप खुद को पूरी तरह स्वस्थ मानते हैं तब भी समय समय पर कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना और संतुलित जीवनशैली अपनाना आपके दिल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।

  • फिट दिखना नहीं है स्वस्थ दिल की गारंटी ICMR की रिपोर्ट में सामने आई भारतीयों के कोलेस्ट्रॉल की चौंकाने वाली सच्चाई

    फिट दिखना नहीं है स्वस्थ दिल की गारंटी ICMR की रिपोर्ट में सामने आई भारतीयों के कोलेस्ट्रॉल की चौंकाने वाली सच्चाई


    नई दिल्ली । भारत में हृदय रोग तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हो चुके हैं और अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक नई स्टडी ने इस खतरे को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। अध्ययन के अनुसार देश के लगभग 10 में से 9 वयस्क किसी न किसी प्रकार की असामान्य कोलेस्ट्रॉल समस्या से प्रभावित हैं। यह स्थिति केवल बुजुर्गों या अधिक वजन वाले लोगों तक सीमित नहीं है बल्कि कम उम्र के युवा और सामान्य दिखने वाले स्वस्थ लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ नियमित स्वास्थ्य जांच और बेहतर जीवनशैली अपनाने पर लगातार जोर दे रहे हैं।

    इस अध्ययन में देशभर के 23665 लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में पाया गया कि लगभग 87 प्रतिशत से अधिक लोगों में रक्त में वसा का स्तर सामान्य नहीं था। किसी में खराब कोलेस्ट्रॉल अधिक मिला तो किसी में ट्राइग्लिसराइड्स बढ़े हुए पाए गए जबकि बड़ी संख्या में लोगों में अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से कम था। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहने पर हृदय रोग हार्ट अटैक स्ट्रोक और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा सकती है।

    अध्ययन का सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि 30 से 39 वर्ष की आयु वर्ग में यह समस्या सबसे अधिक देखने को मिली। इसका मतलब है कि जिस उम्र में लोग अपने करियर और परिवार की जिम्मेदारियों में सबसे अधिक सक्रिय होते हैं उसी समय उनके दिल की सेहत सबसे बड़े खतरे का सामना कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली फास्ट फूड शारीरिक गतिविधि की कमी तनाव और अनियमित दिनचर्या इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में असामान्य कोलेस्ट्रॉल की समस्या अधिक पाई गई लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति भी बहुत अलग नहीं रही। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह समस्या अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई बल्कि पूरे देश में तेजी से फैल रही है। महिलाओं में भी पुरुषों की तुलना में यह समस्या अधिक दर्ज की गई जिससे महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत महसूस की जा रही है।

    विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि केवल मोटापा मधुमेह या उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों में ही नहीं बल्कि ऐसे लोगों में भी असामान्य कोलेस्ट्रॉल पाया गया जो देखने में पूरी तरह स्वस्थ थे और जिन्हें पहले से कोई बड़ी बीमारी नहीं थी। इससे यह धारणा भी टूटती है कि केवल अधिक वजन वाले लोगों को ही हृदय रोग का खतरा होता है।

    डॉक्टरों के अनुसार समय समय पर लिपिड प्रोफाइल जांच कराना बेहद जरूरी है। इस साधारण रक्त जांच से कुल कोलेस्ट्रॉल अच्छे कोलेस्ट्रॉल खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर आसानी से पता चल जाता है। यदि शुरुआत में ही गड़बड़ी का पता चल जाए तो खानपान में सुधार नियमित व्यायाम वजन नियंत्रित रखने धूम्रपान और शराब से दूरी बनाने तथा आवश्यकता पड़ने पर दवा के जरिए इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

    दिल को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना कम से कम तीस मिनट व्यायाम करना हरी सब्जियां फल साबुत अनाज और फाइबर युक्त भोजन लेना तले भुने और अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थों से बचना पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना बेहद आवश्यक माना जाता है। साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहना भी उतना ही जरूरी है ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता चल सके।

    स्वस्थ जीवन केवल बाहरी फिटनेस से नहीं बल्कि शरीर के भीतर संतुलित स्वास्थ्य से बनता है। इसलिए यदि आप खुद को पूरी तरह स्वस्थ मानते हैं तब भी समय समय पर कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना और संतुलित जीवनशैली अपनाना आपके दिल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।

  • बारिश के मौसम में स्वास्थ्य को रखना है सुरक्षित तो अपनाएं ये आसान उपाय छोटी सी सावधानी बचाएगी बड़ी बीमारियों से

    बारिश के मौसम में स्वास्थ्य को रखना है सुरक्षित तो अपनाएं ये आसान उपाय छोटी सी सावधानी बचाएगी बड़ी बीमारियों से


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं कई तरह की मौसमी बीमारियों का खतरा भी साथ लेकर आता है। बारिश के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया वायरस और मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है। ऐसे में यदि खानपान स्वच्छता और दिनचर्या पर ध्यान न दिया जाए तो वायरल बुखार डेंगू मलेरिया टाइफाइड फूड पॉइजनिंग और पेट से जुड़ी कई समस्याएं आसानी से घेर सकती हैं। इसलिए इस मौसम में स्वास्थ्य की देखभाल को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी हो जाता है।

    बारिश के दिनों में सबसे पहले स्वच्छ भोजन और साफ पानी का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पीना बेहतर माना जाता है। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ और कटे हुए फल खाने से बचना चाहिए क्योंकि इनमें संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। घर का ताजा और गर्म भोजन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।

    मानसून के दौरान रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखना बेहद आवश्यक है। इसके लिए संतुलित आहार का सेवन करें जिसमें हरी सब्जियां मौसमी फल दालें सूखे मेवे और पर्याप्त प्रोटीन शामिल हो। विटामिन सी से भरपूर फल शरीर को संक्रमण से लड़ने में सहायता करते हैं। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है ताकि शरीर हाइड्रेटेड बना रहे।

    बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में नहीं रहना चाहिए। घर पहुंचते ही सूखे कपड़े पहनें और शरीर को अच्छी तरह पोंछ लें। गीले जूते और मोजे पहनकर रहने से फंगल संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पैरों की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें और उन्हें पूरी तरह सुखाकर ही जूते पहनें।

    मच्छरों से बचाव मानसून में सबसे जरूरी सावधानियों में से एक है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें क्योंकि यही मच्छरों के पनपने का सबसे बड़ा कारण बनता है। रात में मच्छरदानी का उपयोग करें और जरूरत पड़ने पर मच्छर भगाने वाले सुरक्षित उत्पादों का इस्तेमाल करें। यदि तेज बुखार शरीर दर्द या लगातार कमजोरी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

    बारिश के मौसम में नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि बाहर निकलना संभव न हो तो घर के अंदर हल्का व्यायाम योग या प्राणायाम किया जा सकता है। इससे शरीर सक्रिय रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। मानसिक तनाव कम करने के लिए भी नियमित दिनचर्या बनाए रखना लाभदायक होता है।

    बच्चों और बुजुर्गों को इस मौसम में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। उन्हें बारिश में भीगने से बचाएं और किसी भी तरह के संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी न करें। व्यक्तिगत स्वच्छता जैसे हाथ धोना साफ कपड़े पहनना और आसपास सफाई बनाए रखना संक्रमण से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
    बच्चों और बुजुर्गों को इस मौसम में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। उन्हें बारिश में भीगने से बचाएं और किसी भी तरह के संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी न करें। व्यक्तिगत स्वच्छता जैसे हाथ धोना साफ कपड़े पहनना और आसपास सफाई बनाए रखना संक्रमण से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

    मानसून का मौसम आनंद और ताजगी लेकर आता है लेकिन थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। यदि संतुलित आहार स्वच्छता नियमित व्यायाम और समय पर चिकित्सा सलाह को जीवनशैली का हिस्सा बना लिया जाए तो बारिश के पूरे मौसम का आनंद बिना किसी बीमारी के लिया जा सकता है। सावधानी ही इस मौसम में स्वस्थ रहने की सबसे बड़ी कुंजी है।