Tag: healthy lifestyle

  • एनर्जी ड्रिंक से मिलती है फुर्ती या बढ़ता है खतरा, रोज पीने से पहले जान लें शरीर पर होने वाले असर और जरूरी सावधानियां

    एनर्जी ड्रिंक से मिलती है फुर्ती या बढ़ता है खतरा, रोज पीने से पहले जान लें शरीर पर होने वाले असर और जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली। एनर्जी ड्रिंक आज युवाओं और कामकाजी लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। थकान महसूस होने पर तुरंत ऊर्जा पाने और लंबे समय तक एक्टिव रहने के लिए कई लोग इनका सेवन करते हैं। पढ़ाई के दौरान जागने से लेकर जिम और खेल गतिविधियों तक एनर्जी ड्रिंक का इस्तेमाल बढ़ गया है। इन पेय पदार्थों में आमतौर पर कैफीन के साथ चीनी और दूसरे उत्तेजक पदार्थ शामिल हो सकते हैं। इनकी वजह से कुछ समय के लिए व्यक्ति को अधिक सतर्क और ऊर्जावान महसूस हो सकता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एनर्जी ड्रिंक शरीर की थकान का स्थायी समाधान है।

    एनर्जी ड्रिंक में मौजूद कैफीन दिमाग और नर्वस सिस्टम को उत्तेजित करता है। इससे नींद कम महसूस हो सकती है और व्यक्ति कुछ समय के लिए ज्यादा एक्टिव नजर आ सकता है। इसी कारण लंबे समय तक काम करने या रात में पढ़ाई करने वाले लोग इनका सेवन करते हैं। हालांकि ज्यादा कैफीन लेने से बेचैनी घबराहट दिल की धड़कन तेज होना और नींद में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कैफीन का असर हर व्यक्ति पर अलग हो सकता है इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति को जितनी मात्रा आसानी से सहन हो जाती है जरूरी नहीं कि उतनी मात्रा सभी के लिए सुरक्षित हो।

    एनर्जी ड्रिंक में चीनी की मात्रा भी कई बार काफी अधिक हो सकती है। नियमित रूप से ज्यादा चीनी वाले पेय पदार्थों का सेवन वजन बढ़ने और दांतों से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है। यदि कोई व्यक्ति पहले से ही अधिक मीठे खाद्य पदार्थ और पेय ले रहा है तो एनर्जी ड्रिंक उसके कुल चीनी सेवन को और बढ़ा सकता है। इसलिए केवल पेय के नाम में एनर्जी शब्द देखकर इसे स्वास्थ्यवर्धक समझना सही नहीं है।

    खास सावधानी बच्चों और किशोरों को लेकर बरतनी चाहिए। कम उम्र में कैफीन का अधिक सेवन नींद और व्यवहार से जुड़ी परेशानियां पैदा कर सकता है। गर्भवती महिलाओं और कैफीन के प्रति संवेदनशील लोगों को भी ऐसे पेय पदार्थों का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर माना जाता है। इसी तरह जिन लोगों को दिल से जुड़ी समस्या है या जो किसी विशेष बीमारी की दवा ले रहे हैं उन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के अधिक कैफीन वाले पेय से बचना चाहिए।

    एनर्जी ड्रिंक और शराब को मिलाकर पीना भी जोखिम बढ़ा सकता है। कैफीन व्यक्ति को कुछ समय के लिए कम नशे में महसूस करा सकता है जबकि शराब का असर शरीर पर बना रहता है। इससे व्यक्ति अपनी वास्तविक स्थिति को कम आंक सकता है और जोखिम भरे फैसले ले सकता है। इसलिए दोनों को मिलाकर सेवन करना उचित नहीं माना जाता।

    अगर थकान दूर करनी है तो पर्याप्त नींद संतुलित भोजन पानी और नियमित शारीरिक गतिविधि ज्यादा बेहतर आधार हैं। एनर्जी ड्रिंक को रोजाना की आदत बनाने के बजाय कभी कभार भी सेवन करना हो तो लेबल पर कैफीन और चीनी की मात्रा जरूर देखनी चाहिए। किसी भी पेय को लेकर सबसे जरूरी बात उसकी मात्रा और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति है। यदि एनर्जी ड्रिंक लेने के बाद लगातार दिल की धड़कन तेज होना चक्कर घबराहट या अन्य असामान्य लक्षण महसूस हों तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

  • डायबिटीज के मरीज जरूर जान लें खाने के बाद 5 से 20 मिनट टहलने का क्या होता है असर रिसर्च में सामने आई जरूरी बातें

    डायबिटीज के मरीज जरूर जान लें खाने के बाद 5 से 20 मिनट टहलने का क्या होता है असर रिसर्च में सामने आई जरूरी बातें


    नई दिल्ली। आजकल की व्यस्त जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या तेजी से चिंता का विषय बन रही है। खासकर डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए भोजन के बाद ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में रोजमर्रा की दिनचर्या में एक छोटी सी आदत शामिल करके सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। यह आदत है खाना खाने के बाद कुछ देर टहलना। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार भोजन के बाद हल्की शारीरिक गतिविधि करने से शरीर को ग्लूकोज का इस्तेमाल करने में मदद मिलती है। हालांकि सवाल यह है कि आखिर 5 मिनट 10 मिनट या 20 मिनट में से कितनी देर चलना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

    भोजन करने के बाद शरीर खाने में मौजूद कार्बोहाइड्रेट को तोड़कर ग्लूकोज में बदलता है। इससे ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है। इस दौरान जब व्यक्ति लगातार बैठा रहता है तो मांसपेशियों की गतिविधि कम होती है। वहीं टहलने से मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और वे ऊर्जा के लिए ग्लूकोज का इस्तेमाल करने लगती हैं। इस प्रक्रिया से भोजन के बाद ब्लड शुगर में होने वाली बढ़ोतरी को सीमित करने में मदद मिल सकती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीच बीच में उठकर चलने की सलाह देते हैं।

    अगर आपके पास समय कम है तो भोजन के बाद 5 मिनट की हल्की वॉक से शुरुआत की जा सकती है। यह उन लोगों के लिए आसान विकल्प हो सकता है जो ऑफिस में काम करते हैं या जिनकी दिनचर्या काफी व्यस्त रहती है। कुछ मिनट चलने से भी शरीर को निष्क्रिय रहने के मुकाबले गतिविधि मिलती है। हालांकि इसका असर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति भोजन की मात्रा और ग्लूकोज नियंत्रण पर निर्भर कर सकता है।

    वहीं 10 मिनट की वॉक उन लोगों के लिए उपयोगी दिनचर्या बन सकती है जो भोजन के बाद थोड़ा अधिक समय निकाल सकते हैं। सामान्य गति से टहलने से मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं और भोजन के बाद ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। इसके लिए जरूरी नहीं कि तेज गति से चला जाए। आरामदायक चाल से नियमित रूप से चलना भी शुरुआत के लिए अच्छा विकल्प है।

    यदि आप आराम से 20 मिनट तक टहल सकते हैं तो यह आपकी दैनिक शारीरिक गतिविधि बढ़ाने में योगदान दे सकता है। नियमित वॉक से ब्लड शुगर नियंत्रण के साथ हृदय स्वास्थ्य और फिटनेस को भी लाभ मिल सकता है। हालांकि केवल 20 मिनट चलने से हर व्यक्ति का ब्लड शुगर निश्चित रूप से सामान्य हो जाएगा ऐसा नहीं कहा जा सकता। वॉक की अवधि और गति का चुनाव अपनी क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार करना चाहिए।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी एक दिन लंबी वॉक करने के बजाय नियमित रूप से चलने की आदत विकसित की जाए। भोजन के बाद हल्की वॉक करना आसान शुरुआत हो सकती है। इसके साथ संतुलित आहार पर्याप्त नींद और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का सेवन भी जरूरी है। डायबिटीज के मरीज अपनी दवा या इंसुलिन की मात्रा केवल वॉक शुरू करने के आधार पर खुद से न बदलें। यदि चलने के दौरान चक्कर कमजोरी या पसीना आने जैसे लक्षण महसूस हों तो रुककर ब्लड शुगर की जांच और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। इस तरह अपनी दिनचर्या में छोटी लेकिन नियमित गतिविधि शामिल करके ब्लड शुगर नियंत्रण की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

  • सेहतमंद जिंदगी के लिए जरूरी आदतें, दिनचर्या में शामिल करें ये आसान तरीके

    सेहतमंद जिंदगी के लिए जरूरी आदतें, दिनचर्या में शामिल करें ये आसान तरीके


    नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अपनी सेहत का ध्यान रखना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। काम का दबाव अनियमित खानपान कम नींद और शारीरिक गतिविधियों की कमी धीरे धीरे शरीर पर असर डाल सकती है। ऐसे में Health Care को केवल बीमारी होने के बाद इलाज तक सीमित रखने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना जरूरी है। अच्छी सेहत के लिए सबसे पहले संतुलित खानपान पर ध्यान देना चाहिए। भोजन में हरी सब्जियां मौसमी फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन अत्यधिक मीठा और जरूरत से ज्यादा नमक लेने से बचना भी जरूरी है।

    शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना भी महत्वपूर्ण है। पानी की जरूरत उम्र मौसम शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग अलग हो सकती है। इसलिए पूरे दिन शरीर में पानी की कमी न होने दें। इसके साथ ही रोजाना कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए निकालना चाहिए। तेज चलना योग हल्की एक्सरसाइज साइकिलिंग या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य गतिविधि शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है। लंबे समय तक लगातार बैठकर काम करने वालों को बीच बीच में उठकर चलना भी चाहिए।

    अच्छी सेहत के लिए नींद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर तथा दिमाग दोनों के लिए जरूरी है। सोने और जागने का समय लगभग निश्चित रखने की कोशिश करें। रात में सोने से पहले मोबाइल या अन्य स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल कम करना भी नींद की गुणवत्ता के लिए मददगार हो सकता है।

    मानसिक स्वास्थ्य भी Health Care का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लगातार तनाव महसूस होने पर अपनी दिनचर्या में आराम मनोरंजन परिवार के साथ समय और पसंदीदा गतिविधियों के लिए जगह बनाएं। जरूरत महसूस होने पर किसी भरोसेमंद व्यक्ति या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना उचित कदम हो सकता है।

    इसके अलावा समय समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी उपयोगी है। खासकर यदि किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है या परिवार में किसी बीमारी का इतिहास रहा है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच करानी चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो खुद से दवा लेने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।

    कुल मिलाकर अच्छी सेहत किसी एक दिन की कोशिश से नहीं बल्कि रोजाना अपनाई गई छोटी छोटी आदतों से बनती है। संतुलित भोजन पर्याप्त नींद नियमित शारीरिक गतिविधि तनाव को नियंत्रित रखने की कोशिश और समय पर स्वास्थ्य सलाह लेने जैसी आदतें स्वस्थ जीवनशैली का आधार बन सकती हैं।

  • सर्दियों में बढ़ जाता है बीमारियों का खतरा हेल्दी रहने के लिए रोजमर्रा की इन आदतों को बनाएं अपनी ताकत

    सर्दियों में बढ़ जाता है बीमारियों का खतरा हेल्दी रहने के लिए रोजमर्रा की इन आदतों को बनाएं अपनी ताकत


    नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम अपने साथ ठंडक और सुहाना मौसम लेकर आता है लेकिन इस दौरान सेहत को लेकर थोड़ी अतिरिक्त सावधानी रखना भी जरूरी हो जाता है। तापमान कम होने पर कई लोगों की दिनचर्या बदल जाती है और शारीरिक गतिविधियां भी कम हो जाती हैं। ऐसे में सर्दी जुकाम गले में खराश और सांस से जुड़ी परेशानियों से बचने के लिए अपनी रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। अच्छी डाइट पर्याप्त नींद नियमित गतिविधि और साफ सफाई जैसी आदतें सर्दियों में शरीर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं।

    ठंड के मौसम में खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। भोजन में मौसमी सब्जियों फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को शामिल करना बेहतर रहता है। शरीर को गर्म रखने के लिए लोग अक्सर बहुत ज्यादा तला भुना भोजन खाने लगते हैं लेकिन इससे बचना चाहिए। संतुलित और पौष्टिक भोजन शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करता है। आंवला अमरूद संतरा और अन्य मौसमी फल भी डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।

    सर्दियों में पानी पीने की आदत कम हो जाती है लेकिन शरीर को इस मौसम में भी पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। प्यास कम लगने के बावजूद समय समय पर पानी पीते रहना चाहिए। गुनगुना पानी कई लोगों को आरामदायक लग सकता है लेकिन पानी की मात्रा व्यक्ति की उम्र गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। चाय और कॉफी को पानी का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

    ठंड के कारण लोग सुबह उठकर व्यायाम करने से बचते हैं लेकिन शरीर को सक्रिय रखना जरूरी है। मौसम अनुकूल हो तो हल्की वॉक स्ट्रेचिंग योग या अपनी क्षमता के अनुसार दूसरी शारीरिक गतिविधियां की जा सकती हैं। नियमित गतिविधि शरीर को सक्रिय रखने के साथ मूड को बेहतर बनाए रखने में भी मदद कर सकती है। बहुत ज्यादा ठंड या खराब मौसम में घर के भीतर हल्की एक्सरसाइज करना भी विकल्प हो सकता है।

    सर्दियों में त्वचा की देखभाल भी जरूरी है। ठंडी और शुष्क हवा के कारण त्वचा में रूखापन बढ़ सकता है। नहाने के बाद मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है। बहुत गर्म पानी से लंबे समय तक नहाने से त्वचा की प्राकृतिक नमी कम हो सकती है इसलिए सामान्य या हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल बेहतर रहता है। होंठों और हाथों की त्वचा को भी मॉइस्चराइज रखना चाहिए।

    ठंड के मौसम में पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है। देर रात तक जागने और लगातार स्क्रीन देखने की आदत नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। रोज लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करनी चाहिए। अच्छी नींद शरीर और दिमाग दोनों को आराम देने में मदद करती है।

    सर्दियों में साफ सफाई को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोना और खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना संक्रमण फैलने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर विशेष सावधानी बरतना भी उपयोगी है। बुजुर्ग छोटे बच्चों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्या वाले लोगों को ठंड से बचाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    अगर लगातार बुखार सांस लेने में परेशानी सीने में दर्द बहुत ज्यादा कमजोरी या कोई अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दे तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सर्दियों में स्वस्थ रहने का सबसे अच्छा तरीका किसी एक नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित भोजन नियमित गतिविधि पर्याप्त नींद स्वच्छता और मौसम के अनुसार सावधानी को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना है।

  • दवाओं से पहले जीवनशैली पर दें ध्यान स्वस्थ शरीर और खुशहाल जीवन के लिए अपनाएं ये जरूरी आदतें

    दवाओं से पहले जीवनशैली पर दें ध्यान स्वस्थ शरीर और खुशहाल जीवन के लिए अपनाएं ये जरूरी आदतें


    नई दिल्ली।
    अच्छी सेहत हर व्यक्ति की सबसे बड़ी जरूरत है लेकिन व्यस्त जीवनशैली में लोग अक्सर अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं। काम का तनाव अनियमित खानपान कम नींद और शारीरिक गतिविधि की कमी धीरे धीरे शरीर पर असर डाल सकती है। स्वस्थ रहने के लिए हमेशा कठिन नियम अपनाने की जरूरत नहीं होती बल्कि रोजमर्रा की कुछ आसान आदतों में बदलाव करके भी शरीर को बेहतर तरीके से स्वस्थ रखा जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता किसी बीमारी के बाद नहीं बल्कि पहले से शुरू होनी चाहिए।

    स्वस्थ रहने के लिए संतुलित भोजन सबसे अहम माना जाता है। रोज के भोजन में हरी सब्जियां मौसमी फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। अधिक तला हुआ भोजन ज्यादा नमक और अत्यधिक मीठी चीजों का सेवन सीमित रखना बेहतर होता है। पैकेज्ड और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की जगह ताजा और घर का बना भोजन प्राथमिकता देने से खानपान को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है। भोजन की मात्रा के साथ खाने का समय भी नियमित रखना जरूरी है।

    पर्याप्त पानी पीना भी शरीर के लिए बेहद जरूरी है। शरीर में पानी की कमी होने पर थकान कमजोरी और सिरदर्द जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं। इसलिए दिनभर अपनी जरूरत के अनुसार पानी पीते रहना चाहिए। हालांकि हर व्यक्ति की पानी की जरूरत उसकी उम्र मौसम शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।

    शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना भी जरूरी है। रोज कुछ समय पैदल चलना योग करना हल्की एक्सरसाइज करना या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य गतिविधि करना शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत से बचना भी महत्वपूर्ण है। काम के बीच छोटे ब्रेक लेकर कुछ देर चलना शरीर के लिए बेहतर हो सकता है।

    स्वास्थ्य के लिए नींद को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर तथा दिमाग दोनों के लिए जरूरी है। देर रात तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल करने से नींद प्रभावित हो सकती है इसलिए सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करने की कोशिश करनी चाहिए। तनाव को नियंत्रित करना भी स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा है। ध्यान योग किताब पढ़ना या अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना मानसिक तनाव कम करने में मदद कर सकता है।

    इसके अलावा व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना भी जरूरी है। हाथों की नियमित सफाई साफ कपड़े और आसपास की स्वच्छता कई संक्रमणों से बचाव में मदद कर सकती है। समय समय पर सामान्य स्वास्थ्य जांच कराना भी उपयोगी हो सकता है ताकि किसी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।

    ध्यान रखना चाहिए कि ये सामान्य स्वास्थ्य सुझाव हैं और किसी बीमारी का इलाज नहीं हैं। अगर शरीर में लगातार कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें या पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। स्वस्थ जीवन का आधार संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद मानसिक शांति और साफ सफाई जैसी छोटी लेकिन महत्वपूर्ण आदतें हैं। इन्हें रोज की जिंदगी का हिस्सा बनाकर लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

  • बीमारी से बचना है तो आज से बदलें अपनी दिनचर्या: सही खानपान नियमित एक्सरसाइज पर्याप्त नींद और तनाव पर काबू रखने से ऐसे रखें अपनी सेहत का ख्याल

    बीमारी से बचना है तो आज से बदलें अपनी दिनचर्या: सही खानपान नियमित एक्सरसाइज पर्याप्त नींद और तनाव पर काबू रखने से ऐसे रखें अपनी सेहत का ख्याल


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम और जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। लंबे समय तक बैठकर काम करना अनियमित खानपान नींद की कमी तनाव और शारीरिक गतिविधि का कम होना धीरे धीरे शरीर पर असर डाल सकता है। अच्छी सेहत के लिए किसी एक दिन की मेहनत काफी नहीं होती बल्कि रोजमर्रा की आदतों में छोटे और लगातार बदलाव जरूरी होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार स्वस्थ खानपान नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद तंबाकू से दूरी और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल खुद की सेहत संभालने के अहम हिस्से हैं।

    स्वास्थ्य देखभाल की शुरुआत सबसे पहले भोजन से होती है। रोज के खाने में अलग अलग प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करना शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने में मदद करता है। साबुत अनाज दालें फल सब्जियां और जरूरत के अनुसार प्रोटीन के अच्छे स्रोत भोजन का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। दूसरी तरफ बहुत ज्यादा नमक चीनी अस्वास्थ्यकर वसा और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर माना जाता है। WHO के अनुसार स्वस्थ आहार पर्याप्तता संतुलन संयम और विविधता जैसे सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।

    इसके साथ शारीरिक गतिविधि को रोज की दिनचर्या में जगह देना बेहद जरूरी है। इसके लिए जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति जिम जाए। तेज चाल से चलना साइकिल चलाना तैरना योग करना खेलना या रोजमर्रा के कामों में सक्रिय रहना भी शारीरिक गतिविधि का हिस्सा हो सकता है। WHO के अनुसार वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि या उसके बराबर अधिक तीव्र गतिविधि करने की सलाह दी जाती है। जो लोग लंबे समय से सक्रिय नहीं हैं उन्हें अचानक बहुत ज्यादा व्यायाम करने के बजाय धीरे धीरे शुरुआत करनी चाहिए।

    स्वास्थ्य देखभाल में नींद को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए। देर रात तक मोबाइल चलाना लगातार काम करना और सोने का समय बदलते रहना शरीर की दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सोने और जागने का समय नियमित रखने की कोशिश करें। सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना और शांत वातावरण बनाना भी बेहतर नींद की आदत विकसित करने में मदद कर सकता है। अगर लंबे समय तक नींद से जुड़ी समस्या बनी रहती है तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

    मानसिक स्वास्थ्य भी शरीर की सेहत से अलग नहीं है। लगातार तनाव चिंता चिड़चिड़ापन या थकान महसूस होने पर व्यक्ति को अपने काम के बीच आराम और सामाजिक जुड़ाव के लिए समय निकालना चाहिए। परिवार और दोस्तों से बातचीत करना पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना स्वास्थ्य देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। खुद की देखभाल का मतलब यह नहीं है कि बीमारी होने पर डॉक्टर की जरूरत नहीं है। WHO भी स्पष्ट करता है कि self care स्वास्थ्य व्यवस्था और स्वास्थ्यकर्मियों की जगह नहीं लेती बल्कि उनकी देखभाल को बेहतर तरीके से पूरा करती है।

    तंबाकू से दूरी बनाना भी स्वास्थ्य सुरक्षा का बेहद महत्वपूर्ण कदम है। इसी तरह शराब के सेवन से बचना या उसे सीमित करना कई स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में मदद कर सकता है। जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर डायबिटीज या अन्य पुरानी बीमारी है उन्हें नियमित जांच और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं को अपनी मर्जी से बंद नहीं करना चाहिए। WHO की सलाह के मुताबिक जीवनशैली में बदलाव कई बीमारियों के प्रबंधन में मदद कर सकते हैं लेकिन कई स्थितियों में दवा और चिकित्सकीय निगरानी भी जरूरी रहती है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि स्वस्थ रहने के लिए किसी बड़े बदलाव का इंतजार न करें। रोज थोड़ी शारीरिक गतिविधि पौष्टिक भोजन पर्याप्त आराम तनाव को संभालने की कोशिश और समय पर चिकित्सकीय सलाह जैसी छोटी आदतें लंबे समय में बड़ा अंतर ला सकती हैं। अपने शरीर के संकेतों को समझना और लगातार बनी रहने वाली परेशानी को नजरअंदाज न करना भी उतना ही जरूरी है। स्वास्थ्य की सही देखभाल बीमारी के बाद शुरू नहीं होती बल्कि बीमारी से बचाव और बेहतर जीवनशैली की आदतों से पहले ही शुरू हो जाती है।

  • बारिश का मजा भी और सेहत की सुरक्षा भी, मानसून में खुद की देखभाल के लिए अपनाएं ये आसान और असरदार उपाय

    बारिश का मजा भी और सेहत की सुरक्षा भी, मानसून में खुद की देखभाल के लिए अपनाएं ये आसान और असरदार उपाय


    नई दिल्ली । बरसात का मौसम गर्मी से राहत लेकर आता है और हरियाली के साथ वातावरण को खुशनुमा बना देता है लेकिन इस मौसम में सेहत का खास ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी होता है। बारिश के दौरान हवा में नमी बढ़ जाती है और मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिलता है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी सर्दी खांसी बुखार पेट से जुड़ी परेशानी और त्वचा संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए मानसून का आनंद लेने के साथ साथ खुद की देखभाल पर ध्यान देना जरूरी है। सही खानपान साफ सफाई और रोजमर्रा की कुछ अच्छी आदतें अपनाकर इस मौसम में खुद को स्वस्थ और फिट रखा जा सकता है।

    बरसात के मौसम में सबसे पहले साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए क्योंकि जमा हुआ पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। बारिश में बाहर से आने के बाद गीले कपड़ों को तुरंत बदल देना चाहिए और शरीर को अच्छी तरह सुखाना चाहिए। लंबे समय तक गीले कपड़े पहनने से त्वचा में खुजली और फंगल संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पैरों को भी साफ और सूखा रखना जरूरी है क्योंकि मानसून में पैरों में संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है। बाहर से आने के बाद हाथ और पैरों को अच्छी तरह धोने की आदत स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है।

    इस मौसम में खानपान का भी विशेष महत्व होता है। बाहर का खुला और लंबे समय से रखा हुआ खाना खाने से बचना चाहिए। बारिश के दिनों में ताजा और घर का बना भोजन ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना जाता है। भोजन में फल सब्जियां दाल और अन्य पौष्टिक चीजों को शामिल करना चाहिए ताकि शरीर को जरूरी पोषण मिल सके। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है क्योंकि कई लोग ठंडे मौसम में पानी कम पीने लगते हैं। शरीर को हाइड्रेट रखना सेहत के लिए हर मौसम में जरूरी है। पीने के पानी और खाने की स्वच्छता का ध्यान रखना भी इस मौसम में महत्वपूर्ण होता है।

    मानसून में त्वचा की देखभाल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बढ़ी हुई नमी के कारण त्वचा चिपचिपी हो सकती है और कुछ लोगों को पिंपल्स या रैशेज की परेशानी हो सकती है। इसलिए चेहरे और शरीर को साफ रखना जरूरी है। त्वचा पर बहुत ज्यादा भारी उत्पादों का इस्तेमाल करने के बजाय अपनी स्किन टाइप के अनुसार हल्के और उपयुक्त उत्पादों का चयन किया जा सकता है। किसी भी नई स्किन प्रोडक्ट से एलर्जी या जलन महसूस होने पर उसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    बरसात के दिनों में पर्याप्त नींद और आराम भी जरूरी है। मौसम में बदलाव के कारण शरीर थका हुआ महसूस कर सकता है इसलिए रोजाना पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करनी चाहिए। हल्की एक्सरसाइज योग या घर पर स्ट्रेचिंग जैसी गतिविधियां शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती हैं। अगर बाहर बारिश हो रही हो तो घर के अंदर ही कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए निकालना बेहतर हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना भी सेल्फ केयर का महत्वपूर्ण हिस्सा है इसलिए अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना चाहिए।

    बारिश में भीगने का आनंद लेना गलत नहीं है लेकिन लंबे समय तक गीले रहने से बचना चाहिए। अगर बारिश में भीग जाएं तो घर पहुंचकर जल्द से जल्द सूखे कपड़े पहनें और शरीर को गर्म और आरामदायक रखें। किसी भी तरह के लगातार बुखार तेज कमजोरी सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। मानसून में छोटी छोटी सावधानियां अपनाकर न केवल बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है बल्कि पूरे मौसम का आनंद भी बेहतर तरीके से लिया जा सकता है। साफ सफाई पौष्टिक भोजन पर्याप्त पानी अच्छी नींद और सक्रिय दिनचर्या ही बरसात के मौसम में खुद की बेहतर देखभाल का सबसे आसान तरीका है।

  • हाई BP को हल्के में न लें! शरीर में बढ़ता दबाव इन वजहों से हो सकता है खतरनाक, जानें बचाव के आसान तरीके

    हाई BP को हल्के में न लें! शरीर में बढ़ता दबाव इन वजहों से हो सकता है खतरनाक, जानें बचाव के आसान तरीके


    नई दिल्ली । ब्लड प्रेशर यानी रक्तचाप का बढ़ना आज के समय में एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। कई बार लोगों को पता भी नहीं चलता कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते। इसी वजह से हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर भी कहा जाता है। सामान्य स्थिति में रक्तचाप शरीर में खून के प्रवाह को बनाए रखने के लिए जरूरी होता है लेकिन जब यह लंबे समय तक सामान्य स्तर से अधिक बना रहे तो हृदय और रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ सकता है।

    ब्लड प्रेशर बढ़ने की एक बड़ी वजह खराब लाइफस्टाइल हो सकती है। आजकल लोगों की दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि कम हो गई है और लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत बढ़ गई है। नियमित व्यायाम की कमी से वजन बढ़ सकता है और मोटापे के कारण हाई BP का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा खाने में ज्यादा नमक का सेवन भी कुछ लोगों में रक्तचाप बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। पैकेज्ड फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन में सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन सीमित रखना बेहतर माना जाता है।

    तनाव भी ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है। जब व्यक्ति लंबे समय तक तनाव में रहता है तो शरीर में ऐसे हार्मोन सक्रिय होते हैं जो कुछ समय के लिए हृदय की धड़कन और रक्तचाप बढ़ा सकते हैं। लगातार तनाव बना रहने पर यह समस्या और गंभीर हो सकती है। इसके साथ ही नींद पूरी न होना भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। नियमित रूप से कम नींद लेने वाले लोगों में हाई BP का खतरा बढ़ सकता है।

    धूम्रपान और तंबाकू का सेवन भी रक्त वाहिकाओं पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसी तरह अत्यधिक शराब का सेवन कुछ लोगों में रक्तचाप बढ़ने से जुड़ा हो सकता है। इसलिए BP को नियंत्रित रखने के लिए इन आदतों से दूरी बनाना महत्वपूर्ण है।

    कई बार हाई ब्लड प्रेशर के पीछे दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं या कुछ दवाएं भी कारण हो सकती हैं। किडनी से जुड़ी समस्याएं हार्मोन संबंधी परेशानियां और कुछ अन्य स्थितियां रक्तचाप को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति का BP बार बार बढ़ रहा है तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

    ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद और तनाव को कम करने वाली स्वस्थ आदतें अपनाना फायदेमंद हो सकता है। खाने में नमक की मात्रा सीमित रखना फल सब्जियां और साबुत अनाज जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना भी मददगार हो सकता है। साथ ही डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से BP की जांच करवानी चाहिए।

    अगर BP बहुत ज्यादा बढ़ जाए और इसके साथ तेज सिरदर्द सीने में दर्द सांस लेने में परेशानी कमजोरी बोलने में दिक्कत या दिखाई देने में परेशानी जैसे गंभीर लक्षण हों तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। हाई BP का सही कारण जानने और उचित उपचार के लिए चिकित्सकीय सलाह सबसे जरूरी है। यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है और किसी डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह का विकल्प नहीं है।

  • फिट और स्वस्थ रहने का आसान फॉर्मूला, अच्छी डाइट से पर्याप्त नींद तक रोज अपनाएं ये जरूरी आदतें और रहें बीमारियों से दूर

    फिट और स्वस्थ रहने का आसान फॉर्मूला, अच्छी डाइट से पर्याप्त नींद तक रोज अपनाएं ये जरूरी आदतें और रहें बीमारियों से दूर


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम और जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। लंबे समय तक बैठे रहना अनियमित खानपान कम नींद और लगातार तनाव जैसी आदतें धीरे धीरे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। स्वस्थ रहने के लिए किसी एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ अच्छी आदतों को शामिल करना ज्यादा जरूरी है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद और मानसिक शांति पर ध्यान देना चाहिए।

    सबसे पहले खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। भोजन में अलग अलग तरह की सब्जियां फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को शामिल करना चाहिए। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन अत्यधिक मीठा और ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर माना जाता है। भोजन की मात्रा और समय का भी ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक भूखे रहने या बार बार जरूरत से ज्यादा खाने की आदत से बचना चाहिए।

    शरीर को स्वस्थ रखने में पानी की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना शरीर में हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद करता है। गर्मी या अधिक शारीरिक गतिविधि के दौरान शरीर को पानी की जरूरत और बढ़ सकती है। हालांकि पानी की जरूरत हर व्यक्ति की उम्र गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।

    व्यायाम को स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा माना जाता है। रोज कुछ समय पैदल चलना योग करना स्ट्रेचिंग करना या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य शारीरिक गतिविधि करना शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। अगर आपका काम लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर करने वाला है तो बीच बीच में उठकर थोड़ा चलना भी उपयोगी आदत हो सकती है। किसी नई या कठिन एक्सरसाइज की शुरुआत धीरे धीरे करना बेहतर रहता है।

    अच्छी सेहत के लिए नींद को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर को आराम देने के साथ मानसिक ताजगी बनाए रखने में मदद करती है। रात में देर तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन देखने की आदत कम करने और सोने का नियमित समय तय करने से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। हर व्यक्ति की नींद की जरूरत अलग हो सकती है लेकिन लगातार नींद की कमी को सामान्य मानकर नहीं चलना चाहिए।

    मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। लगातार तनाव महसूस होने पर काम के बीच आराम लेना परिवार और दोस्तों से बातचीत करना संगीत पढ़ने या पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना मददगार हो सकता है। अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे और रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करे तो विशेषज्ञ की मदद लेना उचित है।

    इसके अलावा नियमित स्वास्थ्य जांच भी महत्वपूर्ण है। उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार ब्लड प्रेशर ब्लड शुगर आंखों और अन्य जरूरी स्वास्थ्य जांच के बारे में डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है। किसी बीमारी के लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

    कुल मिलाकर अच्छी सेहत किसी एक दिन की मेहनत से नहीं बल्कि रोज की छोटी छोटी आदतों से बनती है। संतुलित भोजन नियमित गतिविधि पर्याप्त नींद तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश और समय समय पर स्वास्थ्य जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर लंबे समय तक स्वस्थ रहने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

  • कैंसर पर जोंटी रोड्स का बड़ा संदेश, फिटनेस के साथ सही खानपान और जीवनशैली को बताया अहम

    कैंसर पर जोंटी रोड्स का बड़ा संदेश, फिटनेस के साथ सही खानपान और जीवनशैली को बताया अहम


    नई दिल्ली । दक्षिण अफ्रीका के पूर्व क्रिकेटर जोंटी रोड्स ने कैंसर को लेकर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है। अपने क्रिकेट करियर में शानदार फील्डिंग के लिए दुनिया भर में पहचान बनाने वाले रोड्स ने मुंबई में आयोजित एक कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में जीवनशैली और स्वास्थ्य से जुड़े विकल्पों पर बात की। वह SSO Cancer Hospitals से ब्रांड एंबेसडर के तौर पर जुड़े हुए हैं और हाल ही में अस्पताल की ओर से शुरू किए गए Head and Neck Cancer Centre of Excellence के उद्घाटन कार्यक्रम में भी शामिल हुए।

    रोड्स ने कहा कि कैंसर जैसी बीमारी को केवल अचानक होने वाली समस्या के तौर पर नहीं देखना चाहिए। उन्होंने अपनी बात रखते हुए आदतों तनाव और जीवनशैली से जुड़े फैसलों को स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि व्यक्ति को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसे विकल्प चुनने चाहिए जो लंबे समय तक उसके स्वास्थ्य के लिए बेहतर साबित हों। हालांकि कैंसर के मामले में यह समझना भी जरूरी है कि बीमारी का कोई एक कारण नहीं होता और हर मरीज के कैंसर को उसकी जीवनशैली से जोड़ना सही नहीं है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कैंसर कई तरह की बीमारियों का समूह है और इसके पीछे आनुवंशिक कारणों के साथ पर्यावरणीय और व्यवहार से जुड़े कई कारक हो सकते हैं। तंबाकू का सेवन शराब अस्वास्थ्यकर खानपान शारीरिक निष्क्रियता अधिक वजन वायु प्रदूषण और कुछ संक्रमण कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। WHO के मुताबिक 2022 में दुनिया भर में कैंसर के नए मामलों में करीब 37 प्रतिशत मामले ऐसे कारणों से जुड़े थे जिन्हें रोकथाम की रणनीतियों के जरिए कम किया जा सकता है।

    रोड्स ने अपनी फिटनेस यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि खिलाड़ी होने के कारण व्यायाम और फिटनेस उनकी जीवनशैली का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिट व्यक्ति को कैंसर नहीं हो सकता ऐसा कहना सही नहीं होगा। उनका संदेश मुख्य रूप से लोगों को अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक करने और बेहतर विकल्प चुनने पर केंद्रित था। दरअसल कैंसर का जोखिम कम करने के लिए केवल व्यायाम ही पर्याप्त नहीं है बल्कि तंबाकू से दूरी स्वस्थ वजन संतुलित खानपान नियमित शारीरिक गतिविधि और शराब से बचाव जैसे कई कदम महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    जोंटी रोड्स ने भारत में अपने परिवार के साथ लंबे समय तक रहने का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह भारत को केवल एक पर्यटक के रूप में नहीं देखते। उन्होंने यहां लोगों की जीवनशैली और स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों को करीब से देखने की बात कही। उनका उद्देश्य अपने अनुभव के जरिए लोगों को कैंसर के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल करने और समय रहते जागरूक होने के लिए प्रेरित करना है।

    कैंसर को लेकर जागरूकता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू समय पर जांच और इलाज भी है। WHO के अनुसार कई तरह के कैंसर का शुरुआती चरण में पता चलने और उचित उपचार मिलने पर इलाज संभव है। यही वजह है कि शरीर में लगातार बने रहने वाले असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच और जोखिम कारकों को कम करने की कोशिश बीमारी के बोझ को घटाने में मदद कर सकती है।

    रोड्स ने कैंसर को लेकर डर के बजाय जागरूकता और सकारात्मक सोच पर जोर दिया। उनका कहना था कि भारत में कैंसर के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर और चिकित्सा सुविधाएं मौजूद हैं और मरीजों को बीमारी का सामना हिम्मत के साथ करना चाहिए। उनका संदेश यही है कि स्वास्थ्य को लेकर छोटे लेकिन लगातार किए जाने वाले सही फैसले लंबे समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति को कैंसर होने या न होने का फैसला केवल उसकी जीवनशैली से नहीं किया जा सकता और किसी भी लक्षण या जोखिम की स्थिति में डॉक्टर की सलाह ही सबसे महत्वपूर्ण है।