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  • सुबह खाली पेट पानी पीना: सेहत के लिए ‘साइलेंट हीलर’, जानें 11 फायदे और सही तरीका

    सुबह खाली पेट पानी पीना: सेहत के लिए ‘साइलेंट हीलर’, जानें 11 फायदे और सही तरीका


    नई दिल्ली । हम अक्सर सुनते हैं कि सुबह खाली पेट पानी पीना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। हेल्थ एक्सपर्ट इसे साइलेंट हीलर कहते हैं क्योंकि यह छोटी लेकिन असरदार आदत हमारे शरीर को रीस्टार्ट का संदेश देती है। इंग्लैंड की लॉफबोरो यूनिवर्सिटी की स्टडी बताती है कि सुबह उठने के 30 मिनट के अंदर आधा लीटर पानी पीने से ब्रेन की फंक्शनिंग में सुधार आता है।

    डॉ. रोहित शर्मा कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल जयपुर बताते हैं कि सोते समय शरीर रिकवरी और रिपेयर मोड में चला जाता है। मेटाबॉलिज्म और ऑर्गन्स स्लो हो जाते हैं। ऐसे में सुबह पानी पीना शरीर को धीरे धीरे इस मोड से बाहर निकालता है। मूड संतुलित रहता है फोकस और याददाश्त बढ़ती है और सोचने समझने की क्षमता बेहतर होती है।

    डाइजेशन पर इसका असर भी महत्वपूर्ण है। खाली पेट पानी पेट में पहुंचकर पाचन तंत्र को सक्रिय करता है पेट और आंतों की मांसपेशियां मूवमेंट शुरू करती हैं। गैस्ट्रिक जूस और एंजाइम्स रिलीज होने से खाना पचाने की क्षमता बढ़ती है। कब्ज एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं कम होती हैं।

    सुबह पानी पीने से कई लाइफस्टाइल डिजीज का जोखिम घट सकता है। हाइड्रेटेड रहने से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और टॉक्सिन्स जमा नहीं होते। किडनी स्टोन यूरिन इन्फेक्शन हाई ब्लड प्रेशर और कब्ज जैसी बीमारियों के खतरे कम होते हैं।

    वजन कम करने में भी यह मददगार है। पानी मेटाबॉलिज्म को 20–30% तक एक्टिव करता है और कैलोरी बर्न में सहायक होता है। पेट थोड़ा भरा महसूस होने से नाश्ते में ओवरईटिंग कम होती है। हालांकि सिर्फ पानी पीने से वजन कम नहीं होता इसे हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ अपनाना जरूरी है।

    मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर दिखता है। डिहाइड्रेशन से थकान चिड़चिड़ापन और फोकस की कमी हो सकती है। सुबह पानी पीने से ब्रेन को पर्याप्त ऑक्सीजन और ब्लड सप्लाई मिलती है जिससे स्ट्रेस हॉर्मोन बैलेंस होते हैं और दिन की शुरुआत क्लियर और शांत होती है।

    एनर्जी लेवल और मूड पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। रात भर डिहाइड्रेटेड रहने से शरीर सुस्त रहता है। पानी पीते ही सेल्स सक्रिय हो जाती हैं थकान कम होती है और सिर भारी लगने की समस्या घटती है। यही कारण है कि हेल्थ एक्सपर्ट चाय कॉफी से पहले पानी पीने की सलाह देते हैं।

    डॉ. शर्मा के मुताबिक गुनगुना या नॉर्मल टेम्परेचर का पानी सुबह के लिए सबसे सही है। ठंडा पानी डाइजेशन धीमा कर सकता है। आमतौर पर 1–2 गिलास 250–500 ml पानी पर्याप्त होता है लेकिन मौसम और हेल्थ कंडीशन के हिसाब से मात्रा बदल सकती है।

    कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। किडनी या हार्ट की समस्या लो ब्लड प्रेशर गंभीर गैस्ट्रिक इश्यू वाले लोग थोड़ी सतर्कता बरतें। सुबह खाली पेट पानी पीना एक छोटी लेकिन असरदार आदत है जो डाइजेशन मेटाबॉलिज्म मेंटल हेल्थ और ओवरऑल वेलबीइंग को बेहतर बनाती है।

  • Women’s Day Special: पैरों की थकान से राहत दिलाएगा टोगा योगा, 5 मिनट की ये एक्सरसाइज देगी शरीर और दिमाग को एनर्जी

    Women’s Day Special: पैरों की थकान से राहत दिलाएगा टोगा योगा, 5 मिनट की ये एक्सरसाइज देगी शरीर और दिमाग को एनर्जी


    नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में महिलाएं एक साथ कई जिम्मेदारियां निभाती हैं। घर संभालना, ऑफिस का काम करना और परिवार की देखभाल करना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। ऐसे में अक्सर महिलाएं अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। दिनभर खड़े रहना, ज्यादा चलना या लंबे समय तक बैठकर काम करना पैरों में दर्द, सूजन और थकान का कारण बन सकता है।

    इन्हीं समस्याओं से राहत दिलाने के लिए एक बेहद आसान और असरदार एक्सरसाइज है टोगा योगा। यह एक सरल फुट एक्सरसाइज है जो पैरों की उंगलियों और तलवों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करती है। टोगा शब्द Toe यानी पैर की उंगलियों और Yoga यानी योग से मिलकर बना है। इसे करने के लिए किसी विशेष उपकरण या ज्यादा समय की जरूरत नहीं होती। दिन में सिर्फ पांच मिनट इस एक्सरसाइज को करने से शरीर और दिमाग दोनों को नई ऊर्जा मिल सकती है।

    टोगा योगा में पैरों की उंगलियों को अलग अलग तरीके से हिलाया और स्ट्रेच किया जाता है। देखने में यह एक्सरसाइज बहुत आसान लगती है लेकिन इसके फायदे काफी प्रभावी होते हैं। हमारे पैरों में कई छोटी छोटी मांसपेशियां होती हैं जो शरीर के संतुलन, चलने फिरने और खड़े रहने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। टोगा योगा इन मांसपेशियों को सक्रिय और मजबूत बनाने में मदद करता है।

    इस एक्सरसाइज का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। जब पैरों की मसल्स मजबूत होती हैं तो लंबे समय तक खड़े रहने या चलने के दौरान थकान कम महसूस होती है। खासतौर पर उन महिलाओं के लिए यह एक्सरसाइज काफी फायदेमंद हो सकती है जिन्हें काम के दौरान लंबे समय तक खड़ा रहना पड़ता है।

    टोगा योगा करने से पैरों में ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। जब पैरों की उंगलियों को हिलाया और स्ट्रेच किया जाता है तो रक्त प्रवाह में सुधार होता है जिससे सूजन और भारीपन की समस्या कम हो सकती है। बेहतर ब्लड सर्कुलेशन पूरे शरीर में ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करता है।

    यह एक्सरसाइज मानसिक तनाव और थकान को कम करने में भी सहायक मानी जाती है। जब हम ध्यानपूर्वक पैरों की मांसपेशियों को स्ट्रेच करते हैं तो शरीर में रिलैक्सेशन का एहसास होता है। इससे दिनभर की थकान कम होती है और मन भी शांत महसूस करता है।

    टोगा योगा करने के लिए कुछ आसान एक्सरसाइज अपनाई जा सकती हैं। इसमें टो स्प्रेड एक्सरसाइज के तहत पैरों की सभी उंगलियों को फैलाकर कुछ सेकंड तक उसी स्थिति में रखा जाता है। बिग टो लिफ्ट में पैर की बाकी उंगलियों को जमीन पर रखते हुए केवल अंगूठे को ऊपर उठाने की कोशिश की जाती है। टो कर्ल एक्सरसाइज में पैरों की उंगलियों को अंदर की ओर मोड़कर फिर सीधा किया जाता है। टो टैपिंग में उंगलियों को धीरे धीरे जमीन पर टैप किया जाता है। वहीं तौलिया ग्रिप एक्सरसाइज में जमीन पर रखे छोटे तौलिये को पैरों की उंगलियों से पकड़कर अपनी ओर खींचा जाता है।

    महिलाएं अक्सर अपने परिवार और काम की जिम्मेदारियों के बीच खुद को समय नहीं दे पातीं। लेकिन दिन में सिर्फ कुछ मिनट का यह छोटा सा प्रयास सेहत के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है। टोगा योगा एक ऐसी आसान और प्रभावी एक्सरसाइज है जिसे रोजाना अपनाकर पैरों की मजबूती, बेहतर ब्लड सर्कुलेशन और मानसिक राहत हासिल की जा सकती है।

  • मांस नहीं, पौधों से बनेगी ताकत: जानिए प्लांट-बेस्ड प्रोटीन के फायदे और इसे डाइट में शामिल करने के आसान तरीके

    मांस नहीं, पौधों से बनेगी ताकत: जानिए प्लांट-बेस्ड प्रोटीन के फायदे और इसे डाइट में शामिल करने के आसान तरीके

    नई दिल्ली। शरीर को सुचारू रूप से चलाने मांसपेशियों को मजबूत रखने और ऊर्जा बनाए रखने के लिए प्रोटीन बेहद जरूरी पोषक तत्व है। खासतौर पर जिम में कसरत करने वाले लोगों के लिए प्रोटीन मसल रिकवरी और ग्रोथ का आधार माना जाता है। आम धारणा यह है कि पर्याप्त प्रोटीन सिर्फ अंडा चिकन या मांसाहारी भोजन से ही मिल सकता है लेकिन यह सोच पूरी तरह सही नहीं है।आज के समय में प्लांट-बेस्ड प्रोटीन न सिर्फ शाकाहारी लोगों के लिए बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वालों की पहली पसंद बनता जा रहा है। भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में लोग मांसाहारी प्रोटीन छोड़कर पौधों से मिलने वाले प्रोटीन की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।

    क्यों बेहतर है प्लांट-बेस्ड प्रोटीन?
    पौधों से मिलने वाला प्रोटीन शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित और पचने में आसान माना जाता है। जहां मांसाहारी प्रोटीन के साथ कोलेस्ट्रॉल और सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा होती है वहीं प्लांट-बेस्ड प्रोटीन में कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहीं होता। यही वजह है कि यह दिल की सेहत के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है।दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स से जहां कैल्शियम मिलता है वहीं बहुत से लोगों को लैक्टोज इन्टॉलरेंस की समस्या भी होती है जिससे गैस पेट दर्द और अपच जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसके विपरीत बादाम तिल और हरी सब्जियां कैल्शियम के बेहतरीन प्लांट-बेस्ड स्रोत हैं।

    फाइबर और एनर्जी का डबल फायदा
    प्लांट-बेस्ड प्रोटीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके साथ शरीर को भरपूर फाइबर भी मिलता है। फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। यही कारण है कि ऐसे लोग जो पौधों से प्रोटीन लेते हैं उनमें मोटापा और हृदय रोग का खतरा कम देखा जाता है।

    किन चीजों से लें प्लांट-बेस्ड प्रोटीन?
    आप अपनी रोज़मर्रा की डाइट में इन चीजों को शामिल कर सकते हैं-

    दालें मूंग मसूर अरहर
    सोया टोफू और सोया चंक्स

    राजमा चना और लोबिया

    सूखे मेवे और सीड्स बादाम कद्दू के बीज सूरजमुखी के बीज

    अंकुरित अनाज और साबुत अनाज

    हरी पत्तेदार सब्जियां

    कितना प्रोटीन है जरूरी?
    आम तौर पर शरीर के वजन के हिसाब से प्रोटीन की जरूरत तय की जाती है। यदि आपका वजन 50 किलोग्राम है तो रोजाना लगभग 50 ग्राम प्रोटीन लेना पर्याप्त माना जाता है। यह मात्रा आसानी से प्लांट-बेस्ड डाइट से पूरी की जा सकती है।

    डाइट में शामिल करने के आसान तरीके
    आप मूंग दाल को अंकुरित कर सलाद बना सकते हैं मूंग दाल या बेसन का चीला खा सकते हैं सब्जियों के साथ टोफू मिलाकर स्वादिष्ट भोजन बना सकते हैं या राजमा-बीन्स की टिक्की और कबाब ट्राय कर सकते हैं।कुल मिलाकर अगर आप बिना मांसाहार के भी मजबूत फिट और एनर्जेटिक रहना चाहते हैं तो प्लांट-बेस्ड प्रोटीन एक स्मार्ट और हेल्दी विकल्प है।

  • जिम जाने से डर लगता है? इन 5 टिप्स के साथ शुरू करें अपना वेट लॉस सफर

    जिम जाने से डर लगता है? इन 5 टिप्स के साथ शुरू करें अपना वेट लॉस सफर


    नई दिल्ली । वजन कम करने की प्रक्रिया अक्सर कठिन और उबाऊ लगती है। कई बार हम सोचते हैं कि हमें जिम में घंटों पसीना बहाना होगा और अपनी पसंदीदा चीज़ों को छोड़ना पड़ेगा। लेकिन असल में वजन घटाने की सफलता का सबसे बड़ा राज आपकी मानसिक सोच और मोटिवेशन में छिपा है। सही आदतें और सकारात्मक नजरिया ही इस सफर को आसान और मजेदार बना सकते हैं।अगर आप भी वजन घटाने के सफर की शुरुआत करना चाहते हैं तो इन 5 टिप्स को अपनाकर आप इसे सिर्फ प्रभावी नहीं बल्कि मजेदार भी बना सकते हैं।

    छोटे टारगेट से शुरुआत करें

    अगर आपने एक साथ 10 किलो वजन घटाने का सोच लिया तो यह आपको जल्दी ही हतोत्साहित कर सकता है। इसके बजाय छोटे और साप्ताहिक लक्ष्य तय करें जैसे कि हर हफ्ते 500 ग्राम वजन घटाना। शुरुआत में केवल 15-20 मिनट की एक्सरसाइज से शुरू करें। छोटे टारगेट पूरे होने पर मिलने वाली संतुष्टि आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।

    फिजिकल एक्टिविटी को मजेदार बनाएं

    कभी-कभी वर्कआउट को बोझ जैसा महसूस करना स्वाभाविक है लेकिन इसे मजेदार बनाने की कोशिश करें। अपने पसंदीदा गानों की प्लेलिस्ट सुनते हुए वर्कआउट करें। म्यूजिक न केवल आपको ऊर्जा देगा बल्कि यह आपके मूड को भी बेहतर बनाएगा। इससे वर्कआउट की समय सीमा का पता भी नहीं चलेगा और आप आसानी से लंबे समय तक एक्टिव रहेंगे।

    वर्कआउट पार्टनर ढूंढें

    अकेले जिम जाने की सोच ही आलस को जन्म देती है। ऐसे में एक वर्कआउट पार्टनर का होना बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को अपने साथ वर्कआउट करने के लिए प्रेरित करें। इससे न केवल आपको प्रेरणा मिलेगी बल्कि आप एक-दूसरे को उत्साहित और प्रोत्साहित भी करेंगे। इसके अलावा वर्कआउट पार्टनर के साथ करने से यह और भी मजेदार हो सकता है।

    आहार में बदलाव करें पर प्रतिबंध नहीं

    वजन घटाने के सफर में आहार को भी बदलना महत्वपूर्ण है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको अपनी पसंदीदा चीजें छोड़नी पड़ें। अगर आप बहुत सख्त आहार योजना का पालन करेंगे तो जल्दी ही वह आपके लिए बोरिंग और मुश्किल हो जाएगा। इसके बजाय छोटे-छोटे बदलाव करें जैसे कि अधिक प्रोटीन और फाइबर का सेवन शक्कर और जंक फूड की मात्रा कम करना।

    अपने छोटे-छोटे प्रगति को सेलिब्रेट करें

    वजन घटाने का सफर लंबा हो सकता है और इसके दौरान किसी छोटे बदलाव को नजरअंदाज करना आसान होता है। लेकिन छोटी-छोटी प्रगति को सेलिब्रेट करना आपके मोटिवेशन को बढ़ा सकता है। जैसे ही आप कोई छोटा लक्ष्य हासिल करें अपने आप को सराहें या खुद को कोई छोटा इनाम दें। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आप और भी बेहतर करने के लिए प्रेरित होंगे। वजन घटाने का सफर मानसिक दृष्टिकोण से कहीं अधिक जुड़ा हुआ है। अगर आप इसे एक सकारात्मक और मजेदार अनुभव के रूप में देखेंगे तो यह सफर बेहद सफल और प्रेरणादायक बन सकता है। शुरुआत में छोटी शुरुआत करें इसे मजेदार बनाएं और साथ ही अपने आहार और आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करें। जब आप इसे एक आदत के रूप में अपनाएंगे तो यह आसानी से आपका जीवन का हिस्सा बन जाएगा।

  • हेल्दी ईटिंग और रेसिपी ट्रेंड्स 2026: स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ता नया भारत

    हेल्दी ईटिंग और रेसिपी ट्रेंड्स 2026: स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ता नया भारत

    नई दिल्ली।आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में स्वस्थ रहना एक चुनौती जरूर है, लेकिन 2026 के हेल्दी ईटिंग और फूड ट्रेंड्स इसे पहले से कहीं आसान बना रहे हैं। अब हेल्दी खाना सिर्फ वजन घटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह इम्यूनिटी बढ़ाने, दिनभर ऊर्जा बनाए रखने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने का अहम जरिया बन चुका है। बदलती लाइफस्टाइल के साथ लोग अब ऐसे फूड ऑप्शन्स की तलाश में हैं जो नैचुरल हों, कम प्रोसेस्ड हों और शरीर को संपूर्ण पोषण दें।2026 के फूड ट्रेंड्स में नैचुरल इंग्रीडिएंट्स, लो-कार्ब डाइट और प्लांट-बेस्ड फूड्स का दबदबा साफ नजर आ रहा है। लोग पैकेज्ड और जंक फूड से दूरी बनाकर घर के बने, ताज़े और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन को प्राथमिकता दे रहे हैं। क्विनोआ, ओट्स, मिलेट्स, मील शेक्स और वेजिटेबल-फ्रूट स्मूदीज़ तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि ये पचाने में आसान होने के साथ लंबे समय तक एनर्जी भी देते हैं।

    रेसिपी ट्रेंड्स की बात करें तो इस साल स्वाद और सेहत के बीच बेहतरीन संतुलन देखने को मिल रहा है। हल्दी, ग्रीन टी, चिया सीड्स और फ्लैक्स सीड्स जैसे सुपरफूड्स को रोज़मर्रा की डाइट में शामिल करना अब आम हो गया है। ये न सिर्फ इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं, बल्कि हार्ट हेल्थ और पाचन के लिए भी फायदेमंद माने जा रहे हैं। डिनर में लो-कार्ब वेजिटेबल प्लेट्स और प्रोटीन रिच स्नैक्स का चलन भी बढ़ रहा है। बेक्ड स्वीट पोटैटो फ्राइज, पैन-ग्रिल्ड सब्जियां या हर्ब-ग्रिल्ड चिकन जैसे विकल्प स्वादिष्ट होने के साथ वजन कंट्रोल और मसल स्ट्रेंथ में मदद करते हैं।हेल्दी लाइफस्टाइल सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सही समय पर भोजन करना और छोटे-छोटे पोर्शन लेना भी उतना ही जरूरी है। दिन की शुरुआत गुनगुने पानी या नींबू पानी से करने, दिनभर पर्याप्त पानी पीने और हर 3-4 घंटे में हल्का व पौष्टिक स्नैक लेने से शरीर एक्टिव बना रहता है और थकान महसूस नहीं होती।

    फिट रहने के लिए अब लोग भारी-भरकम एक्सरसाइज की बजाय हल्की व नियमित गतिविधियों को अपनाने लगे हैं। योग, मॉर्निंग स्ट्रेचिंग और वर्क फ्रॉम होम के दौरान छोटे-छोटे वॉक ब्रेक्स शरीर और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं। इसके साथ ही विटामिन और मिनरल्स के लिए सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहने के बजाय प्राकृतिक स्रोतों को प्राथमिकता दी जा रही है। धूप से विटामिन डी, खट्टे फलों से विटामिन सी और हरी सब्जियों व बीन्स से आयरन लेना अब लोगों की डेली रूटीन का हिस्सा बनता जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि हेल्दी रूटीन की सफलता किसी एक बड़े बदलाव में नहीं, बल्कि रोज़ के छोटे-छोटे सुधारों में छिपी होती है। अचानक डाइट बदलना या एक्सट्रीम फास्टिंग करने की बजाय धीरे-धीरे हेल्दी आदतें अपनाना लंबे समय तक बेहतर परिणाम देता है। 2026 के ये हेल्दी ईटिंग ट्रेंड्स यही संदेश देते हैं कि सेहतमंद जीवन कोई मुश्किल लक्ष्य नहीं, बल्कि सही चुनावों से बना एक आसान सफर है।

  • ग्वालियर में नए साल की सुबह ‘दूध अभियान’: शराब छोड़, सेहत से की नववर्ष की शुरुआत

    ग्वालियर में नए साल की सुबह ‘दूध अभियान’: शराब छोड़, सेहत से की नववर्ष की शुरुआत

    ग्वालियर। नए साल 2026 की शुरुआत शहर में कुछ अलग अंदाज में हुई। इंदरगंज चौराहे पर आयोजित दूध अभियान में लोगों ने शराब छोड़कर दूध पीकर नववर्ष का स्वागत किया। एसोसिएशन ऑफ ग्वालियर यूथ सोसाइटी और यातायात पुलिस के संयुक्त प्रयास से यह अनोखा अभियान चलाया गया।सुबह-सुबह पंडाल पर 2 क्विंटल केसरिया दूध तैयार कर निशुल्क वितरण किया गया। राहगीरों, वाहन चालकों, युवाओं और बुजुर्गों ने रुककर दूध पिया और अभियान का समर्थन किया। एडिशनल एसपी अनु बेनीवाल ने खुद लोगों को दूध दिया और नशामुक्त नववर्ष का संदेश फैलाया। पंडाल के आसपास बड़े-बड़े बैनरों और साउंड सिस्टम के जरिए संदेश दिया गया-दारू से नहीं, दूध से करें नववर्ष की शुरुआत।

    आयोजकों का कहना है कि नए साल पर शराब पीने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे सड़क दुर्घटनाएं, घरेलू हिंसा और स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं। युवाओं में नशे की लत चिंता का विषय है। इसी चुनौती के समाधान के लिए यह अभियान शुरू किया गया।दूध वितरण कार्यक्रम में लोगों की लंबी कतारें लग गईं। कई लोगों ने इसे नए साल की सबसे अच्छी और सार्थक शुरुआत बताया। युवाओं ने कहा कि ऐसे अभियान नशे के प्रति सोच बदलने में मददगार हैं। स्थानीय निवासियों ने आयोजन की सराहना की और इसे आगे जारी रखने की मांग की।

    यातायात पुलिस ने भी मौके पर लोगों से नशे में वाहन न चलाने, ट्रैफिक नियमों का पालन करने और सुरक्षित जीवनशैली अपनाने की अपील की। अधिकारियों ने कहा कि जश्न वही बेहतर है, जो खुद के साथ दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।ग्वालियर की यह पहल केवल एक आयोजन नहीं बल्कि सार्वजनिक जागरूकता का संदेश है। नए साल की सुबह दूध के माध्यम से लोगों को यह बताया गया कि जश्न और जिम्मेदारी साथ-साथ चल सकते हैं। शहर की इस अनोखी शुरुआत ने साबित कर दिया कि बदलाव छोटे कदमों से ही शुरू होता है।

  • सर्दियों में भी रहें हाइड्रेटेड: पानी और गर्म ड्रिंक्स के 5 आसान टिप्स

    सर्दियों में भी रहें हाइड्रेटेड: पानी और गर्म ड्रिंक्स के 5 आसान टिप्स


    नई दिल्ली
    /सर्दियों में लोग अक्सर यह सोचते हैं कि गर्म मौसम की तरह डिहाइड्रेशन का खतरा नहीं है। लेकिन सच यह है कि ठंड के मौसम में भी शरीर में पानी की कमी चुपचाप असर डालती है। कम प्यास लगना, हीटर, ब्लोअर और गर्म कपड़े शरीर से नमी को निकाल लेते हैं। इसके अलावा, सर्दियों में चाय, कॉफी या अल्कोहल का ज्यादा सेवन भी डिहाइड्रेशन बढ़ा देता है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह थकान, सिरदर्द, रूखी त्वचा और कमजोर इम्यूनिटी जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।

    क्यों बढ़ता है सर्दियों में डिहाइड्रेशन का खतरा?
    सर्दियों में पसीना जल्दी सूख जाता है, जिससे पानी की कमी महसूस नहीं होती। प्यास का संकेत कमजोर होने के कारण लोग पर्याप्त पानी पीना भूल जाते हैं। हीटर और ब्लोअर से हवा में नमी कम हो जाती है और गर्म कपड़े भी शरीर से पानी सोख लेते हैं। यही कारण है कि ठंड में भी हाइड्रेशन पर ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

    सर्दियों में हाइड्रेटेड रहने के 5 आसान हैक्स

    1. पानी पीने की आदत बनाएं
    सिर्फ प्यास लगने पर पानी पीने की आदत छोड़ दें। सुबह उठते ही 1–2 गिलास गुनगुना पानी पिएं। दिनभर हर 1–2 घंटे में थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। मोबाइल रिमाइंडर सेट करना इस आदत को बनाए रखने में मदद करता है।

    2. गुनगुने और हेल्दी ड्रिंक्स अपनाएं
    ठंड में ठंडा पानी पीने का मन नहीं करता, इसलिए गुनगुना पानी या हर्बल ड्रिंक्स पीना बेहतर रहता है। नींबू पानी, अदरक और दालचीनी का काढ़ा शरीर को हाइड्रेट रखता है और इम्यूनिटी भी बढ़ाता है। गर्म ड्रिंक्स पाचन को बेहतर बनाने और शरीर में ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करती हैं।

    3. सूप और शोरबा शामिल करें
    सर्दियों में सूप, सब्जियों का शोरबा, दलिया और दही डाइट में शामिल करें। संतरा, सेब और अमरूद जैसे फलों में भी पानी और पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं। ये न केवल हाइड्रेशन बनाए रखते हैं, बल्कि शरीर को ठंड से लड़ने के लिए आवश्यक विटामिन और मिनरल भी देते हैं।

    4. कैफीन और शराब का संतुलन रखें
    चाय, कॉफी और शराब का ज्यादा सेवन शरीर से पानी निकाल देता है। अगर इनका सेवन करें, तो पर्याप्त पानी पीना सुनिश्चित करें। पानी के साथ ही कैफीन और अल्कोहल के नुकसान को कम किया जा सकता है।

    5. शरीर के संकेतों को पहचानें
    रूखे होंठ, सूखी त्वचा, गहरा पीला यूरिन, थकान, चक्कर और सिरदर्द डिहाइड्रेशन के मुख्य संकेत हैं। इन संकेतों को नजरअंदाज न करें और तुरंत पानी या गर्म ड्रिंक्स लें।सर्दियों में पर्याप्त हाइड्रेशन बनाए रखना स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। छोटे-छोटे कदम अपनाकर आप न केवल डिहाइड्रेशन से बच सकते हैं, बल्कि ठंड के मौसम में भी एनर्जी और इम्यूनिटी बनाए रख सकते हैं। गुनगुने पानी, सूप, शोरबा और हेल्दी ड्रिंक्स को अपनी डाइट में शामिल करके आप शरीर को फुली हाइड्रेटेड रख सकते हैं और सर्दियों का मजा सुरक्षित तरीके से ले सकते हैं।