Tag: healthy lifestyle

  • सुबह की ये ड्रिंक्स कंट्रोल कर सकती हैं हाई BP, दिल की सेहत को मिल सकता है सपोर्ट

    सुबह की ये ड्रिंक्स कंट्रोल कर सकती हैं हाई BP, दिल की सेहत को मिल सकता है सपोर्ट

    नई दिल्ली।
    हाई ब्लड प्रेशर आज के समय में एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जो जीवनशैली और खानपान से सीधे जुड़ी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार इस स्थिति को नियंत्रित रखने में दवाओं के साथ-साथ रोजमर्रा की आदतों का भी बड़ा योगदान होता है। खासकर सुबह की दिनचर्या इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    सुबह की शुरुआत अगर सही और संतुलित ड्रिंक के साथ की जाए तो शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। ऐसे में कुछ प्राकृतिक पेय पदार्थों को नियमित रूप से सेवन करने की सलाह दी जाती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ दिल की सेहत के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं।

    सुबह हल्का गर्म नींबू पानी एक सरल और उपयोगी विकल्प माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन सी और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में सहायक हो सकते हैं। यह शरीर को ताजगी देने के साथ दिन की अच्छी शुरुआत करने में मदद करता है।

    इसके अलावा नारियल पानी को भी एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इसमें पोटैशियम की अच्छी मात्रा होती है, जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। संतुलित इलेक्ट्रोलाइट्स रक्तचाप को स्थिर रखने में सहायक माने जाते हैं।

    चुकंदर का जूस भी उन ड्रिंक्स में शामिल है, जिन्हें अक्सर हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है। इसमें प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो रक्त वाहिकाओं को रिलैक्स करने में मदद कर सकते हैं। इसे बिना अतिरिक्त चीनी के सेवन करने की सलाह दी जाती है ताकि इसका प्राकृतिक लाभ बना रहे।

    ग्रीन टी भी एक लोकप्रिय विकल्प है, जिसे हल्के रूप में सेवन करने पर शरीर को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने और तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।

    आंवला जूस को भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ हृदय पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

    इन ड्रिंक्स के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि कुछ आदतों से बचा जाए। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक कैफीन वाले पेय, शुगर युक्त ड्रिंक्स और पैकेज्ड जूस का अधिक सेवन ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है।

    कुल मिलाकर, सुबह की सही आदतें और प्राकृतिक पेय पदार्थों का संतुलित सेवन जीवनशैली को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक माना जाता है।

  • दवाओं से आगे बढ़कर अपनाएं ये 4 जरूरी बदलाव, टाइप-2 डायबिटीज पर मिलेगा बेहतर नियंत्रण

    दवाओं से आगे बढ़कर अपनाएं ये 4 जरूरी बदलाव, टाइप-2 डायबिटीज पर मिलेगा बेहतर नियंत्रण

    नई दिल्ली। आज के दौर में टाइप-2 डायबिटीज एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जो तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। हालांकि यह बीमारी गंभीर जरूर है, लेकिन सही आदतों को अपनाकर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल दवाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी उतने ही जरूरी हैं।

    सबसे पहले शरीर के वजन को संतुलित रखना बेहद आवश्यक है। बढ़ता हुआ वजन न केवल डायबिटीज के खतरे को बढ़ाता है, बल्कि इसे नियंत्रित करना भी मुश्किल बना देता है। इसलिए नियमित रूप से वजन की निगरानी करना और जरूरत के अनुसार उसे कम करने के प्रयास करना चाहिए। संतुलित वजन शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है।

    इसके साथ ही शारीरिक सक्रियता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है। रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट तक व्यायाम करने से शरीर सक्रिय रहता है और शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। तेज चलना, साइकिल चलाना, योग या हल्का व्यायाम जैसे विकल्प आसानी से अपनाए जा सकते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर में ऊर्जा संतुलन बनाए रखती है और मेटाबॉलिज्म को मजबूत बनाती है।

    खानपान की भूमिका भी इस बीमारी को नियंत्रित करने में बेहद अहम है। संतुलित और पौष्टिक आहार लेने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और ब्लड शुगर अचानक बढ़ने से बचता है। भोजन में हरी सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए। इसके साथ ही अधिक तले-भुने और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना भी जरूरी है। सही डाइट न केवल डायबिटीज को कंट्रोल करती है, बल्कि शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखती है।

    इसके अलावा कुछ आदतों से दूरी बनाना भी उतना ही जरूरी है, जो इस समस्या को बढ़ा सकती हैं। ज्यादा चीनी और सैचुरेटेड फैट वाले खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं, इसलिए इनका सेवन सीमित करना चाहिए। साथ ही तंबाकू का सेवन भी स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। यह न केवल डायबिटीज के खतरे को बढ़ाता है, बल्कि हृदय और फेफड़ों पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।

  • Type-2 Diabetes से बचाव है संभव: अपनाएं ये 4 आसान आदतें और रहें स्वस्थ

    Type-2 Diabetes से बचाव है संभव: अपनाएं ये 4 आसान आदतें और रहें स्वस्थ


    नई दिल्ली। आज के समय में तेजी से बढ़ती लाइफस्टाइल बीमारियों में Type 2 Diabetes एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। खराब खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ता तनाव इस बीमारी के प्रमुख कारण माने जाते हैं। हालांकि, अच्छी बात यह है कि World Health Organization (WHO) का मानना है कि कुछ आसान और नियमित आदतों को अपनाकर इस बीमारी से बचाव संभव है।

    WHO के अनुसार, सबसे जरूरी है अपने शरीर के वजन को संतुलित रखना। बढ़ता हुआ वजन डायबिटीज के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। ऐसे में नियमित रूप से वजन पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर उसे नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। संतुलित वजन न सिर्फ डायबिटीज बल्कि कई अन्य बीमारियों से भी बचाता है।

    दूसरा महत्वपूर्ण उपाय है शारीरिक रूप से सक्रिय रहना। विशेषज्ञों की सलाह है कि रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट तक व्यायाम जरूर करना चाहिए। इसमें तेज चलना, साइकिल चलाना या हल्का-फुल्का खेलकूद शामिल हो सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर में इंसुलिन के प्रभाव को बेहतर बनाती है और ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखने में मदद करती है।

    तीसरा अहम पहलू है संतुलित और पौष्टिक आहार। WHO के अनुसार, अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। वहीं, ज्यादा चीनी, प्रोसेस्ड फूड और सैचुरेटेड फैट से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। सही खानपान न केवल डायबिटीज के खतरे को कम करता है, बल्कि शरीर को ऊर्जा और पोषण भी देता है।

    चौथा और बेहद जरूरी उपाय है तंबाकू से दूरी बनाना। तंबाकू का सेवन न केवल डायबिटीज बल्कि दिल और फेफड़ों से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाता है। WHO का स्पष्ट कहना है कि तंबाकू छोड़ने से शरीर की ओवरऑल हेल्थ बेहतर होती है और कई बीमारियों से बचाव संभव होता है।

    आज के व्यस्त जीवन में छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करना ही सबसे बड़ा उपाय है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण और तंबाकू से दूरी बनाकर न केवल Type 2 Diabetes बल्कि कई अन्य गंभीर बीमारियों से भी बचा जा सकता है।

    कुल मिलाकर, अगर समय रहते जागरूकता दिखाई जाए और सही जीवनशैली अपनाई जाए, तो डायबिटीज जैसी बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।

  • मोटापे और बीमारियों की बड़ी वजह बना तेल, ऐसे करें नियंत्रण..

    मोटापे और बीमारियों की बड़ी वजह बना तेल, ऐसे करें नियंत्रण..


    नई दिल्ली।आज के समय में बदलती जीवनशैली और असंतुलित खानपान ने सेहत से जुड़ी कई समस्याओं को तेजी से बढ़ा दिया है। इनमें सबसे बड़ी समस्या है भोजन में अधिक तेल का इस्तेमाल, जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाकर कई गंभीर बीमारियों की जड़ बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत से ज्यादा तेल का सेवन न केवल वजन बढ़ाता है, बल्कि यह हृदय रोग, डायबिटीज और अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम भी बढ़ा देता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा केवल दिखने की समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर के अंदर कई बीमारियों की शुरुआत का संकेत भी है। जब खाने में तेल की मात्रा अधिक होती है, तो शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा होने लगती है, जिससे वजन तेजी से बढ़ता है। धीरे-धीरे यह स्थिति शरीर के अंगों पर दबाव डालने लगती है और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा होती हैं।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। खाना बनाते समय तेल को मापकर इस्तेमाल करना, बिना जरूरत के तलने वाले भोजन से दूरी बनाना और हल्के पकाने के तरीकों को अपनाना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है।

    भाप में पकाए गए भोजन, ग्रिल्ड या कम तेल में बने व्यंजन न केवल शरीर के लिए हल्के होते हैं बल्कि इनमें पोषक तत्व भी बेहतर तरीके से सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा घर के खाने में संतुलन बनाए रखना और बार-बार तले हुए खाद्य पदार्थों से बचना लंबे समय तक शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि तेल का पूरी तरह त्याग करना जरूरी नहीं है, बल्कि इसका संतुलित उपयोग सबसे महत्वपूर्ण है। सही मात्रा में लिया गया तेल शरीर के लिए ऊर्जा का स्रोत भी होता है, लेकिन जब यह सीमा से अधिक हो जाता है तो यही सेहत के लिए खतरा बन जाता है।

  • डल स्किन से छुटकारा पाकर पाएं नेचुरल ग्लो, सेब, चुकंदर और गाजर का जूस बना सकता है त्वचा को अंदर से हेल्दी और चमकदार

    डल स्किन से छुटकारा पाकर पाएं नेचुरल ग्लो, सेब, चुकंदर और गाजर का जूस बना सकता है त्वचा को अंदर से हेल्दी और चमकदार


    नई दिल्ली:
    गर्मी के मौसम में धूल, प्रदूषण और तेज धूप का असर सबसे पहले हमारी त्वचा पर दिखाई देता है। धीरे-धीरे चेहरा अपनी प्राकृतिक चमक खोने लगता है और स्किन डल व थकी हुई नजर आने लगती है। ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल बाहरी स्किन केयर ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर को अंदर से पोषण देना भी जरूरी होता है। इसी कारण सेब, चुकंदर और गाजर से बना प्राकृतिक जूस त्वचा के लिए एक सरल और प्रभावी उपाय माना जा रहा है, जो शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स देकर स्किन को स्वस्थ बनाने में मदद कर सकता है।

    सेब इस जूस का अहम हिस्सा माना जाता है, जिसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर में कोलेजन के निर्माण को सपोर्ट करते हैं, जिससे त्वचा की कसावट बनी रहती है और उम्र बढ़ने के लक्षण धीरे-धीरे कम दिखाई देते हैं। सेब शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करता है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक नमी और चमक बनी रहती है।

    चुकंदर को खून को शुद्ध करने वाला एक प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। इसमें मौजूद तत्व शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जिससे त्वचा तक ऑक्सीजन और पोषण अधिक मात्रा में पहुंचता है। जब त्वचा को पर्याप्त पोषण मिलता है, तो वह अधिक साफ, चमकदार और स्वस्थ नजर आती है। चुकंदर शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी सहायक माना जाता है, जिसका सीधा असर त्वचा की गुणवत्ता पर दिखाई देता है।

    गाजर इस जूस का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसमें बीटा कैरोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह शरीर में विटामिन ए में बदलकर त्वचा की कोशिकाओं की मरम्मत और नए सेल्स के निर्माण में मदद करता है। यह त्वचा को सूखने से बचाकर उसे मुलायम और हेल्दी बनाए रखने में सहायक होता है, जिससे चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है।

    इन तीनों सामग्रियों का मिश्रण शरीर को अंदर से पोषण देने के साथ-साथ डिटॉक्स करने में भी मदद कर सकता है। नियमित रूप से इस प्राकृतिक जूस का सेवन त्वचा की डलनेस को कम करने, उसे साफ रखने और धीरे-धीरे प्राकृतिक ग्लो बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

  • कोलेस्ट्रॉल 2026: नई गाइडलाइन, LDL टारगेट और जरूरी लाइफस्टाइल बदलाव

    कोलेस्ट्रॉल 2026: नई गाइडलाइन, LDL टारगेट और जरूरी लाइफस्टाइल बदलाव


    नई दिल्ली । अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी ने कोलेस्ट्रॉल पर नई गाइडलाइन जारी की है यह अपडेट इसलिए बेहद अहम है क्योंकि इसने पिछले आठ साल के पुराने पैरामीटर्स को पूरी तरह बदल दिया है वर्ल्ड हेल्थ फेडरेशन (WHF) के मुताबिक दुनियाभर में हर साल सबसे ज्यादा मौतें कार्डियोवस्कुलर डिजीज (CVD) के कारण होती हैं और 2 करोड़ से ज्यादा लोग हर साल इसी वजह से जीवन गंवा देते हैं

    कोलेस्ट्रॉल एक प्रकार का फैट यानी लिपिड है जो ब्लड में पाया जाता है यह दो तरह का होता है LDL जिसे बैड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है और HDL जिसे गुड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है यह शरीर के लिए जरूरी है क्योंकि यह बॉडी सेल्स की वॉल्स बनाने में मदद करता है कुछ हॉर्मोन्स बनाने और विटामिन D उत्पादन में सहायक होता है साथ ही बाइल जूस बनाने में भी मदद करता है HDL हार्ट को हेल्दी रखने में अहम भूमिका निभाता है

    नई गाइडलाइन में स्क्रीनिंग, रिस्क एसेसमेंट और लाइफस्टाइल पर जोर दिया गया है पुरानी गाइडलाइन में LDL 130 mg/dL से कम रखने की सलाह दी जाती थी लेकिन अब इसे पर्सनलाइज्ड करके तीन कैटेगरी में बांट दिया गया है जिनको हार्ट डिजीज का हाई रिस्क है उनके लिए LDL 55 mg/dL से कम, मीडियम रिस्क वालों के लिए 70 mg/dL से कम और जो लोग हार्ट डिजीज से प्रभावित नहीं हैं उनके लिए 100 mg/dL से कम रखने की सलाह दी गई है इसका मतलब है कि अब ‘नॉर्मल’ की कोई तय सीमा नहीं है बल्कि यह व्यक्ति के रिस्क लेवल पर निर्भर करता है

    नई गाइडलाइन में रिस्क कैलकुलेशन भी व्यापक बना दिया गया है क्योंकि अब कम उम्र में भी हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ रहा है इसके पीछे फैमिली हिस्ट्री और खराब लाइफस्टाइल मुख्य कारण हैं फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया जैसी जेनेटिक कंडीशन के कारण बचपन से LDL बढ़ सकता है वहीं जंकफूड, कम एक्सरसाइज और मोटापा भी इसे बढ़ाते हैं इसलिए अब बच्चों की स्क्रीनिंग 9 साल की उम्र से करने की सलाह दी गई है

    हाई कोलेस्ट्रॉल हार्ट, ब्रेन और किडनी पर गंभीर असर डालता है यह आर्टरीज में प्लाक बनाकर ब्लड फ्लो कम करता है जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है ब्लड क्लॉट्स ब्रेन में स्ट्रोक और मेमोरी इम्पेयरमेंट का कारण बन सकते हैं वहीं किडनी की ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाकर क्रॉनिक किडनी डिजीज का रिस्क बढ़ाते हैं

    लाइफस्टाइल फैक्टर्स में अनहेल्दी डाइट, ट्रांस और सैचुरेटेड फैट, सिडेंटरी लाइफ, मोटापा, स्मोकिंग, पर्याप्त नींद न लेना, देर रात खाने की आदत और स्ट्रेस शामिल हैं ये सभी LDL बढ़ाने में मदद करते हैं

    अगर कोलेस्ट्रॉल ज्यादा आए तो सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लें LDL लेवल के हिसाब से टारगेट तय करें और हार्ट-हेल्दी डाइट, नियमित कार्डियो एक्सरसाइज, वेट कंट्रोल, शराब-सिगरेट से परहेज, पर्याप्त नींद और स्ट्रेस मैनेजमेंट अपनाएं जरूरत पड़ने पर स्टेटिन जैसी दवाइयां लें और फॉलो-अप टेस्ट समय-समय पर करवाएं

    नई गाइडलाइन के अनुसार बैलेंस्ड डाइट, एक्टिव लाइफ और अच्छी आदतें HDL और LDL को संतुलित करके हृदय, ब्रेन और किडनी की सुरक्षा करती हैं इसलिए कोलेस्ट्रॉल पर ध्यान रखना अब हर उम्र में जरूरी हो गया है

  • सेहत और ऊर्जा का राज महिलाओं के लिए ये सात फूड्स बेहद जरूरी

    सेहत और ऊर्जा का राज महिलाओं के लिए ये सात फूड्स बेहद जरूरी


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं अक्सर अपने परिवार की देखभाल करते करते खुद की सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। इसका असर यह होता है कि उनके शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और धीरे धीरे कमजोरी हार्मोन असंतुलन और कई गंभीर बीमारियां उन्हें घेर लेती हैं। ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं अपने दैनिक आहार में कुछ खास पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करें ताकि उनका शरीर मजबूत और स्वस्थ बना रहे।

    सबसे पहले बात करें रागी की तो यह कैल्शियम आयरन और फाइबर से भरपूर होती है। रागी का नियमित सेवन हड्डियों को मजबूत बनाता है और शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है। इसे रोटी चीला या लड्डू के रूप में आसानी से खाया जा सकता है। इसके अलावा यह बाल और त्वचा के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है।

    दूसरा महत्वपूर्ण आहार है आंवला जो विटामिन सी का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और संक्रमण से बचाने में मदद करता है। आंवले को जूस चटनी या मुरब्बे के रूप में रोजाना लिया जा सकता है।

    तीसरे स्थान पर चिया सीड्स आते हैं जो कैल्शियम और फाइबर से भरपूर होते हैं। यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और वजन को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। चिया सीड्स को पानी दूध या स्मूदी में मिलाकर आसानी से सेवन किया जा सकता है।

    चौथे नंबर पर अलसी के बीज हैं जो ओमेगा 3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत होते हैं। यह दिल को स्वस्थ रखते हैं और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही हार्मोन संतुलन में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है और यह पीसीओडी जैसी समस्याओं में भी लाभकारी माने जाते हैं।

    पांचवें स्थान पर कद्दू के बीज आते हैं जो मैग्नीशियम और जिंक से भरपूर होते हैं। यह शरीर की कई जरूरी क्रियाओं को संतुलित रखते हैं और थायराइड जैसी समस्याओं से बचाने में मदद करते हैं। रोजाना एक चम्मच कद्दू के बीज का सेवन शरीर के लिए लाभदायक होता है।

    छठे नंबर पर अखरोट का नाम आता है जो मस्तिष्क को मजबूत बनाने और याददाश्त को बेहतर करने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से नसों की कमजोरी दूर होती है और बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।

    सातवें और आखिरी स्थान पर चुकंदर है जो शरीर में खून की कमी को दूर करने में बेहद कारगर माना जाता है। महिलाओं में एनीमिया की समस्या आम होती है ऐसे में चुकंदर का सेवन रक्त की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है। इसे सलाद जूस या रोटी के रूप में आहार में शामिल किया जा सकता है।

    इन सात चीजों को अपने रोजाना के आहार में शामिल करके महिलाएं न केवल अपनी सेहत को बेहतर बना सकती हैं बल्कि लंबे समय तक ऊर्जा और संतुलन बनाए रख सकती हैं। सही खानपान ही स्वस्थ जीवन की सबसे मजबूत नींव है और छोटी छोटी आदतें ही बड़े बदलाव लाती हैं।

  • बढ़ा हुआ पित्त बिगाड़ सकता है सेहत, संतुलन के लिए डाइट में शामिल करें ये 5 ठंडी तासीर वाली चीजें

    बढ़ा हुआ पित्त बिगाड़ सकता है सेहत, संतुलन के लिए डाइट में शामिल करें ये 5 ठंडी तासीर वाली चीजें


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और अत्यधिक मसालेदार भोजन ने शरीर में पित्त बढ़ने की समस्या को आम बना दिया है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर तीन दोषों वात, पित्त और कफ पर आधारित होता है, जिनमें पित्त अग्नि और जल का मिश्रण है। जब यह असंतुलित हो जाता है, तो पाचन खराब होना, एसिडिटी, त्वचा संबंधी समस्याएं और चिड़चिड़ापन जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। ऐसे में समय रहते खानपान और जीवनशैली में बदलाव करना बेहद जरूरी हो जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पित्त को नियंत्रित करने के लिए सबसे पहले शरीर को ठंडक पहुंचाने वाले आहार को अपनाना चाहिए। इसमें सबसे महत्वपूर्ण हैं हल्के और सुपाच्य अनाज जैसे जौ, चावल और गेहूं। ये न केवल पाचन को बेहतर बनाते हैं बल्कि शरीर की आंतरिक गर्मी को भी कम करने में मदद करते हैं। इसके विपरीत उड़द दाल और कुलथी जैसी गरम तासीर वाली चीजों से दूरी बनाना ही बेहतर होता है, क्योंकि ये पित्त को और बढ़ा सकती हैं।

    फलों में मीठे और रसीले विकल्प पित्त संतुलन के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं। सेब, नाशपाती, अंजीर और किशमिश जैसे फल शरीर को ठंडक देते हैं और पाचन को सुधारते हैं। हालांकि आमतौर पर खट्टे फलों से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन आंवला और अनार सीमित मात्रा में लिए जा सकते हैं क्योंकि ये शरीर को पोषण देने के साथ पित्त को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं।

    सब्जियों की बात करें तो खीरा, करेला, मटर और परवल जैसी ठंडी या कड़वी तासीर वाली सब्जियां पित्त को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। वहीं बैंगन, कच्चा प्याज, लहसुन और पालक जैसी गरम प्रकृति वाली सब्जियों का सेवन कम करना चाहिए, क्योंकि ये शरीर की गर्मी को बढ़ा सकती हैं।

    किचन में मौजूद कुछ मसाले भी पित्त नियंत्रण में सहायक होते हैं। सौंफ, धनिया, इलायची और केसर जैसे मसाले शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं। इसके उलट हींग और काली मिर्च का अधिक सेवन जलन और एसिडिटी को बढ़ा सकता है, इसलिए इनका उपयोग सीमित मात्रा में करना ही बेहतर है।

    डेयरी उत्पादों में ठंडा दूध, शुद्ध देसी घी और ताजी छाछ पित्त प्रकृति वाले लोगों के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। ये न केवल शरीर को ठंडा रखते हैं बल्कि पाचन को भी मजबूत बनाते हैं।

    हालांकि केवल डाइट ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव भी उतना ही जरूरी है। पित्त बढ़ने पर तेज धूप से बचना चाहिए और ठंडे वातावरण में समय बिताना लाभकारी होता है। मानसिक शांति बनाए रखने के लिए हल्का संगीत सुनना और पानी के पास समय बिताना भी फायदेमंद होता है।

    कुल मिलाकर, अगर आप अपने शरीर के पित्त को संतुलित रखना चाहते हैं, तो सही खानपान और संतुलित दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी है। इससे न केवल आपका पाचन तंत्र मजबूत होगा, बल्कि आप शारीरिक और मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहेंगे।

  • मोटापा बन रहा बीमारियों का बड़ा कारण, रोजमर्रा की आदतों में बदलाव से करें नियंत्रण

    मोटापा बन रहा बीमारियों का बड़ा कारण, रोजमर्रा की आदतों में बदलाव से करें नियंत्रण


    नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग सुविधाओं के पीछे इतने व्यस्त हो गए हैं कि अपने स्वास्थ्य की ओर ध्यान देना लगभग भूलते जा रहे हैं। यही कारण है कि मोटापा अब केवल दिखने या शरीर की बनावट से जुड़ी समस्या नहीं रह गया है बल्कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। बदलती जीवनशैली असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि जब शरीर का वजन सामान्य सीमा से अधिक हो जाता है तो यह केवल शरीर में अतिरिक्त चर्बी ही नहीं बढ़ाता बल्कि शरीर के अंदरूनी तंत्र को भी प्रभावित करता है। मोटापे के कारण शरीर में आंतरिक सूजन बढ़ने लगती है जो धीरे धीरे इंसुलिन प्रतिरोध को जन्म देती है। यही स्थिति आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों का कारण बनती है जिनमें Type 2 Diabetes High Blood Pressure Thyroid Disease और धमनियों में ब्लॉकेज जैसी समस्याएं शामिल हैं। इसलिए विशेषज्ञ मोटापे को कई बीमारियों का प्रवेश द्वार भी मानते हैं।

    मोटापा बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण आज का बदलता खानपान है। फास्ट फूड जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक्स का अत्यधिक सेवन शरीर में अनावश्यक कैलोरी जमा कर देता है। इन खाद्य पदार्थों में पोषक तत्व कम और वसा व चीनी की मात्रा अधिक होती है जो वजन तेजी से बढ़ाने का काम करते हैं। इसके अलावा लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत भी मोटापे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। ऑफिस में घंटों कंप्यूटर के सामने बैठना और बच्चों का खेल के मैदान के बजाय मोबाइल या टीवी पर समय बिताना शारीरिक सक्रियता को कम कर देता है जिससे शरीर की कैलोरी खर्च नहीं हो पाती।

    इसके साथ ही मानसिक तनाव और अनियमित नींद भी वजन बढ़ने का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं। जब व्यक्ति पर्याप्त नींद नहीं लेता या लगातार तनाव में रहता है तो शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और वजन बढ़ने लगता है। ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मोटापे को नियंत्रित करने के लिए दवाइयों से अधिक जरूरी है कि लोग अपनी जीवनशैली और आदतों में बदलाव करें।

    मोटापा नियंत्रित करने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट तक तेज चलना साइकिल चलाना या योग करना बेहद फायदेमंद माना जाता है। नियमित व्यायाम से शरीर की अतिरिक्त कैलोरी बर्न होती है और वजन नियंत्रित रहता है। इसके साथ ही आहार में भी बदलाव जरूरी है। घर का बना संतुलित और पौष्टिक भोजन हरी सब्जियां फल और साबुत अनाज को प्राथमिकता देनी चाहिए जबकि चीनी और तेल का सेवन कम करना चाहिए।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि स्क्रीन टाइम को सीमित किया जाए खासकर बच्चों के लिए। उन्हें अधिक समय तक मोबाइल या कंप्यूटर पर बैठने के बजाय शारीरिक खेलों के लिए प्रेरित करना चाहिए। इसके अलावा रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लेना भी वजन नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। छोटे छोटे बदलाव जैसे लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का उपयोग करना हर एक घंटे के बाद कुछ मिनट टहलना और दैनिक काम खुद करना भी शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करते हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लोग समय रहते अपनी आदतों में सुधार कर लें तो मोटापे से बचना संभव है और इसके कारण होने वाली कई गंभीर बीमारियों के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • Muscle Loss से बचना है तो 35 के बाद बदलें डाइट और टाइमिंग, न्यूट्रिशनिस्ट ने बताए असरदार नियम

    Muscle Loss से बचना है तो 35 के बाद बदलें डाइट और टाइमिंग, न्यूट्रिशनिस्ट ने बताए असरदार नियम


     नई दिल्ली।  उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं और अक्सर 30 से 35 साल के बाद लोग महसूस करने लगते हैं कि पहले जैसी ताकत और ऊर्जा नहीं रही। मांसपेशियां धीरे धीरे ढीली होने लगती हैं और शरीर की फिटनेस कम होने लगती है। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को सार्कोपेनिया कहा जाता है। इसमें उम्र बढ़ने के साथ मसल्स मास कम होने लगता है।

    मशहूर न्यूट्रिशनिस्ट लवनीत बत्रा के अनुसार यदि सही डाइट और सही समय पर भोजन की आदत अपनाई जाए तो उम्र बढ़ने के बावजूद शरीर को लंबे समय तक मजबूत और फिट रखा जा सकता है। उनका कहना है कि मसल्स बनाने के लिए केवल अच्छा खाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि भोजन का समय भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

    उनके अनुसार जब भी कोई व्यक्ति वर्कआउट करता है तो उसके बाद मांसपेशियों को रिपेयर और मजबूत होने के लिए प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इसलिए एक्सरसाइज के एक से दो घंटे के भीतर 20 से 30 ग्राम हाई क्वालिटी प्रोटीन लेना जरूरी माना जाता है। इससे मसल्स की रिकवरी बेहतर होती है और शरीर की ताकत भी बढ़ती है।

    प्रोटीन के लिए कई अच्छे विकल्प उपलब्ध हैं। अंडे और डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध पनीर और दही शरीर को अच्छा प्रोटीन देते हैं। इसके अलावा चिकन और मछली जैसे लीन मीट भी मसल्स के लिए लाभदायक होते हैं। शाकाहारी लोगों के लिए टोफू और दालें प्रोटीन के अच्छे स्रोत माने जाते हैं।न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार वर्कआउट से पहले भी शरीर को थोड़ी ऊर्जा देना जरूरी होता है। एक्सरसाइज से 30 से 60 मिनट पहले हल्का स्नैक लेना फायदेमंद माना जाता है। इसके लिए ग्रीक योगर्ट या एक मुट्ठी ड्राई फ्रूट जैसे बादाम और अखरोट अच्छे विकल्प हो सकते हैं। इससे वर्कआउट के दौरान मसल्स को नुकसान कम होता है और शरीर बेहतर प्रदर्शन कर पाता है।

    अक्सर लोग वजन कम करने के लिए कार्बोहाइड्रेट और फैट को पूरी तरह छोड़ देते हैं लेकिन ऐसा करना सही नहीं माना जाता। कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देने का काम करते हैं। फल सब्जियां और साबुत अनाज शरीर में ग्लाइकोजन स्टोर को भरते हैं जिससे शरीर जल्दी थकता नहीं है।इसी तरह हेल्दी फैट भी शरीर के लिए जरूरी होते हैं। एवोकाडो जैतून का तेल और बादाम जैसे हेल्दी फैट्स हार्मोन को संतुलित रखने में मदद करते हैं और मांसपेशियों को सुरक्षित रखते हैं।स्वस्थ शरीर के लिए पानी का सही मात्रा में सेवन भी बेहद जरूरी है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर की परफॉर्मेंस बेहतर होती है और वर्कआउट के बाद रिकवरी भी तेजी से होती है।

    न्यूट्रिशनिस्ट का सुझाव है कि दिन भर में तीन से पांच छोटे मील्स लेना चाहिए और हर मील में प्रोटीन जरूर शामिल होना चाहिए। इससे शरीर को लगातार अमीनो एसिड मिलते रहते हैं और मांसपेशियों की मरम्मत और विकास बेहतर तरीके से होता है।लवनीत बत्रा ने पनीर से जुड़ी एक आसान और स्वादिष्ट रेसिपी भी साझा की है। उन्होंने बताया कि घर में मौजूद पनीर की मदद से बिना किसी प्रोटीन पाउडर के लगभग 25 ग्राम प्रोटीन वाला पौष्टिक मील आसानी से तैयार किया जा सकता है।यदि सही डाइट सही समय और नियमित एक्सरसाइज को जीवनशैली का हिस्सा बना लिया जाए तो 35 साल की उम्र के बाद भी शरीर को मजबूत स्वस्थ और फिट बनाए रखना संभव है।