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  • हीटवेव ने बढ़ाई ठंडी हवा की मांग, 80% घर अब भी बिना AC, फिर भी यूरोप में एयर कंडीशनर बाजार ने पकड़ी रिकॉर्ड रफ्तार

    हीटवेव ने बढ़ाई ठंडी हवा की मांग, 80% घर अब भी बिना AC, फिर भी यूरोप में एयर कंडीशनर बाजार ने पकड़ी रिकॉर्ड रफ्तार

    नई दिल्ली । लगातार बढ़ते तापमान और बार-बार पड़ रही भीषण हीटवेव ने यूरोप में रहने के तौर-तरीकों को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है। लंबे समय तक ऐसा माना जाता रहा कि यूरोप की जलवायु एयर कंडीशनर पर निर्भर रहने वाली नहीं है, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। रिकॉर्ड स्तर की गर्मी ने न केवल लोगों की दिनचर्या प्रभावित की है, बल्कि एयर कंडीशनिंग उद्योग के लिए भी नए अवसर पैदा कर दिए हैं। यही वजह है कि दुनिया के सबसे कम एसी उपयोग वाले क्षेत्रों में शामिल यूरोप अब सबसे तेज़ी से बढ़ते एयर कंडीशनर बाजार के रूप में उभर रहा है।

    यूरोप के अधिकांश देशों में दशकों तक गर्मियों का मौसम अपेक्षाकृत हल्का रहा। इसी कारण यहां के घरों, कार्यालयों और सार्वजनिक भवनों का निर्माण ठंडी जलवायु को ध्यान में रखकर किया गया। मोटी दीवारें, सीमित वेंटिलेशन और गर्मी को भीतर रोकने वाली संरचनाएं पहले उपयोगी थीं, लेकिन बदलती जलवायु में यही डिज़ाइन अब बड़ी चुनौती बन गए हैं। लगातार बढ़ती गर्मी के बीच घरों के भीतर तापमान लंबे समय तक बना रहता है, जिससे लोगों के लिए सामान्य जीवन भी कठिन हो जाता है।

    यूरोप के करीब 80 प्रतिशत घरों में आज भी एयर कंडीशनर उपलब्ध नहीं हैं। इसके पीछे ऐतिहासिक जलवायु, ऊंची बिजली दरें, महंगा इंस्टॉलेशन, पुराने भवनों पर निर्माण संबंधी प्रतिबंध और पर्यावरण संरक्षण जैसी कई वजहें रही हैं। कई देशों में ऐतिहासिक इमारतों पर बाहरी एसी यूनिट लगाने की अनुमति भी नहीं मिलती, जिससे नई व्यवस्था स्थापित करना आसान नहीं होता।

    हालांकि पिछले कुछ वर्षों में लगातार रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने लोगों की सोच बदल दी है। फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली और ब्रिटेन जैसे देशों में गर्मियों के दौरान तापमान कई बार 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। ऐसे हालात में एयर कंडीशनर अब विलासिता नहीं बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी आवश्यकता के रूप में देखा जाने लगा है। इसी बदलाव ने पूरे यूरोप में एसी की मांग को नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया है।

    बाजार में इस परिवर्तन का असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। रिटेल स्टोर, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां लगातार बढ़ती मांग का सामना कर रही हैं। कई स्थानों पर स्टॉक तेजी से समाप्त हो रहे हैं और पोर्टेबल एयर कंडीशनर, कूलिंग डिवाइस तथा पंखों की बिक्री में कई गुना वृद्धि दर्ज की जा रही है। निर्माताओं ने भी यूरोपीय बाजार के लिए विशेष मॉडल तैयार करने शुरू कर दिए हैं, ताकि बदलती जरूरतों के अनुरूप उत्पाद उपलब्ध कराए जा सकें।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा जलवायु रुझान जारी रहे तो आने वाले वर्षों में यूरोप में एयर कंडीशनर की संख्या कई गुना बढ़ सकती है। हालांकि इसके साथ ऊर्जा खपत, बिजली आपूर्ति और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर बहस भी तेज हो रही है। एक वर्ग का मानना है कि भीषण गर्मी से लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, जबकि दूसरा पक्ष ऊर्जा दक्ष भवनों और टिकाऊ कूलिंग तकनीकों को अधिक उपयुक्त समाधान मानता है।

    बदलते मौसम ने स्पष्ट कर दिया है कि यूरोप अब केवल ठंडी जलवायु वाला महाद्वीप नहीं रह गया है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों ने वहां रहने की परिस्थितियों को तेजी से बदला है और एयर कंडीशनर उद्योग को अभूतपूर्व विस्तार का अवसर दिया है। आने वाले वर्षों में कूलिंग तकनीक, ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ निर्माण मॉडल यूरोप की नई शहरी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने की संभावना है।

  • एमपी में चार दिन तक लू और उमस का कहर, 25 जून के बाद मानसून की दस्तक के संकेत

    एमपी में चार दिन तक लू और उमस का कहर, 25 जून के बाद मानसून की दस्तक के संकेत


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मौसम के तेवर फिलहाल राहत देने वाले नहीं हैं। प्रदेश में 26 जून तक लू, उमस भरी गर्मी और कहीं-कहीं आंधी-बारिश का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। मानसून की एंट्री में देरी और प्री-मानसून गतिविधियों के कमजोर पड़ने से गर्मी का प्रभाव बढ़ गया है। पिछले दो दिनों से जबलपुर संभाग के कई इलाकों में हीटवेव का असर भी महसूस किया जा रहा है।

    मौसम विभाग के भोपाल केंद्र ने जबलपुर, रीवा और सागर संभाग के जिलों के लिए अगले चार दिनों तक हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। सोमवार को नरसिंहपुर, जबलपुर, मंडला, उमरिया और डिंडौरी में दिन के समय गर्म हवाएं चलने की संभावना है। हालांकि शाम के बाद कुछ क्षेत्रों में आंधी और बारिश हो सकती है।

    इसके अलावा ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, गुना, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, राजगढ़, भोपाल, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, देवास, सीहोर, इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में भी गर्मी का असर बना रहने का अनुमान है।


    21 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश की संभावना

    हीटवेव और गर्मी के बीच प्रदेश के 21 से अधिक जिलों में आंधी और बारिश का दौर भी जारी रह सकता है। झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, मैहर, अनूपपुर, कटनी, दमोह, सागर, विदिशा और अशोकनगर में तेज आंधी चलने का अलर्ट जारी किया गया है।

    रायसेन में सबसे ज्यादा बारिश
    रविवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी और बारिश दर्ज की गई। रायसेन में 61 मिमी यानी करीब ढाई इंच बारिश हुई। भोपाल में दोपहर के समय जोरदार बारिश हुई, जबकि सतना में लगभग पौन इंच पानी गिरा। जबलपुर, खजुराहो, नौगांव और सिवनी में भी बारिश का सिलसिला बना रहा।

    तापमान में आई गिरावट
    बारिश के असर से रविवार को अधिकतम तापमान में कुछ कमी दर्ज की गई। भोपाल में तापमान 35.3 डिग्री सेल्सियस, इंदौर में 37.1 डिग्री, ग्वालियर में 39.7 डिग्री, उज्जैन में 36 डिग्री और जबलपुर में 38 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के हिल स्टेशन पचमढ़ी में सबसे कम 32.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। वहीं सिवनी और शिवपुरी में 35 डिग्री, रायसेन में 36 डिग्री तथा सागर और टीकमगढ़ में 36.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। दतिया प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां पारा 40.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

    मानसून की दस्तक में अभी और इंतजार

    मध्य प्रदेश में मानसून निर्धारित समय से करीब सात दिन देरी से चल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून को प्रदेश में प्रवेश करने में अभी लगभग चार दिन और लग सकते हैं। अनुमान है कि 25 जून के बाद मानसून प्रदेश में दस्तक देगा। वहीं 23 जून तक इसके छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की ओर आगे बढ़ने की संभावना है।

  • क्या बदल रहा है धरती पर सूरज की रोशनी का संतुलन? कुछ जगह बढ़ेगी गर्मी, कहीं कम पहुंचेगी धूप

    क्या बदल रहा है धरती पर सूरज की रोशनी का संतुलन? कुछ जगह बढ़ेगी गर्मी, कहीं कम पहुंचेगी धूप


    नई दिल्ली । धरती पर जीवन का आधार मानी जाने वाली सूर्य की रोशनी अब पूरी दुनिया में समान रूप से नहीं पहुंच रही है। वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च में संकेत मिले हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी के विभिन्न हिस्सों में धूप का संतुलन बदल रहा है। इसका असर भविष्य में मौसम, तापमान, कृषि उत्पादन और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर दिखाई दे सकता है।

    हाल ही में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग और बदलते जलवायु पैटर्न के कारण पृथ्वी तक पहुंचने वाली सूर्य ऊर्जा का वितरण प्रभावित हो रहा है। चीन की एक शोध टीम द्वारा किए गए अध्ययन में उन्नत जलवायु मॉडल और कंप्यूटर सिमुलेशन का उपयोग किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि बढ़ते तापमान के साथ वातावरण में नमी और बादलों के स्वरूप में बदलाव हो रहा है, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों में सूर्य की किरणों की मात्रा भी बदल रही है।

    अध्ययन के मुताबिक, आर्कटिक और अंटार्कटिका जैसे ध्रुवीय क्षेत्रों में भविष्य में सूर्य की रोशनी कम पहुंच सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ती नमी और घने बादलों की वजह से सूर्य की कई किरणें धरती तक पहुंचने से पहले ही परावर्तित होकर वापस अंतरिक्ष में चली जाएंगी। अनुमान है कि आर्कटिक क्षेत्र में गर्मियों के दौरान सूर्य ऊर्जा में उल्लेखनीय कमी दर्ज की जा सकती है।

    दूसरी ओर, भारत, अमेरिका और यूरोप के कई मध्य अक्षांश वाले क्षेत्रों में स्थिति अलग हो सकती है। इन इलाकों में बादलों की मात्रा घटने की संभावना जताई गई है। कम बादलों का अर्थ है कि सूर्य की किरणें अधिक मात्रा में धरती तक पहुंचेंगी, जिससे गर्मी और तापमान में वृद्धि हो सकती है। भारत जैसे देशों में, जहां पहले से ही हीटवेव एक गंभीर चुनौती बन चुकी है, वहां इस बदलाव का असर और अधिक महसूस किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सूर्य की रोशनी के इस असंतुलन के पीछे कई कारण काम कर रहे हैं। बढ़ता वैश्विक तापमान वातावरण में अधिक नमी पैदा कर रहा है। यह नमी कई क्षेत्रों में सूर्य की ऊर्जा को अवशोषित कर लेती है, जबकि कुछ इलाकों में बादलों की कमी के कारण अधिक धूप जमीन तक पहुंच रही है। वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को “डाउनवर्ड सरफेस सोलर रेडिएशन” के रूप में परिभाषित करते हैं, जिसका अर्थ है वह सौर ऊर्जा जो वातावरण को पार करके सीधे पृथ्वी की सतह तक पहुंचती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जलवायु परिवर्तन की गति इसी तरह जारी रही तो भविष्य में इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। कृषि उत्पादन, जल संसाधन, मानव स्वास्थ्य और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं भी इससे प्रभावित हो सकती हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक लगातार ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने और पर्यावरण संरक्षण के उपायों पर जोर दे रहे हैं।

    हालांकि यह बदलाव धीरे-धीरे हो रहा है, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि इसके संकेत अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। आने वाले दशकों में सूर्य की रोशनी का यह बदलता संतुलन दुनिया के मौसम तंत्र को नई दिशा दे सकता है।

  • गर्मी का कहर जारी, उमस ने बढ़ाई परेशानी; कुछ जगहों पर राहत की बूंदें संभव

    गर्मी का कहर जारी, उमस ने बढ़ाई परेशानी; कुछ जगहों पर राहत की बूंदें संभव


    मध्‍य प्रदेश 6 जून को मौसम का मिजाज अधिकतर इलाकों में गर्म और उमस भरा बना हुआ है। Monsoon की सक्रियता अभी सीमित है, जिसके कारण कई क्षेत्रों में तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को परेशान कर रखा है। दिन के समय तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

    सुबह से ही आसमान साफ और धूप तीखी रहने के कारण गर्मी का प्रभाव अधिक महसूस किया गया। दोपहर के समय उमस का स्तर बढ़ने से लोगों को बेचैनी का सामना करना पड़ा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार नमी की अधिकता के कारण गर्मी और अधिक तीव्र महसूस हो रही है।

    हालांकि, मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। यह बारिश मुख्य रूप से स्थानीय बादलों के बनने और नमी के दबाव के कारण संभव है। इससे उन इलाकों में अस्थायी राहत मिल सकती है जहां तापमान अधिक है।

    ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गर्मी का असर समान रूप से देखा जा रहा है। दोपहर के समय बाजारों और सड़कों पर आवाजाही कम हो रही है, जबकि लोग दिन के गर्म हिस्से में घरों के अंदर रहना ही बेहतर समझ रहे हैं।

    मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यदि नमी और बादलों की गतिविधि बढ़ती है तो मौसम में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर बारिश की संभावना बनी हुई है।

    कुल मिलाकर, 6 जून का दिन गर्मी और उमस से भरा रहेगा, लेकिन कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश लोगों को थोड़ी राहत दे सकती है।

  • दिल्ली-एनसीआर में मौसम ने अचानक ली करवट, दिन में छाया अंधेरा; तेज आंधी और झमाझम बारिश से मिली गर्मी से राहत

    दिल्ली-एनसीआर में मौसम ने अचानक ली करवट, दिन में छाया अंधेरा; तेज आंधी और झमाझम बारिश से मिली गर्मी से राहत

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर क्षेत्र में गुरुवार को मौसम ने अचानक करवट ले ली। दोपहर तक जहां तेज धूप और उमस लोगों को परेशान कर रही थी, वहीं कुछ ही समय बाद आसमान में घने बादल छा गए और तेज धूल भरी आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। मौसम के इस अप्रत्याशित बदलाव ने राजधानी और आसपास के इलाकों में दिन के समय ही रात जैसा माहौल पैदा कर दिया। कई स्थानों पर दृश्यता प्रभावित हुई, जबकि तेज हवाओं और बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी और लू से बड़ी राहत दिलाई।

    दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और आसपास के कई क्षेत्रों में अचानक मौसम बदलने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। दिनभर की चिलचिलाती गर्मी से परेशान लोगों ने बारिश का स्वागत किया। कई जगहों पर तेज हवाओं के कारण पेड़ों की शाखाएं झूलती नजर आईं, जबकि सड़कों पर वाहन चालकों को सावधानी बरतनी पड़ी। बारिश शुरू होते ही कई इलाकों में यातायात की रफ्तार भी प्रभावित हुई।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग ने पहले ही दिल्ली-एनसीआर के लिए गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई थी। विभाग ने 4 और 5 जून के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमी गतिविधियों के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक मौसम में बदलाव बना रह सकता है।

    मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार गुरुवार को अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे रह सकता है, जबकि रात के समय भी बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है। इससे तापमान में और गिरावट आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव राजधानी क्षेत्र में पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी के दौर को कुछ समय के लिए कमजोर कर सकता है।

    पूर्वानुमान के मुताबिक शुक्रवार को भी दिल्ली-एनसीआर में मौसम का यही रुख बना रह सकता है। गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है। इसके चलते अधिकतम तापमान में कमी बनी रह सकती है और लोगों को गर्मी से राहत मिलती रहेगी। हालांकि मौसम विभाग ने खुले स्थानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास अनावश्यक रूप से खड़े न रहने की सलाह दी है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून पूर्व गतिविधियों के कारण इस तरह के बदलाव सामान्य हैं, लेकिन तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए सावधानी बरतना आवश्यक है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों, खुले में काम करने वाले लोगों और किसानों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

    आने वाले दिनों में राजधानी क्षेत्र में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहने की संभावना है। हालांकि सप्ताहांत तक तापमान में फिर से कुछ बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन फिलहाल बारिश और बादलों ने लोगों को झुलसाने वाली गर्मी से बड़ी राहत पहुंचाई है। मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकतानुसार नई चेतावनियां जारी की जा सकती हैं।

  • गर्मी में स्टाइल भी, सुरक्षा भी! UV कपड़े बन रहे नया फैशन ट्रेंड

    गर्मी में स्टाइल भी, सुरक्षा भी! UV कपड़े बन रहे नया फैशन ट्रेंड


    नई दिल्ली । भीषण गर्मी, चिलचिलाती धूप और लगातार बढ़ती हीटवेव के बीच अब लोगों को राहत देने का नया तरीका फैशन ट्रेंड बनता जा रहा है। पहले जहां लोग धूप से बचने के लिए सनस्क्रीन, दुपट्टा, ग्लव्स और छाते का सहारा लेते थे, वहीं अब बाजार में ऐसे खास कपड़े तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं जिनमें “सनस्क्रीन” जैसी सुरक्षा पहले से मौजूद है। UV-प्रोटेक्टिव क्लोदिंग यानी अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने वाले कपड़े अब फैशन और हेल्थ दोनों का कॉम्बिनेशन बन चुके हैं।

    इन खास कपड़ों की मांग खासतौर पर उन लोगों में तेजी से बढ़ रही है जो रोजाना बाइक, स्कूटी, साइकिल या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर करते हैं। लंबे समय तक धूप में रहने से होने वाली टैनिंग, सनबर्न और स्किन डैमेज से बचने के लिए लोग अब UV-सुरक्षा वाले जैकेट, शर्ट, ट्राउजर, टोपी, ग्लव्स और स्कार्फ खरीद रहे हैं।

    UV-प्रोटेक्टिव कपड़े सामान्य फैब्रिक से अलग तकनीक से तैयार किए जाते हैं। इनमें धागों की बुनाई काफी घनी होती है ताकि सूरज की हानिकारक किरणें आसानी से कपड़े के आर-पार न जा सकें। इसके अलावा इनमें पॉलिएस्टर, नायलॉन और हाई-टेक कॉटन ब्लेंड जैसे फैब्रिक का इस्तेमाल किया जाता है, जो UV किरणों को बेहतर तरीके से ब्लॉक करते हैं। कई कंपनियां इन कपड़ों पर खास मिनरल या केमिकल कोटिंग भी करती हैं, जिसमें जिंक ऑक्साइड और टाइटेनियम डाइऑक्साइड जैसे तत्व शामिल होते हैं। ये UV किरणों को रिफ्लेक्ट करने में मदद करते हैं।

    विशेषज्ञों के मुताबिक जैसे सनस्क्रीन में SPF रेटिंग होती है, वैसे ही इन कपड़ों में UPF यानी अल्ट्रावायलेट प्रोटेक्शन फैक्टर होता है। यह बताता है कि कपड़ा कितनी UV किरणों को रोक सकता है। UPF 15 से 20 वाले कपड़े सामान्य सुरक्षा देते हैं, जबकि UPF 30 से 40 अच्छी सुरक्षा माने जाते हैं। वहीं UPF 50 वाले कपड़े लगभग 98 प्रतिशत तक UV किरणों को ब्लॉक कर सकते हैं।

    फैशन और स्किन प्रोटेक्शन का यह कॉम्बिनेशन लोगों को खूब पसंद आ रहा है। पहले जहां लोग गर्मी में चेहरा ढंककर निकलते थे, वहीं अब स्टाइलिश UV जैकेट और फुल स्लीव कपड़े नया स्टाइल स्टेटमेंट बनते जा रहे हैं। खासतौर पर युवाओं और आउटडोर एक्टिविटी करने वाले लोगों में इसका क्रेज तेजी से बढ़ा है।

    बढ़ती गर्मी और सन डैमेज का डर भी इस ट्रेंड के पीछे बड़ी वजह माना जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक तेज धूप में रहने से स्किन एजिंग, पिग्मेंटेशन और स्किन कैंसर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में UV कपड़े एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी साफ करते हैं कि UV-प्रोटेक्टिव कपड़े पहनने का मतलब यह नहीं है कि सनस्क्रीन की जरूरत खत्म हो गई। चेहरे, हाथों और शरीर के खुले हिस्सों पर सनस्क्रीन लगाना अब भी जरूरी है। साथ ही धूप का चश्मा और हाइड्रेशन भी बेहद जरूरी माना जाता है।

    जानकारों के मुताबिक अगर ये कपड़े गीले हो जाएं तो उनकी UPF क्षमता कम हो सकती है। इसलिए धूप में लंबे समय तक रहने पर अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। फिलहाल फैशन इंडस्ट्री में UV-प्रोटेक्टिव क्लोदिंग तेजी से अपनी जगह बना रही है। स्टाइल, आराम और सुरक्षा का यह नया फॉर्मूला आने वाले समय में गर्मियों की जरूरत बन सकता है।

  • एमपी में भीषण गर्मी का दौर जारी, आज भी तीव्र लू की चेतावनी, 28 मई से तीन दिन बारिश की संभावना

    एमपी में भीषण गर्मी का दौर जारी, आज भी तीव्र लू की चेतावनी, 28 मई से तीन दिन बारिश की संभावना

    भोपाल। मध्यप्रदेश में नौतपा के शुरुआती दो दिनों में जहां कई इलाकों में आंधी और बारिश देखने को मिली, वहीं अब मौसम विभाग ने 28 मई से लगातार तीन दिन तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार यह प्री-मानसून गतिविधियों की शुरुआत मानी जा रही है। विभाग का अनुमान है कि प्रदेश में मानसून 10 से 16 जून के बीच दस्तक दे सकता है।

    बुधवार को निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा जिलों में तीव्र लू का रेड अलर्ट जारी किया गया है। टीकमगढ़ में रात के समय भी तापमान अधिक बना रहने की संभावना है। वहीं ग्वालियर और जबलपुर में भी तीव्र लू का असर रहने की चेतावनी दी गई है। राजधानी भोपाल में भी हीटवेव चलने के आसार हैं।

    मंगलवार को प्रदेश के 16 शहरों में अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया। छतरपुर जिले के खजुराहो और नौगांव सबसे गर्म रहे। खजुराहो में तापमान 46.4 डिग्री और नौगांव में 45.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

    इसके अलावा दतिया में 45.2 डिग्री, दमोह, सतना और टीकमगढ़ में 45 डिग्री, रीवा में 44.8 डिग्री, राजगढ़ में 44.6 डिग्री, श्योपुर में 44.4 डिग्री तथा गुना में 44.3 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। नरसिंहपुर में 44.2 डिग्री, जबकि सागर, मंडला, मुरैना और रायसेन में तापमान 44 डिग्री तक पहुंच गया।

    प्रदेश के पांच बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां पारा 44.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल में 43.2 डिग्री, जबलपुर में 43.9 डिग्री, उज्जैन में 42 डिग्री और इंदौर में 41.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    भोपाल में पिछले 14 वर्षों में सात बार नौतपा के दौरान बारिश दर्ज की गई है, जबकि दो बार केवल बूंदाबांदी हुई थी। इस बार भी नौतपा की शुरुआत में हल्की बारिश हो चुकी है। वर्ष 2018 और 2019 में सबसे अधिक गर्मी दर्ज की गई थी, जब औसत तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया था।

    मौसम विभाग ने बुधवार के लिए छह जिलों—निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं 19 जिलों में तीव्र लू का ऑरेंज अलर्ट और 22 जिलों में लू का येलो अलर्ट घोषित किया गया है। इंदौर, धार, बड़वानी, झाबुआ, अलीराजपुर, हरदा, नर्मदापुरम और बैतूल में तेज गर्मी का असर रहने की संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार 28 मई तक प्रदेश में गर्मी अपने चरम पर बनी रहेगी। हालांकि 29 मई से आंधी, बारिश और गरज-चमक के साथ मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • भीषण गर्मी की चपेट में उत्तर भारत, बांदा बना देश का सबसे गर्म शहर, कई राज्यों में हीटवेव का अलर्ट

    भीषण गर्मी की चपेट में उत्तर भारत, बांदा बना देश का सबसे गर्म शहर, कई राज्यों में हीटवेव का अलर्ट

    नई दिल्ली। उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार बढ़ते तापमान के बीच उत्तर प्रदेश का बांदा जिला मंगलवार को देश का सबसे गर्म इलाका दर्ज किया गया, जहां अधिकतम तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम विभाग ने बांदा समेत कई शहरों में गंभीर लू की चेतावनी जारी की है।

    मौसम विभाग के अनुसार मैदानी क्षेत्रों में जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है, तो उसे हीटवेव की स्थिति माना जाता है। इसी कारण उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में लू का अलर्ट जारी किया गया है।

    उत्तर प्रदेश में बांदा के अलावा उरई में 45.8 डिग्री, झांसी में 45.5 डिग्री, प्रयागराज में 45.4 डिग्री, आगरा में 45.3 डिग्री और हमीरपुर में 45.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। राज्य के कई इलाकों में रात के समय भी गर्म हवाओं का असर बना रहा, जिससे लोगों को रात में भी राहत नहीं मिल सकी।

    राजस्थान में भी गर्मी का प्रकोप जारी है। श्रीगंगानगर राज्य का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 47 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बीकानेर और फलोदी में 46 डिग्री, जैसलमेर में 45.6 डिग्री और कोटा में 45.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। राजधानी जयपुर में भी तेज गर्मी रही और अधिकतम तापमान 43.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।

    महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में भी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया है। ब्रह्मपुरी में तापमान 46.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से 3.5 डिग्री अधिक रहा। चंद्रपुर में 46.4 डिग्री, वर्धा में 46 डिग्री, नागपुर के सोनेगांव क्षेत्र में 45.5 डिग्री और गोंदिया में 45.2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।

    हरियाणा में सिरसा सबसे गर्म जिला रहा, जहां तापमान 46 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। रोहतक में पारा 45.6 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं पंजाब के बठिंडा में अधिकतम तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी भीषण गर्मी का असर देखने को मिला। सफदरजंग वेधशाला में अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 3.1 डिग्री अधिक था। मौसम विभाग के मुताबिक दिल्ली के आयानगर, रिज और लोधी रोड क्षेत्रों में तापमान हीटवेव के आधिकारिक मानक से मामूली कम रहा, अन्यथा पूरी राजधानी गंभीर लू की चपेट में आ सकती थी।

    हालांकि मौसम विभाग ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को जल्द राहत मिलने की संभावना जताई है। IMD के अनुसार 29 मई से राजधानी में आंधी और बारिश का दौर शुरू हो सकता है, जिससे तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है।

  • एशिया से लेकर यूरोप तक…. रिकॉर्डतोड़ गर्मी से लोग परेशान….ब्रिटेन, फ्रांस और स्पेन में भी लू का कहर

    एशिया से लेकर यूरोप तक…. रिकॉर्डतोड़ गर्मी से लोग परेशान….ब्रिटेन, फ्रांस और स्पेन में भी लू का कहर


    नई दिल्ली।
    दुनिया इस समय भीषण गर्मी (Extreme heat) और लगातार बढ़ते तापमान की चुनौती का सामना कर रही है। भारत (India) में जहां कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है, वहीं यूरोप, एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में भी रिकॉर्डतोड़ गर्मी (Record Breaking Heat) ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो (El Niño) और जलवायु परिवर्तन (Climate change) के कारण हीटवेव (Heatwaves) अब पहले से ज्यादा खतरनाक, लंबी और जल्दी आने लगी हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, जो गर्मी पहले जून-जुलाई में देखने को मिलती थी, अब वह मई महीने में ही रिकॉर्ड तोड़ रही है। कई देशों में स्कूलों, खेल आयोजनों और सार्वजनिक गतिविधियों पर असर पड़ा है। कुछ जगहों पर मौतों और स्वास्थ्य संकट की घटनाएं भी सामने आई हैं।


    ब्रिटेन में गर्मी ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड

    ब्रिटेन में मई महीने का अब तक का सबसे गर्म दिन रिकॉर्ड किया गया। देश के मौसम विभाग के अनुसार लंदन के क्यू गार्डन्स में तापमान 34.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने 1922 और 1944 के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी गर्मी आमतौर पर जुलाई या अगस्त में देखने को मिलती है, लेकिन इस बार मई में ही लोगों को झुलसा देने वाली गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी से बचने के लिए लोग पार्कों, फव्वारों और स्विमिंग पूल का सहारा लेते नजर आए।


    फ्रांस में 350 से ज्यादा शहरों में तापमान का रिकॉर्ड टूटा

    फ्रांस में भी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। देश के 350 से ज्यादा शहरों में मई महीने के तापमान के रिकॉर्ड टूट गए हैं। कई इलाकों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। सरकार ने कई क्षेत्रों में हाई टेम्परेचर अलर्ट जारी किया है और लोगों को दोपहर के समय घरों में रहने की सलाह दी गई है। पेरिस में एक रनिंग इवेंट के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अधिकारियों का मानना है कि तेज गर्मी इसका एक बड़ा कारण हो सकती है।


    स्पेन में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पहुंचने का अनुमान

    स्पेन भी इस समय भीषण हीटवेव का सामना कर रहा है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। हालात ऐसे हैं कि रात में भी तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं जा रहा, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल रही। विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए।


    वियतनाम में हाल बेहाल

    एशिया में वियतनाम भी गर्मी की मार झेल रहा है। कई इलाकों में तापमान 39 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी है। लोगों को दोपहर 10 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।


    इन देशों में भी गर्मी का कहर

    थाईलैंड – बैंकॉक और अन्य इलाकों में अत्यधिक गर्मी के कारण स्वास्थ्य अलर्ट जारी किए गए हैं।
    फिलीपींस – स्कूलों को ऑनलाइन मोड में चलाने तक की नौबत आई क्योंकि तापमान बेहद ज्यादा बढ़ गया।
    मेक्सिको – लगातार हीटवेव के कारण कई राज्यों में लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं।
    चीन – उत्तरी और मध्य चीन के कई हिस्सों में रिकॉर्डतोड़ गर्मी दर्ज की गई है।
    पाकिस्तान – सिंध और पंजाब के कई इलाकों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है।


    क्या है भारत का हाल?

    देश में नौतपा के पहले दिन सोमवार को उत्तर-पश्चिम से लेकर मध्य भारत तक प्रचंड गर्मी के साथ उमस से लोग बेहाल रहे। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में चिलचिलाती धूप के साथ गर्म लू चलती रही। दिन के साथ रातें भी गर्म रहीं। अभी 4-5 दिन झुलसा देने वाली गर्मी के आसार हैं। वहीं तमिलनाडु में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। चेन्नई स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (RMC) ने मंगलवार को राज्य के आठ जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से दक्षिण-पूर्व अरब सागर तक बने वायुमंडलीय परिसंचरण तंत्र का असर राज्य के कई हिस्सों में देखने को मिलेगा।

  • नौतपा का प्रचंड असर शुरू: इन बीमारियों से जूझ रहे लोग रहें अलर्ट, लापरवाही पड़ सकती है भारी

    नौतपा का प्रचंड असर शुरू: इन बीमारियों से जूझ रहे लोग रहें अलर्ट, लापरवाही पड़ सकती है भारी


    नई दिल्ली।
    देश के कई हिस्सों में नौतपा की शुरुआत के साथ भीषण गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान लगातार बढ़ रहा है और तेज धूप लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य लोगों की तुलना में पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को इस दौरान अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। बढ़ती गर्मी शरीर के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करती है, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं। ऐसे में लापरवाही कई बार बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक नौतपा के दौरान शरीर पर हीट स्ट्रेस तेजी से बढ़ता है। अत्यधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी होने लगती है। इसका सीधा असर शरीर की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। खासतौर पर डायबिटीज, हार्ट, किडनी, अस्थमा और मोटापे से पीड़ित लोगों में जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है। यही वजह है कि डॉक्टर इन मरीजों को समय रहते सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

    डायबिटीज के मरीजों में गर्मी का असर कई तरह से दिखाई देता है। शरीर में पानी की कमी होने पर ब्लड शुगर का स्तर प्रभावित हो सकता है। कई बार डिहाइड्रेशन के कारण शुगर अचानक बढ़ या घट सकती है, जिससे मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है। इसके अलावा इंसुलिन की कार्यक्षमता पर भी अधिक तापमान असर डाल सकता है। इसलिए ऐसे मरीजों को समय-समय पर पानी पीने और शुगर की नियमित जांच करते रहने की सलाह दी जा रही है।

    किडनी रोगियों के लिए भी नौतपा का समय चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। अधिक पसीना निकलने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और पहले से मौजूद समस्या गंभीर हो सकती है। डॉक्टरों का मानना है कि पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना ऐसे मरीजों के लिए बेहद जरूरी है।

    हार्ट मरीजों के लिए भी बढ़ती गर्मी चिंता का विषय है। अत्यधिक तापमान शरीर के तापमान नियंत्रण तंत्र पर दबाव डालता है। कई मामलों में हीट स्ट्रोक या हीट एग्जॉशन की स्थिति बन सकती है, जिससे दिल पर अतिरिक्त भार पड़ता है। इसी तरह अस्थमा और सांस संबंधी मरीजों में गर्म हवा और वातावरणीय बदलाव सांस लेने में परेशानी बढ़ा सकते हैं।

    डॉक्टरों की सलाह है कि नौतपा के दौरान दोपहर में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। हल्के और सूती कपड़े पहनने, पर्याप्त पानी पीने, तला-भुना भोजन कम खाने और शरीर को ठंडा रखने जैसे छोटे उपाय बड़ी समस्याओं से बचा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सही सावधानी और संतुलित दिनचर्या अपनाकर भीषण गर्मी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।