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  • Weather: केरल में इस दिन दस्तक देगा मानसून, दक्षिण में भारी और उत्तर-मध्य में सामान्य से कम बारिश का अनुमान

    Weather: केरल में इस दिन दस्तक देगा मानसून, दक्षिण में भारी और उत्तर-मध्य में सामान्य से कम बारिश का अनुमान


    नई दिल्ली।
    इस मानसून सत्र (Monsoon Session) में देश के लगभग आधे हिस्से, उत्तर और मध्य भारत (North and Central India) में भीषण सूखा पड़ने की आशंका है। जून से सितंबर के बीच होने वाली मानसूनी बारिश (Monsoon Rains) के भी सामान्य से कम रहने का अनुमान है। इसका प्रमुख कारण प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में बन रहा शक्तिशाली अल नीनो है। इसकी वजह से दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में भीषण बाढ़ का खतरा भी है। कृषि प्रधान भारत के लिए मानसून की यह स्थिति बहुत भयावह है, जो बहुत हद तक मानसूनी वर्षा पर निर्भर है।

    भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अल नीनो तेजी से आकार ले रहा है। भारत के लिए अल नीनो हमेशा से ही खराब रहा है। इस बार मजबूत अल नीनो बन रहा है, जिसका भयावह परिणाम हो सकता है। मजबूत अल नीनो दक्षिण पश्चिम मानसून की हवाओं को कमजोर कर देता है। इसका नतीजा यह होता है कि देश के अधिकांश हिस्से में बारिश कम होती है और सूखे जैसे हालात पैदा हो जाता हैं। इस बार उत्तर और मध्य भारत में कुछ ऐसी ही स्थिति की आशंका है। दूसरी तरफ, तमिनलाडु, आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों में तबाही वाली बढ़ आ सकती है। आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार सामान्य तिथि से करीब चार दिन पहले, यानी 26 मई के आसपास केरल तट पर दस्तक दे सकता है। शनिवार को यह दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान- निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में और आगे बढ़ा है। इसके आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।


    यूपी, हरियाणा-पंजाब में सबसे ज्यादा असर

    शक्तिशाली अल नीनो का सबसे अधिक उत्तर और मध्य भारत पर प्रभाव पड़ने की आशंका है। पश्चिम भारत के कुछ हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं। इनमें पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्यों पर बुरा असर पड़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर के लिए गर्मी और सूखे के दोहरे संकट का सामना करना पड़ सकता है।

    मानसूनी बारिश कम होने से प्रमुख फसलों को नुकसान हो सकता है। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों, बिजली आपूर्ति और ग्रामीण आय पर दबाव बढ़ सकता है। भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 70 फीसदी मानसून से आता है और लगभग आधी आबादी कृषि पर निर्भर है, ऐसे में कम बारिश वाला वर्ष भी व्यापक आर्थिक प्रभाव डाल सकता है।


    आईओडी कम कर सकता है असर

    इस भयावह आशंका के बीच इंडियन ओशन डिपोल’ (आईओडी) के रूप में एक उम्मीद की किरण भी नजर आ रही है। जलवायु मॉडल के अनुसार मानसून के आखिरी महीनों में आईओडी सकाकात्मक हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो यह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकता है। मानसूनी हवाओं को थोड़ी मजबूती मिल सकती है जिससे कुछ इलाकों में बारिश की वापसी संभव है।


    लू घोषित करने के मापदंडों में बदलाव करेगा आईएमडी

    आईएमडी अपने विशेषज्ञों के साथ मिलकर जल्द ही देश में लू की स्थिति घोषित करने के मानदंडों में संशोधन करेगा। मौजूदा मापदंड भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल नहीं हैं। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को बताया कि इस गर्मी के मौसम में लोगों को भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा तथा पहली बार कर्नाटक-महाराष्ट्र तट के पास बने चक्रवाती तंत्र के आधार पर मौसम पूर्वानुमान जारी किए गए। इससे पहले कभी भी दक्षिण के इतने करीब कोई चक्रवाती तंत्र नहीं बना था और इस बार हमें इसी के आधार पर मौसम का पूर्वानुमान लगाना पड़ा।


    870 मिलीमीटर होनी चाहिए औसत बारिश

    आईएमडी के पूर्वानुमान एक अनुसार, इस साल मानसूनी बारिश दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के केवल 92 फीसदी होने की संभावना है। एलपीए का यह स्तर सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में आता है। साल 1971 से 2020 के डाटा के आधार पर भारत में औसत बारिश 870 मिलीमीटर होनी चाहिए, लेकिन इस बार इससे कम बारिश होने की आशंका है। आंकड़ों के मुताबिक इस बार सूखे की स्थिति बनने की संभावना 35% है। यह सामान्य वर्षों की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। जून या जुलाई में अल नीनो के पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है।


    44.8 डिग्री पर तपा बांदा

    उत्तर प्रदेश में भी भीषण गर्मी पड़ रही है। शनिवार को राज्य में अधिकतम स्थानों पर पारा 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर ही रहा। बांदा में सबसे अधिक तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं, झांसी में 44.1 डिग्री, प्रयागराज में 44 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रहा। आगरा में 43 डिग्री सेल्सियस, गाजीपुर में 42 डिग्री सेल्सियस और वाराणसी हवाई अड्डे पर 41.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया।

  • बारिश और ओलावृष्टि के बीच चार धाम यात्रा: आस्था का सफर बना चुनौती, यात्रियों के लिए जारी हुए अहम सुरक्षा संकेत

    बारिश और ओलावृष्टि के बीच चार धाम यात्रा: आस्था का सफर बना चुनौती, यात्रियों के लिए जारी हुए अहम सुरक्षा संकेत

    नई दिल्ली ।  उत्तराखंड के ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में इन दिनों मौसम ने करवट ले ली है और लगातार हो रही भारी बारिश तथा ओलावृष्टि ने चार धाम यात्रा को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। यह यात्रा, जो आस्था और श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है, अब यात्रियों के लिए सावधानी और तैयारी की परीक्षा बन गई है। पहाड़ी इलाकों में बदलते मौसम ने यात्रा मार्गों पर जोखिम बढ़ा दिया है और प्रशासन लगातार यात्रियों को सतर्क रहने की अपील कर रहा है।

    चार धाम यात्रा का मार्ग अपने आप में कठिन माना जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में यह और भी संवेदनशील हो जाता है। कई जगहों पर भूस्खलन, सड़क फिसलन और अचानक रास्ता बंद होने जैसी परिस्थितियां बन जाती हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे हालात में बिना तैयारी यात्रा करना खतरनाक साबित हो सकता है और किसी भी समय अप्रत्याशित स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

    यात्रा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात मौसम की लगातार निगरानी रखना है। पहाड़ों में मौसम बहुत तेजी से बदलता है, जहां कुछ ही घंटों में साफ आसमान अचानक घने बादलों और तेज बारिश में बदल सकता है। इस कारण यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले और यात्रा के दौरान मौसम के अपडेट पर ध्यान देना जरूरी है। यदि किसी क्षेत्र में खराब मौसम या चेतावनी जैसी स्थिति बनी हो तो यात्रा को कुछ समय के लिए रोक देना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

    चार धाम यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए समय प्रबंधन भी बेहद जरूरी भूमिका निभाता है। सुबह के समय यात्रा शुरू करना अधिक सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि दिन के शुरुआती हिस्से में मौसम अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। वहीं शाम के समय पहाड़ी क्षेत्रों में धुंध और बारिश का असर बढ़ जाता है, जिससे दृश्यता कम हो जाती है और दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी यात्रा दिन के उजाले में ही पूरी करने की कोशिश करें।

    यात्रा के दौरान हल्का और आवश्यक सामान ही साथ रखना समझदारी भरा कदम है। भारी बैग और अनावश्यक वस्तुएं पहाड़ी रास्तों पर चलने में कठिनाई पैदा कर सकती हैं। बारिश से बचाव के लिए रेनकोट और वाटरप्रूफ कपड़े, साथ ही मजबूत पकड़ वाले जूते यात्रा का हिस्सा होना चाहिए। विशेष रूप से ट्रैकिंग मार्गों पर फिसलन का खतरा अधिक होता है, इसलिए सही जूते और सावधानी बेहद जरूरी है।

    स्वास्थ्य सुरक्षा भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड और कम ऑक्सीजन के कारण थकान, सांस लेने में कठिनाई और कमजोरी जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं। बुजुर्गों और बच्चों को इस मौसम में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। जिन लोगों को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें यात्रा से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

    इसके साथ ही यात्रियों को यह भी समझना होगा कि मौसम खराब होने पर धैर्य रखना और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना सबसे सुरक्षित विकल्प है। कई बार यात्रा को रोकना या मार्ग बदलना असुविधाजनक हो सकता है, लेकिन यह निर्णय जीवन सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।

    कुल मिलाकर कहा जाए तो चार धाम यात्रा केवल धार्मिक आस्था का मार्ग नहीं बल्कि प्रकृति की कठिन परिस्थितियों में धैर्य, तैयारी और सावधानी की परीक्षा भी है। सही योजना, सतर्कता और मौसम के प्रति जागरूकता इस पवित्र यात्रा को सुरक्षित और सफल बनाने की सबसे बड़ी कुंजी है।

  • उत्तर-पश्चिम भारत में बदला मौसम, आंधी-तूफान के साथ हुई झमाझम बारिश.. आज इन राज्यों में अलर्ट

    उत्तर-पश्चिम भारत में बदला मौसम, आंधी-तूफान के साथ हुई झमाझम बारिश.. आज इन राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली।
    पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत (North-West India.) के पहाड़ी इलाकों और आसपास के मैदानी क्षेत्रों में सोमवार को अचानक मौसम ने करवट ली। आंधी-तूफान (Thunderstorms) के साथ कहीं हल्की तो कहीं झमाझम बारिश (Light to heavy rain) हुई। कुछ क्षेत्रों में धूल भरी आंधी और कुछ जगहों पर ओलावृष्टि से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को भी उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में छिटपुट से लेकर कई स्थानों पर गरज और चमक के साथ बारिश होने, 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और ओलावृष्टि की संभावना है।

    मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में आंधी-तूफान के साथ झमाझम बारिश और ओलावृष्टि हुई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में छिटपुट स्थानों पर 11-20 सेमी तक वर्षा दर्ज की गई है। कुछ जगहों पर 60-80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में ओले गिरे। इसके अलावा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम, ओडिशा, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम तथा त्रिपुरा में छिटपुट स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की गई है।

    मौसम में बदलाव से अधिकतम तापमान में 3-5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिमी बंगाल के गंगा किनारे वाले क्षेत्रों, उप-हिमालयी पश्चिमी बंगाल और सिक्किम, पूर्वोत्तर भारत और पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस से कम दर्ज किया गया। विदर्भ, तटीय आंध्र प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, राजस्थान में अधिकतम तापमान 36-40 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। सबसे अधिक तेलंगाना के आदिलाबाद में 45.3 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।


    आज भी आंधी-पानी का अलर्ट

    मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फरबाद और हिमाचल प्रदेश में 6 मई तक और उत्तराखंड में 8 मई तक छिटपुट से लेकर हल्की बारिश और बर्फबारी होने, गरज और बिजली की कड़क के साथ 30-50 किमी प्रति घंटा की गति से हवाएं चलने की संभावना है। मंगलवार को राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और बिहार में भी बारिश हो सकती है। इससे गर्मी से राहत तो मिलेगी, लेकिन फसलों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका है। दिल्ली समेत एनसीआर के गाजियाबाद, नोएडा और हापुड़ में बिजली कड़कने, तेज आंधी और ओले गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

  • भारत में आग बरसा रहा सुपर अल नीनो….IMD ने दी इस राज्य में भारी बारिश की चेतावनी

    भारत में आग बरसा रहा सुपर अल नीनो….IMD ने दी इस राज्य में भारी बारिश की चेतावनी


    नई दिल्ली।
    मौसम के बदलते मिजाज (Changing Weather patterns) और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी (Record Breaking Heat) ने इस साल चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ‘अल नीनो’ (Super El Nino) का वह खतरनाक रूप है, जो इस साल पूरी दुनिया के मौसम चक्र को प्रभावित कर रहा है। प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह का पानी जब असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, तो उस मौसमी घटना को ‘अल नीनो’ कहते हैं। इसका असर भारत (India) पर अभी से देखने को मिल रहा है।

    हालांकि दक्षिणी राज्य केरल के लिए अच्छी खबर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने केरल के कई हिस्सों में आगामी दिनों में भारी बारिश की चेतावनी देते हुए अगले 5 दिनों का विस्तृत मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम में हो रहे अचानक बदलाव को देखते हुए अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।


    इन जिलों में जारी हुआ ‘येलो अलर्ट’

    IMD के 5-दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अप्रैल, 2026 के लिए केरल के चार प्रमुख जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है:- पथानामथिट्टा, इडुक्की, कुन्नूर, कासरगोड।

    मौसम विभाग के अनुसार, ‘येलो अलर्ट’ का अर्थ है कि लोगों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि इन क्षेत्रों में 24 घंटों के भीतर 64.5 मिमी से 115.5 मिमी के बीच भारी बारिश होने की पूरी संभावना है।


    ‘सुपर अल नीनो’ क्या है?

    जब समुद्र की सतह का तापमान अपने दीर्घकालिक औसत से 2°C (या उससे अधिक) ऊपर चला जाता है, तो यह एक असाधारण और विनाशकारी रूप ले लेता है, जिसे वैज्ञानिक ‘सुपर अल नीनो’ कहते हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और कई ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल्स ने चेतावनी दी है कि 2026 में मई-जुलाई तक यह स्थिति हावी हो सकती है। कुछ विशेषज्ञ इसे पिछले 140 सालों के सबसे ताकतवर चक्रों में से एक मान रहे हैं। इसका सीधा असर वैश्विक तापमान में वृद्धि और मौसम के चरम रूप के तौर पर सामने आता है।

    मॉनसून और अल नीनो (El Nino) से इसका संबंध

    गर्मियों के मौसम में अचानक होने वाली यह भारी बारिश जलवायु परिवर्तन और विशेष रूप से अल नीनो प्रभाव का परिणाम है, जिसका सीधा असर भारत के मॉनसून चक्र पर पड़ता है। इसे ऐसे समझा जा सकता है।

    प्री-मॉनसून गतिविधियां: अल नीनो में प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। भले ही अल नीनो आमतौर पर भारत में मुख्य ‘दक्षिण-पश्चिम मॉनसून’ (जून से सितंबर) को कमजोर कर देता है, लेकिन मॉनसून से ठीक पहले (प्री-मॉनसून) के चरण में यह बहुत ही अस्थिर मौसम उत्पन्न कर सकता है।

    ला नीना से अल नीनो का संक्रमण: साल 2026 की शुरुआत में ‘ला नीना’ का प्रभाव कमजोर हुआ है और यह ‘अल नीनो’ की तरफ बढ़ रहा है। समुद्र के बढ़ते तापमान और स्थानीय वायुमंडलीय दबाव के इस जटिल टकराव के कारण ही केरल में एकाएक बेमौसम भारी बारिश और तूफान देखने को मिल रहे हैं।

    मॉनसून के मौसम पर ‘छाया’: यह अप्रत्याशित बारिश इस बात का संकेत है कि इस साल मुख्य मॉनसून चक्र में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। मॉनसून की शुरुआत से पहले ही कहीं अचानक तीव्र बारिश तो कहीं लू (हीटवेव) चलने जैसी स्थितियां बन रही हैं।


    भारत में अभी से इतनी ‘आग’ क्यों बरस रही है?

    अप्रैल 2026 में ही उत्तर प्रदेश (बांदा, फतेहपुर, इटावा जैसे जिले), मध्य प्रदेश और कई अन्य हिस्सों में तापमान 45-46°C को पार कर गया है। इसके पीछे कई भौगोलिक और मौसमी कारण एक साथ काम कर रहे हैं। साल की शुरुआत में ला नीना (ठंडा चरण) खत्म हो गया है और पृथ्वी तेजी से ‘अल नीनो’ के गर्म चरण में जा रही है। इससे वायुमंडल में गर्माहट काफी तेजी से बढ़ रही है।

    उत्तर और मध्य भारत के ऊपर बादलों का कोई कवर नहीं है। साफ आसमान के कारण सूरज की किरणें बिना किसी रुकावट के सीधे धरती पर पड़ रही हैं, जिससे हवा का एक ‘गर्म गुंबद’ बन गया है जो गर्मी को बाहर नहीं निकलने दे रहा। उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों की मिट्टी पूरी तरह सूख चुकी है। हवा में नमी न के बराबर है और वहां से आने वाली सूखी महाद्वीपीय हवाएं तापमान को सीधे बढ़ा रही हैं, जिससे शहरों का माहौल किसी भट्टी जैसा हो गया है।


    इस साल कैसा रहेगा मॉनसून और कब होगी बारिश?

    भारत में कृषि और अर्थव्यवस्था की धुरी माने जाने वाले मॉनसून पर इस साल ‘अल नीनो’ की स्पष्ट छाया मंडरा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 13 अप्रैल 2026 को जारी अपने लंबी अवधि के पूर्वानुमान में यह तस्वीर साफ कर दी है। IMD के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून से सितंबर) के “सामान्य से नीचे” रहने की संभावना सबसे अधिक है। देश भर में इस बार औसतन मात्र 92% बारिश (LPA का) होने का अनुमान है।

    कब आएगा मॉनसून?

    आमतौर पर मॉनसून 1 जून को केरल तट से टकराता है। हालांकि मानसून अपने समय पर दस्तक दे सकता है, लेकिन जुलाई-अगस्त तक अल नीनो पूरी तरह हावी हो जाएगा। इससे मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और बारिश के वितरण में भारी असमानता देखने को मिल सकती है। बारिश कम होने और तापमान अधिक रहने से धान, दलहन और गन्ने जैसी खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जो एक बड़ी आर्थिक चिंता का विषय है।

  • Weather: गर्मी के मौसम में तेज बारिश.. ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान… कई राज्यों में आज भी अलर्ट

    Weather: गर्मी के मौसम में तेज बारिश.. ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान… कई राज्यों में आज भी अलर्ट


    नई दिल्ली।
    पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और ऊपरी हवा में बने चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से देशभर के मौसम (Weather) में बड़ा बदलाव दर्ज किया जा रहा है, जिसका सबसे ज्यादा असर उत्तर भारत (North India.) में दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग के अनुसार जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों में भारी बारिश (Heavy Rain), तेज आंधी, तूफान और ओलावृष्टि (Hailstorm) की चेतावनी जारी की गई है। 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं, जबकि किसानों को फसलों के नुकसान का खतरा बढ़ गया है।

    देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जहां 64.5 से 115.5 मिमी तक वर्षा होने का अनुमान है। इन इलाकों में ऑरेंज अलर्ट लागू है और कई स्थानों पर पहले से ही बादल छाए हुए हैं तथा बारिश का दौर जारी है। पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के चलते भूस्खलन जैसी घटनाओं की आशंका भी जताई गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय है। इसके साथ ही ऊपरी हवा में चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है और पश्चिमी भारत के ऊपर उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम लगातार सक्रिय है। इन सभी मौसमीय प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से देश के विभिन्न हिस्सों में अस्थिर मौसम की स्थिति बनी हुई है, जिसमें बारिश, तूफान और ओलावृष्टि शामिल हैं।


    राजस्थान के कई जिलों में खेतों में बिछी सफेद चादर

    राजस्थान में शनिवार को पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से दोपहर बाद मौसम में बदलाव आया। जयपुर, अजमेर, भरतपुर, कोटा और उदयपुर सहित कई जिलों में गरज के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और हल्की से मध्यम बारिश के साथ छिटपुट ओलावृष्टि भी हुई। बीकानेर में शुक्रवार को खेतों में ओले बिछे नजर आए थे। मौसम विभाग ने बताया कि एक नया और शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ 6 अप्रैल की दोपहर से जोधपुर और बीकानेर के कुछ हिस्सों में सक्रिय होने की संभावना है।

    इसके प्रभाव से जोधपुर, बीकानेर, अजमेर, जयपुर, भरतपुर और कोटा डिवीजनों के कई हिस्सों में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने, कुछ जगहों पर भारी बारिश होने और छिटपुट ओलावृष्टि होने की संभावना है।


    बंगाल में उमस भरी गर्मी जारी

    जहां एक ओर उत्तर और पश्चिम भारत में मौसम ठंडा और अस्थिर हो रहा है, वहीं पश्चिम बंगाल के गंगा तटीय क्षेत्रों में गर्म और उमस भरा मौसम बना हुआ है। इस तरह की उमस शरीर को थकाने वाली होती है और स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती है।


    पिछले 24 घंटों में बारिश का असर

    पिछले 24 घंटों के दौरान देश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई है। जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और कर्नाटक के कुछ इलाकों में अच्छी वर्षा हुई है। जम्मू-कश्मीर के कुछ क्षेत्रों में 50 मिमी तक बारिश दर्ज की गई, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों, केरल और माहे में 20 मिमी तक हल्की से मध्यम वर्षा हुई।


    अस्थिर रहेगा मौसम, कुछ दिन और जारी रहेगा असर

    आने वाले कुछ दिनों तक बारिश, आंधी, तूफान और ओलावृष्टि की आशंका को देखते हुए मौसम विभाग ने उत्तर भारत के लोगों और किसानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके। मौसम विभाग ने लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। आंधी और बिजली के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचें और पेड़ों के नीचे खड़े न हों। घर की छत पर रखी ढीली वस्तुओं को सुरक्षित करें और वाहनों को छत के नीचे पार्क करें ताकि ओलों से नुकसान न हो। बिजली गिरने के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सीमित उपयोग करने की भी सलाह दी गई है।


    तापमान में गिरावट मौसम रहेगा ठंडा

    मौसम के इस बदलाव का असर तापमान पर भी साफ दिखाई देगा। उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना है। आने वाले कुछ दिनों तक मौसम ठंडा और अस्थिर बना रह सकता है, हालांकि बाद में तापमान में हल्की बढ़ोतरी के संकेत भी हैं। देश में ओडिशा के झारसुगुड़ा में अधिकतम तापमान 41.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर में 16.2 डिग्री सेल्सियस रहा।


    दक्षिण भारत भी अछूता नहीं, केरल में भारी बारिश के आसार

    उत्तर भारत के साथ-साथ दक्षिण भारत में भी मौसम का असर देखा जा रहा है। केरल और माहे में भी 64.5 से 115.5 मिमी तक भारी बारिश की संभावना जताई गई है। यहां गरज के साथ तेज बारिश का पूर्वानुमान है, जिससे स्थानीय स्तर पर जलभराव और यातायात प्रभावित हो सकता है।

  • मध्य भारत से लेकर कश्मीर से तक तेज बारिश का अलर्ट… MP-महाराष्ट्र में होगी ओलावृष्टि!

    मध्य भारत से लेकर कश्मीर से तक तेज बारिश का अलर्ट… MP-महाराष्ट्र में होगी ओलावृष्टि!


    भोपाल।
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी भारत (North-Western India.) इस समय दो शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभों (Strong Western Disturbances) के प्रभाव में है. इसका सीधा असर कश्मीर से लेकर मध्य भारत (Central India) तक देखने को मिलेगा. इस क्षेत्र में ओलावृष्टि होने की संभावना है. शुक्रवार और शनिवार को कश्मीर घाटी के कुछ हिस्सों में भारी बारिश (Heavy Rain) भी हो सकती है.

    IMD ने बताया कि मध्य भारत में 7 अप्रैल तक गरज और बिजली चमकने के साथ बारिश होने की संभावना है. इसके अलावा, 3 अप्रैल को मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और उससे सटे गुजरात क्षेत्र में और 4 अप्रैल को पूर्वी मध्य प्रदेश समेत छत्तीसगढ़ में कुछ जगहों पर ओलावृष्टि हो सकती है. विभाग ने यह भी बताया कि इस हफ्ते देश के ज्यादातार हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से कम या सामान्य के आसपास रहने की संभावना है।

    पिछले 24 घंटों में अरुणाचल प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भारी बारिश दर्ज की गई. इस बीच, पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश और मध्य महाराष्ट्र में ओलावृष्टि होने की खबरें मिली हैं। मार्च महीने में, देश पर आठ पश्चिमी विक्षोभों का असर पड़ा, जबकि सामान्य तौर पर इनकी संख्या 5 या 6 होती है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह बारिश लाने वाली हवाओं की एक प्रणाली है जो भूमध्य सागर और ईरान के ऊपर से पैदा होती है. यह ‘सबट्रॉपिकल पछुआ जेट स्ट्रीम’ के सहारे भारत पहुंचती है और हिमालय से टकराकर बारिश व बर्फबारी करती है। इस साल मार्च में सामान्य से कहीं अधिक सक्रिय रहे, जिसका असर अब अप्रैल की शुरुआत में भी दिख रहा है. पश्चिमी विक्षोभ आमतौर पर उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों के महीनों यानी दिसंबर से मार्च के दौरान सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं।

  • मप्र में बदला मौसम, भोपाल समेत कई जगह तेज बारिश, 6 जिलों में हुई ओलावृष्टि

    मप्र में बदला मौसम, भोपाल समेत कई जगह तेज बारिश, 6 जिलों में हुई ओलावृष्टि


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में सोमवार को अचानक मौसम बदल गया और कई जिलों में अचानक तेज बारिश और ओलावृष्टि का दौर शुरू हो गया। नीमच और उज्जैन में बारिश के साथ ओले गिरे, जबकि भोपाल, मंदसौर, रीवा और बैतूल समेत कई इलाकों में तेज बारिश दर्ज की गई।

    मौसम विभाग ने छह जिलों में आंधी के साथ ओले गिरने का अलर्ट जारी किया है। इनमें खंडवा, बैतूल, देवास, नीमच, श्योपुर और खरगोन शामिल हैं। वहीं 10 से ज्यादा जिलों में बारिश-आंधी का असर देखने को मिलेगा। इनमें छिंदवाड़ा, रतलाम, बालाघाट, सिवनी, पांढुर्णा और अनूपपुर (अमरकंटक) में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। यह सिस्टम अगले 3 से 4 दिनों तक सक्रिय रहेगा।

    प्रदेश के आसपास सक्रिय मौसम प्रणालियों के चलते प्रदेश में मौसम का मिजाज सोमवार को पूरी तरह बदल गया है। सोमवार को प्रदेश के कई जिलों में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को खासा नुकसान हुआ है। मालवा-निमाड़ अंचल के नीमच, जावद, मनासा, डीकेन, खरगोन के भीकनगांव क्षेत्र और धार के डही में तेज बारिश के साथ ओले गिरे। ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी और कटाई के बाद रखी गेहूं व चना की फसल को नुकसान पहुंचा है।

    भोपाल के मौसम विज्ञान केन्द्र से मिली जानकारी के मुताबिक, श्योपुर कलां में 3.0 मिमी, अनूपपुर में 0.5 मिमी और नीमच में 2.0 मिमी बारिश शाम साढ़े पांच बजे तक रिकॉर्ड की गई। ग्वालियर और चंबल को छोड़कर दोपहर बाद भोपाल समेत प्रदेश के आसमान पर बादल छा गए। इसके चलते इंदौर, छिंदवाड़ा समेत प्रदेश के कई शहरों में गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हुई। वहीं, नर्मदापुरम और खजुराहो में पारा 40 डिग्री सेल्सियस रहा। नौ जिलों में दिन का तापमान 39 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।

    मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार पंजाब से होते हुए हरियाणा की तरफ एक द्रोणिका गुजर रही है, जो पश्चिमी राजस्थान से होते हुए अरब सागर तक बनी हुई है। वहीं, उत्तर-पश्चिमी उप्र पर चक्रवातीय हवाओं का घेरा बना हुआ है, जो ओडिशा तक एक द्रोणिका के रूप में है। यह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक पास हो रहा है। इसके चलते प्रदेश के मौसम में यह बादल आए हैं।

    मौसम वैज्ञानिक एचएस पांडे ने बताया कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी, पश्चिमी विक्षोभ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन के सक्रिय होने से प्रदेश में मौसम में यह बदलाव आया है। तीन अप्रैल तक प्रदेश के मौसम का मिजाज ऐसा ही रहेगा। मंगलवार से दिन के तापमान में गिरावट होगी। मौसम केंद्र द्वारा यलो अलर्ट जारी किया गया है। अगले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई शहरों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है।

    प्रदेश के दक्षिणी खंडवा, बैतूल, दक्षिणी देवास, उत्तरी नीमच, श्योपुर कलां और पूर्वी खरगोन में मध्यम तूफान के साथ ओलावृष्टि होने की संभावना है। साथ ही दक्षिणी नीमच, मंदसौर, गांधी सागर अभयारण्य, अनूपपुर, अमरकंटक, सिवनी, पांढुर्ना, पेंच, दक्षिणी छिंदवाड़ा, इंदौर, पश्चिम बड़वानी, दक्षिणी, पूर्वी धार, उत्तरी देवास, शाजापुर, उत्तरी रतलाम, दक्षिणी उज्जैन, रीवा, दक्षिणी बालाघाट में हल्की गरज के साथ बारिश होने की संभावना है। दक्षिणी सीहोर और दक्षिणी भोपाल में बिजली गिरने, ओलावृष्टि के साथ मध्यम गरज के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने इन जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है।