Tag: Hindi Cinema

  • बड़े स्टार नहीं बड़ा बजट नहीं फिर भी बॉक्स ऑफिस पर छाई हनुमान अंश, 26वें दिन 50 करोड़ पार

    बड़े स्टार नहीं बड़ा बजट नहीं फिर भी बॉक्स ऑफिस पर छाई हनुमान अंश, 26वें दिन 50 करोड़ पार


    नई दिल्ली। बॉक्स ऑफिस पर इस समय फिल्म हनुमान अंश की सफलता ने सभी को हैरान कर दिया है. अगस्त में रिलीज हुई इस फिल्म ने शुरुआत में बेहद धीमी रफ्तार पकड़ी लेकिन बाद में इसकी कमाई ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि बड़े बजट की फिल्मों को भी पीछे छोड़ दिया. करीब 2 करोड़ रुपये की लागत में तैयार हुई हनुमान अंश ने 26 दिनों में 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का नेट कलेक्शन कर लिया है. कम बजट और बिना बड़े सितारों वाली इस फिल्म की कमाई को इंडस्ट्री में एक बड़ी मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है.

    हनुमान अंश 7 अगस्त को देशभर में 355 स्क्रीन्स पर रिलीज हुई थी. रिलीज के पहले दिन फिल्म ने केवल 10 लाख रुपये की कमाई की थी. शुरुआती आंकड़ों को देखकर ऐसा नहीं लग रहा था कि फिल्म आगे चलकर इतना बड़ा कारोबार कर पाएगी. पहले 15 दिनों तक भी फिल्म की रफ्तार काफी सुस्त रही. कई दिनों में इसकी कमाई महज कुछ लाख रुपये तक सीमित रही.

    इसके बाद फिल्म की कहानी पूरी तरह बदल गई. तीसरे शनिवार को हनुमान अंश की कमाई में बड़ा उछाल देखने को मिला और फिल्म ने करीब 85 लाख रुपये जुटाए. अगले दिन रविवार को इसकी कमाई सीधे 2.20 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. शुरुआती दो हफ्तों में जहां फिल्म करीब 40 लाख रुपये ही कमा पाई थी वहीं तीसरे हफ्ते में इसने लगभग 10 करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया. इसके साथ ही फिल्म की कुल कमाई करीब 10.40 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.

    फिल्म की असली रफ्तार तीसरे हफ्ते के बाद देखने को मिली. उस समय सिनेमाघरों में कई दूसरी बड़ी फिल्में भी मौजूद थीं और उन्हें ज्यादा स्क्रीन मिली हुई थीं. इसके बावजूद हनुमान अंश ने दर्शकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर ली. 21वें दिन के बाद फिल्म की कमाई में लगातार तेजी देखने को मिली.

    चौथे हफ्ते में फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा प्रदर्शन किया जिसकी शायद किसी ने उम्मीद नहीं की थी. कई दिनों में फिल्म ने 6 से 7 करोड़ रुपये तक की कमाई की. चौथे रविवार को तो फिल्म ने करीब 12 करोड़ रुपये का शानदार कलेक्शन किया. अकेले चौथे हफ्ते में हनुमान अंश ने लगभग 43.23 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर लिया.

    26वें दिन फिल्म ने 50 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया. इसके बाद चौथे मंगलवार को भी फिल्म ने करीब 8 करोड़ रुपये की कमाई की और इसकी कुल नेट कमाई 53.63 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. महज 2 करोड़ रुपये के बजट से बनी इस फिल्म का यह कारोबार करीब 25 गुना से ज्यादा बैठता है.

    हनुमान अंश की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि फिल्म को शुरुआत में दर्शकों का बहुत बड़ा समर्थन नहीं मिला था. लेकिन धीरे धीरे माउथ पब्लिसिटी ने माहौल बदल दिया. फिल्म की कहानी और विषय ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचना शुरू किया और कम स्क्रीन के बावजूद इसकी कमाई बढ़ती चली गई.

    फिल्म की यह सफलता बताती है कि बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ बड़ा बजट या बड़े सितारे ही सफलता की गारंटी नहीं होते. मजबूत कहानी और दर्शकों से जुड़ाव भी किसी फिल्म को लंबी रेस का खिलाड़ी बना सकता है. अगर हनुमान अंश की रफ्तार आने वाले दिनों में भी बनी रहती है तो इसके 100 करोड़ रुपये के आंकड़े की ओर बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है.

  • अजय देवगन के धमाकेदार डेब्यू के पीछे थे कुकू कोहली, ‘फूल और कांटे’ से मिली पहचान; हार्ट अटैक ने ली जान

    अजय देवगन के धमाकेदार डेब्यू के पीछे थे कुकू कोहली, ‘फूल और कांटे’ से मिली पहचान; हार्ट अटैक ने ली जान


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के मशहूर फिल्म निर्देशक कुकू कोहली का निधन हो गया है। 1991 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म फूल और कांटे से अजय देवगन को बॉलीवुड में शानदार लॉन्च देने वाले कुकू कोहली ने मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में आखिरी सांस ली। वह लंबे समय से इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थे। जानकारी के मुताबिक स्टेंट प्रक्रिया के एक दिन बाद उन्हें अचानक हार्ट अटैक आया जिसके बाद उनकी मौत हो गई। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई और कई कलाकारों तथा फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

    कुकू कोहली को हिंदी सिनेमा में अजय देवगन के शुरुआती करियर को मजबूत आधार देने वाले फिल्ममेकर के तौर पर याद किया जाता है। फूल और कांटे अजय देवगन की डेब्यू फिल्म थी और इसी फिल्म ने उन्हें रातोंरात दर्शकों के बीच पहचान दिला दी थी। फिल्म में अजय देवगन की एंट्री का वह दृश्य आज भी बॉलीवुड की सबसे चर्चित एंट्री में गिना जाता है जिसमें वह दो चलती मोटरसाइकिलों पर पैर रखकर अनोखे अंदाज में नजर आए थे। फिल्म की सफलता ने अजय देवगन को एक नए एक्शन स्टार के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई थी।

    कुकू कोहली ने अपने करियर में कई लोकप्रिय फिल्मों का निर्देशन किया। फूल और कांटे के अलावा उन्होंने कोहराम सुहाग हकीकत और अनाड़ी नंबर वन जैसी फिल्मों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया। उनकी फिल्मों में एक्शन ड्रामा और मनोरंजन का ऐसा मेल देखने को मिलता था जो उस दौर के दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय रहा। साल 2004 में उन्होंने वो तेरा नाम था फिल्म का निर्देशन किया था और यही उनके निर्देशन करियर की आखिरी फिल्म साबित हुई। इसके बाद उन्होंने फिल्म निर्माण से दूरी बना ली थी।

    फिल्ममेकर अशोक पंडित ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कुकू कोहली के निधन की जानकारी साझा की। उनके निधन को भारतीय सिनेमा के लिए बड़ी क्षति बताया जा रहा है। फिल्म इंडस्ट्री में कुकू कोहली का योगदान खास तौर पर इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि उन्होंने अजय देवगन जैसे कलाकार को शुरुआती दौर में ऐसा मंच दिया जिसने उनके लंबे और सफल फिल्मी करियर की नींव रखी।

    कुकू कोहली का असली नाम अवतार कोहली था। उनका जन्म 4 जून 1949 को पेशावर में हुआ था। बाद में वह मुंबई पहुंचे और फिल्मी दुनिया में अपना करियर शुरू किया। निर्देशन की दुनिया में आने से पहले उन्होंने दिग्गज फिल्ममेकर राज कपूर के साथ बतौर असिस्टेंट काम किया। राज कपूर के साथ काम करने के दौरान उन्होंने बॉबी सत्यम शिवम सुंदरम और प्रेम रोग जैसी चर्चित फिल्मों की मेकिंग को करीब से समझा। इस अनुभव ने उनकी फिल्म निर्माण की समझ को मजबूत किया और आगे चलकर उन्होंने खुद निर्देशन की कमान संभाली।

    कुकू कोहली की निजी जिंदगी भी कई वजहों से चर्चा में रही। उन्होंने 1990 में अभिनेत्री अरुणा ईरानी से शादी की थी। यह उनकी दूसरी शादी थी। उनकी पहली पत्नी रीटा कोहली थीं और पहली शादी से उनकी दो बेटियां पूजा कोहली और करिश्मा कोहली हैं। पूजा कोहली फिल्म निर्माण से जुड़ी रही हैं। कुकू कोहली और अरुणा ईरानी का रिश्ता लंबे समय तक फिल्मी दुनिया में चर्चा का विषय रहा।

    कुकू कोहली भले ही पिछले कई वर्षों से फिल्मों से दूर थे लेकिन उनका काम और खास तौर पर फूल और कांटे के जरिए अजय देवगन को दिया गया लॉन्च आज भी याद किया जाता है। एक ऐसी फिल्म जिसने एक नए अभिनेता को पहचान दिलाई और निर्देशक को भी हिंदी सिनेमा में अलग मुकाम दिया। उनके निधन से बॉलीवुड ने एक ऐसे फिल्ममेकर को खो दिया जिसने अपने दौर में मसाला और एक्शन फिल्मों को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई। कुकू कोहली का नाम आने वाले समय में भी फूल और कांटे और अजय देवगन के यादगार डेब्यू के साथ हमेशा जुड़ा रहेगा।

  • हीरो नंबर 1 की वापसी तय गोविंदा ने नई फिल्म रूपा का किया ऐलान नई एक्ट्रेस रानी स्वर्णकार के साथ आएंगे नजर

    हीरो नंबर 1 की वापसी तय गोविंदा ने नई फिल्म रूपा का किया ऐलान नई एक्ट्रेस रानी स्वर्णकार के साथ आएंगे नजर


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के हीरो नंबर 1 के नाम से मशहूर गोविंदा ने आखिरकार अपने प्रशंसकों को वह खुशखबरी दे दी जिसका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। कई वर्षों तक बड़े पर्दे से दूर रहने के बाद गोविंदा अब एक बार फिर फिल्मों में वापसी करने जा रहे हैं। उन्होंने आधिकारिक तौर पर अपनी नई फिल्म रूपा का ऐलान किया है। खास बात यह है कि इस फिल्म में वह सिर्फ मुख्य अभिनेता के रूप में ही नहीं बल्कि निर्माता की जिम्मेदारी भी संभालते नजर आएंगे। उनके साथ इस फिल्म में नई अभिनेत्री रानी स्वर्णकार बॉलीवुड में कदम रखेंगी।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गोविंदा ने अपने फिल्मी सफर के उतार चढ़ाव पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उनके करियर में कई ऐसे मौके आए जब उन्हें नजरअंदाज किया गया और लोगों ने यह तक कह दिया कि अब उनकी वापसी संभव नहीं है। हालांकि उन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। गोविंदा ने कहा कि उन्होंने एक नई शुरुआत करने का फैसला किया है और उन्हें विश्वास है कि उनकी नई फिल्म दर्शकों का दिल जीतने में सफल होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह फिल्म खासतौर पर युवा दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है और उन्हें उम्मीद है कि थिएटर में इसे देखने वाले दर्शकों को एक नया अनुभव मिलेगा।

    गोविंदा ने बातचीत के दौरान अपनी जिंदगी में अंक 14 के महत्व का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह न्यूमरोलॉजी में विश्वास करते हैं और 14 हमेशा उनके लिए बेहद शुभ साबित हुआ है। उनके अनुसार 14 वर्ष की उम्र से ही उनकी जिंदगी में इस अंक का खास महत्व रहा है। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने सिर्फ एक सप्ताह में 14 फिल्में साइन की थीं और इसके बाद करीब 14 वर्षों तक लगातार सुपरस्टारडम का दौर देखा। बाद में वह 14वीं लोकसभा के सदस्य भी बने। उन्होंने अपने संघर्ष के वर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि हर कठिन दौर के बाद उन्हें नई शुरुआत करने का मौका मिला और अब एक बार फिर वह उसी विश्वास के साथ फिल्मों में लौट रहे हैं।

    गोविंदा ने यह भी कहा कि इस बार उन्होंने ज्यादा इंतजार नहीं किया और तय कर लिया कि अब फिर से अभिनय की दुनिया में सक्रिय होना है। उन्होंने भगवान का आशीर्वाद मिलने की बात कहते हुए उम्मीद जताई कि फिल्म रूपा उनके करियर का नया अध्याय साबित होगी। उनके प्रशंसकों के लिए भी यह वापसी बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि लंबे समय से दर्शक उन्हें बड़े पर्दे पर देखने का इंतजार कर रहे थे।

    हाल ही में गोविंदा अपनी पत्नी सुनीता आहूजा का समर्थन करने के लिए रियलिटी शो लॉकअप 2 में भी पहुंचे थे। वहां उन्होंने अपनी चिरपरिचित कॉमिक टाइमिंग से सभी का मनोरंजन किया। शो के दौरान फराह खान के साथ उनकी मजेदार नोकझोंक और सुनीता आहूजा को लेकर किए गए हास्यपूर्ण संवाद सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में रहे। इससे साफ है कि गोविंदा आज भी अपनी सहज हास्य शैली और शानदार स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों का मनोरंजन करने का हुनर रखते हैं।

    अब फिल्म रूपा के जरिए गोविंदा की वापसी पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि यह फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है तो एक बार फिर बॉलीवुड को अपना चहेता हीरो नंबर 1 पुराने अंदाज में बड़े पर्दे पर देखने का मौका मिलेगा।

  • गोल्डन दौर को किया याद हेमा मालिनी ने बताया क्यों नहीं कर रहीं फिल्मों में वापसी और क्या है इसकी सबसे बड़ी वजह

    गोल्डन दौर को किया याद हेमा मालिनी ने बताया क्यों नहीं कर रहीं फिल्मों में वापसी और क्या है इसकी सबसे बड़ी वजह


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा की ड्रीम गर्ल के नाम से मशहूर हेमा मालिनी लंबे समय से बड़े पर्दे से दूर हैं। उनके प्रशंसक अक्सर यह सवाल करते रहे हैं कि आखिर वह नई फिल्मों में नजर क्यों नहीं आतीं। अब खुद हेमा मालिनी ने इस सवाल का जवाब देते हुए अपनी चुप्पी तोड़ी है और साफ कहा है कि आज की फिल्मों का स्वरूप उनके दौर से पूरी तरह बदल चुका है। यही सबसे बड़ी वजह है कि उन्होंने फिल्मों से दूरी बना रखी है।

    एक बातचीत के दौरान हेमा मालिनी ने अपने लंबे फिल्मी सफर को याद करते हुए कहा कि उन्हें उस दौर का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला जिसे हिंदी सिनेमा का स्वर्णिम काल कहा जाता है। उनके अनुसार उस समय बनने वाली फिल्मों में कहानी भावनाएं संगीत और अभिनय का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता था। खास बात यह थी कि महिला प्रधान फिल्मों को भी बराबर महत्व दिया जाता था और अभिनेत्रियों को दमदार किरदार निभाने का अवसर मिलता था।

    उन्होंने बताया कि अपने करियर में उन्हें सीता और गीता सपनों का सौदागर खुशबू शोले ड्रीम गर्ल सत्ते पे सत्ता त्रिशूल क्रांति और बागबान जैसी यादगार फिल्मों में काम करने का अवसर मिला। पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें एहसास होता है कि उन्होंने लगभग दो सौ फिल्मों में अभिनय किया और कई निर्माता निर्देशकों ने बार बार उन्हें अपनी फिल्मों का हिस्सा बनाया। उस दौर में फिल्मों के गीत भी सफलता की सबसे बड़ी पहचान होते थे और हर फिल्म में कई यादगार गाने दर्शकों के दिलों में बस जाते थे।

    हेमा मालिनी का कहना है कि समय के साथ फिल्म निर्माण की शैली पूरी तरह बदल गई है। आज की फिल्मों की सोच प्रस्तुति और कहानी कहने का तरीका पहले से काफी अलग हो चुका है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई लोग उनसे पूछते हैं कि वह अब फिल्मों में काम क्यों नहीं करतीं लेकिन उन्हें लगता है कि वर्तमान दौर की फिल्मों में खुद को सहज रूप से ढाल पाना उनके लिए आसान नहीं है। यही कारण है कि उन्होंने नई फिल्मों से दूरी बनाए रखना बेहतर समझा।

    उन्होंने यह भी कहा कि हर दौर की अपनी अलग पहचान होती है और हर कलाकार उस दौर की जरूरतों के अनुसार काम करता है। उनका मानना है कि जिस तरह का सिनेमा उन्होंने अपने समय में किया वह आज भी दर्शकों के बीच पसंद किया जाता है और यही उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। उनके अनुसार कलाकार के लिए यह संतोष की बात होती है कि वर्षों बाद भी उसके निभाए किरदार लोगों की यादों में जिंदा रहें।

    हेमा मालिनी ने अपने करियर की शुरुआत राज कपूर के साथ फिल्म सपनों का सौदागर से की थी। इसके बाद उन्होंने लगातार कई सफल फिल्मों में अभिनय कर खुद को हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल कर लिया। अपनी खूबसूरती और अभिनय के दम पर उन्होंने करोड़ों दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई और ड्रीम गर्ल की पहचान हासिल की।

    उनकी आखिरी फिल्म शिमला मिर्ची थी जो वर्ष 2020 में रिलीज हुई थी। इसके बाद उन्होंने कोई नई फिल्म स्वीकार नहीं की। फिलहाल वह सक्रिय राजनीति में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं और सार्वजनिक जीवन के साथ परिवार को भी पूरा समय दे रही हैं। मुंबई में रहने के दौरान वह अपनी दोनों बेटियों और नाती नातिनों के साथ समय बिताना पसंद करती हैं। हालांकि फिल्मों से दूरी के बावजूद उनके प्रशंसकों के बीच उनका सम्मान और लोकप्रियता आज भी पहले जैसी ही बनी हुई है।

  • हेमा मालिनी संग सीन देने में हुई झिझक! नसीरुद्दीन शाह के इनकार के बाद मेकर्स ने निकाला अनोखा रास्ता

    हेमा मालिनी संग सीन देने में हुई झिझक! नसीरुद्दीन शाह के इनकार के बाद मेकर्स ने निकाला अनोखा रास्ता


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कई बार ऐसे किस्से सामने आते हैं जो फिल्मों से ज्यादा उनकी शूटिंग के दौरान घटी घटनाओं की वजह से चर्चा में रहते हैं। कलाकार अक्सर अपने किरदार की जरूरत के अनुसार चुनौतीपूर्ण दृश्य निभाते हैं लेकिन कुछ मौके ऐसे भी आए जब कलाकारों ने व्यक्तिगत असहजता के कारण कुछ दृश्यों को करने से परहेज किया। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा साल 1988 में रिलीज हुई फिल्म रिहाई से जुड़ा है जिसमें हेमा मालिनी और नसीरुद्दीन शाह अहम भूमिकाओं में नजर आए थे।

    बताया जाता है कि फिल्म की कहानी के अनुसार नसीरुद्दीन शाह और हेमा मालिनी के बीच एक रोमांटिक दृश्य फिल्माया जाना था। जब अभिनेता को इस दृश्य के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने इसे करने में असहजता जताई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नसीरुद्दीन शाह का मानना था कि हेमा मालिनी जैसी वरिष्ठ और प्रतिष्ठित अभिनेत्री के साथ इस तरह का दृश्य करना उनके लिए सहज नहीं था। उन्होंने निर्देशक से अपनी झिझक भी साझा की।

    कहा जाता है कि फिल्म की निर्देशक अरुणा राजे और स्वयं हेमा मालिनी ने उन्हें समझाने का प्रयास किया ताकि दृश्य कहानी की जरूरत के अनुसार पूरा किया जा सके। हालांकि अभिनेता अपने फैसले पर कायम रहे। इसके बाद फिल्म की टीम ने वैकल्पिक तरीका अपनाते हुए संबंधित दृश्य को बॉडी डबल की मदद से फिल्माने का निर्णय लिया। इस तरह फिल्म की शूटिंग पूरी की गई और कहानी के प्रवाह को भी बनाए रखा गया।

    फिल्म रिहाई अपने समय की अलग विषयवस्तु वाली फिल्मों में गिनी जाती है। इसमें ग्रामीण समाज महिलाओं के अकेलेपन सामाजिक बदलाव और रिश्तों की जटिलताओं को संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया गया था। फिल्म में हेमा मालिनी के अलावा विनोद खन्ना नसीरुद्दीन शाह और नीना गुप्ता जैसे कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। समीक्षकों ने इसकी कहानी और अभिनय की सराहना की थी।

    रिपोर्टों के मुताबिक इस फिल्म के लिए शुरुआत में अभिनेत्री स्मिता पाटिल पर भी विचार किया गया था। बाद में यह भूमिका हेमा मालिनी को मिली और उन्होंने मजबूत कहानी तथा महिला निर्देशक के साथ काम करने की इच्छा के चलते फिल्म स्वीकार की। एक इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने भी बताया था कि अरुणा राजे के निर्देशन में काम करना उनके लिए एक विशेष अनुभव था और यही वजह थी कि उन्होंने यह फिल्म करने का फैसला लिया।

    आज भी रिहाई केवल अपनी कहानी के लिए ही नहीं बल्कि शूटिंग से जुड़े इन दिलचस्प किस्सों के कारण भी याद की जाती है। यह घटना इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि कलाकारों की व्यक्तिगत सहजता और पेशेवर जरूरतों के बीच संतुलन बनाने के लिए फिल्म निर्माण के दौरान कई बार अलग-अलग समाधान तलाशने पड़ते हैं।

  • जब एक ही गाने ने बना दिया रिकॉर्ड! 20 मिनट के इस देशभक्ति ट्रैक की कहानी जानकर रह जाएंगे हैरान

    जब एक ही गाने ने बना दिया रिकॉर्ड! 20 मिनट के इस देशभक्ति ट्रैक की कहानी जानकर रह जाएंगे हैरान


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि फिल्मों की आत्मा माने जाते हैं। कई बार किसी फिल्म की कहानी भले ही दर्शकों के दिलों में खास जगह न बना पाए लेकिन उसके गाने वर्षों तक लोगों की जुबान पर बने रहते हैं। बॉलीवुड के इतिहास में ऐसे कई गीत हैं जिन्होंने लोकप्रियता के नए रिकॉर्ड बनाए लेकिन एक गीत ऐसा भी है जिसने अपनी असाधारण लंबाई के कारण अलग पहचान हासिल की। यह गीत फिल्म अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों का टाइटल ट्रैक है जिसे हिंदी फिल्मों के सबसे लंबे गीतों में गिना जाता है।

    साल 2004 में रिलीज हुई इस फिल्म का शीर्षक गीत लगभग 20 मिनट की अवधि का है। फिल्म में इसे एक साथ नहीं बल्कि तीन अलग-अलग हिस्सों में प्रस्तुत किया गया है ताकि कहानी का प्रवाह बना रहे और भावनात्मक प्रभाव भी कायम रहे। इस गीत में देशभक्ति वीरता बलिदान और सैनिकों के सम्मान की भावना को बेहद प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया है। यही वजह है कि यह गीत आज भी देशभक्ति गीतों की सूची में खास स्थान रखता है।

    इस गीत का संगीत मशहूर संगीतकार अनु मलिक ने तैयार किया था। भव्य ऑर्केस्ट्रा दमदार बोल और भावनात्मक प्रस्तुति ने इसे सामान्य फिल्मी गीतों से अलग पहचान दिलाई। गीत के हर हिस्से में सैनिकों के त्याग परिवारों की भावनाएं और राष्ट्र के प्रति समर्पण को प्रमुखता से उभारा गया है। यही कारण है कि यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि देशभक्ति का संदेश देने वाला एक सशक्त संगीतात्मक प्रस्तुतीकरण बन गया।

    फिल्म अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों का निर्देशन अनिल शर्मा ने किया था। इसमें अमिताभ बच्चन अक्षय कुमार बॉबी देओल दिव्या खोसला कुमार संदली सिन्हा और नगमा जैसे कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए थे। कहानी भारतीय सेना की तीन पीढ़ियों के संघर्ष बलिदान और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर आधारित थी। फिल्म को समीक्षकों से सराहना मिली लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी।

    हालांकि फिल्म व्यावसायिक रूप से सफल नहीं रही लेकिन इसका शीर्षक गीत समय के साथ अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहा। देशभक्ति के अवसरों पर आज भी यह गीत कई मंचों और कार्यक्रमों में सुनाई देता है। इसकी लंबाई के बावजूद दर्शकों की भावनाओं को अंत तक बांधे रखने की क्षमता इसे विशेष बनाती है।

    भारतीय सिनेमा में इतने लंबे गीत बहुत कम देखने को मिलते हैं। यही वजह है कि अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों का टाइटल ट्रैक आज भी बॉलीवुड के सबसे लंबे और यादगार देशभक्ति गीतों में शामिल माना जाता है। यह गीत केवल एक संगीत रचना नहीं बल्कि देश के वीर जवानों के साहस समर्पण और बलिदान को श्रद्धांजलि देने वाला भावनात्मक दस्तावेज बन चुका है।

  • वेलकम टू द जंगल में सेंसर की बड़ी कार्रवाई, अक्षय कुमार की फिल्म में लगे 18 कट, बना अनोखा रिकॉर्ड

    वेलकम टू द जंगल में सेंसर की बड़ी कार्रवाई, अक्षय कुमार की फिल्म में लगे 18 कट, बना अनोखा रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की आगामी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ रिलीज से पहले ही चर्चा में आ गई है। इस फिल्म में सेंसर बोर्ड ने कुल 18 बदलाव किए हैं, जिसके बाद यह अक्षय कुमार के करियर की अब तक की सबसे ज्यादा सेंसर की गई फैमिली कॉमेडी फिल्म बन गई है। फिल्म में किए गए ये बदलाव डायलॉग्स से लेकर कुछ दृश्यों तक फैले हुए हैं।

    रिपोर्ट्स के अनुसार सेंसर बोर्ड ने फिल्म में मौजूद कई डबल मीनिंग डायलॉग्स को हटाने या बदलने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा कुछ संवेदनशील संदर्भ, जिनमें कश्मीर से जुड़े जिक्र भी शामिल बताए जा रहे हैं, उन्हें भी संशोधित किया गया है। फिल्म के कुछ हिस्सों में अभिनेत्री दिशा पाटनी और जैकलीन फर्नांडिस के बिकिनी सीन्स पर भी सेंसर की नजर पड़ी है, जहां क्लोजअप शॉट्स को हटाया गया या एडिट किया गया है।

    यह पहली बार नहीं है जब अक्षय कुमार की फिल्मों पर सेंसर बोर्ड की कैंची चली हो। इससे पहले उनकी फिल्म ‘ओह माय गॉड 2’ में भी 27 कट लगाए गए थे। उस फिल्म को ए सर्टिफिकेट मिला था और बाद में यह बॉक्स ऑफिस पर सफल रही थी। वहीं ‘भूत बंगला’ में भी 5 कट किए गए थे, जिनमें कुछ एडल्ट या डबल मीनिंग कंटेंट शामिल थे।

    इसके अलावा ‘बच्चन पांडे’ और ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ जैसी फिल्मों में भी मामूली स्तर पर कट्स किए गए थे, लेकिन ‘वेलकम टू द जंगल’ इस मामले में खास इसलिए बन गई है क्योंकि इसमें सबसे ज्यादा 18 बदलाव दर्ज किए गए हैं।

    फिल्म के निर्देशक अहमद खान हैं और यह फिल्म 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। पहले ही फ्रेंचाइजी की लोकप्रियता को देखते हुए फिल्म से काफी उम्मीदें जुड़ी हैं। हालांकि सेंसर बोर्ड द्वारा किए गए इन बदलावों का असर फिल्म की कहानी और प्रस्तुति पर कितना पड़ेगा, यह रिलीज के बाद ही साफ हो सकेगा।

    फिलहाल यह फिल्म सिर्फ अपनी स्टारकास्ट या कॉमेडी के लिए नहीं, बल्कि सेंसर रिकॉर्ड के कारण भी सुर्खियों में बनी हुई है।

  • राजेश खन्ना–अंजू ब्रेकअप की अनसुनी दास्तान, सीक्रेट पार्टी बनी रिश्ते के टूटने की वजह

    राजेश खन्ना–अंजू ब्रेकअप की अनसुनी दास्तान, सीक्रेट पार्टी बनी रिश्ते के टूटने की वजह


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना की निजी जिंदगी हमेशा से ही चर्चा और गॉसिप का हिस्सा रही है। उनकी और अभिनेत्री अंजू महेंद्रू की सात साल लंबी रिलेशनशिप एक वक्त पर फिल्मी दुनिया की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों में से एक मानी जाती थी लेकिन यह रिश्ता जितनी तेजी से जुड़ा उतनी ही नाटकीय परिस्थितियों में टूट भी गया।

    कई किताबों और रिपोर्ट्स में इस बात का जिक्र मिलता है कि उनके रिश्ते में दरार की सबसे बड़ी वजह एक सीक्रेट पार्टी बनी थी जो खंडाला में आयोजित की गई थी। कहा जाता है कि राजेश खन्ना ने यह पार्टी अपने बेहद करीबी दोस्तों के लिए रखी थी जिसमें अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया और उनके परिवार के कुछ सदस्य भी शामिल थे। खास बात यह थी कि इस पार्टी के बारे में अंजू महेंद्रू को कोई जानकारी नहीं दी गई थी।

    जानकारी के मुताबिक यह आयोजन बेहद निजी रखा गया था और राजेश खन्ना ने अपने स्टाफ तक को सख्त हिदायत दी थी कि इसकी भनक बाहर न जाए। लेकिन किसी तरह अंजू महेंद्रू को इस पार्टी के बारे में पता चल गया और वह सीधे खंडाला पहुंच गईं। बताया जाता है कि जब वह वहां पहुंचीं तब तक पार्टी को तुरंत एक दूसरे होटल में शिफ्ट कर दिया गया था ताकि स्थिति को संभाला जा सके।

    इस पूरे घटनाक्रम ने दोनों के रिश्ते में गहरी खाई पैदा कर दी। अंजू महेंद्रू बेहद आहत होकर वापस लौट गईं और इसके बाद उनके और राजेश खन्ना के बीच दूरी बढ़ती चली गई। कहा जाता है कि इसी दौरान राजेश खन्ना का झुकाव डिंपल कपाड़िया की ओर बढ़ने लगा था जिससे रिश्ते की स्थिति और भी जटिल हो गई।

    घटनाओं के बाद यह भी बताया जाता है कि अंजू महेंद्रू और राजेश खन्ना के बीच बातचीत पूरी तरह खत्म होने की कगार पर पहुंच गई थी। अंजू की नाराजगी इतनी गहरी थी कि उन्होंने काका के प्रति कठोर रुख अपनाया और संपर्क तोड़ने का फैसला कर लिया। वहीं दूसरी ओर राजेश खन्ना ने भी इस रिश्ते से आगे बढ़ने का मन बना लिया था।

    इसी दौर में राजेश खन्ना ने डिंपल कपाड़िया से शादी का फैसला किया जिसने पूरे फिल्म इंडस्ट्री को चौंका दिया। उनकी शादी साल 1973 में हुई और इसके बाद वह एक नई पारिवारिक जिंदगी में प्रवेश कर गए। हालांकि यह रिश्ता भी लंबे समय तक स्थिर नहीं रह सका और 1982 में दोनों अलग हो गए।

    इस पूरी कहानी को आज भी बॉलीवुड के सबसे चर्चित और भावनात्मक किस्सों में से एक माना जाता है जहां एक सीक्रेट पार्टी ने एक लंबी प्रेम कहानी का अंत कर दिया और भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नई कहानी की शुरुआत कर दी।

  • एक थप्पड़ ने बदल दी थी जिंदगी: खूबसूरत हीरोइन से बॉलीवुड की सबसे मशहूर ‘मंथरा’ बनने तक का सफर

    एक थप्पड़ ने बदल दी थी जिंदगी: खूबसूरत हीरोइन से बॉलीवुड की सबसे मशहूर ‘मंथरा’ बनने तक का सफर


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सफलता हासिल की, लेकिन अभिनेत्री ललिता पवार की कहानी सबसे अलग और प्रेरणादायक मानी जाती है। एक समय वह हिंदी फिल्मों की बेहद खूबसूरत और लोकप्रिय नायिका थीं, लेकिन एक दुर्घटना ने उनकी पूरी जिंदगी बदलकर रख दी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने अभिनय के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसे आज भी याद किया जाता है।

    यह घटना साल 1942 की है, जब फिल्म ‘जंग-ए-आजादी’ की शूटिंग चल रही थी। फिल्म में ललिता पवार मुख्य अभिनेत्री थीं, जबकि अभिनेता भगवान दादा उनके साथ काम कर रहे थे। एक दृश्य में भगवान दादा को ललिता पवार के गाल पर थप्पड़ मारना था। शूटिंग के दौरान यह थप्पड़ इतना जोरदार पड़ा कि ललिता पवार जमीन पर गिर पड़ीं और उनकी हालत गंभीर हो गई। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनके चेहरे की नस प्रभावित हो गई है।

    बताया जाता है कि इलाज के दौरान स्थिति और बिगड़ गई। लंबे समय तक अस्पताल में रहने के बाद जब वह सामान्य जीवन में लौटीं तो उनके चेहरे के बाईं ओर लकवे का असर दिखाई देने लगा। उनकी एक आंख सिकुड़ गई थी और चेहरे की बनावट भी पहले जैसी नहीं रही। उस दौर में फिल्म उद्योग में नायिकाओं के लिए सुंदरता को सबसे बड़ी शर्त माना जाता था, इसलिए इस हादसे ने उनके लीड अभिनेत्री बनने के सपनों को लगभग खत्म कर दिया।

    करीब तीन वर्षों तक इलाज और संघर्ष के बाद ललिता पवार ने फिर से फिल्मों में वापसी की कोशिश की। हालांकि अब उन्हें मुख्य नायिका के रोल नहीं मिल रहे थे। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने के बजाय खुद को नए किरदारों के अनुरूप ढाल लिया। उन्होंने मां, बहन, चाची और सास जैसे चरित्र भूमिकाएं निभानी शुरू कीं। धीरे-धीरे उनकी अलग पहचान बनने लगी।

    उनकी सिकुड़ी हुई आंख और सख्त चेहरे के भाव नकारात्मक भूमिकाओं में बेहद प्रभावशाली साबित हुए। देखते ही देखते वह हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय खलनायिका और सास के रूप में मशहूर हो गईं। रामानंद सागर की लोकप्रिय टीवी श्रृंखला ‘रामायण’ में निभाया गया ‘मंथरा’ का किरदार आज भी लोगों की स्मृतियों में जीवित है। इस भूमिका ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।

    ललिता पवार का निजी जीवन भी संघर्षों से भरा रहा। वैवाहिक जीवन में भी उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके उन्होंने अपने काम और आत्मविश्वास को कभी कमजोर नहीं होने दिया। यही वजह रही कि उन्होंने हिंदी, मराठी और गुजराती भाषाओं की 700 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया

    उनके नाम सबसे लंबे अभिनय करियर का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी दर्ज है, जो उनकी मेहनत और समर्पण का प्रमाण है। एक हादसे ने भले ही उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी, लेकिन उन्होंने उस दर्द को अपनी ताकत बना लिया और अभिनय की दुनिया में अमर हो गईं।

    24 फरवरी 1998 को कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद ललिता पवार ने अंतिम सांस ली। हालांकि वह इस दुनिया को छोड़ गईं, लेकिन उनका संघर्ष, साहस और अभिनय आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ इच्छाशक्ति इंसान को नई पहचान दिला सकती है।

  • 83 की उम्र में भी नहीं थम रहा अमिताभ बच्चन का जुनून, एक ही दिन में शूट कर डालीं 12 शॉर्ट फिल्में

    83 की उम्र में भी नहीं थम रहा अमिताभ बच्चन का जुनून, एक ही दिन में शूट कर डालीं 12 शॉर्ट फिल्में


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के महानायक Amitabh Bachchan आज भी अपनी ऊर्जा, अनुशासन और काम के प्रति समर्पण से नई पीढ़ी को प्रेरित कर रहे हैं। 83 वर्ष की उम्र में जहां अधिकांश लोग आरामदायक जीवन की ओर बढ़ते हैं, वहीं अमिताभ बच्चन लगातार काम में व्यस्त हैं और अपने प्रोफेशनल कमिटमेंट्स को पूरी गंभीरता से निभा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने उनके प्रशंसकों को हैरान और प्रभावित दोनों कर दिया है।

    अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग के जरिए जानकारी दी कि उन्होंने एक ही दिन में 12 शॉर्ट फिल्मों की शूटिंग पूरी की है। उन्होंने देर रात अपने ब्लॉग में लिखा कि काम तो काम है और उसे पूरी ईमानदारी के साथ करना ही उनकी प्राथमिकता है। बिग बी ने बताया कि 12 शॉर्ट फिल्मों की शूटिंग पूरी हो चुकी है और अभी दो और शूट बाकी हैं। इसके बाद भी वह अपने प्रशंसकों से जुड़ने के लिए ब्लॉग लिख रहे थे।

    उन्होंने लिखा कि कई दिनों की तैयारी, लगातार पढ़ाई और कठिन परिश्रम के बाद भी वह अपने इरादों और काम करने के तरीके से कभी समझौता नहीं करते। उनके अनुसार, किसी भी काम को पूरी लगन और समर्पण के साथ करना ही सफलता की कुंजी है। ब्लॉग के अंत में उन्होंने यह भी लिखा कि अब वह आराम करने जा रहे हैं क्योंकि लंबे दिन के बाद शरीर को विश्राम की भी जरूरत होती है।

    बिग बी ने अपने प्रशंसकों के साथ अपने खास रिश्ते का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि फैंस के साथ उनका जुड़ाव कभी नहीं टूटना चाहिए। बाकी चीजें समय के साथ बदल सकती हैं, लेकिन दर्शकों का प्यार और संवाद उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

    अमिताभ बच्चन की इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रशंसकों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने उन्हें प्रेरणा का स्रोत बताया। एक यूजर ने लिखा कि अमिताभ बच्चन की कार्यशैली और अनुशासन युवाओं के लिए सीख है। वहीं दूसरे प्रशंसक ने लिखा कि इतनी उम्र में भी जिस तरह वह लगातार काम कर रहे हैं, वह अविश्वसनीय है। हालांकि कुछ प्रशंसकों ने उनकी सेहत को लेकर चिंता भी जताई और उन्हें पर्याप्त आराम करने की सलाह दी।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो अमिताभ बच्चन आखिरी बार Vettaiyan में नजर आए थे, जिसमें उनके साथ Rajinikanth मुख्य भूमिका में थे। फिल्म में दोनों दिग्गज कलाकारों की जोड़ी को दर्शकों ने काफी पसंद किया था।

    आने वाले समय में अमिताभ बच्चन Kalki 2898 AD Part 2 में दिखाई देंगे। इस फिल्म में उनके साथ Prabhas और Kamal Haasan भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में होंगे। फिल्म का पहला भाग Kalki 2898 AD बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता साबित हुआ था और दुनियाभर में 1000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करने में सफल रहा था।

    फिलहाल अमिताभ बच्चन की यह उपलब्धि एक बार फिर साबित करती है कि समर्पण, अनुशासन और मेहनत के सामने उम्र कोई मायने नहीं रखती।