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  • एक फिल्म, 9 किरदार और चौंकाने वाली भविष्यवाणी! बॉलीवुड स्टार की कहानी है बेहद दिलचस्प

    एक फिल्म, 9 किरदार और चौंकाने वाली भविष्यवाणी! बॉलीवुड स्टार की कहानी है बेहद दिलचस्प



    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा से अभिनय की परिभाषा बदल दी। उनमें से एक नाम है Sanjeev Kumar। संजीव कुमार सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वे अभिनय की ऐसी पाठशाला थे, जिनके किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित हैं। चाहे फिल्म ‘शोले’ में ठाकुर बलदेव सिंह का किरदार हो या फिर गंभीर और भावनात्मक भूमिकाएं, उन्होंने हर बार अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया।

    बॉलीवुड में डबल और ट्रिपल रोल निभाने वाले कलाकारों की लंबी सूची रही है। कई सितारों ने एक ही फिल्म में दो या तीन किरदार निभाकर दर्शकों का मनोरंजन किया है। लेकिन संजीव कुमार ने वह कर दिखाया जो उनके दौर में किसी अन्य अभिनेता ने नहीं किया था। वर्ष 1974 में रिलीज हुई Naya Din Nai Raat में उन्होंने पूरे नौ अलग-अलग किरदार निभाए और अभिनय की नई मिसाल कायम कर दी।

    इस फिल्म में उनके साथ Jaya Bhaduri मुख्य भूमिका में थीं। फिल्म की कहानी एक युवती सुषमा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो शादी से बचने के लिए घर छोड़ देती है। इसके बाद उसकी जिंदगी में अलग-अलग तरह के लोगों का सामना होता है। इन सभी किरदारों को संजीव कुमार ने निभाया था। खास बात यह थी कि उनके नौ किरदार जीवन के नौ रसों का प्रतीक माने गए थे।

    फिल्म में संजीव कुमार कभी डॉक्टर के रूप में नजर आए, तो कभी डाकू, साधु, पंडित और अन्य विविध व्यक्तित्वों के रूप में दिखाई दिए। हर किरदार का हावभाव, बोलने का अंदाज, शारीरिक भाषा और व्यक्तित्व अलग था। यही वजह थी कि दर्शकों को ऐसा महसूस ही नहीं हुआ कि पर्दे पर एक ही अभिनेता कई भूमिकाएं निभा रहा है। उनके अभिनय की यही ताकत उन्हें अपने समय के सबसे सम्मानित कलाकारों में शामिल करती है।

    फिल्म का निर्देशन ए. भीमसिंह ने किया था। यह दक्षिण भारतीय अभिनेता Sivaji Ganesan की तमिल फिल्म Navarathri का हिंदी रीमेक थी। हालांकि हिंदी संस्करण में संजीव कुमार ने अपनी अदाकारी से किरदारों को नई पहचान दी और फिल्म को यादगार बना दिया।

    संजीव कुमार का जीवन भी उतना ही चर्चित रहा जितना उनका करियर। उनके बारे में अक्सर यह कहा जाता है कि उन्होंने अपनी कम उम्र में मृत्यु की आशंका जताई थी। हालांकि इस तरह की बातें वर्षों से चर्चा का विषय रही हैं, लेकिन उनकी असली पहचान उनकी अद्भुत अभिनय क्षमता और सिनेमा को दिए गए अमूल्य योगदान से है।

    आज भी जब हिंदी सिनेमा के महानतम अभिनेताओं की बात होती है, तो संजीव कुमार का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। एक ही फिल्म में नौ किरदार निभाने का उनका रिकॉर्ड भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।

  • ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ की भावुक कहानी: Neel Kamal का अमर विदाई गीत और Rajendra Kumar का यादगार किस्सा

    ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ की भावुक कहानी: Neel Kamal का अमर विदाई गीत और Rajendra Kumar का यादगार किस्सा

    नई दिल्ली । हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में कुछ गीत ऐसे हैं जो सिर्फ धुन या बोल तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समय के साथ भावनाओं की विरासत बन जाते हैं। वर्ष 1968 में रिलीज हुई फिल्म ‘नील कमल’ का विदाई गीत ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ भी उन्हीं चुनिंदा गीतों में शामिल किया जाता है, जिसने भारतीय समाज में पिता-बेटी के रिश्ते की संवेदनशीलता को एक अलग पहचान दी। इस गीत को संगीतकार रवि के संगीत, गीतकार साहिर लुधियानवी के शब्दों और मोहम्मद रफी की भावपूर्ण आवाज ने कालजयी बना दिया।

    कहा जाता है कि इस गीत की लोकप्रियता केवल फिल्म रिलीज़ के बाद नहीं बढ़ी, बल्कि उससे पहले ही इसकी भावनात्मक शक्ति लोगों तक पहुंचने लगी थी। एक चर्चित किस्से के अनुसार, गीतकार राजेंद्र कृष्ण की बेटी की शादी के अवसर पर फिल्म इंडस्ट्री की कई हस्तियां मौजूद थीं। इसी समारोह में संगीतकार रवि से अनुरोध किया गया कि वे कोई विशेष प्रस्तुति दें। रवि ने इस गीत को विदाई के समय प्रस्तुत करने का निर्णय लिया, ताकि उसकी भावनात्मक गहराई पूरी तरह महसूस की जा सके।

    जैसे ही विदाई की रस्म शुरू हुई, माहौल बेहद भावुक हो गया। परिवार के सदस्य पहले से ही भावनाओं में डूबे हुए थे और उसी क्षण ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ की धुन ने पूरे वातावरण को और भारी कर दिया। गीत के बोल जैसे-जैसे आगे बढ़े, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। कहा जाता है कि यह केवल एक संगीत प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि एक ऐसा अनुभव था जिसने वहां मौजूद लोगों के दिलों को गहराई से छू लिया।

    इस घटना से जुड़ा सबसे चर्चित पहलू अभिनेता राजेंद्र कुमार का बताया जाता है। कहा जाता है कि गीत समाप्त होने के बाद वे इतने भावुक हो गए कि सीधे संगीतकार रवि के पास पहुंचे और पूछ बैठे कि यह गीत किस फिल्म का हिस्सा है, क्योंकि उस समय तक ‘नील कमल’ रिलीज नहीं हुई थी। यह घटना इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि कभी-कभी कला अपनी आधिकारिक प्रस्तुति से पहले ही लोगों के दिलों तक पहुंच जाती है और अमर हो जाती है।

    गीत से जुड़ी एक और भावनात्मक कथा मोहम्मद रफी से संबंधित बताई जाती है। कहा जाता है कि रिकॉर्डिंग के दौरान वे अपने निजी जीवन के अनुभवों से भावुक हो गए थे, जिससे उनकी आवाज में एक विशेष कंपन और दर्द झलक आया। संगीतकार रवि ने उस प्राकृतिक भाव को गीत में बनाए रखने का निर्णय लिया, क्योंकि उन्हें लगा कि यही वास्तविकता गीत को और अधिक प्रभावशाली बनाती है। यही कारण है कि यह गीत आज भी विदाई समारोहों में विशेष स्थान रखता है।

    समय के साथ यह गीत केवल एक फिल्मी प्रस्तुति नहीं रहा, बल्कि भारतीय पारिवारिक भावनाओं का प्रतीक बन गया। विवाह समारोहों में विदाई के क्षणों में इसकी मौजूदगी आज भी उतनी ही प्रभावशाली महसूस की जाती है जितनी दशकों पहले थी।

    यह गीत आने वाली पीढ़ियों के लिए भी हिंदी सिनेमा की उस विरासत का हिस्सा बना रहेगा, जिसमें संगीत केवल मनोरंजन नहीं बल्कि भावनाओं की गहराई को व्यक्त करने का माध्यम बनता है। इसकी लोकप्रियता यह साबित करती है कि सच्ची कला समय की सीमाओं से परे जाकर हमेशा जीवित रहती है।

    आज भी जब यह गीत गूंजता है, तो हर श्रोता के मन में विदाई का वही पुराना भाव और अपनापन लौट आता है, जो इसे अमर बनाता है।

  • जब 16 हजार लौटाकर मोहम्मद रफी ने रच दिया इंसानियत का इतिहास, जीतेंद्र भी रह गए हैरान

    जब 16 हजार लौटाकर मोहम्मद रफी ने रच दिया इंसानियत का इतिहास, जीतेंद्र भी रह गए हैरान



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर के दिग्गज पार्श्वगायक मोहम्मद रफी को उनकी बेहतरीन आवाज के साथ-साथ उनकी सादगी और इंसानियत के लिए भी याद किया जाता है। उनसे जुड़ा एक ऐसा ही भावुक किस्सा अभिनेता जीतेंद्र ने साझा किया था, जो आज भी लोगों के दिलों को छू जाता है।

    दरअसल, कुछ साल पहले एक संगीत समारोह में जीतेंद्र ने अपने और मोहम्मद रफी के बीच का एक पुराना अनुभव सुनाया था। उन्होंने बताया कि वे एक मिडिल क्लास परिवार से थे और बाद में उन्होंने फिल्म प्रोडक्शन की दुनिया में कदम रखा। अपनी कंपनी “तिरुपति फिल्म्स” के तहत उन्होंने कई फिल्मों का निर्माण किया, जिनमें ‘हमजोली’, ‘परिचय’, ‘खुशबू’, ‘ज्योति बने ज्वाला’ और ‘दीदार-ए-यार’ जैसी फिल्में शामिल थीं।

    ‘दीदार-ए-यार’ उनके करियर की सबसे महंगी फिल्मों में से एक थी, जिसमें ऋषि कपूर भी मुख्य भूमिका में थे। इसी फिल्म के लिए मोहम्मद रफी ने एक गाना गाया था, जिसके लिए उन्हें शुरुआत में 4 हजार रुपये फीस दी गई थी। समय के साथ फिल्म का बजट बढ़ गया और बाद में एक और गाना किशोर कुमार और मोहम्मद रफी दोनों ने मिलकर रिकॉर्ड किया।

    इस दौरान जीतेंद्र के मैनेजर ने निर्णय लिया कि दोनों गायकों को समान फीस दी जाए और उन्होंने मोहम्मद रफी को 20 हजार रुपये भेज दिए। लेकिन जब यह बात मोहम्मद रफी तक पहुंची, तो उन्होंने इस पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब फिल्म की शुरुआत में उनकी फीस 4 हजार तय हुई थी, तो उससे अधिक पैसे लेना उन्हें स्वीकार नहीं है।

    इसके बाद मोहम्मद रफी ने केवल 4 हजार रुपये ही अपने पास रखे और बाकी 16 हजार रुपये वापस कर दिए। उन्होंने साफ कहा कि वे सिर्फ उतनी ही रकम लेंगे जितनी शुरुआत में तय हुई थी। उनकी इस ईमानदारी और विनम्रता ने जीतेंद्र को गहराई से प्रभावित किया और यह किस्सा आज भी वह भावुक होकर याद करते हैं।

    यह घटना सिर्फ एक लेन-देन की कहानी नहीं है, बल्कि उस दौर के कलाकारों की सादगी, सिद्धांत और सम्मान की भावना को भी दर्शाती है, जो आज के समय में भी मिसाल के रूप में देखी जाती है।

  • फिल्म ‘गाइड’ की शूटिंग के दौरान सांप वाले सीन की मांग पर उठे सवाल और अभिनेत्री का स्पष्ट इनकार

    फिल्म ‘गाइड’ की शूटिंग के दौरान सांप वाले सीन की मांग पर उठे सवाल और अभिनेत्री का स्पष्ट इनकार

    नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री वहीदा रहमान ने अपने लंबे और सफल करियर में कई यादगार फिल्मों में काम किया है, लेकिन फिल्म ‘गाइड’ से जुड़ा एक पुराना किस्सा आज भी सबसे ज्यादा चर्चित घटनाओं में शामिल माना जाता है। यह फिल्म भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है, जिसमें उनके अभिनय और डांस परफॉर्मेंस ने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा था। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान सामने आया एक प्रसंग आज भी फिल्म जगत में दिलचस्प उदाहरण के रूप में देखा जाता है।

    बताया जाता है कि फिल्म के अंग्रेजी संस्करण की शूटिंग के दौरान एक दृश्य को लेकर निर्देशक की ओर से एक असामान्य मांग सामने रखी गई थी। इस दृश्य में अभिनेत्री से अपेक्षा की गई थी कि डांस करते समय वह एक सांप के साथ ऐसा सीन करें जिसमें उसे चूमने जैसा भाव दिखाया जाए। यह सुझाव उस समय के हिसाब से काफी अप्रत्याशित और असहज करने वाला माना गया, जिससे सेट पर एक अलग तरह की स्थिति बन गई थी।

    वहीदा रहमान ने इस प्रस्ताव पर तुरंत अपनी असहमति व्यक्त की थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि यह उनके लिए सहज नहीं है और वह इस तरह का दृश्य करने में असमर्थ हैं। उनका मानना था कि केवल प्रभाव पैदा करने के लिए इस तरह की मांग उचित नहीं है और कलाकार की अपनी सीमाएं और सम्मान भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने इस सीन को करने से साफ इनकार कर दिया था।

    इस घटना के बावजूद फिल्म की शूटिंग जारी रही और ‘गाइड’ को बाद में भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में स्थान मिला। फिल्म में वहीदा रहमान के अभिनय और नृत्य को बेहद सराहा गया और यह फिल्म उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई। दर्शकों ने उनके प्रदर्शन को काफी पसंद किया और यह फिल्म आज भी एक क्लासिक मानी जाती है।

    यह पूरा प्रसंग इस बात को दर्शाता है कि सिनेमा में रचनात्मकता के साथ कलाकार की सहमति और सहजता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। वहीदा रहमान का यह निर्णय यह साबित करता है कि एक कलाकार अपने सिद्धांतों पर कायम रहते हुए भी महान प्रदर्शन कर सकता है और अपने करियर में ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।

  • सालों की खामोशी के बाद धमाकेदार वापसी कैसे अक्षय खन्ना ने फिर जीता दर्शकों का दिल

    सालों की खामोशी के बाद धमाकेदार वापसी कैसे अक्षय खन्ना ने फिर जीता दर्शकों का दिल


    नई दिल्ली:हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो भीड़ का हिस्सा नहीं बनते बल्कि अपनी अलग पहचान गढ़ते हैं अक्षय खन्ना उन्हीं चुनिंदा अभिनेताओं में से एक हैं जिनका करियर उतार चढ़ाव से भरा जरूर रहा लेकिन उनकी प्रतिभा हमेशा अलग नजर आई जन्मदिन के इस खास मौके पर उनकी कहानी एक ऐसे कलाकार की है जिसने खामोशी के लंबे दौर के बाद भी खुद को फिर से साबित कर दिखाया

    दिसंबर 2025 में रिलीज हुई धुरंधर में अक्षय खन्ना ने कराची के खतरनाक डॉन रहमान डकैत का किरदार निभाकर सबको चौंका दिया यह भूमिका पहले कई बड़े सितारों को ऑफर हुई थी लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया अक्षय ने इस चुनौती को स्वीकार किया और जब फिल्म रिलीज हुई तो उनके किरदार ने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए उनका अंदाज और स्क्रीन प्रेजेंस इतना दमदार था कि नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी वह छा गए

    इसी साल छावा में उनके द्वारा निभाया गया औरंगजेब का किरदार भी काफी सराहा गया क्रिटिक्स ने उनके अभिनय को बेहद प्रभावशाली बताया और एक बार फिर यह साबित हुआ कि अक्षय खन्ना किसी भी तरह के किरदार में खुद को ढाल सकते हैं

    28 मार्च 1975 को मुंबई में जन्मे अक्षय खन्ना दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना के बेटे हैं लेकिन उन्होंने अपनी पहचान खुद के दम पर बनाई साल 1997 में फिल्म हिमालय पुत्र से डेब्यू करने वाले अक्षय को शुरुआत में असफलता का सामना करना पड़ा लेकिन उसी साल बॉर्डर में निभाए गए उनके किरदार ने उन्हें रातों रात पहचान दिला दी

    उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ 2001 में दिल चाहता है के साथ आया इस फिल्म में उन्होंने सिद्धार्थ यानी सिड का किरदार निभाया जो हिंदी सिनेमा के सबसे संवेदनशील और यादगार किरदारों में गिना जाता है उनके शांत और गहरे अभिनय ने दर्शकों को एक अलग तरह का हीरो दिखाया

    इसके बाद हमराज हंगामा और रेस जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाई कभी निगेटिव रोल तो कभी कॉमिक टाइमिंग हर अंदाज में वह फिट बैठे वहीं गांधी माई फादर में उनके अभिनय को बेहद सराहा गया

    हालांकि एक समय ऐसा भी आया जब अक्षय खन्ना अचानक फिल्मों से दूर हो गए 2012 से 2016 तक वह पूरी तरह पर्दे से गायब रहे ऐसा लगा मानो इंडस्ट्री ने उन्हें भुला दिया हो लेकिन यह खामोशी ज्यादा लंबे समय तक नहीं रही

    उन्होंने इत्तेफाक मॉम और दृश्यम 2 जैसी फिल्मों से जोरदार वापसी की खासतौर पर दृश्यम 2 में उनका तेज तर्रार पुलिस अधिकारी का किरदार दर्शकों को खूब पसंद आया

    अक्षय खन्ना की कहानी यह बताती है कि सच्ची प्रतिभा कभी खत्म नहीं होती वह सिर्फ सही मौके का इंतजार करती है अपनी दूसरी पारी में उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे सशक्त और भरोसेमंद अभिनेताओं में से एक हैं

  • किंग खान की ईद पोस्ट हुई वायरल कमेंट बॉक्स में उमड़ा फैंस का प्यार और मजेदार अंदाज

    किंग खान की ईद पोस्ट हुई वायरल कमेंट बॉक्स में उमड़ा फैंस का प्यार और मजेदार अंदाज


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान ने एक बार फिर अपने खास अंदाज से फैंस का दिल जीत लिया है। ईद के पवित्र मौके पर उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक शानदार तस्वीर साझा करते हुए सभी को मुबारकबाद दी। इस तस्वीर में वह डिजाइनर शेरवानी पहने बेहद शालीन अंदाज में सलाम करते नजर आए। उनके चेहरे की सादगी और मुस्कान ने फैंस को भावुक कर दिया।

    शाहरुख खान ने अपने संदेश में सभी के लिए खुशियां सुकून और रोशनी की कामना की। उन्होंने लिखा कि हर किसी को वह सब मिले जिसके लिए वह दुआ करता है बल्कि उससे भी ज्यादा। यह संदेश सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचा और देखते ही देखते उनकी पोस्ट वायरल हो गई।

    फैंस के लिए यह पोस्ट किसी तोहफे से कम नहीं रही। हर साल ईद पर शाहरुख अपने घर के बाहर आकर फैंस से मिलते थे और उन्हें शुभकामनाएं देते थे लेकिन इस बार सोशल मीडिया के जरिए दिया गया यह संदेश भी उतना ही खास साबित हुआ। कुछ ही मिनटों में पोस्ट पर हजारों लाइक्स और कमेंट्स की बाढ़ आ गई।

    कमेंट बॉक्स में फैंस का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। किसी ने उन्हें ईद मुबारक कहकर अपना प्यार जताया तो किसी ने उन्हें असली किंग बताते हुए तारीफों के पुल बांध दिए। एक यूजर ने लिखा कि आपका नाम ही काफी है हेटर्स को जवाब देने के लिए। वहीं कई फैंस ने मजाकिया अंदाज में सेवइयां और बिरयानी की डिमांड कर डाली।

    दिलचस्प बात यह रही कि शाहरुख खान के इंटरनेशनल फैंस भी इस खुशी में शामिल नजर आए। ग्रीस से एक फैन ने लिखा कि भले ही वह इस त्योहार को नहीं मना रही लेकिन उसकी शुभकामनाएं हमेशा उनके साथ हैं। इस तरह यह पोस्ट सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में उनके चाहने वालों को जोड़ने में सफल रही।

    अगर बात वर्क फ्रंट की करें तो शाहरुख खान जल्द ही अपनी अपकमिंग फिल्म किंग में नजर आने वाले हैं जिसमें वह दमदार एक्शन करते दिखाई देंगे। उनके फैंस इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वहीं सलमान खान ने भी ईद के मौके पर अपने परिवार के साथ वीडियो शेयर कर फैंस को बधाई दी। उनकी फिल्म मातृभूमि को लेकर भी चर्चा तेज है।

    दोनों सुपरस्टार्स की फिल्मों को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है और अब सभी की नजरें बॉक्स ऑफिस पर टिकी हैं कि कौन सी फिल्म ज्यादा धमाल मचाती है। फिलहाल ईद के मौके पर शाहरुख खान की यह पोस्ट लोगों के दिलों में खास जगह बना चुकी है और सोशल मीडिया पर लगातार ट्रेंड कर रही है।

  • जब शेषनाग के सेट पर भड़क गई थीं सरोज खान, रिहर्सल को लेकर रेखा से कह दी कड़वी बात

    जब शेषनाग के सेट पर भड़क गई थीं सरोज खान, रिहर्सल को लेकर रेखा से कह दी कड़वी बात


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की चमकदार दुनिया के पीछे कई ऐसे किस्से छिपे होते हैं जो समय के साथ चर्चित कहानियों में बदल जाते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प और भावुक किस्सा 1990 में रिलीज हुई फिल्म शेषनाग के सेट से जुड़ा हुआ है। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान मशहूर एक्ट्रेस रेखा और दिग्गज कोरियोग्राफर सरोज खान के बीच हुई एक घटना ने पूरे सेट का माहौल बदल दिया था। रिहर्सल को लेकर हुई इस बातचीत के बाद रेखा की आंखों में आंसू आ गए थे।

    दरअसल फिल्म में रेखा पर एक बेहद मुश्किल डांस नंबर फिल्माया जाना था। इस गाने की कोरियोग्राफी की जिम्मेदारी सरोज खान के पास थी जो उस दौर की सबसे मशहूर और सख्त अनुशासन वाली कोरियोग्राफर मानी जाती थीं। गाने की तैयारी के लिए सरोज खान को सिर्फ तीन दिन का समय मिला था। ऐसे में उन्होंने फिल्म के प्रोड्यूसर से कहकर रेखा को रिहर्सल के लिए सेट पर बुलाने का अनुरोध किया ताकि गाने की शूटिंग से पहले डांस को पूरी तरह तैयार किया जा सके।

    हालांकि उस समय रेखा ने अपनी तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए रिहर्सल में आने से मना कर दिया। बताया जाता है कि वह तीनों दिन रिहर्सल के लिए नहीं पहुंचीं। तीन दिन बाद जब गाने की शूटिंग का दिन आया तब रेखा सेट पर पहुंचीं। सरोज खान ने उन्हें फिर से रिहर्सल के लिए बुलाया लेकिन उस दिन भी रेखा ने यह कहते हुए मना कर दिया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है और आज की शूटिंग को कैंसिल कर देना चाहिए।

    यह बात सुनकर सरोज खान काफी नाराज हो गईं। वह सीधे रेखा के पास गईं और उनसे साफ-साफ सवाल किया कि आखिर वह रिहर्सल के लिए क्यों नहीं आ रही हैं। अपने एक पुराने इंटरव्यू में सरोज खान ने बताया था कि उन्होंने रेखा से कहा रेखा जी ऐसा लगता है कि आपको मुझसे कोई एलर्जी है। मैं आपको रिहर्सल के लिए बुलाती हूं तो आप नहीं आतीं और शूटिंग वाले दिन आती हैं तो कहती हैं कि तबीयत ठीक नहीं है। अगर आपको मेरे साथ काम नहीं करना है तो आप प्रोड्यूसर से कह सकती हैं कि डांस मास्टर बदल दिया जाए क्योंकि कुछ तो गड़बड़ जरूर है।

    सरोज खान की यह बात सुनकर माहौल अचानक गंभीर हो गया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने रेखा की तरफ देखा तो उनकी आंखों में आंसू थे। रेखा यह सुनकर काफी भावुक हो गई थीं और उनकी आंखों से आंसू निकल आए थे। हालांकि सरोज खान ने उन्हें समझाते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उन्होंने कुछ गलत कहा है लेकिन आज शूटिंग जरूर होनी चाहिए।

    इसके बाद रेखा ने खुद को संभाला और शांत स्वर में कहा मैं शूट करूंगी। इतना कहकर वह वहां से चली गईं। कुछ देर बाद रेखा की सेक्रेटरी सरोज खान के पास आईं और उनसे पूछा कि उन्होंने रेखा से आखिर क्या कह दिया है क्योंकि वह सेट पर रो रही हैं। यह घटना आज भी बॉलीवुड के उन चर्चित किस्सों में गिनी जाती है जो यह दिखाती है कि फिल्म इंडस्ट्री में काम के प्रति अनुशासन और दबाव कभी कभी बड़े कलाकारों के बीच भी भावनात्मक पल पैदा कर देते हैं।

  • राजामौली का दावा: 'वाराणसी' में बाहुबली से भी ज्यादा भव्य और दमदार सिनेमाई अनुभव

    राजामौली का दावा: 'वाराणसी' में बाहुबली से भी ज्यादा भव्य और दमदार सिनेमाई अनुभव



    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के दिग्गज निर्देशक एस. एस. राजामौली इन दिनों अपनी मेगा बजट फिल्म ‘वाराणसी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। करीब 1300 करोड़ रुपये के बजट में बन रही यह एक्शन-एडवेंचर फिल्म अगले साल रिलीज के लिए तैयार बताई जा रही है। फिल्म में महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा जोनास और पृथ्वीराज सुकुमारन लीड रोल में नजर आएंगे। रिलीज से पहले ही यह प्रोजेक्ट देश-विदेश में जबरदस्त चर्चा बटोर रहा है।

    हैदराबाद स्थित अन्नपूर्णा स्टूडियो में हाल ही में शुरू हुई अत्याधुनिक मोशन कैप्चर फैसिलिटी में फिल्म के कई अहम सीक्वेंस शूट किए गए हैं। राजामौली का कहना है कि यह भारत की सबसे उन्नत मो-कैप लैब में से एक है, जहां हाई-प्रिसिजन टेक्नोलॉजी के जरिए बड़े और जटिल दृश्यों को पहले से ज्यादा प्रभावशाली ढंग से फिल्माया जा सकता है।

    इसी दौरान राजामौली ने अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म बाहुबली: द बिगिनिंग का जिक्र करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर उस समय भारत में इतनी एडवांस मोशन कैप्चर तकनीक उपलब्ध होती, तो वे ‘बाहुबली’ और ‘ईगा’ जैसी फिल्मों को और भी बेहतर बना सकते थे। उनके मुताबिक भारत में टैलेंट की कभी कमी नहीं रही, लेकिन विश्वस्तरीय तकनीकी ढांचे की कमी के कारण कई बार विज़न को पूरी क्षमता के साथ पर्दे पर उतारना संभव नहीं हो पाता था।

    राजामौली ने बताया कि अब हालात बदल रहे हैं। नई तकनीक की बदौलत भारतीय फिल्मकारों को बड़े विजुअल सीक्वेंस के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ‘वाराणसी’ के कुछ जटिल एक्शन और फैंटेसी दृश्यों में इसी मोशन कैप्चर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसके परिणाम से टीम बेहद संतुष्ट है।

    फिल्म की पहली झलक पेरिस के प्रतिष्ठित सिनेमा हॉल Le Grand Rex में आयोजित एक ट्रेलर फेस्टिवल में दिखाई गई, जहां दर्शकों ने जबरदस्त प्रतिक्रिया दी। इससे साफ है कि ‘वाराणसी’ को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उत्सुकता बढ़ चुकी है।

    पोस्टर्स में महेश बाबू का ‘रुद्र’, पृथ्वीराज का ‘कुंभ’ और प्रियंका का ‘मंदाकिनी’ अवतार पहले ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन चुका है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा, तो यह फिल्म 7 अप्रैल 2027 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। राजामौली का मानना है कि नई तकनीक और बड़े विज़न का यह संगम भारतीय सिनेमा को एक नए स्तर पर ले जाएगा—और शायद यही वजह है कि वे आज भी मानते हैं, “बाहुबली को मैं और बेहतर बना सकता था।”

  • बॉलीवुड vs साउथ: बॉक्स ऑफिस क्लैश में किसने मारा बाज़ी और किसे झेला नुकसान

    बॉलीवुड vs साउथ: बॉक्स ऑफिस क्लैश में किसने मारा बाज़ी और किसे झेला नुकसान


    नई दिल्ली । बॉक्स ऑफिस पर साउथ और बॉलीवुड फिल्मों की टक्कर साल दर साल चर्चा का विषय बनी रहती है। कभी किसी फिल्म को भारी नुकसान उठाना पड़ा तो कभी साउथ फिल्म ने बॉलीवुड स्टार की धाक को झटका दे दिया। 2024 और पिछले कुछ वर्षों में कई मौके आए जब हिंदी और साउथ फिल्में आमने-सामने आईं और दर्शक उत्सुक रहते हैं कि इस टक्कर में बाज़ी किसकी हुई।

    सबसे पहले बात करें अक्षय कुमार की सरफिरा और कमल हासन स्टार इंडियन 2 की। 12 जुलाई 2024 को रिलीज़ हुई ये दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं। इंडियन 2 जिसका बजट लगभग 250 करोड़ था पूरी तरह डिजास्टर साबित हुई और अक्षय की फिल्म भी फ्लॉप रही।

    इसके बाद 15 अगस्त 2024 को राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर की स्त्री 2 और तमिल फिल्म थंगालान ने क्लैश किया। इस टक्कर में स्त्री 2 ने शानदार कमाई की और बॉक्स ऑफिस पर जीत दर्ज की जबकि थंगालान फ्लॉप साबित हुई।

    सनी देओल की गदर 2 और रजनीकांत की जेलर के बीच भी मुकाबला देखने को मिला। जेलर 10 अगस्त और गदर 2 11 अगस्त 2024 को रिलीज़ हुई। दोनों ही फिल्में ब्लॉकबस्टर साबित हुईं और दर्शकों ने दोनों को पसंद किया।

    शाहरुख खान की हिंदी फिल्म जीरो और कन्नड़ स्टार यश की KGF का क्लैश भी यादगार रहा। दोनों फिल्में 21 दिसंबर 2018 को रिलीज़ हुईं। जीरो KGF के मुकाबले पूरी तरह फ्लॉप रही जबकि KGF ने बॉक्स ऑफिस पर बाज़ी मारी और दर्शकों का प्यार बटोर लिया।

    इसी तरह शाहरुख की डंकी और प्रभास स्टारर सालार ने भी क्लैश किया। डंकी 21 दिसंबर और सालार 22 दिसंबर 2023 को रिलीज़ हुई। दोनों फिल्में कमर्शियल हिट रही लेकिन डायरेक्टर प्रशांत नील ने माना कि शाहरुख के साथ रिलीज़ होने से नुकसान हुआ।

    इन उदाहरणों से साफ है कि बॉलीवुड और साउथ फिल्मों का क्लैश हमेशा रोमांचक रहता है। कभी साउथ फिल्में बाज़ी मारती हैं कभी बॉलीवुड की पकड़ मजबूत होती है। रिलीज़ डेट कंटेंट की ताकत और स्टार पावर तय करती है कि किसका पलड़ा भारी रहेगा।

  • 19 मार्च की जंग: ‘धुरंधर 2’ से नहीं हटेंगे यश, ‘टॉक्सिक’ की रिलीज पर अडिग रहने के पीछे बड़ा कारण

    19 मार्च की जंग: ‘धुरंधर 2’ से नहीं हटेंगे यश, ‘टॉक्सिक’ की रिलीज पर अडिग रहने के पीछे बड़ा कारण


    नई दिल्ली । बॉक्स ऑफिस पर 19 मार्च को इस साल की सबसे बड़ी भिड़ंत देखने को मिल सकती है। एक ओर है बहुप्रतीक्षित सीक्वल धुरंधर 2 तो दूसरी तरफ सुपरस्टार यश की मेगा बजट फिल्म टॉक्सिक । दोनों फिल्मों की रिलीज डेट एक ही दिन तय होने से इंडस्ट्री में हलचल तेज है। जहां कयास लगाए जा रहे थे कि टॉक्सिक की रिलीज आगे बढ़ सकती है वहीं ताजा रिपोर्ट्स ने साफ कर दिया है कि यश अपनी फिल्म की तारीख बदलने के मूड में नहीं हैं।

    बताया जा रहा है कि यह फैसला किसी प्रतिस्पर्धा या अहंकार का नहीं बल्कि अपने प्रोजेक्ट पर गहरे विश्वास का परिणाम है। सूत्रों के मुताबिक यश को अपनी फिल्म के कंटेंट और प्रस्तुति पर पूरा भरोसा है। वह केवल ओपनिंग वीकेंड के आंकड़ों पर नहीं बल्कि लंबी रेस के प्रदर्शन पर ध्यान दे रहे हैं। उनका मानना है कि अगर फिल्म में दम है तो क्लैश के बावजूद दर्शक उसे सराहेंगे और थिएटर तक पहुंचेंगे। यही वजह है कि 19 मार्च की तारीख पर वह अडिग हैं।

    टॉक्सिक की घोषणा दिसंबर 2023 में ही कर दी गई थी और रिलीज डेट भी पहले से तय थी। यश के प्रशंसक लंबे समय से उन्हें बड़े पर्दे पर देखने का इंतजार कर रहे हैं। करीब 600 करोड़ रुपये के बजट में बनी यह फिल्म उनके करियर की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में गिनी जा रही है। दक्षिण भारत में यश की जबरदस्त फैन फॉलोइंग है ऐसे में ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिल्म को वहां से मजबूत ओपनिंग मिल सकती है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार यश धुरंधर 2 के मेकर्स से इस बात को लेकर नाराज भी हैं कि उनकी फिल्म की घोषित रिलीज डेट के बावजूद उसी दिन दूसरी बड़ी फिल्म लाने की योजना बनाई गई। इंडस्ट्री सूत्रों का कहना है कि दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग में बड़े प्रोजेक्ट्स की रिलीज डेट तय करते समय आपसी संवाद और समन्वय की परंपरा आम है। लेकिन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में इस तरह का कम्युनिकेशन हमेशा देखने को नहीं मिलता। माना जा रहा है कि अगर औपचारिक बातचीत होती तो शायद स्थिति अलग हो सकती थी।

    दूसरी ओर धुरंधर 2 को लेकर भी जबरदस्त बज बना हुआ है। पहली फिल्म की सफलता के बाद इसके सीक्वल से बड़ी उम्मीदें हैं। खासकर हिंदी बेल्ट में इस फिल्म को लेकर उत्साह चरम पर है। ऐसे में 19 मार्च का दिन दोनों फिल्मों के लिए परीक्षा की घड़ी साबित हो सकता है।

    ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि यह क्लैश जोखिम के साथ अवसर भी लेकर आता है। यदि दोनों फिल्मों का कंटेंट दर्शकों को पसंद आता है तो वे समानांतर रूप से अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं। फिलहाल यश का रुख साफ है वह पीछे हटने के बजाय मुकाबले के लिए तैयार हैं। अब दर्शकों का फैसला ही तय करेगा कि इस महाटक्कर में किसका पलड़ा भारी रहता है।