Tag: Hormuz Strait

  • मोजतबा खामेनेई को लेकर अटकलों के बीच बड़ा अपडेट, पेजेशकियन से मुलाकात में बनी आगे की रणनीति

    मोजतबा खामेनेई को लेकर अटकलों के बीच बड़ा अपडेट, पेजेशकियन से मुलाकात में बनी आगे की रणनीति


    नई दिल्ली। ईरान में जारी गंभीर संकट और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ लंबी बैठक की है। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब मोजतबा खामेनेई के सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने को लेकर लगातार कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। राष्ट्रपति पेजेशकियन के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच करीब सात घंटे तक बातचीत हुई और इस दौरान देश की आंतरिक स्थिति से लेकर आर्थिक चुनौतियों और अमेरिका के दबाव तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।

    पेजेशकियन ने एक इंटरव्यू में बताया कि बैठक में सबसे ज्यादा जोर ईरान के भीतर एकता बनाए रखने पर रहा। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल बाहरी दबाव नहीं बल्कि आंतरिक मतभेद भी हैं। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि विरोधी ताकतें देश में विभाजन पैदा करने की कोशिश कर सकती हैं और ऐसे समय में राजनीतिक नेतृत्व तथा जनता के बीच सहयोग बेहद जरूरी है।

    मोजतबा खामेनेई को मार्च में ईरान का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया था। उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल से जुड़े हमले में मौत के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी मिली थी। पद संभालने के बाद से मोजतबा की सार्वजनिक मौजूदगी बेहद सीमित रही है। इसी वजह से उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर कई तरह की अटकलें भी सामने आती रही हैं। राष्ट्रपति के साथ उनकी यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब ईरान अमेरिका के साथ बेहद तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहा है।

    बैठक में आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों पर भी चर्चा हुई। पेजेशकियन के अनुसार बाजार की स्थिति रोजगार आवास और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण पैदा हो रही आर्थिक दिक्कतें प्रमुख मुद्दों में शामिल रहीं। ईरानी नेतृत्व के सामने चुनौती यह है कि बाहरी दबाव के बीच देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की जरूरतों को किस तरह संभाला जाए।

    अमेरिका के साथ विवाद में ईरान ने अपना रुख भी काफी सख्त रखा है। ईरान चाहता है कि उसके बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी खत्म की जाए। इसके अलावा युद्ध के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा आर्थिक प्रतिबंध हटाने और विदेशों में जब्त की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करने की मांग भी की गई है। ईरान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि इन मुद्दों पर समाधान के बिना होर्मुज जलडमरूमध्य को स्थायी रूप से खोलने का फैसला आसान नहीं होगा।

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में जारी तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ईरान ओमान के साथ भी जलमार्ग से जुड़ी आवाजाही को लेकर बातचीत कर रहा है।

    इसी बीच ईरान ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर मोहसेन रेजाई को सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का प्रमुख बनाया गया है। लंबे समय तक रिवोल्यूशनरी गार्ड का नेतृत्व कर चुके रेजाई को सख्त रुख के लिए जाना जाता है। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी भी दी है कि यदि ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रही तो अमेरिकी सैनिकों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान फिलहाल आंतरिक एकता आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। अमेरिका के साथ बातचीत की संभावना बनी हुई है लेकिन ईरान अपनी शर्तों पर समझौते की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में मोजतबा खामेनेई की रणनीति और होर्मुज को लेकर ईरान का फैसला पूरे क्षेत्र की राजनीति और वैश्विक बाजार के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।

  • अमेरिका ईरान से क्यों मांग रहा मुआवजा? ट्रंप ने रखी लंबी सूची, शांति वार्ता पर भी डाला नया दबाव

    अमेरिका ईरान से क्यों मांग रहा मुआवजा? ट्रंप ने रखी लंबी सूची, शांति वार्ता पर भी डाला नया दबाव


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब मुआवजे का मुद्दा उठाकर विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान पिछले कुछ महीनों में हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग कर सकता है तो अमेरिका भी उससे मुआवजा मांग सकता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साफ संकेत दिया कि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा। उनके इस रुख से दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्हें यह विचार दिलचस्प लगा कि ईरान हालिया संघर्ष में हुए नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा है। इसी आधार पर उन्होंने अमेरिका की ओर से भी ईरान से मुआवजा मांगने की बात कही। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान से जुड़े संघर्षों में कई अमेरिकी नागरिकों और सैन्यकर्मियों की जान गई है जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। ट्रंप का कहना है कि ऐसे पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिलना चाहिए।

    अपने बयान में ट्रंप ने पुराने हमलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने यमन के बंदरगाह पर अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत यूएसएस कोल पर हुए घातक हमले का हवाला दिया। अक्टूबर 2000 में हुए इस हमले में 17 अमेरिकी नाविकों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी अलकायदा पर डाली गई थी। ट्रंप ने इसके अलावा जनरल कासिम सुलेमानी से जुड़े घटनाक्रम और दूसरे संघर्षों में मारे गए लोगों का भी जिक्र किया।

    ट्रंप ने कहा कि पिछले कई दशकों के दौरान विरोध प्रदर्शनों और विभिन्न संघर्षों में मारे गए लोगों के परिवारों को भी मुआवजे की सूची में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने पिछले पांच महीनों में मारे गए हजारों लोगों के परिजनों के लिए भी नुकसान की भरपाई की बात कही। हालांकि इन दावों और मुआवजे की संभावित प्रक्रिया को लेकर अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को इस मुद्दे को भविष्य की बातचीत में शामिल करने के निर्देश दे दिए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और संभावित समझौते को लेकर बातचीत की कोशिशें चल रही हैं। ट्रंप ने इससे पहले संकेत दिया था कि वह सैन्य कार्रवाई बढ़ाने के बजाय ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने को प्राथमिकता दे सकते हैं।

    दूसरी ओर ईरान भी अमेरिका के सामने अपनी कई शर्तें रख रहा है। ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में जारी नाकाबंदी हटाने के साथ युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में फंसी संपत्तियों को जारी करने जैसी मांगें उठाई गई हैं। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट रखा है और अमेरिका से क्षेत्रीय मामलों में हस्तक्षेप कम करने की मांग की है।

    ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ने का इंतजार कर रहा है। उनका मानना है कि महंगाई और कमजोर होती आर्थिक स्थिति ईरानी नेतृत्व को समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर सकती है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत भले ही जारी रहने के संकेत दे रही हो लेकिन मुआवजे युद्ध के नुकसान और होर्मुज जैसे मुद्दों ने समझौते की राह को और मुश्किल बना दिया है। आने वाले दिनों में ट्रंप का यह नया रुख अमेरिका ईरान संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकता है।

  • ट्रंप की नई डिमांड से मचा तेल बाजार में हड़कंप, क्रूड के दाम में अचानक जोरदार तेजी

    ट्रंप की नई डिमांड से मचा तेल बाजार में हड़कंप, क्रूड के दाम में अचानक जोरदार तेजी


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के सामने रखी गई नई मांग के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 5 फीसदी की तेजी के साथ 87 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 4.50 फीसदी से ज्यादा चढ़कर करीब 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। कच्चे तेल के साथ प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई। इस अचानक बढ़ी कीमत ने दुनियाभर के बाजारों में एक बार फिर महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से बातचीत और तनाव दोनों का दौर जारी है। युद्ध भले ही फिलहाल थमा हुआ माना जा रहा हो लेकिन दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी है। इसी बीच ट्रंप ने ईरान के सामने एक नई मांग रख दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान से उन लोगों के लिए मुआवजे की मांग की है जिन्होंने ईरान से जुड़े संघर्षों में अपनी जान गंवाई है या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। ट्रंप का कहना है कि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत में इस मुद्दे को भी शामिल किया जाएगा।

    ट्रंप की इस मांग ने बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। निवेशकों को आशंका है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव दोबारा बढ़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों पर इसका तत्काल असर देखने को मिला। तेल बाजार में सबसे ज्यादा चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और दुनिया की कुल तेल जरूरत का करीब 20 फीसदी हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है।

    ईरान और अमेरिका के बीच विवाद का असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहता। कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी होने पर पेट्रोल डीजल परिवहन और औद्योगिक उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ने की आशंका रहती है। तेल महंगा होने पर विमानन से लेकर माल ढुलाई तक कई क्षेत्रों का खर्च बढ़ सकता है और इसका दबाव आम उपभोक्ताओं पर भी दिखाई दे सकता है।

    मध्य पूर्व में तनाव के बीच निवेशक लगातार अमेरिका और ईरान से आने वाले बयानों और घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुलता है और तनाव कम होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। लेकिन अगर टकराव दोबारा बढ़ता है या होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को लेकर कोई गंभीर समस्या सामने आती है तो कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

    फिलहाल ट्रंप की नई मांग ने तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है और होर्मुज क्षेत्र की स्थिति कैसी रहती है इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। यही घटनाक्रम तय करेगा कि कच्चे तेल की कीमतों में मौजूदा तेजी आगे जारी रहती है या बाजार को राहत मिलती है।

  • PM मोदी ने ईरान से राष्ट्रपति को किया टेलीफोन…. बोले- होर्मुज स्ट्रेट में हो आवाजाही की स्वतंत्रता

    PM मोदी ने ईरान से राष्ट्रपति को किया टेलीफोन…. बोले- होर्मुज स्ट्रेट में हो आवाजाही की स्वतंत्रता


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने ईरान (Iran) के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन (President Dr. Masoud Pezeshkian) से मंगलवार को टेलीफोन पर बातचीत की, जिसमें राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने पश्चिम एशिया (West Asia) की हालिया घटनाओं और आगे की दिशा की जानकारी प्रधानमंत्री को दी। पीएम मोदी ने समझौते का स्वागत करते हुए भारत की स्थिर नीति को दोहराया कि क्षेत्र के सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही होना चाहिए। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के निरंतर प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया। इस दौरान समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता और वाणिज्य की सुरक्षा को बनाए रखने के महत्व को भी सामने रखा गया।

    पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं के बारे में ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बात हुई। बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि लगातार कोशिशों से इस इलाके में स्थायी शांति आएगी। भारत और दुनिया के लिए होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही की आजादी के महत्व को फिर से दोहराया।’ इससे पहले, पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री मोदी को ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। खामेनेई का अंतिम संस्कार समारोह अगले सप्ताह आयोजित होने वाला है। खबरों के मुताबिक, सरकार भारत के प्रतिनिधि के तौर पर बिहार के राज्यपाल अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा को इन समारोह में भेजने की योजना बना रही है। अंतिम संस्कार की रस्में 5 से 9 जुलाई तक होंगी।


    भारत-ईरान के रिश्ते में उतार-चढ़ाव

    भारत और ईरान के मौजूदा संबंध काफी जटिल और रणनीतिक महत्व वाले रहे हैं। दोनों देशों के बीच सभ्यतागत और ऐतिहासिक गहराई है, लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिकी प्रतिबंधों, क्षेत्रीय तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 2024 में भारत ने चाबहार पोर्ट के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को 10 वर्षों के लिए ऑपरेट करने का समझौता किया, जिसमें 120 मिलियन डॉलर का निवेश शामिल था। 2026 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत ने पोर्ट पर अपनी गतिविधियां कम कीं और वादा किया राशि का भुगतान पूरा कर लिया।

    होर्मुज स्ट्रेट संकट के दौरान भारत ने ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क बढ़ाया, जहाजों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री स्तर पर बातचीत हुई। ईरान के सुप्रीम लीडर की मृत्यु पर भारत ने शोक व्यक्त किया और BRICS जैसे मंचों पर सहयोग जारी रखा। ऊर्जा आयात लगभग बंद हो गया है, लेकिन कनेक्टिविटी, अफगानिस्तान और मध्य एशिया पहुंच के लिए चाबहार अभी भी अहम बना हुआ है। दोनों देशों के बीच संबंध रणनीतिक स्वायत्तता और व्यावहारिक जरूरतों पर आधारित हैं। भारत ईरान को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी मानता है, जबकि ईरान भारत को बड़े बाजार और निवेशक के रूप में देखता है।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा संकट, ड्रोन हमले के बाद 11 हजार नाविकों की निकासी पर लगी रोक

    होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा संकट, ड्रोन हमले के बाद 11 हजार नाविकों की निकासी पर लगी रोक

    नई दिल्ली ।  होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कार्गो जहाज पर हुए ड्रोन हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं सुरक्षा हालात बिगड़ने के चलते अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन आईएमओ ने 11 हजार से अधिक फंसे नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए चलाया जा रहा विशेष रेस्क्यू अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया है। इस फैसले के बाद हजारों नाविक अब भी समुद्र में फंसे हुए हैं और उनकी सुरक्षित वापसी को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने बताया कि गुरुवार को जिस मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमला हुआ वह संगठन की आधिकारिक निकासी योजना का हिस्सा नहीं था। इसके बावजूद इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक निकासी सूची में शामिल जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती तब तक बचाव अभियान को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

    जानकारी के अनुसार संयुक्त राष्ट्र ओमान और कई सदस्य देशों के सहयोग से पिछले कुछ दिनों से फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान चला रहे थे। इस विशेष ऑपरेशन का उद्देश्य युद्ध और बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के कारण समुद्र में फंसे जहाजों और उनके चालक दल को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना था।

    इसी दौरान ओमान के तट के पास सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो जहाज एवर लवली पर ड्रोन हमला हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस हमले में किसी नाविक की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है लेकिन घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है।

    आईएमओ प्रमुख आर्सेनियो डोमिंगेज ने कहा कि निकासी अभियान को फिलहाल अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है और सुरक्षा स्थिति की दोबारा समीक्षा की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी जहाज को तब तक आगे नहीं बढ़ाया जाएगा जब तक सभी संबंधित देशों और एजेंसियों की ओर से सुरक्षित मार्ग की गारंटी नहीं मिल जाती।

    बताया जा रहा है कि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद लगभग 11 हजार नाविकों को सुरक्षित निकालने की योजना बनाई गई थी। हालांकि ताजा ड्रोन हमले ने इस पूरी प्रक्रिया को झटका दिया है और अब निकासी अभियान अनिश्चितकाल के लिए टल सकता है।

    अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार इस पूरे क्षेत्र में अभी भी करीब 20 हजार से अधिक नाविक विभिन्न मालवाहक और वाणिज्यिक जहाजों पर फंसे हुए हैं। इनमें से लगभग 11 हजार लोगों को पहले चरण में सुरक्षित निकालने की योजना तैयार की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक समुद्री व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है।

    अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए आरोपों के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि ईरान ने अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि सुरक्षा हालात कब सामान्य होंगे और हजारों फंसे नाविकों का रेस्क्यू अभियान दोबारा कब शुरू किया जाएगा।

  • अमेरिकी नेवी का बड़ा ऑपरेशन: 20 चेतावनियों के बाद मालवाहक जहाज पर मिसाइल दागी, ईरान तक पहुंच रोकने का दावा

    अमेरिकी नेवी का बड़ा ऑपरेशन: 20 चेतावनियों के बाद मालवाहक जहाज पर मिसाइल दागी, ईरान तक पहुंच रोकने का दावा

    नई दिल्ली । ओमान की खाड़ी में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है, जब अमेरिकी सेना ने एक मालवाहक जहाज पर हेलफायर मिसाइल से हमला करने का दावा किया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह जहाज गांबिया के झंडे वाला ‘लियान स्टार’ था, जो ईरान की ओर बढ़ रहा था और बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद नहीं रुका। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और भू-राजनीतिक तनाव और अधिक बढ़ गया है।

    अमेरिकी सेना के मुताबिक यह घटना उस समय हुई जब जहाज ओमान की खाड़ी से होकर एक ईरानी बंदरगाह की ओर बढ़ रहा था। अमेरिकी नौसेना ने इसे रोकने के लिए लगातार 20 से अधिक चेतावनियां जारी कीं, लेकिन जहाज ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसके बाद अमेरिकी बलों ने कार्रवाई करते हुए हेलफायर मिसाइल से जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाया, जिससे उसकी गति बाधित हो गई और वह आगे नहीं बढ़ सका।

    अधिकारियों का दावा है कि यह जहाज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में था, लेकिन अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था। हमले के बाद जहाज अब ईरान की ओर आगे नहीं बढ़ रहा है और ओमान की खाड़ी में बहाव की स्थिति में है। हालांकि इसकी वर्तमान स्थिति और चालक दल को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    यह कार्रवाई उस व्यापक नौसैनिक रणनीति का हिस्सा बताई जा रही है जिसे अमेरिका ने हाल के महीनों में क्षेत्र में लागू किया है। इस अभियान के तहत अब तक कई जहाजों को रोका जा चुका है और दर्जनों जहाजों को उनके मार्ग से हटाकर अन्य दिशाओं में भेजा गया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रतिबंधों को लागू करने के लिए उठाया गया है।

    दूसरी ओर, इस घटना ने होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। यह क्षेत्र पहले से ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, और यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक बाजारों पर असर डाल सकता है।

    अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्षविराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। दोनों देशों के बीच भविष्य की रणनीति और संभावित समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसी बीच उच्च स्तर पर कूटनीतिक बातचीत भी जारी है, लेकिन अब तक किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।

    अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई जारी रह सकती है। वहीं, ईरान की ओर से इस घटना पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना केवल एक समुद्री कार्रवाई नहीं बल्कि व्यापक भू-राजनीतिक तनाव का हिस्सा है, जो आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सीधा पड़ सकता है।

  • होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान का बड़ा कदम, संसद में कानून पर मतदान के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ी चिंता

    होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान का बड़ा कदम, संसद में कानून पर मतदान के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । वैश्विक ऊर्जा और समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। मध्य पूर्व क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति को प्रभावित करने वाले इस जलमार्ग के प्रबंधन से जुड़े विधेयक पर ईरान की संसद में आज मतदान किया गया। यह प्रस्ताव इस मार्ग के संचालन को कानूनी रूप देने और नियंत्रण व्यवस्था को और सख्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है, क्योंकि यह समुद्री मार्ग दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा संभालता है।

    सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित कानून का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी और प्रबंधन के लिए स्पष्ट ढांचा तैयार करना है। इस मार्ग से वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की बड़ी मात्रा में आपूर्ति होती है, जिसके कारण इसे दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में गिना जाता है। ईरान लंबे समय से इस क्षेत्र में अपने अधिकार और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की बात करता रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे वैश्विक व्यापार के लिए साझा मार्ग मानता है।

    संसद में हुई इस वोटिंग के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में ईरान इस जलमार्ग पर शुल्क आधारित व्यवस्था या अतिरिक्त नियंत्रण लागू कर सकता है, जिसे कुछ विशेषज्ञ अनौपचारिक रूप से “टोल व्यवस्था” के रूप में भी देख रहे हैं। हालांकि आधिकारिक स्तर पर इसे समुद्री सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण का हिस्सा बताया जा रहा है। यदि इस तरह की व्यवस्था लागू होती है तो इसका सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति श्रृंखला और शिपिंग लागत पर पड़ सकता है।

    वैश्विक स्तर पर इस घटनाक्रम को लेकर चिंता का माहौल है। कई देशों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह की सख्ती या नियंत्रण बढ़ने से ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा हो सकती है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा संभालता है, इसलिए यहां होने वाला कोई भी बदलाव सीधे अंतरराष्ट्रीय कीमतों और आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण इस मुद्दे पर कूटनीतिक स्तर पर निगरानी और बातचीत की संभावना भी बनी हुई है।

    ईरान का पक्ष है कि वह अपने समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है। वहीं अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के कदम क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा सकते हैं और वैश्विक व्यापार प्रवाह पर असर डाल सकते हैं। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में सुरक्षा घटनाओं और तनाव की स्थिति पहले भी देखी गई है, जिससे इसकी संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।

    अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि संसद में पारित इस प्रस्ताव के बाद ईरान इसे किस तरह लागू करता है और क्या यह वास्तव में किसी प्रकार की शुल्क प्रणाली या नए नियंत्रण ढांचे का रूप लेता है, या फिर यह केवल प्रशासनिक और सुरक्षा सुधार तक सीमित रहता है।

  • युद्धविराम के पीछे कौन सा बड़ा खेल? अमेरिका–इजरायल रिश्तों पर ईरानी विदेश मंत्री के तीखे सवाल

    युद्धविराम के पीछे कौन सा बड़ा खेल? अमेरिका–इजरायल रिश्तों पर ईरानी विदेश मंत्री के तीखे सवाल


    नई दिल्ली । मध्य-पूर्व में जारी तनाव और सैन्य गतिविधियों के बीच ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका और इजरायल के बीच संबंधों और युद्धविराम प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि क्षेत्र में हालात जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, उसमें कई अंतरराष्ट्रीय पक्षों की भूमिकाएं स्पष्ट नहीं हैं और विभिन्न स्तरों पर विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं। अराघची के इन बयानों ने कूटनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है।

    विदेश मंत्री अराघची ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से आरोप लगाया कि व्हाइट हाउस और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अलग-अलग संकेत दिए जा रहे हैं, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि हजारों अमेरिकी सैनिक मध्य-पूर्व क्षेत्र की ओर तैनात किए जा रहे हैं, जिससे तनाव और बढ़ने की आशंका है। उनके अनुसार, यदि किसी स्तर पर युद्धविराम की कोशिश सफल भी होती है, तो यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका और इजरायल इस संघर्ष के अंतिम परिणाम को लेकर समान दृष्टिकोण रखते हैं या नहीं।

    अराघची ने अपने बयान में यह भी कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष के एक महीने बाद अब दुनिया भर की सरकारें इसके राजनीतिक और आर्थिक प्रभावों का आकलन करने में जुटी हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वहां से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ेगा।

    उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा रही है। ईरान का दावा है कि कुछ हालिया सैन्य गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन हैं। ईरानी पक्ष का कहना है कि वह इन कार्रवाइयों को गंभीरता से देख रहा है और आवश्यक प्रतिक्रिया देने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

    मध्य-पूर्व में स्थिति उस समय और संवेदनशील हो गई जब होर्मुज क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आईं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई थी और इसका उद्देश्य अपने सैनिकों और नौसैनिक इकाइयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। वहीं ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे आक्रामक कदम बताया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप से क्षेत्र में कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और सभी पक्षों की नजर आगामी घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

  • ईरान–अमेरिका तनाव फिर बढ़ा: MQ-9 ड्रोन गिराने का दावा, सीजफायर उल्लंघन पर दी कड़ी चेतावनी

    ईरान–अमेरिका तनाव फिर बढ़ा: MQ-9 ड्रोन गिराने का दावा, सीजफायर उल्लंघन पर दी कड़ी चेतावनी




    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी सेना के एक MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है। ईरान का कहना है कि यह ड्रोन उसके हवाई क्षेत्र में घुस आया था।

    यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब क्षेत्र में अस्थायी संघर्ष विराम (सीजफायर) लागू बताया जा रहा है और इसी दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के पास सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं।

    ईरान का दावा और कड़ी चेतावनी
    ईरान की मीडिया एजेंसी मेहर न्यूज के अनुसार, IRGC ने कहा कि अमेरिकी ड्रोन उसकी सीमा में प्रवेश कर रहा था, जिसके बाद उसे निशाना बनाकर मार गिराया गया। साथ ही ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि सीजफायर का उल्लंघन दोबारा किया गया तो इसका “कड़ा और निर्णायक जवाब” दिया जाएगा।ईरान ने यह भी कहा कि उसकी सुरक्षा और संप्रभुता का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    अमेरिकी कार्रवाई का दावा
    दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा है कि उसने आत्मरक्षा में कार्रवाई की है। अमेरिकी प्रवक्ता के मुताबिक, क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिकों और युद्धपोतों को खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया।

    रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास संदिग्ध बोट्स पर भी कार्रवाई की, जिन पर कथित तौर पर बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश का आरोप था। इसके अलावा बंदर अब्बास के पास एक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल साइट पर भी हमले की बात सामने आई है।

    चार ईरानी सैनिकों की मौत का दावा
    ईरानी मीडिया का दावा है कि अमेरिकी हमलों में रिवोल्यूशनरी गार्ड के चार सैनिकों की मौत हुई है। हालांकि इस पर स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

    क्षेत्र में बढ़ता तनाव
    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकती है।

    ईरान और अमेरिका के बीच पहले से ही परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर तनाव बना हुआ है। इस ताजा घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच हालात को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

  • होर्मुज स्ट्रेट खुलने के संकेत, अमेरिका-ईरान समझौते की बढ़ी उम्मीद; दुनिया को मिल सकती है राहत

    होर्मुज स्ट्रेट खुलने के संकेत, अमेरिका-ईरान समझौते की बढ़ी उम्मीद; दुनिया को मिल सकती है राहत



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव अब कम होता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम और व्यापक समझौते को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देश एक संभावित डील के काफी करीब पहुंच चुके हैं। इसी बीच ईरान ने बड़ा संकेत देते हुए कहा है कि अगर समझौता अंतिम रूप लेता है तो रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट में अगले 30 दिनों के भीतर जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो सकती है।

    दरअसल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमलों के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया था। इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर निगरानी और नियंत्रण सख्त कर दिया था, जिससे इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आ गई। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है, इसलिए इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी उथल-पुथल मच गई थी।

    ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार संभावित समझौते में युद्ध को खत्म करने, क्षेत्र में तनाव कम करने और समुद्री यातायात बहाल करने जैसे मुद्दों पर सहमति बनने की कोशिश हो रही है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि यदि सभी पक्ष सहमत होते हैं तो एक महीने के भीतर जहाजों की आवाजाही युद्ध-पूर्व स्थिति में लौट सकती है।

    उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी हाल के दिनों में दावा कर चुके हैं कि ईरान के साथ समझौते को लेकर सकारात्मक प्रगति हुई है। हालांकि परमाणु कार्यक्रम और हाईली एनरिच्ड यूरेनियम जैसे मुद्दों पर अभी दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह सामान्य होता है तो इसका सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ेगा। इससे कच्चे तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है और भारत समेत कई देशों को ऊर्जा संकट से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।