Tag: Hormuz Strait

  • Iran-US Deal में नया पेंच: ‘संवर्धित यूरेनियम नहीं सौंपेंगे’, तेहरान ने परमाणु मुद्दे पर झुकने से किया इनकार

    Iran-US Deal में नया पेंच: ‘संवर्धित यूरेनियम नहीं सौंपेंगे’, तेहरान ने परमाणु मुद्दे पर झुकने से किया इनकार



    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच नया विवाद सामने आ गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) के भंडार को किसी भी देश को नहीं सौंपेगा। तेहरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम मौजूदा प्रारंभिक समझौते का हिस्सा नहीं है।

    एक  रिपोर्ट के मुताबिक एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने कहा कि अमेरिका के साथ अभी जो बातचीत चल रही है, उसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव और युद्ध जैसी स्थिति को खत्म करना है, न कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम फैसला लेना। सूत्र ने कहा कि परमाणु मुद्दे पर चर्चा आगे होने वाली औपचारिक वार्ताओं में की जाएगी।

    इससे कुछ घंटे पहले अमेरिकी मीडिया, खासकर न्यूयॉर्क टाइम्स में दावा किया गया था कि ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को छोड़ने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार हो गया है। रिपोर्ट में दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि दोनों देशों के बीच समझौते का ढांचा लगभग तैयार है और अब तकनीकी प्रक्रियाओं पर बातचीत होनी बाकी है।

    हालांकि ईरान ने इन रिपोर्टों को पूरी तरह सही मानने से इनकार कर दिया। ईरानी मीडिया और सरकारी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल बातचीत का फोकस होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य जहाजरानी बहाल करना और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत हासिल करना है।

    ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार संभावित समझौते में यह प्रस्ताव शामिल है कि 30 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही युद्ध-पूर्व स्तर पर वापस लाई जाएगी। इसके बदले अमेरिका ईरानी तेल पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में राहत दे सकता है।

    इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते का “फ्रेमवर्क” तैयार हो चुका है। ट्रंप के मुताबिक इस डील का मकसद दोनों देशों के बीच तनाव कम करना और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करना है।

    फिलहाल दोनों देशों के बयानों में अंतर साफ दिखाई दे रहा है। जहां अमेरिका इसे परमाणु समझौते की दिशा में बड़ी प्रगति बता रहा है, वहीं ईरान लगातार यह संकेत दे रहा है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है।

  • ईरान-अमेरिका डील पर ट्रंप का बड़ा दावा: ‘समझौता लगभग तय’, होर्मुज खुलने की बात; तेहरान ने किया खंडन

    ईरान-अमेरिका डील पर ट्रंप का बड़ा दावा: ‘समझौता लगभग तय’, होर्मुज खुलने की बात; तेहरान ने किया खंडन

    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ एक बड़ा शांति समझौता “काफी हद तक तय” हो चुका है और बस अंतिम औपचारिकताओं पर काम चल रहा है। ट्रंप ने कहा कि यह समझौता अमेरिका, ईरान और कुछ अन्य देशों के बीच बातचीत के बाद आगे बढ़ा है।

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी बातचीत की है, जो “सकारात्मक” रही। उनके मुताबिक समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोले जाने की दिशा में भी चर्चा हुई है।

    हालांकि ईरान ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता युद्ध को समाप्त करने की है और किसी भी तरह का अंतिम समझौता अभी नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी साफ किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण बना रहेगा।

    रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान केवल युद्ध-पूर्व स्तर पर जहाजों की आवाजाही बहाल करने पर सहमत हो सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह “फ्री नेविगेशन” नहीं माना जाएगा।

    इस बीच न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान सैद्धांतिक रूप से अपने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार को सौंपने पर सहमत हो सकता है। हालांकि इसकी प्रक्रिया और शर्तों पर आगे औपचारिक बातचीत होनी बाकी है।

    यह मुद्दा अमेरिका की प्रमुख मांगों में से एक रहा है, क्योंकि इसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की दिशा में अहम कदम माना जाता है। फिलहाल दोनों पक्षों के अलग-अलग बयानों ने इस संभावित समझौते को लेकर असमंजस और बढ़ा दिया है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव से तेल बाजार में भूचाल, ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के पार

    अमेरिका-ईरान तनाव से तेल बाजार में भूचाल, ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के पार



    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ नजर आने लगा है। लगातार तीसरे दिन कच्चे तेल की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती सख्ती और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। इसी के चलते ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) करीब 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

    फरवरी से अब तक 50% से ज्यादा महंगा हुआ तेल

    विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल है। यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। फरवरी से अब तक कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। वहीं पिछले सप्ताह ही कीमतों में करीब 8 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया था।

    ट्रंप चाहते हैं कि ईरान जल्द समझौते के लिए तैयार हो जाए। माना जा रहा है कि यदि दोनों देशों के बीच सहमति बनती है तो होर्मुज स्ट्रेट में बाधाएं कम हो सकती हैं और तेल परिवहन सामान्य हो सकता है।

    ट्रंप ने दी सख्त चेतावनी

    पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि तेहरान के पास समय बहुत कम है और उसे जल्द फैसला लेना होगा। ट्रंप ने कहा कि ईरान को केवल एक परमाणु साइट संचालित करने की अनुमति होगी, जबकि बाकी साइटों को बंद करना पड़ेगा।

    इसके अलावा ट्रंप ने हाई एनरिच्ड यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने की बात कही। उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका ईरान की विदेशों में फ्रीज की गई संपत्तियों का बड़ा हिस्सा जारी नहीं करेगा।

    ईरान ने भी दी जवाबी धमकी

    ट्रंप के बयान के बाद ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। ईरानी सैन्य प्रवक्ता अबोलफजल शेकर्ची ने कहा कि यदि ईरान पर दोबारा हमला हुआ तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी संसाधनों और ठिकानों को निशाना बनाने में देर नहीं लगेगी।

    यूएई के न्यूक्लियर प्लांट के पास ड्रोन हमला

    इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अल धफरा क्षेत्र स्थित बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट के बाहरी हिस्से में ड्रोन हमला होने की खबर सामने आई है। हमले के बाद इलाके में आग लग गई, हालांकि सुरक्षा और दमकल टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित कर लिया। अधिकारियों के मुताबिक, इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

  • Iran-US War : लेबनान में तनाव बढ़ा, इजरायल ने 9 इलाकों को खाली करने का दिया आदेश; होर्मुज को लेकर भी बढ़ी चिंता

    Iran-US War : लेबनान में तनाव बढ़ा, इजरायल ने 9 इलाकों को खाली करने का दिया आदेश; होर्मुज को लेकर भी बढ़ी चिंता



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सीजफायर के दावों के बीच हालात फिर से बिगड़ते दिख रहे हैं, जहां एक तरफ अमेरिका संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इजरायल ने लेबनान के कई इलाकों को खाली करने का आदेश जारी कर दिया है।

    दक्षिणी लेबनान में इजरायल ने 9 से अधिक कस्बों को खाली करने की चेतावनी दी है, जिससे पहले से विस्थापित लाखों लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कई लोग सीजफायर के बाद लौटे थे, लेकिन नए हालात के चलते एक बार फिर पलायन का खतरा पैदा हो गया है।

    इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भी कम नहीं हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि बातचीत विफल होती है तो अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर दोबारा बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगले हफ्तों में हमलों की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह इसे “दोस्त देशों के लिए खुला और दुश्मनों के लिए सीमित” कर सकता है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है। वहीं अमेरिका इसे खोलने के लिए दबाव बना रहा है।

    संयुक्त राष्ट्र में भी इस मुद्दे पर टकराव देखने को मिला है, जहां ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी अमेरिकी समर्थित प्रस्ताव का समर्थन करने वाले देशों को भविष्य के तनाव के लिए जिम्मेदार माना जाएगा।

  • हॉर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय गंतव्य वाले LPG जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, ऊर्जा आपूर्ति पर वैश्विक नजरें

    हॉर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय गंतव्य वाले LPG जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, ऊर्जा आपूर्ति पर वैश्विक नजरें

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते अमेरिका-ईरान तनाव के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में आ गया है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल यह समुद्री गलियारा न केवल कच्चे तेल और तरलीकृत गैस के बड़े हिस्से की आवाजाही सुनिश्चित करता है, बल्कि कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा का आधार भी माना जाता है। ऐसे समय में जब इस क्षेत्र में राजनीतिक और सैन्य तनाव गहराता जा रहा है, भारतीय गंतव्य वाले दो एलपीजी जहाजों की सुरक्षित आवाजाही ने हालात को नई दिशा में सोचने पर मजबूर कर दिया है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, एक एलपीजी जहाज सिमी हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के दौरान कुछ समय के लिए अपने ट्रांसपोंडर को बंद रखने के बाद ओमान की खाड़ी में देखा गया। इसी तरह दूसरा जहाज एनवी सनशाइन भी इसी मार्ग से सुरक्षित रूप से आगे बढ़ा। दोनों जहाजों की यात्रा इस बात का संकेत देती है कि क्षेत्रीय तनाव के बावजूद समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की गतिविधियां पूरी तरह बाधित नहीं हुई हैं, हालांकि उन पर खतरे और अनिश्चितता का साया जरूर बना हुआ है।

    जानकारी के अनुसार, एनवी सनशाइन जहाज संयुक्त अरब अमीरात की रुवैस रिफाइनरी से एलपीजी लेकर भारत के मंगलौर की ओर बढ़ रहा था, जबकि सिमी कतर के रस लाफान बंदरगाह से गुजरात के कांडला तक ईंधन की आपूर्ति कर रहा था। इन दोनों मार्गों का भारत के ऊर्जा ढांचे के लिए विशेष महत्व है, क्योंकि देश की एलपीजी और ईंधन आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से ही पूरा होता है। ऐसे में हॉर्मुज स्ट्रेट की स्थिरता सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी हुई मानी जाती है।

    मध्य पूर्व में हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ा है, जिससे इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह क्षेत्र न केवल ऊर्जा व्यापार का प्रमुख केंद्र है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी प्रकार की बाधा या तनाव की स्थिति में इसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ऊर्जा कीमतों पर देखने को मिल सकता है।

    इसी बीच राजनीतिक स्तर पर भी बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिका की ओर से ईरान को लेकर कठोर रुख और शांति प्रस्तावों पर असहमति ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। वहीं क्षेत्रीय मध्यस्थों के माध्यम से संवाद की कोशिशें भी जारी हैं, लेकिन अब तक किसी ठोस समाधान की ओर बढ़ते संकेत स्पष्ट नहीं दिख रहे हैं।

    इन परिस्थितियों के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरते इन एलपीजी जहाजों की आवाजाही यह दर्शाती है कि वैश्विक ऊर्जा जरूरतें किसी भी राजनीतिक तनाव से ऊपर बनी हुई हैं। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा प्रभाव शिपिंग रूट्स, बीमा लागत और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस क्षेत्र की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।

  • तेल संकट के बीच ईरान का बड़ा बयान: अमेरिका-इजरायल पर आरोप, भारत समेत दुनिया पर असर

    तेल संकट के बीच ईरान का बड़ा बयान: अमेरिका-इजरायल पर आरोप, भारत समेत दुनिया पर असर



    नई दिल्ली। ईरान ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच वैश्विक सप्लाई चेन और तेल संकट पर गंभीर चिंता जताई है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि इस स्थिति से ईरान “खुश नहीं” है, लेकिन इसके लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिन्होंने क्षेत्र में तनाव को बढ़ाया है।

    बकाई के अनुसार, पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट की जड़ में अमेरिका और इजरायल की नीतियां हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए खाड़ी क्षेत्र के देशों की जमीन का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए किया। उन्होंने कहा कि ईरान को अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जवाबी कदम उठाने पड़े, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उचित हैं।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान को इस संघर्ष के कारण भारत या किसी अन्य देश को होने वाले आर्थिक नुकसान पर कोई खुशी नहीं है। उनके मुताबिक, ईरान एक तटीय देश होने के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर काफी निर्भर है और वह इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा चाहता है।

    तेल और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा यह संकट वैश्विक स्तर पर असर डाल रहा है, जिससे सप्लाई चेन बाधित हुई है और कई देशों में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। भारत जैसे देश, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं, इस स्थिति से सीधे प्रभावित हो रहे हैं।

    ईरानी प्रवक्ता ने यह भी संकेत दिया कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सभी देशों के हित में है और इसे खुला और स्थिर बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति से ही संभव है, न कि सैन्य टकराव से।

    फिलहाल यह संकट अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा के बीच गहरे तनाव को दर्शा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है।

  • मध्य-पूर्व में बड़ा खुलासा: UAE पर ईरान हमले का आरोप, अमेरिका-ईरान तनाव और तेल संकट ने बढ़ाई वैश्विक चिंता

    मध्य-पूर्व में बड़ा खुलासा: UAE पर ईरान हमले का आरोप, अमेरिका-ईरान तनाव और तेल संकट ने बढ़ाई वैश्विक चिंता




    नई दिल्ली। ईरान और मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसमें दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान पर गुप्त सैन्य कार्रवाई की थी। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल महीने में ईरान के लावान द्वीप स्थित ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया था। इस हमले के बाद रिफाइनरी में भीषण आग लग गई थी और उत्पादन लंबे समय तक प्रभावित रहा।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि यह हमला अप्रैल की शुरुआत में हुआ था, उसी समय जब अमेरिका युद्धविराम की घोषणा कर रहा था। ईरान ने उस दौरान दावा किया था कि उसकी रिफाइनरी पर दुश्मन देश ने हमला किया है। इसके बाद जवाबी कार्रवाई में ईरान ने UAE और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया था। हालांकि UAE ने कभी भी इस हमले की आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन उसके विदेश मंत्रालय ने यह जरूर कहा कि देश को किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का जवाब देने का अधिकार है, जिसमें सैन्य कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।

    इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों पर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरानी नेतृत्व को लेकर कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें “बेईमान” बताया है। ट्रम्प ने आरोप लगाया कि ईरान बातचीत को लंबा खींचता है और बार-बार अपने रुख बदलता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन दस्तावेजों को कुछ मिनटों में पहुंचना चाहिए, उन्हें ईरान कई दिनों तक रोककर रखता है, जिससे बातचीत की प्रक्रिया बाधित होती है।

    दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता कई विवादित मुद्दों में उलझी हुई है। इनमें होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा, ईरानी जहाजों पर अमेरिकी प्रतिबंध, परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम प्रमुख हैं। इन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच गहरी असहमति बनी हुई है।

    हाल के 24 घंटों में कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रम्प ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है। अमेरिका ने मांग की है कि ईरान कम से कम 12 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपने पास मौजूद 60% एनरिच्ड यूरेनियम भी सौंप दे। इसके जवाब में तनाव और बढ़ गया है।

    इसी बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट में संभावित बाधा और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव ने बाजार को अस्थिर कर दिया है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है।

    ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ चल रहा युद्धविराम अब “बहुत कमजोर स्थिति” में पहुंच चुका है और उन्होंने ईरानी प्रस्ताव को “कूड़ा” बताते हुए अमेरिका के लिए “पूर्ण जीत” की बात कही है। वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि फ्रांस और ब्रिटेन के युद्धपोत होर्मुज स्ट्रेट में प्रवेश करते हैं तो उसे जवाब दिया जाएगा। इससे समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच लेबनान सीमा पर भी तनाव तेज हो गया है। हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच संघर्ष में तेजी देखी गई है। दक्षिणी लेबनान में इजराइली एयरस्ट्राइक में 6 लोगों की मौत और 7 के घायल होने की खबर है। वहीं हिजबुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है, जिससे सीमा क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

    इसी बीच एक और रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने संघर्ष के दौरान ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर अस्थायी रूप से जगह दी थी, ताकि उन्हें संभावित हमलों से बचाया जा सके। हालांकि पाकिस्तान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि नूर खान एयरबेस पर बड़े पैमाने पर विमानों को छिपाना संभव नहीं है।

    कुल मिलाकर ईरान, अमेरिका और मध्य-पूर्व में हालात तेजी से बदल रहे हैं और हर दिन नए तनाव और नए खुलासे सामने आ रहे हैं, जिससे वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार दोनों पर गहरा असर पड़ रहा है।

  • ईरान की अमेरिका को खुली धमकी, बोला- तेल टैंकरों पर हमला हुआ तो US ठिकानों और जहाजों पर बरसेंगी मिसाइलें

    ईरान की अमेरिका को खुली धमकी, बोला- तेल टैंकरों पर हमला हुआ तो US ठिकानों और जहाजों पर बरसेंगी मिसाइलें



    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने अमेरिका को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर फारस की खाड़ी या Strait of Hormuz में ईरानी तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया, तो अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों पर बड़ा हमला किया जाएगा।

    IRGC की नौसेना इकाई ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर दावा किया कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी जहाज अब ईरानी मिसाइलों और ड्रोन की रेंज में हैं। इसके बाद IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने भी कहा कि उनके ड्रोन और मिसाइल सिस्टम अमेरिकी ठिकानों पर “लॉक” किए जा चुके हैं और अब सिर्फ आदेश का इंतजार है।

    इस बीच The Wall Street Journal की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने ईरान को 14 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव भेजा है, जिस पर तेहरान के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने उम्मीद जताई थी कि जल्द जवाब मिल सकता है, लेकिन ईरान ने फिलहाल किसी समयसीमा को मानने से इनकार कर दिया है।

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा जारी है और जवाब “उचित समय” पर दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी बाहरी दबाव या समयसीमा के तहत फैसला नहीं करेगा।

    उधर, क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। दक्षिणी Lebanon में इजराइली हमलों और Hezbollah की जवाबी कार्रवाई ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। वहीं होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार भी प्रभावित हुआ है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।

    कुवैत ने भी अपने एयरस्पेस में संदिग्ध ड्रोन देखे जाने की पुष्टि की है, जबकि कतर से पाकिस्तान जा रहे एक गैस जहाज के होर्मुज स्ट्रेट पार करने के दौरान कुछ समय तक उसका सिग्नल गायब रहने से क्षेत्र में चिंता और बढ़ गई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।

  • सीजफायर के बीच फिर भड़की जंग! अमेरिका की ईरान पर बमबारी, ट्रम्प की खुली धमकी से मचा हड़कंप

    सीजफायर के बीच फिर भड़की जंग! अमेरिका की ईरान पर बमबारी, ट्रम्प की खुली धमकी से मचा हड़कंप



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्धविराम के दावों के बीच हालात एक बार फिर विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ता दिख रहा है। ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने सीजफायर तोड़ते हुए ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इसके बाद तेहरान ने साफ चेतावनी दी है कि अब किसी भी हमले का जवाब बेहद कड़े और सीधे सैन्य एक्शन से दिया जाएगा।

    ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने जास्क क्षेत्र के पास उस तेल टैंकर पर हमला किया, जो होर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़ रहा था। ईरान ने इसे युद्धविराम का खुला उल्लंघन बताया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर ईरान परमाणु समझौते पर आगे नहीं बढ़ता तो अमेरिका और भी बड़े हमले करेगा।

    ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया था, लेकिन अमेरिकी सेना ने सभी हमलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि जवाबी कार्रवाई में ईरान की कई सैन्य नावों और ठिकानों को तबाह कर दिया गया। ट्रम्प ने दो टूक कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

    बढ़ते संघर्ष का सबसे बड़ा असर दुनिया की सबसे अहम समुद्री व्यापारिक लाइन होर्मुज स्ट्रेट पर दिखाई दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी IMO के मुताबिक, संकट के कारण खाड़ी क्षेत्र में करीब 1500 जहाज फंस गए हैं। इन जहाजों पर लगभग 20 हजार नाविक मौजूद हैं। इससे वैश्विक तेल सप्लाई, गैस कारोबार और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ने लगा है। कई देशों में ईंधन और जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    इस बीच अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच बैक चैनल बातचीत की खबरें भी सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश 30 दिन के अस्थायी समझौते और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि जमीन पर जारी सैन्य गतिविधियां किसी स्थायी शांति की संभावना को कमजोर करती नजर आ रही हैं।

    ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि ईरान का मिसाइल भंडार खत्म हो चुका है। अराघची ने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह सक्रिय है और देश अपनी सुरक्षा के लिए हर स्तर पर तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बनती है, अमेरिका सैन्य कार्रवाई शुरू कर देता है।

    उधर संयुक्त अरब अमीरात ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइल और तीन ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। वहीं लेबनान में भी तनाव तेजी से बढ़ रहा है। इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष फिर तेज हो गया है और दक्षिणी लेबनान में लगातार हवाई हमलों की खबरें सामने आ रही हैं।

    भारत सरकार ने भी पश्चिम एशिया के हालात पर करीबी नजर बनाए रखी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए विशेष कंट्रोल रूम सक्रिय किए गए हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाने की तैयारी की गई है।

  • West Asia Crisis: युद्धविराम के बावजूद भड़का तनाव, लेबनान में इस्राइल का बड़ा एक्शन; ईरान-अमेरिका आमने-सामने

    West Asia Crisis: युद्धविराम के बावजूद भड़का तनाव, लेबनान में इस्राइल का बड़ा एक्शन; ईरान-अमेरिका आमने-सामने



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू होने के बावजूद हालात लगातार विस्फोटक बने हुए हैं। दक्षिणी लेबनान में इस्राइल ने सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव और गहरा गया है। पूरे क्षेत्र में एक बार फिर बड़े संघर्ष का खतरा मंडराने लगा है।

    लेबनान के गांव को खाली करने का आदेश
    इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के अल-अब्बासियाह गांव के लोगों को तत्काल इलाका खाली करने का आदेश दिया है। इस्राइल के अरबी भाषा के प्रवक्ता अविचाई अद्राई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर लोगों से गांव छोड़कर कम से कम 1000 मीटर दूर खुले इलाकों में जाने को कहा।

    युद्धविराम के बावजूद दक्षिण लेबनान में इस्राइली हवाई हमले और सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। हिजबुल्लाह और इस्राइली सेना के बीच रुक-रुक कर झड़पें भी जारी हैं, जिससे स्थानीय लोगों में डर और पलायन का माहौल बना हुआ है।

    दक्षिण लेबनान में हवाई हमला, 11 लोगों की मौत
    अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्राइल ने नबातियेह जिले के दुएर, हारौफ और हब्बौश कस्बों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। वहीं 36 लोग घायल बताए जा रहे हैं।

    होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका-ईरान आमने-सामने
    उधर, होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, लेकिन अमेरिकी सेना ने सभी हमलों को नाकाम कर दिया।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के तीन बड़े युद्धपोत सुरक्षित हैं और जवाबी कार्रवाई में ईरानी हमलावरों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने जल्द समझौता नहीं किया तो अमेरिका और कड़ी कार्रवाई करेगा।

    ईरान ने अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप
    ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम उल्लंघन और तेल टैंकरों पर हमला करने का आरोप लगाया है। ईरानी सेना के अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज जलमार्ग और फुजैराह के पास जहाजों को निशाना बनाया, जिसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य जहाजों पर जवाबी हमला किया। ईरान ने दावा किया कि उसकी जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही तेहरान ने साफ कहा कि किसी भी हमले का “बिना हिचकिचाहट करारा जवाब” दिया जाएगा।

    खाड़ी क्षेत्र से 5 भारतीयों की सुरक्षित वापसी
    इस बीच लेबनान स्थित भारतीय दूतावास ने खाड़ी क्षेत्र में फंसे पांच भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया है। दूतावास ने लेबनानी प्रशासन के सहयोग के लिए आभार जताया है।पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच दुनिया की नजर अब अमेरिका, ईरान और इस्राइल की अगली चाल पर टिकी हुई है।