Tag: Hormuz Strait

  • ईरान की अमेरिका को खुली धमकी, बोला- तेल टैंकरों पर हमला हुआ तो US ठिकानों और जहाजों पर बरसेंगी मिसाइलें

    ईरान की अमेरिका को खुली धमकी, बोला- तेल टैंकरों पर हमला हुआ तो US ठिकानों और जहाजों पर बरसेंगी मिसाइलें



    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने अमेरिका को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर फारस की खाड़ी या Strait of Hormuz में ईरानी तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया, तो अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों पर बड़ा हमला किया जाएगा।

    IRGC की नौसेना इकाई ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर दावा किया कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी जहाज अब ईरानी मिसाइलों और ड्रोन की रेंज में हैं। इसके बाद IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने भी कहा कि उनके ड्रोन और मिसाइल सिस्टम अमेरिकी ठिकानों पर “लॉक” किए जा चुके हैं और अब सिर्फ आदेश का इंतजार है।

    इस बीच The Wall Street Journal की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने ईरान को 14 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव भेजा है, जिस पर तेहरान के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने उम्मीद जताई थी कि जल्द जवाब मिल सकता है, लेकिन ईरान ने फिलहाल किसी समयसीमा को मानने से इनकार कर दिया है।

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा जारी है और जवाब “उचित समय” पर दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी बाहरी दबाव या समयसीमा के तहत फैसला नहीं करेगा।

    उधर, क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। दक्षिणी Lebanon में इजराइली हमलों और Hezbollah की जवाबी कार्रवाई ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। वहीं होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार भी प्रभावित हुआ है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।

    कुवैत ने भी अपने एयरस्पेस में संदिग्ध ड्रोन देखे जाने की पुष्टि की है, जबकि कतर से पाकिस्तान जा रहे एक गैस जहाज के होर्मुज स्ट्रेट पार करने के दौरान कुछ समय तक उसका सिग्नल गायब रहने से क्षेत्र में चिंता और बढ़ गई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।

  • सीजफायर के बीच फिर भड़की जंग! अमेरिका की ईरान पर बमबारी, ट्रम्प की खुली धमकी से मचा हड़कंप

    सीजफायर के बीच फिर भड़की जंग! अमेरिका की ईरान पर बमबारी, ट्रम्प की खुली धमकी से मचा हड़कंप



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्धविराम के दावों के बीच हालात एक बार फिर विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ता दिख रहा है। ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने सीजफायर तोड़ते हुए ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इसके बाद तेहरान ने साफ चेतावनी दी है कि अब किसी भी हमले का जवाब बेहद कड़े और सीधे सैन्य एक्शन से दिया जाएगा।

    ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने जास्क क्षेत्र के पास उस तेल टैंकर पर हमला किया, जो होर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़ रहा था। ईरान ने इसे युद्धविराम का खुला उल्लंघन बताया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर ईरान परमाणु समझौते पर आगे नहीं बढ़ता तो अमेरिका और भी बड़े हमले करेगा।

    ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया था, लेकिन अमेरिकी सेना ने सभी हमलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि जवाबी कार्रवाई में ईरान की कई सैन्य नावों और ठिकानों को तबाह कर दिया गया। ट्रम्प ने दो टूक कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

    बढ़ते संघर्ष का सबसे बड़ा असर दुनिया की सबसे अहम समुद्री व्यापारिक लाइन होर्मुज स्ट्रेट पर दिखाई दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी IMO के मुताबिक, संकट के कारण खाड़ी क्षेत्र में करीब 1500 जहाज फंस गए हैं। इन जहाजों पर लगभग 20 हजार नाविक मौजूद हैं। इससे वैश्विक तेल सप्लाई, गैस कारोबार और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ने लगा है। कई देशों में ईंधन और जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    इस बीच अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच बैक चैनल बातचीत की खबरें भी सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश 30 दिन के अस्थायी समझौते और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि जमीन पर जारी सैन्य गतिविधियां किसी स्थायी शांति की संभावना को कमजोर करती नजर आ रही हैं।

    ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि ईरान का मिसाइल भंडार खत्म हो चुका है। अराघची ने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह सक्रिय है और देश अपनी सुरक्षा के लिए हर स्तर पर तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बनती है, अमेरिका सैन्य कार्रवाई शुरू कर देता है।

    उधर संयुक्त अरब अमीरात ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइल और तीन ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। वहीं लेबनान में भी तनाव तेजी से बढ़ रहा है। इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष फिर तेज हो गया है और दक्षिणी लेबनान में लगातार हवाई हमलों की खबरें सामने आ रही हैं।

    भारत सरकार ने भी पश्चिम एशिया के हालात पर करीबी नजर बनाए रखी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए विशेष कंट्रोल रूम सक्रिय किए गए हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाने की तैयारी की गई है।

  • West Asia Crisis: युद्धविराम के बावजूद भड़का तनाव, लेबनान में इस्राइल का बड़ा एक्शन; ईरान-अमेरिका आमने-सामने

    West Asia Crisis: युद्धविराम के बावजूद भड़का तनाव, लेबनान में इस्राइल का बड़ा एक्शन; ईरान-अमेरिका आमने-सामने



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू होने के बावजूद हालात लगातार विस्फोटक बने हुए हैं। दक्षिणी लेबनान में इस्राइल ने सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव और गहरा गया है। पूरे क्षेत्र में एक बार फिर बड़े संघर्ष का खतरा मंडराने लगा है।

    लेबनान के गांव को खाली करने का आदेश
    इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के अल-अब्बासियाह गांव के लोगों को तत्काल इलाका खाली करने का आदेश दिया है। इस्राइल के अरबी भाषा के प्रवक्ता अविचाई अद्राई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर लोगों से गांव छोड़कर कम से कम 1000 मीटर दूर खुले इलाकों में जाने को कहा।

    युद्धविराम के बावजूद दक्षिण लेबनान में इस्राइली हवाई हमले और सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। हिजबुल्लाह और इस्राइली सेना के बीच रुक-रुक कर झड़पें भी जारी हैं, जिससे स्थानीय लोगों में डर और पलायन का माहौल बना हुआ है।

    दक्षिण लेबनान में हवाई हमला, 11 लोगों की मौत
    अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्राइल ने नबातियेह जिले के दुएर, हारौफ और हब्बौश कस्बों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। वहीं 36 लोग घायल बताए जा रहे हैं।

    होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका-ईरान आमने-सामने
    उधर, होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, लेकिन अमेरिकी सेना ने सभी हमलों को नाकाम कर दिया।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के तीन बड़े युद्धपोत सुरक्षित हैं और जवाबी कार्रवाई में ईरानी हमलावरों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने जल्द समझौता नहीं किया तो अमेरिका और कड़ी कार्रवाई करेगा।

    ईरान ने अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप
    ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम उल्लंघन और तेल टैंकरों पर हमला करने का आरोप लगाया है। ईरानी सेना के अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज जलमार्ग और फुजैराह के पास जहाजों को निशाना बनाया, जिसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य जहाजों पर जवाबी हमला किया। ईरान ने दावा किया कि उसकी जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही तेहरान ने साफ कहा कि किसी भी हमले का “बिना हिचकिचाहट करारा जवाब” दिया जाएगा।

    खाड़ी क्षेत्र से 5 भारतीयों की सुरक्षित वापसी
    इस बीच लेबनान स्थित भारतीय दूतावास ने खाड़ी क्षेत्र में फंसे पांच भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया है। दूतावास ने लेबनानी प्रशासन के सहयोग के लिए आभार जताया है।पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच दुनिया की नजर अब अमेरिका, ईरान और इस्राइल की अगली चाल पर टिकी हुई है।

  • वेस्ट एशिया में तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ईरान विवाद जल्द होगा खत्म; परमाणु मुद्दे पर अमेरिका का सख्त रुख

    वेस्ट एशिया में तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ईरान विवाद जल्द होगा खत्म; परमाणु मुद्दे पर अमेरिका का सख्त रुख



    नई दिल्ली। 28 फरवरी से जारी संघर्ष के बीच क्षेत्र में हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं, हालांकि युद्धविराम के प्रयासों और अमेरिका-ईरान बातचीत की कोशिशों ने कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान विवाद जल्द सुलझ सकता है।

    ट्रंप का दावा: जल्द खत्म होगा विवाद
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने अपने समर्थकों से बातचीत में कहा कि ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति जल्द खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है और इसी वजह से कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

    ट्रंप ने अपनी नीति का बचाव करते हुए कहा कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है और अधिकतर लोग इसे सही मानते हैं।

    क्षेत्र में लगातार हिंसा जारी
    हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं

    दक्षिणी तेहरान में अमेरिकी-इस्राइली हमलों में 12 लोगों की मौत

    लेबनान में पिछले 24 घंटों में 33 लोगों की मौत, जिनमें एक किशोर भी शामिल

    लेबनान से उत्तरी इस्राइल पर रॉकेट हमले में 1 व्यक्ति की मौत और 2 घायल

    ईरानी हमले में बहरीन में मोरक्को के सैनिक की मौत और कई घायल

    ईरान का पलटवार और बयान
    ईरान की संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उन्हें अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान वैश्विक वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने के लिए दिए जा रहे हैं।उन्होंने अमेरिकी सैन्य अभियानों पर तंज कसते हुए इन्हें “ऑपरेशन ट्रस्ट मी ब्रो” और “ऑपरेशन फॉक्सियोस” कहा और कहा कि ये रणनीतियां विफल साबित हो रही हैं।


    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जर्मनी के राष्ट्रपति के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें अमेरिका-इस्राइल की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया गया था।

    वेस्ट एशिया में हालात अभी भी विस्फोटक बने हुए हैं। एक तरफ सैन्य टकराव और जवाबी हमले जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदें भी जिंदा हैं, जिससे आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव संभव माना जा रहा है।

  • UAE पर ईरानी हमला, 3 भारतीय घायल, भारत सख्त; मोदी बोले- नागरिकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर वार ‘अस्वीकार्य’

    UAE पर ईरानी हमला, 3 भारतीय घायल, भारत सख्त; मोदी बोले- नागरिकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर वार ‘अस्वीकार्य’



    नई दिल्ली। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह ऑयल पोर्ट पर हुए हमले ने पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा दिया है। इस हमले में 3 भारतीय नागरिकों के घायल होने पर भारत ने कड़ी नाराजगी जताई है और साफ कहा है कि आम नागरिकों को निशाना बनाना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फुजैराह के इंडस्ट्रियल जोन को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया। हालांकि UAE की एयर डिफेंस सिस्टम ने कई खतरों को बीच में ही नष्ट कर दिया, लेकिन मलबा गिरने से कुछ जगहों पर नुकसान हुआ और भारतीय नागरिक घायल हो गए।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि निर्दोष लोगों और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और हिंसा तुरंत रोकने की अपील की है।

    भारत सरकार ने यह भी दोहराया कि होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत बिना किसी बाधा के जारी रहना चाहिए। यह मार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है।

    UAE अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने 12 बैलिस्टिक मिसाइल, 3 क्रूज मिसाइल और 4 ड्रोन को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया। हालांकि ईरान ने अब तक इस हमले को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे स्थिति और संवेदनशील बनी हुई है।

    इस बीच, फुजैराह की रणनीतिक अहमियत को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। यह इलाका UAE के तेल निर्यात का बड़ा केंद्र है और यहां से हबशन-फुजैराह पाइपलाइन के जरिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल दुनिया के बाजारों तक पहुंचाया जाता है, वह भी होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करते हुए।

    पिछले 24 घंटे में घटनाक्रम तेजी से बदला है। ईरान पर ड्रोन हमले के आरोप, होर्मुज में जहाजों पर हमले, अमेरिका का ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ और क्षेत्रीय देशों की बढ़ती प्रतिक्रिया ने हालात को और जटिल बना दिया है।

    दक्षिण कोरिया के एक जहाज में धमाके के बाद आग लगने की घटना ने भी सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं। वहीं, अमेरिका ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई एडवाइजरी जारी की है, हालांकि ईरान ने इसे असुरक्षित बताया है।

    इसी बीच, ईरान के विदेश मंत्री का चीन दौरा भी अहम माना जा रहा है, जहां क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक समाधान पर चर्चा हो सकती है।

    कुल मिलाकर, फुजैराह हमले के बाद पश्चिम एशिया में हालात नाजुक बने हुए हैं। भारत ने जहां अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, वहीं कूटनीतिक समाधान और शांति की अपील भी दोहराई है। आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।

  • सोने की कीमतों में स्थिरता, US-Iran तनाव और ऊर्जा संकट से बाजार सतर्क..

    सोने की कीमतों में स्थिरता, US-Iran तनाव और ऊर्जा संकट से बाजार सतर्क..

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस समय सोने की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद सोने में किसी तरह की बड़ी तेजी या गिरावट देखने को नहीं मिली है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

    सोने का कारोबार एक सीमित दायरे में घूम रहा है, जहां न तो मजबूत खरीदारी का दबाव दिख रहा है और न ही भारी बिकवाली का। बाजार में हलचल जरूर है, लेकिन घबराहट वाली स्थिति नहीं बनी है। निवेशक फिलहाल किसी बड़े फैसले से पहले वैश्विक घटनाक्रमों के स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं।

    सबसे ज्यादा ध्यान इस समय होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी स्थिति पर है, जिसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बेहद अहम रास्ता माना जाता है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर तेल की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है, इसलिए बाजार इसे गंभीरता से देख रहा है।

    कच्चे तेल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी ने महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसी वजह से केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। आम तौर पर जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं या कटौती की संभावना कम होती है, तो सोने पर दबाव देखा जाता है, क्योंकि यह कोई रिटर्न देने वाला निवेश नहीं होता।

    इसके बावजूद लंबी अवधि के निवेशकों का भरोसा सोने पर कायम है। वैश्विक स्तर पर कई केंद्रीय बैंक लगातार सोने की खरीद कर रहे हैं, जिससे बाजार को सपोर्ट मिल रहा है। वहीं निजी निवेशक भी धीरे-धीरे सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

    चांदी और अन्य कीमती धातुओं में हल्की तेजी देखने को मिल रही है, जबकि डॉलर इंडेक्स में मामूली कमजोरी दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, फेडरल रिजर्व की नीति और वैश्विक राजनीतिक हालात पर निर्भर करेगी।

    मौजूदा समय में सोना स्थिर स्थिति में बना हुआ है और बाजार में कोई बड़ा ट्रेंड फिलहाल देखने को नहीं मिल रहा है। निवेशक अभी भी वैश्विक तनाव और ऊर्जा बाजार की दिशा साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।

  • होर्मुज में बड़ा खेल? अमेरिका ने ईरानी जहाज छोड़कर पाकिस्तान को क्यों सौंपा, ट्रम्प के ‘रेस्क्यू मिशन’ से बढ़ा समुद्री तनाव

    होर्मुज में बड़ा खेल? अमेरिका ने ईरानी जहाज छोड़कर पाकिस्तान को क्यों सौंपा, ट्रम्प के ‘रेस्क्यू मिशन’ से बढ़ा समुद्री तनाव


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव के बीच एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सेना ने जब्त किए गए ईरानी जहाज ‘टूस्का’ को अब पाकिस्तान को सौंप दिया है। यह जहाज पहले चीन से लौटते समय अमेरिकी कार्रवाई में पकड़ा गया था।

    यह जानकारी अमेरिकी सेंट्रल कमांड United States Central Command (CENTCOM) के प्रवक्ता ने दी है। बताया जा रहा है कि जहाज को उसके क्रू के साथ आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत ईरान वापस भेजने की तैयारी की जा रही है।

    क्यों पकड़ा गया था जहाज?
    अमेरिकी अधिकारियों का दावा था कि यह जहाज ऐसे सामान लेकर जा रहा था जो हथियार निर्माण से जुड़े हो सकते हैं। इसी आधार पर 21 अप्रैल को इसे जब्त किया गया था। हालांकि ईरान ने इस कार्रवाई को “समुद्री डकैती” बताते हुए कड़ी आलोचना की थी।

    होर्मुज स्ट्रेट में नया अभियान
    इसी बीच अमेरिका ने Donald Trump के नेतृत्व में होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए एक नया रेस्क्यू अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। यह इलाका वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है।

    ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि कई देशों के जहाज वहां फंस गए हैं और अमेरिका उन्हें सुरक्षित रास्ता देगा ताकि वे बिना खतरे के अपना संचालन जारी रख सकें।

    ईरान को चेतावनी
    अमेरिकी प्रशासन ने साफ किया है कि यह रेस्क्यू ऑपरेशन सोमवार सुबह से शुरू होगा। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि ईरान ने इस अभियान में कोई बाधा डाली तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

    बढ़ता तनाव
    जहाज को पाकिस्तान को सौंपे जाने और रेस्क्यू मिशन की घोषणा के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंधों पर बड़ा असर डाल सकता है।

  • Donald Trump vs Iran: बढ़ता टकराव, ‘महायुद्ध’ की धमकी से वैश्विक तनाव चरम पर

    Donald Trump vs Iran: बढ़ता टकराव, ‘महायुद्ध’ की धमकी से वैश्विक तनाव चरम पर


    नई दिल्ली। अमेरिका और Iran के बीच एक बार फिर टकराव तेज हो गया है, जहां हालात खुली जंग की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के ताजा बयानों ने तनाव को और भड़का दिया है, जबकि ईरान ने पलटवार करते हुए ‘महायुद्ध’ की चेतावनी दे दी है। दोनों देशों के बीच यह बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र पहले से ही अस्थिर है और वैश्विक समुदाय की नजरें इस टकराव पर टिकी हैं।

    ईरानी सेना ने साफ संकेत दिया है कि अमेरिका और इजरायल किसी भी समय दोबारा हमला शुरू कर सकते हैं। ईरान के सैन्य मुख्यालय के उप-प्रमुख मोहम्मद जाफर असादी ने कहा कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता और उसकी नीतियां अस्थिरता पैदा कर रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका कोई “नई हिमाकत” करता है, तो ईरान पूरी ताकत से जवाब देगा।

    दूसरी ओर, Donald Trump ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान के साथ बातचीत अभी अनिश्चित है और अगर जरूरत पड़ी तो सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समझौते के प्रस्ताव उन्हें स्वीकार नहीं हैं और आगे क्या होगा, यह हालात तय करेंगे। ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व को “बिखरा हुआ” बताते हुए दावा किया कि वहां अंदरूनी मतभेद गहरे हैं, जिससे बातचीत मुश्किल हो रही है।

    तनाव के बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है, जिसमें Islamic Revolutionary Guard Corps के 14 जवानों की मौत हो गई। यह हादसा तेहरान के पास जंजन इलाके में हुआ, जहां युद्ध के दौरान बचे विस्फोटक सामग्री में धमाका हो गया। युद्धविराम के बाद यह सबसे बड़ा नुकसान माना जा रहा है, जिसने हालात की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

    इधर, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अमेरिका लगातार ईरान पर इसे खोलने का दबाव बना रहा है, जबकि ईरान अपने रुख पर कायम है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है, ऐसे में यहां किसी भी टकराव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

    विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रास्ते बेहद सीमित होते जा रहे हैं। एक तरफ जहां बातचीत की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ सैन्य विकल्प भी खुले हैं, जो किसी बड़े संघर्ष का संकेत दे रहे हैं। अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह टकराव क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक संकट में बदल सकता है।

  • डॉल्फिन से समुद्री जंग? ईरान की ‘सीक्रेट अंडरवॉटर स्ट्रैटेजी’ के दावों से बढ़ी हलचल

    डॉल्फिन से समुद्री जंग? ईरान की ‘सीक्रेट अंडरवॉटर स्ट्रैटेजी’ के दावों से बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है कि ईरान समुद्र के अंदर बारूदी सुरंगें बिछाने और दुश्मन जहाजों को निशाना बनाने के लिए प्रशिक्षित डॉल्फिन का इस्तेमाल कर सकता है। यह दावा ऐसे समय में किया गया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक बना हुआ है और यहां किसी भी सैन्य गतिविधि का वैश्विक असर पड़ सकता है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कथित रणनीति में डॉल्फिन को विस्फोटकों या माइंस से लैस कर दुश्मन के जहाजों के पास भेजा जा सकता है। हालांकि, इस तरह के दावों की पुष्टि अब तक स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है और कई विशेषज्ञ इसे सूचना युद्ध (Information Warfare) का हिस्सा भी मान रहे हैं। सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि वास्तविक युद्ध में इस तरह के प्रयोग बेहद जटिल और जोखिम भरे होते हैं।

    इतिहास बताता है कि समुद्री जीवों का सैन्य उपयोग पूरी तरह नया नहीं है। संयुक्त राज्य अमेरिका और पूर्व सोवियत संघ जैसे देशों ने अतीत में डॉल्फिन और सी-लायन को माइन डिटेक्शन और अंडरवॉटर मिशन के लिए ट्रेन किया था। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने भी साल 2000 के आसपास ऐसे प्रशिक्षित समुद्री जीव हासिल किए थे, लेकिन वर्तमान में उनकी वास्तविक क्षमता और तैनाती को लेकर कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं है।

    दूसरी ओर, होर्मुज जलडमरूमध्य में खतरे का बड़ा कारण अभी भी पानी के ऊपर होने वाले हमले और जहाजों की सुरक्षा है, न कि समुद्र के नीचे बिछाई गई माइंस। अमेरिकी अधिकारियों के बयान भी इस मुद्दे पर एक जैसे नहीं हैं कुछ इसे बड़ा खतरा मानते हैं, तो कुछ इसे सीमित जोखिम बताते हैं। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर ईरान किसी भी तरह की माइन बिछाने की कोशिश करता है, तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा।

    रणनीतिक रूप से देखा जाए तो होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल सप्लाई का अहम रास्ता है, और यहां किसी भी तरह का अवरोध या संघर्ष पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। ऐसे में डॉल्फिन जैसे असामान्य हथियारों की चर्चा भले ही सुर्खियां बना रही हो, लेकिन असली चिंता अब भी पारंपरिक सैन्य टकराव और समुद्री सुरक्षा को लेकर ही है।

  • हॉर्मुज स्ट्रेट से तनाव के बीच पहली बार निकला LNG टैंकर, शिपिंग रूट पर फिर हलचल

    हॉर्मुज स्ट्रेट से तनाव के बीच पहली बार निकला LNG टैंकर, शिपिंग रूट पर फिर हलचल


    नई दिल्ली| मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हॉर्मुज स्ट्रेट से पहली बार एक लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टैंकर सफलतापूर्वक गुजरने में कामयाब रहा है। यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर बना हुआ है।

    शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह LNG टैंकर मार्च की शुरुआत में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के दास द्वीप प्लांट से लोड होकर रवाना हुआ था। इसके बाद यह टैंकर भारत के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र से गुजरता हुआ आगे बढ़ा। बताया जा रहा है कि तनाव के चलते यह टैंकर कई हफ्तों तक फारस की खाड़ी में ही रुका रहा और इसके ट्रांसमिशन सिग्नल 31 मार्च के आसपास बंद हो गए थे, जो बाद में भारत के नजदीक आने पर फिर से सक्रिय हुए।

    हॉर्मुज स्ट्रेट, जो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला एक बेहद संकरा और रणनीतिक समुद्री मार्ग है, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और गैस का निर्यात इसी मार्ग से होकर गुजरता है।

    हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते इस क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां काफी प्रभावित हुई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने इस स्ट्रेट पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है, जबकि अमेरिका ने ईरानी जहाजों पर प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं।

    इसी तनाव के बीच कई LNG टैंकरों को कतर से रवाना होने के बाद वापस लौटना पड़ा था। हालांकि अब इस नए टैंकर के गुजरने को एक संभावित राहत संकेत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं कही जा सकती।

    सूत्रों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने को लेकर बातचीत भी चल रही है। ईरान ने एक नया शांति प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें हॉर्मुज स्ट्रेट खोलने की बात शामिल है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर असहमति के चलते अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया है।

    इस बीच यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में यह समुद्री मार्ग पूरी तरह सामान्य होता है या फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका असर और गहराता है।