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  • हॉर्मुज में भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर ईरानी फायरिंग के बाद ऐक्शन में भारत…

    हॉर्मुज में भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर ईरानी फायरिंग के बाद ऐक्शन में भारत…


    नई दिल्ली।
    भारत (India) ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में दो भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps.- IRGC) के सैनिकों द्वारा की गई गोलीबारी की घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। यह घटना 18 अप्रैल को हुई थी। सरकार ने तत्काल कूटनीतिक कदम उठाते हुए ईरानी राजदूत को तलब किया और इस घटना पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। अभी भी हॉर्मुज में करीब 14 भारतीय जहाज फंसे हैं जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए भारत ने प्रयास तेज कर दिए हैं। दूसरी ओर भारतीय नौसेना ने 7 युद्धपोत तैनात कर जहाजों को एस्कॉर्ट करना शुरू कर दिया है।


    कूटनीतिक प्रतिक्रिया और भारत का रुख

    गोलीबारी की घटना के बाद भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूत से मुलाकात कर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट रूप से इस क्षेत्र से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की है कि भारत ने राजनयिक चैनलों के माध्यम से तेजी से कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा- हम भारतीय जहाजों की सुरक्षा के संबंध में ईरानी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं और उन्हें सुरक्षित रास्ता दिलाने के लिए प्रयासरत हैं।

    यह फायरिंग ईरानी अधिकारियों और स्थानीय IRGC यूनिट के बीच ‘संचार की कमी’ का नतीजा प्रतीत होती है। राहत की बात ये है कि जहाजों को कोई बड़ा ढांचागत नुकसान नहीं पहुंचा है। घटना के दौरान जहाजों के कुछ हिस्सों में शीशे (कांच) टूटने की सूचना मिली है।


    UKMTO की रिपोर्ट और हमलों का विवरण

    यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी अपनी रिपोर्ट में इस घटना का जिक्र किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 18 अप्रैल को कुल तीन जहाजों को निशाना बनाया गया, जिनमें से दो भारतीय थे।

    पहली घटना: एक भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकर के पास दो ईरानी सैन्य गनबोट (हथियारबंद नावें) आईं और बिना किसी पूर्व चेतावनी या रेडियो संपर्क के फायरिंग शुरू कर दी। गनीमत रही कि चालक दल पूरी तरह सुरक्षित बच गया।

    दूसरी घटना: इसके कुछ ही समय बाद, ओमान के तट के पास एक अन्य भारतीय सुपरटैंकर को निशाना बनाया गया। इस जहाज पर एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल (गोला/मिसाइल) टकराने की खबर है, जिससे इस अहम समुद्री मार्ग में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

    इस गंभीर घटना के बीच, भारतीय नौसेना ने क्षेत्र में 7 युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। फंसे जहाजों को लारक आइलैंड से दूर रहने और केवल अनुमति मिलने पर आगे बढ़ने की एडवाइजरी जारी की गई है। नौसेना जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही है।


    वर्तमान स्थिति और भारतीय जहाजों की मौजूदगी

    इस समय स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है। हॉर्मुज स्ट्रेट में कम से कम 14 भारतीय ध्वज वाले जहाज अभी भी लंगर डाले हुए हैं, जिनमें तीन बड़े तेल टैंकर और एक एलपीजी (LPG) कैरियर शामिल हैं। 28 फरवरी को मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद से भारत पहले ही 10 भारतीय एलपीजी और तेल टैंकरों को इस क्षेत्र से सुरक्षित निकाल चुका है। अब बाकी बचे 14 जहाजों की सुरक्षित वापसी के प्रयास किए जा रहे हैं। ईरान में भारी संख्या में भारतीय नागरिक भी मौजूद हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना नई दिल्ली की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत लगातार ईरान पर कूटनीतिक दबाव बना रहा है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो और भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी मिल सके।

  • होर्मुज को लेकर अमेरिका और दुनिया को ब्लैकमैल नहीं कर सकता ईरान… ट्रंप ने दी चेतावनी

    होर्मुज को लेकर अमेरिका और दुनिया को ब्लैकमैल नहीं कर सकता ईरान… ट्रंप ने दी चेतावनी


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर दोबारा प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने ईरान (Iran) को चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान अमेरिका और दुनिया को ब्लैकमैल नहीं कर सकता। बता दें, शुक्रवार को लेबनान (Lebanon.) में हुए सीजफायर का स्वागत करते हुए ईरान (Iran) ने होर्मुज पर लगे प्रतिंबध को हटा दिया था। हालांकि, जब ट्रंप होर्मुज के पास लगे अमेरिकी ब्लाकेड को हटाने से इनकार कर दिया, तो शनिवार को ईरान ने फिर से होर्मुज के दरवाजे बंद कर दिए।

    होर्मुज पर बदलते हालात पर ट्रंप ने शनिवार को ओवेल ऑफिस में मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, “हम उनसे बात कर रहे हैं। वे स्ट्रेट को फिर से बंद करना चाहते हैं। जैसा कि वे वर्षों से करते आ रहे हैं और वे हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकते।”

    इससे पहले ईरानी सेना की कमांड ने एक होर्मुज पर अमेरिकी कमांड को वादाखिलाफी बताया। ईरान की तरफ से कहा गया कि ईरानी बंदरगाहों के खिलाफ लगाए गए अमेरिकी ब्लाकेड को न हटाकर अमेरिका ने अपना वादा तोड़ा है। बयान में आगे कहा गया, “जब तक अमेरिका ईरान आने वाले सभी जहाजों के लिए आवाजाही की स्वतंत्रता बहाल नहीं करता, होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति सख्त नियंत्रण में रहेगी।”

    शनिवार सुबह होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति को अपने देश और दुनिया के सामने रखते हुए ईरानी सरकारी टीवी ने बताया कि होर्मुज पर वापस नियंत्रण हासिल कर लिया गया है। ईरान की तरफ से होर्मुज पर नियंत्रण हासिल करने के प्रयास में ही दो भारतीय तेल टैंकरों के ऊपर गोलीबारी की खबर सामने आई है। इस घटना को लेकर सरकार ने ईरानी राजदूत को भी समन किया है।

    बता दें, 28 फरवरी को अमेरिकी और इजरायली हमले के बाद शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट ने पूरे विश्व को ऊर्जा संकट में धकेल दिया है। हमले के कुछ दिन बाद ही ईरान ने होर्मुज के ऊपर प्रतिबंध लगा दिया, जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं। पांच हफ्तों की लड़ाई के बाद अमेरिका और ईरान ने सीजफायर की घोषणा कर दी, लेकिन इजरायल ने लेबनान पर हमला करना जारी रखा। इसकी वजह से ईरान ने होर्मुज को खोलने से इनकार कर दिया। अमेरिकी और ईरान के बीच हुई वार्ता के बाद इजरायल ने भी लेबनान के साथ सीजफायर का ऐलान कर दिया। इसके बाद ईरान ने शुक्रवार को सीजफायर की अवधि तक होर्मुज के रास्ते व्यापारिक जहाजों के लिए खोल दिए। लेकिन फिर ट्रंप के बायन के बाद व्यवस्था बिगड़ गई।

  • अमेरिकी नाकाबंदी के बीच होर्मुज से गुजरा माल्टा का ध्वज लगा जहाज…

    अमेरिकी नाकाबंदी के बीच होर्मुज से गुजरा माल्टा का ध्वज लगा जहाज…


    दुबई।
    माल्टा (Malta.) का ध्वज लगे एक जहाज (Ship) ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz.) से पश्चिम की ओर यात्रा शुरू की। यह पहला कच्चा तेल (Crude oil.) ले जाने वाला टैंकर बताया जा रहा है, जब से अमेरिका (America.) ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लगाई है। यह जानकारी दुनिया भर में जहाजों की निगरानी करने वाले शिपिंग ट्रैकिंग मॉनिटर के हवाले से दी गई है।

    माल्टा का ध्वज लगा तेल टैंकर अगियोस फैनोरियोस-I के गुरुवार को इराक के बसरा बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है, जहां अमेरिका की नाकेबंदी लागू नहीं है। मरीन ट्रैफिक के अनुसार, यह जहाज ओमान की खाड़ी में लगभग दो दिन तक रुका रहा और फिर उसने दोबारा मार्ग तय किया।

    इस बीच, अमेरिका की नौसेना ने कहा कि वह ईरान के आसपास व्यापारिक जहाजों पर कार्रवाई करने के लिए तैयार है। अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों ने क्षेत्र में मौजूद व्यापारिक जहाजों को चेतावनी दी है कि वे जहाजों को रोक सकते हैं और नाकेबंदी लागू करने के लिए बल प्रयोग कर सकते हैं।

    नौसेना के रेडियो संदेश में कहा, ईरानी बंदरगाहों की ओर या वहां से आने-जाने वाले जहाजों को रोका जा सकता है और जब्त किया जा सकता है। यह संदेश अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) की ओर से सोशल मीडिया पर भी साझा किया गया है। एक सैन्य अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर पुष्टि की कि यह संदेश इस समय क्षेत्र के सभी जहाजों को प्रसारित किया जा रहा है। रेडियो संदेश में आगे कहा गया, अगर आप नाकेबंदी का पालन नहीं करेंगे, तो बल प्रयोग किया जाएगा।

  • होर्मुज की नाकेबंदी….जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए US ने तैनात किए 15 युद्धपोत

    होर्मुज की नाकेबंदी….जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए US ने तैनात किए 15 युद्धपोत


    वाशिंगटन।
    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच गजब की तनातनी शुरू हो गई है। फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में स्थित इस अहम समुद्री रास्ते पर ईरान के बाद अमेरिका ने पहरा लगा दिया है, जिसके बाद तनाव बढ़ता ही जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अपनी धमकियों के बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही रोकने के लिए पूरा दम लगा दिया है। अमेरिका ने इस क्षेत्र में 15 से ज्यादा युद्धपोत तैनात किए गए हैं, जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों के आसपास नाकेबंदी लागू कर रहे हैं।

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड फोर्स ने बताया है कि अमेरिका बहुत सख्ती से नाकेबंदी लागू कर रहा है। ऑपरेशन में अमेरिका का खास युद्धपोत यूएसएस ट्रिपोली (LHA-7) भी शामिल है। यहां से एफ-35बी लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट, एमवी-22 ओस्प्रे विमान और हेलिकॉप्टर लगातार होर्मुज की ओर भेजे जा रहे हैं। CENTCOM ने बताया कि यूएसएस ट्रिपोली खास तरह से डिजाइन किया गया है, जिसमें ज्यादा से ज्यादा फाइटर जेट तैनात किए जा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर यह जहाज 20 से ज्यादा एफ-35बी जेट ऑपरेट कर सकता है।


    नाकेबंदी शुरू

    CENTCOM के मुताबिक, यह नाकेबंदी तय समय से शुरू कर दी गई है और इसे सख्ती से लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले हर जहाज पर नजर रखी जाएगी। हालांकि, अमेरिका ने साफ किया है कि जो जहाज ईरान के अलावा दूसरे देशों के बंदरगाहों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे हैं, उन्हें नहीं रोका जाएगा। CENTCOM ने एक बयान में कहा, “नाकेबंदी सभी देशों के उन पोतों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी, जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं। गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत दी जाएगी।”

    वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान की कोई फास्ट अटैकर जहाज़ें नाकेबंदी के पास आईं, तो उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। हालांकि विश्लेषकों का कहना कि अमेरिका के लिए केवल बल प्रयोग के जरिये जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल करना मुश्किल होगा। फिलहाल यह स्पष्ट भी नहीं है कि नाकेबंदी कैसे काम करेगी या ईरान जवाब में क्या कदम उठाएगा।


    नहीं हो पाया था युद्धविराम

    इससे पहले अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी को हुए सशर्त युद्ध-विराम समझौते को स्थायी शांति में बदलने के लिए पिछले शनिवार को पाकिस्तान में हुई बातचीत बेनतीजा रही थी, जिसके बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को निशाना बनाया है। दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिर से शुरू होगी या नहीं, इस संबंध में फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है।


    ईरान ने दी बड़ी धमकी

    अमेरिकी एक्शन के जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी बंदरगाहों को निशाना बनाने की धमकी दी है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग के मुताबिक, “फारस की खाड़ी और ओमान सागर में सुरक्षा या तो सभी के लिए होगी या किसी के लिए भी नहीं।” ईरानी सेना ने कहा, “इस क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।”

  • शांति वार्ता से पहले ट्रंप का बड़ा बयान… बोले- डील हो या न हो, होर्मुज का खुलना तय

    शांति वार्ता से पहले ट्रंप का बड़ा बयान… बोले- डील हो या न हो, होर्मुज का खुलना तय


    वाशिंगटन।
    इस्लामाबाद (Islamabad.) में होने जा रही पाकिस्तान और अमेरिका (Pakistan and America) के बीच शांति वार्ता से पहले डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump.) ने कहा है कि किसी भी कीमत पर होर्मुज (Hormuz.) को खुलवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि युद्धविराम को लेकर सहमति बने या ना बने, होर्मुज का खुलना तय है। डोनाल्ड ट्रंप बार-बार कहते रहे हैं कि ईरान पर हमला करके उन्होंने अपने उद्देश्यों की पूर्ति कर ली है और अब उनका टार्गेट होर्मुज खुलवाना है। बता दें कि होर्मुज बंद होने की वजह से दुनिया के ज्यादातर देश बुरी तरह प्रभावित हैं। दुनिया का 20 फीसदी तेल व्यापार इसी समुद्री रास्ते से होता है।

    ट्रंप ने कहा, हमारी जीत हुई है और अब हम खाड़ी का यह रास्ता खोलने जा रहे हैं। इसके लिए कोई डील जरूरी नहीं है। ईरान को लेकर ट्रंप ने कहा, उनकी नौसेना चली गई, वायुसेना चली गई, बड़े नेता चले गए, अब उनके पास बचा ही क्या है। इस्लामाबाद के लिए रवाना होने से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, अगर ईरानी अच्छी भावना के साथ बात करने को तैया हैं तो हम भी उनका स्वागत करते हैं। अगर वे हमारे साथ कोई खेल खेलना चाहते हैं तो उन्हें अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिलेगी।


    ईरान की तरफ से प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन

    ईरान की तरफ से बातचीत के लिए संसद के स्पीकर मोहम्मद बकर कलीबाफ और उनके साथ विदश मंत्री सैयद अब्बास अरागची, रधक्षा परिषद के सचिव अली अकबर अहमदियान और केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दुलनासिर हेम्माती इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं। कलीबाफ ने कहा कि दोनों तरफ से दो वादे अभी पूरे नहीं हुए हैं। उनके पूरे होने के बाद ही बातचीत शुरू होगी।

    डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरानी ‘आज इसलिए ज़िंदा हैं क्योंकि बातचीत हो रही है।’ उन्होंने कहा कि ईरानियों को शायद यह एहसास नहीं है कि उनके पास दुनिया से थोड़े समय के लिए ज़बरदस्ती वसूली करने के अलावा कोई और दांव नहीं है; यह वसूली वे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का इस्तेमाल करके करते हैं। इसके ज़रिए उन्होंने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान के रणनीतिक नियंत्रण की ओर इशारा किया।

    उन्होंने ईरान पर तंज कसते हुए कहा कि वे (ईरानी) लड़ने के मुकाबले फेक न्यूज़ मीडिया और जनसंपर्क को संभालने में ज़्यादा माहिर हैं। ट्रंप की ये टिप्पणियाँ उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तब आईं, जब उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के नेतृत्व में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचा। ईरान ने अभी तक बातचीत के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा है।

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने इस्लामाबाद रवाना होने से पहले कहा कि अगर ईरान ‘सद्भावना’ से काम करता है, तो वे उसके साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान “हमें बेवकूफ़ बनाने” की कोशिश करता है, तो अमेरिका इसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा। ईरान की संसद के अध्यक्ष ने ज़ोर देकर कहा कि कोई भी बातचीत शुरू होने से पहले लेबनान में संघर्ष-विराम होना ज़रूरी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को कहा कि वे लेबनान के साथ जल्द से जल्द बातचीत करने के लिए तैयार हैं।

  • कूटनीतिक सफलता…. ईरान युद्ध के बीच होर्मुज से अब तक निकले तेल-गैस से भरे भारत के 9 जहाज

    कूटनीतिक सफलता…. ईरान युद्ध के बीच होर्मुज से अब तक निकले तेल-गैस से भरे भारत के 9 जहाज


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष (West Asia Crisis) के बीच ईरान (Iran) ने समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लगभग बंद कर दिया है। इससे खाड़ी देशों से गैस और तेल की आपूर्ति बाधित हो गई है। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में तेल की कीमतों में आग लगी है। लेकिन, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिन्होंने इस जोखिम भरे रास्ते से तेल और गैस से भरे सबसे अधिक जहाज सुरक्षित निकाले हैं। होर्मुज फारस और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा समुद्री मार्ग है। ओमान और ईरान के बीच स्थित होर्मुज जलमार्ग एक जगह मात्र 33 किलोमीटर चौड़ा है। यह फारस की खाड़ी को शेष दुनिया से जोड़ता है।

    इस रास्ते से दुनिया का लगभग 20 फीसदी कच्चे तेल का नौवहन होता है। 28 फरवरी को अमेरिका-इस्राइल की ओर से हमला किए जाने के बाद ईरान ने इस मार्ग की नाकेबंदी कर दी है। कुछ तेल टैंकरों को ईरान ने निशाना भी बनाया है। लेकिन ईरान से अपने ऐतिहासिक संबंधों और मजबूत कूटनीति के जरिये भारत होर्मुज के रास्ते अब तक तेल और गैस से भरे 9 जहाज सुरक्षित निकाल लाने में सफल रहा है। इनमें से 8 जहाज भारतीय तट पर पहुंच गए हैं, जबकि एक पहुंचने वाला है।


    सबसे पहले जहाज पार कराया था

    पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच भारत ने सबसे पहले घरेलू लिक्विफाइड पेट्रोलिमय गैस (एलपीजी) से भरे दो जहाजों को होर्मुज पार कराया था। शिवालिक और नंदा देवी नामक इन दोनों टैंकरों को ईरान की नौसेना ने ही अपनी सुरक्षा में होर्मुज को पार कराा था। हालांकि, भारत ने भी अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में पोत तैनात कर रखे हैं। शिवालिक और एमटी नंदा देवी 92,712 टन एलपीजी लेकर आए थे। शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह और नंदा देवी उसके अगले दिन 17 मार्च को गुजरात के ही कांडला बंदरगाह पहुंचा था।


    जग लाडकी से जगत वसंत तक, भारत पहुंचे कई जहाज

    जग लाडकी संयुक्त अरब अमीरात से 80,886 टन कच्चा तेल लेकर 18 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा था। इसके बाद पाइन गैस और जग वसंत 92,612 टन एलपीजी लेकर 26 और 28 मार्च को भारत पहुंचे थे। 94,000 टन एलपीजी लेकर बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम भी आए हैं। बीडब्ल्यू टीवाई 31 मार्च को मुंबई और बीडब्ल्यू ईएलएम 1 अप्रैल को मंगलोर बंदरगाह पहुंचा था। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि लगभग 44,000 टन एलपीजी लेकर सी बर्ड 2 अप्रैल को मंगलोर बंदरगाह पहुंचा था। यह ईरान से एलपीजी लेकर आया है। सात साल में पहली बार भारत ने ईरान से गैस खरीदा है।


    ईरान के साथ भुगतान की समस्या नहीं कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित

    केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि ईरान से कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान संबंधी कोई समस्या नहीं है और रिफाइनरियां तेहरान के साथ दुनियाभर के विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं से तेल हासिल कर रही हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन खबरों को खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि ईरानी कच्चा तेल ले जा रहा एक तेल टैंकर अपने पहले से संकेतित गंतव्य भारत के बजाय चीन की ओर मुड़ गया है।

    मंत्रालय ने कहा कि ये दावे उद्योग के उस सामान्य अभ्यास की अनदेखी करते हैं, जहां परिचालन लचीलेपन के आधार पर यात्रा के दौरान कार्गो अपना गंतव्य बदल सकते हैं। यदि यह खेप भारत आती, तो लगभग सात वर्षों में ऐसी पहली खेप होती। मंत्रालय ने इन दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया कि भुगतान बाधाओं के कारण कार्गो को गुजरात के वाडिनार के बजाय चीन की ओर मोड़ा गया था। मंत्रालय ने कहा कि ईरानी कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान की कोई बाधा नहीं है।

    मंत्रालय ने स्पष्ट किया, भारत 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात करता है, और कंपनियों के पास विभिन्न स्रोतों और भौगोलिक क्षेत्रों से तेल प्राप्त करने का पूर्ण लचीलापन है। मंत्रालय के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों ने ईरान सहित अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं को सुरक्षित कर लिया है। जहाजों पर नजर रखने वाली फर्म केपलर ने शुक्रवार को कहा था कि 2002 में निर्मित और 2025 में अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित टैंकर पिंग शुन अब गुजरात के वाडिनार के बजाय चीन के डोंगयिंग को अपना गंतव्य बता रहा है।

  • होर्मुज पर ट्रंप की नीति से भड़के अमेरिकी सांसद, युद्ध खर्च पर भी उठाए सवाल

    होर्मुज पर ट्रंप की नीति से भड़के अमेरिकी सांसद, युद्ध खर्च पर भी उठाए सवाल

    वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश में आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। डेमोक्रेटिक सांसद क्रिस मर्फी ने ट्रंप की रणनीति पर तीखा हमला करते हुए इसे “पागलपन” करार दिया है।

    मर्फी ने कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज स्ट्रेट खुला हुआ था, लेकिन अब अमेरिका उस समस्या को सुलझाने की कोशिश कर रहा है जिसे उसने खुद पैदा किया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ संघर्ष पर अमेरिका प्रतिदिन करीब दो अरब डॉलर खर्च कर रहा है, जो बेहद बड़ी राशि है।

    सांसद ने यह भी कहा कि युद्ध में अमेरिकी नागरिकों की जान जा रही है और देश में कई परिवार अपने प्रियजनों को खो चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर संघर्ष जारी रहा तो ऐसी संख्या और बढ़ सकती है। साथ ही वैश्विक स्तर पर ईंधन और अन्य वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल का भी जिक्र किया।

    होर्मुज पर बढ़ा तनाव
    अमेरिका और Israel के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्ती बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान कुछ मित्र देशों के जहाजों को ही गुजरने दे रहा है और अन्य टैंकरों पर हमले या शुल्क लगाने की चेतावनी दे रहा है।

    इस बीच ट्रंप ने ईरान को जलडमरूमध्य खोलने के लिए दी गई समयसीमा बढ़ाते हुए कहा कि फिलहाल ईरानी ऊर्जा संयंत्रों पर बमबारी टाली जाएगी। हालांकि दोनों देशों के बीच युद्धविराम वार्ता अभी भी गतिरोध में बताई जा रही है।
    ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps ने दावा किया कि उसने होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे तीन जहाजों को चेतावनी देकर वापस भेज दिया। गार्ड्स के अनुसार यह मार्ग “दुश्मन देशों” से जुड़े जहाजों के लिए बंद है।

    क्षेत्र में बढ़ते सैन्य जमावड़े के बीच अमेरिका ने अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं, जबकि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में Hezbollah के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के लिए और सैनिक भेजे हैं। इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • LPG संकट में भारत का ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा….जानें नौसेना होर्मुज से कैसे निकाल रही जहाज!

    LPG संकट में भारत का ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा….जानें नौसेना होर्मुज से कैसे निकाल रही जहाज!


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में LPG संकट के बीच ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा (Operation Energy Security) की शुरुआत की गई है। खबर है कि भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए युद्धपोत तैनात किए हैं। हालांकि, इसे लेकर सेना की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Iran’s Foreign Minister Abbas Araghchi) ने कहा है कि मित्र देशों के जहाजों को निकलने की अनुमति दी गई है, जिनमें भारत भी शामिल है।

    एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ऑपरेशन के तहत भारतीय नौसेना ने 5 से ज्यादा युद्धपोत तैनात किए हैं। ऑपरेशन का मकसद उन जलमार्गों और जहाजों को सुरक्षित करना है, जिनके जरिए एलपीजी, एलएजी और कच्चा तेल भारत पहुंच रहा है। माना जा रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग में भारत के लिए निकले 20 कार्गो फंस गए हैं।

    एक सूत्र ने बताया, ‘जब भारत आने वाला कोई मालवाहक जहाज इस स्ट्रेट को पार कर लेता है, तो ओमान की खाड़ी में तैनात नौसेना के युद्धपोत उस जहाज को सुरक्षा देते हैं और उसे संकटग्रस्त क्षेत्र से बाहर अरब सागर की ओर ले जाते हैं।’ वहीं, रिस्क एनालिस्ट मार्टिन कैली कहते हैं, ‘ऐसा लगता है कि ईरान चुनिंदा जहाजों को वेरिफिकेशन के बाद होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे रहा है, जो ईरानी जलक्षेत्र के अंदर जहाजों के ट्रांजिट के दौरान किया जाता है।’


    नौसेना का ऐक्शन

    रिपोर्ट के अनुसार, फारस की खाड़ी से निकलने वाले भारतीय कार्गो के संपर्क में नौसेना बनी रहती है। जहाज जब ईरान की सहमति से एक पॉइंट से गुजर जाता है, तो नौसेना के डेस्ट्रॉयर्स और फ्रिगेट्स कमान संभालते हैं। ये मिलकर जहाज को खतरे के क्षेत्र से बाहर निकालकर ले जाते हैं।


    भारत पहुंचे कई जहाज

    खबर है कि इस मिशन के चलते कई भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से भारत लौट आए हैं। इनमें एलपीजी लाने वाले पाइन गैस और जग वसंत का नाम शामिल है। दोनों मिलकर करीब 92 हजार टन एलपीजी लाए हैं।


    ईरान ने दिया भारतीय जहाजों को रास्ता

    मुंबई में ईरान के कॉन्सुलेट ने एक पोस्ट में कहा, ‘ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची: हमने चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान सहित मित्र देशों के लिए Strait of Hormuz से गुजरने की अनुमति दे दी है।


    इन लोगों की एलपीजी सप्लाई बंद करने की तैयारी

    पाइप के जरिये आपूर्ति की जाने वाली रसोई गैस (पीएनजी) की सुविधा उपलब्ध होने पर भी इसकी सेवा नहीं लेने वाले उपभोक्ताओं की घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी। सरकार ने आदेश जारी कर इसकी जानकारी दी है। यह कदम गैस नेटवर्क के विस्तार को तेज करने और एक ही ईंधन पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि नोटिस मिलने के तीन महीने के भीतर ग्राहकों को पीएनजी अपनानी होगी, ऐसा न करने पर रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी।

  • बड़ी सफलता…. 24 घंटे में होर्मुज से नहीं निकला कोई जहाज, लेकिन भारत के 2 LPG टैंकरों को मिली अनुमति

    बड़ी सफलता…. 24 घंटे में होर्मुज से नहीं निकला कोई जहाज, लेकिन भारत के 2 LPG टैंकरों को मिली अनुमति


    तेहरान।
    मिडिल ईस्ट में जंग (Middle East War) के बीच ईरान (Iran) ने सबसे अहम माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को ‘बंद’ कर रखा है। वह होर्मुज से चंद जहाजों को ही जाने की अनुमति दे रहा है, जबकि अन्य को मिसाइलों से समुद्र की तलहटी में डुबो दे रहा। इस बीच, शुक्रवार को पिछले 24 घंटे से ईरान ने होर्मुज से किसी भी देश के जहाज को निकलने नहीं दिया है, लेकिन इसके बावजूद भी भारत (India) को बड़ी सफलता मिली है। दो भारतीय एलपीजी टैंकरों (Two Indian LPG tankers) को इस स्ट्रेट को पार करने की अनुमति मिल गई है।

    न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने शिपिंग डेटा और सूत्रों के हवाले से बताया है कि यात्राओं में आए ठहराव के बाद, भारतीय झंडे वाले लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) के दो टैंकर आने वाले दिनों में होर्मुज से गुजरने की तैयारी कर रहे हैं। एजेंसी ने कहा, ”पिछले 24 घंटों में इस जलमार्ग से कोई भी कच्चा तेल टैंकर नहीं गुजरा है।” ईरान द्वारा उन जहाजों पर हमला करने की धमकी दिए जाने के बाद से सैकड़ों जहाजों ने लंगर डाल दिया है, जो होर्मुज के रास्ते खाड़ी से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। इसी स्ट्रेट से दुनिया के लगभग 20 फीसदी तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का प्रवाह होता है।

    Kpler के डेटा और शिपिंग सूत्रों के अनुसार, ये दोनों टैंकर इस समय खाड़ी के पानी में लंगर डाले हुए हैं। शुक्रवार को सूत्रों से मिले बाजार के आकलन के अनुसार, और उपलब्ध डेटा के आधार पर, पिछले 24 घंटों में इस जलमार्ग से कच्चे तेल के टैंकरों की कोई यात्रा नहीं हुई है। एक अलग डेटा से पता चला कि 18 मार्च को, अमेरिका के प्रतिबंधों की मार झेल रहा एक खाली कच्चे तेल का टैंकर, ईरानी जलक्षेत्र की ओर लौट गया था।

    शुक्रवार को MarineTraffic के जहाज-ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि भारतीय झंडे वाले LPG टैंकर ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ ने संकेत दिया है कि वे यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। भारत के केंद्रीय शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को पूछे जाने पर कि क्या ये जहाज यात्रा की तैयारी कर रहे हैं, कहा कि इस बारे में तत्काल कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।


    एलपीजी सप्लाई में बनी हुई है कमी

    एलपीजी की सप्लाई में कमी शुक्रवार को लगातार तीसरे हफ्ते भी जारी रही। हालांकि सिलेंडर भरवाने को लेकर बुकिंग में कुछ कमी आई है जो स्थिति के धीरे-धीरे सामान्य होने के संकेत हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कच्चे माल की आपूर्ति में बाधा बनी रहने से होटल सहित व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति प्रतिबंध जारी हैं जिससे चिंता बनी हुई है। अमेरिका तथा इजरायल के ईरान पर हमलों और उसके जवाबी कार्रवाई करने से शुरू हुए युद्ध के कारण होर्मुज बंद हो गया है, जो एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके जरिये भारत अपने आयात का 60 प्रतिशत प्राप्त करता है। इतनी बड़ी मात्रा में आपूर्ति अचानक बंद होने से सरकार ने घरेलू रसोई के लिए आपूर्ति को प्राथमिकता दी है। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को आपूर्ति शुरू में पूरी तरह रोक दी गई थी लेकिन बाद में उनकी जरूरत का पांचवां हिस्सा बहाल किया गया।

  • तेल-गैस के बाद इंटरनेट पर भी संकट? ईरान के कदम से वैश्विक कनेक्टिविटी पर खतरा, भारत भी प्रभावित हो सकता है

    तेल-गैस के बाद इंटरनेट पर भी संकट? ईरान के कदम से वैश्विक कनेक्टिविटी पर खतरा, भारत भी प्रभावित हो सकता है


    तेहरान।
     मध्य पूर्व में जारी तनाव अब सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क पर भी खतरा मंडराने लगा है। ईरान द्वारा हॉर्मुज में ऊर्जा आपूर्ति बाधित करने के बाद अब समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबलों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन केबलों को नुकसान पहुंचता है, तो दुनिया के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं ठप हो सकती हैं, जिसका असर India सहित कई देशों की बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं पर पड़ेगा।

    दो अहम समुद्री रास्ते खतरे में
    रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक कनेक्टिविटी के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गहॉर्मुज  और बाब-अल-मंदेब मार्ग इस समय जोखिम में हैं। इन दोनों इलाकों के समुद्र तल में फाइबर ऑप्टिक केबलों का विशाल नेटवर्क फैला हुआ है, जो यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ता है।

    बताया जा रहा है कि हॉर्मुज क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों और संभावित सुरंगों के कारण शिपिंग और बीमा कंपनियां पहले ही सतर्क हो गई हैं। वहीं लाल सागर क्षेत्र में Houthis के हमलों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

    इंटरनेट की रीढ़ हैं ये केबल
    समुद्र के नीचे बिछी ये फाइबर केबलें हजारों किलोमीटर लंबी होती हैं और दुनिया के अधिकांश डेटा ट्रांसफर का आधार हैं। वीडियो कॉल, ईमेल, ऑनलाइन बैंकिंग से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेवाएं—सब कुछ इन्हीं पर निर्भर करता है।

    हॉर्मुज के संकरे हिस्सों में समुद्र की गहराई लगभग 200 फीट तक ही है, जिससे इन केबलों को निशाना बनाना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है।

    करीब 20 केबलों पर मंडरा रहा खतरा
    लाल सागर और हॉर्मुज क्षेत्र में करीब 20 प्रमुख केबल मौजूद हैं, जिनमें 17 लाल सागर से होकर गुजरती हैं। हॉर्मुज मार्ग में AAE-1, Falcon, Gulf Bridge International और Tata TGN-Gulf जैसी महत्वपूर्ण लाइनें शामिल हैं। ये केबल सीधे तौर पर भारत के अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक को सपोर्ट करती हैं।

    डिजिटल दुनिया पर बड़ा असर संभव
    Amazon, Microsoft और Google जैसी बड़ी टेक कंपनियों के मिडिल ईस्ट में स्थापित डाटा सेंटर भी इन्हीं केबलों से जुड़े हैं। ऐसे में अगर कनेक्टिविटी प्रभावित होती है, तो क्लाउड सेवाएं, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर व्यापक असर पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर, यह संकट दिखाता है कि आधुनिक दुनिया की डिजिटल लाइफलाइन कितनी नाजुक है—जहां एक क्षेत्रीय संघर्ष भी वैश्विक इंटरनेट और अर्थव्यवस्था को झकझोर सकता है।