निवेशकों के लिए भारत सुरक्षित और खुला बाजार, SEBI प्रमुख ने जताया भरोसा


नई दिल्ली।भारत आज भी वैश्विक निवेशकों के लिए एक खुला, स्थिर और आकर्षक बाजार बना हुआ है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि मजबूत आर्थिक आधार, तेजी से बढ़ता निवेशक वर्ग और सुधार-आधारित नीतियां भारत को वैश्विक पूंजी के लिए खास बनाती हैं।

🇺🇸 सैन फ्रांसिस्को में निवेशकों से संवाद

यह बयान सैन फ्रांसिस्को में आयोजित एक इंटरएक्टिव सेशन के दौरान दिया गया, जिसे भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में वैश्विक निवेशकों, वेंचर कैपिटल फर्म्स और उद्योग जगत के दिग्गजों ने हिस्सा लिया।

पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-आधारित रेगुलेटरी सिस्टम

सेबी प्रमुख ने कहा कि नियामकीय ढांचा पारदर्शी, परामर्श-आधारित और तकनीक-संचालित है। सेबी का फोकस ऐसी नीतियों पर है जो जोखिम को ध्यान में रखते हुए निवेश को आसान बनाएं और पूंजी बाजार की स्थिरता बनाए रखें।

उन्होंने बताया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के रजिस्ट्रेशन और री-केवाईसी प्रक्रिया को आसान किया गया है। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म का बढ़ता उपयोग, मजबूत आईपीओ बाजार और वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) की बढ़ती भूमिका बाजार को और गहराई दे रही है।

घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी

भारत के पूंजी बाजार की एक बड़ी ताकत घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी है। इससे बाजार को स्थिरता और मजबूती मिल रही है, जो वैश्विक निवेशकों के लिए भी भरोसे का संकेत है।

मजबूत आर्थिक संकेतक दे रहे सहारा

तुहिन कांत पांडे ने कहा कि नियंत्रित महंगाई, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और संतुलित बाहरी खाते भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देते हैं। यही कारण है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

भारत-अमेरिका व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य

इस मौके पर के. श्रीकर रेड्डी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार 240 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है और इसे 2030 तक 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है।

वहीं रामकृष्णन मुकुंदन ने सरकार, उद्योग और वैश्विक निवेशकों के बीच सहयोग को भारत की भविष्य की ग्रोथ के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति वैश्विक साझेदारी, खासकर अमेरिका के साथ, पर निर्भर करेगी।

निवेश माहौल को और बेहतर बनाने पर जोर

सत्र के दौरान निवेशकों और नीति-निर्माताओं के बीच खुली चर्चा हुई। इसमें नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने, क्रॉस-बॉर्डर निवेश नियमों में स्पष्टता लाने, डीप-टेक सेक्टर में फंडिंग बढ़ाने और डिजिटल प्रक्रियाओं को तेज करने जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया।