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  • गोवा अग्निकांड: लूथरा ब्रदर्स को जल्द लाया जा सकता है भारतथाइलैंड से प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू

    गोवा अग्निकांड: लूथरा ब्रदर्स को जल्द लाया जा सकता है भारतथाइलैंड से प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू


    नई दिल्ली । गोवा के बर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब में 6 दिसंबर को हुए भयंकर अग्निकांड में कम से कम 25 लोग मारे गए थेजिनमें क्लब के कई कर्मचारी भी शामिल थे। इस हादसे के बाद नाइटक्लब के मालिक सौरभ और गौरव लूथरादोनों भाईथाइलैंड के फुकेट भाग गए थे। गोवा पुलिस ने उनकी तलाश शुरू कर दी थीऔर अब खबर है कि उन्हें अगले 24 से 48 घंटे में भारत लाया जा सकता है।

    सरकारी सूत्रों के अनुसारलूथरा भाइयों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही हैऔर जल्द ही उन्हें थाइलैंड से भारत लाया जा सकता है। विदेश मंत्रालय ने उनके पासपोर्ट को कैंसल कर दिया है और इंटरपोल ने उनके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया है। इसके अलावादिल्ली की एक अदालत ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी थीजिसमें उन्होंने यह दावा किया था कि गोवा में उनकी जान को खतरा है और उन्हें पीट-पीट कर मार डाला जाएगा।

    अग्निकांड के बाद गोवा पुलिस ने क्लब के पांच कर्मचारियों और प्रबंधकों को गिरफ्तार किया है। इन कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही हैजबकि सौरभ और गौरव लूथरा की गिरफ्तारी के लिए कार्यवाही चल रही है। जांच समितिजो इस घटना की गहन जांच कर रही हैने गोवा के अन्य प्रमुख व्यक्तियोंजैसे क्लब के जमीन के मालिक प्रदीप घाडी अमोणकर और आरपोरा-नागोवा के सरपंच रोशन रेडकर से भी पूछताछ की है। अमोणकर को गहन पूछताछ के लिए शनिवार देर रात तक तलब किया गया था।
    सरकार की ओर से लूथरा भाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। उनके प्रत्यर्पण के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस भीषण अग्निकांड के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को न्याय दिलाया जा सके।

  • कोलकाता में लियोनेल मेसी का दौरा 22 मिनट में खत्म, प्रशंसक हुए मायूस, जानिए क्या है वजह?

    कोलकाता में लियोनेल मेसी का दौरा 22 मिनट में खत्म, प्रशंसक हुए मायूस, जानिए क्या है वजह?


    नई दिल्‍ली । दिग्गज फुटबॉलर(Legendary footballer) लियोनेल मेसी(Lionel Messi) का कोलकाता दौरा, जिसके लिए फैन्स लंबे समय से इंतजार कर रहे थे वह महज 22 मिनट में ही खत्म हो गया और शनिवार को साल्ट लेक स्टेडियम के भीतर अफरा-तफरी का माहौल हो गया. अपने GOAT टूर के तहत शहर की दूसरी यात्रा पर आए मेसी से यह उम्मीद की जा रही थी कि यह भारत (India)में फुटबॉल के लिए एक यादगार दिन होगा. लेकिन हुआ इसका बिलकुल उल्टा.

    फीफा वर्ल्ड कप विजेता मेसी के आगमन को लेकर प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह था. शनिवार तड़के ही बड़ी संख्या में फैंस उन्हें देखने के लिए स्टेडियम पहुंच गए थे. लेकिन दोपहर होते-होते पूरा आयोजन बिखर गया. अब आइए जानते हैं कि आखिर ये अव्यवस्था हुई कैसे

    50 हजार से ज्यादा फैन्स पहुंचे
    करीब 50,000 दर्शक साल्ट लेक स्टेडियम में उमड़ पड़े थे, जिनमें से कई ने 4,000 रुपये से ज्यादा कीमत के टिकट खरीदे थे. वे बेबस होकर यह दृश्य देखते रह गए कि फुटबॉल के इस महान खिलाड़ी को राजनेताओं, वीवीआईपी लोगों, भारी सुरक्षा व्यवस्था और सेल्फी लेने में ज्यादा दिलचस्पी रखने वाले लोगों की भीड़ ने चारों ओर से घेर लिया.

    स्टेडियम के गेट सुबह 8 बजे खोल दिए गए थे और मेसी 11:30 बजे अपने इंटर मियामी टीम के साथी लुईस सुआरेज़ और रोड्रिगो डी पॉल के साथ मैदान में उतरे. जैसे ही उन्होंने प्रवेश किया, हजारों प्रशंसकों की गगनभेदी तालियों से उनका स्वागत हुआ.

    वीआईपी लोगों ने ही घेर लिया
    सूत्रों के अनुसार, कुछ ही मिनटों में मेसी खुद को राजनेताओं, पुलिस अधिकारियों, वीआईपी और उनके काफिलों से घिरा हुआ पाया, जिससे एक मानवीय घेरा बन गया. दर्शकों को उस खिलाड़ी की झलक तक नहीं मिल पा रही थी, जिसे देखने वे आए थे.

    हैरान और हल्की मुस्कान के साथ मेसी ने मैदान का एक धीमा चक्कर लगाने की कोशिश की और कुछ पूर्व खिलाड़ियों को ऑटोग्राफ भी दिए, लेकिन अव्यवस्था और बढ़ती चली गई.

    पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए प्रमोटर सताद्रु दत्ता ने बार-बार भीड़ से पीछे हटने की अपील की. तनाव भरी आवाज़ में उन्होंने कहा, “कृपया उन्हें अकेला छोड़ दें. कृपया मैदान खाली करें.”

    हालांकि, उनकी अपीलों को काफी हद तक नजरअंदाज कर दिया गया. आखिरकार, उनके एक घंटे के तय कार्यक्रम से काफी पहले ही सुरक्षा कारणों से उन्हें स्टेडियम से बाहर ले जाया गया और आयोजन रद्द करने का फैसला लिया गया. इसके बाद हालात और बिगड़ गए. स्टेडियम में तोड़फोड़ हुई, सजावट और संपत्ति को नुकसान पहुंचा और पूरा परिसर अस्त-व्यस्त हो गया.

    गांगुली चाहते थे मेसी और रुकें
    एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों में शामिल सौरव गांगुली ने मेसी को ज्यादा देर रुकने के लिए मनाने की कोशिश की. आयोजन रद्द होने के बाद आयोजक, पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास और राज्य पुलिस के डीजीपी राजीव कुमार को मेसी की टीम से बातचीत करते और उन्हें कार्यक्रम जारी रखने के लिए मनाने की कोशिश करते देखा गया.

    इसी दौरान गांगुली को यह कहते हुए सुना गया, “अगर आप थोड़ी देर और रुकें तो अच्छा होगा.”

    अब मेसी शनिवार को ही हैदराबाद के लिए रवाना हो गए हैं, जहां वह तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ एक संक्षिप्त फुटबॉल सत्र (किकअबाउट) में हिस्सा लेंगे.

  • जबलपुर के गांवों में मगरमच्छों की धूप सेंकने की घटना से मची दहशतवन विभाग की टीम की ढिलाई पर सवाल

    जबलपुर के गांवों में मगरमच्छों की धूप सेंकने की घटना से मची दहशतवन विभाग की टीम की ढिलाई पर सवाल


    जबलपुर । इन दिनों जबलपुर में पड़ रही कड़ाके की ठंड ने न केवल मानव जीवन को प्रभावित किया हैबल्कि वन्य प्राणियों के लिए भी समस्याएं पैदा कर दी हैं। जलचर प्राणीविशेष रूप से मगरमच्छठंड से राहत पाने के लिए धूप सेंकने की आदत बना रहे हैं। यह अद्भुत दृश्य जबलपुर जिले के परियट जलाशय से लगे गांवों में देखा जा रहा मटामरघानारिठौरीपिपरिया और आसपास की कालोनियों में मगरमच्छों का आना बढ़ गया हैजिससे ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया है।

    परियट जलाशय मगरमच्छों के लिए एक प्राकृतिक निवास स्थान बन चुका है। इस क्षेत्र में लगभग 1000 मगरमच्छ रहते हैंऔर इनकी संख्या समय के साथ बढ़ी है। ये जलचरजो आमतौर पर जल में रहते हैंअब ठंड से बचने के लिए धूप में आराम करने निकल आते हैं। परियट नदी में मगरमच्छों की अधिकता के कारण वे शिकार की तलाश में और अपने निवास स्थान से बाहर भी भटकने लगे हैं। अब ये मगरमच्छ गांवों के नजदीक आकर मानव बस्तियों तक पहुंच रहे हैंजो लोगों के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।

    इन मगरमच्छों ने पहले कुछ पालतू जानवरों पर हमले किए हैंजिनमें श्वान और मवेशी शामिल हैं। हालांकिअभी तक किसी मनुष्य पर हमला नहीं हुआ हैलेकिन स्थानीय लोग इस खतरे को लेकर बेहद चिंतित हैं। कई बार गांवों के सरपंचों ने वन विभाग से इस समस्या का समाधान निकालने के लिए अपील की हैलेकिन वन विभाग की टीम की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। वे केवल रेस्क्यू का आश्वासन देकर अपना काम निपटा लेते हैंजबकि समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

    वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे जल्द ही इस स्थिति से निपटने के लिए कदम उठाएंगेलेकिन अब तक इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। इस खतरनाक स्थिति में वन विभाग की ढिलाई पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या का हल नहीं निकाला गयातो यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

    मगरमच्छों के बढ़ते खतरे को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि इंसानी दखल की वजह से इनका प्राकृतिक निवास क्षेत्र घटता जा रहा हैजिसके कारण वे रहवासी इलाकों में घुसने लगे हैं। इस समस्या का समाधान वन विभाग के समुचित और तत्काल प्रयासों में हैलेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग जल्द इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाएगा

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्व. गोपीनाथ मुंडे की जयंती पर किया नमन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्व. गोपीनाथ मुंडे की जयंती पर किया नमन


    मध्य प्रदेश / मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. गोपीनाथ मुंडे की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. मुंडे का जीवन देशभक्ति और समाजसेवा की मिसाल है, जिसने गरीब और वंचित वर्ग के कल्याण के लिए अपने संपूर्ण जीवन को समर्पित किया। डॉ. यादव ने कहा कि स्व. गोपीनाथ मुंडे ने हमेशा नए भारत के निर्माण के लिए काम किया और युवाओं को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा दी। उनका सरल जीवन, ईमानदार व्यक्तित्व और समाज के कमजोर वर्ग के लिए किए गए प्रयास सदैव याद किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके आदर्श और नीति-निर्देश आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेंगे।

    स्व. मुंडे महाराष्ट्र के समाज और राजनीति में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व थे। उन्होंने गरीब और किसानों के हितों की आवाज़ उठाई और उनकी बेहतरी के लिए कई सामाजिक और आर्थिक योजनाओं की शुरुआत की। उनके कार्य और जीवनशैली ने यह साबित किया कि सच्ची सेवा और समर्पण से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि स्व. मुंडे की जयंती पर उनके योगदान को याद करना केवल श्रद्धांजलि नहीं,बल्कि उनके आदर्शों को अपनाकर समाज में सुधार और विकास लाने का अवसर भी है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्व. मुंडे के जीवन से प्रेरणा लेकर देश और समाज के लिए निरंतर प्रयास करें।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा, स्व. गोपीनाथ मुंडे का संकल्प और उनकी निष्ठा हम सभी के लिए मार्गदर्शन का स्रोत हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि सच्ची सेवा और समर्पण से समाज के कमजोर वर्गों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाया जा सकता है। डॉ. यादव ने अंत में कहा कि स्व. मुंडे के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा और उनकी सोच को आगे बढ़ाने के लिए सरकार और समाज मिलकर प्रयास करेंगे।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जूनियर्स हॉकी विश्व कप-2025 में कांस्य पदक जीतने पर टीम को दी बधाई

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जूनियर्स हॉकी विश्व कप-2025 में कांस्य पदक जीतने पर टीम को दी बधाई

     
    मध्य प्रदेश /मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एफ.आई.एच. हॉकी पुरुष जूनियर्स विश्व कप-2025 में भारतीय जूनियर हॉकी टीम द्वारा कांस्य पदक जीतने पर टीम को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। यह उपलब्धि न केवल भारतीय हॉकी के लिए गौरवपूर्ण है बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस उपलब्धि ने दिखा दिया है कि समर्पण अनुशासन और निरंतर प्रयास से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा -यह अभूतपूर्व उपलब्धि हमारे युवा खिलाड़ियों की मेहनत संघर्ष और टीम भावना का परिणाम है। जूनियर्स टीम ने हर मुकाबले में अपने कौशल और धैर्य का लोहा मनवाया और विश्व कप में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया।-

    उन्होंने कहा कि यह पदक केवल एक जीत नहीं है बल्कि यह भविष्य के लिए नई प्रेरणा और उम्मीद लेकर आता है। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से आग्रह किया कि वे इसी उत्साह और मेहनत के साथ आगे बढ़ें और भारतीय हॉकी को विश्व स्तर पर और ऊँचाइयों तक पहुँचाएँ। उन्होंने कहा कि सरकार इस तरह की उपलब्धियों को बढ़ावा देने के लिए खिलाड़ियों के लिए बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएँ और अंतरराष्ट्रीय अनुभव सुनिश्चित करने में लगातार प्रयास कर रही है।एफ.आई.एच. जूनियर्स विश्व कप-2025 में भारतीय टीम ने कठिन मुकाबलों के बाद कांस्य पदक अपने नाम किया। टीम ने सेमीफाइनल में चुनौतीपूर्ण मैचों का सामना किया और हार के बावजूद अपने आत्मविश्वास और सामूहिक रणनीति से कांस्य पदक जीतने में सफलता हासिल की। इस उपलब्धि ने खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टीम के प्रत्येक सदस्य का नाम लेते हुए उनके योगदान की सराहना की और कहा कि उनके खेल में अनुशासन और समर्पण ने ही टीम को इस सफलता तक पहुँचाया। उन्होंने कहा कि यह जीत भारतीय हॉकी के उज्जवल भविष्य की ओर संकेत करती है और आने वाले वर्षों में देश की हॉकी को और मजबूत बनाने में मदद करेगी। डॉ. यादव ने कहा कि सरकार खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण केंद्र और अकादमिक कार्यक्रम संचालित कर रही है। इसके तहत खिलाड़ियों को उच्च गुणवत्ता वाले कोचिंग आधुनिक प्रशिक्षण उपकरण और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर दिए जाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में और अधिक युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगे।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस सफलता ने न केवल खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया है बल्कि पूरे देश में खेलों के प्रति उत्साह और विश्वास को भी बढ़ाया है। उन्होंने टीम के कोच और सपोर्ट स्टाफ को उनके समर्पण के लिए धन्यवाद दिया जिन्होंने खिलाड़ियों को हर स्थिति में मार्गदर्शन और प्रेरणा दी। डॉ. यादव ने खिलाड़ियों से कहाआपकी यह जीत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। यह दिखाती है कि मेहनत धैर्य और टीम भावना के साथ किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। हमें आप पर गर्व है और हम आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।-इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी और अन्य खेलों के विकास के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ियों की सफलता केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि पूरे देश की उपलब्धि है और इसे राष्ट्रीय गौरव के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • Ind vs SA: दक्षिण अफ्रीका ने रचा इतिहास… भारत के खिलाफ जीत में ऑस्ट्रेलिया को पछाड़ बनी नंबर-1 टीम

    Ind vs SA: दक्षिण अफ्रीका ने रचा इतिहास… भारत के खिलाफ जीत में ऑस्ट्रेलिया को पछाड़ बनी नंबर-1 टीम

    नई दिल्ली। इंडिया वर्सेस साउथ अफ्रीका (India vs South Africa) 5 मैच की टी20 सीरीज (T20 series) का दूसरा मुकाबला गुरुवार को न्यू चंडीगढ़ के महाराजा यादविन्द्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, मुल्लांपुर में खेला गया था। इस मैच में मेहमान टीम ने जोरदार वापसी करते हुए भारत (India) को 51 रनों से धूल चटाई और सीरीज में 1-1 की बराबरी की। साउथ अफ्रीका (South Africa) की इस जीत के हीरो उनके सलामी बल्लेबाज क्विंटन डी कॉक (Opening batsman Quinton de Kock) रहे, जिन्होंने 90 रनों की शानदार पारी खेल भारत के साथ 214 रनों का टारगेट रखने में अहम भूमिका निभाई। साउथ अफ्रीका के इस स्कोर के सामने टीम इंडिया पूरे 20 ओवर भी नहीं टिक पाई और 162 रनों पर ढेर हो गई। साउथ अफ्रीका ने भारत के खिलाफ इस जीत के साथ इतिहास रच दिया।

    साउथ अफ्रीका अब भारत के खिलाफ टी20 क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा मैच जीतने वाली टीम बन गई है। जी हां, यह उनकी टी20 क्रिकेट में भारत के खिलाफ 13वीं जीत थी। भारत के खिलाफ सबसे ज्यादा टी20 मैच जीतने वाली टीमों की इस लिस्ट में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमों को पछड़कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ अभी तक 12-12 मैच जीते हैं।


    T20I में भारत के खिलाफ सबसे ज्यादा जीत

    13 – साउथ अफ्रीका (33 मैच)*
    12 – ऑस्ट्रेलिया (37 मैच)
    12 – इंग्लैंड (29 मैच)
    10 – न्यूजीलैंड (25 मैच)
    10 – वेस्टइंडीज (30 मैच)


    5 ऐसे कप्तान जिनकी अगुवाई में भारत नहीं हारा एक भी T20I मैच, सहवाग भी लिस्ट में

    बात मैच की करें तो, सूर्यकुमार यादव ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया था। उनके इस फैसले को क्विंटन डी कॉक ने पहले 6 ओवर में ही गलत साबित कर दिया था, जब साउथ अफ्रीका ने 1 विकेट के नुकसान पर 53 रन बोर्ड पर लगा दिए थे। डी कॉक 46 गेंदों पर 5 चौकों और 7 गगनचुंबी छक्कों के साथ 90 रनों की पारी खेल एक छोर से तबाही मचाते रहे, वहीं दूसरे छोर पर एडन मारक्रम (29), डोनोवन फरेरा (30) और डेविड मिलर (20) ने आकर छोटी मगर शानदार पारियां खेल उनका साथ दिया। साउथ अफ्रीका निर्धारित 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 213 रन बोर्ड पर लगाने में कामयाब रहा।

    214 के टारगेट का पीछा करने उतरी टीम इंडिया की शुरुआत बेहद खराब रही। शुभमन गिल पहले ही ओवर में गोल्डन डक पर आउट हुए वहीं अभिषेक शर्मा भी उनके पीछे-पीछे 8 गेंदों पर 17 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। वहीं कप्तान सूर्यकुमार यादव ने भी एक बार फिर निराश किया। पावरप्ले खत्म होने के बाद भारत का स्कोर 3 विकेट के नुकसान पर 51 रन था। नंबर-5 पर आए तिलक वर्मा ने जरूर एक छोर को संभालते हुए 34 गेंदों पर 2 चौकों और 5 छक्कों की मदद से 62 रनों की पारी खेली, मगर उन्हें दूसरे छोर से किसी का साथ नहीं मिला। इस बार हार्दिक पांड्या भी अपना जलवा बिखेरने में नाकामयाब रहे। ओटनील बार्टमैन ने 4 विकेट के साथ साउथ अफ्रीका के स्टार बॉलर रहे। भारतीय टीम 19.1 ओवर में 162 के स्कोर पर सिमट गई।

  • भारत में 1.5 लाख करोड़ का निवेश करेगा माइक्रोसॉफ्ट, सत्य नडेला ने किया ऐलान

    भारत में 1.5 लाख करोड़ का निवेश करेगा माइक्रोसॉफ्ट, सत्य नडेला ने किया ऐलान


    नई दिल्ली।
    माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के सीईओ सत्य नडेला (CEO Satya Nadella) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के साथ अपनी मुलाकात के बाद भारत (India) के लिए बड़ा ऐलान किया है। सत्य नडेला ने कहा है कि टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट भारत में 1.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश करने जा रही है, जो एशिया में कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। सत्य नडेला के इस ऐलान से भारत के ‘AI ड्रीम’ को रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

    सत्य नडेला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इस निवेश को लेकर जानकारी साझा की है। साथ ही उन्होंने PM मोदी के साथ अपनी एक तस्वीर भी साझा की। सत्य नडेला ने लिखा, “भारत में AI के अवसरों पर प्रेरणादायक बातचीत के लिएधन्यवाद, PM नरेंद्र मोदी जी। देश की महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट 17.5 बिलियन डॉलर का निवेश करने जा रहा है।”

    सत्य नडेला ने बताया है कि यह कंपनी का एशिया में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। उन्होंने लिखा, “यह एशिया में हमारा अब तक का सबसे बड़ा निवेश है, जिससे भारत के AI फर्स्ट फ्यूचर के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा, कौशल और क्षमताओं को विकसित करने में मदद मिल सके।”

    वहीं माइक्रोसॉफ्ट ने एक प्रेस रिलीज जारी कर कहा है कि भारत में माइक्रोसॉफ्ट का निवेश तीन स्तंभों पर केंद्रित है, जो प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप है। बयान के मुताबिक, “माइक्रोसॉफ्ट और साथ मिलकर आने वाले दशक में नए बेंचमार्क स्थापित करने और देश को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से AI पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर ले जाने के लिए तैयार हैं। हम एक ऐसे भविष्य को आकार दे रहे हैं जो ज्यादा न्यायसंगत है।” बयान में आगे कहा गया है, “भारत में माइक्रोसॉफ्ट का निवेश तीन स्तंभों, स्केल, स्किल और संप्रभुता, पर केंद्रित है, जो प्रधानमंत्री केविजन के अनुरूप है।”

  • सरकार का 2030 लक्ष्य: सड़क दुर्घटनाओं में मौतें और चोटें 50% तक घटाना

    सरकार का 2030 लक्ष्य: सड़क दुर्घटनाओं में मौतें और चोटें 50% तक घटाना

    नई दिल्ली। भारत में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या 2024 में 2.3 प्रतिशत बढ़कर 1.77 लाख से अधिक हो गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश में प्रतिदिन औसतन 485 लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा रहे हैं। यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

    गडकरी ने कहा कि फरवरी 2020 में सड़क सुरक्षा पर आयोजित तीसरे वैश्विक मंत्री स्तरीय सम्मेलन में ‘स्टॉकहोम घोषणापत्र’ अपनाया गया था। इसके तहत 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और चोटों को 50 प्रतिशत तक कम करने का वैश्विक लक्ष्य तय किया गया है।

    मंत्री ने बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 2024 में देश में सभी प्रकार की सड़कों पर दुर्घटनाओं में मरने वालों की कुल संख्या 1,77,177 थी। इसमें ईडीएआर पोर्टल से प्राप्त पश्चिम बंगाल का डेटा भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस द्वारा कुल 4,80,583 सड़क हादसों की रिपोर्ट दर्ज की गई थी, जिसमें 1,72,890 लोगों की मौत हुई और 4,62,825 लोग घायल हुए।

    सड़क दुर्घटनाओं में भारत की स्थिति वैश्विक स्तर पर चिंताजनक बनी हुई है। ‘वर्ल्ड रोड स्टेटिस्टिक्स 2024’ के अनुसार, चीन में प्रति लाख आबादी सड़क दुर्घटनाओं में मौत की दर 4.3 है, अमेरिका में यह 12.76 है, जबकि भारत में यह आंकड़ा 11.89 है। यानी भारत का दर अमेरिका के बराबर करीब है और चीन से कई गुना अधिक।

    सड़क सुरक्षा सुधार के लिए सरकार ने 4-‘ई’ रणनीति अपनाई है। इसका आधार चार स्तंभ हैं: एजुकेशन (शिक्षा), इंजीनियरिंग (सड़क और वाहन दोनों की गुणवत्ता), एनफोर्समेंट (कानून का प्रवर्तन) और इमरजेंसी केयर (आपातकालीन उपचार)। इस बहुआयामी रणनीति के तहत सड़क सुरक्षा के लिए कई पहलें की गई हैं।

    शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने awareness कार्यक्रम और सड़क सुरक्षा पर जागरूकता अभियान चलाए हैं, ताकि लोग यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाएं। इंजीनियरिंग के तहत सड़कों और वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नए मानक तय किए गए हैं। एनफोर्समेंट के क्षेत्र में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है, और इमरजेंसी केयर के तहत दुर्घटना के तुरंत बाद प्राथमिक उपचार और अस्पताल तक पहुँचाने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

    मंत्री ने बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस विभागों के सहयोग से सड़क सुरक्षा को लेकर निगरानी और आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। इससे यह पहचानने में मदद मिलती है कि किन सड़कों और क्षेत्रों में सबसे अधिक हादसे हो रहे हैं और उन्हें सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

    सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार की यह पहल समय की मांग है, क्योंकि बढ़ती आबादी और वाहन संख्या के कारण सड़क हादसों में लगातार वृद्धि हो रही है। 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में मौतों और चोटों को आधा करने का लक्ष्य एक महत्वाकांक्षी कदम है। इसके सफल होने के लिए जनता, सरकार और सड़क उपयोगकर्ताओं को मिलकर काम करना होगा।

    गडकरी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल कानून या प्रशासन का विषय नहीं है, बल्कि यह समाज की जिम्मेदारी भी है। सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित वाहन और सुरक्षित ड्राइविंग की संस्कृति ही सड़क दुर्घटनाओं की दर को घटा सकती है। सरकार ने इसके लिए व्यापक कार्यक्रम और योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें स्मार्ट रोड प्रोजेक्ट, हाईवे पर CCTV निगरानी, ट्रैफिक नियमों के कड़े प्रवर्तन और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का विस्तार शामिल है।

    सरकारी आंकड़े और वैश्विक तुलना यह दर्शाते हैं कि भारत को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में और भी कदम उठाने की आवश्यकता है। जनता की भागीदारी और सरकारी प्रयासों के समन्वय से ही सड़क हादसों में मौत और चोटों को कम किया जा सकता है।

  • भगोड़े विजय माल्या को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका, कहा- पहले भारत आकर कोर्ट में हाजिर हो

    भगोड़े विजय माल्या को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका, कहा- पहले भारत आकर कोर्ट में हाजिर हो


    नई दिल्‍ली ।
    भारत से करोड़ों रुपए का गबन करके भागने वाले शराब कारोबारी विजय माल्या को बॉम्बे हाई कोर्ट ने झटका दिया है। कोर्ट ने माल्या की तरफ से फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट को दी गई चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस पर तभी कार्यवाही होगी, जब माल्या खुद भारत आकर कोर्ट में पेश होगा।

    मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंकढ़ की खंडपीठ ने मामले को आगे बढ़ाते हुए 23 दिसंबर को फिर से सुनवाई की बात कही। पीठ ने माल्या के वकील से कहा,”पहले अपने मुवक्किल को कोर्ट में पेश कराइए, फिर इस मामले पर सुनवाई की जाएगी। यह बताइए की वह कब तक भारत आएगा।”

    गौरतलब है कि नामी शराब कारोबारी और भारत के अरबपतियों में से एक विजय माल्या साल 2016 में देश छोड़कर भाग गया था। 2015 में ही सीबीआई ने माल्या के खिलाफ सिक्योरिटीज एवं फ्राड सेल के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इसमें माल्या के ऊपर आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात और दुराचार का आरोप लगाया गया था। यह पूरा मामला 900 करोड़ रुपए के कर्ज से जुड़ा हुआ था, जिसे आईडीबीआई बैंक ने विजय माल्या की कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस को दिया था। बाद में, एसबीआई के नेतृत्व में बैंकों के एक समूह ने माल्या के खिलाफ एक और धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवाई।

    इसके बाद शुरू हुई जांच में सामने आया कि माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस का चेयरमैन रहते हुए, लोन लेने के लिए कई फ्रॉड किए हैं। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोप भी शामिल हैं।

    2018 में एफईओ एक्ट के लागू होने के बाद माल्या के खिलाफ इसी कानून के तहत कार्यवाही होनी शुरू हो गई। इसके विरोध में माल्या ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इसकी सुनवाई जारी है। ईडी ने माल्या की इस याचिका के खिलाफ जवाब दाखिल करते हुए कहा था कि माल्या के भारत लौटे बिना उसे किसी भी तरह की सुरक्षा देना सही नहीं है। ईडी ने कहा कि विजय माल्या 2016 में जांच से बचने के लिए देश छोड़कर भाग गए थे। इसके बाद उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया, और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ। नवंबर 2016 में उन्हें “घोषित अपराधी” घोषित किया गया। 2017 और 2018 में विशेष अदालत ने उनके खिलाफ नए वारंट जारी किए, और उन्हें अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया, लेकिन माल्या भारत नहीं लौटे।

    2016 में इन केसों से बचने के लिए ब्रिटेन गए माल्या तब से वहीं भगोड़े के रूप में रह रहे हैं। हालांकि, जब भी उन्हें भारत वापस आने के लिए कहा गया, तब सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए उन्होंने इससे इनकार कर दिया। एक बार उन्होंने भारत आने की इच्छा भी जताई थी, लेकिन उन्होंने गिरफ्तारी से सुरक्षा देने की मांग रखी थी, जिसे ईडी ने खारिज कर दिया था।

  • जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग में तेजी से बढ़ रही भर्ती, मसूद अजहर ने दिए कई खुलासे

    जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग में तेजी से बढ़ रही भर्ती, मसूद अजहर ने दिए कई खुलासे


    नई दिल्ली। बीते मई में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारी नुकसान झेलने वाले आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर ने हाल ही में संगठन की महिला विंग के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मसूद अजहर ने दावा किया है कि संगठन की महिला विंग में अब तक लगभग पांच हजार महिलाएं शामिल हो चुकी हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इन महिलाओं को कथित तौर पर आत्मघाती हमलों के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    पिछले साल अक्टूबर में मसूद अजहर ने जैश की महिला ब्रिगेड की घोषणा की थी, जिसे जमात-उल-मोमिनात नाम दिया गया। इस महिला ब्रिगेड की जिम्मेदारी मसूद अजहर की बहन सईदा संभाल रही हैं। मसूद अजहर ने हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि जमात-उल-मोमिनात का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है और संगठन की रणनीति में इसका अहम स्थान है।

    मसूद अजहर ने बताया कि महिला विंग की गतिविधियों को और व्यवस्थित करने के लिए पाक अधिकृत कश्मीर के विभिन्न जिलों में इसका विस्तार किया जा रहा है। उनका कहना है कि हर जिले में एक महिला प्रमुख, जिसे मुंतजिमा कहा जाएगा, नियुक्त की जाएगी। यह प्रमुख स्थानीय स्तर पर महिला विंग की गतिविधियों की निगरानी करेगी और भर्ती एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों को संचालित करेगी।

    महिला विंग की भर्ती प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए संगठन ने ऑनलाइन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी शुरू किया है। इसे ‘तुफात अल-मुमिनात’ नाम दिया गया है। इस ऑनलाइन कोर्स के तहत महिलाओं को जिहादी विचारधारा और फिदायीन हमलों के लिए मानसिक और शारीरिक प्रशिक्षण दिया जाता है। हर महिला के लिए इस कोर्स की फीस 500 रुपये रखी गई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान में चरमपंथी समूह महिलाओं का अकेले बाहर जाना मंजूर नहीं करते, इसलिए जैश-ए-मोहम्मद अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर महिलाओं की भर्ती और प्रशिक्षण कर रहा है। संगठन का उद्देश्य आईएसआईएस, हमास और लिट्टे जैसी अंतरराष्ट्रीय आतंकी संस्थाओं की तर्ज पर महिला आतंकी ब्रिगेड तैयार करना और उन्हें आत्मघाती हमलों में इस्तेमाल करना है।

    मसूद अजहर के खुलासों से यह स्पष्ट होता है कि जैश-ए-मोहम्मद अपने संगठन को पुनः संगठित करने और महिला आतंकियों के माध्यम से नई रणनीतियों को लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत महिलाओं को सक्रिय रूप से आतंकी गतिविधियों में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि महिला विंग की इस तरह की विस्तार योजना खतरे को और बढ़ा सकती है। महिलाओं के प्रशिक्षण और भर्ती के ऑनलाइन कार्यक्रम से संगठन न केवल अपनी पहुंच को बढ़ा रहा है, बल्कि उन्हें फिदायीन हमलों के लिए तैयार भी कर रहा है। यह कदम आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों के लिए नए खतरे पैदा कर सकता है।

    जैश-ए-मोहम्मद की इस नई रणनीति ने न केवल भारत बल्कि पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियों को इस बात पर विशेष ध्यान देना होगा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिलाएं कैसे आतंकवाद में शामिल हो रही हैं और उनका प्रशिक्षण किस हद तक जा रहा है।

    अंततः, मसूद अजहर द्वारा किए गए खुलासे इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जैश-ए-मोहम्मद अपनी महिला विंग के माध्यम से संगठन की ताकत बढ़ाने और नई रणनीतियों को लागू करने में जुटा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चुनौती पेश कर सकता है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सतर्कता की आवश्यकता है।