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  • टी20 अंतरराष्ट्रीय में राशिद खान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, 200 विकेट लेकर बने दुनिया के नंबर-1 गेंदबाज, अर्शदीप भी शीर्ष 10 में शामिल..

    टी20 अंतरराष्ट्रीय में राशिद खान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, 200 विकेट लेकर बने दुनिया के नंबर-1 गेंदबाज, अर्शदीप भी शीर्ष 10 में शामिल..

    नई दिल्ली । टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बल्लेबाजों के आक्रामक अंदाज और चौके-छक्कों की भरमार के बीच गेंदबाजों ने भी अपनी अलग पहचान बनाई है। इस प्रारूप में लगातार विकेट हासिल करना किसी भी गेंदबाज के लिए बड़ी चुनौती होती है। इसके बावजूद कई खिलाड़ियों ने अपनी सटीक गेंदबाजी, गति और स्पिन के दम पर शानदार रिकॉर्ड कायम किए हैं। टी20 अंतरराष्ट्रीय में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में अफगानिस्तान के राशिद खान पहले स्थान पर हैं। उन्होंने 200 विकेट हासिल करके इतिहास रच दिया है। वहीं भारतीय गेंदबाजों में अर्शदीप सिंह ने सबसे ज्यादा विकेट लेकर शीर्ष स्थान हासिल किया है।

    राशिद खान के नाम ऐतिहासिक उपलब्धि

    अफगानिस्तान के लेग स्पिनर राशिद खान टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 200 विकेट लेने वाले दुनिया के पहले गेंदबाज बन गए हैं। उन्होंने 29 अक्टूबर 2026 को जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले में अपना 200वां विकेट हासिल किया। राशिद ने यह उपलब्धि 120 मैचों में दर्ज की है। उनकी गेंदबाजी में गति, टर्न और गुगली का खास मेल देखने को मिलता है, जिसके कारण बल्लेबाजों के लिए उन्हें समझना आसान नहीं होता।

    सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में इंग्लैंड के आदिल राशिद दूसरे स्थान पर हैं। उन्होंने 153 मैचों में 171 विकेट हासिल किए हैं। इस तरह राशिद खान और आदिल राशिद के बीच 29 विकेट का अंतर है। हांगकांग के एहसान खान और न्यूजीलैंड के ईश सोढ़ी 165-165 विकेट के साथ अगले स्थानों पर हैं।

    टी20 अंतरराष्ट्रीय में सर्वाधिक विकेट लेने वाले टॉप-10 गेंदबाज
    गेंदबाज देश मैच विकेट
    राशिद खान अफगानिस्तान 120 200
    आदिल राशिद इंग्लैंड 153 171
    एहसान खान हांगकांग 119 165
    ईश सोढ़ी न्यूजीलैंड 142 165
    टिम साउदी न्यूजीलैंड 126 164
    वानिंदु हसरंगा श्रीलंका 101 163
    मुस्तफिजुर रहमान बांग्लादेश 130 163
    एडम जम्पा ऑस्ट्रेलिया 118 153
    अर्शदीप सिंह भारत 103 150
    शाकिब अल हसन बांग्लादेश 129 149

    भारतीय गेंदबाजों में अर्शदीप सिंह सबसे आगे

    भारतीय खिलाड़ियों की बात करें तो बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने इस प्रारूप में सबसे ज्यादा विकेट हासिल किए हैं। उन्होंने 31 अक्टूबर 2026 को न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में अपना 150वां विकेट पूरा किया। इस उपलब्धि के साथ वह टी20 अंतरराष्ट्रीय में 150 विकेट लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बन गए। अर्शदीप ने 103 मैचों में यह आंकड़ा हासिल किया है।

    भारत की सूची में दूसरे स्थान पर जसप्रीत बुमराह हैं। उन्होंने 100 मैचों में 126 विकेट लिए हैं। वहीं अक्षर पटेल 116 मैचों में 116 विकेट के साथ तीसरे और हार्दिक पांड्या 138 मैचों में 114 विकेट के साथ चौथे स्थान पर हैं।

    भारत के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय में सर्वाधिक विकेट
    गेंदबाज मैच विकेट
    अर्शदीप सिंह 103 150
    जसप्रीत बुमराह 100 126
    अक्षर पटेल 116 116
    हार्दिक पांड्या 138 114

    लगातार अच्छा प्रदर्शन करना बड़ी चुनौती

    टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में गेंदबाजों के सामने बल्लेबाजों के आक्रामक रवैये से निपटने की चुनौती रहती है। कम ओवरों के इस प्रारूप में बल्लेबाज तेजी से रन बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में गेंदबाजों को अपनी रणनीति और गेंदबाजी में लगातार बदलाव करना पड़ता है। राशिद खान ने लेग स्पिन के दम पर लंबे समय तक अपनी प्रभावशाली मौजूदगी बनाए रखी है। आदिल राशिद और ईश सोढ़ी ने भी निरंतर विकेट हासिल किए हैं।

    तेज गेंदबाजों में टिम साउदी, मुस्तफिजुर रहमान और अर्शदीप सिंह ने अपनी उपयोगिता साबित की है। वहीं भारतीय टीम में जसप्रीत बुमराह का अनुभव और निरंतरता महत्वपूर्ण रही है। अक्षर पटेल और हार्दिक पांड्या जैसे ऑलराउंडर भी गेंदबाजी में टीम को अतिरिक्त विकल्प देते हैं।

    क्या टूट सकता है राशिद खान का रिकॉर्ड?

    राशिद खान के 200 विकेट का आंकड़ा फिलहाल इस प्रारूप में सबसे आगे है। दूसरे स्थान पर मौजूद आदिल राशिद उनसे 29 विकेट पीछे हैं। इस अंतर को कम करने के लिए उन्हें लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा। भारतीय गेंदबाजों में अर्शदीप सिंह ने 150 विकेट पूरे कर अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके करियर में अभी आगे और मुकाबले खेलने के अवसर हैं, जिनमें वह अपने विकेटों की संख्या बढ़ा सकते हैं।

  • सूर्यकुमार यादव को रणजी टीम में भी नहीं मिली जगह, उपलब्धता बताने के बाद चयन से बाहर होने पर उठे बड़े सवाल

    सूर्यकुमार यादव को रणजी टीम में भी नहीं मिली जगह, उपलब्धता बताने के बाद चयन से बाहर होने पर उठे बड़े सवाल


    नई दिल्ली। सूर्यकुमार यादव के क्रिकेट करियर को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। टीम इंडिया से बाहर होने के बाद अब उन्हें मुंबई की रणजी ट्रॉफी टीम में भी जगह नहीं मिली है। खास बात यह है कि मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन की चयन बैठक से पहले सूर्यकुमार यादव से पूछा गया था कि क्या वह रणजी ट्रॉफी का मुकाबला खेलना चाहते हैं। बताया गया कि सूर्या ने इसके लिए अपनी सहमति भी जताई थी। इसके बावजूद जब मुंबई की टीम का ऐलान हुआ तो उनका नाम स्क्वॉड में नहीं था। इस फैसले ने क्रिकेट जगत में नई चर्चा छेड़ दी है।

    मुंबई को रणजी ट्रॉफी 2026-27 सीजन का अपना पहला मुकाबला 11 अक्टूबर से वानखेड़े स्टेडियम में चंडीगढ़ के खिलाफ खेलना है। इस मुकाबले के लिए घोषित टीम की कप्तानी अनुभवी सिद्धेश लाड को सौंपी गई है जबकि युवा बल्लेबाज आयुष म्हात्रे को उपकप्तान बनाया गया है। टीम में यशस्वी जायसवाल मुशीर खान सरफराज खान सुवेद पारकर शम्स मुलानी तनुष कोटियन और तुषार देशपांडे जैसे खिलाड़ी शामिल हैं लेकिन सूर्यकुमार यादव का नाम नदारद है।

    मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के चयन प्रमुख राजेश पवार ने सूर्यकुमार यादव के चयन को लेकर वजह भी बताई है। उनके मुताबिक सूर्या ने पिछले करीब 18 महीनों से कोई रेड बॉल मुकाबला नहीं खेला है। चयनकर्ताओं का मानना है कि उन्हें पहले कुछ मैचों में खेलकर लंबे फॉर्मेट की लय हासिल करनी चाहिए। इसके बाद उन्हें टीम में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि जब चयनकर्ताओं ने खुद सूर्यकुमार से उनकी उपलब्धता को लेकर संपर्क किया था तो फिर उन्हें शुरुआती मुकाबले के लिए टीम में क्यों नहीं चुना गया।

    सूर्यकुमार यादव ने टी20 क्रिकेट में भारतीय टीम के लिए लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन किया है। वह टीम इंडिया की कप्तानी भी कर चुके हैं और टी20 विश्व कप में भारत की सफलता के दौरान उनकी भूमिका काफी अहम रही थी। ऐसे में रणजी टीम से बाहर होना उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं माना जा रहा है। खासकर तब जब वह खुद रेड बॉल क्रिकेट में वापसी की इच्छा जाहिर कर चुके हैं।

    मुंबई की टीम के सामने इस सीजन की शुरुआत में एक और चुनौती भी है। पिछले सीजन में टीम की कप्तानी करने वाले शार्दुल ठाकुर शुरुआती मुकाबलों में उपलब्ध नहीं रहेंगे। ट्रेनिंग के दौरान उनकी दाहिने हाथ की बीच वाली उंगली में मामूली फ्रैक्चर हुआ है। माना जा रहा है कि वह कम से कम शुरुआती दो मैचों से बाहर रह सकते हैं।

    अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सूर्यकुमार यादव रणजी क्रिकेट में वापसी के लिए किस तरह की तैयारी करते हैं और मुंबई के चयनकर्ता उन्हें अगले मुकाबलों में मौका देते हैं या नहीं। फिलहाल उनकी गैरमौजूदगी ने भारतीय क्रिकेट में उनके भविष्य को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है।

  • रोहित शर्मा के खास सेलिब्रेशन का खुला राज बोले कुछ चीजें सिर्फ अपने लिए होती हैं जडेजा को भी नहीं बताया पूरा किस्सा

    रोहित शर्मा के खास सेलिब्रेशन का खुला राज बोले कुछ चीजें सिर्फ अपने लिए होती हैं जडेजा को भी नहीं बताया पूरा किस्सा


    नई दिल्ली। गुवाहाटी में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए मुकाबले में रोहित शर्मा ने बल्ले से शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने वनडे करियर का 35वां शतक पूरा किया। रोहित की इस पारी ने जहां भारतीय टीम के लिए बड़े लक्ष्य का पीछा आसान बनाया वहीं शतक पूरा करने के बाद उनका अनोखा सेलिब्रेशन भी चर्चा का विषय बन गया। रोहित ने शतक पूरा करने के बाद मैदान पर जिस अंदाज में जश्न मनाया उसे देखकर फैंस से लेकर टीम के साथी खिलाड़ी तक यह जानने को उत्सुक नजर आए कि आखिर इस सेलिब्रेशन के पीछे की वजह क्या थी।

    मैच के बाद जब रोहित शर्मा से उनके इस खास जश्न के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसका पूरा राज बताने से इनकार कर दिया। हिटमैन ने साफ किया कि यह सेलिब्रेशन किसी खास व्यक्ति या सार्वजनिक वजह के लिए नहीं था बल्कि उनके लिए था। रोहित ने संकेत दिया कि जिंदगी में कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें इंसान अपने तक ही रखना पसंद करता है। उन्होंने कहा कि वह इस सेलिब्रेशन को अपने लिए रखना चाहते हैं और इसके पीछे की पूरी कहानी साझा नहीं करना चाहते।

    रोहित के इस जवाब ने रहस्य को और बढ़ा दिया। खास बात यह रही कि भारतीय टीम के अनुभवी ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा भी इस सेलिब्रेशन का मतलब जानना चाहते थे। रोहित ने बताया कि जडेजा ने उनसे पूछा था कि आखिर उन्होंने ऐसा जश्न क्यों मनाया। इस पर रोहित ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह ड्रेसिंग रूम में बताएंगे। हालांकि बाद में भी रोहित ने इस खास सेलिब्रेशन की पूरी वजह सार्वजनिक नहीं की।

    इस मुकाबले में जडेजा ने रोहित के लिए एक अलग तरह के सेलिब्रेशन की योजना भी बनाई थी। रोहित के मुताबिक जडेजा चाहते थे कि शतक पूरा करने के बाद वह मैदान पर स्लाइड करें और फिर जंप करते हुए जश्न मनाएं। लेकिन रोहित ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में बताया कि 50 ओवर तक फील्डिंग करने के बाद और फिर करीब 25 से 30 ओवर तक बल्लेबाजी करने के बाद उनके पास स्लाइड और जंप करने जितनी ऊर्जा नहीं बची थी। रोहित का यह अंदाज टीम के माहौल को भी हल्का और मजेदार बनाता नजर आया।

    मैच की बात करें तो वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 405 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। भारत को जीत के लिए 406 रन बनाने थे। इतने बड़े लक्ष्य के सामने भारतीय टीम को मजबूत शुरुआत की जरूरत थी और रोहित शर्मा तथा शुभमन गिल ने जिम्मेदारी संभालते हुए शानदार साझेदारी की। दोनों बल्लेबाजों ने स्कोरबोर्ड के दबाव को खुद पर हावी नहीं होने दिया और गेंद की मेरिट के हिसाब से बल्लेबाजी करने पर ध्यान दिया।

    रोहित ने गिल की बल्लेबाजी की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि गिल पूरी पारी के दौरान नियंत्रण में नजर आए और अंत तक उनका नाबाद रहना शानदार रहा। रोहित ने यह भी बताया कि गर्मी में लंबे समय तक फील्डिंग करने के बाद इतनी बड़ी रनचेज में बल्लेबाजी करना आसान नहीं था। ऐसे समय में उनके अनुभव ने अहम भूमिका निभाई।

    रोहित और गिल की 250 से ज्यादा रन की बड़ी साझेदारी ने भारत की जीत की नींव मजबूत कर दी। दोनों बल्लेबाजों ने बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए धैर्य और आक्रामकता का शानदार संतुलन दिखाया। रोहित का 35वां वनडे शतक इस मुकाबले की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। वहीं उनके रहस्यमयी सेलिब्रेशन ने इस पारी को और भी खास बना दिया।

  • अरुण जेटली स्टेडियम में ऐतिहासिक पल भारत अफगानिस्तान मुकाबले से पहले गूंजा वंदे मातरम

    अरुण जेटली स्टेडियम में ऐतिहासिक पल भारत अफगानिस्तान मुकाबले से पहले गूंजा वंदे मातरम


    नई दिल्ली। भारत और अफगानिस्तान के बीच नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जा रहे पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले से पहले एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला। क्रिकेट के मैदान पर पहली बार राष्ट्रीय गान जन गण मन से पहले राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का वादन किया गया। इस दौरान स्टेडियम में मौजूद खिलाड़ियों के साथ दर्शकों ने भी सम्मान के साथ खड़े होकर राष्ट्रीय गीत को सुना। यह मौका भारतीय क्रिकेट और देश के खेल इतिहास में खास माना जा रहा है।

    मुकाबला शुरू होने से पहले आमतौर पर राष्ट्रीय गान बजाने की परंपरा रही है। हालांकि इस बार कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम से हुई और उसके बाद राष्ट्रीय गान जन गण मन बजाया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन ने स्टेडियम के माहौल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। खिलाड़ियों और दर्शकों के बीच भी इस दौरान खास उत्साह नजर आया।

    बताया गया कि यह आयोजन राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रमों का हिस्सा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से इससे संबंधित दिशा निर्देश जारी किए गए थे। इन्हीं दिशा निर्देशों के तहत अरुण जेटली स्टेडियम में वंदे मातरम के सभी छह छंद प्रस्तुत किए गए। राष्ट्रीय गीत के पूरे संस्करण को प्रस्तुत करने में करीब 3 मिनट 10 सेकेंड का समय निर्धारित किया गया था। इसके बाद राष्ट्रीय गान के लिए करीब 52 सेकेंड का समय रखा गया। इस तरह पूरे कार्यक्रम की अवधि लगभग 4 मिनट 2 सेकेंड रही।

    नए दिशा निर्देशों के अनुसार राष्ट्रीय गीत के वादन के दौरान वहां मौजूद लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़े रहने के लिए कहा गया है। राष्ट्रीय गीत के संपूर्ण संस्करण के इस्तेमाल को कुछ औपचारिक सरकारी कार्यक्रमों और विशेष अवसरों के लिए मंजूरी दी गई है। इसी क्रम में भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले गए इस अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबले से पहले भी इसका आयोजन किया गया।

    वंदे मातरम का भारतीय इतिहास में विशेष महत्व है। इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने रचा था। वर्ष 1937 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इसके शुरुआती दो छंदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया था। इसके बाद वर्ष 1950 में संविधान सभा ने वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता दी।

    क्रिकेट मुकाबले की बात करें तो भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम में संजू सैमसन को विकेटकीपर की जिम्मेदारी दी गई जबकि अभिषेक शर्मा और ईशान किशन टीम का हिस्सा रहे। तिलक वर्मा नीतीश कुमार रेड्डी शिवम दुबे अक्षर पटेल अर्शदीप सिंह जसप्रीत बुमराह और वरुण चक्रवर्ती भी प्लेइंग इलेवन में शामिल रहे। हालांकि युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को इस मुकाबले में खेलने का मौका नहीं मिला।

    इस ऐतिहासिक शुरुआत के बाद अब क्रिकेट प्रेमियों की नजर इस बात पर भी रहेगी कि आने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट आयोजनों में वंदे मातरम को लेकर क्या परंपरा आगे बढ़ती है। भारत अफगानिस्तान मुकाबले से पहले हुआ यह आयोजन निश्चित तौर पर क्रिकेट के मैदान पर यादगार पलों में शामिल हो गया है।

  • टीम इंडिया के खराब प्रदर्शन पर BCCI का मंथन! कप्तान और कोच पहुंचे बैठक में लेकिन चीफ सेलेक्टर अगरकर नहीं आए

    टीम इंडिया के खराब प्रदर्शन पर BCCI का मंथन! कप्तान और कोच पहुंचे बैठक में लेकिन चीफ सेलेक्टर अगरकर नहीं आए


    नई दिल्ली । टीम इंडिया के हालिया विदेशी दौरों पर खराब प्रदर्शन के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने बड़ी रिव्यू मीटिंग की लेकिन इस अहम बैठक से चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए। मुंबई स्थित BCCI मुख्यालय में हुई इस बैठक में टीम इंडिया के आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे की समीक्षा की गई। भारतीय टीम को दोनों विदेशी दौरों पर लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट में उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली जिसके बाद बोर्ड ने प्रदर्शन से लेकर खिलाड़ियों की फिटनेस और लगातार सामने आ रही चोटों तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।

    बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा अजीत अगरकर के शामिल नहीं होने को लेकर रही। अगरकर का मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट सितंबर के अंत में समाप्त होने वाला है और ऐसे में यह माना जा रहा था कि बोर्ड की इस बैठक में उनके भविष्य और कॉन्ट्रैक्ट एक्सटेंशन को लेकर भी कोई बड़ा फैसला हो सकता है। हालांकि BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने साफ कर दिया कि इस रिव्यू मीटिंग में अगरकर के कॉन्ट्रैक्ट को आगे बढ़ाने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।

    सैकिया ने चीफ सेलेक्टर की गैरमौजूदगी की वजह भी बताई। उनके मुताबिक बैठक काफी कम समय के नोटिस पर बुलाई गई थी और उस समय अजीत अगरकर मुंबई से बाहर थे। बताया गया कि वह ऐसी जगह मौजूद थे जहां से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी बैठक में शामिल होना संभव नहीं हो सका। अगरकर की अनुपस्थिति इसलिए भी सुर्खियों में रही क्योंकि टीम के खराब प्रदर्शन की समीक्षा करने वाली बैठक में चयन समिति के प्रमुख का मौजूद न होना क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन गया।

    दरअसल भारतीय टीम के लिए हाल के दोनों विदेशी दौरे निराशाजनक रहे। भारत ने आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की T20I सीरीज खेली जिसमें टीम को 0-2 से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर भी टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। पांच मैचों की T20I सीरीज में भारत को 1-4 से हार मिली जबकि तीन मैचों की ODI सीरीज में भी टीम को 1-2 से शिकस्त झेलनी पड़ी। लगातार विदेशी दौरों पर सीमित ओवरों के क्रिकेट में खराब नतीजों के बाद BCCI ने टीम के प्रदर्शन का गहराई से विश्लेषण करने का फैसला किया।

    मुंबई में हुई इस अहम बैठक में भारतीय क्रिकेट के कई बड़े नाम मौजूद रहे। टेस्ट और ODI कप्तान शुभमन गिल T20I कप्तान श्रेयस अय्यर हेड कोच गौतम गंभीर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के क्रिकेट डायरेक्टर वीवीएस लक्ष्मण और BCCI के कई अधिकारी बैठक में शामिल हुए। बैठक के दौरान सिर्फ टीम के प्रदर्शन पर ही नहीं बल्कि खिलाड़ियों की फिटनेस और लगातार हो रही चोटों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। आने वाले मुकाबलों को देखते हुए टीम मैनेजमेंट के सामने खिलाड़ियों को फिट रखने और बेहतर संयोजन तैयार करने की चुनौती भी अहम मानी जा रही है।

    अजीत अगरकर के कार्यकाल पर नजर डालें तो उनके नेतृत्व वाली चयन समिति के दौर में भारतीय टीम ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत ने 2023 ODI वर्ल्ड कप का फाइनल खेला और इसके बाद 2024 तथा 2026 में लगातार दो T20 वर्ल्ड कप जीतने में सफलता हासिल की। हालांकि इसी दौर में भारतीय क्रिकेट में कई बड़े बदलाव भी देखने को मिले और विराट कोहली तथा रोहित शर्मा ने टेस्ट और T20I क्रिकेट से संन्यास लिया जबकि दिग्गज ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया।

    अब सबकी नजर सितंबर के अंत पर टिकी है जब अजीत अगरकर का मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट समाप्त होगा। फिलहाल BCCI ने उनके एक्सटेंशन को लेकर किसी चर्चा से इनकार किया है लेकिन आने वाले दिनों में चयन समिति और भारतीय टीम के भविष्य को लेकर बोर्ड का फैसला क्रिकेट जगत के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।

  • जब सूर्या का क्रिकेट से उठ गया था भरोसा! पत्नी ने याद दिलाई 5 साल की मेहनत, ऐसे लौटा मैदान में जोश

    जब सूर्या का क्रिकेट से उठ गया था भरोसा! पत्नी ने याद दिलाई 5 साल की मेहनत, ऐसे लौटा मैदान में जोश


    नई दिल्ली। सूर्यकुमार यादव की क्रिकेट कहानी में उतार चढ़ाव हमेशा देखने को मिले हैं लेकिन हाल ही में सामने आया उनका एक खुलासा फैन्स को हैरान करने वाला है। भारत को 2026 का टी20 वर्ल्ड कप जिताने वाले सूर्यकुमार यादव एक समय क्रिकेट से संन्यास लेने के बारे में सोचने लगे थे। टीम से बाहर होने और कप्तानी गंवाने के बाद वह इस कदर निराश हो गए थे कि उन्हें अपने क्रिकेट करियर का आगे का रास्ता भी साफ नजर नहीं आ रहा था। हालांकि इस मुश्किल दौर में उनकी पत्नी देविशा शेट्टी ने उनका साथ दिया और उन्हें उनके पुराने जुनून की याद दिलाकर दोबारा मैदान पर लौटने के लिए प्रेरित किया।

    आकाश चोपड़ा को दिए इंटरव्यू में सूर्यकुमार यादव ने बताया कि टीम से बाहर होने के बाद करीब 40 से 50 दिनों तक वह घर पर बिल्कुल खाली बैठे रहे। इस दौरान उनके मन में लगातार यह सवाल चल रहा था कि अब आगे क्या करना है और क्या उन्हें क्रिकेट खेलना भी जारी रखना चाहिए। उनके मुताबिक भविष्य को लेकर तस्वीर पूरी तरह धुंधली हो गई थी। एक ऐसे खिलाड़ी के लिए यह दौर बेहद मुश्किल था जिसने पिछले कुछ वर्षों में भारतीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई थी।

    सूर्यकुमार के लिए स्थिति उस समय और कठिन हो गई जब उन्हें कप्तानी से हटाकर टी20 टीम से भी बाहर कर दिया गया। चयनकर्ताओं ने उनकी जगह श्रेयस अय्यर को टी20 टीम की कप्तानी सौंपी। लगातार बड़े मुकाम हासिल करने के बाद अचानक टीम से बाहर होना सूर्या के लिए बड़ा झटका था। इसी दौरान उनके मन में संन्यास लेने का विचार आया।

    लेकिन इस कठिन समय में पत्नी देविशा उनकी सबसे बड़ी ताकत बनीं। देविशा ने उन्हें पीछे मुड़कर अपने उस दौर को याद करने के लिए कहा जब वह 13 से 15 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर रहे थे। उन्होंने सूर्या से सवाल किया कि आखिर उन्होंने तब बल्ला क्यों उठाया था। देविशा ने उन्हें उनके अंदर मौजूद क्रिकेट के जुनून और खेल के प्रति पागलपन की याद दिलाई।

    उन्होंने सूर्यकुमार को पिछले पांच साल की उनकी उपलब्धियां भी याद दिलाईं। पांच वर्ल्ड कप खेलना, दो बार आईसीसी टी20 प्लेयर ऑफ द ईयर का पुरस्कार जीतना, दुनिया की नंबर एक टी20 रैंकिंग हासिल करना, 2024 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में शानदार कैच लेना और 2026 में कप्तान के तौर पर वर्ल्ड कप ट्रॉफी उठाना उनकी बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। देविशा ने उन्हें समझाया कि जिस मुकाम तक पहुंचने में कई खिलाड़ियों को 20 से 25 साल लग जाते हैं उसे सूर्या ने महज पांच साल में हासिल किया है।

    पत्नी की बातों का सूर्यकुमार पर गहरा असर हुआ और उन्होंने धीरे धीरे क्रिकेट में वापसी की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने दोबारा जिम जाना शुरू किया दोस्तों के साथ समय बिताया और टेनिस तथा रबर बॉल क्रिकेट खेलकर अपने पुराने जुनून को फिर से महसूस किया। सूर्या के मुताबिक पिछले दो तीन हफ्तों में उनके अंदर वह पुराना जोश दोबारा लौट आया है।

    अब सूर्यकुमार के लिए क्रिकेट सिर्फ उनका करियर नहीं बल्कि उनकी बेटी के लिए भी एक प्रेरणा बन गया है। उनका कहना है कि जब वह अपनी बेटी को देखते हैं तो उन्हें महसूस होता है कि अब उन्हें उसके लिए खेलना है। 35 साल के सूर्यकुमार का मानना है कि उनके अंदर क्रिकेट के लिए प्यार फोकस और अनुशासन वापस आ चुका है। वह अपने बचे हुए तीन से चार साल यानी करीब 38 से 39 साल की उम्र तक उसी जुनून और पागलपन के साथ क्रिकेट खेलना चाहते हैं।

  • महज 15 साल की उम्र में कप्तानी का मौका ईशान किशन के चोटिल होते ही वैभव सूर्यवंशी बने ईस्ट जोन के कार्यवाहक कप्तान

    महज 15 साल की उम्र में कप्तानी का मौका ईशान किशन के चोटिल होते ही वैभव सूर्यवंशी बने ईस्ट जोन के कार्यवाहक कप्तान


    नई दिल्ली। दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के लिए रविवार का दिन बेहद खास रहा। ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के बीच खेले जा रहे मुकाबले में सूर्यवंशी को पहली बार सीनियर फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कप्तानी की जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला। ईस्ट जोन के नियमित कप्तान ईशान किशन चोटिल होने के कारण मैदान से बाहर चले गए जिसके बाद टीम के उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी ने कुछ समय के लिए कार्यवाहक कप्तान की भूमिका निभाई। इतनी कम उम्र में सीनियर क्रिकेट में कप्तानी की जिम्मेदारी मिलना सूर्यवंशी के लगातार बढ़ते कद को दर्शाता है।

    दरअसल सेंट्रल जोन की बल्लेबाजी के दौरान विकेटकीपिंग कर रहे ईशान किशन के दाहिने अंगूठे में चोट लग गई। चोट के कारण उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा। इसके बाद विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी कुमार कुशाग्र ने संभाली जबकि ईस्ट जोन के उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी को टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी दी गई। यह सूर्यवंशी का सीनियर फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कप्तानी का पहला अनुभव रहा। इससे पहले वह अपनी बल्लेबाजी और कभी कभी गेंदबाजी को लेकर सुर्खियां बटोर चुके हैं।

    दलीप ट्रॉफी में सूर्यवंशी का प्रदर्शन पहले से ही चर्चा में रहा है। नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में उनके बल्ले से केवल आठ रन निकले थे लेकिन गेंदबाजी में उन्होंने शानदार योगदान दिया। उन्होंने महज 11 रन देकर दो विकेट हासिल किए थे। इस प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि सूर्यवंशी केवल बल्लेबाजी तक सीमित नहीं हैं बल्कि जरूरत पड़ने पर गेंद से भी टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

    सूर्यवंशी ने खुद अपनी गेंदबाजी को लेकर दिलचस्प बात साझा की थी। उनका कहना था कि बल्लेबाजों को अक्सर गेंदबाजी करने में मजा आता है और गेंदबाजों को बल्लेबाजी करने में। ईस्ट जोन के पिछले मुकाबले में जब विरोधी टीम के विकेट नहीं गिर रहे थे तब उन्हें दो तीन ओवर गेंदबाजी करने के लिए कहा गया था। सूर्यवंशी ने खुद को विकेट लेने वाला खिलाड़ी बताते हुए मजाकिया अंदाज में कहा था कि ईशान किशन को शायद पता नहीं था कि वह विकेट लेने वाले खिलाड़ी हैं।

    ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के सेमीफाइनल में टॉस जीतकर ईस्ट जोन ने रजत पाटीदार की कप्तानी वाली सेंट्रल जोन टीम को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। सेंट्रल जोन की टीम में सारांश जैन की भी वापसी हुई है। सारांश ने इसी महीने श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में भारत के लिए टेस्ट डेब्यू किया था।

    पहले दिन के शुरुआती सत्र में ईस्ट जोन के गेंदबाजों ने सेंट्रल जोन पर दबाव बनाए रखा। 32 ओवर के बाद सेंट्रल जोन का स्कोर 81 रन पर तीन विकेट था। अभिजीत के सरकार और मुकेश कुमार ने शानदार गेंदबाजी करते हुए विकेट हासिल किए। अभिजीत ने पहले घंटे में अमन मोखाडे और कुणाल चंदेला को पवेलियन भेजा जबकि भारतीय तेज गेंदबाज मुकेश कुमार ने दूसरे घंटे के अंत में कप्तान रजत पाटीदार को 12 रन के निजी स्कोर पर क्लीन बोल्ड कर दिया।

    वैभव सूर्यवंशी के लिए यह जिम्मेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह बेहद कम उम्र में लगातार बड़े मंच पर अपनी पहचान बना रहे हैं। आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से चर्चा में आए सूर्यवंशी अब कप्तानी और गेंदबाजी जैसे पहलुओं में भी अनुभव हासिल कर रहे हैं। ईशान किशन की चोट से पैदा हुई स्थिति ने उन्हें अचानक नेतृत्व की भूमिका में ला खड़ा किया लेकिन यह मौका उनके क्रिकेटिंग सफर में एक अहम पड़ाव साबित हो सकता है। आने वाले समय में उनके खेल के साथ नेतृत्व क्षमता पर भी सभी की नजर रहेगी।

  • 60 विकेट लेकर जम्मू-कश्मीर को बनाया रणजी चैंपियन अब इंग्लैंड में आजमाएंगे किस्मत! आकिब नबी पर टीम इंडिया की नजर

    60 विकेट लेकर जम्मू-कश्मीर को बनाया रणजी चैंपियन अब इंग्लैंड में आजमाएंगे किस्मत! आकिब नबी पर टीम इंडिया की नजर


    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी के लिए भारतीय क्रिकेट में एक और बड़ा मौका दस्तक दे रहा है। रणजी ट्रॉफी के पिछले सीजन में अपनी घातक गेंदबाजी से तहलका मचाने वाले नबी अब इंग्लैंड की काउंटी चैंपियनशिप में सरे की टीम के लिए खेलते नजर आ सकते हैं। उन्हें मौजूदा डिवीजन वन सीजन के कुछ मुकाबलों के लिए सरे के साथ जोड़े जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि वह 2 सितंबर से द ओवल में यॉर्कशायर के खिलाफ होने वाले मुकाबले के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। इसके बाद ससेक्स और ग्लैमॉर्गन के खिलाफ होने वाले मुकाबलों में भी उनके खेलने की संभावना जताई जा रही है।

    आकिब नबी ने रणजी ट्रॉफी के पिछले सीजन में अपनी गेंदबाजी से जबरदस्त प्रभाव छोड़ा था। उन्होंने महज 12.56 की औसत से 60 विकेट हासिल किए और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। उनकी शानदार गेंदबाजी के दम पर जम्मू-कश्मीर ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया। घरेलू क्रिकेट में इस प्रदर्शन के बाद नबी को भारतीय टीम के भविष्य के तेज गेंदबाजों में एक महत्वपूर्ण नाम माना जा रहा है।

    इंग्लैंड का संभावित काउंटी कार्यकाल नबी के लिए सिर्फ विदेशी क्रिकेट खेलने का मौका नहीं होगा बल्कि भारतीय टीम के नजरिए से भी इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टीम मैनेजमेंट और राष्ट्रीय चयनकर्ता न्यूजीलैंड के आगामी टेस्ट दौरे को ध्यान में रखते हुए नबी को तेज गेंदबाजों के अनुकूल परिस्थितियों में खेलने का अनुभव दिलाना चाहते हैं। इंग्लैंड में रेड कूकाबुरा गेंद से गेंदबाजी करते हुए नबी की स्विंग और परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाने की क्षमता को परखा जा सकता है। न्यूजीलैंड में टेस्ट क्रिकेट के दौरान भी तेज गेंदबाजों को अनुकूल परिस्थितियां मिलने की उम्मीद रहती है ऐसे में यह अनुभव उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

    नबी श्रीलंका के खिलाफ भारत की हालिया टेस्ट सीरीज का भी हिस्सा रहे थे। भारत ने यह सीरीज 1-0 से अपने नाम की लेकिन नबी को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली थी। अब इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेलने का मौका उन्हें विदेशी परिस्थितियों में खुद को साबित करने का अवसर देगा। खास बात यह है कि इंग्लैंड में कई भारतीय खिलाड़ी पहले से काउंटी क्रिकेट में सक्रिय हैं जिससे नबी को वहां के माहौल और परिस्थितियों को समझने में भी मदद मिल सकती है।

    इंग्लैंड में भारतीय खिलाड़ियों की मौजूदगी की बात करें तो बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार वार्विकशायर के साथ फिर जुड़ने वाले हैं। कुलदीप यादव भी यॉर्कशायर के लिए काउंटी क्रिकेट खेलने लौटेंगे। सरे की टीम में भारतीय लेग स्पिनर राहुल चाहर और अनकैप्ड बल्लेबाजी ऑलराउंडर महिपाल लोमरोर भी शामिल हैं। ऐसे में नबी को विदेशी परिस्थितियों में भारतीय खिलाड़ियों के साथ खेलने और अनुभव साझा करने का मौका मिल सकता है।

    काउंटी चैंपियनशिप में अपना संभावित कार्यकाल पूरा करने के बाद नबी के इंडिया ए टीम से जुड़ने की उम्मीद है। 22 सितंबर से पुडुचेरी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले दो रेड बॉल मुकाबलों में उनके खेलने की संभावना है। इसके बाद जम्मू-कश्मीर की टीम के साथ उनके जुड़ने को लेकर भी स्थिति पर नजर रहेगी क्योंकि 1 से 5 अक्टूबर तक श्रीनगर में रेस्ट ऑफ इंडिया के खिलाफ ईरानी कप मुकाबला होना है।

    इस बीच भारतीय तेज गेंदबाजी के अनुभवी चेहरे मोहम्मद शमी और मुकेश कुमार के भी काउंटी चैंपियनशिप के बाद के चरणों में खेलने की संभावना जताई गई है। दोनों फिलहाल दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में ईस्ट जोन की ओर से खेल रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में भारतीय तेज गेंदबाजों के लिए विदेशी परिस्थितियों में खुद को परखने के कई अहम मौके सामने आ सकते हैं। आकिब नबी के लिए सरे का संभावित काउंटी कार्यकाल इसी दिशा में उनके करियर का बड़ा पड़ाव साबित हो सकता है।

  • 154.5 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मचाई सनसनी 4 विश्व कप खेले 315 विकेट झटके ऐसी रही मैसूर एक्सप्रेस की क्रिकेट यात्रा

    154.5 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मचाई सनसनी 4 विश्व कप खेले 315 विकेट झटके ऐसी रही मैसूर एक्सप्रेस की क्रिकेट यात्रा


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में जब तेज गेंदबाजों की बात होती है तो जवागल श्रीनाथ का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। मैसूर एक्सप्रेस के नाम से मशहूर श्रीनाथ ने अपनी गति स्विंग और गेंद को अलग अलग अंदाज में इस्तेमाल करने की क्षमता से लंबे समय तक बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें खड़ी कीं। 31 अगस्त 1969 को कर्नाटक के मैसूर में जन्मे दाएं हाथ के तेज गेंदबाज श्रीनाथ ने उस दौर में भारतीय तेज गेंदबाजी को नई पहचान दी जब टीम में तेज गति के गेंदबाजों की संख्या सीमित हुआ करती थी। कपिल देव के बाद श्रीनाथ भारतीय तेज गेंदबाजी का सबसे प्रमुख चेहरा बने और कपिल के संन्यास के बाद उन्होंने भारतीय आक्रमण की जिम्मेदारी संभाली।

    श्रीनाथ ने 1991 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। शुरुआती दौर में उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी तेज गति थी लेकिन करियर के दौरान उन्होंने अपनी गेंदबाजी में स्विंग और धीमी गेंद जैसे हथियार भी जोड़े। 1997 में चोट ने उनके करियर को बड़ा झटका दिया और उन्हें लगभग पूरा साल क्रिकेट से बाहर रहना पड़ा। उस समय उनकी वापसी को लेकर सवाल उठने लगे थे लेकिन श्रीनाथ ने हार नहीं मानी। वापसी के बाद उन्होंने अपनी गेंदबाजी में बदलाव किया और 1998 उनके करियर के सबसे शानदार वर्षों में शामिल हो गया। चोट के बाद उनकी गति कुछ प्रभावित हुई लेकिन विकेट लेने की क्षमता और गेंदबाजी की समझ और मजबूत होती गई।

    1999 वनडे विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ श्रीनाथ ने 154.5 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंककर अपनी गति का जबरदस्त प्रदर्शन किया। लंबे समय तक यह वनडे क्रिकेट में किसी भारतीय गेंदबाज द्वारा फेंकी गई सबसे तेज गेंद का रिकॉर्ड रहा। बाद में 2023 में उमरान मलिक ने श्रीलंका के खिलाफ 156 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डालकर यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इसके बावजूद श्रीनाथ की तेज गेंदबाजी भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक खास मुकाम रखती है।

    श्रीनाथ ने भारत की ओर से चार वनडे विश्व कप खेले। 1992 1996 1999 और 2003 में वह भारतीय टीम का हिस्सा रहे। 2003 विश्व कप से पहले उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया था लेकिन तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली ने उन्हें वापसी के लिए तैयार किया। श्रीनाथ ने भी कप्तान के भरोसे को सही साबित किया और 2003 विश्व कप में शानदार गेंदबाजी करते हुए 11 मैचों में 16 विकेट हासिल किए। इस प्रदर्शन ने भारत को फाइनल तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका निभाई।

    2002 में भी श्रीनाथ उस भारतीय टीम का हिस्सा थे जिसने श्रीलंका के साथ संयुक्त रूप से आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीता था। इसके बाद 2003 विश्व कप के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। उनके आंकड़े उनकी महानता की गवाही देते हैं। श्रीनाथ ने भारत के लिए 229 वनडे मैचों में 315 विकेट हासिल किए और वह वनडे क्रिकेट में भारत के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज हैं। कुल भारतीय गेंदबाजों में केवल अनिल कुंबले उनसे आगे हैं। वह 300 से ज्यादा वनडे विकेट लेने वाले भारत के एकमात्र तेज गेंदबाज भी रहे हैं।

    टेस्ट क्रिकेट में भी श्रीनाथ का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने 67 टेस्ट मैचों में 236 विकेट अपने नाम किए। करीब 12 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में उन्होंने भारतीय तेज गेंदबाजी को लगातार मजबूती दी और कई मुश्किल विदेशी दौरों पर टीम की गेंदबाजी की अगुआई की।

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद श्रीनाथ ने कमेंट्री या कोचिंग को अपना मुख्य पेशा बनाने के बजाय मैच रेफरी के रूप में नई पारी शुरू की। वह आईसीसी के प्रतिष्ठित मैच रेफरी के रूप में लंबे समय से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। क्रिकेट में उनके योगदान के लिए 1999 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। तेज गति स्विंग अनुभव और लगातार प्रदर्शन की बदौलत जवागल श्रीनाथ भारतीय क्रिकेट में उस दौर के प्रतीक बन गए जब एक अकेला तेज गेंदबाज पूरी गेंदबाजी इकाई की पहचान बन सकता था।

  • विदेशी पिचों पर सचिन या कोहली कौन बेहतर? एबी डिविलियर्स की राय ने बढ़ाई चर्चा, आंकड़ों में किसका पलड़ा भारी

    विदेशी पिचों पर सचिन या कोहली कौन बेहतर? एबी डिविलियर्स की राय ने बढ़ाई चर्चा, आंकड़ों में किसका पलड़ा भारी

    नई दिल्ली । सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली भारतीय क्रिकेट के ऐसे दो नाम हैं जिनकी तुलना अक्सर होती रही है। दोनों ने अलग-अलग दौर में भारतीय बल्लेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और दुनिया के मुश्किल क्रिकेटिंग हालात में अपनी काबिलियत साबित की। अब दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान एबी डिविलियर्स ने दोनों दिग्गजों की विदेशी परिस्थितियों में सफलता को लेकर अपनी राय रखी है। डिविलियर्स की टिप्पणी के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि सचिन और विराट में आखिर बेहतर बल्लेबाज कौन था।

    डिविलियर्स ने सचिन तेंदुलकर की उपलब्धियों को कमतर आंकने के बजाय यह कहा कि सचिन ने भारतीय बल्लेबाजों के लिए एक रास्ता तैयार किया था। उनके मुताबिक सचिन उन शुरुआती भारतीय बल्लेबाजों में थे जिन्होंने यह विश्वास पैदा किया कि उपमहाद्वीप से आने वाला बल्लेबाज तेज गेंदबाजों की उछाल और सीम वाली परिस्थितियों में भी सफल हो सकता है। हालांकि डिविलियर्स का मानना है कि विराट कोहली ने इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए उसे एक अलग स्तर तक पहुंचाया।

    डिविलियर्स की बात का सबसे चर्चित हिस्सा यही रहा कि उन्होंने विराट कोहली को विदेशी परिस्थितियों में सचिन से अधिक मजबूत बताया। उनकी राय के मुताबिक कोहली ने विदेशों में भारतीय बल्लेबाजी के आत्मविश्वास को और बढ़ाया और टीम इंडिया को विदेशी मैदानों पर एक मजबूत टेस्ट टीम बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस बयान ने सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में सचिन बनाम विराट की पुरानी बहस को फिर हवा दे दी है।

    हालांकि अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई देती है। सचिन तेंदुलकर ने 200 टेस्ट मैचों में 15,921 रन बनाए और टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने हुए हैं। उनके टेस्ट करियर का बड़ा हिस्सा विदेशी मैदानों पर भी सफल रहा। आंकड़ों के अनुसार सचिन ने दक्षिण अफ्रीका इंग्लैंड न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में 63 टेस्ट खेलकर 51.30 की औसत से 5,387 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 17 शतक और 23 अर्धशतक लगाए।

    वहीं विराट कोहली ने 123 टेस्ट मैचों में 9,230 रन बनाए। भारत के बाहर खेले गए 66 टेस्ट में उनके नाम 4,774 रन दर्ज हैं। चार प्रमुख विदेशी देशों दक्षिण अफ्रीका इंग्लैंड न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में कोहली ने 46 टेस्ट मैचों में 42.08 की औसत से 3,661 रन बनाए। उनके नाम इन परिस्थितियों में 12 शतक और 14 अर्धशतक रहे। यानी कुल विदेशी आंकड़ों में सचिन का पलड़ा मजबूत नजर आता है जबकि डिविलियर्स ने कोहली के प्रभाव और उनके दौर में भारतीय टीम की मानसिकता में आए बदलाव को अधिक महत्व दिया।

    डिविलियर्स ने मौजूदा भारतीय बल्लेबाजों का भी जिक्र किया और कहा कि सचिन और विराट ने अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए मिसाल कायम की। केएल राहुल और देवदत्त पडिक्कल जैसे बल्लेबाजों को उन्होंने इसी परंपरा का हिस्सा बताया। हालांकि राहुल की विदेशी टेस्ट बल्लेबाजी पर उन्होंने सुधार की गुंजाइश भी बताई। डिविलियर्स के मुताबिक राहुल की तकनीक शानदार है लेकिन विदेशों में उनके औसत से ज्यादा की उम्मीद की जाती है। उन्होंने सलाह दी कि राहुल जब क्रीज पर जम जाएं तो अपनी पारियों को बड़े स्कोर में बदलें और शतक के बाद भी बल्लेबाजी जारी रखते हुए 150 से 180 रन जैसे बड़े स्कोर बनाने की कोशिश करें।

    दरअसल सचिन और विराट की तुलना सिर्फ आंकड़ों से पूरी तरह तय नहीं हो सकती। सचिन ने ऐसे दौर में भारतीय क्रिकेट को विश्व मंच पर स्थापित किया जब विदेशी परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाजों के सामने कई तरह की चुनौतियां थीं। विराट ने उसी आधार को आगे बढ़ाते हुए फिटनेस आक्रामकता और विदेशी जीत की मानसिकता को नई पहचान दी। इसलिए डिविलियर्स का बयान किसी एक खिलाड़ी को पूरी तरह महान साबित करने के बजाय दोनों की विरासत और उनके प्रभाव के अलग-अलग पहलुओं को सामने रखता है। यही वजह है कि सचिन बनाम विराट की बहस शायद क्रिकेट प्रशंसकों के बीच कभी खत्म नहीं होने वाली।