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  • बिना बयानबाजी के छा गए वीवीएस लक्ष्मण टीम इंडिया में भरोसे और संतुलन की नई संस्कृति से बदली जीत की तस्वीर

    बिना बयानबाजी के छा गए वीवीएस लक्ष्मण टीम इंडिया में भरोसे और संतुलन की नई संस्कृति से बदली जीत की तस्वीर


    नई दिल्ली। जिम्बाब्वे दौरे पर भारतीय क्रिकेट टीम ने सिर्फ सीरीज जीतकर ही नहीं बल्कि अपने बदले हुए अंदाज से भी सभी का ध्यान आकर्षित किया है। इस बदलाव के केंद्र में अंतरिम मुख्य कोच वीवीएस लक्ष्मण रहे जिन्होंने बिना किसी बयानबाजी और विवाद के केवल तीन मैचों में टीम के भीतर नया आत्मविश्वास पैदा कर दिया। खिलाड़ियों पर भरोसा जताने की उनकी शैली और शांत नेतृत्व ने यह साबित किया कि सफल कोचिंग केवल रणनीति तक सीमित नहीं होती बल्कि ड्रेसिंग रूम का माहौल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

    इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के दौरान भारतीय टीम लगातार हार और आलोचनाओं का सामना कर रही थी। टीम चयन से लेकर रणनीति तक कई फैसलों पर सवाल उठे थे। ऐसे समय में जब गौतम गंभीर उपलब्ध नहीं थे तब वीवीएस लक्ष्मण ने अंतरिम कोच की जिम्मेदारी संभाली और खिलाड़ियों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित किया। उन्होंने किसी भी खिलाड़ी पर सार्वजनिक दबाव बनाने के बजाय उनका मनोबल बढ़ाने पर जोर दिया।

    इसका असर मैदान पर भी साफ दिखाई दिया। कप्तान श्रेयस अय्यर और युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी समेत कई खिलाड़ियों ने खुलकर लक्ष्मण के मार्गदर्शन की सराहना की। टीम के भीतर आत्मविश्वास और सहजता का माहौल बना जिससे खिलाड़ी बिना किसी अतिरिक्त दबाव के अपना स्वाभाविक खेल दिखा सके। लंबे समय बाद भारतीय ड्रेसिंग रूम में सकारात्मक ऊर्जा स्पष्ट नजर आई।

    वीवीएस लक्ष्मण की चयन नीति भी चर्चा का विषय बनी। उन्होंने टीम में बदलाव जरूर किए लेकिन केवल प्रयोग करने के लिए नहीं बल्कि खिलाड़ियों की क्षमता और टीम की जरूरत को ध्यान में रखकर फैसले लिए। दूसरे टी20 मुकाबले में यश ठाकुर को मौका दिया गया जबकि सीरीज अपने नाम करने के बाद तीसरे मैच में सूर्यांश शेडगे को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। इससे खिलाड़ियों को यह संदेश मिला कि प्रदर्शन और तैयारी के आधार पर सभी को अवसर मिलेगा।

    युवा खिलाड़ियों के साथ लक्ष्मण का जुड़ाव उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में लंबे समय तक काम करने के कारण वह उभरते क्रिकेटरों की मानसिकता और उनकी जरूरतों को अच्छी तरह समझते हैं। शुभमन गिल यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी जैसे कई खिलाड़ियों ने उनके मार्गदर्शन में अपने खेल को निखारा है। यही अनुभव अंतरिम कोच के रूप में भी उनके काम आया।

    हालांकि तीन मैचों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि टीम की सभी समस्याएं समाप्त हो गई हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने कई आसान कैच छोड़े जिससे फील्डिंग अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। बल्लेबाजी और रणनीति में सुधार जरूर दिखाई दिया लेकिन फील्डिंग में निरंतरता लाने की जरूरत बनी हुई है।

    वीवीएस लक्ष्मण इससे पहले भी कई बार अंतरिम मुख्य कोच की भूमिका निभा चुके हैं और हर बार उनके काम की सराहना हुई है। इसके बावजूद उन्होंने स्थायी मुख्य कोच बनने के बजाय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में युवा खिलाड़ियों को तैयार करने की जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी। अब उनके हालिया प्रदर्शन के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या भारतीय क्रिकेट को भविष्य में अलग अलग प्रारूपों के लिए अलग मुख्य कोच की व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।

    फिलहाल इतना तय है कि जिम्बाब्वे दौरे ने यह साबित कर दिया है कि टीम की सफलता केवल रणनीति या तकनीक पर निर्भर नहीं करती बल्कि खिलाड़ियों के भीतर विश्वास जगाने और उन्हें खुलकर खेलने का माहौल देने वाला नेतृत्व भी उतना ही अहम होता है। वीवीएस लक्ष्मण ने अपने शांत स्वभाव और संतुलित फैसलों से यही संदेश पूरी क्रिकेट दुनिया को दिया है।

  • सोशल मीडिया की चमक से दूर रख रहे सीनियर खिलाड़ी ईशान किशन बोले वैभव का पूरा ध्यान सिर्फ क्रिकेट पर होना चाहिए

    सोशल मीडिया की चमक से दूर रख रहे सीनियर खिलाड़ी ईशान किशन बोले वैभव का पूरा ध्यान सिर्फ क्रिकेट पर होना चाहिए


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा जिस युवा खिलाड़ी की हो रही है वह हैं महज 15 वर्ष के वैभव सूर्यवंशी। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार शुरुआत करने वाले इस युवा बल्लेबाज ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में केवल 18 गेंदों में अर्धशतक लगाकर सभी को प्रभावित किया। उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी ने उन्हें रातोंरात सुर्खियों में ला दिया लेकिन भारतीय टीम के सीनियर खिलाड़ी इस बात का भी पूरा ध्यान रख रहे हैं कि इतनी कम उम्र में मिली लोकप्रियता उनके खेल पर असर न डाले।

    भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने दूसरे टी20 मुकाबले के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में वैभव सूर्यवंशी को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि पूरी टीम की कोशिश है कि युवा बल्लेबाज का ध्यान सोशल मीडिया की चर्चाओं और बाहरी शोर से हटाकर केवल क्रिकेट पर केंद्रित रहे। ईशान के अनुसार कम उम्र में प्रसिद्धि मिलने के साथ कई तरह के आकर्षण और दबाव भी आते हैं लेकिन सही मार्गदर्शन मिलने पर खिलाड़ी लंबा और सफल करियर बना सकता है।

    ईशान किशन ने कहा कि वैभव काफी समझदार खिलाड़ी हैं और उन्हें अच्छी तरह पता है कि मैदान पर कैसे खेलना है और मैदान के बाहर किस तरह व्यवहार करना है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस माहौल और पृष्ठभूमि से वैभव आते हैं वहां कई बार दोस्त और सोशल मीडिया जैसी चीजें ध्यान भटका सकती हैं। ऐसे में टीम के सीनियर खिलाड़ी लगातार उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि केवल वह ही नहीं बल्कि अभिषेक शर्मा अक्षर पटेल और टीम के कई अन्य खिलाड़ी भी वैभव से लगातार बातचीत करते रहते हैं। सभी का उद्देश्य यही है कि युवा बल्लेबाज सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाओं या आलोचनाओं से प्रभावित न हो। अगर किसी मैच में रन नहीं बनते हैं तो भी उसका असर उनकी बॉडी लैंग्वेज या आत्मविश्वास पर नहीं पड़ना चाहिए। सीनियर खिलाड़ी चाहते हैं कि वैभव अपने खेल को लगातार बेहतर बनाने पर ध्यान दें क्योंकि यही उनके उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी कुंजी होगी।

    दूसरी ओर ईशान किशन ने भी दूसरे टी20 मुकाबले में शानदार प्रदर्शन कर अपनी उपयोगिता साबित की। उन्होंने केवल 44 गेंदों में 81 रनों की विस्फोटक पारी खेली जिसमें नौ चौके और दो शानदार छक्के शामिल रहे। उनके साथ तिलक वर्मा ने भी आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 29 गेंदों पर नाबाद 60 रन बनाए। दोनों बल्लेबाजों की बेहतरीन साझेदारी की बदौलत भारत ने निर्धारित 20 ओवर में पांच विकेट पर 219 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया।

    भारतीय गेंदबाजों ने भी बल्लेबाजों का पूरा साथ दिया और जिम्बाब्वे की टीम को लक्ष्य तक पहुंचने का मौका नहीं दिया। शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के दम पर भारत ने मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ युवा खिलाड़ियों और अनुभवी क्रिकेटरों के बीच बेहतर तालमेल भी देखने को मिला जो आने वाले समय में भारतीय टीम के लिए बेहद सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ियों को सीनियर क्रिकेटरों का मार्गदर्शन मिलना भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। अगर वह इसी तरह अपने खेल पर ध्यान केंद्रित रखते हैं तो आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट को एक और बड़ा सितारा मिल सकता है।

  • 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास, पहला इंटरनेशनल अर्धशतक मां, परिवार और कोच को किया समर्पित

    15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास, पहला इंटरनेशनल अर्धशतक मां, परिवार और कोच को किया समर्पित


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में ऐसी धमाकेदार पारी खेली, जिसने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। महज 15 साल की उम्र में उन्होंने 19 गेंदों में 50 रन ठोककर न सिर्फ टीम इंडिया को शानदार शुरुआत दिलाई, बल्कि कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिए। मैच के बाद वैभव ने अपनी इस यादगार पारी को अपनी मां, परिवार, कोच और उन सभी लोगों को समर्पित किया, जिन्होंने उनके कठिन समय में उनका साथ दिया।

    हरारे में खेले गए मुकाबले में वैभव ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। उन्होंने केवल 18 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और 19 गेंदों की पारी में 4 चौके तथा 4 छक्के लगाए। इस प्रदर्शन के साथ वह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए।

    15 साल 118 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर वैभव ने इंग्लैंड के लुई ब्रूस का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने 16 साल 56 दिन की उम्र में टी20 इंटरनेशनल फिफ्टी लगाई थी। इतना ही नहीं, वैभव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक बनाने वाले बल्लेबाज भी बन गए। उन्होंने नेपाल के कुशल मल्ला का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया, जिन्होंने 2020 में 15 साल 340 दिन की उम्र में यह कारनामा किया था।

    बीसीसीआई द्वारा साझा किए गए वीडियो में वैभव ने कहा कि करियर की शुरुआत में ऐसी पारियां आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देती हैं। उन्होंने बताया कि बल्लेबाजी के दौरान वह पूरी तरह अपनी लय में थे और अपनी स्वाभाविक खेल शैली पर भरोसा करते हुए शॉट्स लगाए। उन्होंने कहा कि यह अर्धशतक उनके परिवार, कोच और उन सभी लोगों के लिए है, जिन्होंने हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाया।

    मैच के दौरान अर्धशतक पूरा करने के बाद वैभव ने दोनों हाथों से सिर के ऊपर ‘ए’ का निशान बनाया। इस खास सेलिब्रेशन के बारे में उन्होंने खुलासा किया कि यह उनकी मां आरती को समर्पित था। वहीं, ‘थंब्स अप’ का इशारा उन्होंने भारतीय बल्लेबाज रिंकू सिंह के साथ हुई बातचीत से प्रेरित होकर किया।

    हरारे का मैदान वैभव के लिए लगातार यादगार साबित हो रहा है। इसी वर्ष उन्होंने आईसीसी अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों पर 175 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली थी। इससे पहले सेमीफाइनल में अफगानिस्तान के खिलाफ 68 रन बनाकर भारत को रिकॉर्ड छठा अंडर-19 विश्व कप खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

    हालांकि इंग्लैंड के खिलाफ पिछली टी20 सीरीज में उन्हें तीन मौकों पर बड़ी पारी खेलने का अवसर नहीं मिला, लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले ही मैच में उन्होंने शानदार वापसी कर अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया। वैभव ने कहा कि हरारे का माहौल उन्हें पसंद है, लेकिन वह इसे हल्के में नहीं लेते। उनका लक्ष्य हर मैच में टीम के लिए बेहतर प्रदर्शन करना और अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देना है।

    15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रिकॉर्डतोड़ अर्धशतक लगाकर वैभव सूर्यवंशी ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय क्रिकेट को भविष्य का एक और बड़ा सितारा मिल चुका है।

  • रोहित पर भरोसा बरकरार, शमी और संजू बाहर, अभिनव मुकुंद ने चुनी अपनी ड्रीम वर्ल्ड कप टीम

    रोहित पर भरोसा बरकरार, शमी और संजू बाहर, अभिनव मुकुंद ने चुनी अपनी ड्रीम वर्ल्ड कप टीम


    नई दिल्ली । वनडे विश्व कप 2027 को लेकर क्रिकेट जगत में चर्चाएं तेज हो गई हैं और इसी बीच भारत के पूर्व क्रिकेटर अभिनव मुकुंद ने अपनी पसंदीदा 15 सदस्यीय भारतीय टीम का चयन कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मुकुंद की टीम में कई अनुभवी खिलाड़ियों को जगह मिली है जबकि कुछ बड़े नामों को बाहर रखकर उन्होंने चयन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सबसे ज्यादा चर्चा तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन के बाहर रहने की हो रही है। इसके अलावा युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा और रिंकू सिंह को भी मुकुंद ने अपनी टीम में शामिल नहीं किया।

    ईएसपीएन क्रिकइन्फो से बातचीत के दौरान अभिनव मुकुंद ने अपनी टीम का खुलासा किया। उन्होंने सलामी बल्लेबाज के रूप में शुभमन गिल और रोहित शर्मा को चुना। हाल के समय में रोहित शर्मा की फॉर्म को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं लेकिन मुकुंद का मानना है कि बड़े टूर्नामेंट में उनका अनुभव और नेतृत्व भारतीय टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यही वजह रही कि उन्होंने रोहित पर भरोसा कायम रखा जबकि यशस्वी जायसवाल को अपनी टीम में जगह नहीं दी।

    मुकुंद ने तीसरे नंबर पर विराट कोहली को रखा है जबकि चौथे स्थान के लिए श्रेयस अय्यर को चुना। मध्यक्रम को मजबूत बनाने के लिए उन्होंने विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर केएल राहुल और ईशान किशन को शामिल किया है। संजू सैमसन को टीम से बाहर रखने का फैसला सबसे चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि हाल के वर्षों में उन्होंने सीमित ओवरों के क्रिकेट में कई प्रभावशाली पारियां खेली हैं।

    ऑलराउंडर विभाग में मुकुंद ने हार्दिक पांड्या अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर पर भरोसा जताया है। उनका मानना है कि ये तीनों खिलाड़ी बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में संतुलन प्रदान कर सकते हैं। स्पिन आक्रमण की जिम्मेदारी उन्होंने कुलदीप यादव को सौंपी है जो पिछले कुछ समय से लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन कर रहे हैं।

    तेज गेंदबाजी आक्रमण में मुकुंद ने जसप्रीत बुमराह को मुख्य हथियार माना है। उनके साथ अनुभवी मोहम्मद सिराज को शामिल किया गया है। इसके अलावा प्रसिद्ध कृष्णा हर्षित राणा और युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार को भी टीम में जगह मिली है। गुरनूर बरार का चयन विशेष रूप से चर्चा में है क्योंकि उन्होंने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया है और मुकुंद ने उनके प्रदर्शन पर भरोसा दिखाया है।

    मोहम्मद शमी का टीम से बाहर होना क्रिकेट प्रशंसकों के लिए सबसे बड़ा आश्चर्य माना जा रहा है। शमी लंबे समय से भारत के सबसे भरोसेमंद तेज गेंदबाजों में शामिल रहे हैं और बड़े टूर्नामेंटों में उनका रिकॉर्ड शानदार रहा है। इसके बावजूद मुकुंद ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए युवा गेंदबाजों को प्राथमिकता दी है।

    हालांकि यह केवल अभिनव मुकुंद की व्यक्तिगत पसंद की टीम है और इसका भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड या राष्ट्रीय चयन समिति से कोई संबंध नहीं है। अंतिम टीम का चयन खिलाड़ियों की फॉर्म फिटनेस प्रदर्शन और चयनकर्ताओं की रणनीति के आधार पर किया जाएगा। फिर भी मुकुंद की इस टीम ने वनडे विश्व कप 2027 को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

  • भारत-जिम्बाब्वे टी20 सीरीज का रोमांच शुरू, इन पांच खिलाड़ियों का प्रदर्शन तय कर सकता है मुकाबले का रुख

    भारत-जिम्बाब्वे टी20 सीरीज का रोमांच शुरू, इन पांच खिलाड़ियों का प्रदर्शन तय कर सकता है मुकाबले का रुख


    नई दिल्ली । भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का आगाज गुरुवार से होने जा रहा है। इंग्लैंड दौरे के बाद टीम इंडिया अब नई चुनौती के लिए तैयार है। इस बार टीम की कमान श्रेयस अय्यर के हाथों में है और उनका लक्ष्य कप्तान के रूप में विजयी शुरुआत करना होगा। सीरीज में कई युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा साबित करने का मौका मिलेगा, जबकि कुछ अनुभवी चेहरे भी टीम की जीत में अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। ऐसे में पांच भारतीय खिलाड़ियों पर क्रिकेट प्रेमियों की खास नजर रहने वाली है।

    सबसे पहले बात करें युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की। इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले वैभव उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सके थे। लगातार तीन मैचों में बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहने के बाद अब उनके पास जिम्बाब्वे के खिलाफ खुद को साबित करने का शानदार अवसर है। अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले वैभव से टीम इंडिया को तेज शुरुआत की उम्मीद होगी।

    सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा भी इस सीरीज के सबसे अहम खिलाड़ियों में शामिल हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ उनका रिकॉर्ड शानदार रहा है और उन्होंने छह टी20 मुकाबलों में 179 रन बनाए हैं। हालांकि इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के अंतिम तीन मैचों में उनका बल्ला शांत रहा था। ऐसे में वह इस दौरे पर दमदार वापसी करने के इरादे से उतरेंगे। अभिषेक के पास कई व्यक्तिगत रिकॉर्ड अपने नाम करने का भी मौका है।

    कप्तान श्रेयस अय्यर पर भी सभी की नजरें रहेंगी। हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में उन्होंने शानदार बल्लेबाजी की थी और अब उसी लय को टी20 प्रारूप में भी बरकरार रखना चाहेंगे। अय्यर की सबसे बड़ी ताकत परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी करना है। वह जरूरत पड़ने पर पारी को संभाल भी सकते हैं और तेजी से रन भी बना सकते हैं। कप्तान के तौर पर उनका प्रदर्शन टीम इंडिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।

    तेज गेंदबाज प्रिंस यादव भी इस सीरीज में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने अपनी रफ्तार और सटीक यॉर्कर से प्रभावित किया था, हालांकि विकेट उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं मिले। जिम्बाब्वे के खिलाफ वह नई गेंद और डेथ ओवरों दोनों में टीम के लिए प्रभावी साबित हो सकते हैं। उनकी गति विपक्षी बल्लेबाजों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

    वहीं तेज गेंदबाज मयंक यादव की वापसी भी क्रिकेट प्रेमियों के लिए उत्साह का विषय है। अपनी तेज रफ्तार के कारण आईपीएल में सुर्खियां बटोर चुके मयंक लंबे समय तक चोट से जूझते रहे हैं। अनुभवी गेंदबाजों की गैरमौजूदगी में उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका मिलने की संभावना है। यदि वह अपनी पुरानी लय में दिखाई देते हैं तो भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को नई धार मिल सकती है।

    युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के इस संतुलित संयोजन के साथ टीम इंडिया जिम्बाब्वे के खिलाफ जीत के इरादे से मैदान में उतरेगी। अब देखना होगा कि इन पांच खिलाड़ियों में कौन अपने प्रदर्शन से सबसे ज्यादा प्रभाव छोड़ता है और भारत को सीरीज में बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाता है।

  • फेक बयान पर सूर्यकुमार यादव की सफाई: भारतीय टीम के साथ खड़ा हूं, अफवाहों पर न करें भरोसा

    फेक बयान पर सूर्यकुमार यादव की सफाई: भारतीय टीम के साथ खड़ा हूं, अफवाहों पर न करें भरोसा


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज और पूर्व टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव ने सोशल मीडिया पर उनके नाम से वायरल हो रहे कथित बयानों को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंटरनेट पर प्रसारित किए जा रहे कई बयान पूरी तरह भ्रामक हैं और उनका उन बयानों से कोई संबंध नहीं है। सूर्यकुमार ने लोगों से अपील की है कि बिना पुष्टि किसी भी जानकारी पर भरोसा न करें और न ही उसे आगे साझा करें।

    सूर्यकुमार यादव ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि वह भारतीय टीम के प्रदर्शन से बेहद खुश हैं और हमेशा टीम की सफलता की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि टीम के खिलाड़ी देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास कर रहे हैं और उन्हें हमेशा उनका पूरा समर्थन मिलेगा। उन्होंने भारतीय टीम के उज्ज्वल भविष्य पर भरोसा जताते हुए सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं।

    अपने संदेश में सूर्यकुमार यादव ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के लिए भी विशेष शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि वैभव अपने क्रिकेट करियर के बेहद रोमांचक दौर की शुरुआत कर रहे हैं और उन्हें हर पल का आनंद लेते हुए देश का नाम रोशन करना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि युवा खिलाड़ी आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगे।

    सूर्यकुमार यादव ने अपने नाम से प्रसारित किए जा रहे कथित बयानों पर नाराजगी भी जाहिर की। उन्होंने साफ कहा कि सोशल मीडिया पर जो बयान उनके नाम से साझा किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने ऐसा कोई बयान न तो दिया है और न ही किसी को इसकी अनुमति दी है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि किसी भी खबर या पोस्ट को साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें ताकि गलत सूचनाओं के प्रसार पर रोक लगाई जा सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय क्रिकेट, अपने साथी खिलाड़ियों और खेल के प्रति उनका समर्पण किसी भी अफवाह या झूठे बयान से कहीं अधिक मजबूत है। उनके लिए देश और टीम सर्वोपरि है तथा वह हमेशा भारतीय क्रिकेट के हित में खड़े रहेंगे। उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और क्रिकेट प्रेमी इसे जिम्मेदार और सकारात्मक पहल मान रहे हैं।

    हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट में दावा किया गया था कि सूर्यकुमार यादव ने भारतीय टी20 टीम की कप्तानी, अपने चयन और युवा खिलाड़ियों को लेकर कुछ विवादित टिप्पणियां की हैं। हालांकि अब स्वयं सूर्यकुमार यादव ने इन दावों का खंडन कर दिया है। उनकी इस स्पष्ट प्रतिक्रिया के बाद उनके नाम से फैलाए जा रहे भ्रामक बयानों पर विराम लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • दिल्ली में ट्रायल में हुए रिजेक्ट, पिता ने तीन दिन में बदल दी किस्मत: संजू सैमसन ने सुनाया संघर्ष का प्रेरक किस्सा

    दिल्ली में ट्रायल में हुए रिजेक्ट, पिता ने तीन दिन में बदल दी किस्मत: संजू सैमसन ने सुनाया संघर्ष का प्रेरक किस्सा


    नई दिल्ली । टी20 विश्व कप 2026 में भारत की खिताबी जीत के अहम नायकों में शामिल विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने अपने क्रिकेट करियर के शुरुआती संघर्षों का भावुक किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली की टीम में बार-बार जगह नहीं मिलने के बाद उनके पिता ने ऐसा फैसला लिया जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।

    जियोस्टार के शो ‘सुपरस्टार्स’ में बातचीत के दौरान संजू ने कहा कि बचपन में वह अपने दोस्तों को डीडीसीए की जैकेट पहनकर दिल्ली की टीम के लिए खेलते देखते थे। इससे उनके मन में भी दिल्ली का प्रतिनिधित्व करने का सपना जगा। उन्होंने कई बार ट्रायल दिए, स्टेट कैंप तक पहुंचे और अच्छे रन भी बनाए, लेकिन अंतिम टीम में कभी जगह नहीं मिली।

    संजू ने बताया कि एक ट्रायल के बाद जब चयनित खिलाड़ियों की सूची जारी हुई तो उसमें उनका नाम नहीं था। वह और उनके पिता चुपचाप घर लौट आए। घर पहुंचते ही उनके पिता विश्वनाथन ने मां से कहा कि अब परिवार को केरल जाना होगा। मां ने बच्चों की पढ़ाई का हवाला देते हुए कुछ साल रुकने की सलाह दी, लेकिन पिता अपने फैसले पर अडिग रहे।

    उन्होंने कहा कि पिता ने साफ शब्दों में कहा कि अब और इंतजार नहीं होगा। तीन दिन के भीतर टिकट बुक हुई और पूरा परिवार ट्रेन से केरल रवाना हो गया। वहीं से उनके क्रिकेट करियर का नया अध्याय शुरू हुआ और उन्होंने केरल की ओर से खेलना शुरू किया।

    संजू ने दिल्ली में अपने बचपन की यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनके पिता दिल्ली पुलिस की फुटबॉल टीम से जुड़े थे और रोज अभ्यास के लिए जाते थे। खेल का माहौल देखकर बचपन से ही उन्हें भी खिलाड़ी बनने की प्रेरणा मिली। पुलिस कॉलोनी की सड़कों पर टेनिस बॉल से गली क्रिकेट खेलते-खेलते उनका क्रिकेट के प्रति जुनून बढ़ता गया।

    उन्होंने बताया कि उनके पिता ने कभी फुटबॉल खेलने के लिए मजबूर नहीं किया। हालांकि वे फुटबॉल भी खेलते थे, लेकिन पिता ने उनकी बल्लेबाजी देखकर महसूस किया कि क्रिकेट में उनका भविष्य बेहतर हो सकता है। इसके बाद उन्होंने संजू और उनके भाई दोनों को क्रिकेट पर पूरा ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।

    संजू ने दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम (तत्कालीन फिरोज शाह कोटला) से जुड़ी एक खास याद भी साझा की। उन्होंने बताया कि एक बार उनके पिता की वहां ड्यूटी थी। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध कर उन्हें नेट्स में अभ्यास करने का मौका दिलाया। संजू, उनके भाई और पिता ने करीब एक घंटे तक नेट्स में अभ्यास किया। संजू ने कहा कि उन्हें आज भी समझ नहीं आता कि उस समय उनके पिता ने यह कैसे संभव किया, लेकिन वही पल उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा।

    संजू सैमसन की यह कहानी बताती है कि प्रतिभा के साथ सही समय पर लिया गया साहसी फैसला और परिवार का अटूट विश्वास किसी भी खिलाड़ी की सफलता की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।

  • क्रिकेट के हिटमैन का बड़ा सम्मान: रोहित शर्मा को पद्मश्री, राष्ट्रपति भवन में गूंजीं तालियां

    क्रिकेट के हिटमैन का बड़ा सम्मान: रोहित शर्मा को पद्मश्री, राष्ट्रपति भवन में गूंजीं तालियां


    नई दिल्ली ।भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम अध्यायों में अपना नाम दर्ज करा चुके दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा को देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। मंगलवार को द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। इस सम्मान के साथ रोहित शर्मा उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए हैं जिन्होंने खेल जगत में अपने उत्कृष्ट योगदान के दम पर देश का सर्वोच्च सम्मान हासिल किया है।

    रोहित शर्मा का नाम जनवरी 2026 में घोषित पद्म पुरस्कार विजेताओं की सूची में शामिल किया गया था। भारतीय क्रिकेट में उनके उल्लेखनीय योगदान, शानदार बल्लेबाजी, रिकॉर्डतोड़ उपलब्धियों और सफल नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें इस सम्मान के लिए चुना गया। वर्षों से क्रिकेट प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाले रोहित ने अपने खेल से न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है।

    राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस विशेष समारोह में कुल 65 विशिष्ट हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इनमें 2 पद्म विभूषण, 7 पद्म भूषण और 56 पद्मश्री पुरस्कार शामिल रहे। समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। रोहित शर्मा के अलावा विजय अमृतराज, अलका याग्निक और ममूटी जैसे कई प्रतिष्ठित कलाकारों को भी सम्मान दिया गया।।

    रोहित शर्मा भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी बल्लेबाजी का कोई सानी नहीं माना जाता। वनडे क्रिकेट में तीन दोहरे शतक लगाने वाले वह दुनिया के इकलौते बल्लेबाज हैं। उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी और बड़े मैचों में शानदार प्रदर्शन ने उन्हें विश्व क्रिकेट के महान खिलाड़ियों की श्रेणी में पहुंचा दिया है।

    बतौर कप्तान भी रोहित शर्मा ने भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी नेतृत्व क्षमता के तहत टीम इंडिया ने कई महत्वपूर्ण श्रृंखलाओं और टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन किया। मैदान पर उनका शांत स्वभाव, रणनीतिक सोच और खिलाड़ियों को प्रेरित करने की क्षमता उन्हें एक सफल कप्तान बनाती है।

    क्रिकेट के मैदान पर हासिल की गई उनकी उपलब्धियां केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं बल्कि उन्होंने करोड़ों युवाओं को प्रेरित करने का काम भी किया है। एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व क्रिकेट के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल होना उनकी मेहनत, समर्पण और संघर्ष की कहानी को दर्शाता है।

    पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद खेल जगत और क्रिकेट प्रशंसकों ने रोहित शर्मा को बधाइयां दीं। सोशल मीडिया पर भी उनके सम्मान को लेकर खुशी की लहर देखने को मिली। यह सम्मान न केवल रोहित शर्मा की व्यक्तिगत उपलब्धि है बल्कि भारतीय क्रिकेट के लिए भी गर्व का क्षण है।

    रोहित शर्मा की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और यह साबित करती है कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और समर्पण से किसी भी ऊंचाई को हासिल किया जा सकता है।

  • तबाही का दूसरा नाम वैभव सूर्यवंशी, 15 साल की उम्र में ही तोड़े कई बड़े रिकॉर्ड्स

    तबाही का दूसरा नाम वैभव सूर्यवंशी, 15 साल की उम्र में ही तोड़े कई बड़े रिकॉर्ड्स


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट में एक नया नाम तेजी से सुर्खियों में है—वैभव सूर्यवंशी। महज 15 साल की उम्र में इस युवा बल्लेबाज ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से पूरी दुनिया को चौंका दिया है। उनकी बल्लेबाजी शैली इतनी आक्रामक और प्रभावशाली है कि उन्हें “तबाही का दूसरा नाम” कहा जाने लगा है।

    हाल ही में श्रीलंका ए के खिलाफ ट्राई सीरीज फाइनल में वैभव ने सिर्फ 11 गेंदों में अर्धशतक लगाकर लिस्ट ए क्रिकेट का सबसे बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड 12 गेंदों में था, जिसे उन्होंने आसानी से पीछे छोड़ दिया। इस पारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वैभव भविष्य के नहीं, बल्कि वर्तमान के भी स्टार हैं।

    वैभव का सबसे बड़ा कारनामा केवल यही नहीं है। उन्होंने बेहद कम उम्र में लिस्ट ए क्रिकेट में शतक लगाने का भी रिकॉर्ड बनाया है। मात्र 14 साल 272 दिन की उम्र में शतक जड़कर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की थी। उस मैच में उन्होंने 190 रनों की विशाल पारी खेलकर विपक्षी टीम को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था।

    इसके अलावा, वैभव सूर्यवंशी विश्व क्रिकेट में सबसे तेज 150 रन बनाने वाले बल्लेबाज भी हैं। उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी में सिर्फ 59 गेंदों में यह उपलब्धि हासिल की थी, जिसने एबी डिविलियर्स जैसे दिग्गज का रिकॉर्ड तोड़ दिया था।

    लिस्ट ए क्रिकेट में भारत की ओर से तीसरा सबसे तेज शतक लगाने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है। उन्होंने मात्र 36 गेंदों में शतक पूरा कर यह कारनामा किया था। हालांकि भारत में उनसे तेज शतक ईशान किशन और अनमोलप्रीत ने लगाए हैं, लेकिन वैभव की उम्र को देखते हुए यह उपलब्धि बेहद खास मानी जाती है।

    यूथ क्रिकेट में भी वैभव का प्रदर्शन असाधारण रहा है। अंडर-19 टेस्ट में उन्होंने सिर्फ 58 गेंदों में शतक लगाकर इतिहास रचा था। यह अंडर-19 क्रिकेट इतिहास का दूसरा सबसे तेज शतक है और भारत की ओर से सबसे तेज भी माना जाता है।

    उनका करियर सिर्फ बल्लेबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने बेहद कम उम्र में रणजी ट्रॉफी में डेब्यू भी किया है। मात्र 12 साल 284 दिन की उम्र में उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कदम रखकर खुद को भविष्य का सुपरस्टार साबित किया।

    आईपीएल में भी वैभव ने अपनी छाप छोड़ी है। उन्होंने राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए गुजरात टाइटंस के खिलाफ शानदार शतक लगाया था और मात्र 38 गेंदों में 101 रन बनाकर इतिहास रच दिया था। इसी सीजन में उन्होंने 72 छक्के लगाकर क्रिस गेल का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।

    इन सभी रिकॉर्ड्स को देखकर यह साफ है कि वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट के भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान की भी सबसे बड़ी खोज बन चुके हैं। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और रिकॉर्ड तोड़ने की क्षमता उन्हें एक अलग ही श्रेणी में खड़ा करती है।

  • ‘टीम इंडिया के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है’: डेब्यू सीरीज में चमके गुरनूर बरार, सफलता का बताया राज

    ‘टीम इंडिया के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है’: डेब्यू सीरीज में चमके गुरनूर बरार, सफलता का बताया राज


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट को एक और उभरता हुआ तेज गेंदबाज मिल गया है। अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार ने अपने प्रदर्शन से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। दाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज ने अपने पहले दोनों वनडे मुकाबलों में तीन-तीन विकेट लेकर यह साबित कर दिया कि वह भविष्य में भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण का अहम हिस्सा बन सकते हैं।

    लखनऊ में खेले गए मुकाबले के बाद गुरनूर बरार ने अपनी सफलता के पीछे घरेलू क्रिकेट और इंडिया ए टीम में मिले अनुभव को सबसे बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि इंडिया ए का मंच उनके लिए सीखने और खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम साबित हुआ है।

    गुरनूर ने कहा कि जब उन्हें इंडिया ए टीम में चुना गया था, तब वह बेहद उत्साहित थे। उनके अनुसार, इंडिया ए में खेलते समय उन्होंने वही रणनीति अपनाई जो वह रणजी ट्रॉफी में इस्तेमाल करते थे। हार्ड लेंथ पर लगातार तेज गेंदबाजी करना और गेंद को स्विंग कराना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। उन्होंने बताया कि इंडिया ए में मिले अनुभव ने उन्हें यह विश्वास दिया कि वह बड़े स्तर पर भी उसी आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन कर सकते हैं।

    युवा तेज गेंदबाज ने कहा कि उन्होंने भारतीय टीम के लिए खेलते समय भी अपनी स्वाभाविक गेंदबाजी पर भरोसा रखा। उन्होंने किसी तरह का अतिरिक्त दबाव नहीं लिया और अपनी मजबूत पक्षों पर ध्यान केंद्रित किया। बरार का मानना है कि अभी भी उनके प्रदर्शन में और सुधार की काफी गुंजाइश है और आने वाले मैचों में वह और बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं।

    उन्होंने टीम प्रबंधन और गेंदबाजी कोच की भी जमकर तारीफ की। गुरनूर ने कहा कि उन्हें कोचिंग स्टाफ से पूरा समर्थन मिला है। टीम प्रबंधन ने उन्हें कोई नई तकनीक अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया, बल्कि उनकी मौजूदा क्षमताओं पर भरोसा जताते हुए अपनी ताकत के अनुसार गेंदबाजी करने की सलाह दी। यही भरोसा उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में मददगार साबित हुआ।

    गुरनूर बरार ने कहा कि वह भगवान के आभारी हैं कि उन्हें भारतीय टीम के लिए खेलने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह तो केवल शुरुआत है और वह आने वाले वर्षों में टीम इंडिया के लिए बहुत कुछ हासिल करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य केवल टीम में जगह बनाना नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की सफलताओं में महत्वपूर्ण योगदान देना है।

    आईपीएल 2026 में गुरनूर बरार गुजरात टाइटंस का हिस्सा रहे। हालांकि उन्हें अधिक मैच खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन टीम के साथ बिताया गया समय उनके लिए बेहद मूल्यवान रहा। उन्होंने बताया कि गुजरात टाइटंस के ड्रेसिंग रूम में अनुभवी खिलाड़ियों और कोचों से बहुत कुछ सीखने को मिला।

    बरार ने कहा कि टीम में मुख्य कोच आशीष नेहरा के अलावा कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और इशांत शर्मा जैसे अनुभवी गेंदबाज मौजूद थे। उनके साथ समय बिताने और बातचीत करने से उन्हें गेंदबाजी के कई तकनीकी और मानसिक पहलुओं को समझने का मौका मिला।

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार शुरुआत के बाद अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें गुरनूर बरार पर टिकी हैं। यदि वह इसी तरह निरंतर प्रदर्शन करते रहे, तो भारतीय तेज गेंदबाजी को एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प मिल सकता है।