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  • इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित हुए प्रधानमंत्री मोदी, देशभर से बधाइयों का दौर; नेताओं ने बताया भारत के गौरव का क्षण

    इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित हुए प्रधानमंत्री मोदी, देशभर से बधाइयों का दौर; नेताओं ने बताया भारत के गौरव का क्षण

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्ण ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ से सम्मानित किए जाने के बाद देशभर में उन्हें बधाइयां देने का सिलसिला शुरू हो गया। लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस उपलब्धि को भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और दोनों देशों के बीच मजबूत होते रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया। नेताओं का कहना है कि यह सम्मान भारत की सक्रिय विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ते प्रभाव की व्यापक स्वीकृति को दर्शाता है।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सम्मान भारत और इंडोनेशिया के बीच लगातार मजबूत हो रहे द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच विश्वास, सहयोग और साझेदारी को नई दिशा मिली है। उनके अनुसार यह सम्मान क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों की भी अंतरराष्ट्रीय मान्यता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे दोनों देशों के बीच मित्रता और अधिक मजबूत होगी।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी प्रधानमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके दूरदर्शी नेतृत्व, प्रभावशाली कूटनीति और भारत के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता की वैश्विक पहचान है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है और यह सम्मान उसी बढ़ते प्रभाव का प्रमाण है। उनके अनुसार भारत आज विश्व समुदाय के बीच एक भरोसेमंद और जिम्मेदार साझेदार के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी प्रधानमंत्री मोदी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सम्मान उनकी वैश्विक नेतृत्व क्षमता और भारत-इंडोनेशिया के बीच गहरे होते संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ की सफलता का भी महत्वपूर्ण संकेत है। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग लगातार नए आयाम हासिल कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय विकास और साझा समृद्धि को भी बल मिलेगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह सम्मान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रदान किया। इसे इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है और यह उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने असाधारण योगदान के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक सहयोग को नई दिशा दी हो। इस सम्मान को भारत और इंडोनेशिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक भी माना जा रहा है।

    सम्मान ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि न बताते हुए देश के 140 करोड़ नागरिकों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि उन्हें मिला यह सम्मान भारत के लोगों के प्रति इंडोनेशिया की सद्भावना और दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति, वहां की सरकार और जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देशों की मित्रता आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगी।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सहयोग केवल राजनीतिक या रणनीतिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे अनेक क्षेत्रों में लगातार विस्तार हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और विकास के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाएंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान भारत की विदेश नीति की बढ़ती स्वीकार्यता और वैश्विक स्तर पर मजबूत होती भूमिका का संकेत है। हाल के वर्षों में भारत ने विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को विस्तार दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी स्थिति और प्रभाव दोनों मजबूत हुए हैं। ऐसे सम्मान न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देते हैं, बल्कि वैश्विक समुदाय में भारत की सकारात्मक और विश्वसनीय छवि को भी और सुदृढ़ बनाते हैं।

  • भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई रणनीतिक मजबूती, पीएम मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो की वार्ता में व्यापार, रक्षा और समुद्री सहयोग पर बनी व्यापक सहमति

    भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई रणनीतिक मजबूती, पीएम मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो की वार्ता में व्यापार, रक्षा और समुद्री सहयोग पर बनी व्यापक सहमति

    नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में मंगलवार को महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, कृषि, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और मानव विकास सहित कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर व्यापक चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य में दोनों देशों के बीच सहयोग को नई गति देना समय की आवश्यकता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वार्ता के बाद कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में केवल मजबूती ही नहीं आई है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का दायरा भी लगातार विस्तृत हुआ है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि मौजूदा बैठक से रणनीतिक साझेदारी और अधिक मजबूत होगी तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर सहयोग के नए अवसर तैयार होंगे।

    वार्ता के दौरान आर्थिक सहयोग को विशेष प्राथमिकता दी गई। दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ कृषि, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में साझेदारी को विस्तार देने पर विचार-विमर्श किया। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि आपसी सहयोग से न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास और स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी।

    रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी बैठक का प्रमुख केंद्र रहा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण समुद्री देशों के रूप में भारत और इंडोनेशिया ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर साझा दृष्टिकोण दोहराया। दोनों देशों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, रणनीतिक समन्वय और रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इस दौरान रक्षा क्षेत्र में हुए समझौतों को दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया।

    संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। इनमें सबसे प्रमुख ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली से जुड़ा सहयोग रहा, जिसके तहत भारत इंडोनेशिया को अतिरिक्त ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही इंडोनेशिया ने भारतीय ‘अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली को खरीदने का निर्णय भी लिया है। इन समझौतों को भारत के रक्षा निर्यात और दोनों देशों के बढ़ते रक्षा सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी का तीन दिवसीय इंडोनेशिया दौरा केवल रणनीतिक और आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक संबंधों को भी नई ऊर्जा देने का प्रयास माना जा रहा है। उन्होंने साझा सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि योग्याकार्ता स्थित एक हजार वर्ष से अधिक पुराने प्रम्बानन मंदिर का पुनर्निर्माण परियोजना दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है। प्रधानमंत्री बुधवार को राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ इस परियोजना का शुभारंभ करेंगे।

    दौरे के दौरान प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक सहयोग, रक्षा साझेदारी, आर्थिक संबंधों और सांस्कृतिक जुड़ाव को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। दोनों देशों ने भविष्य में आपसी विश्वास, साझा हितों और क्षेत्रीय शांति को आधार बनाकर सहयोग को और अधिक मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

  • भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिली नई रणनीतिक रफ्तार, पीएम मोदी बोले- दोनों देशों की साझेदारी का लाभ पूरी दुनिया और मानवता को मिलेगा

    भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिली नई रणनीतिक रफ्तार, पीएम मोदी बोले- दोनों देशों की साझेदारी का लाभ पूरी दुनिया और मानवता को मिलेगा

    नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को नई मजबूती देते हुए दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, शिक्षा, अंतरिक्ष, औद्योगिक सहयोग और तकनीक समेत अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनाई है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव 21वीं सदी की वैश्विक व्यवस्था और पूरी मानवता पर भी दिखाई देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच सहयोग का नया दौर साझा विकास और स्थिरता को नई दिशा देगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा दिए गए आत्मीय स्वागत और देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान को भारत के 140 करोड़ नागरिकों के सम्मान के रूप में स्वीकार करते हुए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों के दशकों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंधों का प्रतीक है तथा भविष्य में सहयोग को और अधिक मजबूत करने की प्रेरणा देगा।

    उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों में विश्वास, सहयोग और रणनीतिक समझ लगातार बढ़ी है। वर्ष 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी अब नए चरण में प्रवेश कर रही है। विकास, सुरक्षा, तकनीक, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आगे भी इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लिया गया है।

    रक्षा और समुद्री सुरक्षा को लेकर दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन, औद्योगिक सहयोग और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिए दोनों देशों के तटरक्षक बल मिलकर काम करेंगे। ब्लू इकोनॉमी, बंदरगाह विकास और समुद्री व्यापार के क्षेत्र में भी साझेदारी को विस्तार देने पर सहमति बनी है, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों और समुद्री संपर्क को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को भी सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है। भारत की किफायती दवाओं की उपलब्धता इंडोनेशिया में बढ़ाने, वहां के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण में सहयोग देने तथा उन्नत गेहूं के बीज उपलब्ध कराने जैसे कदमों पर सहमति बनी है। इसके साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली और कल्याणकारी योजनाओं के संचालन से जुड़े भारतीय अनुभव भी साझा किए जाएंगे, ताकि दोनों देशों के नागरिकों तक सरकारी सेवाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

    तकनीक और डिजिटल क्षेत्र में दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दूरसंचार, डिजिटल अवसंरचना और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने का निर्णय लिया है। भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस प्रणाली को इंडोनेशिया की भुगतान व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी सहमति बनी है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और पर्यटन को सुविधा मिलेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भारत के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान का परिसर इंडोनेशिया में स्थापित करने की योजना भी सामने आई है, जिससे पूरे आसियान क्षेत्र के विद्यार्थियों को लाभ मिलने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिक्ष अनुसंधान, तकनीकी क्षमता निर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों, स्टील और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए भी संयुक्त प्रयासों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता में एकता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने में दोनों देशों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, आसियान की केंद्रीय भूमिका, संवाद आधारित कूटनीति और वैश्विक शांति के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि साझा इतिहास, साझा विश्वास और साझा समृद्धि के आधार पर भारत और इंडोनेशिया आने वाले वर्षों में नई सफलताओं की मिसाल कायम करेंगे।

  • भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगा नया आयाम, जकार्ता में पीएम मोदी और राष्ट्रपति सुबियांतो के बीच रक्षा से डिजिटल अर्थव्यवस्था तक होगी व्यापक चर्चा

    भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगा नया आयाम, जकार्ता में पीएम मोदी और राष्ट्रपति सुबियांतो के बीच रक्षा से डिजिटल अर्थव्यवस्था तक होगी व्यापक चर्चा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दूसरे दिन भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की उम्मीद है। जकार्ता में प्रधानमंत्री का औपचारिक और भव्य स्वागत किया गया, जहां इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ उनकी उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक निर्धारित है। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने वाले कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।

    औपचारिक स्वागत समारोह के दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री मोदी का आत्मीय स्वागत किया। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन करने के बाद अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों से परिचय कराया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति भवन स्थित अतिथि पुस्तिका में हस्ताक्षर भी किए। इस अवसर पर दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री भी उपस्थित रहे, जिससे इस यात्रा के महत्व का स्पष्ट संकेत मिला।

    दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भारत और इंडोनेशिया के राष्ट्रीय ध्वज लेकर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने बच्चों का अभिवादन स्वीकार किया और उनसे आत्मीयता से मुलाकात की। यह दृश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक और जन-स्तरीय संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने जकार्ता पहुंचने पर मिले स्वागत को विशेष बताते हुए उसके कुछ दृश्य साझा किए और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ होने वाली बैठक को लेकर उत्साह व्यक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी ने दोनों देशों के लोगों को लाभ पहुंचाया है और अब इस सहयोग को नए क्षेत्रों तक विस्तारित करने का अवसर है।

    द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स, खाद्य सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषय प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे। इसके अलावा दोनों देश निवेश, व्यापार, प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण और क्षेत्रीय सहयोग को लेकर भी नए अवसरों पर विचार करेंगे। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षित समुद्री मार्ग और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने पर भी चर्चा होने की संभावना है।

    बैठक के दौरान वर्ष 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत अब तक हुई प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी। दोनों देश इस साझेदारी को अधिक व्यावहारिक और परिणामोन्मुख बनाने के लिए नई पहल पर सहमति बना सकते हैं। इससे द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोग को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह इंडोनेशिया की चौथी यात्रा है, लेकिन व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा है। ऐसे में इस दौरे को दोनों देशों के रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं के बीच यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने तथा भविष्य की साझा विकास यात्रा को नई गति देने की दिशा में एक अहम पड़ाव साबित हो सकती है।

  • भारत-इंडोनेशिया रक्षा साझेदारी को नई मजबूती, ब्रह्मोस मिसाइल आपूर्ति समझौते से स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

    भारत-इंडोनेशिया रक्षा साझेदारी को नई मजबूती, ब्रह्मोस मिसाइल आपूर्ति समझौते से स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

    नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देते हुए ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस करार को भारत के रक्षा निर्यात, स्वदेशी सैन्य तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है। समझौते के साथ दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, औद्योगिक सहयोग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी संबंधों को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई है।

    यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान संपन्न हुआ, जो उनके तीन देशों के विदेश दौरे का पहला चरण है। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच कई रणनीतिक और आर्थिक समझौतों को अंतिम रूप दिया गया। ब्रह्मोस मिसाइल की आपूर्ति के साथ भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    समझौते के तहत इंडोनेशिया भारत में विकसित ‘अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली की खरीद भी करेगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित यह मिसाइल ‘बियॉन्ड विजुअल रेंज’ क्षमता से लैस है और आधुनिक हवाई युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। यह तेजी से दिशा बदलने वाले दुश्मन के लड़ाकू विमानों को लक्ष्य बनाकर उन्हें प्रभावी ढंग से निष्क्रिय करने में सक्षम मानी जाती है।

    जानकारी के अनुसार भारत भविष्य में इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त बैटरियां भी उपलब्ध करा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह भारत के रक्षा निर्यात कार्यक्रम को और मजबूती देगा तथा स्वदेशी रक्षा उद्योग के लिए नए अवसर तैयार करेगा। हाल के वर्षों में भारत ने रक्षा उपकरणों के निर्यात को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है और कई मित्र देशों के साथ इस दिशा में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास को इस साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उनके अनुसार नए समझौतों से रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन, औद्योगिक सहयोग और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक सहयोग का मार्ग प्रशस्त होगा।

    रक्षा क्षेत्र के अलावा दोनों देशों ने स्वास्थ्य, खनिज संसाधन और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। भारत की गुणवत्तापूर्ण और किफायती दवाओं की उपलब्धता इंडोनेशिया में और आसान बनाने पर सहमति बनी है। साथ ही डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास में भी भारत सहयोग करेगा, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे।

    भारत और इंडोनेशिया ने आवश्यक खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए स्टील, मिनरल्स और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा भारत इंडोनेशिया को विशेष इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन विकसित करने और चुनावी प्रौद्योगिकी से जुड़ा तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराएगा। इन पहलों को दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

    यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक एवं सैन्य सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ से सम्मानित किया। यह सम्मान उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने असाधारण योगदान और उत्कृष्ट सेवाएं दी हों। इस सम्मान को भारत और इंडोनेशिया के बीच मजबूत होते संबंधों तथा पारस्परिक विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस और ‘अस्त्र’ जैसी स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का निर्यात भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और वैश्विक रक्षा बाजार में बढ़ती उपस्थिति को और मजबूत करेगा। साथ ही यह समझौता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों के रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने के साथ भारत के घरेलू रक्षा उद्योग, अनुसंधान और विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी दीर्घकालिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।

  • इंडोनेशिया पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी का भव्य राजकीय स्वागत, फाइटर जेट्स ने किया एस्कॉर्ट; राष्ट्रपति प्रबोवो ने एयरपोर्ट पर की अगवानी

    इंडोनेशिया पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी का भव्य राजकीय स्वागत, फाइटर जेट्स ने किया एस्कॉर्ट; राष्ट्रपति प्रबोवो ने एयरपोर्ट पर की अगवानी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को तीन देशों की अपनी आधिकारिक विदेश यात्रा के पहले चरण में इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंच गए। इंडोनेशिया पहुंचने पर उनका विशेष राजकीय सम्मान के साथ स्वागत किया गया। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो स्वयं एयरपोर्ट पर मौजूद रहे और उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी कर दोनों देशों के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों का संदेश दिया।

    प्रधानमंत्री के विशेष विमान के इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही वहां की वायुसेना के फाइटर जेट्स ने उसे एस्कॉर्ट किया। राजकीय यात्राओं के दौरान दिया जाने वाला यह सम्मान दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास, सामरिक सहयोग और उच्च स्तरीय कूटनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। जकार्ता पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री का औपचारिक स्वागत भी निर्धारित राजकीय प्रोटोकॉल के तहत किया गया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा व्यक्तिगत रूप से किए गए स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति की उपस्थिति भारत और इंडोनेशिया के बीच गहरी मित्रता तथा परस्पर सम्मान को दर्शाती है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा के दौरान होने वाली द्विपक्षीय वार्ताएं दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा प्रदान करेंगी।

    भारत और इंडोनेशिया ने वर्ष 2018 में अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया था। इसके बाद से रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल सहयोग, ऊर्जा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान सहित अनेक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। मौजूदा यात्रा के दौरान भी इन विषयों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है, ताकि दोनों देशों के बीच सहयोग को और व्यापक बनाया जा सके।

    प्रधानमंत्री अपने इंडोनेशिया प्रवास के दौरान वहां रह रहे भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। भारतीय प्रवासी लंबे समय से दोनों देशों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। इस मुलाकात के दौरान समुदाय के साथ संवाद और द्विपक्षीय संबंधों में उनकी भागीदारी पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

    यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो योग्याकार्ता स्थित ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे। यह स्थल भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। दोनों नेताओं का यह दौरा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और साझा ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।

    इंडोनेशिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी अपनी विदेश यात्रा के अगले चरण में ऑस्ट्रेलिया और फिर न्यूजीलैंड जाएंगे। इस दौरान वे दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। चर्चाओं का मुख्य फोकस व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, तकनीकी साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर रहेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते रणनीतिक परिदृश्य के बीच प्रधानमंत्री मोदी का यह तीन देशों का दौरा भारत की क्षेत्रीय कूटनीति को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है। इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ बढ़ता सहयोग न केवल आर्थिक और सामरिक संबंधों को नई दिशा देगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और साझा विकास के एजेंडे को भी आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • इंडोनेशिया के 1100 साल पुराने प्रम्बानन मंदिर पहुंचेंगे पीएम मोदी, हिंदू विरासत और रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

    इंडोनेशिया के 1100 साल पुराने प्रम्बानन मंदिर पहुंचेंगे पीएम मोदी, हिंदू विरासत और रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की विदेश यात्रा के पहले चरण में इंडोनेशिया पहुंचे हैं। इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव योग्यकर्ता स्थित 9वीं शताब्दी का ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर माना जा रहा है। यह मंदिर न केवल दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे महत्वपूर्ण हिंदू धरोहरों में शामिल है, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के हजारों वर्ष पुराने सांस्कृतिक संबंधों का भी जीवंत प्रतीक है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    प्रम्बानन मंदिर का निर्माण लगभग 850 ईस्वी के आसपास हुआ माना जाता है। यह इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है, जहां भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा की भव्य प्रतिमाएं स्थापित हैं। परिसर का सबसे ऊंचा मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिसकी ऊंचाई लगभग 47 मीटर है। शिव मंदिर के भीतर माता पार्वती, भगवान गणेश और महर्षि अगस्त्य की प्राचीन मूर्तियां भी स्थापित हैं, जो इस परिसर की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता को और बढ़ाती हैं।

    मंदिर की दीवारों पर रामायण और भागवत पर आधारित विस्तृत शिल्पांकन आज भी आकर्षण का केंद्र हैं। इन कलाकृतियों में भारतीय संस्कृति और पौराणिक परंपराओं की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। मंदिर परिसर में नियमित रूप से रामायण बैले का मंचन भी किया जाता है, जो स्थानीय संस्कृति और भारतीय महाकाव्य की गहरी ऐतिहासिक कड़ी को दर्शाता है।

    प्रम्बानन मंदिर को वर्ष 1991 में विश्व धरोहर का दर्जा मिला था। यह स्थल आज भी लाखों पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। भारतीय और इंडोनेशियाई विशेषज्ञों के सहयोग से मंदिर परिसर के कुछ पुराने और क्षतिग्रस्त हिस्सों के संरक्षण और जीर्णोद्धार की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान इस सहयोग को आगे बढ़ाने से जुड़े महत्वपूर्ण कदमों की भी घोषणा होने की संभावना है।

    इंडोनेशिया दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन यहां हिंदू और बौद्ध सभ्यता की विरासत आज भी सुरक्षित है। इस्लाम के आगमन से पहले यहां कई शक्तिशाली हिंदू-बौद्ध राजवंशों का शासन रहा, जिनकी छाप आज भी मंदिरों, स्मारकों और सांस्कृतिक परंपराओं में दिखाई देती है। जावा, बाली, सुमात्रा और अन्य द्वीपों पर स्थित अनेक प्राचीन मंदिर इस ऐतिहासिक विरासत के साक्षी हैं।

    बाली द्वीप आज भी हिंदू संस्कृति का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में हिंदू आबादी निवास करती है। वहीं इंडोनेशिया की सांस्कृतिक पहचान में रामायण, महाभारत, भगवान हनुमान और गरुड़ जैसे पात्रों का विशेष स्थान है। इनका प्रभाव स्थानीय कला, नृत्य, साहित्य और सांस्कृतिक आयोजनों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल सांस्कृतिक महत्व तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को भी आगे बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। दोनों देशों के साझा हितों को देखते हुए यह दौरा व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक रणनीतिक सहयोग के इस संतुलन से भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को नई गति मिलेगी। प्रम्बानन मंदिर का दौरा इस बात का भी प्रतीक होगा कि सांस्कृतिक जुड़ाव आज भी दोनों देशों की साझेदारी की मजबूत नींव बना हुआ है।

  • तीन देशों की अहम यात्रा पर रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ आर्थिक व रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

    तीन देशों की अहम यात्रा पर रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ आर्थिक व रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिवसीय विदेश यात्रा पर इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे के लिए रवाना हो गए हैं। यह यात्रा भारत के लिए कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरान विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों, उच्चस्तरीय वार्ताओं और भारतीय समुदाय के साथ संवाद के माध्यम से तीनों देशों के साथ सहयोग को और व्यापक बनाने पर जोर रहेगा। यात्रा का उद्देश्य व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, तकनीक और लोगों के बीच संबंधों को नई दिशा देना भी है।

    रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दौरा भारत के प्रमुख विकास साझेदार देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई गति देने के साथ-साथ युवाओं के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा से भारत के वैश्विक सहयोग और क्षेत्रीय साझेदारी को नया बल मिलेगा।

    यात्रा का पहला पड़ाव इंडोनेशिया है, जहां प्रधानमंत्री कई उच्चस्तरीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। दोनों देशों के बीच वर्षों से मजबूत सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और समुद्री संबंध रहे हैं। इस दौरे के दौरान द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों की समीक्षा के साथ भविष्य की साझेदारी को और व्यापक बनाने पर चर्चा होने की संभावना है। सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कार्यक्रम भी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को नई मजबूती देंगे।

    इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे, जहां रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी सहयोग जैसे प्रमुख विषयों पर वार्ता होगी। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग, उभरती प्रौद्योगिकियों, नवाचार और खेल विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है।

    ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। विदेशों में बसे भारतीय समुदाय को भारत और संबंधित देशों के बीच सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। ऐसे संवाद दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड जाएंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई गति देने, निवेश बढ़ाने और व्यावसायिक सहयोग को विस्तार देने पर चर्चा होगी। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। भारतीय समुदाय के साथ संवाद भी इस दौरे का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार, शिक्षा, कृषि, नवाचार और सेवा क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित उच्चस्तरीय संवाद से दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूती मिल सकती है।

    प्रधानमंत्री की यह तीन देशों की यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और मुक्त, समावेशी तथा नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अवधारणा को भी आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सहयोग और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने के भारत के प्रयासों को भी इस दौरे से नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • प्रधानमंत्री मोदी का इंडोनेशिया दौरा कई मोर्चों पर अहम, रणनीतिक सहयोग से लेकर डिजिटल कनेक्टिविटी तक बनेंगे नए आयाम

    प्रधानमंत्री मोदी का इंडोनेशिया दौरा कई मोर्चों पर अहम, रणनीतिक सहयोग से लेकर डिजिटल कनेक्टिविटी तक बनेंगे नए आयाम

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों की विदेश यात्रा के पहले चरण में होने वाला इंडोनेशिया दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। 6 से 8 जुलाई तक प्रस्तावित इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल सहयोग, कृषि, खनिज संसाधनों और सांस्कृतिक संबंधों सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर रहेगा।

    भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुई है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों की समीक्षा और भविष्य की सहयोग योजनाओं को गति देने का अवसर भी मानी जा रही है। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्गों को साझा प्राथमिकता मानते हैं।

    रक्षा और समुद्री सुरक्षा इस यात्रा के प्रमुख एजेंडों में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और रक्षा उद्योग में सहयोग को और व्यापक बनाने पर चर्चा होने की संभावना है। समुद्री सुरक्षा, समुद्री निगरानी और हिंद महासागर क्षेत्र में समन्वय बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत करने के पक्षधर हैं।

    आर्थिक सहयोग भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण पहलू रहेगा। भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है और दोनों देश निवेश के नए अवसरों की तलाश में हैं। विनिर्माण, ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा होगी। दोनों देशों के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर भी जोर दिया जाएगा।

    महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग को भी प्राथमिकता मिलने की संभावना है। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े उद्योगों के लिए आवश्यक खनिजों की उपलब्धता को देखते हुए दोनों देश आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

    डिजिटल सहयोग इस यात्रा का एक और प्रमुख आयाम है। दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान प्रणाली, ई-कॉमर्स, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और तकनीकी नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। इससे व्यापार, पर्यटन, निवेश और लोगों के बीच संपर्क को और अधिक सरल तथा प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    कृषि, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक कल्याण से जुड़े क्षेत्रों में भी अनुभव साझा करने पर जोर रहेगा। टिकाऊ कृषि, खाद्यान्न सुरक्षा, सार्वजनिक वितरण व्यवस्था, डिजिटल कृषि और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में दोनों देश एक-दूसरे के सफल मॉडलों से सीखने और सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

    इस यात्रा का सांस्कृतिक पक्ष भी विशेष महत्व रखता है। भारत और इंडोनेशिया के बीच हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक, धार्मिक और समुद्री संबंध रहे हैं। साझा विरासत, सभ्यतागत जुड़ाव और लोगों के बीच संपर्क को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों और उच्चस्तरीय मुलाकातों का आयोजन भी प्रस्तावित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को व्यापक रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी के नए चरण में पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

  • भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगा नया आयाम, पीएम मोदी के दौरे पर टैगोर की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी खास पुस्तक की जाएगी भेंट

    भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगा नया आयाम, पीएम मोदी के दौरे पर टैगोर की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी खास पुस्तक की जाएगी भेंट


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया के दौरे पर रहेंगे, जहां उनके स्वागत की व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह यात्रा भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति और दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत होते संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जकार्ता सहित कई प्रमुख स्थानों पर स्वागत की तैयारियों के बीच इस दौरे का सांस्कृतिक महत्व भी विशेष रूप से चर्चा में है।

    प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में द्विपक्षीय बैठकों के साथ भारतीय समुदाय से संवाद भी शामिल है। इस दौरान व्यापार, निवेश, समुद्री सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक साझेदारी जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को नई गति देने की दिशा में इस यात्रा को अहम माना जा रहा है।

    इस दौरे की एक विशेष उपलब्धि यह भी होगी कि प्रधानमंत्री मोदी को गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की ऐतिहासिक इंडोनेशिया यात्रा पर आधारित एक विशेष पुस्तक भेंट की जाएगी। यह वर्ष टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है, जिससे इस यात्रा का सांस्कृतिक महत्व और बढ़ गया है। पुस्तक में टैगोर की यात्रा, उनके अनुभवों और भारत तथा इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है।

    बताया गया है कि इस पुस्तक पर पिछले दो वर्षों से शोध और लेखन का कार्य किया गया। शताब्दी वर्ष के अवसर पर इसके पूर्ण होने को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। लेखक का मानना है कि यह पुस्तक दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक संबंधों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी।

    रवींद्रनाथ टैगोर ने लगभग एक सदी पहले इंडोनेशिया की यात्रा के दौरान वहां की संस्कृति, कला और परंपराओं का गहन अध्ययन किया था। उन्होंने जावा, बाली, सुमात्रा, जकार्ता और अन्य क्षेत्रों का भ्रमण करते हुए भारतीय सांस्कृतिक प्रभावों को करीब से देखा। विशेष रूप से रामायण और महाभारत से जुड़े सांस्कृतिक स्वरूपों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया था।

    अपनी यात्रा के दौरान टैगोर ने प्रसिद्ध बोरोबुदुर मंदिर का भी भ्रमण किया और वहां की सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। उन्होंने स्थानीय कला, नृत्य और पारंपरिक शिल्प में गहरी रुचि दिखाई। उनकी इस यात्रा का प्रभाव बाद में भारतीय सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों में भी दिखाई दिया, जहां दक्षिण-पूर्व एशियाई कला और परंपराओं को विशेष महत्व दिया गया।

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल कूटनीतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों को भी नई पहचान देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ साझा सांस्कृतिक विरासत पर आधारित यह पहल दोनों देशों के रिश्तों को भविष्य में और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।