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  • Indonesia: होटल से डोरमैट, बर्तन, हेयर ड्रायर चुराते पकड़े गए भारतीय पर्यटक, कटाई देश की नाक

    Indonesia: होटल से डोरमैट, बर्तन, हेयर ड्रायर चुराते पकड़े गए भारतीय पर्यटक, कटाई देश की नाक


    उबुद (बाली)।
    इंडोनेशिया (Indonesia) के बाली में भारतीय पर्यटकों (Indian tourists) के एक समूह द्वारा होटल का सामान (Hotel stuff) चोरी करने का एक शर्मनाक मामला सामने आया है। यह घटना 19 अप्रैल को उबुद के असवारा रिसॉर्ट (Asvara Resort) में हुई, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। चेक-आउट के दौरान पकड़ी गई चोरी रिपोर्टों के अनुसार, यह समूह 16 अप्रैल से रिसॉर्ट में रुका हुआ था और 19 अप्रैल को चेक-आउट कर रहा था। चेक-आउट की प्रक्रिया के दौरान, होटल के कर्मचारियों को कुछ सामान कम होने का संदेह हुआ। जब पर्यटकों को रोककर उनके सामान की तलाशी ली गई, तो उनके बैग से होटल की कई चीजें बरामद हुईं।


    बैग से निकला हेयर ड्रायर और डोरमैट

    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि होटल स्टाफ पर्यटकों के बैग खोलकर उनमें से चोरी किया गया सामान निकाल रहा है। बरामद की गई वस्तुओं में पूल टॉवल, बाथ टॉवल, एक डोरमैट, किमोनो रोब्स, हेयर ड्रायर, बर्तन और टीवी रिमोट का बॉक्स शामिल थे। वीडियो में एक कर्मचारी को यह कहते सुना जा सकता है कि ये पर्यटक भारत से हैं, जिस पर समूह के ही एक सदस्य ने सफाई देते हुए कहा, “सभी भारतीय ऐसे नहीं होते”।


    सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा

    इस घटना के वीडियो ने इंटरनेट पर भारतीयों के बीच काफी नाराजगी पैदा कर दी है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे “शर्मनाक” और “घटिया कृत्य” बताया है। एक यूजर ने टिप्पणी की, “वे विदेश यात्रा का खर्च तो उठा सकते हैं, लेकिन अपने लिए चम्मच और तौलिए नहीं खरीद सकते?” वहीं अन्य लोगों ने इसे देश की छवि खराब करने वाला व्यवहार बताया।


    पुलिस की कार्रवाई और मामला सुलझा

    इस बीच, गियान्यार पुलिस (Gianyar Police) के प्रवक्ता इप्तु आई गुस्ती नगुरह सुआर्डिता ने बताया कि इस मामले में कोई कानूनी केस दर्ज नहीं किया गया है। पुलिस के अनुसार, होटल प्रबंधन और पर्यटकों के बीच मामले को आपसी सहमति से सुलझा लिया गया। पर्यटकों द्वारा सारा सामान वापस कर दिए जाने के बाद उन्हें जाने की अनुमति दे दी गई।

  • इंडोनेशिया का भारत को बड़ा झटका! टाटा-महिंद्रा के 1.05 लाख ट्रकों का मेगा ऑर्डर फिलहाल रोका

    इंडोनेशिया का भारत को बड़ा झटका! टाटा-महिंद्रा के 1.05 लाख ट्रकों का मेगा ऑर्डर फिलहाल रोका


    नई दिल्ली ।
    दक्षिण पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इंडोनेशिया ने भारत की ऑटो इंडस्ट्री को बड़ा झटका दिया है। स्थानीय नीति निर्माताओं और व्यापारिक संगठनों के तीखे विरोध के बाद इंडोनेशिया सरकार ने भारतीय कंपनियों टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा से 1 05 000 ट्रकों की खरीद के मेगा ऑर्डर पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह डील दोनों भारतीय कंपनियों के लिए अब तक के सबसे बड़े निर्यात ऑर्डरों में से एक मानी जा रही थी।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इस ऑर्डर के तहत महिंद्रा को 35 ,000 स्कॉर्पियो पिक अप वाहन सप्लाई करने थे जिसे कंपनी अपने इतिहास का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट ऑर्डर बता रही थी। वहीं टाटा मोटर्स की स्थानीय इकाई को 35,000 योद्धा पिक अप और 35 ,000 अल्ट्रा T.7 ट्रकों की डिलीवरी करनी थी। इंडोनेशिया के लिए यह टाटा का अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर माना जा रहा था। हालांकि इस फैसले पर दोनों कंपनियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    दरअसल यह पूरा प्रोजेक्ट इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियान्टो की महत्वाकांक्षी योजना से जुड़ा है। सरकार देशभर में 80,000 से ज्यादा सामुदायिक सहकारी समितियां स्थापित करना चाहती है। इन 4×4 और 6 पहिया ट्रकों का इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में कोल्ड स्टोरेज सब्सिडी वाली खाद और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए किया जाना था। साथ ही ये समितियां लोन सेवाएं भी देतीं जिससे सरकार सीधे ग्रामीण आबादी तक पहुंच बना सके।

    लेकिन जकार्ता में इस बड़े आयात का जबरदस्त विरोध हुआ। इंडोनेशिया में पहले से टोयोटा सुजुकी और मित्सुबिशी जैसी वैश्विक कंपनियों की बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स मौजूद हैं। कमजोर घरेलू मांग और घटती कार बिक्री के बीच स्थानीय उद्योग पहले ही दबाव में है। ऐसे में बाहर से 1 लाख से ज्यादा वाहन आयात करने के फैसले को उद्योग संगठनों ने सरकार की औद्योगीकरण और रोजगार सृजन नीति के खिलाफ बताया।

    इंडोनेशिया के उद्योग मंत्री अगुस गुमीवांग कर्तासस्मिता ने कहा कि देश के ऑटो सेक्टर में सालाना लगभग 10 लाख पिक अप ट्रक बनाने की क्षमता है। उनके मुताबिक अगर 70, 000 पिक अप ट्रक देश में ही बनाए जाते तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को करीब 27 ट्रिलियन रुपिया लगभग 1.6 अरब डॉलर का फायदा होता और हजारों नौकरियां पैदा होतीं।

    यह खरीद सरकारी कंपनी पीटी अग्रिनास पंगन नुसंतारा द्वारा की जानी थी जिसे खाद्य आत्मनिर्भरता और कृषि परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में स्थापित किया गया है। शेष सरकार और संसद के बीच अहम बैठक तक इस आदेश को होल्ड पर रखा गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इंडोनेशिया सरकार स्थानीय निर्माण को प्राथमिकता देगी या भारत के साथ इस बड़े व्यापारिक समझौते को फिर से हरी झंडी मिलेगी। यह फैसला दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर भी असर डाल सकता है।