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  • इंदौर में 2 करोड़ का फायर फाइटिंग रोबोट, आग बुझाने में करेगा मदद

    इंदौर में 2 करोड़ का फायर फाइटिंग रोबोट, आग बुझाने में करेगा मदद


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में अब आग बुझाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो गया है। नगर निगम ने करीब ₹2 करोड़ की लागत से एक AI आधारित फायर फाइटिंग रोबोट तैनात किया है, जो उन जगहों पर जाकर आग बुझा सकता है, जहां इंसानों का जाना बेहद खतरनाक होता है। यह रोबोट जयपुर की रोबोटिक्स कंपनी द्वारा विकसित किया गया है और इसे विशेष रूप से औद्योगिक और उच्च जोखिम वाली आग की घटनाओं के लिए तैयार किया गया है।

    कैसे काम करता है यह रोबोट?
    यह फायर फाइटिंग रोबोट पूरी तरह रिमोट ऑपरेटेड है और इसे दूर से नियंत्रित किया जाता है। इसमें लगा कैमरा और डिस्प्ले सिस्टम ऑपरेटर को लाइव स्थिति दिखाता है, जिससे यह पता चलता है कि आगे क्या हो रहा है। यह एक तरह का क्रॉलर टैंक सिस्टम है, जो खराब रास्तों, मलबे और सीढ़ियों पर भी आसानी से चल सकता है।

    500°C की आग में भी काम करने की क्षमता
    इस रोबोट की सबसे बड़ी खासियत इसकी गर्मी सहने की क्षमता है। यह लगभग 500 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी काम कर सकता है।
    इसके अलावा इसमें-
    थर्मल इमेजिंग कैमरा
    AI आधारित ऑब्जेक्ट डिटेक्शन
    हाई प्रेशर वाटर और फोम सिस्टम
    मजबूत क्रॉलर ट्रैक
    जैसी आधुनिक तकनीकें लगी हैं, जो इसे बेहद प्रभावी बनाती हैं।

    8 से 10 घंटे तक लगातार काम
    यह रोबोट एक बार चार्ज होने पर लगभग 8 से 10 घंटे तक लगातार काम कर सकता है। इसकी बैटरी सिस्टम और कूलिंग तकनीक इसे लंबे समय तक सक्रिय रहने में मदद करती है। यह फायर टैंकर से जुड़कर पानी और फोम दोनों के जरिए आग पर काबू पा सकता है।
    इंदौर में इस रोबोट का इस्तेमाल कई बड़े हादसों में किया गया है, जिनमें शामिल हैं-
    नवदा पंथ प्लास्टिक फैक्ट्री आग
    परदेशीपुरा की आग
    सिटी फॉरेस्ट क्षेत्र की घटना
    पीथमपुर की बड़ी औद्योगिक आग
    इन सभी मामलों में इस रोबोट ने जोखिम भरे हालात में फायरफाइटिंग में अहम भूमिका निभाई।

    क्यों है यह तकनीक खास?
    यह रोबोट खास तौर पर उन जगहों के लिए बनाया गया है जहां-
    तेल और गैस प्लांट
    केमिकल और पेट्रोकेमिकल फैक्ट्री
    बड़े गोदाम और लॉजिस्टिक हब
    बिजली संयंत्र और ट्रांसफॉर्मर यूनिट
    जैसे हाई रिस्क क्षेत्र शामिल हैं।
    यह लगभग 500 किलो तक का भार भी संभाल सकता है और भारी मलबे में भी आसानी से मूव कर सकता है।

    अधिकारियों का बयान
    नगर निगम कमिश्नर के अनुसार, यह रोबोट फायर टैंकर से जुड़कर काम करता है और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में भी लंबे समय तक आग बुझाने में सक्षम है। इससे फायरफाइटर्स की जान का जोखिम काफी कम हो जाता है।

    इंदौर का यह फायर फाइटिंग रोबोट आधुनिक आपदा प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह तकनीक न सिर्फ आग बुझाने की क्षमता बढ़ाती है, बल्कि दमकलकर्मियों की सुरक्षा को भी नए स्तर पर ले जाती है।

  • इंदौर में रिश्तों को लेकर बढ़े विवाद, पंचायत में सामने आए अहम सामाजिक मुद्दे

    इंदौर में रिश्तों को लेकर बढ़े विवाद, पंचायत में सामने आए अहम सामाजिक मुद्दे


    नई दिल्ली । इंदौर में सिंधी समाज द्वारा शुरू की गई मध्यस्थता पहल लगातार चर्चा में है। समाज की पंचायत ने अब तक 800 से अधिक पारिवारिक और वैवाहिक विवादों को सुलझाया है, जिनमें कई मामले तलाक तक पहुंचने की कगार पर थे। लेकिन बातचीत, काउंसलिंग और आपसी समझ के जरिए कई परिवारों को टूटने से बचा लिया गया।

    एक मामले में एक महिला अपने वैवाहिक जीवन से बेहद असंतुष्ट थी और तलाक चाहती थी। विवाद बढ़ने पर मामला समाज की पंचायत तक पहुंचा, जहां दोनों पक्षों को सुना गया और मेडिकल व काउंसलिंग सहायता भी ली गई। इसके बाद दोनों को साथ रहने के लिए तैयार किया गया।

    पंचायत से जुड़े सदस्यों के अनुसार, अब तक सामने आए कुल मामलों में लगभग 48% विवाद वैवाहिक जीवन से जुड़े हैं। इनमें एक बड़ा हिस्सा निजी और दाम्पत्य जीवन में असंतुष्टि से जुड़ा पाया गया है। इसके अलावा संपत्ति, आर्थिक और पारिवारिक विवाद भी बड़ी संख्या में सामने आए हैं।

    विशेषज्ञों और समाज के डॉक्टरों की मदद से कई मामलों में काउंसलिंग भी कराई जाती है, ताकि समस्याओं को चिकित्सकीय और मानसिक दृष्टिकोण से भी समझा जा सके। पंचायत का दावा है कि हर मामला अलग होता है और उसका समाधान भी व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार किया जाता है।

    इसके अलावा समाज ने विवाह योग्य युवाओं का एक सर्वे भी किया है, जिसमें 22 से 29 और 30 से 40 वर्ष के आयु वर्ग में अविवाहित युवक-युवतियों का आंकड़ा भी सामने आया है। यह डेटा सामाजिक बदलाव और विवाह संबंधी प्रवृत्तियों को भी दर्शाता है।

    इस पहल को समाज में परिवारों को जोड़कर रखने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जो आधुनिक समय में बदलते रिश्तों की जटिलताओं को समझने की दिशा में एक उदाहरण बन रही है।

  • चेकिंग से बचने की कोशिश में बेकाबू ट्राला, पुलिस ने रोका तो फोड़े गए कांच

    चेकिंग से बचने की कोशिश में बेकाबू ट्राला, पुलिस ने रोका तो फोड़े गए कांच


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Indore में गुरुवार को एक बड़ा हंगामा उस समय हो गया जब छत्रीपुरा इलाके में पुलिस चेकिंग के दौरान एक ट्राला चालक ने बैरिकेड तोड़कर भागने की कोशिश की। यह घटना गंगवाल बस स्टैंड क्षेत्र में हुई, जहां पुलिस ने वाहन जांच के लिए बैरिकेड और स्टॉपर लगाए हुए थे।

    पुलिस के अनुसार, चेकिंग के दौरान एक ट्राला तेज रफ्तार में आया और रोकने के प्रयास के बावजूद चालक ने बैरिकेड्स को टक्कर मारते हुए आगे बढ़ा दिया। इसके बाद ट्राला जवाहर मार्ग की ओर तेज गति से भाग निकला, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    घटना के बाद पुलिस ने तुरंत ट्राले का पीछा शुरू किया। सूचना मिलते ही अलग-अलग टीमों ने इलाके में नाकेबंदी कर दी। ट्राला जब बंबई बाजार क्षेत्र में पहुंचा तो पुलिस ने एफआरवी वाहन लगाकर उसे रोक लिया।

    हालांकि ट्राले के रुकते ही स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। मौके पर मौजूद लोगों में गुस्सा फैल गया और भीड़ ने ट्राले के कांच फोड़ दिए। कुछ देर के लिए वहां माहौल तनावपूर्ण हो गया, लेकिन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया।

    अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान यह अफवाह भी फैल गई कि ट्राले ने रास्ते में कुछ लोगों को टक्कर मार दी है। हालांकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस तरह की किसी भी घटना से इनकार किया है और स्पष्ट किया है कि कोई जनहानि नहीं हुई है।

    पुलिस ने ट्राले को जब्त कर लिया है और चालक से पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि चालक नशे की हालत में हो सकता है, हालांकि इसकी पुष्टि मेडिकल जांच के बाद ही की जाएगी।

    Indore में हुई इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और नशे में वाहन चलाने के खतरे को उजागर कर दिया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि चालक चेकिंग से क्यों भागा और क्या वाहन में कोई अन्य अनियमितता थी।

    फिलहाल इलाके में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन घटना के बाद कुछ समय तक बंबई बाजार क्षेत्र में तनाव का माहौल बना रहा।

  • इंदौर में स्वास्थ्य संस्थान पर सवाल: नर्सों ने लगाए गंभीर आरोप, मैनेजमेंट पर बढ़ा दबाव

    इंदौर में स्वास्थ्य संस्थान पर सवाल: नर्सों ने लगाए गंभीर आरोप, मैनेजमेंट पर बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Indore स्थित बॉम्बे हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों में आ गया है। यहां कार्यरत नर्सों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्हें नर्सिंग ऑफिसर और सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा 2026 में शामिल होने के लिए आवश्यक छुट्टी नहीं दी जा रही है। इस मामले ने अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों के बीच तनाव की स्थिति पैदा कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, अस्पताल की करीब 30 से 35 नर्सों ने सरकारी भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन किया है, जो 15 मई को आयोजित होनी है। इनमें से कई नर्सों के परीक्षा केंद्र भोपाल सहित अन्य शहरों में हैं, जिसके चलते उन्हें यात्रा और परीक्षा में शामिल होने के लिए अवकाश की आवश्यकता है।

    नर्सों का आरोप है कि उन्होंने प्रबंधन से छुट्टी की मांग की थी, लेकिन इसे स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया गया। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि यदि कोई कर्मचारी परीक्षा देने जाता है तो वह अपनी जिम्मेदारी पर जाएगा और ड्यूटी व्यवस्था में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा।

    नर्सों के अनुसार, अस्पताल की नर्सिंग सुपरिटेंडेंट सीबी जॉर्ज की ओर से एक ऑडियो संदेश जारी किया गया है, जिसमें कहा गया कि नियुक्ति के समय परीक्षा के लिए छुट्टी देने का कोई वादा नहीं किया गया था, इसलिए किसी भी प्रकार की छुट्टी या समायोजन संभव नहीं है।

    इस स्थिति से नर्सों में नाराजगी के साथ-साथ चिंता भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी करना उनका अधिकार है, लेकिन वर्तमान नौकरी में दबाव बनाकर उन्हें परीक्षा से दूर रखने की कोशिश की जा रही है। कई कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि अनुपस्थित रहने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और हॉस्टल खाली कराने तक की चेतावनी दी गई है।

    हॉस्टल में रहने वाली नर्सों को कथित तौर पर यह संदेश भी दिया गया है कि 14 और 15 मई को किसी भी कर्मचारी को नाइट पास नहीं दिया जाएगा और ड्यूटी से अनुपस्थित पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। इससे कई नर्सें मानसिक दबाव में हैं और अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं।

    हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को अलग दृष्टिकोण से देखा है। बॉम्बे हॉस्पिटल के डायरेक्टर का कहना है कि यदि एक साथ बड़ी संख्या में नर्सें छुट्टी पर चली जाती हैं, तो अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित होगी। विशेषकर इमरजेंसी और किडनी यूनिट जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं पर असर पड़ सकता है।

    प्रबंधन का यह भी कहना है कि उन्होंने किसी को परीक्षा देने से रोका नहीं है, लेकिन नियमित अवकाश (सीएल आदि) देना संभव नहीं है क्योंकि इससे अस्पताल संचालन प्रभावित हो सकता है।

    Indore में इस विवाद ने स्वास्थ्य सेवाओं में स्टाफ प्रबंधन और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • आग का कहर: इंदौर पेट्रोल पंप पर टैंकर में लगी आग, ड्राइवर की सूझबूझ से बची बड़ी दुर्घटना

    आग का कहर: इंदौर पेट्रोल पंप पर टैंकर में लगी आग, ड्राइवर की सूझबूझ से बची बड़ी दुर्घटना


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Indore में गुरुवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब मांगलिया इलाके में स्थित एक पेट्रोल पंप पर खड़े ईंधन टैंकर में अचानक आग लग गई। यह घटना सुबह करीब 10 बजे की बताई जा रही है, जिसने कुछ देर के लिए पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया।

    जानकारी के अनुसार, पेट्रोल पंप पर एक खाली हो चुका टैंकर खड़ा था, जिसमें अचानक केबिन के हिस्से में शॉर्ट सर्किट के कारण आग भड़क उठी। आग लगते ही वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया और स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी, क्योंकि पेट्रोल पंप जैसे संवेदनशील स्थान पर जरा सी चिंगारी भी बड़े विस्फोट का कारण बन सकती है।

    हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में ड्राइवर की सूझबूझ ने एक बड़े हादसे को टाल दिया। जैसे ही उसे आग का अहसास हुआ, उसने तुरंत जलते हुए टैंकर को पेट्रोल पंप से दूर ले जाकर खड़ा कर दिया। इस त्वरित निर्णय से आग पंप के फ्यूल एरिया तक नहीं पहुंच पाई और बड़ा विस्फोट होने से बच गया।

    घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। दमकल कर्मियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए करीब एक टैंकर पानी की मदद से आग पर काबू पाया। आग बुझाने के दौरान पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर इलाके में यातायात को आंशिक रूप से रोक दिया, जबकि आसपास के लोगों को सुरक्षित दूरी पर हटाया गया।

    पेट्रोल पंप कर्मचारियों को भी तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी व्यक्ति को चोट नहीं आई।

    Indore में हुई इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि जरा सी लापरवाही भी बड़े खतरे का कारण बन सकती है, खासकर ईंधन भंडारण वाले स्थानों पर। हालांकि ड्राइवर की समय रहते की गई कार्रवाई और दमकल विभाग की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया।

    घटना के बाद कुछ समय तक इलाके में दहशत का माहौल रहा, लेकिन आग पर काबू पाने के बाद स्थिति सामान्य हो गई। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है कि आखिर शॉर्ट सर्किट कैसे हुआ और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

  • बाणगंगा पुलिस पर आरोप: 9 घंटे शव लेकर घूमते रहे परिजन, सिस्टम की बड़ी लापरवाही उजागर

    बाणगंगा पुलिस पर आरोप: 9 घंटे शव लेकर घूमते रहे परिजन, सिस्टम की बड़ी लापरवाही उजागर


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Indore से सामने आया यह मामला सिस्टम की संवेदनहीनता और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक 21 वर्षीय युवक की करंट लगने से मौत के बाद उसके शव को पोस्टमॉर्टम के लिए परिजन लगभग 9 घंटे तक बाइक पर लेकर इधर-उधर भटकते रहे।

    घटना 11 मई की बताई जा रही है, जब निर्माणाधीन मकान में काम के दौरान युवक को करंट लग गया था। परिजन उसे तुरंत अरबिंदो अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। लेकिन परिवार यह मानने को तैयार नहीं था और शव को लेकर दूसरी जगह इलाज के लिए निकल गया।

    यहीं से स्थिति और जटिल हो गई। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी थी, लेकिन बाणगंगा थाना पुलिस की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया और स्पष्ट रूप से कहा कि “अब शव ले गए हैं, तुम जानो तुम्हारा काम जाने।”

    इसके बाद परिजन शव को बाइक पर लेकर इंदौर और आसपास के इलाकों में अस्पताल दर अस्पताल घूमते रहे। सांवेर के एक अस्पताल में भी डॉक्टरों ने युवक को मृत घोषित किया, लेकिन तब तक परिवार मानसिक रूप से बेहद आहत और आक्रोशित हो चुका था।

    स्थिति तब और बिगड़ गई जब अलग-अलग जगहों पर पुलिस और अस्पताल के बीच समन्वय की कमी साफ दिखाई दी। परिजन कई घंटों तक शव को लेकर सड़कों पर भटकते रहे, जिससे स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी गई।

    आखिरकार देर रात शव को वापस अस्पताल की मर्चुरी में रखा गया, लेकिन अगले दिन भी पोस्टमॉर्टम में देरी को लेकर परिजनों ने हंगामा किया। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी की गई, तब जाकर पोस्टमॉर्टम हो सका और अंतिम संस्कार किया गया।

    इस पूरे मामले ने Indore में स्वास्थ्य व्यवस्था और पुलिस प्रशासन के बीच तालमेल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल प्रबंधन ने दावा किया है कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की स्थिति बनी हो और पुलिस की लापरवाही के कारण परिजन परेशान हुए हों।

    वहीं पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच की बात कही है और कहा है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना न केवल एक परिवार के दर्द को दिखाती है, बल्कि यह भी सवाल उठाती है कि आपात स्थितियों में सिस्टम कितना तैयार और संवेदनशील है।

  • इंदौर में बड़ा मामला: पुलिस पर मारपीट का आरोप, शादी और तलाक विवाद में फंसा परिवार

    इंदौर में बड़ा मामला: पुलिस पर मारपीट का आरोप, शादी और तलाक विवाद में फंसा परिवार


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Indore में एक पारिवारिक विवाद अब पुलिस और एक डॉक्टर के बीच गंभीर टकराव में बदल गया है। हीरानगर थाना क्षेत्र में दहेज प्रताड़ना के एक मामले के बाद डॉक्टर अभिषेक ने पुलिसकर्मियों पर मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।

    पूरा मामला एक महिला की शिकायत से शुरू हुआ, जिसमें उसने अपने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया था। महिला का कहना है कि उसकी शादी 29 नवंबर 2025 को हुई थी और शादी के कुछ ही दिनों बाद उसका पति नोएडा चला गया था। महिला ने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष उसे कार और पैसों के लिए प्रताड़ित करता था।

    महिला की शिकायत पर पुलिस ने उसके पति, जेठ (डॉक्टर अभिषेक), सास-ससुर सहित पूरे परिवार के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कर लिया। इसके बाद पुलिस ने सभी पक्षों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया था।

    इसी दौरान मामला तब और बढ़ गया जब डॉक्टर अभिषेक ने पुलिस पर ही मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप लगा दिए। उनका कहना है कि उन्हें थाने में बुलाकर उनके साथ गलत व्यवहार किया गया, जबकि पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है।

    थाना प्रभारी के अनुसार, पुलिस ने केवल कानूनी कार्रवाई के तहत पूछताछ की थी और आरोपों से बचने के लिए डॉक्टर झूठे आरोप लगा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सभी कार्रवाई नियमों के तहत की गई है और दहेज प्रताड़ना के मामले में पर्याप्त सबूतों के आधार पर FIR दर्ज हुई है।

    इस पूरे विवाद में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है, जिसमें महिला ने आरोप लगाया है कि उसका पति नोएडा में किसी अन्य युवक के साथ रह रहा है और वह उससे तलाक लेना चाहता है।

    वहीं, पूछताछ के दौरान डॉक्टर अभिषेक ने सीने में दर्द की शिकायत की, जिसके बाद पुलिस उन्हें अस्पताल भी ले गई, लेकिन जांच में उनकी स्थिति सामान्य पाई गई।

    फिलहाल दोनों पक्षों के आरोपों के बीच मामला और जटिल होता जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और सच्चाई सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • डॉग फीडिंग के दौरान युवक पर हमला, इंदौर की घटना CCTV में रिकॉर्ड-पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

    डॉग फीडिंग के दौरान युवक पर हमला, इंदौर की घटना CCTV में रिकॉर्ड-पुलिस ने शुरू की कार्रवाई


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Indore के द्वारकापुरी इलाके में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां बेसहारा कुत्तों को खाना खिला रहे एक वॉलंटियर अमन तोमर पर आधा दर्जन से अधिक लोगों ने हमला कर दिया। यह पूरी वारदात पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।
    जानकारी के अनुसार, पीड़ित अमन तोमर लंबे समय से इलाके में आवारा कुत्तों को भोजन कराने का काम कर रहे हैं। घटना उस समय हुई जब उन्होंने एक व्यक्ति को कुत्ते के साथ मारपीट करते हुए देखा और उसे रोकने की कोशिश की। इसी बात पर विवाद बढ़ गया और मामला हिंसक हो गया।
    आरोप है कि कुछ ही देर बाद कई लोग मौके पर पहुंचे और उन्होंने अमन तोमर पर हमला कर दिया। हमलावरों ने मिलकर युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे वह घायल हो गया।
    घटना के बाद स्थानीय पशु प्रेमियों ने पुलिस पर शुरुआती कार्रवाई में लापरवाही का आरोप लगाया और मामला पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक पहुंचाया। इसके बाद People For Animals की इंदौर इकाई के प्रतिनिधियों सहित अन्य कार्यकर्ता भी शिकायत लेकर पहुंचे और उन्होंने पूरे मामले का सीसीटीवी फुटेज अधिकारियों को सौंपा।
    शिकायत के बाद पुलिस ने द्वारकापुरी थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हमलावरों की पहचान की जा रही है और जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
    पीड़ित का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। वहीं, इस घटना ने इलाके में पशु सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
  • इंदौर: बीजेपी नेता की कार में आग लगने से हड़कंप, शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की संभावना

    इंदौर: बीजेपी नेता की कार में आग लगने से हड़कंप, शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की संभावना


    नई दिल्ली । इंदौर के प्रजाप्रत नगर स्थित राम टेकरी इलाके में शनिवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक खड़ी कार में अचानक आग लग गई। यह कार बीजेपी नेता शिवेंद्र सिंह गौड़ की बताई जा रही है। घटना रात करीब 11 बजे की है, जब स्थानीय लोगों ने कार से धुआं और आग की लपटें निकलते देख तुरंत इसकी सूचना दमकल विभाग को दी।

    सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया। दमकल कर्मियों ने करीब 5 हजार लीटर पानी का इस्तेमाल कर आग पर काबू पाया। हालांकि तब तक आग कार के आगे के हिस्से को पूरी तरह अपनी चपेट में ले चुकी थी और वाहन को काफी नुकसान हो चुका था।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के बाद स्थानीय लोगों ने भी अपने स्तर पर पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग तेजी से फैलती गई और उसे रोकना मुश्किल हो गया। कुछ ही मिनटों में कार का अगला हिस्सा पूरी तरह जलकर खाक हो गया।

    प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। हालांकि फायर विभाग और पुलिस दोनों ही इस मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं ताकि असल वजह सामने आ सके। अभी तक किसी तरह की साजिश या अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है।

    जानकारी के मुताबिक, यह कार बीजेपी नेता शिवेंद्र सिंह गौड़ की है, जो द्वारकापुरी क्षेत्र के निवासी हैं और सुदामा नगर से जुड़े हुए हैं। वे प्रदेश युवा मोर्चा से भी जुड़े रहे हैं। इसके अलावा उनका संबंध क्षेत्रीय विधायक मालिनी गौड़ के परिवार से भी बताया जाता है।

    घटना के बाद इलाके में कुछ देर तक दहशत का माहौल रहा। स्थानीय लोगों ने राहत की सांस तब ली जब दमकल विभाग ने समय रहते आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। प्रशासन ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वाहन में आग लगने के पीछे तकनीकी खराबी थी या कोई अन्य वजह। वहीं फायर ब्रिगेड की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • इंदौर के द्वारकापुरी में रोड विवाद ने लिया हिंसक रूप, दो पक्षों में जमकर मारपीट

    इंदौर के द्वारकापुरी में रोड विवाद ने लिया हिंसक रूप, दो पक्षों में जमकर मारपीट


    नई दिल्ली। इंदौर के द्वारकापुरी क्षेत्र की गणेश मंदिर वाली गली में शुक्रवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब रोड चौड़ीकरण और अतिक्रमण को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। शुरुआत में हुई कहासुनी धीरे-धीरे इतनी बढ़ गई कि मामला हिंसक झड़प में बदल गया।
    स्थानीय लोगों के अनुसार, विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक पक्ष ने सड़क चौड़ीकरण का समर्थन करते हुए दूसरे पक्ष से सहयोग की बात कही। हालांकि, दूसरे पक्ष ने इस पर सहमति नहीं जताई, जिसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद ने उग्र रूप ले लिया और लोग डंडे व पाइप लेकर एक-दूसरे पर टूट पड़े।
    घटना के वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दोनों पक्षों के लोग सड़क पर हंगामा करते हुए एक-दूसरे पर हमला कर रहे हैं। इस दौरान लात-घूंसे भी चले और कुछ लोगों के बीच झूमाझटकी की स्थिति भी बनी रही। बताया जा रहा है कि मारपीट के दौरान एक व्यक्ति का गला पकड़ने की कोशिश भी की गई। इस झड़प में दोनों पक्षों के लोग घायल हो गए।
    घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
    पुलिस के अनुसार, मामले में दोनों पक्षों की शिकायत पर क्रॉस एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें लक्की बिंजवा की शिकायत पर धीरज और गिरीश के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जबकि धीरज बिंजवा की शिकायत पर सुनील, लक्की और अभिषेक के खिलाफ कार्रवाई की गई है। कुछ लोगों को राउंडअप भी किया गया है और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जा रही है।
    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि विवाद की जड़ सड़क चौड़ीकरण और कथित अतिक्रमण से जुड़ी हुई है। एक पक्ष सड़क को चौड़ा करने के पक्ष में था, जबकि दूसरे पक्ष पर निर्माण कर अतिक्रमण करने के आरोप लगाए गए हैं। इसी मुद्दे पर दोनों के बीच तनाव बढ़ता गया और मामला मारपीट तक पहुंच गया।
    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि आगे किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।