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  • मौतों के बाद भी लापरवाह सिस्टम: IDA दफ्तर में परोसा जा रहा दो साल पुराना एक्सपायरी पानी

    मौतों के बाद भी लापरवाह सिस्टम: IDA दफ्तर में परोसा जा रहा दो साल पुराना एक्सपायरी पानी


    इंदौर । भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला अभी लोगों की स्मृति से मिटा भी नहीं था कि शहर के एक प्रमुख सरकारी कार्यालय से चौंकाने वाली लापरवाही सामने आ गई है। शहर के विकास की जिम्मेदारी संभालने वाला इंदौर विकास प्राधिकरण IDA स्वयं स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी करता पाया गया है। IDA कार्यालय में आगंतुकों आम नागरिकों और बैठकों में शामिल लोगों को एक्सपायरी आरओ पानी परोसे जाने का मामला उजागर हुआ है।

    जानकारी के अनुसार IDA कार्यालय में रखी पानी की बोतलों पर पैकेजिंग तिथि 23 नवंबर 2024 अंकित है। बोतलों पर स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यह पानी निर्माण तिथि से 90 दिनों तक ही उपयोग योग्य है। इस आधार पर पानी फरवरी 2025 के बाद पीने योग्य नहीं था लेकिन हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2026 में भी यही बोतलें कार्यालय में रखी गई हैं और उपयोग में लाई जा रही हैं।

    इस पूरे मामले में सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया है कि IDA के अधिकारी स्वयं इस पानी को पीने से परहेज करते हैं। विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अधिकारी घर से अपना निजी पानी लेकर आते हैं जबकि यह एक्सपायरी बोतलबंद पानी मीटिंग आगंतुकों और वीआईपी के लिए रखा जाता है। आवश्यकता पड़ने पर एजेंट को फोन कर पेटियां मंगवा ली जाती हैं लेकिन उनकी गुणवत्ता या वैधता की कोई जांच नहीं की जाती।

    सरकारी कार्यालय में हर वर्ष बोतलबंद पानी की खरीद पर बड़ी राशि खर्च की जाती है इसके बावजूद न तो स्टॉक की नियमित जांच की जा रही है और न ही एक्सपायरी डेट पर कोई निगरानी है। यह स्थिति न केवल वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करती है बल्कि सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एक्सपायरी पानी का सेवन फूड पॉइजनिंग पेट संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। ऐसे में यदि यह पानी किसी बुजुर्ग बीमार व्यक्ति या बच्चे को परोसा जाए तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

    भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद प्रशासन ने जांच और सुधार के दावे किए थे लेकिन IDA कार्यालय की यह स्थिति दर्शाती है कि सिस्टम ने उन घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया। सरकारी दफ्तरों में आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सुरक्षा तक सुनिश्चित नहीं की जा सकी है।

    अब यह सवाल उठना लाजमी है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी पानी सप्लाई करने वाले ठेकेदार के खिलाफ क्या कदम उठाए जाएंगे और क्या पूरे स्टॉक की जांच कर दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

  • इंदौर: शादी का झांसा देकर युवती से कई बार दुष्कर्म, आरोपी रितिक कुशवाह गिरफ्तार; पॉक्सो एक्ट में भी केस दर्ज

    इंदौर: शादी का झांसा देकर युवती से कई बार दुष्कर्म, आरोपी रितिक कुशवाह गिरफ्तार; पॉक्सो एक्ट में भी केस दर्ज


    इंदौर । मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के तेजाजी नगर थाना क्षेत्र से सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक युवक ने दोस्ती का फायदा उठाते हुए एक युवती को शादी का झांसा दिया और उसके साथ कई बार दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया है।

    तेजाजी नगर थाना प्रभारी देवेंद्र मरकाम के अनुसार पीड़िता शनिवार को अपनी मां के साथ थाने पहुंची थी और आपबीती सुनाई। शिकायत के मुताबिक आरोपी रितिक कुशवाह की पहचान युवती से साल 2022 में हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और आरोपी ने युवती को प्रेम जाल में फंसाकर शादी करने का वादा किया। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने उस समय भी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे जब वह नाबालिग थी इसी आधार पर पुलिस ने मामले में दुष्कर्म की धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो ) एक्ट भी जोड़ा है।

    घटनाक्रम के विवरण के अनुसार आरोपी रितिक ने जुलाई 2025 में पीड़िता को अपने दोस्त रमन के कमरे पर ले जाकर पहली बार दुष्कर्म किया। इसके बाद नवंबर माह में उसने लिबोंदी क्षेत्र में अपने एक अन्य दोस्त के घर पर भी युवती के साथ गलत काम किया। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर करीब 6 बार उसके साथ बलात्कार किया। जब भी युवती ने शादी का दबाव बनाया आरोपी टालमटोल करने लगा और अंततः मुकर गया।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने रितिक कुशवाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस अपराध में उसके दोस्तों की क्या भूमिका थी। इंदौर पुलिस का कहना है कि महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में कोई भी कोताही नहीं बरती जाएगी और आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।

  • इंदौर में छात्र से मारपीट और ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज मामला, न्यूड वीडियो बनाने के आरोप में 5 नाबालिगों पर केस

    इंदौर में छात्र से मारपीट और ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज मामला, न्यूड वीडियो बनाने के आरोप में 5 नाबालिगों पर केस


    इंदौर । शहर के जूनी इंदौर थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें एक नाबालिग छात्र के साथ मारपीट, अपहरण और ब्लैकमेलिंग किए जाने का आरोप लगा है। पुलिस के अनुसार, स्कूल में पढ़ने वाले कुछ नाबालिग लड़कों ने आपसी रंजिश के चलते पीड़ित छात्र को निशाना बनाया और उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पहले छात्र के साथ मारपीट की, इसके बाद जबरन उसे गाड़ी में बैठाकर शहर के खजराना क्षेत्र में स्थित एक कमरे में ले गए। वहां उसे बंद कर दोबारा बेरहमी से पीटा गया। आरोप है कि इसी दौरान पीड़ित के कपड़े उतरवाकर उसका आपत्तिजनक वीडियो बना लिया गया। बाद में आरोपियों ने इस वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर छात्र को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।

    पुलिस के मुताबिक, इस पूरे मामले की जड़ स्कूल से जुड़ी आपसी रंजिश बताई जा रही है। बताया गया है कि मुख्य आरोपी करण की बहन और पीड़ित छात्र एक ही स्कूल में पढ़ते हैं। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और पांच नाबालिगों ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद आरोपियों ने पीड़ित को धमकी दी कि यदि उसने किसी को बताया या पुलिस में शिकायत की, तो उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा।

    पीड़ित छात्र ने पुलिस को बताया कि घटना के समय उसके पिता की तबीयत गंभीर रूप से खराब थी, जिसके कारण वह डर और मानसिक दबाव में रहा और तत्काल किसी को कुछ नहीं बता सका। इसी दौरान आरोपियों ने हद पार करते हुए वीडियो को पीड़ित के पिता के मोबाइल फोन पर भेज दिया। इसके बाद परिवार को पूरे मामले की जानकारी हुई और वे सीधे थाने पहुंचे।

    परिजनों की शिकायत पर जूनी इंदौर थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अपहरण, मारपीट, ब्लैकमेलिंग, आईटी एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी पांचों आरोपियों को पकड़ लिया है। पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी विधि-विवादित बालक नाबालिग हैं, जिनके खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं और वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि वीडियो कहां-कहां भेजा गया और कहीं उसे वायरल तो नहीं किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नाबालिगों से जुड़े इस संवेदनशील मामले में हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  • इंदौर दूषित पानी कांड: 24 मौतों में से 15 गंदे पानी से. MGM कॉलेज की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा. 5 माह का मासूम भी शिकार

    इंदौर दूषित पानी कांड: 24 मौतों में से 15 गंदे पानी से. MGM कॉलेज की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा. 5 माह का मासूम भी शिकार


    इंदौर । देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर में दूषित पानी कांड ने प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में फैले इस जलजनित संक्रमण ने अब तक 24 लोगों की जान ले ली है। इस दर्दनाक सूची में मात्र 5 महीने का एक मासूम बच्चा भी शामिल है. जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।इस मामले में अब एमजीएम मेडिकल कॉलेज की विशेष टीम द्वारा तैयार की गई डेथ एनालिसिस रिपोर्ट सामने आई है. जिसमें चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। टीम ने कुल 21 मौतों का विस्तृत डेथ ऑडिट किया. जबकि बाकी मामलों की जानकारी अलग से संकलित की गई। रिपोर्ट के अनुसार. 15 लोगों की मौत सीधे तौर पर दूषित पानी के सेवन और उससे फैले उल्टी-दस्त जैसे संक्रमण के कारण हुई है। इस तथ्य की पुष्टि खुद शासन स्तर पर भी कर दी गई है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2 मौतें उस समय हुई थीं. जब क्षेत्र में महामारी जैसे हालात शुरू भी नहीं हुए थे। वहीं 4 लोगों की मौत अन्य चिकित्सकीय कारणों से होना सामने आया है। कुछ मामलों में मौत का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो सका. जिस पर आगे जांच की जरूरत बताई गई है। एमजीएम कॉलेज की यह रिपोर्ट कलेक्टर शिवम वर्मा को सौंप दी गई है. जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार. 29 दिसंबर से अब तक इस दूषित पानी की चपेट में 436 से अधिक लोग आ चुके हैं। इनमें से अधिकांश मरीजों का इलाज कर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। फिलहाल 33 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं. जिनमें से 8 की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है। चिंता की बात यह है कि मंगलवार को भी 5 नए मरीज सामने आए हैं. जिससे संक्रमण के पूरी तरह थमने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में पेयजल पाइपलाइन में लंबे समय से लीकेज था. जिसके चलते सीवेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिल गया। लोगों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या की शिकायत कई बार संबंधित विभागों से की. लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यदि शुरुआत में ही पाइपलाइन की मरम्मत और जल की जांच कर ली जाती. तो इतनी बड़ी त्रासदी को रोका जा सकता था।यह मामला न सिर्फ इंदौर की स्वच्छता की छवि पर सवाल खड़े करता है. बल्कि शहरी बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगे की कार्रवाई. जिम्मेदारों की जवाबदेही और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।

  • भागीरथपुरा त्रासदी के बाद ज़मीन से लेकर हाईकोर्ट तक हलचल, 23 मौतों ने झकझोरा सिस्टम

    भागीरथपुरा त्रासदी के बाद ज़मीन से लेकर हाईकोर्ट तक हलचल, 23 मौतों ने झकझोरा सिस्टम


    इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई 23 मौतों ने प्रशासन और सिस्टम को झकझोर कर रख दिया है। जिस इलाके में कुछ दिन पहले तक मातम पसरा हुआ था वहां अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। ज़मीन के नीचे से लेकर अदालत के गलियारों तक इस त्रासदी का असर साफ दिख रहा है। प्रशासनिक स्तर पर जहां सुधार कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं वहीं न्यायिक मोर्चे पर भी मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। गुरुवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर अहम सुनवाई प्रस्तावित है।

    भागीरथपुरा की सड़कों पर इन दिनों भारी हलचल है। पुलिस चौकी के सामने की मुख्य सड़क से लेकर अंदरूनी गलियों तक जेसीबी मशीनें लगातार खुदाई में जुटी हैं। कई जगह पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को हटाकर नई पाइप डाली जा रही हैं तो कहीं ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने का काम चल रहा है। प्रशासन का दावा है कि नर्मदा जल आपूर्ति लाइन और सीवरेज व्यवस्था को पूरी तरह अलग किया जा रहा है ताकि दूषित पानी की समस्या भविष्य में दोबारा न हो।हालांकि इन सुधार कार्यों के चलते स्थानीय लोगों को फिलहाल भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह खुदी सड़कों कीचड़ और अधूरे भराव के कारण आवाजाही मुश्किल हो गई है। दोपहिया वाहन चालकों बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को वैकल्पिक रास्तों से निकलना पड़ रहा है। बावजूद इसके क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह असुविधा उन्हें मंजूर है अगर इससे भविष्य में किसी और परिवार को अपनों को खोने का दर्द न झेलना पड़े।

    स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इलाके की पेयजल और ड्रेनेज व्यवस्था वर्षों से बदहाल थी। इसको लेकर कई बार शिकायतें भी की गईं लेकिन समय रहते प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई। लोगों का कहना है कि यदि पहले ही सुधार कार्य किए गए होते तो शायद 23 निर्दोष लोगों की जान नहीं जाती।स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इस त्रासदी की भयावहता को और स्पष्ट करते हैं। अब तक कुल 440 लोग दूषित पानी से बीमार होकर अस्पताल पहुंचे थे। इनमें से 413 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है जबकि 27 मरीज अब भी विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें 8 मरीज आईसीयू में हैं और 3 की हालत गंभीर बताई जा रही है जिन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इलाके में लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि किसी भी नए मामले को समय रहते पकड़ा जा सके।

    न्यायिक स्तर पर भी मामला तूल पकड़ चुका है। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दूषित पेयजल से जुड़ी पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होनी है। पिछली सुनवाई में अदालत ने प्रशासन के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिए थे कि यदि लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जा सकती है।भागीरथपुरा की यह त्रासदी अब केवल एक स्थानीय हादसा नहीं रही बल्कि यह सिस्टम की जवाबदेही और नागरिक अधिकारों से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन चुकी है।

  • इंदौर में कोहराम पटेल ब्रिज के नीचे बस ने बाइक को मारी टक्कर आक्रोशित भीड़ ने बस को किया आग के हवाले

    इंदौर में कोहराम पटेल ब्रिज के नीचे बस ने बाइक को मारी टक्कर आक्रोशित भीड़ ने बस को किया आग के हवाले


    इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के व्यस्ततम इलाके पटेल ब्रिज के नीचे बुधवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गईजब एक भीषण सड़क हादसे ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। शुक्ला ब्रदर्स की एक तेज रफ्तार यात्री बस ने एक बाइक सवार को जोरदार टक्कर मार दीजिसके बाद मौके पर मौजूद गुस्साई भीड़ ने कानून को हाथ में लेते हुए बस में आग लगा दी। देखते ही देखते बस आग के गोले में तब्दील हो गई और काले धुएं का गुबार पूरे आसमान में छा गया।

    टक्कर के बाद भड़का जन-आक्रोश यह घटना सुबह करीब 9:30 बजे की हैजब छोटी ग्वालटोली क्षेत्र में पटेल ब्रिज के नीचे यातायात का भारी दबाव था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसारशुक्ला ब्रदर्स की बस ने बाइक को अपनी चपेट में ले लिया। गनीमत रही कि बाइक सवार को गंभीर चोटें नहीं आईंलेकिन इस हादसे ने वहां मौजूद लोगों के गुस्से को भड़का दिया। आरोप है कि चालक की लापरवाही से नाराज भीड़ ने बस को घेर लिया और उसमें आग लगा दी। आगजनी की आशंका इसलिए भी प्रबल है क्योंकि टक्कर के कुछ ही मिनटों बाद बस धू-धू कर जलने लगी थी।दमकल ने पाया काबूचालक मौके से फरार घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम और तुकोगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड के सब इंस्पेक्टर शोभाराम मालवीय ने बताया कि आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि दूर से ही दिखाई दे रही थीं। दमकलकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए एक टैंकर पानी की मदद से आग पर काबू पायालेकिन तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी। हैरानी की बात यह रही कि आग लगने के दौरान बस का चालक मौके पर नहीं मिला आशंका है कि वह भीड़ के डर से वाहन छोड़कर भाग खड़ा हुआ।

    पुलिस की पड़ताल: दुर्घटना या साजिश? तुकोगंज थाना प्रभारी जितेंद्र यादव ने बताया कि बाइक सवार को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया हैजहाँ उसकी हालत खतरे से बाहर है। पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि बस में आग तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट से लगी या फिर इसे भीड़ ने जानबूझकर लगाया। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आगजनी करने वाले संदिग्धों की पहचान की जा सके। पुलिस का कहना है कि यदि आगजनी की पुष्टि होती हैतो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यातायात हुआ बाधितलाखों का नुकसान ब्रिज के नीचे हुई इस घटना के कारण घंटों तक यातायात व्यवस्था चरमरा गई। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रूट को डायवर्ट किया और वैकल्पिक मार्गों से वाहनों को निकाला। इस अग्निकांड में बस पूरी तरह नष्ट हो गई हैजिससे बस ऑपरेटर को लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है। फिलहालपुलिस बस चालक की तलाश कर रही है और बाइक सवार के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

  • इंदौर में ऐतिहासिक चरण पादुका यात्रा: हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा, 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब

    इंदौर में ऐतिहासिक चरण पादुका यात्रा: हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा, 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब


    इंदौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर इंदौर महानगर में धर्म, संस्कृति और सामाजिक समरसता का भव्य दृश्य देखने को मिला। पूरे शहर में दिनभर हिंदू सम्मेलनों का आयोजन हुआ, जबकि शाम को दास हनुमान बगीची से निकली चरण पादुका यात्रा ने श्रद्धा और आस्था का नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया। इस यात्रा में 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने सहभागिता की और जय सियाराम व हनुमानजी के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

    करीब ढाई किलोमीटर लंबी यह भव्य यात्रा चार घंटे से अधिक समय में संपन्न हुई। यात्रा दास हनुमान बगीची से प्रारंभ होकर बड़ा गणपति, टोरी कार्नर, लोहारपट्टी, कैलाश मार्ग, पंचकुईया और भूतेश्वर महादेव होते हुए पुनः दास हनुमान बगीची पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए 200 से अधिक स्वागत मंच और भव्य तोरण द्वार बनाए गए थे। जगह-जगह पुष्पवर्षा, प्रसाद वितरण और फलाहार की व्यवस्था ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।यात्रा का सबसे आकर्षक दृश्य हेलिकॉप्टर से की गई पुष्पवर्षा रही, जिसने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। फूलों की वर्षा के बीच श्रद्धालु नाचते-गाते, झूमते-थिरकते हुए भक्ति में लीन नजर आए। बैंड-बाजे, भजन मंडलियां, हनुमत ढोल, धार्मिक झांकियां, अश्वारोही बालक और ऊंटों की उपस्थिति ने यात्रा को भव्य और अविस्मरणीय बना दिया।

    इस ऐतिहासिक चरण पादुका यात्रा में नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, सांसद शंकर लालवानी, पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय सहित अनेक जनप्रतिनिधि शामिल हुए। संत-महंत, महामंडलेश्वर, किन्नर समाज की मंडली और गौशालाओं के प्रतिनिधियों की सहभागिता ने सामाजिक समरसता का संदेश दिया।इससे पहले सुबह से ही इंदौर के विभिन्न क्षेत्रों में हिंदू सम्मेलनों की श्रृंखला शुरू हो गई थी। दूधिया ग्राम में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए RSS के अखिल भारतीय व्यवस्था प्रमुख अनिल ओक ने मातृ शक्ति और समाज की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति शक्ति और करुणा का संतुलन सिखाती है और समय आने पर समाज को अपने धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए संगठित होना चाहिए।

    सम्मेलनों में संत-समाज ने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का आह्वान किया। मातृ शक्ति से जुड़े वक्ताओं ने पंच परिवर्तन और कुटुंब व्यवस्था को सशक्त बनाने पर जोर दिया। कार्यक्रमों में बच्चों और युवाओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। दुर्गावाहिनी से जुड़ी बालिकाओं ने शस्त्र कला का प्रदर्शन कर लोगों का ध्यान खींचा।आयोजन के समापन पर भारत माता की आरती और समरसता भोज का आयोजन किया गया। संघ पदाधिकारियों के अनुसार, महानगर में आयोजित 251 हिंदू सम्मेलनों में लगभग 12 लाख लोगों की सहभागिता रही। आगामी 18 जनवरी को शेष सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा, जबकि 14 से 20 जनवरी तक जय सियाराम बाबा की प्रतिमा का प्रकटोत्सव भी मनाया जाएगा। यह आयोजन इंदौर के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक यादगार अध्याय बन गया है।

  • इंदौर में पानी कांड का नया मोड़: कांग्रेस की न्याय यात्रा और सड़क निर्माण में नर्मदा फटी लाइन

    इंदौर में पानी कांड का नया मोड़: कांग्रेस की न्याय यात्रा और सड़क निर्माण में नर्मदा फटी लाइन

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और प्रमुख शहरों इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर से राज्य की ताजा खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इंदौर में दूषित पानी से कई मासूमों की असमय मौत के मामले में कांग्रेस आज ‘न्याय यात्रा’ निकालेगी। यह यात्रा दोपहर 12 बजे बड़ा गणपति चौराहे से शुरू होकर राजवाड़ा तक जाएगी और पूरी तरह मौन रहेगी। इसमें स्वागत मंच नहीं लगाए जाएंगे और आम जनता को जोड़ने के लिए इसे गैर-राजनीतिक रखा गया है। इस यात्रा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जैसे पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा और राज्य कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी, विवेक तन्खा, शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे भी शामिल होंगे। कांग्रेस विधायक, पार्षद, महिला कांग्रेस और सेवादल के पदाधिकारी भी बड़ी संख्या में हिस्सा लेंगे। वहीं, इंदौर के निपानिया इलाके में मास्टर प्लान के तहत सड़क निर्माण के दौरान नर्मदा की लाइन फूटने से लाखों लीटर पानी सड़क पर बह गया और इलाके की पानी की सप्लाई प्रभावित हो गई। नगर निगम इस लापरवाही की जांच कर रहा है।

    मुरैना में अवैध रेत पकड़, भोपाल में बीजेपी कार्यशाला और रायसेन हादसा
    राज्यभर में अन्य खबरों में मुरैना की वन विभाग टीम ने चार किलोमीटर तक पीछा कर अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली को पकड़ लिया। रेत चंबल नदी से खनन की गई थी और अंधेरे का फायदा उठाकर ट्रैक्टर चालक मौके से फरार हो गया। ट्रॉली को मुरैना डिपो में रखा गया और नमूने लिए गए। वहीं, भोपाल में बीजेपी प्रदेश कार्यालय में 12 जनवरी को प्रदेश स्तरीय कार्यशाला आयोजित होगी, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा संबोधित करेंगे। डॉ. मोहन यादव आज सुबह 11.40 से 11.55 बजे कोकता बाईपास रोड, पटेल नगर पहुंचेंगे और कृषक कल्याण वर्ष 2026 के शुभारंभ के तहत कृषि रथ और ट्रैक्टर रैली की शुरुआत करेंगे। इसके बाद हैलीपेड प्रेस्टीज कॉलेज से जंबूरी मैदान, भेल भोपाल तक कार्यक्रम होंगे। इसी बीच रायसेन के उदयपुरा थाना क्षेत्र में ट्रक और ट्रॉले की आमने-सामने टक्कर में दोनों चालक गंभीर रूप से घायल हो गए। ट्रक चालक के दोनों पैर और ट्रॉले चालक का एक पैर कट गया। फोरलेन रोड पर पैच वर्क के दौरान कोई संकेत बोर्ड न होने से यह हादसा हुआ, जिसे नेशनल हाईवे अथॉरिटी की लापरवाही माना जा रहा है।

  • दूषित पानी हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर ने जलदाय व्यवस्था का किया निरीक्षण

    दूषित पानी हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट, कलेक्टर ने जलदाय व्यवस्था का किया निरीक्षण


    नई दिल्ली । इंदौर में दूषित पेयजल से हुई गंभीर घटनाओं के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। शहर में कहीं भी पीने के पानी में गंदगी की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। शनिवार को कलेक्टर ऋतुराज सिंह, नगर निगम आयुक्त दलीप कुमार और नगर निगम सभापति रवि जैन ने शहर के वार्ड क्रमांक 44 और 45 के अंतर्गत आने वाले नागदा और पालनगर क्षेत्रों का दौरा कर जलदाय व्यवस्था का गहन निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने क्षेत्र की पानी की टंकियों, सप्लाई लाइनों और नल कनेक्शनों की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान कई स्थानों पर गंभीर खामियां सामने आईं। कुछ नल कनेक्शन नालियों के बेहद पास पाए गए, वहीं कई जगह नलों में टोटियां तक नहीं लगी थीं, जिससे गंदा पानी पाइपलाइन में जाने का खतरा बना हुआ था। अधिकारियों ने मौके पर ही नगर निगम की टीम को तत्काल टोटियां लगाने और कनेक्शन दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री के निर्देश पर किया गया निरीक्षण

    कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि यह निरीक्षण मुख्यमंत्री के निर्देश पर किया गया है। दूषित पानी से हुई मौतों को प्रशासन बेहद गंभीरता से ले रहा है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।निरीक्षण के दौरान पानी की हार्डनेस की भी जांच की गई और विभिन्न स्थानों से पानी के सैंपल लिए गए। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि सभी सैंपल्स की लैब में समयबद्ध जांच हो और रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधार किए जाएं।

    नालियों के पास पाइपलाइन बनी खतरे की वजह

    स्थानीय रहवासियों ने अधिकारियों को बताया कि गणेश मंदिर जाने वाले मार्ग पर नाली का गंदा पानी अक्सर सड़क पर बहता रहता है। चूंकि अधिकांश पानी की लाइनें और नल कनेक्शन नालियों के पास हैं, ऐसे में सीवेज का पानी पीने की सप्लाई में मिलने का खतरा बना रहता है। निरीक्षण के दौरान एक खुली टोटी भी मिली, जिससे दूषित पानी सीधे पाइपलाइन में जा रहा था। इस पर निगम अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

    टंकियों की सफाई और क्लोरीनेशन के आदेश

    कलेक्टर ने बताया कि शहर की सभी पानी की टंकियों की साफ-सफाई का काम एक दिन पहले ही शुरू कर दिया गया है। साथ ही सात दिनों के भीतर पूरे शहर में पानी की व्यापक टेस्टिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को सभी वार्डों में टंकियों की गहन सफाई, क्लोरीनेशन और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां-जहां पानी की सप्लाई में गंदगी मिलने की आशंका है, वहां संबंधित प्वाइंट्स को अस्थायी रूप से बंद किया जाएगा। इसके अलावा सीवरेज लाइनों में लीकेज की जांच कर कहीं भी पानी और सीवर की मिक्सिंग पाए जाने पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    सभापति ने बताई निरीक्षण की स्थिति

    नगर निगम सभापति रवि जैन ने बताया कि वार्ड क्रमांक 44 और 45 में कई जगह नाली और पानी की लाइनें साथ-साथ चल रही हैं। कुछ स्थानों पर लीकेज भी सामने आए हैं। निरीक्षण के दौरान गणेश मंदिर पहुंच मार्ग पर नाली का पानी ऊपर आता हुआ पाया गया, जो बेहद चिंताजनक है। इन सभी बिंदुओं पर निगम की टीम को तुरंत सुधार कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार अब सभी वार्डों में नियमित और सतत निरीक्षण किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।

    नागरिकों से की गई अपील

    प्रशासन की ओर से आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि कहीं भी पीने के पानी में गंदगी, बदबू या रंग बदलने जैसी समस्या नजर आए, तो तुरंत नगर निगम या संबंधित वार्ड कार्यालय को इसकी सूचना दें। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
    दूषित पानी की घटना के बाद प्रशासन की इस सक्रियता को शहरवासियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है, हालांकि लोग चाहते हैं कि यह सतर्कता सिर्फ निरीक्षण तक सीमित न रहे, बल्कि स्थायी समाधान भी सुनिश्चित किया जाए।

  • नर्मदा जल में सीवर की मिलावट का खुलासा, खतरनाक बैक्टीरिया मिलने से बढ़ा हैजा-डायरिया का खतरा

    नर्मदा जल में सीवर की मिलावट का खुलासा, खतरनाक बैक्टीरिया मिलने से बढ़ा हैजा-डायरिया का खतरा


    नई दिल्ली। इंदौर शहर से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से सप्लाई हो रहे नर्मदा जल को लेकर की गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। सरकारी और निजी प्रयोगशालाओं में लिए गए पानी के सैंपल्स में कई खतरनाक और जानलेवा बैक्टीरिया पाए गए हैं जिससे इलाके में हैजा डायरिया और अन्य पेट संबंधी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ गया है।लैब रिपोर्ट के अनुसार पानी में फीकल कॉलिफॉर्म ई-कोलाई विब्रियो कोलेरी स्यूडोमोनास क्लेबसेला सिट्रोबैक्टर और प्रोटोजोआ जैसे सूक्ष्म जीव मौजूद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन बैक्टीरिया की मौजूदगी इस बात का सीधा संकेत है कि पीने के पानी की पाइपलाइन में सीवर का गंदा पानी मिल रहा है। इसी कारण पानी को जांच रिपोर्ट में अनसैटिस्फैक्ट्री यानी पूरी तरह असंतोषजनक श्रेणी में रखा गया है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से इलाके में लगातार लोग बीमार पड़ रहे हैं। कई घरों में उल्टी-दस्त पेट दर्द और बुखार की शिकायतें सामने आई हैं। इसी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पानी की सैंपलिंग शुरू की। रविवार से लगातार पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। यह सैंपल्स शहर के 100 से अधिक कॉलेजों और निजी अस्पतालों की लैब में भी भेजे गए जहां रिपोर्ट ने स्थिति को गंभीर बताया है।हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक इन रिपोर्ट्स को सार्वजनिक नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक विभाग के पास मौजूद रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा है कि यह पानी न तो पीने योग्य है और न ही घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित। इसके बावजूद आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है जिससे लोगों में नाराजगी और डर दोनों बढ़ रहे हैं।

    इसी बीच कलेक्टर शिवम वर्मा ने क्षेत्र का दौरा किया और लोगों को भरोसा दिलाने के लिए मौके पर पानी पीकर दिखाया। लेकिन संक्रमण के समय लिए गए पानी की लैब कल्चर रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीपेज के जरिए सीवर का पानी सप्लाई लाइन में मिल रहा है जिससे यह स्थिति पैदा हुई है।रिपोर्ट में विब्रियो कोलेरी बैक्टीरिया की मौजूदगी विशेष रूप से चिंता का विषय है क्योंकि यही बैक्टीरिया हैजा फैलाने के लिए जिम्मेदार होता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसके अलावा ई-कोलाई और फीकल कॉलिफॉर्म की मौजूदगी यह दर्शाती है कि पानी में मलजनित प्रदूषण है जो किसी भी हालत में सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर इम्युनिटी वाले लोग बुजुर्ग और बच्चे इस दूषित पानी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। स्यूडोमोनास और क्लेबसेला जैसे बैक्टीरिया फेफड़ों मूत्र मार्ग और खून में संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं।फिलहाल जरूरत इस बात की है कि जल सप्लाई सिस्टम की तत्काल जांच कर ली जाए पाइपलाइनों की मरम्मत की जाए और लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए। साथ ही प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप और जागरूकता अभियान चलाने की भी सख्त जरूरत है ताकि किसी बड़े स्वास्थ्य संकट को समय रहते रोका जा सके।