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  • चार राज्यों को जोड़ने वाला हाईस्पीड कॉरिडोर तैयार, बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर एक्सप्रेसवे से घटेगा आधा सफर समय

    चार राज्यों को जोड़ने वाला हाईस्पीड कॉरिडोर तैयार, बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर एक्सप्रेसवे से घटेगा आधा सफर समय

    नई दिल्ली । भारत में बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास के बीच एक और महत्वाकांक्षी परियोजना सुर्खियों में है, जो देश के दक्षिण और मध्य हिस्सों की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से विकसित किया जा रहा बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर हाईस्पीड एक्सप्रेसवे एक ऐसा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर है, जो न केवल यात्रा को तेज बनाएगा बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगा।

    यह लगभग 1100 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे चार प्रमुख राज्यों से होकर गुजरेगा, जिनमें कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र शामिल हैं। इस मार्ग में आने वाले प्रमुख शहरों में नागपुर, हिंगनघाट, आदिलाबाद, निजामाबाद, हैदराबाद, कुरनूल, अनंतपुर और चिक्काबल्लापुर जैसे महत्वपूर्ण केंद्र शामिल हैं। यह कॉरिडोर इन क्षेत्रों को सीधे एक हाईस्पीड नेटवर्क से जोड़ देगा, जिससे व्यापार और आवागमन दोनों में क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेगा।

    वर्तमान समय में महाराष्ट्र के नागपुर से कर्नाटक के बेंगलुरु तक की यात्रा में लगभग 23 से 24 घंटे का समय लग जाता है। लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद यही सफर घटकर लगभग 11 से 12 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इसे 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के अनुसार डिजाइन किया जा रहा है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुरक्षित और तेज हो जाएगी।

    इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 35 हजार करोड़ रुपये है। शुरुआत में इसे 6-लेन एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसे भविष्य में बढ़ते यातायात को देखते हुए 8 या 12 लेन तक विस्तारित करने की योजना भी शामिल है। यह एक एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे होगा, जिसमें प्रवेश और निकास के लिए सीमित स्थान निर्धारित किए जाएंगे, जिससे ट्रैफिक फ्लो सुचारू और नियंत्रित रहेगा।

    इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषता इसके आसपास विकसित होने वाली औद्योगिक संरचना है। इसके किनारे विशेष आर्थिक क्षेत्र और औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और रियल एस्टेट तथा व्यापारिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।

    हाल ही की प्रगति के अनुसार, परियोजना के कई हिस्सों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर काम तेजी से चल रहा है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि पर्यावरणीय मंजूरियों के कारण कुछ चरणों में देरी देखने को मिली, लेकिन अब परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    यह हाईस्पीड एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि एक व्यापक विकास मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में भारत के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और आर्थिक ढांचे को एक नई गति प्रदान करेगा।

  • क्षतिग्रस्त पुल का काम खिंचा, बीहर नदी पर यातायात बहाली अभी टली

    क्षतिग्रस्त पुल का काम खिंचा, बीहर नदी पर यातायात बहाली अभी टली


    नई दिल्ली ।  रीवा के बायपास मार्ग स्थित बीहर नदी पर बने क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत का कार्य अभी भी धीमी गति से चल रहा है, जिससे यातायात बहाल होने की उम्मीदें टलती नजर आ रही हैं। पुल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अब यह स्पष्ट नहीं है कि इसे कब तक पूरी तरह से सुरक्षित किया जा सकेगा।

    मौके पर स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। गर्डर उठाने की प्रक्रिया के दौरान एलाइनमेंट बिगड़ने से तकनीकी समस्याएं और बढ़ गई हैं। वहीं, पिलरों के बीच गैप बढ़ने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे संरचना की मजबूती पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    सूत्रों के अनुसार, मरम्मत कार्य में लगी डीजीसी इंफ्रा की टीम ने प्रारंभिक तौर पर सुझाव दिया था कि पुल को पूरी तरह तोड़कर नए सिरे से निर्माण करना अधिक सुरक्षित विकल्प होगा। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय जिला प्रशासन को लेना है और फिलहाल मरम्मत का काम ही जारी है।

    एमपीआरडीसी के अधिकारी इस मामले में स्पष्ट जानकारी देने से बच रहे हैं। वहीं, इंजीनियरों का मानना है कि जल्दबाजी में यातायात बहाल करना जोखिम भरा हो सकता है। अनुमान है कि पुल को सुरक्षित बनाने में अभी एक महीने से अधिक समय लग सकता है।

    गौरतलब है कि प्रशासन ने पहले 10 मई तक पुल पर यातायात बहाल करने का दावा किया था, लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी काम अधूरा है। इससे लोगों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है।

    इस बीच भारी वाहनों को शहर के भीतर से गुजरना पड़ रहा है, जिससे ट्रैफिक जाम, धूल और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है और स्थानीय लोगों को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है।

  • NTPC से मिला मेगा प्रोजेक्ट: इस कंपनी के स्टॉक ने 5 साल में दिया मल्टीबैगर रिटर्न

    NTPC से मिला मेगा प्रोजेक्ट: इस कंपनी के स्टॉक ने 5 साल में दिया मल्टीबैगर रिटर्न


    नई दिल्ली ।  सिविल कंस्ट्रक्शन सेक्टर की कंपनी SPML Infra को हाल ही में एक बड़ा कॉरपोरेट ऑर्डर मिला है, जिसने बाजार में निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। कंपनी को देश की प्रमुख ऊर्जा कंपनी NTPC Limited से ₹1128 करोड़ का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट मिला है। इस खबर के बाद कंपनी के शेयर में भी तेजी देखी गई और यह 3.91% की बढ़त के साथ ₹222 के स्तर पर बंद हुआ।
    यह प्रोजेक्ट 1 GWh क्षमता वाले एडवांस बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम से जुड़ा है, जिसे बिहार के बारौनी थर्मल पावर स्टेशन में स्थापित किया जाएगा। यह भारत के सबसे बड़े ग्रिड-लेवल स्टोरेज प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है। इसके तहत कंपनी को न केवल सप्लाई और सिविल वर्क करना है, बल्कि इंस्टॉलेशन और लंबे समय तक ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
    इस मेगा प्रोजेक्ट में आधुनिक तकनीकों जैसे बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) और थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) का उपयोग किया जाएगा, जिससे ऊर्जा भंडारण और वितरण को अधिक कुशल बनाया जा सकेगा।
    विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट भारत के ऊर्जा ढांचे के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे ग्रिड स्टेबिलिटी बेहतर होगी, पीक लोड मैनेजमेंट आसान होगा और रिन्यूएबल एनर्जी को मुख्य ग्रिड में बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा।
    कंपनी के लिए यह डील एक रणनीतिक मील का पत्थर मानी जा रही है, क्योंकि इससे SPML Infra की एंट्री ग्रीन एनर्जी और स्टोरेज सेक्टर में मजबूत हो गई है। कंपनी पहले से ही इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में सक्रिय रही है, लेकिन अब यह नई दिशा उसकी ग्रोथ को और तेज कर सकती है।
    बाजार प्रदर्शन की बात करें तो इस स्टॉक ने पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। बीते 5 सालों में इसने लगभग 2122% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है, जबकि 3 साल में भी 500% से अधिक की बढ़त दर्ज की गई है। यह प्रदर्शन इसे रिटेल और लॉन्ग टर्म निवेशकों के बीच आकर्षक बनाता है।
    कंपनी प्रबंधन के अनुसार, यह ऑर्डर उनकी भविष्य की रणनीति को मजबूत करता है और उन्हें ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। आने वाले समय में कंपनी का फोकस ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर रहेगा। शेयरहोल्डिंग पैटर्न में भी सुधार देखा गया है, जहां प्रमोटर्स की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 41% तक पहुंच गई है, जो कंपनी में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
    कुल मिलाकर, NTPC से मिला यह मेगा ऑर्डर न केवल SPML Infra के लिए बल्कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में क्लीन एनर्जी और स्टोरेज टेक्नोलॉजी को नई दिशा दे सकता है।

  • इंदौर को बड़ी राहत, सरवटे–गंगवाल रोड प्रोजेक्ट फिर शुरू, अब 80 नहीं बल्कि 60 फीट चौड़ी बनेगी सड़क

    इंदौर को बड़ी राहत, सरवटे–गंगवाल रोड प्रोजेक्ट फिर शुरू, अब 80 नहीं बल्कि 60 फीट चौड़ी बनेगी सड़क


    इंदौर
    शहर में लंबे समय से अटकी पड़ी एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना अब फिर से शुरू होने जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरवटे से गंगवाल बस स्टैंड के बीच बनने वाली यह सड़क पिछले कई महीनों से विवाद और तकनीकी कारणों के चलते अधूरी पड़ी थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाने पर सहमति बन गई है।

    शुरुआत में इस सड़क को 80 फीट चौड़ा करने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन स्थानीय निवासियों की आपत्तियों और लगातार चल रहे विरोध के बाद इसमें बदलाव किया गया है। अब यह सड़क 60 फीट चौड़ाई के साथ विकसित की जाएगी। इस निर्णय के बाद परियोजना को मंजूरी मिल गई है और निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है।

    यह सड़क निर्माण कार्य स्मार्ट सिटी योजना के तहत शुरू किया गया था, लेकिन बीच में फंडिंग और तकनीकी अड़चनों के कारण काम रुक गया। इसके अलावा बाधक निर्माणों को हटाने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई थी, जिससे परियोजना लंबे समय तक अधर में लटकी रही।

    स्थानीय स्तर पर इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए गए और बजट की व्यवस्था भी की गई, लेकिन निर्माण कार्य फिर भी शुरू नहीं हो सका। अब नए वर्क ऑर्डर और संशोधित चौड़ाई के साथ इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।

    चौड़ाई कम करने के फैसले के बाद स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच सहमति बन गई है, जिससे अब विवाद की स्थिति समाप्त हो गई है। माना जा रहा है कि इस सड़क के बनने से क्षेत्र में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और रोजमर्रा की आवाजाही आसान हो जाएगी।

    यह परियोजना पूरी होने के बाद सरवटे से गंगवाल बस स्टैंड के बीच का इलाका अधिक व्यवस्थित और सुगम बन सकेगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सालभर से रुकी यह योजना कितनी तेजी से पूरी होती है और लोगों को इसका वास्तविक लाभ कब तक मिलता है।

  • हाईटेक सिस्टम फेल? शहडोल में खुलेआम बिजली चोरी, ईमानदार उपभोक्ता परेशान..

    हाईटेक सिस्टम फेल? शहडोल में खुलेआम बिजली चोरी, ईमानदार उपभोक्ता परेशान..


    मध्य प्रदेश /शहडोल जिले में बिजली व्यवस्था को आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जाने की प्रक्रिया को एक बड़ा कदम माना जा रहा था, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर कुछ और ही दिखाई दे रही है। हाईटेक सिस्टम की मौजूदगी के बावजूद ग्रामीण इलाकों में बिजली चोरी का पुराना तरीका ‘कटिया कनेक्शन’ आज भी खुलेआम जारी है, जिससे बिजली विभाग की चुनौती और भी बढ़ गई है।

    जिले के कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोग मीटर बायपास कर सीधे लाइन से बिजली का उपयोग कर रहे हैं। यह अवैध तरीका अब आम होता जा रहा है, जहां घरेलू उपयोग से लेकर भारी उपकरणों तक को बिना किसी रोक-टोक के चलाया जा रहा है। इस स्थिति ने न केवल बिजली आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि पूरे नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव भी डाल दिया है।

    बिजली चोरी का सबसे बड़ा असर ट्रांसफार्मरों और सप्लाई सिस्टम पर देखने को मिल रहा है। ओवरलोडिंग के कारण बार-बार बिजली गुल होना, लो वोल्टेज और तकनीकी खराबी जैसी समस्याएं अब सामान्य हो चुकी हैं। इसका सीधा असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जो नियमित रूप से बिल का भुगतान कर रहे हैं और नियमों का पालन कर रहे हैं। छोटे व्यापारी और आम परिवार इस असंतुलित व्यवस्था से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

    स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा का विषय है कि इस तरह की गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं, लेकिन सख्त कार्रवाई अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है। कई जगहों पर खुलेआम तारों में हुक लगाकर बिजली लेने की घटनाएं देखी जा सकती हैं, जिससे विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    दूसरी ओर बिजली विभाग का कहना है कि समय-समय पर जांच अभियान चलाए जाते हैं और अवैध कनेक्शन हटाने की कार्रवाई भी की जाती है। साथ ही स्मार्ट मीटर को इस समस्या के समाधान के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भविष्य में बिजली चोरी पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।

    हालांकि जमीनी स्थिति और दावों के बीच बड़ा अंतर साफ नजर आता है। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के बावजूद बिजली चोरी की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। इससे यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या तकनीक अकेले इस समस्या को हल कर सकती है या इसके लिए सख्त प्रशासनिक कार्रवाई और सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है।

  • दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से बढ़ेगी रफ्तार, गडकरी बोले-रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

    दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से बढ़ेगी रफ्तार, गडकरी बोले-रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा


    नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देहरादून में बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन किया। करीब 213 किलोमीटर लंबे इस 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण 12,000 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से किया गया है। यह हाई-स्पीड कॉरिडोर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ता है।

    6 घंटे का सफर अब सिर्फ ढाई घंटे
    इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से नई दिल्ली से देहरादून तक की यात्रा का समय लगभग 6 घंटे से घटकर सिर्फ 2.5 घंटे रह जाएगा। इससे यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा।

    ‘सिर्फ सड़क नहीं, आर्थिक विकास का इंजन’
    केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस परियोजना को देश के आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और क्षेत्रीय विकास को गति देगा।

    पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
    इस कॉरिडोर से हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी। खासतौर पर उत्तराखंड जैसे पर्यटन-प्रधान राज्य के लिए यह परियोजना बेहद लाभकारी साबित होगी।

    आर्थिक और औद्योगिक विकास के नए अवसर
    बेहतर कनेक्टिविटी से:

    उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा
    निवेश आकर्षित होगा
    स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
    क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी

    आधुनिक सुविधाओं से लैस हाईवे
    यह कॉरिडोर अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ तैयार किया गया है:

    10 इंटरचेंज
    3 रेलवे ओवरब्रिज (ROB)
    4 बड़े पुल
    12 रोडसाइड सुविधाएं
    एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATM)

    पर्यावरण संरक्षण का भी रखा गया ध्यान
    इस परियोजना में पर्यावरण संतुलन को विशेष महत्व दिया गया है।
    12 किमी लंबा वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर (एशिया के सबसे लंबे में से एक)

    8 पशु मार्ग
    2 हाथी अंडरपास
    370 मीटर लंबी सुरंग (दात काली मंदिर के पास)
    इन सुविधाओं से वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा।

    आगे और मजबूत होगी कनेक्टिविटी
    मंत्री ने बताया कि सहारनपुर बाईपास से हरिद्वार तक 51 किमी लंबा 6-लेन सुपररोड भी जल्द शुरू किया जाएगा, जिससे इस पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और बेहतर होगी।

  • अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक- उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक- उप मुख्यमंत्री शुक्ल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक है। रीवा में शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार को बेहतर बनाने के सभी प्रयास जारी हैं। हमारा प्रयास है कि गुणात्मक शिक्षा व बेहतर इलाज की सभी व्यवस्थायें रहें ताकि यहां के लोगों को उच्च शिक्षा व इलाज के लिये बाहर न जाना पड़े।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रविवार को यह विचार ीवा में लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा भवन के लोकार्पण अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपने संभाग को आदर्श संभाग बनायें। महाविद्यालय के प्राचार्यों का दायित्व है कि वह अपने महाविद्यालय में नवीन पाठ¬क्रम संचालन के लिये प्रयासरत रहें तथा प्राध्यापकों व विद्यार्थियों के साथ जीवंत संबंध बनायें रखें।

    उन्होंने कहा कि अच्छा प्रशासक वही है जो जमीनी फीड बैक लेकर कार्य करे। यह भवन उच्च स्तरीय सुविधाओं से युक्त है। जब कार्यालय अच्छा होता है तो कार्य करने की इच्छा भी बढ़ जाती है। इस कार्यालय भवन के द्वारा संभाग के सभी महाविद्यालयों के विकास व उच्च शिक्षा के गुणात्मक सुधार के सभी प्रयास तत्परता से होंगे।

    अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ. आर.पी. सिंह ने बताया कि लगभग 3 करोड़ रूपये से निर्मित भवन में सभी सुविधाएँ हैं। यहां से शासकीय, अशासकीय व अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों पर नियंत्रण होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विधि विधान से पूजन अर्चन कर भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर आयुक्त रीवा संभाग बीएस जामोद, अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय सहित महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।

  • श्रद्धालुओं को नहीं होगी कोई परेशानी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घाट निर्माण कार्यों की समीक्षा कर दिए अहम निर्देश

    श्रद्धालुओं को नहीं होगी कोई परेशानी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घाट निर्माण कार्यों की समीक्षा कर दिए अहम निर्देश


    भोपाल । मध्यप्रदेश में आगामी सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों को लेकर सरकार ने अब जमीनी स्तर पर काम तेज कर दिया है इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उज्जैन पहुंचकर क्षिप्रा नदी पर निर्माणाधीन घाटों का निरीक्षण किया और स्पष्ट रूप से कहा कि श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रखी जाएगी उनका यह दौरा न केवल व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए था बल्कि अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने का संदेश भी था

    मुख्यमंत्री ने श्री अंगारेश्वर और श्री सिद्धवट के मध्य बन रहे नए घाटों का अवलोकन करते हुए वहां की व्यवस्थाओं को विस्तार से परखा उन्होंने निर्देश दिए कि घाटों के लगभग 200 मीटर क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए वस्त्र बदलने की समुचित व्यवस्था की जाए साथ ही सुविधाजनक स्थानों पर स्वच्छ और पर्याप्त संख्या में टॉयलेट भी बनाए जाएं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े

    इसके अलावा मुख्यमंत्री ने प्रमुख घाटों पर हर 200 मीटर की दूरी पर सुविधा घर विकसित करने के निर्देश दिए जिससे स्नान करने आए श्रद्धालुओं को आवश्यक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें उन्होंने यह भी कहा कि घाटों तक पहुंचने के रास्ते सुगम और सुरक्षित होने चाहिए इसके लिए लगभग 500 मीटर की दूरी पर सीढ़ियों या अन्य पहुंच मार्गों का निर्माण सुनिश्चित किया जाए ताकि श्रद्धालु आसानी से मुख्य घाटों तक पहुंच सकें

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने श्री सिद्धवट और श्री अंगारेश्वर मंदिर के बीच निर्माणाधीन पुल का भी जायजा लिया अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी कि इस पुल के बन जाने से दोनों प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच आवागमन और अधिक सुगम हो जाएगा और श्रद्धालुओं को एक वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध होगा इससे भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलेगी और आवागमन व्यवस्थित रहेगा

    घाटों के निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि स्नान के लिए लगभग 5 मीटर चौड़े घाट तैयार किए जाएं जिससे श्रद्धालुओं के आने जाने के साथ बैठने की भी पर्याप्त सुविधा मिल सके उन्होंने घाटों पर बैठने की व्यवस्था छायादार स्थान और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित करने के भी निर्देश दिए

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का यह निरीक्षण यह दर्शाता है कि सरकार सिंहस्थ 2028 को लेकर पूरी तरह गंभीर है और श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव देने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं यह पहल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने वाली साबित होगी

  • दिल्ली बजट 2026 इंफ्रास्ट्रक्चर स्वास्थ्य शिक्षा और ग्रीन पहल को बड़ा बढ़ावा

    दिल्ली बजट 2026 इंफ्रास्ट्रक्चर स्वास्थ्य शिक्षा और ग्रीन पहल को बड़ा बढ़ावा

    नई दिल्ली में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट में विकास और जनकल्याण की बड़ी तस्वीर सामने आई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 1,03,700 करोड़ रुपए का बजट पेश करते हुए इसे केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि राजधानी के भविष्य का रोडमैप बताया। इस बजट में खास बात यह रही कि विकास के साथ पर्यावरण संतुलन पर जोर देते हुए कुल बजट का 21 प्रतिशत हिस्सा ग्रीन बजट के रूप में रखा गया है

    सरकार के अनुसार दिल्ली की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और जीएसडीपी में भी वृद्धि दर्ज की गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया गया है। लोक निर्माण विभाग को 5,921 करोड़ और शहरी विकास विभाग को 7,887 करोड़ रुपए देने का प्रस्ताव है। यमुनापार, अनधिकृत कॉलोनियों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए भी अलग से बजट निर्धारित किया गया है

    राजधानी में सड़कों और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 750 किलोमीटर सड़कों का पुनर्विकास, नए फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए जाएंगे। इसके साथ ही बारापुल्ला कॉरिडोर को जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है

    बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पावर सेक्टर के लिए 3,942 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसमें सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली लाइनों को भूमिगत करने की योजना शामिल है

    जल और सीवर व्यवस्था को सुधारने के लिए 9,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाकर 1,500 एमजीडी तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे स्वच्छता और जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी

    स्वास्थ्य क्षेत्र में 12,645 करोड़ रुपए का बजट रखते हुए सरकार ने अधूरे अस्पतालों को पूरा करने, आईसीयू सुविधाओं के विस्तार और नई स्वास्थ्य योजनाओं की घोषणा की है। आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ाया गया है और 750 नए आरोग्य केंद्र खोले जाएंगे। नवजात शिशुओं के लिए नई जांच सुविधाएं भी शुरू की जाएंगी

    शिक्षा क्षेत्र को भी इस बजट में विशेष प्राथमिकता दी गई है। 19,148 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ हजारों स्मार्ट क्लासरूम बनाए जाएंगे, छात्राओं को मुफ्त साइकिल और मेधावी छात्रों को लैपटॉप देने की योजना है। नई आईटीआई, एडुसिटी और खेल विश्वविद्यालय जैसे प्रोजेक्ट्स भी प्रस्तावित हैं

    महिला और बाल विकास के लिए 7,406 करोड़ रुपए का बजट रखते हुए महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा पर जोर दिया गया है। मुफ्त बस यात्रा, गैस सिलेंडर और नई योजनाएं जारी रहेंगी। साथ ही शहर में 50,000 नए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और वन स्टॉप सेंटर बनाए जाएंगे

    परिवहन क्षेत्र में 8,374 करोड़ रुपए के बजट के साथ इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा दिया जाएगा। 2027 तक 7,500 बसें और 2029 तक 12,000 ई बसों का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा मेट्रो और नमो भारत कॉरिडोर पर भी निवेश बढ़ाया जाएगा

    एमएसएमई सेक्टर और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां लाई जाएंगी, जिसमें वेयरहाउसिंग, सेमीकंडक्टर और ड्रोन पॉलिसी शामिल हैं। वहीं पर्यटन बजट में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है और पहली बार इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल आयोजित करने की योजना है

    पर्यावरण संरक्षण के लिए 822 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण, वेस्ट टू एनर्जी प्लांट और कार्बन क्रेडिट जैसी योजनाएं शामिल हैं। कचरा निपटान क्षमता को दोगुना करने का लक्ष्य भी तय किया गया है

  • जल जीवन मिशन 2.0 से खुलेगा 3 लाख करोड़ का बड़ा बाजार अब फोकस होगा सेवा और मेंटेनेंस पर

    जल जीवन मिशन 2.0 से खुलेगा 3 लाख करोड़ का बड़ा बाजार अब फोकस होगा सेवा और मेंटेनेंस पर


    नई दिल्ली:देश में हर घर तक साफ पानी पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सरकार केवल पाइपलाइन और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अब फोकस पानी की निरंतर सप्लाई और उसके बेहतर रखरखाव पर किया जा रहा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस बदलाव से ऑपरेशन और मेंटेनेंस यानी ओएंडएम सेक्टर में करीब 3 लाख करोड़ रुपये के बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं

    रिपोर्ट में बताया गया है कि इस योजना का कुल बजट बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इसके साथ ही मिशन को अब सर्विस-डिलीवरी मॉडल में बदला जा रहा है, जिससे इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन यानी EPC सेक्टर को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। इसका मतलब है कि कंपनियों को अब सिर्फ प्रोजेक्ट बनाने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि उन्हें लंबे समय तक सेवाएं भी देनी होंगी

    इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण असर भुगतान व्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है। अभी कई राज्यों में कंपनियों को भुगतान मिलने में 6 महीने से ज्यादा का समय लग जाता है, लेकिन सरकार ने इसे सुधारते हुए सितंबर 2026 तक भुगतान अवधि को घटाकर 60 दिन से कम करने का लक्ष्य तय किया है। इससे सेक्टर में कैश फ्लो बेहतर होगा और कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी

    सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में 100 प्रतिशत नल कनेक्शन देने की समयसीमा को भी 2024 से बढ़ाकर दिसंबर 2028 कर दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना को जल्दबाजी में पूरा करने के बजाय गुणवत्ता और स्थायित्व पर ज्यादा ध्यान दिया जाए

    रिपोर्ट के अनुसार, इस मिशन से पीवीसी और एचडीपीई पाइप बनाने वाली संगठित कंपनियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, जिन कंपनियों के पास मजबूत तकनीक, बेहतर सर्विस नेटवर्क और ऊर्जा दक्ष समाधान हैं, वे इस बदलाव का ज्यादा फायदा उठा पाएंगी

    हालांकि, रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 2025-26 के बाद बजट आवंटन और वास्तविक खर्च के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है, जिससे यह संकेत मिलता है कि योजना के क्रियान्वयन में अभी भी कुछ चुनौतियां मौजूद हैं। इसी कारण अब सरकार टिकाऊ और प्रभावी सेवा देने वाले मॉडल पर जोर दे रही है

    गौरतलब है कि इस योजना की शुरुआत अगस्त 2019 में हुई थी, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक नल से स्वच्छ पानी पहुंचाना था। अब तक इस योजना के तहत नल कनेक्शन वाले घरों की संख्या में करीब पांच गुना वृद्धि हुई है और फरवरी 2026 तक ग्रामीण कवरेज 81 प्रतिशत से अधिक हो चुका है

    फिर भी कई क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता और नियमित सप्लाई को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अब इस योजना को अपग्रेड कर सेवा आधारित मॉडल अपनाने का फैसला किया है

    जल जीवन मिशन 2.0 के तहत डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे सुजलम भारत प्लेटफॉर्म के जरिए पानी की सप्लाई और गुणवत्ता पर नजर रखी जाएगी। साथ ही ग्राम पंचायतों और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि जल आपूर्ति को एक स्थायी और विश्वसनीय सार्वजनिक सेवा के रूप में विकसित किया जा सके

    यह बदलाव न केवल देश के जल प्रबंधन सिस्टम को मजबूत करेगा, बल्कि उद्योगों और कंपनियों के लिए भी एक बड़े आर्थिक अवसर के रूप में सामने आ रहा है