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  • मेटा का हाईकोर्ट में बयान: इंस्टाग्राम डेटा केवल सरकार के साथ साझा, यूजर्स की निजता पर जोर

    मेटा का हाईकोर्ट में बयान: इंस्टाग्राम डेटा केवल सरकार के साथ साझा, यूजर्स की निजता पर जोर


    नई दिल्ली। Meta Platforms ने अदालत को बताया कि इंस्टाग्राम की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवा जारी रहेगी। कंपनी ने स्पष्ट किया कि पॉलिसी में बदलाव केवल इतना है कि यदि किसी आपराधिक जांच या कानूनी प्रक्रिया के तहत सरकार जानकारी मांगेगी, तभी डेटा उपलब्ध कराया जाएगा। कंपनी ने यह भी कहा कि किसी भी तीसरे पक्ष को यूजर्स का डेटा नहीं दिया जाएगा, जिससे निजता का संरक्षण सुनिश्चित रहेगा।

    इंस्टाग्राम की नई नीति पर विवाद
    Instagram की ओर से 8 मई से एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवा में बदलाव की सूचना दी गई थी, जिसके बाद इसे लेकर याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह बदलाव यूजर्स की प्राइवेसी के अधिकार का उल्लंघन कर सकता है।

    कपिल सिब्बल ने दी नीति की कानूनी व्याख्या
    वरिष्ठ अधिवक्ता Kapil Sibal ने अदालत में कहा कि कंपनी पूरी तरह कानून के दायरे में काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल गैरकानूनी गतिविधियों की रोकथाम या आपराधिक मामलों की जांच के तहत ही सरकार को डेटा उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह की निजी जानकारी सार्वजनिक या तीसरे पक्ष को साझा नहीं की जाएगी।

    डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड पर उठे सवाल
    सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम के तहत बनाए गए डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया में अभी तक नियुक्तियां नहीं हुई हैं। इसी वजह से शिकायत सीधे अदालत में दायर करनी पड़ी।

    कोर्ट का रुख और आगे की प्रक्रिया
    अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए Meta Platforms से छह सप्ताह के भीतर विस्तृत लिखित जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई में कंपनी की नीति और स्पष्ट हो सकती है।

  • लोगों को खूब भा रहा PM मोदी का झालमुड़ी वीडियो….इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ और फेसबुक पर 9 करोड़ व्यूज़

    लोगों को खूब भा रहा PM मोदी का झालमुड़ी वीडियो….इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ और फेसबुक पर 9 करोड़ व्यूज़


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के रविवार को पश्चिम बंगाल (West Bengal.) में चार जनसभाओं के बीच झालमुड़ी (Jhalmuri) की एक दुकान पर जाने के वीडियो सोशल मीडिया पर धूम मचा रहा है। इंस्टाग्राम पर 24 घंटे के भीतर इसे 10 करोड़ बार और फेसबुक पर लगभग नौ करोड़ बार देखा जा चुका है। सूत्रों ने यह भी बताया कि “झालमुड़ी” के लिए गूगल सर्च पिछले 22 वर्षों में सबसे अधिक है। पीएम मोदी रविवार को पश्चिम बंगाल में अपने चुनाव प्रचार दौरे के दौरान अचानक रुके और झाड़ग्राम में लोकप्रिय बंगाली स्ट्रीट फूड झालमुड़ी का स्वाद लिया। झालमुड़ी मुरमुरे, हरी मिर्च और अन्य मसालों से बनाया जाती है।

    एक सूत्र ने बताया, ”प्रधानमंत्री मोदी के पश्चिम बंगाल में झालमुड़ी की एक दुकान पर जाने के वीडियो को इंस्टाग्राम पर 24 घंटे के भीतर 10 करोड़ बार और फेसबुक पर लगभग नौ करोड़ बार देखा गया।” मोदी ने झालमुड़ी का स्वाद लिया और बाद में उसकी तस्वीर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर तीन पोस्ट किये जिसमें उन्होंने अपने दौरे का एक वीडियो भी पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, ”एक व्यस्त रविवार को पश्चिम बंगाल में चार सार्वजनिक सभाओं के बीच, मैंने झाड़ग्राम में स्वादिष्ट मसालेदार मुरमुरे (झालमुड़ी) का आनंद लिया।”


    ममता बोलीं- ये नौटंकी था

    दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को आरोप लगाया कि झाड़ग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अचानक “झालमुरी” खरीदने के लिए रुकना सिर्फ एक “नौटंकी” था। बीरभूम जिले के मुरारई विधानसभा क्षेत्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, “चुनाव प्रचार के दौरान जब प्रधानमंत्री बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अचानक झालमुरी खरीदने के लिए रुके थे, तो उस समय वहां कैमरे कैसे मौजूद थे?” उन्होंने कहा कि ये पूरा घटनाक्रम पहले से तय था।


    पीएम ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया था

    प्रधानमंत्री ने रविवार को अपने आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह झाड़ग्राम की एक साधारण-सी दुकान से ‘झालमुरी’ खरीदते दिखाई दे रहे थे। इस दौरान उनके सुरक्षाकर्मी भी साथ थे। वीडियो में देखा जा सकता है कि मोदी ‘झालमुरी’ के लिए दुकानदार को भुगतान करते हैं और जब ​​दुकानदार रुपये लेने से इनकार करता है, तो वह जोर देकर कहते हैं कि उसे रुपये स्वीकार करने चाहिए। पूरे घटनाक्रम की सहजता पर सवाल उठाते हुए ममता ने कहा, “वहां कैमरे पहले से ही लगा दिए गए थे। एसपीजी (प्रधानमंत्री को निकट सुरक्षा प्रदान करने वाला बल) ने पूरी व्यवस्था की थी।”


    जेब में 10 रुपये का नोट रखे देखा गया था

    उन्होंने दावा किया, “प्रधानमंत्री को अपनी जेब में 10 रुपये का नोट रखे देखा गया था। क्या यह विश्वास करने लायक है? यह सब नौटंकी है।” ममता ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर “विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समुदाय से निर्दलीय उम्मीदवारों को मैदान में उतारने में कुछ गद्दारों की गुप्त रूप से मदद करने” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मेरे इलाके भाबानीपुर में भी ऐसा ही हुआ है। वे मुर्शिदाबाद और मालदा से आए हैं।” ममता ने कहा, “उन्होंने (भाजपा नेताओं) धर्म का व्यवसायीकरण कर दिया है। मैं मानवता का सम्मान करती हूं। मैं धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखती हूं। मैं हर धर्म, जाति, पंथ और भाषा का सम्मान करती हूं। लेकिन जिन्होंने अपने ही लोगों के साथ विश्वासघात किया है, हमारी पार्टी के साथ विश्वासघात किया है, उन्हें जनता अस्वीकार कर देगी।”

  • कनाडा में पंजाबी यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल की बेरहमी से हत्या, मां ने खालिस्तानियों पर लगाया आरोप, विवादित टिप्पणियां बनीं वजह

    कनाडा में पंजाबी यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल की बेरहमी से हत्या, मां ने खालिस्तानियों पर लगाया आरोप, विवादित टिप्पणियां बनीं वजह



    नई दिल्ली। कनाडा में पंजाबी मूल की यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल (45) की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। घटना मंगलवार रात साढ़े 9 बजे विंडसर इलाके में हुई, जब हमलावर उसके घर में घुसे और उसे घर के भीतर ही कई बार चाकू मारे। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। नैन्सी का जन्म हरियाणा में हुआ था और बाद में उनका परिवार लुधियाना शिफ्ट हो गया। उनकी मां जालंधर में रहती हैं।

    नैन्सी ग्रेवाल अपने यूट्यूब वीडियो के लिए विवादित रही हैं। वह खुलकर खालिस्तानियों, अकाल तख्त जत्थेदार और डेरा ब्यास मुखी की आलोचना करती थीं। हत्या से पहले नैन्सी ने इंस्टाग्राम पर अकाल तख्त जत्थेदार और डेरे के मुखी पर विवादित टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने धार्मिक नेताओं की गतिविधियों पर सवाल उठाए थे।

    कनाडा पुलिस ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद रात में टीम तुरंत मौके पर पहुंची। अस्पताल में नैन्सी ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने नैन्सी के घर और आसपास का क्षेत्र सील कर सबूत जुटाए। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और किसी के पास जानकारी होने पर डिटेक्टिव सार्जेंट जेमी नेस्टर से संपर्क करने को कहा है।

    नैन्सी की मां छिंदरपाल कौर ने कहा कि बेटी पहले भी कई बार धमकी और हमले का शिकार हो चुकी थी। पिछले हमले में घर में आग लगाई गई थी, जिससे नैन्सी बच गई थी। इस बार हमलावरों ने उसकी रेकी कर बेरहमी से कत्ल किया। मां ने आरोप लगाया कि इसमें 3-4 लोग शामिल थे और उन्होंने उनके नाम नोट कर लिए हैं। छिंदरपाल ने कनाडा पुलिस से अपील की है कि आरोपी को गिरफ्तार कर न्याय दिलाया जाए।

    नैन्सी पेशे से नर्स थीं और दो कंपनियों में काम करती थीं। वह गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करती थीं। उनके परिवार ने बताया कि बेटी ने हमेशा सच के रास्ते पर चलने की सीख दी।

    पुलिस के अनुसार हत्या की घटना की गंभीर जांच की जा रही है। आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के लिए सीसीटीवी फुटेज और आसपास के सबूत जुटाए जा रहे हैं। नैन्सी ग्रेवाल के परिवार ने न्याय की उम्मीद जताई है और बताया कि उनका यह कट्टर विरोध और निर्भीक व्यक्तित्व कई लोगों को परेशान करता था।

    नैन्सी की हत्या ने कनाडा और पंजाब की समाज में सनसनी मचा दी है। सोशल मीडिया पर उनके समर्थक और भारतीय समुदाय ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और जिम्मेदारों को कानून के तहत सजा दिलाने की मांग की है।

  • 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन, आंध्र प्रदेश में प्रस्ताव पर चर्चा..

    16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन, आंध्र प्रदेश में प्रस्ताव पर चर्चा..


    नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है। राज्य के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान बताया कि बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर सोशल मीडिया का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा एक निश्चित उम्र से कम के बच्चों को इन प्लेटफॉर्म्स पर नहीं होना चाहिए। वे यह नहीं समझ पाते कि किस तरह का कंटेंट उनके संपर्क में आ रहा है। ऐसे में मजबूत कानूनी ढांचे की जरूरत है।

    सरकार का यह कदम ऑस्ट्रेलिया के अंडर-16 सोशल मीडिया कानून से प्रेरित है। ऑस्ट्रेलिया ने पिछले महीने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए TikTok X (ट्विटर) फेसबुक इंस्टाग्राम यूट्यूब और स्नैपचैट जैसी प्रमुख सोशल मीडिया साइट्स पर प्रतिबंध लगाया था। इस कानून के तहत न तो बच्चे नए अकाउंट बना सकते हैं और न ही पुराने अकाउंट चालू रख सकते हैं। आंध्र प्रदेश सरकार इसी मॉडल का अध्ययन कर रही है। यदि यह लागू होता है तो यह भारत का पहला राज्य होगा जो बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कानूनी पाबंदी लगाएगा।

    तेलुगु देशम पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक रेड्डी ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि पिछली सरकार के दौरान सोशल मीडिया का दुरुपयोग हुआ था और विशेषकर महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक हमले किए गए। उन्होंने कहा कम उम्र के बच्चे भावनात्मक रूप से इतने परिपक्व नहीं होते कि वे ऑनलाइन नकारात्मक और नुकसानदायक कंटेंट को समझ सकें। इसलिए सरकार दुनिया के बेहतरीन उदाहरणों का अध्ययन कर रही है।दीपक रेड्डी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कदम को सेंसरशिप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि इसका उद्देश्य केवल बच्चों को जहरीले कंटेंट ऑनलाइन नफरत और मानसिक नुकसान से बचाना है।

    आंध्र प्रदेश सरकार फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार और अध्ययन के चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम ऐतिहासिक साबित हो सकता है। अगर इसे लागू किया गया तो राज्य के छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह नियंत्रित होगा और उन्हें मानसिक एवं भावनात्मक रूप से सुरक्षित रखा जा सकेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरे से बचाने और उनके स्वस्थ मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम बच्चों की सुरक्षा के लिए डिजिटल युग में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है।

  • लड़की बनकर लड़के से इंस्टाग्राम पर चैट, रोमांस के नाम पर अपहरण

    लड़की बनकर लड़के से इंस्टाग्राम पर चैट, रोमांस के नाम पर अपहरण

    मुंबई। महाराष्ट्र के ठाणे में एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए 15 वर्षीय लड़के के अपहरण का मामला सामने आया है।
    आरोपियों ने सबसे पहले लड़की बनकर लड़के के साथ भावनात्मक संबंधों को मजबूत किया फिर उसे रोमेंटिक संबंध बनाने के लिए एक जगह पर बुलाया, जहां पर उसका अपहरण करने की कोशिश की गई। हालांकि, इस मामले की जानकारी जल्दी ही पुलिस के पास पहुंच गई, जिससे पुलिस ने लड़के को बचा लिया और चार आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।

    रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित एक निजी स्कूल में कक्षा दसवीं का छात्र है। आरोपियों ने लड़की के नाम से एक फर्जी आईडी बनाकर उससे दोस्ती बढ़ाई, फिर धीरे-धीरे उसके साथ रोमेंटिक बातें करने लगे। कुछ समय के बाद जब आरोपियों ने पीड़ित का भरोसा जीत लिया और उसे रोमांटिक संबंध के लिए ठाणे के कल्याण पूर्व स्थित नंदीवली में मिलने बुला लिया।

    भरोसे में आने पर लड़का कैब के जरिए वहां पहुंच गया।

    लड़के के वहां पहुंचते ही चारों आरोपियों ने उसका अपहरण कर लिया और उसे एक रिहायशी इमारत के कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने उसके परिजनों से संपर्क करके 20 लाख रुपए की मांग की और दवाब बनाने के लिए कई मैसेज भी भेजे।

    इसके बाद लड़के के माता-पिता की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत ही कार्रवाई शुरू की और सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के आधार पर पहले कार और फिर उस जगह का पता लगाया, जहां पर लड़के को छोड़ा गया था। इसके बाद पुलिस ने नंदीवली के कमरे में छापा मारा औऱ लड़के को छुड़ा लिया, इसके बाद पुलिस ने 24 घंटे के अंदर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस के मुताबिक आरोपियों की पहचान प्रदीप कुमार जायसवाल (24), विशाल पासी(19), चंदन मौर्य (19) और सत्यम यादव के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि उन पर भारतीय न्याय संहिता के तहत अपहरण और जबरन वसूली के आरोप लगाकर पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

  • ऑस्ट्रेलिया के बाद फ्रांस में भी बच्चों के लिए फेसबुक-इंस्टा-यूट्यूब होगा बैन

    ऑस्ट्रेलिया के बाद फ्रांस में भी बच्चों के लिए फेसबुक-इंस्टा-यूट्यूब होगा बैन


    नई दिल्‍ली। रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस सरकार ने एक मसौदा कानून तैयार किया है। इस मसौदे के तहत, बच्चों को अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बचाने के लिए नया प्रयास किया जाएगा और सितंबर 2026 तक 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।

    ऑस्ट्रेलिया ने इस महीने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू कर दिया है। यह दुनिया का पहला देश है जिसने ऐसा कदम उठाया। अब खबर है कि फ्रांस भी इसी तरह का कानून लाने की तैयारी कर रहा है। न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस सरकार ने एक मसौदा कानून तैयार किया है। इस मसौदे के तहत, बच्चों को अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बचाने के लिए नया प्रयास किया जाएगा और सितंबर 2026 तक 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।
    बताया जा रहा है कि इस पहल को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन का समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि संसद को जनवरी में इस प्रस्ताव पर बहस शुरू कर देनी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया ने इस महीने विश्व में पहली बार 16 साल से कम उम्र के लोगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू किया है।

    फ्रांसीसी मसौदे में कहा गया है कि कई अध्ययन और रिपोर्टें अब किशोरों द्वारा डिजिटल स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग से होने वाले विभिन्न जोखिमों की पुष्टि करती हैं। सरकार ने कहा कि जिन बच्चों को ऑनलाइन सेवाओं तक बेरोकटोक पहुंच मिली हुई है, वे ‘अनुचित सामग्री’ के संपर्क में आ रहे हैं, साइबर उत्पीड़न का शिकार हो सकते हैं या उनकी नींद के पैटर्न में बदलाव आ सकता है।

    रिपोर्ट के अनुसार, इस मसौदा कानून में दो मुख्य अनुच्छेद हैं। पहला अनुच्छेद 15 वर्ष से कम आयु के नाबालिग को ऑनलाइन सोशल मीडिया सेवा प्रदान करने को गैरकानूनी बनाता है। दूसरा अनुच्छेद माध्यमिक विद्यालयों में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान करता है।

  • ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के टीनएजर्स के लिए सोशल मीडिया बैन कियाकंपनियों पर जुर्माना लगाने का आदेश

    ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के टीनएजर्स के लिए सोशल मीडिया बैन कियाकंपनियों पर जुर्माना लगाने का आदेश


    नई दिल्ली ।
    ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के टीनएजर्स के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बैन कर दिया है। यह कदम दुनिया में इस तरह का पहला कदम हैजो 10 दिसंबर से लागू हो चुका है। अब से 16 साल से छोटे बच्चे और किशोर फेसबुकइंस्टाग्रामयूट्यूबटिकटॉक जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। सोशल मीडिया कंपनियों को आदेश दिए गए हैं कि वे इन प्लेटफॉर्म्स पर छोटे उम्र के यूजर्स के अकाउंट डिलीट करें और ऐसा नहीं करने पर भारी पैनल्टी का सामना करना पड़ेगा। हालांकिपेरेंट्स और टीनएजर्स पर कोई पैनल्टी नहीं लगेगी।

    ऑस्ट्रेलिया में नया कानून

    ऑस्ट्रेलिया ने यह नया कानून लागू कर दिया हैजो 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के उपयोग से प्रतिबंधित करता है। इसका उद्देश्य बच्चों और किशोरों को सोशल मीडिया की लत और उसके नकरात्मक प्रभावों से बचाना है। इस कानून के लागू होने से अब 16 साल से कम उम्र के यूजर्स को फेसबुकइंस्टाग्रामटिकटॉक और यूट्यूब जैसी प्रमुख सोशल मीडिया साइट्स का इस्तेमाल करना प्रतिबंधित होगा। इन प्लेटफॉर्म्स को यह आदेश दिया गया है कि वे इन उम्र के यूजर्स के अकाउंट्स को तुरंत डिलीट करें और यदि ऐसा नहीं किया गया तो उन कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

    कंपनियों पर होगा जुर्माना

    ऑस्ट्रेलिया सरकार ने सभी प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों को आदेश जारी किए हैं कि वे रात 12 बजे तक 16 साल से कम उम्र के बच्चों का एक्सेस इन प्लेटफॉर्म्स से पूरी तरह से ब्लॉक कर दें। यदि कोई कंपनी इन आदेशों का पालन नहीं करतीतो उस पर 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलरकरीब 296 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह कदम सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एक सख्त चेतावनी है कि वे बच्चों की सुरक्षा को गंभीरता से लें और उन्हें सोशल मीडिया के संभावित खतरों से बचाने के लिए कदम उठाएं।

    यूजर्स के मिले-जुले रिएक्शन

    ऑस्ट्रेलिया के इस नए कानून के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रही हैं। जहां एक तरफ बड़ी टेक कंपनियां और आजादी समर्थक संगठन इस कदम की आलोचना कर रहे हैंवहीं दूसरी तरफ कई पैरेंट्स और समाज के कुछ वर्ग इसे सकारात्मक कदम मान रहे हैं। पैरेंट्स का कहना है कि यह कदम उनके बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैक्योंकि सोशल मीडिया के अधिक उपयोग से बच्चों में अवसादचिंताऔर आत्मसम्मान में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    दूसरी ओरकुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने वाला कदम मान रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों को सोशल मीडिया से पूरी तरह से अलग करना भी सही नहीं हो सकताक्योंकि यह प्लेटफॉर्म्स कई अवसर और जानकारी प्रदान करते हैंजो बच्चों के विकास के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

    सामाजिक प्रभाव और बहस

    ऑस्ट्रेलिया का यह कदम सोशल मीडिया की भूमिका और इसके बच्चों पर पड़ने वाले प्रभावों पर वैश्विक स्तर पर बहस को और बढ़ा देगा। सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल के बारे में कई विशेषज्ञ पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि यह बच्चों के मानसिक स्वास्थ्यआत्मविश्वास और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। सोशल मीडिया कंपनियों के लिए यह भी चुनौती होगी कि वे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाती हैंजबकि उनकी प्राइवेसी और स्वतंत्रता को बनाए रखें।

    इस नए कानून से अन्य देशों में भी एक उदाहरण पेश हो सकता हैजो सोशल मीडिया के इस्तेमाल के बारे में सख्त दिशा-निर्देशों की ओर कदम बढ़ाते हैं। लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या इस तरह के कानून पूरी दुनिया में लागू किए जा सकते हैंया फिर यह केवल ऑस्ट्रेलिया के लिए एक विशेष मामला होगा। ऑस्ट्रेलिया का यह कदम बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैलेकिन इसके सामाजिक और कानूनी प्रभावों को लेकर अभी और चर्चाएं जारी रहेंगी।