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  • इंटरनेट पर डॉक्टर का नंबर खोजना पड़ा महंगा, रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करते ही खाते से पांच लाख रुपये साफ

    इंटरनेट पर डॉक्टर का नंबर खोजना पड़ा महंगा, रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करते ही खाते से पांच लाख रुपये साफ


    मध्य प्रदेश: के जबलपुर में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां इंटरनेट पर डॉक्टर का संपर्क नंबर खोजने के दौरान एक व्यक्ति ठगों के जाल में फंस गया। इलाज के लिए डॉक्टर से संपर्क करने की कोशिश कर रहे व्यक्ति को रजिस्ट्रेशन के नाम पर भेजे गए एक लिंक पर क्लिक करना भारी पड़ गया। लिंक खुलते ही उसके बैंक खाते से कुल पांच लाख रुपये चार अलग-अलग लेनदेन में निकल गए। घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार, पीड़ित जबलपुर के गोरखपुर थाना क्षेत्र के हथिताल इलाके का निवासी है। उसने अपनी पत्नी के त्वचा संबंधी उपचार के लिए इंटरनेट पर डॉक्टर का मोबाइल नंबर तलाशा था। सर्च के दौरान मिले एक नंबर पर उसने संपर्क किया। फोन पर हुई बातचीत के दौरान सामने वाले व्यक्ति ने खुद को संबंधित चिकित्सा सेवा से जुड़ा बताते हुए इलाज से पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने की बात कही।

    आरोप है कि इसके बाद पीड़ित के मोबाइल पर एक लिंक भेजा गया और उसे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करने के लिए उस पर क्लिक करने के लिए कहा गया। जैसे ही उसने लिंक खोला और आगे की प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया, कुछ ही समय में उसके बैंक खाते से क्रमवार चार ट्रांजैक्शन के माध्यम से कुल पांच लाख रुपये निकल गए। बैंक खाते से राशि कटने के संदेश मिलने के बाद उसे साइबर ठगी का एहसास हुआ।

    घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने स्थानीय थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर साइबर ठगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि लेनदेन से जुड़े तकनीकी पहलुओं, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।

    साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस ने नागरिकों को इंटरनेट पर उपलब्ध किसी भी मोबाइल नंबर या लिंक की सत्यता जांचने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठग अक्सर अस्पताल, डॉक्टर, बैंक या सरकारी सेवाओं के नाम पर फर्जी वेबसाइट और मोबाइल नंबर तैयार कर लोगों को झांसे में लेते हैं। इसके बाद रजिस्ट्रेशन, अपॉइंटमेंट या सत्यापन के बहाने लिंक भेजकर बैंकिंग जानकारी या डिवाइस तक पहुंच हासिल करने का प्रयास किया जाता है।

    विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करना जरूरी है। यदि किसी सेवा के लिए ऑनलाइन भुगतान या रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता हो तो संबंधित संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित संपर्क माध्यम का ही उपयोग किया जाना चाहिए। साथ ही बैंक खाते से जुड़े ओटीपी, पासवर्ड, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी संदिग्ध कॉल, संदेश या लिंक के माध्यम से वित्तीय जानकारी मांगी जाए तो सतर्क रहें और किसी भी प्रकार का लेनदेन करने से पहले जानकारी की पुष्टि अवश्य करें। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते सतर्कता बरतकर इस प्रकार की साइबर ठगी से बचा जा सकता है, जबकि किसी भी संदिग्ध घटना की स्थिति में तत्काल पुलिस और साइबर हेल्पलाइन को सूचना देना सबसे प्रभावी कदम माना जाता है।

  • पीएम आवास और बिजली सुविधा वाली जमीन पर चला बुलडोजर, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप, जांच शुरू

    पीएम आवास और बिजली सुविधा वाली जमीन पर चला बुलडोजर, ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाए गंभीर आरोप, जांच शुरू

    मध्य प्रदेश:के सिंगरौली जिले के चितरंगी तहसील अंतर्गत ग्राम भुईधरवा में वन विभाग की कार्रवाई के बाद भूमि अधिकार और बेदखली को लेकर नया विवाद सामने आया है। वन विभाग द्वारा कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कई परिवारों के आशियाने प्रभावित हुए, जिसके बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे कई दशकों से संबंधित भूमि पर निवास और खेती करते आ रहे हैं तथा अब अचानक की गई कार्रवाई से उनके सामने आवास और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

    ग्रामीणों का दावा है कि उनके परिवार वर्ष 1969 से इस भूमि पर रह रहे हैं और पीढ़ियों से खेती-बाड़ी कर जीवनयापन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस जमीन को अब वन विभाग अतिक्रमित बता रहा है, उसी क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के तहत प्रधानमंत्री आवास बनाए गए, हैंडपंप स्थापित किए गए और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। ग्रामीणों के अनुसार इन परिस्थितियों ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि उनका निवास और खेती वैध प्रक्रिया के दायरे में है।

    मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब कुछ ग्रामीणों ने वन विभाग के एक बीट गार्ड पर पट्टा दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया। आरोप है कि एक ग्रामीण से नकद राशि और एक बकरा कथित रूप से लिए गए, लेकिन इसके बावजूद भूमि का पट्टा नहीं मिला। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि ग्रामीणों ने इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। विभाग की ओर से आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    प्रभावित परिवारों का कहना है कि खेती ही उनकी आय का मुख्य साधन है और बेदखली की कार्रवाई के बाद उनके सामने रोजगार और आवास दोनों का संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे चितरंगी तहसील कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग केवल स्थायी समाधान और भूमि अधिकार से जुड़े मामलों के निष्पक्ष निपटारे की है।

    विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच के लिए राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई है। जांच पूरी होने तक संबंधित कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाने का निर्णय लिया गया है ताकि सभी तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण किया जा सके। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि यदि जांच में कोई व्यक्ति वास्तव में भूमिहीन पाया जाता है और पात्रता की शर्तें पूरी करता है तो नियमानुसार उसे भूमि से संबंधित लाभ दिलाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जिन परिवारों के मकान कार्रवाई के दौरान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही बरसात के मौसम को देखते हुए प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी रहने और भोजन की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    यह मामला अब केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी योजनाओं के लाभ, वन भूमि पर निवास, प्रशासनिक कार्रवाई और कथित भ्रष्टाचार जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़ गया है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सभी पक्षों के दावों और उपलब्ध अभिलेखों की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा, ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति के अधिकार प्रभावित न हों और कानून के अनुरूप उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

  • मैरीलैंड के बेलकैंप में उपकरण चालू होने से फैला धुआं, पड़ोसियों ने दो बेजुबानों को सुरक्षित निकाला बाहर

    मैरीलैंड के बेलकैंप में उपकरण चालू होने से फैला धुआं, पड़ोसियों ने दो बेजुबानों को सुरक्षित निकाला बाहर

    नई दिल्ली । पालतू पशुओं की अनजानी और मासूम हरकतें कभी-कभी कितने बड़े और विनाशकारी हादसों का रूप ले सकती हैं, इसका एक अत्यंत हृदयविदारक उदाहरण अमेरिका से सामने आया है। मैरीलैंड राज्य के बेलकैंप इलाके में एक घर के भीतर उस समय भारी तबाही मच गई, जब परिवार की अनुपस्थिति में एक पालतू कुत्ते ने गलती से किचन में रखा टोस्टर ऑन कर दिया। देखते ही देखते इस छोटे से उपकरण से निकली चिंगारी ने विकराल आग का रूप ले लिया और पूरा मकान धुएं के गुबार से घिर गया। इस दर्दनाक हादसे में परिवार के तीन बेहद प्रिय पालतू जानवरों की दम घुटने से मौत हो गई, जबकि पड़ोसियों की तत्परता और अदम्य साहस के कारण दो अन्य कुत्तों को सुरक्षित बचा लिया गया। यह पूरी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना घर के भीतर स्थापित सुरक्षा कैमरे में कैद हो गई है।

    स्थानीय जांच और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, यह भीषण हादसा उस समय घटित हुआ जब मकान के मालिक किसी घरेलू कार्य से बाहर गए हुए थे और घर में केवल उनके पालतू पशु ही मौजूद थे। सुरक्षा कैमरों की फुटेज का विश्लेषण करने पर अधिकारियों ने पाया कि आग लगने का कारण कोई तकनीकी शॉर्ट-सर्किट नहीं था। वीडियो साक्ष्यों में साफ दिखाई दे रहा है कि परिवार का एक पालतू कुत्ता खेलते-खेलते अचानक रसोईघर के काउंटर पर चढ़ जाता है। इसी दौरान उसका पैर या शरीर का कोई हिस्सा वहां रखे इलेक्ट्रॉनिक टोस्टर से छू जाता है, जिससे वह उपकरण चालू हो जाता है। टोस्टर के अत्यधिक गर्म होने के कारण उसके अत्यंत निकट रखा अन्य घरेलू सामान सुलगने लगा और कुछ ही मिनटों में लपटें पूरी रसोई को अपनी चपेट में लेते हुए घर के अन्य हिस्सों में फैल गईं।

    आग की विभीषणता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देखते ही देखते पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। आसपास रहने वाले नागरिकों ने जब बंद मकान की खिड़कियों और छतों से काला धुआं निकलते देखा, तो उन्होंने बिना एक पल गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। पड़ोसियों ने अत्यंत विषम परिस्थितियों के बीच घर का दरवाजा तोड़कर भीतर प्रवेश किया और दो कुत्तों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। हालांकि, अत्यधिक धुआं भर जाने के कारण एक अन्य कुत्ता और परिवार की दो बिल्लियां घर के भीतर ही फंसे रह गए, जिन्हें बचाया नहीं जा सका।

    घटना की आपातकालीन सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां और लगभग तीस दमकलकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे। बचाव दल ने करीब बीस मिनट की कड़ी मशक्कत और भारी जद्दोजहद के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया। प्रशासनिक अधिकारियों के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस अग्निकांड में मकान के ढांचे और भीतर रखी मूल्यवान संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसका कुल मूल्य लगभग दो लाख डॉलर आंका गया है।

    अग्निशमन विशेषज्ञों और राष्ट्रीय सुरक्षा संघों का कहना है कि पालतू जानवरों की वजह से घरेलू उपकरणों के चालू होने और आग लगने की घटनाएं दुर्लभ नहीं हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अकेले अमेरिका में ही प्रतिवर्ष लगभग एक हजार घरों में बेजुबान जानवरों की अनजानी हरकतों के कारण आग लगने के मामले दर्ज किए जाते हैं, जिससे लाखों पालतू जीव प्रभावित होते हैं। पूर्व में भी अन्य राज्यों से ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां स्मार्ट उपकरणों की समय पर चेतावनी न मिलने के कारण परिवारों को भारी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है।

  • मैरीलैंड के बेल्ट्सविले में अनोखा अपराध, बिल्ली को हथियार की तरह इस्तेमाल कर कर्मचारी को थमाया धमकी भरा नोट

    मैरीलैंड के बेल्ट्सविले में अनोखा अपराध, बिल्ली को हथियार की तरह इस्तेमाल कर कर्मचारी को थमाया धमकी भरा नोट

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराध जगत से जुड़ी एक ऐसी अजीबोगरीब और हैरतअंगेज घटना सामने आई है, जिसने न केवल पुलिस प्रशासन बल्कि सोशल मीडिया जगत को भी पूरी तरह चकित कर दिया है। अमेरिका के मैरीलैंड राज्य में एक व्यक्ति ने बैंक डकैती की वारदात को अंजाम देने के लिए किसी पारंपरिक हथियार, पिस्तौल या बारूद का इस्तेमाल करने के बजाय एक मासूम जानवर का सहारा लिया। आमतौर पर बैंक लूट की घटनाओं में भारी सुरक्षा चूक और खौफनाक मंजर देखने को मिलता है, लेकिन इस विशिष्ट मामले में एक बेहद छोटी और मासूम बिल्ली अनजाने में इस अजीब अपराध का मुख्य हिस्सा बन गई। आरोपी ने बैंक के भीतर घुसकर जिस तरह की हरकत की, उसने सुरक्षा अधिकारियों को भी कुछ समय के लिए हैरत में डाल दिया।

    इस अनोखे और सुनियोजित घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब आरोपी शख्स मैरीलैंड के बेल्ट्सविले इलाके में स्थित एक प्रसिद्ध पेट सप्लाई स्टोर के एडॉप्शन सेंटर में दाखिल हुआ। वहां उसने पिछले काफी दिनों से रखी गई लगभग साढ़े तीन महीने की एक खास नस्ल की टक्सीडो बिल्ली पर अपनी नजरें टिका रखी थीं। सुरक्षा कैमरों की फुटेज से यह साफ हुआ है कि आरोपी पिछले दो हफ्तों से लगातार उस स्टोर के चक्कर काट रहा था और बिल्ली की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। घटना वाले दिन उसने बेहद चालाकी से बिल्ली के पिंजरे को खोला और उसे चुपचाप उठाकर स्टोर से बाहर भाग निकला। यह पूरी घटना स्टोर के सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसमें आरोपी हल्के रंग की पोशाक में बिल्ली को दबाकर भागता नजर आया।

    पशु संरक्षण केंद्र से बिल्ली की चोरी करने के ठीक बाद आरोपी का अगला कदम और भी ज्यादा चौंकाने वाला रहा। वह उस नन्हीं बिल्ली को अपने साथ लेकर कुछ ही दूरी पर स्थित पीएनबी बैंक की एक स्थानीय शाखा में सीधे प्रवेश कर गया। बैंक के भीतर काउंटर पर पहुंचकर उसने सबसे पहले वहां तैनात बैंक कर्मचारी यानी टेलर के हाथों में उस छोटी बिल्ली को थमा दिया। इससे पहले कि बैंक कर्मचारी कुछ समझ पाता, आरोपी ने जेब से एक लिखित नोट निकाला और कर्मचारी के सामने बढ़ा दिया। इस नोट में बेहद सख्त लहजे में बैंक में रखे कैश को तुरंत उसके हवाले करने की मांग की गई थी। बैंक के भीतर मौजूद अन्य ग्राहकों और कर्मचारियों के लिए यह दृश्य बेहद काल्पनिक और असाधारण था।

    इस अजीबोगरीब रंगदारी और लूट के प्रयास की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस नियंत्रण कक्ष को दी गई। सूचना मिलते ही प्रिंस जॉर्ज काउंटी पुलिस की एक भारी टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बैंक की घेराबंदी कर दी और आरोपी को मौके पर ही धर-दबोचा। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए बैंक मैनेजर के केबिन से उस मासूम बिल्ली को पूरी तरह सुरक्षित और सकुशल बरामद कर लिया। बिल्ली रेस्क्यू संस्था के अधिकारी भी शुरुआत में इतनी बड़ी पुलिसिया कार्रवाई देखकर हैरान थे, लेकिन जब उन्हें बैंक के भीतर बिल्ली के होने की पुख्ता जानकारी मिली, तो पूरा मामला साफ हो गया।

    इस अनोखी घटना की खबर जैसे ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया और इंटरनेट पर प्रसारित हुई, सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर बेहद मजेदार और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया। पशु कल्याण संस्था ने आधिकारिक बयान जारी कर मजाकिया लहजे में कहा कि इस नन्हीं बिल्ली का आपराधिक जीवन अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है और वह वापस अपनी सामान्य दुनिया में लौट आई है। हालांकि आरोपी को उसकी इस गंभीर करतूत के लिए सलाखों के पीछे भेज दिया गया है, लेकिन मैग्नोलिया नाम की यह बिल्ली अब लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो चुकी है और संस्था अब उसके लिए एक सुरक्षित और संवेदनशील आशियाने की तलाश कर रही है।

  • मंदिर समिति के अध्यक्ष के पूर्व निजी सहायक प्रमोद नौटियाल पर कसा शिकंजा, चोरी की रकम की बरामदगी के लिए रिमांड की तैयारी में जुटी पुलिस

    मंदिर समिति के अध्यक्ष के पूर्व निजी सहायक प्रमोद नौटियाल पर कसा शिकंजा, चोरी की रकम की बरामदगी के लिए रिमांड की तैयारी में जुटी पुलिस

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध और पवित्र बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की राशि की चोरी के मामले में चमोली पुलिस की विशेष जांच टीम ने एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस की ओर से आधिकारिक तौर पर दावा किया गया है कि गिरफ्तार किया गया मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल मंदिर परिसर में दान की गई धनराशि की गिनती के दौरान एक या दो बार नहीं, बल्कि कम से कम चार अलग-अलग अवसरों पर नकदी की हेराफेरी करते हुए सीसीटीवी कैमरों में कैद हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस की विंग लगातार तकनीकी साक्ष्यों को जुटाने में लगी हुई है। पुलिस अब अदालत के माध्यम से आरोपी की हिरासत प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है ताकि चोरी की गई वास्तविक धनराशि और अन्य कीमती सामान को बरामद किया जा सके।

    चमोली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, जांच दल ने अब तक मंदिर परिसर में हुई दान की गिनती से संबंधित कई महत्वपूर्ण तिथियों की सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया है। इनमें मुख्य रूप से जून और जुलाई महीने के शुरुआती हफ्तों की रिकॉर्डिंग शामिल हैं, जहां आरोपी प्रमोद नौटियाल कथित तौर पर बड़ी ही चालाकी से नकदी को छिपाकर अपने पास रखते हुए दिखाई दे रहा है। हालांकि, तकनीकी सीमाओं के कारण जांच टीम के सामने एक बड़ी चुनौती भी खड़ी हो गई है। वर्तमान यात्रा सीजन के दौरान अब तक दर्जनों बार दान की गिनती की जा चुकी है, परंतु सीसीटीवी कैमरों का डिजिटल स्टोरेज फुल हो जाने की वजह से पुरानी फुटेज स्वतः ही डिलीट हो चुकी हैं। ऐसी स्थिति में पुलिस को अंदेशा है कि आरोपी पूर्व में भी इस तरह की वारदातों को अंजाम देता आ रहा होगा, जिसके साक्ष्य मिट चुके हैं।

    गौरतलब है कि इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के शीर्ष नेतृत्व का बेहद करीबी और पूर्व निजी सहायक रह चुका है। वह लंबे समय से इस प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थान से जुड़ा हुआ था और उसके पास वीआईपी प्रोटोकॉल के साथ-साथ मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती की प्रत्यक्ष निगरानी करने की अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी थी। इस ऊंचे और जिम्मेदार पद पर रहने के कारण ही उसे नकदी की गिनती वाले संवेदनशील क्षेत्र में निर्बाध प्रवेश की अनुमति मिली हुई थी, जिसका उसने कथित तौर पर दुरुपयोग किया। आरोपी को पुलिस ने उसके देहरादून स्थित आवास से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद अदालत ने उसे चौदह दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

    पुलिस और विशेष जांच दल की अब तक की पूछताछ में आरोपी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और वह लगातार जांच अधिकारियों को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। वर्तमान में पुलिस के हाथ केवल एक शालिग्राम शिला लगी है, जबकि चोरी की गई नकद राशि अथवा सोने-चांदी के सिक्कों की बरामदगी अभी भी शेष है। इसी वजह से पुलिस अब उच्च न्यायालय अथवा सत्र अदालत के समक्ष दोबारा रिमांड का आवेदन प्रस्तुत करने की रणनीति बना रही है। इस प्रशासनिक विफलता और सुरक्षा में चूक के बाद मंदिर समिति ने भी कड़ा रुख अख्तियार करते हुए आंतरिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं, जिसके तहत दान प्रबंधन से जुड़े कुछ अन्य अधिकारियों को भी उनके पदों से हटा दिया गया है। वर्तमान में इस पूरे प्रकरण की समानांतर जांच पुलिस की एसआईटी, मंदिर समिति की आंतरिक जांच कमेटी और राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा अत्यंत गंभीरता से की जा रही है।

  • छत्रपति शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक स्थल पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास, वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई कर हटाया बोर्ड

    छत्रपति शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक स्थल पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास, वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई कर हटाया बोर्ड

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पुणे में स्थित ऐतिहासिक और प्रमुख पर्यटन स्थल सिंहगढ़ किले में सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित करने की एक गंभीर कोशिश का मामला सामने आया है। कुछ अज्ञात शरारती तत्वों द्वारा किले के मुख्य प्रवेश मार्ग के समीप एक बेहद संवेदनशील और विवादित पोस्टर लगा दिया गया, जिसमें एक विशेष समुदाय के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी। जैसे ही यह मामला स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों के संज्ञान में आया, तुरंत त्वरित कार्रवाई की गई। राज्य के वन विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए उस विवादित पोस्टर को तत्काल प्रभाव से वहां से हटा दिया। हालांकि इस घटना के संबंध में पुलिस को अभी तक कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने स्वतः ही इस पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।

    वन विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना मंगलवार सुबह की है जब पार्किंग क्षेत्र के बिल्कुल समीप किले के प्रवेश द्वार पर लगे एक पुराने लोहे के बोर्ड पर यह छपा हुआ पोस्टर चिपका हुआ देखा गया। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुबह के समय गश्त के दौरान जैसे ही यह आपत्तिजनक पोस्टर दिखाई दिया, उसे तुरंत हटाकर जब्त कर लिया गया। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, किसी अज्ञात असामाजिक तत्व ने तड़के अंधेरे का फायदा उठाकर इस कृत्य को अंजाम दिया और प्रिंटेड पोस्टर को वहां चिपकाकर मौके से फरार हो गया। मराठी भाषा में लिखे गए इस पोस्टर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हो गईं, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।

    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चिंताजनक बात यह रही कि पोस्टर के निचले हिस्से में आधिकारिक भाषा का प्रयोग करते हुए आदेशानुसार शब्द लिखा गया था। वन विभाग के अधिकारियों ने अंदेशा व्यक्त किया है कि शरारती तत्वों ने जानबूझकर इस शब्द का इस्तेमाल किया ताकि आम जनता और वहां आने वाले पर्यटकों के बीच यह गलत संदेश और भ्रम फैलाया जा सके कि यह प्रतिबंध सरकार या किसी अधिकृत सरकारी विभाग द्वारा लागू किया गया है। वर्तमान में सिंहगढ़ किला और उसके आसपास का पूरा विस्तृत वन क्षेत्र राज्य के वन विभाग के प्रशासनिक और कानूनी अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है और यहां किसी भी प्रकार का प्रतिबंध पूरी तरह से गैर-कानूनी है।

    ऐतिहासिक दृष्टिकोण से सिंहगढ़ का किला मध्यकालीन भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवशाली पहाड़ी किला माना जाता है। यह स्थल छत्रपति शिवाजी महाराज के समृद्ध इतिहास और प्रसिद्ध सिंहगढ़ की ऐतिहासिक लड़ाई का गवाह रहा है, जिसके कारण महाराष्ट्र के सबसे प्रमुख और लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में इसकी गिनती होती है। पुणे ग्रामीण पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भले ही किसी संगठन ने इस मामले में शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन सामाजिक शांति और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली इस हरकत को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। किले की तरफ जाने वाले सभी पहाड़ी रास्तों, चेकपोस्ट और मुख्य प्रवेश मार्गों पर स्थापित सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की गहनता से जांच की जा रही है ताकि संदिग्धों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।

  • जबलपुर में आदिवासी युवक की संदिग्ध मौत पर उठे सवाल, पुलिस जांच पर छात्र संगठन ने जताई आपत्ति, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग

    जबलपुर में आदिवासी युवक की संदिग्ध मौत पर उठे सवाल, पुलिस जांच पर छात्र संगठन ने जताई आपत्ति, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग

    मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में एक आदिवासी युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसओ) ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग उठाते हुए पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। संगठन का कहना है कि यदि मामले में शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई तो मृतक के परिजनों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।

    जानकारी के अनुसार डुमना चौकी क्षेत्र के महंगवा गांव निवासी नितिन बैगा 8 जून की शाम घर से निकला था, जिसके बाद वह वापस नहीं लौटा। परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की सूचना पुलिस को दी थी। बाद में उसका शव महंगवा स्थित खाटू श्याम मंदिर के पास जंगल में बरामद हुआ। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

    भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के जिला उपाध्यक्ष राहुल पाण्डेय ने थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि युवक की गुमशुदगी की सूचना मिलने के बाद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। संगठन का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर गंभीरता से प्रयास किए जाते तो परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। संगठन ने पुलिस से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है।

    संगठन का यह भी कहना है कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए ताकि मृतक के परिवार को न्याय मिल सके। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द उचित कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन मृतक के परिजनों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा। संगठन ने प्रशासन से मामले की हर पहलू से जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

    वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की जांच नियमानुसार जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार युवक की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज होने के बाद जांच शुरू की गई थी और बाद में उसका शव बरामद हुआ। पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी लगने की पुष्टि हुई है। साथ ही रिपोर्ट के अनुसार मृतक के शरीर पर किसी प्रकार के बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और सभी परिस्थितियों की विस्तृत जांच की जा रही है।

    पुलिस का यह भी कहना है कि परिजनों द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग की गई है, जिसे गंभीरता से लिया गया है। जांच के दौरान सभी तथ्यों, परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला अब जांच के महत्वपूर्ण चरण में है और पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। दूसरी ओर छात्र संगठन और परिजन निष्पक्ष जांच की मांग पर कायम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • छतरपुर में जमीन विवाद के बीच फायरिंग का आरोप, बागेश्वर बाबा के भाई शालिग्राम गर्ग पर घायल ने लगाए गंभीर आरोप, पुलिस ने शुरू की जांच

    छतरपुर में जमीन विवाद के बीच फायरिंग का आरोप, बागेश्वर बाबा के भाई शालिग्राम गर्ग पर घायल ने लगाए गंभीर आरोप, पुलिस ने शुरू की जांच

    मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बागेश्वर धाम से जुड़े एक मामले ने तूल पकड़ लिया है। राजनगर थाना क्षेत्र के ग्राम कोड़ा में कथित जमीन विवाद के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग पर फायरिंग का आरोप लगाया गया है। घटना में घायल हुए व्यक्ति को पुलिस ने उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया है। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जा रही है।

    घायल की पहचान मोतीलाल कुशवाहा के रूप में हुई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जमीन को लेकर चल रहे विवाद के दौरान उनके साथ मारपीट की गई और उन पर गोली चलाई गई। उनका यह भी आरोप है कि गरीब लोगों की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था और इसी विवाद के चलते यह घटना हुई। पुलिस ने घायल के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जांच की जा रही है।

    घटना के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को तत्काल जिला अस्पताल भेजा गया। चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घायल की चिकित्सीय रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए जा रहे साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। घटनास्थल का निरीक्षण कर उपलब्ध भौतिक साक्ष्य भी एकत्र किए जा रहे हैं।

    प्राथमिक जानकारी के अनुसार, विवाद जमीन से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि घटना की परिस्थितियों और फायरिंग के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे।

    फिलहाल इस मामले में शालिग्राम गर्ग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं आई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार के अपराध की पुष्टि होती है तो विधि अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

    घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है, जबकि पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की जा रही है तथा जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

  • जबलपुर के सेंट अलायसियस स्कूल में धर्म परिवर्तन के आरोपों पर बवाल, कर्मचारियों के दावों के बाद हिंदू संगठनों का प्रदर्शन, पुलिस ने संभाला मोर्चा

    जबलपुर के सेंट अलायसियस स्कूल में धर्म परिवर्तन के आरोपों पर बवाल, कर्मचारियों के दावों के बाद हिंदू संगठनों का प्रदर्शन, पुलिस ने संभाला मोर्चा

    मध्य प्रदेश:  जबलपुर स्थित सेंट अलायसियस स्कूल में धर्म परिवर्तन के आरोपों को लेकर मंगलवार को विवाद खड़ा हो गया। कुछ कर्मचारियों द्वारा स्कूल प्रबंधन पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और नौकरी से निकालने की धमकी देने के आरोप लगाए जाने के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता स्कूल परिसर पहुंच गए। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और विरोध हुआ, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।

    विवाद उस समय सामने आया जब स्कूल के कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया गया। कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें नौकरी बनाए रखने के लिए धर्म बदलने के लिए कहा गया और ऐसा नहीं करने पर सेवा समाप्त करने की चेतावनी दी गई। शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि उन्हें विभिन्न प्रकार के प्रलोभन दिए गए, लेकिन धर्म परिवर्तन से इनकार करने के बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया गया।

    इन आरोपों की जानकारी सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में स्कूल पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नारे लगाए और आरोप लगाया कि कर्मचारियों पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान परिसर में लगे कुछ बैनर और पोस्टर भी क्षतिग्रस्त किए गए तथा बैरिकेडिंग को नुकसान पहुंचने की सूचना मिली। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए प्रदर्शनकारियों को शांत कराया।

    प्रदर्शन में शामिल संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को डर और लालच के माध्यम से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा था। उन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।

    दूसरी ओर, शिकायत करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने धर्म परिवर्तन करने से इनकार किया, जिसके बाद उनकी नौकरी समाप्त कर दी गई। उनका दावा है कि इस कार्रवाई से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। अधिकारियों ने बताया कि सभी पक्षों से प्राप्त शिकायतों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होने का इंतजार करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

  • नेमावर में शातिर महिला ने भरोसे का उठाया फायदा, जेवर चमकाने और बर्तन बदलने के बहाने 20 लाख के आभूषण लेकर फरार

    नेमावर में शातिर महिला ने भरोसे का उठाया फायदा, जेवर चमकाने और बर्तन बदलने के बहाने 20 लाख के आभूषण लेकर फरार


    मध्य प्रदेश : के देवास जिले के प्रसिद्ध तीर्थस्थल नेमावर में महिलाओं को निशाना बनाकर ठगी की एक बड़ी घटना सामने आई है। आरोप है कि एक महिला ने पुराने बर्तनों के बदले नए बर्तन देने और सोने-चांदी के आभूषणों को चमकाने तथा नया डिज़ाइन तैयार करने का झांसा देकर करीब 20 लाख रुपये मूल्य के जेवर अपने कब्जे में ले लिए और फरार हो गई। घटना के बाद पीड़ित महिलाओं ने पुलिस से शिकायत कर आरोपी की गिरफ्तारी और आभूषण बरामद कराने की मांग की है।

    शिकायत के अनुसार, ठगी की शुरुआत 7 जुलाई को हुई, जब एक महिला अपनी गोद में एक छोटे बच्चे को लेकर पीड़ितों के घर पहुंची। उसने स्वयं को भरोसेमंद बताते हुए पुराने बर्तनों के बदले नए बर्तन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा। बातचीत के दौरान उसने महिलाओं का विश्वास जीतने की कोशिश की और अगले दिन फिर आने की बात कहकर वहां से चली गई।

    पीड़ितों का आरोप है कि 8 जुलाई को वही महिला दोबारा उनके घर पहुंची। इस बार उसने सोने और चांदी के आभूषणों को नया रूप देने, चमकाने और आकर्षक डिज़ाइन तैयार करने का प्रस्ताव रखा। उसने भरोसा दिलाया कि वह जेवर देखकर तुरंत वापस कर देगी। महिला की बातों पर विश्वास करते हुए पीड़ितों ने अपने कीमती आभूषण उसे सौंप दिए।

    आरोप है कि जेवर लेने के बाद महिला वहां से चली गई और फिर वापस नहीं लौटी। काफी देर तक इंतजार करने के बाद जब उसका कोई पता नहीं चला, तब पीड़ितों को अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ। पीड़ित महिलाओं के अनुसार, गायब हुए सोने-चांदी के आभूषणों की कुल कीमत लगभग 20 लाख रुपये है। घटना के बाद क्षेत्र में लोगों के बीच भी चिंता का माहौल है और स्थानीय नागरिकों ने ऐसे गिरोहों से सतर्क रहने की अपील की है।

    मामले की जानकारी मिलते ही पीड़ित महिलाएं नेमावर थाने पहुंचीं और लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस से निष्पक्ष जांच करने, आरोपी महिला की पहचान कर उसे शीघ्र गिरफ्तार करने तथा उनके आभूषण बरामद कराने की मांग की है। पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    प्राथमिक जांच के तहत पुलिस आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। साथ ही घटनास्थल के आसपास आने-जाने वाले संदिग्ध लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी महिला किसी संगठित ठग गिरोह का हिस्सा है या उसने अकेले इस वारदात को अंजाम दिया। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अपरिचित व्यक्ति के झांसे में आकर अपने कीमती आभूषण या अन्य बहुमूल्य सामान किसी को न सौंपें। यदि कोई व्यक्ति जेवर चमकाने, बदलने या अन्य किसी बहाने से घर पहुंचता है तो उसकी पहचान की पुष्टि किए बिना उस पर भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने से ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। यह मामला एक बार फिर सावधानी और सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करता है, ताकि इस प्रकार की ठगी से आम नागरिकों को बचाया जा सके।