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  • वायरल गर्ल मोनालिसा केस में नया मोड़ नाबालिग होने की पुष्टि के बाद गंभीर धाराएं जुड़ीं

    वायरल गर्ल मोनालिसा केस में नया मोड़ नाबालिग होने की पुष्टि के बाद गंभीर धाराएं जुड़ीं


    खरगोन। प्रयागराज महाकुंभ से सुर्खियों में आई वायरल गर्ल मोनालिसा का मामला अब गंभीर कानूनी मोड़ ले चुका है। राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी इस कहानी में अब नया खुलासा हुआ है कि मोनालिसा नाबालिग है। यह जानकारी राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की जांच में सामने आई है जिससे पूरे मामले की दिशा बदल गई है और कानूनी पेचीदगियां बढ़ गई हैं।

    दरअसल इस मामले की शुरुआत तब हुई जब प्रथम दुबे ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य से शिकायत की थी। 17 मार्च को दर्ज इस शिकायत के बाद आयोग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए एक जांच दल का गठन किया और पूरे मामले की गहराई से जांच शुरू की गई।

    जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए उन्होंने सभी को चौंका दिया। महेश्वर स्थित शासकीय अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार मोनालिसा का जन्म 30 दिसम्बर 2009 को शाम 5 बजकर 50 मिनट पर हुआ था। इस आधार पर वह अभी बालिग नहीं है। यह तथ्य सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है क्योंकि नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून बेहद सख्त होता है।

    इसी बीच मोनालिसा के पिता जयसिंह भोंसले की ओर से भी बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने फरमान खान के खिलाफ महेश्वर थाने में 25 मार्च को अपहरण का मामला दर्ज कराया था। बाद में इस एफआईआर को अपडेट करते हुए पुलिस ने इसमें अपहरण के साथ साथ POCSO Act के तहत धाराएं जोड़ दी हैं। इसके अलावा शादी का झांसा देकर बहलाने जैसे गंभीर आरोप भी शामिल किए गए हैं जिससे आरोपी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

    इस पूरे मामले पर सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। सनोज मिश्रा ने इस खुलासे को अहम बताते हुए कहा कि अब सच्चाई सामने आ चुकी है और यह स्पष्ट हो गया है कि मोनालिसा नाबालिग है। उनके इस बयान के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है और लोगों के बीच अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    यह मामला केवल एक वायरल घटना तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब यह कानून व्यवस्था और समाजिक संवेदनशीलता का मुद्दा बन गया है। नाबालिग से जुड़ा होने के कारण इसमें सख्त कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और जांच एजेंसियां हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।

    आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच और कानूनी कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल यह मामला देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और हर किसी की नजर आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

    प्रयागराज महाकुंभ से सुर्खियों में आई वायरल गर्ल मोनालिसा का मामला अब गंभीर कानूनी मोड़ ले चुका है। राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी इस कहानी में अब नया खुलासा हुआ है कि मोनालिसा नाबालिग है। यह जानकारी राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की जांच में सामने आई है जिससे पूरे मामले की दिशा बदल गई है और कानूनी पेचीदगियां बढ़ गई हैं।

    दरअसल इस मामले की शुरुआत तब हुई जब प्रथम दुबे ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य से शिकायत की थी। 17 मार्च को दर्ज इस शिकायत के बाद आयोग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए एक जांच दल का गठन किया और पूरे मामले की गहराई से जांच शुरू की गई।

    जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए उन्होंने सभी को चौंका दिया। महेश्वर स्थित शासकीय अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार मोनालिसा का जन्म 30 दिसम्बर 2009 को शाम 5 बजकर 50 मिनट पर हुआ था। इस आधार पर वह अभी बालिग नहीं है। यह तथ्य सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है क्योंकि नाबालिग से जुड़े मामलों में कानून बेहद सख्त होता है।

    इसी बीच मोनालिसा के पिता जयसिंह भोंसले की ओर से भी बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने फरमान खान के खिलाफ महेश्वर थाने में 25 मार्च को अपहरण का मामला दर्ज कराया था। बाद में इस एफआईआर को अपडेट करते हुए पुलिस ने इसमें अपहरण के साथ साथ POCSO Act के तहत धाराएं जोड़ दी हैं। इसके अलावा शादी का झांसा देकर बहलाने जैसे गंभीर आरोप भी शामिल किए गए हैं जिससे आरोपी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

    इस पूरे मामले पर सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। सनोज मिश्रा ने इस खुलासे को अहम बताते हुए कहा कि अब सच्चाई सामने आ चुकी है और यह स्पष्ट हो गया है कि मोनालिसा नाबालिग है। उनके इस बयान के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है और लोगों के बीच अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    यह मामला केवल एक वायरल घटना तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब यह कानून व्यवस्था और समाजिक संवेदनशीलता का मुद्दा बन गया है। नाबालिग से जुड़ा होने के कारण इसमें सख्त कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और जांच एजेंसियां हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।

    आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच और कानूनी कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल यह मामला देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और हर किसी की नजर आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • कोलकाता एयरपोर्ट पर इंडिगो विमान से टकराया कैटरिंग ट्रक, उड़ान से पहले हादसा; जांच शुरू

    कोलकाता एयरपोर्ट पर इंडिगो विमान से टकराया कैटरिंग ट्रक, उड़ान से पहले हादसा; जांच शुरू


    कोलकाता। इंडिगो के एक पार्क किए गए विमान को नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर मंगलवार को हादसे का सामना करना पड़ा, जब एक कैटरिंग ट्रक विमान के इंजन से टकरा गया। टक्कर से विमान को मामूली नुकसान पहुंचा, हालांकि घटना के समय विमान खाली खड़ा था।

    बे नंबर 51 पर हुआ हादसा

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, एयरपोर्ट के बे नंबर 51 पर खड़ा विमान उस समय ऑपरेशन में नहीं था। इसी दौरान कैटरिंग वाहन स्टार्ट करते वक्त अचानक आगे बढ़ गया और सीधे इंजन से जा टकराया। घटना के बाद एयरपोर्ट अधिकारियों ने तुरंत स्थिति संभाल ली।

    कोई हताहत नहीं

    हादसे में किसी यात्री या स्टाफ के घायल होने की सूचना नहीं है। एयरपोर्ट अथॉरिटी और संबंधित एजेंसियों ने मौके का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है।

    इंडिगो का बयान

    इंडिगो ने कहा कि 7 अप्रैल को एप्रन पर चल रहा थर्ड-पार्टी मानव रहित वाहन खड़े विमान से टकरा गया। विमान को फिलहाल ग्राउंड कर दिया गया है और विस्तृत जांच व मरम्मत के बाद ही दोबारा उड़ान की अनुमति दी जाएगी।

    यह विमान कोलकाता से गुवाहाटी जाने वाली फ्लाइट 6E 6663 के रूप में संचालित होने वाला था। एयरलाइन ने यात्रियों की सुविधा के लिए वैकल्पिक विमान की व्यवस्था कर दी है।

  • बृजेश्वरी कॉलोनी अग्निकांड का खुलासा शॉर्ट सर्किट बना मौत का कारण, जांच जारी

    बृजेश्वरी कॉलोनी अग्निकांड का खुलासा शॉर्ट सर्किट बना मौत का कारण, जांच जारी


    इंदौर । इंदौर के कनाड़िया रोड स्थित बृजेश्वरी एनएक्स कॉलोनी में 18 मार्च को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था उस समय एक ही परिवार के आठ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और इस घटना की वजह लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं लेकिन अब पुलिस जांच में अहम सुराग सामने आए हैं और स्पष्ट हुआ है कि यह हादसा शॉर्ट सर्किट के कारण हुआ था

    जांच के दौरान पुलिस को बताया गया कि घर में खड़ी इलेक्ट्रिक कार को रोजाना की तरह रात में चार्ज पर लगाया गया था परिवार के सदस्यों सौरभ पुगलिया सौमिल पुगलिया और हर्षित पुगलिया ने पुलिस को बयान दिया कि भले ही सौरभ ने कार की चार्जिंग बंद कर दी थी लेकिन रात करीब 11 बजे हर्षित ने कार को फिर से चार्ज पर लगा दिया इसी दौरान अचानक शॉर्ट सर्किट से आग भड़क उठी और देखते ही देखते पूरा घर अपनी चपेट में आ गया

    इस दर्दनाक हादसे में मनोज पुगलिया उनकी बहू सिमरन और अन्य परिवार के छह सदस्य समेत कुल आठ लोगों की जान चली गई जिसमें बच्चे भी शामिल थे इस घटना ने पूरे इलाके में मातम और शोक की लहर दौड़ा दी आग लगने के तुरंत बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और उन्हें ढांढस बंधाया

    शुरुआती दौर में परिवार की ओर से आग लगने की वजह घर के पास स्थित इलेक्ट्रिक पोल बताई गई थी लेकिन अब जांच में स्पष्ट हो गया कि असली कारण घर के भीतर चार्जिंग के दौरान हुए शॉर्ट सर्किट की वजह से आग भड़की थी इसके बाद जब परिवार के सदस्य जले हुए घर में सामान देखने पहुंचे तो उन्हें कुछ अवशेष मिले जिन्हें पुलिस की मौजूदगी में परिवार ने दफना दिया

    एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग से जुड़े नियमों और सुरक्षा उपायों की सख्ती से निगरानी की जाएगी ताकि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके

    इस घटना ने इलेक्ट्रिक वाहनों और घरों में चार्जिंग की सुरक्षा के मुद्दे पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि छोटे से लापरवाही का कितना भयावह परिणाम हो सकता है इंदौर अग्निकांड ने सभी को आग और इलेक्ट्रिक सुरक्षा के प्रति सचेत किया है और प्रशासन की जांच आगे इसे रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है

  • इंदौर अग्निकांड: सीएम डॉ. मोहन यादव ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात, SOP बनाने के दिए संकेत

    इंदौर अग्निकांड: सीएम डॉ. मोहन यादव ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात, SOP बनाने के दिए संकेत


    भोपाल। डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर गहरा शोक व्यक्त किया और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। इस दौरान पीड़ित परिवारों ने फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस के देर से पहुंचने की शिकायत भी की जिस पर मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीर जांच का आश्वासन दिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना के मद्देनजर ईवी चार्जिंग इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग को लेकर एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलती तकनीक के साथ नई चुनौतियां सामने आ रही हैं और सरकार इनसे निपटने के लिए ठोस कदम उठाएगी।

    घटना के तुरंत बाद सीएम ने अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए थे और भोपाल से विशेषज्ञों की टीम इंदौर भेजी गई। उन्होंने कहा कि डिजिटल लॉक और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाएं आधुनिक जीवन का हिस्सा हैं लेकिन इनके उपयोग में सावधानी बेहद जरूरी है।

    गौरतलब है कि इंदौर के तिलक नगर क्षेत्र में बुधवार तड़के एक भीषण हादसा हुआ था। रबर कारोबारी मनोज पुगलिया के घर के बाहर खड़ी इलेक्ट्रिक कार में चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट हुआ जिससे आग लग गई। देखते ही देखते आग ने तीन मंजिला मकान को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में मनोज पुगलिया उनकी गर्भवती बहू सिमरन समेत कुल 8 लोगों की जिंदा जलने से मौत हो गई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता पीड़ित परिवारों को राहत देना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है। साथ ही उन्होंने लोगों से भी अपील की कि आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते समय सतर्कता बरतें।

  • काबुल में भीषण हमला, 500 से अधिक मौतें… पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक का आरोप, UN ने की जांच की मांग

    काबुल में भीषण हमला, 500 से अधिक मौतें… पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक का आरोप, UN ने की जांच की मांग


    काबुल/इस्लामाबाद/जेनेवा।
    अफगानिस्तान और पाकिस्तान में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुए भीषण हमले ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। अफगान अधिकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमले में 500 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 250 लोग घायल हुए हैं। यह हमला हाल के वर्षों में अफगानिस्तान में हुआ सबसे घातक हवाई हमला माना जा रहा है। इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से तत्काल संघर्ष रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने इस हमले पर गहरी चिंता जताते हुए इसकी स्वतंत्र, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और हिंसा को तुरंत रोका जाना चाहिए।


    2000 बेड वाले अस्पताल पर हमला

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में स्थित 2000 बेड वाले ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल पर सोमवार रात यह हमला हुआ। यह अफगानिस्तान के सबसे बड़े नशा मुक्ति केंद्रों में से एक माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए भर्ती थे। हमले में अस्पताल की इमारत का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया और कई लोग मलबे में दब गए। बचाव दल लगातार शव और घायलों को निकाल रहे हैं।

    अफगान अधिकारियों का कहना है कि हमले के बाद अस्पताल की कई इमारतें पूरी तरह तबाह हो गईं और परिसर में भारी तबाही का मंजर देखने को मिला। राहत और बचाव दल लगातार मलबा हटाकर शव और घायलों को निकाल रहे हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। तालिबान प्रशासन ने इसे “मानवता के खिलाफ अपराध” बताते हुए कड़ी निंदा की है।


    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया भयावह मंजर

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमले के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई इमारतें ध्वस्त हो गईं और चारों ओर मलबा फैल गया। सैकड़ों लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पताल के मलबे के बीच भटकते नजर आए।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के इलाके में भी कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और देर रात तक बचाव अभियान जारी रहा।


    संयुक्त राष्ट्र की सख्त टिप्पणी

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि काबुल के नशा मुक्ति केंद्र में हुआ यह विस्फोट बेहद दुखद है और इसकी तुरंत, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और जांच के नतीजे सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

    संयुक्त राष्ट्र ने यह भी याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत नागरिकों और नागरिक प्रतिष्ठानों को विशेष सुरक्षा प्राप्त होती है। युद्ध के नियमों के अनुसार किसी भी हमले में अंतर, अनुपात और सावधानी के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है, जबकि चिकित्सा संस्थानों को अतिरिक्त सुरक्षा दी जाती है।


    अफगानिस्तान का कड़ा रुख

    इस बीच अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतिन काने ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि काबुल पर किए गए हमले का “मुंहतोड़ जवाब” दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव दल मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।

    अफगान सरकार ने इस घटना को अपनी संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा है कि ऐसे हमले बिना जवाब के नहीं छोड़े जाएंगे। पिछले एक महीने से दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव और सीमा पार झड़पों के कारण बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत और हजारों लोगों के विस्थापित होने की खबरें भी सामने आई हैं।


    पाकिस्तान ने आरोपों को बताया निराधार

    दूसरी ओर पाकिस्तान ने अस्पताल को निशाना बनाने के आरोपों को खारिज कर दिया है। इस्लामाबाद का कहना है कि उसकी वायुसेना ने काबुल और नंगरहार में “आतंकी ढांचे और हथियार भंडार” को निशाना बनाते हुए सटीक कार्रवाई की। पाकिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक हमले में गोला-बारूद के डिपो और आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया गया और किसी अस्पताल या नागरिक केंद्र को लक्ष्य नहीं बनाया गया।


    बढ़ते संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय चिंता

    यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पिछले कुछ हफ्तों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार हमलों को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। हालिया झड़पों के बाद दोनों देशों के बीच हालात “खुले संघर्ष” की स्थिति तक पहुंच चुके हैं।

    ऐसी स्थिति में भारत समेत कई देशों ने भी इस हमले की निंदा करते हुए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और तनाव कम करने की अपील की है। साथ ही वर्तमान में बने ऐसे हालात पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच यह टकराव जारी रहा तो पूरे दक्षिण और मध्य एशिया की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

  • भारत पर नया टैरिफ लगा सकता है, अमेरिका…कई देशों की व्यापारिक नीतियों की जांच शुरू

    भारत पर नया टैरिफ लगा सकता है, अमेरिका…कई देशों की व्यापारिक नीतियों की जांच शुरू


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की सरकार ने 16 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों की उन व्यापारिक नीतियों और प्रथाओं के खिलाफ नई जांच शुरू की है, जिन्हें अमेरिका (America) ‘अनुचित’ मानता है। इस कदम से भारत (India) सहित कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ (Additional Tariff.) और अन्य जुर्माने लगने का रास्ता साफ हो सकता है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा ट्रंप की ओर से पहले लगाए गए टैरिफ को खारिज कर दिया गया था, जिसके बाद वह अब नए विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।


    जांच के दायरे में भारत और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं

    औद्योगिक क्षमता से अधिक उत्पादन को लेकर की जा रही इस जांच के निशाने पर मुख्य रूप से भारत के साथ-साथ यूरोपीय संघ (EU), चीन, जापान और कई अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। अमेरिका के इस कड़े कदम से इन प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ उसके संबंधों में तनाव बढ़ने की पूरी संभावना है।


    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का कड़ा रुख

    न्यूज एजेंसी एएफपी (AFP) के हवाले से, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीर ने बताया कि ट्रंप प्रशासन दो अलग-अलग जांचें शुरू कर रहा है। पहली जांच जरूरत से ज्यादा उत्पादन पर केंद्रित है, जबकि दूसरी जांच जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को लेकर है। उन्होंने कहा कि इस गर्मियों तक चीन, यूरोपीय संघ, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और मैक्सिको के खिलाफ नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं। इस सूची में ताइवान, वियतनाम, थाइलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे भी शामिल हैं। अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार कनाडा को इस जांच से बाहर रखा गया है।

    अपने रुख को स्पष्ट करते हुए ग्रीर ने कहा- हमें अमेरिकी नौकरियों की रक्षा करनी है और हमें यह सुनिश्चित करने की सख्त जरूरत है कि हमारे व्यापारिक साझेदारों के साथ हमारा व्यापार पूरी तरह से निष्पक्ष हो। उन्होंने सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा- अगर इस समस्या को हल करने के लिए हमें टैरिफ लगाने की जरूरत पड़ी, तो हम ऐसा जरूर करेंगे। हालांकि, ग्रीर ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि भविष्य में लगाए जाने वाले संभावित जुर्माने या टैरिफ अलग-अलग देशों के लिए अलग-अलग होंगे या एक समान।

    ग्रीर के अनुसार, चीन की इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उत्पादन क्षमता उसकी घरेलू मांग से कहीं अधिक है। फिर भी, वहां की शीर्ष ईवी निर्माता कंपनी BYD आक्रामक रूप से उज्बेकिस्तान, थाइलैंड, ब्राजील, हंगरी और तुर्की में अपने कारखाने स्थापित कर रही है और यूरोप में भी विस्तार करने की योजना बना रही है।

    जर्मनी और आयरलैंड के बड़े व्यापार अधिशेष को यूरोपीय संघ की अतिरिक्त क्षमता का सबूत माना गया है। इसके अलावा, अमेरिका के साथ व्यापार घाटे के बावजूद सिंगापुर में सेमीकंडक्टर की अतिरिक्त वैश्विक क्षमता है, और नॉर्वे में ईंधन व समुद्री भोजन के भारी निर्यात को इसका सबूत माना गया है।


    60 देशों पर पड़ेगा असर

    जबरन मजदूरी को लेकर जो दूसरी जांच की जा रही है, उसके बारे में ग्रीर ने बताया कि यह जांच कल दोपहर के बाद किसी भी समय शुरू हो सकती है। इस जांच की जद में लगभग 60 व्यापारिक साझेदार देश आएंगे, जिससे ग्लोबल सप्लाई चैन पर व्यापक असर पड़ सकता है।

    अमेरिका ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा हस्ताक्षरित ‘उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट’ के तहत पहले ही चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और अन्य सामानों पर कार्रवाई की है। अमेरिका का आरोप है कि चीन ने उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए लेबर कैंप बनाए हैं (हालांकि चीन इन आरोपों से इनकार करता है)। अब इस जांच का दायरा अन्य देशों तक भी बढ़ाया जा सकता है।


    ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात से ठीक पहले उठाया गया कदम

    ट्रंप प्रशासन का यह ताजा व्यापारिक कदम रणनीतिक रूप से भी काफी अहम है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब अप्रैल महीने में बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इस नई जांच का असर दोनों नेताओं की आगामी बातचीत पर भी देखने को मिल सकता है।

  • सेवाधाम आश्रम में 51 दिन में 11 बच्चों की मौत, 50 से अधिक की हालत गंभीर; हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

    सेवाधाम आश्रम में 51 दिन में 11 बच्चों की मौत, 50 से अधिक की हालत गंभीर; हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान


    उज्जैन । अंबोदिया स्थित अंकित सेवाधाम आश्रम में बीते डेढ़ माह के भीतर 11 बच्चों की मौत ने शहर में हड़कंप मचा दिया है। 20 नवंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 के बीच हुई इन मौतों में अधिकांश बच्चे बहु-दिव्यांग थे और 10 से 18 वर्ष की आयु वर्ग में आते थे। बच्चों को गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल उज्जैन लाया गया था लेकिन इलाज के दौरान उनकी जान बचाई नहीं जा सकी।

    इस मामले पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव महिला एवं बाल विकास प्रमुख सचिव आयुक्त कलेक्टर उज्जैन जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और आश्रम अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। अदालत ने आश्रम की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।

    शासकीय चरक अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार दिसंबर 2025 में 8 और जनवरी 2026 में 2 बच्चों की मौत हुई। सभी मामलों में पोस्टमॉर्टम शासकीय चरक भवन अस्पताल में थाना भैरवगढ़ पुलिस की मौजूदगी में कराया गया। अस्पताल के आरएमओ डॉ. चिन्मय चिंचोलेकर ने बताया कि अधिकांश बच्चों में एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियां पाई गईं और कुछ को मृत अवस्था में लाया गया जबकि कुछ की इलाज के दौरान मौत हुई।

    अंकित सेवाधाम आश्रम में वर्तमान में लगभग 250 निराश्रित और दिव्यांग बच्चे रह रहे हैं जिनमें से 50 से अधिक की हालत गंभीर बताई जा रही है। आश्रम संचालक सुधीर भाई गोयल ने कहा कि आश्रम में आने वाले अधिकांश बच्चे पहले से ही गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते हैं। कई बच्चे स्वयं चलने-उठने या भोजन करने में असमर्थ हैं।

    करीब 1.5 साल पहले इंदौर के युग पुरुष धाम आश्रम में बच्चों की मौत और बीमारी के मामलों के बाद प्रशासन ने उस आश्रम की मान्यता रद्द कर दी थी। इसके बाद वहां रह रहे 86 दिव्यांग बच्चों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में शिफ्ट किया गया जिनमें अधिकांश मृतक भी शामिल थे।

    सुधीर भाई गोयल ने कहा कि मृतक बच्चे पहले से गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे। उनमें सांस लेने में कठिनाई खून की कमी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं थीं। उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों का इलाज पहले से ही विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में चल रहा था और उनकी गंभीर स्थिति के कारण उन्हें आश्रम में रखा गया।

    मामले की संवेदनशीलता और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए हाईकोर्ट ने सभी जिम्मेदार अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अदालत के नोटिस के बाद आश्रम और संबंधित स्वास्थ्य सुविधाओं की निगरानी और कड़ी करने की संभावना जताई जा रही है।

  • सेवढ़ा में पुरानी रंजिश के चलते युवक की हत्या, मुख्य आरोपी रवि बघेल गिरफ्तार

    सेवढ़ा में पुरानी रंजिश के चलते युवक की हत्या, मुख्य आरोपी रवि बघेल गिरफ्तार


    दतिया/ सेवढ़ा। अंगद सरकार मंदिर के पास स्थित व्यस्त बस स्टैंड क्षेत्र में हुई एक सनसनीखेज हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। 17 फरवरी की यह वारदात पुरानी रंजिश का नतीजा बताई जा रही है। हत्या के मुख्य आरोपी रवि बघेल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जांच में यह सामने आया है कि आरोपी ने अखलेश यादव पर हमला करने के लिए मौका देख कर पत्थर से हमला कर उसकी हत्या कर दी।

    घटना के समय क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई थी। वारदात का तरीका और स्थान यह संकेत दे रहे थे कि हत्या पूरी तरह से सोची-समझी साजिश के तहत की गई थी। मंदिर परिसर के पास हत्या के दृश्य को देखकर स्थानीय लोगों में डर और दहशत फैल गई थी। पुलिस ने तुरंत ही क्षेत्र में स्थिति को नियंत्रित किया और आरोपी की तलाश शुरू कर दी।

    पुलिस अधीक्षक के अनुसार, घटना स्थल और साक्ष्यों को देखकर हमें शक हुआ कि यह किसी व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा है। आरोपी की पहचान और उसके इरादों का पता लगाने के लिए तकनीकी और फील्ड साक्ष्यों का उपयोग किया गया। पुलिस ने लगातार दबिश दी और 25 फरवरी को पुख्ता सूचना मिलने पर रवि बघेल को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया।

    पूछताछ में आरोपी ने बताया कि यह हत्या पुरानी दुश्मनी के चलते की गई थी। उसने स्पष्ट किया कि उसका मकसद अखलेश यादव को रास्ते से हटाना था और मौका मिलते ही उसने पत्थर से हमला कर हत्या को अंजाम दिया। इस खुलासे के बाद इलाके में कुछ हद तक राहत महसूस की गई, क्योंकि मुख्य आरोपी अब पकड़ में आ चुका है।

    पुलिस फिलहाल यह भी जांच कर रही है कि इस हत्या में और कौन-कौन शामिल थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, रवि बघेल के अलावा अन्य किसी की भूमिका है या नहीं, इसे लेकर छानबीन जारी है। सभी पहलुओं पर ध्यान देकर हम सुनिश्चित करेंगे कि न्याय के मार्ग में कोई बाधा न आए।

    गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा। पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे मामले से संबंधित किसी भी संदिग्ध जानकारी को साझा करें ताकि जांच में तेजी लाई जा सके। यह हत्या मामले ने एक बार फिर इस बात को स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत रंजिश कभी-कभी जानलेवा हो सकती है। 

  • जबलपुर में अतिक्रमण कार्रवाई के दौरान दुकानदार की मौत, परिजन और व्यापारियों ने थाने के सामने शव रख कर किया प्रदर्शन

    जबलपुर में अतिक्रमण कार्रवाई के दौरान दुकानदार की मौत, परिजन और व्यापारियों ने थाने के सामने शव रख कर किया प्रदर्शन


    जबलपुर । शहर के बरगी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान एक दुकानदार की मौत हो जाने से तनाव की स्थिति पैदा हो गई। परिजनों और व्यापारियों ने प्रशासन पर दबाव बढ़ाने का आरोप लगाया और विरोध स्वरूप थाने के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया। घटना के बाद प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया तभी प्रदर्शन शांत हुआ।

    घटना बरगी थाना अंतर्गत पटेल चौराहे की बताई जा रही है। मंगलवार शाम को राजस्व और पुलिस की टीम कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रही थी। इसी दौरान दुकानदार को हार्ट अटैक आ गया और उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजन और स्थानीय लोग भड़क उठे। परिजनों का आरोप था कि प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान अत्यधिक दबाव बनाया जिससे दुकानदार की तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।

    दुकानदार की मौत की खबर फैलते ही आसपास के व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने बरगी थाने के बाहर इकट्ठा होकर जोरदार विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने थाने के सामने शव रखकर नारेबाजी की और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रशासन का रवैया अत्यधिक कठोर था और इससे मौत हुई है।

    विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लेने के प्रयास किए। बरगी थाना प्रभारी ने लोगों को आश्वासन दिया कि घटना की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस आश्वासन के बाद लोगों का गुस्सा कुछ हद तक शांत हुआ और प्रदर्शन समाप्त हुआ।

    इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उचित सावधानियां बरती गईं या नहीं। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर की जा रही थी लेकिन परिजनों का आरोप है कि दबाव और तनाव के कारण दुकानदार की तबीयत बिगड़ गई।

    अब इस मामले की जांच की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को सौंपी गई है। जांच में यह देखना होगा कि कार्रवाई के दौरान नियमों का पालन हुआ या नहीं और क्या प्रशासन की गलती से मौत हुई है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि अतिक्रमण हटाने के दौरान सुरक्षा और चिकित्सा आपातकालीन इंतजाम थे या नहीं।

    अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और उसके दौरान हुई मौत ने शहर में गर्मागरम बहस छेड़ दी है। लोग प्रशासन की कार्रवाई और जिम्मेदारी पर सवाल उठा रहे हैं जबकि प्रशासन मामले की जांच और निष्पक्षता की बात कर रहा है।

  • आय से अधिक संपत्ति मामला: पूर्व डिप्टी डायरेक्टर की 11.81 करोड़ की संपत्ति PMLA के तहत अटैच

    आय से अधिक संपत्ति मामला: पूर्व डिप्टी डायरेक्टर की 11.81 करोड़ की संपत्ति PMLA के तहत अटैच


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के भोपाल जोनल ऑफिस ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक बड़ी कार्रवाई की है। आदिम जाति कल्याण विभाग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जगदीश सरवटे के खिलाफ PMLA 2002 के तहत 11.81 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को प्रोविजनल रूप से अटैच किया गया है। यह कार्रवाई भोपाल जोनल ऑफिस की ओर से आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई थी जिसमें संपत्ति के स्रोत और उसके दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

    जगदीश सरवटे मध्यप्रदेश के जबलपुर में आदिम जाति कल्याण विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर तैनात रहे हैं। उनके खिलाफ यह मामला आय से अधिक संपत्ति के संदेह पर दर्ज किया गया था। आरोप है कि उनके पास घोषित आय से कहीं अधिक संपत्ति पाई गई है जिसके चलते विभाग ने PMLA की धाराओं के तहत यह कठोर कदम उठाया है।

    आधिकारिक सूत्रों के अनुसार अचल संपत्तियों को प्रोविजनल रूप से अटैच किया गया है और मामले की आगे की जांच जारी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि संपत्ति के वैध दस्तावेज और स्रोत की पुष्टि होने पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    यह कार्रवाई EOW की पिछली कार्रवाई से जुड़ी हुई है जब जबलपुर EOW की टीम ने छापेमारी के दौरान करोड़ों की संपत्ति के साथ बाघ की खाल भी बरामद की थी। उस जांच में EOW को आरोपी की आय से अधिक करोड़ों रुपए की संपत्ति मिलने की जानकारी मिली थी।

    अब इस मामले में PMLA के तहत अटैचमेंट की प्रक्रिया पूरी की गई है जिससे आरोपी की संपत्ति को किसी भी तरह की बिक्री या हस्तांतरण से रोक दिया गया है। PMLA 2002 के तहत अटैचमेंट का अर्थ है कि संपत्ति को अस्थायी रूप से सीज कर दिया जाता है ताकि जांच पूरी होने तक उसका उपयोग या हेरफेर न हो सके।

    इस मामले में EOW की जांच जारी है और आगे की जांच में यह देखा जाएगा कि आरोपी ने संपत्ति के स्रोत को सही तरीके से दिखाया या नहीं। यदि जांच में आरोप साबित होते हैं तो आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ संपत्ति को फॉरफिट भी किया जा सकता है। मामले की गूंज अब पूरे राज्य में सुनाई दे रही है क्योंकि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के खिलाफ सरकार की सख्त नीति को दर्शाती है।